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शुक्रवार, 6 नवंबर 2015

समय और परिस्थिति


   1960 के दशक में लोक संगीत बैन्ड दि बायर्ड्स का एक गाना, टर्न! टर्न! टर्न! बहुत पसन्द किया गया। यह गाना बिलबोर्ड के सर्वोच्च 100 गानों में सम्मिलित हुआ और संसार भर में लोकप्रीय हो गया। इस गाने के शब्द लोगों को बहुत पसन्द आए। रोचक बात यह है कि इस गाने की अन्तिम पंक्ति को छोड़ बाकी सारा गाना परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक नामक पुस्तक से लिया गया है।

   सभोपदेशक के लेखक ने लिखा, "हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है" (सभोपदेशक 3:1)। लेखक आगे मानव अनुभव की कुछ बातों की सूचि देता है: जन्म और मरण, लाभ और हानि, रोना और हंसना, जश्न और मातम, आदि। जैसे प्रकृति में मौसम बदलते हैं वैसे ही मानव जीवन में अनुभव बदलते हैं; हमारी परिस्थितियाँ सदा एक सी नहीं रहतीं।

   कभी हम अपने जीवन के परिवर्तनों का स्वागत करते हैं, किंतु यदि परिवर्तन हानि या दुख के साथ आए तो उसे स्वीकार करना कष्टदायी होता है। लेकिन समय या परिस्थिति कोई भी हो, परमेश्वर ही है जो कभी नहीं बदलता, और ना ही उसके उद्देश्य अथवा योजनाएं बदलती हैं (मलाकी 3:6)।

   क्योंकि परमेश्वर, उसकी बातों, उसकी शिक्षाओं, उसकी योजनाओं, उसके उद्देश्यों में कभी परिवर्तन नहीं आता इसलिए हम जीवन की बदलती परिस्थितियों और समयों में उस पर अटूट भरोसा बनाए रख सकते हैं। हम सदा आश्वस्त रह सकते हैं कि उसकी उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहती है (भजन 46:1), उसकी शान्ति हमारे हृदयों को विचलित नहीं होने देती (फिलिप्पियों 4:7) और उसका प्रेम हमारे मनों को सुरक्षित रखता है (रोमियों 8:39)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर का अपरिवर्तनीय स्वभाव जीवन की बदलती परिस्थितियों में हमारी सुरक्षा है।

क्योंकि मैं यहोवा बदलता नहीं; इसी कारण, हे याकूब की सन्तान तुम नाश नहीं हुए। - मलाकी 3:6

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 3:1-8
Ecclesiastes 3:1 हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है। 
Ecclesiastes 3:2 जन्म का समय, और मरन का भी समय; बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:3 घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:4 रोने का समय, और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:5 पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गले लगाने का समय, और गले लगाने से रूकने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:6 ढूंढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:7 फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:8 प्रेम का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3


गुरुवार, 5 नवंबर 2015

पुरुस्कार


   हमारे चर्च में बच्चों के लिए मसीही सेवकाई में हम जब बच्चों को कोई अच्छा व्यवहार करते देखते हैं तो उन्हें एक कार्ड देते हैं। बच्चे उन कार्डों को जमा करते रहते हैं और फिर उन कार्डों के बदले में, अपने अच्छे आचरण और व्यवहार के लिए पुरुस्कार ले लेते हैं। इसका उद्देश्य है किसी बुरे आचरण अथवा दुर्व्यवहार की बजाए, अच्छे आचरण और व्यवहार पर उनका ध्यान केंद्रित रखना। इस सेवकाई के अन्तर्गत जब चर्च के एक अगुवे ने 11 वर्षीय टायरी को एक कार्ड देना चाहा तो उसने कहा, "जी नहीं; धन्यवाद, मुझे कार्ड नहीं चाहिए। मैं केवल अच्छा व्यवहार बनाए रखना चाहता हूँ, चाहे उसके लिए मुझे कोई पुरुस्कार मिले या ना मिले।" उसके लिए सही कार्य करना ही अपने आप में एक पुरुस्कार था। उसका चरित्र अच्छा है और वह अच्छी बातों के साथ जीना चाहता है, चाहे उसे इसके लिए पुरुस्कार मिले या नहीं मिले।

