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सोमवार, 6 जनवरी 2020

भेंट



      लेखक ओ. हेनरी की विख्यात लघु कथा, “द गिफ्ट ऑफ़ द मैगी” के प्रमुख पात्र – एक युवा दंपत्ति जिम और डेला निर्धन थे, किन्तु उस क्रिसमस के समय वे एक दूसरे को कोई बहुत अनुपम भेंट देना चाहते थे। डेला के बहुत लंबे और सुन्दर बाल थे, और जिम के पास उसके दादा के समय से परिवार में चली आ रही एक घड़ी थी, जिसे कलाई पर बाँधने के लिए जिम के पास उपयुक्त चेन नहीं थी। एक दूसरे को बताए बिना, एक दूसरे को उत्तम भेंट देने के लिए पैसे जुटाने के लिए, डेला ने अपने बाल कटवा कर बेच दिए और जिम के लिए चेन खरीद ली; और जिम ने अपनी घड़ी बेचकर डेला के बालों के लिए सुन्दर तथा महंगे कंघों को खरीद लिया।

      अब उस क्रिसमस की प्रातः उनके पास प्रेम और प्रेम की अभिव्यक्ति के लिए अच्छी भेंट तो थीं, किन्तु उन भेंटों की उपयोगिता नहीं थी। परन्तु उनके इस प्रेम भाव ने उन्हें भेंट देने वालों में सबसे उत्तम बना दिया था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के प्रभु यीशु के जन्म की घटनाओं में हम कुछ लोगों (मैगी) को देखते हैं जो बहुमूल्य भेंटें, सोना, मुर्र, और लोबान, लेकर संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के जन्म के समय उसके दर्शन के लिए आए थे (मत्ती 2:11)। ये लोग यहूदी नहीं थे; ये बाहरी, या अन्यजाति थे, और उन्हें इस बात का आभास भी नहीं था कि यरूशलेम आकर नए जन्मे हुए यहूदियों के राजा के विषय पूछताछ करने के द्वारा वे वहाँ पर कितनी उथल-पुथल मचा देंगे (पद 2)।

      जैसा कि जिम और डेला की योजनाओं के साथ हुआ, उन मैगी की योजनाएं भी अपेक्षा के अनुसार नहीं रहीं। परन्तु उन्होंने भी वह दिया जो धन से कभी खरीदा नहीं जा सकता है; वे भौतिक भेंटों के साथ तो आए थे, परन्तु उन्होंने प्रभु यीशु को आराधना भी चढ़ाई; उस प्रभु को जो अपने आप को संसार के सभी लोगों के लिए, उनमें लाए गए विश्वास द्वारा पापों की क्षमा तथा उद्धार को भेंट स्वरूप देने के लिए आया था। प्रभु परमेश्वर की यह भेंट समस्त संसार के सभी लोगों के लिए है; बस उसे स्वेच्छा से ग्रहण करने की आवश्यकता है। - मार्ट डीहान

