ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

लालसा


   मेरी सहेली कैथी अपनी बेटी और 4 माह के नाती ऑलिवर के साथ एक सप्ताह की छुट्टी बिताने गई थी; छुट्टी स्माप्त होने पर उसे उनसे विदा लेकर उसे वापस आना पड़ा, तब तक के लिए जब तक फिर मिलने जाने का अवसर बने। उस ने अपना यह अनुभव लिख कर मुझ से साझा किया; उसने लिखा, "ऐसे मधुर पुनःमिलन की यादों से मुझे स्वर्ग में होने की लालसा होती है। वहाँ हमें यादें अपने मन-मस्तिष्क में संजोनी नहीं पड़ेंगी। वहाँ हमें यह प्रार्थना नहीं करनी पड़ेगी कि समय धीमी गति से बीते और दिन लंबे हों। वहाँ हमारे ’हैलो’ कभी ’गुडबाय’ (अलविदा) नहीं बनेंगे। स्वर्ग हमारे लिए सदाकाल के ’हैलो’ का स्थान होगा, और मुझे इसकी प्रतीक्षा करना भारी हो रहा है।" कैथी पहली बार नानी बनी है, और अधिकाधिक अपने नाती के साथ होने की उसकी लालसा समझ में आती है। वह हर उस पल के लिए धन्यवादी है जो वह अपने नाती के साथ बिताने पाती है; और उस धन्य आशा के लिए भी जब वह स्वर्ग में प्रीय जनों के साथ होगी और उस आनन्दमय अद्भुत समय का फिर कभी अन्त नहीं होगा।

   हमें अपने भले दिन बहुत छोटे और बुरे दिन बहुत लंबे प्रतीत होते हैं, लेकिन दोनों ही प्रकार के दिन हम मसीही विश्वासियों के दिलों में आने वाले स्वर्ग के सर्वोत्तम दिनों की लालसा जागृत करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कहा कि वह और उसके साथ कुरिन्थुस की मसीही मण्डली के मसीही विश्वासी भी संसार और शरीर को छोड़कर अपने स्वर्गीय घर में पहुँच जाने की लालसा रखते हैं: "इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें" (2 कुरिन्थियों 5:२)। यद्यपि इस जीवन में प्रभु परमेश्वर हर समय हमारे साथ ही है, अभी हम उसे प्रत्यक्ष देख नहीं पाते हैं; अभी हम विश्वास के सहारे जीते हैं ना कि रूप को देखकर (पद 7)।

   परमेश्वर ने हम मनुष्यों को अपने साथ संगति में रहने के लिए बनाया है (पद 5); इसीलिए उसने प्रभु यीशु मसीह में मिलने वाली पापों की क्षमा और सेंत-मेंत उद्धार के द्वारा हमारे लिए इस संगति में आने का मार्ग भी तैयार करके दे दिया है; ताकि स्वर्ग में उसके तथा अन्य मसीही विश्वासियों के साथ हम सदाकाल के ’हैलो’ की स्थिति में रहें, किसी से भी कभी विदा होने की कोई संभावना ही ना हो। यही हमारे लिए परमेश्वर की और हम मसीही विश्वासियों की परमेश्वर तथा प्रीय जनों के लिए लालसा है। - ऐनी सेटास


अभी हम प्रभु यीशु को बाइबल में होकर देखते हैं; तब प्रत्यक्ष देखेंगे।

पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है। - इब्रानियों 11:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:15-5:8
2 Corinthians 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। 
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। 
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

बोल


   आपने यह कथन सुना होगा, "समयानुसार कहना या करना ही सबसे महत्वपूर्ण है।" परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, सही समयानुसार बोलना या चुप रहना भी बहुत महत्वपूर्ण होता है। अपने अनुभवों के आधार पर उन अवसरों के बारे में सोचें जब परमेश्वर ने अनायास ही आपको किसी को तरो-ताज़ा करने के लिए उपयुक्त बोल दिए; या ऐसे अवसरों को जब आप कुछ बोलना चाहते थे किंतु आपका अनेपक्षित रीति से शान्त ही बने रहना आपके लिए अधिक बुद्धिमतापूर्ण ठहरा।

