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Tuesday, December 31, 2013

लेखा


   कुछ समय पहले मैंने एक "मीलपत्थर" पार किया जो था मेरे बीस वर्ष से एक आत्मिक डायरी या लेखा रखना। जब उस डायरी में मैंने अपनी कुछ आरंभिक प्रविष्ठियाँ पढ़ीं तो मुझे अचरज हुआ कि मैं इसे बना कर रख भी सका, किंतु आज मुझे यदि आप ना लिखने के लिए पैसे भी दें तो भी मैं लिखने से नहीं रुकने वाला।

   डायरी में यह लेखा रखने से जो लाभ मुझे मिले उनमें से कुछ हैं: मैं अपने जीवन के अनुभवों से जानने पाया कि सफलता एवं असफलता दोनों ही जीवन का अभिन्न अंग हैं। मुझे परमेश्वर के अनुग्रह का स्मरण हो आता है जब मैं ध्यान करता हूँ कि कैसे जटिल समस्याओं के समयों में उसने मेरा मार्गदर्शन किया, समस्या का हल खोजने में मेरी सहायता करी। मेरे पिछ्ले अनुभव मेरी आज की समस्याओं के हल खोजने में मेरे सहायक होते हैं और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मैं देखने पाता हूँ कि परमेश्वर कैसे मेरे जीवन में पूरी विश्वासयोग्यता के साथ कार्यरत रहा है, मुझे संभालता, तराशता और बेहतर बनाता रहा है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखे अनेक भजन ऐसे ही आत्मिक डायरी के लेख के समान ही हैं। उन भजनों में दर्ज है कि कैसे परमेश्वर ने भिन्न संघर्षों और परिस्थितियों में सहायता करी और सुरक्षित निकाला। ऐसा ही एक भजन है दाऊद द्वारा लिखित भजन 40, जिसमें दाऊद कहता है: "मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है" (भजन 40:1-2)। बाद में जब कभी भी उसे परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को स्मरण करना होता तो उसे केवल इस भजन को पढ़ लेने भर की ही आवश्यकता होती होगी।

   इस प्रकार का लेखा या डायरी रखना आपके लिए भी लाभदायक हो सकता है। यह आपको और स्पष्ट रीति से दिखा सकता है कि परमेश्वर आपकी जीवन यात्रा में आपको क्या सिखा रहा है और अपनी इस डायरी की प्रविष्ठियों से आप अपने प्रति परमेश्वर की लगातार बनी हुई विश्वासयोग्यता के प्रति भी आश्वस्त हो सकते हैं, यह लेखा शैतान द्वारा परमेश्वर के प्रति आपके विश्वास को डगमगाने नहीं देगा। - डेनिस फिशर


बीते समय में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का स्मरण भविष्य के लिए आशा देता है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों की नाईं उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: भजन  40:1-5
Psalms 40:1 मैं धीरज से यहोवा की बाट जोहता रहा; और उसने मेरी ओर झुककर मेरी दोहाई सुनी। 
Psalms 40:2 उसने मुझे सत्यानाश के गड़हे और दलदल की कीच में से उबारा, और मुझ को चट्टान पर खड़ा कर के मेरे पैरों को दृढ़ किया है। 
Psalms 40:3 और उसने मुझे एक नया गीत सिखाया जो हमारे परमेश्वर की स्तुति का है। बहुतेरे यह देखकर डरेंगे, और यहोवा पर भरोसा रखेंगे।
Psalms 40:4 क्या ही धन्य है वह पुरूष, जो यहोवा पर भरोसा करता है, और अभिमानियों और मिथ्या की ओर मुड़ने वालों की ओर मुंह न फेरता हो। 
Psalms 40:5 हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू ने बहुत से काम किए हैं! जो आश्चर्यकर्म और कल्पनाएं तू हमारे लिये करता है वह बहुत सी हैं; तेरे तुल्य कोई नहीं! मैं तो चाहता हूं की खोल कर उनकी चर्चा करूं, परन्तु उनकी गिनती नहीं हो सकती।

