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सोमवार, 20 जुलाई 2015

बाइबल


   कुछ गाने और धुनें ऐसी होती हैं कि वे आपके मस्तिषक में बैठ जाती हैं, और आप उन्हें अपने ध्यान तथा विचारों से निकाल नहीं पाते; वे हर समय आपके मस्तिषक के अन्दर बजती रहती हैं, आपको विचलित रखती हैं। उनको मन-मस्तिषक से हटाने का एक ही कारगर उपाय बताया जाता है - उन्हें किसी अन्य गाने या धुन से बदल लें; वह नया गाना या धुन उस पुराने को निकालकर उसका स्थान ले लेती है।

   यही प्रक्रिया हम अपने विचारों को स्वच्छ रखने के लिए भी प्रयोग कर सकते हैं। जब भी अनुचित, वासनात्मक, प्रतिशोधात्मक विचार हमारे अन्दर समा जाएं और हमें विचलित करने लगें, परमेश्वर के वचन बाइबल को पढ़ने और उस पर मनन करने से हम उन गलत विचारों को स्वच्छ और भली बातों से बदल सकते हैं।

   परमेश्वर से प्रेम रखने के संबंध में प्रभु यीशु ने सिखाया है "...तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख" (मत्ती 22:37) तथा बाइबल हम मसीही विश्वासियों को यह भी सिखाती है: "और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो" (रोमियों 12:2)। हमें किन बातों पर विचार करते रहना है यह भी परमेश्वर ने हमारे लिए बाइबल में दिया है: "निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो" (फिलिप्पियों 4:8)।

   जब भी हमारे मन तथा विचार किसी गलत, अनुचित या पापमय बात की ओर भटकने लगें, परमेश्वर के वचन बाइबल की बुद्धिमता और शुद्धता से अपने मन-मस्तिषक को भर लें, अपने बुरे विचारों को उसके स्वच्छ विचारों से बदल लें, क्योंकि परमेश्वर ने बाइबल हमें स्वच्छ और सिद्ध होने का मार्ग दिखाने के लिए दी है। - सिंडी हैस कैस्पर


हमारा चरित्र हमारे विचारों, वचनों और कार्यों का योग है।

हर एक पवित्रशास्‍त्र परमेश्वर की प्रेरणा से रचा गया है और उपदेश, और समझाने, और सुधारने, और धर्म की शिक्षा के लिये लाभदायक है। ताकि परमेश्वर का जन सिद्ध बने, और हर एक भले काम के लिये तत्‍पर हो जाए। - 2 तिमुथियुस 3:16-17

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 4:4-9
Philippians 4:4 प्रभु में सदा आनन्‍दित रहो; मैं फिर कहता हूं, आनन्‍दित रहो। 
Philippians 4:5 तुम्हारी कोमलता सब मनुष्यों पर प्रगट हो: प्रभु निकट है। 
Philippians 4:6 किसी भी बात की चिन्‍ता मत करो: परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और बिनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख अपस्थित किए जाएं। 
Philippians 4:7 तब परमेश्वर की शान्‍ति, जो समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरिक्षत रखेगी।
Philippians 4:8 निदान, हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, और जो जो बातें आदरणीय हैं, और जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं, और जो जो बातें मनभावनी हैं, निदान, जो जो सदगुण और प्रशंसा की बातें हैं, उन्‍हीं पर ध्यान लगाया करो। 
Philippians 4:9 जो बातें तुम ने मुझ से सीखीं, और ग्रहण की, और सुनी, और मुझ में देखीं, उन्‍हीं का पालन किया करो, तब परमेश्वर जो शान्‍ति का सोता है तुम्हारे साथ रहेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22


रविवार, 19 जुलाई 2015

आशीषों का उपयोग


   मैं उन लोगों से सहमत नहीं हूँ जो भौतिक वस्तुओं के विरुद्ध कहते और प्रचार करते रहते हैं, तथा जिनका यह मानना है कि जीवन में भौतिक वस्तुओं का होना बुरा है। मैं मानता हूँ कि मैं स्वभाव से एक उपभोगता हूँ और वे वस्तुएं जमा करना, जिनकी मुझे आवश्यकता है, मुझे अच्छा लगता है।

