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शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

प्रशिक्षण



      मेरे घर के पास ही एक फिटनेस केंद्र था जहाँ वर्षों से मैं जाकर व्यायाम किया करता था। परन्तु पिछले माह वह बन्द हो गया, और मुझे एक नए जिम में जाकर दाखला लेना पड़ा। व्यायाम का मेरा पहला स्थान स्नेहिल, मितव्यता वाला स्थान था जहाँ वे लोग आया करते थे जो व्यायाम करते हुए एक दूसरे के साथ मित्रता के संबंध भी बनाना चाहते थे। हमारे मध्य शायद ही कभी कोई तनाव हुआ होगा। परन्तु अब जिस नए स्थान पर मैं व्यायाम के लिए जाता हूँ वह शरीर के डील-डौल बनाने के प्रति गंभीर लोगों का स्थान है, जो बस यही करने में लगे होते हैं। मैं उन्हें शरीर को बनाने सुधारने के लिए परिश्रम करते हुई देखता हूँ। उनके शरीर तो बलवंत लगते हैं, परन्तु मैं सोचता हूँ कि क्या उनके हृदय भी अनुग्रह के द्वारा बलवंत होते जा रहे हैं?

      हृदय एक प्रकार की मांस-पेशी है; ऐसी मांस-पेशी जो अन्य मांस-पेशियों को सक्रीय रखती है। अपनी अन्य मांस-पेशियों को बढ़ाते और बलवंत करते रहना अच्छा है, परन्तु मुख्य बात है वह प्रशिक्षण लेना जो हृदय को बलवंत रखने के लिए सही है।

      यही बात हमारे आत्मिक हृदय पर भी लागू होती है। हम इस हृदय को परमेश्वर के वचन बाइबल के संदेश को ग्रहण करके तथा उसकी बातों के पालन के द्वारा स्वस्थ एवँ हृष्ट-पुष्ट रखते हैं। अपने आत्मिक हृदय को स्वस्थ और बलवंत रखना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसका प्रशिक्षण हमें अन्य सभी बातों से पहले और बढ़ाकर लेना चाहिए।

      प्रेरित पौलुस हमारे साथ सहमत होगा, क्योंकि उसने कहा था: “पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर। क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है” (1 तिमुथियुस 4:7-8)।


परमेश्वर का प्रशिक्षण हमें विश्वास में विकसित करने के लिए होता है।

नाना प्रकार के और विचित्र उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ। - इब्रानियों 13:9

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:6-11
1 Timothy 4:6 यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा: और विश्वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जा तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
1 Timothy 4:7 पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर।
1 Timothy 4:8 क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है।
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है।
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है।
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-33
  • प्रेरितों 14



शनिवार, 4 जनवरी 2014

अभ्यास


   नव वर्ष का आरंभ अकसर वह समय होता है जब हम अपने लिए कुछ निर्णय लेते हैं कि हम अपनी देखभाल भली भांति करेंगे, व्यायाम करेंगे, सही भोजन सही मात्रा में खाएंगे और बीते समय में जमा किए हुए वज़न को कम करेंगे। इसलिए मैं भी प्रयास करता हूँ की यथासंभव स्वस्थ बना रह सकूँ - मैं सही भोजन खाने का प्रयास करता हूँ - कभी कभी कुछ इधर उधर का हो जाता है, लेकिन प्रयास सही भोजन का ही रहता है; मैं व्यायाम करता हूँ, सैर पर जाता हूँ। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा है: "क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है" (1 तिमुथियुस 4:8); और मैं जानता हूँ कि मेरा शरीर इस संसार में बहुत लम्बे समय तक कायम नहीं रहेगा, उसकी सामर्थ और क्षमता क्षीण होती जा रही है। इसलिए मेरे लिए यह बेहतर है कि मैं अपने शरीर की अपेक्षा उस भक्ति पर अधिक ध्यान दूँ जो परमेश्वर के वचन बाइबल के निर्देश के अनुसार है और जो मेरे ना केवल इस संसार के वरन इस संसार के बाद के जीवन के लिए भी लाभदायक होगी। यह तो निश्चित है कि इस संसार से हम कुछ तो लेकर जाएंगे, यहाँ की धन दौलत शोहरत इत्यादि ना सही परन्तु यहाँ इस संसार में रहते हुए कमाए गए और उस आते जीवन में मिलने वाले हमारे प्रतिफल तो हमारे साथ ही जाएंगे।

