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शनिवार, 18 जनवरी 2020

विलम्ब


      संसार भर में फैली और परस्पर जुड़ी हुई कंप्यूटर प्रणाली में आई खराबी के कारण संसार भर में अनेकों स्थानों पर हवाई यात्राएं बाधित हो जाती हैं, उन्हें रद्द करना पड़ता है, जिसके कारण हज़ारों यात्री हवाई अड्डों पर फंस जाते हैं, उनकी योजनाएं ठप्प हो जाती हैं। किसी बर्फीले तूफ़ान के कारण सड़कों पर अनेकों गाड़ियों की आपस में भिड़न्त हो जाती है और कई प्रमुख सड़क मार्ग बंद हो जाते हैं, यातायात बंद हो जाता है। जिस व्यक्ति ने वायदा किया था कि वह “तुरंत ही” उत्तर दे देगा, वह ऐसा नहीं करता है, और अनिश्चितता तथा असमंजस की स्थिति बनी रहती है। इन और ऐसी सभी परिस्थितयों के कारण विलम्ब होता है, और विलम्ब होने के कारण अकसर क्रोध और खिसियाहट होती है, जिस के फिर अन्य कई गलत या बुरे परिणाम होते हैं। परन्तु प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी होने के नाते, हमारे पास यह विशेषाधिकार और सौभाग्य है कि ऐसी प्रत्येक परिस्थिति में हम प्रभु से सहायता प्राप्त कर सकते हैं।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में धैर्य बनाए रखने वालों के महान उदाहरणों में से एक है यूसुफ, जिसे उसके ईर्ष्यालु भाइयों ने दासों का व्यापार करने वालों को बेच दिया, जिन्होंने फिर उसे मिस्र ले जाकर बेच दिया; वहां उसके स्वामी की पत्नी ने उस पर झूठे आरोप लगा कर उसे बंदीगृह में डलवा दिया। लेकिन परमेश्वर का वचन हमें बताता है कि उन परिस्थितियों में भी “यहोवा यूसुफ के संग संग रहा, और उस पर करूणा की, और बन्दीगृह के दरोगा के अनुग्रह की दृष्टि उस पर हुई” (उत्पत्ति 39: 21)। इसके कई वर्षों के बाद जब यूसुफ ने फिरौन के स्वप्नों का अर्थ बताया तो उसे मिस्र में राजा के बाद का दूसरा सबसे ऊँचा स्थान दिया गया (अध्याय 41)।

      यूसुफ के धैर्य रखने का सबसे विलक्षण प्रतिफल तब आया जब वहां पड़े अकाल के समय में उसके वे ईर्ष्यालु भाई, उसकी स्थिति से अनजान, उसके ही पास आए कि उससे अन्न लें और अपने परिवारों को बचाएं। यूसुफ ने उन से कहा, “...मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिस को तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था। अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।... इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा” (उत्पत्ति 45:4-5, 8)।

      हमारे जीवनों की प्रत्येक परिस्थिति में, सभी विलंबों में, वह चाहे जितना भी छोटा या लंबा हो, हमें भी यूसुफ के समान धैर्य, सही दृष्टिकोण, और शान्ति के साथ प्रभु में विश्वास को बनाए रखना चाहिए; अन्ततः परिणाम सर्वोत्तम होंगे। - डेविड मैक्कैसलैंड

परमेश्वर में हमारा भरोसा, 
हमें अपने विश्वास को धैर्य के साथ निभाने के लिए सक्षम करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 45:1-8
Genesis 45:1 तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका; और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
Genesis 45:2 तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा: और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
Genesis 45:3 तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तब जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके; क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
Genesis 45:4 फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उसने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिस को तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
Genesis 45:5 अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो; क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
Genesis 45:6 क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है; और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
Genesis 45:7 सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
Genesis 45:8 इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50


