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मंगलवार, 15 सितंबर 2015

चमकता जीवन


   अन्तराष्ट्रीय बास्केट-बॉल संघ के अनुसार, बास्केट-बॉल संसार का दूसरा सबसे लोकप्रीय खेल है, और अनुमान लगाया गया है कि संसार भर में इसके 45 करोड़ चाहने वाले हैं। अमेरिका में मार्च महीने में आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्पर्धाओं में अकसर प्रसिद्ध बास्केट-बॉल प्रशिक्षक जॉन वुडेन को स्मरण किया जाता है। लॉस ऐन्जेलेस के कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में अपने 27 वर्षों के दौरान वुडन द्वारा प्रशिक्षित टीमों ने अभूतपूर्व 10 बार राष्ट्रीय प्रतियोगिताएं जीतीं। लेकिन आज भी वुडेन को, जिनका देहांत 2010 में हुआ, उनकी इन उपलब्धियों से अधिक उनके व्यक्तित्व के लिए स्मरण किया जाता है।

   जॉन वुडेन मसीही विश्वासी थे और अपने मसीही विश्वास को जी कर दिखाते थे; प्रतियोगिता जीतने से आसक्त वातावरण में भी वे दूसरों के प्रति एक सच्ची लगन और चिंता रखते थे। अपनी जीवनी, "They Call Me Coach" में उन्होंने लिखा, "मैंने सदा ही यह जताने का प्रयास किया है बास्केटबॉल सर्वोपरि नहीं है। हमारे उस संपूर्ण जीवन के सामने, जो हम जीते हैं, उसका महत्व बहुत कम है। एक ही जीवन है जो सदा विजयी रहता है, और वह है वो जीवन जो उद्धारकर्ता प्रभु के हाथ में समर्पित कर दिया गया है। जब तक यह समर्पण ना हो, हमारा जीवन मार्ग एक गोल चक्कर में चलते जाने के समान निरर्थक है, हमें कहीं नहीं पहुँचा सकता है।"

   प्रभु यीशु ने कहा, "उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें" (मत्ती 5:16)। जॉन वुडेन ने अपने जीवन के हर कार्य से परमेश्वर को आदर दिया, और उनके चमकते हुए जीवन का उदाहरण आज हमें भी यही करने के लिए प्रेरित करता है। - डेविड मैक्कैसलैण्ड


अपने प्रकाश को चमकने दें - चाहे आप कोने में लगी मोमबत्ती हों अथवा पहाड़ी पर खड़ा प्रकाशस्तंभ।

परन्तु धर्मियों की चाल उस चमकती हुई ज्योति के समान है, जिसका प्रकाश दोपहर तक अधिक अधिक बढ़ता रहता है। - नीतिवचन 4:18

बाइबल पाठ: मत्ती 5:1-16
Matthew 5:1 वह इस भीड़ को देखकर, पहाड़ पर चढ़ गया; और जब बैठ गया तो उसके चेले उसके पास आए। 
Matthew 5:2 और वह अपना मुंह खोल कर उन्हें यह उपदेश देने लगा, 
Matthew 5:3 धन्य हैं वे, जो मन के दीन हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:4 धन्य हैं वे, जो शोक करते हैं, क्योंकि वे शांति पाएंगे। 
Matthew 5:5 धन्य हैं वे, जो नम्र हैं, क्योंकि वे पृथ्वी के अधिकारी होंगे। 
Matthew 5:6 धन्य हैं वे जो धर्म के भूखे और प्यासे हैं, क्योंकि वे तृप्त किये जाएंगे। 
Matthew 5:7 धन्य हैं वे, जो दयावन्‍त हैं, क्योंकि उन पर दया की जाएगी। 
Matthew 5:8 धन्य हैं वे, जिन के मन शुद्ध हैं, क्योंकि वे परमेश्वर को देखेंगे। 
Matthew 5:9 धन्य हैं वे, जो मेल करवाने वाले हैं, क्योंकि वे परमेश्वर के पुत्र कहलाएंगे। 
Matthew 5:10 धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्‍हीं का है। 
Matthew 5:11 धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। 
Matthew 5:12 आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था।
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए। 
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता। 
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। 
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 22-24
  • 2 कुरिन्थियों 8


