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मंगलवार, 22 मार्च 2011

मार्गदर्शन या भावनाएं?

कई मसीही परमेश्वर के मार्गदर्शन को अपनी भावनाओं या भीतरी अनुभूतियों से जोड़ते हैं। किन्तु ये भावनाएं और अनुभूतियाँ परमेश्वर के मार्गदर्शन का प्रमाण नहीं हैं। प्रिंस्टन विश्वविद्यालय के एक भूत्पूर्व अधिपति, जौन हिबेन ने एक अतिथिति श्रीमान ब्युकमन को अपने घर भोज पर बुलाया। यह अतिथिति परमेश्वर के मार्गदर्शन को लेकर कुछ अपनी ही धारणाएं रखता था। भोजन के लिए न सिर्फ वह देर से पहुंचा वरन अपने साथ तीन बिन बुलाए मेहमानों को भी भोज के लिए ले आया। उस ने श्रिमति हिबेन को सफाई देते हुए कहा, "परमेश्वर ने मुझे इन तीनों को भी भोज पर लाने के लिए कहा!" श्रीमति हिबेन ने उत्तर दिया, "जी नहीं; मुझे नहीं लगता कि परमेश्वर का इससे कोई संबंध है।" ब्युकमन ने तिलमिला कर पूछा, "आप यह कैसे कह सकतीं हैं?" श्रीमति हिबेन ने उत्तर दिया, "क्योंकि मैं जानती हूँ कि परमेश्वर संभ्रांत है।"

यह किस्सा परमेश्वर के मार्गदर्शन के बारे में एक महत्वपूर्ण तथ्य प्रस्तुत करता है। विभिन्न परिस्थितियों को लेकर हमारे अन्दर कई सशक्त भावनाएं आ सकती हैं, परन्तु हमें उन्हें परमेश्वर का मार्गदर्शन मानने से पहले सदा परमेश्वर की प्रगट इच्छा के सामने रखकर जाँचना चाहिए। परमेश्वर का मार्गदर्शन कभी उसके वचन के प्रतिकूल अथवा उससे भिन्न नहीं होगा। परमेश्वर के वचनों को उनके संदर्भ में अध्ययन करने से हमें सही पहचान की सूझबूझ मिलती है, और उनका मनन करने से हम अपनी भावनाओं को जाँच पाते हैं।

अपनी पुस्तक "Knowing God" में जे. आई. पैकर चेतावनी देते हैं, "यदि कोई भावना हमारे अहम को उभारती है, या हमें अपनी मनमर्ज़ी करने को उकसाती है, या अपनी ज़िम्मेदारी से बच कर निकलने को प्रोत्साहित करती है, या हमें अपने आप को बढ़ा-चढ़ा कर प्रस्तुत करने की ओर ले चलती है, तो तुरंत उसे पहचान कर निषक्रीय कर देना चाहिए, उसे परमेश्वर का मार्गदर्शन समझने की गलती नहीं करनी चाहिए।"

यह एक अच्छी सलाह है, खासकर तब जब हमारे पास परमेश्वर का वचन है जो हमारे मार्ग का दीपक और राह का उजियला है। - डेनिस डी हॉन


भावनाएं तथ्यओं एवं विश्वास का स्थान कभी नहीं ले सकतीं।

उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। - नीतिवचन ३:६



बाइबल पाठ: नीतिवचन ३:१-१०

Pro 3:1 हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना, अपने ह्रृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना;
Pro 3:2 क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा।
Pro 3:3 कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं वरन उनको अपने गले का हार बनाना, और अपनी हृदय रूपी पटिया पर लिखना।
Pro 3:4 और तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा, तू अति बुद्धिमान होगा।
Pro 3:5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।
Pro 3:6 उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
Pro 3:7 अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना, यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना।
Pro 3:8 ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियां पुष्ट रहेंगी।
Pro 3:9 अपनी संपत्ति के द्वारा और अपनी भूमि की पहिली उपज दे देकर यहोवा की प्रतिष्ठा करना;
Pro 3:10 इस प्रकार तेरे खत्ते भरे और पूरे रहेंगे, और तेरे रस कुण्डों से नया दाखमधु उमण्डता रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १०-१२
  • लूका १:३९-५६