परमेश्वर के अनुग्रह की भेंट अमूल्य है।

क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। - इफिसियों 2:8-9

बाइबल पाठ: मत्ती 2:1-12
Matthew 2:1 हेरोदेस राजा के दिनों में जब यहूदिया के बैतलहम में यीशु का जन्म हुआ, तो देखो, पूर्व से कई ज्योतिषी यरूशलेम में आकर पूछने लगे।
Matthew 2:2 कि यहूदियों का राजा जिस का जन्म हुआ है, कहां है? क्योंकि हम ने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं।
Matthew 2:3 यह सुनकर हेरोदेस राजा और उसके साथ सारा यरूशलेम घबरा गया।
Matthew 2:4 और उसने लोगों के सब महायाजकों और शास्‍त्रियों को इकट्ठे कर के उन से पूछा, कि मसीह का जन्म कहाँ होना चाहिए?
Matthew 2:5 उन्होंने उस से कहा, यहूदिया के बैतलहम में; क्योंकि भविष्यद्वक्ता के द्वारा यों लिखा है।
Matthew 2:6 कि हे बैतलहम, जो यहूदा के देश में है, तू किसी रीति से यहूदा के अधिकारियों में सब से छोटा नहीं; क्योंकि तुझ में से एक अधिपति निकलेगा, जो मेरी प्रजा इस्राएल की रखवाली करेगा।
Matthew 2:7 तब हेरोदेस ने ज्योतिषियों को चुपके से बुलाकर उन से पूछा, कि तारा ठीक किस समय दिखाई दिया था।
Matthew 2:8 और उसने यह कहकर उन्हें बैतलहम भेजा, कि जा कर उस बालक के विषय में ठीक ठीक मालूम करो और जब वह मिल जाए तो मुझे समाचार दो ताकि मैं भी आकर उसको प्रणाम करूं।
Matthew 2:9 वे राजा की बात सुनकर चले गए, और देखो, जो तारा उन्होंने पूर्व में देखा था, वह उन के आगे आगे चला, और जंहा बालक था, उस जगह के ऊपर पंहुचकर ठहर गया।
Matthew 2:10 उस तारे को देखकर वे अति आनन्‍दित हुए।
Matthew 2:11 और उस घर में पहुंचकर उस बालक को उस की माता मरियम के साथ देखा, और मुंह के बल गिरकर उसे प्रणाम किया; और अपना अपना यैला खोल कर उसे सोना, और लोहबान, और गन्‍धरस की भेंट चढ़ाई।
Matthew 2:12 और स्‍वप्‍न में यह चितौनी पाकर कि हेरोदेस के पास फिर न जाना, वे दूसरे मार्ग से हो कर अपने देश को चले गए।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-17
  • मत्ती 5:27-48



गुरुवार, 27 सितंबर 2018

धन



      मेरी सहेली के पिता की अन्त्येष्टि के समय किसी ने उससे कहा, “तुम्हारे पिता से मिलने से पहले मैं नहीं जानता था कि कोई किसी की सहायता करते हुए इतना आनन्दित रहा सकता है।” मेरी सहेली के पिता ने परमेश्वर के राज्य के निर्माण में लोगों की सेवा करने, हंसते रहने और प्रेम करते रहने, और अपरिचितों से मिलने तथा उन्हें मित्र बना लेने के द्वारा अपना योगदान दिया था । जब उनका देहांत हुआ तो उन्होंने प्रेम की विरासत अपने पीछे छोड़ी; इसकी तुलना में जब मेरी सहेली की फूफी – उसके पिता की बड़ी बहन ने अपनी धन-संपत्ति को ही अपनी विरासत माना और अपने अंतिम वर्ष इसी चिन्ता में बिताए कि उनकी विरासत और दुर्लभ पुस्तकों की देखभाल उनके बाद कौन करेगा।

      अपनी शिक्षाओं और अपने जीवन के उदाहरण के द्वारा प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को चिताया कि वे सांसारिक धन एकत्रित न करें, वरन निर्धनों को दें, और उसकी कीमत पहिचानें जिसे न काई और न ही ज़ंक नाश करेगा। परमेश्वर के वचन बाइबल में, इस संदर्भ में, इस बात का महत्व समझाने वाला प्रभु यीशु का कथन दर्ज है, “क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा” (लूका 12:34)।

      हमारा यह विचार हो सकता है कि हमारी वस्तुएँ हमारे जीवनों को सार्थक करती हैं। परन्तु जब हमारा कोई नवीनतम उपकरण टूट जाता है, या जब हम किसी बहुमूल्य वस्तु को खो देते हैं, तब हमें एहसास होता है कि सांसारिक वस्तुएँ स्थाई नहीं हैं, वरन प्रभु यीशु के साथ हमारा संबंध ही है जो स्थिर एवँ स्थाई बना रहता है तथा शान्ति प्रदान करता है। औरों के प्रति हमारा प्रेम और चिन्ता धूमिल नहीं होते हैं, परन्तु बने रहते हैं।

      हम प्रभु परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह उस वस्तु के मूल्य की वास्तविक सच्चाई को समझने में हमारी सहायता करे, जिसे हम मूल्यवान समझते हैं, जिससे हम समझ सकें कि हमारे मन कहाँ लगे रहते हैं; और सबसे बढ़कर हमें परमेश्वर के राज्य के खोजी बनाए, सच्चे और चिर-स्थाई धन की लालसा हमारे अन्दर जागृत करे। - एमी बाउचर पाई


हम जिसे बहुमूल्य समझते हैं वही हमारे मनों की दशा को प्रकट करता है।

यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपने प्राण की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? या मनुष्य अपने प्राण के बदले में क्या देगा? – मत्ती 16:26

