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Friday, October 31, 2014

विश्वासयोग्य और धर्मी


   यदि आपको कुछ छुपाने की आवश्यकता है तो माईक स्लैट्री के पास आपके लिए समाधान हो सकता है। कोलारैडो स्प्रिंग्स से प्रकाशित होने वाले अखबार द गैज़ट में एक खबर छपी थी कि बहुत वर्ष पहले एक सेल-फोन कंपनी ने उस इलाके में अपने फोन के प्रयोग के लिए माईक की ज़मीन पर एन्टिना लगाना चाहा और उसे एक देवदार के पेड़ का स्वरूप देकर लोगों से छुपाए रखना चाहा। माईक को उस एन्टिना के छुपाने के लिए और बेहतर विचार आया - उसने उस ज़मीन पर एक बनावटी खलिहान खड़ा कर दिया जिसकी दीवारें ऐसे प्लास्टिक से बनी थीं जिन में से होकर रेडियो तरेंगे सरलता से जा सकती थीं। आगे चलकर माईक ने इसी विचार को लेकर अपनी कंपनी स्थापित कर ली जो एन्टिना छुपाने और उन्हें सुरक्षित रखने के लिए तरह तरह के आकर्षक ढाँचे बनाती है। माईक का मानना है कि आज भी उसके अधिकांश पड़ौसी यह नहीं जानते कि उसके खलिहान में वास्तव में है क्या!

   हम में से शायद ही कोई होगा जिसके पास छुपाए रखने के लिए कुछ नहीं हो। जो हम संसार और लोगों से छुपाए रखना चाहते हैं वह हमारे तहखाने या अटारी में जमा हो रही बेकार चीज़ों जैसी हानिरहित वस्तुएं हो सकती हैं, या फिर हमारे व्यक्तिगत जीवन के नैतिक और आत्मिक विफलताएं और दुष्कर्म जैसी हानिकारक बातें, जिन्हें हम ना केवल अन्य लोगों से वरन अपने आप से और परमेश्वर से भी छुपाए रखना चाहते हैं। हम इन्सानों से तो बातों को छुपाए रख सकते हैं, परन्तु परमेश्वर से नहीं; वह हमें और हमारी हर बात को पूरी रीति से भली-भांति जानता और समझता है।

   राजा दाऊद ने परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 32:3-5 में परमेश्वर से अपने पाप छुपाने के प्रयास कि व्यर्थता तथा उन पापों का परमेश्वर के आगे अंगीकार करने से मिलने वाली शान्ति का वर्णन किया है। परमेश्वर हम से बस इतना ही तो चाहता है कि उससे कुछ भी छुपाए रखने या किसी दलील के सहारे किसी अनुचित अथवा गलत बात को सही या न्यायसंगत ठहराने की बजाए हम उसे स्वीकार कर लें, पश्चाताप के साथ उसके लिए परमेश्वर से क्षमा माँग लें "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। हमारा अंगीकार, पश्चाताप और क्षमा याचना ही परमेश्वर के साथ हमारे संबंध की बहाली का मार्ग है। हमारे जीवन में ऐसा कुछ नहीं है जो परमेश्वर से छुपा है, इसलिए उससे कुछ छुपाए रखने के व्यर्थ प्रयत्न करके अपने लिए अशान्ति अर्जित करने की बजाए अंगीकार, पश्चाताप और क्षमा द्वारा शान्ति पा लेने में क्या बुराई है? परमेश्वर पर विश्वास रखें, वह अपने वचन के अनुसार आपके पापों को क्षमा करने और आपको सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब भी हम अपने पापों को प्रगट करने को तैयार हो जाते हैं, परमेश्वर, प्रभु यीशु में होकर उन्हें क्षमा करने तथा ढ़ाँपने को तैयार हो जाता है।

जो अपने अपराध छिपा रखता है, उसका कार्य सफल नहीं होता, परन्तु जो उन को मान लेता और छोड़ भी देता है, उस पर दया की जायेगी। - नीतिवचन 28:13

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा। 
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा। 
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • लूका 18-21


