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मंगलवार, 29 जून 2021

तृप्ति

 

          मेरे बच्चे तो रोमांचित थे, लेकिन मैं बहुत आशंकित थी। छुट्टियाँ मनाने के समय में हम एक मछली-घर घूमने गए थे, और वहाँ एक विशेष टैंक में छोटी शार्क मछलियाँ भी थीं, जिन्हें दर्शक छू सकते थे, दुलार से थपथपा सकते थे। मैंने वहाँ के सहायक से पूछा कि क्या ये शार्क कभी किसी को काटती या पकड़ती नहीं हैं? उसने उत्तर दिया कि इन शार्क मछलियों को अभी कुछ देर पहले ही भरपेट भोजन करवाया गया है, और फिर उसके ऊपर कुछ और अतिरिक्त भी खिला दिया गया है। क्योंकि अब उन्हें भूख नहीं थी, उनके पेट भरे हुए थे, इसलिए वे काटेंगी भी नहीं।

          मैंने जो शार्क को छूने और थपथपाने के विषय में उस दिन सीखा, वह परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन में लिखी बात, “सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं” (नीतिवचन 27:7) के अनुसार है। भूख – वह अन्दर से खालीपन का भाव – हमारे सही निर्णय करने की बुद्धिमत्ता को क्षीण बना सकती है। भूखा होना या तृप्त न होना हमें ऐसा कुछ भी स्वीकार करने के लिए बाध्य कर सकता है, जिसके द्वारा हमें लगता है कि हमारी भूख शांत हो सकेगी, हमें तृप्ति मिल सकेगी – चाहे उसके लिए हमें किसी और का कोई भाग ही काटना या छीनना क्यों न पड़े।

          परमेश्वर नहीं चाहता है कि हम अपनी भूख या तृप्त होने की भावना से बाध्य होकर जीवन जीएँ। वह चाहता है कि हम मसीह यीशु के प्रेम से भर जाएँ जिससे हम जो भी करें वह उस शान्ति और स्थिरता के साथ हो जो वह हमें प्रदान करता है। इस बात का निरंतर एहसास कि हमें बिना किसी भी शर्त के लगातार प्रेम किया जाता है, हमें इसके लिए भरोसा देता है। इस प्रेम में स्थिर और दृढ़ होने के द्वारा हम हमारी ओर आने वाले प्रत्येक “अच्छी” प्रतीत होने वाली वस्तु को स्वीकार करने के स्थान पर, अपने लिए अपनी संपत्ति, संबंधों, सामग्री के विषय जाँच-परख कर सही चुनाव कर सकते हैं।

          केवल प्रभु यीशु मसीह के साथ एक सही संबंध ही हमें पूर्ण संतुष्टि दे सकता है, हमें तृप्त रख सकता है। हम अपने लिए उसके अनुपम, अद्भुत प्रेम को समझें, और अपनी तथा औरों की तृप्ति के लिए “...परमेश्वर की सारी भरपूरी तक परिपूर्ण हो जाएँ” (इफिसियों 3:19)। - जेनिफर बेनसन शुल्ट

 

जो प्रभु यीशु को जीवन की रोटी के रूप में देखते हैं, वे कभी भूखे नहीं होंगे।


जीवन की रोटी जो स्वर्ग से उतरी मैं हूं। यदि कोई इस रोटी में से खाए, तो सर्वदा जीवित रहेगा और जो रोटी मैं जगत के जीवन के लिये दूंगा, वह मेरा मांस है। - यूहन्ना 6:51

बाइबल पाठ: नीतिवचन 27:1-10

नीतिवचन 27:1 कल के दिन के विषय में मत फूल, क्योंकि तू नहीं जानता कि दिन भर में क्या होगा।

नीतिवचन 27:2 तेरी प्रशंसा और लोग करें तो करें, परन्तु तू आप न करना; दूसरा तुझे सराहे तो सराहे, परन्तु तू अपनी सराहना न करना।

नीतिवचन 27:3 पत्थर तो भारी है और बालू में बोझ है, परन्तु मूढ का क्रोध उन दोनों से भी भारी है।

नीतिवचन 27:4 क्रोध तो क्रूर, और प्रकोप धारा के समान होता है, परन्तु जब कोई जल उठता है, तब कौन ठहर सकता है?

