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रविवार, 21 जून 2015

कमज़ोर तथा बलवन्त


   कुछ वर्ष पहले की बात है, देर रात का समय था, मैं कुछ अन्य लोगों के साथ एक इमारत में लिफ्ट में था; हम सब थके हुए दिखाई दे रहे थे। लिफ्ट एक मंज़िल पर रुकी और एक कद्दावर व्यक्ति अन्दर आया, उसने दबी हुई पुरानी सी टोपी, कुचला हुआ पुराना सा कोट और घिसे हुए पुराने से जूते पहने हुए थे। लिफट के अन्दर आते ही उसने हम सब पर एक नज़र घुमाई और भारी गुर्राहट वाली आवाज़ में बोला, "पुरुषों, सलाम!" उसके मुँह से यह सुनते ही हम सब अपने कंधों को चौरस करके सीधे खड़े हो गए; हम सब उसके द्वारा किए गए संबोधन के अनुसार दिखने का प्रयास कर रहे थे।

   आज के दिन, जो पुरुषों के सम्मान को समर्पित है, आईये पुरुष होने के बारे में कुछ बातें करें। हम साहसी और सामर्थी बनने के प्रयास तो करते हैं, किंतु कई बार यह महज़ दिखावा होता है; अपने सारे प्रयासों के बावजूद हम अपने अन्दर इस बात को जानते हैं कि हम वैसे हैं नहीं जैसा दिखा रहे हैं। बाहर से दिखाई देने वाली हमारी निर्भीकता के पीछे अन्दर ही अन्दर हमारे अनेक डर, असुरक्षाएं और कमियाँ छुपी रहती हैं। हमारा बाहर से दिखाई देने वाला पौरुष कई बार छलावा मात्र ही होता है।

   प्रेरित पौलुस इस सच्चाई को स्वीकार करने से लजाया नहीं; उसने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को लिखी अपनी दूसरी पत्री में लिखा, "...हम भी तो उस में निर्बल हैं; परन्तु परमेश्वर की सामर्थ से जो तुम्हारे लिये है, उसके साथ जीएंगे" (2 कुरिन्थियों 13:4)। यह केवल धर्मपरायणता दिखाने के लिए कही जाने वाली बात नहीं है वरन दीन कर देने वाली सच्चाई है। लेकिन साथ ही पौलुस ने यह भी लिखा कि "जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ" (1 कुरिन्थियों 16:13), जो एक विरोधाभास जैसा लगता है।

   यह कैसे हो सकता है कि हम स्वाभिक रूप से निर्बल भी हों और फिर पुराषार्थ करें तथा बलवन्त होते जाएं? यह केवल तब संभवव है जब हम, प्रेरित पुलुस के समान ही, अपने कमज़ोरियों को मानते हुए अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर के हाथों में समर्पित कर दें, और फिर उसकी सामर्थ तथा मार्गदर्शन के साथ, उसके कार्यों को करें, जिनके लिए वह हमें आवश्यक बल, बुद्धि और योग्यता प्रदान करेगा। प्रभु यीशु हम कमज़ोरों को भी बलवन्त बना देता है। - डेविड रोपर


सच्चा बल, आत्मा में परमेश्वर की सामर्थ का होना है।

इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं। - 2 कुरिन्थियों 12:10 

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 16:9-13
1 Corinthians 16:9 क्योंकि मेरे लिये एक बड़ा और उपयोगी द्वार खुला है, और विरोधी बहुत से हैं।
1 Corinthians 16:10 यदि तीमुथियुस आ जाए, तो देखना, कि वह तुम्हारे यहां निडर रहे; क्योंकि वह मेरी नाईं प्रभु का काम करता है। 
1 Corinthians 16:11 इसलिये कोई उसे तुच्‍छ न जाने, परन्तु उसे कुशल से इस ओर पहुंचा देना, कि मेरे पास आ जाए; क्योंकि मैं उस की बाट जोह रहा हूं, कि वह भाइयों के साथ आए। 
1 Corinthians 16:12 और भाई अपुल्लोस से मैं ने बहुत बिनती की है कि तुम्हारे पास भाइयों के साथ जाए; परन्तु उसने इस समय जाने की कुछ भी इच्छा न की, परन्तु जब अवसर पाएगा, तब आ जाएगा। 
1 Corinthians 16:13 जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 3-5
  • प्रेरितों 5:22-42



