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शनिवार, 21 नवंबर 2020

मध्यस्थ

 

         एक बड़े शैक्षिक कार्य को समय से पूरा करना मुझ पर बोझ के समान बना हुआ था, और मैं चिंतित थी कि क्या मैं उसे समय से पूरा करने पाऊंगी? मेरी चिंताओं के मध्य में मुझे तीन सन्देश मिले – तीनों मेरे मित्रों द्वारा मुझे प्रोत्साहित करने के लिए भेजे गए थे। प्रत्येक सन्देश में कहा गया कि परमेश्वर ने उस मित्र के हृदय में डाला कि वह  मेरे लिए प्रार्थना करे और मुझे प्रोत्साहित करे। मैंने उन संदेशों के कारण अपने आप को बहुत दीन और प्रोत्साहित पाया कि मेरे ये मित्र, यह जाने बिना ही कि मुझे क्या परेशानी है, परमेश्वर की अगुवाई में मेरे लिए प्रार्थना कर रहे थे, मेरे लिए प्रार्थना में मध्यस्थ और सहायक का कार्य कर रहे थे।

        हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि प्रेरित पौलुस को प्रार्थना की सामर्थ्य का पता था, जब उसने कोरिन्थ की मसीही मण्डली को लिखा कि उसे विश्वास था कि परमेश्वर उन्हें संकटों से बचाता रहेगा जब “तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे” (2 कुरिन्थियों 1:10-11)। और जब परमेश्वर उनकी प्रार्थनाओं का उत्तर देगा तो वह महिमान्वित होगा जब लोग उन बहुतेरों की प्रार्थनाओं के उत्तर के लिए उसके धन्यवादी होंगे (पद 11)।

        मेरे मित्र और पौलुस के समर्थक प्रार्थना में मध्यस्थ होने की सेवकाई में संलग्न थे, जिसे सुप्रसिद्ध मसीही प्रचारक ऑस्वाल्ड चैम्बर्स ने “एक गुप्त सेवकाई जो पिता परमेश्वर को महिमान्वित करने वाले फल लाती है” कहा। जब हम अपने मन और हृदय यीशु पर केन्द्रित करते हैं, तो हम पाते हैं कि वह हमें एक आकार दे रहा है, हमें प्रार्थना करना तथा साथ ही औरों के लिए मध्यस्थता करना भी सिखा रहा है। वह हमें सक्षम करता है कि हम मित्रों, परिवार जनों, और यहाँ तक कि अजनबियों के लिए भी प्रार्थनाएँ करें, उनके लिए भी मध्यस्थ होने की भूमिका को निभाएं।

        क्या आज परमेश्वर ने किसी के लिए आपके मन में बोझ डाला है कि आप उसके लिए मध्यस्थ बनें और उसे प्रार्थना में परमेश्वर के सामने उठाएँ? – एमी बाउचर पाई

 

परमेश्वर अपने लोगों की प्रार्थनाएँ सुनता है।


और हर समय और हर प्रकार से आत्मा में प्रार्थना, और बिनती करते रहो, और इसी लिये जागते रहो, कि सब पवित्र लोगों के लिये लगातार बिनती किया करो। - इफिसियों 6:18

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 1:8-11

2 कुरिन्थियों 1:8 हे भाइयों, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो, जो आसिया में हम पर पड़ा, कि ऐसे भारी बोझ से दब गए थे, जो हमारी सामर्थ्य से बाहर था, यहां तक कि हम जीवन से भी हाथ धो बैठे थे।

2 कुरिन्थियों 1:9 वरन हम ने अपने मन में समझ लिया था, कि हम पर मृत्यु की आज्ञा हो चुकी है कि हम अपना भरोसा न रखें, वरन परमेश्वर का जो मरे हुओं को जिलाता है।

2 कुरिन्थियों 1:10 उसी ने हमें ऐसी बड़ी मृत्यु से बचाया, और बचाएगा; और उस से हमारी यह आशा है, कि वह आगे को भी बचाता रहेगा।

2 कुरिन्थियों 1:11 और तुम भी मिलकर प्रार्थना के द्वारा हमारी सहायता करोगे, कि जो वरदान बहुतों के द्वारा हमें मिला, उसके कारण बहुत लोग हमारी ओर से धन्यवाद करें।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3

