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मंगलवार, 2 अक्टूबर 2018

स्मरण



      मेरा मित्र बॉब हौर्नर प्रभु यीशु मसीह को “स्मरण करवाने का विशेषज्ञ” कहता है। और यह भला है क्योंकि हम स्वभाव से इतने अधिक भुलक्कड़ और संदेह करने वाले हैं। प्रभु यीशु ने पृथ्वी की अपनी सेवकाई के दिनों में चाहे जितनी बार उनके पास आने वालों की आवश्यकताओं की पूर्ति की हो, किन्तु फिर भी उसके प्रथम शिष्य संदेह करते रहते थे कि उनकी आवश्यकताएँ कहीं अपूर्ण न रह जाएँ। प्रभु के अनेकों आश्चर्यकर्मों को देखने के बाद भी, वे उस बड़े और गहरे अर्थ को समझने में नाकाम रहे जो प्रभु चाहता था कि वे समझें और स्मरण रखें।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के नए नियम खण्ड में हम एक स्थान पर पढ़ते हैं कि गलील की झील में नाव से यात्रा करते समय शिष्यों को ध्यान आया कि वे रोटी लाना भूल गए हैं, और वे दबी आवाज़ में इसके बारे में आपस में बातचीत करने लगे। प्रभु यीशु ने उनके असमंजस को देख के उनसे पूछा, “यह जानकर यीशु ने उन से कहा; तुम क्यों आपस में यह विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते? क्या तुम्हारा मन कठोर हो गया है? क्या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं” (मरकुस 8:17-18)। फिर प्रभु ने उन्हें स्मरण करवाया कि जब प्रभु ने पाँच हज़ार की भीड़ को पाँच रोटियों से खिलाया था तब शिष्यों ने बचे हुए भोजन की बारह टोकरियाँ उठाईं थीं। और जब प्रभु ने चार हज़ार की भीड़ को सात रोटियों से खिलाया था तब उन्होंने सात टोकरे भरकर बचा हुआ भोजन उठाया था। इसके बाद प्रभु ने उन शिष्यों से पूछा, “उसने उन से कहा, क्या तुम अब तक नहीं समझते?” (पद 21)।

      लोगों की भौतिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रभु यीशु द्वारा आश्चर्यजनक रीति से प्रावधान किए जाने के द्वारा प्रभु एक महान सत्य की ओर संकेत कर रहा था – कि वह ही जीवन की रोटी है, और उसके यह देह रोटी के समान, हम सब के लिए “तोड़ी” जानी थी, जिससे हम उससे जीवन पा सकें।

      प्रभु भोज के समय हम मसीही विश्वासी जब रोटी तोड़कर खाते हैं और कटोरे में से पीते हैं तो हम प्रभु यीशु द्वारा सँसार के प्रत्येक मनुष्य के प्रति रखे गए प्रेम और सभी के उद्धार के लिए किए गए प्रावधान को स्मरण करते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु भोज में भाग लेना प्रभु यीशु के प्रेम और प्रावधान को स्मरण करना है।

यीशु ने उन से कहा, जीवन की रोटी मैं हूं: जो मेरे पास आएगा वह कभी भूखा न होगा और जो मुझ पर विश्वास करेगा, वह कभी प्यासा न होगा। - यूहन्ना 6:35

