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शुक्रवार, 14 सितंबर 2018

समय से परे



      सन 2016 में ब्रिटेन और सारे विश्व में थियेटर कंपनियों ने कुछ विशेष प्रस्तुतीकरणों द्वारा विलियम शेक्सपीयर के देहांत की 400वीं बरसी मनाई। उन्होंने संगीत-समारोहों, व्याख्यानों, और उत्सवों का आयोजन किया जिनमें लोगों की भीड़ सम्मिलित हुई, अंग्रेज़ी भाषा के सबसे महान नाटककार माने जाने वाले व्यक्ति की अभी तक लोकप्रिय बनी हुई कृतियों का उत्सव मनाने के लिए। शेक्सपीयर के एक समकालिक व्यक्ति, बेन जॉनसन ने उनके विषय में लिखा, “वे किसी काल के नहीं थे, वे हर काल के लिए थे।”

      कुछ कलाकारों, लेखकों, और दार्शनिकों का प्रभाव कुछ सदियों तक बना रह सकता है, परन्तु प्रभु यीशु मसीह ही सँसार के इतिहास में एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनका प्रभाव न केवल सदियों से सारे विश्व में बना हुआ है, वरन समय के बाद भी बना रहेगा। प्रभु यीशु मसीह ने परमेश्वर के वचन बाइबल में, अपने विषय दावा किया, “जो रोटी स्वर्ग से उतरी यही है, बाप दादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा” (यूहन्ना 6:58)। जब प्रभु यीशु की शिक्षाओं को सुनने वाले अनेकों लोगों ने उनकी यह बातें सुनकर अप्रसन्नता व्यक्त की और आगे से उसके पीछे न चलने का निर्णय लिया, तो प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों से पूछा, कि क्या वे भी उन लोगों के समान उसे छोड़ देना चाहते हैं (पद 67)? तब प्रभु यीशु के एक शिष्य ने उत्तर दिया, “शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं। और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है” (पद 68-69)?

      जब हम अपने पापों के लिए क्षमा माँग कर अपने जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करते हैं, उसे अपने जीवन का उद्धारकर्ता स्वीकार करके उसे अपने जीवन में आने का निमंत्रण देते हैं, तो हम उसके उन आरंभिक शिष्यों और उनके बाद के अन्य सभी शिष्यों में सम्मिलित हो जाते हैं जिन्होंने एक नए और अनंतकालीन जीवन के लिए उसके साथ, उसके पीछे चलने का निर्णय ले लिया है, ऐसे जीवन के लिए जो समय से परे भी बना रहेगा और अवर्णनीय आनन्द से भरा रहेगा। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु परमेश्वर का पुत्र है, 
समय की सीमाओं से परे है, 
अपने शिष्यों को अनन्त जीवन परदान करता है।

जिस के पास पुत्र है, उसके पास जीवन है; और जिस के पास परमेश्वर का पुत्र नहीं, उसके पास जीवन भी नहीं है। - 1 यूहन्ना 5:12