बाइबल पाठ: लूका 12:22-34
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है।
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो?
Luke 12:27 सोसनों के पेड़ों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा?
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो।
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है।
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी।
Luke 12:32 हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे।
Luke 12:33 अपनी संपत्ति बेचकर दान कर दो; और अपने लिये ऐसे बटुए बनाओ, जो पुराने नहीं होते, अर्थात स्वर्ग पर ऐसा धन इकट्ठा करो जो घटता नहीं और जिस के निकट चोर नहीं जाता, और कीड़ा नहीं बिगाड़ता।
Luke 12:34 क्योंकि जहां तुम्हारा धन है, वहां तुम्हारा मन भी लगा रहेगा।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 3-4
  • गलतियों 6



शनिवार, 14 फ़रवरी 2015

मूल्य


   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक घटना है, याकूब के विवाह की। याकूब अपने मामा लाबान के यहाँ रहता और कार्य करता था, और लाबान की छोटी बेटी राहेल से प्रेम करता था। याकूब ने लाबान से राहेल का हाथ माँगा तो लाबान ने स्वीकार कर लिया, लेकिन शादी के समय राहेल के स्थान पर उसकी बड़ी बहिन लियाह को, जो आँखों से कमज़ोर थी, याकूब को दे दिया। शादी की रात याकूब ने लियाह के साथ यह समझते हुए बिताई कि वह राहेल के साथ है, लेकिन दिन निकलने पर उसे पता पड़ा कि उसके साथ धोखा हुआ है। अब अपनी प्रेमिका को पाने के लिए याकूब को लाबान के साथ एक और समझौते में पड़ना पड़ा। लाबान ने लियाह को याकूब से ब्याह तो दिया लेकिन वह लियाह से याकूब को सच्चा प्रेम करवाने में असफल रहा, याकूब सदा ही लियाह से कम और राहेल से अधिक प्रेम करता रहा।

   लियाह द्वारा अपने आप को याकूब की नज़रों में "दूसरे दर्जे" का होना का आभास सदा ही होता रहा। इस बात का एहसास हमें होता है लियाह द्वारा अपने पहले तीन पुत्रों को दिए गए नामों के द्वारा। उसने अपने सबसे पहले पुत्र का नाम रखा रूबेन जिसका अर्थ है "देखो, एक पुत्र"; फिर दूसरे पुत्र का नाम रखा शिमौन जिसका अर्थ है "सुन लेना" और तीसरे पुत्र का नाम रखा लेवी जिसका अर्थ है "मिलाना"; जबकि राहेल जिससे याकूब प्रेम रखता था बाँझ ही रही। अपने हर पुत्र के जन्म के साथ लियाह को आशा होती थी कि उसका पति अब उसे प्रेम करने लगेगा, अपने पुत्रों में होकर वह अपने पति के प्रेम को पाना चाहती थी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, और समय के साथ लियाह की आशा भी बदलने लगी, उसे अब एहसास होने लगा कि चाहे उसका पति उससे प्रेम ना भी करे तौ भी परमेश्वर उससे प्रेम करता है और उसे आशीष दे रहा है, और परमेश्वर के प्रेम को पाने के लिए उसे अपने किसी प्रयास के करने की आवश्यकता नहीं है - वह पहले से ही उससे प्रेम करता आ रहा है, इसलिए उसने अपने चौथे पुत्र का नाम रखा यहूदा जिसका अर्थ है "उत्सव मनाना"।

   यही बात हम सभी के लिए भी ऐसी ही लागू है - हम परमेश्वर के प्रेम को "कमा" नहीं सकते क्योंकि हमारे प्रति उसका प्रेम हमारे किए किसी कार्य पर निर्भर नहीं है। परमेश्वर ने हमसे हमारे पाप की दशा में होने पर भी प्रेम किया, इतना प्रेम कि हमारे लिए अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को बलिदान होने संसार में भेजा, जिससे उसके साथ हमारे मेल-मिलाप का रास्ता बन जाए (रोमियों 5:8)। परमेश्वर की नज़रों में हमारा मूल्य बहुत है, हम "दूसरे दर्जे" के नहीं हैं; वह हमारे साथ रहना चाहता है, संगति करना चाहता है, अपने साथ स्वर्ग में रखना चाहता है। क्या आप उसके द्वारा इस प्रकार मूल्यवान आंके जाने को महत्व देंगे? - सिंडी हैस कैस्पर


