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रविवार, 23 सितंबर 2012

शब्द - बाण या मरहम


   परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन का लेखक ऐसे बुद्धिहीन लोगों के बारे में लिखता है "...जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है..." (नीतिवचन १२:१८) - हमारी जीभ कई फालियों वाले ’स्विस’ चाकू के समान कई प्रकार से काटने और घायल करने की क्षमता रखती है।

   ऐसे हानिकारक रवैये का कारण होता है हमारे अन्दर का क्रोध, खिसियाहट, कुण्ठाएं, निराशाएं, अधीरताएं, तनाव, स्वदोष-बोध, असुरक्षाएं इत्यादि। अपने शब्दों द्वारा जब हम लोगों को घायल करते हैं तो साथ ही हम मित्रता और अन्य संबंधों को भी काटते और विच्छेदित करते हैं। इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं कि उन सात बातों की सूचि में जिन से परमेश्वर घृणा करता है, एक है वह व्यक्ति जो भाइयों के बीच झगड़ा उत्पन्न करता है (नीतिवचन ६:१६-१९)।

   परमेश्वर के समक्ष घृणित बातों की इस सूचि में सम्मिलित होने से हम अपने आप को कैसे बचाकर रख सकते हैं? सबसे पहली बात तो यह कि हमें अपने बोल-चाल का ध्यान रखना होगा; कानाफूसी और द्वेषपूर्ण बातें हमारे जीवनों में बिलकुल स्वीकार्य नहीं हैं और ना ही ऐसे शब्द जो आहत करते हैं। फिर, डींग मारना, घमण्ड दिखाना, झूठ बोलना और शब्दों के अन्य सभी ऐसे प्रयोग जिनके द्वारा फूट पड़ती है या चोट पहुँचती है भी हमारे जीवनों में नहीं पाए जाने हैं।

   शब्दों और जीभ के ऐसे दुरुपयोग के स्थान पर हमें ऐसा व्यवहार दिखाना और ऐसे शब्द प्रयोग करने हैं जिनसे प्रेम, क्षमा, करुणा, दया प्रगट होती है; वे जो घायल मन पर मरहम का काम करें। नम्रता सहित सत्य ही हमारे जीवन, आपसी संबंधों और बोलचाल का आधार होना चाहिए; और हमारी जीभ का प्रयोग दूसरों को उभारने तथा संवारने के लिए होना चाहिए ना कि किसी को नीचा दिखाने या गिराने के लिए।

   यदि प्रभु यीशु ने हमारे साथ ऐसे प्रेम, क्षमा और अनुग्रह से पूर्ण मधुर वचनों का प्रयोग एवं मृदु व्यवहार ना किया होता तो हम कहाँ होते? इसलिए प्रत्येक मसीही विश्वासी का भी कर्तव्य है कि वह शब्दों का प्रयोग बाण के समान बेधने के लिए नहीं वरन ढांपने और चंगा करने वाले मरहम के समान करे, जैसा कि हमारे उद्धाकर्ता प्रभु यीशु ने अपने शब्दों और व्यवहार का प्रयोग सबकी भलाई के लिए किया। - जो स्टोवैल


हमारे शब्दों में बनाने और बिगाड़ने दोनो की शक्ति है।

ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं। - नीतिवचन १२:१८

बाइबल पाठ: नीतिवचन ६:१६-१९; १२:१७-२२
Pro 6:16  छ: वस्तुओं से यहोवा बैर रखता है, वरन सात हैं जिन से उसको घृणा है 
Pro 6:17 अर्थात घमण्ड से चढ़ी हुई आंखें, झूठ बोलने वाली जीभ, और निर्दोष का लोहू बहाने वाले हाथ, 
Pro 6:18  अनर्थ कल्पना गढ़ने वाला मन, बुराई करने को वेग से दौड़ने वाले पांव, 
Pro 6:19  झूठ बोलने वाला साक्षी और भाइयों के बीच में झगड़ा उत्पन्न करने वाला मनुष्य। 
Pro 12:17  जो सच बोलता है, वह धर्म प्रगट करता है, परन्तु जो झूठी साक्षी देता, वह छल प्रगट करता है। 
Pro 12:18  ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोचविचार का बोलना तलवार की नाई चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं। 
Pro 12:19  सच्चाई सदा बनी रहेगी, परन्तु झूठ पल ही भर का होता है। 
Pro 12:20  बुरी युक्ति करने वालों के मन में छल रहता है, परन्तु मेल की युक्ति करने वालों को आनन्द होता है। 
Pro 12:21  धर्मी को हानि नहीं होती है, परन्तु दुष्ट लोग सारी विपत्ति में डूब जाते हैं। 
Pro 12:22  झूठों से यहोवा को घृणा आती है परन्तु जो विश्वास से काम करते हैं, उन से वह प्रसन्न होता है।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत १-३ 
  • गलतियों २