Thursday, October 30, 2014

डटे रहें


   मैं एक व्यस्त चौराहे पर अपनी कार में रुकी हुई थी और मोड़ मुड़ने के संकेत की प्रतीक्षा कर रही थी। मुझे एंब्यूलैंस के साइरन की धव्नि सुनाई दी और मैंने पीछे का दृश्य दिखाने वाले दर्पण में देखा कि एक एंब्यूलैंस तेज़ी से मेरी ही ओर आ रही है। इतने में बत्ती का रंग बदला और मोड़ मुड़ने का संकेत हो गया, मेरे पीछे खड़ी कार के चालक ने हॉर्न बजा कर मुझे मोड़ मुड़ने के लिए दबाव दिया, लेकिन मैंने देख लिया था कि एंब्यूलैंस तेज़ी से आ रही है यदि मैंने गाड़ी मोड़ी तो मैं उसके रास्ते में आ जाऊँगी और परिणाम सबके लिए बहुत दुखदाई होगा, इसलिए मैं उस चालक के दबाव के बावजूद अपने स्थान पर डटी रही, और जब एंब्यूलैंस निकल गई मैंने तब ही मोड़ मुड़ा।

   आत्मिक बातों के लिए भी हमें अनेक बार ऐसे ही अनुभव से होकर निकलना पड़ता है, जब संसार तथा संसार के लोगों के दबाव के बावजूद, जो सही है हम उस पर ही डट कर खड़े रहें। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र राजा सुलेमान को यह पाठ कठिन रीति से सीखना पड़ा। राजा सुलेमान का राज्यकाल बहुत अच्छे से आरंभ हुआ था और अपने शासन के आरंभ ही में उसने परमेश्वर से दर्शन पाया तथा परमेश्वर से मांगा कि उसे राज्य करने की बुद्धिमता मिल जाए (1 राजा 3:9); परमेश्वर ने सुलेमान की प्रार्थना सुनी और उसे सदबुद्धि प्रदान करी। परमेश्वर ने सुलेमान द्वारा ही अपने लिए मन्दिर का निर्माण भी करवाया। मन्दिर का निर्माण पूरा होने के बाद मन्दिर के समर्पण के समय सुलेमान द्वारा करी गई प्रार्थना परमेश्वर के प्रति उसके समर्पण और निष्ठा को दिखाती है (1 राजा 8:23, 61)। लेकिन सुलेमान ज़्यादा दिन तक परमेश्वर के प्रति समर्पित और वफादार नहीं रहा; परमेश्वर के निर्देशों के विरुद्ध उसने अनेक अन्यजाति स्त्रियों से विवाह कर लिए और उन्हें अपने घर ले आया; उन स्त्रियों ने उसके मन को बदल डाला और सुलेमान जीवते सच्चे परमेश्वर की उपासना के अलावा अन्य देवी-देवताओं की उपासना तथा मूर्ति-पूजा में पड़ गया, और उसके जीवन का अन्त समय आने तक "उसका हृदय परमेश्वर की ओर सच्चा ना रहा" (1 राजा 11:1-6; नहेमियाह 13:26), और इसके बहुत विनाशकारी परिणाम ना केवल उसके अपने परिवार में वरन पूरे इस्त्राएल में देखने को मिले।

   जैसा सुलेमान के साथ हुआ, वैसा ही आज हमारे साथ भी हो सकता है - संसार के लोग विभिन्न रीतियों से हम मसीही विश्वासियों पर दबाव डाल सकते हैं कि हम अपने प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह और उसके जीवते सच्चे वचन बाइबल के प्रति अपने समर्पण और वफादारी को छोड़ कर संसार द्वारा दिखाए जा रहे मार्ग पर मुड़ जाएं। लेकिन यदि हम सत्य को जानते तथा पहचानते हैं तो हम गलत मोड़ लेकर नुकसान उठाने की बजाए परमेश्वर की सहायता से सही स्थान पर डटे रहेंगे (फिलिप्पियों 2:16)। जब कभी आप अपने मसीही विश्वास में अपने आप को निर्णय के किसी चौराहे पर खड़ा पाएं और सही मार्ग चुनना कठिन लगे तो परमेश्वर के वचन बाइबल का अध्ययन करें, वह आपके पाँव के लिए दीपक और मार्ग के लिए उजियाले का कार्य करेगी (भजन 119:105)।

   आत्मिक बातों तथा उनसे संबंधित निर्णयों में असमंजस से बचने के लिए सदा ही परमेश्वर के सारे आत्मिक हथियारों को धारण करे रहें (इफिसियों 6:10-18), सब बातों के लिए परमेश्वर पवित्र आत्मा से मार्गदर्शन तथा सहायता लें (1 कुरिन्थियों 2:10-12) और अन्य मसीही विश्वासियों के साथ संगति एवं प्रार्थना में बने रहें। गलत मोड़ मुड़ने के लिए संसार चाहे कितना भी दबाव डाले, कैसा भी प्रलोभन दे, सच्चे परमेश्वर के सच्चे मार्ग पर डटे रहने में ही भलाई तथा आशीष है। - जैनिफर बेन्सन शुल्ट