सोमवार, 21 मार्च 2011

परमेश्वर का मार्गदर्शन

यदि कभी आप ने लालटेन की रौशनी में रात के अंधियारे में यात्रा करी है तो आप समझ सकते हैं कि लालटेन की रौशनी केवल अगला कदम देखकर रखने तक का ही प्रकाश देती है। लेकिन जब आप वह कदम उठा लेते हैं तो वही प्रकाश फिर उससे अगला कदम रखने का स्थान दिखा देता है। और इसी प्रकार जब आप आगे बढ़ते रहते हैं तो कदम-कदम करके आप का पूरा मार्ग रौशन होता जाता है।

अनेक मसीही विश्वासी, जो लम्बे समय से परमेश्वर के साथ चलते रहे हैं, अपने अनुभव से बताते हैं कि परमेश्वर भी इसी प्रकार कदम कदम करके उन्हें मार्ग दिखाता रहा है और चलाता रहा है, और वे इसी प्रकार अपनी मंजिल तक पहुंचने के पूर्ण्तः आश्वस्त भी हैं। लेकिन कुछ मसीही यात्री अपने सफर की अनिश्चितताओं के अन्धकार से परेशान हो जाते हैं। संभावित खतरों, मार्ग की बाधाओं और मार्ग में हो सकने वाले ठोकर के कारणों से विचिलित होकर वे प्रभु में अपनी सुरक्षा और शांति का आनन्द नहीं उठा पाते।

नीतिवचन के लेखक ने लिखा " तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वे तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।" (नीतिवचन ३:५,६) और दाऊद ने परमेश्वर की यह प्रतिज्ञा बताई "मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।" (भजन ३२:८)

जब हम आने वाले कल के लिए परेशान होने की बजाए अपने आज के लिए परमेश्वर पर भरोसा करना सीख लेते हैं तो अपने जीवन के हर कदम के लिए परमेश्वर के मार्गदर्शन और अनुग्रह को भी अनुभव करने लगते हैं। जितना परमेश्वर हमें दिखाता है, उससे आगे देखने की चिंता करने की हमें आवश्यक्ता नहीं है। जब हम उसके मार्गदर्शन में चलते हैं तो हर कदम के लिए हमारे पास उसकी ज्योति बनी रहती है।

परमेश्वर के मार्गदर्शन में चलना एक अद्भुत अनुभव है। - रिचर्ड डी हॉन


परमेश्वर के सत्य की लालटेन को दृढ़ता से थामे रहें और वह आपका सही मार्ग रौशन करती रहेगी।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन ११९:१०५


बाइबल पाठ: भजन ११९:१०५-११२

Psa 119:105 तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है।
Psa 119:106 मैं ने शपथ खाई, और ठाना भी है कि मैं तेरे धर्ममय नियमों के अनुसार चलूंगा।
Psa 119:107 मैं अत्यन्त दु:ख में पड़ा हूं, हे यहोवा, अपने वचन के अनुसार मुझे जिला।
Psa 119:108 हे यहोवा, मेरे वचनों को स्वेच्छाबलि जान कर ग्रहण कर, और अपने नियमों को मुझे सिखा।
Psa 119:109 मेरा प्राण निरन्तर मेरी हथेली पर रहता है, तौभी मैं तेरी व्यवस्था को भूल नहीं गया।
Psa 119:110 दुष्टों ने मेरे लिये फन्दा लगाया है, परन्तु मैं तेरे उपदेशों के मार्ग से नहीं भटका।
Psa 119:111 मैं ने तेरी चितौनियों को सदा के लिये अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण है।
Psa 119:112 मैं ने अपने मन को इस बात पर लगाया है, कि अन्त तक तेरी विधियों पर सदा चलता रहूं।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू ७-९
  • लूका १:२१-३८