   बाइबल बताती है कि अन्य बातों के समान बोलने या चुप रहने का भी सही समय होता है: "फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है" (सभोप्देशक 3:7)। राजा सुलेमान ने भली-भांति बोले गए भले बोलों की उपमा चांदी में जड़े गए सुनहरे सेबों से दी है (नीतिवचन 25:11-12); अर्थात सुन्दर, बहुमूल्य और बेशकीमती कलाकृति के समान। बोलने के सही समय की पहचान रखना, बोलने तथा सुनने वालों, दोनों ही के लिए लाभकारी होता है; चाहे वे बोल प्रेम, प्रोत्साहन, प्रशंसा के हों या ताड़ना अथवा डाँट के। इसी प्रकार शान्त रहने का भी समय और उपयोगिता होती है; जब मन किसी का अपमान करने, उसे नीचा दिखाने या इधर-उधर उसकी बुराई करने को उकसा रहा हो, तो बुद्धिमान राजा सुलेमान के कहे अनुसार, अपनी ज़ुबान पर लगाम देना और शान्त रहने के उचित समय को पहचानना बुद्धिमतापूर्ण होता है: "जो अपने पड़ोसी को तुच्छ जानता है, वह निर्बुद्धि है, परन्तु समझदार पुरूष चुपचाप रहता है। जो लुतराई करता फिरता वह भेद प्रगट करता है, परन्तु विश्वासयोग्य मनुष्य बात को छिपा रखता है" (नीतिवचन 11:12-13)। जब बड़बोला हो कर या क्रोधित हो कर पाप कर जाने की लालसा मन में उठती है, वह चाहे किसी मनुष्य के विरोध में हो या परमेश्वर के, तो बोलने में धैर्यवन्त होना ही गलती कर बैठने का प्रतिरोधक होता है: "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन 10:19); "हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19)।

   कई बार यह जान पाना कि क्या कहें और कब कहें कठिन होता है। ऐसे में हम मसीही विश्वासियों की अगुवाई हमारे अन्दर बसने वाला परमेश्वर का आत्मा करता है और सही निर्णय करने में वही हमारा सहायक होता है। वही हमें सही समय पर सही रीति से सही बोल का प्रयोग करने की सद्बुद्धि देता है, जिससे हम औरों की भलाई और अपने परमेश्वर पिता की महिमा का कारण ठहरें। - मार्विन विलियम्स


सही समय पर कहे गए सही शब्द उत्तम कलाकृति के समान होते हैं।

जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों। - सभोपदेशक 5:1-2

बाइबल पाठ: नीतिवचन 25:11-15
Proverbs 25:11 जैसे चान्दी की टोकरियों में सोनहले सेब हों वैसे ही ठीक समय पर कहा हुआ वचन होता है। 
Proverbs 25:12 जैसे सोने का नथ और कुन्दन का जेवर अच्छा लगता है, वैसे ही मानने वाले के कान में बुद्धिमान की डांट भी अच्छी लगती है। 
Proverbs 25:13 जैसे कटनी के समय बर्फ की ठण्ड से, वैसे ही विश्वासयोग्य दूत से भी, भेजने वालों का जी ठण्डा होता है। 
Proverbs 25:14 जैसे बादल और पवन बिना दृष्टि निर्लाभ होते हैं, वैसे ही झूठ-मूठ दान देने वाले का बड़ाई मारना होता है।
Proverbs 25:15 धीरज धरने से न्यायी मनाया जाता है, और कोमल वचन हड्डी को भी तोड़ डालता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


बुधवार, 12 अक्टूबर 2016

शरणस्थान


   मलेशिया के क्लांग शहर के एक चर्च में प्रवेश करते समय, वहाँ बाहर लगे एक स्वागत-चिन्ह ने मेरा ध्यान खींचा; उस पर लिखा था: "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान।"

   प्रभु यीशु मसीह के मन को प्रतिबिंबित करने वाली बातों में से शायद ही कोई और बात इससे बेहतर होगी, यदि प्रभु यीशु मसीह की विश्वासी मण्डली थके हुओं के लिए विश्राम स्थल और उनके बोझों को हलका करने वाली हो। यह प्रभु यीशु की सेवकाई में बहुत महत्वपूर्ण है; प्रभु यीशु ने स्वयं ही कहा है, "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   प्रभु यीशु ने यह वायदा किया है कि वह हमारे भारी बोझों को लेकर उनके स्थान पर अपना हलका बोझ हमें प्रदान कर देगा: "मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है" (मत्ती 11:29-30)।

