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सोमवार, 24 जून 2013

प्रेम का कारण

   एक दिन मेरा तीन वर्षीय बेटा अचानक ही बोल उठा, "माँ मैं आपसे बहुत प्रेम करता हूँ।" मुझे सुनकर अच्छा तो लगा लेकिन साथ ही जानने का कौतहूल भी हुआ कि एक तीन वर्षीय बालक को ऐसा क्या अच्छा लगता है जिसके कारण उसने यह भाव व्यक्त किया। जानने के लिए मैंने अपने बेटे से पूछा कि वह क्यों मुझसे प्रेम करता है, तो तुरंत ही बड़े स्वाभाविक भाव से उसने उत्तर दिया, "क्योंकि आप मेरे साथ खेलते हो!" कारण सुनकर मुझे थोड़ी सी निराशा हुई इसलिए मैंने फिर पूछा, "बस इसी कारण या और कुछ भी है?" उसी साधारण और उनमुक्त भाव से वह बोला, "नहीं, बस इतना ही।" उसका यह उत्तर सुनकर मैं मुस्कुराई तो सही, लेकिन मुझे परमेश्वर के साथ अपने संबंध का भी ध्यान आया। क्या परमेश्वर के प्रति मेरे प्रेम का कारण केवल मुझे भली लगने वाली वे बातें हैं जो परमेश्वर मेरे लिए करता है? यदि मेरी मनपसन्द बातें कल ना हों तब मेरा प्रेम परमेश्वर के प्रति कैसा होगा?

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक अय्युब को ऐसी ही परीक्षा से निकलना पड़ा। अय्युब एक बहुत ही धर्मी और परमेश्वर का भय मानने वाला और बहुत धनी व्यक्ति था। अचानक ही उसका परिवार, मकान, संपत्ति और स्वास्थ्य, सब शैतान द्वारा बरबाद कर दिए गए, और उसकी पत्नि ने उसकी दयनीय दशा देखकर सलाह दी: "तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा" (अय्युब 2:9 )। लेकिन अय्युब का अपनी पत्नि को प्रत्युत्तर था: "उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया" (अय्युब 2:10)। उसके साथ सांत्वना दिखाने आए उसके मित्र भी उसी पर दोषारोपण करने लगे कि अवश्य ही उसके जीवन में कुछ पाप होगा जिसके कारण उसे यह सब भोगना पड़ रहा है; अय्युब स्वयं भी परमेश्वर से प्रश्न करता रहा कि क्यों उसे यह सब सहना पड़ रहा है, लेकिन उसने परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को नहीं छोड़ा और उसके प्रति आशावान रहा। अन्ततः परमेश्वर से उसने केवल जितना उसने गंवाया था उससे दोगुनी आशीष ही नहीं पाई वरन परमेश्वर के नए और गहरे दर्शन तथा समझ-बूझ भी प्राप्त करी।

   अय्युब का परमेश्वर के प्रति प्रेम और श्रद्धा का कारण उसके जीवन की खुशहाली या समस्याओं का समाधान नहीं था वरन वह परमेश्वर से परमेश्वर के व्यक्तित्व और जो कुछ वह है और करता है के कारण प्रेम करता था। परमेश्वर के प्रति अय्युब का दृष्टिकोण था "वह बुद्धिमान और अति सामथीं है: उसके विरोध में हठ कर के कौन कभी प्रबल हुआ है?" (अय्युब 9:4)

   क्या आज परमेश्वर के प्रति आपका भी अय्युब के समान ही दृष्टिकोण है? विचार कीजिए कि परमेश्वर के प्रति आपके प्रेम का कारण क्या है? यदि आप किसी परेशानी में पड़ जाएं और आपकी सुख समृद्धि जाती रहे तो क्या आप फिर भी परमेश्वर से वैसा ही प्रेम बनाए रखेंगे? - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के व्यक्तित्व और चरित्र पर ध्यान केंद्रित रखने से हम परिस्थितियों से ध्यान हटाए रहते हैं।

उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया। - अय्युब 2:10

बाइबल पाठ: अय्युब 2
Job 2:1 फिर एक और दिन यहोवा परमेश्वर के पुत्र उसके साम्हने उपस्थित हुए, और उनके बीच शैतान भी उसके साम्हने उपस्थित हुआ।
Job 2:2 यहोवा ने शैतान से पूछा, तू कहां से आता है? शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, कि इधर-उधर घूमते-फिरते और डोलते-डालते आया हूँ।
Job 2:3 यहोवा ने शैतान से पूछा, क्या तू ने मेरे दास अय्यूब पर ध्यान दिया है कि पृथ्वी पर उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय मानने वाला और बुराई से दूर रहने वाला मनुष्य और कोई नहीं है? और यद्यापि तू ने मुझे उसको बिना कारण सत्यानाश करने को उभारा, तौभी वह अब तक अपनी खराई पर बना है।
Job 2:4 शैतान ने यहोवा को उत्तर दिया, खाल के बदले खाल, परन्तु प्राण के बदले मनुष्य अपना सब कुछ दे देता है।
Job 2:5 सो केवल अपना हाथ बढ़ाकर उसकी हड्डियां और मांस छू, तब वह तेरे मुंह पर तेरी निन्दा करेगा।
Job 2:6 यहोवा ने शैतान से कहा, सुन, वह तेरे हाथ में है, केवल उसका प्राण छोड़ देना।
Job 2:7 तब शैतान यहोवा के साम्हने से निकला, और अय्यूब को पांव के तलवे से ले सिर की चोटी तक बड़े बड़े फोड़ों से पीड़ित किया।
Job 2:8 तब अय्यूब खुजलाने के लिये एक ठीकरा ले कर राख पर बैठ गया।
Job 2:9 तब उसकी स्त्री उस से कहने लगी, क्या तू अब भी अपनी खराई पर बना है? परमेश्वर की निन्दा कर, और चाहे मर जाए तो मर जा।
Job 2:10 उसने उस से कहा, तू एक मूढ़ स्त्री की सी बातें करती है, क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दु:ख न लें? इन सब बातों में भी अय्यूब ने अपने मुंह से कोई पाप नहीं किया।
Job 2:11 जब तेमानी एलीपज, और शूही बिलदद, और नामाती सोपर, अय्यूब के इन तीन मित्रों ने इस सब विपत्ति का समाचार पाया जो उस पर पड़ी थीं, तब वे आपस में यह ठान कर कि हम अय्यूब के पास जा कर उसके संग विलाप करेंगे, और उसको शान्ति देंगे, अपने अपने यहां से उसके पास चले।
Job 2:12 जब उन्होंने दूर से आंख उठा कर अय्यूब को देखा और उसे न चीन्ह सके, तब चिल्लाकर रो उठे; और अपना अपना बागा फाड़ा, और आकाश की ओर धूलि उड़ाकर अपने अपने सिर पर डाली।
Job 2:13 तब वे सात दिन और सात रात उसके संग भूमि पर बैठे रहे, परन्तु उसका दु:ख बहुत ही बड़ा जान कर किसी ने उस से एक भी बात न कही।


एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 1-2 
  • प्रेरितों 7:22-43


रविवार, 23 जून 2013

भिन्न

   स्वर्ग के जिस राज्य की स्थापना के लिए प्रभु यीशु इस धरती पर आए थे उसकी मान्यताएं और मूल्य उनके आगमन के समय भी और आज भी संसार में प्रचलित मूल्यों से बहुत भिन्न और विलक्षण हैं। प्रभु यीशु के पृथ्वी पर रहने के दिनों में धर्म के अगुवे और शिक्षक लोगों की भीड़, उस भीड़ द्वारा आदर और अभिवादन, तथा अपने आप को ऊँचा दिखाना बहुत पसन्द करते थे; और आज भी यही प्रवृति देखने को मिलती है।

   प्रभु यीशु ने एक नीतिकथा द्वारा अपने शिष्यों को इस प्रवृति से बच कर रहने को समझाया; यह नीतिकथा परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 14 में मिलती है। इस नीतिकथा में कुछ लोगों के बारे में उल्लेख है जो एक विवाह के भोज में आमंत्रित थे और वहाँ पर उन्होंने अपने लिए सबसे सम्मानित स्थान चुन लिए। लेकिन जब भोज का मेज़बान उन स्थानों पर बैठाने के लिए उन लोगों को लाया जिनके लिए वे स्थान तैयार किए गए थे और इन लोगों से स्थान खाली करने को कहा, तो इन्हें बड़ी शर्मिंदगी के साथ उठकर पीछे के नीचे स्थानों पर जाना पड़ा। साथ ही प्रभु यीशु ने शिष्यों को यह भी समझाया कि उन्हें अपनी दावत में कैसे लोगों को आमंत्रित करना चाहिए और क्यों: "परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला। तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा" (लूका 14:13-14)।

   क्या आप इस बात से निराश हैं कि समाज, पड़ौसियों और चर्च में आपको ऊँचा दर्जा नहीं दिया जाता है? क्या आप इस बात को लेकर कुँठित हैं कि आपकी योग्यता और स्थान की सही पहचान नहीं हुई है और आपको वह स्थान नहीं मिल रहा है जिसके योग्य आप अपने आप को समझते हैं? ज़रा प्रभु यीशु की बात पर ध्यान दीजिए: "जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा" (लूका 14:11)।

   परमेश्वर के राज्य का यह एक वह भिन्न मूल्य है जो संसार में आपको कहीं नहीं मिलेगा - यदि परमेश्वर से आदर और उसके द्वारा उन्नत स्थान चाहते हैं तो संसार में अपने आप को दीन और नम्र कर दें तथा संसार और संसार के लोगों से कुछ भी आशा ना रखें। परमेश्वर की नज़रों में दीन बनें और उचित समय तथा परिस्थिति के द्वारा वह आपको संसार में भी आदरणीय बना देगा। - डेव एगनर