रविवार, 20 मार्च 2011

अनुभव के पाठ

एक मसीही जब घोर परेशानियों में पड़ा तो उसे बाइबल के वचनों से बहुत सांत्वना मिली। उसने कहा, मैं प्रसन्न हुआ यह जानकर कि बाइबल मुझे सिखाती है कि परमेश्वर प्रत्येक परेशानी में भी मेरे साथ है और मुझे उनसे पार निकालेगा। ज़िंदगी सदा परेशानी ही नहीं है। यदि ऐसा होता तो हम कब के सदा की निराशाओं में घिर कर हार मान चुके होते।

निर्गमन १५ अध्याय में हम पढ़ते हैं कि जब इस्त्राएलियों ने "मारा" नाम स्थान में पढ़ाव डाला तो वे तीन दिन से जल के अभाव में चल रहे थे, लेकिन वहां का जल खारा निकला और वे उसे पी न सके। तब परमेश्वर ने मूसा को उपाय बताया और वह खारा जल मीठा बन गया। फिर उसके बाद अगले पड़ाव के लिए परमेश्वर उन्हें "एलीम" नामक स्थान पर ले गया जहां उन्हें ठंडे मीठे जल के सोते और विश्राम के लिए खजूर के पेड़ों की छाया मिली। वे लोग जानते थे कि दोनो पड़ाव परमेश्वर की ओर से हैं। परमेश्वर का महिमा का बादल उनके ऊपर छाया किये रहता था और उन्हें मार्ग दिखाता था। जब और जहां बादल चलता था तब और वहां इस्त्राएली चलते थे; जब बादल रुकता था तो इस्त्राएली भी रुकते थे। वह बादल ही उन्हें मारा भी ले गया और एलीम भी। इस्त्राएलियों की यह यात्रा मसीही जीवन की यात्रा का रूपक भी है।

यदि परमेश्वर किसी मसीही विश्वासी को "मारा" यानि परेशानियों और मुशकिलों के स्थान तक लाया है, तो वहां वह उसका उपाय भी देगा और आगे फिर "एलीम" के सुखदायी विश्राम तक भी लेकर जाएगा। और जब हम एलीम के आनन्द में हों तो ध्यान रखें कि परमेशवर हमें आगे की यात्रा के लिये सामर्थ भी दे रहा है और तैयार भी कर रहा है।

परमेश्वर का आराम और सहायता सदा उसके बच्चों के साथ है - यहां भी और स्वर्ग में भी। - पौल वैन गोर्डर


क्लेश की प्रत्येक मरुभूमि में परमेश्वर की सांत्वना की हरियाली भी है।

वह मुझे हरी हरी चराइयों में बैठाता है; वह मुझे सुखदाई जल के झरने के पास ले चलता है। - भजन २३:२


बाइबल पाठ: निर्गमन १५:२२-२७

Exo 15:22 तब मूसा इस्राएलियों को लाल समुद्र से आगे ले गया, और वे शूर नाम जंगल में आए, और जंगल में जाते हुए तीन दिन तक पानी का सोता न मिला।
Exo 15:23 फिर मारा नाम एक स्थान पर पहुंचे, वहां का पानी खारा था, उसे वे न पी सके; इस कारण उस स्थान का नाम मारा पड़ा।
Exo 15:24 तब वे यह कह कर मूसा के विरूद्ध बकझक करने लगे, कि हम क्या पीएं?
Exo 15:25 तब मूसा ने यहोवा की दोहाई दी, और यहोवा ने उसे एक पौधा बतला दिया, जिसे जब उस ने पानी में डाला, तब वह पानी मीठा हो गया। वहीं यहोवा ने उनके लिये एक विधि और नियम बनाया, और वहीं उस ने यह कह कर उनकी परीक्षा की,
Exo 15:26 कि यदि तू अपने परमेश्वर यहोवा का वचन तन मन से सुने, और जो उसकी दृष्टि में ठीक है वही करे, और उसकी सब विधियों को माने, तो जितने रोग मैं ने मिस्रियों पर भेजे हैं उन में से एक भी तुझ पर न भेजूंगा क्योंकि मैं तुम्हारा चंगा करने वाला यहोवा हूं।
Exo 15:27 तब वे एलीम को आए, जहां पानी के बारह सोते और सत्तर खजूर के पेड़ थे और वहां उन्होंने जल के पास डेरे खड़े किए।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू ४-६
  • लूका १:१-२०