   लेकिन मैं यह भी स्वीकार करता हूँ की भौतिक वस्तुओं से आवशयकता से अधिक प्रेम करना या उन्हें अनावश्यक होने पर भी जमा करते रहना, आत्मिक हानि का कारण हो सकता है। मैं यह भी मानता हूँ कि हमारे पास भौतिक वस्तुएं जितनी अधिक होंगी, और हम जितना यह मान कर चलेंगे कि हमें अपने लिए जो चाहिए हम वह अर्जित कर सकते हैं, उतना ही अधिक हम अपने जीवन में परमेश्वर की आवश्यकता तथा उस पर निर्भरता को भुला देने के खतरे में बढ़ते चले जाएंगे। हम यह भूलने के जोखिम में आ जाएंगे कि अन्ततः परमेश्वर ही है जो हमारे आनन्द के लिए हमें सब कुछ प्रदान करता है (1 तिमुथियुस 6:17)।

   यह भी एक कड़ुवा सत्य है कि मनुष्य अकसर परमेश्वर से अपने आनन्द की वस्तुएं पाने के पश्चात वस्तु से प्रेम परन्तु उस वस्तु के देने वाले परमेश्वर को नज़रंदाज़ करने लगता है। इसी लिए जब परमेश्वर अपने लोगों को वाचा किए हुए कनान देश में बहुतायत का जीवन देने जा रहा था तो उसने उन्हें सचेत किया: "इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे" (व्यव्स्थाविवरण 8:11)।

   यदि परमेश्वर ने आपको भौतिक आशीषों से परिपूर्ण किया है, तो यह कभी ना भूलें कि उन आशीषों का स्त्रोत कौन है, वरन अपने आप को आशीषों के स्त्रोत अपने परमेश्वर पिता के बारे में स्मरण दिलाते रहें। साथ ही यह भी ना भूलें कि उसने आपको आशीषें केवल आप के प्रयोग के लिए ही नहीं दी हैं वरन मुख्यतः इसलिए दी हैं कि उन्हें उस सब कुछ देने वाले परमेश्वर के राज्य की बढ़ोतरी तथा सुसमाचार के प्रचार में लगाएं। अपनी आशीषों के लिए सदा परमेश्वर के धन्यवादी और कृतज्ञ रहें तथा उससे प्रार्थना करते रहें कि उन आशीषों का उपयोग कैसे करना है यह वह आपको बताता रहे। - जो स्टोवैल


उपहार से अधिक उपहार को देने वाले को महत्व दें।

इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। - 1 तिमुथियुस 6:17

बाइबल पाठ: व्यव्स्थाविवरण 8:7-18
Deuteronomy 8:7 क्योंकि तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे एक उत्तम देश में लिये जा रहा है, जो जल की नदियों का, और तराइयों और पहाड़ों से निकले हुए गहिरे गहिरे सोतों का देश है। 
Deuteronomy 8:8 फिर वह गेहूं, जौ, दाखलताओं, अंजीरों, और अनारों का देश है; और तेलवाली जलपाई और मधु का भी देश है। 
Deuteronomy 8:9 उस देश में अन्न की महंगी न होगी, और न उस में तुझे किसी पदार्थ की घटी होगी; वहां के पत्थर लोहे के हैं, और वहां के पहाड़ों में से तू तांबा खोदकर निकाल सकेगा। 
Deuteronomy 8:10 और तू पेट भर खाएगा, और उस उत्तम देश के कारण जो तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे देगा उसका धन्य मानेगा। 
Deuteronomy 8:11 इसलिये सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि अपने परमेश्वर यहोवा को भूलकर उसकी जो जो आज्ञा, नियम, और विधि, मैं आज तुझे सुनाता हूं उनका मानना छोड़ दे; 
Deuteronomy 8:12 ऐसा न हो कि जब तू खाकर तृप्त हो, और अच्छे अच्छे घर बनाकर उन में रहने लगे, 
Deuteronomy 8:13 और तेरी गाय-बैलों और भेड़-बकरियों की बढ़ती हो, और तेरा सोना, चांदी, और तेरा सब प्रकार का धन बढ़ जाए, 
Deuteronomy 8:14 तब तेरे मन में अहंकार समा जाए, और तू अपने परमेश्वर यहोवा को भूल जाए, जो तुझ को दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है, 
Deuteronomy 8:15 और उस बड़े और भयानक जंगल में से ले आया है, जहां तेज विष वाले सर्प और बिच्छू हैं, और जलरहित सूखे देश में उसने तेरे लिये चकमक की चट्ठान से जल निकाला, 
Deuteronomy 8:16 और तुझे जंगल में मन्ना खिलाया, जिसे तुम्हारे पुरखा जानते भी न थे, इसलिये कि वह तुझे नम्र बनाए, और तेरी परीक्षा कर के अन्त में तेरा भला ही करे। 
Deuteronomy 8:17 और कहीं ऐसा न हो कि तू सोचने लगे, कि यह सम्पत्ति मेरे ही सामर्थ्य और मेरे ही भुजबल से मुझे प्राप्त हुई। 
Deuteronomy 8:18 परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 23-25
  • प्रेरितों 21:18-40