नीतिवचन 27:5 खुली हुई डांट गुप्त प्रेम से उत्तम है।

नीतिवचन 27:6 जो घाव मित्र के हाथ से लगें वह विश्वासयोग्य है परन्तु बैरी अधिक चुम्बन करता है।

नीतिवचन 27:7 सन्तुष्ट होने पर मधु का छत्ता भी फीका लगता है, परन्तु भूखे को सब कड़वी वस्तुएं भी मीठी जान पड़ती हैं।

नीतिवचन 27:8 स्थान छोड़ कर घूमने वाला मनुष्य उस चिडिय़ा के समान है, जो घोंसला छोड़ कर उड़ती फिरती है।

नीतिवचन 27:9 जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है।

नीतिवचन 27:10 जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • अय्यूब 14-16
  • प्रेरितों 9:22-43


गुरुवार, 21 जुलाई 2016

जल


   यद्यपि पृथ्वी का 70 प्रतिशत भाग जल से ढका हुआ है, फिर भी उस जल का 1 प्रतिश्त से भी कम अंश मनुष्यों के पीने योग्य है। जल का संरक्षण और स्वच्छता संसार के अनेकों भागों में बहुत महत्वपूर्ण विषय हैं, क्योंकि जीवन स्वच्छ और पीने योग्य जल के उपलब्ध होने पर निर्भर करता है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि एक पापों में भटकी हुई स्त्री को जीवन-जल तक लाने के लिए प्रभु यीशु मसीह ने मार्ग से हटकर यात्रा करी। प्रभु यीशु जान-बूझकर सामरिया के एक ऐसे स्थान से होकर गए, जहाँ से कोई भी शिष्ट एवं सम्मानयोग्य प्रचारक नहीं जाता था। वहाँ उन्होंने उस महिला को जीवन-जल के बारे में बताया; प्रभु यीशु ने उससे कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   यह जीवन-जल स्वयं प्रभु यीशु मसीह ही हैं। जो उन्हें स्वीकार कर लेते हैं, वे अनन्त अविनाशी जीवन भी पा लेते हैं। प्रभु यीशु के अनुयायियों के अन्दर यह जीवन जल एक कार्य और करता है - उनमें से उमड़कर बहने वाला यह जीवन-जल औरों को भी तृप्त करता है, और फिर उन तृप्त होने वालों में से होकर अन्य लोगों की तृप्ति के लिए प्रवाहित होने लग जाता है (यूहन्ना 7:38)।

   जैसे संसार में स्वच्छ पेय जल की उपलब्धता असमान है, वैसा ही इस जीवन-जल के संबंध में भी है। संसार के कई स्थानों पर अभी भी अनेकों ऐसे लोग हैं जो प्रभु यीशु और उसमें लाए गए विश्वास द्वारा सेंत-मेंत मिलने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार के बारे में या तो जानते ही नहीं हैं, या फिर अच्छे से और सही रीति से नहीं जानते हैं। हम मसीही विश्वासियों का यह विशेषाधिकार एवं ज़िम्मेदारी है कि इस पाप और बुराई से भरे संसार के लोगों में उन्हें सच्ची तृप्ति देने वाले इस जीवन-जल को पहुँचाने वाले बनें। - सी. पी. हिया


प्यासे संसार के लिए जीवन-जल का कभी ना समाप्त होने वाले स्त्रोत प्रभु यीशु मसीह ही हैं।

जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। - यूहन्ना 7:38 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:4-14
John 4:4 और उसको सामरिया से हो कर जाना अवश्य था। 
John 4:5 सो वह सूखार नाम सामरिया के एक नगर तक आया, जो उस भूमि के पास है, जिसे याकूब ने अपने पुत्र यूसुफ को दिया था। 
John 4:6 और याकूब का कूआं भी वहीं था; सो यीशु मार्ग का थका हुआ उस कूएं पर यों ही बैठ गया, और यह बात छठे घण्टे के लगभग हुई। 
John 4:7 इतने में एक सामरी स्त्री जल भरने को आई: यीशु ने उस से कहा, मुझे पानी पिला। 
John 4:8 क्योंकि उसके चेले तो नगर में भोजन मोल लेने को गए थे। 
John 4:9 उस सामरी स्त्री ने उस से कहा, तू यहूदी हो कर मुझ सामरी स्त्री से पानी क्यों मांगता है? (क्योंकि यहूदी सामरियों के साथ किसी प्रकार का व्यवहार नहीं रखते)। 
John 4:10 यीशु ने उत्तर दिया, यदि तू परमेश्वर के वरदान को जानती, और यह भी जानती कि वह कौन है जो तुझ से कहता है; मुझे पानी पिला तो तू उस से मांगती, और वह तुझे जीवन का जल देता। 
John 4:11 स्त्री ने उस से कहा, हे प्रभु, तेरे पास जल भरने को तो कुछ है भी नहीं, और कूआं गहिरा है: तो फिर वह जीवन का जल तेरे पास कहां से आया? 
John 4:12 क्या तू हमारे पिता याकूब से बड़ा है, जिसने हमें यह कूआं दिया; और आप ही अपने सन्तान, और अपने ढोरों समेत उस में से पीया? 
John 4:13 यीशु ने उसको उत्तर दिया, कि जो कोई यह जल पीएगा वह फिर प्यासा होगा। 
John 4:14 परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15



शनिवार, 18 अक्टूबर 2014

अनुग्रह और प्रेम


   मेरी मुलाकात एक ऐसे व्यक्ति से हुई जिसका यह मानना था कि उसके कार्य इतने बुरे थे कि उनके लिए परमेश्वर उसे कभी क्षमा नहीं कर सकता। एक अन्य व्यसक और परिपक्व जन ने उसे अपने साथ लिया और उसे संभाला, और फिर एक वर्ष बाद जब मैं उससे मिला तब तक वह पहला व्यक्ति प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार को पा चुका था और बड़ी लगन से परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने में लगा हुआ था। लेकिन और तीन वर्ष के बाद जब मेरी उससे बातचीत हुई तो मुझे आभास हुआ कि मसीही विश्वास के जीवन का उसका वह आरंभिक उत्साह अब क्षीण हो गया था, उसके स्थान पर कुड़कुड़ाहट उसके जीवन में आ गई थी; उसने कहा, "मुझे यह समझ नहीं आता कि परमेश्वर कैसे बुराई को पनपने और समृद्ध होने देता है जबकि उसके अपने पुत्र और पुत्रियाँ (उसका संकेत स्वयं अपनी ओर था) जीवन यापन के लिए संघर्ष में लगे हैं।" उसकी कुड़कुड़ाहट ने उसके मसीही विश्वास के आनन्द को समाप्त कर दिया था।

   बहुतेरे अन्य लोगों के समान ही, वह भी यह भूल गया था कि एक समय वह स्वयं भी उस बुराई में पड़ा था, और यह केवल मसीह यीशु में होकर उपलब्ध परमेश्वर का अनुग्रह ही था जिसके द्वारा उसका जीवन बदला और वह पापों से छूट सका। आज वह उस पाप क्षमा और उद्धार के लिए अपनी आरंभिक कृतज्ञता को भूल गया था, उसने अपने प्रति प्रभु के अनुग्रह का मूल्यांकन करने और अपना जीवन प्रभु के समक्ष बिताने की बजाए दूसरों का मूल्यांकन करने और अपनी तुलना उनसे करना आरंभ कर दिया था, जिससे उसका दृष्टिकोण बदल गया और उसका आनन्द जाता रहा। उसके इस व्यवहार से मुझे प्रभु यीशु द्वारा दाख की बारी में काम करने के लिए मज़दुरों को बुलाए जाने वाले दृष्टांत (मत्ती 20:1-16) की याद आई। स्वामी ने जिन्हें उस बारी में कार्य करने के लिए बुलाय था, उनमें से कुछ अपने कर्त्वय को भूल कर दुसरों के बारे में सोचने लग गए थे (पद 10-12), और परिणाम दुखदायी था।

