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मंगलवार, 12 जनवरी 2021

करो

 

          स्कूल जाने के लिए मेरी बेटी समय से कुछ पहले ही तैयार हो गई, इसलिए उसने सुझाया कि हम रास्ते में पड़ने वाली कॉफ़ी की दुकान पर रुकते हुए जाएंगे; मैंने मान लिया। जब हम उस दुकान पर पहुँचे, तो मैंने उससे पूछा कि क्या हम थोड़ी सी खुशी भी बाँट दें, और उसने मान लिया। हमने कॉफ़ी का अपना ऑर्डर दिया, और भुगतान करने वाली पंक्ति में पैसे लेने वाली महिला से कहा कि हमारे पीछे वाली महिला की कॉफ़ी के ऑर्डर का भुगतान भी हम ही से ले ले। मेरी बेटी के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कान थी।

          जीवन की बड़ी-बड़ी बातों में एक कप कॉफ़ी की कीमत कोई विशेष बात नहीं है; या फिर है? मैं सोचता हूँ कि क्या यह परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा औरों के लिए करने की कही गई बात को निभाने का एक तरीका हो सकता है? इससे जुड़ा एक विचार आपके सामने रखता हूँ, चुकाने के लिए किसी पंक्ति में खड़े हुए अपने से अगले या पिछले व्यक्ति के लिए कुछ सहायता कर देने की बात आपको कैसी लगती है? चाहे वह एक कप कॉफ़ी हो या कुछ और अधिक, अथवा उससे भी कम। प्रभु ने जब औरों के लिए करने को कहा है, तो उसने हमें दूसरों की सहायता करने की मात्रा की स्वतंत्रता भी  दे दी है।

          जब मैं और मेरी बेटी, उस कॉफ़ी की दुकान से बाहर जा रहे थे तो हमने हमारे पीछे खड़ी उस महिला और भुगतान लेने वाली महिला के चेहरों को देखा – उन दोनों ही के चेहरों पर एक बड़ी से मुस्कान थी। - जॉन ब्लेज़

 

जब हम लोगों के लिए करते हैं, हम प्रभु के लिए करते हैं।


जो कोई इन छोटों में से एक को चेला जानकर केवल एक कटोरा ठंडा पानी पिलाए, मैं तुम से सच कहता हूं, वह किसी रीति से अपना प्रतिफल न खोएगा। - मत्ती 10:42

बाइबल पाठ: मत्ती 25:37-40

मत्ती 25:37 तब धर्मी उसको उत्तर देंगे कि हे प्रभु, हम ने कब तुझे भूखा देखा और खिलाया? या प्यासा देखा, और पिलाया?

मत्ती 25:38 हम ने कब तुझे परदेशी देखा और अपने घर में ठहराया या नंगा देखा, और कपड़े पहनाए?

मत्ती 25:39 हम ने कब तुझे बीमार या बन्‍दीगृह में देखा और तुझ से मिलने आए?

मत्ती 25:40 तब राजा उन्हें उत्तर देगा; मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया, वह मेरे ही साथ किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17

रविवार, 23 अगस्त 2020

खुशी

 

          अकसर हम सुनते हैं कि खुशी अपनी इच्छा के अनुसार काम करने से मिलती है। परन्तु यह सत्य नहीं है। इस मानसिकता से केवल खोखलापन, चिंता, और दिल का दुःख ही मिलता है। कवि डब्ल्यू. एच. औडेन ने लोगों पर ध्यान किया जो विलासिता में अपने खालीपन को भरने का मार्ग तलाश रहे थे। उन्होंने उनके लिए लिखा “एक भुतहा जंगल में खोए हुए, / बच्चे जो रात से डरते हैं / जो न कभी प्रसन्न रहे और न भले।”


          परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार दाऊद हमारे भय और दुःख का उपाय लिखता है, “मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया” (भजन 34:4)। खुशी कार्यों को परमेश्वर की कार्य-विधि के अनुसार करने में है, और यह ऐसा तथ्य है जिसे प्रतिदिन परखा जा सकता है। दाऊद ने आगे लिखा, “जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया” (पद 5)। आप भी ऐसा ही कर के देखिए, और आप स्वयं समझ जाएँगे। जब वह कहता है, “परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है” (पद 8), तब उसका यही तात्पर्य है।


          हम कहते हैं देखने ही से विश्वास होता है, हम संसार में बातों को इसी प्रकार से समझते हैं – मुझे प्रमाण दिखाओ और मैं विश्वास कर लूँगा। परमेश्वर इसे विपरीत कहता है, विश्वास करो तो देखने भी पाओगे। तभी वह कहता है “परखो, और तब तुम देख लोगे।”


          परमेश्वर के वचन पर विश्वास रखो। वह आप से जो भी करने के लिए कहे, उसे कर दें; और आप देखने पाएँगे। वह आपको सही कार्य करने का अनुग्रह देगा, तथा उससे बढ़कर भी देगा; वह अपने आप को ही आपको दे देगा। वही तो सारी भलाई का एकमात्र स्त्रोत है – और उसके साथ स्थाई खुशी भी मिलेगी। - डेविड एच. रोपर

 

खुशी सही कार्य ठीक से करने में है।


यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा। - भजन संहिता 37:4


बाइबल पाठ: भजन 34:1-14

भजन संहिता 34:1 मैं हर समय यहोवा को धन्य कहा करूंगा; उसकी स्तुति निरन्तर मेरे मुख से होती रहेगी।

भजन संहिता 34:2 मैं यहोवा पर घमण्ड करूंगा; नम्र लोग यह सुनकर आनन्दित होंगे।

भजन संहिता 34:3 मेरे साथ यहोवा की बड़ाई करो, और आओ हम मिलकर उसके नाम की स्तुति करें।

भजन संहिता 34:4 मैं यहोवा के पास गया, तब उसने मेरी सुन ली, और मुझे पूरी रीति से निर्भय किया।

भजन संहिता 34:5 जिन्होंने उसकी ओर दृष्टि की उन्होंने ज्योति पाई; और उनका मुंह कभी काला न होने पाया।

भजन संहिता 34:6 इस दीन जन ने पुकारा तब यहोवा ने सुन लिया, और उसको उसके सब कष्टों से छुड़ा लिया।

भजन संहिता 34:7 यहोवा के डरवैयों के चारों ओर उसका दूत छावनी किए हुए उन को बचाता है।

भजन संहिता 34:8 परखकर देखो कि यहोवा कैसा भला है! क्या ही धन्य है वह पुरुष जो उसकी शरण लेता है।

भजन संहिता 34:9 हे यहोवा के पवित्र लोगों, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती!

भजन संहिता 34:10 जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होगी।

भजन संहिता 34:11 हे लड़कों, आओ, मेरी सुनो, मैं तुम को यहोवा का भय मानना सिखाऊंगा।

भजन संहिता 34:12 वह कौन मनुष्य है जो जीवन की इच्छा रखता, और दीर्घायु चाहता है ताकि भलाई देखे?

भजन संहिता 34:13 अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले।

भजन संहिता 34:14 बुराई को छोड़ और भलाई कर; मेल को ढूंढ और उसी का पीछा कर।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 113-115
  • 1 कुरिन्थियों 6

मंगलवार, 30 मई 2017

आँसू


   मैंने अपनी एक पुरानी सहेली को, उसकी माँ के देहान्त पर फोन किया। उसकी माँ और मेरी माँ भी बहुत अच्छी सहेलियाँ रहे थे, और अब दोनों ही इस संसार से जा चुके थे। परस्पर बातचीत करते हुए, हमारा वार्तालाप भावनाओं के चक्र में चला गया - देहान्त के कारण दुःख के आँसू और उनके प्रेम, देखभाल करने वाले स्वभाव और ज़िन्दादिली के उदाहरणों को स्मरण करके उनके साथ बिताए हुए पलों के लिए खुशी के आँसू।