शनिवार, 18 जुलाई 2015

सेवकाई और नम्रता


   मुझे स्वावलंबी बनने में सहायता करने वाली एक पुस्तक में दी गई सलाह अच्छी तो लगी, परन्तु उसके व्यावहारिक होने पर मुझे सन्देह है। पुस्तक के लेखक ने कहा कि केवल वह करो जिसे करने में तुम निपुण हो, क्योंकि तब तुम सबसे अधिक सन्तुष्टि प्राप्त करोगे। लेखक चाह रहा था कि उसके पाठक अपने लिए ऐसी जीवन शैली बनाएं जो उनके अनुकूल हो। अब मैं आपके बारे में तो नहीं जानता किंतु अपने लिए कह सकता हूँ कि यदि मैं केवल वही करूँ जिसमें मैं निपुण हूँ, तो कुछ खास नहीं कर पाऊँगा!

   परमेश्वर के वचन बाइबल में मरकुस 10 अध्याय में हम दो भाईयों तथा प्रभु यीशु के चेलों के बारे में पढ़ते हैं जो अपने जीवन के लिए कुछ विशेष चाहते थे; वे चाहते थे कि प्रभु यीशु के राज्य में वे दोनों प्रभु यीशु के दाएं और बाएं ओर बैठें (पद 37)। उनकी यह इच्छा सुनकर शेष 10 चेलों को बहुत बुरा लगा (पद 41); संभवतः वे 10 चेले भी अपने लिए यही चाहते होंगे! लेकिन प्रभु यीशु ने इस विवाद के अवसर का सदुपयोग अपने चेलों को एक अन्य प्रकार का जीवन जीने के बारे में सिखाने के लिए किया - सेवकाई का जीवन। प्रभु यीशु ने उन सब से कहा: "...जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने" (पद 43-44)। प्रभु यीशु के कथन से स्पष्ट है कि परमेश्वर की नज़रों में उसके अनुयायियों को अन्य मनुष्यों पर प्रभुता एवं घमण्ड का नहीं वरन सब के प्रति सेवकाई और नम्रता का जीवन जीना है।

   स्वयं प्रभु यीशु, परमेश्वर के पुत्र ने यही करके अपने जीवन से सब के लिए यह उदाहरण प्रस्तुतु किया। इसी वार्तालाप में प्रभु यीशु ने अपने विषय में अपने चेलों से कहा: "क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे" (पद 45)। अपने तथा सम्पूर्ण जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के उदाहरण का परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सामर्थ से अनुसरण कर के, हम भी परमेश्वर को भाने वाला यह सेवकाई और नम्रता का जीवन जी सकते हैं। - ऐनी सेटास


परमेश्वर के लिए बड़ी सेवकाई के अवसर तो कम ही आते हैं, परन्तु मनुष्यों की सेवकाई के छोटे छोटे अवसर सदा ही हमारे चारों ओर रहते हैं।

जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। - फिलिप्पियों 2:5-7 

बाइबल पाठ: मरकुस 10:35-45
Mark 10:35 तब जब्‍दी के पुत्र याकूब और यूहन्ना ने उसके पास आकर कहा, हे गुरू, हम चाहते हैं, कि जो कुछ हम तुझ से मांगे, वही तू हमारे लिये करे। 
Mark 10:36 उसने उन से कहा, तुम क्या चाहते हो कि मैं तुम्हारे लिये करूं? 
Mark 10:37 उन्होंने उस से कहा, कि हमें यह दे, कि तेरी महिमा में हम में से एक तेरे दाहिने और दूसरा तेरे बांए बैठे। 
Mark 10:38 यीशु ने उन से कहा, तुम नहीं जानते, कि क्या मांगते हो? जो कटोरा मैं पीने पर हूं, क्या पी सकते हो? और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, क्या ले सकते हो? 
Mark 10:39 उन्होंने उस से कहा, हम से हो सकता है: यीशु ने उन से कहा: जो कटोरा मैं पीने पर हूं, तुम पीओगे; और जो बपतिस्मा मैं लेने पर हूं, उसे लोगे। 
Mark 10:40 पर जिन के लिये तैयार किया गया है, उन्हें छोड़ और किसी को अपने दाहिने और अपने बाएं बिठाना मेरा काम नहीं। 
Mark 10:41 यह सुन कर दसों याकूब और यूहन्ना पर रिसयाने लगे। 
Mark 10:42 और यीशु ने उन को पास बुला कर उन से कहा, तुम जानते हो, कि जो अन्यजातियों के हाकिम समझे जाते हैं, वे उन पर प्रभुता करते हैं; और उन में जो बड़ें हैं, उन पर अधिकार जताते हैं। 
Mark 10:43 पर तुम में ऐसा नहीं है, वरन जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने। 
Mark 10:44 और जो कोई तुम में प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने। 
Mark 10:45 क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 20-22
  • प्रेरितों 21:1-17


