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शुक्रवार, 15 जून 2012

मधुर संगीत

   २००९ के बसन्त ऋतु की बात है, इंगलैंड में आयोजित और प्रसारित होने वाले संगीत प्रतियोगिता के टी.वी. कार्यक्रम "Britain's Got Talent" में एक युवती सूज़न बोयल मंच पर आईं और माइक्रोफोन हाथों में पकड़ा। अन्य प्रतियोगियों के मुकाबले में वे देखने में बहुत ही साधारण सी लगती थीं, किसी को उन से कोई विशेष आशा भी नहीं थी। फिर उन्होंने गाना आरंभ किया, और वहां उपस्थित निर्णायकजन तथा दर्शकजन मंत्रमुग्ध हो कर उनके गाने को सुनते रहे; जब गाना समाप्त हुआ तो सभी दर्शक अपने स्थानों पर खड़े हो गए और उनके गाने के माधुर्य और प्रभाव के लिए खुले दिल से उन की प्रशंसा करी। सभी आश्चर्यचकित थे कि इतना अनुपम संगीत इतने अप्रत्याशित व्यक्ति से कैसे आया।

   हम में से प्रत्येक जन भी इसी प्रकार प्रभु यीशु मसीह के अद्भुत सौन्दर्य और प्रेम को प्रवाहित करने का अप्रत्याशित उद्गम स्थान बन सकता है। यही परमेश्वर की योजना है। हम में से प्रत्येक जन, साधारण से साधारण जन भी, किसी न किसी समय जीवन के मंच पर आ खड़ा होता है और संदेह से भरे संसार की दृष्टि हम पर लगी होती है। वे देखना चाहते हैं कि हमारे जीवन से संसार के लिए क्या आने वाला है। हमारे परिवार जन, मित्र, आस-पास के लोग चाहे हम से किसी खास बात की कोई उम्मीद नहीं रखें, परन्तु एक है जो हमें खास बना देता है, जब वह हम में से होकर संसार के सामने प्रवाहित होता है, जब प्रभु यीशु का प्रेम और अनुग्रह हमारे जीवनों में संसार को दिखाई देता है, तो चाहे वह अप्रत्याशित ही हो, लेकिन प्रभावी होता है।

   परमेश्वर के वचन में प्रेरित पतरस ने अपनी पत्री में स्मरण दिलाया: "पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो" (१ पतरस २:९)।

   आप को लग सकता है कि आप यह नहीं कर सकते, किंतु करने वाले आप नहीं परमेश्वर प्रभु यीशु है। आप को केवल अपनी स्वेच्छा से प्रभु के हाथों में अपने आप को समर्पण करना है और उसे अपने जीवन में कार्य करने की अनुमति देनी है, उसकी आज्ञाकरिता में बने रहना है। फिर जब प्रभु का जीवन और कार्य आप में से होकर प्रवाहित होगा तो वह उस मधुर संगीत के समान होगा जो सब को प्रफुल्लित करता है और उन्हें बाध्य करता है कि वे आपकी ओर प्रशंसा तथा सराहना के साथ मुड़ें। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु की सुन्दरता बहुत अप्रत्याशित स्त्रोतों से प्रकट होती है।


पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो। - १ पतरस २:९

बाइबल पाठ: १ पतरस २:९-१२
1Pe 2:9  पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी, याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिस ने तुम्हें अन्‍धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।
1Pe 2:10  तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।
1Pe 2:11  हे प्रियों मैं तुम से बिनती करता हूं, कि तुम अपने आप को परदेशी और यात्री जान कर उस सांसारिक अभिलाषाओं से जो आत्मा से युद्ध करती हैं, बचे रहो।
1Pe 2:12  अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्‍टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें।


एक साल में बाइबल: 

  • नेहेमियाह १-३ 
  • प्रेरितों २:१-२१

गुरुवार, 14 जून 2012

भली बात

   शिकागो विश्वविद्यालय द्वारा करे गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, लोग सकारात्मक बातों कि अपेक्षा नकारात्मक बातों को अधिक स्मरण रखते हैं। आम तौर से लोग कहते तो हैं कि वे मीडिया द्वारा दिखाई जाने वाली बुरी खबरें, जैसे प्राकृतिक आपदाएं, दुर्घटनाएं, बीमारियां, आर्थिक मन्दी और उसके दुषपरिणाम इत्यादि देखना पसन्द नहीं करते, किंतु इस सर्वेक्षण से प्रतीत होता है कि वे इन नकारात्मक बातों की ओर आकर्षित रहते हैं। जो मन और ध्यान नकारात्मक की ओर आकर्षित रहेगा, वह कभी न कभी नकारात्मक करेगा भी। इसलिए यह बहुत आवश्यक है कि लोगों का ध्यान नकारात्मक से हटा कर किसी भली बात, किसी सकारात्मक बात की ओर लगाया जाए, कोई ऐसी बात जो सदैव ताज़ा बनी रहे।

