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बुधवार, 28 जनवरी 2015

बीते दिन



   कई बार हमारे विचार हमारे बीते हुए समय की ओर चले जाते हैं और हमारे अन्दर एक तीव्र लालसा उठती है उस बीते हुए समय में लौट जाने की क्योंकि हमें लगता है कि वे दिन और स्थान वर्तमान के बजाए अधिक अच्छे थे। लेकिन कुछ लोगों के लिए बीते दिनों की यादें केवल कड़ुवाहट भरी होती हैं। रात के पहरों में वे अपनी असफलताओं पर, अपने भ्रम तथा भ्रान्तियों पर विचार करते रहते हैं और कसमसाते रहते हैं यह सोचकर कि जीवन ने उनके साथ क्रूर बरताव ही किया है।

   मैंने एक वृद्ध महिला की कहानी सुनी थी जो हाथ अपनी गोद में रखे हुए, आँखें किसी दूर स्थान पर लगाए हुए घंटों अपनी कुर्सी शाँत पर बैठी रहती थी। एक दिन उसकी बेटी ने उससे पूछा, "माँ, आप वहाँ कुर्सी पर खामोश बैठी क्या सोचती रहती हो?" उस वृद्धा ने मुस्कुराते हुए, और आँखों में एक चमक के साथ हलकी आवाज़ में उत्तर दिया, "यह मेरे और प्रभु यीशु के बीच की बात है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक, राजा दाऊद ने बीते समय को स्मरण करने के बारे में लिखा: "मुझे प्राचीन काल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूं, और तेरे काम को सोचता हूं" (भजन 143:5)। जब हम परमेश्वर पिता के प्रेम और अनुकंपा को स्मरण करते हैं, बीते दिनों में उससे मिली आशीषों के बारे में विचार करते हैं, तो ये वे यादें होती हैं जो हमें और भलाई के लिए प्रोत्साहित करती हैं। वे हमारे अन्दर परमेश्वर की और भी अधिक संगति, उसकी और भी अधिक प्रेम भरी देख-रेख में बने रहने की लालसा को बढ़ा देती हैं। वे यादें हमारे बीते दिनों को प्रभु के साथ की हमारी घनिष्ठता और संगति के आनन्द का स्थान बना देती हैं।

   मेरी यह प्रार्थना है कि हमारे बीते दिनों की यादें और उनका मनन हमें परमेश्वर की और निकटता में लाने वाला बन सके। - डेविड रोपर


प्रभु यीशु के साथ संगति हमारे वर्तमान एवं अनन्त आनन्द की कुँजी है।

मैंने प्राचीन काल के दिनों को, और युग युग के वर्षों को सोचा है। मैं रात के समय अपने गीत को स्मरण करता; और मन में ध्यान करता हूं, और मन में भली भांति विचार करता हूं - भजन 77:5-6

बाइबल पाठ: भजन 143:1-6
Psalms 143:1 हे यहोवा मेरी प्रार्थना सुन; मेरे गिड़गिड़ाने की ओर कान लगा! तू जो सच्चा और धर्मी है, सो मेरी सुन ले, 
Psalms 143:2 और अपने दास से मुकद्दमा न चला! क्योंकि कोई प्राणी तेरी दृष्टि में निर्दोष नहीं ठहर सकता।
Psalms 143:3 शत्रु तो मेरे प्राण का ग्राहक हुआ है; उसने मुझे चूर कर के मिट्टी में मिलाया है, और मुझे ढेर दिन के मरे हुओं के समान अन्धेरे स्थान में डाल दिया है। 
Psalms 143:4 मेरी आत्मा भीतर से व्याकुल हो रही है मेरा मन विकल है।
Psalms 143:5 मुझे प्राचीन काल के दिन स्मरण आते हैं, मैं तेरे सब अद्भुत कामों पर ध्यान करता हूं, और तेरे काम को सोचता हूं। 
Psalms 143:6 मैं तेरी ओर अपने हाथ फैलाए हुए हूं; सूखी भूमि की नाईं मैं तेरा प्यासा हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35