शुक्रवार, 20 नवंबर 2020

परिस्थितियाँ


         जब अफ्रीका के घाना देश में तानो नदी पर बना एक पुल बह गया तो तानो नदी के बार नए क्रोबो नगर के निवासी उस पार ही फंसे रह गए। नदी के इस पार पास्टर सैम्यूएल अप्पियाह के चर्च में लोगों की उपस्थिति भी बहुत कम हो गई क्योंकि उनके चर्च के बहुत से सदस्य नदी के उस पार नए क्रोबो नगर में रहते थे।

         उस समय पास्टर सैम्यूएल चर्च के बच्चों की देखभाल करने वाले स्थान को बढ़ाने के लिए कार्य कर रहे थे, जिससे और भी अधिक अनाथ बच्चों की देखभाल की जा सके। ऐसे में उनके चर्च ने नदी के पार ही नए क्रोबो नगर में खुले स्थान में चर्च की सभाएं आयोजित करने का निर्णय लिया। सभाओं के आरंभ होने के पश्चात शीघ्र ही नए मसीही विश्वासी चर्च के साथ जुड़ने लगे, वहाँ उस पार एक नया चर्च बनने लगा, और पास्टर सैम्यूएल के पास अनाथों के लिए शरणस्थान बनाने के लिए बड़ा स्थान भी उपलब्ध हो गया। उन कठिन परिस्थितियों में होकर भी परमेश्वर अपने रचनात्मक निर्माण कार्यों को पूरा कर रहा था।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में, जब पौलुस को पकड़ कर बंदीगृह में डाल दिया गया, तो उसने अपनी परिस्थितियों के लिए विलाप नहीं किया। बंदीगृह से लिखी गई अपनी प्रबल पत्रियों के द्वारा पौलुस ने कई कलीसियाओं और लोगों को प्रोत्साहित किया और शिक्षाएँ दीं। फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी पत्री में पौलुस लिखता है “हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है” (फिलिप्पियों 1:12)। पौलुस ने बताया कि कैसे उसके बेड़ियों में डाले जाने के कारण “कैसरी राज्य की सारी पलटन” मसीह यीशु के विषय में जानने पाई है (पद 13), तथा औरों की हिम्मत बढ़ी है कि वे भी प्रभु यीशु का सुसमाचार प्रचार करें (पद 14)।

         परिस्थितियों और कठिनाइयों के बावजूद, पास्टर सैम्यूएल और पौलुस, दोनों ने देखा कि कैसे परमेश्वर उन्हें नए तरीकों से सेवकाई के लिए उपयोग कर रहा है। आज हमारी परिस्थितियों के द्वारा परमेश्वर हम से क्या सेवकाई लेना चाहता है? – टिम गुस्ताफसन

 

परमेश्वर सभी मानवीय गड़बड़ी में भी अपना कार्य करता रहता है। 

बाइबल का यही सन्देश है। - मैट शैंडलर


और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:12-18

फिलिप्पियों 1:12 हे भाइयों, मैं चाहता हूं, कि तुम यह जान लो, कि मुझ पर जो बीता है, उस से सुसमाचार ही की बढ़ती हुई है।

फिलिप्पियों 1:13 यहां तक कि कैसरी राज्य की सारी पलटन और शेष सब लोगों में यह प्रगट हो गया है कि मैं मसीह के लिये कैद हूं।

फिलिप्पियों 1:14 और प्रभु में जो भाई हैं, उन में से बहुधा मेरे कैद होने के कारण, हियाव बान्ध कर, परमेश्वर का वचन निधड़क सुनाने का और भी हियाव करते हैं।

फिलिप्पियों 1:15 कितने तो डाह और झगड़े के कारण मसीह का प्रचार करते हैं और कितने भली मनसा से।

फिलिप्पियों 1:16 कई एक तो यह जान कर कि मैं सुसमाचार के लिये उत्तर देने को ठहराया गया हूं प्रेम से प्रचार करते हैं।

फिलिप्पियों 1:17 और कई एक तो सिधाई से नहीं पर विरोध से मसीह की कथा सुनाते हैं, यह समझ कर कि मेरी कैद में मेरे लिये क्लेश उत्पन्न करें।

फिलिप्पियों 1:18 सो क्या हुआ? केवल यह, कि हर प्रकार से चाहे बहाने से, चाहे सच्चाई से, मसीह की कथा सुनाई जाती है, और मैं इस से आनन्दित हूं, और आनन्दित रहूंगा भी।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2