शनिवार, 20 जून 2015

शरणस्थान


  एक दिन मैं एक बड़ी झील के किनारे घूम रही थी; चलते चलते मैं बड़े बड़े पत्थरों और चट्टानों के निकट पहुँची और मेरा ध्यान उन चट्टानों के बीच अन्दर को बने एक छोटे से सुरक्षित स्थान की ओर गया जहाँ एक छोटा सा पौधा जड़ पकड़े हुए उग रहा था। प्रतीत हो रहा था कि उस पौधे को बढ़ने के लिए ना केवल पर्याप्त धूप और पानी उपलब्ध हो रहा है, वरन उन चट्टानों के बीच अन्दर को होने के कारण एक और महत्वपूर्ण चीज़ भी मिल रही है - सुरक्षा। वहाँ किसी भी बारिश-तूफान या तेज़ हवा से उसके कोमल पत्तों को कोई हानि नहीं हो सकती थी।

   उस पौधे के उस सुरक्षित स्थान को देखकर मुझे प्रसिद्ध मसीही भजन, "यीशु मेरे शरणस्थान, तुझ में मेरा है कल्याण" स्मरण हो आया। उस भजन के शब्द उन बातों को व्यक्त करते हैं जिन्हें हम तब चाहते हैं जब हमारा सामना हमारे प्रति बुरे इरादे रखने वाले क्रूर लोगों से होता है जो परमेश्वर को कोई मान्यता या आदर नहीं देते (भजन 94:4-7)। जब हम किसी के बुरे इरादों का निशाना बनते हैं, हम भजनकार की गवाही: "परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है" (भजन 94:22) को स्मरण कर सकते हैं।

   एक चट्टान के समान हमारा परमेश्वर भरोसेमन्द और मज़बूत है; एक शरणस्थान के रूप में वह हमें संकटों और स्मस्याओं के टल जाने तक सुरक्षित रख सकता है। भजनकार हमें स्मरण दिलाता है: "वह तुझे अपने पंखों की आड़ में ले लेगा, और तू उसके पैरों के नीचे शरण पाएगा; उसकी सच्चाई तेरे लिये ढाल और झिलम ठहरेगी" (भजन 91:4)। जब परमेश्वर हमारा रक्षक है तो हमें इस बात से घबराने की आवश्यकता नहीं है कि दूसरे हमारा क्या बिगाड़ सकते हैं; हम हर बात और परिस्थिति में विश्वास रख सकते हैं कि जब भी परेशानियाँ आएंगी तब परमेश्वर हमें संभालेगा, हमारा शरणस्थान बना रहेगा। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर अपने लोगों के लिए सदा का शरणस्थान है।

मेरा चट्टानरूपी परमेश्वर है, जिसका मैं शरणागत हूँ, मेरी ढाल, मेरा बचाने वाला सींग, मेरा ऊंचा गढ़, और मेरा शरण स्थान है, हे मेरे उद्धार कर्त्ता, तू उपद्रव से मेरा उद्धार किया करता है। - 2 शमूएल 22:3

बाइबल पाठ: भजन 94
Psalms 94:1 हे यहोवा, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, हे पलटा लेने वाले ईश्वर, अपना तेज दिखा! 
Psalms 94:2 हे पृथ्वी के न्यायी उठ; और घमण्ड़ियों को बदला दे! 
Psalms 94:3 हे यहोवा, दुष्ट लोग कब तक, दुष्ट लोग कब तक डींग मारते रहेंगे? 
Psalms 94:4 वे बकते और ढ़िठाई की बातें बोलते हैं, सब अनर्थकारी बड़ाई मारते हैं। 
Psalms 94:5 हे यहोवा, वे तेरी प्रजा को पीस डालते हैं, वे तेरे निज भाग को दु:ख देते हैं। 
Psalms 94:6 वे विधवा और परदेशी का घात करते, और अनाथों को मार डालते हैं; 
Psalms 94:7 और कहते हैं, कि याह न देखेगा, याकूब का परमेश्वर विचार न करेगा। 
Psalms 94:8 तुम जो प्रजा में पशु सरीखे हो, विचार करो; और हे मूर्खों तुम कब तक बुद्धिमान हो जाओगे? 
Psalms 94:9 जिसने कान दिया, क्या वह आप नहीं सुनता? जिसने आंख रची, क्या वह आप नहीं देखता? 
Psalms 94:10 जो जाति जाति को ताड़ना देता, और मनुष्य को ज्ञान सिखाता है, क्या वह न समझाएगा? 
Psalms 94:11 यहोवा मनुष्य की कल्पनाओं को तो जानता है कि वे मिथ्या हैं। 
Psalms 94:12 हे याह, क्या ही धन्य है वह पुरूष जिस को तू ताड़ना देता है, और अपनी व्यवस्था सिखाता है, 
Psalms 94:13 क्योंकि तू उसको विपत्ति के दिनों में उस समय तक चैन देता रहता है, जब तक दुष्टों के लिये गड़हा नहीं खोदा जाता। 
Psalms 94:14 क्योंकि यहोवा अपनी प्रजा को न तजेगा, वह अपने निज भाग को न छोड़ेगा; 
Psalms 94:15 परन्तु न्याय फिर धर्म के अनुसार किया जाएगा, और सारे सीधे मन वाले उसके पीछे पीछे हो लेंगे। 
Psalms 94:16 कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन साम्हना करेगा? 
Psalms 94:17 यदि यहोवा मेरा सहायक न होता, तो क्षण भर में मुझे चुपचाप हो कर रहना पड़ता। 
Psalms 94:18 जब मैं ने कहा, कि मेरा पांव फिसलने लगा है, तब हे यहोवा, तेरी करूणा ने मुझे थाम लिया। 
Psalms 94:19 जब मेरे मन में बहुत सी चिन्ताएं होती हैं, तब हे यहोवा, तेरी दी हुई शान्ति से मुझ को सुख होता है। 
Psalms 94:20 क्या तेरे और दुष्टों के सिंसाहन के बीच सन्धि होगी, जो कानून की आड़ में उत्पात मचाते हैं? 
Psalms 94:21 वे धर्मी का प्राण लेने को दल बान्धते हैं, और निर्दोष को प्राणदण्ड देते हैं। 
Psalms 94:22 परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है। 
Psalms 94:23 और उसने उनका अनर्थ काम उन्हीं पर लौटाया है, और वह उन्हें उन्हीं की बुराई के द्वारा सत्यानाश करेगा; हमारा परमेश्वर यहोवा उन को सत्यानाश करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • एस्तेर 1-2
  • प्रेरितों 5:1-21



