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बुधवार, 26 मई 2021

हिम्मत

 

            लंडन के पार्लियामेंट स्क्वायर में लगी महान पुरुषों (नेल्सन मेंडेला, विंस्टन चर्चिल, महात्मा गांधी, और अन्य) की प्रतिमाओं के मध्य में केवल एक महिला की प्रतिमा भी है। यह एकमात्र महिला है मिलीसेंट फॉसेट, जिन्होंने महिलाओं को वोट देने का अधिकार दिए जाने के लिए संघर्ष किया। काँसे में बनी उनकी प्रतिमा में उन्हें अमर किया गया है, और उन्हें हाथ में एक बैनर थामे हुए दिखाया गया है, जिसमें उनके द्वारा अपने साथी संघर्ष करने वालों के लिए उनके शब्द “साहस हर स्थान पर औरों में साहस का आह्वान करता है” लिखे गए हैं। फॉसेट ने इस बात पर जोर दिया कि एक व्यक्ति का साहस औरों में भी साहस उत्पन्न करता है, और डरपोक आत्माओं को सक्रिय होने के लिए जागृत करता है।

            परमेश्वर के वचन बाइबल में जब दाऊद अपनी राजगद्दी अपने पुत्र सुलैमान को सौंप रहा था, तो उसने उसे उन भारी दायित्वों के बारे में भी समझाया जो शीघ्र ही उसके कन्धों पर आ पड़ेंगे। बहुत संभव है कि सुलैमान उन दायित्वों  – इस्राएल का नेतृत्व करना कि सभी लोग परमेश्वर के निर्देशों के अनुसार चलें, जो भूमि परमेश्वर ने उन्हें प्रदान की थी उसकी ठीक से रक्षा करे, और मंदिर को बनवाने के महान कार्य को करवाए (1 इतिहास 28:8-10) के भार का अंदाजा लगाकर काँप उठा।

            सुलैमान के कंपकंपाते हृदय को भांपते हुए, दाऊद ने अपने पुत्र को सामर्थी शब्द भी कहे: “फिर दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, हियाव बान्ध और दृढ़ हो कर इस काम में लग जा। मत डर, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि यहोवा परमेश्वर जो मेरा परमेश्वर है, वह तेरे संग है; और जब तक यहोवा के भवन में जितना काम करना हो वह न हो चुके, तब तक वह न तो तुझे धोखा देगा और न तुझे त्यागेगा” (पद 20)। सच्ची हिम्मत कभी भी सुलैमान की अपनी योग्यता अथवा स्वावलंबी होने से नहीं आती, वरन परमेश्वर पर निर्भर करने और उसकी उपस्थिति तथा सामर्थ्य का सहारा लेने से उसे प्रदान की जानी थी; और परमेश्वर ने सुलैमान को उसके दायित्वों के निर्वाह के लिए आवश्यक हिम्मत प्रदान भी की।

            जब हमें कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, तो अकसर हम अपने आप को बहादुरी दिखाने के लिए उकसाते हैं या अपने कौशल का ढोल पीटने लगते हैं। किन्तु हमारे विश्वास को नूतन और कारगर करने वाला परमेश्वर है। वह हमारे साथ बना रहेगा, और हमारे साथ उसकी उपस्थिति हमें हिम्मत देती रहेगी। - विन्न कोलियर

 

प्रभु मेरी हर परिस्थिति में मुझे अपनी उपस्थिति का एहसास करवाएँ।


जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी। - यशायाह 43:2

बाइबल पाठ: 1 इतिहास 28:8-10, 19-21

1 इतिहास 28:8 इसलिये अब इस्राएल के देखते अर्थात यहोवा की मण्डली के देखते, और अपने परमेश्वर के सामने, अपने परमेश्वर यहोवा की सब आज्ञाओं को मानो और उन पर ध्यान करते रहो; ताकि तुम इस अच्छे देश के अधिकारी बने रहो, और इसे अपने बाद अपने वंश का सदा का भाग होने के लिये छोड़ जाओ।