मंगलवार, 27 जनवरी 2015

अगुवे



   सर्दियों के एक अति ठंडे दिन में मुझे परड्यू विश्वविद्यालाय जाना पड़ा। विश्वविद्यालय के परिसर में एक छात्रावास के पास से निकलते समय मुझे दो लड़के दिखाई दिए जो छात्रावास के मार्ग पर जमी हुई बर्फ की मोटी परत को हटाने में लगे हुए थे। यह सोचकर कि वे दोनों प्रथम वर्ष के छात्र होंगे जिन्हें छात्रावास के वरिष्ठ छात्रों ने यह कठिन कार्य करने को कहा है, मैंने उनसे कहा, "जब यहाँ दाखिला लिया था तब किसी ने यह नहीं कहा होगा कि ऐसा भी करना पड़ेगा?" उन में से एक ने सिर उठाकर मेरी ओर देखा और मुस्कुरा कर बोला, "ऐसा नहीं है; हम दोनों ही इस छात्रावास के वरिष्ठ छात्र हैं और इस छात्रावास के छात्रसंघ के पदाधिकारी भी - मैं उपाध्यक्ष हूँ और मेरा यह मित्र अध्यक्ष है।" मैंने उन दोनो को उनकी कठिन मेहनत के लिए धन्यवाद किया और अपने कार्य के लिए आगे बढ़ गया; मुझे उन दोनों ने अपने उदाहरण से याद दिला दिया कि सच्चे अगुवे दूसरों के सेवक होते हैं।

   जब प्रभु यीशु के दो चेलों ने प्रभु यीशु से चाहा कि आने वाले उसके स्वर्गीय राज्य में वे दोनों उसके दाहिने और बांए ओर बैठने का आदरणीय स्थान पाएं; तब प्रभु ने अपने बारहों चेलों को पास बुला कर उन सभी से कहा, "पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने" (मरकुस 10:43-44)। यदि किसी के मन में इस बारे में फिर भी कोई भ्रम रह गया हो, तो उस भ्रम को दूर करने के उद्देश्य से प्रभु यीशु ने आगे उनसे अपने बारे में कहा, "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:45)।

   परमेश्वर के भय में चलने और कार्य करने वाले सच्चे अगुवे का चिन्ह है कि वह सत्ता-अधिकार तथा विशेषाधिकारों के लिए परन्तु नम्रता से सेवा करने के लिए अगुवे होने की ज़िम्मेदारी ग्रहण करता है और फिर उसे वैसे ही निभाता भी है। प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर सामर्थ देता है कि वे प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करते हुए उसके गुणों को अपने जीवन से दिखाने पाएं; परमेश्वर द्वारा प्रदान की गई इस सामर्थ से अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वाह में प्रभु यीशु को महिमा देने वाले बनें। - डेविड मैक्कैसलैंड


एक योग्य अगुवा वह ही है जो सेवा करना सीख चुका है।

क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं। - 2 कुरिन्थियों 4:5 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



सोमवार, 26 जनवरी 2015

कथावाचक



   बचपन में जब मेरी माँ मुझे किताब से कहानी पढ़कर सुनाती थीं तो मुझे बहुत अच्छा लगता था; मैं उनकी गोद में बैठकर उनके प्रत्येक शब्द को बड़े ध्यान से सुनता था। वो पढ़कर सुनाती थीं और मैं किताब के हर एक पृष्ठ पर बने चित्रों को बारीकी से देखता रहता था, और बड़ी उत्सुकता से अगले पृष्ठ पर जो था उसकी प्रतीक्षा करता था।

   क्या आपने कभी इस बात के बारे में सोचा है कि आप का जीवन भी एक कहानी सुनाता है? प्रत्येक परिस्थिति में - अच्छी, बुरी या सामान्य - हमारे चारों ओर के लोग हमें देख रहे हैं और जो कहानी हम अपने जीवनों से कह रहे हैं उसे सुन रहे हैं। हमारी यह कहानी ना केवल हमारे शब्दों से वरन हमारे रवैये और जीवन की परिस्थितियों के प्रति हमारी प्रतिक्रीया के द्वारा भी लोगों के सामने बयान होती है। हमारे बच्चे और नाती-पोते, हमारे जीवन साथी, हमारे पड़ौसी, हमारे सहकर्मी या सहपाठी, सभी हमारे द्वारा दिखाई जाने वाली कहानी को देखते हैं और हमारे बारे में अपनी अपनी राय बनाते हैं।