   कैथरीन हैन्की (१८३४-१९११) एक ऐसी महिला थीं जो एक ऐसी ही "भली बात" में रुचि रखती थीं। उनकी बहुत इच्छा रहती थी कि युवतियां प्रभु यीशु को जानें। वे १८६६ में बहुत बीमार पड़ीं; बीमारी के बिस्तर पर पड़े पड़े वे उन लोगों के बारे में सोचने लगीं जिनके साथ उन्होंने प्रभु यीशु द्वारा पाप और पाप के दण्ड से छुटकारे की भली गाथा बांटी थी। उनके मन में यह इच्छा उठी कि उनमें से कोई जन उनके पास आए और उनके साथ उस भली कथा के बारे में बातें करे, उस पुरानी किंतु मन प्रफुल्लित कर देने वाली प्रभु यीशु की कहानी से उन्हें सांत्वना दे। इसी परिस्थिति और भावनाओं में उन्होंने एक कविता लिखी जो बाद में सुप्रसिद्ध भक्ति गीत "Tell Me the Old Old Story" बनी और आज भी लोगों को उभारती है। इस गीत के एक छन्द कुछ इस प्रकार से है:
मुझे यह कहानी धीरे धीरे सुनाओ, जिससे मैं उसे अपने अन्दर समा सकूं;
उस अद्भुत छुटकारे, परमेश्वर द्वारा पाप के निवारण की बात।
मुझे यह बात बार बार सुनाओ, क्योंकि मैं भूल सकती हूं;
जैसे प्रातः की ओस दोपहर होते होते ग़ायब हो जाती है।

   हम परमेश्वर के प्रेम की यह अद्भुत गाथा सुनने से कभी नहीं थकते "क्‍योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्‍तु अनन्‍त जीवन पाए" (युहन्ना ३:१६)। हमारे प्रभु ने एक सिद्ध जीवन जीया, कोई उसके जीवन में कोई भी दोष या पाप नहीं दिखा पाया, उसने सारे संसार के सब लोगों के पापों का बोझ अपने ऊपर ले लिया और हम सबके पापों के बदले अपने आप को क्रूस पर बलिदान कर दिया; वह मारा गया, गाड़ा गया और तीसरे दिन जी उठा (लूका २३:४४-२४:३)। आज भी जो कोई, चाहे वह किसी भी स्थान, जाति, धर्म, रंग, स्तर का क्यों ना हो, साधारण विश्वास के साथ प्रभु यीशु के क्रूस पर दिये बलिदान को स्वीकार करता है, उससे अपने पापों के लिए सीधे और सच्चे मन से क्षमा मांगता है, तो उसे वह पापों की क्षमा और अनन्त जीवन तथा परमेश्वर कि सन्तान होने का अधिकार देता है (यूहन्ना १:१२)।

   इस पाप और बुराई से भरे संसार में जहां नकारात्मक सकारात्मक पर हावी होता जा रहा है, लोगों को एक प्रभावी तथा चिर स्थाई भली बात के सुनने और जानने की बहुत आवश्यक्ता है। किसी के साथ इस भली बात को अवश्य ही बांटिए। - अनी सेटास


प्रभु यीशु का सुसमाचार संसार का सबसे उत्तम समाचार है।


परन्‍तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उस ने उन्‍हें परमेश्वर के सन्‍तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्‍हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्‍छा से, न मनुष्य की इच्‍छा से, परन्‍तु परमेश्वर से उत्‍पन्न हुए हैं। - यूहन्ना १:१२, १३