शुक्रवार, 19 जून 2015

लगे रहो


   बेसबॉल के ख्याति प्राप्त खिलाड़ियों में से एक गैरी कार्टर, प्रभु यीशु के अनुयायी थे। अपने 19 वर्ष के खेल के जीवन में उन्होंने प्रतिदिन खेल को सही रीति से खेलने के लिए परमेश्वर में अपने विश्वास से सामर्थ और सहनशक्ति प्राप्त करी। कार्टर की, 57 वर्ष की आयु में, मस्तिष्क के कैंसर से मृत्यु के कुछ समयोपरांत वॉल स्ट्रीट जर्नल में उनके बारे में एक लेख प्रकाशित हुआ जिसमें उस लेख के लेखक एन्ड्रयु क्लैवन ने बताया कि कार्टर ने किस प्रकार उनके जीवन को प्रभावित किया था।

   1980 के द्शक के अन्त के भाग में क्लैवन अपने जीवन में निराशा से भरे हुए थे और आत्महत्या करने की सोच रहे थे। ऐसे समय उन्होंने में एक खेल के बाद कार्टर द्वारा दिए गए साक्षात्कार को सुना। कार्टर की टीम ने खेल में जीत प्राप्त करी थी और उस जीत में कार्टर का महत्वपूर्ण योगदान रहा था; अपनी बढ़ती हुई आयु और दुखते हुए घुटनों के बावजूद खेल की एक अति महत्वपूर्ण स्थिति में कार्टर ने ज़ोर लगाकर दौड़ लगाई जो उनकी टीम के लिए आवश्यक अंक जमा करने में सहायक हुई। जब इस घटना के बारे में साक्षात्कार लेने वाले ने उनसे पूछा कि अपने दुखते हुए घुटनों के बावजूद वे ऐसा कैसे कर सके तो कार्टर का उत्तर, जो क्लैवन ने सुना, कुछ इस प्रकार था: "कभी कभी जीवन में पीड़ा में भी बस लगे रहना पड़ता ही है।" कार्टर के इस साधारण से वाक्य ने निराश क्लैवन को बहुत प्रभावित किया, और उसे निराशा से निकाला; क्लैवन ने ठाना कि कार्टर के समान ही वह भी विपरीत परिस्थिति में अपनी ज़िम्मेदारियों के निर्वाह में लगा रह सकता है। निराशा से निकलने के बाद क्लैवन को उत्साह मिला, वह आगे बढ़ा और आगे चलकर मसीही विश्वासी भी बन गया।

   कार्टर ने जो बात उस साक्षात्कार में कही, जिससे क्लैवन निराशा से निकल सका और आगे बढ़ सका, वह परमेश्वर के वचन बाइबल में विलापगीत नामक पुस्तिका पर आधारित है -  विलापगीत 3:32। जीवन और परिस्थितियों के निर्वाह में हमें दुख, पीड़ा, कठिनाईयों आदि का सामना करना पड़ सकता है, परन्तु इनके कारण हमें आत्मग्लानि और निराशा में गिरने की आवश्यकता नहीं है; क्योंकि जो परमेश्वर जो हमें इन विपरीत परिस्थितियों में आने देता है, वही हमें उन परिस्थितियों में अपने अनुग्रह और सामर्थ से परिपूर्ण भी करता है।