शुक्रवार, 17 जनवरी 2020

कृतज्ञ



      क्या आप और अधिक कृतज्ञ होने की भावना विकसित करना चाहेंगे? सत्रहवीं शताब्दी के एक ब्रिटिश कवि, जॉर्ज हर्बर्ट ने अपने पाठकों को इस उद्देश्य की ओर प्रोत्साहित करने के लिए एक कविता लिखी थी “Gratefulness” (कृतज्ञता), जिसकी एक पंक्ति है: “आपने मुझे बहुत कुछ दिया है, किन्तु एक चीज़ और दीजिए: एक कृतज्ञ मन।”

      हर्बर्ट ने पहचाना कि उसे कृतज्ञ होने के लिए केवल एक ही चीज़ की आवश्यकता थी – उन आशीषों का बोध रखना और उन्हें पहचानना, जो परमेश्वर उसे पहले ही दे चुका है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि रोमियों 11:36 प्रभु यीशु मसीह को सभी आशीषों का स्त्रोत बताता है, जहां लिखा है, “क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन” जब “सब कुछ” कहा गया है, तो इसमें जीवन की बहुमूल्य से लेकर सामान्य वस्तुओं तक, सभी कुछ सम्मिलित है। जीवन में हमें जो भी प्राप्त होता है वह हमारे स्वर्गीय पिता से ही आता है (याकूब 1:17), और उन्हें वह हमें स्वेच्छा से, अपने प्रेम में होकर प्रदान करता है।

      अपने जीवन में परमेश्वर की आशीषों के एहसास को और बढ़ाने के लिए, मैं ऐसा मन विकसित कर रही हूँ जो प्रतिदिन के सभी आनंदों के स्त्रोत का हर बात के लिए आभार व्यक्त करता है, विशेषकर उन आनंदों के लिए, जिन्हें मैं अकसर बिना उन पर ध्यान किए यूं ही ले लेती हूँ। आज के इन आनंदों में सम्मिलित है सैर के लिए एक ताज़ा प्रातः, मित्रों के साथ बिताने के लिए एक संध्या, मेरी रसोई में खाने-पीने के समान की भरपूरी, जिससे मैं अपने बेटियों के साथ उनके मन-पसंद भोजन वस्तुओं को बना सकती हूँ, मेरी खिड़की से दिखने वाला सुन्दर संसार का दृश्य, और ताज़ी बनी कॉफ़ी की सुगंध।

      ध्यान कीजिए कि परमेश्वर ने आपको क्या कुछ दे रखा है? उन आशीषों के प्रति जागरूक होना, हमें परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ मन विकसित करने में सहायक होगा। - लिसा सामरा

जब भी आप किसी भी भलाई का ध्यान करते हैं, परमेश्वर का धन्यवाद करें।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: रोमियों 11:33-36
Romans 11:33 आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
Romans 11:34 प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ?
Romans 11:35 या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
Romans 11:36 क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



गुरुवार, 16 जनवरी 2020

कृतज्ञ



      क्या आप और अधिक कृतज्ञ होने की भावना विकसित करना चाहेंगे? सत्रहवीं शताब्दी के एक ब्रिटिश कवि, जॉर्ज हर्बर्ट ने अपने पाठकों को इस उद्देश्य की ओर प्रोत्साहित करने के लिए एक कविता लिखी थी “Gratefulness” (कृतज्ञता), जिसकी एक पंक्ति है: “आपने मुझे बहुत कुछ दिया है, किन्तु एक चीज़ और दीजिए: एक कृतज्ञ मन।”

      हर्बर्ट ने पहचाना कि उसे कृतज्ञ होने के लिए केवल एक ही चीज़ की आवश्यकता थी – उन आशीषों का बोध रखना और उन्हें पहचानना, जो परमेश्वर उसे पहले ही दे चुका है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि रोमियों 11:36 प्रभु यीशु मसीह को सभी आशीषों का स्त्रोत बताता है, जहां लिखा है, “क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन” जब “सब कुछ” कहा गया है, तो इसमें जीवन की बहुमूल्य से लेकर सामान्य वस्तुओं तक, सभी कुछ सम्मिलित है। जीवन में हमें जो भी प्राप्त होता है वह हमारे स्वर्गीय पिता से ही आता है (याकूब 1:17), और उन्हें वह हमें स्वेच्छा से, अपने प्रेम में होकर प्रदान करता है।