   प्रेरित पौलुस हमें स्मरण दिलाता है कि मसीही विश्वासी होने के नाते, हमारे जीवन पत्रियों के समान हैं जिन्हें लोग पढ़ते हैं, "हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है। यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है" (2 कुरिन्थियों 3:2-3)।

   हमारे चारों ओर के लोग हमारे जीवनों से कैसी कहानियाँ पढ़ रहे हैं? क्षमा की? करुणा की? उदारता की? धैर्य की? प्रेम की? या फिर कहीं कोई ऐसी कहानी भी है जो हमारे मसीही विश्वास में होने के दावे से मेल नहीं खाती?

   यदि आपने प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार को और उसके अनुग्रह को पाया है; यदि परमेश्वर का पवित्र-आत्मा आपके अन्दर निवास करता है; यदि आप परमेश्वर की सेवकाई किसी प्रतिफल के लिए नहीं वरन उसके प्रति प्रेम से वशिभूत होकर करते हैं, तो आप एक ऐसे कथावाचक हैं जिसकी पाप के कारण नाश की ओर बढ़ते इस संसार को बहुत आवश्यकता है। प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा आपको सेंत-मेंत में मिले उद्धार और पाप क्षमा की अपनी कथा को अपने आस-पास के लोगों को सुनाते रहिए, अपने वचन, चरित्र और व्यवहार से दिखाते रहिए। - जो स्टोवैल


अपने जीवन से मसीह यीशु के अनुग्रह और प्रेम की कहानी सुनाते रहिए।

क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - 1 थिस्सुलुनीकियों 1:8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:1-11
2 Corinthians 3:1 क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाईं सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं? 
2 Corinthians 3:2 हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है। 
2 Corinthians 3:3 यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। 
2 Corinthians 3:4 हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं। 
2 Corinthians 3:5 यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है। 
2 Corinthians 3:6 जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है। 
2 Corinthians 3:7 और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्त्राएल उसके मुंह पर दृष्टि नहीं कर सकते थे। 
2 Corinthians 3:8 तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:9 क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:10 और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। 
2 Corinthians 3:11 क्योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्यों न होगा?

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17



रविवार, 25 जनवरी 2015

विचार और व्यवहार


   कुमरान प्रथम ईसवीं का एक यहूदी समुदाय था जिसने अपने आप को बाहरी सभी प्रभावों से पृथक कर लिया था जिससे वे भविष्यवाणी करे हुए मसीहा के आगमन के लिए अपने आप को तैयार कर सकें। वे भक्तिमय जीवन व्यतीत करने, अनुष्ठानों और विधि-विधानों का पालन करने तथा कड़ाई से नियमों के अनुसार चलने के द्वारा अपने आप को परमेश्वर की दृष्टि में न्यायसंगत रखने में विश्वास रखते थे। उनसे संबंधित विद्यमान दस्तावेज़ दिखाते हैं कि वे अपनी सभाओं और समुदायों में किसी भी लंगड़े, अन्धे या अपंग व्यक्ति को नहीं आने देते थे, क्योंकि उनका मानना था कि शारिरिक दोष वाला कोई भी व्यक्ति अनुष्ठानात्मक रीति से ’अपवित्र’ है। जब वे आपस में कोई प्रीति-भोज आयोजित करते थे तो उनकी अतिथि सूची में भी कोई विक्लांग व्यक्ति नहीं होता था।

   कुमरान के यहूदी लोगों के दिनों में ही इस्त्राएल का वही भविष्यवाणी किया हुआ मसीहा जिसकी वे प्रतीक्षा कर रहे थे - प्रभु यीशु, उस इलाके में कार्यरत था, परमेश्वर पिता के स्वर्गीय राज्य की शिक्षाएं लोगों को दे रहा था, बड़े बड़े आश्चर्यकर्म और चंगाई के कार्य कर रहा था तथा बहुतेरों को उससे राहत तथा शांति मिल रही थी; और एक विचित्र विरोधाभास की बात है कि कुमरान की मान्यताओं के विपरीत प्रभु यीशु लोगों से कह रहा था, "परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला। तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा" (लूका 14:13-14)।

