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मंगलवार, 15 मार्च 2016

पदवी तथा उपाधि


   प्रसिद्ध अन्तर्राष्ट्रीय प्रसारण सेवा बी.बी.सी. ने एक बार लोगों से महत्वपूर्ण प्रतीत होने वाले, किंतु अजीब और बहुत कम पहचाने जाने वाले कार्य पदवियों तथा उपाधियों के उदाहरण भेजने को कहा। पदवी तथा उपाधि के नाम भेजने वालों में एक महिला थी जिसने अपने कार्य की पदवी के लिए लिखा: "Underwater Ceramic Technician" (जलमगन चीनीमिट्टी तकनीशियन); वास्तव में वह महिला एक होटल में बर्तन धोने का काम करती थी! कभी कभी उपाधि या पदवी लगाकर कार्य को अधिक महत्वपूर्ण दिखाने के प्रयास किए जाते हैं।

   जब प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के वचन बाइबल में इफसुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में परमेश्वर द्वारा उन्हें दिए गए कुछ मसीही सेवकाई के वरदानों के बारे में लिखा (इफिसियों 4:11) तो उसका यह उद्देश्य कदापि नहीं था कि उसके द्वारा प्रयुक्त वे शीर्षक मसीही मण्दलियों में उत्कृष्ठ तथा आदरपूर्ण उपाधियाँ या पदवियाँ बना दी जाएं। पौलुस तो केवल यह समझा रहा था कि मसीही मण्डली के सर्वांगीण उत्थान के लिए भिन्न सेवकाईयों की आवश्यकता है, जिसके लिए परमेश्वर ने भिन्न सेवकों को नियुक्त किया है। किसी भी सेवक की सेवकाई किसी अन्य से बड़ी या छोटी, अथवा अधिक महत्वपूर्ण या कम महत्वपूर्ण नहीं है; वरन सबकी सेवकाई का एक ही उद्देश्य है कि मिल-जुल कर सेवा द्वारा मसीह की देह अर्थात मसीह की मण्डली उन्नति पाए।

   जो बात अधिक महत्वपूर्ण थी वह थी इन वरदानों का उद्देश्य और प्रयोग, ना कि उन्हें पदवी के समान उपयोग करके मण्डली में ऊँच-नीच की भावना लाना। पौलुस ने यह समझाने के लिए लिखा, "जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए" (इफिसियों 4:12)। मसीही विश्वासियों की मण्डली में हमारी पदवी अथवा उपाधि का कोई महत्व नहीं है। महत्व है तो इस बात का कि हम प्रभु के लोगों के विश्वास को स्थिर और दृढ़ करने में परमेश्वर द्वारा निर्धारित अपनी भूमिका भली-भांति निभाते हैं या नहीं। जब हम परमेश्वर के वचन बाइबल के मापदण्डों के अनुसार अपनी कार्य के प्रभावी एवं उपयोगी होने को मापने लगते हैं तो फिर इसका कोई महत्व नहीं रह जाता कि हमारी पदवी या उपाधि क्या है, या वह है भी अथवा नहीं, या फिर कब और कैसे उसे किसी अन्य में परिवर्तित कर दिया गया है, या किसी अन्य को हमारे स्थान पर रख दिया गया है।

   परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम और समर्पण के कारण हमारा कर्तव्य तथा कार्य है कि हम अपने साथी मसीही विश्वासियों को उभारने, संवारने और परमेश्वर की निकटता में बढ़ाने मे अपना योगदान देते रहें; और स्वर्ग में परमेश्वर हमें अपने आँकलन के अनुसार प्रतिष्ठित करेगा: "...धन्य हे अच्‍छे और विश्वासयोग्य दास, तू थोड़े में विश्वासयोग्य रहा; मैं तुझे बहुत वस्‍तुओं का अधिकारी बनाऊंगा अपने स्‍वामी के आनन्द में सम्भागी हो" (मत्ती 25:21)। - सी. पी. हिया


परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए वरदान हमारे द्वारा दूसरों की सेवकाई के लिए हैं।

क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया। - इफिसियों 2:10

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:11-16
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। 
Ephesians 4:13 जब तक कि हम सब के सब विश्वास, और परमेश्वर के पुत्र की पहिचान में एक न हो जाएं, और एक सिद्ध मनुष्य न बन जाएं और मसीह के पूरे डील डौल तक न बढ़ जाएं। 
Ephesians 4:14 ताकि हम आगे को बालक न रहें, जो मनुष्यों की ठग-विद्या और चतुराई से उन के भ्रम की युक्तियों की, और उपदेश की, हर एक बयार से उछाले, और इधर-उधर घुमाए जाते हों। 
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं। 
Ephesians 4:16 जिस से सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 26-27
  • मरकुस 14:27-53


सोमवार, 14 मार्च 2016

भटकने वाले


   उत्कृष्ट तथा सुप्रसिद्ध मसीही भजन "Come, Thou Fount of Every Blessing" (हे प्रभु! आशीष के सोते) सन 1757 में 22 वर्षीय रॉबर्ट रॉबिन्सन द्वारा लिखा गया था। इस भजन की एक पंक्ति है जो हमेशा ही मेरा ध्यान खींचती है और मुझे आत्म-निरीक्षण करने के लिए बाध्य करती है; यह पंक्ति का भाव है, "तुझसे भटक जाने, अपने परमेश्वर से दूर हो जाने की मेरी प्रवृति बनी रहती है, मैं यह जानता हूँ।" मुझे लगता है कि यह बात मेरे लिए भी उतनी ही सत्य है जितनी कि रॉबर्ट रॉबिन्सन के लिए थी। कितनी ही बार मैं देखता हूँ कि बजाए इसके कि मैं अपने उद्धाकर्ता पर मन लगाए रखूँ जिसने मेरे उद्धार के लिए अपने प्राण बलिदान किए, जो मुझ से असीम प्रेम करता है, मेरा मन संसार की बातों में इधर-उधर भागता भटकता फिरता है; और मैं तथा रॉबर्ट रॉबिन्सन इस बात में अकेले नहीं हैं।

   लेकिन साथ ही यह भी सत्य है कि भटकने के उन समयों में हमारे हृदय की मूल भावना परमेश्वर को छोड़ कर उस से दूर चले जाने की नहीं होती। हम तो बस प्रेरित पौलुस की सी दशा में होते हैं, जब पौलुस ने कहा: "क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं" (रोमियों 7:19)। ऐसे भटक जाने स्थिति में हमारी तीव्र इच्छा, हमें संभाल कर रख सकने वाले अपने प्रभु परमेश्वर की ओर वापस मुड़ जाने की होनी चाहिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार अपने ऐसे ही संघर्ष को लेकर लिखता है, "मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे" (भजन 119:10)।

   कभी-कभी चाहे हमारे मन परमेश्वर के निकट आने के लालयित हों, जीवन की परिस्थितियाँ या संसार के आकर्षण हमें परमेश्वर से तथा उसके वचन से दूर ले जाते हैं। लेकिन हमें कितना अधिक धन्यवादी होना चाहिए उस धीरजवन्त, दयालु, प्रेमी पिता परमेश्वर के लिए जिसका अनुग्रह हम पर बना रहता है और हमारे उससे भटक जाने की दशा में भी उसका प्रेम हमारे प्रति कम नहीं होता, वरन वह साधन करता है कि हम उसके पास लौट आएं, उसकी संगति में बने रहें। - बिल क्राउडर


हमारी भटकने की प्रवृति से कहीं अधिक सामर्थी है परमेश्वर की हमें खोजने और अपने पास ले आने की प्रवृति।

मैं खोई हुई भेड़ की नाईं भटका हूं; तू अपने दास को ढूंढ़ ले, क्योंकि मैं तेरी आज्ञाओं को भूल नहीं गया। - भजन 119:176

