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मंगलवार, 23 जून 2015

अधिकार और अधिकारी


   हमारे चर्च के लोग चर्च के नए भवन के निर्माण को लेकर बहुत उत्साहित थे। प्रति इतवार वे सब उस भवन के निर्माण के लिए ज़मीन में करी गई खुदाई को देखते; निर्माण कार्य बढ़ तो रहा था किंतु उसकी गति बहुत धीमी थी। इस धीमी गति का कारण था पानी - जो एक स्थान पर आवश्यकता से अधिक था तो दूसरे स्थान पर आवश्यकता से कम! खुदाई के एक किनारे पर पानी का एक भूमिगत सोता था, इसलिए जब तक कि निर्माण की देखरेख करने वाले इस बात से सन्तुष्ट नहीं हो जाते कि वह पानी किसी अन्य वाजिब स्थान की ओर भलि-भांतिमोड़ दिया गया है, वहाँ निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। दूसरी ओर नगरपालिका अधिकारियों का कहना था कि हमारे पास भवन में अनिवार्यतः लगाए जाने वाली आग बुझाने की सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त पानी का स्त्रोत नहीं था इसलिए जब तक पानी के नए पाईप डालकर उस सुविधा की आवश्यकतानुसार पर्याप्त दबाव के साथ सही मात्रा में पानी उपलब्ध नहीं हो जाता तब तक निर्माण आगे नहीं बढ़ सकता था। हम में से कोई नहीं चाहता था कि इन नियमों के कारण निर्माण का कार्य धीमा हो किंतु हमें यह भी एहसास था कि यदि नियमानुसार कार्य नहीं किया गया तो आगे चलकर हमें बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है, समय और संसाधन दोनों का भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है और भवन भी क्षतिग्रस्त हो सकता है।

   कई बार हम सरकारी और अन्य अधिकारियों को लेकर कुड़कुड़ाते हैं, परन्तु अधिकारियों और अधिकारों को उचित आदर देना परमेश्वर को आदर देना है। प्रेरित पौलुस की अधिकारियों के साथ अपनी ही समस्याएं रहती थीं, परन्तु फिर भी उसने परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें सिखाया, "हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं" और "...यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी" (रोमियों 13:1, 3)।

   हम मसीही विश्वासियों को भी परमेश्वर का पवित्र आत्मा यही सिखाता है - अधिकारियों और अधिकारों के प्रति स्वस्थ रवैया बनाए रखें; यह हमारे और हमारी मसीही गवाही के लिए भला होगा और इन सबसे बढ़कर हमारे द्वारा परमेश्वर की महिमा के लिए होगा। - डेव ब्रैनन


हमारे द्वारा अधिकारों को दिया गया आदर, परमेश्वर को आदर देता है।

परमेश्वर का नाम युगानुयुग धन्य है; क्योंकि बुद्धि और पराक्रम उसी के हैं। समयों और ऋतुओं को वही पलटता है; राजाओं का अस्त और उदय भी वही करता है; बुद्धिमानों को बुद्धि और समझ वालों को समझ भी वही देता है; - दानिय्येल 2:20-21

बाइबल पाठ: रोमियों 13:1-7
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 9-10
  • प्रेरितों 7:1-21