बाइबल पाठ: यूहन्ना 6:51-69
John 6:51 जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है।
John 6:52 इस पर यहूदी यह कहकर आपस में झगड़ने लगे, कि यह मनुष्य क्योंकर हमें अपना मांस खाने को दे सकता है?
John 6:53 यीशु ने उन से कहा; मैं तुम से सच सच कहता हूं जब तक मनुष्य के पुत्र का मांस न खाओ, और उसका लोहू न पीओ, तुम में जीवन नहीं।
John 6:54 जो मेरा मांस खाता, और मेरा लोहू पीता है, अनन्त जीवन उसी का है, और मैं अंतिम दिन फिर उसे जिला उठाऊंगा।
John 6:55 क्योंकि मेरा मांस वास्‍तव में खाने की वस्तु है और मेरा लोहू वास्‍तव में पीने की वस्तु है।
John 6:56 जो मेरा मांस खाता और मेरा लोहू पीता है, वह मुझ में स्थिर बना रहता है, और मैं उस में।
John 6:57 जैसा जीवते पिता ने मुझे भेजा और मैं पिता के कारण जीवित हूं वैसा ही वह भी जो मुझे खाएगा मेरे कारण जीवित रहेगा।
John 6:58 जो रोटी स्वर्ग से उतरी यही है, बाप दादों के समान नहीं कि खाया, और मर गए: जो कोई यह रोटी खाएगा, वह सर्वदा जीवित रहेगा।
John 6:59 ये बातें उसने कफरनहूम के एक आराधनालय में उपदेश देते समय कहीं।
John 6:60 इसलिये उसके चेलों में से बहुतों ने यह सुनकर कहा, कि यह बात नागवार है; इसे कौन सुन सकता है?
John 6:61 यीशु ने अपने मन में यह जान कर कि मेरे चेले आपस में इस बात पर कुड़कुड़ाते हैं, उन से पूछा, क्या इस बात से तुम्हें ठोकर लगती है?
John 6:62 और यदि तुम मनुष्य के पुत्र को जहां वह पहिले था, वहां ऊपर जाते देखोगे, तो क्या होगा?
John 6:63 आत्मा तो जीवनदायक है, शरीर से कुछ लाभ नहीं: जो बातें मैं ने तुम से कहीं हैं वे आत्मा है, और जीवन भी हैं।
John 6:64 परन्तु तुम में से कितने ऐसे हैं जो विश्वास नहीं करते: क्योंकि यीशु तो पहिले ही से जानता था कि जो विश्वास नहीं करते, वे कौन हैं और कौन मुझे पकड़वाएगा।
John 6:65 और उसने कहा, इसी लिये मैं ने तुम से कहा था कि जब तक किसी को पिता की ओर यह वरदान न दिया जाए तक तक वह मेरे पास नहीं आ सकता।
John 6:66 इस पर उसके चेलों में से बहुतेरे उल्टे फिर गए और उसके बाद उसके साथ न चले।
John 6:67 तब यीशु ने उन बारहों से कहा, क्या तुम भी चले जाना चाहते हो?
John 6:68 शमौन पतरस ने उसको उत्तर दिया, कि हे प्रभु हम किस के पास जाएं? अनन्त जीवन की बातें तो तेरे ही पास हैं।
John 6:69 और हम ने विश्वास किया, और जान गए हैं, कि परमेश्वर का पवित्र जन तू ही है।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 19-21
  • 2 कुरिन्थियों 7



गुरुवार, 13 सितंबर 2018

समर्पण



      संभवतः आत्म-संयम निभाना सबसे कठिन व्यवहार होता है। कितनी ही बार हम किसी बुरी आदत, किसी घटिया आचरण, या गलत विचार द्वारा पराजित हो चुके हैं। हम सुधरने के वायदे करते हैं। हम लोगों से कहते हैं कि हमें उत्तरदायी ठहराएं। परन्तु अपने अन्दर हम जानते हैं कि हमारे अन्दर अपने आप को बदलने की पर्याप्त इच्छा-शक्ति और क्षमता नहीं है। बदलने के लिए हम बातें कर सकते हैं, योजनाएं बना सकते हैं, अपनी सहायता स्वयँ करना सिखाने वाली पुस्तकें पढ़ सकते हैं, परन्तु अपने अन्दर की अनेकों बातों को नियंत्रित करने या उनपर विजयी होने की व्यवाहारिक कठिनाई से हम भली-भांति अवगत हैं।

      हमें धन्यवादी होना चाहिए कि परमेश्वर हमारी इस दुर्बलता को न केवल जानता है और समझता है, वरन उसके पास इसका समाधान भी है। परमेश्वर का वचन बाइबल बताती है  कि “आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे” (गलतियों 5:16)। आत्म-संयम प्राप्त करने का एकमात्र तरीका है परमेश्वर के हाथों में आत्म-समर्पण कर देना।