   प्रभु यीशु की शिक्षाओं और कुमरान के "आत्मिक विशिष्ट वर्ग" के लोगों की मान्यताओं के बीच का विरोधाभास हमारे लिए शिक्षाप्रद है। हम अकसर बाहरी कर्म-कांडों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने को मान्यता देते हैं, लेकिन भूल जाते हैं कि परमेश्वर बाहरी स्वरूप नहीं वरन मनों को जाँचने वाला और मन के विचारों के अनुसार प्रतिफल देता है। हम अपने समान दिखाई देने तथा विचार-व्यवहार रखने वाले व्यक्तियों के साथ संगति रखना चाहते हैं, अपनी मान्यताओं और विचारधारों के अनुसार लोगों को ऊँचा-नीचा, सही-गलत, भला-बुरा आँकते हैं; लेकिन प्रभु यीशु ने कभी किसी के साथ कोई भेद-भाव नहीं किया।

   हम मसीही विश्वासियों को प्रभु यीशु ने अपने समान विचार और व्यवहार रखने को कहा है, उसके समान ही हमारे दिल और दरवाज़े सभी के लिए खुले रहें। - डेनिस फिशर


सभी को साथ लेकर चलने वाला सुसमाचार, अपने आप को विशिष्ट वर्ग का मानने वाले लोगों के द्वारा नहीं फैलाया जा सकता - जॉर्ज स्वीटिंग

जो कंगाल पर अनुग्रह करता है, वह यहोवा को उधार देता है, और वह अपने इस काम का प्रतिफल पाएगा। - नीतिवचन 19:17

बाइबल पाठ: लूका 14:7-14
Luke 14:7 जब उसने देखा, कि नेवताहारी लोग क्योंकर मुख्य मुख्य जगहें चुन लेते हैं तो एक दृष्‍टान्‍त देकर उन से कहा। 
Luke 14:8 जब कोई तुझे ब्याह में बुलाए, तो मुख्य जगह में न बैठना, कहीं ऐसा न हो, कि उसने तुझ से भी किसी बड़े को नेवता दिया हो। 
Luke 14:9 और जिसने तुझे और उसे दोनों को नेवता दिया है: आकर तुझ से कहे, कि इस को जगह दे, और तब तुझे लज्ज़ित हो कर सब से नीची जगह में बैठना पड़े। 
Luke 14:10 पर जब तू बुलाया जाए, तो सब से नीची जगह जा बैठ, कि जब वह, जिसने तुझे नेवता दिया है आए, तो तुझ से कहे कि हे मित्र, आगे बढ़कर बैठ; तब तेरे साथ बैठने वालों के साम्हने तेरी बड़ाई होगी। 
Luke 14:11 और जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा; और जो कोई अपने आप को छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा।। 
Luke 14:12 तब उसने अपने नेवता देने वाले से भी कहा, जब तू दिन का या रात का भोज करे, तो अपने मित्रों या भाइयों या कुटुम्बियों या धनवान पड़ोसियों न बुला, कहीं ऐसा न हो, कि वे भी तुझे नेवता दें, और तेरा बदला हो जाए। 
Luke 14:13 परन्तु जब तू भोज करे, तो कंगालों, टुण्‍डों, लंगड़ों और अन्‍धों को बुला। 
Luke 14:14 तब तू धन्य होगा, क्योंकि उन के पास तुझे बदला देने को कुछ नहीं, परन्तु तुझे धर्मियों के जी उठने पर इस का प्रतिफल मिलेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16



शनिवार, 24 जनवरी 2015

अनुसरण


   बच्चों के लिए आयोजित एक चर्च सभा में उनकी शिक्षिका ने परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए परमेश्वर की दस आज्ञाओं में से प्रथम, "तू मुझे छोड़ दूसरों को ईश्वर कर के न मानना" (निर्गमन 20:3) के बारे में उन्हें बताया, और उन्हें कुछ तरीके भी बताए जिससे वे इस नियम का पालन कर सकें। शिक्षिका ने उन बच्चों को समझाया कि उनके जीवनों में परमेश्वर से बढ़कर और कुछ भी नहीं होना चाहिए - ना तो उनका खेल-कूद और विडियो-गेम्स, ना स्कूल का कार्य और ना ही उनके खान-पीन; तथा परमेश्वर को सर्वप्रथम रखने का अर्थ है प्रतिदिन उसके साथ समय बिताना, जो उससे प्रार्थना करने और उसके वचन बाइबल को पढ़ने तथा उसकी आज्ञाओं के पालन के द्वारा होता है, और ऐसा करने की प्राथमिकता में अन्य किसी भी बात से कोई हस्तक्षेप कभी नहीं होना चाहिए।

