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रविवार, 14 जुलाई 2019

आमने-सामने



      यद्यपि आज सँसार इलेक्ट्रौनिक विधि से इतनी निकटता से जुड़ा हुआ है, फिर भी आमने-सामने होकर वार्तालाप करने का समय सर्वोत्तम होता है। जब हम एक दूसरे के साथ अपनी मन की बात बाँटते हैं, एक दूसरे के साथ हंसते हैं, तो एक दूसरे के चहरे के भाव देखकर ही भावनाओं को समझ जाते हैं। जो परस्पर प्रेम करते हैं, चाहे परिवार जन हो या मित्रगण, वे आमने-सामने ही संगति रखना पसन्द करते हैं।

      हम यही आमने-सामने की संगति, परमेश्वर के वचन बाइबल में, परमेश्वर और मूसा के मध्य देखते हैं। परमेश्वर ने मूसा को चुना कि वह उसके लोगों को मिस्त्र के दासत्व से निकालकर लाए। परमेश्वर के साथ चलते-चलते मूसा परमेश्वर पर अपने भरोसे में बढ़ता गया। इस्राएल के लोग तो परमेश्वर के विरुद्ध बलवा और अनाज्ञाकारिता और मूर्तिपूजा में भी पड़े, परन्तु मूसा परमेश्वर के साथ बना रहा। जब उन इस्राएलियों ने परमेश्वर के स्थान पर सोने के बछड़े की उपासना की (देखें निर्गमन 32), तो मूसा ने परमेश्वर से मिलने के लिए छावनी के बाहर तम्बू लगा लिया, और इस्राएली दूर ही से देख सकते थे (33:7-11)। जब परमेश्वर की उपस्थिति का सूचक बादल का खंबा उस तम्बू पर उतरा तो मूसा ने उन लोगों के लिए विनती की; और परमेश्वर ने आश्वस्त किया कि उसकी उपस्थिति उनके साथ बनी रहेगी (पद 14)।

      क्रूस पर प्रभु यीशु मसीह की मृत्यु और उनके मृतकों में से पुनरुत्थान के कारण अब हमें मूसा के समान किसी की आवश्यकता नहीं है कि हमारे लिए परमेश्वर से विनती करे – अब प्रभु यीशु अपने अनुयायियों के लिए यह कार्य करते रहते हैं। प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास और उससे मिलने वाली पापों की क्षमा के कारण हम परमेश्वर के मित्र हो गए हैं (यूहन्ना 15:15), उसके साथ हमारा मेल-मिलाप हो गया है (रोमियों 5: 1, 10)। अब हम भी प्रार्थना में प्रभु परमेश्वर के साथ मिल सकते हैं और उससे ऐसे बात कर सकते हैं जैसे कोई मित्र के साथ आमने-सामने बातचीत करता है। - एमी बाउचर पाई


हम प्रभु परमेश्वर के साथ ऐसे बात कर सकते हैं, जैसे मित्र के साथ।

फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। - रोमियों 8:34

बाइबल पाठ: निर्गमन 33:7-14
Exodus 33:7 मूसा तम्बू को छावनी से बाहर वरन दूर खड़ा कराया करता था, और उसको मिलापवाला तम्बू कहता था। और जो कोई यहोवा को ढूंढ़ता वह उस मिलापवाले तम्बू के पास जो छावनी के बाहर था निकल जाता था।
Exodus 33:8 और जब जब मूसा तम्बू के पास जाता, तब तब सब लोग उठ कर अपने अपने डेरे के द्वार पर खड़े हो जाते, और जब तक मूसा उस तम्बू में प्रवेश न करता था तब तक उसकी ओर ताकते रहते थे।
Exodus 33:9 और जब मूसा उस तम्बू में प्रवेश करता था, तब बादल का खम्भा उतर के तम्बू के द्वार पर ठहर जाता था, और यहोवा मूसा से बातें करने लगता था।
Exodus 33:10 और सब लोग जब बादल के खम्भे को तम्बू के द्वार पर ठहरा देखते थे, तब उठ कर अपने अपने डेरे के द्वार पर से दण्डवत करते थे।
Exodus 33:11 और यहोवा मूसा से इस प्रकार आमने-सामने बातें करता था, जिस प्रकार कोई अपने भाई से बातें करे। और मूसा तो छावनी में फिर आता था, पर यहोशू नाम एक जवान, जो नून का पुत्र और मूसा का टहलुआ था, वह तम्बू में से न निकलता था।।
Exodus 33:12 और मूसा ने यहोवा से कहा, सुन तू मुझ से कहता है, कि इन लोगों को ले चल; परन्तु यह नहीं बताया कि तू मेरे संग किस को भेजेगा। तौभी तू ने कहा है, कि तेरा नाम मेरे चित्त में बसा है, और तुझ पर मेरे अनुग्रह की दृष्टि है।
Exodus 33:13 और अब यदि मुझ पर तेरे अनुग्रह की दृष्टि हो, तो मुझे अपनी गति समझा दे, जिस से जब मैं तेरा ज्ञान पाऊं तब तेरे अनुग्रह की दृष्टि मुझ पर बनी रहे। फिर इसकी भी सुधि कर कि यह जाति तेरी प्रजा है।
Exodus 33:14 यहोवा ने कहा, मैं आप चलूंगा और तुझे विश्राम दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12
  • प्रेरितों 19:1-20