   परमेश्वर हम में से किसी का भी, किसी भी रीति से, किसी भी बात के लिए लेशमात्र भी कर्ज़दार नहीं है। यदि हमारे पापों के बावजूद वह हमें अपनी पृथ्वी पर बने रहने देता है, हमें खाने-पीने-रहने-ओढ़ने को देता है, हमारे जीवनों में आनन्द के अवसर आने देता है, तो यह सब उसका हमारे प्रति अनुग्रह और प्रेम ही है। लेकिन इससे भी बढ़कर उसका प्रेम इसमें प्रदर्शित होता है कि वह संसार के सभी लोगों को प्रभु यीशु में होकर सेंत-मेंत उद्धार उपलब्ध कराता है, उनके पाप क्षमा करने को तैयार रहता है, उन्हें अपने परिवार में जोड़ने को लालायित रहता है। वह चाहता है कि हम सब उसके साथ अनन्तकाल तक स्वर्ग में निवास करें, और जो कोई प्रभु यीशु में होकर उसके पास आता है, उसके अन्दर वह अपना आत्मा निवास करने को देता है जिससे वह व्यक्ति उस अनन्तकाल के जीवन के लिए तैयार किया जा सके।

   किसी के भी जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव उसके प्रति परमेश्वर के इस महान अनुग्रह और प्रेम को किसी रीति से कमतर नहीं आँक सकते। जब तक हमारी नज़रें अपने उद्धारकर्ता प्रभु परमेश्वर यीशु मसीह पर लगी रहेंगी, और हम उसके वचन की रौशनी में स्वयं अपना आँकलन उसके समक्ष करते रहेंगे, हम उसके अनुग्रह के महत्व तथा हमारे प्रति उसके प्रेम की महानता को समझते रहेंगे। फिर हमारे जीवन में ना तो कुड़कुड़ाने का कोई अवसर होगा और ना ही प्रभु में हमारा आनन्द कभी छिन्न हो सकेगा। - रैन्डी किल्गोर


जीवन में तृप्त और आनन्दित रहने के लिए कभी यह ना भूलें कि परमेश्वर भला है और अपने बच्चों के लिए सदा भला ही करता है।

हे भाइयों, एक दूसरे पर दोष न लगाओ ताकि तुम दोषी न ठहरो, देखो, हाकिम द्वार पर खड़ा है। - याकूब 5:9

बाइबल पाठ: मत्ती 20:1-16
Matthew 20:1 स्वर्ग का राज्य किसी गृहस्थ के समान है, जो सबेरे निकला, कि अपने दाख की बारी में मजदूरों को लगाए। 
Matthew 20:2 और उसने मजदूरों से एक दीनार रोज पर ठहराकर, उन्हें अपने दाख की बारी में भेजा। 
Matthew 20:3 फिर पहर एक दिन चढ़े, निकल कर, और औरों को बाजार में बेकार खड़े देखकर, 
Matthew 20:4 उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ, और जो कुछ ठीक है, तुम्हें दूंगा; सो वे भी गए। 
Matthew 20:5 फिर उसने दूसरे और तीसरे पहर के निकट निकलकर वैसा ही किया। 
Matthew 20:6 और एक घंटा दिन रहे फिर निकलकर औरों को खड़े पाया, और उन से कहा; तुम क्यों यहां दिन भर बेकार खड़े रहे? उन्हों ने उस से कहा, इसलिये, कि किसी ने हमें मजदूरी पर नहीं लगाया। 
Matthew 20:7 उसने उन से कहा, तुम भी दाख की बारी में जाओ। 
Matthew 20:8 सांझ को दाख बारी के स्‍वामी ने अपने भण्‍डारी से कहा, मजदूरों को बुलाकर पिछलों से ले कर पहिलों तक उन्हें मजदूरी दे दे। 
Matthew 20:9 सो जब वे आए, जो घंटा भर दिन रहे लगाए गए थे, तो उन्हें एक एक दीनार मिला। 
Matthew 20:10 जो पहिले आए, उन्होंने यह समझा, कि हमें अधिक मिलेगा; परन्तु उन्हें भी एक ही एक दीनार मिला। 
Matthew 20:11 जब मिला, तो वह गृहस्थ पर कुडकुड़ा के कहने लगे। 
Matthew 20:12 कि इन पिछलों ने एक ही घंटा काम किया, और तू ने उन्हें हमारे बराबर कर दिया, जिन्हों ने दिन भर का भार उठाया और घाम सहा? 
Matthew 20:13 उसने उन में से एक को उत्तर दिया, कि हे मित्र, मैं तुझ से कुछ अन्याय नहीं करता; क्या तू ने मुझ से एक दीनार न ठहराया? 
Matthew 20:14 जो तेरा है, उठा ले, और चला जा; मेरी इच्छा यह है कि जितना तुझे, उतना ही इस पिछले को भी दूं। 
Matthew 20:15 क्या उचित नहीं कि मैं अपने माल से जो चाहूं सो करूं? क्या तू मेरे भले होने के कारण बुरी दृष्टि से देखता है? 
Matthew 20:16 इसी रीति से जो पिछले हैं, वह पहिले होंगे, और जो पहिले हैं, वे पिछले होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • मत्ती 20-22