   हम मसीही विश्वासियों को भी एक दिन पुरुस्कार मिलेंगे। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए" (2 कुरिन्थियों 5:10)। लेकिन यह प्रतिफल या पुरुस्कार प्राप्त करना ही हमारे लिए अच्छे आचरण को करने का कारण नहीं होना चाहिए; और ना ही हमारा अच्छा आचरण और अच्छे कार्य हमें उद्धार दिला सकते हैं, जो केवल पापों से पश्चाताप और मसीह यीशु पर लाए गए विश्वास से है। हमारे अच्छे आचर्फ़ण एवं व्यवहार का आधार है परमेश्वर के प्रति हमारा प्रेम। परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम के कारण, उसकी प्रसन्नता के लिए, हमें वह आचरण और व्यवहार प्रदर्शित करना चाहिए जो हमारे मसीही विश्वास के अनुरूप है, उसकी इच्छा के अनुसार है, हमारे मसीही विश्वास की प्रत्यक्ष गवाही है।

   यदि हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं तो उसे, जिसने हम से हमारे पापों की दशा में भी हम से प्रेम किया (रोमियों 5:8), उसकी प्रसन्नता के लिए हमें वही करना चाहिए जो उसे पसन्द है, और पवित्र मन तथा शुद्ध ध्येय से उसकी आज्ञाकारिता में बने रहना चाहिए। हमारा सर्वोत्त्म पुरुस्कार होगा अनन्तकाल तक स्वर्ग में अपने परमेश्वर पिता के साथ बने रहना। - ऐनी सेटास


परमेश्वर को प्रसन्न करना ही हमारा उसके आज्ञाकारी रहने का मुख्य कारण है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 5:1-11
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। 
2 Corinthians 5:9 इस कारण हमारे मन की उमंग यह है, कि चाहे साथ रहें, चाहे अलग रहें पर हम उसे भाते रहें। 
2 Corinthians 5:10 क्योंकि अवश्य है, कि हम सब का हाल मसीह के न्याय आसन के साम्हने खुल जाए, कि हर एक व्यक्ति अपने अपने भले बुरे कामों का बदला जो उसने देह के द्वारा किए हों पाए। 
2 Corinthians 5:11 सो प्रभु का भय मानकर हम लोगों को समझाते हैं और परमेश्वर पर हमारा हाल प्रगट है; और मेरी आशा यह है, कि तुम्हारे विवेक पर भी प्रगट हुआ होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



बुधवार, 4 नवंबर 2015

अनुकंपा


   अमेरिका के गृह युद्ध (1861-1865) में रिचर्ड कर्कलैंड सेना में सार्जेंट थे। फ्रड्रिकबर्ग के युद्ध में मेरीज़ हाईट्स नामक स्थान पर विरोधी पक्ष के अनेक घायल सैनिकों को युद्ध भूमि पर छोड़ शेष सेना पीछे हट गई थी। रिचर्ड ने उन घायल सैनिकों की सहायता के लिए अनुमति ली, खाने-पीने की वस्तुएं जमा करीं और सुरक्षा के लिए बनाई गई दीवार को लांघ कर दूसरी ओर पहुँच गया और दुश्मन की सेना के घायल सैनिकों की सेवा करने लगा। अपनी जान को जोखिम में डाल कर मेरीज़ हाईट्स का यह फरिश्ता मसीह यीशु की अपने चेलों को दी गई आज्ञा, अपने दुश्मनों से भी प्रेम करो (मत्ती 5:44) को पूरा करता रहा, प्रभु यीशु की अनुकंपा दुश्मन सैनिकों में बाँटता रहा।