      दूसरे शब्दों में, आत्म-संयम के लिए हमारा ध्यान अपने प्रयास पर नहीं, वरन परमेश्वर के प्रति अपने समर्पण  पर होना चाहिए, जिससे हम प्रतिपल अपने ऊपर, अपनी योग्यताओं, क्षमताओं, कार्यों आदि पर नहीं वरन परमेश्वर पर और उसके वचन के मार्गदर्शन, उसकी विधियों पर भरोसा बनाए रखें। पौलुस द्वारा कहे “आत्मा के अनुसार चलने” का यही तात्पर्य है। जब हम परमेश्वर के आत्मा के अनुसार चलेंगे, तो परमेश्वर के आत्मा के फल, “पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं” (गलतियों 5: 22-23) भी हमारे जीवनों में दिखाए देने लगेंगे।

      क्या आप अपने जीवन में यह परिवर्तन चाहते हैं? क्या आप अपनी बुराईयों से छूटकर शरीर और उसकी लालसाओं पर विजयी जीवन जीना चाहते हैं; अपने जीवन में आत्मा के फल देखना चाहते हैं? अपने आप को परमेश्वर के हाथों में पूर्णतः समर्पित कर दीजिए; उसके आज्ञाकारी हो जाईये, और वह आप में अपनी समानता के फल उत्पन्न करने में सहायता करता जाएगा। - जैम फेर्नानडेज़ गैरिडो


हमारा भला करने के लिए, 
परमेश्वर को हमारी योग्यताओं की नहीं हमारे समर्पण की आवश्यकता है।

सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। - रोमियों 8:1

बाइबल पाठ: गलतियों 5:16-25
Galatians 5:16 पर मैं कहता हूं, आत्मा के अनुसार चलो, तो तुम शरीर की लालसा किसी रीति से पूरी न करोगे।
Galatians 5:17 क्योंकि शरीर आत्मा के विरोध में, और आत्मा शरीर के विरोध में लालसा करती है, और ये एक दूसरे के विरोधी हैं; इसलिये कि जो तुम करना चाहते हो वह न करने पाओ।
Galatians 5:18 और यदि तुम आत्मा के चलाए चलते हो तो व्यवस्था के आधीन न रहे।
Galatians 5:19 शरीर के काम तो प्रगट हैं, अर्थात व्यभिचार, गन्‍दे काम, लुचपन।
Galatians 5:20 मूर्ति पूजा, टोना, बैर, झगड़ा, ईर्ष्या, क्रोध, विरोध, फूट, विधर्म।
Galatians 5:21 डाह, मतवालापन, लीलाक्रीड़ा, और इन के जैसे और और काम हैं, इन के विषय में मैं तुम को पहिले से कह देता हूं जैसा पहिले कह भी चुका हूं, कि ऐसे ऐसे काम करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे।
Galatians 5:22 पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज,
Galatians 5:23 और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।
Galatians 5:24 और जो मसीह यीशु के हैं, उन्होंने शरीर को उस की लालसाओं और अभिलाषाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है।
Galatians 5:25 यदि हम आत्मा के द्वारा जीवित हैं, तो आत्मा के अनुसार चलें भी।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 16-18
  • 2 कुरिन्थियों 6



बुधवार, 12 सितंबर 2018

तैयार



      मेरी आठ वर्षीय पुत्री ने कहा, “मुझे भूख लगी है।” मैंने उत्तर दिया, “मुझे क्षमा करो, मेरे पास खाने के लिए कुछ भी नहीं है। आओ हम एक खेल खेलते हैं।” हम दोपहर के समय होने के लिए निर्धारित विवाह में दुलहन के आगमन की एक घंटे से भी अधिक से प्रतीक्षा कर रहे थे। यह विचार करते हुए कि न जाने और कितनी देर लगेगी, मैं सोचने लगी कि क्या मैं अपनी बेटी को विवाह के आरंभ होने तक व्यस्त रखने पाऊँगी?

