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गुरुवार, 5 दिसंबर 2013

प्रेम से परिपूर्ण


   मेरे एक मित्र ने अपनी दादी को अपने जीवन में सबसे प्रभावी व्यक्तियों में से एक बताया। अपनी दादी से मिले भरपूर प्रेम और देखभाल के कारण वह उनके एक चित्र को सदा अपने कार्यस्थल की मेज़ पर रखे रहता है, जिससे वह सदा उनके निस्वार्थ प्रेम को स्मरण रखने पाए। उसका कहना है कि उन्होंने ही उसे प्रेम का अर्थ और प्रेम करना सिखाया है।

   सभी को ऐसा ही मानवीय प्रेम पाने का सौभाग्य चाहे ना मिला हो, लेकिन प्रभु यीशु मसीह में होकर संसार का प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर के प्रेम की परिपूर्णता को अनुभव कर सकता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित यूहन्ना द्वारा लिखित प्रथम पत्री के चौथे अध्याय में प्रेम शब्द 27 बार आया है, तथा प्रभु यीशु में होकर हमें प्राप्त होने वाले परमेश्वर के प्रेम को हमारे परमेश्वर तथा एक दुसरे के प्रति प्रेम का उदगम स्त्रोत बताया गया है: "प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा" (पद 10); " और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है" (पद 16); "हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया" (पद 19)।

   परमेश्वर का प्रेम बूँद-बूँद करके टपकने वाले नल या हमारे स्वयं खोदे जाने वाले किसी कुएँ के समान नहीं है जिस में से प्रेम-जल पाने के लिए हमें परिश्रम करना पड़े। वह तो एक बहती हुई नदी है जो उसके हृदय से निकलकर हमारे मनों में प्रवाहित होती रहती है और जिससे हम जब चाहें और जितना चाहें उतना शांतिदायक जीवन जल प्राप्त कर सकते हैं। हमारी पारिवारिक पृष्ठभूमि या जीवन के अनुभव चाहे जैसे भी रहे हों - चाहे हमने दूसरों से प्रेम पाने का अनुभव किया हो अथवा नहीं, लेकिन परमेश्वर से हमें सदा ही प्रेम मिलता रह सकता है। परमेश्वर के प्रेम के इस कभी ना खत्म होने वाले सोते से ना केवल हम तृप्त रह सकते हैं, वरन दूसरों को भी उसके पास इस तृप्ति के लिए ला सकते हैं।

   प्रभु यीशु में होकर संसार का प्रत्येक जन परमेश्वर के प्रेम से परिपूर्ण रह सकता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर के प्रेम से बढ़कर सामर्थी और कुछ नहीं है।

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:19 

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-21
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। 
1 John 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1 John 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 1-2 
  • 1 यूहन्ना 4


बुधवार, 4 दिसंबर 2013

शांति


   सृष्टि की शांति जाती रही जब हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा ने परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता का पाप कर के, अदन कि वाटिका में वह वर्जित फल खा लिया। यह पाप करते ही ना केवल उन की परमेश्वर से सहभागिता जाती रही, वरन उनकी परस्पर शांति भी जाती रही और वे आपस में भी एक दुसरे पर दोषारोपण करने लगे (उत्पत्ति 3:12-13)। परमेश्वर के साथ तथा परस्पर संबंधों में पाप के कारण आने वाली यही अशांति तब से लेकर आज तक संसार और मानवजाति के लिए दुख का कारण बनी हुई है। हम अपने द्वारा लिए गलत निर्णयों तथा किए गए गलत चुनावों के लिए दूसरों को दोषी ठहराने का प्रयास करते रहते हैं, और जब कोई हमसे इस प्रयास में सहमत नहीं होता तो हम क्रोधित होने लगते हैं। दूसरों पर दोषारोपण की इस प्रवृति के कारण परिवारों, चर्च मण्डली, समाज और राष्ट्रों में भी तनाव तथा कलह व्याप्त है। हम शांति स्थापित कर नहीं पा रहे हैं क्योंकि हमारे मन दूसरों को दोषी ठहराने में लगे रहते हैं और संसार बिखरता जा रहा है, खंडित होता जा रहा है।

