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शुक्रवार, 27 जून 2014

परवाह


   मेरी सास की मृत्यु के कई महीने बाद तक भी उनके अन्तिम दिनों में बड़े प्रेम और ध्यान से उनकी देखभाल करने वाले हस्पताल के लोगों से हमें कार्ड और पत्र आते रहे। उन कार्ड और पत्रों के द्वारा वे हमें उस दुख के समय में सांत्वना और प्रोत्साहन दे रहे थे, उस विछोह का सामना करने के मार्ग सुझा रहे थे। एक पत्र में लिखा था, "आपकी माँ के जन्मदिन की तिथि जैसे निकट आ रही है, हम भी उन्हें स्मरण कर रहे हैं और हमारी प्रार्थनाएं तथा विचार आपके एवें आपके परिवार के साथ हैं।" सहायता करने वाले ये अद्भुत लोग जानते और समझते हैं कि बिछुड़ने का दुख एक लंबी प्रक्रिया है जिसमें लगातार सहायता और सहारे की आवश्यकता होती है, इसलिए वो जो भी करते हैं उसमें गहरी सहानुभूति सम्मिलित होती है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने मसीही विश्वासियों को लिखा, "तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो" (गलतियों 6:2)। पाप स्वभाव के कारण शरीर के कार्य तो विनाशकारी, स्वार्थी और हानिकारक होते हैं (गलतियों 5:19-21) लेकिन प्रभु यीशु में उद्धार पाए हुए लोगों द्वारा परमेश्वर के आत्मा के अनुसार किए गए कार्य हैं: "पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं" (गलतियों 5:22-23)। मसीह यीशु में हमें मिलने वाली महान स्वतंत्रता एक दूसरे की परवाह और प्रेम के साथ एक दूसरे की सेवा करने की प्रेर्णा देती है।

   किसी दुख में पड़े हुए जन के लिए प्रेम और प्रोत्साहन का व्यवहार तपती झुलसाती गरमी में राहत देने वाली तथा तरोताज़ा कर देने वाली वर्षा के समान होता है। जब हम अर्थपूर्ण रीति से दूसरों की परवाह करते हैं, उनसे प्रेम का व्यवहार करते हैं तो यह उनमें नए जीवन की ताज़गी को प्रवाहित करता है, मुर्झाए हुओं को फिर से हरा-भरा करता है और हम मसीही विश्वासियों के लिए समस्त संसार के उद्धारकर्ता मसीह यीशु द्वारा दिए गए निर्देशों को पूरा करता है, मसीही चरित्र को संसार के सामने प्रकट करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


करुणा मसीह-समान प्रेम को कार्यकारी रूप में दिखाने का गुण है।

और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे। - 1 यूहन्ना 4:21

बाइबल पाठ: गलतियों 5:14-2
Galatians 5:14 क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Galatians 5:15 पर यदि तुम एक दूसरे को दांत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो, कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे। 
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ। 
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे। 
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन। 
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म। 
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे। 
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, 
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। 
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी। 
Galatians 5:26 हम घमण्‍डी हो कर न एक दूसरे को छेड़ें, और न एक दूसरे से डाह करें। 
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102


गुरुवार, 26 जून 2014

प्रार्थना


   एक इतवार प्रातः की बात है, सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक डी. एल. मूडी कुछ बच्चों को सन्डे स्कूल ले जाने के लिए एक घर में गए। घर के अन्दर तीन व्यक्तियों ने उन्हें घेर कर एक कोने में जा खड़ा किया और उन्हें बुरी तरह से धमकाने लगे। मूडी ने उन तीनों से आग्रह किया, "क्या आप मुझे प्रार्थना करने का समय भी नहीं देंगे?" यह सुनकर उन्होंने मूडी को प्रार्थना करने का अवसर दे दिया, और मूडी उन तीनों के हित के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करने लगे। उनके हित के लिए मूडी की प्रार्थना इतनी खराई और ईमानदारी से थी कि वे तीनों उसे सुनकर मूडी को छोड़कर वहाँ से चले गए।

