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गुरुवार, 9 जनवरी 2014

बाधा या आशीष?


   यदि आप का जीवन भी मेरे जीवन के समान है तो आप समझ सकते हैं कि पूरे दिन के कार्य को पहले से योजनाबद्ध रखने का क्या तात्पर्य है। मेरा एक कैलेण्डर है जो मुझे सारे दिन में मेरे समय पर कब किस का अधिकार है बताता है - कब किससे कितनी देर के लिए मिलना है, कब क्या करना है, आदि सब उसमें दर्ज रहता है। लेकिन साथ ही अवश्य ही कोई ना कोई बाधा या अनेपक्षित बात मेरे इस योजनाबद्ध दिन को अस्त-व्यस्त कर देती है। अकसर ये बातें और बाधाएं खिसिया देने वाली होती हैं, लेकिन कभी कभी वे उपयोगी और लाभकारी भी हो जाती हैं।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें दिखाती है कि परमेश्वर द्वारा किए गए अनेक महान कार्य, लोगों के जीवन में ऐसी ’बाधा’ बनकर आए जिसने उनके सामन्य चल रहे जीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया। उदाहरणस्वरूप मरियम के जीवन को ही देखिए। मरियम एक कुँवारी कन्या थी जिसकी मंगनी हो गई थी, इसलिए जब परमेश्वर के स्वर्गदूत ने आकर उसे सन्देश दिया कि वह गर्भवती होगी और पुत्र जनेगी जिसका नाम यीशु रखा जाएगा तो निस्सन्देह उसके सामान्य रूप से चल रहे जीवन के लिए यह बहुत बेचैन करने वाला और चिंता का विषय था (लूका 1:26-31)। इसी प्रकार आरंभिक मसीही विश्वास और विश्वासियों के कट्टर विरोधी उन्मादी शाउल को ही लीजिए, जो और मसीही विश्वासियों को पकड़ कर लाने के लिए दमिश्क की ओर जा रहा था जब उसका सामना प्रभु यीशु मसीह से हुआ (प्रेरितों 9:1-9); इस जीवन परिवर्तन कर देने वाली बाधा ने मसीह यीशु विरोधी उन्मादी शाउल को मसीह यीशु का अडिग विश्वासी प्रेरित पौलुस बना दिया जो मसीही विश्वास की बढ़ोतरी और परमेश्वर के वचन की कई पुस्तकों और पत्रियों के लिखे जाने का कारण हुआ।

   भजनकार हमें स्मरण दिलाता है कि "यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है" (भजन 33:10)। लेकिन फिर भी हम अकसर अपने व्यवस्थित और सामान्य चल रहे जीवन में आई बाधाओं के कारण कुंठित हो जाते हैं, उन बाधाओं के कारण खिसियाते हैं, सन्देह करते हैं, डरते हैं। जब भी ऐसी कोई परिस्थिति आए हमें स्मरण रखना चाहिए कि प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन परमेश्वर के हाथों में सुरक्षित है और वह हर परिस्थिति में अपने जन के लिए केवल भला ही होने देगा। इसलिए बाधाओं से विचिलित ना हों वरन उन्हें आशीषों के अवसर के रूप में देखें - परमेश्वर हमारी योजना के स्थान पर अपनी भली योजना हमारे जीवन में कार्यान्वित कर रहा है। - जो स्टोवैल


अपने जीवन में आने वाली अगली बाधा से खिसियाएं नहीं वरन उसमें परमेश्वर की योजना ढूँढ कर उसे पूरी करने का प्रयास करें।

मनुष्य के मन में बहुत सी कल्पनाएं होती हैं, परन्तु जो युक्ति यहोवा करता है, वही स्थिर रहती है। - नीतिवचन 19:21