शनिवार, 22 सितंबर 2012

सत्य और सत्यापित


   मेरे पति को भूतपूर्व अमेरीकी राष्ट्रपति रौनल्ड रियगन द्वारा कही बात "विश्वास करो, परन्तु स्त्यापित भी करो" बहुत पसन्द है। जब रियगन राष्ट्रपति थे तो राजनैतिक आदान-प्रदान और व्यवहार में उनसे कही गई बातों का वे विश्वास करना तो चाहते थे; परन्तु क्योंकि उनके देश की सुरक्षा उन्हें बताई गई बात के सत्य होने पर निर्भर थी इसलिए वे हर बात को सत्यापित भी करवाते थे और सत्यापित सत्य के अनुसार ही कार्यवाही करते थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में, प्रेरितों १७:११ में, भी कुछ ऐसे लोगों का उल्लेख है जिन्होंने केवल इसलिए प्रचार किए हुए वचन को मान नहीं लिया क्योंकि परमेश्वर के नाम से एक नामी प्रचारक ने उनके मध्य आकर कुछ प्रचार किया। राष्ट्रपति रियगन ही के समान उनमें भी सत्यापित करने की लालसा थी, इसलिए "ये लोग तो थिस्‍सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्‍होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों हीं हैं, कि नहीं।" अर्थात बेरिया के उन मसीही विश्वासियों ने वचन को सुना और ग्रहण किया, किंतु मानने से पहले स्वयं पवित्र-शास्त्र से प्रचार किए हुए वचन के बारे में जांचकर देखा और तब उसे स्वीकार किया; और ऐसा वे प्रतिदिन किया करते थे। उनके इस व्यवहार के कारण परमेश्वर का वचन उनकी आलोचना नहीं करता वरन उन्हें ’भले’ कह कर के संबोधित करता है।

  यह बात आज हम सभी के लिए भी अति आवश्यक है। हमें हमारी बाइबल शिक्षा चाहे किसी चर्च, सण्डे स्कूल, रेडियो या टी.वी. पर प्रचार या अन्य किसी भी माध्यम से मिले, जो हम सुनते हैं उसे परमेश्वर के वचन के समक्ष रखकर जांचना आवश्यक है, हमारी ज़िम्मेदारी है (२ तिमुथियुस ३:१६-१७)। हमें ऐसे मनुष्य बनना है जो "अपने आप को परमेश्वर का ग्रहणयोग्य और ऐसा काम करने वाला ठहराने का प्रयत्‍न कर, जो लज्ज़ित होने न पाए, और जो सत्य के वचन को ठीक रीति से काम में लाता हो" (२ तिमुथियुस २:१५)।

   यदि हम ऐसा करेंगे तो हम किसी गलत या दूसरे ही सुसमाचार के सुनाने वालों के शिकार नहीं बनेंगे जो परमेश्वर के वचन को बिगाड़ना चाहते हैं (गलतियों १:६-७) - ऐसे झूठे शिक्षक जो भेड़ के भेस में नाश करने वाले भेड़िए हैं (मत्ती ७:१५)।

   स्मरण रखिए - "विश्वास करो, परन्तु स्त्यापित भी करो।" सिंडी हैस कैसपर


सत्य को भली भांति जानना झूठ को पहचानने के लिए पहला कदम है।

ये लोग तो थिस्‍सलुनीके के यहूदियों से भले थे और उन्‍होंने बड़ी लालसा से वचन ग्रहण किया, और प्रति दिन पवित्र शास्‍त्रों में ढूंढ़ते रहे कि ये बातें यों हीं हैं, कि नहीं। - प्रेरितों १७:११