गलतियों में पड़ने से बचने के लिए सच्चाई को दृढ़ता से थामे रहें।

तेरा वचन मेरे पांव के लिये दीपक, और मेरे मार्ग के लिये उजियाला है। - भजन 119:105

बाइबल पाठ: 1 राजा 11:1-13
1 Kings 11:1 परन्तु राजा सुलैमान फ़िरौन की बेटी, और बहुतेरी और पराई स्त्रियों से, जो मोआबी, अम्मोनी, एदोमी, सीदोनी, और हित्ती थीं, प्रीति करने लगा। 
1 Kings 11:2 वे उन जातियों की थीं, जिनके विषय में यहोवा ने इस्राएलियों से कहा था, कि तुम उनके मध्य में न जाना, और न वे तुम्हारे मध्य में आने पाएं, वे तुम्हारा मन अपने देवताओं की ओर नि:सन्देह फेरेंगी; उन्हीं की प्रीति में सुलैमान लिप्त हो गया। 
1 Kings 11:3 और उसके सात सौ रानियां, और तीन सौ रखेलियां हो गई थीं और उसकी इन स्त्रियों ने उसका मन बहका दिया। 
1 Kings 11:4 सो जब सुलैमान बूढ़ा हुआ, तब उसकी स्त्रियों ने उसका मन पराये देवताओं की ओर बहका दिया, और उसका मन अपने पिता दाऊद की नाईं अपने परमेश्वर यहोवा पर पूरी रीति से लगा न रहा। 
1 Kings 11:5 सुलैमान तो सीदोनियों की अशतोरेत नाम देवी, और अम्मोनियों के मिल्कोम नाम घृणित देवता के पीछे चला। 
1 Kings 11:6 और सुलैमान ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में बुरा है, और यहोवा के पीछे अपने पिता दाऊद की नाईं पूरी रीति से न चला। 
1 Kings 11:7 उन दिनों सुलैमान ने यरूशलेम के साम्हने के पहाड़ पर मोआबियों के कमोश नाम घृणित देवता के लिये और अम्मोनियों के मोलेक नाम घृणित देवता के लिये एक एक ऊंचा स्थान बनाया। 
1 Kings 11:8 और अपनी सब पराये स्त्रियों के लिये भी जो अपने अपने देवताओं को धूप जलातीं और बलिदान करती थीं, उसने ऐसा ही किया। 
1 Kings 11:9 तब यहोवा ने सुलैमान पर क्रोध किया, क्योंकि उसका मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा से फिर गया था जिसने दो बार उसको दर्शन दिया था। 
1 Kings 11:10 और उसने इसी बात के विषय में आज्ञा दी थी, कि पराये देवताओं के पीछे न हो लेना, तौभी उसने यहोवा की आज्ञा न मानी। 
1 Kings 11:11 और यहोवा ने सुलैमान से कहा, तुझ से जो ऐसा काम हुआ है, और मेरी बन्धाई हुई वाचा और दी हुई वीधि तू ने पूरी नहीं की, इस कारण मैं राज्य को निश्चय तूझ से छीन कर तेरे एक कर्मचारी को दे दूंगा। 
1 Kings 11:12 तौभी तेरे पिता दाऊद के कारण तेरे दिनो में तो ऐसा न करूंगा; परन्तु तेरे पुत्र के हाथ से राज्य छीन लूंगा। 
1 Kings 11:13 फिर भी मैं पूर्ण राज्य तो न छीन लूंगा, परन्तु अपने दास दाऊद के कारण, और अपने चुने हुए यरूशलेम के कारण, मैं तेरे पुत्र के हाथ में एक गोत्र छोड़ दूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • लूका 14-17