   हो सकता है कि यह ईश्वरीय भक्ति नीरस, भयावह और हमें अपनी पहुँच से बाहर प्रतीत हो, लेकिन उस ईश्वरीय भक्ति का सार केवल आत्म-त्याग वाला प्रेम है - अपने आप से अधिक दूसरों की चिन्ता करना। इस प्रकार का प्रेम मिलना दुर्लभ है; केवल प्रभु यीशु का प्रेम ही ऐसा प्रेम है, और प्रभु यीशु अपने प्रत्येक अनुयायी को यही प्रेम कर सकने की सामर्थ अपने पवित्र आत्मा की शक्ति से प्रदान करता है। हम मसीही विश्वासियों को प्रभु यीशु पर विश्वास रखते हुए उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा इस प्रेम को प्रगट और प्रदर्शित करते रहना है। जितना हम प्रभु यीशु के चरणों पर बैठकर उसकी बात सुनेंगे, उससे वार्तालाप करेंगे, अपने मनों की बातें उसके साथ बाँटेंगे, उतना अधिक हम उसकी समानता में ढलते जाएंगे और उसके इस निस्वार्थ प्रेम को अपने जीवनों से प्रगट करने वाले बनते जाएंगे।

   मुझे लगता है कि जीवन, प्रेम में बढ़ते जाने की एक यात्रा है और मैं जानता तथा मानता हूँ कि इसके लिए प्रभु यीशु के प्रेम के समान और कोई प्रेम नहीं है। शारीरिक व्यायाम और अभ्यास से निःसन्देह कुछ लाभ अवश्य होगा, लेकिन इससे भी बढ़कर कुछ और है, एक और अभ्यास है - प्रभु यीशु का प्रेम, उसमें बने रहने, दूसरों को उसके बारे में बताते रहने और उस प्रेम में बढ़ते जाने का अभ्यास। इस नव वर्ष के अपनी उन्नति के निर्णयों में इस अभ्यास को भी सम्मिलित कर लीजिए। - डेविड रोपर


ईश्वरीय भक्ति का प्रगट रूप ही प्रेम है।

इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:6-11
1 Timothy 4:6 यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा: और विश्वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जा तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा। 
1 Timothy 4:7 पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर। 
1 Timothy 4:8 क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है। 
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है। 
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है। 
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 10-11


मंगलवार, 25 जनवरी 2011

मधु से मीठा

मोनटाना विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने इस धारणा को चुनौती दी कि व्यायाम से पहले शक्कर की अधिक मात्रा वाला नाशता लेने से शरीर को शीघ्र उर्जा प्राप्त होती है। उन्होंने लम्बी दूरी की दौड़ में भाग लेने वाले धावकों का व्यायाम के लिये उपयोग होने वाली स्थावर साईकिलों पर परीक्षण किया। उन्होंने पाया कि जिन धावकों ने परीक्षण से पहले शक्कर रहित पेय पिये थे वे, उनके मुकाबले जिन्होंने शक्कर युक्त पेय लिये थे, २५ प्रतिशत अधिक देर तक साईकिल चला सके। उनके परीक्षणों का निष्कर्ष था कि खिलाड़ियों के लिये बेहतर होगा यदि वे व्यायाम से पहले किसी शक्कर युक्त नाशते का उपयोग न करें।

राजा सुलेमान ने भी शहद के अत्याधिक सेवन के उदाहरण को लिया, एक और गंभीर समस्या की ओर ध्यान खींचने के लिये - आत्मप्रशंसा के मधुर स्वाद में रत हो जाना। नीतिवचन के २५वें अध्याय में इस बुद्धिमान राजा ने आत्मप्रशंसा और घमंड के लिये दो चेतावनियां दीं (पद १४, २७)। लोगों में अपनी महिमा के प्रयास में लगे रहना निकट भविष्य के संदर्भ में तो अच्छा लग सकता है, लेकिन दीर्घ कालीन संदर्भ में यह हानिकारक ही होता है।

आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को निरंतर लेते रहने से अधिक किसी अन्य में हमें अन्दर से कमज़ोर करने की क्षमता नहीं। कितना भला हो यदि हम मधु से मीठे इस आत्मप्रशंसा और घमंड के भोजन को तज कर परमेश्वर के प्रति विश्वास और अनुशासन में बने रहें। ऐसा करने से ही हम जीवन की चुनौतियों का सामना करने की सच्ची भीतरी सामर्थ पा सकते हैं। - मार्ट डी हॉन