सोमवार, 14 सितंबर 2015

इन्कार


   हवाई अड्डे में चलते हुए मेरा ध्यान भीड़ में भागते हुए एक व्यक्ति की टोपी पर लिखे वाक्य की ओर गया, जहाँ दो शब्दों में लिखा था, "सब अस्वीकारें!" मैं सोचने लगा कि इसका तात्पर्य क्या हो सकता है? क्या अपने दोष को कभी स्वीकार ना करें? जीवन के सुख-विलास का इन्कार करें? या कुछ और? मैं उन दो शब्दों के रहस्य को समझने के लिए अपना सिर खुजाने लगा।

   प्रभु यीशु के एक अनुयायी शमौन पतरस ने भी कुछ इन्कार किया था; प्रभु यीशु के पकड़वाए जाने के बाद, उसके कठिन समय में पतरस ने तीन बार इस बात का इन्कार किया कि वह उसे जानता है (लूका 22:57, 58, 60)। इससे उसे बाद में ऐसी तीव्र ग्लानि और हृदय-वेदना हुई कि वह बाहर जाकर फूट-फूटकर रोने लगा (पद 62)।

   लेकिन पतरस के उस इन्कार के कारण प्रभु यीशु का उसके प्रति प्रेम कम नहीं हुआ। वैसे ही आज हमारे द्वारा आत्मिक कमज़ोरी के क्षणों में करी गई बुराईयों और इन्कारों से हमारे प्रति प्रभु यीशु का प्रेम कम नहीं होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह नबी ने लिखा, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:22-23)।

   हम इस बात से आश्वस्त हो सकते हैं कि चाहे हम विफल हो जाएं, हमारा प्रभु परमेश्वर कभी नहीं बदलता, वह हमसे सदा उस प्रेम और करुणा के साथ व्यवहार करता है जो अनन्तकाल की है, कभी कम नहीं होती, कभी टलती नहीं। - बिल क्राउडर


हमारा सिद्ध ना होना, परमेश्वर की करुणा का हम पर बने रहने का कारण है।

यदि हम अविश्वासी भी हों तौभी वह विश्वास योग्य बना रहता है, क्योंकि वह आप अपना इन्कार नहीं कर सकता। - 2 तिमुथियुस 2:13

बाइबल पाठ: लूका 22:54-62
Luke 22:54 फिर वे उसे पकड़कर ले चले, और महायाजक के घर में लाए और पतरस दूर ही दूर उसके पीछे पीछे चलता था। 
Luke 22:55 और जब वे आंगन में आग सुलगाकर इकट्ठे बैठे, तो पतरस भी उन के बीच में बैठ गया। 
Luke 22:56 और एक लौंडी उसे आग के उजियाले में बैठे देखकर और उस की ओर ताककर कहने लगी, यह भी तो उसके साथ था। 
Luke 22:57 परन्तु उसने यह कहकर इन्कार किया, कि हे नारी, मैं उसे नहीं जानता। 
Luke 22:58 थोड़ी देर बाद किसी और ने उसे देखकर कहा, तू भी तो उन्‍हीं में से है: पतरस ने कहा; हे मनुष्य मैं नहीं हूं। 
Luke 22:59 कोई घंटे भर के बाद एक और मनुष्य दृढ़ता से कहने लगा, निश्‍चय यह भी तो उसके साथ था; क्योंकि यह गलीली है। 
Luke 22:60 पतरस ने कहा, हे मनुष्य, मैं नहीं जानता कि तू क्या कहता है! वह कह ही रहा था कि तुरन्त मुर्ग ने बांग दी। 
Luke 22:61 तब प्रभु ने घूमकर पतरस की ओर देखा, और पतरस को प्रभु की वह बात याद आई जो उसने कही थी, कि आज मुर्ग के बांग देने से पहिले, तू तीन बार मेरा इन्कार करेगा। 
Luke 22:62 और वह बाहर निकलकर फूट फूट कर रोने लगा।

एक साल में बाइबल: नीतिवचन 19-21; 2 कुरिन्थियों 7

रविवार, 13 सितंबर 2015

अनुकर्णीय


   जब मैं अपने पिता के बारे में सोचती हूँ तो मुझे यह कथन स्मरण हो आता है: "उन्होंने मुझे कहा नहीं कि जीवन कैसे जीना है; उन्होंने मुझे जीवन जी कर दिखाया।" मेरी युवाव्यस्था में मैंने अपने पिता को परमेश्वर के साथ चलते हुए देखा। वे प्रति इतवार प्रातः की चर्च सभा में सम्मिलित होते थे, और वहाँ परमेश्वर के वचन बाइबल का व्यसकों को अध्ययन करवाते थे, चर्च में आए पैसे के हिसाब में सहायता करते थे, और चर्च का अगुवा होने की सभी ज़िम्मेदारियाँ निभाते थे। चर्च के बाहर वे नियमित रीति से बाइबल अध्ययन करते थे और बाइबल तथा सुसमाचार के बारे में विश्वासयोग्यता के साथ चर्चा किया करते थे। मैंने उन्हें अपने कार्यों के द्वारा परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करते हुए देखा।