गुरुवार, 23 अगस्त 2018

वार्तालाप



      हाल ही में मेरा दामाद, ईविंग, मेरी पोती, मैगी, से बातें कर रहा था और उसे समझा रहा था कि हम परमेश्वर के साथ वार्तालाप कर सकते हैं, और वह हम से बात-चीत करता है। जब ईविंग ने मैगी से कहा कि परमेश्वर हम से अपने वचन बाइबल के द्वारा वार्तालाप करता है, तो मैगी ने निःसंकोच कहा: “उसने मुझसे तो आज तक कुछ नहीं कहा है। मैंने तो आज तक परमेश्वर को मुझसे वार्तालाप करते नहीं सुना है।”

      हम में से अधिकांश मैगी की बात से सहमत होंगे, यदि हमारे साथ परमेश्वर के वार्तालाप करने का अर्थ हम यह समझते हैं कि कोई सुनाई देने वाली आवाज़ हमें निर्देश देगी, जैसे कि “अपना घर बेच दो और दूर देश में जाकर अनाथों की देखभाल करो।” परन्तु जब हम परमेश्वर द्वारा हमसे कुछ “बोलने” की बात करते हैं, तब हमारा अभिप्राय कुछ भिन्न होता है।

      हम पवित्र-शास्त्र के अध्ययन द्वारा परमेश्वर की आवाज़ को “सुनते” हैं। बाइबल हमें प्रभु यीशु के बारे में बताती है, और यह भी बताती है कि परमेश्वर ने “हम से पुत्र के द्वारा बातें की” जो “उसकी महिमा का प्रकाश और उसके तत्व की छाप है” (इब्रानियों 1:2-3)। पवित्र-शास्त्र हमें बताता है कि प्रभु यीशु मसीह में होकर हम उद्धार कैसे प्राप्त कर सकते हैं, और हम परमेश्वर को भावता हुआ जीवन कैसे व्यतीत कर सकते हैं (2 तिमुथियुस 3:14-17)। पवित्र-शास्त्र के अतिरिक्त, हमारे साथ पवित्र-आत्मा है। पहला कुरिन्थियों 2:12 कहता है कि हमें पवित्र-आत्मा इसलिए दिया गया है जिससे हम उन बातों को जान सकें जो परमेश्वर ने हमें दी हैं।

      क्या आपको परमेश्वर की आवाज़ को सुने काफी समय हो गया है? उसके वचन बाइबल के साथ समय बिताएं, उसकी पवित्र-आत्मा को सुनें जो वचन में होकर प्रभु यीशु को हम पर प्रगट करता है। परमेश्वर से होने वाले अद्भुत वार्तालाप के प्रति संवेदनशील बनें, शान्त होकर उसकी बातों को ध्यान से सुनें। - डेव ब्रैनन


जब हम सुनने के लिए समय निकालते हैं, 
तब परमेश्वर अपने वचन में होकर हम से वार्तालाप करता है।

परन्तु हम ने संसार की आत्मा नहीं, परन्तु वह आत्मा पाया है, जो परमेश्वर की ओर से है, कि हम उन बातों को जानें, जो परमेश्वर ने हमें दी हैं। - 1 कुरिन्थियों 2:12