गुरुवार, 19 नवंबर 2020

स्पष्ट संवाद


         एक बार मुझे पचास मील तक गाड़ी चला कर दूर रहने और काम करने वाले कंपनी के एक कार्यकर्ता के साथ बातचीत करने के लिए जाना पड़ा। मुझे एक अन्य कार्यकर्ता से समाचार मिला था कि वो हमारी कंपनी के विषय अनुचित बातें कह रहा था, और मुझे इससे हमारी कंपनी के नाम और साख़ के बिगड़ जाने की चिंता थी। मुझे लगा कि मुझे उससे स्पष्ट संवाद करना चाहिए, जिससे उसे अपनी राय बदलनी पड़े।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में 1 शमूएल 25 अध्याय में एक अनहोने व्यक्ति ने गंभीर व्यक्तिगत जोखिम उठाकर इस्राएल के भावी राजा का, जो कि एक बहुत गलत चुनाव करके कार्य करने वाला था, सामना करने का निर्णय लिया। अबीगैल का विवाह नाबाल से हो रखा था, जो अपने नाम के अर्थ “मूर्ख” अनुरूप चरित्र वाला व्यक्ति था। दाऊद और उसके साथ के लोग नाबाल के लोगों और भेड़-बकरियों आदि की रक्षा करते रहे थे, जिसके लिए उन्हें आशा थी कि नाबाल उन्हें पारंपरिक रीति से दी जाने वाली भेंट दे देगा (पद 10, 11), परन्तु नाबाल ने न केवल माँगने पर भी वह भेंट देने से इनकार किया, वरन साथ ही दाऊद का अपमान भी किया। नाबाल के इस व्यवहार से रुष्ट होकर दाऊद उसके पास उसे सबक सिखाने जाने के लिए निकला, और बहुत संभव था कि वह नाबाल को मार ही डालता। अबीगैल को जब इस बात का पता चला, और यह जानते हुए कि उसका मूर्ख पति समझ-बूझ की बात नहीं सुनेगा, अबीगैल ने आगे जाकर दाऊद से भेंट की, उससे शान्ति बनाए रखने तथा अपने निर्णय पर पुनःविचार करने का आग्रह किया और उसे भेंट दे दी।

         अबीगैल का दाऊद के साथ प्रयास सफल रहा; उसके इस सफल संवाद का भेद क्या था? उसने सबसे पहले आगे भोजन वस्तुओं की भेंट भेजकर दाऊद और उसके साथियों के प्रति अपने पति के ऋण को चुकाया, और फिर उसने दाऊद के साथ स्पष्ट और सच्ची बात की। उसने बुद्धिमानी के साथ दाऊद को स्मरण करवाया कि परमेश्वर ने उसे क्यों बुलाया था और परमेश्वर के लिए उसकी सेवकाई क्या थी। इन बातों को ध्यान में रखते हुए दाऊद को प्रतिशोध लेने और नाबाल को मारने से पीछे हट जाने का अनुरोध किया, जिससे दाऊद को बाद में अपने विवेक पर अकारण हत्या का दोष न रखना पड़े, और ऐसा करने के लिए पछताना नहीं पड़े (पद 31)।

         संभव है कि आप भी किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जो कोई गलत निर्णय लेने के बहुत निकट है, जिससे उसकी तथा औरों की हानि हो सकती है, या वह परमेश्वर के लिए उसकी सेवकाई में अप्रभावी हो सकता है। अबीगैल के समान, क्या परमेश्वर आपको भी किसी से स्पष्ट संवाद करने के लिए कह रहा है? – एलीसा मॉर्गन

 

कभी-कभी परमेश्वर का अनुसरण करने का अर्थ होता है स्पष्ट संवाद करना।


परन्तु तुम्हारी बात हां की हां, या नहीं की नहीं हो; क्योंकि जो कुछ इस से अधिक होता है वह बुराई से होता है। - मत्ती 5:37

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 25:21-35

 1 शमूएल 25:21 दाऊद ने तो सोचा था, कि मैं ने जो जंगल में उसके सब माल की ऐसी रक्षा की कि उसका कुछ भी न खोया, यह नि:सन्देह व्यर्थ हुआ; क्योंकि उसने भलाई के बदले मुझ से बुराई ही की है।

1 शमूएल 25:22 यदि बिहान को उजियाला होने तक उस जन के समस्त लोगों में से एक लड़के को भी मैं जीवित छोड़ूं, तो परमेश्वर मेरे सब शत्रुओं से ऐसा ही, वरन इस से भी अधिक करे।

