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शुक्रवार, 8 नवंबर 2019

सहायता



      चुआंग अपनी पत्नि से नाराज़ था क्योंकि जिस प्रसिद्ध रेस्टोरेंट में भोजन करने के लिए वे जाना चाहते थे, वहाँ पहुँचने के सही निर्देश वह ठीक से प्राप्त नहीं करने पाई थी। वे लोग पारिवारिक छुट्टी पर घूमने के लिए जापान आए हुए थे और वापस घर जाने से पहले वे उस रेस्टोरेंट में भोजन करके वापसी की उड़ान लेने वाले थे। परन्तु अब देर होते जा रही थी और उन्हें वह भोजन कर पाना कठिन लग रहा था। चुआंग ने खिसियाहट में अपने पत्नि की आलोचना की, ठीक से कार्य-योजना न बनाने के लिए उससे कटु शब्द कहे।

      बाद में चुआंग को अपने शब्दों के लिए खेद हुआ। उसे बोध हुआ कि वह आवश्यकता से अधिक कटु हो गया था, साथ ही उसे यह भी एहसास हुआ कि वह स्वयँ भी तो रेस्टोरेंट के लिए दिशानिर्देश ले सकता था, जो उसने नहीं किया था। उसे यह भी ध्यान आया कि उसकी पत्नि के अच्छे आयोजन के कारण ही वे लोग पिछले सात दिन से अपनी छुट्टियों का भरपूरी से आनन्द ले रहे थे।

      हम में से बहुतेरे चुआंग के समान व्यवहार करने के दोषी हो सकते हैं। जब हम किसी बात को लेकर क्रोधित होते हैं तो आपा खो देते हैं और अनियंत्रित होकर बोलना आरंभ कर देते हैं। हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के भजनकार के समान “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर” (भजन 141:3) प्रार्थना करने की कितनी अधिक आवश्यकता रहती है!

      किन्तु हम यह किस प्रकार से कर सकते हैं? इसके लिए एक सहायक परामर्श है, बोलने से पहले विचार कर लें कि क्या जो शब्द आप बोलने जा रहे हैं वे भले और सहायक, अनुग्रहपूर्ण तथा दयालु हैं (देखें इफिसियों 4:29-32)?

      मुँह पर पहरा बैठाने का अर्थ है हम जब भी चिढ़े हुए या क्रोधित हों, तो अपने मुँह को बन्द रखें, तथा कुछ भी कहने से पहले परमेश्वर की सहायता मांगे कि वह हमें सही शब्द और सही तरीका प्रदान करे; या हमें बिलकुल शान्त हो जाने की सामर्थ्य प्रदान करे। अपने शब्दों पर काबू रखना आजीवन कार्य है। हम परमेश्वर के धन्यवादी हों कि वह सदा हमारी सहायता करता रहता है। - पो फैंग चिया

मन भावने वचन मधु भरे छते के समान प्राणों को मीठे लगते
और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। - नीतिवचन 16:24

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: भजन 141
Psalms 141:1 हे यहोवा, मैं ने तुझे पुकारा है; मेरे लिये फुर्ती कर! जब मैं तुझ को पुकारूं, तब मेरी ओर कान लगा!
Psalms 141:2 मेरी प्रार्थना तेरे साम्हने सुगन्ध धूप, और मेरा हाथ फैलाना, संध्या काल का अन्नबलि ठहरे!
Psalms 141:3 हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!
Psalms 141:4 मेरा मन किसी बुरी बात की ओर फिरने न दे; मैं अनर्थकारी पुरूषों के संग, दुष्ट कामों में न लगूं, और मैं उनके स्वादिष्ट भोजन वस्तुओं में से कुछ न खाऊं!
Psalms 141:5 धर्मी मुझ को मारे तो यह कृपा मानी जाएगी, और वह मुझे ताड़ना दे, तो यह मेरे सिर पर का तेल ठहरेगा; मेरा सिर उस से इन्कार न करेगा। लोगों के बुरे काम करने पर भी मैं प्रार्थना में लवलीन रहूंगा।
Psalms 141:6 जब उनके न्यायी चट्टान के पास गिराए गए, तब उन्होंने मेरे वचन सुन लिये; क्योंकि वे मधुर हैं।
Psalms 141:7 जैसे भूमि में हल चलने से ढेले फूटते हैं, वैसे ही हमारी हडि्डयां अधोलोक के मुंह पर छितराई हुई हैं।
Psalms 141:8 परन्तु हे यहोवा, प्रभु, मेरी आंखे तेरी ही ओर लगी हैं; मैं तेरा शरणागत हूं; तू मेरे प्राण जाने न दे!
Psalms 141:9 मुझे उस फन्दे से, जो उन्होंने मेरे लिये लगाया है, और अनर्थकारियों के जाल से मेरी रक्षा कर!
Psalms 141:10 दुष्ट लोग अपने जालों में आप ही फंसें, और मैं बच निकलूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 43-45
  • इब्रानियों 5



सोमवार, 16 सितंबर 2019

क्रोध प्रबंधन



      मैं अपनी एक सहेली के साथ भोजन कर रही थी, तो उसने बताया कि वह अपने परिवार के एक सदस्य से कितनी खिसिया चुकी थी। परन्तु वह उस सदस्य से कुछ भी कहने से हिचकिचाती थी। मेरी सहेली को उस सदस्य द्वारा लगातार उसकी उपेक्षा करते रहना या उसका मजाक उड़ाते रहना कतई पसन्द नहीं था, परन्तु फिर भी वह ऐसा करता ही रहता था, मेरी सहेली को क्रोध दिलाता रहता था। अनतः जब उसने उस सदस्य से इस समस्या के विषय बात-चीत करनी चाही, तो उस सदस्य ने निन्दापूर्ण आलोचना करने के द्वारा प्रत्युत्तर दिया। इससे मेरी सहेली भड़क उठी और उसपर बहुत क्रुद्ध हुई। परिणामस्वरूप दोनों ही व्यक्तियों ने अपने-अपने रुख और कठोर कर लिए तथा परिवार के मध्य की फूट और बढ़ गई।

      मैं उसके साथ सहानुभूति रखती हूँ, उसकी परिस्थिति को समझ सकती हूँ, क्योंकि मैं भी व्यवहार में उसके समान ही हूँ। मुझे भी लोगों का उनकी गलत बातों के लिए सामना करने में बहुत कठिनाई होती है। यदि कोई परिवार का सदस्य या कोई मित्र आकर कुछ बुरा बोलता अथवा करता है, तो अकसर मैं उसे अपना प्रत्युत्तर देने की भावनाओं को दबाए रखती हूँ; और तब तक दबाए रखती हूँ जब तक कि वही व्यक्ति या कोई और आकर कुछ और अनुचित कह या कर नहीं देता है। मेरे सहने की शक्ति के परे बात जाते ही मैं भी फट पड़ती हूँ।

      संभवतः इसीलिए, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने इफिसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा कि “क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे” (इफिसियों 4:26)। अनसुलझी बातों को सुलझाने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करने से क्रोध नियंत्रण में रहता है। किसी गलती का पात्र बनने पर उसे लेकर बुड़बुड़ाते और खिसियाते रहने से कडुवाहट ही उत्पन्न होती है। ऐसा करने की बजाए हमें उस बात को लेकर परमेश्वर के पास जाना चाहिए, और परमेश्वर की सहायता से “प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं” (इफिसियों 4:15)।