सोमवार, 22 जून 2015

सामर्थ


   नैशनल जियोग्राफिक सोसायटी द्वारा प्रकाशित एक संसार के नक्शे पर लिखा हुआ है, "पृथ्वी का वज़न 6.6 सिक्सट्रिल्यन टन है" और हमारी कलपना से भी परे यह इतना भारी वज़न किस पर स्थिर किया गया है - शून्य पर! यह पृथ्वी जिस पर हम निवास करते हैं और अपना जीवन जीते हैं, अपनी धुरी पर 1000 मील प्रति घंटा की गति से घूमते हुए अन्तरिक्ष में सूरज के चारों ओर भी चक्कर लगा रही है; ये सभी कार्य नियमित और निर्धारित रीति से अपने समयानुसार अविरल होते रहते हैं। लेकिन अपने स्वास्थ्य, रिश्तेदारियों, भुगतानों को करने आदि की चिन्ताओं में पड़े होने से हमें इन बातों को पहचानने तथा उनकी ओर ध्यान देने का समय ही नहीं मिल पाना हमारे लिए बड़ी सामान्य सी बात है। लेकिन परमेश्वर हमारी प्रत्येक बात और आवश्यकता का ध्यान करता है; उनका भी जिन्हें हम जानते भी नहीं हैं, और उनके लिए भी जो उसे जानते और मानते नहीं हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में पुराने नियम खण्ड के एक पात्र, अय्युब ने अपने स्वास्थ्य, परिवार और संपदा की आक्समिक और समझ से बाहर भारी हानि उठाने पर, परमेश्वर की सृष्टि में विदित उसके कार्यों और सामर्थ के द्वारा अपनी परिस्थिति को समझने की प्रयास किया। उसने कहा, "वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है" (अय्युब 26:7)। अय्युब ने बादलों को देखकर अचंभा किया जो इतना जल लिए रहते हैं फिर भी फटते नहीं (अय्युब 26:8); अय्युब ने उजियाले और अन्धकार के सिवाने पर विचार किया (अय्युब 26:10) और इन सब बातों को परमेश्वर की गति का महज़ छोर मात्र ही कहा (अय्युब 26:14)।

   सृष्टि ने अय्युब के प्रश्नों का उत्तर तो नहीं दिया, परन्तु उस सृष्टिकर्ता परमेश्वर की ओर, जो सहायता और आशा के साथ उसके प्रश्नों के उत्तर दे सकता था, उसका ध्यान अवश्य कर दिया।

   वह परमेश्वर जो इस सृष्टि को अपने शब्द से संभाले हुए है (इब्रानियों 1:3; कुलुस्सियों1:17), वही हमारे जीवनो को भी संभाले रहता है। वे अनुभव जो हमें "शून्य" या महत्वहीन प्रतीत होते हैं, वे सब परमेश्वर पिता की सामर्थ और प्रेम में होकर हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण और आवश्यक कार्य पूरा कर रहे हैं। परमेश्वर का कोई भी कार्य व्यर्थ अथवा महत्वहीन नहीं है; उसपर भरोसा रखिए, उसके समय की प्रतीक्षा कीजिए, उसे समर्पित रहिए। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


जब हम परमेश्वर की सृष्टि में दिखने वाली उसकी सामर्थ पर मनन करते हैं, हम अपने प्रति उसकी देखरेख की सामर्थ को भी पहिचानते हैं।

वह [प्रभु यीशु] उस की महिमा का प्रकाश, और उसके तत्‍व की छाप है, और सब वस्‍तुओं को अपनी सामर्थ के वचन से संभालता है: वह पापों को धोकर ऊंचे स्थानों पर महामहिमन के दाहिने जा बैठा। - इब्रानियों 1:3 

बाइबल पाठ: अय्युब 26:5-14
Job 26:5 बहुत दिन के मरे हुए लोग भी जलनिधि और उसके निवासियों के तले तड़पते हैं। 
Job 26:6 अधोलोक उसके साम्हने उघड़ा रहता है, और विनाश का स्थान ढंप नहीं सकता। 
Job 26:7 वह उत्तर दिशा को निराधार फैलाए रहता है, और बिना टेक पृथ्वी को लटकाए रखता है। 
Job 26:8 वह जल को अपनी काली घटाओं में बान्ध रखता, और बादल उसके बोझ से नहीं फटता। 
Job 26:9 वह अपने सिंहासन के साम्हने बादल फैला कर उसको छिपाए रखता है। 
Job 26:10 उजियाले और अन्धियारे के बीच जहां सिवाना बंधा है, वहां तक उसने जलनिधि का सिवाना ठहरा रखा है। 
Job 26:11 उसकी घुड़की से आकाश के खम्भे थरथरा कर चकित होते हैं। 
Job 26:12 वह अपने बल से समुद्र को उछालता, और अपनी बुद्धि से घपण्ड को छेद देता है। 
Job 26:13 उसकी आत्मा से आकाशमण्डल स्वच्छ हो जाता है, वह अपने हाथ से वेग भागने वाले नाग को मार देता है। 
Job 26:14 देखो, ये तो उसकी गति के किनारे ही हैं; और उसकी आहट फुसफुसाहट ही सी तो सुन पड़ती है, फिर उसके पराक्रम के गरजने का भेद कौन समझ सकता है?