बाइबल पाठ: गलतियों १:१-१२
Gal 1:1   पौलुस की, जो न मनुष्यों की ओर से, और न मनुष्य के द्वारा, वरन यीशु मसीह और परमेश्वर पिता के द्वारा, जिस ने मरे हुओं में से जिलाया, प्रेरित है। 
Gal 1:2   और सारे भाइयों की आरे से, जो मेरे साथ हैं, गलतिया की कलीसियाओं के नाम। 
Gal 1:3  परमेश्वर पिता, और हमारे प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शान्‍ति मिलती रहे। 
Gal 1:4  उसी ने अपने आप को हमारे पापों के लिये दे दिया, ताकि हमारे परमेश्वर और पिता की इच्‍छा के अनुसार हमें इस वर्तमान बुरे संसार से छुड़ाए। 
Gal 1:5  उस की स्‍तुति और बड़ाई। युगानुयुग होती रहे। आमीन।
Gal 1:6  मुझे आश्‍चर्य होता है, कि जिस ने तुम्हें मसीह के अनुग्रह से बुलाया उस से तुम इतनी जल्दी फिर कर और ही प्रकार के सुसमाचार की ओर झुकने लगे। 
Gal 1:7  परन्‍तु वह दूसरा सुसमाचार है ही नहीं: पर बात यह है, कि कितने ऐसे हैं, जो तुम्हें घबरा देते, और मसीह के सुसमाचार को बिगाड़ना चाहते हैं। 
Gal 1:8  परन्‍तु यदि हम या स्‍वर्ग से कोई दूत भी उस सुसमाचार को छोड़ जो हम ने तुम को सुनाया है, कोई और सुसमाचार तुम्हें सुनाए, तो श्रापित हो। 
Gal 1:9  जैसा हम पहिले कह चुके हैं, वैसा ही मैं अब फिर कहता हूं, कि उस सुसमाचार को छोड़ जिसे तुम ने ग्रहण किया है, यदि कोई और सुसमाचार सुनाता है, तो श्रापित हो। अब मैं क्‍या मनुष्यों को मानता हूं या परमेश्वर को? क्‍या मैं मनुष्यों को प्रसन्न करना चाहता हूं? 
Gal 1:10  यदि मैं अब तक मनुष्यों को प्रसन्न करता रहता, तो मसीह का दास न होता।
Gal 1:11  हे भाइयो, मैं तुम्हें जताए देता हूं, कि जो सुसमाचार मैं ने सुनाया है, वह मनुष्य का सा नहीं। 
Gal 1:12 क्‍योंकि वह मुझे मनुष्य की ओर से नहीं पहुंचा, और न मुझे सिखाया गया, पर यीशु मसीह के प्रकाश से मिला।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक १०-१२ 
  • गलतियों १

शुक्रवार, 21 सितंबर 2012

मार्गनिर्देशक


   क्या कभी आपने इस बात पर विचार किया कि वायुयान चालक एक स्थान से दूसरे स्थान तक वायुयान को कैसे ले जा पाते हैं? यह सम्भव होता है एक विमान दिशानिर्देशन और संचालन पद्वति के द्वारा जिसका अविषकार १९५० में हुआ था, और जो आज भी वायुयानों को उनके गन्तव्य स्थानों तक पहुँचाने में कारगर है। इस पद्वति के अन्तर्गत वायुयान चालक अपने सूचक यंत्र पर एक दिशा निर्धारित करता है, और यदि वायुयान उस निर्धारित दिशा से इधर-उधर होता है तो वह यन्त्र चालक को दिखा देता है कि वायुयान मार्ग से हट रहा है, जिससे चालक यान को पुनः सही दिशा में ला सके।

   यशायाह भविष्यद्वक्ता के दिनों में इस्त्राएल को एक सही दिशा सूचक की आवश्यक्ता थी, और परमेश्वर ने उनके लिए वह मार्गदर्शक बनना चाहा। परन्तु परमेश्वर की चेतावनियों के बावजुद इस्त्राएल ने परमेश्वर की बजाए मिस्त्र के साथ संधि कर ली (यशायाह ३०:१-२)। लेकिन परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में इस्त्राएल से वायदा किया कि एक दिन वह ही उनका मार्गनिर्देशक होगा: "और जब कभी तुम दाहिनी वा बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो" (यशायाह ३०:२१)।

   आज प्रत्येक मसीही विश्वासी को परमेश्वर ने एक आंतरिक मार्गनिर्देशक प्रदान किया है जो उसके अन्दर रहकर उसका मार्गदर्शन करता रहता है। प्रभु यीशु ने अपनी पवित्र आत्मा अपने प्रत्येक विश्वासी को उसके मार्गदर्शन के लिए दीया है: "परन्‍तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा..." (यूहन्ना १६:१३)। यदि आपको अपने जीवन की दिशा निर्धारित करने के लिए मार्गदर्शन चाहिए तो इधर-उधर ताकने की आवश्यक्ता नहीं है, परमेश्वर द्वारा प्रदित मार्गनिर्देशक पर विश्वास रखें और उससे दिशा निर्देशन लें; वह आपको सदा सही दिशा ही दिखाएगा। - सी. पी. हिया