   जब परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह हमें उभारने और उत्साहित करने के लिए सदा उपलब्ध है, तो हर परिस्थिति में, चाहे वह विपरीत ही क्यों ना हो, हम अपनी हर ज़िम्मेदारी को निभाने के लिए बस लगे रह सकते हैं। - डेव एग्नर


परमेश्वर या तो दुख से आपको बचाए रखेगा, अन्यथा उसे सहने की शक्ति आपको प्रदान करेगा।

हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। - विलापगीत 3:22

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:1-3; 25-33
Lamentations 3:1 उसके रोष की छड़ी से दु:ख भोगने वाला पुरुष मैं ही हूं; 
Lamentations 3:2 वह मुझे ले जा कर उजियाले में नहीं, अन्धियारे ही में चलाता है; 
Lamentations 3:3 उसका हाथ दिन भर मेरे ही विरुद्ध उठता रहता है। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 12-13
  • प्रेरितों 4:23-37



गुरुवार, 18 जून 2015

महत्व एवं आदर


   किम पीक के पास एक अद्भुत प्रतिभा है - अद्वितीय स्मरण शक्ति! किम ने शेक्स्पीयर द्वारा लिखे गए सभी नाटक अक्षरशः स्मरण कर रखे हैं। एक बार शेक्सपीयर के एक नाटक की प्रस्तुति के दौरान एक अभिनेता अपनी पंक्ति का एक शब्द बोलना भूल गया; किम पीक तुरंत खड़ा होकर बोल उठा, "रुको!" उस अभिनेता ने क्षमा माँगी और कहा कि उसे लगा कि ना ही इस पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा और ना ही किसी को कोई एतराज़ होगा। किम ने जवाब दिया, "शेक्स्पियर को अवश्य होता"।

   शब्द महत्वपूर्ण होते हैं; विशेषकर तब जब वे परमेश्वर के शब्द हों। मूसा ने इस्त्राएलियों को इस बारे में सचेत किया और लिखा, "जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना" (व्यवस्थाविवरण 4:2)। जब इस्त्राएली वाचा किए हुए देश में प्रवेश करने को तैयार हो रहे थे तब मूसा ने उन्हें अनेक बार उनके प्रति लगातार बनी रहने वाली परमेश्वर की विश्वासयोग्यता के बारे में स्मरण दिलाया; साथ ही उसने उन्हें उस वाचा के देश में परमेश्वर के वचन के पालन और उसके प्रति उनकी आज्ञाकारिता के बने रहने पर भी ज़ोर दिया जिससे कि उनके जीवन में आशीषें और समृद्धि बनी रहे (व्यवस्थाविवरण 4:39-40)। परमेश्वर की दृष्टि में उसके वचन का प्रत्येक नियम और निर्देश महत्वपूर्ण और पालन-योग्य है, कुछ भी नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता; और इस्त्रएली जो महत्व एवं आदर उसके वचन का करते वही इस बात का सूचक होता कि परमेश्वर का उनके जीवनों में कितना आदर एवं महत्व है।

   आज यही हमारे लिए भी उतना ही सार्थक है - जो महत्व एवं आदर हम परमेश्वर के वचन बाइबल का करते हैं वही इस बात का सूचक है कि हमारे जीवनों में परमेश्वर का क्या महत्व एवं आदर है। परमेश्वर के प्रति सच्ची श्रद्धा रखने का अर्थ है उसके वचन को महत्व देना, सावधानी से उसका उपयोग करना और मन से उसका पालन करना; विचार करें कि आप ऐसा कर रहे हैं या नहीं! - मार्विन विलियम्स

परमेश्वर के वचन को किसी जोड़-तोड़ की नहीं, आज्ञाकारिता की आवश्यकता है।

जिस के पास मेरी आज्ञा है, और वह उन्हें मानता है, वही मुझ से प्रेम रखता है, और जो मुझ से प्रेम रखता है, उस से मेरा पिता प्रेम रखेगा, और मैं उस से प्रेम रखूंगा, और अपने आप को उस पर प्रगट करूंगा। - यूहन्ना 14:21