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 6-8
  • प्रेरितों 6



रविवार, 21 जून 2015

कमज़ोर तथा बलवन्त


   कुछ वर्ष पहले की बात है, देर रात का समय था, मैं कुछ अन्य लोगों के साथ एक इमारत में लिफ्ट में था; हम सब थके हुए दिखाई दे रहे थे। लिफ्ट एक मंज़िल पर रुकी और एक कद्दावर व्यक्ति अन्दर आया, उसने दबी हुई पुरानी सी टोपी, कुचला हुआ पुराना सा कोट और घिसे हुए पुराने से जूते पहने हुए थे। लिफट के अन्दर आते ही उसने हम सब पर एक नज़र घुमाई और भारी गुर्राहट वाली आवाज़ में बोला, "पुरुषों, सलाम!" उसके मुँह से यह सुनते ही हम सब अपने कंधों को चौरस करके सीधे खड़े हो गए; हम सब उसके द्वारा किए गए संबोधन के अनुसार दिखने का प्रयास कर रहे थे।

   आज के दिन, जो पुरुषों के सम्मान को समर्पित है, आईये पुरुष होने के बारे में कुछ बातें करें। हम साहसी और सामर्थी बनने के प्रयास तो करते हैं, किंतु कई बार यह महज़ दिखावा होता है; अपने सारे प्रयासों के बावजूद हम अपने अन्दर इस बात को जानते हैं कि हम वैसे हैं नहीं जैसा दिखा रहे हैं। बाहर से दिखाई देने वाली हमारी निर्भीकता के पीछे अन्दर ही अन्दर हमारे अनेक डर, असुरक्षाएं और कमियाँ छुपी रहती हैं। हमारा बाहर से दिखाई देने वाला पौरुष कई बार छलावा मात्र ही होता है।

   प्रेरित पौलुस इस सच्चाई को स्वीकार करने से लजाया नहीं; उसने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी दूसरी पत्री में लिखा, "...हम भी तो उस में निर्बल हैं; परन्तु परमेश्वर की सामर्थ से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएंगे" (2 कुरिन्थियों 13:4)। यह केवल धर्मपरायणता दिखाने के लिए कही जाने वाली बात नहीं है वरन दीन कर देने वाली सच्चाई है। लेकिन साथ ही पौलुस ने यह भी लिखा कि "जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ" (1 कुरिन्थियों 16:13), जो एक विरोधाभास जैसा लगता है।

   यह कैसे हो सकता है कि हम स्वाभिक रूप से निर्बल भी हों और फिर पुराषार्थ करें तथा बलवन्त होते जाएं? यह केवल तब संभवव है जब हम, प्रेरित पुलुस के समान ही, अपने कमज़ोरियों को मानते हुए अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दें, और फिर उसकी सामर्थ तथा मार्गदर्शन के साथ, उसके कार्यों को करें, जिनके लिए वह हमें आवश्यक बल, बुद्धि और योग्यता प्रदान करेगा। प्रभु यीशु हम कमज़ोरों को भी बलवन्त बना देता है। - डेविड रोपर


सच्चा बल, आत्मा में परमेश्वर की सामर्थ का होना है।

इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं। - 2 कुरिन्थियों 12:10 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 16:9-13
1 Corinthians 16:9 क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।
1 Corinthians 16:10 यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्हारे यहां निडर रहे; क्योंकि वह मेरी नाईं प्रभु का काम करता है। 
1 Corinthians 16:11 इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्तु उसे कुशल से इस ओर पहुंचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्योंकि मैं उस की बाट जोह रहा हूं, कि वह भाइयों के साथ आए। 
1 Corinthians 16:12 और भाई अपुल्लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्छा न की, परन्तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा। 
1 Corinthians 16:13 जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42