   क्रिसमस शांति का मौसम है। परमेश्वर के वचन बाइबल का पुराने नियम का खण्ड हमें बताता है कि कैसे परमेश्वर ने शांति के राजकुमार (यशायाह 9:6), प्रभु यीशु के संसार में आगमन के लिए तैयारी करी। प्रभु यीशु संसार में आए जिससे उसके क्रूस पर बहाए गए लहु के द्वारा (कुल्लुसियों 1:20) पाप और दोषारोपण का यह कुचक्र तोड़ा जा सके और परमेश्वर के साथ तथा परस्पर मानव संबंधों में शांति स्थापित हो सके। हमारे पापों और कटु व्यवहार के कारण संसार में व्याप्त असंतोष तथा अशांति के लिए हमें दोषी ठहराने की बजाए, प्रभु यीशु ने सारे संसार के लोगों के सारे पापों का दोष अपने ऊपर ले लिया, उनका दण्ड सह लिया, और अपने बलिदान तथा पुनर्त्थान के द्वारा पापों के दोष तथा दण्ड से बच निकलने का मार्ग मानव जाति को बना के दे दिया। अब जो कोई भी प्रभु यीशु से अपने पापों की क्षमा मांग कर अपना जीवन उसे समर्पित कर देता है, वह उसका अनुयायी तथा परमेश्वर की सनतान बन जाता है (यूहन्ना 1:12-13)।

   जो परमेश्वर से पापों की क्षमा की यह अद्भुत शांति पा लेता है, फिर स्वतः ही उसके अन्दर दूसरों को भी इस अद्भुत शांति को पहुँचाने की लालसा जागृत हो जाती है। जो परमेश्वर के साथ शांति से जीवन व्यतीत कर पाता है, वह दूसरों के साथ भी शांति से रहने पाता है। जो अपने पापों के दोष से मुक्त हो जाने के अनुभव को जानता है वह दूसरों को भी दोषी ठहराने से दूर रहता है।

   आज परमेश्वर का द्वार संसार के प्रत्येक जन के लिए यह शांति तथा मुक्ति पा लेने के लिए खुला है। क्या आप ने इस अवसर का लाभ उठाया है? यही समय है अपने लिए शांति पा लेने और दूसरों को शांति तक पहुँचा देने का; इसे व्यर्थ ना जाने दीजिए। - जूली ऐकैरमैन लिंक


प्रभु यीशु ने हमारी अशांति अपने ऊपर ले ली जिससे कि हम उस की शांति अपने जीवनों में प्राप्त कर सकें।

क्योंकि हमारे लिये एक बालक उत्पन्न हुआ, हमें एक पुत्र दिया गया है; और प्रभुता उसके कांधे पर होगी, और उसका नाम अद्‌भुत, युक्ति करने वाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनन्तकाल का पिता, और शान्ति का राजकुमार रखा जाएगा। - यशायाह 9:6

बाइबल पाठ: कुल्लुसियों 1:17-29
Colossians 1:17 और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। 
Colossians 1:18 और वही देह, अर्थात कलीसिया का सिर है; वही आदि है और मरे हुओं में से जी उठने वालों में पहिलौठा कि सब बातों में वही प्रधान ठहरे। 
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।
Colossians 1:24 अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं। 
Colossians 1:25 जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं। 
Colossians 1:26 अर्थात उस भेद को जो समयों और पीढिय़ों से गुप्‍त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। 
Colossians 1:27 जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है। 
Colossians 1:28 जिस का प्रचार कर के हम हर एक मनुष्य को जता देते हैं और सारे ज्ञान से हर एक मनुष्य को सिखाते हैं, कि हम हर एक व्यक्ति को मसीह में सिद्ध कर के उपस्थित करें। 
Colossians 1:29 और इसी के लिये मैं उस की उस शक्ति के अनुसार जो मुझ में सामर्थ के साथ प्रभाव डालती है तन मन लगाकर परिश्रम भी करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 47-48 
  • 1 यूहन्ना 3