परमेश्वर का पवित्र आत्मा प्रत्येक मसीही विश्वासी का सच्चा मार्गदर्शक है।

परन्‍तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्‍योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्‍तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आने वाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना १६:१३

बाइबल पाठ: यशायाह ३०:१५-२२
Isa 30:15  प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहने और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया, 
Isa 30:16  तुम ने कहा, नहीं, हम तो घोड़ों पर चढ़कर भागेंगे, इसलिये तुम भागोगे; और यह भी कहा कि हम तेज सवारी पर चलेंगे, सो तुम्हारा पीछा करने वाले उस से भी तेज होंगे। 
Isa 30:17  एक ही की धमकी से एक हजार भागेंगे, और पांच की धमकी से तुम ऐसा भागोगे कि अन्त में तुम पहाड़ की चोटी के डण्डे वा टीले के ऊपर की ध्वजा के समान रह जाओगे जो चिन्ह के लिये गाड़े जाते हैं। 
Isa 30:18  तौभी यहोवा इसलिये विलम्ब करता है कि तुम पर अनुग्रह करे, और इसलिये ऊंचे उठेगा कि तुम पर दया करे। क्योंकि यहोवा न्यायी परमेश्वर है; क्या ही धन्य हैं वे जो उस पर आशा लगाए रहते हैं।
Isa 30:19  हे सिय्योन के लोगों तुम यरूशलेम में बसे रहो; तुम फिर कभी न रोओगे, वह तुम्हारी दोहाई सुनते ही तुम पर निश्चय अनुग्रह करेगा: वह सुनते ही तुम्हारी मानेगा। 
Isa 30:20  और चाहे प्रभु तुम्हें विपत्ति की रोटी और दु:ख का जल भी दे, तौभी तुम्हारे उपदेशक फिर न छिपें, और तुम अपनी आंखों से अपने उपदेशकों को देखते रहोगे। 
Isa 30:21  और जब कभी तुम दाहिनी वा बाईं ओर मुड़ने लगो, तब तुम्हारे पीछे से यह वचन तुम्हारे कानों में पड़ेगा, मार्ग यही है, इसी पर चलो। 
Isa 30:22  तब तुम वह चान्दी जिस से तुम्हारी खुदी हुई मूर्त्तियां गढ़ी हैं, और वह सोना जिस से तुम्हारी ढली हुई मूर्त्तियां आभूषित हैं, अशुद्ध करोगे। तुम उनको मैले कुचैले वस्त्र की नाईं फेंक दोगे और कहोगे, दूर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक ७-९ 
  • २ कुरिन्थियों १३

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

दृढ़ भक्ति


   मैग्गी को टेलिविज़न में कोई रुचि नहीं है; उसकी अपेक्षा उसे खिड़की से बाहर देखना ज़्यादा पसन्द है। ना ही उसे पढ़ने का शौक है, उसे किताबें चबाते हुए तो देखा गया है, पर पढ़ते हुए कभी नहीं। किंतु फिर भी जब मैं और मेरे पति टेलिविज़न देखने बैठते हैं या बैठकर कुछ पढ़ रहे होते हैं तो मैग्गी भी साथ ही रहती है। जो हम कर रहे हैं वह चाहे उसे बिलकुल पसन्द नहीं है, लेकिन बस हमारे साथ और आस-पास रहना उसे अच्छा लगता है, इसलिए वह पास बनी रहती है। मैग्गी हमारी पालतु कुतिया है और उसे जीवन में एक ही बात प्रीय है - हमारे साथ रहना, चाहे हमारी बातें उसे समझ आएं या ना आएं, उसे पसन्द हों या ना हों। अपने स्वामी के प्रति दृढ़ वफादारी - हर बात में और हर परिस्थिति में एक पालतु कुत्ते का गुण है और मैग्गी में भी यही पाया जाता है।

   परमेश्वर भी हमसे, जो उसकी सन्तान हैं एक दृढ़ वफादारी और भक्ति की आशा रखता है। यदि हम वास्तव में परमेश्वर को समर्पित हैं, उसके भक्त हैं, तो हम भी हर समय उसके साथ रहना चाहेंगे, चाहे उसकी बातें हमारी समझ में आएं या ना आएं। जब वह हमसे नाराज़ प्रतीत हो (भजन ८८:१४); जब लगे कि वह सो गया है (भजन ४४:२३) या जब दुष्ट लोग फलते-फूलते दिखाई दें तब हो सकता है कि हम उससे सवाल करें कि "ऐसा क्यों प्रभु?" लेकिन मन में प्रश्न होने के बावजूद भी जब हम उसके प्रति वफादारी और भक्ति में दृढ़ बने रहते हैं तो उसकी उपस्थिति में हमें आनन्द की भरपूरी मिलती है (भजन १६:११)।