शनिवार, 20 जून 2015

शरणस्थान


  एक दिन मैं एक बड़ी झील के किनारे घूम रही थी; चलते चलते मैं बड़े बड़े पत्थरों और चट्टानों के निकट पहुँची और मेरा ध्यान उन चट्टानों के बीच अन्दर को बने एक छोटे से सुरक्षित स्थान की ओर गया जहाँ एक छोटा सा पौधा जड़ पकड़े हुए उग रहा था। प्रतीत हो रहा था कि उस पौधे को बढ़ने के लिए ना केवल पर्याप्त धूप और पानी उपलब्ध हो रहा है, वरन उन चट्टानों के बीच अन्दर को होने के कारण एक और महत्वपूर्ण चीज़ भी मिल रही है - सुरक्षा। वहाँ किसी भी बारिश-तूफान या तेज़ हवा से उसके कोमल पत्तों को कोई हानि नहीं हो सकती थी।

   उस पौधे के उस सुरक्षित स्थान को देखकर मुझे प्रसिद्ध मसीही भजन, "यीशु मेरे शरणस्थान, तुझ में मेरा है कल्याण" स्मरण हो आया। उस भजन के शब्द उन बातों को व्यक्त करते हैं जिन्हें हम तब चाहते हैं जब हमारा सामना हमारे प्रति बुरे इरादे रखने वाले क्रूर लोगों से होता है जो परमेश्वर को कोई मान्यता या आदर नहीं देते (भजन 94:4-7)। जब हम किसी के बुरे इरादों का निशाना बनते हैं, हम भजनकार की गवाही: "परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है" (भजन 94:22) को स्मरण कर सकते हैं।

   एक चट्टान के समान हमारा परमेश्वर भरोसेमन्द और मज़बूत है; एक शरणस्थान के रूप में वह हमें संकटों और स्मस्याओं के टल जाने तक सुरक्षित रख सकता है। भजनकार हमें स्मरण दिलाता है: "वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी" (भजन 91:4)। जब परमेश्वर हमारा रक्षक है तो हमें इस बात से घबराने की आवश्यकता नहीं है कि दूसरे हमारा क्या बिगाड़ सकते हैं; हम हर बात और परिस्थिति में विश्वास रख सकते हैं कि जब भी परेशानियाँ आएंगी तब परमेश्वर हमें संभालेगा, हमारा शरणस्थान बना रहेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर अपने लोगों के लिए सदा का शरणस्थान है।

मेरा चट्टानरूपी परमेश्वर है, जिसका मैं शरणागत हूँ, मेरी ढाल, मेरा बचाने वाला सींग, मेरा ऊंचा गढ़, और मेरा शरण स्थान है, हे मेरे उद्धार कर्त्ता, तू उपद्रव से मेरा उद्धार किया करता है। - 2 शमूएल 22:3

बाइबल पाठ: भजन 94
Psalms 94:1 हे यहोवा, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, अपना तेज दिखा! 
Psalms 94:2 हे पृथ्वी के न्यायी उठ; और घमण्ड़ियों को बदला दे! 
Psalms 94:3 हे यहोवा, दुष्ट लोग कब तक, दुष्ट लोग कब तक डींग मारते रहेंगे? 
Psalms 94:4 वे बकते और ढ़िठाई की बातें बोलते हैं, सब अनर्थकारी बड़ाई मारते हैं। 
Psalms 94:5 हे यहोवा, वे तेरी प्रजा को पीस डालते हैं, वे तेरे निज भाग को दु:ख देते हैं। 
Psalms 94:6 वे विधवा और परदेशी का घात करते, और अनाथों को मार डालते हैं; 
Psalms 94:7 और कहते हैं, कि याह न देखेगा, याकूब का परमेश्वर विचार न करेगा। 
Psalms 94:8 तुम जो प्रजा में पशु सरीखे हो, विचार करो; और हे मूर्खों तुम कब तक बुद्धिमान हो जाओगे? 
Psalms 94:9 जिसने कान दिया, क्या वह आप नहीं सुनता? जिसने आंख रची, क्या वह आप नहीं देखता? 
Psalms 94:10 जो जाति जाति को ताड़ना देता, और मनुष्य को ज्ञान सिखाता है, क्या वह न समझाएगा? 
Psalms 94:11 यहोवा मनुष्य की कल्पनाओं को तो जानता है कि वे मिथ्या हैं। 
Psalms 94:12 हे याह, क्या ही धन्य है वह पुरूष जिस को तू ताड़ना देता है, और अपनी व्यवस्था सिखाता है, 
Psalms 94:13 क्योंकि तू उसको विपत्ति के दिनों में उस समय तक चैन देता रहता है, जब तक दुष्टों के लिये गड़हा नहीं खोदा जाता। 
Psalms 94:14 क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा, वह अपने निज भाग को न छोड़ेगा; 
Psalms 94:15 परन्तु न्याय फिर धर्म के अनुसार किया जाएगा, और सारे सीधे मन वाले उसके पीछे पीछे हो लेंगे। 
Psalms 94:16 कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन साम्हना करेगा? 
Psalms 94:17 यदि यहोवा मेरा सहायक न होता, तो क्षण भर में मुझे चुपचाप हो कर रहना पड़ता। 
Psalms 94:18 जब मैं ने कहा, कि मेरा पांव फिसलने लगा है, तब हे यहोवा, तेरी करूणा ने मुझे थाम लिया। 
Psalms 94:19 जब मेरे मन में बहुत सी चिन्ताएं होती हैं, तब हे यहोवा, तेरी दी हुई शान्ति से मुझ को सुख होता है। 
Psalms 94:20 क्या तेरे और दुष्टों के सिंसाहन के बीच सन्धि होगी, जो कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं? 
Psalms 94:21 वे धर्मी का प्राण लेने को दल बान्धते हैं, और निर्दोष को प्राणदण्ड देते हैं। 
Psalms 94:22 परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है। 
Psalms 94:23 और उसने उनका अनर्थ काम उन्हीं पर लौटाया है, और वह उन्हें उन्हीं की बुराई के द्वारा सत्यानाश करेगा; हमारा परमेश्वर यहोवा उन को सत्यानाश करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21



