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मंगलवार, 24 अप्रैल 2012

स्वच्छ पर्यावरण

   प्रदूषण कितनी कुण्ठित कर देने वाली समस्या है! हर कोई इसके दुषप्रभाव का मारा हुआ है, किंतु फिर भी हर कोई इसके बढ़ते जाने में योगदान करता रहता है।

   प्रदूषण के अनेक रूप हैं, एक ऐसा रूप भी है जो समाज में व्याप्त तो है, किंतु जिसकी अकसर अवहेलना होती है; लेखक चार्ल्स स्विंडौल ने इसे ’शब्दों के प्रदूषण’ की संज्ञा दी है। यह वह प्रदूषण है जो कुड़कुड़ाने वालों, आलोचकों और निन्दकों के द्वारा बड़ी सहजता से फैलाया जाता है और समाज द्वारा इसे उतनी ही सहजता से स्वीकार भी किया जाता है। स्विंडौल लिखते हैं "नकारात्मक रवैये का यह विष अपने चारों ओर ऐसा निषेधात्मक वातावरण उत्पन्न कर देता है जहां हर बात की केवल बुराई पर ही ध्यान केंद्रित हो।"

   कुछ मसीही विश्वासी मित्रों को इस नकारत्मक शब्दों के प्रदूषण के विषय में चिंता हुई और उन्होंने निर्णय लिया कि वे इसके विरुद्ध कुछ अपने प्रयास करेंगे। उन्होंने निर्णय लिया कि आपसी बातचीत में एक सप्ताह तक किसी भी विषय पर कोई आलोचनात्मक या नकारात्मक शब्दों का प्रयोग नहीं करेंगे। उन्हें अचंभा हुआ यह देख कर कि उस सप्ताह में वे आपस में कितनी कम बातचीत कर पाए। उन्होंने अपना यह प्रयास ज़ारी रखा और उन्होंने पाया कि आपसी बातचीत को ज़ारी रखने के लिए उन्हें अपने संवाद कौशल और भाषा की शब्दावली को पुनः सीखने की आवश्यकता पड़ी।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने भी मसीही विश्वासियों को ऐसे ही निर्णायक कदम उठाने का आवाहन किया; इफीसियों को लिखी अपनी पत्री में पौलुस ने लिखा कि वे अपने पुराने मनुष्यत्व और उसके व्यवहार को जो परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित करता है उतार फेंकें और मसीह से मिला वह नया मनुष्यत्व पहन ले जो दूसरों को बनाने और बढ़ाने में सक्रीय रहता है। हमारे व्यवहार, विचार और वाणी में यह परिवर्तन केवल परमेश्वर के पवित्र आत्मा पर निर्भर रहने से ही संभव है, "आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे" (गलतियों ५:१६)।

   यदि हमें नकारात्मक शब्दों के प्रदूषण से बच कर अपने जीवन के पर्यावरण को स्वच्छ करना है तो पहले हमें इसका निर्णय लेना होगा, फिर परमेश्वर से सहायता कि प्रार्थना के साथ, परमेश्वर की आत्मा की सामर्थ से परमेश्वर के वचन और आज्ञाओं के पालन के द्वारा हम अपने आत्मिक पर्यावरण को स्वच्छ कर पाएंगे। - जोनी योडर


अपनी वाणी को स्वच्छ कीजीए और अपने वातावरण को प्रदूषित होने से बचाइए।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिए उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। - इफिसीयों ४:२९
बाइबल पाठ: इफिसीयों ४:१७-३२
Eph 4:17  इसलिये मैं यह कहता हूं, और प्रभु में जताए देता हूं कि जैसे अन्यजातीय लोग अपने मन की अनर्थ की रीति पर चलते हैं, तुम अब से फिर ऐसे न चलो।
Eph 4:18 क्‍योंकि उनकी बुद्धि अन्‍धेरी हो गई है और उस अज्ञानता के कारण जो उन में है और उनके मन की कठोरता के कारण वे परमेश्वर के जीवन से अलग किए हुए हैं।
Eph 4:19 और वे सुन्न होकर, लुचपन में लग गए हैं, कि सब प्रकार के गन्‍दे काम लालसा से किया करें।
Eph 4:20  पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Eph 4:21  वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Eph 4:22  कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Eph 4:23  और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Eph 4:24  और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Eph 4:25  इस कारण झूठ बोलना छोड़ कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Eph 4:26  क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Eph 4:27  और न शैतान को अवसर दो।
Eph 4:28  चोरी करने वाला फिर चोरी न करे, वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Eph 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिए उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Eph 4:30  और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Eph 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Eph 4:32  और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो। 
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १९-२० 
  • लूका १८:१-२३