   बाइबल में यहूदा के राजा आसा का वृतान्त आया है, जिसने अपने जीवन में परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण और भक्ति को अपना आदर्श बनाया (2 इतिहास 14:2)। उसने अपने राज्य में से मूर्तियों को हटवाया, परमेश्वर की वेदी को पुनःस्थापित किया तथा अपनी प्रजा के लोगों की परमेश्वर के साथ वाचा बाँधने में अगुवाई करी (2 इतिहास 15:8-12)। आसा के पुत्र यहोशापात ने भी अपने पिता का अनुसरण किया और "वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था..." (2 इतिहास 17:4)। यहोशापात ने भी अपने राज्य से मूर्तिपूजा को साफ किया (पद 6), तथा परमेश्वर की बातों को प्रजा को सिखाने के लिए याजकों और लेवियों को यहूदा के सभी नगरों में भेजा (पद 7-9)।

   यहोशापात का शासन काल उसके पिता के शासन काल के समान था; यहोशापात ने अपने पिता आसा के भक्तिपूर्ण उदाहरण का संपूर्ण रीति से अनुकरण किया। लेकिन इस से भी बढ़कर यह था कि वह परमेश्वर की बातों में लौलीन हो गया, "यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया..." (पद 6)। आज यदि आप अनुकरण के लिए किसी उदाहरण को ढूँढ़ रहे हैं, तो परमेश्वर के वचन बाइबल में आपको अनेक उदाहरण मिल जाएंगे; सर्वोत्त्म उदाहरण है हमारे पिता परमेश्वर का, जो अनुकरण के सर्वथा योग्य हमारा पिता है।


जब हम परमेश्वर को अपना पिता कहते हैं और उसके पुत्र के समान जीवन व्यतीत करते हैं, हम अपने परमेश्वर का आदर करते हैं।

और आसा ने वही किया जो उसके परमेश्वर यहोवा की दृष्टि में अच्छा और ठीक था। - 2 इतिहास 14:2

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 17:1-10
2 Chronicles 17:1 और उसका पुत्र यहोशापात उसके स्थान पर राज्य करने लगा, और इस्राएल के विरुद्ध अपना बल बढ़ाया। 
2 Chronicles 17:2 और उसने यहूदा के सब गढ़ वाले नगरों में सिपाहियों के दल ठहरा दिए, और यहूदा के देश में और एप्रैम के उन नगरों में भी जो उसके पिता आसा ने ले लिये थे, सिपाहियों की चौकियां बैठा दीं। 
2 Chronicles 17:3 और यहोवा यहोशापात के संग रहा, क्योंकि वह अपने मूलपुरुष दाऊद की प्राचीन चाल सी चाल चला और बाल देवताओं की खोज में न लगा। 
2 Chronicles 17:4 वरन वह अपने पिता के परमेश्वर की खोज में लगा रहता था और उसी की आज्ञाओं पर चलता था, और इस्राएल के से काम नहीं करता था। 
2 Chronicles 17:5 इस कारण यहोवा ने रज्य को उसके हाथ में दृढ़ किया, और सारे यहूदी उसके पास भेंट लाया करते थे, और उसके पास बहुत धन और उसका वैभव बढ़ गया। 
2 Chronicles 17:6 और यहोवा के मार्गों पर चलते चलते उसका मन मगन हो गया; फिर उसने यहूदा से ऊंचे स्थान और अशेरा नाम मूरतें दूर कर दीं। 
2 Chronicles 17:7 और उसने अपने राज्य के तीसरे वर्ष में बेन्हैल, ओबद्याह, जकर्याह, नतनेल और मीकायाह नामक अपने हाकिमों को यहूदा के नगरों में शिक्षा देने को भेज दिया। 
2 Chronicles 17:8 और उनके साथ शमायाह, नतन्याह, जबद्याह, असाहेल, शमीरामोत, यहोनातान, अदोनिय्याह, तोबिय्याह और तोबदोनिय्याह, नाम लेवीय और उनके संग एलीशामा और यहोराम नामक याजक थे। 
2 Chronicles 17:9 सो उन्होंने यहोवा की व्यवस्था की पुस्तक अपने साथ लिये हुए यहूदा में शिक्षा दी, वरन वे यहूदा के सब नगरों में प्रजा को सिखाते हुए घूमे। 
2 Chronicles 17:10 और यहूदा के आस पास के देशों के राज्य राज्य में यहोवा का ऐसा डर समा गया, कि उन्होंने यहोशापात से युद्ध न किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6