प्रभु यीशु के क्रूस पर दिए गए बलिदान से बढ़कर हम मनुष्यों के प्रति परमेश्वर के प्रेम को और कुछ वर्णन नहीं कर सकता।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 29:16-35
Genesis 29:16 लाबान के दो बेटियां थी, जिन में से बड़ी का नाम लिआ: और छोटी का राहेल था। 
Genesis 29:17 लिआ: के तो धुन्धली आंखे थी, पर राहेल रूपवती और सुन्दर थी। 
Genesis 29:18 सो याकूब ने, जो राहेल से प्रीति रखता था, कहा, मैं तेरी छोटी बेटी राहेल के लिये सात बरस तेरी सेवा करूंगा। 
Genesis 29:19 लाबान ने कहा, उसे पराए पुरूष को देने से तुझ को देना उत्तम होगा; सो मेरे पास रह। 
Genesis 29:20 सो याकूब ने राहेल के लिये सात बरस सेवा की; और वे उसको राहेल की प्रीति के कारण थोड़े ही दिनों के बराबर जान पड़े। 
Genesis 29:21 तब याकूब ने लाबान से कहा, मेरी पत्नी मुझे दे, और मैं उसके पास जाऊंगा, क्योंकि मेरा समय पूरा हो गया है। 
Genesis 29:22 सो लाबान ने उस स्थान के सब मनुष्यों को बुला कर इकट्ठा किया, और उनकी जेवनार की। 
Genesis 29:23 सांझ के समय वह अपनी बेटी लिआ: को याकूब के पास ले गया, और वह उसके पास गया। 
Genesis 29:24 और लाबान ने अपनी बेटी लिआ: को उसकी लौंडी होने के लिये अपनी लौंडी जिल्पा दी। 
Genesis 29:25 भोर को मालूम हुआ कि यह तो लिआ है, सो उसने लाबान से कहा यह तू ने मुझ से क्या किया है? मैं ने तेरे साथ रहकर जो तेरी सेवा की, सो क्या राहेल के लिये नहीं की? फिर तू ने मुझ से क्यों ऐसा छल किया है? 
Genesis 29:26 लाबान ने कहा, हमारे यहां ऐसी रीति नहीं, कि जेठी से पहिले दूसरी का विवाह कर दें। 
Genesis 29:27 इसका सप्ताह तो पूरा कर; फिर दूसरी भी तुझे उस सेवा के लिये मिलेगी जो तू मेरे साथ रह कर और सात वर्ष तक करेगा। 
Genesis 29:28 सो याकूब ने ऐसा ही किया, और लिआ: के सप्ताह को पूरा किया; तब लाबान ने उसे अपनी बेटी राहेल को भी दिया, कि वह उसकी पत्नी हो। 
Genesis 29:29 और लाबान ने अपनी बेटी राहेल की लौंडी होने के लिये अपनी लौंडी बिल्हा को दिया। 
Genesis 29:30 तब याकूब राहेल के पास भी गया, और उसकी प्रीति लिआ: से अधिक उसी पर हुई, और उसने लाबान के साथ रहकर सात वर्ष और उसकी सेवा की। 
Genesis 29:31 जब यहोवा ने देखा, कि लिआ: अप्रिय हुई, तब उसने उसकी कोख खोली, पर राहेल बांझ रही। 
Genesis 29:32 सो लिआ: गर्भवती हुई, और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ, और उसने यह कहकर उसका नाम रूबेन रखा, कि यहोवा ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है: सो अब मेरा पति मुझ से प्रीति रखेगा। 
Genesis 29:33 फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने यह कहा कि यह सुनके, कि मैं अप्रिय हूं यहोवा ने मुझे यह भी पुत्र दिया: इसलिये उसने उसका नाम शिमोन रखा। 
Genesis 29:34 फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने कहा, अब की बार तो मेरा पति मुझ से मिल जाएगा, क्योंकि उस से मेरे तीन पुत्र उत्पन्न हुए: इसलिये उसका नाम लेवी रखा गया। 
Genesis 29:35 और फिर वह गर्भवती हुई और उसके एक और पुत्र उत्पन्न हुआ; और उसने कहा, अब की बार तो मैं यहोवा का धन्यवाद करूंगी, इसलिये उसने उसका नाम यहूदा रखा; तब उसकी कोख बन्द हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 15-16
  • मत्ती 27:1-26