1 इतिहास 28:9 और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा।

1 इतिहास 28:10 अब चौकस रह, यहोवा ने तुझे एक ऐसा भवन बनाने को चुन लिया है, जो पवित्रस्थान ठहरेगा, हियाव बान्धकर इस काम में लग जा।

1 इतिहास 28:19 मैं ने यहोवा की शक्ति से जो मुझ को मिली, यह सब कुछ बूझ कर लिख दिया है।

1 इतिहास 28:20 फिर दाऊद ने अपने पुत्र सुलैमान से कहा, हियाव बान्ध और दृढ़ हो कर इस काम में लग जा। मत डर, और तेरा मन कच्चा न हो, क्योंकि यहोवा परमेश्वर जो मेरा परमेश्वर है, वह तेरे संग है; और जब तक यहोवा के भवन में जितना काम करना हो वह न हो चुके, तब तक वह न तो तुझे धोखा देगा और न तुझे त्यागेगा।

1 इतिहास 28:21 और देख परमेश्वर के भवन के सब काम के लिये याजकों और लेवियों के दल ठहराए गए हैं, और सब प्रकार की सेवा के लिये सब प्रकार के काम प्रसन्नता से करने वाले बुद्धिमान पुरुष भी तेरा साथ देंगे; और हाकिम और सारी प्रजा के लोग भी जो कुछ तू कहेगा वही करेंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • इतिहास 28-29
  • यूहन्ना 9:24-41

रविवार, 2 मई 2021

प्रार्थना

 

          केविन ने अपनी आँख से आँसू पोंछते हुए, मेरी पत्नी केरी को पढ़ने के लिए एक पर्ची पकड़ाई। उसे पता था की मैं और केरी प्रार्थना कर रहे थे कि हमारी बेटी प्रभु यीशु में विश्वास में लौट कर आ जाए। केविन ने बताया कि वह पर्ची उसे, उसकी माँ के देहांत के बाद, उनकी बाइबल में मिली थी, और उसने आशा व्यक्त की, कि हम उसे पढ़ने से प्रोत्साहित होंगे। उस पर्ची में सबसे ऊपर लिखा था “मेरे बेटे केविन के लिए” और उसके नीचे, उसके उद्धार के लिए एक प्रार्थना लिखी हुई थी, जो उसकी माँ केविन के लिए किया करती थी।

          केविन ने आगे बताया, “अब मैं इस पर्ची को हमेशा अपने साथ अपनी बाइबल में रखता हूँ। मेरी माँ पैंतीस वर्ष से भी अधिक तक मेरे उद्धार पाने के लिए प्रार्थना करती रही। तब मैं परमेश्वर से बहुत दूर था, परन्तु आज मैं मसीही विश्वासी हूँ।” उसने हमारी ओर ध्यान से देखते हुए और अपने आँसुओं में से मुसकुराते हुए कहा “अपनी बेटी के लिए प्रार्थना करना कभी न छोड़ना – उत्तर आने में चाहे कितना भी समय क्यों न लग जाए, हिम्मत बनाए रखना।”

          उसके इन प्रोत्साहन के शब्दों से मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा प्रार्थना से संबंधित एक दृष्टांत याद आया, जो लूका रचित सुसमाचार में लिखा है। लूका ने प्रभु के इस दृष्टांत का आरंभ इन शब्दों में किया,फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्टान्त कहा” (लूका 18:1)।

          इस दृष्टांत में प्रभु यीशु ने एक “अधर्मी न्यायी”, जो किसी की परवाह नहीं करता था, की तुलना पूर्णतः सिद्ध स्वर्गीय पिता परमेश्वर से, जो सभी की चिंता करता है और चाहता है कि लोग उसके पास आएँ तथा आशीषित हों, की है। उस न्यायी ने केवल इसलिए निवेदन को सुना और न्याय को चुकाया क्योंकि वह बारंबार किए जा रहे निवेदन से और परेशान नहीं होना चाहता था। हम इससे प्रोत्साहित हो सकते हैं कि जब वह अधर्मी न्यायी प्रार्थना का उत्तर दे सकता है, तो सब से प्रेम करने और सब का ध्यान रखने वाला परमेश्वर क्यों हमारी प्रार्थनाओं का उत्तर नहीं देगा। हमारा परमेश्वर पिता चाहता है कि हम उससे प्रार्थना करें। - जेम्स बैंक्स