   यदि मैं वहाँ मूडी के स्थान पर होता तो ना जाने क्या करती; शायद अपनी सहायता के लिए चिल्लाती, या बचकर भागने के लिए कोई पिछला दरवाज़ा अथवा खिड़की ढूँढ़ने लगती। मुझे नहीं लगता कि मैं हमारे प्रभु यीशु द्वारा अपने अनुयायियों को दिए गए निर्देश, "जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो" (लूका 6:28) का पालन करती।

   ऐसे लोगों के हित के लिए प्रार्थना करना जो हम मसीही विश्वासियों के साथ दुर्व्यवहार करते हैं, उन्हें अपमानित करते हैं, एक तरीका है उन लोगों के साथ भलाई करने का, जैसा प्रभु यीशु ने लूका 6:27 में कहा है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को समझाया कि उन लोगों के साथ भलाई करने से जो हमारे साथ भलाई करते हैं मसीही विश्वासियों को कोई श्रेय नहीं मिलता, क्योंकि पापी भी तो ऐसा ही करते हैं (लूका 6:33)। लेकिन इसके विपरीत उनके लिए प्रार्थना करने, उनकी भलाई की कामना करना (रोमियों 12:14) हमें संसार से भिन्न बनाता है और परमेश्वर के व्यवहार के अनुकूल करता है क्योंकि परमेश्वर भी तो पापियों पर दया करता है, उनके लिए भलाई करता है (लूका 6:35)।

   आज यदि आप किसी विरोधी के द्वारा घेर कर एक कोने में फंसाया हुआ अनुभव करें, तो आवश्यकतानुसार अपनी सुरक्षा के मार्ग के बारे तो सोचें लेकिन साथ ही प्रभु यीशु की शिक्षानुसार उसके लिए प्रार्थना अवश्य करें (लूका 23:34) क्योंकि प्रार्थना ही आपका सर्वोत्तम बचाव है। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट्ज़


भलाई के बदले भलाई करना मानवीय है, बुराई के बदले भलाई करना ईश्वरीय है।

अपने सताने वालों को आशीष दो; आशीष दो श्राप न दो। - रोमियों 12:14

बाइबल पाठ: लूका 6:27-36
Luke 6:27 परन्तु मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो। 
Luke 6:28 जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो। 
Luke 6:29 जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उसको कुरता लेने से भी न रोक। 
Luke 6:30 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तेरी वस्तु छीन ले, उस से न मांग। 
Luke 6:31 और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो। 
Luke 6:32 यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखते हैं। 
Luke 6:33 और यदि तुम अपने भलाई करने वालों ही के साथ भलाई करते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं। 
Luke 6:34 और यदि तुम उसे उधार दो, जिन से फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएं। 
Luke 6:35 वरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है। 
Luke 6:36 जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 97-99


बुधवार, 25 जून 2014

उपयोग


   जेम्स को दिल की बीमारी थी और उसकी पत्नि बेक्की उसकी देखभाल किया करती थी। लेकिन जब यह देखभाल करना बेक्की के लिए कठिन होने लगा तब उन्होंने निर्णय लिया कि वे किसी ऐसे सेवा स्थान पर भर्ती हो जाएंगे जहाँ देखभाल में उन्हें सहायता मिल सके। बेक्की ने इसके लिए अनेक सेवा स्थान देखे। हर स्थान पर जाकर उसका पहला प्रश्न होता था, "क्या वे लोग भोजन को पका कर तरल या भर्ते के समान बनाते हैं?" बेक्की को सेवा स्थान में जेम्स के लिए सही भोजन मिल पाने की चिन्ता थी क्योंकि जेम्स ठोस भोजन निगल नहीं पाता था। आम तौर से बेक्की को अपने प्रश्न के उत्तर में "नहीं" ही सुनने को मिलता था, लेकिन फिर भी वह जेम्स की देखभाल के लिए सही स्थान खोजने के अपने प्रयास में लगी रही। अन्ततः एक मसीही सेवा स्थान पर उसे उत्तर में "हाँ" सुनने को मिला।