मसीह यीशु के राज्य में दीनता सदा ही घमण्ड पर विजयी रही है और रहती है।

प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। - याकूब 4:10 

बाइबल पाठ: लूका 14:7-14
Luke 14:7 जब उसने देखा, कि नेवताहारी लोग क्योंकर मुख्य मुख्य जगहें चुन लेते हैं तो एक दृष्‍टान्‍त देकर उन से कहा।
Luke 14:8 जब कोई तुझे ब्याह में बुलाए, तो मुख्य जगह में न बैठना, कहीं ऐसा न हो, कि उसने तुझ से भी किसी बड़े को नेवता दिया हो।
Luke 14:9 और जिसने तुझे और उसे दोनों को नेवता दिया है: आकर तुझ से कहे, कि इस को जगह दे, और तब तुझे लज्ज़ित हो कर सब से नीची जगह में बैठना पड़े।
Luke 14:10 पर जब तू बुलाया जाए, तो सब से नीची जगह जा बैठ, कि जब वह, जिसने तुझे नेवता दिया है आए, तो तुझ से कहे कि हे मित्र, आगे बढ़कर बैठ; तब तेरे साथ बैठने वालों के साम्हने तेरी बड़ाई होगी।
Luke 14:11 और जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।
Luke 14:12 तब उसने अपने नेवता देने वाले से भी कहा, जब तू दिन का या रात का भोज करे, तो अपने मित्रों या भाइयों या कुटुम्बियों या धनवान पड़ोसियों को न बुला, कहीं ऐसा न हो, कि वे भी तुझे नेवता दें, और तेरा बदला हो जाए।
Luke 14:13 परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला।
Luke 14:14 तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10 
  • प्रेरितों 7:1-21


शनिवार, 22 जून 2013

भय और विश्वास

   माँ ने अपने पाँच वर्षीय पुत्र जौनी से कहा कि गोदाम में जाकर टमाटर के सूप का एक डब्बा ले आए। लेकिन जौनी ने यह कहते हुए, "लेकिन वहाँ तो अन्धेरा है" जाने से मना कर दिया। माँ ने जौनी को फिर आश्वस्त किया, "वहाँ पर डरने की कोई बात नहीं है, और फिर यीशु तो वहाँ भी है।" जौनी आशंका से भरा हुआ और बड़े अनमने मन से गोदाम तक गया, धीरे से गोदाम का दरवाज़ा खोला और अन्दर के अन्धकार को देखकर बाहर ही से ऊँची आवाज़ में बोला, "यीशु, मुझे ज़रा यहाँ टमाटर सूप का एक डब्बा तो पकड़ना।"

   यह मज़ाकिया कहानी मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक गिदोन की याद दिलाती है। परमेश्वर ने गिदोन को दर्शन दिए और उसे "हे शूरवीर सूरमा" कहकर संबोधित भी किया (न्यायियों 6:12) और फिर उसे इस्त्राएलियों को मिदियानी आताताईयों के हाथों से छुड़ाने को कहा (पद 14)। लेकिन गिदोन अपने भय से आगे नहीं देख सका और इस ज़िम्मेदारी से बचने का मार्ग ढूँढते हुए, "उसने कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, मैं इस्राएल को क्योंकर छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूं" (न्यायियों 6:15 )। परमेश्वर ने गिदोन को फिर आश्वस्त किया कि वह परमेश्वर की सहायता से मिदियानियों को हराने पाएगा (पद 16), लेकिन गिदोन का भय नहीं गया। फिर अपने आप को और आश्वस्त करने तथा अपने साथ परमेश्वर की उपस्थिति को जाँचने के लिए गिदोन ने परमेश्वर से दो बार चिन्ह माँगे (पद 17, 36-40), और परमेश्वर ने उन चिन्हों को भी पूरा किया। जब गिदोन इतना भयभीत और सन्देहकारी था तो फिर परमेश्वर ने उसे "हे शूरवीर सूरमा" कहकर क्यों संबोधित किया? इसलिए, क्योंकि परमेश्वर जानता था कि अपनी ही नज़रों में तुच्छ और कमज़ोर यह व्यक्ति आगे चलकर परमेश्वर की सहायता से कैसे महान कार्य करेगा और इस्त्राएल में क्या बन जाएगा।

   आज अपने हालात और संसार की परिस्थितियों से घबराकर हम भी अपनी योग्यताओं और सामर्थ पर शक कर सकते हैं, अपने को कमज़ोर और लाचार मान सकते हैं। लेकिन हम यह कभी नहीं भूलें कि जब हम परमेश्वर पर विश्वास रखेंगे और उसके आज्ञाकारी रहेंगे तो वह अपनी सामर्थ से हमें परिपूर्ण करके हमारे द्वारा क्या कुछ नहीं कर सकता। जो गिदोन का परमेश्वर था वही आज हम मसीही विश्वासियों का भी परमेश्वर है। उसकी योजनाएं आज भी वैसी ही अद्भुत और उसका साथ वैसा ही सामर्थ प्रदान करने तथा जयवंत बनाने वाला है। जीवन अपनी कमज़ोरियों के भय से नहीं, परमेश्वर में विश्वास की सामर्थ से बिताएं। - एलबर्ट ली