      क्या आज किसी व्यक्ति को लेकर आप किसी समस्या में पड़े हुए हैं? उसे अपने अन्दर दबाए रखने के स्थान पर, उस समस्या को परमेश्वर के सम्मुख खोल दें। परमेश्वर आपके क्रोध और रोष की अग्नि को अपने प्रेम और क्षमा से बुझा सकता है। - लिंडा वॉशिंगटन

क्रोध की अग्नि को बेकाबू हो जाने से पहले ही बुझा दें।

बुराई के बदले किसी से बुराई न करो; जो बातें सब लोगों के निकट भली हैं, उन की चिन्ता किया करो। जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो। हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। - रोमियों 12:17-19

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:15, 26-32
Ephesians 4:15 वरन प्रेम में सच्चाई से चलते हुए, सब बातों में उस में जो सिर है, अर्थात मसीह में बढ़ते जाएं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करनेवाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन 25-26
  • 2 कुरिन्थियों 9



गुरुवार, 23 मई 2019

प्रतिनिधि



      उस कार पर परमेश्वर के विरोध में लगे स्टिकर्स ने एक विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर का ध्यान आकर्षित किया। वह प्रोफ़ेसर कभी स्वयँ भी नास्तिक हुआ करता था, और उसने सोचा कि कार का मालिक परमेश्वर में विश्वास करने वालों को उत्तेजित और क्रुद्ध करना चाहता था। प्रोफ़ेसर ने स्पष्ट किया, “क्रोध के द्वारा नास्तिक अपनी नास्तिकता को तर्कसंगत जताना चाहता है”; और फिर उन्होंने सचेत किया, “अधिकाँशतः इस क्रोध के प्रत्युत्तर में उसे फिर क्रोध ही मिलता है।”

      मसीही विश्वास में आने की अपनी यात्रा के बारे में याद करते हुए उन्होंने अपने एक मसीही विश्वासी मित्र की उनके प्रति चिन्ता का ध्यान किया। उस मित्र ने उन्हें निमंत्रण दिया कि वे मसीह के सत्य पर विचार करें; प्रोफ़ेसर ने कहा, “मेरे मित्र के उस आग्रह में कोई क्रोध की अभिव्यक्ति नहीं थी।” प्रोफ़ेसर अपने मित्र के उस तीव्र आग्रह में निहित वास्तविक आदर और नम्रता को कभी नहीं भुला सका।

      मसीह यीशु में विश्वास करने वाले बहुधा अपमानित अनुभव करते हैं जब और लोग मसीह यीशु पर विश्वास नहीं लाते हैं। परन्तु अपने इस तिरिस्कार के प्रति स्वयं प्रभु यीशु की क्या प्रतिक्रिया होती है? पृथ्वी पर अपनी सेवकाई के दिनों में प्रभु यीशु को लगातार धमकियों और घृणा का सामना करना पड़ा था, परन्तु उन्होंने कभी इसे व्यक्तिगत रीति से नहीं लिया, इस व्यवहार के कारण अपने ईश्वरत्व पर कभी संदेह नहीं होने दिया। एक बार जब वे अपने शिष्यों के साथ जा रहे थे और एक गाँव के लोगों ने उन्हें आने नहीं दिया तो उनके दो शिष्य, यूहन्ना और याकूब ने तुरंत प्रतिक्रिया में उस गाँव को भस्म करने की इच्छा व्यक्त की, “हे प्रभु; क्या तू चाहता है, कि हम आज्ञा दें, कि आकाश से आग गिरकर उन्हें भस्म कर दें” (लूका  9:54)। लेकिंन प्रभु यीशु यह नहीं चाहते थे, और उन्होंने उन शिष्यों को इस प्रतिक्रिया के लिए उलाहना दिया (पद 55)। यह इसलिए क्योंकि परमेश्वर ने प्रभु यीशु को जगत के नाश के लिए नहीं वरन उसे बचाने के लिए भेजा था (यूहन्ना 3:17)।

      यह हमारे लिए चकित होने वाली बात हो सकती है कि परमेश्वर को हमारी आवश्यकता उसका बचाव करने के लिए कदापि नहीं है। वह चाहता है कि हम उसके प्रतिनिधि बनकर सँसार के सामने उसके गुणों, उसके प्रेम और क्षमा के सुसमाचार को प्रगट करें। परमेश्वर का प्रतिनिधि बनकर, उसे सँसार के सामने रखने में समय, परिश्रम, संयम, धैर्य और प्रेम की आवश्यकता होती है। - टिम गुस्ताफसन


प्रभु यीशु मसीह का बचाव करने की सर्वोत्तम विधि है उसके समान जीवन जी कर दिखाना।

परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिये नहीं भेजा, कि जगत पर दंड की आज्ञा दे परन्तु इसलिये कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए। - यूहन्ना 3:17

बाइबल पाठ: लूका 9:51-56
Luke 9:51 जब उसके ऊपर उठाए जाने के दिन पूरे होने पर थे, जो उसने यरूशलेम को जाने का विचार दृढ़ किया।
Luke 9:52 और उसने अपने आगे दूत भेजे: वे सामरियों के एक गांव में गए, कि उसके लिये जगह तैयार करें।
Luke 9:53 परन्तु उन लोगों ने उसे उतरने न दिया, क्योंकि वह यरूशलेम को जा रहा था।
Luke 9:54 यह देखकर उसके चेले याकूब और यूहन्ना ने कहा; हे प्रभु; क्या तू चाहता है, कि हम आज्ञा दें, कि आकाश से आग गिरकर उन्हें भस्म कर दे।
Luke 9:55 परन्तु उसने फिरकर उन्हें डांटा और कहा, तुम नहीं जानते कि तुम कैसी आत्मा के हो।
Luke 9:56 क्योंकि मनुष्य का पुत्र लोगों के प्राणों को नाश करने नहीं वरन बचाने के लिये आया है: और वे किसी और गांव में चले गए।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 इतिहास 19-21
  • यूहन्ना 8:1-27



रविवार, 28 अप्रैल 2019

क्रोध



      बात ऑस्ट्रेलिया के पर्थ शहर की है, एक प्रातः फिओन मुल्हौलेंड ने पाया कि उसकी कार गायब है। तब उसे एहसास हुआ कि उसने कार को निषिद्ध क्षेत्र में खड़ा किया था, इसलिए उसे उठा कर ले जाया गया है। उसने परिस्थिति पर विचार किया, उसे जो जुर्माने के लिए 600 डॉलर देने पड़ेंगे, उसके बारे में भी सोचा, और निर्णय लिया कि वह कार को वापस लाने के लिए जिस व्यक्ति के साथ संपर्क में आएगा, उसके प्रति क्रोधित नहीं होगा। अपनी भावनाओं को क्रोध में व्यक्त करने के स्थान पर मुल्होलेंड ने उस स्थिति को लेकर एक हास्य कविता भी लिखा डाली, और जब वह कार को छुड़ाने के लिए गया तो वहाँ उपस्थित व्यक्ति को वह कविता पढ़कर सुनाई, और उस व्यक्ति को वह कविता पसन्द भी आई। इस प्रकार एक संभावित झगड़ा होने से बच गया।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन की पुस्तक सिखाती है कि “मुकद्दमे से हाथ उठाना, पुरूष की महिमा ठहरती है; परन्तु सब मूढ़ झगड़ने को तैयार होते हैं” (नीतिवचन 20:3)। झगड़ा वह तनाव है जो दो लोगों के बीच होता है जब वे किसी बात पर असहमत होते हैं, और या तो अन्दर ही अन्दर उबलता रहता है, या विस्फोटक होकर दोनों के मध्य बाहर निकल पड़ता है।