बाइबल पाठ: भजन 119:9-16
Psalms 119:9 जवान अपनी चाल को किस उपाय से शुद्ध रखे? तेरे वचन के अनुसार सावधान रहने से। 
Psalms 119:10 मैं पूरे मन से तेरी खोज मे लगा हूं; मुझे तेरी आज्ञाओं की बाट से भटकने न दे! 
Psalms 119:11 मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं। 
Psalms 119:12 हे यहोवा, तू धन्य है; मुझे अपनी विधियां सिखा! 
Psalms 119:13 तेरे सब कहे हुए नियमों का वर्णन, मैं ने अपने मुंह से किया है। 
Psalms 119:14 मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानों सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूं। 
Psalms 119:15 मैं तेरे उपदेशों पर ध्यान करूंगा, और तेरे मार्गों की ओर दृष्टि रखूंगा। 
Psalms 119:16 मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 23-25
  • मरकुस 14:1-26


रविवार, 13 मार्च 2016

सामर्थ


   अक्टूबर 2012 के अन्तिम दिनों में अमेरिका के उत्तर-पूर्व क्षेत्र में एक प्रचण्ड तूफान आया जिससे उस इलाके में भीषण विनाश और बाढ़ आई। उस तूफान के कारण 80 लाख से अधिक लोगों को बिना बिजली के रहना पड़ा जिससे भोजन वस्तुओं और पानी की भारी कमी हो गई और यातायात के साधन रुक गए। तेज़ हवाओं के कारण बहुत से घर गिर गए, रिहायशी इलाकों में मलबा और रास्तों पर रेत भर गया और जीवन अस्त-व्यस्त हो गया।

   प्राकृतिक तूफान के समान ही कोई व्यक्तिगत त्रासदी भी हमें अन्दर से ध्वस्त, असहाय और अन्धकार से भरा हुआ छोड़ सकती है। लेकिन ऐसे कठिन समयों में परमेश्वर अपने वचन बाइबल से अपने बच्चों को आश्वस्त करता है "वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है" (यशायाह 40:29)।

   हमारे कठिन समयों में, जब हमें लगता है कि हम अपने जीवन और सामर्थ के न्यून्तम बिन्दु पर पहुंच गए हैं, वहाँ भी हम अपने परमेश्वर पिता में आश्वस्त होकर उस पर भरोसा रख सकते हैं, और उससे सामर्थ पा सकते हैं क्यों कि उसने हम से वायदा किया है, "परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे" (यशायाह 40:31)।

   जीवन के प्रत्येक तूफान में परमेश्वर ही हमारा बल और सामर्थ बना रहता है, हमें सुरक्षित लिए चलता है, पार लगाता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


आश्रय की सामर्थ का वास्तविक प्रमाण तूफान आने पर ही होता है।

मत डर, क्योंकि मैं तेरे संग हूं, इधर उधर मत ताक, क्योंकि मैं तेरा परमेश्वर हूं; मैं तुझे दृढ़ करूंगा और तेरी सहायता करूंगा, अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्हाले रहूंगा। - यशायाह 41:10

बाइबल पाठ: यशायाह 40:25-31
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुद्धि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 20-22
  • मरकुस 13:21-37


शनिवार, 12 मार्च 2016

अनोखी तथा अनूठी


   परमेश्वर के वचन बाइबल का स्वर्णिम नियम - जैसा आप चाहते हैं कि आप के साथ हो, आप भी वैसा ही दुसरों के साथ करें, अन्य कई धर्मों में भी पाया जाता है। तो फिर प्रभु यीशु द्वारा कही गई इस बात में क्या अनोखा या अनूठा है?