      प्रतीक्षा करते हुए, मुझे लगा कि मानो हम प्रभु यीशु द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए एक दृष्टांत का साक्षात अभिनय कर रहे हैं। यद्यपि हमारे रहने का स्थान, चर्च के पास ही था, मुझे लग रहा था कि घर से खाने के लिए कुछ बिस्किट लेने मैं जैसे ही जाऊँगी, दुल्हन आ जाएगी, और मैं उसके आगमन तथा स्वागत को देखने से रह जाऊँगी। इसलिए मैं अपने भूखी बेटी के ध्यान को बंटाने के अपने तरीके आज़माती रही, और प्रभु यीशु द्वारा दिए गए दस कुँवारियों के दृष्टांत (मत्ती 25:1-13) के बारे में विचार करती रही।

      उस दृष्टांत में प्रभु ने बताया था कि कैसे पाँच कुंवारियां अपने दीपकों के लिए पर्याप्त अतिरिक्त तेल लेकर आईं थी, जिससे दूल्हे के आने तक उनके दीपक जलते रहें, परन्तु शेष पाँच तेल लेकर नहीं आईं थीं। और जब वे अपने दीपकों के लिए और तेल मोल लेने के लिए गईं, दूल्हा आ गया और वे उसके साथ विवाह के समारोह में नहीं जा सकीं। जैसे मेरे लिए बिस्किट लेने जाने का अब समय नहीं बचा था, उन पाँच कुँवारियों के लिए भी तेल मोल लेकर आने का समय बीत चुका था।

      प्रभु यीशु ने इस दृष्टांत को हमें यह सिखाने के लिए बताया कि हमें उसके पुनःआगमन के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए। क्योंकि जब वह आएगा तो हमें उसे अपने जीवनों का हिसाब देना होगा। क्या हम यह हिसाब देने को तैयार हैं? – एमी बाउचर पाई


प्रभु यीशु के पुनःआगमन के लिए सदैव तैयार रहना चाहिए।

क्योंकि तुम आप ठीक जानते हो कि जैसा रात को चोर आता है, वैसा ही प्रभु का दिन आने वाला है। जब लोग कहते होंगे, कि कुशल है, और कुछ भय नहीं, तो उन पर एकाएक विनाश आ पड़ेगा, जिस प्रकार गर्भवती पर पीड़ा; और वे किसी रीति से न बचेंगे। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:2

बाइबल पाठ: मत्ती 25:1-13
Matthew 25:1 तब स्वर्ग का राज्य उन दस कुंवारियों के समान होगा जो अपनी मशालें ले कर दूल्हे से भेंट करने को निकलीं।
Matthew 25:2 उन में पांच मूर्ख और पांच समझदार थीं।
Matthew 25:3 मूर्खों ने अपनी मशालें तो लीं, परन्तु अपने साथ तेल नहीं लिया।
Matthew 25:4 परन्तु समझदारों ने अपनी मशालों के साथ अपनी कुप्‍पियों में तेल भी भर लिया।
Matthew 25:5 जब दुल्हे के आने में देर हुई, तो वे सब ऊंघने लगीं, और सो गई।
Matthew 25:6 आधी रात को धूम मची, कि देखो, दूल्हा आ रहा है, उस से भेंट करने के लिये चलो।
Matthew 25:7 तब वे सब कुंवारियां उठ कर अपनी मशालें ठीक करने लगीं।
Matthew 25:8 और मूर्खों ने समझदारों से कहा, अपने तेल में से कुछ हमें भी दो, क्योंकि हमारी मशालें बुझी जाती हैं।
Matthew 25:9 परन्तु समझदारों ने उत्तर दिया कि कदाचित हमारे और तुम्हारे लिये पूरा न हो; भला तो यह है, कि तुम बेचने वालों के पास जा कर अपने लिये मोल ले लो।
Matthew 25:10 जब वे मोल लेने को जा रही थीं, तो दूल्हा आ पहुंचा, और जो तैयार थीं, वे उसके साथ ब्याह के घर में चलीं गई और द्वार बन्‍द किया गया।
Matthew 25:11 इसके बाद वे दूसरी कुंवारियां भी आकर कहने लगीं, हे स्‍वामी, हे स्‍वामी, हमारे लिये द्वार खोल दे।
Matthew 25:12 उसने उत्तर दिया, कि मैं तुम से सच कहता हूं, मैं तुम्हें नहीं जानता।
Matthew 25:13 इसलिये जागते रहो, क्योंकि तुम न उस दिन को जानते हो, न उस घड़ी को।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 13-15
  • 2 कुरिन्थियों 5



