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शुक्रवार, 8 फ़रवरी 2019

मित्र



      मेरी एक प्रिय सहेली ने मुझे एक सन्देश भेजा और कहा, “मैं बहुत आनन्दित हूँ कि हम एक-दूसरे के साथ अपने जीवन की भली, बुरी, और कटु बातें बाँट सकते हैं।” हम दोनों कई वर्षों से सहेलियाँ रहे हैं, और हमने परस्पर अपने आनन्द और असफलताओं को साझा किया है। हम जानते हैं कि हम सिद्ध नहीं हैं, इसलिए हम अपने संघर्षों को भी बाँटते हैं और एक दूसरे की सफलताओं में आनन्दित भी होते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल के दो पात्र, दाऊद और योनातान भी बहुत अच्छे मित्र थे; उनकी मित्रता का आरंभ गोलियत पर दाऊद की विजय के साथ हुआ (1 शमूएल 18:1-4)। उन दोनों ने योनातान के पिता, राजा शाउल, के दाऊद के प्रति द्वेष रखने (18:6-11; 20:1-2) और दाऊद को मार डालने के शाउल के षड़यंत्रों और प्रयासों के बुरे और भयावह दिनों के अनुभव भी साझा किए (20:42)।

      परिस्थितियों के बदल जाने पर अच्छे मित्र एक-दूसरे का साथ नहीं छोड़ देते हैं। वे एक-दूसरे साथ भले और बुरे दोनों समयों में बने रहते हैं। अच्छे मित्र, उन बुरे दिनों में जब हम प्रभु से दूर चले जाने के प्रलोभनों या परिक्षा में पड़ रहे हों, तब हमें फिर से परमेश्वर की ओर मोड़ने में भी सहायक होते हैं।

      सच्ची मित्रता परमेश्वर का उपहार है क्योंकि वह सदा हमारे साथ बने रहने वाले हमारे उस सिद्ध मित्र – प्रभु यीशु, के जैसे व्यवहार का उदाहरण होते हैं; उस प्रभु का जिसने हम से प्रतिज्ञा की है कि वह न तो हमें कभी छोड़ेगा और न ही कभी त्यागेगा (इब्रानियों 13:5)। - कीला ओकोआ


सच्चा मित्र वह पहला व्यक्ति होता है 
जो तब हमारे पास आता है 
जब अन्य सभी छोड़ के चले जाते हैं।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। - इब्रानियों 13:5

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 20:35-42
1 Samuel 20:35 बिहान को योनातन एक छोटा लड़का संग लिये हुए मैदान में दाऊद के साथ ठहराए हुए स्थान को गया।
1 Samuel 20:36 तब उसने अपने छोकरे से कहा, दौड़कर जो जो तीर मैं चलाऊं उन्हें ढूंढ़ ले आ। छोकरा दौड़ता ही था, कि उसने एक तीर उसके परे चलाया।
1 Samuel 20:37 जब छोकरा योनातन के चलाए तीर के स्थान पर पहुंचा, तब योनातन ने उसके पीछे से पुकार के कहा, तीर तो तेरी परली ओर है।
1 Samuel 20:38 फिर योनातन ने छोकरे के पीछे से पुकारकर कहा, “बड़ी फुर्ती कर, ठहर मत!” और योनातन का छोकरा तीरों को बटोर के अपने स्वामी के पास ले आया।
1 Samuel 20:39 इसका भेद छोकरा तो कुछ न जानता था; केवल योनातन और दाऊद इस बात को जानते थे।
1 Samuel 20:40 और योनातन ने अपने हथियार अपने छोकरे को देकर कहा, जा, इन्हें नगर को पहुंचा।
1 Samuel 20:41 ज्योंही छोकरा चला गया, त्योंही दाऊद दक्खिन दिशा की अलंग से निकला, और भूमि पर औंधे मुंह गिरके तीन बार दण्डवत की; तब उन्होंने एक दूसरे को चूमा, और एक दूसरे के साथ रोए, परन्तु दाऊद को रोना अधिक था।
1 Samuel 20:42 तब योनातन ने दाऊद से कहा, कुशल से चला जा; क्योंकि हम दोनों ने एक दूसरे से यह कहके यहोवा के नाम की शपथ खाई है, कि यहोवा मेरे और तेरे मध्य, और मेरे और तेरे वंश के मध्य में सदा रहे। तब वह उठ कर चला गया; और योनातन नगर में गया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 4-5
  • मत्ती 24:29-51