   बच्चों के उस समूह में से एक बड़ी बालिका ने इस संदर्भ में एक विचार प्रेरक प्रश्न पूछा - क्या मसीही विश्वास का जीवन केवल आज्ञाओं के पालन मात्र तक सीमित है या फिर परमेश्वर को मसीही विश्वासी के जीवन के प्रत्येक भाग में सम्मिलित होना चाहिए?

   कई बार हम परमेश्वर के वचन बाइबल को नियमों के सूची-पत्र के रूप में देखने तथा मानने की गलती कर लेते हैं। इसमें कोई संश्य नहीं है कि परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करना (यूहन्ना 14:21) और उसके साथ समय बिताना अति महत्वपूर्ण हैं, लेकिन ऐसा करना मनोभावना की बात है ना कि वैधानिक आवश्यकता-पूर्ति की - हमारे द्वारा अपने जीवनों में परमेश्वर को दी गई प्राथमिकता तथा उसके प्रति आज्ञाकारिता, परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम के कारण होनी चाहिए। प्रभु यीशु और स्वर्गीय परमेश्वर पिता के बीच एक गहरे प्रेम का संबंध था, और प्रभु यीशु सदा परमेश्वर पिता की इच्छापूर्ति, आज्ञाकारिता तथा उसके साथ प्रार्थना में समय बिताने को सर्वोपरि रखते थे। प्रभु यीशु के अनुयायी होने के कारण हम मसीही विश्वासियों को भी प्रभु यीशु के उदाहरण का अनुसरण करना है, उसके दिखाए-बताए मार्ग पर चलना है, "सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था" (1 यूहन्ना 2:6)।

   जब भी हमें जीवन की किसी परिस्थिति में मार्गदर्शन की या कुछ समझने की आवश्यकता पड़े तो हम प्रभु यीशु के जीवन को देख कर सीख सकते हैं - चाहे वह नम्र तथा दीन होना हो, विश्वास में दृढ़ तथा समर्पित होना हो, प्रेम दिखाने और निभाने के बारे में जानना हो, अपनी प्राथमिकताओं का निर्धारण करना हो, या अन्य कोई भी बात हो; हम प्रभु यीशु की ओर देखते हुए, उसके उदाहरण का अनुसरण करते हुए अपने मसीही विश्वास के जीवन में आगे बढ़ते रह सकते हैं। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु ने हमें उसका अनुसरण करने के लिए बुलाया है।

जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। - यूहन्ना 14:21

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 2:1-11
1 John 2:1 हे मेरे बालकों, मैं ये बातें तुम्हें इसलिये लिखता हूं, कि तुम पाप न करो; और यदि कोई पाप करे, तो पिता के पास हमारा एक सहायक है, अर्थात धार्मिक यीशु मसीह। 
1 John 2:2 और वही हमारे पापों का प्रायश्‍चित्त है: और केवल हमारे ही नहीं, वरन सारे जगत के पापों का भी। 
1 John 2:3 यदि हम उस की आज्ञाओं को मानेंगे, तो इस से हम जान लेंगे कि हम उसे जान गए हैं। 
1 John 2:4 जो कोई यह कहता है, कि मैं उसे जान गया हूं, और उस की आज्ञाओं को नहीं मानता, वह झूठा है; और उस में सत्य नहीं। 
1 John 2:5 पर जो कोई उसके वचन पर चले, उस में सचमुच परमेश्वर का प्रेम सिद्ध हुआ है: हमें इसी से मालूम होता है, कि हम उस में हैं। 
1 John 2:6 सो कोई यह कहता है, कि मैं उस में बना रहता हूं, उसे चाहिए कि आप भी वैसा ही चले जैसा वह चलता था। 
1 John 2:7 हे प्रियों, मैं तुम्हें कोई नई आज्ञा नहीं लिखता, पर वही पुरानी आज्ञा जो आरम्भ से तुम्हें मिली है; यह पुरानी आज्ञा वह वचन है, जिसे तुम ने सुना है। 
1 John 2:8 फिर मैं तुम्हें नई आज्ञा लिखता हूं; और यह तो उस में और तुम में सच्ची ठहरती है; क्योंकि अन्धकार मिटता जाता है और सत्य की ज्योति अभी चमकने लगी है। 
1 John 2:9 जो कोई यह कहता है, कि मैं ज्योति में हूं; और अपने भाई से बैर रखता है, वह अब तक अन्धकार ही में है। 
1 John 2:10 जो कोई अपने भाई से प्रेम रखता है, वह ज्योति में रहता है, और ठोकर नहीं खा सकता। 
1 John 2:11 पर जो कोई अपने भाई से बैर रखता है, वह अन्धकार में है, और अन्धकार में चलता है; और नहीं जानता, कि कहां जाता है, क्योंकि अन्धकार ने उस की आंखे अन्‍धी कर दी हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39



शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

शब्द



   कुछ समय पहले की बात है, अमेरीकी टेलिविज़न कार्यक्रमों के कलाकारों को दिए जाने वाले एम्मी पुरुस्कार की विजेता एक अभिनेत्री ने, वार्षिक अमेरिकी संगीत पुरुस्कार समारोह के दौरान साहसिक कदम उठाया और वहाँ से उठ कर चली गई। उसके कार्यक्रम को छोड़कर उठकर चले जाने का कारण था वहाँ पर चल रही टिप्पणियों तथा बात-चीत का स्तर; उस अभिनेत्री ने कहा कि समारोह के प्रस्तुतकर्ताओं, भाग लेने वाले कलाकारों तथा दर्शकों में हो रहे निरंतर अशलील मज़ाक और भद्दी टिप्पणियों से वह परेशान और दुखी हो गई थी; थोड़ा भी आत्म-सम्मान रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए वहाँ का वातावरण तथा उपस्थित लोगों का व्यवहार अपमानजनक था।

   ऐसी भद्देपन और फूहड़पन की स्थिति केवल आज ही की समस्या नहीं है; प्रेरित पौलुस के दिनों में भी यह समस्या विद्यमान थी। पौलुस ने अपने समय के मसीही विश्वासियों को स्मरण दिलाया कि उन्हें अपने जीवन से अशलीलता, निर्लज्जता, झूठी निन्दा, अभद्र बातचीत एवं व्यवहार को निकाल देना चाहिए (इफिसियों 5:4; कुलुस्सियों 3:8); ऐसी बातचीत और व्यवहार उनके मसीही विश्वास में आने से पूर्व की बात है (1 कुरिन्थियों 6:9-11), और अब मसीह यीशु में होकर उन्हें दी गई नई पहचान में इसका कोई स्थान नहीं है। इन बातों के विपरीत अब उनके जीवनों में ऐसे भले और हितकारी शब्द तथा व्यवहार होने चाहिए जो सुनने वालों को अनुग्रह प्रदान करें (इफिसियों 4:29)। उनके अन्दर बसने वाला परमेश्वर का पवित्र आत्मा उनकी सहायता करता है कि वे ऐसे भले शब्दों का प्रयोग करें जो दूसरों के लिए हितकारी हों (यूहन्ना 16:7-13), तथा जब भी वे किसी अनुचित बातचीत में पड़ें तो वही पवित्र आत्मा उन्हें इस गलती के लिए कायल भी करता है।

   हम मसीही विश्वासियों को अपने जीवन की हर बात से अपने परमेश्वर की गवाही देने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है; इसलिए हमें ध्यान रखना है कि हमारे मुँह सदा परमेश्वर के प्रति धन्यवाद और दूसरों के प्रति अनुग्रह करने वाले शब्दों से ही भरे हों। - मार्विन विलियम्स


भले शब्द भले बनाए गए जीवन से ही आते हैं।

और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाए। - इफिसियों 5:3-4

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:20-32
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई। 
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए। 
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। 
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ। 
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है। 
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20