   उसके इस वायदे के पीछे उसकी महान सामर्थ है; हमारे बोझ चाहे जैसे भी हों, कितने भी भारी क्यों ना हों, मसीह यीशु में हम परमेश्वर के पुत्र के मज़बूत कंधों का सहारा और सहायता पाते हैं, जो उन बोझों को स्वयं उठा लेता है और उनके स्थान पर अपने कार्य के हलके बोझ को हमें सौंप देता है।

   मसीह यीशु, जिसने हम से अनन्त काल के प्रेम से प्रेम किया है, हमारे संघर्षों को जानता है, और हम भरोसा रख सकते हैं कि वह हमें ऐसा विश्राम प्रदान करेगा जैसा हम अपने प्रयासों से कभी प्राप्त नहीं कर सकते हैं। उसकी सामर्थ हमारी कमज़ोरियों के लिए काफी है, इसी कारण वह सारे संसार के सभी "बोझ से दबे लोगों के लिए शरणस्थान" है। - बिल क्राउडर


परमेश्वर बेचैन लोगों को बुलाता है 
जिससे वे उसमें स्थाई और अनन्तकालीन चैन सेंत-मेंत पाएं।

यहोवा जो तेरा छुड़ाने वाला और इस्राएल का पवित्र है, वह यों कहता है, मैं ही तेरा परमेश्वर यहोवा हूं जो तुझे तेरे लाभ के लिये शिक्षा देता हूं, और जिस मार्ग से तुझे जाना है उसी मार्ग पर तुझे ले चलता हूं। भला होता कि तू ने मेरी आज्ञाओं को ध्यान से सुना होता! तब तेरी शान्ति नदी के समान और तेरा धर्म समुद्र की लहरों के नाईं होता; - यशायाह 48:17-18

बाइबल पाठ: मत्ती 11:25-30
Matthew 11:25 उसी समय यीशु ने कहा, हे पिता, स्वर्ग और पृथ्वी के प्रभु; मैं तेरा धन्यवाद करता हूं, कि तू ने इन बातों को ज्ञानियों और समझदारों से छिपा रखा, और बालकों पर प्रगट किया है। 
Matthew 11:26 हां, हे पिता, क्योंकि तुझे यही अच्छा लगा। 
Matthew 11:27 मेरे पिता ने मुझे सब कुछ सौंपा है, और कोई पुत्र को नहीं जानता, केवल पिता; और कोई पिता को नहीं जानता, केवल पुत्र और वह जिस पर पुत्र उसे प्रगट करना चाहे। 
Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। 
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। 
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4


मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

परिवर्तन


   शिक्षक तथा सर्वाधिक बिकने वाली पुस्तकों के एक लेखक टोनी वैगनर विघटन द्वारा परिवर्तन में दृढ़ विश्वास रखते हैं, जिससे संसार के सोचने और कार्य करने की प्रणाली में परिवर्तन आ सके। अपनी पुस्तक, Creating Innovators: The Making of Young People Who Will Change the World, में वे कहते हैं कि "मनुष्य के प्रत्येक प्रयास के द्वारा परिवर्तन आता है", और, "यदि सही वातावरण और अवसर मिले तो अधिकांश लोग और अधिक रचनात्मक तथा परिवर्तनकारी हो सकते हैं।"

   प्रेरित पौलुस प्रथम शताब्दी में परिवर्तन लाने वाला एक व्यक्ति था जो प्रभु यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा जीवन में आने वाले आधारभूत परिवर्तन का प्रचार करता हुआ एशिया माइनर में यात्रा करता रहा। रोम में रहने वाले मसीही विश्वासियों को पौलुस ने लिखा, कि वे अपने आप को पूर्णतः परमेश्वर को समर्पित कर दें, "और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो" (रोमियों 12:2)। पौलुस ने उन्हें सिखाया कि कैसे एक स्वार्थी, लालची और छीन कर ले लेने वाले संसार में वे मसीह यीशु पर केन्द्रित और औरों को देने वाला जीवन व्यतीत कर सकते हैं।