      परमेश्वर ने हमें सब के साथ शांतिपूर्वक रहने के लिए आवश्यक संसाधन प्रदान किए हैं। परमेश्वर का वचन हमें आश्वस्त करता है कि क्रोधित होना किन्तु पाप न करना संभव है (इफिसियों 4:26)। परमेश्वर का पवित्र आत्मा हमें सामर्थ्य देता है कि हम लोगों के प्रति कटु प्रतिक्रया करने, या उन्हें आहात करने करने के लिए हमें उकसाने वाली चिंगारियों से बच कर चल सकें। और प्रभु यीशु मसीह में जब भी हम आवेश में हों या उकसाए जाएँ तो, अनुसरण करने के लिए उपयुक्त उदाहरण पाते हैं (1 पतरस 2:23)। हमारा प्रभु परमेश्वर दयालु, अनुग्रहकारी, क्रोध करने में धीमा, और बहुतायत से प्रेम तथा विश्वासयोग्यता बनाए रखता है (भजन 86:15)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


क्रोध करने में धीमे रहो।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों 4:26

बाइबल पाठ: याकूब 1:19-27
James 1:19 हे मेरे प्रिय भाइयो, यह बात तुम जानते हो: इसलिये हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो।
James 1:20 क्योंकि मनुष्य का क्रोध परमेश्वर के धर्म का निर्वाह नहीं कर सकता है।
James 1:21 इसलिये सारी मलिनता और बैर भाव की बढ़ती को दूर कर के, उस वचन को नम्रता से ग्रहण कर लो, जो हृदय में बोया गया और जो तुम्हारे प्राणों का उद्धार कर सकता है।
James 1:22 परन्तु वचन पर चलने वाले बनो, और केवल सुनने वाले ही नहीं जो अपने आप को धोखा देते हैं।
James 1:23 क्योंकि जो कोई वचन का सुनने वाला हो, और उस पर चलने वाला न हो, तो वह उस मनुष्य के समान है जो अपना स्‍वाभाविक मुंह दर्पण में देखता है।
James 1:24 इसलिये कि वह अपने आप को देख कर चला जाता, और तुरन्त भूल जाता है कि मैं कैसा था।
James 1:25 पर जो व्यक्ति स्‍वतंत्रता की सिद्ध व्यवस्था पर ध्यान करता रहता है, वह अपने काम में इसलिये आशीष पाएगा कि सुनकर नहीं, पर वैसा ही काम करता है।
James 1:26 यदि कोई अपने आप को भक्त समझे, और अपनी जीभ पर लगाम न दे, पर अपने हृदय को धोखा दे, तो उस की भक्ति व्यर्थ है।
James 1:27 हमारे परमेश्वर और पिता के निकट शुद्ध और निर्मल भक्ति यह है, कि अनाथों और विधवाओं के क्‍लेश में उन की सुधि लें, और अपने आप को संसार से निष्‍कलंक रखें।

एक साल में बाइबल:  
  • 1 राजा 3-5
  • लूका 20:1-26



रविवार, 5 नवंबर 2017

क्रोध


   शायद उस दिन मेरे पड़ौसियों को समझ नहीं आ रहा होगा कि शरद ऋतु की उस प्रातः मुझे देखकर वे मेरे बारे में क्या सोचें। मैं हाथ में बेलचा पकड़े हुए घर के अन्दर आने के रास्ते के किनारे, नाले के कोने के नीचे जमी हुई बर्फ को तोड़ने का प्रयास कर रही थी, और बेलचे के हर प्रहार के साथ क्रोधावेश के साथ प्रार्थनाएं करती जा रही थी, जो एक ही बात को लेकर थीं: "बस बहुत हो गया; मुझमें अब और करने की शक्ति नहीं है।" मुझे घर की देखभाल करनी होती है और मेरे पास करने के लिए कार्यों की लंबी सूचि रहती है, और अब यह जमी हुई बर्फ भी मेरे कार्यों की सूचि को बढ़ा रही थी, मेरे सीमित समय में दख़ल दे रही थी। मेरा वह क्रोधावेश झूठ के एक पुल्लिन्दे पर आधारित था - "मेरे साथ इससे बेहतर व्यवहार होना चाहिए; आखिरकर, केवल परमेश्वर पर निर्भर रहना अपर्याप्त है; किसी को मेरी परवाह नहीं है।"

   जब हम अपने क्रोध के साथ चिपके रहने का निर्णय लेते हैं, तब हम कड़ुवाहट के फन्दे में फंस जाते हैं, और फिर आगे नहीं बढ़ पाते हैं। क्रोध का एकमात्र उपाय है सत्य; सत्य को स्मरण करना और उसके आगे समर्पित रहना। सत्य यह है कि परमेश्वर हमें वह नहीं देता है जो वास्तव में हमें मिलना चाहिए; वरन वह हमपर अनुग्रह करता है, हमें अपनी दया का पात्र बनाता है, "क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है" (भजन 86:5)। सत्य यह है कि उसकी सामर्थ्य हमारी प्रत्येक आवश्यकता की पूर्ति के लिए पर्यापत है; हमें चाहे जैसा भी प्रतीत हो, परमेश्वर हमारे लिए पर्याप्त से भी बढ़कर है।

   परन्तु इससे पहले कि हम इस आश्वासन को थामने पाएं, हमें थोड़ा पीछे हटकर, अपने प्रयासों के बेलचे को नीचे रखकर, हमारी ओर दया और अनुग्रह में बढ़े हुए प्रभु यीशु के हाथ को थामना होगा। हमारा प्रभु परमेश्वर हमारे क्रोधावेश को सुनने और सहने, और अपने समय तथा योजनानुसार हमें आगे ले चलने के लिए महान और विश्वासयोग्य है। - शैली बीच


अनुग्रह: परमेश्वर से वह पाना हम जिसके कदापि योग्य नहीं है; 
दया: वह नहीं पाना हम जिसके सर्वथा योग्य हैं।

मूर्ख अपने सारे मन की बात खोल देता है, परन्तु बुद्धिमान अपने मन को रोकता, और शान्त कर देता है। - नीतिवचन 29:11