Wednesday, October 29, 2014

अनुकंपा


   एलिज़ाबेथ की कहानी मार्मिक थी। उसे अपने स्थान मैसाच्यूसेट्स में एक बहुत अपमानजनक अनुभव से होकर निकलना पड़ा, और उस बात की अन्य शर्मिन्दगी से बचने के लिए वह बस में बैठ कर न्यूजर्सी को चल दी। उस अनुभव की कटुताके कारण यात्रा में वह बेकाबू रोती ही रही, उसे पता भी नहीं चला कब बस एक स्थान पर थोड़ी देर के लिए रुक गई है। बस के यात्री नीचे उतरने लगे, उनमें से एक यात्री ने उसे रोते हुए देखा और लौट कर उसके पास आया और एलिज़ाबेथ को परमेश्वर के वचन बाइबल की अपनी प्रति पकड़ाई और कहा कि तुम्हें इसकी आवश्यकता है। एलिज़ाबेथ का वह अजनबी सह-यात्री बिलकुल सही था; ना केवल एलिज़ाबेथ को बाइबल की आवश्यकता थी वरन उसे बाइबल के प्रभु, यीशु मसीह की भी आवश्यकता थी। उस अजनबी द्वारा मसीही अनुकंपा में एक उपहार देने के छोटे से कार्य के कारण एलिज़ाबेथ ने प्रभु यीशु मसीह को जाना और उसे अपने उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण कर लिया।

   प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए अनुकंपा का सजीव उदाहरण हैं। मत्ती के 9 अध्याय में उसके विषय में हम पढ़ते हैं कि "जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे" (मत्ती 9:36)। हमारे प्रभु ने ना केवल लोगों के टूटे मन, दुख और पीड़ा को देखा, वरन उन्होंने अपने अनुयायियों को उभारा के वे उन लोगों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह ऐसों को उन के मध्य भेजे जो नाश की ओर जा रहे इस संसार के दुखी लोगों की आवश्यकताओं और समस्याओं के समाधान के लिए काम आ सकें (पद 38)।

   आज भी संसार को ऐसे कार्यकर्ताओं की आवश्यकता है जो प्रभु यीशु की अनुकंपा को दुखी संसार में दिखा सकें। हम मसीही विश्वासियों का यह कर्तव्य है कि अपने प्रभु के मार्गदर्शन और निर्देशों का पालन करें और पाप के दुख को झेल रहे संसार के लोगों को प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा पापों से मुक्ति, चिरस्थाई आनन्द एवं अनन्त जीवन का मार्ग दिखाएं, उन्हें प्रभु यीशु की अनुकंपा का अनुभव कराएं। - बिल क्राउडर


आवश्यकता है - दुख और निराशा में पड़े संसार को मसीह यीशु में आनन्द और आशा पहुँचाने वाले मसीही विश्वासियों की।

क्योंकि गृहदेवता अनर्थ बात कहते और भावी कहने वाले झूठा दर्शन देखते और झूठे स्वपन सुनाते, और व्यर्थ शान्ति देते हैं। इस कारण लोग भेड़-बकरियों की नाईं भटक गए; और चरवाहे न होने के कारण दुर्दशा में पड़े हैं। - ज़कर्याह 10:2

बाइबल पाठ: मत्ती 9:27-38
Matthew 9:27 जब यीशु वहां से आगे बढ़ा, तो दो अन्धे उसके पीछे यह पुकारते हुए चले, कि हे दाऊद की सन्तान, हम पर दया कर। 
Matthew 9:28 जब वह घर में पहुंचा, तो वे अन्धे उस के पास आए; और यीशु ने उन से कहा; क्या तुम्हें विश्वास है, कि मैं यह कर सकता हूं उन्होंने उस से कहा; हां प्रभु। 
Matthew 9:29 तब उसने उन की आंखे छूकर कहा, तुम्हारे विश्वास के अनुसार तुम्हारे लिये हो। 
Matthew 9:30 और उन की आंखे खुल गईं और यीशु ने उन्हें चिताकर कहा; सावधान, कोई इस बात को न जाने। 
Matthew 9:31 पर उन्होंने निकलकर सारे देश में उसका यश फैला दिया।
Matthew 9:32 जब वे बाहर जा रहे थे, तो देखो, लोग एक गूंगे को जिस में दुष्टात्मा थी उस के पास लाए। 
Matthew 9:33 और जब दुष्टात्मा निकाल दी गई, तो गूंगा बोलने लगा; और भीड़ ने अचम्भा कर के कहा कि इस्राएल में ऐसा कभी नहीं देखा गया। 
Matthew 9:34 परन्तु फरीसियों ने कहा, यह तो दुष्टात्माओं के सरदार की सहायता से दुष्टात्माओं को निकालता है।
Matthew 9:35 और यीशु सब नगरों और गांवों में फिरता रहा और उन की सभाओं में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बीमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा। 
Matthew 9:36 जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों की नाईं जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे। 
Matthew 9:37 तब उसने अपने चेलों से कहा, पक्के खेत तो बहुत हैं पर मजदूर थोड़े हैं। 
Matthew 9:38 इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो कि वह अपने खेत काटने के लिये मजदूर भेज दे।