      अपने जीवन में परमेश्वर की आशीषों के एहसास को और बढ़ाने के लिए, मैं ऐसा मन विकसित कर रही हूँ जो प्रतिदिन के सभी आनंदों के स्त्रोत का हर बात के लिए आभार व्यक्त करता है, विशेषकर उन आनंदों के लिए, जिन्हें मैं अकसर बिना उन पर ध्यान किए यूं ही ले लेती हूँ। आज के इन आनंदों में सम्मिलित है सैर के लिए एक ताज़ा प्रातः, मित्रों के साथ बिताने के लिए एक संध्या, मेरी रसोई में खाने-पीने के समान की भरपूरी, जिससे मैं अपने बेटियों के साथ उनके मन-पसंद भोजन वस्तुओं को बना सकती हूँ, मेरी खिड़की से दिखने वाला सुन्दर संसार का दृश्य, और ताज़ी बनी कॉफ़ी की सुगंध।

      ध्यान कीजिए कि परमेश्वर ने आपको क्या कुछ दे रखा है? उन आशीषों के प्रति जागरूक होना, हमें परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ मन विकसित करने में सहायक होगा। - लिसा सामरा

जब भी आप किसी भी भलाई का ध्यान करते हैं, परमेश्वर का धन्यवाद करें।

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: रोमियों 11:33-36
Romans 11:33 आहा! परमेश्वर का धन और बुद्धि और ज्ञान क्या ही गंभीर है! उसके विचार कैसे अथाह, और उसके मार्ग कैसे अगम हैं!
Romans 11:34 प्रभु कि बुद्धि को किस ने जाना या उसका मंत्री कौन हुआ?
Romans 11:35 या किस ने पहिले उसे कुछ दिया है जिस का बदला उसे दिया जाए।
Romans 11:36 क्योंकि उस की ओर से, और उसी के द्वारा, और उसी के लिये सब कुछ है: उस की महिमा युगानुयुग होती रहे: आमीन।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 41-42
  • मत्ती 12:1-23



प्रार्थना



      एक दिन जब मैं अपने एक करीबी मित्र के हित को लेकर बहुत चिंतित थी, तो मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खंड में शमुएल, जो इस्राएलियों का एक्क बुद्धिमान अगुवा था, की कहानी से प्रोत्साहन मिला। जब मैंने पढ़ा कि कैसे शमुएल ने परमेश्वर के लोगों के लिए प्रार्थना की जब वे कठिनाई में पड़े हुए थे, तो इससे मेरे उस करीबी मित्र के लिए प्रार्थना करने के मेरे संकल्प को प्रोत्साहन और बल मिला।

      इस्राएलियों के सामने पलिश्तियों का सामना करने का ख़तरा था, और पलिश्ती परमेश्वर के लोगों को पहले भी हरा चुके थे जब इस्राएलियों ने परमेश्वर पर भरोसा नहीं रखा था (देखें 1 शमुएल 4)। अपने पापों से पश्चाताप करने के बाद उन्हें पता चला कि पलिश्ती उन पर आक्रमण करने वाले हैं। किन्तु इस बार इस्राएलियों ने शमुएल से निवेदन किया कि वह उनके लिए प्रार्थना करता रहे (7:8)। और परमेश्वर ने उन प्रार्थनाओं का उत्तर दिया, शत्रु को घबरा दिया (पद 10)। चाहे वे पलिश्ती इस्राएलियों से अधिक शक्तिशाली रहे होंगे, परन्तु प्रभु परमेश्वर सबसे शक्तिशाली है।

      जब हमारे प्रीय जनों को जिन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है, तो उन्हें लेकर हम दुखी होते हैं, हमें लगता है कि उनकी परिस्थिति सुधरेगी नहीं, और संदेह होता है कि क्या प्रभु कार्य करेगा। परन्तु हमें कभी भी प्रार्थना की सामर्थ्य को हलका नहीं समझाना चाहिए, क्योंकि हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता हमारी प्रार्थनाओं को सुनता है। हम यह तो नहीं जानते हैं कि हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर में वह कैसे कार्य करेगा, परन्तु हम यह जानते हैं कि हमारा पिता होने के नाते वह चाहता है कि हम उसके प्रेम को अपना लें और उसकी विश्वासयोग्यता में भरोसा बनाए रखें।

