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रविवार, 4 जून 2017

एकाकी


   एक मित्र ने, जिसके जीवन में एकाकीपन के साथ संघर्ष चल रहा था, अपने फेसबुक पृष्ठ पर लिखा, "ऐसा नहीं है कि क्योंकि मेरे कोई मित्रगण नहीं हैं इसलिए मैं एकाकी अनुभव करती हूँ। मेरे बहुत से मित्र हैं। मैं जानती हूँ कि मेरे बहुत से साथी हैं जो मुझे थामेंगे, मुझे आश्वस्त करेंगे, मेरे साथ बातचीत करेंगे, मेरे बारे में चिंता करेंगे और मेरी देखभाल करेंगे। परन्तु वे हमेशा मेरे साथ बने नहीं रह सकते हैं।"

   प्रभु यीशु इस प्रकार के एकाकीपन को समझते हैं। मेरा विचार है कि इस पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के दिनों में प्रभु ने यह एकाकीपन कोढ़ियों की आँखों और अन्धों की आवाज़ में देखा था। लेकिन इस भी बढ़कर उन्होंने स्वयं इसे अनुभव किया जब उनके निकट साथी उन्हें छोड़कर भाग गए (मरकुस 14:50)।

   परन्तु जैसा उन्होंने अपने साथियों द्वारा छोड़े जाने की भविष्यवाणी की थी, वैसे ही प्रभु ने परमेश्वर पिता की साथ बनी रहने वाली उपस्थिति के आश्वासन के बारे में भी कहा था। प्रभु ने अपने शिष्यों से कहा: "देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है" (यूहन्ना 16:32)। यह कहने के कुछ समय के पश्चात उन्होंने हमारे लिए क्रूस उठा लिया और उस पर हमारे पापों को अपने ऊपर लिए वे बलिदान हो गए। अपने इस बलिदान के द्वारा उन्होंने हमारे लिए संभव कर दिया कि हमारा मेल-मिलाप परमेश्वर पिता के साथ पुनः स्थापित हो सके, हम परमेश्वर के परिवार के सदस्य बन सकें।

   मनुष्य होने के नाते हमें एकाकीपन के समयों से होकर निकलना पड़ेगा; परन्तु प्रभु यीशु हमें यह समझने में सहायता करते हैं कि उस एकाकीपन में भी पिता परमेश्वर की उपस्थिति सदा हमारे साथ बनी रहेगी। परमेश्वर सर्वव्यापी और शाश्वत है; केवल वह ही है जो सदा हमारे साथ बना रह सकता है। इसलिए जो भी स्वेच्छा से प्रभु यीशु पर लाए गए विश्वास और पापों के लिए पश्चाताप के द्वारा परमेश्वर के परिवार का अंग बन गया है, वह कभी भी एकाकी नहीं होगा। - पो फैंग चिया