गुरुवार, 7 फ़रवरी 2019

आनन्द



      एक युवा जापानी महिला द्वारा व्यवस्थित एवँ सुनियोजित होने पर लिखी गई पुस्तक की सँसार भर में बीस लाख से भी अधिक प्रतियाँ बिक चुकी हैं। उस महिला का मुख्य सन्देश लोगों को अपने घरों और अलमारियों में से अनावश्यक वस्तुओं – वे वस्तुएँ जो उनके लिए बोझ हैं, को निकाल बाहर करने में सहायक हो रहा है। उसका कहना है कि “उस वस्तु को उठाओ, और अपने आप से पूछो कि ‘क्या इससे मुझे आनन्द मिलता है?’ यदि उत्तर हाँ है तो उसे रखे रहो अन्यथा उसे किसी और को दे दो।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को उभारा कि प्रभु यीशु मसीह के साथ अपने संबंधों में वे आनन्द के खोजी रहें, “प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो” (फिलिप्पियों 4:4)। उसने उन से कहा कि चिंता से अव्यवस्थित जीवन जीने के स्थान पर, वे प्रत्येक बात को धन्यवाद के साथ प्रार्थना में प्रभु के हाथों में समर्पित कर दें, और परमेश्वर की शान्ति उनके हृदय एवँ विचारों को संभाले रहेगी (पद 6-7)।

      जब हम अपनी दिनचर्या के कार्यों तथा दायित्वों को देखते हैं, तो हम पाते हैं कि उनमें से सभी हमारे लिए आनन्दायक नहीं होते हैं। परन्तु हम अपने आप से प्रश्न कर सकते हैं, “इसके द्वारा कैसे मेरे तथा परमेश्वर के हृदय में आनंद लाया जा सकता है?” उस कार्य को करने के कारण को लेकर हमारे दृष्टिकोण में लाए गए परिवर्तन के द्वारा हम उसके प्रति अपनी भावनाओं को भी परिवर्तित कर सकते हैं। इसीलिए पौलुस आगे कहता है कि “निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो” (पद 8)।

      पौलुस के ये शब्द हमारे विचार करने के लिए महत्वपूर्ण, और हमें आनन्द देने के लिए उपयुक्त हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु पर केंद्रित रहना आनन्दित रहने का आरंभ है।

...क्योंकि आज का दिन हमारे प्रभु के लिये पवित्र है; और उदास मत रहो, क्योंकि यहोवा का आनन्द तुम्हारा दृढ़ गढ़ है। - नहेम्याह 8:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो।
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है।
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं।
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो।
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था 1-3
  • मत्ती 24:1-28



बुधवार, 6 फ़रवरी 2019

चरित्र और भरोसा



      एक साक्षात्कार में, गायिका और गीत लेखिका मेरिडिथ एन्ड्रयूस ने बताया कि कभी-कभी वह परमेश्वर के प्रचार कार्यों, अपनी रचनात्मक गतिविधियों, पारिवारिक परिस्थितियों और समस्याओं, और मातृत्व की जिम्मेदारियों में तालमेल बैठाने के प्रयासों में अभिभूतित अनुभव करती हैं। अपनी इस कठिनाई पर विचार करके बोलते हुए उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि परमेश्वर मुझे एक स्वच्छ और शुद्ध करने वाली प्रक्रिया से होकर ले चल रहा है, जिसमें अन्दर से व्यर्थ को बाहर निकालने के लिए कुचल दिया जाना भी सम्मिलित है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल का एक पात्र, अय्यूब, अचानक ही अपने सम्पूर्ण परिवार, स्वास्थ्य और संपदा की हानि उठने के बाद अभुभूतित था। इससे भी बुरी बात यह थी कि यद्यपि अय्यूब परमेश्वर की नियमित उपासना और आराधना करने वाला व्यक्ति था, उसे लगा कि इस कठिन समय में परमेश्वर उसकी सहायता की पुकार को अनसुनी कर रहा है। उसके जीवन के परिदृश्य से उसे परमेश्वर अनुपस्थित दिखाई दे रहा था। अय्यूब ने दावा किया कि वह चाहे किसी भी दिशा में देखे, उसे परमेश्वर कहीं दिखाई नहीं दे रहा था (अय्यूब 23:2-9)।

