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Sunday, January 31, 2016

पछतावा


   क्या कभी आप ने खरीददारी के पछतावे का अनुभव किया है? मैंने किया है। कभी कभी कोई नई चीज़ खरीदने से ठीक पहले मेरे अन्दर कुछ नया पा लेने की उत्तेजना होती है, लेकिन उसे खरिद लेने के बाद पछतावे का भाव मुझे अभिभूत कर देता है; मैं सोचने लगता हूँ, क्या वास्तव में मुझे इस चीज़ की आवश्यकता थी? क्या मुझे इतना पैसा इस एक चीज़ पर लगा देना चाहिए था? लेकिन तब तक यह सब सोचने का समय निकल चुका होता है, अब आगे मुझे अपने निर्णय और उसके परिणामों को निभाना ही पड़ता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में उत्पत्ति के 3 अध्याय में हम ऐसे अपरिवर्तनीय पछतावे की पहली घटना का वर्णन पाते हैं। सारी बात का आरंभ हुआ जब सर्प का रूप लेकर आए धूर्त शैतान ने सब्ज़-बाग़ दिखाकर हमारी आदि माता हव्वा के मन में परमेश्वर के वचन के प्रति संदेह उत्पन्न किया (पद 1); फिर उसके मन में उत्पन्न इस असमंजस के समय में उसने परमेश्वर के चरित्र पर संदेह करवाया (पद 4-5) और हव्वा को विश्वास दिलाया उसकी बात मान लेने से हव्वा की आँखें खुल जाएंगी और वह परमेश्वर के तुल्य हो जाएगी (पद 7-8)।

   शैतान की बातों के बहकावे से अपने मन में जागृत लालसा में आकर हव्वा ने परमेश्वर द्वारा वर्जित वह फल स्वयं भी खाया तथा अपने पति आदम को भी खिलाया। शैतान के बहकावे में आकर किए गए कार्य से उस प्रथम आदमी और औरत की आँखें तो अवश्य खुल गईं, लेकिन वे परमेश्वर के तुल्य होने की बजाए परमेश्वर से दूर हो गए, उससे छिपने लगे। उन्हें वह तो नहीं मिला जिसकी उन्हें आशा थी परन्तु वह मिला जिसकी उन्हें ज़रा सी भनक भी नहीं थी: आदम और हव्वा द्वारा परमेश्वर की इस अनाज्ञाकारिता के कारण पाप को मानव जाति और संसार में प्रवेश करने का अवसर मिल गया, जिसके परिणाम तब उन्होंने भोगे और तब से हम सभी आज तक भोगते रहे हैं।

   पाप के दुषपरिणाम बहुत गंभीर हैं; पाप सदा ही अपने शिकार को परमेश्वर से दूर करता और दूर रखता भी है। लेकिन परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में आदम और हव्वा को चमड़े के वस्त्र पहनाए (पद 21) और आने वाले समय में मनुष्यों को पाप की पकड़ से निकाल कर पुनः परमेश्वर के पास लौटा लाने का मार्ग प्रदान करने वाले मसीहा - प्रभु यीशु मसीह का वायदा भी दिया।

   जैसे परमेश्वर ने तब आदम और हव्वा को चमड़े के वस्त्र प्रदान किए, आज प्रभु यीशु हमें अपनी धार्मिकता के वस्त्र प्रदान करता है। जो कोई प्रभु यीशु से पापों की क्षमा मांगकर अपना जीवन उसे समर्पित करता है उसे फिर पाप के दुषपरिणामों के पछतावे में रहने की कोई आवश्यकता नहीं रहती। - पोह फ़ैंग चिया


मसीह यीशु का क्रूस परमेश्वर की वह धार्मिकता दिखाता है जिसे परमेश्वर ने समस्त मानव जाति के लिए दिया है। 

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? - रोमियों 5:8-10

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-21
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना? 
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं। 
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे। 
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे, 
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे। 
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया। 
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये। 
Genesis 3:8 तब यहोवा परमेश्वर जो दिन के ठंडे समय बाटिका में फिरता था उसका शब्द उन को सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी बाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए। 
Genesis 3:9 तब यहोवा परमेश्वर ने पुकार कर आदम से पूछा, तू कहां है? 
Genesis 3:10 उसने कहा, मैं तेरा शब्द बारी में सुन कर डर गया क्योंकि मैं नंगा था; इसलिये छिप गया। 
Genesis 3:11 उसने कहा, किस ने तुझे चिताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैं ने तुझे बर्जा था, क्या तू ने उसका फल खाया है? 
Genesis 3:12 आदम ने कहा जिस स्त्री को तू ने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैं ने खाया। 
Genesis 3:13 तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, तू ने यह क्या किया है? स्त्री ने कहा, सर्प ने मुझे बहका दिया तब मैं ने खाया। 
Genesis 3:14 तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, तू ने जो यह किया है इसलिये तू सब घरेलू पशुओं, और सब बनैले पशुओं से अधिक शापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा: 
Genesis 3:15 और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करुंगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा। 
Genesis 3:16 फिर स्त्री से उसने कहा, मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दु:ख को बहुत बढ़ाऊंगा; तू पीड़ित हो कर बालक उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा। 
Genesis 3:17 और आदम से उसने कहा, तू ने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैं ने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना उसको तू ने खाया है, इसलिये भूमि तेरे कारण शापित है: तू उसकी उपज जीवन भर दु:ख के साथ खाया करेगा: 
Genesis 3:18 और वह तेरे लिये कांटे और ऊंटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा ; 
Genesis 3:19 और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा। 
Genesis 3:20 और आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की आदिमाता वही हुई। 
Genesis 3:21 और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के अंगरखे बना कर उन को पहिना दिए।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 25-26
  • मत्ती 20:17-34


Saturday, January 30, 2016

अनमोल मृत्यु


   मुझे समाचार मिला कि मेरे एक मसीही विश्वासी मित्र का देहांत हो गया है; इस बात पर मेरे एक अन्य मसीही विश्वासी मित्र ने, जो उस स्वर्गवासी मित्र का भी मित्र था, मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के इस पद: "यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है" (भजन 116:15) की याद दिलाई। हमारे उस दिवंगत मित्र का मसीह यीशु में सजीव तथा जोशीला विश्वास उसके पार्थिव जीवन की विशिष्टता थी, और हम आश्वस्त थे कि अब वह स्वर्ग में परमेश्वर पिता के साथ है। ना केवल हम मित्रगण, वरन उसका परिवार भी उसके अनन्तकाल के स्थान को लेकर पूर्ण्त्या आश्वस्त था, लेकिन फिर भी मेरा ध्यान केवल उन के शोक पर ही गया।

   लोगों के दुःख और शोक में उनके साथ सहानुभूति रखना, उन्हें सांत्वना देना सही और अच्छी बात है, लेकिन मेरे मित्र द्वारा स्मरण कराए गए बाइबल के उस पद ने मेरा ध्यान हमारे मित्र की मृत्यु के प्रति परमेश्वर के दृष्टिकोण की ओर खेंचा - वह परमेश्वर की दृष्टि में अनमोल थी। हम समझते हैं कि अनमोल का अर्थ है वह जिसकी कीमत का आंकलन ना हो सके, परन्तु इससे भी बढ़कर एक अर्थ यहाँ निहित है। परमेश्वर के किसी जन की मृत्यु में कुछ ऐसा है जो संसार में उसकी अनुपस्थिति के शोक से भी कहीं बढ़कर है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के भिन्न अनुवाद, जो शब्दों के तात्पर्यों का खुलासा भी देते हैं, इस बात को भिन्न शब्दों में समझाने का प्रयत्न करते हैं: एंप्लीफ़ाईड बाइबल अनमोल का तात्पर्य समझाने के लिए उसे ’महत्वपूर्ण और हल्के में ना ली जा सकने वाली बात’ कहती है; और लिविंग बाइबल कहती है कि "परमेश्वर के प्रीय उसके लिए अति अनमोल हैं और वह उन्हें यूँ ही नहीं मर जाने देता"; मृत्यु परमेश्वर की दृष्टि में कोई हलकी बात नहीं है। लेकिन हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ का अचरज यह है कि पृथ्वी के जीवन का अन्त स्वर्ग के अनन्त आनन्द तथा लाभ का आरंभ भी होता है।

   आज हम इन बातों के महत्व की समझ की केवल एक झलक मात्र ही देखने-समझने पाते हैं, लेकिन एक दिन परमेश्वर की ज्योति की परिपूर्णता में इन्हें भली भांति समझने पाएंगे। तब तक के लिए उसके संतों की मृत्यु के अनमोल होने का बाइबल में दिया गया परमेश्वर का दृष्टिकोण हमारी सांत्वना और आशा को बनाए रखने के लिए काफी है। - डेविड मैक्कैसलैंड


मृत्यु की खाई को पाटने के लिए मसीही विश्वास एक स्थिर सेतु प्रदान करता है।

धर्मी जन नाश होता है, और कोई इस बात की चिन्ता नहीं करता; भक्त मनुष्य उठा लिये जाते हैं, परन्तु कोई नहीं सोचता। धर्मी जन इसलिये उठा लिया गया कि आने वाली विपत्ति से बच जाए। - यशायाह 57:1

बाइबल पाठ: भजन 116
Psalms 116:1 मैं प्रेम रखता हूं, इसलिये कि यहोवा ने मेरे गिड़गिड़ाने को सुना है। 
Psalms 116:2 उसने जो मेरी ओर कान लगाया है, इसलिये मैं जीवन भर उसको पुकारा करूंगा। 
Psalms 116:3 मृत्यु की रस्सियां मेरे चारों ओर थीं; मैं अधोलोक की सकेती में पड़ा था; मुझे संकट और शोक भोगना पड़ा। 
Psalms 116:4 तब मैं ने यहोवा से प्रार्थना की, कि हे यहोवा बिनती सुन कर मेरे प्राण को बचा ले! 
Psalms 116:5 यहोवा अनुग्रहकारी और धर्मी है; और हमारा परमेश्वर दया करने वाला है। 
Psalms 116:6 यहोवा भोलों की रक्षा करता है; जब मैं बलहीन हो गया था, उसने मेरा उद्धार किया। 
Psalms 116:7 हे मेरे प्राण तू अपने विश्राम स्थान में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है।
Psalms 116:8 तू ने तो मेरे प्राण को मृत्यु से, मेरी आंख को आंसू बहाने से, और मेरे पांव को ठोकर खाने से बचाया है। 
Psalms 116:9 मैं जीवित रहते हुए, अपने को यहोवा के साम्हने जान कर नित चलता रहूंगा। 
Psalms 116:10 मैं ने जो ऐसा कहा है, इसे विश्वास की कसौटी पर कस कर कहा है, कि मैं तो बहुत ही दु:खित हुआ; 
Psalms 116:11 मैं ने उतावली से कहा, कि सब मनुष्य झूठे हैं।
Psalms 116:12 यहोवा ने मेरे जितने उपकार किए हैं, उनका बदला मैं उसको क्या दूं? 
Psalms 116:13 मैं उद्धार का कटोरा उठा कर, यहोवा से प्रार्थना करूंगा, 
Psalms 116:14 मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें सभों की दृष्टि में प्रगट रूप में उसकी सारी प्रजा के साम्हने पूरी करूंगा। 
Psalms 116:15 यहोवा के भक्तों की मृत्यु, उसकी दृष्टि में अनमोल है। 
Psalms 116:16 हे यहोवा, सुन, मैं तो तेरा दास हूं; मैं तेरा दास, और तेरी दासी का पुत्र हूं। तू ने मेरे बन्धन खोल दिए हैं। 
Psalms 116:17 मैं तुझ को धन्यवाद बलि चढ़ाऊंगा, और यहोवा से प्रार्थना करूंगा। 
Psalms 116:18 मैं यहोवा के लिये अपनी मन्नतें, प्रगट में उसकी सारी प्रजा के साम्हने 
Psalms 116:19 यहोवा के भवन के आंगनों में, हे यरूशलेम, तेरे भीतर पूरी करूंगा। याह की स्तुति करो!