बाइबल पाठ: लूका २३:४४-२४:८
Luk 23:44  और लगभग दो पहर से तीसरे पहर तक सारे देश में अन्धियारा छाया रहा।
Luk 23:45  और सूर्य का उजियाला जाता रहा, और मन्दिर का परदा बीच में फट गया।
Luk 23:46  और यीशु ने बड़े शब्द से पुकार कर कहा, हे पिता, मैं अपनी आत्मा तेरे हाथों में सौंपता हूं: और यह कहकर प्राण छोड़ दिए।
Luk 23:47  सूबेदार ने, जो कुछ हुआ था देख कर, परमेश्वर की बड़ाई की, और कहा निश्चय यह मनुष्य धर्मी था।
Luk 23:48  और भीड़ जो यह देखने को इकट्ठी हुई भी, इस घटना को, देखकर छाती पीटती हुई लौट गई।
Luk 23:49  और उसके सब जान पहचान, और जो स्त्रियां गलील से उसके पास आई थीं, दूर खड़ी हुई यह सब देख रही थीं।
Luk 23:50  और देखो यूसुफ नाम एक मन्त्री जो सज्जन और धर्मी पुरूष था।
Luk 23:51  और उन के विचार और उन के इस काम से प्रसन्न न था; और वह यहूदियों के नगर अरिमतीया का रहने वाला और परमेश्वर के राज्य की बाट जोहने वाला था।
Luk 23:52  उस ने पीलातुस के पास जाकर यीशु की लोथ मांग ली।
Luk 23:53  और उसे उतार कर चादर में लपेटा, और एक कब्र में रखा, जो चट्टान में खोदी हुई थी, और उस में कोई कभी न रखा गया था।
Luk 23:54  वह तैयारी का दिन था, और सब्त का दिन आरम्भ होने पर था।
Luk 23:55  और उन स्त्रियों ने जो उसके साथ गलील से आई थीं, पीछे पीछे जाकर उस कब्र को देखा, और यह भी कि उस की लोथ किस रीति से रखी गई है।
Luk 23:56  और लौटकर सुगन्धित वस्तुएं और इत्र तैयार किया: और सब्त के दिन तो उन्होंने आज्ञा के अनुसार विश्राम किया।
Luk 24:1 परन्‍तु सप्‍ताह के पहिले दिन बड़े भोर को वे उन सुगन्‍धित वस्‍तुओं को जो उन्‍होंने तैयार की थीं, ले कर कब्र पर आईं।
Luk 24:2 और उन्‍होंने पत्थर को कब्र पर से लुढ़का हुआ पाया।
Luk 24:3  और भीतर जाकर प्रभु यीशु की लोथ न पाई।
Luk 24:4 जब वे इस बात से भौंचक्की हो रही थीं तो देखो, दो पुरूष झलकते वस्‍त्र पहिने हुए उन के पास आ खड़े हुए।
Luk 24:5 जब वे डर गईं, और धरती की ओर मुंह झुकाए रहीं तो उन्‍होंने उन ने कहा; तुम जीवते को मरे हुओं में क्‍यों ढूंढ़ती हो?
Luk 24:6 वह यहां नहीं, परन्‍तु जी उठा है; स्मरण करो, कि उस ने गलील में रहते हुए तुम से कहा था।
Luk 24:7  कि अवश्य है, कि मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ में पकड़वाया जाए, और क्रूस पर चढ़ाया जाए, और तीसरे दिन जी उठे।
Luk 24:8  तब उस की बातें उन को स्मरण आईं।


एक साल में बाइबल: 

  • एज़रा ९-१० 
  • प्रेरितों १

बुधवार, 13 जून 2012

प्रयासरत रहिए

   १९२४ के ओलंपिक खेलों से जुड़ी सच्ची घटनाओं पर आधारित तथा पुरस्कार प्राप्त अंग्रज़ी फिल्म Chariots of Fire का एक पात्र है ब्रिटेन का प्रसिद्ध धावक हैरल्ड एब्राहम्स जिसे दौड़ में जीतने की धुन सवार थी, किंतु ओलंपिक में भाग लेने से पूर्व की चुनावी दौड़ों में से एक में उसे अपने प्रतिद्वन्दी एरिक लिडल से करारी हार का सामना करना पड़ता है। एब्राहम्स अपनी इस हार से बहुत आहत होता है और घोर निराशा में आ जाता है। जब उसकी सहेली सिबिल उसे प्रोत्साहित करने का प्रयास करती है तो वह क्रोधित हो उठता है और कहता है, "मैं जीतने के लिए दौड़ता हूँ; अगर मैं जीत नहीं सकता, तो मैं दौड़ूंगा भी नहीं।" तब सिबिल उसे बड़ी बुद्धिमानी से उत्तर देती है, "अगर तुम दौड़ोगे नहीं तो जीतोगे भी नहीं!"

   जीवन में निराशाएं और पराजय आती रहती हैं जिन से हतोत्साहित हो करके सब कुछ छोड़ कर बैठ जाने की इच्छा होती है; हम मसीही विश्वासी भी इस से अछूते नहीं हैं। लेकिन वह दौड़ जिसका नाम मसीही जीवन है, उस के लिए, हर परिस्थिति के बावजूद, प्रेरित पौलुस हमें दौड़ते रहने की चुनौती देता है। उसने कुरिन्थुस के विश्वासियों को लिखा, "क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो" (१ कुरिन्थियों ९:२४)। पौलुस ने अपने बारे में फिलिप्पियों के विश्वासियों को लिखा, "हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्‍तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों ३:१३-१४)। फिर वह अपने जीवन के अन्त के निकट आकर लिख सका, "मैं अच्‍छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है। भविष्य में मेरे लिये धर्म का वह मुकुट रखा हुआ है, जिसे प्रभु, जो धर्मी, और न्यायी है, मुझे उस दिन देगा और मुझे ही नहीं, वरन उन सब को भी, जो उसके प्रगट होने को प्रिय जानते हैं" (२ तिमुथियुस २:७-८)। पौलुस ने अपने मसीही जीवन के उदाहरण से सिखाना चाहा कि हम मसीही विश्वासियों को विश्वासयोग्यता सहित अपने विश्वास की दौड़ दौड़ते रहनी है क्योंकि हम अपने प्रभु और राजा मसीह यीशु के आदर के लिए दौड़ रहे हैं, और उस से ही हमें अनन्त काल तक बने रहने वाले मुकुट मिलेंगे।