   प्रभु यीशु जानते थे कि हमारे पास कई प्रश्न होंगे। उनके लिए हमें तैयार करने के लिए उसने कहा कि हम उसके प्रेम में बने रहें (युहन्ना १५:११)। चाहे परमेश्वर के मार्ग हमारी समझ से परे हों, किंतु उसका प्रेम सदा ही विश्वसनीय रहता है। इसलिए उस प्रेम में होकर उसके प्रति अपनी भक्ति में दृढ़ रहें। उसका साथ ही सबसे भला साथ है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


जब हम प्रभु यीशु के प्रेम में बने रहते हैं तो आनन्द की भरपूरी में भी बने रहते हैं।

तू मुझे जीवन का रास्ता दिखाएगा; तेरे निकट आनन्द की भरपूरी है, तेरे दाहिने हाथ में सुख सर्वदा बना रहता है। - भजन १६:११

बाइबल पाठ: यूहन्ना १५:९-१७
Joh 15:9  जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो। 
Joh 15:10  यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं। 
Joh 15:11 मैं ने ये बातें तुम से इसलिये कही हैं, कि मेरा आनन्‍द तुम में बना रहे, और तुम्हारा आनन्‍द पूरा हो जाए। 
Joh 15:12  मेरी आज्ञा यह है, कि जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो। 
Joh 15:13  इस से बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे। 
Joh 15:14  जो कुछ मैं तुम्हें आज्ञा देता हूं, यदि उसे करो, तो तुम मेरे मित्र हो। 
Joh 15:15 अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्‍योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्‍वामी क्‍या करता है: परन्‍तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्‍योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। 
Joh 15:16 तुम ने मुझे नहीं चुना परन्‍तु मैं ने तुम्हें चुना है और तुम्हें ठहराया ताकि तुम जाकर फल लाओ, और तुम्हारा फल बना रहे, कि तुम मेरे नाम से जो कुछ पिता से मांगो, वह तुम्हें दे। 
Joh 15:17  इन बातें की आज्ञा मैं तुम्हें इसलिये देता हूं, कि तुम एक दूसरे से प्रेम रखो।

एक साल में बाइबल: 
  • सभोपदेशक ४-६ 
  • २ कुरिन्थियों १२

बुधवार, 19 सितंबर 2012

प्रतीक्षा


   जब हमारे बच्चे छोटे थे, तब हम एडवेंट को मनाते थे - यह क्रिसमस से चार इतवार पहले से लेकर क्रिसमस तक मनाया जाने वाला वह समय होता था जिसमें पत्तों से भरी डालियों और फूलों से एक गोलाकार माला बना कर सजाई जाती और रोज़ शाम को मोमबत्तियां जलाई जाती थीं तथा अपने मनों को क्रिसमस के लिए तैयार करने के लिए हम लोग परमेश्वर के वचन बाइबल से प्रभु यीशु के जन्मे से संबंधित खंड पढ़ते और स्तुति गीत गाते। यह एक विशेष समय होता था।

   लेकिन एडवेंट का महत्व इससे कहीं अधीक होता है। जब चौथी इसवीं में इसाई समाज ने इसे मनाना आरंभ किया था, तो वे लोग इसे केवल प्रभु यीशु के जन्म का त्यौहार मनाने की तैयारी ही नहीं मानते थे, परन्तु साथ ही प्रभु यीशु के दूसरे आगमन की आशा को भी स्मरण करते थे। प्रभु यीशु के पुनःआगमन की निश्चितता को स्मरण करके वे उसमें आशा और आनन्द पाते थे।

   लूका रचित सुसमाचार परमेश्वर की उस महिमा के तेज के बारे में बताता है जो प्रभु यीशु के जन्म के समाचार के उन तक पहुंचने के समय उनके चारों ओर चमका था (लूका २:९)। लूका रचित सुसमाचार में ही हम प्रभु यीशु के बड़ी सामर्थ और महिमा के साथ पुनःआगमन का वायदा भी पाते हैं। प्रभु यीशु के पहले और दूसरे आगमन की घटनाओं में उनके पृथ्वी पर आने का उद्देश्य निहित है - संसार के लिए पापों से मुक्ति और उद्धार का मार्ग देना तथा संसार के अन्त और न्याय के समय में अपने विश्वासियों को अपने साथ निवास के लिए स्वर्ग में अनन्त काल के लिए लेकर जाना।