यदि आप प्रभु यीशु के हैं तो आप एकाकी कभी नहीं हो सकते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: मरकुस 14:32-50
Mark 14:32 फिर वे गतसमने नाम एक जगह में आए, और उसने अपने चेलों से कहा, यहां बैठे रहो, जब तक मैं प्रार्थना करूं। 
Mark 14:33 और वह पतरस और याकूब और यूहन्ना को अपने साथ ले गया: और बहुत ही अधीर, और व्याकुल होने लगा। 
Mark 14:34 और उन से कहा; मेरा मन बहुत उदास है, यहां तक कि मैं मरने पर हूं: तुम यहां ठहरो, और जागते रहो। 
Mark 14:35 और वह थोड़ा आगे बढ़ा, और भूमि पर गिरकर प्रार्थना करने लगा, कि यदि हो सके तो यह घड़ी मुझ पर से टल जाए। 
Mark 14:36 और कहा, हे अब्‍बा, हे पिता, तुझ से सब कुछ हो सकता है; इस कटोरे को मेरे पास से हटा ले: तौभी जैसा मैं चाहता हूं वैसा नहीं, पर जो तू चाहता है वही हो। 
Mark 14:37 फिर वह आया, और उन्हें सोते पाकर पतरस से कहा; हे शमौन तू सो रहा है? क्या तू एक घड़ी भी न जाग सका? 
Mark 14:38 जागते और प्रार्थना करते रहो कि तुम परीक्षा में न पड़ो: आत्मा तो तैयार है, पर शरीर दुर्बल है। 
Mark 14:39 और वह फिर चला गया, और वही बात कहकर प्रार्थना की। 
Mark 14:40 और फिर आकर उन्हें सोते पाया, क्योंकि उन की आंखे नींद से भरी थीं; और नहीं जानते थे कि उसे क्या उत्तर दें। 
Mark 14:41 फिर तीसरी बार आकर उन से कहा; अब सोते रहो और विश्राम करो, बस, घड़ी आ पहुंची; देखो मनुष्य का पुत्र पापियों के हाथ पकड़वाया जाता है। 
Mark 14:42 उठो, चलें: देखो, मेरा पकड़वाने वाला निकट आ पहुंचा है।
Mark 14:43 वह यह कह ही रहा था, कि यहूदा जो बारहों में से था, अपने साथ महायाजकों और शास्‍त्रियों और पुरनियों की ओर से एक बड़ी भीड़ तलवारें और लाठियां लिये हुए तुरन्त आ पहुंची। 
Mark 14:44 और उसके पकड़ने वाले ने उन्हें यह पता दिया था, कि जिस को मैं चूमूं वही है, उसे पकड़ कर यतन से ले जाना। 
Mark 14:45 और वह आया, और तुरन्त उसके पास जा कर कहा; हे रब्बी और उसको बहुत चूमा। 
Mark 14:46 तब उन्होंने उस पर हाथ डालकर उसे पकड़ लिया। 
Mark 14:47 उन में से जो पास खड़े थे, एक ने तलवार खींच कर महायाजक के दास पर चलाई, और उसका कान उड़ा दिया। 
Mark 14:48 यीशु ने उन से कहा; क्या तुम डाकू जानकर मेरे पकड़ने के लिये तलवारें और लाठियां ले कर निकले हो? 
Mark 14:49 मैं तो हर दिन मन्दिर में तुम्हारे साथ रहकर उपदेश दिया करता था, और तब तुम ने मुझे न पकड़ा: परन्तु यह इसलिये हुआ है कि पवित्र शास्त्र की बातें पूरी हों। 
Mark 14:50 इस पर सब चेले उसे छोड़कर भाग गए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 21-22
  • यूहन्ना 14


शनिवार, 3 जून 2017

कार्य


   देखने में वह केवल बेकार पड़ू हुई पुरानी लकड़ी ही थी, परन्तु चार्ल्स हूपर को उसमें कुछ और भी अधिक दिखाई दिया। उन्होंने लंबे समय से खाली छोड़े गए स्थान की पुरानी लकड़ी को लिया, और एक योजना की रूपरेखा तैयार की। फिर उन्होंने अपनी ज़मीन पर के जंगल में से कुछ पेड़ों को काटा, और अपने दादा के औज़ारों को लेकर उन पेड़ों से तख़ते तथा खंबे बनाए। फिर बड़ी मेहनत के साथ उन्होंने अपनी योजना के अनुसार पुरानी और नई लकड़ी को एक साथ जोड़ना-बैठाना आरंभ किया। आज आप टेनेसी पर्वत श्रंखला के पेड़ों में चार्ल्स और शर्ली हूपर का लकड़ी से बना उत्कृष्ठ घर देख सकते हैं, अब जिसका कुछ भाग अतिथि-गृह है और कुछ पारिवारिक विरासत की चीज़ों का संग्रहालय है। वह घर चार्ल्स के दर्शन, कार्यकुशलता और धीरज की गवाही बनकर खड़ा है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफसुस की गैर-यहूदी मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में उन्हें समझाया कि कैसे प्रभु यीशु यहूदी तथा गैर-यहूदी मसीही विश्वासियों को एकत्रित कर रहा है कि वे एक साथ मिलकर परमेश्वर के निवास के लिए एक भवन बनें: "पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो" (इफिसियों 2:13)। परमेश्वर के लिए बनने वाला यह स्थान, "प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो" (इफिसियों 2:20-21)।

