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बुधवार, 19 मई 2021

सीधा

 

          हमें ज्ञात हुआ कि चर्च के भवन की छत की ऊँची मीनार के टेढ़े हो जाने से लोग घबरा जाते हैं। हम कुछ मित्रों से मिलने गए हुए थे, और बात-चीत के दौरान उन्होंने बताया कि कैसे एक भयानक तूफ़ान के बाद उनके चर्च भवन की छत पर बनी मीनार कुछ टेढ़ी हो गई, जिससे लोग घबरा गए। निःसंदेह चर्च के लोगों ने तुरंत ही उसकी मरम्मत भी करवा दी, किन्तु उस हास्यास्पद चित्रण ने मेरे मन में कुछ विचार भी उत्पन्न किए। अकसर चर्च को एक ऐसा स्थान समझा जाता है जहाँ पर सब कुछ बिलकुल ठीक और व्यवस्थित हो। वह ऐसा स्थान नहीं होता है जहाँ पर हम ‘टेढ़े या अव्यवस्थित दशा में आ जाएँ। है न?

          किन्तु पाप में गिरे और टूटे हुए इस संसार में, हम सभी किसी न किसी रीति से ‘टेढ़े हैं; हम सभी में अपनी कमजोरियों और बुराइयों का संग्रह है। हमें अपनी इन दुर्बलताओं को छिपाए रखने का प्रलोभन रहता है, परन्तु पवित्र शास्त्र हमें इससे विपरीत करने के लिए कहता है। उदाहरण के लिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में, 2 कुरिन्थियों 12 अध्याय में, पौलुस यह सुझाव देता है कि यह हमारी दुर्बलताओं में ही होता है कि मसीह अपनी सर्वाधिक सामर्थ्य हम में होकर प्रगट करता है – और फिर वह अपनी एक अनाम दुर्बलता के साथ संघर्ष – “शरीर में एक काँटा” (पद 7) का उल्लेख करता है। प्रभु ने पौलुस से कहा,मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है” (पद 9)। इसलिए पौलुस का निष्कर्ष था,इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं” (पद 10)।

          हमें अपनी दुर्बलताएं पसन्द तो नहीं आएँगी, किन्तु उन्हें छिपाने के द्वारा हम उनमें होकर मसीह की सामर्थ्य को हमारे जीवनों में काम करने देने से बाधित करते हैं। जब हम प्रभु यीशु को अपने जीवनों के ‘टेढ़े क्षेत्रों में आमंत्रित करते हैं, तो वह कोमलता के साथ उन्हें सीधा करता है, और हमें उनसे छुड़ाकर ऐसा नया बनाता जैसा हम अपने प्रयासों से कभी नहीं कर पाते। - एडम होल्ज़

 

सुधार कर सीधे किए जाने के लिए, प्रभु यीशु को अपने टेढ़ेपन में आमंत्रित करें।


केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। - रोमियों 5:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10

2 कुरिन्थियों 12:1 यद्यपि घमण्ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशनों की चर्चा करूंगा।

2 कुरिन्थियों 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया।

2 कुरिन्थियों 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है।

2 कुरिन्थियों 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं।

2 कुरिन्थियों 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्ड न करूंगा।

2 कुरिन्थियों 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तौभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे।

2 कुरिन्थियों 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशनों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं।

2 कुरिन्थियों 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए।

2 कुरिन्थियों 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ्य निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ्य मुझ पर छाया करती रहे।

2 कुरिन्थियों 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

 

एक साल में बाइबल: 

  • इतिहास 7-9
  • यूहन्ना 6:22-44


मंगलवार, 18 मई 2021

साथ

 