 

प्रभु परमेश्वर पिता, मुझे आपके कार्य और राज्य के लिए प्रार्थना करते रहने वाला बनाएं।


निरन्तर  प्रार्थना में लगे रहो। - 1 थिस्स्लुनीकियों 5:17

बाइबल पाठ: लूका 18:1-8

लूका 18:1 फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्टान्त कहा।

लूका 18:2 कि किसी नगर में एक न्यायी रहता था; जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था।

लूका 18:3 और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा।

लूका 18:4 उसने कितने समय तक तो न माना परन्तु अन्त में मन में विचारकर कहा, यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं।

लूका 18:5 तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा कहीं ऐसा न हो कि घड़ी घड़ी आकर अन्त को मेरा नाक में दम करे।

लूका 18:6 प्रभु ने कहा, सुनो, कि यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है?

लूका 18:7 सो क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उस की दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देर करेगा?

लूका 18:8 मैं तुम से कहता हूं; वह तुरन्त उन का न्याय चुकाएगा; तौभी मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?

 

एक साल में बाइबल: 

  • 1 राजाओं 12-13
  • लूका 22:1-20

गुरुवार, 1 फ़रवरी 2018

प्रार्थना


   क्या आप ऐसे समय से निकल रहे हैं जब लगता है कि समस्या के समाधान के प्रत्येक प्रयास का सामना एक नई समस्या से होता है? आप रात्रि को सोने से पहले परमेश्वर को धन्यवाद करते हैं कि समस्या सुलझा गई, परन्तु जब प्रातः उठते हैं तो पता चलता है कि कुछ बिगड़ गया है और समस्या वहीं की वहीं है।

   ऐसे ही एक अनुभव से निकलते समय, मैं परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका रचित सुसमाचार पढ़ रहा था, और 18वें अध्याय के आरंभिक पद को पढ़कर चकित हो गया; वहाँ लिखा था : “फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा” (पद 1)। मैंने निरंतर निवेदन करते रहने वाली विधवा का यह दृष्टान्त अनेकों बार पहले भी पढ़ा था, परन्तु यह नहीं समझ पाया था कि प्रभु यीशु ने उसे क्यों सुनाया था (पद 2-8)। लेकिन अब मैं उन आरंभिक शब्दों का शेष कहानी के साथ मेल बैठा सका। प्रभु यीशु की, अपने शिष्यों को दी गई शिक्षा स्पष्ट थे – “निरंतर प्रार्थना करते रहो और कभी हिम्मत न टूटने दो।”

   प्रार्थना परमेश्वर को हमारी इच्छा को पूरा करने के लिए मजबूर करने का तरीका नहीं है। प्रार्थना परमेश्वर की सामर्थ्य को समझाने, पहचानने और हमारे जीवनों के लिए उसकी योजनाओं को जानने, की प्रक्रिया है। प्रार्थना में हम अपने जीवन और परिस्थितयों को उसके हाथों में समर्पित करते हैं और भरोसा करते हैं कि अपने समय और तरीके से वह हमारे पक्ष में कार्य करेगा।

   हम जैसे जैसे परमेश्वर के अनुग्रह पर न केवल अपने निवेदन के परिणाम के लिए, वरन, उस परिणाम की प्रक्रिया के लिए भी भरोसा रखते हैं, हम बारंबार परमेश्वर के पास प्रार्थना में लौट कर आते हैं, उसके द्वारा हमारी देखभाल और उसकी बुद्धिमता पर विश्वास रखते हुए।

   हमारे लिए हमारे प्रभु परमेश्वर का प्रोत्साहन स्पष्ट है: “निरंतर प्रार्थना करते रहो और कभी हिम्मत न टूटने दो।” – डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रार्थना सब कुछ बदल देती है।