सोमवार, 23 अप्रैल 2012

धन्य और एकमात्र आशा

   एक लेखक ने लिखा, "मैं जब पहले पहल मसीही विश्वास में आया, और उसके कुछ वर्षों पश्चात तक, मेरे लिए प्रभु यीशु मसीह का दूसरा आगमन एक रोमांच से भर देने वाला विचार, एक धन्य आशा, एक महिमामय प्रतिज्ञा और चर्च के सबसे अधिक प्रोत्साहित कर देने वाले स्तुति गीतों का विषय था। बाद में यह मेरे विश्वास का एक मूल सिद्धांत, अनिवार्य शिक्षा और मेरी मसीही सेवकाई पर विद्यमान अदृश्य छाप बन गया। दूसरे आगमन का यह विचार मेरी धार्मिक चर्चाओं का प्रीय विषय बन गया, चाहे वे मौखिक अथवा लिखित सन्देश के रूप में हों। अब मसीह का दूसरा आगमन मेरे लिए और भी कुछ अधिक हो गया है; प्रेरित पौलुस ने तो इसे ’धन्य आशा’ कहा है, किंतु आज मुझे यह संसार के लिए एकमात्र आशा लगता है।"

   मानवीय दृष्टिकोण से इस संसार के संघर्षों का कोई हल नहीं है। संसार के हर स्थान में समाज और परिस्थितियाँ बद से बदतर ही होती जा रही हैं, अर्थ व्यवस्था बिखरती जा रही है, नैतिक मूल्यों का पतन हो रहा है, स्वार्थ, अनुशासनहीनता और अराजक्ता बढ़ते जा रहे हैं और प्रत्येक संभावित समाधान अपने साथ नई समस्याएं और विभाजन ले कर आता है। मनुष्य के ज्ञान बुद्धि और समझ ने संसार की किसी समस्या का कोई स्थाई हल कभी नहीं दिया, वरन हर ’विकास’ के नाम पर इस संसार को तरह तरह के प्रदूषण - भौतिक अथवा अभौतिक, से भर दिया है। 
   संसार के नेता और अगुवे केवल आश्वासन देना जानते हैं और सुनहरे भविष्य के सपने ही दिखा सकते हैं। वे हर समस्या का समाधान आने वाले कल पर टालने में और अपना आज संवारने की कला में निपुण हैं। उनके अपने जीवन अशांति से भरे और अपराध में लिप्त हैं, वे दूसरों को शांति कहां से देंगे, वे दूसरों के लिए अपराध रहित समाज कैसे बनाएंगे?

   संसार की स्मस्याओं को सुलझाने का एकमात्र और पूर्ण हल है पृथ्वी पर मसीह का दूसरा आगमन. क्योंकि तब वह संसार में अपना राज्य स्थापित करेगा, धार्मिकता और न्याय से राज्य करेगा, और तब "पृथ्वी यहोवा की महिमा के ज्ञान से ऐसी भर जाएगी जैसे समुद्र जल से भर जाता है" (हबक्कूक २:१४)।

   हम मसीही विश्वासी जो अपने प्रभु के दूसरे आगमन की प्रतीक्षा में हैं, प्रार्थना में, प्रभु के कार्य में और प्रभु की गवाही देने में लगे रहें; अपनी उस धन्य और एकमात्र आशा की बाट जोहते रहें जब स्वर्ग का राज्य पृथ्वी पर होगा। - रिचर्ड डी हॉन