   आज भी इस भवन के निर्माण का कार्य ज़ारी है। परमेश्वर हमारे टूटे और बिखरे जीवनों को लेकर, उन्हें हमारे समान ही अन्य टूटे, मुसीबत और परेशानियों से बचाए गए लोगों के साथ मिलाता है, हमारे खुरदरेपन को छीलकर उसे दूर करता है, नए लोगों के साथ हमें मिलाता है, उनके साथ हमारा तालमेल बैठाता है जिससे हम एक साथ मिलकर उसकी महिमा का कारण ठहरें। वह आज भी हमें अपने साथ रहने के लिए तैयार कर रहा है; वह अपने कार्य, अर्थात हम से बहुत प्रेम करता है। - टिम गुस्टाफसन


हमें मसीह के स्वरूप में लाने के लिए 
हमारे जीवन के खुरदरेपन का दूर किया जाना अनिवार्य है।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम परमेश्वर का मन्दिर हो, और परमेश्वर का आत्मा तुम में वास करता है? यदि कोई परमेश्वर के मन्दिर को नाश करेगा तो परमेश्वर उसे नाश करेगा; क्योंकि परमेश्वर का मन्दिर पवित्र है, और वह तुम हो। - 1 कुरिन्थियों 3:16-17

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:10-22
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दोनों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। 
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए। 
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो। 
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है। 
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 19-20
  • यूहन्ना 13:21-38


शुक्रवार, 2 जून 2017

महत्वहीन?


   हम उन सात अरब लोगों में से एक हैं जो इस पृथ्वी पर निवास करते हैं; उस पृथ्वी पर जो आकार में अपेक्षाकृत महत्वहीन एक सौर-मंडल का एक छोटा सा भाग है। वास्तव में हमारी पृथ्वी परमेश्वर द्वारा सृजे गए करोड़ों आकाशीय पिंडों में एक छोटा सा नीला बिंदु मात्र है। इस अति विशाल सृष्टि के दृश्य-पटल पर हमारी सुन्दर, भव्य पृथ्वी धूल के एक छोटे से कण के समान दिखाई देती है, और हम उस कण पर निवास करने वाले अरबों व्यक्तियों में से एक हैं।

   यह विचार हमें अत्यंत महत्वहीन और नगण्य अनुभव करवा सकता है। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि वास्तव में इसका उलट ही सही है। हमारे महान परमेश्वर, जिसके विषय लिखा गया है, "किस ने महासागर को चुल्लू से मापा और किस के बित्ते से आकाश का नाप हुआ, किस ने पृथ्वी की मिट्टी को नपवे में भरा और पहाड़ों को तराजू में और पहाडिय़ों को कांटे में तौला है?" (यशायाह 40:12), की दृष्टि में हम में से प्रत्येक व्यक्ति बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने हम सब को अपने ही स्वरूप में रचा है, हमें अपनी इस भवय सृष्टि का आनन्द लेने के लिए बनाया है (1 तिमुथियुस 6:17)। जितने जन अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभु यीशु पर विश्वास लाते हैं, उसे अपना प्रभु मान लेते हैं, उन सबके लिए परमेश्वर ने कुछ भले कार्य निर्धारित किए हैं (इफिसियों 2:10)। इस सृष्टि की विशालता के बावजूद परमेश्वर हम में से प्रत्येक के बारे में सब कुछ जानता है, हम में से प्रत्येक की परवाह करता है।

   बाइबल में भजन 139 हमें बताता है कि परमेश्वर जानता है कि हम क्या कहने जा रहे हैं, क्या विचार कर रहे हैं। हम उसकी उपस्थिति से कहीं भाग नहीं सकते, बच नहीं सकते, उसकी नज़रों से कहीं भी ओझल नहीं हो सकते हैं। उसने हमारे जन्म से पूर्व ही हमारे अस्तित्व का प्रत्येक पल नियोजित किया है। हमारे परमेश्वर पिता ने हमें अनन्त विनाश से निकालकर अनन्त आनन्द के जीवन में लाने के लिए, हमारे पापों की क्षमा के लिए अपने एकलौते पुत्र को भी नहीं रख छोड़ा, वरन उसे भी इस संसार में भेजकर बलिदान कर दिया जिससे उसके साथ हमारा मेल-मिलाप हो सके। यदि इस सृष्टि के सृजनहार की नज़रों में हम इतने महत्वपूर्ण, इतने कीमती हैं, तो फिर हम महत्वहीन कैसे हो सकते हैं? - डेव ब्रैनन