सोमवार, 17 जून 2013

सच्ची दौलत

   धन सशक्त है; हम उसे कमाने के लिए मेहनत करते हैं, उसे संचित करते हैं, उस के द्वारा अपनी इच्छापूर्ति के प्रयास करते हैं और अपने पार्थिव जीवन की अभिलाषाओं को पूरा करने की चाह रखते हैं। धन की बहकाने वाली सामर्थ के कारण, प्रभु यीशु की शिक्षाओं में सर्वाधिक धन से ही संबंधित थीं; किंतु उन्होंने कभी एक बार भी अपने लिए कोई भेंट या उपहार नहीं चाहा। स्पष्ट है कि उन्होंने धन से संबंधित अपनी शिक्षाएं, अपनी जेब भरने के लिए नहीं दीं। धन संचय करने तथा उसपर निर्भर रहने की शिक्षाओं के विपरीत प्रभु की शिक्षाएं चेतावनी थीं कि धन संचय करने की लालसा और धन को सांसारिक सामर्थ पाने के लिए उपयोग करने की प्रवृत्ति हमारे आत्मिक जीवन के विकास को अवरुद्ध कर देती है और पार्थिव जीवन में अनेक परेशानियाँ ले आती है। प्रभु यीशु ने अपने आस-पास एकत्रित लोगों को एक "धनी-मूर्ख" की नीतिकथा सुनाई जिससे वे परमेश्वर के प्रति धनवान होने के मर्म को समझ सकें तथा पहचान सकें कि परमेश्वर की दृष्टि में धनवान होना संसार के मापदण्ड से कितना भिन्न है: "फिर भीड़ में से एक ने उस से कहा, हे गुरू, मेरे भाई से कह, कि पिता की संपत्ति मुझे बांट दे। उसने उस से कहा; हे मनुष्य, किस ने मुझे तुम्हारा न्यायी या बांटने वाला नियुक्त किया है? और उसने उन से कहा, चौकस रहो, और हर प्रकार के लोभ से अपने आप को बचाए रखो: क्योंकि किसी का जीवन उस की संपत्ति की बहुतायत से नहीं होता। उसने उन से एक दृष्‍टान्‍त कहा, कि किसी धनवान की भूमि में बड़ी उपज हुई। तब वह अपने मन में विचार करने लगा, कि मैं क्या करूं, क्योंकि मेरे यहां जगह नहीं, जहां अपनी उपज इत्यादि रखूं। और उसने कहा; मैं यह करूंगा: मैं अपनी बखारियां तोड़ कर उन से बड़ी बनाऊंगा; और वहां अपना सब अन्न और संपत्ति रखूंगा: और अपने प्राण से कहूंगा, कि प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह। परन्तु परमेश्वर ने उस से कहा; हे मूर्ख, इसी रात तेरा प्राण तुझ से ले लिया जाएगा: तब जो कुछ तू ने इकट्ठा किया है, वह किस का होगा? ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं" (लूका 12:13-21)।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार परमेश्वर के प्रति धनवान होने से क्या तात्पर्य है? प्रेरित पौलुस ने लिखा है कि वे जो धनवान हैं वे अपने धन के प्रति मिथ्या अभिमान ना रखें वरन भले कार्यों में धनी बनें और धन को बाँटने में उदार हों (1 तिमुथियुस 6:17-18)। कहने का तात्पर्य है कि परमेश्वर की नज़रों में धनवान होना हमारे जीवन की गुणवन्ता तथा अपने धन के द्वारा दूसरों की सहायता करने पर निर्भर है। यह बड़ी रोचक बात है! संसार में धन कमाने और धनवान बनने के मार्ग दिखाने वालों की सलाह तथा मार्गदर्शन देने वालों की शिक्षाओं से कितनी भिन्न है यह शिक्षा! लेकिन जो लोग यह विचार रखते हैं कि उनकी सुरक्षा और समाज में उनका स्तर उनके संचित धन के अनुपात में होता है वे प्रभु यीशु की इस नीतिकथा तथा धन संबंधित शिक्षाओं से सचेत हों, सच्ची दौलत वही है जो अविनाशी और चिरस्थाई है ना कि इस पृथ्वी पर संचित करी जाने वाली नाशमान दौलत। - जो स्टोवैल


