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बुधवार, 27 अगस्त 2014

नया सामान्य


   एक पास्टर ने, जिसने शारीरिक एवं मानसिक रीति से घायल होने वालों को सांत्वना और शान्ति प्रदान करने का प्रशिक्षण लिया था, टिप्पणी करी कि घायल लोगों के लिए सबसे बड़ी चुनौती उस समय की चोट या हानि का दुख नहीं होता। इसकी बजाए, उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती होती है आगे आने वाले जीवन के साथ ताल-मेल बैठाना। जो पहले उनके लिए सामान्य होता था, वह अब नहीं रहा, इसलिए जो उनकी सहायता कर रहे हैं उन्हें उन आहत व्यक्तियों को एक नया सामान्य बैठाने में सहायक होना पड़ता है।

   हो सकता है कि यह नया सामान्य वहाँ हो जहाँ अब वे पहले के समान स्वस्थ एवं हृष्ट-पुष्ट नहीं रह सकते, या किसी निकट संबंधी का साथ जाता रहा हो, या किसी सन्तोषजनक नौकरी से हाथ धोना पड़ा हो, या किसी प्रीय जन की मृत्यु का विछोह हो, इत्यादि। ऐसी हानि के दुख की गंभीरता लोगों को पहले के जीवन से एक अलग ही प्रकार का जीवन व्यतीत करने पर मजबूर करती है, चाहे वह नया जीवन जीना उन्हें कितना भी नापसन्द क्यों ना हो।

   जिस व्यक्ति के समक्ष यह नया सामान्य आता है, उसके लिए यह समझ बैठना कि कोई भी उसकी परिस्थिति भली-भाँति नहीं समझ सकता, साधारण बात है। लेकिन यह सत्य नहीं है; प्रभु यीशु के हम मनुष्यों के साथ आकर जीवन व्यतीत करने के उद्देश्यों में से एक था हमारे जीवन और दुखों को व्यक्तिगत अनुभवों से जानना, जो उसकी वर्तमान सेवकाई में सहायक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इब्रानियों की पत्री का लेखक प्रभु यीशु के विषय में लिखता है: "क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला" (इब्रानियों 4:15)।

   हमारे उद्धारकर्ता प्रभु यीशु ने पवित्रता का एक सिद्ध जीवन जीया, लेकिन वह पाप में पड़े संसार के लोगों के दुखों को भी जानता था। उसने हम लोगों के समान ही दुख उठाया, तिरिस्कृत हुआ, पीड़ा सही। इसलिए आज जब मैं और आप ऐसे अन्धकार भरे समयों से होकर निकलते हैं तो वह हमें सान्तवना और अपनी शान्ति देने तथा एक नये सामान्य को बनाने में सहायता करने के लिए तैयार एवं उपलब्ध है। - बिल क्राउडर