   
जिस परमेश्वर ने इस सृष्टि को सृजा, वह आपसे भी प्रेम करता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: भजन 139:7-16
Psalms 139:7 मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? 
Psalms 139:8 यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है! 
Psalms 139:9 यदि मैं भोर की किरणों पर चढ़ कर समुद्र के पार जा बसूं, 
Psalms 139:10 तो वहां भी तू अपने हाथ से मेरी अगुवाई करेगा, और अपने दाहिने हाथ से मुझे पकड़े रहेगा। 
Psalms 139:11 यदि मैं कहूं कि अन्धकार में तो मैं छिप जाऊंगा, और मेरे चारों ओर का उजियाला रात का अन्धेरा हो जाएगा, 
Psalms 139:12 तौभी अन्धकार तुझ से न छिपाएगा, रात तो दिन के तुल्य प्रकाश देगी; क्योंकि तेरे लिये अन्धियारा और उजियाला दोनों एक समान हैं।
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा। 
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं। 
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं। 
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 17-18
  • यूहन्ना 13:1-20


गुरुवार, 1 जून 2017

ज्योति


   पेरू देश के एक दौरे के समय, मैं उस पहाड़ी देश में पाई जाने वाली अनेकों गुफाओं में से एक को देखने गया। हमारे मार्गदर्शक ने बताया कि जिस गुफा में हम जा रहे थे वह 9 मील की गहराई तक खोजा जा चुका है, परन्तु वह इससे भी अधिक गहरी है। उस गुफा में उतरते हुए हमने अचंभित करने वाली चमगादड़ें, अंधेरे में विचरण करने वाले पक्षी और चट्टानों की आकर्षक आकृतियाँ देखीं। लेकिन गहराई में उतरते हुए गुफा का अन्धकार विचलित कर देने वाला, लगभग दम घोटने वाला सा हो गया। हमारे वापस सतह पर दिन की ज्योति में आ जाने से मुझे बहुत राहत मिली।

   यह अनुभव मेरे लिए एक यादगार था, कि अंधेरा कितना विचलित कर देने वाला हो सकता है और हमें ज्योति की कितनी अधिक आवश्यकता होती है। हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जिसे पाप ने अंधेरा कर दिया है - ऐसा संसार जो अपने सृष्टिकर्ता के विरुध्द हो गया है। हमें इस अंधकार से निकलने के लिए ज्योति की आवश्यकता है।
   प्रभु यीशु मसीह, जो मानव जाति सहित समस्त सृष्टि को उसके नियत स्वरूप में पुनः बहाल करने आए थे, ने अपने आप को "ज्योति" बताया (यूहन्ना 8:12)। प्रभु ने अपने संसार में आने के उद्देश्य के संबंध में कहा, "मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे" (यूहन्ना 12:46)।

   प्रभु यीशु में ना केवल हमें उध्दार की ज्योति मिलती है, वरन वह एकमात्र ज्योति मिलती है जिसके साथ हम संसार में व्याप्त पाप के अंधकार में भी अपना मार्ग - हमारे लिए परमेश्वर का मार्ग देख सकते हैं, उस पर चल सकते हैं। - बिल क्राउडर