            मैं अपने बच्चों के साथ पैदल यात्रा पर निकली थी, और हमें मार्ग में उगने वाले लचीले हरे पौधों के छोटे गुच्छे दिखाई दिए। वहाँ लगे एक संकेत चिह्न के अनुसार, उस पौधे को डियर मौस कहते हैं, किन्तु वह वास्तव में मौस नहीं है। वह एक प्रकार का लाइकिन है जो कि फफूंद और काई कि कुछ विशेष किस्मों के एक साथ मिलकर रहने से बनता है, और उन दोनों में परस्पर ऐसा संबंध होता है कि वे एक दूसरे से लाभ प्राप्त करते हैं। अपने आप में उनमें से कोई एक भी जीवित नहीं रह सकता है, किन्तु साथ मिलाकर उगने से वे एक ऐसा मजबूत पौधा बनाते हैं जो उच्च पर्वतीय क्षेत्रों और बर्फ में भी 4500  वर्ष तक भी जीवित रह सकते हैं। क्योंकि यह पौधा सूखे और बहुत ठण्डे वातावरण को भी सहन कर सकता है, इसलिए यह कठोर ठण्ड में उस इलाके में पाए जाने वाले बारहसिंगे की रेनडियर प्रजाति के भोजन का एक मुख्य स्त्रोत होते हैं।

फफूंद और काई के इस प्रकार साथ मिलकर जीवित रहने से मुझे हमारे मानवीय संबंधों का ध्यान आता है। हम मनुष्य भी एक-दूसरे पर निर्भर करते हैं। उन्नति और विकास करने के लिए हमें एक दूसरे के साथ सहायक होने के संबंध में होना आवश्यक ही। 

परमेश्वर के वचन बाइबल में कुलुस्से की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में पौलुस वर्णन करता है कि हमारा परस्पर संबंध कैसा होना चाहिए। हमें "इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो" (कुलुस्सियों 3:12)। हमें एक दूसरे को क्षमा करने वाले और एक ही देह के अंगों के समान साथ मिलकर शान्ति से रहने वाले होना चाहिए (पद 15)। 

अपने परिवारों, मित्रों, आस-पास के लोगों के साथ हमेशा ही शान्ति से रह पाना सहज नहीं होता है। परन्तु जब परमेश्वर का आत्मा हमें अपने संबंधों में क्षमा और नम्रता को प्रदर्शित करने के लिए सक्षम करता है, तो हमारा परस्पर प्रेम औरों को मसीह की ओर इंगित करता है (यूहन्ना 13:35) और हमारा साथ मिल-जुल कर रहना परमेश्वर की महिमा का कारण होता है। - एमी पीटरसन

 

हे परमेश्वर, हमें सक्षम करें कि संसार हम में होकर मसीह के प्रेम को देख सके।


पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं। - गलतियों 5:23-22

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:12-17

कुलुस्सियों 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो।

कुलुस्सियों 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो।

कुलुस्सियों 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्ध लो।

कुलुस्सियों 3:15 और मसीह की शान्ति जिस के लिये तुम एक देह हो कर बुलाए भी गए हो, तुम्हारे हृदय में राज्य करे, और तुम धन्यवादी बने रहो।

कुलुस्सियों 3:16 मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने दो; और सिद्ध ज्ञान सहित एक दूसरे को सिखाओ, और चिताओ, और अपने अपने मन में अनुग्रह के साथ परमेश्वर के लिये भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाओ।

कुलुस्सियों 3:17 और वचन से या काम से जो कुछ भी करो सब प्रभु यीशु के नाम से करो, और उसके द्वारा परमेश्वर पिता का धन्यवाद करो।

 

एक साल में बाइबल: 

  • इतिहास 4-6
  • यूहन्ना 6:1-21

सोमवार, 17 मई 2021

सुरक्षित

 