   यह अनोखा या अनूठापन है प्रभु यीशु द्वारा प्रयुक्त "इस कारण" में; जो हमारे प्रति परमेश्वर पिता द्वारा दिखाए गए प्रेम और उदारता को इस नियम के निभाने के साथ जोड़ता है। प्रभु यीशु ने कहा: "इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है" (मत्ती 7:12)।

   हम में से कोई भी ऐसा नहीं है जो उस सत्य को पूरी तरह से निभाता है जिसे वह भली-भांति जानता है: हम औरों से वैसा प्रेम नहीं करते जैसा परमेश्वर ने हम से किया है; जिस प्रेम को प्रभु यीशु ने अपने जीवन से, और हमें पापों से मुक्ति का मार्ग प्रदान करने के लिए अपने बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा प्रमाणित तथा प्रदर्शित किया है।

   हमारे प्रेमी और उदार स्वर्गीय परमेश्वर पिता ने हमारे प्रति अपने प्रेम की परिपूर्णता प्रभु यीशु में होकर प्रगट की है; और अब वह चाहता है कि प्रभु यीशु पर विश्वास लाने और पापों की क्षमा प्राप्त करने वाले उसके सभी बच्चे अपने पिता के इस प्रेमी और उदार स्वभाव को अपने जीवनों से दिखाएं - वे भी औरों से वैसा ही प्रेम रखें जैसा वे चाहते हैं कि और लोग उन से करें। क्योंकि परमेश्वर ने हम से पहले होकर प्रेम किया, इसलिए हमें भी औरों के प्रति पहले होकर प्रेम दिखाना है (1 यूहन्ना 4:19-21)।

   हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करें, परन्तु ऐसा करने के लिए आज्ञा देकर वह हमें अपनी ही युक्तियों एवं साधनों पर नहीं छोड़ देता, वरन उस आज्ञापालन के लिए योग्य सामर्थ तथा मार्गदर्शन भी देता है - और मसीही विश्वास की यह बात, परमेश्वर के साथ पिता और सन्तान का रिश्ता तथा परमेश्वर पिता से उसकी आज्ञाकारिता में रहने के लिए लगातार मिलती रहने वाला सामर्थ तथा मार्गदर्शन एक ऐसी अनोखी तथा अनूठी बात है जो अन्य किसी भी धर्म में नहीं पाई जाती। हमारा परमेश्वर पिता हमारी सहायता के लिए सदैव तत्पर और तैयार रहता है, हमें बस उसे पुकारने भर की देर है। - डेविड रोपर


बाइबल के स्वर्णिम नियम को केवल स्मरण ही ना रखें, उसे जीवन में लागू भी करें।

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिस उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। 1 यूहन्ना 4:19-21

बाइबल पाठ: मत्ती 7:1-12
Matthew 7:1 दोष मत लगाओ, कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए। 
Matthew 7:2 क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा; और जिस नाप से तुम नापते हो, उसी से तुम्हारे लिये भी नापा जाएगा। 
Matthew 7:3 तू क्यों अपने भाई की आंख के तिनके को देखता है, और अपनी आंख का लट्ठा तुझे नहीं सूझता?
Matthew 7:4 और जब तेरी ही आंख मे लट्ठा है, तो तू अपने भाई से क्योंकर कह सकता है, कि ला मैं तेरी आंख से तिनका निकाल दूं। 
Matthew 7:5 हे कपटी, पहले अपनी आंख में से लट्ठा निकाल ले, तब तू अपने भाई की आंख का तिनका भली भांति देखकर निकाल सकेगा।
Matthew 7:6 पवित्र वस्तु कुत्तों को न दो, और अपने मोती सूअरों के आगे मत डालो; ऐसा न हो कि वे उन्हें पांवों तले रौंदें और पलट कर तुम को फाड़ डालें।
Matthew 7:7 मांगो, तो तुम्हें दिया जाएगा; ढूंढ़ो, तो तुम पाओगे; खटखटाओ, तो तुम्हारे लिये खोला जाएगा। 
Matthew 7:8 क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो ढूंढ़ता है, वह पाता है और जो खटखटाता है, उसके लिये खोला जाएगा। 
Matthew 7:9 तुम में से ऐसा कौन मनुष्य है, कि यदि उसका पुत्र उस से रोटी मांगे, तो वह उसे पत्थर दे? 
Matthew 7:10 वा मछली मांगे, तो उसे सांप दे? 
Matthew 7:11 सो जब तुम बुरे हो कर, अपने बच्‍चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता अपने मांगने वालों को अच्छी वस्तुएं क्यों न देगा? 
Matthew 7:12 इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 17-19
  • मरकुस 13:1-20