यदि हम ज्योति में चलेंगे तो अंधकार से ठोकर नहीं खाएंगे।

तब यीशु ने फिर लोगों से कहा, जगत की ज्योति मैं हूं; जो मेरे पीछे हो लेगा, वह अन्धकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा। - यूहन्ना 8:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 12:42-50
John 12:42 तौभी सरदारों में से भी बहुतों ने उस पर विश्वास किया, परन्तु फरीसियों के कारण प्रगट में नहीं मानते थे, ऐसा न हो कि आराधनालय में से निकाले जाएं। 
John 12:43 क्योंकि मनुष्यों की प्रशंसा उन को परमेश्वर की प्रशंसा से अधिक प्रिय लगती थी।
John 12:44 यीशु ने पुकारकर कहा, जो मुझ पर विश्वास करता है, वह मुझ पर नहीं, वरन मेरे भेजने वाले पर विश्वास करता है। 
John 12:45 और जो मुझे देखता है, वह मेरे भेजने वाले को देखता है। 
John 12:46 मैं जगत में ज्योति हो कर आया हूं ताकि जो कोई मुझ पर विश्वास करे, वह अन्धकार में न रहे। 
John 12:47 यदि कोई मेरी बातें सुनकर न माने, तो मैं उसे दोषी नहीं ठहराता, क्योंकि मैं जगत को दोषी ठहराने के लिये नहीं, परन्तु जगत का उद्धार करने के लिये आया हूं। 
John 12:48 जो मुझे तुच्‍छ जानता है और मेरी बातें ग्रहण नहीं करता है उसको दोषी ठहराने वाला तो एक है: अर्थात जो वचन मैं ने कहा है, वही पिछले दिन में उसे दोषी ठहराएगा। 
John 12:49 क्योंकि मैं ने अपनी ओर से बातें नहीं कीं, परन्तु पिता जिसने मुझे भेजा है उसी ने मुझे आज्ञा दी है, कि क्या क्या कहूं और क्या क्या बोलूं 
John 12:50 और मैं जानता हूं, कि उस की आज्ञा अनन्त जीवन है इसलिये मैं जो बोलता हूं, वह जैसा पिता ने मुझ से कहा है वैसा ही बोलता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 15-16
  • यूहन्ना 12:27-50


बुधवार, 31 मई 2017

दोष


   मुझ पर कई बातों का दोष लगाया गया है, और बहुधा यह सही भी था। मेरे पाप, विफलताएं, और अयोग्यताएं, मेरे मित्रों, परिवारजनों, और संभवतः अजनबियों के लिए भी दुःख, चिंता और असुविधा का कारण रहे हैं। लेकिन मुझ पर ऐसी बातों के लिए भी दोषारोपण किया गया है जिनके लिए मैं कदापि दोषी नहीं थी, ऐसी बातें जिन्हें बदलना मेरे वश के बाहर था।

   परन्तु ऐसा भी हुआ है कि मैंने दूसरों पर दोष लगाए हैं। कितनी ही बार अपनी परिस्थितियों के लिए मैंने दूसरों को ज़िम्मेदार ठहराया है, कहा है कि यदि उन्होंने ऐसा या वैसा नहीं किया होता तो मैं आज इस परिस्थिति में नहीं होती। दोष चोट पहुँचाता है। इसलिए चाहे हम दोषी हों अथवा नहीं, हम बहुत सा समय और मानसिक सामर्थ दोष को किसी अन्य पर लादने में खर्च कर देते है।

   प्रभु यीशु मसीह हमें दोष से निपटने का एक बेहतर विकल्प देता है। यद्यपि वह स्वयं निर्दोष था, फिर भी उसने सारे संसार के पापों को अपने ऊपर ले लिया (यूहन्ना 1:29)। हम अकसर प्रभु यीशु को बलि के मेमने के रूप में देखते हैं, परन्तु वह संसार के सभी लोगों के सभी पापों और दोषों के लिए प्रायश्चित का अन्तिम मेमना भी था (लैव्यवस्था 16:10)।

   यदि हम अपने पापों को मान लें, और उन पापों को उठा ले जाने के प्रभु यीशु के प्रस्ताव को स्वीकार कर लें, तो उन पापों का दोष हमें फिर कभी न तो उठाना पड़ेगा और न ही उनके लिए कोई दण्ड भुगतना पड़ेगा। साथ ही फिर हम अपने पापों, अपनी गलतियों के लिए किसी अन्य को दोषी ठहराने के प्रयास भी नहीं करेंगे।

   परमेश्वर पिता का धन्यवाद हो कि प्रभु यीशु के बलिदान और पुनरुत्थान के कारण आज संसार का प्रत्येक व्यक्ति, प्रभु यीशु पर स्वेच्छा से लाए गए साधारण विश्वास तथा अपने पापों के लिए किए गए पश्चाताप के द्वारा सभी दोषों से मुक्त हो सकता है, उनका दण्ड भोगने से बच सकता है, परमेश्वर से अनन्त जीवन का दान सेंत-मेंत प्राप्त कर सकता है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


अपने पाप तथा दोषों के प्रति ईमानदारी ही 
परमेश्वर से उनकी क्षमा प्राप्त करने का मार्ग है।