धन केवल उन्हीं के लिए आशीष है जो उसे दूसरों के लिए आशीष बनाते हैं।

इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। - 1 तिमुथियुस 6:17 

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 6:6-19
1 Timothy 6:6 पर सन्‍तोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है।
1 Timothy 6:7 क्योंकि न हम जगत में कुछ लाए हैं और न कुछ ले जा सकते हैं।
1 Timothy 6:8 और यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्‍हीं पर सन्‍तोष करना चाहिए।
1 Timothy 6:9 पर जो धनी होना चाहते हैं, वे ऐसी परीक्षा, और फंदे और बहुतेरे व्यर्थ और हानिकारक लालसाओं में फंसते हैं, जो मनुष्यों को बिगाड़ देती हैं और विनाश के समुद्र में डूबा देती हैं।
1 Timothy 6:10 क्योंकि रूपये का लोभ सब प्रकार की बुराइयों की जड़ है, जिसे प्राप्त करने का प्रयत्न करते हुए कितनों ने विश्वास से भटक कर अपने आप को नाना प्रकार के दुखों से छलनी बना लिया है।
1 Timothy 6:11 पर हे परमेश्वर के जन, तू इन बातों से भाग; और धर्म, भक्ति, विश्वास, प्रेम, धीरज, और नम्रता का पीछा कर।
1 Timothy 6:12 विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था।
1 Timothy 6:13 मैं तुझे परमेश्वर को जो सब को जीवित रखता है, और मसीह यीशु को गवाह कर के जिसने पुन्‍तियुस पीलातुस के साम्हने अच्छा अंगीकार किया, यह आज्ञा देता हूं,
1 Timothy 6:14 कि तू हमारे प्रभु यीशु मसीह के प्रगट होने तक इस आज्ञा को निष्‍कलंक और निर्दोष रख।
1 Timothy 6:15 जिसे वह ठीक समयों में दिखाएगा, जो परमधन्य और अद्वैत अधिपति और राजाओं का राजा, और प्रभुओं का प्रभु है।
1 Timothy 6:16 और अमरता केवल उसी की है, और वह अगम्य ज्योति में रहता है, और न उसे किसी मनुष्य ने देखा, और न कभी देख सकता है: उस की प्रतिष्‍ठा और राज्य युगानुयुग रहेगा। आमीन।
1 Timothy 6:17 इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है।
1 Timothy 6:18 और भलाई करें, और भले कामों में धनी बनें, और उदार और सहायता देने में तत्‍पर हों।
1 Timothy 6:19 और आगे के लिये एक अच्छी नेव डाल रखें, कि सत्य जीवन को वश में कर लें।

एक साल में बाइबल: नहेम्याह 7-9 प्रेरितों 3

रविवार, 16 जून 2013

आदर

   घटना 1992 में बार्सेलोना में आयोजित हो रहे ग्रीष्मकालीन ओलिमपिक्स की है। उद्घाटन समारोह को देखने 65,000 दर्षक आए हुए थे और जैसे जैसे भिन्न देशों की टीम्स स्टेडियम में प्रवेश करतीं, वे उनका ज़ोर-शोर से स्वागत करते। लेकिन स्टेडियम के एक भाग में खामोशी और उदासी थी क्योंकि अमेरिका की तैराकी टीम के सदस्य रॉन कारनौ के पिता पीटर कारनौ जानलेवा हृदयाघात से जाते रहे थे।

   पाँच दिन पश्चात रॉन अपनी स्पर्धा में भाग लेने पहुँच गया; जब वह आया तो उसने अपने पिता की टोपी पहनी हुई थी। स्पर्धा के आरंभ होने से पहले उसने वह टोपी उतारी और संभाल कर अपने स्थान के पास रख ली। यह उस तैराक द्वारा अपने पिता को दी गई श्रद्धांजलि थी, जिन्हें रॉन अपना "सर्वश्रेष्ठ मित्र" कहकर संबोधित करता था। उसी टोपी को पहन हुए उसके पिता ने रॉन के साथ बहुत समय बिताया था और कई गतिविधियों में दोनो ने साथ भाग लिया था। उस टोपी को पहनने के द्वारा रॉन अपने पिता को सम्मान देना चाहता था उस हर एक पल और अवसर के लिए जो उन्होंने उसके साथ बिताया, उसे प्रोत्साहित किया, उसका मार्गदर्शन किया और उसे कठिनाईयों में सहारा दिया। आज रॉन के पिता तो उसके साथ नहीं थे लेकिन उनकी यादें रॉन के साथ थीं जो आज भी उसे प्रोत्साहित कर रही थीं, सहारा दे रही थीं।