1 शमूएल 25:23 दाऊद को देख अबीगैल फुर्ती कर के गदहे पर से उतर पड़ी, और दाऊद के सम्मुख मुंह के बल भूमि पर गिरकर दण्डवत की।

1 शमूएल 25:24 फिर वह उसके पांव पर गिर के कहने लगी, हे मेरे प्रभु, यह अपराध मेरे ही सिर पर हो; तेरी दासी तुझ से कुछ कहना चाहती है, और तू अपनी दासी की बातों को सुन ले।

1 शमूएल 25:25 मेरा प्रभु उस दुष्ट नाबाल पर चित्त न लगाए; क्योंकि जैसा उसका नाम है वैसा ही वह आप है; उसका नाम तो नाबाल है, और सचमुच उस में मूढ़ता पाई जाती है; परन्तु मुझ तेरी दासी ने अपने प्रभु के जवानों को जिन्हें तू ने भेजा था न देखा था।

1 शमूएल 25:26 और अब, हे मेरे प्रभु, यहोवा के जीवन की शपथ और तेरे जीवन की शपथ, कि यहोवा ने जो तुझे खून से और अपने हाथ के द्वारा अपना पलटा लेने से रोक रखा है, इसलिये अब तेरे शत्रु और मेरे प्रभु की हानि के चाहने वाले नाबाल ही के समान ठहरें।

1 शमूएल 25:27 और अब यह भेंट जो तेरी दासी अपने प्रभु के पास लाई है, उन जवानों को दी जाए जो मेरे प्रभु के साथ चलते हैं।

1 शमूएल 25:28 अपनी दासी का अपराध क्षमा कर; क्योंकि यहोवा निश्चय मेरे प्रभु का घर बसाएगा और स्थिर करेगा, इसलिये कि मेरा प्रभु यहोवा की ओर से लड़ता है; और जन्म भर तुझ में कोई बुराई नहीं पाई जाएगी।

1 शमूएल 25:29 और यद्यपि एक मनुष्य तेरा पीछा करने और तेरे प्राण का ग्राहक होने को उठा है, तौभी मेरे प्रभु का प्राण तेरे परमेश्वर यहोवा की जीवन रूपी गठरी में बन्धा रहेगा, और तेरे शत्रुओं के प्राणों को वह मानो गोफन में रखकर फेंक देगा।

1 शमूएल 25:30 इसलिये जब यहोवा मेरे प्रभु के लिये यह समस्त भलाई करेगा जो उसने तेरे विषय में कही है, और तुझे इस्राएल पर प्रधान कर के ठहराएगा,

1 शमूएल 25:31 तब तुझे इस कारण पछताना न होगा, तथा मेरे प्रभु का हृदय पीड़ित न होगा कि तू ने अकारण खून किया, और मेरे प्रभु ने अपना पलटा आप लिया है। फिर जब यहोवा मेरे प्रभु से भलाई करे तब अपनी दासी को स्मरण करना।

1 शमूएल 25:32 दाऊद ने अबीगैल से कहा, इस्राएल का परमेश्वर यहोवा धन्य है, जिसने आज के दिन मुझ से भेंट करने के लिये तुझे भेजा है।

1 शमूएल 25:33 और तेरा विवेक धन्य है, और तू आप भी धन्य है, कि तू ने मुझे आज के दिन खून करने और अपना पलटा आप लेने से रोक लिया है।

1 शमूएल 25:34 क्योंकि सचमुच इस्राएल का परमेश्वर यहोवा, जिसने मुझे तेरी हानि करने से रोका है, उसके जीवन की शपथ, यदि तू फुर्ती कर के मुझ से भेंट करने को न आती, तो नि:सन्देह बिहान को उजियाला होने तक नाबाल का कोई लड़का भी न बचता।

1 शमूएल 25:35 तब दाऊद ने उसे ग्रहण किया जो वह उसके लिये लाई थी; फिर उस से उसने कहा, अपने घर कुशल से जा; सुन, मैं ने तेरी बात मानी है और तेरी बिनती ग्रहण कर ली है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1

बुधवार, 18 नवंबर 2020

मार्गदर्शन

 