      इस घोर निराशा में, अय्यूब को स्पष्टता का एक पल भी मिला। एक अँधेरे कमरे में जलती मोमबत्ती के समान, उसका विश्वास टिमटिमाया; उसने कहा, “परन्तु वह [परमेश्वर]जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा” (पद 10)। परमेश्वर हम मसीहियों को परखने के द्वारा शुद्ध और निर्मल करता है; कठिनाइयों और विपरीत परिस्थितियों के द्वारा परमेश्वर हमारे आत्मनिर्भर होने, घमण्ड, और सांसारिक बुद्धिमत्ता को निकाल बाहर करता है। यदि ऐसा लगे कि इस प्रक्रिया से निकलते समय वह सहायता के लिए हमारी पुकार का कोई उत्तर नहीं दे रहा है, तो वह इसलिए हो सकता है कि वह हमें विश्वास में दृढ़ और परिपक्व होने का अवसर प्रदान कर रहा है, हमें हमारी अपनी क्षमता और सामर्थ्य पर निर्भर होने की व्यर्थता का आभास करवा रहा है।

      दुखों और समस्याओं से रगड़े जा कर हम एक ऐसे चमकते हुए चरित्र के साथ विकसित होते है जो परमेश्वर पर हर परिस्थिति में हर बात के लिए भरोसा बनाए रखता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


विश्वास को परखने वाले समय विश्वास को दृढ़ करने के माध्यम भी हो सकते हैं।

क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा; तू ने हमें चान्दी के समान ताया था। - भजन 66:10

बाइबल पाठ: अय्यूब 23:1-12
Job 23:1 तब अय्यूब ने कहा,
Job 23:2 मेरी कुड़कुड़ाहट अब भी नहीं रुक सकती, मेरी मार मेरे कराहने से भारी है।
Job 23:3 भला होता, कि मैं जानता कि वह कहां मिल सकता है, तब मैं उसके विराजने के स्थान तक जा सकता!
Job 23:4 मैं उसके साम्हने अपना मुक़द्दमा पेश करता, और बहुत से प्रमाण देता।
Job 23:5 मैं जान लेता कि वह मुझ से उत्तर में क्या कह सकता है, और जो कुछ वह मुझ से कहता वह मैं समझ लेता।
Job 23:6 क्या वह अपना बड़ा बल दिखा कर मुझ से मुक़द्दमा लड़ता? नहीं, वह मुझ पर ध्यान देता।
Job 23:7 सज्जन उस से विवाद कर सकते, और इस रीति मैं अपने न्यायी के हाथ से सदा के लिये छूट जाता।
Job 23:8 देखो, मैं आगे जाता हूँ परन्तु वह नहीं मिलता; मैं पीछे हटता हूँ, परन्तु वह दिखाई नहीं पड़ता;
Job 23:9 जब वह बाईं ओर काम करता है तब वह मुझे दिखाई नहीं देता; वह तो दाहिनी ओर ऐसा छिप जाता है, कि मुझे वह दिखाई ही नहीं पड़ता।
Job 23:10 परन्तु वह जानता है, कि मैं कैसी चाल चला हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा तब मैं सोने के समान निकलूंगा।
Job 23:11 मेरे पैर उसके मार्गों में स्थिर रहे; और मैं उसी का मार्ग बिना मुड़े थामे रहा।
Job 23:12 उसकी आज्ञा का पालन करने से मैं न हटा, और मैं ने उसके वचन अपनी इच्छा से कहीं अधिक काम के जान कर सुरक्षित रखे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 39-40
  • मत्ती 23:23-39



मंगलवार, 5 फ़रवरी 2019

धन्यवादी



      मैंने आज मैदान में एक फूल को खिले हुए देखा, एक अकेला छोटा सा बैंगनी फूल, कवि थॉमस ग्रे की अद्भुत पंक्ति के अनुसार, “अपनी मनोहरता को रेगिस्तान में व्यर्थ करते हुए।” मैं निश्चित हूँ कि मुझ से पहले किसी ने भी इस फूल को नहीं देखा होगा, और संभवतः कोई और देखेगा भी नहीं। मैं सोचने लगा, इस एकांत स्थान में, ऐसी भव्य सुन्दरता भला क्यों?