   आज के इस दिन में, जो पिताओं को आदर देने के लिए मनाया जाता है, हम स्मरण रखें कि अपने पिता को आदर देने के कई तरीके हो सकते हैं। परमेश्वर का वचन बाइबल भी हमें निर्देश देती है कि अपने माता-पिता का आदर करें (इफिसियों 6:2)। आदर देने का एक तरीका है उन भले गुणों और मूल्यों को सम्मान देना जो उन्होंने हमें सिखाए हैं। साथ ही हम में जो पिता हैं उन्हें भी यह ध्यान देना है कि क्या हम अपने बच्चों को वह समय, प्रोत्साहन तथा मार्गदर्शन दे रहे हैं जो उनका अधिकार तथा उनके प्रति हमारा कर्तव्य है? क्या हमारे बच्चे किसी सार्वजनिक समारोह में हमें वैसा ही आदर देने की लालसा रखेंगे जैसा रॉन ने अपने पिता को दिया?

   आज के इस विशेष दिवस में संकल्प करें कि अपने माता-पिता को उनका योग्य आदर और स्थान देंगे और अपने बच्चों को प्रोत्साहन एवं मार्गदर्शन देने वाले और उनके साथ समय बिताने तथा सहारा देने वाले बनेंगे। - डेव ब्रैनन


अच्छे पिता हमें जीवन केवल देते नहीं हैं, वरन उस जीवन को जीना भी सिखाते हैं।

अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)। - इफिसियों 6:2 

बाइबल पाठ: इफिसियों 6:1-4
Ephesians 6:1 हे बालकों, प्रभु में अपने माता पिता के आज्ञाकारी बनो, क्योंकि यह उचित है।
Ephesians 6:2 अपनी माता और पिता का आदर कर (यह पहिली आज्ञा है, जिस के साथ प्रतिज्ञा भी है)।
Ephesians 6:3 कि तेरा भला हो, और तू धरती पर बहुत दिन जीवित रहे।
Ephesians 6:4 और हे बच्‍चे वालों अपने बच्‍चों को रिस न दिलाओ परन्तु प्रभु की शिक्षा, और चितावनी देते हुए, उन का पालन-पोषण करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6 
  • प्रेरितों 2:22-47


बुधवार, 12 सितंबर 2012

भिन्न लक्ष्य


   व्यावसायिक गोल्फ खिलाड़ी बायर्न नेल्सन के लिए १९४५ विलक्षण वर्ष था। जिन ३० प्रतियोगिताओं में उसने भाग लिया, उनमें से १८ उसने जीतीं, जिनमें से ११ में वह लगातार विजयी रहा। यदि वह चाहता तो अपने इस व्यवसायिक खेलने को आगे बढ़ा कर और ऊँचाईयों पर ले कर जा सकता था और अपने समय का सर्वश्रेष्ठ गोल्फ खिलाड़ी बन सकता था। किंतु यह उसका लक्ष्य नहीं था। उसका लक्ष्य था गोल्फ द्वारा इतना पैसा कमा लेना कि वह एक पशु-पालन और कृषि फार्म खरीद सके जहां वह अपनी शेष आयु वह कार्य करने में व्यतीत करे जो उसकी पहली पसन्द है। नेल्सन ने ३४ वर्ष की आयु में ही गोल्फ से अवकाश ले लिया और कृषि तथा पशु-पालन करने वाला बन गया। उसके लक्ष्य भिन्न थे।