         साइमन को जब कार्य-स्थल पर एक नई भूमिका निभाने का अवसर मिला तो उसे लगा कि यह परमेश्वर द्वारा दिया गया अवसर है। इस निर्णय के विषय प्रार्थना करने और परामर्श लेने के बाद उसे लगा कि परमेश्वर चाहता है कि वह इस अवसर को स्वीकार कर ले तथा और बड़ी चुनौतियों को उठाए। सब कुछ ठीक से होता लग रहा था, और उसके अफसर ने भी उसके इस निर्णय को सराहा और उसे इसके लिए प्रोत्साहित किया। फिर बात बिगड़ने लगी। उसके कुछ सहकर्मियों को उसकी इस तरक्की से ईर्ष्या हुई और उन्होंने उसके साथ सहयोग करना बन्द कर दिया। साइमन सोचने लगा कि क्या उसे अपने कदम वापस ले लेने चाहिएँ।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि जब इस्राएली परमेश्वर के घर के पुनःनिर्माण के लिए यरूशलेम लौट कर आए तब उनके शत्रुओं ने उन्हें धमकाना और निराश करना चाहा (एज्रा 4:4)। पहले तो इस्राएलियों ने कार्य रोक दिया, परन्तु हाग्गै तथा ज़कर्याह भविष्यद्वक्ताओं के द्वारा परमेश्वर से प्रोत्साहन प्राप्त करने के बाद उन्होंने कार्य को फिर से आरंभ कर दिया (एज्रा 4:24-5:2)।

         एक बार फिर शत्रु उन्हें तंग करने के लिए आए, परन्तु इस बार वे कार्य में लगे रहे, क्योंकि उन्हें पता था कि उनका परमेश्वर उन पर दृष्टि बनाए हुए है और उनकी देखभाल कर रहा है (एज्रा 5:5)। वे परमेश्वर के निर्देशों को दृढ़ता के साथ थामे रहे और अपने भरोसे को बनाए रखा कि हर विरोध में परमेश्वर उनका मार्गदर्शन करता रहेगा और उन्हें सफल करेगा। यही हुआ, और परमेश्वर ने फारस के राजा को मंदिर के निर्माण को पूरा करने में उनकी सहायता करने के लिए उभारा (पद 13-14)।

         इसी प्रकार से साइमन ने भी परमेश्वर से बुद्धिमत्ता माँगी, कि वह निर्णय ले सके, कि उसे वहीं रहना है या किसी अन्य स्थान पर जाना है। जब उसे लगा कि परमेश्वर चाहता है कि वह वहीं बना रहे, तो उसने परमेश्वर के मार्गदर्शन पर भरोसा किया, परमेश्वर से दृढ़ बने रहने के लिए सामर्थ्य माँगी। धीरे-धीरे, समय के साथ उसके साथियों का विरोध घटता गया और वे उसे स्वीकार करते चले गए।

         जब हम परमेश्वर का अनुसरण करने का प्रयास करते हैं, तो वह हमें जहाँ भी रखता है, संभव है कि हमें वहाँ लोगों के प्रतिरोध का सामना करना पड़े। यही वह समय होता है जब हमें परमेश्वर के मार्गदर्शन का पालन करना चाहिए। वह हर परिस्थिति से हमें अपने मार्गदर्शन में निकालते हुए ले जाएगा। - लेसली कोह

 

दृढ़ बने रहो, क्योंकि परमेश्वर की दृष्टि तुम पर बनी हुई है।


देखो, यहोवा की दृष्टि उसके डरवैयों पर और उन पर जो उसकी करुणा की आशा रखते हैं बनी रहती है - भजन 33:18

बाइबल पाठ: एज्रा 5:1-5

एज़्रा 5:1 तब हाग्गै नामक नबी और इद्दो का पोता जकर्याह यहूदा और यरूशलेम के यहूदियों से नबूवत करने लगे, उन्होंने इस्राएल के परमेश्वर के नाम से उन से नबूवत की।

एज़्रा 5:2 तब शालतीएल का पुत्र जरुब्बाबेल और योसादाक का पुत्र येशू, कमर बान्ध कर परमेश्वर के भवन को जो यरूशलेम में है बनाने लगे; और परमेश्वर के वे नबी उनका साथ देते रहे।

एज़्रा 5:3 उसी समय महानद के इस पार का तत्तनै नाम अधिपति और शतर्बोजनै अपने सहचरियों समेत उनके पास जा कर यों पूछने लगे, कि इस भवन के बनाने और इस शहरपनाह के खड़े करने की किस ने तुम को आज्ञा दी है?

एज़्रा 5:4 तब हम लोगों से यह कहा, कि इस भवन के बनाने वालों के क्या क्या नाम हैं?