   हम में से बहुत कम के पास रिचर्ड के समान दुश्मन सैनिकों के बीच अनुकंपा दिखाने का अवसर होगा, लेकिन हमारे चारों ओर ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो दुखों, निराशाओं और परेशानियों में जीवन व्यतित कर रहे हैं; कोई अकेला रह गया है, किसी को हानि उठानी पड़ी है, कोई बीमार है; लेकिन एक व्याधि है जिसने सबको परेशान किया हुआ है - पाप का रोग और उसके दुषपरिणाम। हमारी अपनी व्यस्तताओं और अन्य बातों में लगे ध्यान के कारण शान्ति और अनुकंपा के लिए उनकी पुकार चाहे हमें सुनाई नहीं देती लेकिन वे इस प्रतीक्षा में हैं कि कोई उनके पास आए, उन्हें शान्ति दे, उनके दुख को बाँटे।

   प्रेरित पौलुस ने रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में, परमेश्वर के वचन की नीतिवचन 25:21-22 में कही बात को दोहराया: "परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा" (रोमियों 12:20)। पौलुस ने उन्हें आगे समझाया, "बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो" (रोमियों 12:21)। पौलुस द्वारा कही गई यह बात हमें रिचर्ड कर्कलैंड का अनुकरण करने को प्रेरित करती है।
   
   आज हमारे लिए भी समय है कि हम अपनी सुरक्षा की दीवार को लांघ कर प्रभु यीशु की वह अनुकंपा दुखी लोगों के साथ बाँटें जो उसने हमारे साथ बाँटी है। - रैंडी किल्गोर


चाहे अनुराग करना हमारे वश में ना हो, अनुकंपा दिखाना सदा हमारे वश में रहता है। - सैमुएल जौनसन

यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना; और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना; क्योंकि इस रीति तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा। - नीतिवचन 25:21-22

बाइबल पाठ: रोमियों 12:14-21
Romans 12:14 अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। 
Romans 12:15 आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ। 
Romans 12:16 आपस में एक सा मन रखो; अभिमानी न हो; परन्तु दीनों के साथ संगति रखो; अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो। 
Romans 12:17 बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। 
Romans 12:18 जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। 
Romans 12:19 हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। 
Romans 12:20 परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। 
Romans 12:21 बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1


मंगलवार, 3 नवंबर 2015

शान्त हों


   फ्रांस के पैरिस शहर में सन 1924 में आयोजित ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले धावक एरिक लिडिल की जीवनी पर एक फिल्म Chariots of Fire बनी। स्वर्ण पदक जीतने के पश्चात एरिक मिशनरी होकर चीन चले गए। कुछ वर्षों के बाद जब दूसरा विश्व-युद्ध आरंभ हुआ तो एरिक ने अपने परिवार को सुरक्षा के लिए कैनडा भेज दिया, लेकिन वे स्वयं चीन में ही रह गए। शीघ्र ही एरिक और अन्य प्रवासी मिशनरियों को एक जापानी शिविर में कैद करके रख दिया गया। कई महीनों की बन्धुवाई के बाद एरिक बीमार पड़े और डॉक्टरों को लगा कि उन्हें दिमाग़ में रसौली हो गई है।

   जिस अस्पताल में एरिक को रखा गया उसके निकट प्रत्येक इतवार को एक बैन्ड कुछ धुनें बजाया करता था। एक दिन एरिक ने उन से आग्रह किया कि वे मसीही भजन Be Still My Soul (मेरे मन शान्त रह) बजाएं। इस भजन के बोल हैं, "मेरे मन शान्त रह, समय निकट आ रहा है / जब हम सदा काल के लिए प्रभु के साथ होंगे / जब सब निराशाएं, दुख और भय जाते रहेंगे, / शोक ना होगा, प्रेम का पवित्र आनन्द पुनःस्थापित होगा / मेरे मन शान्त रह; अब परिवर्तन और आँसुओं का समय जाता रहेगा / अन्ततः हम सब सुरक्षित और आशीशित होकर एक साथ मिलेंगे। मैं सोचता हूँ कि उन दिनों एरिक इस गीत को स्मरण कर रहे थे, इस पर मनन कर रहे थे। उस बीमारी में यह भजन उनके लिए बहुत शान्तिदायक था और इस घटना के तीन दिन पश्चात उनका देहांत हो गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद ने अपने एक भजन में लिखा, "चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं..." (भजन 46:10)। अपने जीवन के गहन अन्धकार के समय में भी हम शान्त रह सकते हैं क्योंकि हमारे प्रभु यीशु ने हमारे लिए मृत्यु पर जय प्राप्त करी है, और आज उसमें आशीशित अनन्त जीवन उसपर विश्वास करने वाले सभी लोगों को सेंत-मेंत उपलब्ध है।