संसार का अंधकार जैसे जैसे बढ़ता जाता है, प्रभु के आगमन की आशा और अधिक ज्योतिर्मय होती जाती है।
...हम अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेर कर इस युग में संयम और धर्म और भक्ति से जीवन बिताएं। और उस धन्य आशा की अर्थात अपने महान परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की महिमा के प्रगट होने की बाट जोहते रहें। - तीतुस २:१२, १३
बाइबल पाठ: १ थिस्सलुनीकियों ४:१३-१८
1Th 4:13  हे भाइयों, हम नहीं चाहते, कि तुम उनके विषय में जो सोते हैं, अज्ञान रहो; ऐसा न हो, कि तुम औरों की नाई शोक करो जिन्‍हें आशा नहीं।
1Th 4:14  क्‍योंकि यदि हम प्रतीति करते हैं, कि यीशु मरा, और जी भी उठा, तो वैसे ही परमेश्वर उन्‍हें भी जो यीशु में सो गए हैं, उसी के साथ ले आएगा।
1Th 4:15  क्‍योंकि हम प्रभु के वचन के अनुसार तुम से यह कहते हैं, कि हम जो जीवित हैं, और प्रभु के आने तक बचे रहेंगे तो सोए हुओं से कभी आगे न बढ़ेंगे।
1Th 4:16  क्‍योंकि प्रभु आप ही स्‍वर्ग से उतरेगा, उस समय ललकार, और प्रधान दूत का शब्‍द सुनाई देगा, और परमेश्वर की तुरही फूंकी जाएगी, और जो मसीह में मरे हैं, वे पहिले जी उठेंगे।
1Th 4:17  तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिए जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे।
1Th 4:18  सो इन बातों से एक दूसरे को शान्‍ति दिया करो। 
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १६-१८ 
  • लूका १७:२०-३७

स्तुति की सामर्थ्य

   स्तुति में बहुत सामर्थ्य है। जब भी स्कॉटिश पास्टर रौबर्ट मर्रे मैक्शेय्न परमेश्वर और परमेश्वर से संबंधित बातों के प्रति अपने मन को ठंडा पाते थे तो तब तक स्तुति के गीत गाते रहते थे जब तक वे अपनी आत्मा में फिर से ताज़गी अनुभव नहीं करने लगते थे। उनके घर के लोग उनके प्रातः उठने के समय को जान जाते थे क्योंकि वे अपने दिन का आरंभ स्तुति के भजन से करते थे।

   एक दिन, अपने मन को प्रचार के सन्देश के लिए तैयार करते समय उन्होंने अपनी डायरी में लिखा, "क्या मेरे मन की यह कामना है कि मैं पूर्ण्तः पवित्र बनूँ?...प्रभु, आप सब बातों को जानते हैं... मैं अपने अन्दर इतना ठंडापन और हताशा अनुभव कर रहा हूँ कि अपनी इस दशा के लिए दुखी भी नहीं हो सकता। शाम होते होते मेरे अन्दर गर्मजोशी आ गई और मेरे मन को शांति मिल गई, सब स्तुति के भजन गाने और प्रार्थना के द्वारा।"

   क्या आप भी अपने आप को निराशा की गहराईयों में पड़ा अनुभव कर रहे हैं? प्रभु की स्तुति में गीत गाईए। भजनकार ने लिखा, "मैं यहोवा की सारी करूणा के विषय सदा गाता रहूंगा, मैं तेरी सच्चाई पीढ़ी पीढ़ी तक जताता रहूंगा" (भजन ८९:१)। जब हम भी ऐसा ही करेंगे तो स्तुति ना केवल हमारे होठों से वरन हमारे हृदय से भी प्रवाहित होने लग जाएगी। परमेश्वर "हर्ष का तेल, और यश का ओढ़ना" (यशायाह ६१:३) देने में आनन्दित होता है।