   संसार इस प्रकार की विचारधारा को मूर्खता मान सकता है क्योंकि वह उस हृदय को नहीं समझता जो संसार से संसार की धन-दौलत और प्रसिद्धि अर्जित करने की बजाए मन की सच्ची शांति और संतुष्टि की लालसा रखता है। यह विशेषकर तब और भी अधिक लागू होता है जब कोई यह निर्णय उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के लिए जीने के लिए करता है। किंतु संसार की समझ में जो मूर्खता है वह ही हमारे लिए अपने प्रभु से संबंधित और संसार के लक्ष्यों से भिन्न लक्ष्यों को संसार ही के समक्ष रखने के लिए एक उत्तम अवसर बन जाता है। इसी संदर्भ में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे" (१ कुरिन्थियों १:२७)।

   परमेश्वर के राज्य के मूल्यों के अनुसार जीवन व्यतीत करना हमें संसार की नज़रों में मूर्ख ठहरा सकता है, लेकिन यही निर्णय संसार के सामने परमेश्वर को महिमा देने का माध्यम भी बन जाता है, जिसका प्रतिफल परमेश्वर से मिलने वाली ऐसी मूल्यवान, अद्भुत और चिरस्थायी अशीष है जो संसार ना कभी दे सकता है और ना कभी जिसकी कलपना भी कर सकता है। - बिल क्राउडर


जीवन के आदर्श मूल्य व्यर्थ हैं यदि वे परमेश्वर के मूल्यों के अनुरूप नहीं।

परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करे। - १ कुरिन्थियों १:२७

बाइबल पाठ: १ कुरिन्थियों १:१८-३१
1Co 1:18  क्‍योंकि क्रूस की कथा नाश होने वालों के निकट मूर्खता है, परन्‍तु हम उद्धार पाने वालों के निकट परमेश्वर की सामर्थ है। 
1Co 1:19  क्‍योंकि लिखा है, कि मैं ज्ञानवानों के ज्ञान को नाश करूंगा, और समझदारों की समझ को तुच्‍छ कर दूंगा। 
1Co 1:20  कहां रहा ज्ञानवान? कहां रहा शास्त्री? कहां इस संसार का विवादी? क्‍या परमेश्वर ने संसार के ज्ञान को मूर्खता नहीं ठहराया? 
1Co 1:21  क्‍योंकि जब परमेश्वर के ज्ञान के अनुसार संसार ने ज्ञान से परमेश्वर को न जाना तो परमेश्वर को यह अच्‍छा लगा, कि इस प्रकार की मूर्खता के द्वारा विश्वास करने वालों को उद्धार दे। 
1Co 1:22  यहूदी तो चिन्‍ह चाहते हैं, और यूनानी ज्ञान की खोज में हैं। 
1Co 1:23  परन्‍तु हम तो उस क्रूस पर चढ़ाए हुए मसीह का प्रचार करते हैं जो यहूदियों के निकट ठोकर का कारण, और अन्यजातियों के निकट मूर्खता है। 
1Co 1:24  परन्‍तु जो बुलाए हुए हैं क्‍या यहूदी, क्‍या यूनानी, उन के निकट मसीह परमेश्वर की सामर्थ, और परमेश्वर का ज्ञान है। 
1Co 1:25  क्‍योंकि परमेश्वर की मूर्खता मनुष्यों के ज्ञान से ज्ञानवान है; और परमेश्वर की निर्बलता मनुष्यों के बल से बहुत बलवान है।
1Co 1:26   हे भाइयों, अपने बुलाए जाने को तो सोचो, कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए। 
1Co 1:27  परन्‍तु परमेश्वर ने जगत के मूर्खों को चुन लिया है, कि ज्ञान वालों को लज्ज़ित करे; और परमेश्वर ने जगत के निर्बलों को चुन लिया है, कि बलवानों को लज्ज़ित करें। 
1Co 1:28  और परमेश्वर ने जगत के नीचों और तुच्‍छों को, वरन जो हैं भी नहीं उन को भी चुन लिया, कि उन्‍हें जो हैं, व्यर्थ ठहराए। 
1Co 1:29  ताकि कोई प्राणी परमेश्वर के साम्हने घमण्‍ड न करने पाए। 
1Co 1:30  परन्‍तु उसी की ओर से तुम मसीह यीशु में हो, जो परमेश्वर की ओर से हमारे लिये ज्ञान ठहरा अर्थात धर्म, और पवित्रता, और छुटकारा। 
1Co 1:31  ताकि जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १३-१५ 
  • २ कुरिन्थियों ५