बाइबल पाठ: भजन 33:10-15
Psalms 33:10 यहोवा अन्य अन्य जातियों की युक्ति को व्यर्थ कर देता है; वह देश देश के लोगों की कल्पनाओं को निष्फल करता है। 
Psalms 33:11 यहोवा की युक्ति सर्वदा स्थिर रहेगी, उसके मन की कल्पनाएं पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहेंगी। 
Psalms 33:12 क्या ही धन्य है वह जाति जिसका परमेश्वर यहोवा है, और वह समाज जिसे उसने अपना निज भाग होने के लिये चुन लिया हो! 
Psalms 33:13 यहोवा स्वर्ग से दृष्टि करता है, वह सब मनुष्यों को निहारता है; 
Psalms 33:14 अपने निवास के स्थान से वह पृथ्वी के सब रहने वालों को देखता है, 
Psalms 33:15 वही जो उन सभों के हृदयों को गढ़ता, और उनके सब कामों का विचार करता है।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 27-29


बुधवार, 8 जनवरी 2014

दान


   मेरे पति का जन्म-दिन निकट ही था, और मैंने उन से पूछा कि जन्म-दिन के उपहार के लिए उन्हें क्या पसन्द होगा। वे बोले कि मुझे कोई उपहार नहीं चाहिए; मैंने अपने मन में सोचा, "हाँ, हाँ, मैं जानती हूँ कि कोई उपहार चाहिए या नहीं!" मैंने उन पर दबाव दिया कि वे अपनी पसन्द की कोई चीज़ बताएं। मेरे इस प्रकार दबाव देने पर वे बोले कि वे चाहते हैं कि जो पैसा हम लोग उनके लिए उपहार खरीदने पर व्यय करने  की योजना बना रहे हैं, उस पैसे को किसी ज़रूरतमन्द को दान कर दिया जाए।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हमें स्वेच्छा और उदारता से देना चाहिए ना कि अनिच्छा से अथवा केवल औपचारिकता पूरी करने के लिए। हमारा दान परमेश्वर के कार्य और परमेश्वर के सेवकों की सहायता के लिए होना चाहिए (2 कुरिन्थियों 9:7)। इस प्रकार का स्वेच्छा से दिया गया दान, देने वाले के लिए हर्ष का कारण होता है। जब राजा दाऊद ने अपने सोने, चांदी के भण्डार से परमेश्वर का मन्दिर बनवाने के लिए दान दिया, तो अनेक इस्त्राएली अधिकारियों ने भी उसके इस उदार कार्य का अनुसरण किया। उन के द्वारा पीतल, लोहा, मणि और बहुमूल्य धातुओं के दान किए जाने के बाद "तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ" (1 इतिहास 29:9)।

   उस आनन्द के उत्सव में राजा दाऊद ने परमेश्वर की स्तुति करते हुए कहा "मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है" (1 इतिहास 29:14)। राजा दाऊद इस तथ्य का अंगीकार कर रहा था कि अन्ततः परमेश्वर ही प्रत्येक वस्तु का वास्तविक स्वामी है। जब दाऊद के समान हम भी इस तथ्य को स्मरण रखते हैं तो हमें दान देने में कोई समस्या नहीं होती क्योंकि हम उसे ही तो वापस लौटा रहे हैं जो उस सब का वास्तविक स्वामी है, अर्थात परमेश्वर।

   इस कारण जब आप अगली बार पैसा, सेवा या कोई वस्तु मसीही सेवकाई के लिए दान करें तो दान के प्रति अपनी मनशा और अपने रवैये को भी देख लें - क्या आप स्वेच्छा और उदारता से दे रहे हैं, क्योंकि परमेश्वर ऐसे देने वालों से प्रेम करता है। - जेनिफ़र बेन्सन शुल्ट