शुक्रवार, 11 मार्च 2016

ज़ुबान


   अमेरिका के भूतपुर्व राष्ट्रपति हैरी ट्रूमैन का एक नियम था - आवेश या क्रोध में आकर लिखे गए हर पत्र को भेजे जाने से पहले 24 घंटे उनकी मेज़ पर ही रखे रहना होता था। यदि 24 घंटे के शांत होने के समय के बीत जाने के बाद भी वे उस संबंध में वैसा ही सोचते थे जैसा पत्र लिखने के समय, तब तो पत्र भेज दिया जाता, अन्यथा वह मेज़ की एक दराज़ में डाल दिया जाता। उनके राष्ट्रपति काल के समाप्त होने तक, अनभेजे पत्रों से एक बड़ी दराज़ भर गई थी।

   हैरी टूमैन तो 24 घंटे का संयम रखते थे; किंतु तत्कालिक संचार के इस युग में यदि हम 24 मिनिट का भी बुद्धिमता पूर्ण संयम बरत लें तो ना जाने कितनी बातों में शर्मिंदा होने या उनके लिए पछतावा करने से बच सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने मानव इतिहास तथा संसार भर में बार-बार दोहराए जाने वाले प्रसंग - अनियंत्रित ज़ुबान से होने वाले नुकसानों के संबंध में लिखा: "पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है" (याकूब 3:8)।

   जब हम क्रोध या आवेश में आकर बोलते हैं, या फिर कानफूसी द्वारा बात इधर से उधर पहुँचाते हैं, तो हम अपने आप को परमेश्वर द्वारा दी गई नियंत्रण रेखा की सीमा के बाहर पाते हैं। उस संयम का ध्यान करके जो परमेश्वर हमारे प्रति दिखाता है, हमें अपनी ज़ुबान, कलम या कीबोर्ड द्वारा किसी को कुछ कहने या लिखने से पहले वैसे ही संयम का प्रयास करना चाहिए और परमेश्वर का उसके संयम के लिए धन्यवादी होना चाहिए। जब कभी हम अनियंत्रित होकर कुछ कहते या करते हैं, हम मानव होने के कारण अपनी कमज़ोरी और टूटेपन का एहसास दुसरों को करवाते हैं।

   यदि मसीह यीशु में विश्वास लाने से होने वाले परिवर्तन को हमें दूसरों को दिखाना है, तो अपनी ज़ुबान को नियंत्रित कर पाने से अधिक कुछ और दिखाने की शायद कोई आवश्यकता नहीं होगी। यदि हम अपनी ज़ुबान को नियंत्रित रख कर परमेश्वर के समान प्रेम और संयम को दुसरों के प्रति दिखाते हैं तो अवश्य ही लोगों का ध्यान खेंचने पाएंगे। - रैंडी किल्गोर


जो अपने मुंह को वश में रखता है वह अपने प्राण को विपत्तियों से बचाता है। - नीतिवचन 21:23

यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। - याकूब 1:26

बाइबल पाठ: याकूब 3:1-11
James 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे। 
James 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है। 
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं। 
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं। 
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है। 
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है। 
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं। 
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है। 
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं। 
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं। 
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए। 
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 14-16
  • मरकुस 12:28-44