मंगलवार, 11 सितंबर 2018

प्रार्थना



      सितंबर 11, 2001 के दिन, स्टैनली प्रेमनाथ वर्ल्ड ट्रेड सेंटर के साउथ टावर की 81वीं मंज़िल पर कार्य कर रहा था जब उसने एक वायुयान को सीधे अपनी ओर आते देखा। स्टैनली ने एक डेस्क के नीचे बचाव के लिए कूदते हुए प्रार्थना की: “प्रभु, मुझ से यह नहीं होगा! आप ही संभालें!” स्टैनली उस वायुयान के टकराने के कारण गिरने वाले मलबे की दीवार के पीछे फंस गया। वह प्रार्थना करता और सहायता के लिए पुकारता रहा और एक अन्य दफ्तर के कर्मचारी ब्रायन क्लार्क ने उसकी आवाज़ को सुना और सहायता के लिए आया। मलबे और अन्धकार में से होते हुए वे दोनों 80 मंज़िल नीचे उतरकर बाहर आ गए।

      जब दाऊद भयानक जोखिमों का सामना कर रहा था, उसने परमेश्वर से सहायता की प्रार्थना की। युद्ध में शत्रुओं का सामना करते समय वह परमेश्वर की निकटता के लिए आश्वस्त होना चाहता था। मन से निकली एक विनती में दाऊद ने कहा, “मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं;...हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर” (भजन 71:3, 12)।

      परमेश्वर ने हम से यह वायदा तो नहीं किया है कि वह हमें प्रत्येक कठिन परिस्थिति से बचा लेगा। परन्तु हम इस बात के लिए आश्वस्त रह सकते हैं कि हम परमेश्वर हमारी प्रत्येक प्रार्थना को सुनता है, और हर परिस्थिति में हमारे साथ बना रहता है, हमें दृढ़ और स्थिर करता रहता है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर के निकट होना हमारी चेतन सुरक्षा है। 
अंधियारे में एक बच्चा अपने पिता के हाथ को थामने से सुरक्षित अनुभव करता है। 
- चार्ल्स हैडडन स्पर्जन

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: भजन 71:1-12
Psalms 71:1 हे यहोवा मैं तेरा शरणागत हूं; मेरी आशा कभी टूटने न पाए!
Psalms 71:2 तू तो धर्मी है, मुझे छुड़ा और मेरा उद्धार कर; मेरी ओर कान लगा, और मेरा उद्धार कर!
Psalms 71:3 मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं; तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है।
Psalms 71:4 हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर।
Psalms 71:5 क्योंकि हे प्रभु यहोवा, मैं तेरी ही बाट जोहता आया हूं; बचपन से मेरा आधार तू है।
Psalms 71:6 मैं गर्भ से निकलते ही, तुझ से सम्भाला गया; मुझे मां की कोख से तू ही ने निकाला; इसलिये मैं नित्य तेरी स्तुति करता रहूंगा।
Psalms 71:7 मैं बहुतों के लिये चमत्कार बना हूं; परन्तु तू मेरा दृढ़ शरण स्थान है।
Psalms 71:8 मेरे मुंह से तेरे गुणानुवाद, और दिन भर तेरी शोभा का वर्णन बहुत हुआ करे।
Psalms 71:9 बुढ़ापे के समय मेरा त्याग न कर; जब मेरा बल घटे तब मुझ को छोड़ न दे।
Psalms 71:10 क्योंकि मेरे शत्रु मेरे विषय बातें करते हैं, और जो मेरे प्राण की ताक में हैं, वे आपस में यह सम्मति करते हैं, कि
Psalms 71:11 परमेश्वर ने उसको छोड़ दिया है; उसका पीछा कर के उसे पकड़ लो, क्योंकि उसका कोई छुड़ाने वाला नहीं।
Psalms 71:12 हे परमेश्वर, मुझ से दूर न रह; हे मेरे परमेश्वर, मेरी सहायता के लिये फुर्ती कर!