   यद्यपि जेम्स और बेक्की मसीह यीशु में विश्वास नहीं रखते थे और इस विषय को लेकर अपने एक पड़ौसी से उनकी कई बार बहस भी हो चुकी थी, फिर भी जेम्स की देखभाल के लिए उन्होंने उस मसीही सेवा स्थान में आकर रहना स्वीकार किया क्योंकि वहाँ उन्हें जेम्स की आवश्यकता के अनुसार भोजन मिल रहा था। वहाँ रहते हुए उन्होंने वहाँ होने वाली आराधना में जाना और परमेश्वर के वचन को सुनना आरंभ किया; उन्होंने वहाँ के लोगों द्वारा हो रही उनकी अच्छी देखभाल को भी देखा, और एक दिन जेम्स ने अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित कर दिया। जेम्स का मानना है कि प्रभु अपने वचन के अनुसार उसका पीछा कर रहा था (यूहन्ना 6:44), और परमेश्वर ने भोजन का उपयोग उसे उस मसीही सेवा स्थान पर लाने के लिए किया, जहाँ उसे प्रभु के लोगों की सेवा पाने और परमेश्वर का वचन सुनने का अवसर मिला और वह मसीह यीशु में सारे संसार के सभी लोगों के लिए उपलब्ध पापों की क्षमा और उद्धार का सुसमाचार सुनने पाया, समझने पाया और उसपर विश्वास करने पाया।

   मन परिवर्तन परमेश्वर का कार्य है; अपने प्रेम में होकर परमेश्वर लोगों को अपने निकट खींचता है। इसके लिए वह परिस्थितियों का, अपने वचन बाइबल का, और यहाँ तक कि तरल या भर्तेनुमा किए गए भोजन का भी उपयोग करता है। मसीही विश्वासी होने के नाते परमेश्वर के लिए अपनी गवाही को लेकर उत्साहित रहें; वह आपको, आपके व्यवहार को और आपके वचनों को उन लोगों तक मसीह यीशु में उद्धार के सुसमाचार को पहुँचाने का उपयोग करेगा जिन्हें मसीह यीशु के सुसमाचार की आवश्यकता है। - ऐनी सेटास


प्रेम वह चुंबक है जो मसीही विश्वासियों को एक दूसरे के निकट और अविश्वासियों को मसीह यीशु के निकट ले लाता है।

और मैं यदि पृथ्वी पर से ऊंचे पर चढ़ाया जाऊंगा, तो सब को अपने पास खीचूंगा। - यूहन्ना 12:32

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:44-51
John 6:42 और उन्होंने कहा; क्या यह यूसुफ का पुत्र यीशु नहीं, जिस के माता पिता को हम जानते हैं? तो वह क्योंकर कहता है कि मैं स्वर्ग से उतरा हूं। 
John 6:43 यीशु ने उन को उत्तर दिया, कि आपस में मत कुड़कुड़ाओ। 
John 6:44 कोई मेरे पास नहीं आ सकता, जब तक पिता, जिसने मुझे भेजा है, उसे खींच न ले; और मैं उसको अंतिम दिन फिर जिला उठाऊंगा। 
John 6:45 भविष्यद्वक्ताओं के लेखों में यह लिखा है, कि वे सब परमेश्वर की ओर से सिखाए हुए होंगे। जिस किसी ने पिता से सुना और सीखा है, वह मेरे पास आता है। 
John 6:46 यह नहीं, कि किसी ने पिता को देखा परन्तु जो परमेश्वर की ओर से है, केवल उसी ने पिता को देखा है। 
John 6:47 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसी का है। 
John 6:48 जीवन की रोटी मैं हूं। 
John 6:49 तुम्हारे बाप दादों ने जंगल में मन्ना खाया और मर गए। 
John 6:50 यह वह रोटी है जो स्वर्ग से उतरती है ताकि मनुष्य उस में से खाए और न मरे। 
John 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 94-96