गुरुवार, 10 मार्च 2016

मार्गदर्शक


   एक मसीही स्कूल में अपने शिक्षक और खेल प्रशिक्षक होने के कार्यकाल में मैं किशोरों के साथ वार्तालाप करने और उन्हें एक उद्देश्यपूर्ण मसीही जीवन जीने की शिक्षा देने, ऐसा जीवन जो परमेश्वर के तथा दूसरों के प्रति प्रेम से भरा हो, में बहुत रुचि लेता था। मेरा उद्देश्य था कि उन्हें सारा जीवन परमेश्वर के भय में जीना सिखा सकूँ। लेकिन ऐसा होना तब ही संभव था जब वे परमेश्वर के पवित्र-आत्मा की सहायता से उन शिक्षाओं तथा मसीही विश्वास को अपने जीवन का अभिन्न अंग बना लें। जो ऐसा नहीं करते थे, मैंने उन्हें मसीही शिक्षकों और अभिभावकों के प्रभाव से निकलने के बाद जीवन की गलत राहों में भटकते हुए भी देखा।

   यही बात परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई राजा योआश कि कहानी से भी हमें देखने को मिलती है। जब तक योआश अपने बचपन से ही, परमेश्वर के भय में रहने वाले और उसके प्राणों को बचाने वाले तथा उसके सलाहकार यहोयादा के कहे अनुसार चलता रहा, वह परमेश्वर को आदर देने वाला जीवन जीता रहा (2 इतिहास 24:11, 14)। परन्तु समस्या यह थी कि योआश नें यहोयादा के समान परमेश्वर के आदर और भय को अपने जीवन का अंग नहीं बनाया था। यहोयादा की मृत्यु के पश्चात, योआश ने परमेश्वर के भवन को छोड़ दिया (पद 18) और अन्य देवी-देवताओं के पीछे चल निकला। वह बिगड़ कर इतना बुरा हो गया कि जब यहोयादा के पुत्र ने उसे इस संबंध में चिताया, तो उसने अपने प्राणों को बचाने वाले के पुत्र को ही घात करवा दिया (पद 20-22)।

   मसीह यीशु की समानता और मसीही विश्वास में बढ़ना सिखाने के लिए हमारे जीवनों में किसी योग्य मार्गदर्शक का होना हमारे लिए बहुत लाभकारी होता है। लेकिन और भी बेहतर होता है प्रभु यीशु को व्यक्तिगत रीति से जानना, उसे अपना जीवन समर्पित करना और पवित्र-आत्मा के मार्गदर्शन में जीवन व्यतीत करना (गलतियों 5:16)। - डेव ब्रैनन


दूसरों के मसीही विश्वास से प्रोत्साहन मिलता है; स्वयं मसीही विश्वास में आ जाने से जीवन बदल जाता है।

पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। - गलतियों 5:16

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 24:1-2; 15-22
2 Chronicles 24:1 जब योआश राजा हुआ, तब वह सात वर्ष का था, और यरूशलेम में चालीस वर्ष तक राज्य करता रहा; उसकी माता का नाम सिब्या था, जो बेर्शेबा की थी। 
2 Chronicles 24:2 और जब तक यहोयादा याजक जीवित रहा, तब तक योआश वह काम करता रहा जो यहोवा की दृष्टि में ठीक है। 
2 Chronicles 24:15 परन्तु यहोयादा बूढ़ा हो गया और दीर्घायु हो कर मर गया। जब वह मर गया तब एक सौ तीस वर्ष का था। 
2 Chronicles 24:16 और दाऊदपुर में राजाओं के बीच उसको मिट्टी दी गई, क्योंकि उसने इस्राएल में और परमेश्वर के और उसके भवन के विषय में भला किया था। 
2 Chronicles 24:17 यहोयादा के मरने के बाद यहूदा के हाकिमों ने राजा के पास जा कर उसे दण्डवत की, और राजा ने उनकी मानी। 
2 Chronicles 24:18 तब वे अपने पितरों के परमेश्वर यहोवा का भवन छोड़कर अशेरों और मूरतों की उपासना करने लगे। सो उनके ऐसे दोषी होने के कारण परमेश्वर का क्रोध यहूदा और यरूशलेम पर भड़का। 
2 Chronicles 24:19 तौभी उसने उनके पास नबी भेजे कि उन को यहोवा के पास फेर लाएं; और इन्होंने उन्हें चिता दिया, परन्तु उन्होंने कान न लगाया। 
2 Chronicles 24:20 और परमेश्वर का आत्मा यहोयादा याजक के पुत्र जकर्याह में समा गया, और वह ऊंचे स्थान पर खड़ा हो कर लोगों से कहने लगा, परमेश्वर यों कहता है, कि तुम यहोवा की आज्ञाओं को क्यों टालते हो? ऐसा कर के तुम भाग्यवान नहीं हो सकते, देखो, तुम ने तो यहोवा को त्याग दिया है, इस कारण उसने भी तुम को त्याग दिया। 
2 Chronicles 24:21 तब लोगों ने उस से द्रोह की गोष्ठी कर के, राजा की आज्ञा से यहोवा के भवन के आंगन में उसको पत्थरवाह किया। 
2 Chronicles 24:22 यों राजा योआश ने वह प्रीति भूल कर जो यहोयादा ने उस से की थी, उसके पुत्र को घात किया। और मरते समय उसने कहा यहोवा इस पर दृष्टि कर के इसका लेखा ले।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 11-13
  • मरकुस 12:1-27


बुधवार, 9 मार्च 2016

सच्चा रखवाला


   ऊटाह प्रांत के पहाड़ों की पद-यात्रा करते हुए एक व्यक्ति को जंगली बकरियों के एक झुंड में एक बकरी कुछ अजीब सी दिखी। और निकटता से देखने पर पता चला कि वह बकरी थी ही नहीं, वरन बकरी के भेस में एक आदमी था। जब अधिकारियों ने उस आदमी से इस बारे में पूछा तो उसने कहा कि वह अपने कपड़ों पर बकरी के रोएं चिपका कर बकरी का भेस भर कर यह जाँच रहा था कि शिकार पर जाने के लिए ऐसे भेस बदलना कितना कारगर रहेगा।

   उस शिकारी द्वारा इस प्रकार भेस बदल कर जानवरों को धोखा देने के प्रयास से मुझे प्रभु यीशु द्वारा कहे गए शब्द स्मरण हो आए: "झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर में फाड़ने वाले भेडिए हैं। उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं? इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है" (मत्ती 7:15-17)। झूठे मसीही शिक्षक अपने जीवनों में परमेश्वर के आत्मा के फलों (गलतियों 5:22-23) को नहीं दिखाते; वरन, इसके विपरीत वे शरीर की लालसाओं के अनुसार चलते हैं और अधिकारियों को तुच्छ जानते हैं (2 पतरस 2:10)। वे ढीठ, स्वार्थी और लालची होते हैं (पद 10, 14); वे चिकनी-चुपड़ी बातों के द्वारा लोगों को भ्रमित करके उन्हें अपने लाभ के लिए इस्तेमाल करते हैं (पद 3)। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि ऐसे शिक्षक स्वयं भी विनाश की ओर बढ़ रहे हैं और अपने साथ अनेकों ऐसे लोगों को भी विनाश में ले जाएंगे जो बेपरवाह होकर उन्हें तथा उनकी शिक्षाओं को बाइबल के अनुसार परखते तथा जाँचते नहीं हैं (1 थिस्सुलुनीकियों 5:21)।