   इसलिए हम शान्त हों और प्रभु को हमारे हर भय का समाधान करने दें। - बिल क्राउडर


हमारे विचिलित मन का कोलाहल परमेश्वर की कोमल आवाज़ से शान्त हो जाता है।

परन्तु यहोवा अपने पवित्र मन्दिर में है; समस्त पृथ्वी उसके साम्हने शान्त रहे। - हबकुक 2:20

बाइबल पाठ: भजन 46:1-11
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक। 
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं; 
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।। 
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है। 
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है। 
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई। 
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है। 
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है! 
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं! 
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमौन 1


सोमवार, 2 नवंबर 2015

जाँच


   अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव अभियानों में प्रत्याशियों के बीच बहस और भाषणों में अनेक प्रकार के दावे करना चलता रहता है, जो रेडियो और टेलिविज़न पर व्यापक रीति से दिखाया जाता है। बहस में कही गई बातों और भाषणों में किए गए दावों की सत्यता की जाँच करने के लिए विशलेषण करने वालों का दल भी होता है जो यह बताता रहता है कि कौन सा प्रत्याशी कितना सच बोल रहा है और कौन तथ्यों को अपने लाभ के लिए तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत कर रहा है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित युहन्ना ने प्रभु यीशु और कुछ लोगों के बीच, जो यह माने बैठे थे कि प्रभु यीशु झूठ बोल रहा है, हुई एक बहस को दर्ज किया है। प्रभु यीशु ने उन लोगों से कहा, "...यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा" (यूहन्ना 8:31-32)। लेकिन उन लोगों का कहना था कि "...हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे?" (यूहन्ना 8:33)। बहस होती रही और प्रभु यीशु ने बार बार यह दोहराया कि वह सच कह रहा है (पद 34, 40, 45-46, 51); कुछ ने उनकी बात पर विश्वास किया, परन्तु अन्य उनसे क्रोधित रहे, उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया।

   एक तरह से यही बहस आज भी ज़ारी है। जो प्रभु यीशु का विरोध करते हैं वे उनकी बातों को तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं, उनके अर्थ बिगाड़ कर बताते हैं, उनके कथनों पर सन्देह करते और लाते हैं। लेकिन प्रभु यीशु का आज भी वही दावा है कि वो सच कह रहे हैं और उन पर विश्वास करने वाले सभी लोगों को एक ऐसी अद्भुत स्वतंत्रता देते हैं जो कहीं और कदापि नहीं मिल सकती।

   बाइबल में दी गई प्रभु यीशु की जीवनी, शिक्षाएं और कथन वास्तव में जाँचे जाने के योग्य हैं। परमेश्वर स्वयं हमें कहता है, "सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो" (1 थिस्सुलुनीकियों 5:21); अब फैसला हमारे हाथों में है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर का सत्य हर जाँच पर खरा उतरता है।

परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरूष जो उसकी शरण लेता है। - भजन 34:8