बाइबल पाठ: इब्रानियों 1:1-12
Hebrews 1:1 पूर्व युग में परमेश्वर ने बाप-दादों से थोड़ा थोड़ा कर के और भांति भांति से भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा बातें कर के।
Hebrews 1:2 इन दिनों के अन्‍त में हम से पुत्र के द्वारा बातें की, जिसे उसने सारी वस्‍तुओं का वारिस ठहराया और उसी के द्वारा उसने सारी सृष्‍टि रची है।
Hebrews 1:3 वह उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा।
Hebrews 1:4 और स्‍वर्गदूतों से उतना ही उत्तम ठहरा, जितना उसने उन से बड़े पद का वारिस हो कर उत्तम नाम पाया।
Hebrews 1:5 क्योंकि स्‍वर्गदूतों में से उसने कब किसी से कहा, कि तू मेरा पुत्र है, आज तू मुझ से उत्पन्न हुआ? और फिर यह, कि मैं उसका पिता होऊँगा, और वह मेरा पुत्र होगा?
Hebrews 1:6 और जब पहिलौठे को जगत में फिर लाता है, तो कहता है, कि परमेश्वर के सब स्वर्गदूत उसे दण्‍डवत करें।
Hebrews 1:7 और स्‍वर्गदूतों के विषय में यह कहता है, कि वह अपने दूतों को पवन, और अपने सेवकों को धधकती आग बनाता है।
Hebrews 1:8 परन्तु पुत्र से कहता है, कि हे परमेश्वर तेरा सिंहासन युगानुयुग रहेगा: तेरे राज्य का राजदण्‍ड न्याय का राजदण्‍ड है।
Hebrews 1:9 तू ने धर्म से प्रेम और अधर्म से बैर रखा; इस कारण परमेश्वर तेरे परमेश्वर ने तेरे साथियों से बढ़कर हर्ष रूपी तेल से तुझे अभिषेक किया।
Hebrews 1:10 और यह कि, हे प्रभु, आदि में तू ने पृथ्वी की नेव डाली, और स्वर्ग तेरे हाथों की कारीगरी है।
Hebrews 1:11 वे तो नाश हो जाएंगे; परन्तु तू बना रहेगा: और वे सब वस्‍त्र के समान पुराने हो जाएंगे।
Hebrews 1:12 और तू उन्हें चादर के समान लपेटेगा, और वे वस्‍त्र के समान बदल जाएंगे: पर तू वही है और तेरे वर्षों का अन्‍त न होगा।


एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115
  • 1कुरिन्थियों 6



सोमवार, 2 जुलाई 2018

समय



      मेरे बचपन में, हमारा परिवार महीने में एक बार मेरे नाना-नानी के घर जाया करता था, जो एक दूसरे प्रांत में, एक फार्महाउस में रहा करते थे। हम जब भी उनके फार्महाउस के दरवाज़े पर पहुँचते थे, मेरी नानी हमारा स्वागत इन शब्दों के साथ करती थीं, “आओ, अन्दर आओ; यहाँ कुछ समय आराम से बैठो।” यह उनका हमसे यह कहने का तरीका था कि हम आराम से रहें, कुछ समय उनके साथ बिताएं, और एक-दूसरे के हाल-चाल जानें, बात-चीत में समय बिताएं।

      जीवन बहुत व्यस्त हो सकता है। कार्यों से भरे हमारे सँसार में लोगों को जानना कठिन हो सकता है। किसी से यह कहने का समय निकालना कि वे आराम से आकर हमारे साथ बैठें और बात-चीत करें, कठिन हो सकता है। हम एक-दूसरे के साथ इधर-उधर की बात-चीत में समय बिताने के स्थान पर, एक-दूसरे को फोन के माध्यम से सन्देश भेजकर, उनसे मुद्दे की बात अधिक सरलता एवँ शीघ्रता से कर सकते हैं।

      परन्तु ध्यान कीजिए कि प्रभु यीशु मसीह ने क्या किया जब वे एक महसूल लेने वाले के जीवन में कार्य करना चाहते थे। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि प्रभु यीशु ज़क्कई के घर गए, कि उसके साथ कुछ समय बिता सकें। उनके कहे शब्द, “...आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है” (लूका 19:5) संकेत करते हैं कि प्रभु यीशु ज़क्कई के घर केवल थोड़ा सा समय बिताने नहीं गए थे। प्रभु यीशु ने उसके साथ समय बिताया और प्रभु के साथ बिताए उस समय के कारण, ज़क्काई का जीवन बदल गया।