      प्रकृति कभी व्यर्थ नहीं जाती है। प्रतिदिन प्रकृति अपने रचनाकार की सच्चाई, भलाई, और सुंदरता को प्रदर्शित करती है, जैसे परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने व्यक्त किया है: “आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है” (भजन 19:1)। प्रतिदिन प्रकृति परमेश्वर की महिमा का नया बखान करती है। क्या मैं प्रकृति की उस गवाही में परमेश्वर की वह महिमा देखने पाता हूँ, या मैं उसकी गवाही को एक सरसरी नज़र के साथ नज़रंदाज़ कर देता हूँ?

      समस्त प्रकृति अपनी रचना करने वाले की सुन्दरता को दिखाती है। ऐसे में हमारा प्रत्युत्तर आराधना, प्रशंसा, और धन्यवाद हो सकता है – सूरजमुखी के फूल की चमक के लिए, सूर्योदय की भव्यता के लिए, और किसी भी वृक्ष या अन्य किसी के भी स्वरूप के लिए।

      लेखक सी. एस. ल्यूइस ने अपने एक मित्र के साथ गर्मी के एक दिन टहलने जाने के बारे में लिखा। उसने अपने मित्र से पूछा कि परमेश्वर के प्रति एक धन्यवादी हृदय कैसे विक्सित किया जाए। उनका मित्र पास बह रहे एक नाले पर गया, वहाँ एक छोटे से झरने से पानी लेकर अपने चहरे और हाथों पर डाला, और कहा, “क्यों न इससे ही आरंभ करो?” ल्यूइस ने कहा कि उस पल में उन्होंने एक महान सिद्धान्त सीखा: “जहाँ और जैसे भी हैं, वहीं और उसी के लिए परमेश्वर का धन्यवादी बनें।”

      एक छोटा सा झरना, पेड़ों में बहती हवा की मधुर ध्वनि, एक छोटा पक्षी, आपके आस-पास की कोई भी बात – क्यों न परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होने की यात्रा का आरंभ इन्हीं से किया जाए! – डेविड रोपर


समस्त सुन्दरता की पृष्ठभूमी में परमेश्वर ही है। - स्टीव डिविट

किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी। - फिलिप्पियों 4:6-7

बाइबल पाठ: भजन 136:1-9
Psalms 136:1 यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है, और उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:2 जो ईश्वरों का परमेश्वर है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:3 जो प्रभुओं का प्रभु है, उसका धन्यवाद करो, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:4 उसको छोड़कर कोई बड़े बड़े अशचर्यकर्म नहीं करता, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:5 उसने अपनी बुद्धि से आकाश बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:6 उसने पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया है, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:7 उसने बड़ी बड़ी ज्योतियों बनाईं, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:8 दिन पर प्रभुता करने के लिये सूर्य को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
Psalms 136:9 और रात पर प्रभुता करने के लिये चन्द्रमा और तारागण को बनाया, उसकी करूणा सदा की है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 36-38
  • मत्ती 23:1-22



सोमवार, 4 फ़रवरी 2019

धन्यवाद



      हमारे रहने के स्थान में हम निरन्तर होने वाली बिजली की कटौती को लेकर परेशान रहते हैं और कुड़कुड़ाते रहते हैं। यह कटौती सप्ताह में तीन बार तक हो सकती है, और चौबीस घंटे तक चल सकती है, जिससे सारा क्षेत्र अंधकारमय हो जाता है। इससे होने वाली असुविधा को झेलना कठिन होता है, विशेषकर इसलिए क्योंकि ऐसे में हम घरेलू उपयोग के साधारण उपकरण भी प्रयोग नहीं कर सकते हैं।

      हमारी मसीही पड़ौसन ऐसे में बहुधा कहती है, “क्या यह भी परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होने का कारण है?” उसका संदर्भ परमेश्वर के वचन बाइबिल के 1 थिस्सलुनीकियों 5:18 से है जहाँ हर बात के लिए धन्यवादी होने के लिए कहा गया है। तब हमारा उत्तर सदा ही होता है, “हाँ, अवश्य, हमें हर बात के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करना है।” परन्तु जिस अनमने भाव से हम यह उत्तर देते हैं, हमारा बिजली की कटौती के समय कुड़कुड़ाना, उसका भी खंडन कर देता है।