हम कितना दान देते हैं से अधिक महत्वपूर्ण है हम कैसे दान देते हैं।

हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। - 2 कुरिन्थियों 9:7

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:1-14
1 Chronicles 29:1 फिर राजा दाऊद ने सारी सभा से कहा, मेरा पुत्र सुलैमान सुकुमार लड़का है, और केवल उसी को परमेश्वर ने चुना है; काम तो भारी है, क्योंकि यह भवन मनुष्य के लिये नहीं, यहोवा परमेश्वर के लिये बनेगा। 
1 Chronicles 29:2 मैं ने तो अपनी शक्ति भर, अपने परमेश्वर के भवन के निमित्त सोने की वस्तुओं के लिये सोना, चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, पीतल की वस्तुओं के लिये पीतल, लोहे की वस्तुओं के लिये लोहा, और लकड़ी की वस्तुओं के लिये लकड़ी, और सुलैमानी पत्थर, और जड़ने के योग्य मणि, और पच्ची के काम के लिये रंग रंग के नग, और सब भांति के मणि और बहुत संगमर्मर इकट्ठा किया है। 
1 Chronicles 29:3 फिर मेरा मन अपने परमेश्वर के भवन में लगा है, इस कारण जो कुछ मैं ने पवित्र भवन के लिये इकट्ठा किया है, उस सब से अधिक मैं अपना निज धन भी जो सोना चान्दी के रूप में मेरे पास है, अपने परमेश्वर के भवन के लिये दे देता हूँ। 
1 Chronicles 29:4 अर्थात तीन हजार किक्कार ओपीर का सोना, और सात हजार किक्कार तपाई हुई चान्दी, जिस से कोठरियों की भीतें मढ़ी जाएं। 
1 Chronicles 29:5 और सोने की वस्तुओं के लिये सोना, और चान्दी की वस्तुओं के लिये चान्दी, और कारीगरों से बनाने वाले सब प्रकार के काम के लिये मैं उसे देता हूँ। और कौन अपनी इच्छा से यहोवा के लिये अपने को अर्पण कर देता है? 
1 Chronicles 29:6 तब पितरों के घरानों के प्रधानों और इस्राएल के गोत्रों के हाकिमों और सहस्रपतियों और शतपतियों और राजा के काम के अधिकारियों ने अपनी अपनी इच्छा से, 
1 Chronicles 29:7 परमेश्वर के भवन के काम के लिये पांच हजार किक्कार और दस हजार दर्कनोन सोना, दस हजार किक्कार चान्दी, अठारह हजार किक्कार पीतल, और एक लाख किक्कार लोहा दे दिया। 
1 Chronicles 29:8 और जिनके पास मणि थे, उन्होंने उन्हें यहोवा के भवन के खजाने के लिये गेर्शोनी यहीएल के हाथ में दे दिया। 
1 Chronicles 29:9 तब प्रजा के लोग आनन्दित हुए, क्योंकि हाकिमों ने प्रसन्न हो कर खरे मन और अपनी अपनी इच्छा से यहोवा के लिये भेंट दी थी; और दाऊद राजा बहुत ही आनन्दित हुआ। 
1 Chronicles 29:10 तब दाऊद ने सारी सभा के सम्मुख यहोवा का धन्यवाद किया, और दाऊद ने कहा, हे यहोवा! हे हमारे मूल पुरुष इस्राएल के परमेश्वर! अनादिकाल से अनन्तकाल तक तू धन्य है। 
1 Chronicles 29:11 हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरा ही है; क्योंकि आकाश और पृथ्वी में जो कुछ है, वह तेरा ही है; हे यहोवा! राज्य तेरा है, और तू सभों के ऊपर मुख्य और महान ठहरा है। 
1 Chronicles 29:12 धन और महिमा तेरी ओर से मिलती हैं, और तू सभों के ऊपर प्रभुता करता है। सामर्थ्य और पराक्रम तेरे ही हाथ में हैं, और सब लोगों को बढ़ाना और बल देना तेरे हाथ में है। 
1 Chronicles 29:13 इसलिये अब हे हमारे परमेश्वर! हम तेरा ध्न्यवाद और तेरे महिमायुक्त नाम की स्तुति करते हैं। 
1 Chronicles 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 23-26


मंगलवार, 7 जनवरी 2014

अंगीकार


   मैं और मेरी पत्नि एक राजमार्ग पर गाड़ी से जा रहे थे। एक स्थान पर हम ने देखा कि हमारे आगे के एक गाड़ीचालक ने अपनी गाड़ी गलत रीति से मोड़कर सड़क को विभाजित करने वाली पट्टी पर लाकर खड़ी कर दी और दूसरी ओर से आने वाली गाड़ियों को देखने लगा। वह चाह रहा था कि मौका पा कर वह अपनी गाड़ी वापस घुमा कर जिस दिशा से आया था उसी ओर लौट कर जा सके, जबकि वह स्थान इस तरह से गाड़ी मोड़ने के लिए नहीं था। अपनी ओर आने वाली गाड़ियों की ओर नज़र बनाए रखने से वह दूसरी ओर से उसकी ओर आकर पास ही में खड़ी होने वाली पुलिस की गाड़ी को नहीं देख सका। मौका पाकर वह जैसे ही मुड़ा, उसकी गाड़ी पास ही खड़ी पुलिस की गाड़ी से टकरा गई। फिर आगे क्या हुआ, यह तो आप समझ ही सकते हैं।