   लैटिन भाषा में एडवेंट शब्द का अर्थ होता है आगमन। क्रिसमस से पहले के यह सप्ताह पश्चाताप और आशा के लिए एक अच्छा समय हैं जब हम संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के बैतलहम में पहले आगमन का त्यौहार मनाते हैं और उसके अपनी महिमा में दूसरे आगमन की प्रतीक्षा करते हैं।

   संसार का उद्धारकर्ता मसीह यीशु आ चुका है! संसार का न्यायी मसीह यीशु आने वाला है! क्या आप उसके आगमन के लिए तैयार हैं? - डेविड मैक्कैसलैंड


संसार का उद्धारकर्ता मसीह यीशु आ चुका है! संसार का न्यायी मसीह यीशु आने वाला है!

और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। - लूका २:९

बाइबल पाठ: लूका२:८-१२; २१:२५-२८
Luk 2:8  और उस देश में कितने गड़ेरिये थे, जो रात को मैदान में रहकर अपने झुण्‍ड का पहरा देते थे। 
Luk 2:9   और प्रभु का एक दूत उन के पास आ खड़ा हुआ; और प्रभु का तेज उन के चारों ओर चमका, और वे बहुत डर गए। 
Luk 2:10 तब स्‍वर्गदूत ने उन से कहा, मत डरो; क्‍योंकि देखो मैं तुम्हें बड़े आनन्‍द का सुसमाचार सुनाता हूं जो सब लोगों के लिये होगा। 
Luk 2:11  कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिये एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है। 
Luk 2:12  और इस का तुम्हारे लिये यह पता है, कि तुम एक बालक को कपड़े मे लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे। 

Luk 21:25 और सूरज और चान्‍द और तारों में चिन्‍ह दिखाई देंगें, और पृथ्वी पर, देश देश के लोगों को संकट होगा; क्‍योंकि वे समुद्र के गरजने और लहरों के कोलाहल से घबरा जाएंगे। 
Luk 21:26 और भय के कारण और संसार पर आने वाली घटनाओं की बांट देखते देखते लोगों के जी में जी न रहेगा क्‍योंकि आकाश की शक्तियां हिलाई जाएंगी। 
Luk 21:27  तब वे मनुष्य के पुत्र को सामर्थ और बड़ी महिमा के साथ बादल पर आते देखेंगे। 
Luk 21:28 जब ये बातें होने लगें, तो सीधे होकर अपने सिर ऊपर उठाना; क्‍योंकि तुम्हारा छुटकारा निकट होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल ३०-३२ 
  • १ पतरस ४

मंगलवार, 18 सितंबर 2012

समझ से बाहर


   अमेरिका के मध्य-पश्चिम इलाके के जंगलों और बहते पानी के सोतों के आस-पास रहने और बड़े होने से उस इलाके के प्राकृतिक सौन्दर्य तथा वन्य-जीवन से मैं सदा ही बहुत प्रभावित रहा हूँ। परन्तु हाल ही में कैलिफोर्निया के समुद्र-तट पर अपनी एक यात्रा में बड़े बड़े समुद्री जीव-जन्तुओं के दृश्यों और समुद्र में उनकी अटखेलियों तथा कैलिफोर्निया के अति विशाल रेडवुड पेड़ों के जंगल को देखकर मैं मन्त्र-मुग्ध सा रह गया। यह सब, जो परमेश्वर द्वारा रचि गयी प्रकृति के लाखों जीव-जन्तुओं और उनके आपसी ताल-मेल के साथ रहने और बढ़ने के कुछ नमूने ही हैं, हमें परमेश्वर की बुद्धि और समझ-बूझ का आभास देते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के अनुसार, प्रकृति की अनुपम जटिल विविधता और सौन्दर्यता का उद्देश्य केवल विसमय उत्पन्न करना ही नहीं है। प्रकृति के रहस्य हमें परमेश्वर के कार्य करने के तरीकों को भी दिखाते और समझाते हैं और कई बार किसी किसी के जीवन में बयान और समझ से बाहर तकलीफों और परेशानियों को भी आ लेने देने को समझने में सहायता करते है।