मंगलवार, 3 दिसंबर 2013

रेत के किले


   जब हमारे बच्चे छोटे थे तब मैं अपने परिवार के साथ फ्लोरिडा के समुद्र तट पर छुट्टियाँ बिताने जाया करता था। यह हमारे लिए एक बहुत अच्छा समय होता जब हम अपने प्रांत मिशिगन की ठंड से निकल कर कुछ समय के लिए एक गर्म इलाके में समुद्र के किनारे आनन्द कर सकते थे। वहाँ जाकर समुद्र तट पर धूप में लेटकर कोई पुस्तक पढ़ना मुझे सबसे प्रीय लगता था, लेकिन मेरे बच्चों को कुछ और ही पसन्द था, वे समुद्र तट की बालु के साथ रेत के किले और घरौंदे बनाना चाहते थे और इसमें मुझ से सहायता चाहते थे। मुझे अपनी पुस्तक को छोड़कर बड़े अनमने भाव से उनकी सहायता के लिए उठना पड़ता तो था, लेकिन कुछ ही समय में मैं उनके साथ रेत के किले बनाने में तल्लीन हो जाता था और मुझे पता ही नहीं चलता था कि कैसे यह करते हुए घंटों बीत जाते थे, और मैं बड़ी मेहनत से बड़े अच्छे दिखने वाले रेत के किले बनाता रहता था, बिना इस बात का विचार करे कि मेरी यह मेहनत व्यर्थ है, क्योंकि किसी भी समय कोई बड़ी लहर आएगी और उन रेत के किलों को धव्स्त कर के बहा कर ले जाएगी, मेरी सारी मेहनत पर पानी फिर जाएगा।

   जीवन में हम यही गलती कई बार करते हैं - बहुत सा समय और बहुत मेहनत व्यर्थ कार्यों में गंवा देते हैं, अपने ही इरादों के सांसारिक ’रेत के किले’ बनाते रहते हैं, अपनी करनी पर और उपलब्धियों पर घमण्ड करते हैं, बिना यह विचारे कि यह सब कितना व्यर्थ है, हमारे ये किले कभी भी ध्वस्त हो सकते हैं, हमारी सारी मेहनत बेकार हो सकती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चुनौती दी कि वे सांसारिक संपत्ति के प्रति उदासीन हों और अपनी सारी संपत्ति बेचकर गरीबों में दान कर दें; प्रभु ने उनसे कहा: "क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा" (लूका 12:34)। प्रभु यीशु के कहने का तात्पर्य था कि हम जिस रीति से अपने समय और संसाधनों का प्रयोग करते हैं वह हमारे अनन्त काल के दृष्टिकोण के प्रति बहुत कुछ बयान कर देता है। यदि हम प्रभु यीशु के अनुयायी होने के बाद भी नाशमान सांसारिक बातों को अपने जीवनों में प्राथमिकता देते हैं, सांसारिक संपत्ति और उपलब्धियों को पाने के लिए ही अपने समय को बिताते हैं, तो यह दिखाता है कि संभवतः हम प्रभु यीशु के प्रति सच्चे मन से समर्पित नहीं हैं।

   एक पुराने मसीही भजन की एक पंक्ति है, "केवल एक ही जीवन, वह भी शीघ्र समाप्त हो जाएगा; केवल जो मसीह के लिए किया वही शेष रह जाएगा!" थोड़ा रुक कर विचार कीजिए, आज आपने मसीह यीशु और उस के स्वर्गीय राज्य की बढोतरी के लिए क्या किया है? आप के जीवन की प्राथमिकताएं क्या हैं? अपना जीवन किस के लिए व्यतीत कर रहे हैं; कहीं रेत के किले बनाने के लिए तो नहीं? - जो स्टोवैल


परमेश्वर चाहता है कि आप उसके द्वारा आपको दी गई योग्यताओं और संसाधनों का प्रयोग उसके स्वर्गीय 
राज्य की बढ़ोतरी के लिए करें ना कि अपनी सांसारिक स्वार्थ-सिद्धी के लिए।

परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। - मत्ती 6:20

बाइबल पाठ: लूका 12:22-34
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे। 
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है। 
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है। 
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? 
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? 
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा? 
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो। 
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है। 
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे। 
Luke 12:33 अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता। 
Luke 12:34 क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 45-46 
  • 1 यूहन्ना 2


सोमवार, 2 दिसंबर 2013

सदा तत्पर


   मेरी बहन के घर में कुछ किराएदार रहते हैं। एक रात एक किराएदार के यहाँ चोर घुसने का प्रयास करने लगे। उस किराएदार ने पुलिस को फोन कर के बताया कि चोर उसके घर में घुसने का प्रयास कर रहे हैं और उसे तुरंत सहायता की आवश्यकता है। दूसरी ओर से फोन का उत्तर देने वाले व्यक्ति की प्रतिक्रिया सुन कर वह किराएदार दंग रह गई; पुलिस की ओर से फोन सुनने वाले ने कहा, "हम अभी बहुत व्यसत हैं; कृपया प्रातः पुनः फोन करें!" यह प्रत्युत्तर वास्तव में बहुत परेशान करने वाला था। उस किराएदार ने पुलिस से सहायता माँगकर सही कार्य किया था लेकिन किसी कारणवश उसकी सहायता की पुकार को अनसुना कर दिया गया। उन से, जिन्हें तुरंत और हर समय सहायता देने के लिए तैयार और तत्पर मिलना चाहिए, इस प्रकार का उत्तर पाना वास्तव में बहुत निराशाजनक होता है।