दुख के सागर में प्रभु यीशु आशा की स्थिर चट्टान है।

क्योंकि जब उसने परीक्षा की दशा में दुख उठाया, तो वह उन की भी सहायता कर सकता है, जिन की परीक्षा होती है। - इब्रानियों 2:18 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 4:9-16
Hebrews 4:9 सो जान लो कि परमेश्वर के लोगों के लिये सब्त का विश्राम बाकी है। 
Hebrews 4:10 क्योंकि जिसने उसके विश्राम में प्रवेश किया है, उसने भी परमेश्वर की नाईं अपने कामों को पूरा कर के विश्राम किया है। 
Hebrews 4:11 सो हम उस विश्राम में प्रवेश करने का प्रयत्न करें, ऐसा न हो, कि कोई जन उन की नाईं आज्ञा न मान कर गिर पड़े। 
Hebrews 4:12 क्योंकि परमेश्वर का वचन जीवित, और प्रबल, और हर एक दोधारी तलवार से भी बहुत चोखा है, और जीव, और आत्मा को, और गांठ गांठ, और गूदे गूदे को अलग कर के, वार पार छेदता है; और मन की भावनाओं और विचारों को जांचता है। 
Hebrews 4:13 और सृष्‍टि की कोई वस्तु उस से छिपी नहीं है वरन जिस से हमें काम है, उस की आंखों के साम्हने सब वस्तुएं खुली और बेपरदा हैं।
Hebrews 4:14 सो जब हमारा ऐसा बड़ा महायाजक है, जो स्‍वर्गों से हो कर गया है, अर्थात परमेश्वर का पुत्र यीशु; तो आओ, हम अपने अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहे। 
Hebrews 4:15 क्योंकि हमारा ऐसा महायाजक नहीं, जो हमारी निर्बलताओं में हमारे साथ दुखी न हो सके; वरन वह सब बातों में हमारी नाईं परखा तो गया, तौभी निष्‍पाप निकला। 
Hebrews 4:16 इसलिये आओ, हम अनुग्रह के सिंहासन के निकट हियाव बान्‍धकर चलें, कि हम पर दया हो, और वह अनुग्रह पाएं, जो आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-32


मंगलवार, 26 अगस्त 2014

उपलब्ध


   मेरे पिता को पेपर मिल से उनकी सेवा-निवृति के समय उपहार में एक बाइबल दी गई थी। वह बाइबल देवदार की लकड़ी से बने एक विशेष डिब्बे में रखी गई थी जिस पर छापा हुआ था "पवित्र बाइबल"। उस समय मेरी उम्र 12 वर्ष की थी, और उस बाइबल को लेकर मेरे अन्दर कौतहूल रहता था। मुझे लगता था कि उस पर लिखे "पवित्र" से तात्पर्य है कि मैं उसके योग्य नहीं हूँ। लेकिन फिर भी अपनी जिज्ञासा शान्त करने के लिए मैंने उस डिब्बे में झांक कर, उस बाइबल को खोल कर उसे देखा। बाइबल के मध्य में क्रूस पर लटकाए हुए यीशु की तस्वीर थी जिसके साथ यूहन्ना 3:16 के शब्द लिखे हुए थे। तस्वीर के ऊपर लाल रंग की पारदर्शी पन्नी लगी हुई थी, जो मेरी समझ के अनुसार बहे हुए रक्त के कारण उसकी मृत्यु को दर्शाती थी।

   कभी कभी, जब और कोई ध्यान नहीं दे रहा होता था, तब मैं धीरे से उस बाइबल के डिब्बे को पुस्तकों की ताक से निकाल कर, बाइबल को खोलकर देखती, क्रूस पर लटके हुए यीशु पर विचार करती कि यह व्यक्ति कौन है और ऐसे क्यों मरा और सोचती कि क्या उसका प्रेम मेरे लिए भी था या मेरे जैसे लोग, जिनके जीवन में पाप है, उसके प्रेम की सीमा से परे थे?

   अनेकों वर्ष पश्चात मैंने सन्देश सुना कि कैसे परमेश्वर ने प्रभु यीशु में होकर अपने से मेल मिलाप करने और अपने प्रेम को उपलब्ध कराने के लिए प्रभु यीशु को बलिदान होने के लिए भेजा। परमेश्वर के वचन बाइबल में रोमियों 5:1-2 में लिखा है: "सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।" तब मैंने भी प्रभु यीशु पर विश्वास किया, उससे अपने पापों की क्षमा माँगी, अपना जीवन उसे समर्पित किया और अनन्त काल के लिए उद्धार प्राप्त किया।

   हम सब के लिए यह बड़े धन्यवाद कि बात है कि कोई भी मनुष्य परमेश्वर, उसके प्रेम और उसके वचन बाइबल की सीमा से बाहर नहीं है; ये अद्भुत खज़ाने संसार के प्रत्येक व्यक्ति के लिए, वो चाहे कोई भी और कैसा भी क्यों ना हो, सेंत-मेंत उपलब्ध हैं। आज, समय रहते, परमेश्वर से पापों की क्षमा और उद्धार प्राप्त कर लीजिए - ये मेरे और आपके जैसे पापी लोगों के लिए ही हैं। ऐनी सेटास