एज़्रा 5:5 परन्तु यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही, इसलिये जब तक इस बात की चर्चा दारा से न की गई और इसके विषय चिट्ठी के द्वारा उत्तर न मिला, तब तक उन्होंने इन को न रोका।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13

मंगलवार, 17 नवंबर 2020

स्पर्श

 

         भारत में सेवा करने वाले, बीसवीं सदी के मिशनरी चिकित्सक डॉक्टर पॉल ब्रैंड रोग के कारण कोढ़ियों के बिगड़े हुए हाथों और पैरों के ऑपरेशनों के द्वारा इलाज के तरीकों के लिए विश्व-विख्यात हैं। उनके जीवन की एक घटना है, जब एक कोढ़ी मनुष्य की जाँच करते समय उन्होंने उसे स्पर्श करके उसे समझाना चाहा कि उसका इलाज किया जा सकता है, तो उनके द्वारा स्पर्श करने के साथ ही वह मरीज़ रोने लग गया। वहाँ उपस्थिति एक सहायक ने डॉक्टर ब्रैंड को समझाया कि उसके रोग के कारण वर्षों से किसी ने उस कोढ़ के मरीज़ को स्पर्श नहीं किया था; डॉक्टर ब्रैंड द्वारा उसे स्पर्श किए जाने से उसकी आँखों में खुशी के आँसू थे।

         परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि अपनी सेवकाई के आरंभिक समय में प्रभु यीशु के पास भी एक कोढ़ी मनुष्य आया – उन दिनों त्वचा के अनेकों प्रकार के संक्रामक रोगों को “कोढ़” कह दिया जाता था। उसके उस रोग के कारण, पुराने नियम की व्यवस्था के अनुसार, उसे समाज से बाहर रहना होता था। यदि उस रोगी के पास कोई स्वस्थ लोग आ जाते थे तो उसे “अशुद्ध! अशुद्ध!” चिल्ला कर उन्हें बताना होता था कि वे उससे दूरी बनाए रखें (लैव्यव्यवस्था 13:45-46)। परिणामस्वरूप व्यक्ति को महीनों या वर्षों तक अन्य मनुष्यों के संपर्क से दूर रहना होता था।

         दया और प्रेम से भरकर प्रभु यीशु ने अपना हाथ बढ़ाया और उस मनुष्य को स्पर्श किया। प्रभु यीशु के पास सामर्थ्य और अधिकार था कि केवल कहने भर से वह चंगा कर सकता था (मरकुस 2:11-12)। परन्तु, जब प्रभु यीशु के सामने ऐसा व्यक्ति आया जिसके रोग के कारण वह अकेला और तिरस्कृत कर दिया गया था, तो उसके द्वारा स्पर्श किए जाने से उस व्यक्ति को यह आश्वासन मिला कि वह अकेला नहीं है, अपितु स्वीकृत है।

         परमेश्वर जब और जैसे हमें अवसर दे, हम भी अनुग्रह दिखा सकते हैं, एक कोमल स्पर्श के द्वारा व्यक्ति के प्रति आदर और मान व्यक्त कर सकते हैं। मानवीय स्पर्श की सहज उपचार शक्ति दुखी लोगों को यह दिखाने में बहुत सहायक होती है कि प्रभु के समान, हम भी उनकी चिंता करते हैं, वे हमें स्वीकृत हैं। - लीसा सामरा

 

औरों की देखभाल करने में स्पर्श का भी बहुत महत्व है।


और उसने उस से मेरे मुंह को छूकर कहा, देख, इस ने तेरे होंठों को छू लिया है, इसलिये तेरा अधर्म दूर हो गया और तेरे पाप क्षमा हो गए। - यशायाह 6:7

बाइबल पाठ: मरकुस 1:40-45

मरकुस 1:40 और एक कोढ़ी ने उसके पास आकर, उस से बिनती की, और उसके सामने घुटने टेककर, उस से कहा; यदि तू चाहे तो मुझे शुद्ध कर सकता है।

मरकुस 1:41 उसने उस पर तरस खाकर हाथ बढ़ाया, और उसे छूकर कहा; मैं चाहता हूं तू शुद्ध हो जा।

मरकुस 1:42 और तुरन्त उसका कोढ़ जाता रहा, और वह शुद्ध हो गया।

मरकुस 1:43 तब उसने उसे चिताकर तुरन्त विदा किया।

मरकुस 1:44 और उस से कहा, देख, किसी से कुछ मत कहना, परन्तु जा कर अपने आप को याजक को दिखा, और अपने शुद्ध होने के विषय में जो कुछ मूसा ने ठहराया है उसे भेंट चढ़ा, कि उन पर गवाही हो।