शनिवार, 19 मार्च 2011

भरोसा

एक नाविक बार-बार समुद्र में भटक जाता था, इसलिए उसके मित्रों ने उसे एक कुतुबनुमा (compass) दिया और सलाह दी कि अपनी यात्राओं में इसका प्रयोग किया करो। अगली बार जब वह समुद्र में अपनी नाव लेकर निकला तो दोस्तों की सलाह मानकर उनका दिया कुतुबनुमा भी साथ ले गया, लेकिन हमेशा की तरह वह फिर भटक गया और तट का रास्ता नहीं पा सका। उसके मित्र फिर उसे ढूंढने निकले, उसे ढूंढ कर बचाया और तट पर लाकर पूछा कि "तुमने उस कुतुबनुमा का प्रयोग क्यों नहीं किया? यदि करते तो हम इस कष्ट से बच सकते थे।" नाविक ने उत्तर दिया "मैंने बहुत कोशिश करी लेकिन सफल नहीं हुआ। मैं उत्तर दिशा को जाना चाहता था और कुतुबनुमा की सूई दक्षिण-पूर्व की ओर थी; मेरे लाख कोशिश करने के बावजूद कि उसकी सूई उत्तर दिशा की ओर नहीं मुड़ी, इसलिए मेरी उसपर भरोसा करने की हिम्मत नहीं हुई, और मैं अपनी समझ से उत्तर दिशा की ओर निकल पड़ा!" वह नाविक अपनी इच्छा के अनुसार कुतुबनुमा की सूई को मोड़ना चाहता था, न कि कुतुबनुमा के अनुसार अपनी नाव को। उसके इस हट ने उसे फिर खतरे में और उसके मित्रों को परेशानी में डाल दिया।

जब परमेश्वर इस्त्राएलियों को मिस्त्र के दासत्व से निकाल कर लाया, तो इस्त्राएलियों ने भी कुछ ऐसा ही किया। परमेश्वर पर भरोसा करके उसके निर्देषों को मानने की बजाए, उन्होंने अपनी समझ पर अधिक भरोसा किया और कुछ दिनों की अपनी यात्रा को ४० वर्ष की यात्रा बना डाला।

जैसा भजनकार ने लिखा है, परमेश्वर का वायदा है कि वह हमें समझ देगा और हमारे मार्ग में हमारी अगुवाई करेगा कि हम सही राह पर चल सकें। जो उसके निर्देषों और चेतावनियों को मानते हैं उन्हें वह तकलीफों, भटकने और बरबादी से बचाए रखेगा।

जब हम परमेश्वर से किसी विष्य में दिशा निर्देष की प्रार्थना करें, तो ध्यान रखें के उसके वचन रूपी कुतुबनुमे पर भरोसा भी बनाए रखें। - रिचर्ड डी हॉन


जब आप परमेश्वर से मार्गदर्शन की प्रार्थना करें और यदि उसके मार्गदर्शन को अपनी इच्छा से भिन्न पाएं तो खिन्न होकर ढीठ न बन जाएं।

मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपादृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। - भजन ३२:८