शनिवार, 12 सितंबर 2015

सामर्थ


   मुक्केबाज़ी, कुश्ती आदि खेल-स्पर्धाएं ऐसी स्पर्धाएं हैं जिनमें खिलाड़ी व्यक्तिगत रीति से अपनी सामर्थ को दूसरे की सामर्थ से बढ़कर प्रदर्शित करने का प्रयास करते हैं; उस खेल और स्पर्धा में अपने आप को सबसे बढ़कर सामर्थी दिखाना चाहते हैं।

   परमेश्वर की महिमा का एक पहलू है उसकी सामर्थ। किंतु वह अपनी सामर्थ प्रदर्शित कैसे करता है? वह ऐसा करने के लिए हमारी आँखों के सामने तारगणों और नक्षत्र-समूहों को पुनःव्यवस्थित नहीं करता, और ना ही अपनी इच्छानुसार चाहे जब सूर्य का रंग बदल देता है; वह आकाश में कौंधती हुई बिजली को वहीं अपने स्थान पर जमा देने के द्वारा भी अपनी सामर्थ प्रगट नहीं करता है, जबकि इनमें से कोई भी कार्य उसके लिए असंभव या कठिन नहीं है, वह जब भी चाहे ऐसा बड़ी सरलता से कर सकता है। लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि वह अपनी सामर्थ हम मनुष्यों के सामने कैसे प्रगट करता है - हमारे जैसे ज़रूरतमन्द लोगों के प्रति सेंत-मेंत अपने प्रेम और अनुग्रह को प्रकट करने के द्वारा। परमेश्वर अपने प्रेम करने वालों के पक्ष में अपनी सामर्थ दिखाने के अवसर ढूँढ़ता रहता है, "देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए..." (2 इतिहास 16:9)।

   परमेश्वर की कार्यविधि का यह नमूना उसके वचन में आरंभ से अन्त तक दिखाई देता है। इस्त्राएलियों को मिस्त्र की गुलामी से निकालकर लाते समय लाल-समुद्र को दो भाग करने, उन्हें बियाबान में भी मन्ना द्वारा भोजन प्रदान करके, प्रभु यीशु के कुँवारी से जन्म लेने और उनके मृतकों में से पुनरुत्थान आदि बातों के द्वारा परमेश्वर की सामर्थ सदा ही लोगों की सहायता, सुरक्षा और आशीष के कार्यों में होकर प्रदर्शित हुई है।

   इस बात में आश्वस्त रहें कि परमेश्वर हमारे जीवन में आने वाली चुनौतियों में होकर अपने आप को हमारे प्रति सामर्थी दिखाने में आनन्दित होता है; लेकिन जब परमेश्वर अपनी सामर्थ हमारे जीवनों में प्रदर्शित करे, तो उसे धन्यवाद देने और उसकी महिमा करने में पीछे ना रहें। - जो स्टोवैल


परमेश्वर की प्रत्येक प्रतिज्ञा उसकी बुद्धिमता, प्रेम और सामर्थ पर आधारित है।

तू बड़ी युक्ति करने वाला और सामर्थ के काम करने वाला है; तेरी दृष्टि मनुष्यों के सारे चालचलन पर लगी रहती है, और तू हर एक को उसके चालचलन और कर्म का फल भुगताता है। - यिर्मयाह 32:19 