जब हम इस बात से आश्वस्त हैं कि परमेश्वर प्रभु यीशु हमारे साथ है तो हम किसी भी भय का सामना कर सकते हैं।

उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है। - न्यायियों 6:12 

बाइबल पाठ: न्यायियों 6:11-23
Judges 6:11 फिर यहोवा का दूत आकर उस बांजवृक्ष के तले बैठ गया, जो ओप्रा में अबीएजेरी योआश का था, और उसका पुत्र गिदोन एक दाखरस के कुण्ड में गेहूं इसलिये झाड़ रहा था कि उसे मिद्यानियों से छिपा रखे।
Judges 6:12 उसको यहोवा के दूत ने दर्शन देकर कहा, हे शूरवीर सूरमा, यहोवा तेरे संग है।
Judges 6:13 गिदोन ने उस से कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, यदि यहोवा हमारे संग होता, तो हम पर यह सब विपत्ति क्यों पड़ती? और जितने आश्चर्यकर्मों का वर्णन हमारे पुरखा यह कहकर करते थे, कि क्या यहोवा हम को मिस्र से छुड़ा नहीं लाया, वे कहां रहे? अब तो यहोवा ने हम को त्याग दिया, और मिद्यानियों के हाथ कर दिया है।
Judges 6:14 तब यहोवा ने उस पर दृष्टि कर के कहा, अपनी इसी शक्ति पर जा और तू इस्राएलियों को मिद्यानियों के हाथ से छुड़ाएगा; क्या मैं ने तुझे नहीं भेजा?
Judges 6:15 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, बिनती सुन, मैं इस्राएल को क्योंकर छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूं।
Judges 6:16 यहोवा ने उस से कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; सो तू मिद्यानियों को ऐसा मार लेगा जैसा एक मनुष्य को।
Judges 6:17 गिदोन ने उस से कहा, यदि तेरा अनुग्रह मुझ पर हो, तो मुझे इसका कोई चिन्ह दिखा कि तू ही मुझ से बातें कर रहा है।
Judges 6:18 जब तक मैं तेरे पास फिर आकर अपनी भेंट निकाल कर तेरे साम्हने न रखूं, तब तक तू यहां से न जा। उसने कहा, मैं तेरे लौटने तक ठहरा रहूंगा।
Judges 6:19 तब गिदोन ने जा कर बकरी का एक बच्चा और एक एपा मैदे की अखमीरी रोटियां तैयार कीं; तब मांस को टोकरी में, और जूस को तसले में रखकर बांजवृक्ष के तले उसके पास ले जा कर दिया।
Judges 6:20 परमेश्वर के दूत ने उस से कहा, मांस और अखमीरी रोटियों को ले कर इस चट्टान पर रख दे, और जूस को उण्डेल दे। उसने ऐसा ही किया।
Judges 6:21 तब यहोवा के दूत ने अपने हाथ की लाठी को बढ़ाकर मांस और अखमीरी रोटियों को छूआ; और चट्टान से आग निकली जिस से मांस और अखमीरी रोटियां भस्म हो गई; तब यहोवा का दूत उसकी दृष्टि से अन्तरध्यान हो गया।
Judges 6:22 जब गिदोन ने जान लिया कि वह यहोवा का दूत था, तब गिदोन कहने लगा, हाय, प्रभु यहोवा! मैं ने तो यहोवा के दूत को साक्षात देखा है।
Judges 6:23 यहोवा ने उस से कहा, तुझे शान्ति मिले; मत डर, तू न मरेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 6-8 
  • प्रेरितों 6


शुक्रवार, 21 जून 2013

अनपेक्षित अशीष

   परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रथम खण्ड - पुराने नियम में एक पुस्तक है "रूत"। यह पुस्तक एक बड़ी ही अद्भुत लेकिन सच्ची कहानी कहती है, एक गैरइस्त्राएली स्त्री रूत की। कहानी का आरंभ होता है एक इस्त्राएली स्त्री नाओमी के परिवार से, जो इस्त्राएल में पड़े अकाल से बचने के लिए गैरइस्त्राएली मोआब के इलाके में चला जाता है। वहाँ रहते हुए नाओमी के दोनो बेटे मोआबी स्त्रीओं, ओर्पा और रूत से ब्याह कर लेते हैं। कुछ समय पश्चात ही पहले नाओमी के पति का फिर उसके दोनो पुत्रों का भी देहाँत हो जाता है। ऐसे में ये तीन विधवाएं बड़ी कठिन परिस्थितियों में आ जाती हैं।