जब घमंड जीवन से बाहर निकलता है, तब ही परमेश्वर पर विश्वास अन्दर आता है।

जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं। - नीतिवचन २५:२७


बाइबल पाठ: नीतिवचन २५:१४-२८

जैसे बादल और पवन बिना वृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।
क्या तू ने मधु पाया? तो जितना तेरे लिये ठीक हो उतना ही खाना, ऐसा न हो कि अधिक खाकर उसे उगल दे।
अपने पड़ोसी के घर में बारम्बार जाने से अपने पांव को रोक ऐसा न हो कि वह खिन्न होकर घृणा करने लगे।
जो किसी के विरूद्ध झूठी साक्षी देता है, वह मानो हथौड़ा और तलवार और पैना तीर है।
विपत्ति के समय विश्वासघाती का भरोसा टूटे हुए दांत वा उखड़े पांव के समान है।
जैसा जाड़े के दिनों में किसी का वस्त्र उतारना वा सज्जी पर सिरका डालना होता है, वैसा ही उदास मन वाले के साम्हने गीत गाना होता है।
यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसको रोटी खिलाना, और यदि वह प्यासा हो तो उसे पानी पिलाना;
क्योंकि इस रीति तू उसके सिर पर अंगारे डालेगा, और यहोवा तुझे इसका फल देगा।
जैसे उत्तरीय वायु वर्षा को लाती है, वैसे ही चुगली करने से मुख पर क्रोध छा जाता है।
लम्बे चौड़े घर में झगड़ालू पत्नी के संग रहने से छत के कोने पर रहना उत्तम है।
जैसा थके मान्दे के प्राणों के लिये ठण्डा पानी होता है, वैसा ही दूर देश से आया हुआ शुभ समाचार भी होता है।
जो धर्मी दुष्ट के कहने में आता है, वह गंदले सोते और बिगड़े हुए कुण्ड के समान है।
जैसे बहुत मधु खाना अच्छा नहीं, वैसे ही स्वयं की महिमा ढूंढना भी अच्छा नहीं।
जिसकी आत्मा वश में नहीं वह ऐसे नगर के समान है जिसकी शहरपनाह नाका करके तोड़ दी गई हो।

एक साल में बाइबल:
  • निर्गमन १२-१३
  • मत्ती १६

गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

सही उद्देश्य

वह खिलाड़ी अपने अभ्यास और व्यायाम को काफी समय से छोड़ चुका था। अब उसने फिर से अभ्यास आरंभ करने की ठानी, इसलिये उसने अपने लिये व्यायाम का क्रम निर्धारित किया। पहले दिन उसने कई डंड बैठकें और हलकी दौड़ लगाई। अगले दिन, कुछ और अधिक डंड बैठकें, कुछ और लम्बी दौड़। तीसरे दिन फिर कुछ अधिक व्यायाम और कुछ और लम्बी दौड़। चौथे दिन जब हमारा यह खिलाड़ी सुबह उठा तो उसका गला बैठा हुआ था और तबियत खराब थी।

अब उसने अपनी स्थिति पर विचार किया और इस निष्कर्श पर पहुंचा कि यदि व्यायाम द्वारा इतना हांफने और तेज़ सांस लेने का यही नतीजा निकला तो वह व्यायाम नहीं करेगा, वह जैसा है वैसा ही भला!

अब एक दूसरा दृश्य देखते हैं, खिलाड़ी की जगह मसीही विश्वासी को रख देते हैं। इस विश्वासी को एहसास होता है कि उसने बहुत समय से परमेश्वर के साथ अपने संबंध को नज़रंदाज़ किया हुआ है, और इसे ठीक करने के लिये वह अपने आत्मिक व्यायाम - बाइबल पढ़ने और प्रार्थना करने का नया क्रम आरंभ करता है। यह आरंभ करने के कुछ दिनों पश्चात ही उसके जीवन में कुछ समस्याएं आ जातीं हैं। अब उसे किस निष्कर्श पर पहुंचना चाहिये? क्या उस खिलाड़ी के समान उसे सोच लेना चाहिये कि उसकी आत्मिक प्रगति का व्यायाम एक व्यर्थ प्रयास है जिससे उसे कुछ लाभ नहीं हुआ? कदापि नहीं!