एक साल में बाइबल: 
  • मलाकी 1-4 
  • प्रकाशितवाक्य 22


Monday, December 30, 2013

भूमिका


   पिछले कई वर्षों से मेरी बेटी, रोज़ी, स्थानीय माध्यमिक विद्यालय में नाटकों की निर्देशक रही है। छात्र उसके पास आते हैं कि वे नाटकों में भाग ले सकें और वह उनका परीक्षण करके उनके लिए उपयुक्त भूमिकाएं निर्धारित करती है। कुछ छात्र प्रमुख पात्रों की भूमिकाएं पाते हैं, लेकिन फिर भी ऐसी कई सहायक भूमिकाएं होती हैं जो नाटक के लिए आवश्यक हैं और जिनके लिए छात्रों को निर्धारित करना नाटक के सफल प्रदर्शन के लिए अनिवार्य है।

   फिर, ऐसे भी छात्र होते हैं जो नाटक का भाग होना तो चाहते हैं पर पर्दे के सामने आना नहीं चाहते। उनको पर्दा उठाने-गिराने, मंच सज्जा को बदलने, रौशनी तथा विद्युत व्यवस्था की देखभाल करने, पात्रों के साज-सिंगार करने तथा वस्त्र आदि के बदलने में सहायता के लिए उपयोग किया जाता है। कुछ माता-पिता और अभिभावक भी नाटक का अप्रत्यक्ष भाग हो जाते हैं। जब नाटक का पूर्वाभ्यास चल रहा होता है तो वे लोग कार्य करने वालों के लिए अल्पाहार का प्रबंध करते हैं, आवश्यक वस्तुओं को भेंट करते हैं, मंच का सामान और वस्त्र बनाने में सहायता करते हैं, नाटक से संबंधित विज्ञापन और सूचनाएं बनाते तथा वितृत करते हैं। किसी भी नाटक के सफल प्रदर्शन के लिए 4 - 5 महीनों का अथक परिश्रम करना होता है जो अनेक समर्पित स्वयंसेवकों के सहयोग और सहायता से ही संभव होने पाता है।

   प्रभु यीशु मसीह की देह अर्थात उसकी मण्डली के सफल और पूर्णरूपेण कार्य के लिए भी प्रत्येक मसीही विश्वासी का योगदान अनिवार्य है। प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर द्वारा कोई ना कोई वरदान दिया गया है। जब ये सभी वरदान मिलकर कार्य करते हैं तब ही "सारी देह हर एक जोड़ की सहायता से एक साथ मिलकर, और एक साथ गठकर उस प्रभाव के अनुसार जो हर एक भाग के परिमाण से उस में होता है, अपने आप को बढ़ाती है, कि वह प्रेम में उन्नति करती जाए" (इफिसियों 4:16); ये सभी भिन्न भाग मिलकर ही एक देह बनते हैं (रोमियों 12:5)।

   हम सभी मसीही विश्वासियों को एक दूसरे की आवश्यकता है, मसीह की देह अर्थात मसीह की मण्डली की उन्नति के लिए आप क्या भूमिका निभा रहे हैं? - सिंडी हैस कैस्पर


किसी भी मण्डली के सुचारू रूप से कार्य करने के लिए उसके सभी सदस्यों को एक दूसरे के लिए अपने आत्मिक वर्दानों का उपयोग करते रहना चाहिए।

इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो। - 1 कुरिन्थियों 12:27

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। 
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। 
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे। 
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं। 
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं। 
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे। 
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे। 
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 13-14 
  • प्रकाशितवाक्य 21


Sunday, December 29, 2013

आनन्दित


   संसार में हमारा जीवन कठिनाईयों से भरा हो सकता है। किसी ना किसी समय हम में से अधिकांश लोग इस विचार से जूझे होंगे कि मैं जब कठिनाईयों में पड़ा होता हूँ तब परमेश्वर कहाँ होता है? अनेक बार हमने यह भी विचार किया होगा कि अब तो अन्याय ही जीत रहा है और परमेश्वर खामोश बैठा है। हम अपनी कठिनाईयों के प्रति कैसी प्रतिक्रीया देते हैं यह हमारा व्यक्तिगत निर्णय है। इस संदर्भ में परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर के नबी हबक्कूक का दृष्टिकोण अनुसरण के योग्य है - उसने निर्णय किया कि वह परमेश्वर में आनन्दित रहेगा।