      क्या कोई ऐसा है जिसे आपकी प्रार्थनाओं की आवश्यकता है? – एमी बाउचर पाई

परमेश्वर सुनता है जब हम प्रार्थना करते हैं।

निरन्‍तर प्रार्थना मे लगे रहो। - 1 थिस्सलुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: 1 शमुएल 7:7-14
1 Samuel 7:7 जब पलिश्तियों ने सुना कि इस्राएली मिस्पा में इकट्ठे हुए हैं, तब उनके सरदारों ने इस्राएलियों पर चढ़ाई की। यह सुनकर इस्राएली पलिश्तियों से भयभीत हुए।
1 Samuel 7:8 और इस्राएलियों ने शमूएल से कहा, हमारे लिये हमारे परमेश्वर यहोवा की दोहाई देना न छोड़, जिस से वह हम को पलिश्तियों के हाथ से बचाए।
1 Samuel 7:9 तब शमूएल ने एक दूधपिउवा मेम्ना ले सर्वांग होमबलि कर के यहोवा को चढ़ाया; और शमूएल ने इस्राएलियों के लिये यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसकी सुन ली।
1 Samuel 7:10 और जिस समय शमूएल होमबलि हो चढ़ा रहा था उस समय पलिश्ती इस्राएलियों के संग युद्ध करने के लिये निकट आ गए, तब उसी दिन यहोवा ने पलिश्तियों के ऊपर बादल को बड़े कड़क के साथ गरजाकर उन्हें घबरा दिया; और वे इस्राएलियों से हार गए।
1 Samuel 7:11 तब इस्राएली पुरूषों ने मिस्पा से निकलकर पलिश्तियों को खदेड़ा, और उन्हें बेतकर के नीचे तक मारते चले गए।
1 Samuel 7:12 तब शमूएल ने एक पत्थर ले कर मिस्पा और शेन के बीच में खड़ा किया, और यह कहकर उसका नाम एबेनेज़ेर रखा, कि यहां तक यहोवा ने हमारी सहायता की है।
1 Samuel 7:13 तब पलिश्ती दब गए, और इस्राएलियों के देश में फिर न आए, और शमूएल के जीवन भर यहोवा का हाथ पलिश्तियों के विरुद्ध बना रहा।
1 Samuel 7:14 और एक्रोन और गत तक जितने नगर पलिश्तियों ने इस्राएलियों के हाथ से छीन लिये थे, वे फिर इस्राएलियों के वश में आ गए; और उनका देश भी इस्राएलियों ने पलिश्तियों के हाथ से छुड़ाया। और इस्राएलियों और एमोरियों के बीच भी सन्धि हो गई।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 39-40
  • मत्ती 11



बुधवार, 15 जनवरी 2020

प्रयत्नशील



      1950 के दशक में, हमने कभी रंग-भेद पर कोइ प्रश्न उठाया ही नहीं था; हमारे रहने के स्थान पर रंग-भेद रखना एक सामान्य और स्वीकार्य प्रथा थी जिसे दैनिक जीवन में बड़ी सहजता से देखा जा सकता था। स्कूलों, रेस्टोरेंटों, सार्वजनिक वाहनों, पड़ौसियों आदि के मध्य त्वचा के रंग के अनुसार व्यवहार और भेद-भाव किया जाता था।