   लेकिन इस प्रकार का उत्तर और सहायता की पुकार के प्रति उदासीनता परमेश्वर के साथ कभी देखने को नहीं मिलती। चाहे हमें यह लगे कि परमेश्वर हमारी सुन नहीं रहा है, लेकिन वह सदा सुनता है। वह हमारी चिंता करता है, देखभाल करता है और हमारी पुकार का उत्तर अवश्य देता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करता है कि हमारा परमेश्वर पिता हमारे हृदय की चिन्ताओं से अवगत रहता है और उनके समाधान के मार्ग देता है: "जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है" (भजन 145:18)। जब कभी हम उसे पुकारते हैं, तो उससे कभी हमें उदासीनता का प्रत्युत्तर नहीं मिलता।

   हमारी सहायता की पुकार सुनकर वह अपने आप को हमसे दूर नहीं कर लेता, वरन हमारा परमेश्वर पिता हमारे और समीप आ जाता है, हमें शांति और सांत्वना देता है। वह अपने बच्चों की प्रार्थनाओं का उत्तर देने के लिए कभी ’अति-व्यस्त’ नहीं होता - वह सुनते ही उत्तर देता है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर की प्रार्थना लाइन पर ’व्यस्त’ होने का संकेत आपको कभी नहीं मिलेगा।

यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है। - भजन 34:18

बाइबल पाठ: भजन 145:8-21
Psalms 145:8 यहोवा अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से क्रोध करने वाला और अति करूणामय है। 
Psalms 145:9 यहोवा सभों के लिये भला है, और उसकी दया उसकी सारी सृष्टि पर है।
Psalms 145:10 हे यहोवा, तेरी सारी सृष्टि तेरा धन्यवाद करेगी, और तेरे भक्त लोग तुझे धन्य कहा करेंगे! 
Psalms 145:11 वे तेरे राज्य की महिमा की चर्चा करेंगे, और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे; 
Psalms 145:12 कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें। 
Psalms 145:13 तेरा राज्य युग युग का और तेरी प्रभुता सब पीढ़ियों तक बनी रहेगी।
Psalms 145:14 यहोवा सब गिरते हुओं को संभालता है, और सब झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है। 
Psalms 145:15 सभों की आंखें तेरी ओर लगी रहती हैं, और तू उन को आहार समय पर देता है। 
Psalms 145:16 तू अपनी मुट्ठी खोल कर, सब प्राणियों को आहार से तृप्त करता है। 
Psalms 145:17 यहोवा अपनी सब गति में धर्मी और अपने सब कामों में करूणामय है। 
Psalms 145:18 जितने यहोवा को पुकारते हैं, अर्थात जितने उसको सच्चाई से पुकारते हें; उन सभों के वह निकट रहता है। 
Psalms 145:19 वह अपने डरवैयों की इच्छा पूरी करता है, ओर उनकी दोहाई सुन कर उनका उद्धार करता है। 
Psalms 145:20 यहोवा अपने सब प्रेमियों की तो रक्षा करता, परन्तु सब दुष्टों को सत्यानाश करता है।
Psalms 145:21 मैं यहोवा की स्तुति करूंगा, और सारे प्राणी उसके पवित्र नाम को सदा सर्वदा धन्य कहते रहें।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 42-44 
  • 1 यूहन्ना 1


रविवार, 1 दिसंबर 2013

आगमन विषय


   मैं मानती हूँ कि परमेश्वर के वचन बाइबल का हर भाग परस्पर संबंधित है और समस्त पवित्र-शास्त्र प्रासंगिक तथा महत्वपूर्ण है। लेकिन फिर भी मुझे अचरज हुआ जब नवंबर माह के मेरे बाइबल पाठ में पतरस प्रेरित द्वारा लिखित प्रथम पत्री में से मैंने पाया कि प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित चारों विषयों के बारे में पतरस ने एक ही पत्री में एक साथ ही लिखा है। दिसंबर माह से लोग प्रभु यीशु के पहले आगमन - उस पहले क्रिसमस कि यादें ताज़ा करने की तैयारी में लग जाते हैं और साथ ही उसके दूसरे आगमन की भविष्यवाणी को भी स्मरण करते हैं। आगमन के स्मरण का यह समय होता है परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में होकर संसार के लिए भेजी गई आशा, आनन्द, प्रेम और शांति पर ध्यान करना।