   पौलुस के समय से आज संसार बहुत भिन्न हो गया है, लेकिन संसार के लोगों के अन्दर प्रेम, क्षमा और परिवर्तन की लालसा वैसी ही है। संसार के इतिहास का महानतम परिवर्तनकारी प्रभु यीशु यही सब देता है और उसका संसार के सभी लोगों को खुला निमंत्रण है कि वे उसके पास आएं, और उस पर लाए गए विश्वास द्वारा एक नए और भिन्न परिवर्तित जीवन का अनुभव करें। - डेविड मैक्कैसलैंड


जैसे भी हम हैं, परमेश्वर हमें वैसा ही स्वीकार तो कर लेता है, 
परन्तु फिर वैसा रहने नहीं देता वरन अपनी समानता में ले आता है।

परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - 2 कुरिन्थियों 3:18

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देने वाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


सोमवार, 10 अक्टूबर 2016

शान्त आज्ञाकारिता


   बचपन में मुझे बहुत पसन्द आने वाला एक खेल था हूला-हूप (कमर पर घुमाने वाला छल्ला) घुमाना, जो अब पुनः लोकप्रीय हो रहा है। मैं और मेरी सहेली घंटों घर के सामने वाले लॉन पर स्पर्धा में लगे रहते थे, यह देखने के लिए कौन उस छल्ले को सबसे अधिक देर तक अपनी कमर पर घुमाता रह सकता है। इस वर्ष मैंने अपने बचपन के उस समय के आनन्द को फिर से अनुभव किया; एक पार्क में बैठे हुए मैं देख रही थी कि सभी उम्र के बच्चे अपनी अपनी कमर पर छल्ले को घुमाने और उसे धरती पर गिरने से बचाए रखने का प्रयास करने में लगे हुए थे। वे अपनी भरसक शक्ति और प्रयत्नों से, अपने शरीर को इधर-उधर झुका कर छल्ले को कमर के आस-पास रखने के प्रयास में लगे हुए थे, परन्तु उनके सभी प्रयासों के बावजूद छल्ला नीचे गिर ही जा रहा था। फिर एक युवती ने एक छल्ला उठाया और बिना अधिक हिले-डुले, शरीर की लयभद्ध हरकत के द्वारा, वह उस छल्ले को अपनी कमर पर घुमाने लगी, उसे ऊपर अपने कंधों तक और फिर वापस कमर पर लाने-लेजाने लगी। उन बच्चों की अपेक्षा, उसकी छल्ले को घुमा पाने की इस सफलता का राज़ उसका वेग से नहीं वरन लय में हिलना-घुमाना था।

   हमारे आत्मिक जीवनों में भी, परमेश्वर की सेवा के लिए हम अनेक प्रकार से अपनी शक्ति व्यय कर सकते हैं, दूसरों के समान और साथ बने रहने के प्रयास करते रह सकते हैं। परन्तु इन प्रयासों में थक कर चूर हो जाना कोई सद्गुण नहीं है (गलतियों 6:9)। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि हज़ारों लोगों को केवल पाँच रोटियों और दो मछलियों से भर पेट भोजन करवाने (मरकुस 6:38-44) से पहले, प्रभु यीशु ने अपने चेलों से कहा था कि वे एकांत में आकर पहले कुछ विश्राम कर लें। इस घटना से हम यह समझ सकते हैं कि प्रभु परमेश्वर को अपने उद्देश्यों एवं कार्यों को हमारे द्वारा पूरा करवाने के लिए उसे हम से हमें थका देने वाले परिश्रम की आवश्यकता नहीं वरन हमारे सहयोग की आवश्यकता है।

   जो तथ्य प्रभु यीशु ने तब अपने उन चेलों को सिखाया था, वह चाहता है कि वही तथ्य आज हम भी सीख लें: जितना हम शान्त रह कर उसकी आज्ञाकारिता के द्वारा कर सकते हैं उतना हम अपने अनेकों अन्धाधुंध प्रयासों से कभी नहीं कर सकते हैं। - जूली ऐकैअरमैन लिंक