इसलिये जागते रहो और हर समय प्रार्थना करते रहो कि तुम इन सब आने वाली घटनाओं से बचनेऔर मनुष्य के पुत्र के साम्हने खड़े होने के योग्य बनो। - लूका 21:36

बाइबल पाठ: लूका 18:1-8
Luke 18:1 फिर उसने इस के विषय में कि नित्य प्रार्थना करना और हियाव न छोड़ना चाहिए उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा।
Luke 18:2 कि किसी नगर में एक न्यायी रहता था; जो न परमेश्वर से डरता था और न किसी मनुष्य की परवाह करता था।
Luke 18:3 और उसी नगर में एक विधवा भी रहती थी: जो उसके पास आ आकर कहा करती थी, कि मेरा न्याय चुकाकर मुझे मुद्दई से बचा।
Luke 18:4 उसने कितने समय तक तो न माना परन्तु अन्‍त में मन में विचारकर कहा, यद्यपि मैं न परमेश्वर से डरता, और न मनुष्यों की कुछ परवाह करता हूं।
Luke 18:5 तौभी यह विधवा मुझे सताती रहती है, इसलिये मैं उसका न्याय चुकाऊंगा कहीं ऐसा न हो कि घड़ी घड़ी आकर अन्‍त को मेरा नाक में दम करे।
Luke 18:6 प्रभु ने कहा, सुनो, कि यह अधर्मी न्यायी क्या कहता है?
Luke 18:7 सो क्या परमेश्वर अपने चुने हुओं का न्याय न चुकाएगा, जो रात-दिन उस की दुहाई देते रहते; और क्या वह उन के विषय में देर करेगा?
Luke 18:8 मैं तुम से कहता हूं; वह तुरन्त उन का न्याय चुकाएगा; तौभी मनुष्य का पुत्र जब आएगा, तो क्या वह पृथ्वी पर विश्वास पाएगा?


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 27-28
  • मत्ती 21:1-22



शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

मार्ग


   फ्रांस में नौरमैन्डी के समुद्र-तट से करीब आधा मील दूर स्थित मॉन्ट सेंट-माईकल टापू है जिस पर एक मठ बना है। सदियों से यह स्थान धार्मिक तीर्थयात्रियों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। जब तक वहाँ पहुँचने का मार्ग नहीं बन गया, उस टापू तक जाना खतरनाक रहा, और वहाँ पहुँचने के प्रयासों में कुछ तीर्थयात्रियों की जान भी जा चुकी है। जब समुद्र में ज्वार होता है तो वह टापू पानी से घिरा रहता है, और जब भाटा होता है तो टापू के आस-पास उबड़-खाबड़ रेत फैली होती है। उस मार्ग के बन जाने से पहले, उस टापू तक पहुँचना भय से भरा होता था।

   पुराने नियम के समय के यहूदियों के लिए परमेश्वर तक पहुँचना भी भय से भरा होता था। जब परमेश्वर ने अपनी आज्ञाएं दीं तो उसकी आवाज़ के भीषण गर्जन के कारण वे यहूदी लोग उसके समीप आने से डरने लगे (निर्गमन 19:10-16)। जब महायाजक के माध्यम से परमेश्वर तक पहुँचने का मार्ग मिला तो भी कुछ अनुष्ठान और विधियाँ पूरी करे बिना यह संभव नहीं था (लैव्यवस्था 16:1-34)। परमेश्वर की पवित्र उपस्थिति के प्रतीक वाचा के सन्दूक को गलती से भी छू लेना, मृत्यु का कारण बन सकता था (2 शमूएल 6:7-8)।

   किंतु प्रभु यीशु के बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान के द्वारा आज हमारे लिए परमेश्वर तक निर्भीक होकर पहुँचने का मार्ग तैयार और उपलब्ध है। प्रभु यीशु के बलिदान ने समस्त मानव जाति के पापों के दण्ड की कीमत चुका दी है; प्रभु में लाए गए विश्वास के द्वारा किसी भी मसीही विश्वासी को अपने पापों के दण्ड को भोगने की कोई आवश्यकता नहीं रह गई है; अब प्रभु यीशु के सभी विश्वासियों को परमेश्वर की उपस्थिति में निमंत्रण है: "इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे" (इब्रानियों 4:16)।