   यदि हम अपनी दौड़ में, परमेश्वर की सेवकाई छोड़ने या पाप में पड़ जाने के द्वारा, ढीले पड़ जाएंगे तो हम अपने प्रतिफल और स्वर्गीय मुकुट भी खो देंगे जो हमारे प्रभु ने हमारे लिए रखे हैं, और हमें हमारी दौड़ पूरी करने पर देगा।

   सिबिल ने बिलकुल ठीक कहा था, अगर दौड़ेंगे नहीं तो जीतेंगे भी नहीं; मसीही जीवन की अपनी दौड़ में सदा प्रयासरत रहिए। - बिल क्राउडर


किसी भी पदक के जीतने से बढ़ कर मसीह का हमें "शाबाश; बहुत अच्छा किया" कहना होगा।
क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - १ कुरिन्थियों ९:२४
बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों ९:१९-२७
1Co 9:19  क्‍योंकि सब से स्‍वतंत्र होने पर भी मैं ने अपने आप को सब का दास बना दिया है, कि अधिक लोगों को खींच लाऊं।
1Co 9:20  मैं यहूदियों के लिये यहूदी बना कि यहूदियों को खींच लाऊं, जो लोग व्यवस्था के आधीन हैं उन के लिये मैं व्यवस्था के आधीन न होने पर भी व्यवस्था के आधीन बना, कि उन्‍हें जो व्यवस्था के आधीन हैं, खींच लाऊं।
1Co 9:21 व्यवस्थाहीनों के लिये मैं (जो परमेश्वर की व्यवस्था से हीन नहीं, परन्‍तु मसीह की व्यवस्था के आधीन हूं) व्यवस्थाहीन सा बना, कि व्यवस्थाहीनों को खींच लाऊं।
1Co 9:22  मैं निर्बलों के लिये निर्बल सा बना, कि निर्बलों को खींच लाऊं, मैं सब मनुष्यों के लिये सब कुछ बना हूं, कि किसी न किसी रीति से कई एक का उद्धार कराऊं।
1Co 9:23  और मैं सब कुछ सुसमाचार के लिये करता हूं, कि औरों के साथ उसका भागी हो जाऊं।
1Co 9:24 क्‍या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्‍तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो।
1Co 9:25 और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्‍तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं।
1Co 9:26 इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्‍तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्‍तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है।
1Co 9:27  परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार करके, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।
एक साल में बाइबल: 
  • एज़रा ६-८ 
  • यूहन्ना २१

मंगलवार, 12 जून 2012

सही उपयोग

   अपनी मनोरंजक पुस्तक Eats, Shoots & Leaves में लेखिका लिन ट्रस, वर्तमान समय में लेखन में विराम चिन्हों के गलत उपयोग और उन के कारण उत्पन्न होने वाली गलत समझ की कहानी बताती हैं। इस बात का एक उदाहरण है एक पाण्डा की कहानी। पाण्डा चीन में पाया जाने वाला भालू प्रजाति और सौम्य प्रवृति का एक जानवर है जो बांस की कोंपलें (shoots) और कोमल पत्तियां खाना पसन्द करता है। कहानी में एक पाण्डा एक होटल में प्रवेश करता है, अपने खाने के लिए सैन्डविच मंगाता है, सैण्डविच खाकर फिर वह बन्दूक निकालता है और गोलियां चलाने लगता है। जब होटल का वेटर उस से उस के इस व्यवहार के कारण को पूछता है तो पाण्डा उसे जंगल और जंगली जानवरों की जानकारी देने वाली एक पुस्तिका की प्रति देता है, जिसमें विराम चिन्हों का ठीक उपयोग नहीं हुआ है, और उस से कहता है कि इसमें से पाण्डा के बारे में दी गई जानकारी पढ़ो। वेटर पुस्तिका में से पाण्डा की जानकारी वाला पृष्ठ निकालता है, और वहां उसे लिखा मिलता है: "Panda: Large black-and-white bear-like mammal, native to China. Eats, shoots and leaves" - जिसका अनुवाद बनता है - "पाण्डा: चीन में रहने वाला, बड़ा काले-सफेद रंग का भालू के समान जानवर। खाता है, गोली चलाता है और चला जाता है।" अन्तिम वाक्य में Eats के बाद लगे गलत अल्पविराम ने वाक्य का अर्थ ही बदल डाला। लिखने वाले का तात्पर्य था बांस की कोंपलें तथा कोमल पत्तियां खाता है, लेकिन गलत जगह लगे अल्पविराम ने वाक्य का अर्थ कुछ और ही कर दिया।