बाइबल पाठ: यहोशू १:१-९

Jos 1:1 यहोवा के दास मूसा की मृत्यु के बाद यहोवा ने उसके सेवक यहोशू से जो नून का पुत्र था कहा,
Jos 1:2 मेरा दास मूसा मर गया है; सो अब तू उठ, कमर बान्ध, और इस सारी प्रजा समेत यरदन पार होकर उस देश को जा जिसे मैं उनको अर्थात इस्राएलियों को देता हूं।
Jos 1:3 उस वचन के अनुसार जो मैं ने मूसा से कहा, अर्थात जिस जिस स्थान पर तुम पांव धरोगे वह सब मैं तुम्हे दे देता हूं।
Jos 1:4 जंगल और उस लबानोन से लेकर परात महानद तक, और सूर्यास्त की ओर महासमुद्र तक हित्तियों का सारा देश तुम्हारा भाग ठहरेगा।
Jos 1:5 तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा, और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा।
Jos 1:6 इसलिये हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा; क्योंकि जिस देश के देने की शपथ मैं ने इन लोगों के पूर्वजों से खाई थी उसका अधिकारी तू इन्हें करेगा।
Jos 1:7 इतना हो कि तू हियाव बान्धकर और बहुत दृढ़ होकर जो व्यवस्था मेरे दास मूसा ने तुझे दी है उन सब के अनुसार करने में चौकसी करना और उस से न तो दहिने मुड़ना और न बांए, तब जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा काम सुफल होगा।
Jos 1:8 व्यवस्था की यह पुस्तक तेरे चित्त से कभी न उतरने पाए, इसी में दिन रात ध्यान दिए रहना, इसलिये कि जो कुछ उस में लिखा है उसके अनुसार करने की तू चौकसी करे, क्योंकि ऐसा ही करने से तेरे सब काम सुफल होंगे, और तू प्रभावशाली होगा।
Jos 1:9 क्या मैं ने तुझे आज्ञा नहीं दी? हियाव बान्धकर दृढ़ हो जा, भय न खा, और तेरा मन कच्चा न हो; क्योंकि जहां जहां तू जाएगा वहां वहां तेरा परमेश्वर यहोवा तेरे संग रहेगा।

एक साल में बाइबल:
  • यहोशू १-३
  • मरकुस १६

शुक्रवार, 18 मार्च 2011

परमेश्वर की योजना समझिए

एक युवती एक प्रचारक के पास आयी और उससे जानना चाहा कि वह कैसे अपनी उन इच्छाओं की समस्या का समाधान कर सकती है जो परमेश्वर की मन्सा के विरोध में हैं? प्रचारक ने एक छोटा कागज़ लिया, उसपर दो शब्द लिखे और उसे युवती को दे दिया। तब प्रचारक ने युवती से कहा, "इसपर दस मिनिट तक विचार करो, फिर इन में से एक शब्द काट दो और कागज़ मेरे पास वापस ले आओ।" उस युवती ने कागज़ पर लिखे शब्दों को देखा, एक था "नहीं" और दूसरा था "प्रभु"। विचार करने के थोड़े समय में ही वह समझ गयी कि यदि वह "नहीं" को, यानि कि इन्कार करने को चुनती है, तो फिर यीशु को प्रभु नहीं कह सकती; और अगर वह "प्रभु" को चुनती है तो फिर यीशु को "नहीं" यानि इन्कार नहीं कर सकती।

यही हमारे जीवनों के लिये परमेश्वर की इच्छा को समझने का भेद है। जब तक हम परमेश्वर के हाथों में अपने आप को पूर्णतः तथा बिना किसी शर्त के नहीं रख देते, हम अपने प्रति उसकी इच्छा के विकल्पों को नहीं जान सकते। हमें अपने सारे अधिकार उसके आधीन कर देने हैं, तब ही हम उससे मिलने वाले अधिकारों को जान और समझ पाएंगे। अपने शरीरों को "जीवित बलिदान करके चढ़ाना" प्रभु की प्रत्येक आज्ञा के लिए सहमत और समर्पित होना है।

जब हम परमेश्वर को पूर्णतः समर्पित हो जाते हैं, तब ही हम इससे अगला कदम, अर्थात अपने व्यवहार में बदलाव, को उठा पाते हैं। व्यवहार में यह बदलाव तब ही संभव है जब हम अपने सोच-विचार को अपने चारों ओर प्रचलित संसार के सिद्धांतों से हटा कर परमेश्वर के वचन के सिद्धांतों के अनुरूप कर दें; और यह वो ही कर सकता है जिसका तन, मन और बुद्धि संसार को नहीं परमेश्वर को समर्पित हो।

यदि आप अपने जीवन के लिए परमेश्वर की योजना को जानना चाहते हैं, तो सर्वप्रथम अपने आप को परमेश्वर को समर्पित कीजीए। - डेनिस डी हॉन


जो अपनी इच्छा परमेश्वर की इच्छा के आधीन कर देते हैं, वे परमेश्वर से सर्वोत्तम ही पाते हैं।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों १२:१