   प्रभु यीशु मसीह में सभी मनुष्यों के लिए कभी भी, कहीं भी प्रार्थना में परमेश्वर की उपस्थिति में आने का मार्ग तैयार और उपलब्ध हो गया है। - डेनिस फिशर


प्रभु यीशु के नाम से करी गई प्रार्थना के द्वारा प्रमेश्वर पिता तक हमारी तात्कालिक पहुँच होती है।

और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है। - इफिसियों 2:17-18

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:14-16; 10:19-22
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 49-50
  • रोमियों 1


बुधवार, 25 फ़रवरी 2015

तिरस्कृत


   आर्थिक विशेषज्ञ, वॉरन बफेट संसार के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक हैं; 19 वर्ष की आयु में हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल ने उन्हें अस्वीकृत कर दिया था। वे बताते हैं कि हार्वर्ड में दाखिले के लिए हुए साक्षात्कार में असफल होने के बाद भय के भाव ने उन्हें घेर लिया, और साथ ही इस अस्वीकृति के कारण उन्हें अपने पिता की होने वाली प्रतिक्रीया की भी चिंता थी। लेकिन अब पीछे मुड़कर उन सब बातों और घटनाओं के प्रभावों को देखने पर वॉरन कहते हैं: "मेरे जीवन में सब कुछ जो हुआ, वह भी जिसे मैं उस समय मुझे कुचल देने वाली घटना समझता था, मेरी भलाई ही के लिए था।"

   तिरस्कृत होना दर्दनाक होता है, इससे कोई इन्कार नहीं है, लेकिन संसार से तिरस्कृत होने के कारण हमें परमेश्वर की इच्छाओं को पूरा करने से रुक नहीं जाना चाहिए। इस बात का सबसे अच्छा उदाहरण प्रभु यीशु मसीह हैं। प्रभु यीशु को उसके अपने लोगों ने ही स्वीकार नहीं किया (यूहन्ना 1:11), बाद में उसके अनेक अनुयायी उसे छोड़ कर चले गए (यूहन्ना 6:66)। लेकिन जैसे प्रभु यीशु का यह तिरस्कार परमेश्वर की योजना में था (यशायाह 53:3), वैसे ही परमेश्वर के पुत्र का इस तिरस्कार के बावजूद अपनी सेवकाई को जारी रखना और पूरा करना भी था। प्रभु यीशु ने ना केवल पृथ्वी के लोगों के तिरस्कार को सहा, वरन वे यह भी जानते थे कि उनके बलिदान के समय, जब वे कलवरी के क्रूस पर लटके होंगे, उनका स्वर्गीय पिता भी उनसे मूँह मोड़ लेगा, और यह हुआ भी (मत्ती 27:46)। लेकिन इस सब के बावजूद प्रभु यीशु ने बीमारों को चंगा किया, दुष्टात्माओं को निकाला और पाप क्षमा तथा उद्धार के सुसमाचार का प्रचार किया (प्रेरितों 10:38) और क्रूस पर अपने बलिदान से पहले वे परमेश्वर पिता से कह सके "जो काम तू ने मुझे करने को दिया था, उसे पूरा कर के मैं ने पृथ्वी पर तेरी महिमा की है" (यूहन्ना 17:4)।

   यदि तिरस्कृत होना, परमेश्वर द्वारा आपको सौंपे गए कार्य को पूरा करने में बाधा बन रहा है, तो हिम्मत ना हारें, अपनी सेवकाई में डटे रहें। स्मरण रखे कि प्रभु यीशु ने भी यह दुख सहा है और वह आपकी परिस्थितियों तथा भावनाओं को भली-भांति समझ सकता है, इसलिए वह कहता है: "जो कुछ पिता मुझे देता है वह सब मेरे पास आएगा, उसे मैं कभी न निकालूंगा" (यूहन्ना 6:37)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


प्रभु यीशु के समान हमें कोई अन्य नहीं समझ सकता।

क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। - इब्रानियों 4:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-13
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 12-14
  • मरकुस 5:21-43