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 23-24
  • मत्ती 20:1-16


Friday, January 29, 2016

अपेक्षाएं


   एक बार मैंने लोगों के परस्पर संबंधों को सुधारने की सलाह-मश्वरा देने का कार्य करने वाले एक व्यक्ति से पूछा कि मुख्यतः वे कौन सी समस्याएं हैं जिनके कारण लोग उनके पास आते हैं, या जो संबंध बिगड़ने का अकसर कारण होती हैं। बिना झिझके उसका उत्तर था, "अनेकों समस्याओं की जड़ होती है टूटी अपेक्षाएं; यदि इस बात को समय रहते ना सुधारा गया तो यह क्रोध और कड़वाहट उत्पन्न करके संबंधों का नाश कर देती है।"

   हमारे सबसे अच्छे समयों में, हमारा यह आशा रखना कि हम एक अच्छे स्थान पर, अच्छे लोगों के बीच में रहेंगे जो हमें चाहेंगे और हमारा पक्ष लेंगे कोई असमान्य बात नहीं है। लेकिन ऐसी आशाओं को तोड़ देने का जीवन का एक तरीका है; महत्वपूर्ण बात यह कि जब ऐसा हो तब हमारी प्रतिक्रीया क्या होती है?

   पौलुस प्रेरित के जीवन से देखें; वह जेल में बन्द था और वहाँ के स्थानीय मसीही विश्वासी उसे पसन्द भी नहीं करते थे (फिलिप्पियों 1:15-16), लेकिन फिर भी पौलुस निराश नहीं हुआ। इन विपरीत परिस्थितियों के प्रति उसका दृष्टिकोण सामान्य लोगों से भिन्न था; उसका मानना था कि परमेश्वर ने उसे सेवकाई का एक नया अवसर दिया है। अपने बन्दी होने की अवस्था में भी पौलुस ने अपने पहरेदारों को मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनाया, जिससे उन रोमी सैनिकों में भी सुसमाचार प्रचार हो सका। यह देखकर, जेल के बाहर उससे द्वेश रखने वाले भी प्रतिस्पर्धा में सुसमाचार प्रचार में लग गए, लेकिन इससे भी पौलुस आनन्दित ही हुआ क्योंकि चाहे गलत उद्देश्य से ही सही किंतु मसीह यीशु में उपलब्ध उद्धार और पापों की क्षमा का प्रचार तो हुआ (पद 18)।

   पौलुस ने कभी यह आशा नहीं रखी कि वह किसी अच्छे स्थान में रहे या लोग उसे पसन्द करें; उसकी एकमात्र आशा थी उसके जीवन से मसीह यीशु की बड़ाई होती रहे (पद 20) और इस बात से पौलुस कभी पीछे नहीं हटा।

   हम चाहें जहाँ भी हों, हमारे आस-पास चाहे जैसे भी लोग हों, यदि हर परिस्थिति में हमारी अपेक्षा मसीह यीशु को अपने जीवन से प्रकट करने की है तो हम पाएंगे कि यह अपेक्षा ना केवल पूरी होगी वरन हमारी आशा से भी कहीं बढ़कर पूरी होगी और मसीह यीशु हमारे जीवनों से महिमान्वित होगा। - जो स्टोवैल


अपनी एकमात्र अपेक्षा अपने जीवन से मसीह यीशु को महिमान्वित करने की रखें, आप चाहे जहाँ और चाहे जिस के साथ हों।

क्या तुम नहीं जानते, कि तुम्हारी देह पवित्रात्मा का मन्दिर है; जो तुम में बसा हुआ है और तुम्हें परमेश्वर की ओर से मिला है, और तुम अपने नहीं हो? क्योंकि दाम देकर मोल लिये गए हो, इसलिये अपनी देह के द्वारा परमेश्वर की महिमा करो। - 1 कुरिन्थियों 6:19-20

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-21
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं। 
Philippians 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से। 
Philippians 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं। 
Philippians 1:17 और कई एक तो सीधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्‍लेश उत्पन्न करें। 
Philippians 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्‍दित हूं, और आनन्‍दित रहूंगा भी। 
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा। 
Philippians 1:20 मैं तो यही हादिर्क लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं। 
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।

एक साल में बाइबल: 

  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19


Thursday, January 28, 2016

बाधाएं तथा असुविधाएं


   बाधाएं कोई नई बात नहीं हैं; हमारा शायद ही कोई दिन पूर्णतयः पूर्वनियोजित रीति से निकल पाता होगा। जीवन असुविधाओं से भरा रहता है; हमारी योजनाएं हमारे नियंत्रण से बाहर बातों के द्वारा प्रभावित तथा कुंठित होती रहती हैं। ऐसा करने वाली बाधाओं और असुविधाओं की सूचि लंबी और बदलती रहने वाली है - बीमारी, संघर्ष और विरोध, यातायात में अटकना या फंसना, उपकरणों का ठीक काम ना करना, व्यवहार में अशिष्टता, सुस्ती और टालना, अधीरता, अयोग्यता या अक्षमता आदि जैसे अनेकों कारण हमारी योजनाओं पर पानी फेरते रहते हैं, उन्हें बदलते या बिगाड़ते रहते हैं।

   लेकिन इन असुविधाओं और बाधाओं का एक दूसरा पक्ष भी है जिसे अकसर हम नहीं देख पाते हैं। हमारा विचार होता है कि हमें निराश और हताश करने, हमारे जीवन को कठिन बनाने और हमारी योजनाओं को व्यर्थ करने के इलावा इन बाधाओं और असुविधाओं का कोई अन्य उद्देश्य नहीं है। किंतु ये बाधाएं और असुविधाएं हमें किसी अनजाने और अनदेखे खतरे से बचा कर रखने का परमेश्वर का तरीका, या फिर हमारे द्वारा दूसरों के प्रति परमेश्वर के समान अनुग्रह और क्षमा को प्रदर्शित करने अवसर भी हो सकती हैं। ये परिस्थितियाँ परमेश्वर द्वारा हमारी अपनी आशा और योजना से कुछ बेहतर के आरंभ करने का, या फिर विपरीत परिस्थितियों के प्रति हमारे प्रत्युत्तर और हमारी भावनाओं को हमारे समक्ष लाने का माध्यम भी हो सकती हैं जिससे हम अपना आंकलन कर सकें और समय रहते अपने आपको सुधार सकें। इन बाधाओं और असुविधाओं का कारण चाहे जो भी हो, चाहे हम परमेश्वर की बातों और उद्देश्यों ना भी समझने पाएं, तो भी हम मसीही विश्वासी इस बात पर भरोसा रख सकते हैं, उसे लेकर निश्चिंत रह सकते हैं कि सभी बातों के द्वारा परमेश्वर हमारा भला कर रहा है (रोमियों 8:28), हमें हमारा उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की समानता में ढालता जा रहा है और हमारे द्वारा अपने स्वर्गीय राज्य का प्रचार और प्रसार कर रहा है।

   यह कहना कि संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर के अनुयायी बाधाओं तथा असुविधाओं में रहे हैं कोई अतिश्योक्ति नहीं है; लेकिन परमेश्वर के उन अनुयायियों के जीवन इस बात के भी गवाह हैं कि इन सब बातों के द्वारा परमेश्वर के बड़े उद्देश्यों की पूर्ति और उसकी महिमा उनके जीवन से हुई है। यह जानते और समझते हुए, हमें बाधाओं तथा असुविधाओं के लिए भी परमेश्वर के धन्यवादी होना चाहिए, इस विश्वास के साथ कि वह हमें समय के सदुपयोग का अवसर दे रहा है (इफिसियों 5:16, 20)। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


हमारे साथ जो होता है वह इतना महत्वपूर्ण नहीं है जितना वह जो परमेश्वर हम में और हमारे द्वारा कर रहा है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: इफिसियों 5:15-21
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो। 
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमूल्य समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं। 
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है? 
Ephesians 5:18 और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ। 
Ephesians 5:19 और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो। 
Ephesians 5:20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो। 
Ephesians 5:21 और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35


Wednesday, January 27, 2016

क्रूस


   अपने ऑस्ट्रेलिया भ्रमण के समय मुझे अवसर मिला कि मैं पृथ्वी के दक्षिणी गोलार्द्ध से तारामण्डल में दिखने वाले "दक्षिणी क्रूस" नाम से जाने वाले तारा-समूह को देख सकूँ। पृथ्वी के दक्षिणी भाग से दिखने वाला यह सितारों का सबसे विशिष्ट समूह है। 15वीं शताब्दी से ही समुद्री परिवाहन के लिए नाविकों ने इस तारा-समूह पर भरोसा करना आरंभ कर दिया था। यद्यपि यह आकार में छोटा है परन्तु लगभग सारे वर्ष दिखता रहता है। उस अन्धेरी रात को यह तारा-समूह इतना स्पष्ट दिख रहा था कि मैं भी उसे तारागणों में सरलता से पहचान सका। वह वास्तव मे एक अद्भुत दृश्य था।

   परमेश्वर का वचन बाइबल एक अन्य और भी अद्भुत क्रूस के बारे में बताती है - मसीह यीशु का क्रूस। जब हम सितारों की ओर देखते हैं तो हम सृष्टिकर्ता की विलक्षण कारिगरी को देखते हैं; किंतु जब हम मसीह के क्रूस को देखते हैं तो हमें अपनी सृष्टि के लिए अपने प्राण बलिदान कर देने वाला सृष्टिकर्ता नज़र आता है। इसीलिए परमेश्वर का वचन हमें कहता है कि हम "विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा" (इब्रानियों 12:2)।

   कलवरी के क्रूस का अचरज यही है कि जब हम पापी ही थे तो प्रभु यीशु हमारे पापों के लिए मरा (रोमियों 5:8)। अब जो प्रभु यीशु में विश्वास लाते हैं उनका मेलमिलाप परमेश्वर के साथ हो जाता है और जीवन के पथ पर परमेश्वर उनका मार्गदर्शक बनकर आजीवन उनके साथ रहता है (2 कुरिन्थियों 1:8-10)।

   मसीह यीशु का क्रूस पर दिया गया बलिदान सृष्टि सबसे महान अचरज का कार्य है। - बिल क्राउडर


मसीह का क्रूस ही अनन्त में सकुशल प्रवेश का एकमात्र माध्यम है।

परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। - रोमियों 5:8

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-4
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20


Tuesday, January 26, 2016

ज्योति


   प्रति वर्ष दिसंबर के महीने में हमारे घर के निकट के 13 घरों एक मोहल्ले के सभी परिवार मिलकर 300,000 बत्तियों से बनी क्रिसमस ज्योति सजाते हैं। बत्तियों की यह सज्जा इतनी भव्य होती है कि लोग दूर दूर से उसे देखने आते हैं और घंटों पंक्ति में खड़े रहकर उन रंगीन जलती-बुझती-चमकती बत्तियों को देखने तथा उनके साथ बजने वाले संगीत का आनन्द लेते हैं। बत्तियों और संगीत के इस समागम को सुचारू रूप से चलाते रहने के लिए उन लोगों को 64 कंप्यूटरों की सहायता लेनी पड़ती है।