   हमारा यह विचार रखना कि गलती करके हम ऐसे ही बच निकल सकते हैं कोई आसामान्य बात नहीं है, और यह प्रयास अकसर होता रहता है। राजा दाऊद ने भी बत्शीबा के साथ व्यभिचार करने के बाद यही किया, वह भी अपने व्यवहार के दुष्परिणामों से बच कर निकलने के प्रयास करता रहा और अपनी गलती को और भी गंभीर बनाता रहा। उस गाड़ीचालक के समान, दाऊद भी बचने के प्रयास में अपने निकट विद्यमान परमेश्वर से ही जा टकराने के मार्ग पर था, और यही हुआ। जब परमेश्वर ने उसके व्यभिचार, धोखे और हत्या के गंभीर पाप को अपने नबी नतान के द्वारा दाऊद के सामने रखवाया तब दाऊद ने अपनी गलती स्वीकार करी, पश्चाताप किया; इससे उसे परमेश्वर से क्षमा तो मिली - वह परमेश्वर का जन बना रहा, किंतु उस पाप के कारण उसके परिवार पर आए दुष्परिणामों से वह निकल नहीं सका। दाऊद का उदाहरण पाप के दुष्परिणामों की एक जीवती मिसाल है।

   यदि आप भी अपने जीवन के किसी पाप से ऐसे ही बच कर निकलने का प्रयास कर रहे हैं, तो स्मरण रखिए कि आप का पाप आपको कभी ना कभी कहीं ना कहीं ढूंढ़ ही लेगा (गिनती 32:23) और तब उसका प्रतिफल बहुत भयानक और कष्टदायक होगा। भला इसी में है कि आप अपने आप को प्रभु यीशु के सामने खड़ा कर दें, वहाँ अपने पाप का अंगीकार कर लें, उसके लिए प्रभु यीशु से क्षमा माँग लें; क्योंकि उस का वायदा है: "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)।

   यह अंगीकार ही क्षमा, बहाली और नए जीवन का मार्ग खोलता है। - डेनिस फिशर


अपने पापों से पीछा छुड़ाने के लिए उनका सामना हमें करना ही होगा, अन्यथा उनका कष्ट भोगना होगा।