प्रभु यीशु हमारी स्वेच्छा तथा सहयोग चाहता है, ना कि हमें थका देना।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया - यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: मरकुस 6:34-44
Mark 6:34 उसने निकलकर बड़ी भीड़ देखी, और उन पर तरस खाया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे, जिन का कोई रखवाला न हो; और वह उन्हें बहुत सी बातें सिखाने लगा। 
Mark 6:35 जब दिन बहुत ढल गया, तो उसके चेले उसके पास आकर कहने लगे; यह सुनसान जगह है, और दिन बहुत ढल गया है। 
Mark 6:36 उन्हें विदा कर, कि चारों ओर के गांवों और बस्‍तियों में जा कर, अपने लिये कुछ खाने को मोल लें। 
Mark 6:37 उसने उन्हें उत्तर दिया; कि तुम ही उन्हें खाने को दो: उन्हों ने उस से कहा; क्या हम सौ दीनार की रोटियां मोल लें, और उन्हें खिलाएं? 
Mark 6:38 उसने उन से कहा; जा कर देखो तुम्हारे पास कितनी रोटियां हैं? उन्होंने मालूम कर के कहा; पांच और दो मछली भी। 
Mark 6:39 तब उसने उन्हें आज्ञा दी, कि सब को हरी घास पर पांति पांति से बैठा दो। 
Mark 6:40 वे सौ सौ और पचास पचास कर के पांति पांति बैठ गए। 
Mark 6:41 और उसने उन पांच रोटियों को और दो मछिलयों को लिया, और स्वर्ग की ओर देखकर धन्यवाद किया और रोटियां तोड़ तोड़ कर चेलों को देता गया, कि वे लोगों को परोसें, और वे दो मछिलयां भी उन सब में बांट दीं। 
Mark 6:42 और सब खाकर तृप्‍त हो गए। 
Mark 6:43 और उन्होंने टुकडों से बारह टोकिरयां भर कर उठाई, और कुछ मछिलयों से भी। 
Mark 6:44 जिन्हों ने रोटियां खाईं, वे पांच हजार पुरूष थे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2


रविवार, 9 अक्टूबर 2016

उम्मीद


   अपनी पुस्तक God in the Dock (कटघरे में परमेश्वर) में सुप्रसिद्ध मसीही विश्वासी और लेखक सी. एस. ल्युईस ने लिखा: "कलपना कीजिए कि एक इमारत में, जिसमें कई लोग साथ रहते हैं, आधे यह मानते हैं कि वह इमारत के होटल है, और शेष आधे यह मानते हैं कि वह इमारत एक कैदखाना है। जो उसे होटल मानते हैं, उन्हें वह इमारत काफी कष्टदायक और असहनीय लगेगी; और जो उसे कैदखाना मानते हैं उनके लिए वही इमारत आश्चर्यजनक रूप से आरामदेह होगी।" ल्युईस ने बड़ी चतुराई से इस तुलनात्मक स्थिति के द्वारा इस बात को दिखाया है कि कैसे हम अपनी उम्मीद के आधार पर जीवन के प्रति दृष्टिकोण को बनाते हैं। ल्युईस आगे लिखते हैं, "यदि आप इस संसार को एक होटल के रूप में देखते हैं जो आप के सुख-सुविधा और आनन्द उठाने के लिए है, तो आपको यह संसार कष्टदायक एवं असहनीय लगेगा। परन्तु यदि आप इसी संसार को अपने प्रशिक्षण और सुधार का स्थान मान लेते हैं तो यही संसार आपको फिर उतना बुरा भी नहीं लगेगा।"

   अधिकांशतः उम्मीद करी जाती है कि जीवन को आरामदेह, आनन्दपूर्ण और कष्ट-विहीन होना चाहिए। परन्तु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें ऐसा नहीं सिखाती है। एक मसीही विश्वासी के लिए संसार आत्मिक विकास एवं उन्नति का स्थान है, अच्छे और बुरे, दोनों ही प्रकार के अनुभवों के द्वारा। प्रभु यीशु मसीह जीवन के प्रति उम्मीद रखने के विषय में यथार्तवादी थे; उन्होंने अपने चेलों से कहा, "मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है" (यूहन्ना 16:33)। प्रभु यीशु में होकर हमको जीवन की आशीषों और कष्टों को झेलने के समय एक भीतरी शान्ति भी रहती है, क्योंकि हम यह जानते हैं कि सब कुछ परमेश्वर के नियंत्रण में है, और जो भी परमेश्वर हमारे साथ होने दे रहा है वह उसकी सार्वभौमिक योजना के अन्तर्गत, अन्ततः हमारी भलाई और उसकी महिमा के लिए ही हो रहा है।