बाइबल पाठ: मरकुस 8:11-21
Mark 8:11 फिर फरीसी निकलकर उस से वाद-विवाद करने लगे, और उसे जांचने के लिये उस से कोई स्‍वर्गीय चिन्ह मांगा।
Mark 8:12 उसने अपनी आत्मा में आह मार कर कहा, इस समय के लोग क्यों चिन्‍ह ढूंढ़ते हैं? मैं तुम से सच कहता हूं, कि इस समय के लोगों को कोई चिन्ह नहीं दिया जाएगा।
Mark 8:13 और वह उन्हें छोड़कर फिर नाव पर चढ़ गया और पार चला गया।
Mark 8:14 और वे रोटी लेना भूल गए थे, और नाव में उन के पास एक ही रोटी थी।
Mark 8:15 और उसने उन्हें चिताया, कि देखो, फरीसियों के खमीर और हेरोदेस के खमीर से चौकस रहो।
Mark 8:16 वे आपस में विचार कर के कहने लगे, कि हमारे पास तो रोटी नहीं है।
Mark 8:17 यह जानकर यीशु ने उन से कहा; तुम क्यों आपस में यह विचार कर रहे हो कि हमारे पास रोटी नहीं? क्या अब तक नहीं जानते और नहीं समझते?
Mark 8:18 क्या तुम्हारा मन कठोर हो गया है? क्या आंखे रखते हुए भी नहीं देखते, और कान रखते हुए भी नहीं सुनते? और तुम्हें स्मरण नहीं।
Mark 8:19 कि जब मैं ने पांच हजार के लिये पांच रोटी तोड़ी थीं तो तुम ने टुकड़ों की कितनी टोकिरयां भरकर उठाईं? उन्होंने उस से कहा, बारह टोकरियां।
Mark 8:20 और जब चार हज़ार के लिये सात रोटी थीं तो तुमने टुकड़ों के कितने टोकरे भरकर उठाए थे? उन्होंने उस से कहा, सात टोकरे।
Mark 8:21 उसने उन से कहा, क्या तुम अब तक नहीं समझते?


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 14-16
  • इफिसियों 5:1-16



सोमवार, 1 अक्टूबर 2018

पकड़



      चीन के ज़हांगज़ियाजेई में स्थित तियांमेन पर्वत सँसार के सबसे सुन्दर पर्वतों में से एक माना जाता है। उसकी गगनचुंबी चोटियों को उनकी भव्य सुंदरता में देखने के लिए तियांमेन शान केबल कार द्वारा यात्रा करनी पड़ती है, जो केबल के सहारे 7,455 मीटर (4.5 मील) की दूरी तय करती है। इस केबल कार का इतनी ऊंचाई पर चढ़ना और इतनी लंबी दूरी तय करना बड़े अचरज का विषय है, क्योंकि इस केबल कार में अपनी कोई मोटर नहीं है। परन्तु वह उन ऊंचाईयों पर भी सुरक्षित यात्रा करती है क्योंकि उसकी पकड़ उसके मज़बूत केबल पर दृढ़ बनी रहती है, और उस केबल को शक्तिशाली मोटर चलाती है।

      यही सिद्धान्त हमारे मसीही विश्वास के जीवन पर भी लागू होता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस अपने जीवन के उदाहरण के द्वारा हमें प्रोत्साहित करता है: “निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है” (फिलिप्पियों 3:14)। इसके लिए प्रेरित पौलुस ने आगे लिखा, “प्रभु में स्थिर रहो” (4:1), अर्थात मसीह यीशु को दृढ़ता से थामे रहो। मसीही विश्वास के जीवन में अग्रसर होने के लिए हमारे पास अपने कोई संसाधन नहीं हैं। आगे बढ़ते रहने के लिए हम पूर्णतः प्रभु यीशु मसीह पर निर्भर हैं। वही हमें बड़ी से बड़ी चुनौतियों से सुरक्षित निकालेगा और घर तक सकुशल पहुंचाएगा।

      आपने पार्थिव जीवन के अन्त के निकट प्रेरित पौलुस ने अपने विषय कहा, “मैं अच्छी कुश्‍ती लड़ चुका हूं मैं ने अपनी दौड़ पूरी कर ली है, मैं ने विश्वास की रखवाली की है” (2 तिमुथियुस 4:7)। प्रभु यीशु मसीह पर अपने विश्वास की पकड़ को दृढ़ बनाए रखिए, उसे दृढ़ता से थामे रहिए, और आप भी पौलुस के समान विश्वास में स्थिर एवं स्थापित बने रहेंगे। - एल्बर्ट ली


विश्वास में बने रहने का अर्थ है 
संभालने के लिए परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर भरोसा बनाए रखना।

यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह! – भजन 27:14

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:12-4:1
Philippians 3:12 यह मतलब नहीं, कि मैं पा चुका हूं, या सिद्ध हो चुका हूं: पर उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ा चला जाता हूं, जिस के लिये मसीह यीशु ने मुझे पकड़ा था।
Philippians 3:13 हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूं: परन्तु केवल यह एक काम करता हूं, कि जो बातें पीछे रह गई हैं उन को भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ।
Philippians 3:14 निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि वह इनाम पाऊं, जिस के लिये परमेश्वर ने मुझे मसीह यीशु में ऊपर बुलाया है।
Philippians 3:15 सो हम में से जितने सिद्ध हैं, यही विचार रखें, और यदि किसी बात में तुम्हारा और ही विचार हो तो परमेश्वर उसे भी तुम पर प्रगट कर देगा।
Philippians 3:16 सो जहां तक हम पहुंचे हैं, उसी के अनुसार चलें।
Philippians 3:17 हे भाइयो, तुम सब मिलकर मेरी सी चाल चलो, और उन्हें पहिचान रखो, जो इस रीति पर चलते हैं जिस का उदाहरण तुम हम में पाते हो।
Philippians 3:18 क्योंकि बहुतेरे ऐसी चाल चलते हैं, जिन की चर्चा मैं ने तुम से बार बार किया है और अब भी रो रोकर कहता हूं, कि वे अपनी चालचलन से मसीह के क्रूस के बैरी हैं।
Philippians 3:19 उन का अन्‍त विनाश है, उन का ईश्वर पेट है, वे अपनी लज्ज़ा की बातों पर घमण्‍ड करते हैं, और पृथ्वी की वस्‍तुओं पर मन लगाए रहते हैं।
Philippians 3:20 पर हमारा स्‍वदेश स्वर्ग पर है; और हम एक उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के वहां से आने ही बाट जोह रहे हैं।
Philippians 3:21 वह अपनी शक्ति के उस प्रभाव के अनुसार जिस के द्वारा वह सब वस्‍तुओं को अपने वश में कर सकता है, हमारी दीन-हीन देह का रूप बदलकर, अपनी महिमा की देह के अनुकूल बना देगा।
Philippians 4:1 इसलिये हे मेरे प्रिय भाइयों, जिन में मेरा जी लगा रहता है जो मेरे आनन्द और मुकुट हो, हे प्रिय भाइयो, प्रभु में इसी प्रकार स्थिर रहो।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 11-13
  • इफिसियों 4



रविवार, 30 सितंबर 2018

विश्वास



      लोग कहते हैं कि हमें विश्वास रखना चाहिए। परन्तु इसका अर्थ क्या है? क्या कैसा भी विश्वास रखना सही और उचित है? एक शताब्दी पहले एक सकारात्मक विचारधारा रखने वाले ने कहा “अपने आप में, और जो कुछ आप हो, उसमें विश्वास रखो। यह मान कर चलो कि आपके अन्दर कुछ ऐसा है जो किसी भी बाधा से बढ़कर है।” सुनने में यह बहुत अच्छा लगता है, परन्तु जब यह विचार जीवन और सँसार की वास्तविकता से टकराता है तो चकनाचूर हो जाता है। हमें किसी ऐसे पर विश्वास की आवश्यकता पड़ती है जो हमसे और सँसार की बातों से बढ़कर है, हर बात, हर परिस्थिति में उनपर सामर्थी एवँ जयवंत है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि परमेश्वर ने अब्राहम से प्रतिज्ञा की, कि उसका वंश अनगिनित होगा (उत्पत्ति 15:4-5), परन्तु अब्राहम के सामने एक बड़ी बाधा थी – वह और उसकी पत्नि सारा बूढ़े तथा निःसंतान थे! जब वे दोनों परमेश्वर द्वारा प्रतिज्ञा को पूरा करने की प्रतीक्षा करते-करते थक गए, अधीर हो गए, तो उन्होंने अपने उपाय से इसका समाधान करना चाहा। परिणामस्वरूप, उनके परिवार में बहुत कलह उत्पन्न हो गई, और उनका परिवार बिखर गया (देखें उत्पत्ति 16 और 21:8-21)।