      इन बातों के प्रति मेरा व्यवहार 1968 में बदला जब मैंने अमेरिका की सेना में बुनियादी प्रशिक्षण के लिए भर्ती ली। हमारी पलटन में भिन्न संसकृतियों के और भिन्न त्वचा के रंग के जवान थे। हम सब ने शीघ्र ही सीख लिया कि हमें एक-दूसरे को स्वीकार करना पड़ेगा, एक-दूसरे को समझना पड़ेगा, तब ही हम साथ मिलकर काम करने पाएंगे और निर्धारित उद्देश्यों को पूरा करने पाएंगे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में, जब प्रेरित पौलुस ने प्रथम शताब्दी के मसीही विश्वासियों को, जो कुलुस्से में रहते थे, पत्र लिखा, तो वह इस बात को भली-भांति जानता था कि उस मसीही मण्डली में विभिन्न प्रकार के लोग हैं। पौलुस ने उन्हें स्मरण करवाया कि, “उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है” (कुलुस्सियों 3:11)। एक ऐसी मण्डली में, जहां बाहर से दिखाई देने वाली और अन्दर के विचारों की गहरी भिन्नताएं बड़ी सहजता से लोगों के मध्य विभाजन ला सकती थीं, पौलुस ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे “परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो” (पद 12)। और उसने उन से यह भी कहा कि इन सब सदगुणों के ऊपर “...प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो” (पद 14)।

      इन बातों को व्यावाहरिक करना केवल प्रयत्नशील रहने के द्वारा ही संभव है, और हमारा प्रभु यीशु चाहता है कि हम यह प्रयत्न करें, और इसमें लगे रहें। हम सभी मसीही विश्वासियों में जो एक बात सामान्य है, वह है प्रभु के प्रति हमारा प्रेम। इसी आधार पर ही हम परस्पर समझ, शान्ति, और एक मनता में बने रह सकते हैं।

      हमारी सभी विविधताओं में, हम सभी मसीह यीशु में अपनी एक मनता को बनाए रखने के लिए सदैव प्रयत्नशील रहें। - डेविड मेक्कैसलैंड

मसीह यीशु का प्रेम विविधता में भी एकता को ला सकता है।

अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। - गलातियों 3:28

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:9-17
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है।
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है।
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।
Colossians 3:15 और मसीह की शान्‍ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।
Colossians 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।
Colossians 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 36-38
  • मत्ती 10:21-42



मंगलवार, 14 जनवरी 2020

जानना और प्रेम



      मसीही आराधना के सबसे प्रचलित गीतों, विशेषकर बच्चों के लिए, में से एक है “Jesus loves me this I know, for the Bible tells me so” (“यीशु मुझ से प्यार करता, यह मैं जानता हूँ, क्योंकि बाइबल मुझे बताती है”)। इस गीत को एन्ना बी. वार्नर ने लगभग 200 वर्ष पहले लिखा था, और इस गीत के बोल बड़ी कोमलता से प्रभु के साथ हमारे संबंध को बताते हैं।

      किसी ने मेरी पत्नी को एक पट्टिका भेंट में दी, जिसमें इस गीत के शब्दों को आगे-पीछे करके उन्हें एक नया अर्थ दिया गया है। उस पट्टिका पर लिखा है, “यीशु मुझे जानता है, और मैं इस से प्यार करता हूँ।” यह प्रभु के साथ हमारे संबंध को एक बिलकुल नया दृष्टिकोण प्रदान करता है – वह हमें जानता है!

      प्राचीन इस्राएल में एक सच्चे चरवाहे और भाड़े के मज़दूर में फर्क उनके भेड़ों को जानने से प्रकट हो जाता था; भेड़ों को जानने वाला और उनसे प्रेम करने वाला ही सच्चा चरवाहा होता था। सच्चा चरवाहा भेड़ों के साथ इतना समय बिताता था कि वह अपनी भेड़ों के बारे में बहुत कुछ जानकारी रखता था और उनकी बहुत दिल से देखभाल करता था। इसी लिए हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि प्रभु यीशु मसीह ने अपने विषय कहा, “अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं...मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं, और मैं उन्हें जानता हूं, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं” (यूहन्ना 10:14, )।

      हमारा प्रभु हमें जानता है और हम से बहुत प्रेम करता है! हमारे प्रति प्रभु के उद्देश्यों पर हम पूर्णतः भरोसा रख सकते हैं और हमारे लिए उसकी देखभाल को लेकर निश्चिन्त रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर पिता का आश्वासन है कि “...क्योंकि तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहिले ही जानता है, कि तुम्हारी क्या क्या आवश्यक्ता है” (मत्ती 6:8)। जब आप आज जीवन के उतार-चढ़ाव का सामना करें, तो शांत तथा आश्वस्त रहें, आपका सच्चा चरवाहा आपको जानता है और आपसे प्रेम रखता है। - बिल क्राउडर

कितनी अद्भुत बात है – प्रभु यीशु मुझ से प्रेम करता है!