   हमारे जीवनों में प्रभु यीशु की उपस्थिति, कष्ट के समयों में भी हमें प्रसन्नचित बने रहने की सहायता एवं सामर्थ प्रदान करती है। - डेनिस फिशर


कष्ट के समयों में भी प्रभु यीशु में शान्ति प्राप्त होती है।

मैं तुम्हें शान्‍ति दिए जाता हूं, अपनी शान्‍ति तुम्हें देता हूं; जैसे संसार देता है, मैं तुम्हें नहीं देता: तुम्हारा मन न घबराए और न डरे। - यूहन्ना 14:27

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:25-33
John 16:25 मैं ने ये बातें तुम से दृष्‍टान्‍तों में कही हैं, परन्तु वह समय आता है, कि मैं तुम से दृष्‍टान्‍तों में और फिर नहीं कहूंगा परन्तु खोल कर तुम्हें पिता के विषय में बताऊंगा। 
John 16:26 उस दिन तुम मेरे नाम से मांगोगे, और मैं तुम से यह नहीं कहता, कि मैं तुम्हारे लिये पिता से बिनती करूंगा। 
John 16:27 क्योंकि पिता तो आप ही तुम से प्रीति रखता है, इसलिये कि तुम ने मुझ से प्रीति रखी है, और यह भी प्रतीति की है, कि मैं पिता कि ओर से निकल आया। 
John 16:28 मैं पिता से निकलकर जगत में आया हूं, फिर जगत को छोड़कर पिता के पास जाता हूं। 
John 16:29 उसके चेलों ने कहा, देख, अब तो तू खोल कर कहता है, और कोई दृष्‍टान्‍त नहीं कहता। 
John 16:30 अब हम जान गए, कि तू सब कुछ जानता है, और तुझे प्रयोजन नहीं, कि कोई तुझ से पूछे, इस से हम प्रतीति करते हैं, कि तू परमेश्वर से निकला है। 
John 16:31 यह सुन यीशु ने उन से कहा, क्या तुम अब प्रतीति करते हो? 
John 16:32 देखो, वह घड़ी आती है वरन आ पहुंची कि तुम सब तित्तर बित्तर हो कर अपना अपना मार्ग लोगे, और मुझे अकेला छोड़ दोगे, तौभी मैं अकेला नहीं क्योंकि पिता मेरे साथ है। 
John 16:33 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि तुम्हें मुझ में शान्‍ति मिले; संसार में तुम्हें क्‍लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीन लिया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 32-33
  • कुलुस्सियों 1


शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

प्रतीक्षा


   चा सा-सून नामक एक 69 वर्षीय कोरियाई महिला ने, 3 वर्ष के सतत प्रयास के पश्चात, ड्राईविंग लाईसेंस पाने की लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करके वह लाईसेंस प्राप्त कर ही लिया। वह अपने नाती-पोतों को चिड़ियाघर घुमाने लेजाना चाहती थी इसीलिए उसे उस लाईसेंस की आवश्यकता थी। सामन्यतः तुरंत परिणाम प्राप्त करने की इच्छा रखने वाले इस संसार में ऐसा धैर्य और सतत प्रयास कम ही देखने को मिलता है। जब हम किसी चीज़ को पाना चाहते हैं, और वह हमें नहीं मिलती, तो हम अकसर कुड़ाकुड़ाते हैं, तथा और भी अधिक अधीरता से उसकी माँग करते हैं; या फिर, यदि वह चीज़ हमें शीघ्रता से उपलब्ध नहीं होती, तो उसे छोड़कर हम आगे बढ़ जाते हैं। "प्रतीक्षा" एक ऐसा शब्द है जिसे हम सुनना कदापि पसन्द नहीं करते हैं।