शुक्रवार, 19 जून 2015

लगे रहो


   बेसबॉल के ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों में से एक गैरी कार्टर, प्रभु यीशु के अनुयायी थे। अपने 19 वर्ष के खेल के जीवन में उन्होंने प्रतिदिन खेल को सही रीति से खेलने के लिए परमेश्वर में अपने विश्वास से सामर्थ और सहनशक्ति प्राप्त करी। कार्टर की, 57 वर्ष की आयु में, मस्तिष्क के कैंसर से मृत्यु के कुछ समयोपरांत वॉल स्ट्रीट जर्नल में उनके बारे में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उस लेख के लेखक एन्ड्रयु क्लैवन ने बताया कि कार्टर ने किस प्रकार उनके जीवन को प्रभावित किया था।

   1980 के द्शक के अन्त के भाग में क्लैवन अपने जीवन में निराशा से भरे हुए थे और आत्महत्या करने की सोच रहे थे। ऐसे समय उन्होंने में एक खेल के बाद कार्टर द्वारा दिए गए साक्षात्कार को सुना। कार्टर की टीम ने खेल में जीत प्राप्त करी थी और उस जीत में कार्टर का महत्वपूर्ण योगदान रहा था; अपनी बढ़ती हुई आयु और दुखते हुए घुटनों के बावजूद खेल की एक अति महत्वपूर्ण स्थिति में कार्टर ने ज़ोर लगाकर दौड़ लगाई जो उनकी टीम के लिए आवश्यक अंक जमा करने में सहायक हुई। जब इस घटना के बारे में साक्षात्कार लेने वाले ने उनसे पूछा कि अपने दुखते हुए घुटनों के बावजूद वे ऐसा कैसे कर सके तो कार्टर का उत्तर, जो क्लैवन ने सुना, कुछ इस प्रकार था: "कभी कभी जीवन में पीड़ा में भी बस लगे रहना पड़ता ही है।" कार्टर के इस साधारण से वाक्य ने निराश क्लैवन को बहुत प्रभावित किया, और उसे निराशा से निकाला; क्लैवन ने ठाना कि कार्टर के समान ही वह भी विपरीत परिस्थिति में अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वाह में लगा रह सकता है। निराशा से निकलने के बाद क्लैवन को उत्साह मिला, वह आगे बढ़ा और आगे चलकर मसीही विश्वासी भी बन गया।