यहोवा ने मुझे दूर से दर्शन देकर कहा है। मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करुणा बनाए रखी है। - यिर्मयाह 31:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:7-16
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं।
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी।
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा।
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।
John 10:11 अच्छा चरवाहा मैं हूं; अच्छा चरवाहा भेड़ों के लिये अपना प्राण देता है।
John 10:12 मजदूर जो न चरवाहा है, और न भेड़ों का मालिक है, भेड़िए को आते हुए देख, भेड़ों को छोड़कर भाग जाता है, और भेड़िय़ा उन्हें पकड़ता और तित्तर बित्तर कर देता है।
John 10:13 वह इसलिये भाग जाता है कि वह मजदूर है, और उसको भेड़ों की चिन्‍ता नहीं।
John 10:14 अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं।
John 10:15 इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं।
John 10:16 और मेरी और भी भेड़ें हैं, जो इस भेड़शाला की नहीं; मुझे उन का भी लाना अवश्य है, वे मेरा शब्द सुनेंगी; तब एक ही झुण्ड और एक ही चरवाहा होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 33-35
  • मत्ती 10:1-20



सोमवार, 13 जनवरी 2020

परमेश्वर


      जब मैंने कॉलेज में यूनानी और रोमी पौराणिक कथाएँ पढ़ीं, तो मैं हैरान थी, कि उन कथाओं के देवता कितने तुनक-मिज़ाज थे, और कितनी सरलता से क्रोधित हो जाते थे। जो लोग उनके क्रोध के पात्र बनते थे उनके जीवन नाश हो जाते थे, कभी-कभी तो उन देवताओं की एक सनक के कारण ही।

      उनकी इन बातों को पढ़ने के बाद मैंने उपहास करते हुए सोचा कि कोई ऐसे देवताओं पर कैसे विश्वास कर सकता था? परन्तु फिर मैंने अपने आप से भी प्रश्न किया, “जिस एकमात्र और वास्तविक परमेश्वर पर मैं विश्वास रखती हूँ, क्या उसके प्रति मेरा दृष्टिकोण इससे कुछ विशेष भिन्न है? क्या मैं भी यही नहीं सोचती हूँ कि यदि मैं उसपर कुछ संदेह करूं तो वह भी शीघ्र ही क्रोधित हो जाएगा?” मुझे दुःख के साथ स्वीकार करना पड़ता है कि अपने उन प्रश्नों के लिए मेरा उत्तर था “हाँ!”

      इसीलिए मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में मूसा द्वारा परमेश्वर से किए गए अनुरोध की सराहना करती हूँ। मूसा ने परमेश्वर से निवेदन किया, “मुझे अपना तेज दिखा” (निर्गमन 33:18)। परमेश्वर ने मूसा को एक विशाल जन समूह, इस्राएलियों, का नेतृत्व करने और उन्हें मिस्र की गुलामी से निकालकर ले जाने और कनान में देश में बसाने के लिए चुना था। किन्तु ये इस्राएली अकसर मूसा और परमेश्वर के विरुद्ध कुड़कुड़ाते रहते थे; मूसा जानना चाहता था कि उन इस्राएलियों की प्रवृत्ति को देखते हुए, इस बड़े और कठिन कार्य में क्या परमेश्वर उसकी सहायता करता रहेगा? परमेश्वर ने मूसा के अनुरोध के फलस्वरूप अपनी महिमा को उसपर प्रगट किया, और उसे अपना नाम तथा गुण बताए। परमेश्वर ने अपने विषय कहा, “यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य...” (निर्गमन 34:6)।