   प्रेरित पतरस की प्रथम पत्री में हम प्रभु यीशु के आगमन से संबंधित इन चारों विषयों को भी पाते हैं
  • आशा: स्वर्ग में हम मसीही विश्वासियों की अजर मीरास सुरक्षित है, जो मसीह यीशु के पुनरुत्थान के द्वारा है (1 पतरस 1:3-5)।
  • आनन्द: मसीही विश्वासियों के पास एक अवर्णनीय आनन्द है, चाहे उनका विश्वास क्लेषों द्वारा परखा भी जाए, लेकिन उस विश्वास का अन्त आत्माओं का उद्धार है (1 पतरस 1:6-9) जो अन्य किसी रीति से कतई संभव नहीं है, और जिस उद्धार का प्रतिफल यह अवर्णनीय आनन्द है।
  • प्रेम: मसीही विश्वासी एक शुद्ध हृदय से सभी लोगों के साथ प्रेम कर सकते हैं, क्योंकि उन्होंने परमेश्वर के वचन पर विश्वास द्वारा एक नया जन्म पाया है और परमेश्वर का यह वचन अब उनमें बसा रहता है, उनके स्वभाव और दृष्टिकोण को सांसारिक से परिवर्तित कर के स्वर्गीय बना देता है (1 पतरस 1:22-23)।
  • शांति: क्योंकि परमेश्वर अपने लोगों पर ध्यान बनाए रखता है, उनकी प्रार्थनाएं सुनता है, इसलिए मसीही विश्वासियों के जीवन में परमेश्वर की शांति बनी रहती है (1 पतरस 3:10-12)।

   मसीह यीशु के प्रथम आगमन के कारण, जितने उस पर विश्वास लाते हैं, वे सब उसके दुसरे आगमन तक आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि आप आशा, आनन्द, प्रेम और शांति के खोजी हैं तो प्रभु यीशु के पास आईए।

इस कारण अपनी अपनी बुद्धि की कमर बान्‍धकर, और सचेत रहकर उस अनुग्रह की पूरी आशा रखो, जो यीशु मसीह के प्रगट होने के समय तुम्हें मिलने वाला है। - 1 पतरस 1:13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:3-9, 18-23; 3:10-12
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। 
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये। 
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है। 
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो। 
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं, अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे। 
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है। 
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो। 
1 Peter 1:18 क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ। 
1 Peter 1:19 पर निर्दोष और निष्‍कलंक मेम्ने अर्थात मसीह के बहुमूल्य लोहू के द्वारा हुआ। 
1 Peter 1:20 उसका ज्ञान तो जगत की उत्‍पत्ति के पहिले ही से जाना गया था, पर अब इस अन्‍तिम युग में तुम्हारे लिये प्रगट हुआ। 
1 Peter 1:21 जो उसके द्वारा उस परमेश्वर पर विश्वास करते हो, जिसने उसे मरे हुओं में से जिलाया, और महिमा दी; कि तुम्हारा विश्वास और आशा परमेश्वर पर हो। 
1 Peter 1:22 सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो। 
1 Peter 1:23 क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरने वाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। 
1 Peter 3:8 निदान, सब के सब एक मन और कृपामय और भाईचारे की प्रीति रखने वाले, और करूणामय, और नम्र बनो। 
1 Peter 3:9 बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। 
1 Peter 3:10 क्योंकि जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्‍छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे। 
1 Peter 3:11 वह बुराई का साथ छोड़े, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़े, और उस के यत्‍न में रहे। 
1 Peter 3:12 क्योंकि प्रभु की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान उन की बिनती की ओर लगे रहते हैं, परन्तु प्रभु बुराई करने वालों के विमुख रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 40-41 
  • 2 पतरस 3