          न्यूयार्क से सैनएंटोनियो जाने वाली उड़ान को आरंभ हुए अभी बीस मिनिट ही हुए थे, कि उड़ान की सारी योजना बदल गई, और शान्ति का स्थान कोलाहल ने ले लिया। जहाज़ के एक इंजन ने काम करना बन्द कर दिया, उस खराब इंजन से निकलने वाले मलबे का एक टुकड़ा जहाज़ के साथ टकराया और मुख्य कक्ष में छेद कर दिया, जिससे अन्दर का दबाव एक दम से कम हो गया, और सामान इधर-उधर बिखरने लगा। इन सब बातों के कारण कई यात्री घायल हो गए, और एक की मृत्यु भी हो गई। यदि एक शांत स्वभाव का निपुण पायलेट, जिसने नेवी के युद्ध-विमान उड़ाने का प्रशिक्षण पाया हुआ था, जहाज़ को न उड़ा रहा होता, तो परिस्थिति और भी दुखद और भयावह हो जाती। किन्तु उसने संयम और नियंत्रण बनाए रखा और विमान को सुरक्षित उतार लिया। हमारे स्थानीय अखबार में अगले दिन की सुर्खियाँ थीं – “योग्य हाथों में!”

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, भजन 31 में, दाऊद ने प्रकट किया कि वह परमेश्वर के अद्भुत और देखभाल करने वाले हाथों के बारे में कुछ जानकारी रखता था। इसीलिए वह पूरे भरोसे के साथ कह सका,मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं” (पद 5)। दाऊद का विश्वास था कि जब जीवन यात्रा दुर्गम हो जाए, तब भी वह परमेश्वर पर अपना भरोसा बनाए रख सकता था। क्योंकि वह प्रतिकूल शक्तियों के निशाने पर रहता था, इसलिए दाऊद के लिए जीवन कठिन था। यद्यपि उस पर कभी भी हमला हो सकता था, किन्तु फिर भी वह निराश और हताश नहीं रहता था। सताव के मध्य में भी दाऊद चैन की साँस ले सकता था और आनन्दित हो सकता था क्योंकि उसका विश्वासयोग्य, प्रेमी परमेश्वर उसके भरोसे का स्त्रोत था (पद 5-7)।

          संभव है कि आप अपने आप को जीवन के ऐसे समय में पाते हैं जब हर ओर से आप पर संकट और परेशानियों का प्रहार हो रहा है, और यह देख पाना कठिन है कि आगे क्या रखा है। इस सारी अनिश्चितता, असमंजस, और अस्त-व्यस्तता के मध्य, एक बात बिलकुल निश्चित है – जो प्रभु परमेश्वर के हाथों में अपनी सुरक्षा देखते हैं, वे अद्भुत और योग्य हाथों में हमेशा सुरक्षित बने रहते हैं। - आर्थर जैक्सन

 

पिता परमेश्वर जीवन की हर परिस्थिति में मेरी सुरक्षा आप ही बने रहें।


यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन संहिता 18:2

बाइबल पाठ: भजन 31:1-8

भजन संहिता 31:1 हे यहोवा मेरा भरोसा तुझ पर है; मुझे कभी लज्जित होना न पड़े; तू अपने धर्मी होने के कारण मुझे छुड़ा ले!

भजन संहिता 31:2 अपना कान मेरी ओर लगाकर तुरन्त मुझे छुड़ा ले!

भजन संहिता 31:3 क्योंकि तू मेरे लिये चट्टान और मेरा गढ़ है; इसलिये अपने नाम के निमित्त मेरी अगुवाई कर, और मुझे आगे ले चल।

भजन संहिता 31:4 जो जाल उन्होंने मेरे लिये बिछाया है उस से तू मुझ को छुड़ा ले, क्योंकि तू ही मेरा दृढ़ गढ़ है।

भजन संहिता 31:5 मैं अपनी आत्मा को तेरे ही हाथ में सौंप देता हूं; हे यहोवा, हे सत्यवादी ईश्वर, तू ने मुझे मोल ले कर मुक्त किया है।

भजन संहिता 31:6 जो व्यर्थ वस्तुओं पर मन लगाते हैं, उन से मैं घृणा करता हूं; परन्तु मेरा भरोसा यहोवा ही पर है।

भजन संहिता 31:7 मैं तेरी करुणा से मगन और आनन्दित हूं, क्योंकि तू ने मेरे दु:ख पर दृष्टि की है, मेरे कष्ट के समय तू ने मेरी सुधि ली है,