      परन्तु एक दिन हर बात में धन्यवादी होने का हमारा यह मानना एक अद्भुत रीति से सार्थक हो गया। मैं जब कार्य से लौट कर घर आया तो पाया कि हमारी वह पड़ौसन बहुत घबराई हुई है, और उसने रोते हुए बताया, “प्रभु यीशु का धन्यवाद हो कि बिजली की कटौती हो रखी थी, अन्यथा मेरा घर जल जाता और मैं और मेरा परिवार नाश हो जाते।”

      एक कूड़ा उठाने वाला ट्रक उस पड़ौसन के घर के सामने लगे बिजली के खम्बे से टकरा गया था, जिससे बिजली के हाई-टेंशन तार टूटकर उसके घर पर गिर पड़ी थीं। यदि उन तारों में उस समय बिजली प्रवाहित हो रही होती, तो भयानक तबाही हो जाती।

      हम जिन कठिन परिस्थितियों का सामने कर रहे हों, उनमें या उनके लिए प्रभु परमेश्वर से “धन्यवाद” कहना कठिन हो सकता है। परन्तु हम चाहे परमेश्वर के उद्देश्यों को समझें या न समझें, पहचाने या न पहचाने, हमें प्रत्येक परिस्थिति में उसका धन्यवादी होना चाहिए, हमारे प्रति उसके प्रेम और उन योजनाओं तथा भलाईयों के लिए जो वह हमारे लिए तैयार करता रहता है। - लॉरेंस दरमानी


परमेश्वर के अनुग्रह से हम प्रत्येक बात के लिए उसके धन्यवादी हो सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 1 थिस्सलुनीकियों 5: 16-22
1 Thessalonians 5:16 सदा आनन्‍दित रहो।
1 Thessalonians 5:17 निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो।
1 Thessalonians 5:18 हर बात में धन्यवाद करो: क्योंकि तुम्हारे लिये मसीह यीशु में परमेश्वर की यही इच्छा है।
1 Thessalonians 5:19 आत्मा को न बुझाओ।
1 Thessalonians 5:20 भविष्यद्वाणियों को तुच्‍छ न जानो।
1 Thessalonians 5:21 सब बातों को परखो: जो अच्छी है उसे पकड़े रहो।
1 Thessalonians 5:22 सब प्रकार की बुराई से बचे रहो।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 34-35
  • मत्ती 22:23-46



रविवार, 3 फ़रवरी 2019

देख



      ऑनलाइन लेखकों के एक समूह में, जिसकी मैं सदस्या हूँ, और जिसमें हम एक दूसरे को प्रोत्साहित और सहायता करते हैं, एक मित्र ने कहा, “मैं तुम्हें देखती हूँ।” क्योंकि मैं कुछ तनाव और व्याकुलता से हो कर निकल रही थी, इसलिए उसके इन शब्दों से मुझे शान्ति और सुख अनुभव हुआ – वह मुझे, मेरी आकांक्षाओं, भय, संघर्षों, और सपनों को “देख” रही थी – और मुझसे प्रेम करती थी।

      अपने मित्र के इस सहज किन्तु प्रबल प्रोत्साहन को प्राप्त करके मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में उल्लेखित हाजिरा का विचार आया, जो अब्राहम के घर में एक दासी थी। अब्राहम और सारा वर्षों से सन्तान की लालसा और प्रतीक्षा कर रहे थे, किन्तु उन्हें सन्तान का सुख नहीं मिला था। तब सारा ने अपनी दासी हाजिरा को अब्राहम को दिया कि उससे सारा के लिए सन्तान उत्पन्न करे। किन्तु गर्भवती होने पर हाजिरा अपनी स्वामिनी, सारा, को तिरिस्कार की दृष्टि से देखने लगी। जब सारा ने भी हाजिरा के साथ कठोरता से व्यवहार किया तो हाजिरा उससे दूर मरुभूमि में भाग गई।