बाइबल हम मनुष्यों के लिए परमेश्वर का प्रेम-पत्र है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-8
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29


सोमवार, 25 अगस्त 2014

संचालक


   वायुयान की यात्रा का सबसे अधिक जोखिम भरा समय होता है वायुयान को सुरक्षित धरती पर उतारने का। जैसे जैसे वायुयान उतरने के लिए धरती के समीप आता जाता है, उसके आस-पास अन्य वायुयानों की संख्या बढ़ती जाती है, उसके उड़ने की सामान्य ऊँचाई 30,000 फीट के मौसम की अपेक्षा नीचे का मौसम अधिक खराब हो सकता है, तथा जहाँ उसे उतरना है उस हवाई अड्डे की हवाई पट्टी पर अन्य वायुयान हो सकते हैं। इसलिए वायुयान के चालक हवाई अड्डे पर रहने वाले वायुयान संचालकों पर निर्भर रहते हैं कि उन्हें सुरक्षित उतार लाएं। यदि वे संचालक ना हों तो उन वायुयानों का सुरक्षित उतर पाना संभव नहीं है और अव्यवस्था तथा हादसों का होना अवश्यंभावी है। इसलिए ज़रा उस समय की घबराहट की कल्पना कीजिए जब यात्रियों से भरे एक वायुयान के चालक ने यान उतारते समय हवाई अड्डे पर संचालक से संपर्क साधने का प्रयास किया और उसे कोई उत्तर नहीं मिला। अन्ततः मालुम पड़ा कि वह संचालक उपस्थित तो था परन्तु सो गया था, जिससे उस वायुयान और उसके यात्रियों की जान बहुत जोखिम में आ गई थी। अच्छा समाचार यह है कि वह वायुयान बिना किसी प्रकार के कोई नुकसान के सुरक्षित उतारा जा सका।

   हम मसीही विश्वासियों के लिए इससे भी बेहतर और अच्छी खबर यह है कि हमारा परमेश्वर प्रभु यीशु, जो समस्त सृष्टि की प्रत्येक बात को संचालित करता है, वह ना कभी ऊँघता है और ना सोता है। अपने स्वर्गीय स्थान से वह संसार के प्रत्येक जन एवं उनकी हर एक बात, हर एक परिस्थिति पर नज़र बनाए रखता है; हमारे साथ क्या हो रहा है और क्या होने जा रहा है, उससे कुछ छुपा नहीं है। इसीलिए परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने कहा है: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा" (भजन 121:2-3)।

   आप परमेश्वर प्रभु यीशु पर भरोसा रख सकते हैं - वह आपके जीवन की हर बात, हर परिस्थिति, हर घटना, हर आवश्यकता को भली-भांति जानता है। वह ही आपके जीवन की सभी बातों को बिना रुके या थके संचालित करता रहता है जिससे सब बातें मिलकर आपके लिए भलाई उत्पन्न करें तथा परमेश्वर कि महिमा होने पाए। अपने जीवन को उसे पूर्णतयः समर्पित कर दें, तथा निश्चिंत होकर अपने जीवन का संचालन उसके हाथों में छोड़ दीजिए। - जो स्टोवैल


क्योंकि हमारा प्रभु यीशु कभी ऊँघता या सोता नहीं, इसलिए हम निश्चिंत रह सकते हैं।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: भजन 121
Psalms 121:1 मैं अपनी आंखें पर्वतों की ओर लगाऊंगा। मुझे सहायता कहां से मिलेगी? 
Psalms 121:2 मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है।
Psalms 121:3 वह तेरे पांव को टलने न देगा, तेरा रक्षक कभी न ऊंघेगा। 
Psalms 121:4 सुन, इस्राएल का रक्षक, न ऊंघेगा और न सोएगा।
Psalms 121:5 यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है। 
Psalms 121:6 न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी।
Psalms 121:7 यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा। 
Psalms 121:8 यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से ले कर सदा तक करता रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26