हमें यह बात स्पष्ट रूप से समझ लेनी चाहिये कि हमारा बाइबल पढ़ना, प्रार्थना करना, परमेश्वर के लोगों की संगति करना आदि का उद्देश्य यह नहीं है कि हमें कष्ट और परेशानी से रहित जीवन मिल जाए। हम यह इसलिये करते हैं ताकि हम उस सिद्ध परमेश्वर के और निकट आ सकें, उसे और भली भांति जान सकें और उसकी इच्छाओं को पूरा कर सकें। प्रभु यीशु ने कभी अपने अनुयायीयों को यह आश्वासन नहीं दिया कि उन्हें संसार में कष्ट रहित जीवन और संसार के सब सुख मिलेंगे। प्रभु ने कहा "ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा यह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं। और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्‍होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं। परन्‍तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था:" (यूहन्ना १६:१-४) "मैं ने तेरा वचन उन्‍हें पहुंचा दिया है, और संसार ने उन से बैर किया, क्‍योंकि जैसा मैं संसार का नहीं, वैसे ही वे भी संसार के नहीं।" (यूहन्ना १७:१४) पौलुस ने लिखा "पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे" (२ तिमुथियुस ३:१२)।

मसीही विश्वासी के लिये परमेश्वर भक्ति का उद्देश्य सांसारिक उप्लब्धियां नहीं हैं "यदि हम केवल इसी जीवन में मसीह से आशा रखते हैं तो हम सब मनुष्यों से अधिक अभागे हैं" (१ कुरिन्थियों १५:१९)। परमेश्वर इस संसार में भी हमें बहुत कुछ दे सकता है और देता है, परन्तु हमारी आशा और प्रतिफल उस स्वर्ग के अनन्त जीवन के हैं जहां अन्ततः हमने जाना है। इसलिये "तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।" (इब्रानियों १०:२२, २३) - डेव ब्रैनन


परमेश्वर के वचन और प्रार्थना में विश्वासी जीवन की जड़ें धंसाने से ही जीवन में स्थिरता और शांति आती है।

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं। - इब्रानियों १०:२२


बाइबल पाठ: इब्रानियों १०:२२-३९

तो आओ, हम सच्‍चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक का दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव लेकर, और देह को शुद्ध जल से धुलवाकर परमेश्वर के समीप जाएं।
और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्‍योंकि जिस ने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्‍चा है।
और प्रेम, और भले कामों में उकसाने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें।
और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें, और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।
क्‍योंकि सच्‍चाई की पहिचान प्राप्‍त करने के बाद यदि हम जान बूझकर पाप करते रहें, तो पापों के लिये फिर कोई बलिदान बाकी नहीं।
हां, दण्‍ड का एक भयानक बाट जोहना और आग का ज्‍वलन बाकी है जो विरोधियों को भस्म कर देगा।
जब कि मूसा की व्यवस्था का न मानने वाला दो या तीन जनों की गवाही पर, बिना दया के मार डाला जाता है।
तो सोच लो कि वह कितने और भी भारी दण्‍ड के योग्य ठहरेगा, जिस ने परमेश्वर के पुत्र को पांवों से रौंदा, और वाचा के लोहू को जिस के द्वारा वह पवित्र ठहराया गया था, अपवित्र जाना है, और अनुग्रह की आत्मा का अपमान किया।
क्‍योंकि हम उसे जानते हैं, जिस ने कहा, कि पलटा लेना मेरा काम है, मैं ही बदला दूंगा: और फिर यह, कि प्रभु अपने लोगों का न्याय करेगा।
जीवते परमेश्वर के हाथों में पड़ना भयानक बात है।
परन्‍तु उन पहिले दिनों को स्मरण करो, जिन में तुम ज्योति पाकर दुखों के बड़े झमेले में स्थिर रहे।
कुछ तो यों, कि तुम निन्‍दा, और क्‍लेश सहते हुए तमाशा बने, और कुछ यों, कि तुम उन के साझी हुए जिन की र्दुदशा की जाती थी।
क्‍योंकि तुम कैदियों के दुख में भी दुखी हुए, और अपनी संपत्ति भी आनन्‍द से लुटने दी; यह जानकर, कि तुम्हारे पास एक और भी उत्तम और सर्वदा ठहरने वाली संपत्ति है।
सो अपना हियाव न छोड़ो क्‍योंकि उसका प्रतिफल बड़ा है।
क्‍योंकि तुम्हें धीरज धरना अवश्य है, ताकि परमेश्वर की इच्‍छा को पूरी करके तुम प्रतिज्ञा का फल पाओ।
क्‍योंकि अब बहुत ही थोड़ा समय रह गया है जब कि आने वाला आएगा, और देर न करेगा।
और मेरा धर्मी जन विश्वास से जीवित रहेगा, और यदि वह पीछे हट जाए तो मेरा मन उस से प्रसन्न न होगा।
पर हम हटने वाले नहीं, कि नाश हो जाएं पर विश्वास करने वाले हैं, कि प्राणों को बचाएं।

एक साल में बाइबल:
  • ज़क्कर्याह १३-१४
  • प्रकाशितवाक्य २१