बाइबल पाठ: व्यवस्थाविवरण 4:1-10
Deuteronomy 4:1 अब, हे इस्राएल, जो जो विधि और नियम मैं तुम्हें सिखाना चाहता हूं उन्हें सुन लो, और उन पर चलो; जिस से तुम जीवित रहो, और जो देश तुम्हारे पितरों का परमेश्वर यहोवा तुम्हें देता है उस में जा कर उसके अधिकारी हो जाओ। 
Deuteronomy 4:2 जो आज्ञा मैं तुम को सुनाता हूं उस में न तो कुछ बढ़ाना, और न कुछ घटाना; तुम्हारे परमेश्वर यहोवा की जो जो आज्ञा मैं तुम्हें सुनाता हूं उन्हें तुम मानना। 
Deuteronomy 4:3 तुम ने तो अपनी आंखों से देखा है कि बालपोर के कारण यहोवा ने क्या क्या किया; अर्थात जितने मनुष्य बालपोर के पीछे हो लिये थे उन सभों को तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने तुम्हारे बीच में से सत्यानाश कर डाला; 
Deuteronomy 4:4 परन्तु तुम जो अपने परमेश्वर यहोवा के साथ लिपटे रहे हो सब के सब आज तक जीवित हो। 
Deuteronomy 4:5 सुनो, मैं ने तो अपने परमेश्वर यहोवा की आज्ञा के अनुसार तुम्हें विधि और नियम सिखाए हैं, कि जिस देश के अधिकारी होने जाते हो उस में तुम उनके अनुसार चलो। 
Deuteronomy 4:6 सो तुम उन को धारण करना और मानना; क्योंकि और देशों के लोगों के साम्हने तुम्हारी बुद्धि और समझ इसी से प्रगट होगी, अर्थात वे इन सब विधियों को सुनकर कहेंगे, कि निश्चय यह बड़ी जाति बुद्धिमान और समझदार है। 
Deuteronomy 4:7 देखो, कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसका देवता उसके ऐसे समीप रहता हो जैसा हमारा परमेश्वर यहोवा, जब कि हम उसको पुकारते हैं? 
Deuteronomy 4:8 फिर कौन ऐसी बड़ी जाति है जिसके पास ऐसी धर्ममय विधि और नियम हों, जैसी कि यह सारी व्यवस्था जिसे मैं आज तुम्हारे साम्हने रखता हूं? 
Deuteronomy 4:9 यह अत्यन्त आवश्यक है कि तुम अपने विषय में सचेत रहो, और अपने मन की बड़ी चौकसी करो, कहीं ऐसा न हो कि जो जो बातें तुम ने अपनी आंखों से देखीं उन को भूल जाओ, और वह जीवन भर के लिये तुम्हारे मन से जाती रहे; किन्तु तुम उन्हें अपने बेटों पोतों को सिखाना। 
Deuteronomy 4:10 विशेष कर के उस दिन की बातें जिस में तुम होरेब के पास अपने परमेश्वर यहोवा के साम्हने खड़े थे, जब यहोवा ने मुझ से कहा था, कि उन लोगों को मेरे पास इकट्ठा कर कि मैं उन्हें अपने वचन सुनाऊं, जिस से वे सीखें, ताकि जितने दिन वे पृथ्वी पर जीवित रहें उतने दिन मेरा भय मानते रहें, और अपने लड़के बालों को भी यही सिखाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 10-11
  • प्रेरितों 4:1-22


बुधवार, 17 जून 2015

बिना जोखिम


   हाल ही में मेरे एक सहकर्मी ने अपना ऐसा अनुभव बताया, जिसे मैं व्यक्तिगत रीति से कभी अज़माना नहीं चाहूँगा - बन्जी जमपिंग का! उस सहकर्मी ने इसका जो विवरण दिया वह रोमाँचक भी था और डरावना भी। बंजी जमपिंग में सैकड़ों फुट ऊँचे पुल से कूदना होता है, और कूदने वाले के पैर पुल के साथ लंबी, मोटी और लचीली रस्सियों से बंधे होते हैं जिससे वह नीचे ज़मीन के पास तक तो पहुँच सकता है किंतु ज़मीन को छू नहीं सकता। मेरे सहकर्मी ने बताया कि सुरक्षा के लिए एक नहीं वरन दो मज़बूत पेटियाँ और रस्सियाँ उसके शरीर से बाँधी गई थीं, और यह सब कुछ बड़ी सावधानी तथा बारीक जाँच के बाद करवाया जाता है, लेकिन मजेदार समय बिताने वाली बातों की मेरी सूची में यह कदापि सम्मिलित नहीं है।