   जब मैं अवकाश काल में लगाई और जलाई जाने वाली इन ज्योतियों के बारे में सोचती हूँ तो मेरा ध्यान उस सच्ची ज्योति की ओर भी जाता है जिस के कारण क्रिसमस संभव हुआ - वह एकल तेजोमय ज्योति जो अपने प्रेम, खराई और न्याय से सारे जगत को रौशन करती है। यह एकमात्र ज्योति है प्रभु यीशु मसीह, और सारे संसार की हर आवश्यकता के लिए वही काफी है (यशायाह 9:2, 6-7)। हमारे जीवनों की इस ज्योति ने हमें, जो उसके अनुयायी हैं, यह कहा है कि उसकी इस ज्योति को सारे संसार में प्रदर्शित करें जिससे लोग उस ज्योति को देखकर परमेश्वर कि महिमा करने पाएं (मत्ती 5:16)।

   ज़रा विचार कीजिए, क्रिसमस की बत्तियों को लगाने और सुचारू रूप से चलाने के लिए मेहनत करने वाले उन 13 परिवारों के समान यदि हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर कि सच्ची ज्योति को लोगों के जीवनों तथा संसार को ज्योतिर्मय करने के लिए एक जुट और प्रयासरत हो जाएं तो कैसा रहे? फिर पाप के अन्धकार में रहने और जीने वाले लोगों को जीवन की ज्योति को ढूंढ़ने की आवश्यकता ही नहीं रहेगी, वह ज्योति उनके चारों ओर उन्हें चमकती मिलेगी।

   जब मसीही विश्वासी एक साथ मिलकर परमेश्वर के प्रेम की ज्योति को अपने अपने जीवनों से प्रदर्शित करेंगे, तो उद्धार तथा पाप-क्षमा के सुसमाचार की यह ज्योति और अधिक चमकेगी, और अधिक लोगों को प्रभु यीशु के पास आकर्षित करेगी और संसार को सच्ची ज्योति से ज्योतिर्मय कर देगी। - जूली ऐकैरमैन लिंक


संसार के पाप के अन्धकार में हमारे मसीही जीवन की गवाही आशा की ज्योति है।

जो लोग अन्धकार में बैठे थे उन्होंने बड़ी ज्योति देखी; और जो मृत्यु के देश और छाया में बैठे थे, उन पर ज्योति चमकी। - मत्ती 4:16

बाइबल पाठ: मत्ती 5:13-16
Matthew 5:13 तुम पृथ्वी के नमक हो; परन्तु यदि नमक का स्‍वाद बिगड़ जाए, तो वह फिर किस वस्तु से नमकीन किया जाएगा? फिर वह किसी काम का नहीं, केवल इस के कि बाहर फेंका जाए और मनुष्यों के पैरों तले रौंदा जाए।
Matthew 5:14 तुम जगत की ज्योति हो; जो नगर पहाड़ पर बसा हुआ है वह छिप नहीं सकता।
Matthew 5:15 और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है।
Matthew 5:16 उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें।

एक साल में बाइबल: 
  • दानिय्येल 5-7
  • 2यूहन्ना


प्रतीक्षा का अनुशासन


   प्रतीक्षा करना कठिन होता है। हमें दुकान पर सामान खरिदने के समय, यात्रा में, डॉक्टर से मिलने के लिए, सभी स्थानों पर प्रतीक्षा करनी पड़ती है। ऐसा करते समय हम अपनी ऊँगलियों को चटकाते हैं, उबासी आने से रोकने का प्रयत्न करते हैं और अन्दर ही अन्दर खिसियाते हैं। कभी कभी प्रतीक्षा किसी पत्र की होती है जो पहुँच नहीं रहा होता है, किसी बिगड़ी हुई सन्तान के वापस लौट आने की होती है, जीवन साथी में किसी परिवर्तन की होती है, किसी बच्चे के पैदा होने की होती जिसे हम अपनी बाहों में ले सकें। हमें अपनी मनोकामनाओं के पूरे होने की प्रतीक्षा रहती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 40 में भजनकार दाऊद ने कहा, "मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा..." (भजन 40:1); मूल इब्रानी भाषा में जो शब्द "बाट जोहता रहा" के लिए प्रयोग हुए हैं उनका तात्पर्य होता है कि दाऊद ने "प्रतीक्षा करी, और प्रतीक्षा करी, और भी प्रतीक्षा करी" कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना का उत्तर दे। लेकिन फिर भी जब दाऊद प्रतीक्षा के अपने इस समय का पुनःअवलोकन करता है तो इस लंबे विलंब के लिए परमेश्वर की आराधना करता है कि "...उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है..." (भजन 40:3)।

   सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक और लेखक एफ. बी. मेयर्स ने कहा, "परमेश्वर के विलंब पर कैसा महान अध्याय लिखा जा सकता है। यह ऐसा भेद है जो मानव आत्मा को उसकी क्षमता के चरम बिंदु तक संवार सकता है।" प्रतीक्षा के अनुशासन के द्वारा हम में मृदुल सदगुण विकसित हो सकते हैं, जैसे समर्पण, नम्रता, धैर्य, आनन्द सहित सहनशीलता, भलाई में लगे रहना आदि - ये सब ऐसे सदगुण हैं जिन्हें सीखने और जिनमें बढ़ने में सबसे अधिक समय लगता है।

   जब ऐसा लगे कि परमेश्वर हमारी मनोकामनाओं को पूरा करने, हमारी प्रार्थानों का उत्तर देने में विलंब कर रहा है तो हमें क्या करना चाहिए? परमेश्वर से ही सहायता लें कि वह हमें उससे प्रेम करने, उसपर विश्वास बनाए रखने और उसके विलंब को आनन्द के साथ स्वीकार करने की सामर्थ दे तथा उपरोक्त सदगुणों को हम में विकसित करे; साथ ही दाऊद के समान हमें उसकी आराधना और स्तुति में भी लगे रहना चाहिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर के लिए प्रतीक्षा करना कभी भी समय की बर्बादी नहीं है।

यहोवा की बाट जोहता रह; हियाव बान्ध और तेरा हृदय दृढ़ रहे; हां, यहोवा ही की बाट जोहता रह! - भजन 27:14

बाइबल पाठ: भजन 40:1-5
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17


Monday, January 25, 2016

सामन्य दिन


   संग्रहालय की एक प्रदर्श्नी, जिसका शीर्षक था "पॉम्पेई का एक दिन" देखते हुए मैं यह देखकर आश्चर्यचकित हुआ कि वहाँ की बातें बारंबार यह दर्शा रहीं थी कि पॉम्पेई के 20,000 लोगों के लिए 24 अगस्त सन 79 ईसवीं का दिन एक सामन्य दिन के समान ही आरंभ हुआ था, और लोग घरों, बाज़ारों और उस समृद्ध रोमी नगर की बन्दरगाह में अपनी सामान्य दिनचर्या में लगे हुए थे। प्रातः लगभग 8 बजे, निकट के वेसुवियस पहाड़ में एक के बाद एक कुछ छोटे विस्फोट दिखाई दिए और दोपहर होते होते एक भयानक ज्वालामुखी विस्फोट हो गया। 24 घंटे से कम के अन्दर ही पॉम्पेई और उसके अधिकांश लोग ज्वालामुखी की राख की मोटी परत के नीचे दफन हो गए थे। सब कुछ बिलकुल अनेपक्षित था।

   प्रभु यीशु ने अपने अनुयायियों से कहा कि एक दिन वे लौट कर आएंगे। उस दिन भी लोग रोज़ की तरह अपने कार्यों में, व्यवसाय में, भोजन करने में, शादी-ब्याह में लगे होंगे: "जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा" (मत्ती 24:37); लोगों को ज़रा सा अन्दाज़ा भी नहीं होगा कि क्या होने जा रहा है और प्रलय तथा विनाश उन पर आ पड़ेगा।

   यह बताने में प्रभु का उद्देश्य था कि उनके चेले उनके पुनःआगमन के लिए सदा जागरूक और तैयार रहें: "इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा" (मत्ती 24:44)।

   किसी एक सामन्य दिन में अचानक ही सृष्टि के प्रभु का स्वागत करना आपके लिए कैसा रहेगा - अनन्त आनन्द का कारण या अनन्त शोक का कारण? - डेविड मैक्कैसलैंड


तैयार रहिए; आज ही प्रभु यीशु का पुनःआगमन संभव है।

सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। - 1 पतरस 4:7

बाइबल पाठ: मत्ती 24:36-44
Matthew 24:36 उस दिन और उस घड़ी के विषय में कोई नहीं जानता, न स्वर्ग के दूत, और न पुत्र, परन्तु केवल पिता। 
Matthew 24:37 जैसे नूह के दिन थे, वैसा ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:38 क्योंकि जैसे जल-प्रलय से पहिले के दिनों में, जिस दिन तक कि नूह जहाज पर न चढ़ा, उस दिन तक लोग खाते-पीते थे, और उन में ब्याह शादी होती थी। 
Matthew 24:39 और जब तक जल-प्रलय आकर उन सब को बहा न ले गया, तब तक उन को कुछ भी मालूम न पड़ा; वैसे ही मनुष्य के पुत्र का आना भी होगा। 
Matthew 24:40 उस समय दो जन खेत में होंगे, एक ले लिया जाएगा और दूसरा छोड़ दिया जाएगा। 
Matthew 24:41 दो स्‍त्रियां चक्की पीसती रहेंगी, एक ले ली जाएगी, और दूसरी छोड़ दी जाएगी। 
Matthew 24:42 इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा। 
Matthew 24:43 परन्तु यह जान लो कि यदि घर का स्‍वामी जानता होता कि चोर किस पहर आएगा, तो जागता रहता; और अपने घर में सेंध लगने न देता। 
Matthew 24:44 इसलिये तुम भी तैयार रहो, क्योंकि जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16


Sunday, January 24, 2016

सर्वोत्तम कथा


   मिशनरी मसीही सेवक एगर्टन रायर्सन यंग ने सन 1700 में कनाडा के सॉलट्यु कबीले के लोगों में सेवकाई करी। उस कबीले के मुख्या ने मसीह यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को उनके कबीले में लाने के लिए यंग का धन्यवाद किया, और टिप्पणी करी कि यह बात वे अपने जीवन में पहली बार अपने वृद्धावस्था में सुनने पाए। क्योंकि कबीले के मुख्या ने जाना कि परमेश्वर यंग के स्वर्गीय पिता हैं, इसलिए उन्होंने यंग से पूछा, "क्या परमेश्वर मेरे पिता भी हैं?" यंग ने उत्तर दिया, "जी हाँ!" जब यंग का यह उत्तर वहाँ जमा भीड़ ने सुना तो ऊँचे स्वर में अपने हर्ष का प्रगटिकरण किया।

   लेकिन कबीले के मुख्या की बात यहीं आकर समाप्त नहीं हुई; उन्होंने यंग से आगे कहा, "मैं अशिष्ट होना नहीं चाहता, लेकिन मुझे लगता है कि अपने भटके हुए भाई तक यह बात पहुँचाने के लिए आपने बड़ा लंबा समय लिया!"