   अच्छे चरवाहे, प्रभु यीशु मसीह ने अपने लाभ के बदले, सब की भलाई के लिए अपने प्राण बलिदान कर दिए। प्रभु नहीं चाहता कि उसके अनुयायी, उसकी भेड़ें, किसी के भी द्वारा किसी गलत शिक्षा से बहकाई जाएं। वह चाहता है कि हम उन्हें पहचान लें जो धोखा देते हैं और उन धोखेबाज़ों की शिक्षाओं की बजाए, प्रभु के वचन बाइबल के अनुसार चलें, अपनी आत्माओं के सच्चे रखवाले प्रभु यीशु के प्रति समर्पित रहें। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


मसीह के नाम से धोखा देने वाले अनेक हैं किंतु सच्चा मसीह यीशु केवल एक ही है।

सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो। - 1 थिस्सुलुनीकियों 5:21 

बाइबल पाठ: 2 पतरस 2:1-3; 12-19
2 Peter 2:1 और जिस प्रकार उन लोगों में झूठे भविष्यद्वक्ता थे उसी प्रकार तुम में भी झूठे उपदेशक होंगे, जो नाश करने वाले पाखण्‍ड का उद्घाटन छिप छिपकर करेंगे और उस स्‍वामी का जिसने उन्हें मोल लिया है इन्कार करेंगे और अपने आप को शीघ्र विनाश में डाल देंगे। 
2 Peter 2:2 और बहुतेरे उन की नाईं लुचपन करेंगे, जिन के कारण सत्य के मार्ग की निन्‍दा की जाएगी। 
2 Peter 2:3 और वे लोभ के लिये बातें गढ़ कर तुम्हें अपने लाभ का कारण बनाएंगे, और जो दण्‍ड की आज्ञा उन पर पहिले से हो चुकी है, उसके आने में कुछ भी देर नहीं, और उन का विनाश ऊंघता नहीं। 
2 Peter 2:12 पर ये लोग निर्बुद्धि पशुओं ही के तुल्य हैं, जो पकड़े जाने और नाश होने के लिये उत्पन्न हुए हैं; और जिन बातों को जानते ही नहीं, उन के विषय में औरों को बुरा भला कहते हैं, वे अपनी सड़ाहट में आप ही सड़ जाएंगे। 
2 Peter 2:13 औरों का बुरा करने के बदले उन्‍हीं का बुरा होगा: उन्हें दिन दोपहर सुख-विलास करना भला लगता है; यह कलंक और दोष है- जब वे तुम्हारे साथ खाते पीते हैं, तो अपनी ओर से प्रेम भोज कर के भोग-विलास करते हैं। 
2 Peter 2:14 उन ही आंखों में व्यभिचार बसा हुआ है, और वे पाप किए बिना रूक नहीं सकते: वे चंचल मन वालों को फुसला लेते हैं; उन के मन को लोभ करने का अभ्यास हो गया है, वे सन्‍ताप के सन्तान हैं। 
2 Peter 2:15 वे सीधे मार्ग को छोड़कर भटक गए हैं, और बओर के पुत्र बिलाम के मार्ग पर हो लिये हैं; जिसने अधर्म की मजदूरी को प्रिय जाना। 
2 Peter 2:16 पर उसके अपराध के विषय में उलाहना दिया गया, यहां तक कि अबोल गदही ने मनुष्य की बोली से उस भविष्यद्वक्ता को उसके बावलेपन से रोका। 
2 Peter 2:17 ये लोग अन्धे कुंए, और आन्‍धी के उड़ाए हुए बादल हैं, उन के लिये अनन्त अन्धकार ठहराया गया है। 
2 Peter 2:18 वे व्यर्थ घमण्‍ड की बातें कर कर के लुचपन के कामों के द्वारा, उन लोगों को शारीरिक अभिलाषाओं में फंसा लेते हैं, जो भटके हुओं में से अभी निकल ही रहे हैं। 
2 Peter 2:19 वे उन्हें स्‍वतंत्र होने की प्रतिज्ञा तो देते हैं, पर आप ही सड़ाहट के दास हैं, क्योंकि जो व्यक्ति जिस से हार गया है, वह उसका दास बन जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33