      मेरी नानी के घर के बरामदे में बहुत सी कुर्सियाँ थीं – सभी आगंतुकों के स्वागत और उन्हें आराम से बैठकर बात-चीत करने का संकेत देने के लिए। यदि हमें किसी को निकटता से जानना है और उनके जीवनों में अन्तर लाना है, जैसे प्रभु यीशु ने ज़क्कई के जीवन में किया, तो हमें उन्हें आमंत्रित करके उनके साथ समय बिताना होगा। - डेव ब्रैनन


किसी और कि जो सबसे अच्छा उपहार आप दे सकते हैं, 
वह आपका समय हो सकता है।

और अवसर को बहुमोल समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। - इफिसियों 5:16

बाइबल पाठ: लूका 19:1-9
Luke 19:1 वह यरीहो में प्रवेश कर के जा रहा था।
Luke 19:2 और देखो, ज़क्कई नाम एक मनुष्य था जो चुंगी लेने वालों का सरदार और धनी था।
Luke 19:3 वह यीशु को देखना चाहता था कि वह कौन सा है परन्तु भीड़ के कारण देख न सकता था। क्योंकि वह नाटा था।
Luke 19:4 तब उसको देखने के लिये वह आगे दौड़कर एक गूलर के पेड़ पर चढ़ गया, क्योंकि वह उसी मार्ग से जाने वाला था।
Luke 19:5 जब यीशु उस जगह पहुंचा, तो ऊपर दृष्टि कर के उस से कहा; हे ज़क्कई झट उतर आ; क्योंकि आज मुझे तेरे घर में रहना अवश्य है।
Luke 19:6 वह तुरन्त उतर कर आनन्द से उसे अपने घर को ले गया।
Luke 19:7 यह देख कर सब लोगे कुड़कुड़ा कर कहने लगे, वह तो एक पापी मनुष्य के यहां जा उतरा है।
Luke 19:8 ज़क्कई ने खड़े हो कर प्रभु से कहा; हे प्रभु, देख मैं अपनी आधी सम्पत्ति कंगालों को देता हूं, और यदि किसी का कुछ भी अन्याय कर के ले लिया है तो उसे चौगुना फेर देता हूं।
Luke 19:9 तब यीशु ने उस से कहा; आज इस घर में उद्धार आया है, इसलिये कि यह भी इब्राहीम का एक पुत्र है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 22-24
  • प्रेरितों 11



शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

वार्तालाप


   संभवतः आप इस प्रसिद्ध कथन को जानते हों: "महान लोग विचारों के बारे चर्चा करते हैं; साधारण लोग घटनाओं के बारे चर्चा करते हैं और छोटे लोग व्यक्तियों के बारे में चर्चा करते हैं।" इसमें कोई असंगत बात नहीं कि लोगों के बारे में बात करने का भी तरीका होता है जिससे उन्हें सम्मान मिल सके, लेकिन उपरोक्त कथन सामान्यतः चर्चा करने वाले लोगों की मानसिकता पर एक टिप्पणी है जो उनके व्यक्तित्व का परिचय देती है। आज के संसार में सभी पर सामाजिक या व्यवसायिक मीडिया की लगातार बनी रहने वाली नज़र के कारण हमें लोगों के जीवनों को ऐसी अन्तरंगता से देखने को मिलता रहता है जो अनुपयुक्त हो सकता है।

   यह और भी बुरा तब हो जाता है जब दुसरों के जीवनों के बारे में अनुपयुक्त सूचनाओं की यह बाढ़ हमारी बातचीत का ऐसा विषय बन जाती है जहाँ व्यर्थ की कानफूसी अपवाद नहीं वरन सामान्य लगने लगती है, और यह केवल प्रसिद्ध और गणमान्य लोगों को लेकर ही हो ऐसा भी नहीं। हमारे कार्यस्थल, चर्च, पड़ौस, मित्र-मण्डली और परिवार के लोग भी इस व्यर्थ कानाफूसी के विषय बनते चले जाते हैं और फिर लोगों की तेज़ ज़ुबानों के लक्ष्य बनकर उन्हें ऐसी चर्चाओं की पीड़ा सहनी पड़ती है जिन चर्चाओं को कभी होना ही नहीं चाहिए था।