   हाँ, परमेश्वर की स्तुति करना भला है, स्तुति में सामर्थ्य है। - पौल वैन गोर्डर


यदि आप अपने ऊपर उदासी की चादर पाते हैं तो उसके स्थान पर स्तुति के वस्त्र पहन कर देखें।
प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं; - यशायाह ६१:१
बाइबल पाठ: यशायाह ६१:१-३
Isa 61:1  प्रभु यहोवा का आत्मा मुझ पर है; क्योंकि यहोवा ने सुसमाचार सुनाने के लिये मेरा अभिषेक किया और मुझे इसलिये भेजा है कि खेदित मन के लोगों को शान्ति दूं; कि बंधुओं के लिये स्वतंत्रता का और कैदियों के लिये छुटकारे का प्रचार करूं;
Isa 61:2  कि यहोवा के प्रसन्न रहने के वर्ष का और हमारे परमेश्वर के पलटा लेने के दिन का प्रचार करूं, कि सब विलाप करनेवालों को शान्ति दूं;
Isa 61:3  और सिय्योन के विलाप करने वालों के सिर पर की राख दूर कर के सुन्दर पगड़ी बान्ध दूं, कि उनका विलाप दूर करके हर्ष का तेल लगाऊं और उनकी उदासी हटाकर यश का ओढ़ना ओढ़ाऊं; जिस से वे धर्म के बांजवृक्ष और यहोवा के लगाए हुए कहलाएं और जिस से उसकी महिमा प्रगट हो।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १२-१३ 
  • लूका १६

कहें सो करें

   एक स्त्री अपने पोते के साथ १०३ मील प्रति घंटा की रफतार से गाड़ी चलाती हुई पकड़ी गई। जब पुलिस ने उस से इसके बारे में पूछा तो उसका उत्तर था कि वह अपने पोते को सिखाना मांग रही थी कि गाड़ी कभी इतनी तेज़ नहीं चलानी चाहिए; संभ्वतः वह उसे सिखाना चाह रही थी कि जो मैं कर रही हूँ उसे नहीं, वरन वह करो जो मैं कह रही हूँ!

   प्रभु यीशु की पृथ्वी की सेवकाई के दिनों में भी धर्म के अगुवों फरीसी और शास्त्रीयों के साथ भी ऐसी ही समस्या थी। प्रभु यीशु के मूल्यांकन में वे आत्मिक दिवलियापन से ग्रस्त थे और उनकी यह दशा ही इस्त्राएली समाज की दयनीय आत्मिक दशा का कारण थी। परमेश्वर की व्यवस्था को लोगों तक पहुँचाने वाले मूसा के उत्तराधिकारी होने के कारण उन्हें लोगों को उस व्यवस्था को सिखाने और समझाने की ज़िम्मेदारी थी जिससे समाज परमेश्वर की विधियों और नियमों का पालन करते हुए परमेश्वर के साथ एक सजीव और खरे संबंध को बना के रह सके (व्यवस्थाविवरण १०:१२, १३)।

   लेकिन उन धर्म के अगुवों के लिए व्यक्तिगत स्वार्थ के अनतर्गत परमेश्वर के वचन की विवेचना और शिक्षा प्रदान करना परमेश्वर के वचन की सच्चाई से अधिक महत्वपूर्ण हो गया था। जो वे प्रचार करते थे, उसका वे स्वयं पालन नहीं करते थे। जिसका पालन करते थे, वह परमेश्वर को महिमा देने के लिए नहीं वरन स्वयं महिमा पाने के लिए होता था। प्रभु यीशु से वे इसीलिए घृणा करते थे क्योंकि प्रभु यीशु उनकी वास्तविकता को पहचानता था और उनकी पोल खोलता रहता था कि वे कैसे ढोंगी, स्वार्थी, दोगले और केवल दिखाने के लिए कार्य करने वाले हैं।

   आज भी प्रभु यीशु के अनुयायी होने का प्रमाण हमारे प्रचार मात्र द्वारा नहीं है, वरन हमारे आचरण द्वारा है। हम प्रभु के लिए तब ही प्रभावी और सच्चे गवाह हो सकते हैं जब हम जो कहें सो कर के भी दिखाएं। क्या आज हम लोगों से परमेश्वर के वचन का प्रचार तो करने, किंतु स्वयं उसी वचन की अवहेलना करने के दोषी हैं? भला हो कि हम केवल शब्दों से ही नहीं, कार्यों से भी प्रभु यीशु के अनुयायी होने की गवाही दें; हमारे जीवन हमारे प्रचार को सजीव दिखाएं। - मार्विन विलियम्स