   भाषा के साथ सावधानी बरतना परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में भी अति महत्वपूर्ण है। प्रेरित पौलुस ने इस बात के संदर्भ में लिखा, "अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो" (२ तिमुथियुस २:१५)। जिस वाक्यांश का अनुवाद "ठीक रीति से काम में लाना" हुआ है वह मूल भाषा में किसी कुशल कारीगर द्वारा बिलकुल सीध में तराशने या काटने के लिए प्रयोग होता था; अर्थात पौलुस प्रेरित के कहने का तात्पर्य था कि एक कुशल कारिगर के समान परमेश्वर के वचन की व्याख्या ऐसे कर कि जिस से उस में कोई टेढ़ा या बांकापन ना आने पाए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अध्ययन में यह तब  ही संभव है जब परमेश्वर को अपने आप को समर्पित कर के, परमेश्वर की पवित्र आत्मा की अगुवाई में बाइबल का ध्यान पूर्वक अध्ययन करना जीवन का अभिन्न अंग बन जाए। तब ही परमेश्वर के वचन के गूढ़ सत्य सही रीति से समझ में आते हैं और फिर किसी को सही रीति से सिखाए जा सकते हैं। यह सतत प्रयास प्रत्येक सच्चे मसीही विश्वासी का कर्तव्य है; उसके जीवन से परमेश्वर के वचन का दुरुपयोग या निरादर कभी नहीं होना चाहिए, किसी को कोई गलत शिक्षा कभी नहीं जानी चाहिए। - डेनिस फिशर

 
अपने आप को बाइबल के अध्ययन में, और बाइबल को अपने जीवन में लागू कीजिए।
 
अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो। - २ तिमुथियुस २:१५
 
बाइबल पाठ: २ तिमुथियुस २:१-१५
2Ti 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा।
2Ti 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी है, उन्‍हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।
2Ti 2:3 मसीह यीशु के अच्‍छे योद्धा की नाईं मेरे साथ दुख उठा।
2Ti 2:4  जब कोई योद्धा लड़ाई पर जाता है, तो इसलिये कि अपने भरती करने वाले को प्रसन्न करे, अपने आप को संसार के कामों में नहीं फंसाता;
2Ti 2:5  फिर अखाड़े में लड़ने वाला यदि विधि के अनुसार न लड़े तो मुकुट नहीं पाता।
2Ti 2:6  जो गृहस्थ परिश्रम करता है, फल का अंश पहिले उसे मिलना चाहिए।
2Ti 2:7  जो मैं कहता हूं, उस पर ध्यान दे और प्रभु तुझे सब बातों की समझ देगा।
2Ti 2:8  यीशु मसीह को स्मरण रख, जो दाऊद के वंश से हुआ, और मरे हुओं में से जी उठा, और यह मेरे सुसमाचार के अनुसार है।
2Ti 2:9 जिस के लिये मैं कुकर्मी की नाईं दुख उठाता हूं, यहां तक कि कैद भी हूं; परन्‍तु परमेश्वर का वचन कैद नहीं।
2Ti 2:10  इस कारण मैं चुने हुए लोगों के लिये सब कुछ सहता हूं, कि वे भी उस उद्धार को जो मसीह यीशु में हैं अनन्‍त महिमा के साथ पाएं।
2Ti 2:11   यह बात सच है, कि यदि हम उसके साथ मर गए हैं तो उसके साथ जीएंगे भी।
2Ti 2:12  यदि हम धीरज से सहते रहेंगे, तो उसके साथ राज्य भी करेंगे : यदि हम उसका इन्‍कार करेंगे तो वह भी हमारा इन्‍कार करेगा।
2Ti 2:13  यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वासयोग्य बना रहता है, क्‍योंकि वह आप अपना इन्‍कार नहीं कर सकता।
2Ti 2:14  इन बातों की सुधि उन्‍हें दिला, और प्रभु के साम्हने चिता दे, कि शब्‍दों पर तर्क-वितर्क न किया करें, जिन से कुछ लाभ नहीं होता, वरन सुनने वाले बिगड़ जाते हैं।
2Ti 2:15  अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो।
 