   अनेकों अवसरों पर मैं अपने जीवन की परिस्थितियों के कारण यह सोचकर विचिलित होता हूँ कि काश मैं इस या उस स्थान के इन या उन लोगों तक जाकर प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाने पाता। लेकिन ऐसे में परमेश्वर मुझे स्मरण दिलाता है कि दूर के स्थानों की ओर नहीं वरन अपने चारों ओर देखो, और मैं उन अनेकों लोगों को देखने पाता हूँ जिन्होंने कभी प्रभु यीशु के सुसमाचार को सुना ही नहीं है। ऐसे में मुझे यह भी स्मरण हो आता है कि मेरे पास सभी को सुनाने के लिए एक अद्भुत कथा है, "...इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा" (रोमियों 10:12-13)।

   हम मसीही विश्वासियों को यह कभी नहीं भूलना है कि हमारे पास संसार के सभी लोगों को सुनाने के लिए कोई कहानी मात्र नहीं है, वरन हमारे पास सारे संसार के लिए मानव इतिहास की सबसे आवश्यक, प्रभावशाली तथा सर्वोत्तम कथा है। - रैंडी किलगोर


प्रभु यीशु का सुसमाचार सुनाना एक भूख से तृप्ति पाए व्यक्ति द्वारा किसी अन्य भूखे व्यक्ति को अनन्त भोजन के स्त्रोत का पता देना है।

क्योंकि प्रभु ने हमें यह आज्ञा दी है; कि मैने तुझे अन्याजातियों के लिये ज्योति ठहराया है; ताकि तू पृथ्वी की छोर तक उद्धार का द्वार हो। - प्रेरितों 13:47

बाइबल पाठ: रोमियों 10:11-15
Romans 10:11 क्योंकि पवित्र शास्त्र यह कहता है कि जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह लज्जित न होगा। 
Romans 10:12 यहूदियों और यूनानियों में कुछ भेद नहीं, इसलिये कि वह सब का प्रभु है; और अपने सब नाम लेने वालों के लिये उदार है। 
Romans 10:13 क्योंकि जो कोई प्रभु का नाम लेगा, वह उद्धार पाएगा। 
Romans 10:14 फिर जिस पर उन्होंने विश्वास नहीं किया, वे उसका नाम क्योंकर लें? और जिस की नहीं सुनी उस पर क्योंकर विश्वास करें? 
Romans 10:15 और प्रचारक बिना क्योंकर सुनें? और यदि भेजे न जाएं, तो क्योंकर प्रचार करें? जैसा लिखा है, कि उन के पांव क्या ही सुहावने हैं, जो अच्छी बातों का सुसमाचार सुनाते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39


Saturday, January 23, 2016

सीमा


   19वीं शताब्दी में कारोबार के लिए पानी के जहाज़ों पर अकसर बेहिसाब माल लाद दिया जाता था जिससे कई बार वे जहाज़ रास्ते में ही डूब जाते थे और उनके नाविक मारे जाते थे। सन 1875 में ब्रिटिश राजनितिज्ञ सैमुएल प्लिम्सोल ने लापरवाही की इस प्रथा को बन्द करने के लिए अभियान चलाया जिसके फलस्वरूप कानून बना कि हर पानी के जहाज़ के बाहर एक रेखा बनाई जाएगी जिससे पता रहे कि माल लादने से वह जहाज़ कितना पानी अन्दर चला गया है। माल लदान की वह रेखा प्लिमसोल रेखा के नाम से जानी गई और आज भी यह रेखा माल लादने की सीमा को दिखाने के लिए पानी के जहाज़ों के बाहर बनाई जाती है।

   उन पानी के जहाज़ों के समान हमारे जीवन भी कभी-कभी भय, संघर्ष और मनोव्यथा से अभिभूत होकर हमें सहने की क्षमता से अधिक बोझिल लग सकते हैं; हमें यह भी लग सकता है कि हम बस अब परिस्थितियों में डूबने की कगार पर हैं। लेकिन ऐसे समयों में हमें स्मरण करना चाहिए कि हमारा एक अद्भुत सहायक है - हमारा परमेश्वर पिता जो हमारी सहायता करने के लिए सदा तत्पर और तैयार रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा है, "इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है" (1 पतरस 5:6-7)। हमारा परमेश्वर पिता हमारे जीवन में आने और हमें अभिभूत करने वाली हर परेशानी को जानता है और उसका समाधन करता है।

   जीवन की परीक्षाएं हमें हमारे सहने से बाहर बोझिल प्रतीत हो सकती हैं, लेकिन हम इस बात से आश्वस्त रह सकते हैं कि हमारा परमेश्वर पिता हमारी सीमाओं को हम से बेहतर जानता है और हमें उन सीमाओं से बाहर किसी परीक्षा में कभी नहीं पड़ने देगा, वरन हर परेशानी में वह हमें उस में से सुरक्षित निकल आने का मार्ग बना कर देगा (1 कुरिन्थियों 10:13)।


परमेश्वर हमें अशान्त जल में जाने देता है जिससे हम उस पर भरोसा करना सीख सकें।

तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको। - 1 कुरिन्थियों 10:13 

बाइबल पाठ: 1 पतरस 5:5-9
1 Peter 5:5 हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। 
1 Peter 5:6 इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। 
1 Peter 5:7 और अपनी सारी चिन्‍ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है। 
1 Peter 5:8 सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह की नाईं इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए। 
1 Peter 5:9 विश्वास में दृढ़ हो कर, और यह जान कर उसका साम्हना करो, कि तुम्हारे भाई जो संसार में हैं, ऐसे ही दुख भुगत रहे हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20


Friday, January 22, 2016

तारणहार


   हम में से कई लोग सीमित संसाधनों के साथ कार्य करने की चुनौती का सामना करते हैं। कभी-कभी हमें कम धन, समय तथा सहायकों की घटी और क्षीण होती कार्यशक्ति के साथ भी पहले के जितने कार्यभार को निभाना ही होता है; और कभी-कभी तो यह कार्यभार घटने की बजाए बढ़ भी जाता है। एक वाक्यांश है जो इस दशा को दर्शाता है - अधिक ईंटें और भूसा कम!

   जब इस्त्राएली मिस्त्र में ग़ुलामी में थे, यह वाक्यांश उनकी तब की दशा पर आधारित है। मिस्त्र के राजा फिरौन ने इस्त्राएलियों को ईंटें बनाने के लिए भूसा उपलब्ध करवाना बन्द कर दिया जिससे कि इस्त्राएलियों को भूसा स्वयं ही जुटाना पड़ता था किंतु फिरौन ने उनकी बनाई ईंटों में घटी नहीं होने दी। ऐसे में ग़ुलाम इस्त्रएली इधर-उधर से भूसा जुटाते भी फिरते थे और फिरौन द्वारा नियुक्त कार्य-निरीक्षकों से अधिक परिश्रम करके ईंटों की संख्या को पूरा करते रहने के लिए ताड़ना भी झेलते थे (निर्गमन 5:13)। इस विकट परिस्थिति से इस्त्राएली इतने हताश हो गए कि उन्होंने परमेश्वर द्वारा मूसा के माध्यम से कही गई बात, "...मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा" (निर्गमन 6:6) को मानने से इंकार कर दिया (निर्गमन 6:9)।

   चाहे इस्त्राएलियों ने परमेश्वर की बात को मानने से इंकार कर दिया हो परन्तु परमेश्वर फिर भी मूसा को निर्देश और मार्गदर्शन देता रहा, उसे फिरौन के पास जाकर उससे इस्त्राएलियों को छोड़ने के लिए बात करने को तैयार करता रहा। परमेश्वर अपनी प्रजा, इस्त्राएलियों के पक्ष में बना रहा, पृष्ठभूमि में उनके हित के लिए कार्य करता रहा और उन्हें मिस्त्र की ग़ुलामी से छुड़ाकर वाचा किए हुए कनान देश में ले आया।

   जब परिस्थितियाँ कठिन हों तो संभव है कि हम भी उन इस्त्राएलियों के समान हताश होकर परमेश्वर के प्रोत्साहन और आश्वासन को नज़रंदाज़ कर दें; परन्तु ऐसे समयों में भी हमें स्मरण रखना चाहिए कि परमेश्वर ही हमारा तारणहार है (भजन 37:5)। चाहे हमें उसका कार्य दिखाई ना भी दे, वह सदा हमारे पक्ष में कार्य करता रहता है, और हर बात में अन्ततः हमारा भला ही करेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परेशानी के समय विश्वास में दृढ़ रहने के समय होते हैं।

अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा। - भजन 37:5

बाइबल पाठ: निर्गमन 6:1-13
Exodus 6:1 तब यहोवा ने मूसा से कहा, अब तू देखेगा कि मैं फिरौन ने क्या करूंगा; जिस से वह उन को बरबस निकालेगा, वह तो उन्हें अपने देश से बरबस निकाल देगा।
Exodus 6:2 और परमेश्वर ने मूसा से कहा, कि मैं यहोवा हूं। 
Exodus 6:3 मैं सर्वशक्तिमान ईश्वर के नाम से इब्राहीम, इसहाक, और याकूब को दर्शन देता था, परन्तु यहोवा के नाम से मैं उन पर प्रगट न हुआ। 
Exodus 6:4 और मैं ने उनके साथ अपनी वाचा दृढ़ की है, अर्थात कनान देश जिस में वे परदेशी हो कर रहते थे, उसे उन्हें दे दूं। 
Exodus 6:5 और इस्राएली जिन्हें मिस्री लोग दासत्व में रखते हैं उनका कराहना भी सुनकर मैं ने अपनी वाचा को स्मरण किया है। 
Exodus 6:6 इस कारण तू इस्राएलियों से कह, कि मैं यहोवा हूं, और तुम को मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकालूंगा, और उनके दासत्व से तुम को छुड़ाऊंगा, और अपनी भुजा बढ़ाकर और भारी दण्ड देकर तुम्हें छुड़ा लूंगा, 
Exodus 6:7 और मैं तुम को अपनी प्रजा बनाने के लिये अपना लूंगा, और मैं तुम्हारा परमेश्वर ठहरूंगा; और तुम जान लोगे कि मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुम्हें मिस्रियों के बोझों के नीचे से निकाल ले आया। 
Exodus 6:8 और जिस देश के देने की शपथ मैं ने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब से खाई थी उसी में मैं तुम्हें पहुंचाकर उसे तुम्हारा भाग कर दूंगा। मैं तो यहोवा हूं। 
Exodus 6:9 और ये बातें मूसा ने इस्राएलियों को सुनाईं; परन्तु उन्होंने मन की बेचैनी और दासत्व की क्रूरता के कारण उसकी न सुनी।
Exodus 6:10 तब यहोवा ने मूसा से कहा, 
Exodus 6:11 तू जा कर मिस्र के राजा फिरौन से कह, कि इस्राएलियों को अपने देश में से निकल जाने दे। 
Exodus 6:12 और मूसा ने यहोवा से कहा, देख, इस्राएलियों ने मेरी नहीं सुनी; फिर फिरौन मुझ भद्दे बोलने वाले की क्योंकर सुनेगा? 
Exodus 6:13 और यहोवा ने मूसा और हारून को इस्राएलियों और मिस्र के राजा फिरौन के लिये आज्ञा इस अभिप्राय से दी कि वे इस्राएलियों को मिस्र देश से निकाल ले जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14:22-36


Thursday, January 21, 2016

सामंजस्य


   मुझे पाँच तार वाला बैन्जो बजाना बहुत प्रीय है। लेकिन इस संगीत वाद्य में एक कमी है - उसका पांचवा तार बहुत ही सीमित एवं सरल स्वरों के साथ तालमेल बना सकता है। इसलिए संगीत वादक जब कुछ जटिल संगीत बजाना चाहते हैं तो बैन्जो बजाने वाले को सामंजस्य बनाने के लिए कुछ प्रयास करना पड़ता है, तालमेल बैठाना पड़ता है। किसी संगीत समारोह में अद्भुत संगीत लय देनी हो तो बैन्जो वादक को कुछ सामंजस्य और तालमेल बैठाना ही पड़ता हैं।

   जैसे संगीत वादक, संगीत मण्डली के रूप में संगीत प्रस्तुत करने से पहले अपने अपने साज़ों में परस्पर सामंजस्य स्थापित करते हैं जिससे श्रोताओं के सामने अच्छा संगीत प्रस्तुत कर सकें, वैसे ही हम मसीही विश्वासियों को भी एक दूसरे के साथ सामंजस्य बैठाकर तालमेल के साथ परमेश्वर की सेवकाई को पूरा करना चाहिए। उदाहरणस्वरूप, जिन विश्वासियों को परमेश्वर के वचन को सिखाने का वरदान दिया गया है उन्हें उन लोगों के साथ सामंजस्य बैठाना चाहिए जिनका वरदान सभाएं आयोजित करना है और सभा स्थलों की सफाई और व्यवस्था बनाना है। हम सभी मसीही विश्वासियों को कोई ना कोई आत्मिक वरदान दिया गया है, और हम सबको ताल-मेल के साथ कार्य करके परमेश्वर के उद्देश्यों को पूरा करना है।