बाइबल पाठ: भजन 86:1-13
Psalms 86:1 हे यहोवा कान लगा कर मेरी सुन ले, क्योंकि मैं दीन और दरिद्र हूं। 
Psalms 86:2 मेरे प्राण की रक्षा कर, क्योंकि मैं भक्त हूं; तू मेरा परमेश्वर है, इसलिये अपने दास का, जिसका भरोसा तुझ पर है, उद्धार कर। 
Psalms 86:3 हे प्रभु मुझ पर अनुग्रह कर, क्योंकि मैं तुझी को लगातार पुकारता रहता हूं। 
Psalms 86:4 अपने दास के मन को आनन्दित कर, क्योंकि हे प्रभु, मैं अपना मन तेरी ही ओर लगाता हूं। 
Psalms 86:5 क्योंकि हे प्रभु, तू भला और क्षमा करने वाला है, और जितने तुझे पुकारते हैं उन सभों के लिये तू अति करूणामय है। 
Psalms 86:6 हे यहोवा मेरी प्रार्थना की ओर कान लगा, और मेरे गिड़गिड़ाने को ध्यान से सुन। 
Psalms 86:7 संकट के दिन मैं तुझ को पुकारूंगा, क्योंकि तू मेरी सुन लेगा।
Psalms 86:8 हे प्रभु देवताओं में से कोई भी तेरे तुल्य नहीं, और न किसी के काम तेरे कामों के बराबर हैं। 
Psalms 86:9 हे प्रभु जितनी जातियों को तू ने बनाया है, सब आकर तेरे साम्हने दण्डवत करेंगी, और तेरे नाम की महिमा करेंगी। 
Psalms 86:10 क्योंकि तू महान और आश्चर्य कर्म करने वाला है, केवल तू ही परमेश्वर है। 
Psalms 86:11 हे यहोवा अपना मार्ग मुझे दिखा, तब मैं तेरे सत्य मार्ग पर चलूंगा, मुझ को एक चित्त कर कि मैं तेरे नाम का भय मानूं। 
Psalms 86:12 हे प्रभु हे मेरे परमेश्वर मैं अपने सम्पूर्ण मन से तेरा धन्यवाद करूंगा, और तेरे नाम की महिमा सदा करता रहूंगा। 
Psalms 86:13 क्योंकि तेरी करूणा मेरे ऊपर बड़ी है; और तू ने मुझ को अधोलोक की तह में जाने से बचा लिया है।

एक साल में बाइबल: 

  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2


रविवार, 13 अगस्त 2017

सामर्थ्य


   अपने मोबाइल फोन पर आए एक सन्देश को पढ़ते हुए मेरा पारा चढ़ने लगा, और खून खौलने लगा। मैं तुरंत उस सन्देश के प्रत्युत्तर में वैसा ही सन्देश भेजना चाहता था, परन्तु मेरे अन्दर से एक आवाज़ आई, "अभी आवेश में नहीं; इसका उत्तर कल देना।" रात के अच्छे आराम के पश्चात, अगले दिन, जिस बात से मैं बीते दिन में इतना भड़क गया था, वही अब बहुत मामूली लग रही थी। मैंने ही उसे आवश्यकता से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ा के समझ लिया था क्योंकि मैं किसी दूसरे के हित को अपने हित से आगे नहीं रखना चाहता था। मैं किसी दूसरे की सहायता के लिए अपने आप को कोई कष्ट नहीं देना चाहता था।

   मेरे लिए यह खेद की बात है कि मैं अनेकों बार क्रोध और आवेश में लोगों को प्रतिक्रिया और प्रत्युत्तर दे बैठता हूँ। मैं पाता हूँ कि इस प्रवृत्ति के निवारण के लिए मुझे बहुत बार परमेश्वर के वचन बाइबल के महान सत्यों को स्मरण करके अपने आप को काबू में लेना पड़ता है; जैसे कि "क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे" (इफिसियों 4:26) और "हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे" (फिलिप्पियों 2:4)।

   हम मसीही विश्वासियों को परमेश्वर का धन्यवादी होना चाहिए कि उसने अपने पवित्र आत्मा को हमारे अन्दर निवास के लिए दिया है; और वह हमें सिखाता-समझाता है, पाप से लड़ने में हमारी सहायता करता है। पौलुस और पतरस ने इसे पवित्र आत्मा का पवित्र करने का कार्य कहा है (2 थिस्सलुनीकियों 2:13; 1 पतरस 1:2)। पवित्र आत्मा की इस सामर्थ्य के बिना हम निःसहाय और पराजित जीवन व्यतीत कर रहे होते। परन्तु उसके द्वारा हमें दी जाने वाली इस सामर्थ्य के कारण अब हम आशा से परिपूर्ण जयवंत जीवन जीने पाते हैं। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर के जन का विकास सारी उम्र चलते रहने वाला कार्य है।

परन्तु सहायक अर्थात पवित्र आत्मा जिसे पिता मेरे नाम से भेजेगा, वह तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा। - यूहन्ना 14:26

बाइबल पाठ: 2 थिस्सलुनीकियों 2:13-17
2 Thessalonians 2:12 और जितने लोग सत्य की प्रतीति नहीं करते, वरन अधर्म से प्रसन्न होते हैं, सब दण्‍ड पाएं।
2 Thessalonians 2:13 पर हे भाइयो, और प्रभु के प्रिय लोगो चाहिये कि हम तुम्हारे विषय में सदा परमेश्वर का धन्यवाद करते रहें, कि परमेश्वर ने आदि से तुम्हें चुन लिया; कि आत्मा के द्वारा पवित्र बन कर, और सत्य की प्रतीति कर के उद्धार पाओ। 
2 Thessalonians 2:14 जिस के लिये उसने तुम्हें हमारे सुसमाचार के द्वारा बुलाया, कि तुम हमारे प्रभु यीशु मसीह की महिमा को प्राप्त करो। 
2 Thessalonians 2:15 इसलिये, हे भाइयों, स्थिर रहो; और जो जो बातें तुम ने क्या वचन, क्या पत्री के द्वारा हम से सीखी है, उन्हें थामे रहो।
2 Thessalonians 2:16 हमारा प्रभु यीशु मसीह आप ही, और हमारा पिता परमेश्वर जिसने हम से प्रेम रखा, और अनुग्रह से अनन्त शान्‍ति और उत्तम आशा दी है। 
2 Thessalonians 2:17 तुम्हारे मनों में शान्‍ति दे, और तुम्हें हर एक अच्‍छे काम, और वचन में दृढ़ करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 87-88
  • रोमियों 13


बुधवार, 9 नवंबर 2016

दीवारें


   दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के वर्षों को "शीत युद्ध" का समय कहा जाता है, जिसमें देश एक-दूसरे को डराने-धमकाने और वर्चस्व के लिए एक-दूसरे पर पैंतरे आज़माते रहे। इस सुलगते हुए वैमनस्य का एक चिन्ह था बर्लिन शहर को विभाजित करने वाली दीवार, जिसे अगस्त 1961 में खड़ा किया गया, और जो लगभग तीन दशक तक शीत युद्ध का प्रबल चिन्ह बनी रही। फिर 9 नवंबर 1989 को यह घोषणा करी गई कि उस दीवार की पूर्व और पश्चिम, दोनों ओर रहने वाले नागरिक स्वतंत्रता पूर्वक दीवार के पार एक दूसरे के पास आ-जा सकते हैं। इसके एक वर्ष पश्चात उस दीवार को गिरा दिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूसुफ के जीवन का वृतांत दिया गया है जो चिर-परिचित है। युसुफ अपने पिता का दुलारा बेटा था जिस कारण उसके अन्य भाई उससे ईर्ष्या तथा बैर करते थे (उत्पत्ति 37-50)। उन भाईयों मे अवसर पाकर यूसुफ को गुलामी में बेच दिया और पिता से झूठ बोल दिया कि यूसुफ को किसी जानवर ने मार डाला है। लेकिन यूसुफ ने अपने तथा अपने भाईयों के बीच बैर की दीवार खड़ी नहीं करी। वर्षों पश्चात, परमेश्वर की अद्भुत योजना और तरीकों से यूसुफ मिस्त्र का प्रधानमंत्री बन गया और जब उस इलाके में भयानक अकाल पड़ा तो यूसुफ के भाई, जो उसके बारे में अब कुछ नहीं जानते थे, उसके पास मिस्त्र में भोजन लेने आए। यूसुफ ने उन से दया और प्रेम का ही बर्ताव किया, उन्हें अपने पास मिस्त्र में रहने के लिए बुलाया और उनकी आशंकाओं को शांत करते तथा अपने संबंध को दृढ़ करते हुए उन से कहा, "यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। सो अब मत डरो: मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाल-बच्चों का पालन पोषण करता रहूंगा; इस प्रकार उसने उन को समझा बुझाकर शान्ति दी" (उत्पत्ति 50:20-21)।