   तब नाओमी को पता चलता है कि इस्त्राएल अब अकाल से निकल आया है और वह अपने देश, घर और ज़मीन में लौट जाने का निर्णय लेती है। उसकी दोनों विधवा बहुएं भी उसके साथ चलना चाहती हैं, लेकिन नाओमी उन्हें साथ आने से मना करती है क्योंकि उसे लगता है कि परमेश्वर ने उसे छोड़ दिया है और वह उनसे अपने ही लोगों और परिवार जनों में रहने के लिए समझाती है, "तौभी क्या तुम उनके सयाने होने तक आशा लगाए ठहरी रहतीं? और उनके निमित्त पति करने से रुकी रहतीं? हे मेरी बेटियों, ऐसा न हो, क्योंकि मेरा दु:ख तुम्हारे दु:ख से बहुत बढ़कर है; देखो, यहोवा का हाथ मेरे विरुद्ध उठा है" (रूत 1:13)। ओर्पा तो नाओमी की बात मानकर पीछे रह जाती है लेकिन रूत अपनी सास द्वारा परमेश्वर पर रखे कमज़ोर विश्वास से हताश नहीं होती वरन अपने ससुराल के लोगों और उनके परमेश्वर के प्रति एक बड़े अद्भुत विश्वास और समर्पण का परिचय देती है: "तब वे फिर से उठीं; और ओर्पा ने तो अपनी सास को चूमा, परन्तु रूत उस से अलग न हुई। तब उसने कहा, देख, तेरी जिठानी तो अपने लोगों और अपने देवता के पास लौट गई है; इसलिये तू अपनी जिठानी के पीछे लौट जा। रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा; जहां तू मरेगी वहां मैं भी मरूंगी, और वहीं मुझे मिट्टी दी जाएगी। यदि मृत्यु छोड़ और किसी कारण मैं तुझ से अलग होऊं, तो यहोवा मुझ से वैसा ही वरन उस से भी अधिक करे। जब उसने यह देखा कि वह मेरे संग चलने को स्थिर है, तब उसने उस से और बात न कही" (रूत 1:14-18)।

   यह कहानी आरंभ होती है बड़ी निराशाजनक परिस्थितियों - अकाल, मृत्यु और कठिन हालात के साथ, आगे बढ़ती है एक अद्भुत विश्वास द्वारा, एक नया मोड़ लेती है अनपेक्षित करुणा और दया के व्यवहारों से - रूत का नाओमी के प्रति (रूत 1:16-17; 2:11-12) और फिर नाओमी के दूर के रिश्तेदार बोआज़ का रूत के प्रति (रूत 2:13-14)। इस विलक्षण किंतु सच्ची कहानी में कुछ विचित्र से लोग हैं - दो विधवाएं, जिनमें से एक वृद्ध इस्त्राएली है और दूसरी एक जवान गैर इस्त्राएली, एक समृद्ध व्यक्ति बोआज़ जो एक वैश्या की सन्तान है (यहोशु 2:1, मत्ती 1:5)। इसका कथानक आधारित है एक अजीब से "संयोग" - रूत का बोआज़ के खेत में कटाई के बाद ज़मीन पर पड़ी रह गई अन्न की बालों को बीनने जाने पर (रूत 2:3), जिसके कारण रूत बोआज़ के संपर्क में आती है और फिर बोआज़ उसे ब्याह कर अपने घर ले आता है।

   इस कहानी का यही सुखद अन्त नहीं है। कहानी का अन्त एक अद्भुत और कलपना से भी परे आशीष के साथ है; बोआज़ और रूत से उत्पन्न पुत्र ओबेद इस्त्राएल के राजा दाऊद का दादा हुआ और राजा दाऊद के वंश में आगे चलकर संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह ने जन्म लिया।

   दुखदायी परिस्थितियाँ, परमेश्वर पर कमज़ोर टूटता हुआ विश्वास, बहुत ही साधारण से तथा तुच्छ समझे जाने वाले लोग, कुछ दया और करुणा के प्रकट भाव और इन सब के साथ परमेश्वर का हर बात तथा परिस्थिति को अपने वश में एवं नियंत्रित रखना; नतीजा - संसार के लिए पापों से मुक्ति तथा उद्धार का मार्ग!

   क्या आप अपने जीवन की परिस्थितियों से निराश और परेशान हैं? क्या परमेश्वर पर आपका विश्वास डगमगा रहा है या उठ गया है? क्या जीवन के हालात बिलकुल अनेपक्षित और समझ से बाहर हैं? अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित करके सब कुछ परमेश्वर के हाथों में सौंप दीजिए, उसपर भरोसा बनाए रखिए और उसे अपने जीवन में कार्य करने दीजिए; नतीजा ऐसी अनेपक्षित और विलक्षण आशीष होगी जिसकी आप अभी कलपना भी नहीं कर सकते। - जूली ऐकैरमैन लिंक


मसीही विशवासी के जीवन के हर गतिरोध में परमेश्वर एक अद्भुत आनन्द की योजना का निर्माण कर रहा है। - जॉन पाइपर

...क्योंकि तेरी बहू जो तुझ से प्रेम रखती और सात बेटों से भी तेरे लिये श्रेष्ट है उसी का यह बेटा है। - रूत 4:15 

