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मंगलवार, 6 नवंबर 2018

सुरक्षित स्थान



      एक युवा जापानी व्यक्ति को समस्या थी – उसे अपना घर छोड़ने में घबराहट होती थी। अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचने के लिए वह दिन में सोता रहता था, और रात भर जागकर टेलिविज़न देखता रहता था। वह एक हिकिकोमोरी अर्थात आधुनिक सन्यासी बन गया था। उसकी समस्या का आरंभ स्कूल के समय में कक्षा में उसके कम अंक आने से हुई; लगातार कम अंक लाते रहने के कारण उसने स्कूल जाना छोड़ दिया, और सबसे अलग होकर रहने लगा। जितना अधिक वह समाज से दूर रहता गया, अपने आप को उतना ही अधिक समाज में अनुपयुक्त समझता चला गया। अन्ततः उसने परिवार और मित्र जनों से अभी संपर्क तोड़ लिए। उसे फिर से समाज से जुड़ने में सहायता करने के लिए टोक्यो शहर के एक युवकों के क्लब में, जिसे इबाशो कहते हैं, जाना पड़ा, जो कि एक ऐसा सुरक्षित स्थान है जहाँ अन्दर से टूटे हुए लोगों को फिर से समाज के साथ जोड़ने और स्थापित करने के लिए उनकी सहायता की जाती है।

      कैसा रहे यदि हम भी चर्च को एक इबाशो, या उससे भी बढ़कर समझें; एक ऐसा सुरक्षित स्थान जहाँ पाप और सँसार से आहात एवं टूटे हुए लोगों को पुनःस्थापित करने के लिए सहायता उपलब्ध रहती है। क्योंकि, निःसंदेह हम अन्दर से टूटे हुए लोगों का समाज हैं। जब परमेश्वर के वचन बाइबल में हम कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखी पौलुस की पहली पत्री को पढ़ते हैं, तो उसमें पाते हैं कि वह मसीही विश्वास में आने से पहले के उनके जीवन और व्यवहार के बारे में उन्हें स्मरण करवाता है, कि कैसे वे समाज-विरोधी, स्वयँ तथा औरों के लिए हानिकारक तथा खतरनाक जीवन जी रहे थे (1 कुरिन्थियों 6:9-10)। परन्तु प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने के द्वारा उनके जीवन में बड़ा परिवर्तन आया, और उनके जीवन बिलकुल बदल गए। पौलुस ने इन परिवर्तित लोगों को प्रोत्साहित किया कि वे एक दूसरे से प्रेम रखें, एक दूसरे के प्रति धीराजवंत और सहनशील रहें, ईर्षालु, अहंकारी और अशिष्ट न हों (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

      चर्च को भी सँसार के सभी लोगों के लिए एक ऐसा ही इबाशो अर्थात सुरक्षित स्थान होना है, जहाँ आने से कोई भी व्यक्ति, वह चाहे कैसी भी समस्या से जूझ रहा हो, किसी भी बात से टूट गया हो, परमेश्वर के प्रेम और करुणा का अनुभव कर सकता है। जहाँ प्रभु यीशु मसीह के अनुयायियों से सँसार के दुखी लोग्शान्ति और सांत्वना पा सकें। - पो फैंग चिया


केवल परमेश्वर ही पाप से बिगड़ी हुई आत्मा को 
अनुग्रह से सुधरी हुई उत्कृष्ठ कलाकृति बना सकता है।

सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। - रोमियों 5:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 6:9-11; 13:4-7
1 Corinthians 6:9 क्या तुम नहीं जानते, कि अन्यायी लोग परमेश्वर के राज्य के वारिस न होंगे? धोखा न खाओ, न वेश्यागामी, न मूर्तिपूजक, न परस्त्रीगामी, न लुच्‍चे, न पुरूषगामी।
1 Corinthians 6:10 न चोर, न लोभी, न पियक्कड़, न गाली देने वाले, न अन्‍धेर करने वाले परमेश्वर के राज्य के वारिस होंगे।
1 Corinthians 6:11 और तुम में से कितने ऐसे ही थे, परन्तु तुम प्रभु यीशु मसीह के नाम से और हमारे परमेश्वर के आत्मा से धोए गए, और पवित्र हुए और धर्मी ठहरे।
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं।
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता।
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है।
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 37-39
  • इब्रानियों 3



सोमवार, 5 नवंबर 2018

सेवा



      हमारे घर में कुछ मेहमान आकर रुके हुए थे। एक दिन मैंने उनमें से एक से पूछा, “क्या आप अपने कुछ गंदे कपड़े धुलवाना चाहेंगे?” यह सुनते ही उनका चेहरा खिल उठा और उन्होंने पास से निकलती हुई अपनी पुत्री से कहा, “जितने भी कपड़े धुलवाने हों, सब ले आओ; एमी हमारे कपड़े धोना चाह रही है!” यह जानकर कि मेरी “कुछ कपड़े” धोने की बात को बढ़ा कर “जितने भी” बना दिया गया है, मैं मुस्कुराई।

      बाद में सूखने के लिए रस्सी पर कपड़ों को डालते समय, उस प्रातः के परमेश्वर के वचन बाइबल से पढ़ा गया एक पद मुझे स्मरण हो आया, “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (फिलिप्पियों 2:3)। मैं फिलिप्पी के मसीही विश्वासियों को लिखी गई पौलुस प्रेरित की पत्री को पढ़ रही थी, जिसमें पौलुस उन लोगों को एक दूसरे की सेवा और परस्पर एक मनता की जीवन शैली के द्वारा मसीह यीशु की बुलाहट के अनुरूप जीवन जीने के लिए उभार रहा था। वे मसीही विश्वासी सताव से होकर निकल रहे थे, परन्तु पौलुस चाहता था कि वे एक मन होकर रहें। पौलुस जानता थी कि मसीह यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा जो परस्पर एक मनता उन्हें मिली है वह परस्पर सेवा के द्वारा ही व्यक्त हो सकती है, और यही उन्हें अपने मसीही विश्वास में भी दृढ़ बनाकर रखेगी।