एक साल में बाइबल: 
  • एज़रा ३-५ 
  • यूहन्ना २०

सोमवार, 11 जून 2012

सहायता

   कोनेटिकट प्रांत के वाटरबेरी अस्पताल में शल्य चिकित्सा विभाग के अध्यक्ष, डॉक्टर स्कौट कुर्टज़मैन, एक भाषण देने के लिए जा रहे थे के मार्ग में उन्होंने भयानक दुर्घटना का दश्य मिला जिसमें २० गाड़ियां फंसी हुई थीं। डॉक्टर स्कौट ने तुरंत रुक कर सहायता कार्य आरंभ कर दिया, और अगले ९० मिनिट तक टूटी और आपस में फंसी गाड़ियों में घुस घुस कर घायलों का पता किया, उन्हें बाहर निकाला और उनका प्राथमिक उपचार किया। जब सभी घायल निकाल कर निकट के अस्पतालों में पहुंचा दिए गए, तब ही वे वहां से आगे चले। बाद में इस घटना पर बात करते हुए उन्होंने कहा, "मेरी जैसी योग्यताओं वाला कोई व्यक्ति किसी घायल को नज़रंदाज़ करके कैसे जा सकता था? मैं ऐसा बेपरवाही का जीवन नहीं जी सकता।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रभु यीशु ने, ऐसे ही किसी दूसरे की सहायता के लिए रुकने वाले व्यकि की नीतिकथा बयान करी (लूका १०:३०-३७)। उन्होंने जो कहा उसका सार इस प्रकार है: एक यहूदी व्यक्ति मार्ग में जाते हुए डाकुओं द्वारा घेर कर मारा-पीटा और लूटा गया और नंगा तथा अधमुआ करके मार्ग के किनारे छोड़ दिया गया। वहां से निकलने वाले परमेश्वर के मन्दिर के एक पुजारी और मन्दिर के एक और सेवक ने उसे देखा किंतु वे उससे मुंह फेर कर ऐसे ही चले गए। फिर वहां से एक सामरी व्यक्ति निकला; यद्यपि सामरी लोग यहूदियों द्वारा तुच्छ और अछूत समझे जाते थे फिर भी वह रुका, उस घायल की सहायता करी, उसके घावों की सफाई और देखभाल करी और उसे उठाकर एक सराय में लाया; वहां सराय के मालिक को उस घायल व्यक्ति की देखभाल का खर्चा दिया तथा सराय के स्वामी को आश्वासन दिया कि यदि और भी खर्चा होगा तो लौटते समय वह भी भर देगा।

   हमारे चारों ओर संसार में अनेक लोग ऐसे हैं जिन्हें हमारी सहायता की आवश्यक्ता है; कोई मानसिक रूप से आहत है तो कोई शारीरिक या सामाजिक या पारिवारिक रूप से। सभी को किसी न किसी रूप में सांत्वना और सहायता देने वाला कोई सहायक चाहिए। सच्ची शांति और समस्या का समाधान तो परमेश्वर प्रभु यीशु के पास ही है, लेकिन हम जो प्रभु यीशु के अनुयायी हैं, अपने प्रयासों और सेवा द्वारा प्रभु यीशु में मिलने वाली उस शांति और सहृदयता का एक नमूना उस दुखी जन के समक्ष रख सकते हैं, उसे उस सच्ची शांति देने वाले की ओर इशारा दे सकते हैं। - मार्विन विलियम्स


करुणा सदा कार्यशील रहती है।


... तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी शक्ति और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख; और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। - लूका १०:२७

बाइबल पाठ: लूका १०:३०-३७
Luk 10:30  यीशु ने उत्तर दिया, कि एक मनुष्य यरूशलेम से यरीहो को जा रहा था, कि डाकुओं ने घेर कर उसके कपड़े उतार लिए, और मार पीट कर उसे अधमूआ छोड़ कर चले गए।
Luk 10:31 और ऐसा हुआ कि उसी मार्ग से एक याजक जा रहा था: परन्‍तु उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:32  इसी रीति से एक लेवी उस जगह पर आया, वह भी उसे देख के कतराकर चला गया।
Luk 10:33 परन्‍तु एक सामरी यात्री वहां आ निकला, और उसे देख कर तरस खाया।
Luk 10:34 और उसके पास आकर और उसके घावों पर तेल और दाखरस डालकर पट्टियां बान्‍धी, और अपनी सवारी पर चढ़ाकर सराय में ले गया, और उस की सेवा टहल की।
Luk 10:35  दूसरे दिन उस ने दो दिनार निकाल कर भटियारे को दिए, और कहा इस की सेवा टहल करना, और जो कुछ तेरा और लगेगा, वह मैं लौटने पर तुझे भर दूंगा।
Luk 10:36  अब तेरी समझ में जो डाकुओं में घिर गया था, इन तीनों में से उसका पड़ोसी कौन ठहरा?
Luk 10:37  उस ने कहा, वही जिस ने उस पर तरस खाया: यीशु ने उस से कहा, जा, तू भी ऐसा ही कर।