शनिवार, 30 नवंबर 2013

कार्य के परिणाम


   नवम्बर 24, 1971 को एक व्यक्ति, जिसे आज डी. बी. कूपर के नाम से जाना जाता है, ने एक वायुयान का अपहरण किया और धमकी दी कि यदि उसे 200,000 अमिरीकी डॉलर नहीं दिए गए तो वह वायुयान को उड़ा देगा। इस रकम को प्राप्त करने के लिए वायुयान को एक हवाई अड्डे पर उतारा गया, और फिर रकम लेकर कूपर ने पुनः वायुयान को ऊपर हवा में ले जाने को कहा। वायुयान के ऊपर जाने के बाद उसने पिछले दरवाज़े को खुलवाया और रकम लेकर पैराशूट से रात्रि के अन्धकार में कूद गया। इसके बाद उसका कभी कोई अता-पता नहीं चला, वह पकड़ा नहीं गया और आज तक यह गुत्थी अनसुल्झी ही है। लेकिन उस व्यक्ति के एक कार्य के परिणाम हम सब को झेलने पड़ रहे हैं, क्योंकि उस के इस कार्य के बाद हवाई अड्डों पर लोगों पर विश्वास करने का दौर समाप्त हो गया, उसके स्थान पर अविश्वास तथा भय आ गया और सुरक्षा बढ़ा दी गई, जिसके कारण आज हम सब को यात्रा आरंभ होने से लंबा समय पहले आकर सुरक्षा जाँच आदि करवाना होता है और अनेक प्रकार कि असुविधा का सामना करना पड़ता है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल भी दो ऐसे कार्यों का विवरण देती है जिनके परिणामों ने संसार को उपरोक्त घटना से भी कहीं अधिक प्रभावी रीति से बदल डाला। पहली घटना थी हमारे आदि माता-पिता, आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की अवज्ञा का निर्णय जिसके कारण पाप और मृत्यु ने इस संसार में प्रवेश किया, "इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया" (रोमियों 5:12)। दूसरी घटना थी प्रभु यीशु द्वारा इस पाप के प्रभाव के समाधान के लिए अपना जीवन बलिदान करना और फिर मृतकों में से जी उठना, "इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ" (रोमियों 5:18)।

   जो प्रभु यीशु ने अपने बलिदान तथा फिर मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा मानव जाति के लिए किया, समस्त संसार के इतिहास में वह अन्य कोई भी, कभी भी, कहीं भी नहीं कर सका है। आज प्रभु यीशु अपने अनुग्रह में होकर समस्त मानव जाति को पापों की क्षमा और अनन्त जीवन का उपहार सेंत-मेंत देने को तैयार है, यदि वे इस उपहार को स्वीकार करने को तैयार हों, "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना 1:12)।

   क्या आपने प्रभु यीशु के कार्य के परिणाम को अपना लिया है? यदि नहीं, तो अभी अवसर है, अपना लीजिए और अनन्त जीवन के भागी हो जाईए। - डेविड माइक्कैसलैंड


आदम की अनाज्ञाकारिता के परिणाम का समाधान क्रूस पर संपन्न मसीह यीशु की आज्ञाकारिता का कार्य है।

पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। - रोमियों 5:15

बाइबल पाठ: रोमियों 5:12-19
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लागों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39 
  • 2 पतरस 2


शुक्रवार, 29 नवंबर 2013

आदर


   मेरे पिताजी हाल ही में 90 वर्ष के हो गए और अब उनकी शारीरिक क्षमताएं कम होती जा रही हैं। उन्हें चलने के लिए वॉकर का सहारा लेना पड़ता है, और अपने भोजन तथा अन्य कार्यों के लिए किसी की सहायता की आवश्यकता पड़ती है। मेरे बड़े भाई स्टीव और उनकी पत्नि जूडी पिताजी के घर के समीप ही रहते थे, इसलिए उन्होंने निर्णय लिया कि वे अब पिताजी के साथ ही उनके घर में रहेंगे और उनकी देखभाल करेंगे।