मंगलवार, 24 जून 2014

दूरी और समय


   बहुत वर्षों से मैं नेपाल में काम कर रहे एक पास्टर के साथ पत्राचार द्वारा संपर्क में हूँ। वह पास्टर अपने चर्च के सदस्यों के साथ अकसर हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिलने वाली पापों से क्षमा एवं उद्धार का सुसमाचार प्रचार करने के लिए यात्रा करता रहता है। हाल ही में मुझे उससे एक पत्र प्राप्त हुआ, जिसमें उसने आने वाले सप्ताह में अपनी यात्रा का कार्यक्रम लिखा था और उसके लिए प्रार्थना करने को कहा था।

   उसके उस व्यस्त कार्यक्रम के अनुसार उसने उस सप्ताह में अपनी मोटरसाईकिल द्वारा 160 किलोमीटर की यात्रा का लक्ष्य रखा था जिसमें उसे अनेक स्थानों पर सुसमाचार प्रचार तथा पुस्तिकाओं का वितरण करना था। मुझे अपने मित्र द्वारा उस कठिन पहाड़ी क्षेत्र में इतनी लंबी यात्रा करने पर अचरज हुआ और मैंने उसे पत्र लिख कर उसका कुशल-मंगल तथा यात्रा का समाचार पूछा। उसका उत्तर आया, "पहाड़ों में अपने चर्च के सदस्यों के साथ पैदल यात्रा करना और उद्धार के सुसमाचार का प्रचार करना हमारे लिए एक बड़ा अद्भुत समय रहा है। क्योंकि सभी चर्च सदस्यों के पास मोटरसाईकलें नहीं थीं इसलिए हम सब ने पैदल ही यह यात्रा करने का निर्णय लिया। यह हम सबके लिए बहुत आशीषमय रहा है और अभी अनेक ऐसे स्थान हैं जहाँ जाना बाकी है।" 

   उसके इस उत्तर से मुझे दो बातें स्मरण हो आईं - पहली तो, "और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा" (मत्ती 9:35); और दूसरी अपनी दशा। मुझे कितनी हिचकिचाहट होती है यदि बर्फ के समय में मुझे अकेले रह रहे किसी विधुर से मिलने जाना होता है; या सड़क के पार रह रहे किसी पड़ौसी की सहायता के लिए बाहर निकलना पड़ता है; या जब मैं किसी कार्य में व्यस्त हूँ तब कोई मित्र आकर मेरा द्वार खटखटाए तो जाकर उसके लिए द्वार खोलना पड़ता है - अर्थात उस मसीही प्रेम के अन्तर्गत जब मुझे किसी समय भी कोई दूरी तय करनी होती है।

   मेरे मित्र उस नेपाली पास्टर के लिए प्रभु यीशु का उदाहरण सर्वोपरी है। वह अपने प्रभु के समान ही परमेश्वर के राज्य के सुसमाचार के प्रचार के लिए किसी भी समय कोई भी दूरी तय करने के लिए तैयार रहता है, और प्रभु हम मसीही विश्वासियों से यही चाहता है (मत्ती 28:18-20)। - डेविड रोपर


परमेश्वर ने हमें जो दिया है, वह चाहता है कि हम उसे दूसरों के साथ बाँटें भी।

परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे। - प्रेरितों 1:8

बाइबल पाठ: मत्ती 9:35-38, 28:18-20
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 91-93