रविवार, 24 अगस्त 2014

जोखिम


   संसार भर में जब सन 2010 में आर्थिक संकट गहराता जा रहा था, विश्व में अनेक स्थानों पर कारोबार करने वाले एक बैंकिंग व्यवसायसंघ के उच्च प्रबन्धकों की, ग्राहकों को धोखा देने के लिए जाँच करी गई। वे लोग यह जानते हुए भी कि उन ग्राहकों के निवेश अवश्य ही असफल हो जाएंगे, ग्राहकों को यह आश्वासन देकर धोखा देते रहे कि उनके निवेश किए हुए धन से उन्हें बहुत पैसा वापस मिलने वाला है; और जब वह निवेश विफल हुआ तब उन निवेश करने वाले ग्राहकों के पास कुछ नहीं बचा।

   धोखा देना कोई नई बात नहीं है। प्रभु यीशु ने शैतान के लिए कहा, "...वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है" (यूहन्ना 8:44)। हमारी आत्माओं का शत्रु, शैतान हमें फुसलाना चाहता है कि वर्तमान के लिए ही जीएं जबकि वह जानता है कि इसका परिणाम अनन्त मृत्यु एवं कभी ना पल्टी जा सकने वाली हानि है।

   इसके विपरीत, प्रभु यीशु ने कभी अपने चेलों से सांसारिक समृद्धि से भरा हुआ सरल जीवन मिलने का कोई वायदा नहीं किया, वरन उनसे कहा कि वे आत्म-बलिदान का जीवन जीने और उसके साथ तथा उसके नाम के लिए दुख उठाने को तैयार रहें। चेलों को यह समझाने के बाद कि वह मारा जाएगा और फिर तीसरे दिन मृतकों में से जी उठेगा, प्रभु यीशु ने उनसे कहा, "यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा" (लूका 9:23-24)।

   आज हर बात के लिए दो आवाज़ें हैं जो हमसे कहती हैं कि अपने जीवन का निवेश कहाँ करें, एक प्रभु यीशु की और दूसरी शैतान की। धारणाओं, प्रथाओं, सुनी-सुनाई बातों, प्रमाण रहित दावों या अन्ध-विश्वास के अनुसार नहीं वरन भली भाँति देख परख कर तथा सभी दावों सच्चाई की जाँच कर के ही निर्णय लें तथा अपने जीवन का निवेश करें। गलत बात में निवेश करना बहुत जोखिम भरा है, और उस गलत निवेश की हानि को पलटने का फिर कोई साधन है ही नहीं। - डेविड मैक्कैसलैंड


यदि हम जीवते एवं सच्चे परमेश्वर के सत्यों को थामे रहेंगे तो शैतान के धोखों में फंसने नहीं पाएंगे।

पर जितने मसीह यीशु में भक्ति के साथ जीवन बिताना चाहते हैं वे सब सताए जाएंगे। - 2 तिमुथियुस 3:12