मंगलवार, 1 मई 2012

संतुष्टि

   जिग-सौ पज़ल के चित्र को पूर्ण बना पाने की संतुष्टि के लिए हमें उस चित्र के सभी भागों की आवश्यक्ता होती है। कई प्रकार से जीवन भी कुछ ऐसा ही है। हम अपने दिन अपने जीवन के बिखरे हुए टुकड़ों को जमा करने और फिर उन्हें ठीक से जोड़ कर एक अच्छा और पूर्ण चित्र बनाने में लगे रहते हैं, किंतु फिर भी कभी कभी लगता है कि कोई भाग कहीं ग़ायब है, चित्र अधूरा है और संतुष्टि नहीं है।

   ऐसे में थोड़ा रुक कर जांचना आवश्यक है कि क्या हम चित्र को पूरा करने के लिए गलत भागों को लगाने के प्रयास तो नहीं कर रहे? यद्यपि हम जानते हैं कि जिस जीवन में परमेश्वर केंद्रबिंदु नहीं है वह जीवन अपने सबसे महत्वपूर्ण भाग से रहित है, क्या फिर भी हम ऐसे जीवन व्यतीत कर रहे हैं मानों परमेश्वर हमारे लिए कोई विशेष महत्व नहीं रखता? चाहे हम नियमित रूप से चर्च जाते हों, आराधना में सम्मिलित होते हों, तो भी क्या परमेश्वर हमारे जीवन में सबसे अधिक महत्व रखता है? कई बार हम परमेश्वर से अपनी दूरी के आदी हो जाते हैं, उस की कमी हमें कुछ विशेष नहीं खलती, और हमारे लिए पाप में पड़ जाना या समझौता कर लेना सरल हो जाता है, बिना यह एहसास रखे कि इस से हमारे जीवन का एक बहुत महत्वपूर्ण भाग नष्ट हो रहा है।

   लेकिन हम चाहे परमेश्वर से कितने ही दूर चले जाएं, वह सदा हमें अपने पास लाने के प्रयासों में लगा रहता है, क्योंकि उसकी लालसा यही रहती है कि उस की संतान उसके पास रहे। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपने नबी यशायाह द्वारा अपनी प्रजा से कहलवाया: "जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे" (यशायाह ५५:२)।

   यदि आपके जीवन से भी कुछ खोया हुआ प्रतीत होता है, तो स्मरण रखिए कि केवल परमेश्वर ही है जो आपको भरपूरी से संतुष्टि और संपूर्ण तृप्ति दे सकता है। उसे ही अपने जीवन के चित्र को पूर्ण करने दीजिए। उसकी संतुष्टि स्थाई संतुष्टि है। - जो स्टोवैल


प्रत्येक मन में ऐसी लालसाएं हैं जिन्हें केवल यीशु ही तृप्त कर सकता है।
जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। - यशायाह ५५:२
बाइबल पाठ: यशायाह ५५:१-६
Isa 55:1  अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ, और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो।
Isa 55:2  जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगा कर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे।
Isa 55:3  कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे, और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा।
Isa 55:4  सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है।
Isa 55:5  सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उस ने तुझे शोभायमान किया है।
Isa 55:6  जब जब यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो;
एक साल में बाइबल: 
  • १ राजा १०-११ 
  • लूका २१:२०-३८