   हबक्कूक ने यहूदा को तीव्र गति से नैतिक और आत्मिक पतन में गिरते देखा था और वह इससे बहुत चिंतित हुआ। लेकिन इससे भी अधिक चिंता उसे तब हुई जब यहूदा के इस व्यवहार के लिए उसने परमेश्वर की प्रतिक्रीया को जाना - परमेश्वर एक और भी दुष्ट राज्य बाबुल द्वारा यहूदा को दण्डित करने जा रहा था। हबक्कूक यह सब समझ नहीं सका, लेकिन फिर भी उसने परमेश्वर की बुद्धिमता, न्याय और प्रभुतव पर भरोसा रखने का निर्णय लिया और अपने इस निर्णय के अन्तर्गत वह कहने पाया: "तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा" (हबक्कूक 3:18)। यद्यपि हबक्कूक को यह स्पष्ट नहीं था कि यहूदा इस दण्ड में जाने पर सुरक्षित बच कर कैसे आ सकेगा, लेकिन हबक्कूक ने सीख लिया था कि अन्याय, क्लेष और हानि में भी वह परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखेगा और परमेश्वर पर विश्वास द्वारा ही अपना जीवन व्यतीत करेगा। ऐसे विश्वास के निर्णय का प्रतिफल था उसका हर परिस्थिति में परमेश्वर में आनन्दित रहना, चाहे वह परिस्थिति कितनी भी कठिन क्यों ना हो।

   हम भी अपनी परीक्षाओं में आनन्दित रह सकते हैं, यदि हबक्कूक के समान ही हम परमेश्वर पर दृढ़ विश्वास बनाए रखें और उसके सार्वभौमिक प्रभुत्व की ऊँचाईयों पर उसके साथ बने रहें। - मार्विन विलियम्स


परेशानियों में भी परमेश्वर की आराधना करते रहने से बोझ बरकतों में बदल जाते हैं।

परन्तु मैं यहोवा के कारण अपने मन में मगन होऊंगा, मैं उसके किए हुए उद्धार से हर्षित होऊंगा। - भजन 35:9

बाइबल पाठ: हबक्कूक 3:8-19
Habakkuk 3:8 हे यहोवा, क्या तू नदियों पर रिसियाया था? क्या तेरा क्रोध नदियों पर भड़का था, अथवा क्या तेरी जलजलाहट समुद्र पर भड़की थी, जब तू अपने घोड़ों पर और उद्धार करने वाले विजयी रथों पर चढ़कर आ रहा था? 
Habakkuk 3:9 तेरा धनुष खोल में से निकल गया, तेरे दण्ड का वचन शाप के साथ हुआ था। तू ने धरती को नदियों से चीर डाला। 
Habakkuk 3:10 पहाड़ तुझे देख कर कांप उठे; आंधी और जलप्रलय निकल गए; गहिरा सागर बोल उठा और अपने हाथों अर्थात लहरों को ऊपर उठाया। 
Habakkuk 3:11 तेरे उड़ने वाले तीरों के चलने की ज्योति से, और तेरे चमकीले भाले की फलक के प्रकाश से सूर्य और चन्द्रमा अपने अपने स्थान पर ठहर गए। 
Habakkuk 3:12 तू क्रोध में आकर पृथ्वी पर चल निकला, तू ने जाति जाति को क्रोध से नाश किया। 
Habakkuk 3:13 तू अपनी प्रजा के उद्धार के लिये निकला, हां, अपने अभिषिक्त के संग हो कर उद्धार के लिये निकला। तू ने दुष्ट के घर के सिर को घायल कर के उसे गले से नेव तक नंगा कर दिया। 
Habakkuk 3:14 तू ने उसके योद्धाओं के सिरों को उसी की बर्छी से छेदा है, वे मुझ को तितर-बितर करने के लिये बवंडर की आंधी की नाईं आए, और दीन लोगों को घात लगा कर मार डालने की आशा से आनन्दित थे। 
Habakkuk 3:15 तू अपने घोड़ों पर सवार हो कर समुद्र से हां, जलप्रलय से पार हो गया।
Habakkuk 3:16 यह सब सुनते ही मेरा कलेजा कांप उठा, मेरे ओंठ थरथराने लगे; मेरी हड्डियां सड़ने लगीं, और मैं खड़े खड़े कांपने लगा। मैं शान्ति से उस दिन की बाट जोहता रहूंगा जब दल बांध कर प्रजा चढ़ाई करे।
Habakkuk 3:17 क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, 
Habakkuk 3:18 तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा।
Habakkuk 3:19 यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 9-12 
  • प्रकाशितवाक्य 20