शुक्रवार, 17 जुलाई 2015

वार्तालाप


   संभवतः आप इस प्रसिद्ध कथन को जानते हों: "महान लोग विचारों के बारे चर्चा करते हैं; साधारण लोग घटनाओं के बारे चर्चा करते हैं और छोटे लोग व्यक्तियों के बारे में चर्चा करते हैं।" इसमें कोई असंगत बात नहीं कि लोगों के बारे में बात करने का भी तरीका होता है जिससे उन्हें सम्मान मिल सके, लेकिन उपरोक्त कथन सामान्यतः चर्चा करने वाले लोगों की मानसिकता पर एक टिप्पणी है जो उनके व्यक्तित्व का परिचय देती है। आज के संसार में सभी पर सामाजिक या व्यवसायिक मीडिया की लगातार बनी रहने वाली नज़र के कारण हमें लोगों के जीवनों को ऐसी अन्तरंगता से देखने को मिलता रहता है जो अनुपयुक्त हो सकता है।

   यह और भी बुरा तब हो जाता है जब दुसरों के जीवनों के बारे में अनुपयुक्त सूचनाओं की यह बाढ़ हमारी बातचीत का ऐसा विषय बन जाती है जहाँ व्यर्थ की कानफूसी अपवाद नहीं वरन सामान्य लगने लगती है, और यह केवल प्रसिद्ध और गणमान्य लोगों को लेकर ही हो ऐसा भी नहीं। हमारे कार्यस्थल, चर्च, पड़ौस, मित्र-मण्डली और परिवार के लोग भी इस व्यर्थ कानाफूसी के विषय बनते चले जाते हैं और फिर लोगों की तेज़ ज़ुबानों के लक्ष्य बनकर उन्हें ऐसी चर्चाओं की पीड़ा सहनी पड़ती है जिन चर्चाओं को कभी होना ही नहीं चाहिए था।

   हम अपने वार्तालापों में ऐसे शब्दों के प्रयोग को कैसे रोक सकते हैं जिन से दूसरों को कष्ट होता है? यह ध्यान रखने के द्वारा कि परमेश्वर भी हमारे प्रत्येक वार्तालाप को सुनता है और उसका हिसाब रखता है और एक दिन उन सब बातों का हमसे हिसाब अवश्य लेगा (मत्ती 12:36)। हमारा परमेश्वर पिता हम मसीही विश्वासियों से चाहता है कि हम अपने शब्दों का बहुत सावधानी से प्रयोग करें, ऐसा करें जिससे उसे किसी प्रकार की कोई शर्मिंदगी ना हो और हम भी भजनकार के साथ कह सकें: "मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!" (भजन 19:14)

   जब हम दूसरों के बारे में अपने वार्तालाप और शब्दों के द्वारा परमेश्वर को प्रसन्न करने का प्रयास करते हैं, तब हम परमेश्वर को आदर देते हैं। उसकी सहायता से हम अपने वार्तालाप को संसार के लोगों में उसे महिमा देने और उसका आदर करने का माध्यम बना सकते हैं। होने दें कि आपके शब्द, आपका वार्तालाप आपके पिता परमेश्वर के लिए महिमा और आदर का कारण बने। - बिल क्राउडर


शब्दों से किसी को आहत करने से बेहतर है कि हम अपनी ज़ुबान को ही दबा लें।

और मैं तुम से कहता हूं, कि जो जो निकम्मी बातें मनुष्य कहेंगे, न्याय के दिन हर एक बात का लेखा देंगे। - मत्ती 12:36