   जब मैं उस की बात सुन रहा था तो मुझे ध्यान आया कि मसीह यीशु पर विश्वास लाना भी किसी के लिए भी विश्वास कि अंधी छलाँग नहीं है। परमेश्वर ने भी मसीही विश्वास में आने में हमारी सुरक्षा के लिए दो उपाय प्रदान किए हैं, जो हमारे साथ सदा बने रहते हैं, जीवन के सबसे अंधकारमय पलों में भी। परमेश्वर के वचन बाइबल में इफिसियों के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे" (इफिसियों 2:8-9)।

   परमेश्वर द्वारा दी गई इस दोहरी सुरक्षा - परमेश्वर का अनुग्रह और प्रभु यीशु द्वारा पूर्ण किए गए कार्य पर विश्वास, के द्वारा ही परमेश्वर के साथ हमारा संबंध सदा स्थिर और सुरक्षित रहता है। इन दोनों बातों के होते हुए, मसीह यीशु पर विश्वास लाने से मिलने वाला उद्धार कोई अंधविश्वास की छलांग नहीं है; वरन यह बिना किसी जोखिम के परमेश्वर और उसके वचन तथा उसके कभी ना बदलने वाले प्रेम एवं सुरक्षा पर भरोसा करने का अभ्यास है। - बिल क्राउडर


जब हम परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करते हैं, परमेश्वर की शांति स्वतः ही साथ प्राप्त हो जाती है।

जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनन्त जीवन उसका है; परन्तु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, परन्तु परमेश्वर का क्रोध उस पर रहता है। - यूहन्ना 3:36 

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:1-10
Ephesians 2:1 और उसने तुम्हें भी जिलाया, जो अपने अपराधों और पापों के कारण मरे हुए थे। 
Ephesians 2:2 जिन में तुम पहिले इस संसार की रीति पर, और आकाश के अधिकार के हाकिम अर्थात उस आत्मा के अनुसार चलते थे, जो अब भी आज्ञा न मानने वालों में कार्य करता है। 
Ephesians 2:3 इन में हम भी सब के सब पहिले अपने शरीर की लालसाओं में दिन बिताते थे, और शरीर, और मन की मनसाएं पूरी करते थे, और और लोगों के समान स्‍वभाव ही से क्रोध की सन्तान थे। 
Ephesians 2:4 परन्तु परमेश्वर ने जो दया का धनी है; अपने उस बड़े प्रेम के कारण, जिस से उसने हम से प्रेम किया। 
Ephesians 2:5 जब हम अपराधों के कारण मरे हुए थे, तो हमें मसीह के साथ जिलाया; (अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है।) 
Ephesians 2:6 और मसीह यीशु में उसके साथ उठाया, और स्‍वर्गीय स्थानों में उसके साथ बैठाया। 
Ephesians 2:7 कि वह अपनी उस कृपा से जो मसीह यीशु में हम पर है, आने वाले समयों में अपने अनुग्रह का असीम धन दिखाए। 
Ephesians 2:8 क्योंकि विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है, और यह तुम्हारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर का दान है। 
Ephesians 2:9 और न कर्मों के कारण, ऐसा न हो कि कोई घमण्‍ड करे। 
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3


मंगलवार, 16 जून 2015

लालची


   प्रति वर्ष मैं हम्मिंग-बर्ड पक्षियों के भोजन का बर्तन बाहर लगाती हूँ, और वे छोटे पक्षी वहाँ आकर भोजन लेने के लिए आपस में लड़ने लगते हैं। उस बर्तन पर बैठने के लिए चार स्थान हैं और उन चारों स्थानों से उनको उनका प्रीय भोजन - शीरा, एक ही स्त्रोत से भरपूरी से प्राप्त हो सकता है। फिर भी वे पक्षी, अन्य खाली स्थानों को छोड़कर, वहीं बैठना चाहते हैं जहाँ से कोई अन्य पक्षी बैठकर भोजन ले रहा होता है। यह जानते हुए कि उनके बैठने प्रत्येक स्थान से उन्हें उसी एक स्थान से भरपूरी से भोजन मिलेगा, मुझे उनके लालच को देखकर अचरज होता है।

   लेकिन फिर मैं यह भी सोचती हूँ, "मेरे लिए उन पक्षियों का लालच देखना इतना सरल और अपना लालच देखना इतना कठिन क्यों है?" अकसर मेरी लालसा रहती है कि मैं परमेश्वर के निकट उस स्थान पर बैठूँ जहाँ पर कोई अन्य बैठा होता है, जबकि मैं जानती हूँ कि हर भली वस्तु मुझे परमेश्वर से ही प्राप्त होती है, और ना उसके भण्डार में और ना ही मेरे प्रति उसके प्रेम तथा देख-रेख में कोई घटी है; वह मेरी प्रत्येक आवश्यकता को भली भांति पूरा करता है। क्योंकि हम मसीही विश्वासियों के लिए परमेश्वर हमारे शत्रुओं के सामने भी मेज़ सजा सकता है (भजन 23:5), तो फिर हमें इस बात की चिंता करने की क्या आवश्यकता है कि किसी अन्य के पास वह क्यों है जिसकी लालसा मैं करता हूँ?