बाइबल पाठ: रोमियों १२:१-८

Rom 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरो को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान करके चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Rom 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्‍तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्‍छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Rom 12:3 क्‍योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Rom 12:4 क्‍योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Rom 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Rom 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Rom 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Rom 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे, दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्‍साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ३२-३४
  • मरकुस १५:२६-४७

गुरुवार, 17 मार्च 2011

सच्चा उद्धारकर्ता

एक युवा विद्वान ने एक नया धर्म बनाया और उसके सिद्धांतों को समझाने के लिये एक पुस्तक लिखी। कुछ समय पश्चात वह ब्रिटिश राजनीतिज्ञ एवं दार्शनिक बैनजामिन डिज़्राएली के पास आया और कहने लगा कि उसे समझ नहीं आता कि लोग क्यों उसके धर्म में विश्वास करने को राज़ी नहीं होते, जबकि उसका धर्म मसीह की शिक्षाओं और क्रूस पर बलिदान से कहीं अधिक उत्तम है। बुज़ुर्ग बैनजामिन ने उसके कंधे पर हाथ रखकर कहा, "बेटा, लोग तब तक तुम्हारी पुस्तक को नहीं पढ़ेंगे और न ही तुम्हारे धर्म में विश्वास लाएंगे जब तक तुम्हारा भी किसी क्रूस पर चढ़ाए जाकर बलिदान न हो और तुम भी फिर मृतकों में से जी न उठो।"

एक अंग्रेज़ प्रचारक एलेक्ज़ैंडर मैक्लरेन ने मसीह यीशु के व्यक्तित्व के संदर्भ में प्रश्न किया, "ऐसा क्यों है कि संसार के इतिहास में केवल एक और सिर्फ एक ही ऐसा व्यक्ति है जो समय और स्थान से कभी बंधा नहीं रहा है; जो आज भी उन करोड़ों लोगों का, जिनके हृदय उसके प्रेम से धड़कते हैं, वैसा ही घनिष्ठ मित्र है, जैसा वह उनका था जो उसके साथ पृथ्वी पर रहते थे?" यह एक बड़ा गंभीर और वाजिब प्रश्न है, जिसपर विचार आवश्यक है। मैक्लैरन के इस प्रश्न का उत्तर बैनजामिन डिज़्राएली द्वारा उस युवक को दिये उत्तर में ही है।

केवल परमेश्वर का निष्कलंक और निर्दोष पुत्र ही उद्धार प्रदान कर सकता है। केवल वही उद्धारकर्ता हो सकता है और हमारे पापों का बोझ उठा सकता है जिसने अपने बलिदान की सार्थकता को अपने पुनरुत्थान द्वारा प्रमाणित किया हो। क्योंकि यीशु ने हमसे प्रेम किया और अपने आप को हमारे लिये दे दिया, हमें भी अपना हृदय उसके लिये खोल कर उसे अर्पित कर देना चाहिये।

यदि हमने उसपर विश्वास किया है, तो प्रभु के चेले थोमा की तरह हम भी थोमा के समान प्रेम और भक्ति में पुकार सकते हैं, "हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!" वही सच्चा उद्धारकर्ता है जो हमारी आराधना का सच्चा पात्र है। - पौल वैन गौर्डर


जब हम यीशु के प्रभुत्व को पहिचानेंगे तो उसे उसकी उपासना भी करेंगे।

यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर! - यूहन्ना २०:२८


बाइबल पाठ: यूहन्ना २०:२८

Joh 20:26 आठ दिन के बाद उस के चेले फिर घर के भीतर थे, और थोमा उन के साथ था, और द्वार बन्‍द थे, तब यीशु ने आकर और बीच में खड़ा होकर कहा, तुम्हें शान्‍ति मिले।
Joh 20:27 तब उस ने थोमा से कहा, अपनी उंगली यहां लाकर मेरे पंजर में डाल और अविश्वासी नहीं परन्‍तु विश्वासी हो।
Joh 20:28 यह सुन थोमा ने उत्तर दिया, हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर!
Joh 20:29 यीशु ने उस से कहा, तू ने तो मुझे देख कर विश्वास किया है, धन्य हैं वे जिन्‍होंने बिना देखे विश्वास किया।
Joh 20:30 यीशु ने और भी बहुत चिन्‍ह चेलों के साम्हने दिखाए, जो इस पुस्‍तक में लिखे नहीं गए।
Joh 20:31 परन्‍तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास करके उसके नाम से जीवन पाओ।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण ३०-३१
  • मरकुस १५:१-२५