   मनुष्यों द्वारा बनाई गई एक दमनात्मक दीवार 25 वर्ष से भी अधिक पहले ढा दी गई, जिससे वहाँ के निवासियों को परस्पर मिलने की स्वतंत्रता और परिवारों को फिर से एक हो जाने अवसर मिल गया। यदि आपने किसी के साथ क्रोध और विभाजन करने वाली कोई दीवारें खड़ी कर लीं हैं, तो परमेश्वर की सहायता से उन्हें ढा दें और प्रेम के साथ अपने संबंधों को पुनःस्थापित कर लें। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रोध तथा बैर जो दीवारें खड़ी करते हैं, प्रेम उन्हें गिरा देता है।

प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। - 1 कुरिन्थियों 13:4-7

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 50:15-21
Genesis 50:15 जब यूसुफ के भाइयों ने देखा कि हमारा पिता मर गया है, तब कहने लगे, कदाचित यूसुफ अब हमारे पीछे पड़े, और जितनी बुराई हम ने उस से की थी सब का पूरा पलटा हम से ले। 
Genesis 50:16 इसलिये उन्होंने यूसुफ के पास यह कहला भेजा, कि तेरे पिता ने मरने से पहिले हमें यह आज्ञा दी थी, 
Genesis 50:17 कि तुम लोग यूसुफ से इस प्रकार कहना, कि हम बिनती करते हैं, कि तू अपने भाइयों के अपराध और पाप को क्षमा कर; हम ने तुझ से बुराई तो की थी, पर अब अपने पिता के परमेश्वर के दासों का अपराध क्षमा कर। उनकी ये बातें सुनकर यूसुफ रो पड़ा।
Genesis 50:18 और उसके भाई आप भी जाकर उसके साम्हने गिर पड़े, और कहा, देख, हम तेरे दास हैं। 
Genesis 50:19 यूसुफ ने उन से कहा, मत डरो, क्या मैं परमेश्वर की जगह पर हूं? 
Genesis 50:20 यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। 
Genesis 50:21 सो अब मत डरो: मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाल-बच्चों का पालन पोषण करता रहूंगा; इस प्रकार उसने उन को समझा बुझाकर शान्ति दी।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6


गुरुवार, 10 अप्रैल 2014

नम्र व्यवहार


   बॉस्टन के भीड़-भाड़ वाले इलाके के मार्ग की एक सुरंग में मेरी कार खराब होकर रुक गई। मेरे अगल बगल से बच कर निकलते हुए अन्य कार चालक उन्हें हो रही असुविधा के कारण अपने क्रोध और कुण्ठा को व्यक्त करते हुए निकलने लगे। कुछ समय पश्चात कार ठीक करने वालों ने अपनी गाड़ी भेजकर मेरी गाड़ी खींचकर मरम्मत के लिए मंगा ली, और कार को ठीक कर के मुझे वापस सौंप दिया। कुछ दिन के बाद कार फिर खराब हो गई और मुझे अन्तर्राज्य राजमार्ग पर रात के दो बजे फिर फंसा दिया। मैंने फिर से गाड़ी मंगाई, जो आई और कार को खींचकर मरम्मत के लिए ले गई। लेकिन अब की बार कुछ और बात साथ हो गई - मेरे दुर्भाग्यवश मरम्मत की दुकान द्वारा प्रयोग करे जाने वाला कार खड़ी करने का स्थान, स्थानीय बेसबॉल टीम के खेलने के समय सार्वजनिक कार खड़े करने के स्थान के रूप में भी प्रयोग होता था। जिस दिन मुझे कार वापस मिलनी थी वह उस टीम के खेलने का दिन था; इसलिए जब मैं संध्या को अपना कार्य समाप्त करके अपनी कार को लेने के लिए पहुँचा तो मुझे मेरी कार 30 अन्य कारों से घिरी खड़ी मिली, जहाँ से बाहर निकल पाना संभव नहीं था!

   यह देखकर मैंने क्या किया? बस यूँ समझ लीजिए कि मेरी प्रतिक्रिया मसीही चरित्र के अनुसार नहीं थी। मैं भी वापस मरम्मत की दुकान पर पहुँच कर अन्य लोगों के समान ही चिल्लाने और भला-बुरा कहने लगा। यह करते हुए थोड़ी देर में मुझे एहसास हुआ कि मेरे ऐसा करने से वहाँ उपस्थित मरम्मत करने वाले कर्मचारियों का रवैया, जो स्वयं भी अब दिन की समाप्ति पर अपने अपने घरों को लौटकर जाने की तैयारी में थे, मेरे प्रति और उदासीन तथा सहायता ना करने वाला होता जा रहा था। मैं स्वयं ही अपनी सहायता करने के उद्देश्य से खिसिया हुआ, पैर पटकता हुआ दुकान के बन्द दरवाज़े पर पहुँचा और उन्हें हिला हिला कर खोलने का असफल प्रयास करने लगा। असफलता से मेरा क्रोध और भी बढ़ गया था, और मेरे क्रोध, खिसियाहट और असफलता को देखकर वे कर्मचारी हंसने लगे, मेरा ठट्टा करने लगे।

   कुण्ठित और क्रोधित मैं वापस मुड़कर बाहर की ओर चला ही था कि मुझे यह एहसास हुआ कि मैंने मसीही चरित्र से कितना विपरीत व्यवहार किया है। अपने इस व्यवहार से शर्मिंदा होकर मैं लौट कर उन कर्मचारियों के पास आया और उनसे बोला, "मैं शर्मिंदा हूँ, कृप्या मुझे क्षमा कर दीजिए"। मेरी यह बात सुनकर वे अवाक रह गए; उन्होंने वे बन्द दरवाज़े मेरे लिए खोल दिए और मुझे अन्दर आ लेने दिया। मैंने नम्र होकर उनसे कहा कि एक मसीही विश्वासी होने के नाते मुझे ऐसा अभद्र व्यवहार नहीं करना चाहिए था; यह उनके लिए और भी अचरज की बात थी। कुछ ही मिनिटों में वे सब मिलकर मेरे लिए मेरी कार के चारों तरफ खड़ी अन्य कारों को हटाने लगे, और कुछ ही समय में मुझे अपनी कार निकाल कर ले जाने का रास्ता मिल गया।

   मैंने एक महत्वपूर्ण सबक सीख लिया था, चिड़चिड़े और क्रोधित व्यवहार की अपेक्षा नम्र व्यवहार अधिक कारगर होता है और परिस्थितियों को अनुकूल बनाने में सहायक होता है। - रैंडी किल्गोर


नम्र व्यवहार कठोर हृदय को तोड़ने का माध्यम बन जाता है।

विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:3-5

बाइबल पाठ: नीतिवचन 15:1-5
Proverbs 15:1 कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। 
Proverbs 15:2 बुद्धिमान ज्ञान का ठीक बखान करते हैं, परन्तु मूर्खों के मुंह से मूढ़ता उबल आती है। 
Proverbs 15:3 यहोवा की आंखें सब स्थानों में लगी रहती हैं, वह बुरे भले दोनों को देखती रहती हैं। 
Proverbs 15:4 शान्ति देने वाली बात जीवन-वृक्ष है, परन्तु उलट फेर की बात से आत्मा दु:खित होती है। 
Proverbs 15:5 मूढ़ अपने पिता की शिक्षा का तिरस्कार करता है, परन्तु जो डांट को मानता, वह चतुर हो जाता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 राजा 15-17