   परमेश्वर हमें सब भले कार्यों के लिए हर आवश्यक वस्तु भरपूरी से दे सकता है (2 कुरिन्थियों 9:8)। जब हम परमेश्वर के लिए उसके अनुग्रह के सेवक (1 पतरस 4:10) होने की अपनी बुलाहट को पहचान लेंगे, तब हम किसी अन्य के स्थान को लेकर परस्पर द्वेष रखने और लड़ने की बजाए, उस सेवकाई को पूरा करने के लिए जो स्थान परमेश्वर ने हमें दिया है, उसी के लिए कृतज्ञ एवं धन्यवादी हो जाएंगे, और उसके अनुग्रह तथा प्रेम को उसकी इच्छा के अनुसार दूसरों के पास पहुँचाने वाले बन जाएंगे। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


दूसरों की ओर देखने से अप्रसन्नता, परन्तु परमेश्वर की ओर देखने से संतुष्टि आती है।

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। - फिलिप्पियों 4:19

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 9:6-15
2 Corinthians 9:6 परन्तु बात तो यह है, कि जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा काटेगा भी; और जो बहुत बोता है, वह बहुत काटेगा। 
2 Corinthians 9:7 हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे न कुढ़ कुढ़ के, और न दबाव से, क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देने वाले से प्रेम रखता है। 
2 Corinthians 9:8 और परमेश्वर सब प्रकार का अनुग्रह तुम्हें बहुतायत से दे सकता है जिस से हर बात में और हर समय, सब कुछ, जो तुम्हें आवश्यक हो, तुम्हारे पास रहे, और हर एक भले काम के लिये तुम्हारे पास बहुत कुछ हो। 
2 Corinthians 9:9 जैसा लिखा है, उसने बिथराया, उसने कंगालों को दान दिया, उसका धर्म सदा बना रहेगा। 
2 Corinthians 9:10 सो जो बोने वाले को बीज, और भोजन के लिये रोटी देता है वह तुम्हें बीज देगा, और उसे फलवन्‍त करेगा; और तुम्हारे धर्म के फलों को बढ़ाएगा। 
2 Corinthians 9:11 कि तुम हर बात में सब प्रकार की उदारता के लिये जो हमारे द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करवाती है, धनवान किए जाओ। 
2 Corinthians 9:12 क्योंकि इस सेवा के पूरा करने से, न केवल पवित्र लोगों की घटियां पूरी होती हैं, परन्तु लोगों की ओर से परमेश्वर का बहुत धन्यवाद होता है। 
2 Corinthians 9:13 क्योंकि इस सेवा से प्रमाण ले कर वे परमेश्वर की महिमा प्रगट करते हैं, कि तुम मसीह के सुसमाचार को मान कर उसके आधीन रहते हो, और उन की, और सब की सहायता करने में उदारता प्रगट करते रहते हो। 
2 Corinthians 9:14 ओर वे तुम्हारे लिये प्रार्थना करते हैं; और इसलिये कि तुम पर परमेश्वर का बड़ा ही अनुग्रह है, तुम्हारी लालसा करते रहते हैं। 
2 Corinthians 9:15 परमेश्वर को उसके उस दान के लिये जो वर्णन से बाहर है, धन्यवाद हो।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47



सोमवार, 15 जून 2015

महिमा


   जेसन अपने शहर से बाहर एक अन्य स्थान पर था, और वहाँ के स्थानीय चर्च में आरधना के लिए गया। आरधना आरंभ होने से कुछ ही देर पहले जेसन से आग्रह किया गया कि वह परमेश्वर की महिमा के लिए कोई स्तुति गीत आरधना में गाए। जेसन ने सहर्ष वह आग्रह स्वीकार किया और एक जाना-पहचाना स्तुति गीत, To God Be the Glory गाने का निर्णय किया, क्योंकि वह गीत उसके लिए विशेष अर्थ रखता था। उसने चर्च भवन के तहखाने में जाकर उस गीत का अभ्यास किया और फिर आरधना के दौरान जब उसे बुलाया गया तो उसने बिना किसी संगीत वाद्य के अकेले ही वह गीत गाया।