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 10-12
  • 2 कुरिन्थियों 4



सोमवार, 10 सितंबर 2018

सुसमाचार



      ईवी हाई-स्कूल के किशोरों की संगीत मण्डली के 25 सदस्यों में से एक थी, जो जमाइका गए थे कि एक भिन्न संस्कृति और पीढ़ी के लोगों को परमेश्वर के प्रेम के बारे में गानों एवं गवाहियों के द्वारा बता सकें, और दिखा सकें। उस यात्रा का एक दिन ईवी के लिए विशेषतः यादगार और आनन्द से भरा था।

      उस दिन उनकी संगीत मण्डली एक नर्सिंग होम गई, वहाँ के लोगों से मिलने और बातचीत करने। गीत गाने के पश्चात, ईवी एक स्त्री के साथ वार्तालाप करने के लिए बैठ गई। अपनी बातचीत के दौरान, ईवी को एहसास हुआ कि उस स्त्री से प्रभु यीशु के बारे में बातचीत करनी चाहिए – वह कौन था, और उसने हमारे लिए क्या किया है। उसने उस स्त्री को बाइबल से उन पदों को दिखाया जो उद्धार को समझाते हैं। शीघ्र ही उस स्त्री ने कहा कि वह प्रभु यीशु पर उद्धारकर्ता होने का विश्वास करना चाहती है, और उसने ऐसा ही किया भी।

      ईवी के वार्तालाप आरंभ करने के निर्णय के कारण, हमारे संगीत मण्डली दल ने उस दिन परमेश्वर के परिवार में एक नए सदस्य के आगमन का उत्सव मनाया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 16:15 में लिखा है, जो ईवी ने किया, वही सभी मसीही विश्वासियों को करना है; यह प्रभु यीशु की आज्ञा है। इस पद का The Message में भावात्मक अनुवाद इस प्रकार से हुआ है: “सभी स्थानों पर जाओ और परमेश्वर के सुसमाचार के सन्देश की घोषणा सभी से करो।”

      सुसमाचार सन्देश को सुनकर किसी व्यक्ति द्वारा प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करने के महत्व को हम कभी हलके में न लें। - डेव ब्रैनन


प्रभावी गवाह न केवल अपने विश्वास को जानते हैं, वरन उसे औरों के साथ बांटते भी हैं।

और उस[यीशु]ने उन से कहा, तुम सारे जगत में जा कर सारी सृष्‍टि के लोगों को सुसमाचार प्रचार करो।  - मरकुस 16:15