बाइबल पाठ: 2 इतिहास 16:6-13
2 Chronicles 16:6 तब राजा आसा ने पूरे यहूदा देश को साथ लिया और रामा के पत्थरों और लकड़ी को, जिन से बासा काम करता था, उठा ले गया, और उन से उसने गेवा, और मिस्पा को दृढ़ किया। 
2 Chronicles 16:7 उस समय हनानी दर्शी यहूदा के राजा आसा के पास जा कर कहने लगा, तू ने जो अपने परमेश्वर यहोवा पर भरोसा नहीं रखा वरन अराम के राजा ही पर भरोसा रखा है, इस कारण अराम के राजा की सेना तेरे हाथ से बच गई है। 
2 Chronicles 16:8 क्या कूशियों और लूबियों की सेना बड़ी न थी, और क्या उस में बहुत ही रथ, और सवार न थे? तौभी तू ने यहोवा पर भरोसा रखा था, इस कारण उसने उन को तेरे हाथ में कर दिया। 
2 Chronicles 16:9 देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। तूने यह काम मूर्खता से किया है, इसलिये अब से तू लड़ाइयों में फंसा रहेगा। 
2 Chronicles 16:10 तब आसा दशीं पर क्रोधित हुआ और उसे काठ में ठोंकवा दिया, क्योंकि वह उसकी ऐसी बात के कारण उस पर क्रोधित था। और उसी समय से आसा प्रजा के कुछ लोगों को पीसने भी लगा। 
2 Chronicles 16:11 आदि से ले कर अन्त तक आसा के काम यहूदा और इस्राएल के राजाओं के वृत्तान्त में लिखे हैं। 
2 Chronicles 16:12 अपने राज्य के उनतीसवें वर्ष में आसा को पांव का रोग हुआ, और वह रोग अत्यन्त बढ़ गया, तौभी उसने रोगी हो कर यहोवा की नहीं वैद्यों ही की शरण ली। 
2 Chronicles 16:13 निदान आसा अपने राज्य के एकतालीसवें वर्ष में मर के अपने पुरखाओं के साथ सो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 13-15
  • 2 कुरिन्थियों 5


शुक्रवार, 11 सितंबर 2015

प्रेम


   एक चर्च के सामने मैंने एक वाक्य लिखा देखा, जो संबंधों के विष्य में प्रेर्णा देने के लिए मुझे एक उत्तम आदर्श वाक्य लगा: "प्रेम स्वीकार करो; प्रेम बाँट दो; इसे पुनः दोहराओ।"

   वह सर्वोत्तम प्रेम जो हम ग्रहण कर सकते हैं परमेश्वर का प्रेम है। परमेश्वर ने हमसे इतना प्रेम किया कि अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे लिए जीने, मरने और हमारा छुटकारा करने के लिए दे दिया (1 यूहन्ना 4:9)। प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास द्वारा हम परमेश्वर की सन्तान होने का गौरव प्राप्त करते हैं: "परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं" (यूहन्ना 1:12), अर्थात जब हम परमेश्वर के पुत्र प्रभु यीशु मसीह को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करते हैं, हम परमेश्वर के प्रेम को भी स्वीकार करते हैं; इसी प्रकार जब हम प्रभु यीशु में उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को बाँटते हैं तो हम परमेश्वर के प्रेम को भी बाँटते हैं।

   हमारे प्रति दिखाया गया परमेश्वर का प्रेम हमें औरों से प्रेम करने की प्रेर्णा देता है। उसी प्रेम के अन्तर्गत हम दूसरों की सहायता करते हैं, उन्हें सिखाते हैं, उन्हें प्रोत्साहित करते हैं, उन्हें डाँटते भी हैं, उनके साथ आनन्दित भी होते हैं और उनके दुखों में दुखी भी होते हैं। हमारे प्रभु यीशु ने हमें अपने शत्रुओं से भी प्रेम करना सिखाया है, "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है" (मत्ती 5:44-45)। कुछ परिस्थितियों में प्रेम बाँटना चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन जो प्रेम हम ने परमेश्वर से पाया है, उसकी सामर्थ से तथा हमारे प्रभु यीशु मसीह के उदाहरण से हम ऐसा कर सकते हैं।

   हमारे आज के जीवन के लिए एक अच्छी योजना है: प्रेम स्वीकार करो; प्रेम बाँट दो; इसे पुनः दोहराओ। - ऐनी सेटास


प्रेम स्वीकार करो; प्रेम बाँट दो; इसे पुनः दोहराओ।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-19
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है।
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

एक साल में बाइबल: 