   इसका एक उदाहरण हम अय्युब की गाथा में पाते हैं। जब अय्युब को अपनी उन तकलीफों का सामना करना पड़ रहा था तब वह नहीं जानता था कि परमेश्वर उसका और उसके विश्वास का इतना आदर करता है कि उसने शैतान को उसे और परमेश्वर में उसके विश्वास को तकलीफों और नुकसानों के द्वारा परखने की अनुमति दी है, क्योंकि परमेश्वर जानता था कि अय्युब उन सब में खरा उतरेगा और उसका विश्वास डगमगाएगा नहीं।

   अय्युब की गाथा के अध्ययन के बाद जो निष्कर्ष निकल कर सामने आता है वह यह है कि वह सृष्टिकर्ता जिसके पास प्रकृति के अचरज बनाने की समझ-बूझ है, उसके पास हमारी अपनी समझ से बाहर तकलीफों को हमारे जीवन में आने देने के उद्देश्यों और कारणों की भी समझ है और हम उसपर इन सब बातों में भी पूरा पूरा भरोसा रख सकते हैं।

   अपनी परीक्षा के अंत में, अय्युब अपनी स्वधार्मिकता के छल को और परमेश्वर की पवित्रता को और भी बेहत्र समझने पाता है और परमेश्वर के सामने नतमस्तक, अय्युब कहता है: "मैं जानता हूँ कि तू सब कुछ कर सकता है, और तेरी युक्तियों में से कोई रुक नहीं सकती। मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ" - (अय्युब ४२:२,५,६)। 

   समझ से बाहर अपनी परिस्थितियों और क्लेषों में भी अय्युब के समान ही हम भी अपने परमेश्वर में ऐसा ही विश्वास रख सकते हैं; क्योंकि चाहे जो कुछ भी क्यों ना हो जाए, वह जो करेगा हमारे भले ही के लिए करेगा। - मार्ट डी हॉन


प्रकृति और जीवन के अचरज प्रकृति और जीवन के सृष्टिकर्ता परमेश्वर को जानने और उसकी आराधना करने को प्रेरित करते हैं।

मैं कानों से तेरा समाचार सुना था, परन्तु अब मेरी आंखें तुझे देखती हैं; इसलिये मुझे अपने ऊपर घृणा आती है, और मैं धूलि और राख में पश्चात्ताप करता हूँ। - (अय्युब ४२:५-६)

बाइबल पाठ: अय्युब ३६:२२-३३
Job 36:22  देख, ईश्वर अपने सामर्ध्य से बड़े बड़े काम करता है, उसके समान शिक्षक कौन है? 
Job 36:23  किस ने उसके चलने का मार्ग ठहराया है? और कौन उस से कह सकता है, कि तू ने अनुचित काम किया है? 
Job 36:24  उसके कामों की महिमा और प्रशंसा करने को स्मरण रख, जिसकी प्रशंसा का गीत मनुष्य गाते चले आए हैं। 
Job 36:25  सब मनुष्य उसको ध्यान से देखते आए हैं, और मनुष्य उसे दूर दूर से देखता है। 
Job 36:26  देख, ईश्वर महान और हमारे ज्ञान से कहीं परे है, और उसके वर्ष की गिनती अनन्त है। 
Job 36:27  क्योंकि वह तो जल की बूंदें ऊपर को खींच लेता है वे कुहरे से मेंह होकर टपकती हैं, 
Job 36:28  वे ऊंचे ऊंचे बादल उंडेलते हैं और मनुष्यों के ऊपर बहुतायत से बरसाते हैं। 
Job 36:29  फिर क्या कोई बादलों का फैलना और उसके मणडल में का गरजना समझ सकता है? 
Job 36:30  देख, वह अपने उजियाले को चहुँ ओर फैलाता है, और समुद्र की थाह को ढांपता है। 
Job 36:31  क्योंकि वह देश देश के लोगों का न्याय इन्हीं से करता है, और भोजन-वस्तुएं बहुतायत से देता है। 
Job 36:32  वह बिजली को अपने हाथ में लेकर उसे आज्ञा देता है कि दुश्मन पर गिरे। 
Job 36:33  इसकी कड़क उसी का समाचार देती है पशु भी प्रगट करते हैं कि अन्धड़ चढ़ा आता है।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन ३०-३१ 
  • २ कुरिन्थियों ११:१-१५

सोमवार, 17 सितंबर 2012

प्रोत्साहन


   मैं अपने पोते के आठवीं कक्षा के फुटबाल खेल को देखने गया हुआ था। खेल के समय रेफरी ने पेनल्टी की सूचना दी और खेल को रोका। खेलने वालों ने कुछ गलती करी थी और रेफरी को उसके लिए खेल रोकना पड़ा। खेल का आंखों देखा हाल वर्णन करने वाले ने घोषणा करी, ’खेल मैदान पर पेनलटी दिए जाने का समय है और गलती करने वाले इसके भागी हैं।" मैंने मन में सोचा, आज ऐसे ही कई चर्चों में भी उनकी गतिविधियां रोक कर उन्हें सुधारे जाने की आवश्यक्ता है।