बाइबल पाठ: प्रेरितों 1:1-8
Acts 1:1 हे थियुफिलुस, मैं ने पहिली पुस्तिका उन सब बातों के विषय में लिखी, जो यीशु ने आरम्भ में किया और करता और सिखाता रहा।
Acts 1:2 उस दिन तक जब वह उन प्रेरितों को जिन्हें उसने चुना था, पवित्र आत्मा के द्वारा आज्ञा देकर ऊपर उठाया न गया।
Acts 1:3 और उसने दु:ख उठाने के बाद बहुत से पड़े प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया, और चालीस दिन तक वह उन्हें दिखाई देता रहा: और परमेश्वर के राज्य की बातें करता रहा।
Acts 1:4 और उन से मिलकर उन्हें आज्ञा दी, कि यरूशलेम को न छोड़ो, परन्तु पिता की उस प्रतिज्ञा के पूरे होने की बाट जोहते रहो, जिस की चर्चा तुम मुझ से सुन चुके हो।
Acts 1:5 क्योंकि यूहन्ना ने तो पानी में बपतिस्मा दिया है परन्तु थोड़े दिनों के बाद तुम पवित्रात्मा से बपतिस्मा पाओगे।
Acts 1:6 सो उन्हों ने इकट्ठे हो कर उस से पूछा, कि हे प्रभु, क्या तू इसी समय इस्त्राएल को राज्य फेर देगा?
Acts 1:7 उसने उन से कहा; उन समयों या कालों को जानना, जिन को पिता ने अपने ही अधिकार में रखा है, तुम्हारा काम नहीं।
Acts 1:8 परन्तु जब पवित्र आत्मा तुम पर आएगा तब तुम सामर्थ पाओगे; और यरूशलेम और सारे यहूदिया और सामरिया में, और पृथ्वी की छोर तक मेरे गवाह होगे।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 8-9
  • 2 कुरिन्थियों 3



रविवार, 9 सितंबर 2018

प्रेम



      जैसे-जैसे प्रभु यीशु का प्रिय शिष्य यूहन्ना वृद्ध होता गया, उसकी शिक्षाएँ अधिकाधिक सीमित होती गईं, और उसकी शिक्षाओं का केंद्रबिंदु परमेश्वर का प्रेम ही हो गया, जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में उसकी लिखी तीनों पत्रियों में हम देखते हैं। अपनी पुस्तक Knowing the Truth of God’s Love में  पीटर क्रीफ्ट एक पुरानी किंवदंती के हवाले से लिखते हैं कि यूहन्ना का एक शिष्य उसके पास शिकायत के भाव से आया और बोला, “आप किसी और बात के बारे में बात क्यों नहीं करते हैं?” यूहन्ना ने उत्तर दिया, “क्योंकि और कुछ है ही नहीं!”

      अवश्य ही प्रभु यीशु के उद्देश्य और सन्देश का मर्म परमेश्वर का प्रेम ही है। यूहन्ना ने अपने लिखे सुसमाचार में लिखा, “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16)।

      प्रेरित पौलुस हमें बताता है कि हमारे जीवन जीने एवं व्यवहार का केन्द्र परमेश्वर का प्रेम ही है, और वह हमें स्मरण करवाता है कि, “क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी” (रोमियों 8:38-39)।

      परमेश्वर का प्रेम इतना सामर्थी, उपलब्ध और स्थिरता प्रदान करने वाला है कि हम पूरे भरोसे के साथ प्रत्येक दिन में प्रवेश कर सकते हैं इस जानकारी के साथ के सभी भली बातें उसके हाथों से मिलने वाले उपहार हैं, और सभी चुनौतियों का हम उसकी सामर्थ्य द्वारा सामना कर सकते हैं। सारे जीवन में, जो सबसे महत्वपूर्ण बात है वह है प्रेम। - बिल क्राउडर


जब अन्य सभी कुछ गिर चुकता है, परमेश्वर का प्रेम फिर भी स्थिर खड़ा रहता है।

पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है। - 1 कुरिन्थियों 13:13

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-19
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है।
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है।
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं।
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा।
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए।
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है।
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है।
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 6-7
  • 2 कुरिन्थियों 2



शनिवार, 8 सितंबर 2018

स्त्रोत



      मैं 18 वर्ष की थी जब मुझे मेरी पहली पूर्णकालिक नौकरी मिली, और मैंने पैसे बचाने के अनुशासन के बारे में एक महत्वपूर्ण शिक्षा सीखी। मैं काम करती रही और पैसे बचाती रही, जब तक कि मेरे पास स्कूल की एक वर्ष की फीस चुकाने के लिए पैसे एकत्रित नहीं हो गए। तभी मेरी माँ को अचानक ही ऑपरेशन के लिए ले जाना पड़ा, और मुझे एहसास हुआ कि मेरे पास बैंक में उनके इलाज के लायक पैसे हैं। मेरी माँ के प्रति मेरा प्रेम, मेरे भविष्य के लिए मेरी योजनाओं से बढ़कर था।