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-47
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। 
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा। 
John 8:33 उन्होंने उसको उत्तर दिया; कि हम तो इब्राहीम के वंश से हैं और कभी किसी के दास नहीं हुए; फिर तू क्योंकर कहता है, कि तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे? 
John 8:34 यीशु ने उन को उत्तर दिया; मैं तुम से सच सच कहता हूं कि जो कोई पाप करता है, वह पाप का दास है। 
John 8:35 और दास सदा घर में नहीं रहता; पुत्र सदा रहता है। 
John 8:36 सो यदि पुत्र तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा, तो सचमुच तुम स्‍वतंत्र हो जाओगे। 
John 8:37 मैं जानता हूं कि तुम इब्राहीम के वंश से हो; तौभी मेरा वचन तुम्हारे हृदय में जगह नहीं पाता, इसलिये तुम मुझे मार डालना चाहते हो। 
John 8:38 मैं वही कहता हूं, जो अपने पिता के यहां देखा है; और तुम वही करते रहते हो जो तुमने अपने पिता से सुना है। 
John 8:39 उन्होंने उन को उत्तर दिया, कि हमारा पिता तो इब्राहीम है: यीशु ने उन से कहा; यदि तुम इब्राहीम के सन्तान होते, तो इब्राहीम के समान काम करते। 
John 8:40 परन्तु अब तुम मुझ ऐसे मनुष्य को मार डालना चाहते हो, जिसने तुम्हें वह सत्य वचन बताया जो परमेश्वर से सुना, यह तो इब्राहीम ने नहीं किया था। 
John 8:41 तुम अपने पिता के समान काम करते हो: उन्होंने उस से कहा, हम व्यभिचार से नहीं जन्मे; हमारा एक पिता है अर्थात परमेश्वर। 
John 8:42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा। 
John 8:43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते। 
John 8:44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। 
John 8:45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते। 
John 8:46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते? 
John 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3


रविवार, 1 नवंबर 2015

प्रेम


   मैंने एक दुकान में पटिया लिखा एक वाक्य देखा, "मन की जाँच इससे नहीं है कि आप दूसरों से कितना प्रेम करते हैं, वरन इससे है कि लोग आपसे कितना प्रेम करते हैं" और इस कथन का उद्धरण किया गया था बच्चों की एक प्रसिद्ध और लोकप्रीय कथा Wizard of Oz से। निःसन्देह Wizard of Oz एक अच्छी कहानी है, लेकिन आत्मिक बातों के लिए कहानियाँ भरोसेमन्द और सदा सत्य कहने वाला स्त्रोत नहीं होतीं। आत्मिक बातों का सदा सत्य बताने वाला और भरोसेमन्द स्त्रोत है परमेश्वर का वचन बाइबल।

   परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा, "...सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुद्धि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं" (मरकुस 12:29-31)। बाइबल हमें ना केवल परमेश्वर से प्रेम करना सिखाती है, वरन मनुष्यों से भी प्रेम करने को कहती है, उन से भी जो हमारे विरोधी और बैरी हैं (मत्ती 5:43-48) जिससे कि हम अपने परमेश्वर पिता के गुण प्रकट करें। ना केवल हमें सब मनुष्यों से प्रेम रखना है परन्तु साथ ही प्रत्युत्तर में कुछ पाने की आशा रखने की बजाए यदि प्रत्युत्तर में बैर भी मिले तो उसमें भी परमेश्वर के धन्यवादी होना, आनन्दित होना है, "धन्य हो तुम, जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निन्दा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हरो विरोध में सब प्रकार की बुरी बात कहें। आनन्‍दित और मगन होना क्योंकि तुम्हारे लिये स्वर्ग में बड़ा फल है इसलिये कि उन्होंने उन भविष्यद्वक्ताओं को जो तुम से पहिले थे इसी रीति से सताया था" (मत्ती 5:11-12)।

   जब बात प्रेम की आती है तो समझने के लिए जो अति आवश्यक बात है वह है कि प्रेम का स्त्रोत परमेश्वर है (1 यूहन्ना 4:7-8); जैसे मूसा ने इस्त्राएलियों से कहा कि परमेश्वर उनसे प्रेम करने से प्रसन्न होता है (व्यवस्थाविवरण 10:15) इसीलिए उन्हें भी अन्य लोगों से प्रेम करना है, परदेशियों से भी (पद 19)। परमेश्वर चाहता है कि जो उसके प्रेम के पात्र हैं वे उसके प्रेम को दूसरों तक पहुँचाने का माध्यम भी बनें।

   हम प्रेम इसलिए कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर ने हम से प्रेम किया और हमें प्रेम करना सिखाया है (1 यूहन्ना 4:19)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। - 1 यूहन्ना 4:8

हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। - 1 यूहन्ना 4:19

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 10:12-22
Deuteronomy 10:12 और अब, हे इस्राएल, तेरा परमेश्वर यहोवा तुझ से इसके सिवाय और क्या चाहता है, कि तू अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानें, और उसके सारे मार्गों पर चले, उस से प्रेम रखे, और अपने पूरे मन और अपने सारे प्राण से उसकी सेवा करे, 
Deuteronomy 10:13 और यहोवा की जो जो आज्ञा और विधि मैं आज तुझे सुनाता हूं उन को ग्रहण करे, जिस से तेरा भला हो? 
Deuteronomy 10:14 सुन, स्वर्ग और सब से ऊंचा स्वर्ग भी, और पृथ्वी और उस में जो कुछ है, वह सब तेरे परमेश्वर यहोवा ही का है; 
Deuteronomy 10:15 तौभी यहोवा ने तेरे पूर्वजों से स्नेह और प्रेम रखा, और उनके बाद तुम लोगों को जो उनकी सन्तान हो सर्व देशों के लोगों के मध्य में से चुन लिया, जैसा कि आज के दिन प्रगट है। 
Deuteronomy 10:16 इसलिये अपने अपने हृदय का खतना करो, और आगे को हठीले न रहो। 
Deuteronomy 10:17 क्योंकि तुम्हारा परमेश्वर यहोवा वही ईश्वरों का परमेश्वर और प्रभुओं का प्रभु है, वह महान्‌ पराक्रमी और भय योग्य ईश्वर है, जो किसी का पक्ष नहीं करता और न घूस लेता है। 
Deuteronomy 10:18 वह अनाथों और विधवा का न्याय चुकाता, और परदेशियों से ऐसा प्रेम करता है कि उन्हें भोजन और वस्त्र देता है। 
Deuteronomy 10:19 इसलिये तुम भी परदेशियों से प्रेम भाव रखना; क्योंकि तुम भी मिस्र देश में परदेशी थे। 
Deuteronomy 10:20 अपने परमेश्वर यहोवा का भय मानना; उसी की सेवा करना और उसी से लिपटे रहना, और उसी के नाम की शपथ खाना। 
Deuteronomy 10:21 वही तुम्हारी स्तुति के योग्य है; और वही तेरा परमेश्वर है, जिसने तेरे साथ वे बड़े महत्व के और भयानक काम किए हैं, जिन्हें तू ने अपनी आंखों से देखा है। 
Deuteronomy 10:22 तेरे पुरखा जब मिस्र में गए तब सत्तर ही मनुष्य थे; परन्तु अब तेरे परमेश्वर यहोवा ने तेरी गिनती आकाश के तारों के समान बहुत कर दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2


शनिवार, 31 अक्टूबर 2015

प्रेम-दृष्टि


   मार्क सालेम के कार्यक्रमों में आने वाले अनेक लोग यह मानते हैं कि वह उनके मन को पढ़ लेता है; लेकिन मार्क ऐसा कोई दावा नहीं करता। मार्क का कहना है कि वह ना तो कोई जादूगर है और ना ही उसमें लोगों के अन्दर देख पाने की क्षमता है, वह तो केवल उसके पास आने वाले लोगों की हर बात को बारीकी से देखता है और उसका आंकलन करता है। मार्क ने लेखिका जेनिफर मुलसन से एक साक्षात्कार में कहा, "हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जो हमारे लिए प्रायः अदृश्य है क्योंकि हम बातों पर ध्यान नहीं देते हैं...मैं लोगों द्वारा प्रगट करी जा रही बातों के प्रति अति संवेदनशील रहता हूँ।"

   यह जानना रुचिकर है कि प्रभु यीशु लोगों में क्या देखते थे। अनन्त जीवन के खोजी एक धनी जवान व्यक्ति से हुई प्रभु यीशु की बातचीत इसका एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करती है। यह बातचीत परमेश्वर के वचन बाइबल में मत्ती, मरकुस और लूका नामक तीन पुस्तकों में दर्ज है। मरकुस ने अपने विवरण में एक रोचक बात लिखी है, "यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया..." (मरकुस 10:21)। क्योंकि यह जवान व्यक्ति धनवान था, संभवतः कुछ लोग उससे ईर्ष्या करते होंगे; या उसके आज्ञाओं को लड़कपन से मानते आने (मरकुस10:19-20) के दावे को लेकर उसे घमण्डी समझते होंगे, लेकिन प्रभु यीशु मे उसे प्रेम-दृष्टि से देखा।