बाइबल पाठ: भजन 19
Psalms 19:1 आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है। 
Psalms 19:2 दिन से दिन बातें करता है, और रात को रात ज्ञान सिखाती है। 
Psalms 19:3 न तो कोई बोली है और न कोई भाषा जहां उनका शब्द सुनाई नहीं देता है। 
Psalms 19:4 उनका स्वर सारी पृथ्वी पर गूंज गया है, और उनके वचन जगत की छोर तक पहुंच गए हैं। उन में उसने सूर्य के लिये एक मण्डप खड़ा किया है, 
Psalms 19:5 जो दुल्हे के समान अपने महल से निकलता है। वह शूरवीर की नाईं अपनी दौड़ दौड़ने को हर्षित होता है। 
Psalms 19:6 वह आकाश की एक छोर से निकलता है, और वह उसकी दूसरी छोर तक चक्कर मारता है; और उसकी गर्मी सब को पहुंचती है।
Psalms 19:7 यहोवा की व्यवस्था खरी है, वह प्राण को बहाल कर देती है; यहोवा के नियम विश्वासयोग्य हैं, साधारण लोगों को बुद्धिमान बना देते हैं; 
Psalms 19:8 यहोवा के उपदेश सिद्ध हैं, हृदय को आनन्दित कर देते हैं; यहोवा की आज्ञा निर्मल है, वह आंखों में ज्योति ले आती है; 
Psalms 19:9 यहोवा का भय पवित्र है, वह अनन्तकाल तक स्थिर रहता है; यहोवा के नियम सत्य और पूरी रीति से धर्ममय हैं। 
Psalms 19:10 वे तो सोने से और बहुत कुन्दन से भी बढ़कर मनोहर हैं; वे मधु से और टपकने वाले छत्ते से भी बढ़कर मधुर हैं। 
Psalms 19:11 और उन्हीं से तेरा दास चिताया जाता है; उनके पालन करने से बड़ा ही प्रतिफल मिलता है। 
Psalms 19:12 अपनी भूलचूक को कौन समझ सकता है? मेरे गुप्त पापों से तू मुझे पवित्र कर। 
Psalms 19:13 तू अपने दास को ढिठाई के पापों से भी बचाए रख; वह मुझ पर प्रभुता करने न पाएं! तब मैं सिद्ध हो जाऊंगा, और बड़े अपराधों से बचा रहूंगा।। 
Psalms 19:14 मेरे मुंह के वचन और मेरे हृदय का ध्यान तेरे सम्मुख ग्रहण योग्य हों, हे यहोवा परमेश्वर, मेरी चट्टान और मेरे उद्धार करने वाले!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 18-19
  • प्रेरितों 20:17-38


गुरुवार, 16 जुलाई 2015

शुद्ध तथा बलवन्त


   हीरे मज़बूत एवं ठोस, सुन्दर और बहुमूल्य रत्न होते हैं, परन्तु उनका आरंभ बहुत साधारण से काले, भद्दे और ज्वलनशील कोएले (कार्बन) के रूप में होता है। वर्षों तक अत्याधिक तापमान और दबाव सहते सहते यह कार्बन शुद्ध, चमकीले, सुन्दर और मज़बूत हीरे में परिवर्तित हो जाता है, जिसे तराशने और संवारने से वह बहुमूल्य बन जाता है। यह उन्हें आत्मिक सामर्थ और निखार प्राप्त करने की प्रक्रिया को समझने के लिए उचित उदाहरण भी बनाता है।

   प्रेरित पौलुस ने कहा कि परमेश्वर की सामर्थ हमारी निर्बलता में सिद्ध होती है (2 कुरिन्थियों 12:9)। काश कि यह सच नहीं होता, क्योंकि मुझे निर्बल होना अच्छा नहीं लगता। शारिरिक निर्बलता क्या होती है यह मैंने अपने कैंसर के लिए दी जाने वाली कीमोथैरपी और विकिरण से इलाज द्वारा अच्छे से सीखा है। फिर एक छोटी सी घटना ने मुझे अनायास ही भावनाओं की दुर्बलता में भी डाल दिया। इलाज में अपने 3 फीट लंबे बाल गंवा कर लगभग एक साल के लिए गंजा हो जाने से गुज़रने के बाद, एक बार का गलत रीति से मेरे बालों का काटा जाना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं होनी चाहिए थी, परन्तु वह हो गई और मैं इस बात को लेकर अपने भावनात्मक रूप से निर्बल हो जाने के कारण बहुत शर्मिंदा अनुभव करती रही। हम में से कुछ लोग अपने चारों ओर सामर्थ और आत्म-निर्भरता का आवरण लपेटे रहते हैं। परन्तु कोई आक्समक दुर्घटना, या अस्वस्थता, या बेरोज़गारी या किसी प्रीय संबंध का विच्छेद हमें परमेश्वर के अनुग्रह पर अपनी पूर्ण निर्भरता का स्मरण करवा देता है।