गुरुवार, 22 जनवरी 2015

चुन लें



   हाल ही में मैंने एक विज्ञापन देखा जो इंटरनैट पर खेले जाने वाले एक ऐसे खेल के बारे में था जो युनानी पौराणिक कथाओं पर आधारित था। वह खेल सेनाओं, पौराणिक देवताओं, नायकों, सैनिक अभियानों आदि को लेकर बनाया गया था। जिस बात ने मेरा ध्यान आकर्षित किया वह था खेल आरंभ करने की विधि का विवरण - खेलने वाले को इंटरनैट पर जाकर अपने आप को खेल के लिए पंजीकृत करना था, और फिर अपना ईश्वर चुनकर अपना सामराज्य बनाने का प्रयास करना था।

   वाह! क्या बात है; "अपना ईश्वर चुन लें।" ये बातें उस विज्ञापन में भले ही बड़े सहज रूप में कही गई थीं, लेकिन उससे मेरा ध्यान इस बात की ओर गया कि यही बात तो हमारे आज के संसार की सबसे खतरनाक बातों में से एक है। एक खेल में चाहे यह महत्वहीन हो कि आप ने किस को ईश्वर चुना है, लेकिन वास्तविक संसार में इस चुनाव के अनन्तकालीन प्रभाव हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक नायक यहोशू ने, जिसे इस्त्राएलियों को कनान देश में बसाने की ज़िम्मेदारी दी गई थी, इस्त्राएलियों से, जो अनेकों देवताओं की पूजा करने वाले लोगों से घिरे हुए थे, यही बात कही - कि वे चुन लें कि किस की उपासना करेंगे, किंतु उन्हें यह चुनाव लापरवाही से नहीं वरन पूरी गंभीरता से करना था। यहोशु ने इस्त्राएलियों को अपना उदाहरण देते हुए कहा, "और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा" (यहोशु 24:15)।

   जैसे उन इस्त्राएलियों और यहोशु के सामने था, आज हमारे सामने भी अनेकों विकल्प हैं - ना केवल अन्य धर्मों और मतों के अराध्यों के रूप में, वरन हमारी अपनी प्राथमिकताओं के रूप में भी; यदि परमेश्वर हमारे जीवन में हमारी पहली प्राथमिकता नहीं है, तो फिर परमेश्वर का वह सर्वोपरि स्थान किसी अन्य ने ले लिया है - वह हमारी नौकरी या कार्य हो सकता है, हमारा परिवार हो सकता है, हमारे लिए टी.वी. या अन्य मनोरंजन के साधन हो सकते हैं, या ऐसी कोई भी अन्य बात हो सकती है। चुनाव हमारा है, हम किसे अपने जीवन में पहला स्थान देते हैं; लेकिन बुद्धिमानी का चुनाव केवल एक ही है, यहोशु के समान यह कहना, "मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा।" - बिल क्राउडर


परमेश्वर को छोड़ और कोई आपके दिल के खाली स्थान को सही रीति से भर नहीं सकता।

सब राज्यों के लोग तो अपने अपने देवता का नाम ले कर चलते हैं, परन्तु हम लोग अपने परमेश्वर यहोवा का नाम ले कर सदा सर्वदा चलते रहेंगे। - मीका 4:5

बाइबल पाठ: यहोशु 24:14-18
Joshua 24:14 इसलिये अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार और मिस्र में करते थे, उन्हें दूर कर के यहोवा की सेवा करो। 
Joshua 24:15 और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश में तुम रहते हो; परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा। 
Joshua 24:16 तब लोगों ने उत्तर दिया, यहोवा को त्यागकर दूसरे देवताओं की सेवा करनी हम से दूर रहे; 
Joshua 24:17 क्योंकि हमारा परमेश्वर यहोवा वही है जो हम को और हमारे पुरखाओं को दासत्व के घर, अर्थात मिस्र देश से निकाल ले आया, और हमारे देखते बड़े बड़े आश्चर्य कर्म किए, और जिस मार्ग पर और जितनी जातियों के मध्य में से हम चले आते थे उन में हमारी रक्षा की; 
Joshua 24:18 और हमारे साम्हने से इस देश में रहनेवाली एमोरी आदि सब जातियों को निकाल दिया है; इसलिये हम भी यहोवा की सेवा करेंगे, क्योंकि हमारा परमेश्वर वही है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36