   प्रेरित पतरस ने कहा, "जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए" (1 पतरस 4:10)। भण्डारीपन के लिए परस्पर सहयोग होना चाहिए। पहले अपने आत्मिक वरदानों के बारे में विचार कीजिए (रोमियों 12; 1 कुरिन्थियों 12; इफिसियों 4; 1 पतरस 4); फिर विचार कीजिए कि आप अपने इन वरदानों का अन्य संगी विश्वासियों के वरदानों के साथ सामंजस्य कैसे बना सकते हैं जिससे सब कार्य सुचारू रीति से हो सके। जब हमारे आत्मिक वरदान एक दूसरे के पूरक होकर कार्य करेंगे तो परिणाम परमेश्वर की महिमा और हमारा परस्पर तालमेल होगा। - डेनिस फिशर


मसीह यीशु के साथ सामंजस्य बनाए रखने से चर्च में परस्पर तालमेल बना रहता है।

और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए। - इफिसियों 4:11-12

बाइबल पाठ: 1 पतरस 4:7-11
1 Peter 4:7 सब बातों का अन्‍त तुरन्त होने वाला है; इसलिये संयमी हो कर प्रार्थना के लिये सचेत रहो। 
1 Peter 4:8 और सब में श्रेष्ठ बात यह है कि एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो; क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढांप देता है। 
1 Peter 4:9 बिना कुड़कुड़ाए एक दूसरे की पहुनाई करो। 
1 Peter 4:10 जिस को जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भण्‍डारियों की नाईं एक दूसरे की सेवा में लगाए। 
1 Peter 4:11 यदि कोई बोले, तो ऐसा बोले, मानों परमेश्वर का वचन है; यदि कोई सेवा करे; तो उस शक्ति से करे जो परमेश्वर देता है; जिस से सब बातों में यीशु मसीह के द्वारा, परमेश्वर की महिमा प्रगट हो: महिमा और साम्राज्य युगानुयुग उसी की है। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14:1-21


Wednesday, January 20, 2016

सन्तान


   बच्चों को चर्च के लिए तैयार रखना हमेशा ही हमारे लिए चुनौती भरा रहा है। तैयार होकर चर्च पहुँचने के दस मिनट के अन्दर ही हमारा बेटा छोटा मैथ्यु ऐसा दिखने लगता था मानों उसके कोई अभिभावक हैं ही नहीं। वह चर्च के गलियारे में दौड़ लगाता जिससे उसकी आधी कमीज़ पैन्ट से बाहर हो जाती, उसका चश्मा टेढ़ा हो जाता, जूतियाँ गन्दी हो जातीं और उसके कपड़ों पर बिस्कुट का चूरा गिरा हुआ दिखने लगता। यदि उसे अपने आप पर छोड़ दिया जाता तो वह बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगता था।

   मैं सोचता हूँ कि क्या हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी छोटे मैथ्यु के समान ही बदहाल और अव्यवस्थित दिखने लगते हैं? प्रभु यीशु मसीह में विश्वास करने और उसे जीवन समर्पण करने के बाद, मसीह यीशु हमें अपनी धार्मिकता के आत्मिक वस्त्र पहना देता है, लेकिन हम फिर भी संसार की बातों में इधर-उधर भटकने लग जाते हैं और ऐसे जीवन व्यतीत करने लगते हैं मानो हम परमेश्वर की सन्तान हैं ही नहीं। इसीलिए परमेश्वर के वचन में यहूदा की पत्री में दिया गया वायदा कि प्रभु यीशु "...तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है" (यहूदा 1:24) मुझे आश्वस्त करता है, आशा देता है।

   क्या हम ऐसा कुछ कर सकते हैं जिससे हम ऐसे ना दिखें मानों हमारी देखभाल करने वाला हमारा स्वर्गीय पिता है ही नहीं? हम जितना अपने परमेश्वर पिता कि आत्मा के चलाए चलेंगे, उसके समर्पित तथा आज्ञाकारी रहेंगे, उतना ही हम ठोकर खाकर गिरने बचे भी रहेंगे, क्योंकि पवित्र आत्मा हमें सही मार्ग पर सही रीति से चलना सिखाता है और उसमें हमारी सहायता भी करता है। ज़रा सोचिए, हमारे जीवन कितने अधिक स्वच्छ तथा धर्मी होते चले जाएंगे यदि हम नियमित रूप से परमेश्वर के वचन के स्नान से धुलते रहें (इफिसियों 5:26)।

   हमारे लिए यह कैसी बड़ी आशीष है कि प्रभु यीशु का हमसे वायदा है कि वह हमारे अव्यवस्थित, ठोकर खाकर गिरते रहने वाले जीवन लेकर उन्हें पवित्र, निषकलंक और बेझुर्री करके परमेश्वर पिता के सामने प्रस्तुत करेगा (इफिसियों 5:27)। इसलिए हमारे लिए यह आवश्यक है कि हम प्रभु यीशु को अपने जीवन समर्पित करके उसे जीवनों को संवारने दें जिससे संसार के सामने हम उसके प्रेम और देखभाल को परमेश्वर की सन्तान की तरह प्रदर्शित कर सकें। - जो स्टोवैल


हमारे जीवनों में परमेश्वर पिता की उपस्थिति को प्रतिबिंबित करने के लिए हम में उसके पुत्र प्रभु यीशु की उपस्थिति अनिवार्य है।

कि उसको वचन के द्वारा जल के स्‍नान से शुद्ध कर के पवित्र बनाए। और उसे एक ऐसी तेजस्‍वी कलीसिया बना कर अपने पास खड़ी करे, जिस में न कलंक, न झुर्री, न कोई ऐसी वस्तु हो, वरन पवित्र और निर्दोष हो। - (इफिसियों 5:26-27)

बाइबल पाठ: यहूदा 1:20-25
Jude 1:20 पर हे प्रियों तुम अपने अति पवित्र विश्वास में अपनी उन्नति करते हुए और पवित्र आत्मा में प्रार्थना करते हुए। 
Jude 1:21 अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो। 
Jude 1:22 और उन पर जो शंका में हैं दया करो। 
Jude 1:23 और बहुतों को आग में से झपट कर निकालो, और बहुतों पर भय के साथ दया करो; वरन उस वस्‍त्र से भी घृणा करो जो शरीर के द्वारा कलंकित हो गया है।
Jude 1:24 अब जो तुम्हें ठोकर खाने से बचा सकता है, और अपनी महिमा की भरपूरी के साम्हने मगन और निर्दोष कर के खड़ा कर सकता है। 
Jude 1:25 उस अद्वैत परमेश्वर हमारे उद्धारकर्ता की महिमा, और गौरव, और पराक्रम, और अधिकार, हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जैसा सनातन काल से है, अब भी हो और युगानुयुग रहे। आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58


Tuesday, January 19, 2016

मृत्यु और जीवन


   हमारे शहर में, एक ही दिन में, अलग अलग स्थानों पर, दो लोगों की हत्या हुई। पहला एक पुलिस अधिकारी था जो एक परिवार की सहायता करते समय मार गिराया गया। दूसरा एक बेघर व्यक्ति था जिसे प्रातः अपने मित्रों के साथ शराब पीते हुए गोली मार दी गई।

   सारा शहर उस पुलिस अधिकारी के लिए शोकित रहा; वह जवान और बहुत अच्छा व्यक्ति था जो दूसरों की परवाह किया करता था और उसके पड़ौसी तथा उसके साथी पुलिस वाले उसे बहुत चाहते थे। दूसरे के लिए कुछ अन्य बेघर लोग ही शोकित हुए।

   लेकिन मेरा मानना है कि प्रभु परमेश्वर दोनों की मृत्यु से शोकित हुआ।

   जब प्रभु यीशु ने मरियम, मार्था और मित्रों को लाज़रस की मृत्यु पर रोते देखा, "...तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है?" (यूहन्ना 11:33), यद्यपि यीशु जानते थे कि शीघ्र ही वे लाज़रस को पुनः जीवित करने वाले हैं, परन्तु फिर भी वे उस शोक संतप्त परिवार के साथ रोए (यूहन्ना 11:35)। परमेश्वर के वचन बाइबल के कुछ विद्वानों का मानना है कि प्रभु यीशु के रोने के पीछे ना केवल उस परिवार से उनका लगाव था, वरन मृत्यु और उससे लोगों के जीवनों और मनों में होने वाली पीड़ा और शोक भी इसका कारण थे।

   हानि जीवन का अंग है; परन्तु क्योंकि प्रभु यीशु "पुनरुत्थान और जीवन" (यूहन्ना 11:25) हैं, इसलिए उन पर विश्वास लाने और रखने वाले एक दिन सारे शोक और मृत्यु के दुख से निकलकर अनन्त आनन्द के जीवन में प्रवेश करेंगे। परन्तु जब तक वह समय ना आए, प्रभु हमारे दुःखों में दुःखी होता है, और हम मसीही विश्वासियों से कहता है कि, "आनन्द करने वालों के साथ आनन्द करो; और रोने वालों के साथ रोओ" (रोमियों 12:15)। 


करुणा दूसरों की पीड़ा को दूर करने में सहायता करती है।

यीशु ने उस से कहा, पुनरुत्थान और जीवन मैं ही हूं, जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए, तौभी जीएगा। - यूहन्ना 11:25 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 11:30-37
John 11:30 (यीशु अभी गांव में नहीं पहुंचा था, परन्तु उसी स्थान में था जहां मारथा ने उस से भेंट की थी।) 
John 11:31 तब जो यहूदी उसके साथ घर में थे, और उसे शान्‍ति दे रहे थे, यह देखकर कि मरियम तुरन्त उठके बाहर गई है और यह समझकर कि वह कब्र पर रोने को जाती है, उसके पीछे हो लिये। 
John 11:32 जब मरियम वहां पहुंची जहां यीशु था, तो उसे देखते ही उसके पांवों पर गिर के कहा, हे प्रभु, यदि तू यहां होता तो मेरा भाई न मरता। 
John 11:33 जब यीशु न उसको और उन यहूदियों को जो उसके साथ आए थे रोते हुए देखा, तो आत्मा में बहुत ही उदास हुआ, और घबरा कर कहा, तुम ने उसे कहां रखा है? 
John 11:34 उन्होंने उस से कहा, हे प्रभु, चलकर देख ले। 
John 11:35 यीशु के आंसू बहने लगे। 
John 11:36 तब यहूदी कहने लगे, देखो, वह उस से कैसी प्रीति रखता था। 
John 11:37 परन्तु उन में से कितनों ने कहा, क्या यह जिसने अन्धे की आंखें खोली, यह भी न कर सका कि यह मनुष्य न मरता।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30


Monday, January 18, 2016

महान


   कुछ लोग अपने आप को एक विशाल खाई में कहीं खोए हुए एक छोटे से कंकड़ के समान देखते हैं; परन्तु हम अपने आप को चाहे जितना भी नगण्य समझें, हम सभी परमेश्वर द्वारा बहुतायत से प्रयोग किए जाने की क्षमता रखते हैं। सुप्रसिद्ध मसीही प्रचार्क मार्टिन लूथर किंग ने 1968 के आरंभ में, परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 में प्रभु यीशु द्वारा कही गई बातों पर आधारित एक सन्देश में कहा था, "प्रत्येक जन महान हो सकता है, क्योंकि प्रत्येक जन मसीही सेवकाई कर सकता है। मसीही सेवकाई के लिए आपके पास किसी कॉलेज की कोई डिग्री होने की आवश्यकता नहीं है; आपको अपनी भाषा के व्याकरण में अच्छा होने की आवश्यकता नहीं है; आपको प्रसिद्ध दार्शनिकों प्लेटो और सुकरात के बारे में जानने की आवश्यकता नहीं है...आपके पास केवल अनुग्रह से भरा हृदय और प्रेम से जन्मी आत्मा होनी चाहिए।"