सोमवार, 23 जून 2014

धोखा


   चीन के एक सेनापति सन त्ज़ू द्वारा छठवीं शताब्दी में लिखित पुस्तक The Art of War (युद्ध की कला) सदियों से सैनिक विचारधारा के लिए मार्गदर्शक रही है। इस पुस्तक को केवल सेना के नायकों ने ही नहीं वरन जीवन के विभिन्न क्षेत्रों, जैसे नेतृत्व, प्रबन्धन, व्यवसाय, राजनीति, खेलकूद आदि में कार्यरत स्त्री-पुरषों ने नीतिसंगत कौशल से कार्य करने के लिए उपयोगी पाया है। उस चीनी सेनापति सन त्ज़ू ने जो सैनिक युद्ध के बारे में लिखा वह हम मसीही विश्वासियों के लिए भी हमारे आत्मिक दुश्मन शैतान की युक्तियों को समझ पाने में उपयोगी है। सन त्ज़ू ने लिखा: "समस्त युद्ध कौशल धोखे पर आधारित है। इसलिए जब हम आक्रमण करने में सामर्थी हों तो प्रतीत होना चाहिए कि सामर्थी नहीं हैं; जब अपने बल का प्रयोग करने पर हों तो लगना चाहिए कि शिथिल पड़े हैं; जब निकट आ रहे हों तब शत्रु को लगना चाहिए कि कहीं दूर जा रहे हैं; जब दूर हों तो उसे प्रतीत होना चाहिए कि निकट ही हैं।"

   ठीक इसी प्रकार जिस आत्मिक युद्ध में शैतान हमारे विरुद्ध लगातार डटा रहता है, वह भी धोखे पर ही आधारित है। अदन की वाटिका में हमारे आदि माता-पिता आदम और हव्वा से जो पहला पाप शैतान ने करवाया वह भी धोखे पर ही आधारित था। उस पहले पाप को उदाहरण बना कर प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखा, "परन्तु मैं डरता हूं कि जैसे सांप ने अपनी चतुराई से हव्‍वा को बहकाया, वैसे ही तुम्हारे मन उस सीधाई और पवित्रता से जो मसीह के साथ होनी चाहिए कहीं भ्रष्‍ट न किए जाएं" (2 कुरिन्थियों 11:3)।

   इसी कारण हमारे प्रभु यीशु ने हमें सचेत किया है कि शैतान ही झूठ का पिता है (यूहन्ना 8:44) और सदा इस प्रयास में रहता है कि हमें धोखे से पाप में फंसा ले, गिरा दे। इस प्रकार शैतान से धोखा खाने और उसकी चालबाज़ियों से बचने का क्या कोई उपाय है? उपाय है, परमेश्वर के वचन बाइबल से अपने मन मस्तिष्क को भर लेना, जैसा भजनकार ने कहा है, "मैं ने तेरे वचन को अपने हृदय में रख छोड़ा है, कि तेरे विरुद्ध पाप न करूं" (भजन 119:11)। जब हम परमेश्वर के वचन को जानेंगे, तो सत्य को जानेंगे, शैतान की युक्तियों एवं कुटिलताओं को समझने पाएंगे और शैतान के धोखे में पड़ने से बच जाएंगे (2 कुरिन्थियों 2:11)। केवल परमेश्वर के वचन बाइबल की सच्चाईयाँ ही हमें हमारे आत्मिक शत्रु शैतान की चालों से बचाए रख सकती हैं। - बिल क्राउडर 


शैतान के झूठ से बचे रहने का सर्वोत्त्म सुरक्षा उपाय है परमेश्वर का वचन बाइबल।

कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं। - 2 कुरिन्थियों 2:11

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:31-32, 42-47
John 8:31 तब यीशु ने उन यहूदियों से जिन्हों ने उन की प्रतीति की थी, कहा, यदि तुम मेरे वचन में बने रहोगे, तो सचमुच मेरे चेले ठहरोगे। 
John 8:32 और सत्य को जानोगे, और सत्य तुम्हें स्‍वतंत्र करेगा। 