एक अच्छा सजीव उदाहरण, अपने आप में एक प्रभावी प्रचार होता है।
इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना, परन्‍तु उन के से काम मत करना; क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं। - मत्ती २३:३
बाइबल पाठ: मत्ती २३:१-१२
Mat 23:1  तब यीशु ने भीड़ से और अपने चेलों से कहा।
Mat 23:2  शास्त्री और फरीसी मूसा की गद्दी पर बैठे हैं।
Mat 23:3  इसलिये वे तुम से जो कुछ कहें वह करना, और मानना, परन्‍तु उन के से काम मत करना; क्‍योंकि वे कहते तो हैं पर करते नहीं।
Mat 23:4  वे एक ऐसे भारी बोझ को जिस को उठाना कठिन है, बान्‍ध कर उन्‍हें मनुष्यों के कन्‍धों पर रखते हैं, परन्‍तु आप उन्‍हें अपनी उंगली से भी सरकाना नहीं चाहते ।
Mat 23:5  वे अपने सब काम लोगों को दिखाने के लिये करते हैं: वे अपने तावीजों को चौड़े करते, और अपने वस्‍त्रों की कोरें बढ़ाते हैं।
Mat 23:6   जेवनारों में मुख्य मुख्य जगहें, और सभा में मुख्य मुख्य आसन।
Mat 23:7  और बाजारों में नमस्‍कार और मनुष्य में रब्‍बी कहलाना उन्‍हें भाता है।
Mat 23:8  परन्‍तु, तुम रब्‍बी न कहलाना, कयोंकि तुम्हारा एक ही गुरू है: और तुम सब भाई हो।
Mat 23:9  और पृथ्वी पर किसी को अपना पिता न कहना, कयोंकि तुम्हारा एक ही पिता है, जो स्‍वर्ग में है।
Mat 23:10 और स्‍वामी भी न कहलाना, क्‍योंकि तुम्हारा एक ही स्‍वामी है, अर्थात मसीह।
Mat 23:11  जो तुम में बड़ा हो, वह तुम्हारा सेवक बने।
Mat 23:12  जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा: और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल ९-११ 
  • लूका १५:११-३२

शुक्रवार, 20 अप्रैल 2012

सांत्वना के लिए सामर्थ

   लोगों की कुछ आवश्यक्ताएं मन की गहराईयों से संबंधित होती हैं। अंग्रेज़ी भाषा के कवि एल्फ्रेड लॉर्ड टेनिसन ने लिखा, "कोई ऐसी सुबह नहीं है जिसकी शाम होते होते कहीं न कहीं कोई न कोई दिल न टूटा हो।"

   कभी कभी हमें ऐसे दुखी और टूटे हृदय वाले मित्रों या संबंधियों के पास जाना होता है जो मन की किसी गहरी पीड़ा से होकर निकल रहे होते हैं, और हमें समझ नहीं आता कि उन से क्या कहें, कैसे कहें। जो हमने अपने शिक्षकों और बुज़ुर्गों से सीखा है, वह उस दुख की घड़ी में, उन पर कुछ प्रभाव तो डाल सकता है, लेकिन जो शांति परमेश्वर के वचन से मिलती है, उस दुख की घड़ी में उन्हें वह कैसे प्रदान करें? परमेश्वर के वचन बाइबल में जैसा यशायाह भविष्यद्वक्ता कहता है, "प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं" (यशायाह ५०:४), वैसी सामर्थ हम कैसे प्राप्त कर सकते हैं? यह तब ही संभव है जब जैसे यशायाह को वैसे ही हमें भी परमेश्वर स्वयं सिखाए।

   इसके लिए अनिवार्य है कि हम प्रभु यीशु के कदमों में बैठ कर उससे सीखें। जितना अधिक हम उससे पाएंगे, उतना अधिक हमारे पास दूसरों को देने के लिए होगा। जॉर्ज मैक्डौनल्ड परमेश्वर के साथ बिताए गए इस समय का चित्रण करते हुए कहते हैं "यह ऐसे है मानो परमेश्वर ही में हमें एक स्थान दिया गया है। उस स्थान में जा कर हमें दूसरों को प्रदान करने के लिए सामर्थ और प्रकाशन लाना है। हम इसी सेवा के लिए बने हैं।"