   जब प्रभु यीशु के शिष्य आपस में विवाद कर रहे थे कि स्वर्ग में अधिक आदर के स्थान किसे मिलेंगे, तो प्रभु ने उन से कहा, "...जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (मरकुस 10:43-45)।

   मैं अपने और हम सब के बारे में सोचता हूँ; क्या महानता के विषय में हमारी समझ प्रभु की समझ के अनुरूप है? क्या हम खुशी से सेवा करने और ऐसे कार्य करने को तैयार रहते हैं जहाँ हमें कोई नहीं देखता, जिसके बारे में कोई नहीं जानता? हमारी सेवा का उद्देश्य क्या है - प्रभु को प्रसन्न करना या लोगों से प्रशंसा प्राप्त करना? प्रभु हमारे हर छोटे से छोटे कार्य की भी जानकारी रखता है और उसके लिए किया गया कोई कार्य बिना प्रतिफल नहीं जाएगा: "जो कोई एक कटोरा पानी तुम्हें इसलिये पिलाए कि तुम मसीह के हो तो मैं तुम से सच कहता हूं कि वह अपना प्रतिफल किसी रीति से न खोएगा" (मरकुस 9:41)।

   यदि हम समर्पित सेवक बनकर अपने स्वामी की सच्ची सेवा करेंगे, तो हमारे जीवन प्रभु यीशु की ओर संकेत करेंगे जो वास्तव में महान है, और अपने समय तथा तरीके से वह अपने सेवकों को भी महान करता है। - वैर्नन ग्राउंड्स


मसीह यीशु के नाम में किए गए छोटे छोटे कार्य भी प्रभु की दृष्टि में महान होते हैं।

इसलिये परमेश्वर के बलवन्‍त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। - 1 पतरस 5:6 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


Sunday, January 17, 2016

दृष्टिकोण


   शिशु अवस्था में ही फैनी क्रौसबी ने अपनी आखों की दृष्टि खो दी थी, परन्तु फिर भी, आश्चर्यजनक रीति से, वे मसीही गीत लिखने वाले सबसे प्रसिद्ध गीतकारों में से एक थीं। अपने जीवन काल में उन्होंने नौ हज़ार से अधिक गीत लिखे, जिनमें से कुछ अविस्मर्णीय गीत "Bessed Assuranace" और "To God be the Glory" हैं।

   कुछ लोग फैनी के अंधेपन लिए शोकित होते थे; एक बार एक नेकनियत प्रचारक ने उन से कहा, "मेरे विचार से यह बड़ी दयनीय बात है कि हमारे स्वामी ने आपको इतने गुण देते समय दृष्टि का गुण नहीं दिया।" यह मानना बहुत कठिन लगता है कि उस प्रचार्क को फैनी का उत्तर था, "क्या आप जानते हैं कि जन्म के समय यदि मैं किसी एक बात को माँग पाती तो वह होती कि मैं अंधी जन्मूँ?...क्योंकि जब मैं स्वर्ग पहुँचुंगी तो सबसे पहला चेहरा जो मैं देखूंगी और जो मुझे अनन्तकाल तक हर्षित करता रहेगा, वह होगा मेरे उद्धारकर्ता का।"

   फैनी ने जीवन को स्वर्गीय दृष्टिकोण से देखा। अनन्तकाल के परिप्रेक्ष्य में वर्तमान की हमारी समस्याएं बहुत भिन्न लगने लगती हैं, जैसा प्रेरित पौलुस ने लिखा: "इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं" (2 कुरिन्थियों 4:16-18)।

   हमारी सारी परीक्षाएं, क्लेष और विपरीत परिस्थितियाँ गौण हो जाती हैं जब हम अनन्तकाल का स्वर्गीय दृष्टिकोण रखकर स्मरण करते हैं कि एक दिन हम प्रभु यीशु मसीह को देखेंगे और फिर अनन्तकाल के आनन्द में उसके साथ रहेंगे। - डेनिस फिशर


अनन्तकाल के प्रति हमारा दृष्टिकोण वर्तमान के हमारे जीवन को प्रभावित करता है।

अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। - 1 कुरिन्थियों 13:12

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 11:22-33
2 Corinthians 11:22 क्या वे ही इब्रानी हैं? मैं भी हूं: क्या वे ही इस्त्राएली हैं? मैं भी हूँ: क्या वे ही इब्राहीम के वंश के हैं ?मैं भी हूं: क्या वे ही मसीह के सेवक हैं? 
2 Corinthians 11:23 (मैं पागल की नाईं कहता हूं) मैं उन से बढ़कर हूं! अधिक परिश्रम करने में; बार बार कैद होने में; कोड़े खाने में; बार बार मृत्यु के जोखिमों में। 
2 Corinthians 11:24 पांच बार मैं ने यहूदियों के हाथ से उन्‍तालीस उन्‍तालीस कोड़े खाए। 
2 Corinthians 11:25 तीन बार मैं ने बेंतें खाई; एक बार पत्थरवाह किया गया; तीन बार जहाज जिन पर मैं चढ़ा था, टूट गए; एक रात दिन मैं ने समुद्र में काटा। 
2 Corinthians 11:26 मैं बार बार यात्राओं में; नदियों के जोखिमों में; डाकुओं के जोखिमों में; अपने जाति वालों से जोखिमों में; अन्यजातियों से जोखिमों में; नगरों में के जाखिमों में; जंगल के जोखिमों में; समुद्र के जाखिमों में; झूठे भाइयों के बीच जोखिमों में; 
2 Corinthians 11:27 परिश्रम और कष्‍ट में; बार बार जागते रहने में; भूख-पियास में; बार बार उपवास करने में; जाड़े में; उघाड़े रहने में। 
2 Corinthians 11:28 और और बातों को छोड़कर जिन का वर्णन मैं नहीं करता सब कलीसियाओं की चिन्‍ता प्रति दिन मुझे दबाती है। 
2 Corinthians 11:29 किस की निर्बलता से मैं निर्बल नहीं होता? किस के ठोकर खाने से मेरा जी नहीं दुखता? 
2 Corinthians 11:30 यदि घमण्ड करना अवश्य है, तो मैं अपनी निर्बलता की बातों पर करूंगा। 
2 Corinthians 11:31 प्रभु यीशु का परमेश्वर और पिता जो सदा धन्य है, जानता है, कि मैं झूठ नहीं बोलता। 
2 Corinthians 11:32 दमिश्क में अरितास राजा की ओर से जो हाकिम था, उसने मेरे पकड़ने को दमिश्कियों के नगर पर पहरा बैठा रखा था। 
2 Corinthians 11:33 और मैं टोकरे में खिड़की से हो कर भीत पर से उतारा गया, और उसके हाथ से बच निकला।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23


Saturday, January 16, 2016

प्रार्थना


   सुप्रसिद्ध सुसमाचार प्रचारक बिल्ली ग्राहम के 1949 में लॉस एन्जेलेस के एतिहासिक प्रचार अभियान में श्रोताओं के लिए एक विशाल तम्बू लगाया गया था जिसमें 6000 लोग आ सकते थे और 8 सप्ताह चले इस अभियान की प्रत्येक संध्या वह तम्बू अपनी क्षमता से अधिक लोगों से भरा रहता था। उसके निकट ही एक छोटा तम्बू भी था जहाँ प्रार्थना और परामर्श का कार्य होता था। बिल्ली ग्राहम के निकट मित्र एवं सहयोगी तथा उनकी सभाओं में संगीत संचालक क्लिफ बैरोस अकसर कहते थे कि सुसमाचार का असली कार्य उस छोटे तम्बू में होता था, जहाँ लोग जमा हो कर, अपने घुटने टेक कर, बड़े तम्बू की सुसमाचार सभा के लिए सभा से पहले और सभा के दौरान प्रार्थना करते रहते थे। लॉस एन्जेलेस की एक स्थानीय महिला, पर्ल गुड उस तथा उसके बाद की अनेक प्रार्थना सभाओं की जान थी।

   प्रेरित पौलुस ने कुलुस्से के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में उन्हें आश्वस्त किया कि वह और उसके साथी सदा उनके लिए प्रार्थना करते रहते थे (कुलुस्सियों 1:3, 9)। पत्री को अन्त करते हुए पौलुस ने इपफ्रास का भी उल्लेख किया जिसकी सेवकाई से कुलुस्से में मसीही विश्वासियों की मण्डली स्थापित हुई थी: "इपफ्रास जो तुम में से है, और मसीह यीशु का दास है, तुम से नमस्‍कार कहता है और सदा तुम्हारे लिये प्रार्थनाओं में प्रयत्न करता है, ताकि तुम सिद्ध हो कर पूर्ण विश्वास के साथ परमेश्वर की इच्छा पर स्थिर रहो" (कुलुस्सियों 4:12)।

   "बड़े तम्बू" का सा सर्वविदित कार्य - सुसमाचार प्रचार करना, कुछ ही लोगों को दिया गया है। लेकिन परमेश्वर ने हम सभी मसीही विश्वासियों को, पर्ल गुड और इप्रफास के समान, "छोटे तम्बू" का आदर तथा ज़िम्मेदरी दी है - कि वे प्रार्थना में उसके सामने घुटने टेकें और लोगों को प्रार्थना में उसके अनुग्रह के सिंहासन के सामने लाएं जिससे उन लोगों के कार्य और सेवकाई प्रभावी एवं सफल हो सके। - डेविड मैक्कैसलैंड


प्रार्थना कार्य के लिए तैयारी करना नहीं, कार्य करना ही है। - ओस्वॉल्ड चैम्बर्स

और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। - इफिसियों 6:18

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:1-12
Colossians 1:1 पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से। 
Colossians 1:2 मसीह में उन पवित्र और विश्वासी भाइयों के नाम जो कुलुस्‍से में रहते हैं। हमारे पिता परमेश्वर की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति प्राप्त होती रहे। 
Colossians 1:3 हम तुम्हारे लिये नित प्रार्थना कर के अपने प्रभु यीशु मसीह के पिता अर्थात परमेश्वर का धन्यवाद करते हैं। 
Colossians 1:4 क्योंकि हम ने सुना है, कि मसीह यीशु पर तुम्हारा विश्वास है, और सब पवित्र लोगों से प्रेम रखते हो। 
Colossians 1:5 उस आशा की हुई वस्तु के कारण जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी हुई है, जिस का वर्णन तुम उस सुसमाचार के सत्य वचन में सुन चुके हो। 
Colossians 1:6 जो तुम्हारे पास पहुंचा है और जैसा जगत में भी फल लाता, और बढ़ता जाता है; अर्थात जिस दिन से तुम ने उसको सुना, और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है। 
Colossians 1:7 उसी की शिक्षा तुम ने हमारे प्रिय सहकर्मी इपफ्रास से पाई, जो हमारे लिये मसीह का विश्वास योग्य सेवक है। 
Colossians 1:8 उसी ने तुम्हारे प्रेम को जो आत्मा में है हम पर प्रगट किया। 
Colossians 1:9 इसी लिये जिस दिन से यह सुना है, हम भी तुम्हारे लिये यह प्रार्थना करने और बिनती करने से नहीं चूकते कि तुम सारे आत्मिक ज्ञान और समझ सहित परमेश्वर की इच्छा की पहिचान में परिपूर्ण हो जाओ।
Colossians 1:10 ताकि तुम्हारा चाल-चलन प्रभु के योग्य हो, और वह सब प्रकार से प्रसन्न हो, और तुम में हर प्रकार के भले कामों का फल लगे, और परमेश्वर की पहिचान में बढ़ते जाओ। 
Colossians 1:11 और उस की महिमा की शक्ति के अनुसार सब प्रकार की सामर्थ से बलवन्‍त होते जाओ, यहां तक कि आनन्द के साथ हर प्रकार से धीरज और सहनशीलता दिखा सको। 
Colossians 1:12 और पिता का धन्यवाद करते रहो, जिसने हमें इस योग्य बनाया कि ज्योति में पवित्र लोगों के साथ मीरास में समभागी हों।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11