मरकुस 1:45 परन्तु वह बाहर जा कर इस बात को बहुत प्रचार करने और यहां तक फैलाने लगा, कि यीशु फिर खुल्लमखुल्ला नगर में न जा सका, परन्तु बाहर जंगली स्थानों में रहा; और चारों ओर से लोग उसके पास आते रहे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12


सोमवार, 16 नवंबर 2020

धन्यवाद

 

         ग्रीटिंग कार्ड्स पर छपे हज़ारों भावनापूर्ण संदेशों में संभवतः सबसे मर्मस्पर्शी है यह साधारण सा वाक्य: “तुम जो हो उसके लिए धन्यवाद। ”यदि आपको इस सन्देश वाला कार्ड मिले तो आप जान जाते हैं कि कोई आपकी परवाह करता है, इसलिए नहीं क्योंकि आपने उस व्यक्ति के लिए कुछ अद्भुत किया है, परन्तु क्योंकि वह व्यक्ति आपको आपके गुणों के लिए सराहता है।

         मैं यह भी सोचता हूँ कि क्या इस प्रकार की भावना व्यक्त करना, हमारा परमेश्वर को धन्यवाद कहने का सर्वोत्तम तरीका हो सकता है। निःसंदेह ऐसे अवसर होते हैं जब परमेश्वर हमारे जीवनों में स्पष्ट रीति से हस्तक्षेप करता है, और हम कुछ इस प्रकार का कहते हैं, “प्रभु आपका धन्यवाद हो कि आपने मुझे यह नौकरी मिलने में सहायता की।”  परन्तु अधिकांशतः हम केवल इतना भी कह सकते हैं, “प्रभु परमेश्वर, आप जो हैं, वह होने के लिए धन्यवाद।”

         यही भावना परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे परमेश्वर के प्रति धन्यवाद के पदों के पीछे की भावना को भी व्यक्त करती है, जैसे कि “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; उसकी करुणा सदा की है”(1 इतिहास 16:34) – परमेश्वर आप जो हैं – भले और प्रेमी, उसके लिए आपका धन्यवाद हो। और, “मैं यहोवा के धर्म के अनुसार उसका धन्यवाद करूंगा, और परम-प्रधान यहोवा के नाम का भजन गाऊंगा” (भजन 7:17) – परमेश्वर आप जो हैं – पवित्र और धर्मी, उसके लिए आपका धन्यवाद हो। तथा, हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएं, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें! क्योंकि यहोवा महान ईश्वर है, और सब देवताओं के ऊपर महान राजा है” (भजन 95:2-3) – परमेश्वर आप जो हैं – सृष्टि के एकमात्र एवं सर्वशक्तिमान सृष्टिकर्ता परमेश्वर, उसके लिए आपका धन्यवाद हो।

         परमेश्वर जो है – वही पर्याप्त कारण है कि हम उसका धन्यवाद और स्तुति करें। परमेश्वर आप जो हैं, उसके लिए आपका धन्यवाद हो। - डेव ब्रैनन

 

परमेश्वर का धन्यवाद करने के असंख्य कारण है; जो वो है वह भी उन में सम्मिलित है।


हे यहोवा परमेश्वर मैं अपने पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा; मैं तेरे सब आश्चर्य कर्मों का वर्णन करूंगा। - भजन 9:1

बाइबल पाठ: भजन 95:1-7

भजन संहिता 95:1 आओ हम यहोवा के लिये ऊंचे स्वर से गाएं, अपने उद्धार की चट्टान का जयजयकार करें!

भजन संहिता 95:2 हम धन्यवाद करते हुए उसके सम्मुख आएं, और भजन गाते हुए उसका जयजयकार करें!

भजन संहिता 95:3 क्योंकि यहोवा महान ईश्वर है, और सब देवताओं के ऊपर महान राजा है।

भजन संहिता 95:4 पृथ्वी के गहरे स्थान उसी के हाथ में हैं; और पहाड़ों की चोटियां भी उसी की हैं।

भजन संहिता 95:5 समुद्र उसका है, और उसी ने उसको बनाया, और स्थल भी उसी के हाथ का रचा है।

भजन संहिता 95:6 आओ हम झुक कर दण्डवत करें, और अपने कर्ता यहोवा के सामने घुटने टेकें!