और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा। - गिनती 32:23

बाइबल पाठ: 2 शमुएल 12:1-15
2 Samuel 12:1 तब यहोवा ने दाऊद के पास नातान को भेजा, और वह उसके पास जा कर कहने लगा, एक नगर में दो मनुष्य रहते थे, जिन में से एक धनी और एक निर्धन था। 
2 Samuel 12:2 धनी के पास तो बहुत सी भेड़-बकरियां और गाय बैल थे; 
2 Samuel 12:3 परन्तु निर्धन के पास भेड़ की एक छोटी बच्ची को छोड़ और कुछ भी न था, और उसको उसने मोल ले कर जिलाया था। और वह उसके यहां उसके बाल-बच्चों के साथ ही बढ़ी थी; वह उसके टुकड़े में से खाती, और उसके कटोरे में से पीती, और उसकी गोद मे सोती थी, और वह उसकी बेटी के समान थी। 
2 Samuel 12:4 और धनी के पास एक बटोही आया, और उसने उस बटोही के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाने को अपनी भेड़-बकरियों वा गाय बैलों में से कुछ न लिया, परन्तु उस निर्धन मनुष्य की भेड़ की बच्ची ले कर उस जन के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाया। 
2 Samuel 12:5 तब दाऊद का कोप उस मनुष्य पर बहुत भड़का; और उसने नातान से कहा, यहोवा के जीवन की शपथ, जिस मनुष्य ने ऐसा काम किया वह प्राण दण्ड के योग्य है; 
2 Samuel 12:6 और उसको वह भेड़ की बच्ची का चौगुणा भर देना होगा, क्योंकि उसने ऐसा काम किया, और कुछ दया नहीं की। 
2 Samuel 12:7 तब नातान ने दाऊद से कहा, तू ही वह मनुष्य है। इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि मैं ने तेरा अभिशेक करा के तुझे इस्राएल का राजा ठहराया, और मैं ने तुझे शाऊल के हाथ से बचाया; 
2 Samuel 12:8 फिर मैं ने तेरे स्वामी का भवन तुझे दिया, और तेरे स्वामी की पत्नियां तेरे भोग के लिये दीं; और मैं ने इस्राएल और यहूदा का घराना तुझे दिया था; और यदि यह थोड़ा था, तो मैं तुझे और भी बहुत कुछ देने वाला था। 
2 Samuel 12:9 तू ने यहोवा की आज्ञा तुच्छ जान कर क्यों वह काम किया, जो उसकी दृष्टि में बुरा है? हित्ती ऊरिय्याह को तू ने तलवार से घात किया, और उसकी पत्नी को अपनी कर लिया है, और ऊरिय्याह को अम्मोनियों की तलवार से मरवा डाला है। 
2 Samuel 12:10 इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जानकर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है। 
2 Samuel 12:11 यहोवा यों कहता है, कि सुन, मैं तेरे घर में से विपत्ति उठा कर तुझ पर डालूंगा; और तेरी पत्नियों को तेरे साम्हने ले कर दूसरे को दूंगा, और वह दिन दुपहरी में तेरी पत्नियों से कुकर्म करेगा। 
2 Samuel 12:12 तू ने तो वह काम छिपाकर किया; पर मैं यह काम सब इस्राएलियों के साम्हने दिन दुपहरी कराऊंगा। 
2 Samuel 12:13 तब दाऊद ने नातान से कहा, मैं ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। नातान ने दाऊद से कहा, यहोवा ने तेरे पाप को दूर किया है; तू न मरेगा। 
2 Samuel 12:14 तौभी तू ने जो इस काम के द्वारा यहोवा के शत्रुओं को तिरस्कार करने का बड़ा अवसर दिया है, इस कारण तेरा जो बेटा उत्पन्न हुआ है वह अवश्य ही मरेगा। 
2 Samuel 12:15 तब नातान अपने घर चला गया। और जो बच्चा ऊरिय्याह की पत्नी से दाऊद के द्वारा उत्पन्न था, वह यहोवा का मारा बहुत रोगी हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 20-22


सोमवार, 6 जनवरी 2014

घर


   जब हमारा बेटा स्टीफन बालक था तो वह एक ग्रीष्मकालीन शिविर में गया। उसके जाने के कुछ दिन के बाद ही हमें उसका लिखा एक पत्र मिला जिसमें उसने लिखा, "माँ और पापा आप आज ही आकर मुझे यहाँ से वापस घर ले जाईए।" उस बालक का मन यह नहीं जान सका कि उसके पत्र को हम तक पहुँचने और फिर हमारे द्वारा छुट्टी लेकर उस तक पहुँचने में कुछ दिन लगेंगे। उसका छोटा सा दिल बस इतना जानता था कि वह अपने माता-पिता के बिना व्याकुल था और उसे तो बस तुरंत अपने माता-पिता तथा घर वापस पहुँचना था।