बाइबल पाठ: लूका 9:18-27
Luke 9:18 जब वह एकान्‍त में प्रार्थना कर रहा था, और चेले उसके साथ थे, तो उसने उन से पूछा, कि लोग मुझे क्या कहते हैं? 
Luke 9:19 उन्होंने उत्तर दिया, युहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, और कोई कोई एलिय्याह, और कोई यह कि पुराने भविष्यद्वक्ताओं में से कोई जी उठा है। 
Luke 9:20 उसने उन से पूछा, परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो? पतरस ने उत्तर दिया, परमेश्वर का मसीह। 
Luke 9:21 तब उसने उन्हें चिताकर कहा, कि यह किसी से न कहना। 
Luke 9:22 और उसने कहा, मनुष्य के पुत्र के लिये अवश्य है, कि वह बहुत दुख उठाए, और पुरिनए और महायाजक और शास्त्री उसे तुच्‍छ समझकर मार डालें, और वह तीसरे दिन जी उठे। 
Luke 9:23 उसने सब से कहा, यदि कोई मेरे पीछे आना चाहे, तो अपने आप से इन्कार करे और प्रति दिन अपना क्रूस उठाए हुए मेरे पीछे हो ले। 
Luke 9:24 क्योंकि जो कोई अपना प्राण बचाना चाहेगा वह उसे खोएगा, परन्तु जो कोई मेरे लिये अपना प्राण खोएगा वही उसे बचाएगा। 
Luke 9:25 यदि मनुष्य सारे जगत को प्राप्त करे, और अपना प्राण खो दे, या उस की हानि उठाए, तो उसे क्या लाभ होगा? 
Luke 9:26 जो कोई मुझ से और मेरी बातों से लजाएगा; मनुष्य का पुत्र भी जब अपनी, और अपने पिता की, और पवित्र स्वर्ग दूतों की, महिमा सहित आएगा, तो उस से लजाएगा। 
Luke 9:27 मैं तुम से सच कहता हूं, कि जो यहां खड़े हैं, उन में से कोई कोई ऐसे हैं कि जब तक परमेश्वर का राज्य न देख लें, तब तक मृत्यु का स्‍वाद न चखेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 21-23


शनिवार, 23 अगस्त 2014

चित्रण


   एक दिन मेरे बेटे ने, जो अभी छोटा सा बच्चा ही है, एक पेन पकड़ा और अपने पिता का चित्र बनाया। उस बच्चे ने एक गोले में दो आँखें, एक नाक, दो कान बनाए तथा उस गोले के नीचे दो लंबी लकीरें बना दीं, जो उसके अनुसार मेरे पति की टाँगें थीं। उस चित्र को देखकर यद्यपि मैं उसे प्रयास करने के लिए अच्छे अंक दे दूँगी लेकिन उसका वह चित्र मेरे पति का वास्तविक चित्रण नहीं है; उस चित्र में उनकी नीली आँखें, भरोसेमन्द मुस्कुराहट, बालों पर चांदी की सी चमक कहीं दिखाई नहीं देती, लेकिन मेरे बेटे की नज़रों में वह चित्र अपने पिता का चित्रण है।

   परमेश्वर की सन्तान होने के नाते, हम भी कई बार ऐसे ही परमेश्वर के ऐसे चित्रण करते हैं जो सही नहीं होते; खासकर तब जब परमेश्वर हमारे अन्दर कोई सुधार लाने का प्रयास कर रहा हो। जब परमेश्वर हमारे जीवनों में से कोई पापमय बात निकालकर हमें सुधारने के प्रयास कर रहा होता है तब कई बार वह हमें प्रेमरहित और बेपरवाह प्रतीत होता है, क्योंकि अनुशासन अकसर दुखदाई होता है (इब्रानियों 12:11) और हम यह मान बैठते हैं कि परमेश्वर का यह सुधार उसके कोप और परिणामस्वरूप उसके प्रतिशोध का प्रगटिकरण है। जबकि उसका यह सुधार हमारे प्रति उसके प्रेम और परवाह का प्रमाण है। परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है, "क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है" (इब्रानियों 12:6)। वह इसलिए हमारी ताड़ना करता है जिससे हम उसकी पवित्रता के संभागी बन सकें और उसकी धार्मिकता से मिलने वाली शांति को अनुभव कर सकें (पद 10, 11)।

   आज यदि आप परमेश्वर के अनुशासन का सामना कर रहे हैं, तो स्मरण रखिए, वह ना तो आप को क्रोधित तेवर दिखा रहा है और ना ही आप की ओर प्रतिशोध का हाथ हिला रहा है। उसका चित्रण एक क्रोधी और प्रतिशोधपूर्ण दिव्य व्यक्तित्व के रूप में नहीं वरन एक ऐसे प्रेमी पिता के रूप में कीजिए जो सप्रेम अपने बच्चों को सुधारने में प्रयत्नशील रहता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के अनुशासन का हाथ, उसके प्रेम का प्रमाण है।