Friday, January 15, 2016

चिंता


   मेरी मित्र मार्सिया ने, जो बधिरों के जमाइका क्रिश्चियन स्कूल की निर्देशिका है, हाल ही में परिस्थितियों के प्रति एक महतवपूर्ण दृष्टिकोण को दर्शाया। अपने कार्य के विषय में भेजे गए समाचार के पत्र में उसने "एक धन्य आरंभ" शीर्षक के अन्तर्गत एक लेख लिखा, जिसमें उसने बताया कि 7 वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ कि उन्होंने नए वर्ष का आरंभ एक "अधिकाई" से किया। क्या थी वह "अधिकाई"? क्या बैंक में हज़ार डॉलर की रकम? नहीं। क्या साल भर के लिए स्कूल की आवश्यकताओं की आपूर्ति? नहीं। वह "अधिकाई" केवल एक माह की भोजन सामग्री अलमारी में विद्यमान होना थी।

   जब 30 भूखे बच्चों को, बहुत कम पैसों के सहारे, भोजन उपलब्ध करवाना आपकी ज़िम्मेदारी हो तो भोजन सामग्री की यह मात्रा बड़ी बात है। मार्सिया ने अपने लेख में परमेश्वर के वचन बाइबल में से 1 इतिहास 16:34 को भी लिखा: "यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है।"

   साल-ब-साल मार्सिया परमेश्वर पर भरोसा रखती है कि वह उसके स्कूल के बच्चों एवं कर्मचारियों की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। उसके पास कभी अधिक नहीं होता - वह चाहे पानी या भोजन सामग्री या स्कूल की आवश्यकता की कोई वस्तु हो। लेकिन जो भी परमेश्वर उसे भेजता है, उसके लिए वह परमेश्वर की धन्यवादी रहती है, और साथ ही विश्वासयोग्य भी रहती है कि आते समय में भी परमेश्वर उसकी आवश्यकताओं को पूरा करता रहेगा।

   नए साल के आरंभ में क्या हमारे पास मार्सिया के समान विश्वास है कि परमेश्वर हमारी प्रत्येक आवश्यकता को पूरा करेगा? यह विश्वास रखना हमारे प्रभु के आश्वासन को मानना है कि हम ना तो अपने जीवन और ना कल की कोई चिंता करें क्योंकि परमेश्वर हमारी चिंता करता है, हमारे लिए उपलब्ध करवाता है (मत्ती 6:25, 34)। - डेव ब्रैनन


चिंता कल के दुःख को तो समाप्त नहीं करती, परन्तु आज की सामर्थ को अवश्य समाप्त कर देती है। - कोरी टेन बूम

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: मत्ती 6:25-34
Matthew 6:25 इसलिये मैं तुम से कहता हूं, कि अपने प्राण के लिये यह चिन्‍ता न करना कि हम क्या खाएंगे? और क्या पीएंगे? और न अपने शरीर के लिये कि क्या पहिनेंगे? क्या प्राण भोजन से, और शरीर वस्‍त्र से बढ़कर नहीं? 
Matthew 6:26 आकाश के पक्षियों को देखो! वे न बोते हैं, न काटते हैं, और न खत्तों में बटोरते हैं; तौभी तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता उन को खिलाता है; क्या तुम उन से अधिक मूल्य नहीं रखते। 
Matthew 6:27 तुम में कौन है, जो चिन्‍ता कर के अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है 
Matthew 6:28 और वस्‍त्र के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो? जंगली सोसनों पर ध्यान करो, कि वै कैसे बढ़ते हैं, वे न तो परिश्रम करते हैं, न कातते हैं। 
Matthew 6:29 तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में उन में से किसी के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था। 
Matthew 6:30 इसलिये जब परमेश्वर मैदान की घास को, जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा वस्‍त्र पहिनाता है, तो हे अल्पविश्वासियों, तुम को वह क्योंकर न पहिनाएगा? 
Matthew 6:31 इसलिये तुम चिन्‍ता कर के यह न कहना, कि हम क्या खाएंगे, या क्या पीएंगे, या क्या पहिनेंगे? 
Matthew 6:32 क्योंकि अन्यजाति इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहते हैं, और तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता जानता है, कि तुम्हें ये सब वस्तुएं चाहिए। 
Matthew 6:33 इसलिये पहिले तुम उसके राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। 
Matthew 6:34 सो कल के लिये चिन्‍ता न करो, क्योंकि कल का दिन अपनी चिन्‍ता आप कर लेगा; आज के लिये आज ही का दुख बहुत है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42


Thursday, January 14, 2016

नींद और आराम


   कभी कभी हम चाहे जितना प्रयत्न कर लें, अपने तकिए को सही करें या उसे दबाएं-पीटें, करवटें बदलें लेकिन हमें नींद नहीं आती। एक अखबार में छपे लेख ने अच्छी नींद सोने के कुछ सुझाव देने के बाद अन्त में कहा कि अच्छी नींद प्राप्त करने का कोई "सही उपाय" नहीं है।

   नींद ना आने के कई कारण हो सकते हैं, और उन कारणों में से अनेक के बारे में हम कुछ नहीं कर सकते। लेकिन कई बार ना सो पाने का कारण होते हैं हमारी चिन्ताएं, व्याकुलता या दोषी मन। ऐसे में परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 4 में दिए गए दाऊद के उदाहरण से हम सहायता पा सकते हैं। भजन के आरंभ में ही दाऊद ने परमेश्वर से उसकी प्रार्थना सुनने और उस पर करुणा करने की याचना करी (पद 1)। दाऊद ने अपने आप को भी यह स्मरण कराया कि जब भी वह परमेश्वर को पुकारता है, वह उसकी सुनता है (पद 3)। दाऊद हमें प्रोत्साहित करता है: "कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो" (भजन 4:4)। अपने मनों को जब हम परमेश्वर की भलाईओं, करुणा और प्रेम पर लगाते हैं, जो उसने हमारे और हमारे प्रीय जनों के प्रति तथा संसार के प्रति करी हैं, तो यह हमारे विश्वास को बढ़ाता है (पद 5)।

   परमेश्वर हमारी सहायता करना चाहता है जिससे हम अपनी चिन्ताएं और उनके समाधान उस पर छोड़ कर अपना विश्वास उस पर बनाए रखें कि वह हमारे लिए मार्ग निकालेगा। जब हम ऐसा करेंगे तो परमेश्वर के आनन्द से हमारे हृदय भर जाएंगे और हम दाऊद के समान पाएंगे कि "मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है" (भजन 4:8)। - डेव एगनर


चाहे हम सोने ना भी पाएं, तो भी परमेश्वर हमें विश्राम दे सकता है।

तुम जो सवेरे उठते और देर कर के विश्राम करते और दु:ख भरी रोटी खाते हो, यह सब तुम्हारे लिये व्यर्थ ही है; क्योंकि वह अपने प्रियों को यों ही नींद दान करता है। - भजन 127:2

बाइबल पाठ: भजन 4
Psalms 4:1 हे मेरे धर्ममय परमेश्वर, जब मैं पुकारूं तब तू मुझे उत्तर दे; जब मैं सकेती में पड़ा तब तू ने मुझे विस्तार दिया। मुझ पर अनुग्रह कर और मेरी प्रार्थना सुन ले।
Psalms 4:2 हे मनुष्यों के पुत्रों, कब तक मेरी महिमा के बदले अनादर होता रहेगा? तुम कब तक व्यर्थ बातों से प्रीति रखोगे और झूठी युक्ति की खोज में रहोगे? 
Psalms 4:3 यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिये अलग कर रखा है; जब मैं यहोवा को पुकारूंगा तब वह सुन लेगा।
Psalms 4:4 कांपते रहो और पाप मत करो; अपने अपने बिछौने पर मन ही मन सोचो और चुपचाप रहो। 
Psalms 4:5 धर्म के बलिदान चढ़ाओ, और यहोवा पर भरोसा रखो।
Psalms 4:6 बहुत से हैं जो कहते हैं, कि कौन हम को कुछ भलाई दिखाएगा? हे यहोवा तू अपने मुख का प्रकाश हम पर चमका! 
Psalms 4:7 तू ने मेरे मन में उस से कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उन को अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता था। 
Psalms 4:8 मैं शान्ति से लेट जाऊंगा और सो जाऊंगा; क्योंकि, हे यहोवा, केवल तू ही मुझ को एकान्त में निश्चिन्त रहने देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20


Wednesday, January 13, 2016

विश्वासयोग्य


   अप्रैल 1937 में मुसुलोनी की आक्रमणकारी सेना ने इथियोपिया के वालामो क्षेत्र में काम कर रहे सभी मसीही मिशनरी सेवकों को छोड़कर जाने पर विवश कर दिया। वे अपने पीछे 48 जन जिन्होंने मसीह यीशु को अपना उद्धाकर्ता माना था छोड़कर गए। उन पीछे छोड़े गए लोगों के पास उनके आत्मिक पोषण के लिए केवल मरकुस रचित सुसमाचार ही था और उन में से बहुत थोड़े ही थे जिन्हें पढ़ना आता था। लेकिन 4 वर्ष पश्चात जब वे मसीही मिशनरी उस इलाके में लौट कर आए तो ना केवल वह चर्च बचा हुआ था, वरन अब उसके 10,000 सदस्य थे!

   जब प्रेरित पौलुस को थिस्सलुनीके छोड़ने को विवश किया गया (प्रेरितों 17:1-10) उसकी लालसा रही कि वह उन थोड़े से मसीही विश्वासियों के हाल-चाल को जाने जिन्हें वह पीछे छोड़ कर आया था (1 थिस्स्लुनिकीयों 2:17)। बाद में तिमुथियुस थिस्स्लुनीके की मसीही मण्डली से मिला और पौलुस के पास उनके विश्वास और प्रेम का समाचार लाया (1 थिस्स्लुनिकीयों 3:6)। तब तक वे लोग अन्य मसीही विश्वासियों और मकिदूनिया तथा अखया के क्षेत्र के लोगों के लिए उदाहरण और मसीही विश्वास के प्रचार का माध्यम बन चुके थे (1 थिस्स्लुनिकीयों 1:8)।

   पौलुस ने कभी अपनी सेवकाई में लोगों की संख्या की किसी वृद्धि के लिए कोई श्रेय नहीं लिया, और ना ही उसने यह श्रेय किसी अन्य मनुष्य को दिया, वरन उसने इसका सारा श्रेय परमेश्वर को ही दिया। उसने अपनी सेवकाई से मसीही विश्वासियों की बढ़ोतरी के संबंध में लिखा: "मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया" (1 कुरिन्थियों 3:6)।

   कठिन परिस्थितियाँ हमारे अच्छे से अच्छे इरादों को भी बाधित कर सकती हैं, मित्रों और संबंधियों को एक दूसरे से पृथक कर सकती हैं, लेकिन परमेश्वर के इरादों को कभी बाधित नहीं कर सकतीं, उसकी योजनाओं को पनपने और बढ़ने से कभी रोक नहीं सकतीं। परमेश्वर अपनी मण्डली को बना और बढ़ा रहा है; हमें केवल विश्वासयोग्य रहकर, परिणामों की चिन्ता किए बगैर, उसका आज्ञाकारी बने रहना है और उसे अपना कार्य करने का अवसर प्रदान करते रहना है। - सी. पी. हिया


...मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊंगा: और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल न होंगे। - प्रभु यीशु (मत्ती 16:18)

क्योंकि तुम्हारे यहां से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फैल गई है, कि हमें कहने की आवश्यकता ही नहीं। - 1 थिस्सलुनीकियों 1:8 

बाइबल पाठ: 1 थिस्स्लुनिकीयों 2:17-3:7
1 Thessalonians 2:17 हे भाइयों, जब हम थोड़ी देर के लिये मन में नहीं वरन प्रगट में तुम से अलग हो गए थे, तो हम ने बड़ी लालसा के साथ तुम्हारा मुंह देखने के लिये और भी अधिक यत्‍न किया। 
1 Thessalonians 2:18 इसलिये हम ने (अर्थात मुझ पौलुस ने) एक बार नहीं, वरन दो बार तुम्हारे पास आना चाहा, परन्तु शैतान हमें रोके रहा। 
1 Thessalonians 2:19 भला हमारी आशा, या आनन्द या बड़ाई का मुकुट क्या है? क्या हमारे प्रभु यीशु के सम्मुख उसके आने के समय तुम ही न होगे? 
1 Thessalonians 2:20 हमारी बड़ाई और आनन्द तुम ही हो।
1 Thessalonians 3:1 इसलिये जब हम से और भी न रहा गया, तो हम ने यह ठहराया कि एथेन्‍स में अकेले रह जाएं। 
1 Thessalonians 3:2 और हम ने तीमुथियुस को जो मसीह के सुसमाचार में हमारा भाई, और परमेश्वर का सेवक है, इसलिये भेजा, कि वह तुम्हें स्थिर करे; और तुम्हारे विश्वास के विषय में तुम्हें समझाए। 
1 Thessalonians 3:3 कि कोई इन क्‍लेशों के कारण डगमगा न जाए; क्योंकि तुम आप जानते हो, कि हम इन ही के लिये ठहराए गए हैं। 
1 Thessalonians 3:4 क्योंकि पहिले भी, जब हम तुम्हारे यहां थे, तो तुम से कहा करते थे, कि हमें क्‍लेश उठाने पड़ेंगे, और ऐसा ही हुआ है, और तुम जानते भी हो। 
1 Thessalonians 3:5 इस कारण जब मुझ से और न रहा गया, तो तुम्हारे विश्वास का हाल जानने के लिये भेजा, कि कहीं ऐसा न हो, कि परीक्षा करने वाले ने तुम्हारी परीक्षा की हो, और हमारा परिश्रम व्यर्थ हो गया हो। 
1 Thessalonians 3:6 पर अभी तीमुथियुस ने जो तुम्हारे पास से हमारे यहां आकर तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया और इस बात को भी सुनाया, कि तुम सदा प्रेम के साथ हमें स्मरण करते हो, और हमारे देखने की लालसा रखते हो, जैसा हम भी तुम्हें देखने की। 
1 Thessalonians 3:7 इसलिये हे भाइयों, हम ने अपनी सारी सकेती और क्‍लेश में तुम्हारे विश्वास से तुम्हारे विषय में शान्‍ति पाई।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 31-32
  • मत्ती 9:18-38


Tuesday, January 12, 2016

संबंध


   हमारे घर के आहते का एक ओर का बाड़ा कमज़ोर होकर टूट रहा था, और मैंने तथा मेरे पति कार्ल ने निर्णय लिया कि इससे पहले कि वह बाड़ा गिर जाए, उसे हटा देना चाहिए। क्योंकि उसे हटाना कोई कठिन कार्य नहीं था इसलिए हमने एक दोपहर को उसे आसानी से हटा भी दिया। इसके कुछ सप्ताह के बाद, कार्ल जब हमारे बाग़ में काम कर रहे थे तो पड़ौस की एक महिला, जो अपने कुत्ते को टहलाने के लिए निकली थी, कार्ल से बात करने को रुक गई और बोली: "आपका आहता बिना उस बाड़े के बहुत अच्छा लग रहा है; वैसे भी, मैं बाड़ों में विश्वास नहीं रखती। मुझे लोगों के बीच बिना किसी बाधा के संबंध होना, उनका एकजुट होकर एक समूह में रहना मुझे अच्छा लगता है।"

   यद्यपि बाड़े लगाने के कुछ वाजिब कारण होते हैं, लेकिन हमें अपने पड़ौसियों से अलग करके रखना उन कारणों में से एक नहीं है, इसलिए अपनी उस पड़ौसन के दृष्टिकोण को समझना मेरे लिए कठिन नहीं था। जिस चर्च में मैं जाती हूँ उसमें कुछ समूह बने हुए हैं जो सप्ताह में एक बार एकत्रित होते और मिलते हैं, एक दुसरे से संबंध बनाने और बढ़ाने के लिए, और परमेश्वर के साथ अपनी जीवन यात्रा में एक दूसरे को प्रोत्साहित करने के लिए। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि प्रथम चर्च के लोग प्रतिदिन मन्दिर में एकत्रित हुआ करते थे (प्रेरितों 2:44, 46)। इस प्रकार इकठ्ठे होकर संगति रखने और प्रार्थना करने से वे अपने उद्देश्यों और मनसा में एकजुट हो गए; इसका एक और लाभ यह हुआ कि जब भी उन पर परेशानी आती तो उसे झेलने में सहायता के लिए उनके पास साथी होते थे, जैसा बाइबल के सभोपदेशक 4:9-10 में लिखा है।

   मसीही विश्वासियों का अन्य विश्वासियों के समूह के साथ संबंध बनाए रखना उनकी मसीही जीवन यात्रा का एक महत्वपूर्ण भाग है; परस्पर संबंध के द्वारा एक दूसरे से दिखाया गया प्रेम, परमेश्वर के द्वारा हमें किए जाने वाले प्रेम को दर्शाता है। - ऐनी सेटास


हम सभी मसीही विश्वासियों को मसीही संगति की आवश्यकता है जिससे हम एक दूसरे को उठाए रखें और मसीही जीवन यात्रा में आगे बढ़ते रहें।

एक से दो अच्छे हैं, क्योंकि उनके परिश्रम का अच्छा फल मिलता है। क्योंकि यदि उन में से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला हो कर गिरे और उसका कोई उठाने वाला न हो। - सभोपदेशक 4:9-10

बाइबल पाठ: प्रेरितों 2:41-47
Acts 2:41 सो जिन्हों ने उसका वचन ग्रहण किया उन्होंने बपतिस्मा लिया; और उसी दिन तीन हजार मनुष्यों के लगभग उन में मिल गए। 
Acts 2:42 और वे प्रेरितों से शिक्षा पाने, और संगति रखने में और रोटी तोड़ने में और प्रार्थना करने में लौलीन रहे। 
Acts 2:43 और सब लोगों पर भय छा गया, और बहुत से अद्भुत काम और चिन्ह प्रेरितों के द्वारा प्रगट होते थे। 
Acts 2:44 और वे सब विश्वास करने वाले इकट्ठे रहते थे, और उन की सब वस्तुएं साझे की थीं। 
Acts 2:45 और वे अपनी अपनी सम्पत्ति और सामान बेच बेचकर जैसी जिस की आवश्यकता होती थी बांट दिया करते थे। 
Acts 2:46 और वे प्रति दिन एक मन हो कर मन्दिर में इकट्ठे होते थे, और घर घर रोटी तोड़ते हुए आनन्द और मन की सीधाई से भोजन किया करते थे। 
Acts 2:47 और परमेश्वर की स्‍तुति करते थे, और सब लोग उन से प्रसन्न थे: और जो उद्धार पाते थे, उन को प्रभु प्रति दिन उन में मिला देता था।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 29-30
  • मत्ती 9:1-17


Monday, January 11, 2016

परिस्थिति


   प्रथम विश्व-युद्ध के समय, मॉरने की प्रथम लड़ाई में, फ्रांस के लेफ्टिनेंट जनरल फर्डिनेन्ड फॉक ने एक सूचना भेजी: "आक्रमण कर रही मेरी सेना का मध्य भाग कमज़ोर पड़ रहा है और दाहिने भाग को पीछे हटना पड़ रहा है। स्थिति उत्कृष्ट है; मैं आक्रमण में लगा हूँ!" कठिन परिस्थितियों में भी आशा बनाए रखने की उनकी प्रवृति के कारण ही उनकी सेना विजयी हो सकी।

   कभी-कभी जीवन की लड़ाईयों में हमें लगता है मानो जीवन के हर मोर्चे पर हम हार रहे हैं - पारिवारिक कलह, व्यवसाय में हानि, स्वास्थ्य में गड़बड़ी इत्यादि जीवन के प्रति हमारे नज़रिए में निराशाएं ला सकती हैं। लेकिन हर मसीही विश्वासी, अपने अन्त-फल के कारण, सदा ही इस निषकर्ष पर बना रह सकता है कि "स्थिति उत्कृष्ट है"।

   प्रेरित पौलुस को ही देखिए; जब उसे सुसमाचार प्रचार के लिए कैदखाने में डाल दिया गया, तौ भी उसका रवैया आशावादी ही रहा। कैदखाने से फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री के आरंभ ही में पौलुस ने लिखा: "हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है" (फिलिप्पियों 1:12)।

   पौलुस ने अपनी कैद और कैदखाने को सुसमाचार प्रचार करने का एक नया मंच बना लिया जहाँ से वह रोमी सेना के उन लोगों को सुसमाचार दे सका जो वहाँ तैनात थे, और उनमें से कई मसीही विश्वासी हो गए। साथ ही उसकी इस परिस्थिति और इस परिस्थिति के प्रति उसकी प्रतिक्रीया से अन्य मसीही विश्वासी भी साहस प्राप्त कर सके और सुसमाचार प्रचार में और निर्भीक होकर लग सके (पद 13-14)।

   हमारी परिस्थितियों, परेशानियों और परीक्षाओं को, वे चाहे कष्टदायक ही क्यों ना हों, परमेश्वर हमारी भलाई के लिए (रोमियों 8:28) और अपने राज्य की बढ़ोतरी के लिए प्रयोग कर सकता है। हमारी हर परिस्थिति उसे आदर और महिमा देने का एक और कारण है। - डेनिस फिशर


क्लेष, विजयी होने के लिए परमेश्वर का दिया एक मार्ग हो सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:3-14
Philippians 1:3 मैं जब जब तुम्हें स्मरण करता हूं, तब तब अपने परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं। 
Philippians 1:4 और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं। 
Philippians 1:5 इसलिये, कि तुम पहिले दिन से ले कर आज तक सुसमाचार के फैलाने में मेरे सहभागी रहे हो। 
Philippians 1:6 और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा। 
Philippians 1:7 उचित है, कि मैं तुम सब के लिये ऐसा ही विचार करूं क्योंकि तुम मेरे मन में आ बसे हो, और मेरी कैद में और सुसमाचार के लिये उत्तर और प्रमाण देने में तुम सब मेरे साथ अनुग्रह में सहभागी हो। 
Philippians 1:8 इस में परमेश्वर मेरा गवाह है, कि मैं मसीह यीशु की सी प्रीति कर के तुम सब की लालसा करता हूं। 
Philippians 1:9 और मैं यह प्रार्थना करता हूं, कि तुम्हारा प्रेम, ज्ञान और सब प्रकार के विवेक सहित और भी बढ़ता जाए। 
Philippians 1:10 यहां तक कि तुम उत्तम से उत्तम बातों को प्रिय जानो, और मसीह के दिन तक सच्चे बने रहो; और ठोकर न खाओ। 
Philippians 1:11 और उस धामिर्कता के फल से जो यीशु मसीह के द्वारा होते हैं, भरपूर होते जाओ जिस से परमेश्वर की महिमा और स्‍तुति होती रहे। 
Philippians 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है। 
Philippians 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं। 
Philippians 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्‍ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-12
  • मत्ती 4