      मरुभूमि में कठिनाई और दुःख में पड़ी हुई हाजिरा को परमेश्वर ने देखा और उससे वायदा किया कि वह अनेकों लोगों के वंश की जननी होगी। परमेश्वर से हुई इस मुलाकात के बाद हाजिरा ने परमेश्वर को एल रोई कहा, जिसका अर्थ होता है “वह परमेश्वर जो मुझे देखता है” (उत्पत्ति 16:13), क्योंकि वह जान गई थी कि वह अकेली या त्यागी हुई नहीं है।

      जैसे परमेश्वर ने हाजिरा को देखा और उससे प्रेम किया, वैसे ही वह हमें भी देखता और हम से प्रेम करता है। हम मित्रों या परिवार जनों के द्वारा उपेक्षित और तिरीस्कृत अनुभव कर सकते हैं, परन्तु हम मसीही विश्वासी जानते हैं कि हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता, हमें देखता, जानता और अच्छे से समझता है। वह न केवल हमारे प्रत्यक्ष स्वरूप को देखता है, परन्तु हमारे अन्दर की बातों, भावनाओं, और प्रत्येक बात को देखता और भली-भांति जानता है। इसलिए वह हमें जीवनदायक शब्द और मार्गदर्शन देता है – क्योंकि वह हमें देख रहा है। - एमी बाउचर पाई


यह जानना कि परमेश्वर हमें देख रहा है, हमें सांतवना और भरोसा देता है।

यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। - नीतिवचन 15:3

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 16:1-13
Genesis 16:1 अब्राम की पत्नी सारै के कोई सन्तान न थी: और उसके हाजिरा नाम की एक मिस्री दासी थी।
Genesis 16:2 सो सारै ने अब्राम से कहा, देख, यहोवा ने तो मेरी कोख बन्द कर रखी है सो मैं तुझ से बिनती करती हूं कि तू मेरी दासी के पास जा: सम्भव है कि मेरा घर उसके द्वारा बस जाए।
Genesis 16:3 सो सारै की यह बात अब्राम ने मान ली। सो जब अब्राम को कनान देश में रहते दस वर्ष बीत चुके तब उसकी स्त्री सारै ने अपनी मिस्री दासी हाजिरा को ले कर अपने पति अब्राम को दिया, कि वह उसकी पत्नी हो।
Genesis 16:4 और वह हाजिरा के पास गया, और वह गर्भवती हुई और जब उसने जाना कि वह गर्भवती है तब वह अपनी स्वामिनी को अपनी दृष्टि में तुच्छ समझने लगी।
Genesis 16:5 तब सारै ने अब्राम से कहा, जो मुझ पर उपद्रव हुआ सो तेरे ही सिर पर हो: मैं ने तो अपनी दासी को तेरी पत्नी कर दिया; पर जब उसने जाना कि वह गर्भवती है, तब वह मुझे तुच्छ समझने लगी, सो यहोवा मेरे और तेरे बीच में न्याय करे।
Genesis 16:6 अब्राम ने सारै से कहा, देख तेरी दासी तेरे वश में है: जैसा तुझे भला लगे वैसा ही उसके साथ कर। सो सारै उसको दु:ख देने लगी और वह उसके साम्हने से भाग गई।
Genesis 16:7 तब यहोवा के दूत ने उसको जंगल में शूर के मार्ग पर जल के एक सोते के पास पाकर कहा,
Genesis 16:8 हे सारै की दासी हाजिरा, तू कहां से आती और कहां को जाती है? उसने कहा, मैं अपनी स्वामिनी सारै के साम्हने से भाग आई हूं।
Genesis 16:9 यहोवा के दूत ने उस से कहा, अपनी स्वामिनी के पास लौट जा और उसके वश में रह।
Genesis 16:10 और यहोवा के दूत ने उस से कहा, मैं तेरे वंश को बहुत बढ़ाऊंगा, यहां तक कि बहुतायत के कारण उसकी गणना न हो सकेगी।
Genesis 16:11 और यहोवा के दूत ने उस से कहा, देख तू गर्भवती है, और पुत्र जनेगी, सो उसका नाम इश्माएल रखना; क्योंकि यहोवा ने तेरे दु:ख का हाल सुन लिया है।
Genesis 16:12 और वह मनुष्य बनैले गदहे के समान होगा उसका हाथ सबके विरुद्ध उठेगा, और सब के हाथ उसके विरुद्ध उठेंगे; और वह अपने सब भाई बन्धुओं के मध्य में बसा रहेगा।
Genesis 16:13 तब उसने यहोवा का नाम जिसने उस से बातें की थीं, अत्ताएलरोई रखकर कहा कि, क्या मैं यहां भी उसको जाते हुए देखने पाई जो मेरा देखनेहारा है?
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 31-33
  • मत्ती 22:1-22