एक साल में बाइबल: 

  • एज़रा १-२ 
  • यूहन्ना १९:२३-४२

रविवार, 10 जून 2012

प्रार्थना

   एम्मा ग्रे ने, ९५ वर्ष की होकर, जून २००९ में अपनी जीवन यात्रा समाप्त करी। दो दशक से भी अधिक समय तक, वे एक बहुत विशाल मकान में, वहां की साफ-सफाई का कार्य करती रहीं। प्रति रात्रि, अपने कार्य को करने के उपरांत वे नियम से उस मकान में रहने वाले अपने अधिकारी के लिए आशीष, बुद्धिमानी और सुरक्षा की प्रार्थना करती थीं।

   एम्मा ने तो उस मकान में २४ वर्ष कार्य किया, किंतु उस मकान में रहने वाला अधिकारी लगभग प्रति ४ वर्ष बदल जाता था। अपनी सेवा के कार्यकाल में एम्मा ने प्रति रात्रि अमेरिका के छः राष्ट्रपतियों, आइज़िनहौवर, कैनिडी, जौनसन, निक्सन, फोर्ड और कार्टर, के लिए प्रार्थनाएं करीं।

   चाहे व्यक्तिगत रूप से एम्मा के लिए कोई भी उनका पसंदीदा राष्ट्रपति रहा हो, उनकी प्रार्थना प्रत्येक के लिए समान रहती थी। यह एम्मा को परमेश्वर के वचन बाइबल से मिले निर्देशों की आज्ञाकारिता में था, जहां १ तिमुथियुस २:१, २ में लिखा है: "अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थाना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं। राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं।" इस के आगे के पद बताते हैं कि लोगों के लिए प्रार्थना करना परमेश्वर को भाता है और वह चाहता है कि सब का उद्धार हो और वे सत्य को पहचानें।

   क्योंकि "यहोवा दुष्टों से दूर रहता है, परन्तु धमिर्यों की प्रार्थना सुनता है" (नीतिवचन १५:२९), एम्मा की प्रार्थनाओं का उन राष्ट्रपतियों के जीवन और कार्यविधि पर क्या क्या प्रभाव हुआ, यह आने वाला अनन्त ही उजागर करेगा, क्योंकि परमेश्वर का वचन यह भी बताता है कि "राजा का मन नालियों के जल की नाईं यहोवा के हाथ में रहता है, जिधर वह चाहता उधर उसको फेर देता है" (नीतिवचन २१:१)।

   एम्मा के समान, हम मसीही विश्वासियों को भी नियमित रूप से अपने अधिकारियों और अगुवों के लिए प्रार्थनाएं करते रहना चाहिएं जिससे उनके जीवन में परमेश्वर की शांति, बुद्धिमानी और आशीष रहे और उसके प्रतिफल स्वरूप हमारी सुख समृद्धि होती रहे। - सिंडी हैस कैस्पर


अगुवों और अधिकारियों को परमेश्वर के निमित प्रभावी बनाने के लिए, परमेश्वर के सम्मुख उनके लिए प्रार्थनाएं कीजिए।

राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त [प्रार्थना करो] इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं। - १ तिमुथियुस २:२

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस २:१-८
1Ti 2:1  अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं।
1Ti 2:2  राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं।
1Ti 2:3 यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्‍छा लगता, और भाता भी है।
1Ti 2:4  वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो, और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें।
1Ti 2:5 क्‍योंकि परमेश्वर एक ही है: और परमेश्वर और मनुष्यों के बीच में भी एक ही बिचवई है, अर्थात मसीह यीशु जो मनुष्य है।
1Ti 2:6  जिस ने अपने आप को सब के छुटकारे के दाम में दे दिया ताकि उस की गवाही ठीक समयों पर दी जाए।
1Ti 2:7  मैं सच कहता हूं, झूठ नहीं बोलता, कि मैं इसी उद्देश्य से प्रचारक और प्रेरित और अन्यजातियों के लिये विश्वास और सत्य का उपदेशक ठहराया गया।
1Ti 2:8  सो मैं चाहता हूं, कि हर जगह पुरूष बिना क्रोध और विवाद के पवित्र हाथों को उठा कर प्रार्थना किया करें।


एक साल में बाइबल: 