   हम में से अनेकों ने इन मिश्रित भावनाओं का अनुभव किया होगा - एक पल रोना और दूसरे पल हँसना। यह परमेश्वर द्वारा हमें प्रदान की गई बड़ी अद्भुत बात है कि हम दुःख और खुशी दोनों ही में आँसुओं के द्वारा अपने मन की भावना व्यक्त कर सकते हैं, अपना मन हलका कर सकते हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि हमें परमेश्वर ने अपने स्वरूप में सृजा है (उत्पत्ति 1:26)। क्योंकि सारे संसार के सभी मनुष्य उसी एक परमेश्वर के द्वारा, उस ही के स्वरूप में सृजे गए हैं, और संसार भर में, सभी संसकृतियों में विनोद व्यवहार का एक अभिन्न अंग है, इसलिए मेरा विचार है कि प्रभु यीशु का भी विनोदप्रीय व्यवहार रहा होगा। परन्तु हम यह भी जानते हैं कि वह दुःख की पीड़ा से भी भली-भांति अवगत था। जब प्रभु के मित्र लाज़र का देहान्त हुआ और प्रभु ने लाज़र की बहन मरियम को रोते हुए देखा, तो "जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? यीशु के आंसू बहने लगे" (यूहन्ना 11:33, 35)।

   अपनी भावनाओं को आँसुओं द्वारा व्यक्त करना परमेश्वर का एक दान है, और बाइबल हमें आश्वस्त करती है कि परमेश्वर हमारे प्रत्येक आँसू का हिसाब रखता है: "तू मेरे मारे मारे फिरने का हिसाब रखता है; तू मेरे आंसुओं को अपनी कुप्पी में रख ले! क्या उनकी चर्चा तेरी पुस्तक में नहीं है?" (भजन 56:8)। लेकिन साथ ही बाइबल हमें यह आश्वासन भी देती है कि हम मसीही विश्वासियों के लिए एक ऐसा समय भी आने वाला है, जब हर दुःख, हर पीड़ा का अन्त हो जाएगा, और आँसुओं का भी; परमेश्वर हमारे साथ निवास करेगा और स्वयं हमारे सभी आँसू पोंछ डालेगा। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता, जिसने हमारे सभी पापों को धो डाला है, 
वही हमारे सभी आँसुओं को भी पोंछ देगा।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:32-44
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता 
John 11:38 यीशु मन में फिर बहुत ही उदास हो कर कब्र पर आया, वह एक गुफा थी, और एक पत्थर उस पर धरा था। 
John 11:39 यीशु ने कहा; पत्थर को उठाओ: उस मरे हुए की बहिन मारथा उस से कहने लगी, हे प्रभु, उस में से अब तो र्दुगंध आती है क्योंकि उसे मरे चार दिन हो गए। 
John 11:40 यीशु ने उस से कहा, क्या मैं ने तुझ से न कहा था कि यदि तू विश्वास करेगी, तो परमेश्वर की महिमा को देखेगी। 
John 11:41 तब उन्होंने उस पत्थर को हटाया, फिर यीशु ने आंखें उठा कर कहा, हे पिता, मैं तेरा धन्यवाद करता हूं कि तू ने मेरी सुन ली है। 
John 11:42 और मैं जानता था, कि तू सदा मेरी सुनता है, परन्तु जो भीड़ आस पास खड़ी है, उन के कारण मैं ने यह कहा, जिस से कि वे विश्वास करें, कि तू ने मुझे भेजा है। 
John 11:43 यह कहकर उसने बड़े शब्द से पुकारा, कि हे लाजर, निकल आ। 
John 11:44 जो मर गया था, वह कफन से हाथ पांव बन्‍धे हुए निकल आया और उसका मुंह अंगोछे से लिपटा हुआ था यीशु ने उन से कहा, उसे खोल कर जाने दो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 इतिहास 10-12
  • यूहन्ना 11:30-57