      मूसा से कही इस बात के द्वारा मुझे स्मरण आया कि हमारा परमेश्वर पिता आवेश में क्रोधित होकर, लोगों पर टूट पड़ने वाला परमेश्वर नहीं है। यह बहुत शान्तिदायक है, विशेषकर तब जब मैं कितनी ही बार क्रोधित अथवा अधीर होकर उसके विरुद्ध कुछ कटु बोल जाती हूँ या उसपर संदेह करती हूँ। और इसलिए भी क्योंकि उसका आश्वासन है कि वह मुझे धीरे-धीर अपने ही तेजस्वी स्वरुप में ढालता जा रहा है – जिसके लिए उसे मुझे आवश्यकतानुसार काटना, छांटना, और तराशना भी पड़ता है।

      हम अपने जीवनों में ही परमेश्वर की महिमा और हमारे प्रति उसका धैर्य देख सकते हैं – ढलते हुए सूरज का एक सुन्दर दृश्य, किसी मित्र द्वारा प्रोत्साहन और सहारा, और सबसे उत्तम, हमारे अन्दर निवास करने वाले पवित्र-आत्मा की हमारे मार्गदर्शन के लिए कोमल फुसफुसाहट  - ये सभी हमारे जीवनों में परमेश्वर की महिमा और कार्य के चिन्ह हैं। - लिंडा वॉशिंगटन

यद्यपि हम बहुधा बदलते रहते हैं, किन्तु परमेश्वर कभी नहीं बदलता है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: निर्गमन 33:18-19; 34:1-7
Exodus 33:18 उसने कहा मुझे अपना तेज दिखा दे।
Exodus 33:19 उसने कहा, मैं तेरे सम्मुख हो कर चलते हुए तुझे अपनी सारी भलाई दिखाऊंगा, और तेरे सम्मुख यहोवा नाम का प्रचार करूंगा, और जिस पर मैं अनुग्रह करना चाहूं उसी पर अनुग्रह करूंगा, और जिस पर दया करना चांहू उसी पर दया करूंगा।
Exodus 34:1 फिर यहोवा ने मूसा से कहा, पहिली तख्तियों के समान पत्थर की दो और तख्तियां गढ़ ले; तब जो वचन उन पहिली तख्तियों पर लिखे थे, जिन्हें तू ने तोड़ डाला, वे ही वचन मैं उन तख्तियों पर भी लिखूंगा।
Exodus 34:2 और बिहान को तैयार रहना, और भोर को सीनै पर्वत पर चढ़कर उसकी चोटी पर मेरे साम्हने खड़ा होना।
Exodus 34:3 और तेरे संग कोई न चढ़ पाए, वरन पर्वत भर पर कोई मनुष्य कहीं दिखाई न दे; और न भेड़-बकरी और गाय-बैल भी पर्वत के आगे चरते पाएं।
Exodus 34:4 तब मूसा ने पहिली तख्तियों के समान दो और तख्तियां गढ़ी; और बिहान को सवेरे उठ कर अपने हाथ में पत्थर की वे दोनों तख्तियां ले कर यहोवा की आज्ञा के अनुसार पर्वत पर चढ़ गया।
Exodus 34:5 तब यहोवा ने बादल में उतर के उसके संग वहां खड़ा हो कर यहोवा नाम का प्रचार किया।
Exodus 34:6 और यहोवा उसके साम्हने हो कर यों प्रचार करता हुआ चला, कि यहोवा, यहोवा, ईश्वर दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य,
Exodus 34:7 हजारों पीढिय़ों तक निरन्तर करूणा करने वाला, अधर्म और अपराध और पाप का क्षमा करने वाला है, परन्तु दोषी को वह किसी प्रकार निर्दोष न ठहराएगा, वह पितरों के अधर्म का दण्ड उनके बेटों वरन पोतों और परपोतों को भी देने वाला है।

एक साल में बाइबल: 

  • उत्पत्ति 31-32 
  • मत्ती 9:18-38