गुरुवार, 12 दिसंबर 2013

प्रत्यक्ष परिवर्तन


   हाल ही एक हवाई यात्रा के दौरान एक विमान परिचारक ने मुझ से पूछा कि क्या मैं अकसर हवाई यात्रा करता हूँ; और मैंने उत्तर दिया हाँ। तब उसने फिर मुझ से पूछा, क्या आपने पिछले कुछ महीनों में ध्यान किया है कि हवाई यात्रा करने वाले कुछ अधिक आक्रमक और ज़बर्दस्ती करने वाले होते जा रहे हैं? मैंने थोड़ा सा विचार कर के उस से इस बात में सहमति जताई, और हम उन बातों के बारे में बात करने लगे जिन के कारण लोग ऐसा करने लगे हैं - जैसे कि हवाई अड्डों पर बढ़ी हुई सुरक्षा और उससे होने वाली परेशानी, हवाई यात्रा का महंगा और यात्रा में मिलने वाली सुविधाओं का कम होते चले जाना, यात्रा करने में सामान्यता होने वाली असंतुष्टता आदि। हम यह बातें कर ही रहे थे कि, मानो हमारे वार्तालाप की सच्चाई को प्रमाणित करने के लिए, एक यात्री ने बहस आरंभ कर दी क्योंकि वह अपनी निर्धारित सीट पर नहीं वरन किसी दूसरे की सीट पर बैठना चाहता था क्योंकि वह दूसरी सीट उसे अधिक अच्छी लग रही थी।

   जब कभी हमारा सामना क्रोध और आवेश में उत्तेजित किसी जन से होता है तो हम मसीही विश्वासियों के पास अवसर होता है कि हम, अपने प्रभु के समान, शांति लाने वाले बन सकें। प्रेरित पौलुस ने रोम की मसीही मण्डली को लिखी अपनी पत्री में उन्हें लिखा: "जहां तक हो सके, तुम अपने भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो" (रोमियों 12:18)। इस का क्या अर्थ है? इसका एक अर्थ तो यह हो सकता है कि जो कुछ हम नियंत्रित कर सकते हैं उसे नियंत्रित कर के रखें। हम दूसरों के व्यवहार को निर्धारित नहीं कर सकते, लेकिन अपने प्रत्युत्तर को अवश्य निर्धारित कर सकते हैं।

   जब कभी हम क्रोधपूर्ण और आक्रमक व्यवहार अपने आस-पास प्रदर्शित होते हुए देखते हैं, तो उसके प्रति अनुग्रह और शान्ति के व्यवहार द्वारा अपने तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता तथा शान्ति के राजकुमार प्रभु यीशु के चरित्र एवं व्यवहार को अपने जीवन से प्रदर्शित कर सकते हैं। यही वे अवसर होते हैं जब पाप के प्रभाव के कारण आक्रोश और असंतोष से भरा यह संसार उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के बारे में व्यावाहरिक रीति से जान सकता है और प्रभु से प्राप्त होने वाले उद्धार द्वारा जीवन में आए परिवर्तन को प्रत्यक्ष देख सकता है। - बिल क्राउडर


आज संसार को वह शान्ति चाहिए जो प्रत्येक गलतफहमी के दुष्प्रभाव पर जयवन्त है।

सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। - इब्रानियों 12:14

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 9-11 
  • प्रकाशितवाक्य 3


सोमवार, 22 अप्रैल 2013

संयम


   प्रसिद्ध अमेरीकी अभिनेता जॉन वेन ने एक बार कहा था, "धीमा बोलें, धीरे बोलें और कम बोलें।" मेरे लिए उनका यह परामर्श मानना कठिन है क्योंकि मैं तेज़ गति से बोलने वाली हूँ, ऊँची आवाज़ में बोलती हूँ और जब बोलती हूँ तो बहुत कुछ कह जाती हूँ। लेकिन अपने शब्दों पर नियंत्रण रखना क्रोध तथा आवेश की स्थिति को काबू में रखने के लिए एक बहुत उपयोगी माध्यम हो सकता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "...हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19), तथा "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)।

   बाइबल में न्यायियों के समय की घटना इन शिक्षाओं का जीवता उदाहरण है। न्यायियों की पुस्तक के 8 अध्याय में कुछ इस्त्राएलियों की गिदोन के साथ झड़प हुई। इस्त्राएली क्रोधित थे क्योंकि गिदोन उन्हें अपने साथ लिए बिना ही युद्ध के लिए निकल गया था और मिदियानी सेना को उखाड़ फेंका था - वास्तव में गिदोन परमेश्वर की आज्ञा पर परमेश्वर द्वारा उसे प्रदान किए गए केवल 300 लोगों के साथ ही मिदियानी सेना से युद्ध के लिए गया था। जब उसने मिदियानी सेना को उखाड़ फेंका और मिदियानी तितर-बितर होकर इधर-उधर भागने लगे तब गिदोन ने शेष इस्त्राएल के लोगों को उनका पीछा करके घात करने का सन्देश भेजा। इस जय का मुख्य श्रेय गिदोन को मिलने से बाकी इस्त्राएली चिढ़े हुए थे। गिदोन ने प्रत्युत्तर में उन्हें कोई कटु उत्तर नहीं दिया और ना ही उन पर कोई कटाक्ष किया। इसके विपरीत उसने बड़ी नम्रता से व्यवहार किया और उन इस्त्राएलियों को स्मरण कराया कि मिदियानी राजाओं को पकड़ने वाले और घात करने वाले तो वे ही थे, जबकि गिदोन सैनिकों के साथ ही युद्ध में उलझा था; उसने कहा: "तुम्हारे ही हाथों में परमेश्वर ने ओरब और जेब नाम मिद्यान के हाकिमों को कर दिया; तब तुम्हारे बराबर मैं कर ही क्या सका? जब उसने यह बात कही, तब उनका जी उसकी ओर से ठंड़ा हो गया" (न्यायियों 8:3)। गिदोन ने क्रोधित इस्त्राएलियों को आदर भी दिया और उनके क्रोध को शांत भी किया, और फिर इस्त्राएलियों ने उसे अपना न्यायी भी ठहरा लिया।

   परमेश्वर की सहायता से, अपने शब्दों को नियंत्रण में रखने के द्वारा हम क्रोधित लोगों और विस्फोटक स्थितियों को नियंत्रण में ला सकते हैं और उत्तेजित वातावरण को शांत कर सकते हैं। संयम और नम्रता का व्यवहार लोगों के क्रोध को शांत करने और आपसी मेलजोल को बढ़ाने तथा परमेश्वर की महिमा के लिए एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करने में बहुत उपयोगी होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