मैं जिन जिन से प्रीति रखता हूं, उन सब को उलाहना और ताड़ना देता हूं, इसलिये सरगर्म हो, और मन फिरा। - प्रकाशितवाक्य 3:19

बाइबल पाठ: इब्रानियों 12:1-11
Hebrews 12:1 इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। 
Hebrews 12:2 और विश्वास के कर्ता और सिद्ध करने वाले यीशु की ओर ताकते रहें; जिसने उस आनन्द के लिये जो उसके आगे धरा था, लज्ज़ा की कुछ चिन्‍ता न कर के, क्रूस का दुख सहा; और सिंहासन पर परमेश्वर के दाहिने जा बैठा। 
Hebrews 12:3 इसलिये उस पर ध्यान करो, जिसने अपने विरोध में पापियों का इतना वाद-विवाद सह लिया कि तुम निराश हो कर हियाव न छोड़ दो। 
Hebrews 12:4 तुम ने पाप से लड़ते हुए उस से ऐसी मुठभेड़ नहीं की, कि तुम्हारा लोहू बहा हो। 
Hebrews 12:5 और तुम उस उपदेश को जो तुम को पुत्रों की नाईं दिया जाता है, भूल गए हो, कि हे मेरे पुत्र, प्रभु की ताड़ना को हलकी बात न जान, और जब वह तुझे घुड़के तो हियाव न छोड़। 
Hebrews 12:6 क्योंकि प्रभु, जिस से प्रेम करता है, उस की ताड़ना भी करता है; और जिसे पुत्र बना लेता है, उसको कोड़े भी लगाता है। 
Hebrews 12:7 तुम दुख को ताड़ना समझकर सह लो: परमेश्वर तुम्हें पुत्र जान कर तुम्हारे साथ बर्ताव करता है, वह कौन सा पुत्र है, जिस की ताड़ना पिता नहीं करता? 
Hebrews 12:8 यदि वह ताड़ना जिस के भागी सब होते हैं, तुम्हारी नहीं हुई, तो तुम पुत्र नहीं, पर व्यभिचार की सन्तान ठहरे! 
Hebrews 12:9 फिर जब कि हमारे शारीरिक पिता भी हमारी ताड़ना किया करते थे, तो क्या आत्माओं के पिता के और भी आधीन न रहें जिस से जीवित रहें। 
Hebrews 12:10 वे तो अपनी अपनी समझ के अनुसार थोड़े दिनों के लिये ताड़ना करते थे, पर यह तो हमारे लाभ के लिये करता है, कि हम भी उस की पवित्रता के भागी हो जाएं। 
Hebrews 12:11 और वर्तमान में हर प्रकार की ताड़ना आनन्द की नहीं, पर शोक ही की बात दिखाई पड़ती है, तौभी जो उसको सहते सहते पक्के हो गए हैं, पीछे उन्हें चैन के साथ धर्म का प्रतिफल मिलता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 17-20


शुक्रवार, 22 अगस्त 2014

उद्गम और अन्त


   वैज्ञानिक सदियों से "सब कुछ के सिद्धांत" की खोज में लगे हैं जिससे सृष्टि तथा उसकी प्रत्येक वस्तु के आरंभ एवं रचना के बारे में जाना जा सके। एक भौतिक शास्त्री, ब्रायन ग्रीन को लगता है कि उन्होंने वह आधारभूत सिद्धांत पा लिया है; उन्होंने इस बात को लेकर एक पुस्तक लिखी है "The Elegant Universe: Superstrings, Hidden Dimensions, and the Quest for the Ultimate Theory"। ग्रीन द्वारा प्रतिपादित "लड़ी सिद्धांत" एक जटिल परिकल्पना है जो यह प्रस्तावित करती है कि अपने सबसे सूक्षम स्तर पर प्रत्येक वस्तु कंप्यामान लड़ीयों या धागों के मिश्रण से बनी है। उन्होंने अपने इस सिद्धांत के लिए कहा है: "एक ऐसा सैद्धांतिक ढाँचा जिसमें संसार की मूल रचना की प्रत्येक बात को समझा पाने की क्षमता है"।