      ऐसे में इलाज़बेथ इलियट द्वारा उनकी पुस्तक Passion and Purity में लिखे गए ये शब्द मेरे लिए और भी अधिक अर्थपूर्ण हो गए: “यदि हमें जो दिया गया है, हम उसे कस कर पकड़ लेते हैं और समयानुसार उसे छोड़ने को तैयार नहीं होते हैं, या उसका वैसा प्रयोग नहीं करते हैं जैसा हमें देने वाला चाहता है कि हम करें, तो हम अपनी आत्मा की उन्नति में बाधा डालते हैं। यहाँ यह गलती करना बहुत सरल रहता है कि हम यह कहें कि ‘क्योंकि यह मुझे परमेश्वर से मिला है इसलिए यह मेरा ही है; मैं इसके साथ जैसा चाहे वैसा कर सकता हूँ।’ जी नहीं! सत्य यह है कि वह हमारे पास इसलिए है जिससे हम उसके लिए उस देने वाले स्त्रोत का धन्यवाद करें, और उस वस्तु को पुनः उसे ही समर्पित कर दें,...वह दे देने के लिए मेरा है।”

      उस समय मुझे एहसास हुआ कि मेरी नौकरी, और पैसे बचाने का मेरा वह अनुशासन मुझे परमेश्वर से मिले उपहार थे! मैं अपने परिवार को उदारता से दे सकी क्योंकि मैं जानती थी कि परमेश्वर किसी और रीति से मुझे स्कूल की पढ़ाई करवा देगा, और उसने ऐसा ही किया भी।

      आज परमेश्वर कैसे चाहता है कि हम दाऊद की प्रार्थना, “मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है” (1 इतिहास 29:14) को अपने जीवनों में  लागू करें; यह जानते और मानते हुए कि परमेश्वर ही हमारी सभी आवाश्यकताओं की पूर्ति का स्त्रोत है। - कीला ओकोआ


सब कुछ परमेश्वर का, और परमेश्वर से ही है।

क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन। - रोमियों 11:36

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 29:14
1 Chronicles 29:14 मैं क्या हूँ? और मेरी प्रजा क्या है? कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है।
1 Chronicles 29:15 तेरी दृष्टि में हम तो अपने सब पुरखाओं के समान पराए और परदेशी हैं; पृथ्वी पर हमारे दिन छाया के समान बीते जाते हैं, और हमारा कुछ ठिकाना नहीं।
1 Chronicles 29:16 हे हमारे परमेश्वर यहोवा! वह जो बड़ा संचय हम ने तेरे पवित्र नाम का एक भवन बनाने के लिये किया है, वह तेरे ही हाथ से हमे मिला था, और सब तेरा ही है।
1 Chronicles 29:17 और हे मेरे परमेश्वर! मैं जानता हूँ कि तू मन को जांचता है और सिधाई से प्रसन्न रहता है; मैं ने तो यह सब कुछ मन की सिधाई और अपनी इच्छा से दिया है; और अब मैं ने आनन्द से देखा है, कि तेरी प्रजा के लोग जो यहां उपस्थित हैं, वह अपनी इच्छा से तेरे लिये भेंट देते हैं।
1 Chronicles 29:18 हे यहोवा! हे हमारे पुरखा इब्राहीम, इसहाक और इस्राएल के परमेश्वर! अपनी प्रजा के मन के विचारों में यह बात बनाए रख और उनके मन अपनी ओर लगाए रख।
1 Chronicles 29:19 और मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं चितौनियों और विधियों को मानता रहे और यह सब कुछ करे, और उस भवन को बनाए, जिसकी तैयारी मैं ने की है।


एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 3-5
  • 2 कुरिन्थियों 1