इससे पहले कि आपकी जीभ दूसरों को कष्ट दे, आप अपनी जीभ को दबा लें।

कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। - नीतिवचन 15:1

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:24-8:3
Judges 7:24 और गिदोन ने एप्रैम के सब पहाड़ी देश में यह कहने को दूत भेज दिए, कि मिद्यानियों से मुठभेड़ करने को चले आओ, और यरदन नदी के घाटों को बेतबारा तक उन से पहिले अपने वश में कर लो। तब सब एप्रैमी पुरूषों ने इकट्ठे हो कर यरदन नदी को बेतबारा तक अपने वश में कर लिया।
Judges 7:25 और उन्होंने ओरेब और जेब नाम मिद्यान के दो हाकिमों को पकड़ा; और ओरेब को ओरेब नाम चट्टान पर, और जेब को जेब नाम दाखरस के कुण्ड पर घात किया; और वे मिद्यानियों के पीछे पड़े; और ओरेब और जेब के सिर यरदन के पार गिदोन के पास ले गए।
Judges 8:1 तब एप्रैमी पुरूषों ने गिदोन से कहा, तू ने हमारे साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया है, कि जब तू मिद्यान से लड़ने को चला तब हम को नहीं बुलवाया? सो उन्होंने उस से बड़ा झगड़ा किया।
Judges 8:2 उसने उन से कहा, मैं ने तुम्हारे समान भला अब किया ही क्या है? क्या एप्रैम की छोड़ी हुई दाख भी अबीएजेर की सब फसल से अच्छी नहीं है?
Judges 8:3 तुम्हारे ही हाथों में परमेश्वर ने ओरब और जेब नाम मिद्यान के हाकिमों को कर दिया; तब तुम्हारे बराबर मैं कर ही क्या सका? जब उसने यह बात कही, तब उनका जी उसकी ओर से ठंड़ा हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 14-15 
  • लूका 17:1-19


मंगलवार, 12 फ़रवरी 2013

ज्वालामुखी


   उसमें विस्फोटक शक्ति है, अपने मार्ग में आने वाली हर वस्तु को वह भस्म कर डालता है और उसका प्रभाव आणविक विस्फोट के समान विनाशकारी होता है। जब क्रोध किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बना कर प्रदर्षित किया जाए तब वह किसी फटते हुए ज्वालामुखी के समान ही होता है। क्रोध के आवेश का वह समय चाहे थोड़े सी देर का ही हो लेकिन अपने पीछे ध्वस्त भावनाएं, आहत संबंध और पीड़ादायक कटु अनुभव छोड़ जाता है जो लंबे समय तक कष्ट देते रहते हैं।

   दुख की बात यह भी है कि वे लोग जिनसे हम प्रेम करते हैं और जिनके साथ हम समय व्यतीत करते हैं, वे ही हमारे क्रोध और आहत करने वाले शब्दों का सबसे अधिक शिकार होते हैं। चाहे हम आवेश में आकर क्रोधित हों या किसी बात से उकसाए गए हों, प्रतिक्रीया के लिए एक चुनाव सदा ही हमारे हाथ में होता है - हमारी प्रतिक्रीया क्रोध में होगी या संयम तथा सहनशीलता के साथ।

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए। और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो" (इफिसियों ४:३१-३२)।

   यदि आप क्रोध करने की आदत से परेशान हैं और इसके कारण आपके संबंधों पर प्रभाव आ रहा है तो अपनी इस कमज़ोरी को प्रभु यीशु के हाथों में सौंप दें क्योंकि उसी की सामर्थ से आप इस पर जयवंत हो सकते हैं: "जो मुझे सामर्थ देता है उस में मैं सब कुछ कर सकता हूं" (फिलिप्पियों ४:१३)। परमेश्वर से अपने अनियंत्रित व्यवहार और क्रोध के लिए क्षमा माँगें और उस से प्रार्थना करें कि वह आपको अपनी भावनाओं और आवेश को नियंत्रित करने की सामर्थ दे तथा दूसरों को अपने से अधिक आदर देने वाला बनाए: "भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो" (रोमियों १२:१०)। अन्य परिपक्व मसीही विश्वासियों से सहायता लें, उनकी संगति में रहें और उनसे सीखें कि उत्तेजित होने पर अपने आप को कैसे संयम में रखें।

   यदि परमेश्वर का आदर करने, उसे प्रसन्न करने तथा उसके प्रेम को दूसरों के सामने प्रदर्शित करने की सच्ची मनोभावना मन में होगी तो अपने ज्वालामुखी समान क्रोध पर जयवन्त भी अवश्य होंगे। - सिंडी हैस कैसपर


दूसरों पर अपना क्रोध उँडेल देना क्रोध से छुटकारा पाने का तरीका नहीं है।

क्रोध करने वाला मनुष्य झगड़ा मचाता है और अत्यन्त क्रोध करने वाला अपराधी होता है। - नीतिवचन २९:२२

बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२०-३२
Ephesians 4:20 पर तुम ने मसीह की ऐसी शिक्षा नहीं पाई।
Ephesians 4:21 वरन तुम ने सचमुच उसी की सुनी, और जैसा यीशु में सत्य है, उसी में सिखाए भी गए।
Ephesians 4:22 कि तुम अगले चालचलन के पुराने मनुष्यत्‍व को जो भरमाने वाली अभिलाषाओं के अनुसार भ्रष्‍ट होता जाता है, उतार डालो।
Ephesians 4:23 और अपने मन के आत्मिक स्‍वभाव में नये बनते जाओ।
Ephesians 4:24 और नये मनुष्यत्‍व को पहिन लो, जो परमेश्वर के अनुसार सत्य की धामिर्कता, और पवित्रता में सृजा गया है।
Ephesians 4:25 इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Ephesians 4:26 क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
Ephesians 4:27 और न शैतान को अवसर दो।
Ephesians 4:28 चोरी करने वाला फिर चोरी न करे; वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्रम करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
Ephesians 4:29 कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
Ephesians 4:30 और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
Ephesians 4:31 सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
Ephesians 4:32 और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल: 
  • लैव्यवस्था १३ 
  • मत्ती २६:२६-५०


गुरुवार, 13 सितंबर 2012

संयम


   दुसरे विश्वयुद्ध के निर्णायक समय में संगठित सेना के सर्वोच्च सेनापति ड्वाईट डी. आईज़नहावर संसार के सबसे शक्तिशाली व्यक्ति थे। उनके नेतृत्व में, संसार के इतिहास में जल-थल सेना का सबसे बड़ा जमावड़ा, युरोप को नाट्ज़ी प्रभुसत्ता से छुड़ाने के लिए तैयार हुआ। इतनी विशाल सेना का संचालन आईज़नहावर कैसे करने पाए? इस प्रश्न के उत्तर का एक भाग है उनकी अन्य और भिन्न प्रवृत्ति के लोगों के साथ भी मिलकर कार्य कर पाने की विलक्षण प्रतिभा।

   लेकिन जो बात बहुत से लोग नहीं जानते वह यह है कि आईज़नहावर बचपन से ऐसे नहीं थे, वरन इसके विपरीत स्कूल के दिनों में वे अकसर अन्य बच्चों के साथ लड़ते-झगड़ते रहते थे। लेकिन उनकी माता एक बहुत संयमी और ध्यान रखने वाली महिला थीं जो उन्हें परमेश्वर के वचन बाइबल से सिखाती रहती थीं। एक बार जब वे ऐसी ही किसी लड़ाई में लगी आईज़नहावर की चोटों की मरहम-पट्टी कर रहीं थीं तो उन्होंने परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन १६:३२ में लिखे पद को उनके सामने रखा, "विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है"। वर्षों बाद आईज़नहावर ने इसके बारे में लिखा, "माँ से हुए उस वार्तालाप को मैं अपने जीवन के सबसे मुल्यवान समयों में मानता हूँ।" निश्चय ही संयम और क्रोध को वश में करने की उस शिक्षा ही ने आईज़नहावर को दुसरों के साथ मिलकर कार्य करने और प्रभावी होने वाला बनाया और इतनी ऊँचाईयों तक पहुँचाया।