      अब्राहम की अपनी कोई भी युक्ति काम नहीं आई; अन्ततः परमेश्वर का इंतजाम ही उनके काम आया। परन्तु अब्राहम महान विश्वास का व्यक्ति बना, और उसके विषय प्रेरित पौलुस ने लिखा, “उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि तेरा वंश ऐसा होगा वह बहुत सी जातियों का पिता हो” (रोमियों 4:18); उसका यही विश्वास अब्राहम के लिए धार्मिकता गिना गया (पद 22)।

      अब्राहम का विश्वास अपने आप से कहीं अधिक बढ़कर किसी हस्ती पर था – एकमात्र जीवते सच्चे परमेश्वर यहोवा पर। हमारे विश्वास का आधार कौन है, हमारा विश्वास किस पर है – किसी सांसारिक एवँ नश्वर वस्तु अथवा व्यक्ति पर, या सबसे महान अविनाशी परमेश्वर पर? हमारा यही निर्णय हमारे वर्तमान तथा परलोक के लिए सबसे बढ़कर महत्वपूर्ण निर्णय है। - टिम गुस्ताफ्सन


यदि हमारे विश्वास का आधार सही है, तब ही विश्वास सही और उचित होगा।

उन्होंने कहा, प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास कर, तो तू और तेरा घराना उद्धार पाएगा। - प्रेरितों 16:31

बाइबल पाठ: रोमियों 4:18-25
Romans 4:18 उसने निराशा में भी आशा रखकर विश्वास किया, इसलिये कि उस वचन के अनुसार कि तेरा वंश ऐसा होगा वह बहुत सी जातियों का पिता हो।
Romans 4:19 और वह जो एक सौ वर्ष का था, अपने मरे हुए से शरीर और सारा के गर्भ की मरी हुई की सी दशा जानकर भी विश्वास में निर्बल न हुआ।
Romans 4:20 और न अविश्वासी हो कर परमेश्वर की प्रतिज्ञा पर संदेह किया, पर विश्वास में दृढ़ हो कर परमेश्वर की महिमा की।
Romans 4:21 और निश्चय जाना, कि जिस बात की उसने प्रतिज्ञा की है, वह उसे पूरी करने को भी सामर्थी है।
Romans 4:22 इस कारण, यह उसके लिये धामिर्कता गिना गया।
Romans 4:23 और यह वचन, कि विश्वास उसके लिये धामिर्कता गिया गया, न केवल उसी के लिये लिखा गया।
Romans 4:24 वरन हमारे लिये भी जिन के लिये विश्वास धामिर्कता गिना जाएगा, अर्थात हमारे लिये जो उस पर विश्वास करते हैं, जिसने हमारे प्रभु यीशु को मरे हुओं में से जिलाया।
Romans 4:25 वह हमारे अपराधों के लिये पकड़वाया गया, और हमारे धर्मी ठहरने के लिये जिलाया भी गया।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 9-10
  • इफिसियों 3



शनिवार, 29 सितंबर 2018

अनुग्रह



      धार्मिक अगुओं का एक समूह एक व्यभिचार में पकड़ी गई स्त्री को लेकर प्रभु यीशु के पास आया, जब वे मंदिर में लोगों को उपदेश दे रहे थे। उनका उद्देश्य उस स्त्री के द्वारा प्रभु को समाज की दृष्टि में नीचा दिखाना था; परन्तु वे नहीं जानते थे कि वास्तव में वे उस पापी स्त्री को अनुग्रह के सागर के पास ला रहे हैं। उन्होंने प्रभु यीशु के सामने उस स्त्री को खड़ा किया और उससे पूछा कि उस स्त्री के दण्ड के बारे में उसकी राय क्या है; अब इस स्त्री के साथ क्या किया जाना चाहिए? उनके विचार में, यदि प्रभु यीशु कहते कि उसे छोड़ दो तो यह मूसा की व्यवस्था का उल्लंघन होता, और प्रभु यीशु व्यवस्था का पालन न करने के दोषी ठहरते। परन्तु यदि वे कहते कि व्यवस्था के अनुसार उसे पत्थरवाह करके मार दो, तो वे प्रेम और अनुग्रह की अपनी शिक्षाओं के विरुद्ध जाते।