   इस घटना को पढ़ते समय हम अकसर उस अमीर जवान व्यक्ति के अपने धनसंपत्ति को त्यागकर प्रभु यीशु के पीछे हो लेने से इंकार करने और वापस लौट जाने (पद 22) पर ध्यान करते हैं; प्रभु यीशु के चेलों ने भी ऐसा ही किया और किसी धनी व्यक्ति के परमेश्वर के राज्य में प्रवेश कर पाने की कठिनाई से चकित हुए (पद 26), लेकिन प्रभु यीशु ने फिर से अपने प्रेम का उदाहरण देते हुए चेलों से कहा, "...मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है" (पद 27)।

   आज भी प्रभु यीशु संसार के हर जन को प्रेम-दृष्टि से देखता है, हर जन को अपने पास आमंत्रित करता है, सभी को उसके पास लौट आने की प्रतीक्षा करता है। प्रभु यीशु के इस निमंत्रण के प्रति आपका प्रत्युत्तर क्या है? - डेविड मैक्कसलैंड


परमेश्वर के पास सब कुछ देखने और जानने वाली दृष्टि और सबको क्षमा कर देने वाला मन है।

यह हमारे उद्धारकर्ता परमेश्वर को अच्छा लगता, और भाता भी है। वह यह चाहता है, कि सब मनुष्यों का उद्धार हो; और वे सत्य को भली भांति पहिचान लें। - 1 तिमुथियुस 2:3-4

बाइबल पाठ: मरकुस 10:17-27
Mark 10:17 और जब वह निकलकर मार्ग में जाता था, तो एक मनुष्य उसके पास दौड़ता हुआ आया, और उसके आगे घुटने टेककर उस से पूछा हे उत्तम गुरू, अनन्त जीवन का अधिकारी होने के लिये मैं क्या करूं? 
Mark 10:18 यीशु ने उस से कहा, तू मुझे उत्तम क्यों कहता है? कोई उत्तम नहीं, केवल एक अर्थात परमेश्वर। 
Mark 10:19 तू आज्ञाओं को तो जानता है; हत्या न करना, व्यभिचार न करना, चोरी न करना, झूठी गवाही न देना, छल न करना, अपने पिता और अपनी माता का आदर करना। 
Mark 10:20 उसने उस से कहा, हे गुरू, इन सब को मैं लड़कपन से मानता आया हूं। 
Mark 10:21 यीशु ने उस पर दृष्टि कर के उस से प्रेम किया, और उस से कहा, तुझ में एक बात की घटी है; जा, जो कुछ तेरा है, उसे बेच कर कंगालों को दे, और तुझे स्वर्ग में धन मिलेगा, और आकर मेरे पीछे हो ले। 
Mark 10:22 इस बात से उसके चेहरे पर उदासी छा गई, और वह शोक करता हुआ चला गया, क्योंकि वह बहुत धनी था। 
Mark 10:23 यीशु ने चारों ओर देखकर अपने चेलों से कहा, धनवानों को परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:24 चेले उस की बातों से अचंभित हुए, इस पर यीशु ने फिर उन को उत्तर दिया, हे बालको, जो धन पर भरोसा रखते हैं, उन के लिये परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करना कैसा कठिन है! 
Mark 10:25 परमेश्वर के राज्य में धनवान के प्रवेश करने से ऊंट का सूई के नाके में से निकल जाना सहज है! 
Mark 10:26 वे बहुत ही चकित हो कर आपस में कहने लगे तो फिर किस का उद्धार हो सकता है? 
Mark 10:27 यीशु ने उन की ओर देखकर कहा, मनुष्यों से तो यह नहीं हो सकता, परन्तु परमेश्वर से हो सकता है; क्योंकि परमेश्वर से सब कुछ हो सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1