   जब हम एकांत में प्रार्थना के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल पर मनन करते हैं, तो हम उस स्थान में होते हैं और परमेश्वर हम से बातें करता है। यह निजी एकांत मनन का समय ही वह स्थान है जहां से हम यशायाह के समान "सीखने वालों की जीभ" पाकर दुख की गहराईयों में पड़े लोगों के साथ सांत्वना बांटने के लिए सामर्थ और समझ पाते हैं जिस से हम निराश में डूबे लोगों को संभाल सकें। - डेविड रोपर


पहले परमेश्वर के हृदय से पाईए, फिर अपने हृद्य से उसे दूसरे के हृदय के साथ बांट लीजीए।
जो मैं तुम से अन्‍धियारे मे कहता हूं, उसे उजियाले में कहो; और जो कानों कान सुनते हो, उसे कोठों पर से प्रचार करो। - मत्ती १०:२७
बाइबल पाठ: यशायाह ५०:४, ५
Isa 50:4  प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं।
Isa 50:5  प्रभु यहोवा ने मेरा कान खोला है, और मैं ने विरोध न किया, न पीछे हटा।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल ६-८ 
  • लूका १५:१-१०

बुधवार, 18 अप्रैल 2012

गलत अर्थ

   विलियम स्कोर्सबे १९वीं शताब्दी के एक समुद्री नाविक और अन्वेषक थे, जिन्होंने मसीही सेवकाई के लिए परमेश्वर की बुलाहट को माना और मसीही सेवकाई में लग गए। उनके सेवकाई के समय में भी नाविकों के दिशा सूचक यंत्र - कुतुबनुमा और उसकी कार्यविधि में उनकी रुचि बनी रही और अपने अनुसंधान से उन्होंने स्थापित किया कि सभी नवनिर्मित लोहे के जहाज़ अपना चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करते हैं जो उन के कुतुबनुमा पर प्रभाव डालता है और यह प्रभाव समुद्र में विभिन्न परिस्थितियों में बदलता रहता है, जिससे नाविक दिशा सूचक यंत्र से गलत दिशा लेकर घोर संकट में पड़ जाते हैं।

   कुतुबनुमा से मिली गलत दिशा और परमेशवर के वचन बाइबल के गलत अर्थ निकाले जाने के प्रभावों में बड़ी समानता है। प्रेरित पौलुस ने तिमुथियुस को आगाह किया कि वह "...कहानियों और अनन्‍त वंशावलियों पर मन न लगाएं, जिन से विवाद होते हैं" (१ तिमुथियुस १:४)। पौलुस ने आगे सिखाया कि परमेश्वर के वचन के सिद्धांतों में फेर-बदल करके लोग गलत शिक्षाओं में फंस जाते हैं और उससे कितनों का विश्वास रूपी जहाज़ डुब जाता है (पद १९); उसने ऐसे दो लोगों के नाम बताए - हुमिनयुस और सिकन्दर (पद २०) जो परमेश्वर के वचन के सही सिद्धांतों के स्थान पर गलत शिक्षाओं में पड़ने से इस नुकसान को उठा चुके थे।

   आज परमेश्वर के वचन बाइबल के सत्य पर हर ओर से प्रहार हो रहा है, यहां तक कि चर्च में भी कई गलत शिक्षाओं ने स्थान बना लिया है। हमारी व्यक्तिगत राय और विचार परमेश्वर के सिद्धांत बदल नहीं सकते। जीवन की यात्रा में परमेश्वर का वचन ही वह स्थिर दिशा सूचक है जो परिस्थितियों और लोगों के अनुसार नहीं बदलता; और बदलती परिस्थितियों में हमें उस वचन को ही अपना दिशा सूचक बनाना है, किंतु हर एक गलत  शिक्षा और गलत अर्थ से बच कर रहना है। इसीलिए परमेश्वर के वचन में लिखा है कि "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो, और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ..." (कुलुस्सियों ३:१६)। - डेनिस फिशर