शनिवार, 2 फ़रवरी 2019

जीवन



      चार-वर्षीय ऐशर का दमकता हुआ चेहरा उसकी मनपसंद कमीज़ के साथ लगी टोपी में से झाँक रहा था। उसकी उस कमीज़ पर घड़ियाल के सिर के समान दिखने वाली टोपी लगी हुई थी, दांतों के साथ, जिससे लग रहा था मानो घड़ियाल ने उसे निगल लिया है। उसकी माँ को यह देखकर अटपटा लगा; वे लोग एक ऐसे परिवार से मिलने जा रहे थे जिन से वे बहुत समय से नहीं मिले थे, और ऐशर की माँ उन लोगों पर एक अच्छी छाप छोड़ना चाहती थी। इसलिए उसने ऐशर से कहा, “अरे भई, यह अवसर के लिए ठीक नहीं लग रही है।” ऐशर ने भी प्रतिवाद करते हुए कहा, “यह बिलकुल अवसर के अनुरूप है!” तो उसकी माँ ने पूछा, “अच्छा, तो ज़रा बताओ किस अवसर के?” और तुरंत ही ऐशर का उत्तर आया, “आप जानती तो हैं – जीवन के!” यह सुनकर माँ ने उसे पहने रहने की अनुमति दे दी।

      उस आनन्दित लड़के ने अनायास ही परमेश्वर के वचन में सभोपदेशक 3:12 – “मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं” के सत्य को व्यक्त किया। सभोपदेशक की पुस्तक निराशावान प्रतीत हो सकती है, और बहुधा लोग उसे सही से समझ नहीं पाते हैं, क्योंकि वह मनुष्य के परिप्रेक्ष्य से लिखी गई है, परमेश्वर के परिप्रेक्ष्य से नहीं। इस पुस्तक का लेखक, राजा सुलेमान, प्रश्न पूछता है, “काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?” (पद 9)। परन्तु इस संपूर्ण पुस्तक में हमें स्थान-स्थान पर आशा की झलक दिखाई देती रहती है। सुलेमान ने यह भी लिखा, “यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे” (पद 13)।

      हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जो हमारे आनन्द के लिए हमें भली वस्तुएँ देता रहता है। वह जो भी करता है, वह “वह सदा स्थिर रहेगा” (पद 14)। हम जब उसका आदर करते हैं, उसकी आज्ञाकारिता में बने रहते हैं, तो वह हमारे जीवनों को उद्देश्यपूर्ण, सार्थक, और आनन्दपूर्ण बनाता रहता है। - टिम गुस्ताफ्सन


जिस प्रभु ने आपको सृजा है, वह चाहता है कि आप उसे अपने जीवन का केन्द्र-बिंदु बना लें।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 3:9-17
Ecclesiastes 3:9 काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है?
Ecclesiastes 3:10 मैं ने उस दु:खभरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगे रहें।
Ecclesiastes 3:11 उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते है; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता।
Ecclesiastes 3:12 मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं;
Ecclesiastes 3:13 और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे।
Ecclesiastes 3:14 मैं जानता हूं कि जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा; न तो उस में कुछ बढ़ाया जा सकता है और न कुछ घटाया जा सकता है; परमेश्वर ऐसा इसलिये करता है कि लोग उसका भय मानें।
Ecclesiastes 3:15 जो कुछ हुआ वह इस से पहिले भी हो चुका; जो होने वाला है, वह हो भी चुका है; और परमेश्वर बीती हुई बात को फिर पूछता है।
Ecclesiastes 3:16 फिर मैं ने संसार में क्या देखा कि न्याय के स्थान में दुष्टता होती है, और धर्म के स्थान में भी दुष्टता होती है।
Ecclesiastes 3:17 मैं ने मन में कहा, परमेश्वर धर्मी और दुष्ट दोनों का न्याय करेगा, क्योंकि उसके यहां एक एक विषय और एक एक काम का समय है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 29-30
  • मत्ती 21:23-46