बाइबल पाठ: रूत 2:11-23; 4:13-17
Ruth 2:11 बोअज ने उत्तर दिया, जो कुछ तू ने पति मरने के पीछे अपनी सास से किया है, और तू किस रीति अपने माता पिता और जन्मभूमि को छोड़कर ऐसे लोगों में आई है जिन को पहिले तू ने जानती थी, यह सब मुझे विस्तार के साथ बताया गया है।
Ruth 2:12 यहोवा तेरी करनी का फल दे, और इस्राएल का परमेश्वर यहोवा जिसके पंखों के तले तू शरण लेने आई है तुझे पूरा बदला दे
Ruth 2:13 उसने कहा, हे मेरे प्रभु, तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे, क्योंकि यद्यपि मैं तेरी दासियों में से किसी के भी बराबर नहीं हूं, तौभी तू ने अपनी दासी के मन में पैठनेवाली बातें कहकर मुझे शान्ति दी है।
Ruth 2:14 फिर खाने के समय बोअज ने उस से कहा, यहीं आकर रोटी खा, और अपना कौर सिरके में बोर। तो वह लवने वालों के पास बैठ गई; और उसने उसको भुनी हुई बालें दी; और वह खाकर तृप्त हुई, वरन कुछ बचा भी रखा।
Ruth 2:15 जब वह बीनने को उठी, तब बोअज ने अपने जवानों को आज्ञा दी, कि उसको पूलों के बीच बीच में भी बीनने दो, और दोष मत लगाओ।
Ruth 2:16 वरन मुट्ठी भर जाने पर कुछ कुछ निकाल कर गिरा भी दिया करो, और उसके बीनने के लिये छोड़ दो, और उसे घुड़को मत।
Ruth 2:17 सो वह सांझ तक खेत में बीनती रही; तब जो कुछ बीन चुकी उसे फटका, और वह कोई एपा भर जौ निकला।
Ruth 2:18 तब वह उसे उठा कर नगर में गई, और उसकी सास ने उसका बीना हुआ देखा, और जो कुछ उसने तृप्त हो कर बचाया था उसको उसने निकाल कर अपनी सास को दिया।
Ruth 2:19 उसकी सास ने उस से पूछा, आज तू कहां बीनती, और कहां काम करती थी? धन्य वह हो जिसने तेरी सुधि ली है। तब उसने अपनी सास को बता दिया, कि मैं ने किस के पास काम किया, और कहा, कि जिस पुरूष के पास मैं ने आज काम किया उसका नाम बोअज है।
Ruth 2:20 नाओमी ने अपनी बहू से कहा, वह यहोवा की ओर से आशीष पाए, क्योंकि उसने न तो जीवित पर से और न मरे हुओं पर से अपनी करूणा हटाई! फिर नाओमी ने उस से कहा, वह पुरूष तो हमारा कुटुम्बी है, वरन उन में से है जिन को हमारी भूमि छुड़ाने का अधिकार है।
Ruth 2:21 फिर रूत मोआबिन बोली, उसने मुझ से यह भी कहा, कि जब तक मेरे सेवक मेरी कटनी पूरी न कर चुकें तब तक उन्हीं के संग संग लगी रह।
Ruth 2:22 नाओमी ने अपनी बहु रूत से कहा, मेरी बेटी यह अच्छा भी है, कि तू उसी की दासियों के साथ साथ जाया करे, और वे तुझ को दूसरे के खेत में न मिलें।
Ruth 2:23 इसलिये रूत जौ और गेहूं दोनों की कटनी के अन्त तक बीनने के लिये बोअज की दासियों के साथ साथ लगी रही; और अपनी सास के यहां रहती थी।

Ruth 4:13 तब बोअज ने रूत को ब्याह लिया, और वह उसकी पत्नी हो गई; और जब वह उसके पास गया तब यहोवा की दया से उसको गर्भ रहा, और उसके एक बेटा उत्पन्न हुआ।
Ruth 4:14 तब स्त्रियों ने नाओमी से कहा, यहोवा धन्य है, जिसने तुझे आज छुड़ाने वाले कुटुम्बी के बिना नहीं छोड़ा; इस्राएल में इसका बड़ा नाम हो।
Ruth 4:15 और यह तेरे जी में जी ले आनेवाला और तेरा बुढ़ापे में पालनेवाला हो, क्योंकि तेरी बहू जो तुझ से प्रेम रखती और सात बेटों से भी तेरे लिये श्रेष्ट है उसी का यह बेटा है।
Ruth 4:16 फिर नाओमी उस बच्चे को अपनी गोद में रखकर उसकी धाई का काम करने लगी।
Ruth 4:17 और उसकी पड़ोसिनों ने यह कहकर, कि नाओमी के एक बेटा उत्पन्न हुआ है, लड़के का नाम ओबेद रखा। यिशै का पिता और दाऊद का दादा वही हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5 
  • प्रेरितों 5:22-42