   इस संसार में हम मसीही विश्वासी भी कभी कभी बालक स्टीफन के समान ही व्यवहार करते हैं। हमारे लिए बहुत सरल होता है इस संसार के क्लेषों से निकलकर प्रभु यीशु के साथ रहने की लालसा रखना और अपने स्वर्गीय घर जा कर अनन्त सुख में निवास करने की इच्छा रखना। परमेश्वर की सन्तान होने के नाते हम जानते हैं कि यह संसार कभी हमारा घर नहीं हो सकता, और हम यहाँ कभी स्थाई रीति से सन्तुष्ट और आनन्दित नहीं रह सकते, विशेषकर तब जब परिस्थितियाँ हमारे लिए कठिन और कष्टदायक हों। प्रेरित पौलुस का भी यही हाल था; जब वह रोम में अपने मुकद्दमे की प्रतीक्षा में था तो उसने अपनी एक पत्री में लिखा, "क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है" (फिलिप्पियों 1:23)। वह इस संसार में प्रभु यीशु की सेवकाई करते रहने में प्रसन्न तो था लेकिन साथ ही उसके मन का एक भाग प्रभु के साथ स्वर्ग में होने की भी इच्छा रखता था।

   यह विचार अपने मनों में बनाए रखना कि हम मसीही विश्वासियों के लिए स्वर्ग में एक अनन्तकाल के आनन्द का स्थान, हमारा स्वर्गीय घर तैयार है हमें भविष्य के प्रति आशावान तथा इस संसार के कष्टों और निराशाओं को सहन करने की सामर्थ देता रहता है। प्रभु के साथ उस घर में रहने की आशा को बनाए रखें - वह समय बहुत निकट है। - बिल क्राउडर


घर के समान और कोई स्थान नहीं है, विशेषकर जब वह घर प्रभु यीशु के साथ स्वर्गीय घर हो।

इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं। - 2 कुरिन्थियों 5:8

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:21-30
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है। 
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं। 
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है। 
Philippians 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है। 
Philippians 1:25 और इसलिये कि मुझे इस का भरोसा है सो मैं जानता हूं कि मैं जीवित रहूंगा, वरन तुम सब के साथ रहूंगा जिस से तुम विश्वास में दृढ़ होते जाओ और उस में आनन्‍दित रहो। 
Philippians 1:26 और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए। 
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो। 
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है। 
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ। 
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 16-19


रविवार, 5 जनवरी 2014

भविष्य


   कुछ पुरानी फाइलों को देखते हुए मेरी नज़र टाईम पत्रिका के 1992 के एक विशेषांक पर गई, जिसका शीर्षक था: "वर्ष 2000 से आगे: नई शताब्दी में क्या आशा की जा सकती है।" उस विशेषांक में, आज से दो दशक पूर्व करी गई भविष्यवाणियों को पढ़ना बहुत रोचक था। भविष्यवाणी की कुछ सामान्य बातें तो सही निकलीं और पूरी हुईं, लेकिन तब किसी ने भी आज विद्यमान उन अविषकारों और घटनाओं की कलपना भी नहीं करी थी जिन्होंने आज हमारे जीवनों को मौलिक रूप से प्रभावित तथा परिवर्तित कर दिया है। मेरे लिए उस पत्रिका में लिखा हुआ सबसे प्रभावी कथन था, "भविष्यवाणी करने का सबसे प्रथम नियम होना चाहिए कि अनेपक्षित ही भविष्य को अज्ञेय बनाए रखता है।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब हमें स्मरण कराता है कि भविष्य के प्रति वह प्रत्येक दृष्टिकोण जो परमेश्वर को नज़रंदाज़ करता है मूर्खतापूर्ण है। याकूब ने लिखा: "तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे" (याकूब 4:13-15)।

   बहुत से लोग अपनी योजनाओं का बयान करते हुए कहते हैं "यदि प्रभु की इच्छा हुई तो..."; यह वाक्यांश भले ही घिसा-पिटा लगता हो लेकिन परमेश्वर की सार्वभौमिकता और नियंत्रण को स्वीकार करना कभी असंगत नहीं हो सकता। इस वर्ष को आरंभ करते हुए यदि हम परमेश्वर की इच्छा और उद्देश्य में आगे बढ़ते रहेंगे तो भविष्य हमारे लिए कोई घबराने या चिंतित करने वाला विष्य नहीं रहेगा, वरन अपने लिए सदा ही परमेश्वर की भली योजना के होने के आश्वासन के साथ हम भविष्य की ओर आनन्द के साथ देखने वाले बन जाएंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड


जो मसीह यीशु को अपना उद्धारकर्ता मान चुकें हैं वे भविष्य की ओर सुनिश्चय तथा आनन्द से देखते रह सकते हैं।