   लेकिन परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताता है कि परमेश्वर ने अनेकों स्थानों पर, कई बातों के लिए अपने लोगों से चाहा है कि वे उसके सही समय और सही तरीके की प्रतीक्षा करें। परमेश्वर की प्रतीक्षा करने से तात्पर्य है कि अपनी आवश्यकता की पूर्ति के लिए धैर्य के साथ परमेश्वर की ओर देखना। दाऊद ने यह समझ लिया था कि उसे प्रभु परमेश्वर की प्रतीक्षा करना क्यों ज़रूरी है: क्योंकि उसका उद्धार परमेश्वर से था (भजन 62:1); उसे कोई और छुड़ा नहीं सकता था। उसकी सारी आशा केवल परमेश्वर से ही थी (पद 5), क्योंकि केवल परमेश्वर ही है जो प्रार्थनाओं को सुनता है (पद 8)।

   हमारी प्रार्थनाओं में अकसर यह मांग रहती है कि परमेश्वर शीघ्रता से हमारी प्रार्थना सुने, तुरंत ही वैसा कर दे और जो भी हम चाह रहे हैं उस पर आशीष दे। दाऊद के समान ही हम भी प्रार्थना कर सकते हैं: "हे यहोवा, भोर को मेरी वाणी तुझे सुनाई देगी, मैं भोर को प्रार्थना कर के तेरी बाट जोहूंगा" (भजन 5:3)। लेकिन क्या हमने रुक कर कभी यह सोचा है कि यदि परमेश्वर की ओर से हमारी प्रार्थना का उत्तर हो, "धैर्य रखो; मेरी प्रतीक्षा करो" तो हम क्या कहेंगे या करेंगे?

   हम मसीही विश्वासियों को चाहिए कि प्रत्येक बात के लिए हम परमेश्वर के उत्तर की प्रतीक्षा करने वाले बनें, चाहे वह उत्तर हमारे समयानुसार ना भी आए; क्योंकि परमेश्वर के समय और तरीके से मिलने वाला प्रत्येक उत्तर हमारे लिए सर्वोत्तम ही होगा। - सी० पी० हिया


परमेश्वर से करी गई हमारी प्रत्येक प्रार्थना का 
अन्तिम वाक्य होना चाहिए, "आपकी इच्छा ही पूरी हो"।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन 62:1-12
Psalms 62:1 सचमुच मैं चुपचाप हो कर परमेरश्वर की ओर मन लगाए हूं; मेरा उद्धार उसी से होता है। 
Psalms 62:2 सचमुच वही, मेरी चट्टान और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; मैं बहुत न डिगूंगा।
Psalms 62:3 तुम कब तक एक पुरूष पर धावा करते रहोगे, कि सब मिलकर उसका घात करो? वह तो झुकी हुई भीत वा गिरते हुए बाड़े के समान है। 
Psalms 62:4 सचमुच वे उसको, उसके ऊंचे पद से गिराने की सम्मति करते हैं; वे झूठ से प्रसन्न रहते हैं। मुंह से तो वे आशीर्वाद देते पर मन में कोसते हैं।
Psalms 62:5 हे मेरे मन, परमेश्वर के साम्हने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है। 
Psalms 62:6 सचमुच वही मेरी चट्टान, और मेरा उद्धार है, वह मेरा गढ़ है; इसलिये मैं न डिगूंगा। 
Psalms 62:7 मेरा उद्धार और मेरी महिमा का आधार परमेश्वर है; मेरी दृढ़ चट्टान, और मेरा शरणस्थान परमेश्वर है। 
Psalms 62:8 हे लोगो, हर समय उस पर भरोसा रखो; उस से अपने अपने मन की बातें खोल कर कहो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है। 
Psalms 62:9 सचमुच नीच लोग तो अस्थाई, और बड़े लोग मिथ्या ही हैं; तौल में वे हलके निकलते हैं; वे सब के सब सांस से भी हलके हैं। 
Psalms 62:10 अन्धेर करने पर भरोसा मत रखो, और लूट पाट करने पर मत फूलो; चाहे धन सम्पति बढ़े, तौभी उस पर मन न लगाना।
Psalms 62:11 परमेश्वर ने एक बार कहा है; और दो बार मैं ने यह सुना है: कि सामर्थ्य परमेश्वर का है। 
Psalms 62:12 और हे प्रभु, करूणा भी तेरी है। क्योंकि तू एक एक जन को उसके काम के अनुसार फल देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 30-31
  • फिलिप्पियों 4