भजन संहिता 31:8 और तू ने मुझे शत्रु के हाथ में पड़ने नहीं दिया; तू ने मेरे पांवों को चौड़े स्थान में खड़ा किया है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 इतिहास 1-3
  • यूहन्ना 5:25-47

रविवार, 16 मई 2021

प्रेम

 

          मैंने अपने पौत्र को उपहार में देने के लिए नर्म रोएँदार कपड़े से बने भालू के समान बाहरी ढाँचे के अन्दर नर्म कपड़ों के टुकड़ों को ठूँस कर बनाया गया बड़ा सा खिलौना लिया; उस खिलौने में उसके प्रति मेरा प्यार भी ठूँस-ठूँस कर भरा हुआ था। उस उपहार को पाकर मेरे पौत्र की पहली प्रतिक्रिया क्या रही? सबसे पहले तो उसे अचरज हुआ; फिर विस्मय के साथ कुछ घबराहट हुई। फिर उसकी जिज्ञासा जागृत हुई, जिसने उसे एक साहसिक कार्य करने के लिए प्रेरित किया – उसने अपनी उँगली से भालू की नाक को पकड़ा, जिससे वह भालू आगे को उसकी बाँहों में गिर गया। ऐसा होते ही वह बहुत आनन्दित हो गया; उसने अपने नन्हे सिर को भालू की नर्म रोएँदार छाती पर रखा और अपनी बाँहों से उसे एक दृढ़ आलिंगन में ले लिया, और उसके चेहरे पर एक मुस्कराहट फ़ैल गई। उस बच्चे को बिलकुल भी पता नहीं था कि वह भालू उससे प्रेम नहीं कर सकता है; लेकिन उसे लगा कि भालू उस उससे प्रेम कर रहा है और उसने भी उसके प्रति अपने पूरे दिल से प्रेम ही की प्रतिक्रिया दी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में, आरंभिक मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी तीनों पत्रियों में, प्रेरित यूहन्ना दृढ़ता पूर्वक कहता है कि परमेश्वर प्रेम है; उसने लिखा “और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है” (1 यूहन्ना 4:16)।

          परमेश्वर प्रेम करता है; किसी भरवाँ पशु को तकिया बना लेने के द्वारा नहीं वरन एक वास्तविक शरीर की फ़ैली हुई बाँहों के द्वारा, जिस शरीर में एक प्रेम से धड़कता हुआ हृदय भी है (यूहन्ना 3:16)। प्रभु यीशु मसीह में होकर परमेश्वर ने हमारे प्रति अपने असाधारण और बलिदान से भरे प्रेम को व्यक्त किया।

          यूहन्ना आगे कहता है,हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया” (1 यूहन्ना 4:19)। जब हम यह विश्वास करते हैं कि हमसे प्रेम किया गया है, तो प्रत्युत्तर में हम भी प्रेम प्रदान करते हैं। परमेश्वर का वास्तविक प्रेम हमारे लिए संभव करता है कि हम भी परमेश्वर तथा औरों से प्रेम करें – अपने सारे हृदय से। - एलिसा मॉर्गन

 

पिता परमेश्वर मैं आपके प्रेम का एहसास करके, आपसे वास्तविक प्रेम रख सकूँ।


देखो पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है, कि हम परमेश्वर की सन्तान कहलाएं, और हम हैं भी: इस कारण संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने उसे भी नहीं जाना। - 1 यूहन्ना 3:1

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:13-19

1 यूहन्ना 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है।

1 यूहन्ना 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है।

1 यूहन्ना 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में।

1 यूहन्ना 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है।

1 यूहन्ना 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं।

1 यूहन्ना 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ।

1 यूहन्ना 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 24-25
  • यूहन्ना 5:1-24

शनिवार, 15 मई 2021

आशा

 