गुरुवार, 20 जून 2013

संक्षिप्त

   एक बार मैं ने गिनती की और पाया कि अमेरिका के राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन के प्रसिद्ध "गेट्सीबर्ग भाषण" में 300 से भी कम शब्द प्रयुक्त हुए थे; अर्थात बात के प्रभावी और विस्मर्णीय होने के लिए शब्दों की बहुतायत होने की आवश्यकता नहीं है।

   यह भी एक कारण है कि मुझे भजन 117 बहुत पसन्द है; संक्षिप्त होना इस भजन की खासियत है। भजनकार ने कुल 38 शब्दों में जो कुछ वह कहना चाहता था कह दिया है; मूल इब्रानी भाषा में तो इस भजन में केवल 17 शब्द ही प्रयुक्त हुए हैं। परमेश्वर की स्तुति एवं प्रशंसा के इस भजन में सारे संसार के लिए संदेश है कि परमेश्वर यहोवा का करूणामय प्रेम हमारे ऊपर प्रबल हुआ है इसलिए वह स्तुति और धन्यवाद का पात्र है।

   थोड़ा परमेश्वर के प्रेम के बारे में मनन करें। हमारे जन्म और अस्तित्व से पहले ही परमेश्वर ने हमसे प्रेम किया; हमारे जीवन भर उसका व्यवहार हमारे प्रति प्रेम और करुणा से भरा रहता है और हमारी मृत्योपरांत भी उसका प्रेम अपनी सन्तान के प्रति बना रहेगा। पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें स्मरण दिलाया कि उनके प्रति मसीह यीशु के प्रेम से हमें अलग कर सकने वाली कोई भी बात नहीं है (रोमियों 8:39)। परमेश्वर का हृदय प्रेम का एक ऐसा सोता है जो ना कभी सूख सकता है और ना कभी समाप्त हो सकता है।

   इस संक्षिप्त से स्तुति एवं प्रशंसा के भजन को पढ़कर अपनी जीवन यात्रा में प्रोत्साहन पाने के लिए परमेश्वर के मेरे प्रति करुणामय प्रेम से बढ़कर लाभकारी किसी अन्य बात की मैं कलपना भी नहीं कर सकता; जीवन यात्रा को सफल बनाने के लिए उसका प्रेम ही मेरे लिए पर्याप्त है। क्या आपने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रेम को स्थान दिया है? - डेविड रोपर


जितना हम परमेश्वर को अनुभव करते हैं उतना ही उसके प्रति आनन्दित और स्तुतिपूर्ण होते जाते हैं।

और फिर हे जाति जाति के सब लागो, प्रभु की स्तुति करो; और हे राज्य राज्य के सब लोगो; उसे सराहो। - रोमियों 15:11 

बाइबल पाठ: भजन 117; रोमियों 8:31-39
Psalms 117:1 हे जाति जाति के सब लोगों यहोवा की स्तुति करो! हे राज्य राज्य के सब लोगो, उसकी प्रशंसा करो!
Psalms 117:2 क्योंकि उसकी करूणा हमारे ऊपर प्रबल हुई है; और यहोवा की सच्चाई सदा की है याह की स्तुति करो!

Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार?
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं।
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं।
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई,
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2 
  • प्रेरितों 5:1-21


बुधवार, 19 जून 2013

बचाए गए

   जनवरी 2010 में हेती द्वीप समूह में एक विनाशकारी भूकम्प आया। भूकम्प और उसके बाद के बचाव कार्य को मीडिया के द्वारा व्यापक रूप से दिखाया गया। विनाश तथा जान और माल की हानि के दृश्यों के बीच में, सभी आशाओं के विपरीत, किसी किसी के मलबे से जीवित निकाले जाने के दृश्य भी देखने को मिलते थे, और उनके साथ ही उन बचाए गए लोगों के रिश्तेदारों आदि के कृतज्ञता तथा धन्यवाद सहित आँसुओं से भरे चेहरे भी दिखाए जाते थे। वे रिश्तेदार कृतज्ञ एवं धन्यवादी थे उन अनजान लोगों के प्रति जो चौबीसों घण्टे बचाने के कार्य में लगे रहते थे और जिन्होंने अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाई। 

   यदि यह आपके साथ होता तो आपको कैसा अनुभव होता? क्या आप कभी किसी जोखिम से बचाए गए हैं?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को, जिन्होंने व्यक्तिगत रीति से प्रभु यीशु को जाना और जीवन समर्पण किया था तथा जिनके जीवन उनके इस विश्वास को दिखाते थे, लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने पहले तो उन्हें आशवासन दिया कि वह निरंतर उन्हें प्रार्थना में स्मरण रखता है कि वे परमेश्वर की सिद्ध और भली इच्छा को जानने वाले और परमेश्वर को प्रसन्न करने वाले बन सकें; तत्पश्चात पौलुस उन्हें स्मरण दिलाता है कि परमेश्वर ने उनके लिए क्या किया है: "उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया। जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है" (कुलुस्सियों 1:13-14)।