दूसरे दिन उसने यीशु को अपनी ओर आते देखकर कहा, देखो, यह परमेश्वर का मेम्ना है, जो जगत के पाप उठा ले जाता है। - यूहन्ना 1:29

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 16:5-22
Leviticus 16:5 फिर वह इस्त्राएलियों की मण्डली के पास से पापबलि के लिये दो बकरे और होमबलि के लिये एक मेढ़ा ले। 
Leviticus 16:6 और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा चढ़ाकर अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्चित्त करे। 
Leviticus 16:7 और उन दोनों बकरों को ले कर मिलापवाले तम्बू के द्वार पर यहोवा के साम्हने खड़ा करे; 
Leviticus 16:8 और हारून दोनों बकरों पर चिट्ठियां डाले, एक चिट्ठी यहोवा के लिये और दूसरी अजाजेल के लिये हो। 
Leviticus 16:9 और जिस बकरे पर यहोवा के नाम की चिट्ठी निकले उसको हारून पापबलि के लिये चढ़ाए; 
Leviticus 16:10 परन्तु जिस बकरे पर अजाजेल के लिये चिट्ठी निकले वह यहोवा के साम्हने जीवता खड़ा किया जाए कि उस से प्रायश्चित्त किया जाए, और वह अजाजेल के लिये जंगल में छोड़ा जाए। 
Leviticus 16:11 और हारून उस पापबलि के बछड़े को जो उसी के लिये होगा समीप ले आए, और उसको बलिदान कर के अपने और अपने घराने के लिये प्रायश्चित्त करे। 
Leviticus 16:12 और जो वेदी यहोवा के सम्मुख है उस पर के जलते हुए कोयलों से भरे हुए धूपदान को ले कर, और अपनी दोनों मुट्ठियों को फूटे हुए सुगन्धित धूप से भरकर, बीच वाले पर्दे के भीतर ले आकर 
Leviticus 16:13 उस धूप को यहोवा के सम्मुख आग में डाले, जिस से धूप का धुआं साक्षीपत्र के ऊपर के प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर छा जाए, नहीं तो वह मर जाएगा; 
Leviticus 16:14 तब वह बछड़े के लोहू में से कुछ ले कर पूरब की ओर प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर अपनी उंगली से छिड़के, और फिर उस लोहू में से कुछ उंगली के द्वारा उस ढकने के साम्हने भी सात बार छिड़क दे। 
Leviticus 16:15 फिर वह उस पापबलि के बकरे को जो साधारण जनता के लिये होगा बलिदान कर के उसके लोहू को बीच वाले पर्दे के भीतर ले आए, और जिस प्रकार बछड़े के लोहू से उसने किया था ठीक वैसा ही वह बकरे के लोहू से भी करे, अर्थात उसको प्रायश्चित्त के ढकने के ऊपर और उसके साम्हने छिड़के। 
Leviticus 16:16 और वह इस्त्राएलियों की भांति भांति की अशुद्धता, और अपराधों, और उनके सब पापों के कारण पवित्रस्थान के लिये प्रायश्चित्त करे; और मिलापवाला तम्बू जो उनके संग उनकी भांति भांति की अशुद्धता के बीच रहता है उसके लिये भी वह वैसा ही करे। 
Leviticus 16:17 और जब हारून प्रायश्चित्त करने के लिये पवित्रस्थान में प्रवेश करे, तब से जब तक वह अपने और अपने घराने और इस्त्राएल की सारी मण्डली के लिये प्रायश्चित्त कर के बाहर न निकले तब तक कोई मनुष्य मिलापवाले तम्बू में न रहे। 
Leviticus 16:18 फिर वह निकलकर उस वेदी के पास जो यहोवा के साम्हने है जाए और उसके लिये प्रायश्चित्त करे, अर्थात बछड़े के लोहू और बकरे के लोहू दोनों में से कुछ ले कर उस वेदी के चारों कोनों के सींगो पर लगाए। 
Leviticus 16:19 और उस लोहू में से कुछ अपनी उंगली के द्वारा सात बार उस पर छिड़ककर उसे इस्त्राएलियों की भांति भांति की अशुद्धता छुड़ाकर शुध्द और पवित्र करे। 
Leviticus 16:20 और जब वह पवित्रस्थान और मिलापवाले तम्बू और वेदी के लिये प्रायश्चित्त कर चुके, तब जीवित बकरे को आगे ले आए; 
Leviticus 16:21 और हारून अपने दोनों हाथों को जीवित बकरे पर रखकर इस्त्राएलियों के सब अधर्म के कामों, और उनके सब अपराधों, निदान उनके सारे पापों को अंगीकार करे, और उन को बकरे के सिर पर धरकर उसको किसी मनुष्य के हाथ जो इस काम के लिये तैयार हो जंगल में भेज के छुड़वा दे। 
Leviticus 16:22 और वह बकरा उनके सब अधर्म के कामों को अपने ऊपर लादे हुए किसी निराले देश में उठा ले जाएगा; इसलिये वह मनुष्य उस बकरे को जंगल में छोड़े दे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 13-14
  • यूहन्ना 12:1-26