John 8:42 यीशु ने उन से कहा; यदि परमेश्वर तुम्हारा पिता होता, तो तुम मुझ से प्रेम रखते; क्योंकि मैं परमेश्वर में से निकल कर आया हूं; मैं आप से नहीं आया, परन्तु उसी ने मुझे भेजा। 
John 8:43 तुम मेरी बात क्यों नहीं समझते? इसलिये कि मेरा वचन सुन नहीं सकते। 
John 8:44 तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। 
John 8:45 परन्तु मैं जो सच बोलता हूं, इसीलिये तुम मेरी प्रतीति नहीं करते। 
John 8:46 तुम में से कौन मुझे पापी ठहराता है? और यदि मैं सच बोलता हूं, तो तुम मेरी प्रतीति क्यों नहीं करते? 
John 8:47 जो परमेश्वर से होता है, वह परमेश्वर की बातें सुनता है; और तुम इसलिये नहीं सुनते कि परमेश्वर की ओर से नहीं हो। 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 88-90


रविवार, 22 जून 2014

खामोशी


  अमेरिका के न्यू इंगलैंड प्रांत में जहाँ मैं रहता हूँ बेसबॉल का खेल इतना लोकप्रीय है कि किसी "धर्म" के अनुचरों के समान ही उसके अनुचर भी हैं। यहाँ के लोग अपनी स्थानीय टीम ’बॉस्टन रेड सॉक्स’ को इतना चाहते हैं कि यदि कानून प्रतिबंधित भी कर दिया जाता कि कोई अपने कार्य के समय में उनके बारे में चर्चा नहीं करेगा, तो भी ’बॉस्टन रेड सॉक्स’ के अनुचर अपनी टीम के बारे में चर्चा करने से बाज़ नहीं आते।

   इससे मेरे मन में हम मसीही विश्वासियों के लिए एक प्रश्न उत्पन्न हुआ: क्या कभी ऐसे भी समय होते हैं जब एक मसीही विश्वासी को परमेश्वर के बारे में नहीं बोलना चाहिए, खामोश रहना चाहिए? मेरे विचार से ऐसे समय अवश्य होते हैं। कई बार जब हमारे विश्वास को चुनौती देने वाले चर्चा के लिए गंभीर नहीं होते, वरन केवल विवाद का अवसर ढूँढ़ रहे होते हैं तब हमारी खामोशी ही उनके प्रश्नों का सर्वोत्तम उत्तर होती है। जब प्रभु यीशु को मृत्यु दण्ड के लिए पकड़वाया गया तो उसे एक बहुत प्रतिकूल वातावरण और व्यवहार का सामना करना पड़ा। इस प्रतिकूल व्यवहार में जब काइफा महायाजक (प्रधान पुरोहित) ने प्रभु से प्रश्न किए तो प्रभु ने खामोशी को ही अपना उत्तर बनाया (मत्ती 26:63) क्योंकि प्रभु जानता था कि कैफा की रुचि सत्य जानने की कदापि नहीं है (पद 59)।

   चाहे हम महीसी विश्वासी मनुष्य होने के कारण प्रभु यीशु के समान प्रत्येक के मन के विचार जान पाने की सामर्थ ना भी रखते हों, तो भी हमें हर बात में और हर समय हमारे अन्दर बसने वाले परमेश्वर के पवित्र आत्मा की अगुवाई के प्रति संवेदनशील रहना चाहिए जिससे "तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो, कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए" (कुलुस्सियों 4:6)। साथ ही हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि प्रश्न और चर्चा मसीह यीशु से भटक कर व्यर्थ की बातों की ओर जा रही है तो हमारा उस समय खामोश होकर शेष चर्चा को फिर किसी अन्य उचित समय और संदर्भ के लिए छोड़ देना अधिक अच्छा होगा।

   क्या अन्य कोई और भी अवसर हो सकते हैं जब हमारा खामोश रहना उचित हो सकता है? यदि हमारे विश्वास के बारे में चर्चा हमारा तथा हमारे सहकर्मियों का ध्यान हमारे कार्य से हटा सकता है तो कार्य के समय पर अपने कार्य पर ध्यान देना और चर्चा को किसी खाली समय पर करना अधिक उचित होगा। या फिर, यदि कोई व्यक्ति कई बार की चर्चा के बावजूद मन को कठोर किए हुए है तो बजाए उस पर दबाव डालते रहने के खामोश होकर कुछ समय के लिए उसे चर्चा की गई बातों पर विचार करने के लिए छोड़ देना चाहिए।