एक साल में बाइबल: 
  • लूका 10-13


Tuesday, October 28, 2014

निकट


   बहुत वर्ष पुराना एक लोकप्रीय गीत था From a Distance (दूर से), इस गीत का प्रसंग था शान्ति और प्रेम से भरा हुआ संसार और परमेश्वर हमें दूर से देख रहा है। परमेश्वर हमें, हम सब को, देख अवश्य रहा है, लेकिन दूर से नहीं; वह सदैव ही हमारे आस-पास विद्यमान है, अभी कमरे में आपके साथ है, आपको देख रहा है, वह आपसे प्रेम करता है, आपकी भलाई चाहता है।

   मुझे ब्रदर लॉरेंस का उदाहरण स्मरण आता है। वे एक मठ में रहने वाले भिक्षु थे और उन्हें मठ के रसोई में बर्तन साफ करने तथा मठ के अन्य भिक्षुओं के जूते मरम्मत करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई थी जिसे वे कई वर्ष तक निभाते रहे। अपने इसी काम में लगे, वे परमेश्वर तथा उसकी बातों पर भी मनन करते रहते थे। उन्होंने लिखा, "जहाँ तक मुझ से हो सका, मैं अपने आप को परमेश्वर के सम्मुख एक अराधक के रूप में रखता रहा, मेरे साथ बनी रहने वाली उसकी पवित्र उपस्थिति पर अपना ध्यान केंद्रित करता रहा।"

   यही हमारा भी कार्य होना चाहिए, लेकिन हम इसे भूल जाते हैं और हमें इसका स्मरण दिलाने की आवश्यकता पड़ती रहती है। इसे स्मरण रखने में सहायतार्थ मैंने लुहार द्वारा हाथ से बनाई गई एक पुरानी बड़ी सी कील को, जैसी कील का प्रयोग प्रभु यीशु को क्रूस पर ठोकने के लिए भी किया गया था, अपनी मेज़ के ऊपर बनी शेल्फ पर ठोक दिया है। यह हमारा कार्य है कि हम परमेश्वर को सदा अपने सम्मुख रखें (भजन 16:8), सदैव स्मरण रखें कि वह जगत के अन्त तक हमारे साथ बना रहेगा (मत्ती 28:20) और वह हम में से किसी से भी दूर नहीं है (प्रेरितों 17:27)।

   अपने साथ बनी रहने वाली परमेश्वर कि उपस्थिति को स्मरण रखना कोई कठिन कार्य नहीं है, बस यह ध्यान रखिए कि उसने वायदा किया है कि वह आपके साथ सदैव बना रहेगा और उसे परिस्थिति तथा समयानुसार "धन्यवाद", "सहायता या मार्गदर्शन चाहिए", "मैं आपसे प्रेम करता हूँ", "शुभ प्रभात/दोपहर/सन्ध्या/रात्रि" आदि कहते रहिए और उसकी उपस्थिति का एहसास बना रहेगा। - डेविड रोपर


हमारे जितना निकट परमेश्वर रहता है, उससे निकट और कोई रह नहीं सकता।

तब याकूब जाग उठा, और कहने लगा; निश्चय इस स्थान में यहोवा है; और मैं इस बात को न जानता था। - उत्पत्ति 28:16