मंगलवार, 30 मई 2017

आँसू


   मैंने अपनी एक पुरानी सहेली को, उसकी माँ के देहान्त पर फोन किया। उसकी माँ और मेरी माँ भी बहुत अच्छी सहेलियाँ रहे थे, और अब दोनों ही इस संसार से जा चुके थे। परस्पर बातचीत करते हुए, हमारा वार्तालाप भावनाओं के चक्र में चला गया - देहान्त के कारण दुःख के आँसू और उनके प्रेम, देखभाल करने वाले स्वभाव और ज़िन्दादिली के उदाहरणों को स्मरण करके उनके साथ बिताए हुए पलों के लिए खुशी के आँसू।

   हम में से अनेकों ने इन मिश्रित भावनाओं का अनुभव किया होगा - एक पल रोना और दूसरे पल हँसना। यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की गई बड़ी अद्भुत बात है कि हम दुःख और खुशी दोनों ही में आँसुओं के द्वारा अपने मन की भावना व्यक्त कर सकते हैं, अपना मन हलका कर सकते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमें परमेश्वर ने अपने स्वरूप में सृजा है (उत्पत्ति 1:26)। क्योंकि सारे संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर के द्वारा, उस ही के स्वरूप में सृजे गए हैं, और संसार भर में, सभी संसकृतियों में विनोद व्यवहार का एक अभिन्न अंग है, इसलिए मेरा विचार है कि प्रभु यीशु का भी विनोदप्रीय व्यवहार रहा होगा। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि वह दुःख की पीड़ा से भी भली-भांति अवगत था। जब प्रभु के मित्र लाज़र का देहान्त हुआ और प्रभु ने लाज़र की बहन मरियम को रोते हुए देखा, तो "जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? यीशु के आंसू बहने लगे" (यूहन्ना 11:33, 35)।

   अपनी भावनाओं को आँसुओं द्वारा व्यक्त करना परमेश्वर का एक दान है, और बाइबल हमें आश्वस्त करती है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक आँसू का हिसाब रखता है: "तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?" (भजन 56:8)। लेकिन साथ ही बाइबल हमें यह आश्वासन भी देती है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक ऐसा समय भी आने वाला है, जब हर दुःख, हर पीड़ा का अन्त हो जाएगा, और आँसुओं का भी; परमेश्वर हमारे साथ निवास करेगा और स्वयं हमारे सभी आँसू पोंछ डालेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता, जिसने हमारे सभी पापों को धो डाला है, 
वही हमारे सभी आँसुओं को भी पोंछ देगा।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


सोमवार, 29 मई 2017

मार्ग


   जब मेरे बेटे ने चीनी भाषा सीखनी आरंभ की, तो उसके द्वारा लाए गए दस्तावेज़ों को देखकर मैं चकित हो गई। मूल रूप से अंग्रेज़ी बोलने वाली होने के कारण, मेरे लिए यह समझना कठिन था कि उन लिखित अक्षरों का बोली गई भाषा के साथ तालमेल कैसे बैठाया जा सकता है? वह भाषा मुझे बेहद जटिल लगी, लगभग समझ से बिलकुल परे।

   कभी कभी ऐसे ही चकरा देने वाले भावों का सामना मुझे तब करना पड़ता है जब मैं परमेश्वर कि कार्यविधि पर ध्यान करती हूँ। मैं जानती हूँ कि परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में कहा है, "...मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है" (यशायाह 55:8); लेकिन फिर भी, क्योंकि मैं उसके वचन का अध्ययन नियमित रीति से करती हूँ और मैं जानती हूँ कि परमेश्वर का पवित्राअत्मा मेरे हृदय में निवास करता है, इसलिए मेरे अन्दर का एक भाग यह चाहता है कि मैं समझ सकूँ कि परमेश्वर जो कर रहा है, वह वैसा क्यों कर रहा है?