  • २ इतिहास ३४-३६ 
  • यूहन्ना १९:१-२२

शनिवार, 9 जून 2012

उचित

   "यह उचित नहीं है" आपने कई बार यह कहा नहीं तो सोचा अवश्य होगा। आप इस बात से भी सहमत होंगे कि किसी व्यक्ति को, उसके द्वारा करी गई किसी अनुचित बात के लिए बिना दण्ड मिले, बचकर निकल जाना देखना बहुत कड़ुवा अनुभव होता है। हम यह बात जीवन के आरंभिक दिनों ही में सीख लेते हैं; किसी भी किशोरावस्था के बच्चों के माता-पिता से पूछ कर देख लीजिए। बच्चों को, किसी ऐसी बात के लिए जिसके लिए उन्हें दण्ड भोगना पड़ा हो, अपने किसी भाई-बहिन को साफ बच कर निकलते देखना बिलकुल गंवारा नहीं है; इसीलिए वे एक दूसरे की शिकायत करने या उनका भांडा-फोड़ करने को तत्पर रहते हैं।

   हम इसे बचपना कह सकते हैं, पर हम अपने जीवन भर इस प्रवृति से निकल नहीं पाते हैं। हम व्यसकों के लिए "उचित" का अर्थ होता है कि वह दूसरा "पापी" परमेश्वर के न्याय, क्रोध और दण्ड का भागी होना चाहिए, और मुझ "धर्मी" को परमेश्वर से प्रशंसा और आशीष मिलनी चाहिए। किंतु सत्य तो यह है कि यदि परमेश्वर इसी प्रकार से "उचित" रहा होता तो हम सब कब के नाश हो गए होते! हम सब को परमेश्वर के आभारी होना चाहिए कि "उस ने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है" (भजन १०३:१०)।

   हमें कुड़कुड़ाना नहीं वरन धन्यवाद करना चाहिए कि परमेश्वर हम में से किसी को भी वह नहीं देता जो हमारे लिए "उचित" है, वरन अपने धैर्य, अपनी करुणा और अनुग्रह में हो कर हम से प्रेम और सहिषुण्ता के साथ व्यवहार करता है। वह अपनी करुणा और और अनुग्रह उन पर भी उंडेलेने को तैयार रहता है जो इसके सर्वथा अयोग्य हैं और उसके विमुख रहते हैं। ज़रा सा रुक कर अपने जीवन में झांक कर देखिए, आखिरी बार कब था जब आपने "न्याय" नहीं वरन सहनशीलता, करुणा और अनुग्रह से किसी ऐसे के प्रति व्यवहार किया जिसने आपकी कोई हानि करी?

   परमेश्वर का न्याय नहीं, वरन परमेश्वर का प्रेम है जो उसे बाध्य करता है कि वह आपको और मुझे पुकारता और ढ़ूंढ़ता हुआ आता है; और हमारे उसके पास लौट आने पर स्वर्ग में आनन्द मनाया जाता है (लूका १५:७)।

   व्यक्तिगत रीति से पूछिए तो मैं तो परमेश्वर का बहुत धन्यवादी और आभारी हूँ कि उसने मुझ से "उचित" व्यवहार नहीं किया है। क्या आप भी मेरे साथ सहमत हैं? - जो स्टोवैल


क्योंकि परमेश्वर ने पहले हम पर अपनी करुणा तथा दया दिखाई है, इसलिए हम भी दूसरों के प्रति यही व्यवहार प्रदर्शित कर सकते हैं।

उस ने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है। - भजन १०३:१०

बाइबल पाठ: भजन १०३:१-१४
Psa 103:1  हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे!
Psa 103:2  हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कह, और उसके किसी उपकार को न भूलना।
Psa 103:3  वही तो तेरे सब अधर्म को क्षमा करता, और तेरे सब रोगों को चंगा करता है,
Psa 103:4  वही तो तेरे प्राण को नाश होने से बचा लेता है, और तेरे सिर पर करूणा और दया का मुकुट बान्धता है,
Psa 103:5  वही तो तेरी लालसा को उत्तम पदार्थों से तृप्त करता है, जिस से तेरी जवानी उकाब की नाईं नई हो जाती है।
Psa 103:6  यहोवा सब पिसे हुओं के लिये धर्म और न्याय के काम करता है।
Psa 103:7  उस ने मूसा को अपनी गति, और इस्राएलियों पर अपने काम प्रगट किए।
Psa 103:8  यहोवा दयालु और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।
Psa 103:9  वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा।
Psa 103:10  उस ने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।
Psa 103:11  जैसे आकाश पृथ्वी के ऊपर ऊंचा है, वैसे ही उसकी करूणा उसके डरवैयों के ऊपर प्रबल है।
Psa 103:12  उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, उस ने हमारे अपराधों को हम से उतनी ही दूर कर दिया है।
Psa 103:13  जैसे पिता अपने बालकों पर दया करता है, वैसे ही यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है।
Psa 103:14  क्योंकि वह हमारी सृष्टि जानता है, और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है।


एक साल में बाइबल: 

  • २ इतिहास ३२-३३ 
  • यूहन्ना १८:१९-४०