  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4


गुरुवार, 10 सितंबर 2015

सराहना और आलोचना


   हाल ही में हुए एक अध्ययन में 200,000 लोगों से साक्षात्कार में पूछा गया कि उनको और बेहतर कार्य करने से क्या रोकता है और अध्ययन के नतीजों से पता चला कि इस प्रश्न के उत्तरों की सूचि में सबसे ऊपर था कार्यकर्ताओं के अधिकारियों द्वारा उनके कार्य की सराहना एवं उनमें अधिकारियों के विश्वास की कमी। इस शोध ने दिखाया कि सराहना पाना एक बुनियादी मानवीय आवश्यकता है।

   प्रेरित पौलुस भी संभवतः कुरिन्थियों के मसीही विश्वासियों कि इस मूलभूत आवश्यकता को जानता था, इसीलिए उन्हें सुधारने के लिए लिखी गई पत्री का आरंभ, उनका आत्मिक अगुवा होने के कारण पौलुस ने परमेश्वर द्वारा उनके जीवन में दिखाए जाने वाले अनुग्रह के लिए धन्यवाद करने के साथ किया, फिर पौलुस ने कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों की सराहना करी, उसके बाद ही उसने अनुशासन के लिए कठोर शब्दों का प्रयोग किया।

   कभी कुरिन्थुस के ये मसीही विश्वासी परमेश्वर से दूर थे, लेकिन अब प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान द्वारा समस्त संसार को उपलब्ध पापों की क्षमा को परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा प्राप्त करके वे परमेश्वर की निकटता में बढ़ रहे थे। प्रभु यीशु के साथ बने संबंध में हो कर वे उससे अपने आत्मिक जीवन के लिए सामर्थ प्राप्त कर रहे थे जिससे उनका आध्यात्मिक विकास हो रहा था (1 कुरिन्थियों 1:4-7)। कुरिन्थुस के मसीही विश्वासियों के जीवन में किए जा रहे परमेश्वर के कार्य के लिए पौलुस लगातार और विचारपूर्वक परमेश्वर का धन्यवादी रहता था। क्योंकि कुरिन्थुस के वे विश्वासी उनके लिए पौलुस के इस प्रेम, विश्वास और सराहना को भली-भांति जानते थे, इसलिए उन्होंने उससे आलोचना के कठोर शब्द भी स्वीकार कर लिए।

   जब भी हम परमेश्वर के आज्ञाकारी लोगों के संपर्क में आते हैं, और हमें उनके जीवन में कुछ कमियों का आभास होता है तो आलोचना से पहले उनके लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें, उनके द्वारा परमेश्वर के लिए हो रहे कार्यों की सराहना करें, और उसके बाद ही किसी आलोचना के लिए कोई कठोर शब्द प्रयोग करें। - मारविन विलियम्स


प्रशंसा ऊँची आवाज़ में करें; आलोचना धीमी आवाज़ में मृदुता के साथ करें।

वह वहां पहुंचकर, और परमेश्वर के अनुग्रह को देखकर आनन्‍दित हुआ; और सब को उपदेश दिया कि तन मन लगाकर प्रभु से लिपटे रहो। - प्रेरितों 11:23

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 1:1-9
1 Corinthians 1:1 पौलुस की ओर से जो परमेश्वर की इच्छा से यीशु मसीह का प्रेरित होने के लिये बुलाया गया और भाई सोस्थिनेस की ओर से। 
1 Corinthians 1:2 परमेश्वर की उस कलीसिया के नामि जो कुरिन्थुस में है, अर्थात उन के नाम जो मसीह यीशु में पवित्र किए गए, और पवित्र होने के लिये बुलाए गए हैं; और उन सब के नाम भी जो हर जगह हमारे और अपने प्रभु यीशु मसीह के नाम की प्रार्थना करते हैं।
1 Corinthians 1:3 हमारे पिता परमेश्वर और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे।
1 Corinthians 1:4 मैं तुम्हारे विषय में अपने परमेश्वर का धन्यवाद सदा करता हूं, इसलिये कि परमेश्वर का यह अनुग्रह तुम पर मसीह यीशु में हुआ। 
1 Corinthians 1:5 कि उस में हो कर तुम हर बात में अर्थात सारे वचन और सारे ज्ञान में धनी किए गए। 
1 Corinthians 1:6 कि मसीह की गवाही तुम में पक्की निकली। 
1 Corinthians 1:7 यहां तक कि किसी वरदान में तुम्हें घटी नहीं, और तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने की बाट जोहते रहते हो। 
1 Corinthians 1:8 वह तुम्हें अन्‍त तक दृढ़ भी करेगा, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिन में निर्दोष ठहरो। 
1 Corinthians 1:9 परमेश्वर सच्चा है; जिसने तुम को अपने पुत्र हमारे प्रभु यीशु मसीह की संगति में बुलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-9
  • 2 कुरिन्थियों 3