   जब कभी हमें कष्ट की भट्टी से होकर निकलना पड़े, वह चाहे शारीरिक हो या भावनात्मक, चाहे बाहर से आने वाला सताव हो या हमारे अन्दर से उठने वाली ग्लानि और शर्मिंदगी - सदा स्मरण रखें कि परमेश्वर का उद्देश्य हमें इन सभी दबाव और कष्टों द्वारा शुद्ध तथा बलवन्त बनाना ही है, हमारी भलाई के लिए है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


कष्ट वह भट्टी हैं जिसका उपयोग परमेश्वर हमें शुद्ध तथा बलवन्त करने के लिए करता है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रोमियों 8:28

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 12:1-10
2 Corinthians 12:1 यद्यपि घमण्‍ड करना तो मेरे लिये ठीक नहीं तौभी करना पड़ता है; सो मैं प्रभु के दिए हुए दर्शनों और प्रकाशों की चर्चा करूंगा। 
2 Corinthians 12:2 मैं मसीह में एक मनुष्य को जानता हूं, चौदह वर्ष हुए कि न जाने देह सहित, न जाने देह रहित, परमेश्वर जानता है, ऐसा मनुष्य तीसरे स्वर्ग तक उठा लिया गया। 
2 Corinthians 12:3 मैं ऐसे मनुष्य को जानता हूं न जाने देह सहित, न जाने देह रहित परमेश्वर ही जानता है। 
2 Corinthians 12:4 कि स्वर्ग लोक पर उठा लिया गया, और एसी बातें सुनीं जो कहने की नहीं; और जिन का मुंह पर लाना मनुष्य को उचित नहीं। 
2 Corinthians 12:5 ऐसे मनुष्य पर तो मैं घमण्‍ड करूंगा, परन्तु अपने पर अपनी निर्बलताओं को छोड़, अपने विषय में घमण्‍ड न करूंगा। 
2 Corinthians 12:6 क्योंकि यदि मैं घमण्‍ड करना चाहूं भी तो मूर्ख न हूंगा, क्योंकि सच बोलूंगा; तोभी रुक जाता हूं, ऐसा न हो, कि जैसा कोई मुझे देखता है, या मुझ से सुनता है, मुझे उस से बढ़कर समझे। 
2 Corinthians 12:7 और इसलिये कि मैं प्रकाशों की बहुतायत से फूल न जाऊं, मेरे शरीर में एक कांटा चुभाया गया अर्थात शैतान का एक दूत कि मुझे घूँसे मारे ताकि मैं फूल न जाऊं। 
2 Corinthians 12:8 इस के विषय में मैं ने प्रभु से तीन बार बिनती की, कि मुझ से यह दूर हो जाए। 
2 Corinthians 12:9 और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। 
2 Corinthians 12:10 इस कारण मैं मसीह के लिये निर्बलताओं, और निन्‍दाओं में, और दरिद्रता में, और उपद्रवों में, और संकटों में, प्रसन्न हूं; क्योंकि जब मैं निर्बल होता हूं, तभी बलवन्‍त होता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 16-17
  • प्रेरितों 20:1-16


बुधवार, 15 जुलाई 2015

अन्त


   मैं यह स्वीकारता हूँ कि कभी कभी मैं किसी पुस्तक के अन्त को पहले पढ़ लेता हूँ और फिर उसे आरंभ से पढ़ना शुरू करता हूँ। ऐसा करने से मैं यह जान लेता हूँ कि कौन से पात्र अन्त तक बने रहेंगे और कौन से कहानी के बढ़ने के दौरान कहीं रह जाएंगे। यह जानकर कि पुस्तक का अन्त कैसा होगा, मैं आराम से मज़ा ले लेकर उस कहानी को पढ़ने पाता हूँ, कहानी के बढ़ने के साथ साथ उसके पात्रों के चरित्रों के उजागर होने का आनन्द लेने पाता हूँ।

   इसी प्रकार परमेश्वर के वचन बाइबल की अन्तिम पुस्तक, प्रकाशितवाक्य को पढ़ने से हम मसीही विश्वासी प्रोत्साहन और शांति पा सकते हैं। बाइबल बारंबार हम मसीहियों को परिस्थितियों पर जयवन्त होने के लिए कहती है (1 यूहन्ना 4:4; 5:4; प्रकाशितवाक्य 2:7,11,17,26; 3:5,12,21), और बाइबल की अन्तिम पुस्तक हमें बताती है कि प्रभु यीशु में होकर हम ना केवल वर्तमान में जयवन्त रह सकते हैं वरन अपने प्रभु में होकर हम अनन्त काल तक जयवन्त तथा आशीषित बने रहेंगे।