Saturday, December 28, 2013

परिणाम


   इंगलैंड के लिवरपूल शहर में स्थित अन्तर्राष्ट्रीय दासत्व संग्रहालय उस विनाश के लिए स्मारक है जो पीढ़ीयों से दासत्व में रहे पुरुष, स्त्री और बच्चों ने सहा है। कुछ लोगों के लोभ के कारण जो कीमत अन्य मनुष्यों को चुकानी पड़ी है वह दिल दहला देने वाली है - लेकिन केवल वही चुकाई गई कीमत नहीं है। उस संग्रहालय में एक दीवार पर भूतपूर्व दास और फिर मानवीय अधिकारों के एक योद्धा फ्रैड्रिक डगलस द्वारा कही एक बहुत गंभीर बात लिखी है: "कोई व्यक्ति किसी दूसरे के पाँव में ज़ंज़ीर डालने के बाद उस ज़ंज़ीर के दूसरे छोर को अन्ततः अपने गले में बंधे हुआ देखने से बच नहीं सकता"; अर्थात किसी अन्य मनुष्य के साथ अमानवीय व्यवहार करने से हम स्वयं अपने आप को ही अमानवीय बना डालते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इसी भावना को दूसरे शब्दों में व्यक्त किया: "धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा" (गलतियों 6:7)। प्रेरित पौलुस द्वारा लिखे गए ये शब्द हमारे लिए गंभीर चेतावनी हैं कि हमारे द्वारा लिए गए हर निर्णय के परिणाम अवश्य हैं - और इसमें हम दूसरों के साथ जो व्यवहार करते हैं वह भी शामिल है। यदि हम औरों से नफरत करेंगे तो यह नफरत हमारे पास ऐसे परिणामों के रूप में लौट के आजाएगी जिनकी हम आज कलपना भी नहीं कर पाते। हम अपने आप को औरों से पृथक, स्वयं के प्रति क्रुद्ध तथा कुंठित, अपने कार्यों को ठीक से कर पाने में असमर्थ पाएंगे तथा अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की सेवकाई तो कदापि नहीं कर सकेंगे।

   इसके बजाए हम चुनाव करें कि "हम भले काम करने में हियाव न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ" (गलतियों 6:9-10)। - बिल क्राउडर


जो बीज हम आज बो रहे हैं वे ही निर्धारित करते हैं कि हम कल कैसा फल खाएंगे।

और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा। - गिनती 32:23

बाइबल पाठ: गलतियों 6:1-10
Galatians 6:1 हे भाइयों, यदि कोई मनुष्य किसी अपराध में पकड़ा भी जाए, तो तुम जो आत्मिक हो, नम्रता के साथ ऐसे को संभालो, और अपनी भी चौकसी रखो, कि तुम भी परीक्षा में न पड़ो। 
Galatians 6:2 तुम एक दूसरे के भार उठाओ, और इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो। 
Galatians 6:3 क्योंकि यदि कोई कुछ न होने पर भी अपने आप को कुछ समझता है, तो अपने आप को धोखा देता है। 
Galatians 6:4 पर हर एक अपने ही काम को जांच ले, और तब दूसरे के विषय में नहीं परन्तु अपने ही विषय में उसको घमण्‍ड करने का अवसर होगा। 
Galatians 6:5 क्योंकि हर एक व्यक्ति अपना ही बोझ उठाएगा।
Galatians 6:6 जो वचन की शिक्षा पाता है, वह सब अच्छी वस्‍तुओं में सिखाने वाले को भागी करे। 
Galatians 6:7 धोखा न खाओ, परमेश्वर ठट्ठों में नहीं उड़ाया जाता, क्योंकि मनुष्य जो कुछ बोता है, वही काटेगा। 
Galatians 6:8 क्योंकि जो अपने शरीर के लिये बोता है, वह शरीर के द्वारा विनाश की कटनी काटेगा; और जो आत्मा के लिये बोता है, वह आत्मा के द्वारा अनन्त जीवन की कटनी काटेगा। 
Galatians 6:9 हम भले काम करने में हियाव न छोड़े, क्योंकि यदि हम ढीले न हों, तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे। 
Galatians 6:10 इसलिये जहां तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें; विशेष कर के विश्वासी भाइयों के साथ।