          छः ही महीनों में जेराल्ड का जीवन बिखर गया। एक आर्थिक संकट ने उसके व्यवसाय और संपत्ति को नष्ट कर दिया; और एक दुखद दुर्घटना में उसके पुत्र का देहांत हो गया। इन बातों के आघात से उसकी माँ को दिला का दौरा पड़ा और उनकी भी मृत्यु हो गई, और उसकी पत्नी विषाद (depression) में चली गई, तथा उसके दो तरुण बेटियाँ शोक से व्यथित रहने लगीं। वह बस परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार द्वारा कहे गए शब्द ही दोहरा सका,हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया?” (भजन 22:1)।

          वह एकमात्र बात जिसके सहारे जेराल्ड संभला रहा, कार्य करता रहा, थी उसकी आशा, कि जिस परमेश्वर ने प्रभु यीशु को फिर से जीवित किया था, वही एक दिन उसे और उसके परिवार को भी उनके दुःख में से उभारेगा और अनन्तकाल के आनन्द के जीवन में ले जाएगा। उसकी आशा थी कि परमेश्वर सहायता के लिए उसकी पुकार का उत्तर देगा। भजनकार दाऊद के समान, अपनी निराशा में भी, अपनी सभी दुखद परिस्थितियों में भी वह परमेश्वर पर अपना विश्वास बनाए रखने में दृढ़ बना रहा, और इस आशा को थामे रहा कि परमेश्वर उसे छुड़ाएगा और बचा लेगा (पद 4-5 )।

          उसकी इसी दृढ़ आशा ने जेराल्ड को संभाल का रखा, और जब भी कोई उससे पूछता कि वह कैसा है, तो वह इतना ही कह पाता था, “परमेश्वर पर मेरा भरोसा अभी बना हुआ है।”

          परमेश्वर ने उस भरोसे का आदर किया, जेराल्ड को दिलासा दी, वर्षों तक इन कठिन परिस्थितियों में स्थिर बने रहने का साहस और सामर्थ्य दी। उसका परिवार धीरे-धीरे इन त्रासदियों से उभर सका, और फिर जेराल्ड को उसके पहले नाती के जन्म का आनन्द भी प्राप्त हुआ। अब उसकी पुकार परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के लिए गवाही है, अब वह कहता है, “अब मैं यह नहीं पूछता हूँ कि तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? परमेश्वर ने मुझे आशीष दी है।”

          जब ऐसा लगे कि कुछ भी शेष नहीं रहा है, आशा तब भी रहती है। - लेस्ली कोह

 

मसीह का पुनरुत्थान हमारे अनन्तकाल के स्थाई आनन्द की आशा है।

जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। - यशायाह 43:2

बाइबल पाठ: भजन 22:1-5

भजन 22:1 हे मेरे परमेश्वर, हे मेरे परमेश्वर, तू ने मुझे क्यों छोड़ दिया? तू मेरी पुकार से और मेरी सहायता करने से क्यों दूर रहता है? मेरा उद्धार कहां है?

भजन 22:2 हे मेरे परमेश्वर, मैं दिन को पुकारता हूं परन्तु तू उत्तर नहीं देता; और रात को भी मैं चुप नहीं रहता।

भजन 22:3 परन्तु हे तू जो इस्राएल की स्तुति के सिंहासन पर विराजमान है, तू तो पवित्र है।

भजन 22:4 हमारे पुरखा तुझी पर भरोसा रखते थे; वे भरोसा रखते थे, और तू उन्हें छुड़ाता था।

भजन 22:5 उन्होंने तेरी दोहाई दी और तू ने उन को छुड़ाया वे तुझी पर भरोसा रखते थे और कभी लज्जित न हुए।

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 22-23
  • यूहन्ना 4:31-54

शुक्रवार, 14 मई 2021

नम्र आलोचना

 

          चित्रकला की एक कक्षा में, हमारा शिक्षक, जो कि एक बहुत ही अनुभवी व्यावसायिक कलाकार था, मेरे द्वारा बनाए गए चित्र के सामने आकर खड़ा हो गया, और शांत रहते हुए ध्यान से देखने लगा। मैं सोचने लगी, अब ये कहेगा, ‘ये बिलकुल बेकार है; लेकिन उसने ऐसा नहीं कहा।