   स्मरण रखें कि हम परमेश्वर के अनुग्रह के गवाह केवल चर्चा से ही नहीं वरन अपने व्यवहार से भी हो सकते हैं (1 पतरस 3:1-2)। - रैण्डी किलगोर


सुसमाचार प्रचार का एक माध्यम खामोशी भी हो सकती है।

अन्यजातियों में तुम्हारा चालचलन भला हो; इसलिये कि जिन जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जान कर बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देख कर; उन्‍हीं के कारण कृपा दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें। - 1 पतरस 2:12

बाइबल पाठ: मत्ती 26:57-64; याकूब 1:19-26
Matthew 26:57 और यीशु के पकड़ने वाले उसको काइफा नाम महायाजक के पास ले गए, जहां शास्त्री और पुरिनए इकट्ठे हुए थे। 
Matthew 26:58 और पतरस दूर से उसके पीछे पीछे महायाजक के आंगन तक गया, और भीतर जा कर अन्‍त देखने को प्यादों के साथ बैठ गया। 
Matthew 26:59 महायाजक और सारी महासभा यीशु को मार डालने के लिये उसके विरोध में झूठी गवाही की खोज में थे। 
Matthew 26:60 परन्तु बहुत से झूठे गवाहों के आने पर भी न पाई। 
Matthew 26:61 अन्‍त में दो जनों ने आकर कहा, कि उसने कहा है; कि मैं परमेश्वर के मन्दिर को ढा सकता हूं और उसे तीन दिन में बना सकता हूं। 
Matthew 26:62 तब महायाजक ने खड़े हो कर उस से कहा, क्या तू कोई उत्तर नहीं देता? ये लोग तेरे विरोध में क्या गवाही देते हैं? परन्तु यीशु चुप रहा: महायाजक ने उस से कहा। 
Matthew 26:63 मैं तुझे जीवते परमेश्वर की शपथ देता हूं, कि यदि तू परमेश्वर का पुत्र मसीह है, तो हम से कह दे। 
Matthew 26:64 यीशु ने उस से कहा; तू ने आप ही कह दिया: वरन मैं तुम से यह भी कहता हूं, कि अब से तुम मनुष्य के पुत्र को सर्वशक्तिमान की दाहिनी ओर बैठे, और आकाश के बादलों पर आते देखोगे।

James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो। 
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है। 
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है। 
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं। 
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है। 
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था। 
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है। 
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है। 

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 85-87


शनिवार, 21 जून 2014

लुभावना एवं घातक


   ऑस्ट्रेलिया में करे गए एक अध्ययन में पाया गया कि यदि सिग्रेट के डिब्बे दिखने में साधारण से हों, लुभावने ना हों तो वे युवाओं को धुम्रपान के लिए कम आकर्षित करेंगे। इस निशकर्ष के कारण ऑस्ट्रेलियाई सरकार ने यह कानून पारित किया कि सिग्रेट के डिब्बों पर आकर्षक रंग, चिन्ह और धुम्रपान बढ़ावा देने वाले वाक्य नहीं वरन धुम्रपान से सेहत को होने वाले नुकसान संबंधी चेतावनी की बातें और धुम्रपान से खराब हुए फेफड़ों के चित्र दिखाने होंगे। अर्थात अब वहाँ धुम्रपान को लुभावना और सामाजिक रीति से उत्कृष्ठ व्यक्तित्व का चिन्ह नहीं किंतु घातक और निम्न कोटी का दिखाया जाएगा। लेकिन केवल सिग्रेट का डिब्बे ही एक ऐसा उत्पाद नहीं है जो बाहर से दिखने में लुभावने परन्तु अन्दर से प्रभाव में घातक होते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन नामक पुस्तक में बारंबार यह चेतावनी आई है कि हम अपने द्वारा किए गए सभी चुनावों के दूरगामी परिणामों के बारे में ध्यानपूर्वक विचार कर लें। इस पुस्तक के कई पदों में प्रयुक्त वाक्याँश "अन्त में" इस बात को ध्यान दिलाता है कि हम जिस बात या वस्तु की चाह कर रहे हैं आगे चलकर अन्ततः उसके परिणाम क्या होंगे - आनन्द अथवा दुख, आदर अथवा निरादर, जीवन अथवा मृत्यु। क्योंकि परमेश्वर हमें हर नुकसान से बचा कर रखना चाहता है इसलिए "...बुद्धि यहोवा ही देता है; ज्ञान और समझ की बातें उसी के मुंह से निकलती हैं। वह सीधे लोगों के लिये खरी बुद्धि रख छोड़ता है; जो खराई से चलते हैं, उनके लिये वह ढाल ठहरता है" (नीतिवचन 2:6-7)।