गुरुवार, 4 नवंबर 2010

बीज बोइये और फसल काटिये

मैंने एक छोटी कहानी पढ़ी - एक आदमी बीजों की दुकान में बीज देख रहा था, उसे अचानक विचित्र दृश्य दिखाई दिया, वहां परमेश्वर बीज बेचने वाला बनकर खड़ा था। वह आदमी तुरंत परमेश्वर के पास गया और उससे पूछा "आप क्या बेच रहे हैं?" परमेश्वर ने पलट कर पूछा "आप क्या चाहते हैं; आपके दिल की क्या इच्छा है?" आदमी ने उतर दिया "मैं केवल अपने लिये ही नहीं, सारे संसार के लिये खुशी, शांति और भय से मुक्ति चाहता हूँ।" परमेश्वर मुस्कुराया और बोला, "मैं बीज बेचता हूँ, फल नहीं!"

परमेश्वर के वचन, बाइबल में पौलुस ने जीवन में परमेश्वर का आदर और आज्ञाकारिता वाले व्यवहार रूपी बीज बोने के महत्व पर ज़ोर दिया, "क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा" (गलतियों ६:७)। यदि परमेश्वर की आशीशों के फल अनुभव करने हैं तो हमें अपना कर्तव्य भी निभाना होगा; उसके बिना यह सम्भव नहीं होगा।

इस कर्तव्य के निर्वाह में उन लोगों के उदाहरण का अनुसरण करना सहायक होगा जो अपने जीवनों में अच्छे बीज बोते रहे हैं। लेखक सैमुएल शूमेकर का कहना है कि अच्छा उदाहरण या तो हमें वैसा ही करने के लिये प्रेरित कर सकता है, यह हमें यह कहने के लिये बाध्य कर सकता है कि "हां, वह व्यक्ति ऐसा है। वह मेरी तरह गुस्से या अधीरता या चिंता से विचिलित नहीं होता। उसके स्वभाव में आनन्द है।" शूमेकर ने आगे कहा "शायद हम यह भूल जाते हैं कि उस व्यक्ति को मन की ऐसी शांति पाने के लिये बहुत संघर्ष करना पड़ा होगा, और जैसे संघर्ष कर के वह विजयी हुआ, हम भी वैसा ही संघर्ष करके विजयी हो सकते हैं।"

मसीही विश्वासी के लिये यह संघर्ष और आसान हो जाता है क्योंकि प्रभु यीशु ने अपने अनुयायीयों से वायदा किया "मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे" (यूहन्ना १४:२७)। संसार की हर परिस्थिति में मसीही विश्वासी के लिये शांति का स्रोत प्रभु यीशु है "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले। संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्‍तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया है" (यूहन्ना १६:३३)।

क्या आप अपने आप से, अपने हालात से, अपने मन और जीवन की अशांति से परेशान हैं? प्रभु यीशु के पास आइये, समस्त संसार के लिये उसका खुला निमंत्रण है "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो, और मुझ से सीखो, क्‍योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे" (मत्ती ११: २८, २९)। आज ही नये व्यवहार और नये जीवन के बीज बोना आरंभ कीजिए, परमेश्वर का आत्मा उन बीजों के फल आपके जीवन में उत्पन्न करेगा। - जोनी योडर


जो बीज हम आज बोएंगे, कल मिलने वाले फल उन्ही से निर्धारित होंगे।

...क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। - गलतियों ६:७


बाइबल पाठ: गलतियों ६:७-१०

धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्‍योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा।
क्‍योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्‍त जीवन की कटनी काटेगा।
हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्‍योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे।
इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल:
  • यर्मियाह ३२, ३३
  • इब्रानियों १