          उसने कहा कि उसे रंगों का चुनाव और चित्र में खुलेपन की भावना अच्छा लगी। फिर वह बोला कि दूर दिखाए गए पेड़ों को कुछ हल्के रंगों से दिखाया जा सकता है, और निकट दिखाई गए खर-पतवार की झाड़ियों के किनारों को कुछ सौम्य किया जा सकता है। उसके पास मेरे चित्र की आलोचना करने का पूर्ण अधिकार था, किन्तु फिर भी उसकी आलोचना सच्ची किन्तु नम्र थी।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु के पास, उनके पापों के लिए, लोगों की निंदा करने और उन्हें दोषी ठहराने का पूर्ण अधिकार था। प्रभु ने उस सामरी स्त्री को, जिससे उसकी मुलाकात कुएँ पर हुई थी, उसके पापों के दोष के नीचे कुचल देने के लिए दस आज्ञाओं से प्रहार नहीं किया। प्रभु ने केवल कुछ नम्र व्यवहार और वाक्यों के द्वारा उसे उसके जीवन का दिखा दिया; प्रभु द्वारा इतनी ही आलोचना पर्याप्त थी। परिणामस्वरूप, वह स्त्री यह देखने और समझने पाई कि कैसे संतुष्टि के लिए उसके प्रयासों ने उसे पापों में उलझा दिया था। उस स्त्री को यह एहसास होने पर, प्रभु ने आगे उसे प्रकट किया कि वही संपूर्ण और अनन्तकालीन संतुष्टि का स्त्रोत है (यूहन्ना 4:10-13)।

          इस परिस्थिति में प्रभु द्वारा अनुग्रह और सत्य का अद्भुत तालमेल के साथ प्रयोग करना उस स्त्री के जीवन को, और फिर उस गाँव के लोगों के जीवनों को बदलने का माध्यम बना। आज हमारे साथ संबंध में भी प्रभु इसी अनुग्रह और सत्य का प्रयोग करता है (यूहन्ना 1:17), नम्रता के साथ हमारे जीवन की वास्तविकता हम पर प्रकट करता है। उसका अनुग्रह हमें हमारे पाप से अभिभूत नहीं होने देता है; और उसका सत्य हमें उस पाप की, एक मामूली सी बात के समान अनदेखी नहीं करने देता है।

          क्या हम प्रभु यीशु को आमंत्रित करेंगे कि वह आकर हमारे जीवन का अवलोकन करे और अपनी नम्र आलोचना के द्वारा हमें जीवन को सुधारने का मार्ग सिखाए? – जेनिफर बेन्सन शुल्ट

 

प्रभु परमेश्वर मुझे मेरे पाप से छुड़ाकर अनन्त जीवन के मार्ग पर डालने के लिए धन्यवाद।


इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची। - यूहन्ना 1:17

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:7-15, 28-29

यूहन्ना 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला।

यूहन्ना 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे।

यूहन्ना 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते।)

यूहन्ना 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता।

यूहन्ना 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कुआं गहरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया?

यूहन्ना 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कुआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने पशुओं समेत उस में से पीया?

यूहन्ना 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा।

यूहन्ना 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

यूहन्ना 4:15 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, वह जल मुझे दे ताकि मैं प्यासी न होऊं और न जल भरने को इतनी दूर आऊं।

यूहन्ना 4:28 तब स्त्री अपना घड़ा छोड़कर नगर में चली गई, और लोगों से कहने लगी।

यूहन्ना 4:29 आओ, एक मनुष्य को देखो, जिसने सब कुछ जो मैं ने किया मुझे बता दिया: कहीं यही तो मसीह नहीं है?

 

एक साल में बाइबल: 

  • 2 राजाओं 19-21
  • यूहन्ना 4:1-30