      परन्तु प्रभु यीशु ने उन षड्यंत्रकारियों पर पासा पलट दिया। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि उन दोषारोपण करने वाले धर्म के अगुवों को तुरंत सीधा उत्तर देने के बजाए, प्रभु ने झुककर धरती पर कुछ लिखना आरंभ कर दिया। जब वे उससे प्रश्न पूछते रहे, तो उसने ऊपर उनकी ओर देखकर उनसे कहा कि उनमें से जो कोई भी निर्दोष हो, जिसने कभी कोई पाप न किया हो, पहला पत्थर वही मारे, और प्रभु ने झुककर फिर से धरती पर लिखना आरंभ कर दिया। कुछ देर के बाद जब प्रभु ने आँख उठाई तो वह स्त्री अकेली खड़ी थी, उसपर दोषारोपण करने और प्रभु को षडयंत्र में फंसाने का प्रयास करने वाले सभी जा चुके थे।
      अब वहाँ केवल एक ही था जो निर्दोश और निष्पाप था, जो उस स्त्री पर पत्थर मार सकता था – स्वयँ प्रभु यीशु; परन्तु उन्होंने उस स्त्री की ओर देखा, उसपर अनुग्रह किया और उसके पापों को क्षमा करके उससे फिर पाप न करने को कहकर उसे जाने दिया।

      आज आपके स्थिति चाहे जो भी हो, चाहे आप औरों पर दोषारोपण करने के दोषी हों, या इस आश्वासन की खोज में हों कि आपके पापों का क्या होगा? निश्चिन्त होकर प्रभु यीशु के सामने अपने पापों को मान लीजिए तथा उससे क्षमा की प्रार्थना कीजिए, क्योंकि सँसार के किसी भी व्यक्ति के कैसे एवँ कितने भी पाप क्यों न हों, वे प्रभु यीशु के अनुग्रह के बाहर नहीं हैं । वह सबसे प्रेम करता है, सबको क्षमा प्रदान करना चाहता है; उसका प्रेम और करूणा आज सब के लिए उपलब्ध हैं। - रैंडी किल्गोर


हम एक ऐसे उद्धारकर्ता की सेवा करते हैं जो क्षमा देने के लिए लालायित रहता है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:16-17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया।
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा।
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा।
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है।
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है?
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा।
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे।
John 8:8 और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा।
John 8:9 परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई।
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी।
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 7-8
  • इफिसियों 2



शुक्रवार, 28 सितंबर 2018

प्रार्थना



      जब भी हम किसी परेशानी या कठिन परिस्थिति का सामना करते हैं, तब हम अपने मसीही भाई-बहनों से निवेदन करते हैं कि हमारे लिए प्रार्थनाएं करें। यह जानना कि और लोग, वे जो हमारी चिंता करते हैं, हमें परमेश्वर के सम्मुख प्रार्थनाओं में उठाए हुए हैं, बहुत सांतवना एवं प्रोत्साहन प्रदान करता है। परन्तु यदि आपके पास कोई निकट मसीही मित्र नहीं हैं, तब क्या? हो सकता है कि आप किसी ऐसे क्षेत्र में रहते हैं जहाँ प्रभु यीशु मसीह और उसके सुसमाचार का विरोध किया जाता है। ऐसे में आपके लिए प्रार्थना कौन करेगा?

      परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 8 विजय का अध्याय है, और हम इसमें लिखा पाते हैं कि “इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है” (रोमियों 8:26-27)। इसलिए यह जान रखिए कि परमेश्वर का पवित्र आत्मा आपके लिए प्रार्थना करता रहता है।

      इसके अतिरिक्त, “फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है” (पद 34), जीवता प्रभु यीशु भी आपके लिए विनती निवेदन करता रहता है।

      ज़रा विचार कीजिए! पवित्र-आत्मा और प्रभु यीशु आपका नाम ले लेकर आपकी आवश्यकताओं को परमेश्वर पिता के सम्मुख रखते हैं, जो सुनकर आपके पक्ष में कार्य करता है।

      हम मसीही विश्वासियों को यह आश्वासन है कि हम चाहे कहीं भी रहते हों, या हमारी परिस्थिति कितनी भी कठिन या परेशानी से भरी क्यों न हो, हम जीवन की किसी भी समस्या का सामना अकेले नहीं करते हैं। पवित्र-आत्मा और प्रभु यीशु हमारे लिए प्रार्थना करते रहते हैं, हमारे साथ बने रहते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड

                                                        
पवित्र-आत्मा और प्रभु यीशु मसीह आपके लिए सदैव प्रार्थना करते रहते हैं।

और मैं पिता से बिनती करूंगा, और वह तुम्हें एक और सहायक देगा, कि वह सर्वदा तुम्हारे साथ रहे। अर्थात सत्य का आत्मा, जिसे संसार ग्रहण नहीं कर सकता, क्योंकि वह न उसे देखता है और न उसे जानता है: तुम उसे जानते हो, क्योंकि वह तुम्हारे साथ रहता है, और वह तुम में होगा। मैं तुम्हें अनाथ न छोडूंगा, मैं तुम्हारे पास आता हूं। - यूहन्ना14:16-18

बाइबल पाठ: रोमियों 8:22-34
Romans 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।
Romans 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।
Romans 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?
Romans 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।
Romans 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।
Romans 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।
Romans 8:28 और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।
Romans 8:29 क्योंकि जिन्हें उसने पहिले से जान लिया है उन्हें पहिले से ठहराया भी है कि उसके पुत्र के स्वरूप में हों ताकि वह बहुत भाइयों में पहिलौठा ठहरे।
Romans 8:30 फिर जिन्हें उसने पहिले से ठहराया, उन्हें बुलाया भी, और जिन्हें बुलाया, उन्हें धर्मी भी ठहराया है, और जिन्हें धर्मी ठहराया, उन्हें महिमा भी दी है।
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है?
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा?
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है।
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 5-6
  • इफिसियों 1



गुरुवार, 27 सितंबर 2018

धन



      मेरी सहेली के पिता की अन्त्येष्टि के समय किसी ने उससे कहा, “तुम्हारे पिता से मिलने से पहले मैं नहीं जानता था कि कोई किसी की सहायता करते हुए इतना आनन्दित रहा सकता है।” मेरी सहेली के पिता ने परमेश्वर के राज्य के निर्माण में लोगों की सेवा करने, हंसते रहने और प्रेम करते रहने, और अपरिचितों से मिलने तथा उन्हें मित्र बना लेने के द्वारा अपना योगदान दिया था । जब उनका देहांत हुआ तो उन्होंने प्रेम की विरासत अपने पीछे छोड़ी; इसकी तुलना में जब मेरी सहेली की फूफी – उसके पिता की बड़ी बहन ने अपनी धन-संपत्ति को ही अपनी विरासत माना और अपने अंतिम वर्ष इसी चिन्ता में बिताए कि उनकी विरासत और दुर्लभ पुस्तकों की देखभाल उनके बाद कौन करेगा।

      अपनी शिक्षाओं और अपने जीवन के उदाहरण के द्वारा प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को चिताया कि वे सांसारिक धन एकत्रित न करें, वरन निर्धनों को दें, और उसकी कीमत पहिचानें जिसे न काई और न ही ज़ंक नाश करेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में, इस संदर्भ में, इस बात का महत्व समझाने वाला प्रभु यीशु का कथन दर्ज है, “क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा” (लूका 12:34)।