   हम अपने वार्तालापों में ऐसे शब्दों के प्रयोग को कैसे रोक सकते हैं जिन से दूसरों को कष्ट होता है? यह ध्यान रखने के द्वारा कि परमेश्वर भी हमारे प्रत्येक वार्तालाप को सुनता है और उसका हिसाब रखता है और एक दिन उन सब बातों का हमसे हिसाब अवश्य लेगा (मत्ती 12:36)। हमारा परमेश्वर पिता हम मसीही विश्वासियों से चाहता है कि हम अपने शब्दों का बहुत सावधानी से प्रयोग करें, ऐसा करें जिससे उसे किसी प्रकार की कोई शर्मिंदगी ना हो और हम भी भजनकार के साथ कह सकें: "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!" (भजन 19:14)

   जब हम दूसरों के बारे में अपने वार्तालाप और शब्दों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं, तब हम परमेश्वर को आदर देते हैं। उसकी सहायता से हम अपने वार्तालाप को संसार के लोगों में उसे महिमा देने और उसका आदर करने का माध्यम बना सकते हैं। होने दें कि आपके शब्द, आपका वार्तालाप आपके पिता परमेश्वर के लिए महिमा और आदर का कारण बने। - बिल क्राउडर


शब्दों से किसी को आहत करने से बेहतर है कि हम अपनी ज़ुबान को ही दबा लें।

और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। - मत्ती 12:36

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।। 
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


शुक्रवार, 23 जनवरी 2015

शब्द



   कुछ समय पहले की बात है, अमेरीकी टेलिविज़न कार्यक्रमों के कलाकारों को दिए जाने वाले एम्मी पुरुस्कार की विजेता एक अभिनेत्री ने, वार्षिक अमेरिकी संगीत पुरुस्कार समारोह के दौरान साहसिक कदम उठाया और वहाँ से उठ कर चली गई। उसके कार्यक्रम को छोड़कर उठकर चले जाने का कारण था वहाँ पर चल रही टिप्पणियों तथा बात-चीत का स्तर; उस अभिनेत्री ने कहा कि समारोह के प्रस्तुतकर्ताओं, भाग लेने वाले कलाकारों तथा दर्शकों में हो रहे निरंतर अशलील मज़ाक और भद्दी टिप्पणियों से वह परेशान और दुखी हो गई थी; थोड़ा भी आत्म-सम्मान रखने वाले किसी भी व्यक्ति के लिए वहाँ का वातावरण तथा उपस्थित लोगों का व्यवहार अपमानजनक था।

   ऐसी भद्देपन और फूहड़पन की स्थिति केवल आज ही की समस्या नहीं है; प्रेरित पौलुस के दिनों में भी यह समस्या विद्यमान थी। पौलुस ने अपने समय के मसीही विश्वासियों को स्मरण दिलाया कि उन्हें अपने जीवन से अशलीलता, निर्लज्जता, झूठी निन्दा, अभद्र बातचीत एवं व्यवहार को निकाल देना चाहिए (इफिसियों 5:4; कुलुस्सियों 3:8); ऐसी बातचीत और व्यवहार उनके मसीही विश्वास में आने से पूर्व की बात है (1 कुरिन्थियों 6:9-11), और अब मसीह यीशु में होकर उन्हें दी गई नई पहचान में इसका कोई स्थान नहीं है। इन बातों के विपरीत अब उनके जीवनों में ऐसे भले और हितकारी शब्द तथा व्यवहार होने चाहिए जो सुनने वालों को अनुग्रह प्रदान करें (इफिसियों 4:29)। उनके अन्दर बसने वाला परमेश्वर का पवित्र आत्मा उनकी सहायता करता है कि वे ऐसे भले शब्दों का प्रयोग करें जो दूसरों के लिए हितकारी हों (यूहन्ना 16:7-13), तथा जब भी वे किसी अनुचित बातचीत में पड़ें तो वही पवित्र आत्मा उन्हें इस गलती के लिए कायल भी करता है।