भजन संहिता 95:7 क्योंकि वही हमारा परमेश्वर है, और हम उसकी चराई की प्रजा, और उसके हाथ की भेड़ें हैं। भला होता, कि आज तुम उसकी बात सुनते!

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40

रविवार, 15 नवंबर 2020

विकर्षण

 

         इंग्लैंड के विक्टोरियन काल के एक चित्रकार सिगिस्मंड गोएत्ज़े ने अपने समय के लोगों को एक चित्र के द्वारा चौंका दिया। चित्र का शीर्षक था “Despised and Rejected of Men”(मनुष्यों द्वारा तुच्छ जाना तथा तिरस्कार किया हुआ)। इस चित्र में उसने दुःख झेल रहे और दोषी ठहराए गए प्रभु यीशु को, गोएत्ज़े के ही समय के लोगों से घिरा हुआ दिखाया गया है। वे सभी लोग अपनी ही रुचि की बातों – व्यापार, रोमांस, राजनीति, आदि में इतने संलग्न थे कि वे उद्धारकर्ता द्वारा दिए गए बलिदान के प्रति पूर्णतः उदासीन और अनजान थे। मसीह के प्रति उदासीन होने के कारण, उसे घेरे हुई उस भीड़ को, प्रभु यीशु के क्रूस के नीचे एकत्रित हुई भीड़ के समान, ज़रा भी ध्यान नहीं था कि उन्होंने क्या और किसे खो दिया है।

         हमारे वर्तमान समय में भी, मसीही विश्वासी और अविश्वासी दोनों ही का ध्यान अनन्त से भटक सकता है। प्रभु यीशु मसीह के अनुयायी ध्यान भटकाने वाले विकर्षणों की धुंध को परमेश्वर के प्रेम की सच्चाई के द्वारा किस प्रकार मिटा सकते हैं? परमेश्वर की संतान होने के नाते, हम एक दूसरे से प्रेम के करने के द्वारा आरंभ कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु ने कहा, यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो” (यूहन्ना 13:35)।

         परन्तु सच्चा प्रेम यहीं आकर रुक नहीं जाता है। हम उस प्रेम को और विस्तृत करते हैं, प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार के सुसमाचार को औरों के साथ साझा करने के द्वारा जिससे लोग समस्त जगत के सभी लोगों के उद्धारकर्ता की ओर आकर्षित होने पाएं। जैसे कि पौलुस ने लिखा, हम मसीह के राजदूत हैं (2 कुरिन्थियों 5:20)।

         ऐसा करने से मसीह की देह, उसकी कलीसिया, परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित भी कर सकती है और दूसरों तक पहुँचा भी सकती है, क्योंकि परमेश्वर के प्रेम की संसार को बहुत आवश्यकता है। काश पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से प्रभु के प्रेम को अपने जीवनों के द्वारा दिखाने के द्वारा हम मसीह यीशु में सेंत-मेंत मिलाने वाले उद्धार से लोगों का ध्यान भटकाने वाले विकर्षणों को मिटा सकें, और सुसमाचार की आवश्यकता को प्रस्तुत कर सकें। - बिल क्राउडर

 

प्रभु यीशु में उद्धार का सुसमाचार, विकर्षणों की धुंध में ज्योति चमकाता है।


सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो। - 2 कुरिन्थियों 5:20

बाइबल पाठ: यूहन्ना 13:31-35

यूहन्ना 13:31 जब वह बाहर चला गया तो यीशु ने कहा; अब मनुष्य पुत्र की महिमा हुई, और परमेश्वर की महिमा उस में हुई।

यूहन्ना 13:32 और परमेश्वर भी अपने में उस की महिमा करेगा, वरन तुरन्त करेगा।

यूहन्ना 13:33 हे बालकों, मैं और थोड़ी देर तुम्हारे पास हूं: फिर तुम मुझे ढूंढोगे, और जैसा मैं ने यहूदियों से कहा, कि जहां मैं जाता हूं, वहां तुम नहीं आ सकते वैसा ही मैं अब तुम से भी कहता हूं।

यूहन्ना 13:34 मैं तुम्हें एक नई आज्ञा देता हूं, कि एक दूसरे से प्रेम रखो: जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो।

यूहन्ना 13:35 यदि आपस में प्रेम रखोगे तो इसी से सब जानेंगे, कि तुम मेरे चेले हो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19