   संसार की लुभावनी बातों को लेकर किए गए मूर्खतापूर्ण चुनावों के घातक परिणामों से बचने के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल की बुद्धिमानी की बातों को अपना मार्गदर्शक बना लें, "तब तू धर्म और न्याय, और सीधाई को, निदान सब भली-भली चाल समझ सकेगा" (नीतिवचन 2:9)। - डेविड मैक्कैसलैंड


उचित तथा महत्वपूर्ण को पहचान पाना ही बुद्धिमानी है।

यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। - भजन 25:8-9

बाइबल पाठ: नीतिवचन 2:6-20
Psalms 25:6 हे यहोवा अपनी दया और करूणा के कामों को स्मरण कर; क्योंकि वे तो अनन्तकाल से होते आए हैं। 
Psalms 25:7 हे यहोवा अपनी भलाई के कारण मेरी जवानी के पापों और मेरे अपराधों को स्मरण न कर; अपनी करूणा ही के अनुसार तू मुझे स्मरण कर।। 
Psalms 25:8 यहोवा भला और सीधा है; इसलिये वह पापियों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:9 वह नम्र लोगों को न्याय की शिक्षा देगा, हां वह नम्र लोगों को अपना मार्ग दिखलाएगा। 
Psalms 25:10 जो यहोवा की वाचा और चितौनियों को मानते हैं, उनके लिये उसके सब मार्ग करूणा और सच्चाई हैं।। 
Psalms 25:11 हे यहोवा अपने नाम के निमित्त मेरे अधर्म को जो बहुत हैं क्षमा कर।। 
Psalms 25:12 वह कौन है जो यहोवा का भय मानता है? यहोवा उसको उसी मार्ग पर जिस से वह प्रसन्न होता है चलाएगा। 
Psalms 25:13 वह कुशल से टिका रहेगा, और उसका वंश पृथ्वी पर अधिकारी होगा। 
Psalms 25:14 यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उस से डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा। 
Psalms 25:15 मेरी आंखे सदैव यहोवा पर टकटकी लगाए रहती हैं, क्योंकि वही मेरे पांवों को जाल में से छुड़ाएगा।। 
Psalms 25:16 हे यहोवा मेरी ओर फिरकर मुझ पर अनुग्रह कर; क्योंकि मैं अकेला और दीन हूं। 
Psalms 25:17 मेरे हृदय का क्लेश बढ़ गया है, तू मुझ को मेरे दु:खों से छुड़ा ले। 
Psalms 25:18 तू मेरे दु:ख और कष्ट पर दृष्टि कर, और मेरे सब पापों को क्षमा कर।। 
Psalms 25:19 मेरे शत्रुओं को देख कि वे कैसे बढ़ गए हैं, और मुझ से बड़ा बैर रखते हैं। 
Psalms 25:20 मेरे प्राण की रक्षा कर, और मुझे छुड़ा; मुझे लज्जित न होने दे, क्योंकि मैं तेरा शरणागत हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 82-84