एक साल में बाइबल: 
  • ज़कर्याह 5-8 
  • प्रकाशितवाक्य 19


Friday, December 27, 2013

प्रतीक्षा और अनुग्रह


   कंपनी में हुई छंटनी के कारण रॉजर की नौकरी जाती रही। इसके पश्चात वह महीनों तक नौकरी खोजता रहा, स्थान स्थान पर नौकरी के लिए आवेदन देता रहा, नौकरी मिलने के लिए स्वयं प्रार्थना करता रहा और दूसरों को भी प्रार्थना करने के लिए कहता रहा। वे 15 महीने तक नौकरी की प्रतीक्षा करते रहे, इस दौरान रॉजर और उसकी पत्नि जेरी की भावनाएं डांवा-डोल भी हुईं, कभी उन्हें सन्देह होता कि क्या दोबारा नौकरी मिलेगी भी या नहीं। लेकिन इस प्रतीक्षा के समय में साथ ही उन्होंने परमेश्वर द्वारा अद्भुत रीति से अपनी आवश्यकताओं को पूरा होते भी देखा तथा परमेश्वर के अनुग्रह को भी अनुभव किया।

   फिर रॉजर को एक कंपनी में साक्षात्कार के लिए तीन बार बुलाया गया, और उसके एक सप्ताह बाद उसे एक फोन आया। फोन करने वाले ने कहा, "निराशाओं में भी आशा की किरण फूटती है; तुम्हें नौकरी मिल गई है!" बाद में मुझसे रॉजर की पत्नि जैरी ने कहा, "जिस अनुभव से होकर हम निकले हैं, उसे हम कभी किसी अन्य से बदलने को राज़ी नहीं होंगे। इस अनुभव के द्वारा हम एक दूसरे के और परमेश्वर के और अधिक निकट आए।" जिन मित्रों ने रॉजर के लिए प्रार्थनाएं करी थीं वे भी आनन्दित और परमेश्वर के प्रति धन्यवादी हुए।

   प्रेरित पौलुस चाहता था कि कुरिन्थुस की मण्डली परमेश्वर के अनुग्रह को उसके अपने जीवन में कार्यकारी होते हुए देखे, "...ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए" (2 कुरिन्थियों 4:15)। पौलुस को बहुत कठिन परीक्षाओं से होकर निकलना पड़ा था (पद 8-9), लेकिन तब भी वह अन्य लोगों को प्रोत्साहित करता रहा कि वे कठिन समयों में हिम्मत ना छोड़ें, वरन परमेश्वर पर विश्वास बनाए रखें (पद 16)।

   यदि रॉजर और जेरी तथा पौलुस के समान ही हम मसीही विश्वासी भी कठिन परिस्थितियों में परमेश्वर के प्रति अपने विश्वास को बनाए रखेंगे तथा उसके वचन बाइबल के अनुसार चलते रहेंगे तो अन्ततः हम भी परमेश्वर तथा लोगों के और निकट बढ़ने पाएंगे, और हमारी प्रतीक्षा तथा अनुग्रह का प्रत्येक अनुभव परमेश्वर की महिमा का कारण ठहरेगा। - ऐनी सेटास


परमेश्वर को आदर और महिमा देने के लिए अभी के समय से उपयुक्त और कोई दूसरा समय नहीं है।

इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। - 2 कुरिन्थियों 4:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:7-18
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर। 
2 Corinthians 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। 
2 Corinthians 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा। 
2 Corinthians 4:15 क्योंकि सब वस्तुएं तुम्हारे लिये हैं, ताकि अनुग्रह बहुतों के द्वारा अधिक हो कर परमेश्वर की महिमा के लिये धन्यवाद भी बढ़ाए।
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। 
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं।

एक साल में बाइबल: 

  • ज़कर्याह 1-4 
  • प्रकाशितवाक्य 18


Thursday, December 26, 2013

आराधना का उद्देश्य


   यदि आप लोगों को घबराने और चिंतित करने का अचूक उपाय जानना चाहते हैं तो वह है उनकी अर्थव्यवस्था पर आघात। यदि अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है तो राजनेताओं की कुर्सी तक चली जाती है। कुछ ऐसा ही प्रेरित पौलुस के साथ भी हुआ, जिसके कारण उसे अपने विरुद्ध कानूनी कार्यवाही, शहर से खदेड़े जाने तथा जान तक के खतरे तक का सामना करना पड़ा।

   हुआ यूँ कि प्रेरित पौलुस इफिसुस में आकर "आराधनालय में जा कर तीन महीने तक निडर हो कर बोलता रहा, और परमेश्वर के राज्य के विषय में विवाद करता और समझाता रहा" (प्रेरितों 19:8)। दो वर्ष से भी अधिक तक पौलुस वहाँ प्रभु यीशु के सुसमाचार प्रचार करता रहा जिससे वहाँ प्रभु यीशु मसीह के बहुत से अनुयायी हो गए। क्योंकि पौलुस का प्रचार बहुत प्रभावी था और उसके प्रचार के कारण बहुत से लोगों ने समझ और जान लिया कि सच्चा परमेश्वर केवल एक ही है, और वह आत्मा है, कोई गढ़ी हुई मूर्ति नहीं, इस कारण इफिसुस की स्थानीय देवी अरतिमिस के मानने वालों की संख्या घटने लगी। इसका सीधा प्रभाव इफिसुस के सुनारों के धंधे पर पड़ने लगा क्योंकि उनकी आमदनी का मुख्य स्त्रोत था अरितमिस की चाँदी से बनी मूर्तियाँ। उन्होंने भाँप लिया कि यदि शीघ्र ही कुछ नहीं किया गया तो थोड़े ही समय में उनका धंधा बिलकुल चौपट हो जाएगा क्योंकि अरितमिस को मानने वाले बहुत कम ही रह जाएंगे। इस कारण उन्होंने स्थानीय लोगों को भड़का कर पौलुस और उसके साथियों के विरुद्ध बलवा करवा दिया।

   यह घटना हमें यह सोचने और जाँचने को बाध्य करती है कि परमेश्वर की उपासना करने का हमारा उद्देश्य क्या है? इफिसुस के सुनार अपनी देवी की उपासना में केवल इसलिए रुचि रखते थे क्योंकि उनकी आमदनी उस उपासना से जुड़ी थी। ऐसा ना हो कि कभी ऐसा हम मसीही विश्वासियों के लिए कहा जाए; हम मसीही विश्वासियों के लिए समस्त संसार के तथा अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु की आराधना, उपासना का उद्देश्य कभी साँसारिक संपत्ति अर्जित करना ना बनने पाए। हमारी आराधाना, उपासना इस लिए हो क्योंकि प्रभु यीशु ने हम से प्रेम किया, हमारे पापों को अपने ऊपर लेकर हमारे लिए उनका दण्ड सहा और अपना बलिदान दे दिया और अपनी धार्मिकता हमें दे कर हमें परमेश्वर कि सनतान बना दिया।

   हम मसीही विश्वासियों की आराधना का उद्देश्य प्रभु यीशु के प्रति हमारा प्रेम, समर्पण और आदर हो ना कि संसार की नाशमान संपत्ति और यश आदि की प्राप्ति। - डेव ब्रैनन


परमेश्वर ने अपनी सन्तान को आशीषों से पहले ही भर दिया है; हमारी आराधना का उद्देश्य उन्हें प्राप्त करना कदापि नहीं है।

जिस परमेश्वर ने