बुद्धिमानी की पहली पहचान है सत्य को जानना, और दूसरी है असत्य को पहचान पाना।
हे पुत्र तीमुथियुस, उन भविष्यद्ववाणियों के अनुसार जो पहिले तेरे विषय में की गई थीं, मैं यह आज्ञा सौंपता हूं, कि तू उन के अनुसार अच्‍छी लड़ाई को लड़ता रहे। और विश्वास और उस अच्‍छे विवेक को थामें रह जिसे दूर करने के कारण कितनों का विश्वास रूपी जहाज डूब गया। - १ तिमुथियुस १:१८-१९
बाइबल पाठ: कुलुस्सियों २:४-९
Col 2:4  यह मैं इसलिये कहता हूं, कि कोई मनुष्य तुम्हें लुभाने वाली बातों से धोखा न दे।
Col 2:5 क्‍योंकि मैं यदि शरीर के भाव से तुम से दूर हूं, तौभी आत्मिक भाव से तुम्हारे निकट हूं, और तुम्हारे विधि-अनुसार चरित्र और तुम्हारे विश्वास की जो मसीह में है दृढ़ता देखकर प्रसन्न होता हूं।
Col 2:6  सो जैसे तुम ने मसीह यीशु को प्रभु करके ग्रहण कर लिया है, वैसे ही उसी में चलते रहो।
Col 2:7 और उसी में जड़ पकड़ते और बढ़ते जाओ, और जैसे तुम सिखाए गए वैसे ही विश्वास में दृढ़ होते जाओ, और अत्यन्‍त धन्यवाद करते रहो।
Col 2:8 चौकस रहो कि कोई तुम्हें उस तत्‍व-ज्ञान और व्यर्थ धोखे के द्वारा अहेर न करे ले, जो मनुष्यों के परम्पराई मत और संसार की आदि शिक्षा के अनुसार है, पर मसीह के अनुसार नहीं।
Col 2:9 क्‍योंकि उस में ईश्वरत्‍व की सारी परिपूर्णता सदेह वास करती है।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल ३-५ 
  • लूका १४:२५-३५

मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

खामोशी

   कभी कभी किसी झूठे दोषारोपण के लिए खामोशी ही सही प्रत्युत्तर होता है, और कभी कभी किसी बात के लिए खामोश रहना अनुचित होता है। 
   जब प्रभु यीशु को धर्मसभा के सामने ला कर खड़ा किया गया और उसपर दोष मढ़े गए तो वह खामोश रहा (मरकुस १४:५३-६१)। वह जानता था कि उस परिस्थिति में अपना बचाव करना व्यर्थ है क्योंकि अधिकारी तो उसे दोषी ठहराकर उस का दण्ड निर्धारित भी कर चुके थे, जो चल रहा था वह उस दण्ड के निर्णय को लागू करने से पहले करी जाने वाली मात्र औपचारिकता थी, वहां उसे अपनी कोई सफाई देने का अवसर नहीं दिया जा रहा था और ना ही दण्ड के बदले जाने की कोई संभावना थी। खामोश रहकर वह यशायाह भविष्यद्वक्ता द्वारा उसके विष्य में करी गई भविष्यवाणी "वह सताया गया, तौभी वह सहता रहा और अपना मुंह न खोला; जिस प्रकार भेड़ वध होने के समय वा भेड़ी ऊन कतरने के समय चुपचाप शान्त रहती है, वैसे ही उस ने भी अपना मुंह न खोला" (यशायाह ५३:७) भी पूरी कर रहा था। किंतु इसी प्रभु यीशु ने, इन्हीं धर्मशास्त्रियों को उनके झूठ और दोषारोपण के लिए लताड़ा भी था, और उन्हें चुनौती भी दी थी कि उसमें कोई पाप साबित कर के दिखा दें (यूहन्ना ८:१३-५९)।

   एक पास्टर ने अपने चर्च के कार्य से इस्तीफा दे दिया क्योंकि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके बारे में गलत बातें चर्च मण्डली में फैलाईं थीं। उस पास्टर का मानना था कि उन परिस्थितियों में उसका अपनी प्रतिरक्षा करना उसके मसीही विश्वास के आचार के विरुद्ध होता। कभी कभी ऐसा होता है, किंतु उस परिस्थिति में बेहतर होता कि वह पास्टर स्वभाव ही से बखेड़ा खड़ा करने वाले उन लोगों का सामना करता, उनके झूठे आरोपों की पोल खोलता और अपना इस्तीफा देने की बजाए उन लोगों को चर्च के सामने गलती मानने या फिर अनुशासन का सामना करने में से एक चुनने को कहता।