बुधवार, 9 सितंबर 2015

मार्गदर्शक


   लन्डन के वेस्टमिनिस्टर में स्थित तथा आम तौर से बिगबैन के नाम से विख्यात विशाल घड़ी के घण्टों के शानदार स्वरों से बहुत से लोग परिचित हैं। हम में से कितनों के घरों में ऐसी घड़ियाँ होंगी जो प्रत्येक घण्टे पर उन्ही स्वरों को बजाती हैं। यह माना जाता है कि बिगबैन के वे स्वर संगीतकार जॉर्ज फ्रेड्रिक हैन्डल द्वारा परमेश्वर की स्तुति के लिए लिखे गए संकीर्तन Messaih में से लिए गए हैं। बिगबैन घड़ी से जुड़ी एक अन्य विशेषता है उसके अन्दर के कमरे में खुदे हुए समय की विशेषता के सूचक ये शब्द:
इस पूरे घण्टे भर,
प्रभु मेरा मार्गदर्शक रह;
क्योंकि आपकी सामर्थ से संभाला गया,
कोई पग कभी फिसल नहीं सकता।
ये शब्द हमारे जीवनों के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन की निरन्तर आवश्यकता का एक अच्छा अनुस्मारक हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र राजा दाऊद ने इस बात को पहिचाना कि उसे जीवन की चुनौतियों का सामना करने में निरन्तर परमेश्वर के मार्गदर्शन की आवश्यकता है। दाऊद ने भजन 25 में लिखा, "मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं" (भजन 25:5)। दाऊद परमेश्वर से निरन्तर सीखते रहने वाला उसका अनुयायी था, और हर बात में उसकी ओर देखता रहता था। उसके मन की यही इच्छा रहती थी कि वह पूरे भरोसे के साथ सदा परमेश्वर पर निर्भर बना रहे।

   प्रभु परमेश्वर के प्रति ऐसी ही भावना हमारी भी होनी चाहिए। हम अपने दिन का आरंभ तो दिन के लिए परमेश्वर की सहायता माँगकर करते हैं, लेकिन दिन के कार्य आरंभ होने के साथ ही हमारा ध्यान परमेश्वर से हटकर अन्य बातों पर लग जाता है, और फिर हम परमेश्वर के मार्गदर्शन के अनुसार नहीं वरन अपनी या किसी अन्य मनुष्य की समझ के अनुसार निर्णय लेने और कार्य करने लग जाते हैं।

   प्रभु हमारी विनती है आप हमारी सहायता करें जिससे हम सदैव इस बात में बने रहें कि, "प्रभु मेरा मार्गदर्शक रह"। - डेनिस फिशर


प्रातः के आरंभ से लेकर रात्रि के अन्त तक मसीह यीशु को अपने विचारों में प्रथम एवं अन्तिम बनाए रखें।

यहोवा मेरा बल और भजन का विषय है, और वही मेरा उद्धार भी ठहरा है; मेरा ईश्वर वही है, मैं उसी की स्तुति करूंगा, (मैं उसके लिये निवासस्थान बनाऊंगा ), मेरे पूर्वजों का परमेश्वर वही है, मैं उसको सराहूंगा। - निर्गमन 15:2

बाइबल पाठ: भजन 25:1-11
Psalms 25:1 हे यहोवा मैं अपने मन को तेरी ओर उठाता हूं। 
Psalms 25:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं ने तुझी पर भरोसा रखा है, मुझे लज्जित होने न दे; मेरे शत्रु मुझ पर जयजयकार करने न पाएं। 
Psalms 25:3 वरन जितने तेरी बाट जोहते हैं उन में से कोई लज्जित न होगा; परन्तु जो अकारण विश्वासघाती हैं वे ही लज्जित होंगे।
Psalms 25:4 हे यहोवा अपने मार्ग मुझ को दिखला; अपना पथ मुझे बता दे। 
Psalms 25:5 मुझे अपने सत्य पर चला और शिक्षा दे, क्योंकि तू मेरा उद्धार करने वाला परमेश्वर है; मैं दिन भर तेरी ही बाट जोहता रहता हूं। 
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं। 
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2