और संसार और उस की अभिलाषाएं दोनों मिटते जाते हैं, पर जो परमेश्वर की इच्छा पर चलता है, वह सर्वदा बना रहेगा। - 1 यूहन्ना 2:17

बाइबल पाठ: याकूब 4:13-17
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 12-15


शनिवार, 4 जनवरी 2014

अभ्यास


   नव वर्ष का आरंभ अकसर वह समय होता है जब हम अपने लिए कुछ निर्णय लेते हैं कि हम अपनी देखभाल भली भांति करेंगे, व्यायाम करेंगे, सही भोजन सही मात्रा में खाएंगे और बीते समय में जमा किए हुए वज़न को कम करेंगे। इसलिए मैं भी प्रयास करता हूँ की यथासंभव स्वस्थ बना रह सकूँ - मैं सही भोजन खाने का प्रयास करता हूँ - कभी कभी कुछ इधर उधर का हो जाता है, लेकिन प्रयास सही भोजन का ही रहता है; मैं व्यायाम करता हूँ, सैर पर जाता हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा है: "क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है" (1 तिमुथियुस 4:8); और मैं जानता हूँ कि मेरा शरीर इस संसार में बहुत लम्बे समय तक कायम नहीं रहेगा, उसकी सामर्थ और क्षमता क्षीण होती जा रही है। इसलिए मेरे लिए यह बेहतर है कि मैं अपने शरीर की अपेक्षा उस भक्ति पर अधिक ध्यान दूँ जो परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देश के अनुसार है और जो मेरे ना केवल इस संसार के वरन इस संसार के बाद के जीवन के लिए भी लाभदायक होगी। यह तो निश्चित है कि इस संसार से हम कुछ तो लेकर जाएंगे, यहाँ की धन दौलत शोहरत इत्यादि ना सही परन्तु यहाँ इस संसार में रहते हुए कमाए गए और उस आते जीवन में मिलने वाले हमारे प्रतिफल तो हमारे साथ ही जाएंगे।

   हो सकता है कि यह ईश्वरीय भक्ति नीरस, भयावह और हमें अपनी पहुँच से बाहर प्रतीत हो, लेकिन उस ईश्वरीय भक्ति का सार केवल आत्म-त्याग वाला प्रेम है - अपने आप से अधिक दूसरों की चिन्ता करना। इस प्रकार का प्रेम मिलना दुर्लभ है; केवल प्रभु यीशु का प्रेम ही ऐसा प्रेम है, और प्रभु यीशु अपने प्रत्येक अनुयायी को यही प्रेम कर सकने की सामर्थ अपने पवित्र आत्मा की शक्ति से प्रदान करता है। हम मसीही विश्वासियों को प्रभु यीशु पर विश्वास रखते हुए उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा इस प्रेम को प्रगट और प्रदर्शित करते रहना है। जितना हम प्रभु यीशु के चरणों पर बैठकर उसकी बात सुनेंगे, उससे वार्तालाप करेंगे, अपने मनों की बातें उसके साथ बाँटेंगे, उतना अधिक हम उसकी समानता में ढलते जाएंगे और उसके इस निस्वार्थ प्रेम को अपने जीवनों से प्रगट करने वाले बनते जाएंगे।

   मुझे लगता है कि जीवन, प्रेम में बढ़ते जाने की एक यात्रा है और मैं जानता तथा मानता हूँ कि इसके लिए प्रभु यीशु के प्रेम के समान और कोई प्रेम नहीं है। शारीरिक व्यायाम और अभ्यास से निःसन्देह कुछ लाभ अवश्य होगा, लेकिन इससे भी बढ़कर कुछ और है, एक और अभ्यास है - प्रभु यीशु का प्रेम, उसमें बने रहने, दूसरों को उसके बारे में बताते रहने और उस प्रेम में बढ़ते जाने का अभ्यास। इस नव वर्ष के अपनी उन्नति के निर्णयों में इस अभ्यास को भी सम्मिलित कर लीजिए। - डेविड रोपर