   हम सब के जीवनों में ऐसे समय अवश्य ही आएंगे जब किसी अन्य व्यक्ति पर क्रोध और आवेश में आकर कुछ कहने और करने का मन होगा। लेकिन ये ही संयम दिखाने के सबसे बहुमूल्य अवसर हैं जहां परमेश्वर और उसके वचन की सहायता से, अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के समान, हम ना केवल अपने क्रोध को वश में रखना और धैर्य से काम लेना सीख सकते हैं, वरन ऐसा करके संसार के लोगों में प्रभावी और परमेश्वर की महिमा का कारण भी बन सकते हैं।

   एक नम्र और संयमी आत्मा ही प्रभावी और प्रभु को प्रीय आत्मा है। - डेनिस फिशर


जो क्रोध पर जयवन्त है वह एक बहुत प्रबल शत्रु पर जयवन्त है।

विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। - नीतिवचन १६:३२

बाइबल पाठ: नीतिवचन १६:२१-३३
Pro 16:21  जिसके हृदय में बुद्धि है, वह समझ वाला कहलाता है, और मधुर वाणी के द्वारा ज्ञान बढ़ता है। 
Pro 16:22  जिसके बुद्धि है, उसके लिये वह जीवन का सोता है, परन्तु मूढ़ों को शिक्षा देना मूढ़ता ही होती है। 
Pro 16:23  बुद्धिमान का मन उसके मुंह पर भी बुद्धिमानी प्रगट करता है, और उसके वचन में विद्या रहती है। 
Pro 16:24  मनभावने वचन मधुभरे छते की नाईं प्राणों को मीठे लगते, और हड्डियों को हरी-भरी करते हैं। 
Pro 16:25  ऐसा भी मार्ग है, जो मनुष्य को सीधा देख पड़ता है, परन्तु उसके अन्त में मृत्यु ही मिलती है। 
Pro 16:26  परिश्रमी की लालसा उसके लिये परिश्रम करती है, उसकी भूख तो उसको उभारती रहती है। 
Pro 16:27  अधर्मी मनुष्य बुराई की युक्ति निकालता है, और उसके वचनों से आग लग जाती है। 
Pro 16:28  टेढ़ा मनुष्य बहुत झगड़े को उठाता है, और कानाफूसी करने वाला परम मित्रों में भी फूट करा देता है। 
Pro 16:29  उपद्रवी मनुष्य अपने पड़ोसी को फुसलाकर कुमार्ग पर चलाता है। 
Pro 16:30  आंख मूंदने वाला छल की कल्पनाएं करता है, और ओंठ दबाने वाला बुराई करता है। 
Pro 16:31  पक्के बाल शोभायमान मुकुट ठहरते हैं; वे धर्म के मार्ग पर चलने से प्राप्त होते हैं। 
Pro 16:32  विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है। 
Pro 16:33  चिट्ठी डाली जाती तो है, परन्तु उसका निकलना यहोवा ही की ओर से होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन १६-१८ 
  • २ कुरिन्थियों ६

रविवार, 19 दिसंबर 2010

क्रोध की घंटी

एक रविवार प्रातः मैं चर्च में कुछ पहले आ गया। मेरी इच्छा थी कि लोगों के आने से पहले मैं वहां कुछ समय शान्त मनन में बिताऊं। चर्च में प्रवेश करने के लिये जैसे ही मैंने दरवाज़े के ताले में चाबी लगाकर घुमाई, खतरे की घंटी की तेज़ आवाज़ ने मुझे घबरा दिया - प्रवेश करने से पहले, मैं चोरों को रोकने वाली खतरे की घंटी को बन्द करना भूल गया था। उस तेज़ आवाज़ ने न केवल मुझे वरन सोते हुए पड़ौस के लोगों को भी जगाकर नाहक परेशान कर दिया।

क्रोध भी कुछ ऐसा ही होता है। हमारे शान्त जीवनों में अचानक किसी बात से खलबली मच जाती है जिससे हमारा क्रोध भड़क उठता है। इससे हमारी अपनी भी, और जो हमारे आसपास होते हैं उनकी भी शान्ति भंग हो जाती है।

कभी कभी क्रोध सकरात्मक होता है; हमारा ध्यान किसी अन्याय की ओर खिंचता है और उस अन्याय के प्रति हमारा क्रोध हमें कुछ सकरात्मक करने को प्रेरित करता है। परन्तु अधिकांशतः हमारा क्रोध किसी स्वार्थ से जुड़ा होता है - हमारी किसी इच्छा का पालन या पूर्ति न होना, हमारे किसी अधिकार की अवेहलना होना, हमारे किसी विशेषाधिकार या सुविधा का हनन होना, इत्यादि।

क्रोध का कारण जो भी हो, यह निशिचित है कि क्रोध को कभी अनियंत्रित तथा सतत नहीं होने देना चाहिये। प्रतिक्रिया से पहले यह जांचना आवश्यक है कि क्रोध उत्पन्न होने का कारण क्या है, फिर उसका समाधान भी परमेश्वरीय विधि के अनुसार होना चाहिये। परमेश्वर के वचन बाइबल बताती है कि हमारा परमेश्वर प्रभु "दयालु और अनुग्रहकारी ईश्वर है, तू विलम्ब से कोप करने वाला और अति करूणामय है।" (भजन ८६:१५) तथा "...दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य..." (निर्गमन ३४:६) है; एवं मनुष्यों के विष्य में कहती है कि "क्रोधी पुरूष झगड़ा मचाता है, परन्तु जो विलम्ब से क्रोध करने वाला है, वह मुकद्दमों को दबा देता है" (नीतिवचन १५:१८)। "विलम्ब से क्रोध करना वीरता से, और अपने मन को वश में रखना, नगर के जीत लेने से उत्तम है" (नीतिवचन १६:३२)।

इसीलिये पौलुस ने भजनकार के शब्दों को स्मरण दिलाया "क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।" (इफिसियों ४:२६, भजन ४:४) - जो स्टोवैल


अनियंत्रित क्रोध खतरे की घंटी है।

क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे। - इफिसियों ४:२६


बाइबल पाठ: इफिसियों ४:२५-३२

इस कारण झूठ बोलना छोड़कर हर एक अपने पड़ोसी से सच बोले, क्‍योंकि हम आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
क्रोध तो करो, पर पाप मत करो: सूर्य अस्‍त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे।
और न शैतान को अवसर दो।
चोरी करने वाला फिर चोरी न करे, वरन भले काम करने में अपने हाथों से परिश्र्म करे; इसलिये कि जिसे प्रयोजन हो, उसे देने को उसके पास कुछ हो।
कोई गन्‍दी बात तुम्हारे मुंह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वही जो उन्नति के लिये उत्तम हो, ताकि उस से सुनने वालों पर अनुग्रह हो।
और परमेश्वर के पवित्र आत्मा को शोकित मत करो, जिस से तुम पर छुटकारे के दिन के लिये छाप दी गई है।
सब प्रकार की कड़वाहट और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निन्‍दा सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए।
और एक दूसरे पर कृपाल, और करूणामय हो, और जैसे परमेश्वर ने मसीह में तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।

एक साल में बाइबल:
  • योना १-४
  • प्रकाशितवाक्य १०