   कुछ सप्ताह के बाद जेसन को पता चला कि उस दिन उसके द्वारा गाए गए गीत को लेकर उस चर्च के कुछ लोग अप्रसन्न हुए क्योंकि उन्हें लगा कि वह परमेश्वर कि स्तुति के लिए नहीं वरन अपनी संगीत प्रतिभा दिखाने के लिए अकेले ही गा रहा था। क्योंकि वे लोग जेसन को जानते नहीं थे, इसलिए उन्होंने यह गलत अन्दाज़ा लगाया कि जेसन परमेश्वर को महिमा देने के लिए नहीं वरन चर्च के लोगों को प्रभावित करने के लिए गीत गा रहा था।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड से हम पाते हैं कि परमेश्वर ने अलग अलग गुण वाले लोगों को मन्दिर में सेवा और आरधना के लिए नियुक्त किया - निर्माण कार्य में लगे कारीगर से लेकर आरधना की अगुवाई करने और संचालित करने वाले लोग, उनके गुणों और योग्यताओं के आधार पर नियुक्त किए गए (1 इतिहास 15:22; 25:1, 7)।

   प्रभु परमेश्वर ने हम सब को भिन्न भिन्न गुण, योग्यताएं और आत्मिक वरदान दिए हैं जिन्हें हमें उसकी महिमा के लिए उपयोग करना है (कुलुस्सियों 3:23-24)। जब हम उन गुणों, योग्यताओं और वरदानों का उपयोग परमेश्वर की महिमा के उद्देश्य से करते हैं ना कि अपनी प्रतिभा को दिखाने के उद्देश्य से, तो फिर हमें अन्य लोगों के विचारों और समझ को लेकर चिंतित रहने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर ने हमारे लिए अपने सर्वोत्तम को, अर्थात अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को दे दिया; अब उसे अपना सर्वोत्तम अर्पित करके हम उसकी महिमा करते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


परमेश्वर की जो सेवकाई हम अपने पूरे मन से करते हैं, वही हमारी सर्वोत्तम सेवा होती है।

और बसलेल और ओहोलीआब और सब बुद्धिमान जिन को यहोवा ने ऐसी बुद्धि और समझ दी हो, कि वे यहोवा की सारी आज्ञाओं के अनुसार पवित्रस्थान की सेवकाई के लिये सब प्रकार का काम करना जानें, वे सब यह काम करें। -  निर्गमन 36:1

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 25:1-8
1 Chronicles 25:1 फिर दाऊद और सेनापतियों ने आसाप, हेमान और यदूतून के कितने पुत्रों को सेवकाई के लिये अलग किया कि वे वीणा, सारंगी और झांझ बजा बजाकर नबूवत करें। और इस सेवकाई के काम करने वाले मनुष्यों की गिनती यह थी: 
1 Chronicles 25:2 अर्थात आसाप के पुत्रों में से तो जक्कूर, योसेप, नतन्याह और अशरेला, आसाप के ये पुत्र आसाप ही की आज्ञा में थे, जो राजा की आज्ञा के अनुसार नबूवत करता था। 
1 Chronicles 25:3 फिर यदूतून के पुत्रों में से गदल्याह, सरीयशायाह, हसब्याह, मत्तित्याह, ये ही छ: अपने पिता यदूतून की आज्ञा में हो कर जो यहोवा का धन्यवाद और स्तुति कर कर के नबूवत करता था, वीणा बजाते थे। 
1 Chronicles 25:4 और हेमान के पुत्रों में से, मुक्किय्याह, मत्तन्याह, लज्जीएल, शबूएल, यरीमोत, हनन्याह, हनानी, एलीआता, गिद्दलती, रोममतीएजेर, योशबकाशा, मल्लोती, होतीर और महजीओत। 
1 Chronicles 25:5 परमेश्वर की प्रतिज्ञानुकूल जो उसका नाम बढ़ाने की थी, ये सब हेमान के पुत्र थे जो राजा का दशीं था; क्योंकि परमेश्वर ने हेमान को चौदह बेटे और तीन बेटियां दीं थीं। 
1 Chronicles 25:6 ये सब यहोवा के भवन में गाने के लिये अपने अपने पिता के आधीन रह कर, परमेश्वर के भवन, की सेवकाई में झांझ, सारंगी और वीणा बजाते थे। और आसाप, यदूतून और हेमान राजा के आधीन रहते थे। 
1 Chronicles 25:7 इन सभों की गिनती भाइयों समेत जो यहोवा के गीत सीखे हुए और सब प्रकार से निपुण थे, दो सौ अठासी थी। 
1 Chronicles 25:8 और उन्होंने क्या बड़ा, क्या छोटा, क्या गुरू, क्या चेला, अपनी अपनी बारी के लिये चिट्ठी डाली।

एक साल में बाइबल: 
  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21