   जब मुझे ऐसा लगता है कि परमेश्वर की कार्यविधि को जानना मेरा हक है, तो साथ ही मैं नम्र होने के लिए अपने आप को पुनःसमर्पित भी करती हूँ। मुझे स्मरण आता है कि बाइबल के एक चरित्र, अय्युब, को अपने दुःखों के लिए, ऐसे ही प्रश्नों का परमेश्वर से अपेक्षित उत्तर नहीं मिला था (अय्युब 1:5, 8)। वह अपनी परिस्थितियों को समझने का प्रयत्न करता रहा, और परमेश्वर ने उस से प्रश्न किया, "क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? जो ईश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे" (अय्युब 40:2)। परमेश्वर के प्रश्न को सुनकर अय्युब ने पश्चाताप के साथ उत्तर दिया, "देख, मैं तो तुच्छ हूँ, मैं तुझे क्या उत्तर दूं? मैं अपनी अंगुली दांत तले दबाता हूँ" (अय्युब 40:4)। परमेश्वर की महानता के सामने अय्युब निरुत्तर हो गया।

   यद्यपि परमेश्वर के मार्ग रहस्यमय और अथाह प्रतीत होते हैं, हम इस बात से निश्चिंत हो सकते हैं कि चाहे वे हमारी समझ से परे तो हैं, परन्तु उनके द्वारा परमेश्वर हमारी भलाई ही के लिए कार्य कर रहा है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


क्योंकि परमेश्वर का हाथ हर बात, हर स्थान, हर परिस्थिति में है; 
इसलिए हम निश्चिंत होकर सब कुछ उसके हाथ में छोड़ सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: अय्युब 40:1-14
Job 40:1 फिर यहोवा ने अय्यूब से यह भी कहा: 
Job 40:2 क्या जो बकवास करता है वह सर्वशक्तिमान से झगड़ा करे? जो ईश्वर से विवाद करता है वह इसका उत्तर दे। 
Job 40:3 तब अय्यूब ने यहोवा को उत्तर दिया: 
Job 40:4 देख, मैं तो तुच्छ हूँ, मैं तुझे क्या उत्तर दूं? मैं अपनी अंगुली दांत तले दबाता हूँ। 
Job 40:5 एक बार तो मैं कह चुका, परन्तु और कुछ न कहूंगा: हां दो बार भी मैं कह चुका, परन्तु अब कुछ और आगे न बढ़ूंगा। 
Job 40:6 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यह उत्तर दिया: 
Job 40:7 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे बता। 
Job 40:8 क्या तू मेरा न्याय भी व्यर्थ ठहराएगा? क्या तू आप निर्दोष ठहरने की मनसा से मुझ को दोषी ठहराएगा? 
Job 40:9 क्या तेरा बाहुबल ईश्वर के तुल्य है? क्या तू उसके समान शब्द से गरज सकता है? 
Job 40:10 अब अपने को महिमा और प्रताप से संवार और ऐश्वर्य्य और तेज के वस्त्र पहिन ले। 
Job 40:11 अपने अति क्रोध की बाढ़ को बहा दे, और एक एक घमण्डी को देखते ही उसे नीचा कर। 
Job 40:12 हर एक घमण्डी को देख कर झुका दे, और दुष्ट लोगों को जहां खड़े हों वहां से गिरा दे। 
Job 40:13 उन को एक संग मिट्टी में मिला दे, और उस गुप्त स्थान में उनके मुंह बान्ध दे। 
Job 40:14 तब मैं भी तेरे विषय में मान लूंगा, कि तेरा ही दहिना हाथ तेरा उद्धार कर सकता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 11:1-29