   मैं भी अपने पिताजी की देखभाल में हाथ बंटाना चाहता हूँ, लेकिन मैं अपने परिवार के साथ देश के दूसरे छोर पर रहता हूँ, इसलिए मैंने और मेरी पत्नि ने कुछ समय का अवकाश लिया और पिताजी के पास आकर उनके साथ रहने लगे, तथा स्टीव और उसकी पत्नि जूडी को भी कुछ समय के लिए कहीं छुट्टी पर जाने को कहा। हमने पिताजी के साथ अच्छा वक्त बिताया और चाहे थोड़े ही दिन के लिए सही, लेकिन पिताजी की देखभाल और स्टीव तथा जूडी की सहायता करना हमें अच्छा लगा।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि, "अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)" (इफिसियों 6:2)। इस पद पर टिप्पणी करते हुए एक टीकाकार ने लिखा, किसी का आदर करने से तात्पर्य है कि, "उसके साथ सम्मान, आदर, श्रद्धा, दयालुता, शिष्टाचार और आज्ञाकारिता के साथ ऐसा पेश आना जो उसके जीवन की अवस्था के अनुसार है।"

   छोटे बच्चों के लिए इसका अर्थ है, माता-पिता के आज्ञाकारी होना; युवकों के लिए यह दिखाता है कि माता-पिता का आदर करें चाहे उन्हें यह लगे कि वे माता-पिता से अधिक जानते हैं। जवान लोगों के लिए यह माता-पिता को अपने जीवन का अंग बनाए रखने की बुलाहट है और अधेड़ या उससे अधिक उम्र वालों के लिए यह इस बात का ध्यान करने की बात है कि माता-पिता की उम्र भी बढ़ रही है, तथा स्वास्थ्य घट रहा है और उन्हें सहायता तथा देखभाल की आवश्यकता है।

   विचार कीजिए, क्या आप अपनी व्यस्त दिनचर्या में अपने माता-पिता को यथोचित समय तथा आदर देते हैं? - डेनिस फिशर


माता-पिता का आदर करने के लिए उम्र कोई सीमा नहीं है।

शापित हो वह जो अपने पिता वा माता को तुच्छ जाने। तब सब लोग कहें, आमीन। - व्यवस्थाविवरण 27:16

बाइबल पाठ: निर्गमन 20:1-17
Exodus 20:1 तब परमेश्वर ने ये सब वचन कहे, 
Exodus 20:2 कि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा हूं, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
Exodus 20:3 तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना।
Exodus 20:4 तू अपने लिये कोई मूर्ति खोदकर न बनाना, न किसी की प्रतिमा बनाना, जो आकाश में, वा पृथ्वी पर, वा पृथ्वी के जल में है। 
Exodus 20:5 तू उन को दण्डवत न करना, और न उनकी उपासना करना; क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर यहोवा जलन रखने वाला ईश्वर हूं, और जो मुझ से बैर रखते है, उनके बेटों, पोतों, और परपोतों को भी पितरों का दण्ड दिया करता हूं, 
Exodus 20:6 और जो मुझ से प्रेम रखते और मेरी आज्ञाओं को मानते हैं, उन हजारों पर करूणा किया करता हूं।
Exodus 20:7 तू अपने परमेश्वर का नाम व्यर्थ न लेना; क्योंकि जो यहोवा का नाम व्यर्थ ले वह उसको निर्दोष न ठहराएगा।
Exodus 20:8 तू विश्रामदिन को पवित्र मानने के लिये स्मरण रखना। 
Exodus 20:9 छ: दिन तो तू परिश्रम कर के अपना सब काम काज करना; 
Exodus 20:10 परन्तु सातवां दिन तेरे परमेश्वर यहोवा के लिये विश्रामदिन है। उस में न तो तू किसी भांति का काम काज करना, और न तेरा बेटा, न तेरी बेटी, न तेरा दास, न तेरी दासी, न तेरे पशु, न कोई परदेशी जो तेरे फाटकों के भीतर हो। 
Exodus 20:11 क्योंकि छ: दिन में यहोवा ने आकाश, और पृथ्वी, और समुद्र, और जो कुछ उन में है, सब को बनाया, और सातवें दिन विश्राम किया; इस कारण यहोवा ने विश्रामदिन को आशीष दी और उसको पवित्र ठहराया।
Exodus 20:12 तू अपने पिता और अपनी माता का आदर करना, जिस से जो देश तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देता है उस में तू बहुत दिन तक रहने पाए।
Exodus 20:13 तू खून न करना।
Exodus 20:14 तू व्यभिचार न करना।
Exodus 20:15 तू चोरी न करना।
Exodus 20:16 तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना।
Exodus 20:17 तू किसी के घर का लालच न करना; न तो किसी की स्त्री का लालच करना, और न किसी के दास-दासी, वा बैल गदहे का, न किसी की किसी वस्तु का लालच करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36 
  • 2 पतरस 1