   अनेक अन्य वैज्ञानिकों, जैसे न्यूटन, आईंस्टाईन, हौकिंग्स आदि ने भी अपने जीवन का एक बड़ा भाग यह समझने में लगा दिया है कि यह सृष्टि कार्य कैसे करती है - और इसके लिए उन्होंने अनेक विलक्षण सिद्धांत प्रतिपादित किए हैं। लेकिन वास्तविकता यही है कि अभी तक कोई भी सिद्धांत इस गुथी को पूर्णतयः सुल्झा नहीं पाया है, सभी में कोई ना कोई कमी है, और सभी किसी ना किसी बात पर आकर विफल हो जाते हैं। किसी भी सिद्धांत के पूर्णतयः सफल होने के लिए अनिवार्य है कि वह सृष्टिकर्ता परमेश्वर से आरंभ हो तथा उसी पर अंत भी हो।

   परमेश्वर का वचन बाइबल प्रभु यीशु के संदर्भ में बताती है: "क्योंकि उसी में सारी वस्‍तुओं की सृष्‍टि हुई, स्वर्ग की हो अथवा पृथ्वी की, देखी या अनदेखी, क्या सिंहासन, क्या प्रभुतांए, क्या प्रधानताएं, क्या अधिकार, सारी वस्तुएं उसी के द्वारा और उसी के लिये सृजी गई हैं" (कुलुस्सियों 1:16)। बाइबल के यूहन्ना रचित सुसमाचार के आरंभिक पद हमें बताते हैं कि प्रभु यीशु में होकर ही इस सृष्टि की रचना हुई और उसके बिना किसी चीज़ का कोई अस्तित्व नहीं है।

   इसीलिए जब हम इस संसार और उसकी चीज़ों पर विचार करते हैं तो यशायाह भविष्यद्वक्ता के साथ कह सकते हैं: "...सेनाओं का यहोवा पवित्र, पवित्र, पवित्र है; सारी पृथ्वी उसके तेज से भरपूर है" (यशायाह 6:3)। परमेश्वर, जो सारी सृष्टि की प्रत्येक वस्तु का उद्गम और अन्त है, के पवित्र नाम की महिमा युगानुयुग होती रहे! - डेव एग्नर


समस्त सृष्टि परमेश्वर की ओर संकेत कर रही है।

आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। - भजन 19:1

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-13
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 13-16


गुरुवार, 21 अगस्त 2014

शिक्षक


   इंटरनैट पर सोशल नेटवर्क बढ़ रहे हैं। ब्लॉग्स, ट्विटर, ई-मेल, वेब लिंक्स इत्यादि लोगों को आपस में संपर्क में लाने और रखने के अति प्रचलित माध्यम बन गए हैं। लोग, शारीरिक रूप से चाहे कितनी भी दूरी पर क्यों ना रहते हों, वे इन इंटरनैट पर उपलब्ध इन माध्यमों से परस्पर संपर्क कर सकते हैं, एक दूसरे से परामर्श ले-दे सकते हैं, एक दूसरे के साथ अपनी बात बाँट सकते हैं। ये माध्यम आत्मिक शिक्षाओं के प्रसार एवं प्रचार का भी सश्कत ज़रिया हैं।