   प्रकाशितवाक्य का लेखक यूहन्ना जब नए आकाश और नई पृथ्वी के प्रकट होने की बात लिखता है (प्रकाशितवाक्य 21:1), तब वह इसका भी वर्णन करता है कि प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता स्वीकार कर लेने वालों के लिए वह अन्तिम विजय कैसी होगी। उस अन्तिम विजय के समय हम देखेंगे कि प्रभु सदा हमारे साथ रहेगा (पद 3), मृत्यु, आँसु, दुख और पीड़ा का अन्त हो जाएगा (पद 4), वह हमारे लिए सब कुछ नया कर देगा (पद 5); साथ ही प्रभु यह भी घोषणा करता है कि, "जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा" (प्रकाशितवाक्य 21:7)।

   जब आज की परीक्षाएं आपको अपने सहने की सामर्थ से बढ़कर लगें, तो प्रभु द्वारा हमें प्रकाशितवाक्य में दिखाए गए संसार, पाप और शैतान के अन्त पर ध्यान करें, और यह ध्यान रखें कि अन्त बहुत निकट है  और आप किसी भी समय अनन्त काल के लिए प्रभु यीशु के साथ होंगे, फिर वहाँ की शान्ति और आशीषों का कभी कोई अन्त नहीं होगा। - रैन्डी किल्गोर


आज की आशा के लिए अन्त, अर्थात परमेश्वर के साथ अनन्तकाल की आशीषों को स्मरण रखें।

बुद्धिमान महिमा को पाएंगे, और मूर्खों की बढ़ती अपमान ही की होगी। - नीतिवचन 3:35

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 21:1-7
Revelation 21:1 फिर मैं ने नये आकाश और नयी पृथ्वी को देखा, क्योंकि पहिला आकाश और पहिली पृथ्वी जाती रही थी, और समुद्र भी न रहा। 
Revelation 21:2 फिर मैं ने पवित्र नगर नये यरूशलेम को स्वर्ग पर से परमेश्वर के पास से उतरते देखा, और वह उस दुल्हिन के समान थी, जो अपने पति के लिये सिंगार किए हो। 
Revelation 21:3 फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। 
Revelation 21:4 और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। 
Revelation 21:5 और जो सिंहासन पर बैठा था, उसने कहा, कि देख, मैं सब कुछ नया कर देता हूं: फिर उसने कहा, कि लिख ले, क्योंकि ये वचन विश्वास के योग्य और सत्य हैं। 
Revelation 21:6 फिर उसने मुझ से कहा, ये बातें पूरी हो गई हैं, मैं अलफा और ओमिगा, आदि और अन्‍त हूं: मैं प्यासे को जीवन के जल के सोते में से सेंतमेंत पिलाऊंगा। 
Revelation 21:7 जो जय पाए, वही इन वस्‍तुओं का वारिस होगा; और मैं उसका परमेश्वर होऊंगा, और वह मेरा पुत्र होगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 13-15
  • प्रेरितों 19:21-41


मंगलवार, 14 जुलाई 2015

चेतावनी


   उरूगुऐ राष्ट्र के एक रेतीले समुद्र-तट पर आंशिक रूप से रेत में दबी तथा आकाश की ओर उठी हुई कॉन्क्रीट से बनी विशाल ऊँगलियाँ हैं। इसे स्थानीय लोग डूब जाने वालों का स्मारक, "ला मनो" अर्थात "हाथ" कहते हैं। इस स्मारक को चिली देश के कलाकार मारियो इर्राज़बल ने तैरने वालों को डूबने के खतरे के बारे में सचेत करने के लिए बनाया था। यद्यपि यह चेतावनी चिन्ह अब सैलानियों के लिए आकर्षण का स्थान बन गया है, परन्तु आज भी इसका मुख्य उद्देश्य समुद्र में तैरने जाने वालों को समुद्र के जोखिम के बारे में चेतावनी देना ही है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भी परमेश्वर ने हमारे लिए अनेक चेतावनी चिन्ह रखे हैं। बाइबल में इब्रानियों नामक पुस्तक हमारे आत्मा के लिए जोखिमों के बारे में बताती है; जैसे: "हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए" (इब्रानियों 3:12-13)। मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश जा रहे इस्त्राएलियों का परमेश्वर और उसकी बातों के प्रति अविश्वास और बलवा इस पद का संदर्भ है।