   कार्टर ने जो बात उस साक्षात्कार में कही, जिससे क्लैवन निराशा से निकल सका और आगे बढ़ सका, वह परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत नामक पुस्तिका पर आधारित है -  विलापगीत 3:32। जीवन और परिस्थितियों के निर्वाह में हमें दुख, पीड़ा, कठिनाईयों आदि का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु इनके कारण हमें आत्मग्लानि और निराशा में गिरने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि जो परमेश्वर जो हमें इन विपरीत परिस्थितियों में आने देता है, वही हमें उन परिस्थितियों में अपने अनुग्रह और सामर्थ से परिपूर्ण भी करता है।

   जब परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह हमें उभारने और उत्साहित करने के लिए सदा उपलब्ध है, तो हर परिस्थिति में, चाहे वह विपरीत ही क्यों ना हो, हम अपनी हर ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए बस लगे रह सकते हैं। - डेव एग्नर


परमेश्वर या तो दुख से आपको बचाए रखेगा, अन्यथा उसे सहने की शक्ति आपको प्रदान करेगा।

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। - विलापगीत 3:22

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:1-3; 25-33
Lamentations 3:1 उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगने वाला पुरुष मैं ही हूं; 
Lamentations 3:2 वह मुझे ले जा कर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है; 
Lamentations 3:3 उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरुद्ध उठता रहता है। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37



गुरुवार, 18 जून 2015

महत्व एवं आदर


   किम पीक के पास एक अद्भुत प्रतिभा है - अद्वितीय स्मरण शक्ति! किम ने शेक्स्पीयर द्वारा लिखे गए सभी नाटक अक्षरशः स्मरण कर रखे हैं। एक बार शेक्सपीयर के एक नाटक की प्रस्तुति के दौरान एक अभिनेता अपनी पंक्ति का एक शब्द बोलना भूल गया; किम पीक तुरंत खड़ा होकर बोल उठा, "रुको!" उस अभिनेता ने क्षमा माँगी और कहा कि उसे लगा कि ना ही इस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा और ना ही किसी को कोई एतराज़ होगा। किम ने जवाब दिया, "शेक्स्पियर को अवश्य होता"।

   शब्द महत्वपूर्ण होते हैं; विशेषकर तब जब वे परमेश्वर के शब्द हों। मूसा ने इस्त्राएलियों को इस बारे में सचेत किया और लिखा, "जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना" (व्यवस्थाविवरण 4:2)। जब इस्त्राएली वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने को तैयार हो रहे थे तब मूसा ने उन्हें अनेक बार उनके प्रति लगातार बनी रहने वाली परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में स्मरण दिलाया; साथ ही उसने उन्हें उस वाचा के देश में परमेश्वर के वचन के पालन और उसके प्रति उनकी आज्ञाकारिता के बने रहने पर भी ज़ोर दिया जिससे कि उनके जीवन में आशीषें और समृद्धि बनी रहे (व्यवस्थाविवरण 4:39-40)। परमेश्वर की दृष्टि में उसके वचन का प्रत्येक नियम और निर्देश महत्वपूर्ण और पालन-योग्य है, कुछ भी नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता; और इस्त्रएली जो महत्व एवं आदर उसके वचन का करते वही इस बात का सूचक होता कि परमेश्वर का उनके जीवनों में कितना आदर एवं महत्व है।

   आज यही हमारे लिए भी उतना ही सार्थक है - जो महत्व एवं आदर हम परमेश्वर के वचन बाइबल का करते हैं वही इस बात का सूचक है कि हमारे जीवनों में परमेश्वर का क्या महत्व एवं आदर है। परमेश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने का अर्थ है उसके वचन को महत्व देना, सावधानी से उसका उपयोग करना और मन से उसका पालन करना; विचार करें कि आप ऐसा कर रहे हैं या नहीं! - मार्विन विलियम्स