   ऐसा नहीं है कि चर्च की अगुवाई करने वाले पास्टर सिद्ध होते हैं, उन से कोई गलती नहीं होती। यदि हम ऐसे किसी चर्च की तलाश में हैं तो वह कहीं नहीं मिलेगा। परमेश्वर की बुलाहट है कि हम अपने आत्मिक जीवन के अगुवों का आदर करें, विशेषकर उनका जो हमें वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं (१ तिमुथियुस १:५)। मेरे विचार से इस संसार का सबसे कठिन काम पास्टर का काम है। हम एक जटिल, द्रुत गति से चलने वाले और कृत्रिमता से भरे संसार में रहते हैं, और पास्टरों के लिए हमारी अपेक्षाएं भी बहुत ऊँची तथा असंभव होती हैं; जो हम अपने जीवन में सोच नहीं सकते उसे पास्टर के जीवन में देखना चाहते हैं।

   इसलिए हमें एक परिवर्तन लाने की आवश्यक्ता है। केवल पास्टरों से ऊँची ऊँची उम्मीदें रखने की बजाए, हम स्वयं ही उच्च स्तर के चर्च सदस्य क्यों ना बन जाएं और अपने पास्टरों का धन्यवाद और प्रोत्साहन के शब्दों द्वारा आदर करना आरंभ कर दें। हमारा थोड़ा सा प्रयास हमारे पास्टरों को आनन्द और उत्साह के साथ हमारे बीच में सेवकाई करने के लिए उत्तेजित करेगा, उन से होने वाली गलतियां भी कम हो जाएंगीं और हम भी उनकी सेवकाई से और अधिक लाभान्वित हो सकेंगे। प्रत्येक सदस्य द्वारा व्यक्तिगत रवैये में किए गए सुधार का एक छोटा सा प्रयास समस्त मण्डली में बड़े प्रतिफल लाएगा। - जो स्टोवैल


अपने पास्टर के केवल आलोचक ही मत बनें, वरन साथ ही उनके सहपरिश्रमी और उन्हें प्रोत्साहित करने वाले भी बनें।

जो प्राचीन अच्‍छा प्रबन्‍ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं। - १ तिमुथियुस ५:१७

बाइबल पाठ: १ तिमुथियुस ५:१७-२५
1Ti 5:17 जो प्राचीन अच्‍छा प्रबन्‍ध करते हैं, विशेष करके वे जो वचन सुनाने और सिखाने में परिश्रम करते हैं, दो गुने आदर के योग्य समझे जाएं। 
1Ti 5:18 क्‍योंकि पवित्र शास्‍त्र कहता है, कि दांवने वाले बैल का मुंह न बान्‍धना, क्‍योंकि मजदूर अपनी मजदूरी का हकदार है। 
1Ti 5:19  कोई दोष किसी प्राचीन पर लगाया जाए तो बिना दो या तीन गवाहों के उस को न सुन। 
1Ti 5:20  पाप करने वालों को सब के साम्हने समझा दे, ताकि और लोग भी डरें। 
1Ti 5:21 परमेश्वर, और मसीह यीशु, और चुने हुए स्‍वर्गदूतों को उपस्थित जानकर मैं तुझे चितौनी देता हूं कि तू मन खोलकर इन बातों को माना कर, और कोई काम पक्षपात से न कर। 
1Ti 5:22  किसी पर शीघ्र हाथ न रखना और दूसरों के पापों में भागी न होना: अपने आप को पवित्र बनाए रख। 
1Ti 5:23  भविष्य में केवल जल ही का पीने वाला न रह, पर अपने पेट के और अपने बार बार बीमार होने के कारण थोड़ा थोड़ा दाखरस भी काम में लाया कर। 
1Ti 5:24  कितने मनुष्यों के पाप प्रगट हो जाते हैं, और न्याय के लिये पहिले से पहुंच जाते हैं, पर कितनों के पीछे से आते हैं। 
1Ti 5:25  वैसे ही कितने भले काम भी प्रगट होते हैं, और जो ऐसे नहीं होते, वे भी छिप नहीं सकते।

एक साल में बाइबल: 
  • नीतिवचन २७-२९ 
  • २ कुरिन्थियों १०