      हमारा यह विचार हो सकता है कि हमारी वस्तुएँ हमारे जीवनों को सार्थक करती हैं। परन्तु जब हमारा कोई नवीनतम उपकरण टूट जाता है, या जब हम किसी बहुमूल्य वस्तु को खो देते हैं, तब हमें एहसास होता है कि सांसारिक वस्तुएँ स्थाई नहीं हैं, वरन प्रभु यीशु के साथ हमारा संबंध ही है जो स्थिर एवँ स्थाई बना रहता है तथा शान्ति प्रदान करता है। औरों के प्रति हमारा प्रेम और चिन्ता धूमिल नहीं होते हैं, परन्तु बने रहते हैं।

      हम प्रभु परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह उस वस्तु के मूल्य की वास्तविक सच्चाई को समझने में हमारी सहायता करे, जिसे हम मूल्यवान समझते हैं, जिससे हम समझ सकें कि हमारे मन कहाँ लगे रहते हैं; और सबसे बढ़कर हमें परमेश्वर के राज्य के खोजी बनाए, सच्चे और चिर-स्थाई धन की लालसा हमारे अन्दर जागृत करे। - एमी बाउचर पाई


हम जिसे बहुमूल्य समझते हैं वही हमारे मनों की दशा को प्रकट करता है।

यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? – मत्ती 16:26

बाइबल पाठ: लूका 12:22-34
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है।
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो?
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा?
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो।
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है।
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।
Luke 12:33 अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता।
Luke 12:34 क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 3-4
  • गलतियों 6



बुधवार, 26 सितंबर 2018

निमंत्रण



      एक संगीत सभा में उपस्थिति के दौरान, मेरा मन एक परेशान करने वाली ऐसी बात की ओर चला गया जिस पर मुझे ध्यान देने की आवश्यकता थी। परन्तु मेरे ध्यान का उस ओर भटकना केवल कुछ पल का ही थी, क्योंकि एक बहुत ही मनोहर भक्ति-गीत के शब्द मेरे कानों से होकर मेरे मन की गहराइयों को छूने लगे। संगीत मण्डली के सदस्य गा रहे थे, “मेरी आत्मा शान्त रह।” उन शब्दों को सुनते और उन पर मनन करते हुए मेरी आँखें भर आईं, उस शान्ति के बारे में सोचते हुए जो केवल प्रभु परमेश्वर द्वारा ही उपलब्ध करवाई जा सकती है। उस गीत के बोल कुछ इस प्रकार थे:
      मेरी आत्मा शान्त रह:
      प्रभु निकट है तेरे!
      दुःख दर्द का क्रूस सह धीरज से तू;
      आज्ञा और प्रबंध छोड़ परमेश्वर पर;
      हर बदालव में वह रहेगा खरा।

      जब प्रभु यीशु उन नगरों को डाँट रहे थे जिनमें उन्होंने अपने अधिकांश आश्चर्यकर्म किए थे परन्तु फिर भी जिन्होंने पश्चाताप नहीं किया था (मत्ती 11:40), तब भी प्रभु के पास उन लोगों के लिए सांत्वना और शान्ति के शब्द थे जो उनके निकट आना चाहते थेते। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि प्रभु ने उनके पास आने की इच्छा रखने वालों को निमंत्रण देते हुए कहा “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे” (मत्ती 11:28-29)।

      उनका यह कथन चौंकाने वाला है! जो उनका तिरिस्कार कर रहे थे, उनके लिए प्रयोग किए गए उनके कठोर शब्दों के तुरंत बाद प्रभु ने सभी के लिए यह निमंत्रण दिया कि सभी लोग उनके निकट आएँ और उस शान्ति को प्राप्त करें जिसकी सब को लालसा रहती है। प्रभु यीशु ही एकमात्र हैं को हमारी व्याकुल और श्रमित आत्माओं को स्थाई और सच्ची शान्ति प्रदान कर सकते हैं; और इसके लिए उनका निमंत्रण सँसार के सभी लोगों के लिए खुला एवँ उपलब्ध है। - जो स्टोवैल


जब हम अपने मन प्रभु यीशु पर लगाए रखते हैं, 
तो वह हमारे मनों को शान्त बनाए रखता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
Matthew 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है।
Matthew 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा।
Matthew 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे।
Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे।
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 1-2
  • गलतियों 5