परमेश्वर के वचन को किसी जोड़-तोड़ की नहीं, आज्ञाकारिता की आवश्यकता है।

जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। - यूहन्ना 14:21

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 4:1-10
Deuteronomy 4:1 अब, हे इस्राएल, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूं उन्हें सुन लो, और उन पर चलो; जिस से तुम जीवित रहो, और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ। 
Deuteronomy 4:2 जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना। 
Deuteronomy 4:3 तुम ने तो अपनी आंखों से देखा है कि बालपोर के कारण यहोवा ने क्या क्या किया; अर्थात जितने मनुष्य बालपोर के पीछे हो लिये थे उन सभों को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे बीच में से सत्यानाश कर डाला; 
Deuteronomy 4:4 परन्तु तुम जो अपने परमेश्वर यहोवा के साथ लिपटे रहे हो सब के सब आज तक जीवित हो। 
Deuteronomy 4:5 सुनो, मैं ने तो अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार तुम्हें विधि और नियम सिखाए हैं, कि जिस देश के अधिकारी होने जाते हो उस में तुम उनके अनुसार चलो। 
Deuteronomy 4:6 सो तुम उन को धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के साम्हने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है। 
Deuteronomy 4:7 देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? 
Deuteronomy 4:8 फिर कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसके पास ऐसी धर्ममय विधि और नियम हों, जैसी कि यह सारी व्यवस्था जिसे मैं आज तुम्हारे साम्हने रखता हूं? 
Deuteronomy 4:9 यह अत्यन्त आवश्यक है कि तुम अपने विषय में सचेत रहो, और अपने मन की बड़ी चौकसी करो, कहीं ऐसा न हो कि जो जो बातें तुम ने अपनी आंखों से देखीं उन को भूल जाओ, और वह जीवन भर के लिये तुम्हारे मन से जाती रहे; किन्तु तुम उन्हें अपने बेटों पोतों को सिखाना। 
Deuteronomy 4:10 विशेष कर के उस दिन की बातें जिस में तुम होरेब के पास अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने खड़े थे, जब यहोवा ने मुझ से कहा था, कि उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊं, जिस से वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें, और अपने लड़के बालों को भी यही सिखाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


बुधवार, 17 जून 2015

बिना जोखिम


   हाल ही में मेरे एक सहकर्मी ने अपना ऐसा अनुभव बताया, जिसे मैं व्यक्तिगत रीति से कभी अज़माना नहीं चाहूँगा - बन्जी जमपिंग का! उस सहकर्मी ने इसका जो विवरण दिया वह रोमाँचक भी था और डरावना भी। बंजी जमपिंग में सैकड़ों फुट ऊँचे पुल से कूदना होता है, और कूदने वाले के पैर पुल के साथ लंबी, मोटी और लचीली रस्सियों से बंधे होते हैं जिससे वह नीचे ज़मीन के पास तक तो पहुँच सकता है किंतु ज़मीन को छू नहीं सकता। मेरे सहकर्मी ने बताया कि सुरक्षा के लिए एक नहीं वरन दो मज़बूत पेटियाँ और रस्सियाँ उसके शरीर से बाँधी गई थीं, और यह सब कुछ बड़ी सावधानी तथा बारीक जाँच के बाद करवाया जाता है, लेकिन मजेदार समय बिताने वाली बातों की मेरी सूची में यह कदापि सम्मिलित नहीं है।

   जब मैं उस की बात सुन रहा था तो मुझे ध्यान आया कि मसीह यीशु पर विश्वास लाना भी किसी के लिए भी विश्वास कि अंधी छलाँग नहीं है। परमेश्वर ने भी मसीही विश्वास में आने में हमारी सुरक्षा के लिए दो उपाय प्रदान किए हैं, जो हमारे साथ सदा बने रहते हैं, जीवन के सबसे अंधकारमय पलों में भी। परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे" (इफिसियों 2:8-9)।

   परमेश्वर द्वारा दी गई इस दोहरी सुरक्षा - परमेश्वर का अनुग्रह और प्रभु यीशु द्वारा पूर्ण किए गए कार्य पर विश्वास, के द्वारा ही परमेश्वर के साथ हमारा संबंध सदा स्थिर और सुरक्षित रहता है। इन दोनों बातों के होते हुए, मसीह यीशु पर विश्वास लाने से मिलने वाला उद्धार कोई अंधविश्वास की छलांग नहीं है; वरन यह बिना किसी जोखिम के परमेश्वर और उसके वचन तथा उसके कभी ना बदलने वाले प्रेम एवं सुरक्षा पर भरोसा करने का अभ्यास है। - बिल क्राउडर


जब हम परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करते हैं, परमेश्वर की शांति स्वतः ही साथ प्राप्त हो जाती है।

जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है। - यूहन्ना 3:36 

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3