   खामोश रहना गलत करने वालों को गलती करते रहने के लिए प्रोतसाहित भी कर सकता है। किंतु यदि हम केवल अपने आहत अहम के बचाव के लिए या मनुष्यों में अपनी महत्वता को प्रमाणीत करने के लिए ही प्रत्युत्तर देना चाहते हैं, तो मौन रहना और परमेश्वर के समय और न्याय की प्रतीक्षा करना ही बेहतर है।

   क्या आप पर झूठा दोषारोपण किया जा रहा है? यदि आप को लगता है कि प्रत्युत्तर देना व्यर्थ है, या आपका प्रत्युत्तर आपके चोट खाए अहम की रक्षा ही के अन्तर्गत है, तो परमेश्वर से सहने का अनुग्रह मांगें और खामोश रहें। परन्तु यदि आप समझते हैं कि गलत करने वालों को और उनकी गलती को सुधारने या किसी अन्याय को सुधारने का आपके पास उचित अवसर है तो उसके लिए परमेश्वर से सामर्थ और सदबुद्धि मांग कर अवश्य ही अपनी खामोशी तोड़िए और उचित कार्यवाही कीजिए। - हर्ब वैण्डर लुग्ट


खामोशी बहूमूल्य होती है; यदि आप बात को सुधार नहीं सकते तो खामोशी को बनाए रखिए।
तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं? परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है? - मरकुस १४:६०-६१
बाइबल पाठ: मरकुस १४:५३-६५
Mar 14:53  फिर वे यीशु को महायाजक के पास ले गए, और सब महायाजक और पुरिनए और शास्त्री उसके यहां इकट्ठे हो गए।
Mar 14:54  पतरस दूर ही दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन के भीतर तक गया, और प्यादों के साथ बैठ कर आग तापने लगा।
Mar 14:55  महायाजक और सारी महासभा यीशु के मार डालने के लिये उसके विरोध में गवाही की खोज में थे, पर न मिली।
Mar 14:56 क्‍योंकि बहुतेरे उसके विरोध में झूठी गवाही दे रहे थे, पर उन की गवाही एक सी न थी।
Mar 14:57  तब कितनों ने उठकर उस पर यह झूठी गवाही दी।
Mar 14:58 कि हम ने इसे यह कहते सुना है कि मैं इस हाथ के बनाए हुए मन्‍दिर को ढ़ा दूंगा, और तीन दिन में दूसरा बनाऊंगा, जो हाथ से न बना हो।
Mar 14:59  इस पर भी उन की गवाही एक सी न निकली।
Mar 14:60 तब महायाजक ने बीच में खड़े होकर यीशु से पूछा, कि तू कोई उत्तर नहीं देता ये लोग तेरे विरोध में क्‍या गवाही देते हैं?
Mar 14:61 परन्‍तु वह मौन साधे रहा, और कुछ उत्तर न दिया: महायाजक ने उस से फिर पूछा, क्‍या तू उस परम धन्य का पुत्र मसीह है?
Mar 14:62  यीशु ने कहा, हां मैं हूं: और तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी और बैठे, और आकाश के बादलों के साथ आते देखोगे।
Mar 14:63 तब महायाजक ने अपने वस्‍त्र फाड़कर कहा, अब हमें गवाहों का क्‍या प्रयोजन है?
Mar 14:64 तुम ने यह निन्‍दा सुनी: तुम्हारी क्‍या राय है? उन सब ने कहा, वह वध के योग्य है।
Mar 14:65 तब कोई तो उस पर थूकने, और कोई उसका मुंह ढांपने और उसे घूंसे मारने, और उस से कहने लगे, कि भविष्यद्वाणी कर: और प्यादों ने उसे लेकर थप्‍पड़ मारे।
एक साल में बाइबल: 
  • २ शमूएल १-२ 
  • लूका १४:१-२४