   लेकिन इन सब बातों के लिए आमने-सामने मिलना और चर्चा करना भी अति मूल्यवान होता है। विशेषकर जब आत्मिक बातों में किसी परिपक्व विश्वासी के साथ चर्चा करने और मार्गदर्शन पाने की बात आती है, या कोई किसी का शिक्षक बनता है, तो यह प्रत्यक्ष भेंट एवं संवाद अच्छा रहता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम इसके अनेक उदाहरण पाते हैं: एलीशा ने एलिय्याह का अनुसरण किया (1 राजा 19:21), पौलुस ने तिमुथियुस को विश्वास में अपना सच्चा पुत्र मानकर उसका मार्गदर्शन और शिक्षण किया (1 तिमुथियुस 1:2)। पौलुस ने तिमुथियुस को यह भी निर्देश दिए कि जैसे उसने तिमुथियुस सिखाया है, वैसे ही वह भी अन्य लोगों को सिखाए, जो फिर औरों को सिखाएं और इस रीति से यह श्रंखला बनी रहे, बढ़ती रहे (2 तिमुथियुस 2:2)। मूसा ने माता-पिता को दायित्व दिया कि वे अपने बच्चों को परमेश्वर की शिक्षा सदा देते रहें, "और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना" (व्यवस्थाविवरण 6:7)। हमारे सर्वोत्तम शिक्षक, प्रभु यीशु मसीह ने भी अपने बारह चेलों की नियुक्ति के द्वारा हमें सिखाया है कि शिक्षण कैसे किया जाए - व्यक्तिगत संपर्क तथा निर्देशन के द्वारा: "तब उसने बारह पुरूषों को नियुक्त किया, कि वे उसके साथ साथ रहें, और वह उन्हें भेजे, कि प्रचार करें" (मरकुस 3:14); और इसी कार्य को ऐसे ही आगे बढ़ाने के निर्देश अपने चेलों को दिए (मत्ती 28:18-20)।

   इन परिच्छेदों से हम देखते हैं कि विभिन्न परिस्थितियों में भी प्रत्यक्ष व्यक्तिगत संपर्क ही एक दूसरे को उभारने, सिखाने और आत्मिक जीवन में उन्नति करने का सर्वोत्तम माध्यम है: "जैसे लोहा लोहे को चमका देता है, वैसे ही मनुष्य का मुख अपने मित्र की संगति से चमकदार हो जाता है" (नीतिवचन 27:17)। जीवन यात्रा में ऐसे अनेक अवसर आते हैं जब हम एक समझदार एवं परिपक्व व्यक्तित्व से सीख सकते हैं, मार्गदर्शन ले सकते हैं; या ऐसे ही हम भी किसी के शिक्षक बन सकते हैं। इसीलिए परमेश्वर का वचन हमें निर्देश देता है कि एक दुसरे से मिलना ना छोड़ें, वरन इसमें बढ़ते जाएं (इब्रानियों 10:25)। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमें जहाँ ले जाना चाहता है, वहाँ पहुँचने के लिए हमें एक दूसरे के साथ की आवश्यकता है।

और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो। - इब्रानियों 10:25

बाइबल पाठ: मत्ती 28:18-20; 2 तिमुथियुस 2:1-2
Matthew 28:18 यीशु ने उन के पास आकर कहा, कि स्वर्ग और पृथ्वी का सारा अधिकार मुझे दिया गया है। 
Matthew 28:19 इसलिये तुम जा कर सब जातियों के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता और पुत्र और पवित्रआत्मा के नाम से बपतिस्मा दो। 
Matthew 28:20 और उन्हें सब बातें जो मैं ने तुम्हें आज्ञा दी है, मानना सिखाओ: और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं।

2 Timothy 2:1 इसलिये हे मेरे पुत्र, तू उस अनुग्रह से जो मसीह यीशु में है, बलवन्‍त हो जा। 
2 Timothy 2:2 और जो बातें तू ने बहुत गवाहों के साम्हने मुझ से सुनी हैं, उन्हें विश्वासी मनुष्यों को सौंप दे; जो औरों को भी सिखाने के योग्य हों।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 9-12