बाइबल पाठ: प्रेरितों 17:22-31
Acts 17:22 तब पौलुस ने अरियुपगुस के बीच में खड़ा हो कर कहा; हे अथेने के लोगों मैं देखता हूं, कि तुम हर बात में देवताओं के बड़े मानने वाले हो। 
Acts 17:23 क्योंकि मैं फिरते हुए तुम्हारी पूजने की वस्‍तुओं को देख रहा था, तो एक ऐसी वेदी भी पाई, जिस पर लिखा था, कि अनजाने ईश्वर के लिये। सो जिसे तुम बिना जाने पूजते हो, मैं तुम्हें उसका समाचार सुनाता हूं। 
Acts 17:24 जिस परमेश्वर ने पृथ्वी और उस की सब वस्‍तुओं को बनाया, वह स्वर्ग और पृथ्वी का स्‍वामी हो कर हाथ के बनाए हुए मन्‍दिरों में नहीं रहता। 
Acts 17:25 न किसी वस्तु का प्रयोजन रखकर मनुष्यों के हाथों की सेवा लेता है, क्योंकि वह तो आप ही सब को जीवन और स्‍वास और सब कुछ देता है। 
Acts 17:26 उसने एक ही मूल से मनुष्यों की सब जातियां सारी पृथ्वी पर रहने के लिये बनाईं हैं; और उन के ठहराए हुए समय, और निवास के सिवानों को इसलिये बान्‍धा है। 
Acts 17:27 कि वे परमेश्वर को ढूंढ़ें, कदाचित उसे टटोल कर पा जाएं तौभी वह हम में से किसी से दूर नहीं! 
Acts 17:28 क्योंकि हम उसी में जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं; जैसे तुम्हारे कितने कवियों ने भी कहा है, कि हम तो उसी के वंश भी हैं। 
Acts 17:29 सो परमेश्वर का वंश हो कर हमें यह समझना उचित नहीं, कि ईश्वरत्‍व, सोने या रूपे या पत्थर के समान है, जो मनुष्य की कारीगरी और कल्पना से गढ़े गए हों। 
Acts 17:30 इसलिये परमेश्वर आज्ञानता के समयों में अनाकानी कर के, अब हर जगह सब मनुष्यों को मन फिराने की आज्ञा देता है। 
Acts 17:31 क्योंकि उसने एक दिन ठहराया है, जिस में वह उस मनुष्य के द्वारा धर्म से जगत का न्याय करेगा, जिसे उसने ठहराया है और उसे मरे हुओं में से जिलाकर, यह बात सब पर प्रामाणित कर दी है।

एक साल में बाइबल: 
  • लूका 7-9


Monday, October 27, 2014

टाईटैनिक


   मार्क विलकिन्सन ने नौका विहार और मछली मारने के अपने शौक के लिए 16 फुट लंबी एक नाव खरीदी, और उसका नाम रखा टाईटैनिक-2; शायद वह अन्धविश्वासी नहीं था तभी उसने उस कुख्यात विशाल पानी के जहाज़ के नाम पर, जो 1912 में अपनी पहली ही यात्रा में एक बर्फ की चट्टान से टकराकर डूब गया था, अपनी नाव का नाम रखा। टाईटैनिक-2 की प्रथम यात्रा इंगलैण्ड के डौरसैट इलाके के एक बन्दरगाह से आरंभ हुई और गन्तव्य तक पहुँचने में मार्क विलकिन्सन को कोई परेशानी नहीं हुई; लेकिन वापस लौटते हुए नाव में पानी भरने लगा और कुछ ही देर में मार्क विलकिन्सन डूबती हुई नाव के एक किनारे को पकड़े हुए पानी में पड़ा अपने बचाए जाने की प्रतीक्षा कर रहा था। बाद में इस घटना के विषय में मार्क ने कहा, "यह कुछ शर्मिन्दगी की बात रही है, और मैं परेशान हो गया लोगों के इस प्रश्न का उत्तर देते देते कि क्या मेरी नाव भी किसी बर्फ की चट्टान से टकरा गई थी।" बाद में मार्क के लिए शर्मिन्दगी और बढ़ गई जब एक प्रत्यक्षदर्षी ने व्यंग्य किया कि टाईटैनिक-2 नामक वह नाव कोई बड़ी नाव नहीं थी, यदि वह किसी बर्फ के छोटे से टुकड़े से भी टकरा जाती तो भी उसका यही हाल होता।

   टाईटैनिक-2 की यह कहानी व्यंग्यात्मक अवश्य है, और मुझे अनुपयुक्त भरोसे तथा पहले टाईटैनिक के बारे में सोचने पर बाध्य करती है। पहले टाईटैनिक के बनानेवालों को अपने कार्य पर इतना भरोसा और घमण्ड था कि उन्होंने टाईटैनिक को ऐसा पानी का जहाज़ कहा था जो कभी डुबाया नहीं जा सकता। लेकिन अपने कार्यों पर उनका यह विश्वास और घमण्ड कितना गलत प्रमाणित हुआ, बर्फ की एक चट्टान ने उस जहाज़ और उनके दावों को डुबो दिया, टाईटैनिक अपनी पहली यात्रा भी पूरी नहीं कर पाया। परमेश्वर के वचन बाइबल में यिर्मयाह नबी के द्वारा परमेश्वर ने कहा है, "यहोवा यों कहता है, श्रापित है वह पुरुष जो मनुष्य पर भरोसा रखता है, और उसका सहारा लेता है, जिसका मन यहोवा से भटक जाता है" (यि