   हम मसीही विश्वासियों को अपने जीवन की हर बात से अपने परमेश्वर की गवाही देने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है; इसलिए हमें ध्यान रखना है कि हमारे मुँह सदा परमेश्वर के प्रति धन्यवाद और दूसरों के प्रति अनुग्रह करने वाले शब्दों से ही भरे हों। - मार्विन विलियम्स


भले शब्द भले बनाए गए जीवन से ही आते हैं।

और जैसा पवित्र लोगों के योग्य है, वैसा तुम में व्यभिचार, और किसी प्रकार अशुद्ध काम, या लोभ की चर्चा तक न हो। और न निर्लज्ज़ता, न मूढ़ता की बातचीत की, न ठट्ठे की, क्योंकि ये बातें सोहती नहीं, वरन धन्यवाद ही सुना जाए। - इफिसियों 5:3-4

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:20-32
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई। 
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए। 
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो। 
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ। 
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है। 
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। 
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो। 
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो। 
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो। 
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है। 
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। 
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20



शनिवार, 6 सितंबर 2014

सुनें


   मुझे नहीं पता कि ऐसा सभी विवाह संबंधों में यह सत्य है या नहीं, लेकिन ना जाने क्यों, मेरी प्रवृति है कि मैं अकसर अपने आस-पास की बातों से ध्यान हटाकर केवल अपने ही विचारों पर अपना ध्यान केंद्रित कर लेता हूँ। यह मेरी पत्नि के लिए बहुत खिसिया देने वाला हो जाता है, विशेषकर तब जब वह मुझ से कोई आवश्यक बात कह रही होती है, और मैं अपने आप में ध्यान-मग्न हो जाता हूँ। जब उसे मेरी आँखों में वह खोई हुई से दशा दिखाई देती है, तो वह पूछती है, "जो मैं कह रही हूँ, तुमने उसमें से कुछ सुना भी है?"

   किसी भी संबंध का एक महत्वपूर्ण भाग है सुनना, विशेषकर प्रभु यीशु के साथ हमारे संबंधों में। यदि हम मसीह यीशु के हैं तो यह हमारा सौभाग्य है कि हम उससे बात-चीत बनाए रख सकते हैं, उसके वचन बाइबल तथा हमारे जीवनों में पवित्र आत्मा के कार्यों के द्वारा। प्रभु यीशु ने अपने आप को यूहन्ना 10 में "सच्चा चरवाहा" बताया और कहा कि उसकी भेड़ें उसकी आवाज़ सुनती हैं और उसे पहिचानती हैं। हम यह पहिचान सकते हैं कि हम अपने सच्चे चरवाहे और मार्गदर्शक प्रभु यीशु के प्रति ध्यान दे रहे हैं, जब उसके साथ हो रही हमारी बात-चीत हमारे अन्दर सदाचारिता, प्रेम, अनुग्रह तथा उसके चरित्र और गुणों के अनुरूप चरित्र तथा गुण उत्पन्न करती है और उन्हें बढ़ाती है। जो प्रभु यीशु पर अपना ध्यान लगाए रहते हैं, वे उसकी सुनते और मानते हैं, तथा उसकी समानता में भी परिवर्तित होते जाते हैं।

   जैसे अपने पति या पत्नि, या किसी मित्र की बात को ध्यान देकर सुनना यह दिखाता है कि हम उसे महत्व एवं मान्यता दे रहे हैं, उसी प्रकार प्रभु यीशु तथा उसके वचन बाइबल के प्रति भी ध्यान देना यह दिखाता है कि हमारे जीवनों में उसका महत्व एवं मान्यता है। इसलिए जीवन के उन विकर्षणों से जो हमारा ध्यान प्रभु यीशु से हटाते हैं, ध्यान हटाकर प्रभु की वाणी पर ध्यान लगाएं, उसकी सुनें और उससे प्रार्थना द्वारा सामर्थ माँगें कि उसके प्रति आज्ञाकारी रह सकें। - जो स्टोवैल


प्रभु यीशु का अनुसरण करने के लिए पहला कदम है उसकी सुनना।

मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं। - यूहन्ना 10:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:1-10
John 10:1 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है। 
John 10:2 परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है। 
John 10:3 उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले ले कर बुलाता है और बाहर ले जाता है। 
John 10:4 और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं। 
John 10:5 परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती। 
John 10:6 यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है।
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-11