   यद्यपि इस्त्रएलियों के साथ यह घटना इब्रानियों की पुस्तक के लिखे जाने से कई शताबदियों पूर्व घटित हुई थी, उस घटना के आत्मिक सिद्धांत अब भी उतने ही महत्वपूर्ण तथा मान्य हैं जितने उस समय और इब्रानियों की पुस्तक लिखे जाने के समय थे। जो शिक्षा तथा चेतावनी परमेश्वर ने हमारे लिए यहाँ रखी है वह है पाप के कारण उत्पन्न होने वाली मनों की कठोरता, जिसका ना केवल स्वयं हमें प्रतिरोध करना है, वरन दूसरों को भी इसके विषय में सचेत करते रहना है।

   चेतावनी चिन्ह हमें सुरक्षित रखने के लिए दिए जाते हैं। परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने अपने जीवते वचन बाइबल में हमारे लाभ और सुरक्षा के लिए चेतावनियाँ दी हैं। यह हमारे प्रति उसके प्रेम का सूचक है और हमारे द्वारा उसकी आराधना करने का विषय। उसकी चेतावनियों को नज़रंदाज़ ना करें वरन उन्हें गंभीरता-पूर्वक लें। - डेनिस फिशर


परमेश्वर हमारे प्रति अपने प्रेम के अन्तर्गत अपने वचन के द्वारा हमारी सुरक्षा तथा संभाल की चेतावियाँ हम तक पहुँचाता है।

पर तुम चौकस रहो: देखो, मैं ने तुम्हें सब बातें पहिले ही से कह दी हैं। - मरकुस 13:23

बाइबल पाठ: इब्रानियों 3:1-13
Hebrews 3:1 सो हे पवित्र भाइयों तुम जो स्‍वर्गीय बुलाहट में भागी हो, उस प्रेरित और महायाजक यीशु पर जिसे हम अंगीकार करते हैं ध्यान करो। 
Hebrews 3:2 जो अपने नियुक्त करने वाले के लिये विश्वास योग्य था, जैसा मूसा भी उसके सारे घर में था। 
Hebrews 3:3 क्योंकि वह मूसा से इतना बढ़ कर महिमा के योग्य समझा गया है, जितना कि घर का बनाने वाला घर से बढ़ कर आदर रखता है। 
Hebrews 3:4 क्योंकि हर एक घर का कोई न कोई बनाने वाला होता है, पर जिसने सब कुछ बनाया वह परमेश्वर है। 
Hebrews 3:5 मूसा तो उसके सारे घर में सेवक की नाईं विश्वास योग्य रहा, कि जिन बातों का वर्णन होने वाला था, उन की गवाही दे। 
Hebrews 3:6 पर मसीह पुत्र की नाईं उसके घर का अधिकारी है, और उसका घर हम हैं, यदि हम साहस पर, और अपनी आशा के घमण्‍ड पर अन्‍त तक दृढ़ता से स्थिर रहें। 
Hebrews 3:7 सो जैसा पवित्र आत्मा कहता है, कि यदि आज तुम उसका शब्द सुनो। 
Hebrews 3:8 तो अपने मन को कठोर न करो, जैसा कि क्रोध दिलाने के समय और परीक्षा के दिन जंगल में किया था। 
Hebrews 3:9 जहां तुम्हारे बाप दादों ने मुझे जांच कर परखा और चालीस वर्ष तक मेरे काम देखे। 
Hebrews 3:10 इस कारण मैं उस समय के लोगों से रूठा रहा, और कहा, कि इन के मन सदा भटकते रहते हैं, और इन्‍होंने मेरे मार्गों को नहीं पहिचाना। 
Hebrews 3:11 तब मैं ने क्रोध में आकर शपथ खाई, कि वे मेरे विश्राम में प्रवेश करने न पाएंगे। 
Hebrews 3:12 हे भाइयो, चौकस रहो, कि तुम में ऐसा बुरा और अविश्वासी मन न हो, जो जीवते परमेश्वर से दूर हट जाए। 
Hebrews 3:13 वरन जिस दिन तक आज का दिन कहा जाता है, हर दिन एक दूसरे को समझाते रहो, ऐसा न हो, कि तुम में से कोई जन पाप के छल में आकर कठोर हो जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 10-12
  • प्रेरितों 19:1-20