   मसीह यीशु में हम पाप और पाप के श्राप तथा दण्ड से बचाए जाते हैं। उसी ने अपने आप को हमारे लिए बलिदान कर दिया जिससे वह हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर, अपनी धार्मिकता हमे दे सके। उसी में हमें मोक्ष या उद्धार और परमेश्वर की सन्तान होने का दर्जा तथा स्वर्ग में स्थान मिलता है। मसीह यीशु ही है जो संसार के हर व्यक्ति को पाप की मृत्यु से उद्धार के अनन्त जीवन में प्रवेश देता है, अन्धकार की शक्तियों से बचाकर निर्मल ज्योति में निवास देता है।

   पाप के प्रभाव तथा अंजाम से बचाए जाने और परमेश्वर के इस अनुग्रह तथा कृपा का हमारे जीवन में क्या स्थान एवं महत्व है, हमारे लिए यह एक गहन विचार का तथा परमेश्वर के प्रति निरंतर धन्यवादी होने का विषय होना चाहिए। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो पाप से बचाए गए हैं वे ही दूसरों को भी पाप से बचाने की लालसा रखते हैं।

परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। - इफिसियों 2:4-6

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:3-18
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं।
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो।
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो।
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है।
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है।
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया।
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ।
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको।
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।
Colossians 1:13 उसी ने हमें अन्धकार के वश से छुड़ाकर अपने प्रिय पुत्र के राज्य में प्रवेश कराया।
Colossians 1:14 जिस में हमें छुटकारा अर्थात पापों की क्षमा प्राप्त होती है।
Colossians 1:15 वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप और सारी सृष्‍टि में पहिलौठा है।
Colossians 1:16 क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं।
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं।
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13 
  • प्रेरितों 4:23-37


मंगलवार, 18 जून 2013

केंद्र बिन्दु

   मुझे गोल्फ खेलना अच्छा लगता है, इसलिए कभी कभी मैं कुछ ऐसे वीडियो देखता हूँ जो इस खेल की बारीकियों और इसे खेलने के बारे में सिखाते हैं। लेकिन एक वीडियो से मैं बहुत निराश हुआ क्योंकि सिखाने वाले ने गोल्फ के एक बिन्दु को समझाने के लिए 8 क्रम और हर क्रम के नीचे और दर्जन भर उप-क्रम बताए। यह सब समझने में बहुत कठिन और अनुपयोगी था। यद्यपि मैं गोल्फ का कोई कोई बड़ा खिलाड़ी नहीं हूँ, फिर भी सालों से खलने के अनुभव ने मुझे यह सिखाया है कि खेलते समय जितने अधिक विचार आपके दिमाग़ में चल रहे होंगे, आपकी सफलता की संभावना उतनी ही कम होगी। अच्छे खेल के लिए आपको अपने विचारों को सीमित एवं सरल तथा ध्यान को एक ही बात पर केंद्रित रखना चाहिए कि किस प्रकार गोल्फ के बल्ले और गेंद में सबसे अधिक कारगर संपर्क बनाया जाए। उस प्रशिक्षक द्वारा दिए गए इतने अधिक विचार ध्यान को केंद्रित रखने में बाधा थे।

   जैसे गोल्फ में, वैसे ही जीवन में इसी प्रकार से केंद्रित रहना सफलता के लिए अनिवार्य है। यही बात मसीही विश्वास और मसीही जीवन में भी पाई जाती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इस बारे में लिखा है (फिलिप्पियों 3)। बजाए इसके कि वह अनेक बातों पर ध्यान करता रहे, पौलुस ने सबसे महत्वपूरण एक ही बात पर अपना ध्यान केंद्रित रखा: "हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ। निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है" (फिलिप्पियों 3:13-14)।

   उसके जीवन की सफलता और उन्नति का यही राज़ था - "केवल यह एक काम करता हूं" - केंद्रित विचार। ध्यान इधर-उधर खींचने और भंग करने के अनेक आकर्षणों तथा विधियों से भरे इस संसार में एक मसीही विश्वासी के लिए अपने ध्यान को अपने उद्धारकर्ता मसीह यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने से भला और कुछ नहीं है। लेकिन यह तब ही हो सकता है जब मसीह यीशु आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण और मूल्यवान हो। जब ऐसा होगा तब सांसारिक प्रलोभन और विचार नहीं वरन मसीह यीशु का जीवन और शिक्षाएं आपका मार्गदर्शक तथा उद्देश्य होंगी और परमेश्वर की आशीष आपके जीवन में बनी रहेगी। 

   क्या आज मसीह यीशु आपके जीवन तथा ध्यान का केंद्र बिन्दु है? - बिल क्राउडर


जब हम मसीह यीशु पर अपने ध्यान को बनाए रखते हैं तब ही हम उसके लिए सबसे प्रभावशाली होते हैं।

क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। - 1 कुरिन्थियों 9:24 

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:8-16
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं।
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है।
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं।
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11 
  • प्रेरितों 4:1-22