बुधवार, 16 मार्च 2011

हमारा निर्दोष एवज़ी

एक अनाथ युवती के गुर्दों ने काम करना बन्द कर दिया। बहुत इलाज के बाद भी जब कुछ सफलता नहीं मिली, उसकी हालत बिगड़ने लगी और उसके जीवित रहने की आशा क्षीण होने लगी। अन्तिम उपाय के तौर पर चिकित्सकों ने गुर्दे बदलने का निर्णय किया, किंतु कोई रिश्तेदार नहीं था जो उसके लिये अपना गुर्दा दान करता। चिकित्सकों ने समाज के सामने युवती के लिये निशुल्क गुर्दा दान देने के लिये आग्रह जारी किया। एक युवक आगे आया और अपना गुर्दा दान करने के लिये राज़ी हो गया। युवक का गुर्दा निकालते समय ऑपरेशन में कुछ दिक्कतें आईं और युवक की मृत्यु हो गई, लेकिन उसके दान किये हुए गुर्दे के कारण युवती की जान बच सकी। उस युवक ने केवल गुर्दा ही नहीं वरन अपने प्राण देकर उस युवती को नया जीवन दिया।

हमारे प्रभु में ऐसा कोई कारण नहीं था जिससे उसे मृत्यु दण्ड सहना पड़ता, फिर भी उसने स्वेच्छा से हमारे स्थान पर मृत्यु दण्ड सहना स्वीकार किया। एक कवि ने उसके इस बलिदान के लिये कुछ यूँ लिखा: "उसने हमारे स्थान पर मृत्यु सही/ उसने अपने लोगों को बचा लिया/ जो श्राप और दण्ड उसपर गिरा/ वह हमारे पापों का था।

एलिज़ाबेथ बैरेट ब्राउनिंग ने मसीह के क्रूस पर दिये महान बलिदान के आत्मिक मर्म को इन श्ब्दों में व्यक्त किया: वह त्यागा गया! परमेश्वर ने भी उससे अपना मुँह मोड़ लिया/ आदम का पाप धर्मी पुत्र और पिता के बीच आ गया/ हाँ एक बार इम्मैनुएल की कराह ने इस सृष्टी को झकझोर दिया/ वह तन्हा कराह "हे मेरे परमेश्वर, मैं त्यागा गया"।

परमेश्वर के पुत्र के बलिदान द्वारा बचाए जाकर अब हमें अपने उस निर्दोष एवज़ी के लिये अपने हृदय खोल देने चाहियें। - पौल वैन गौर्डर

यीशु हमारे पापों के लिये मरा ताकि हम पापों से मुक्त किये जाएं।

जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं। - २ कुरिन्थियों ५:२१


बाइबल पाठ: २ कुरिन्थियों ५:१७-२१

2Co 5:17 सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो, वे सब नई हो गईं।
2Co 5:18 और सब बातें परमेश्वर की ओर से हैं, जिस ने मसीह के द्वारा अपने साथ हमारा मेल मिलाप कर लिया, और मेल मिलाप की सेवा हमें सौंप दी है।
2Co 5:19 अर्थात परमेश्वर ने मसीह में होकर अपने साथ संसार का मेल मिलाप कर लिया, और उन के अपराधों का दोष उन पर नहीं लगाया और उस ने मेल मिलाप का वचन हमें सौंप दिया है।
2Co 5:20 सो हम मसीह के राजदूत हैं; मानो परमेश्वर हमारे द्वारा समझाता है: हम मसीह की ओर से निवेदन करते हैं, कि परमेश्वर के साथ मेल मिलाप कर लो।
2Co 5:21 जो पाप से अज्ञात था, उसी को उस ने हमारे लिये पाप ठहराया, कि हम उस में होकर परमेश्वर की धामिर्कता बन जाएं।

एक साल में बाइबल:
  • व्यवस्थाविवरण २८-२९
  • मरकुस १४:५४-७२