ईश्वरीय भक्ति का प्रगट रूप ही प्रेम है।

इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:6-11
1 Timothy 4:6 यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा: और विश्वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जा तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा। 
1 Timothy 4:7 पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर। 
1 Timothy 4:8 क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है। 
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है। 
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है। 
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-11


शुक्रवार, 3 जनवरी 2014

बुद्धि का स्त्रोत


   हमारे युवा समय में कार्ल ने, जो अब मेरे पति हैं, मेरे साथ सबंध प्रगाढ़ करने के लिए बहुत मेहनत करी। वे मुझे फोन करते, मुझे पत्र लिखते, मेरे लिए फूलों के गुलदस्ते लाते, मुझे मिठाई खरीद कर देते, मेरे लिए किताबें ले कर आते, मुझे बाहर खाने के लिए लेकर जाते और मुझे उपहार देते रहते। क्योंकि वे मेरे प्रति गंभीर थे, इसलिए वे मेरे साथ संबंध बनाए रखने के लिए भी प्रयासरत रहते थे।

   हज़ारों वर्ष पहले ईसा पूर्व 10वीं शताब्दी में राजा सुलेमान ने भी इसी प्रकार की गंभीरता के साथ किसी अन्य के लिए प्रयास में लगे रहने के निर्देश दिए - बुद्धि के खोजी होने के लिए। शब्दकोश के अनुसार बुद्धिमानी वह गुण है जिससे एक व्यक्ति सत्य, सही और स्थिर बने रहने वाली बात को समझ सकता है। यदि हमने अपने परमेश्वर पिता की महिमा के लिए जीवन जीना है तो बुद्धिमानी का यह गुण हम में होना बहुत आवश्यक है। शायद इसीलिए सुलेमान नें अपने नीतिवचनों में अनेक ऐसी क्रियाओं का उपयोग किया है जो सतत प्रयास को दर्शाती हैं। उसने बुद्धि प्राप्त करने के लिए नीतिवचन 2 में "ध्यान लगाकर सुनो", "मन लगाकर सोचो", "पुकारो", "खोजो", "ढ़ूंढो" आदि क्रियाओं का उपयोग किया है।

   बुद्धि को खोजने और पाने के लिए प्रयास की आवश्यकता होती है, और परमेश्वर का वचन बाइबल ही हमें बताती है कि खरी बुद्धि कहाँ मिलती है: "क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं" (नीतिवचन 2:6)। साथ ही बाइबल परमेश्वर के विषय में यह भी सिखाती है कि "वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है" (नीतिवचन 2:7)।

   अपने सारे मन और प्रयास से परमेश्वर के आज्ञाकारी बनें; आपके जीवन के लिए वह ही खरी बुद्धि का एकमात्र स्त्रोत है। - ऐनी सेटास


आप बहुत ज्ञान तो कहीं से भी प्राप्त कर सकते हैं, परन्तु खरी बुद्धि परमेश्वर ही से मिलती है।

क्योंकि बुद्धि की प्राप्ति चान्दी की प्राप्ति से बड़ी, और उसका लाभ चोखे सोने के लाभ से भी उत्तम है। - नीतिवचन 3:14

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:1-9
Proverbs 2:1 हे मेरे पुत्र, यदि तू मेरे वचन ग्रहण करे, और मेरी आज्ञाओं को अपने हृदय में रख छोड़े, 
Proverbs 2:2 और बुद्धि की बात ध्यान से सुने, और समझ की बात मन लगा कर सोचे; 
Proverbs 2:3 और प्रवीणता और समझ के लिये अति यत्न से पुकारे, 
Proverbs 2:4 ओर उसको चान्दी की नाईं ढूंढ़े, और गुप्त धन के समान उसी खोज में लगा रहे; 
Proverbs 2:5 तो तू यहोवा के भय को समझेगा, और परमेश्वर का ज्ञान तुझे प्राप्त होगा। 
Proverbs 2:6 क्योंकि बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। 
Proverbs 2:7 वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है। 
Proverbs 2:8 वह न्याय के पथों की देख भाल करता, और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है। 
Proverbs 2:9 तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा;

एक साल में बाइबल: उत्पत्ति 6-9