      हम बिना किसी स्वार्थ या व्यर्थ अभिमान के, दूसरों के प्रति प्रेम रखने का दावा तो कर सकते हैं, परन्तु हमारे मनों की सही दशा तब तक प्रकट नहीं होती है जब तक हम परस्पर प्रेम के व्यवहार द्वारा उसे दर्शाते नहीं हैं। कपड़े धोने की मेरी बात का अनुचित लाभ लेते देख मेरा मन कुड़कड़ाने को तो हुआ, परन्तु साथ ही मुझे यह एहसास हुआ कि मसीह यीशु की अनुयायी होने के नाते मेरी बुलाहट अपने मित्रों के प्रति, सच्चे मन से अपने प्रेम को दिखाने की है, कुड़कड़ाने की नहीं।

      हम जब भी, परिवार, मित्रों, या पड़ौसियों के कारण, ऐसी किसी परिस्थिति में पड़ें, तब कुड़कड़ाने की बजाए हम उनकी सेवा के द्वारा अपने मसीही विश्वास को सार्थक बनाएँ। - एमी बाउचर पाई



एक दूसरे की सेवा के द्वारा एक मनता बढ़ती है।

भाईचारे के प्रेम से एक दूसरे पर दया रखो; परस्पर आदर करने में एक दूसरे से बढ़ चलो। - रोमियों 12:10

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:27-2:4
Philippians 1:27 केवल इतना करो कि तुम्हारा चाल-चलन मसीह के सुसमाचार के योग्य हो कि चाहे मैं आकर तुम्हें देखूं, चाहे न भी आऊं, तुम्हारे विषय में यह सुनूं, कि तुम एक ही आत्मा में स्थिर हो, और एक चित्त हो कर सुसमाचार के विश्वास के लिये परिश्रम करते रहते हो।
Philippians 1:28 और किसी बात में विरोधियों से भय नहीं खाते यह उन के लिये विनाश का स्‍पष्‍ट चिन्ह है, परन्तु तुम्हारे लिये उद्धार का, और यह परमेश्वर की ओर से है।
Philippians 1:29 क्योंकि मसीह के कारण तुम पर यह अनुग्रह हुआ कि न केवल उस पर विश्वास करो पर उसके लिये दुख भी उठाओ।
Philippians 1:30 और तुम्हें वैसा ही परिश्रम करना है, जैसा तुम ने मुझे करते देखा है, और अब भी सुनते हो, कि मैं वैसा ही करता हूं।
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 34-36
  • इब्रानियों 2



रविवार, 4 नवंबर 2018

विजेता



      हम में से लगभग सभी लोग एक अच्छे प्रशासन की अपेक्षा करते हैं। हम वोट देते हैं, हम कार्य करते हैं, हम उन कारणों के लिए आवाज़ उठाते हैं जिन्हें हम उचित और सही मानते हैं। परन्तु राजनैतिक समाधान लोगों के मनों की दशा को बदलने में असमर्थ रहते हैं।

      प्रभु यीशु के अनुयायियों में से बहुतेरे ऐसे मसीहा की प्रतीक्षा में थे जो रोमी शोषण और दमन का ज़ोरदार राजनैतिक प्रत्युत्तर दे सके। प्रभु यीशु का शिष्य पतरस भी भिन्न नहीं था। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि जब प्रभु यीशु को पकड़ने के लिए लोग आए, तो पतरस ने अपनी तलवार निकाली और महापुरोहित के सेवक पर वार किया, जिससे उस सेवक का कान कट गया।

      प्रभु यीशु ने तुरंत उसे रोका और उससे कहा “तब यीशु ने पतरस से कहा, अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊं?” (यूहन्ना 18:11)। इसके कुछ ही घंटों के बाद प्रभु यीशु ने उसका न्याय कर रहे रोमी राज्यपाल से कहा, “...मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं” (पद 36)।

      उस पल में जब प्रभु का जीवन अधर में लटका था, उनके द्वारा दिखाया गया संयम, चकित कर देने वाला है, विशेषकर तब जब हम उनके कार्य के द्वारा होने वाले विश्वव्यापी प्रभाव पर विचार करते हैं। भविष्य में एक दिन आएगा जब प्रभु अपनी स्वर्गीय सेनाओं को लेकर युद्ध में उतरेगा; यूहन्ना उसके विषय लिखता है, “फिर मैं ने स्वर्ग को खुला हुआ देखा; और देखता हूं कि एक श्वेत घोड़ा है; और उस पर एक सवार है, जो विश्वास योग्य, और सत्य कहलाता है; और वह धर्म के साथ न्याय और लड़ाई करता है” (प्रकाशितवाक्य 19:11)।

      परन्तु अपने पकड़वाए जाने, दिखावे के मुकद्दमों में इधर से उधर घसीटे जाने, यातनाएं दिए जाने और क्रूस पर चढ़ा कर मारे जाने की घटनाओं में प्रभु यीशु ने अपने स्वर्गीय पिता परमेश्वर की ही इच्छा को पूरा किया। क्रूस की मृत्यु को स्वीकार करने के द्वारा उन्होंने सारे सँसार के सभी लोगों के लिए एक ऐसे घटनाक्रम को आरंभ किया और दिशा दी जो वास्तव में लोगों के हृदयों को बदलता देता है। ऐसा करने में हमारे इस महान विजेता ने मृत्यु तक को पराजित कर दिया। - टिम गुस्ताफ्सन


वास्तविक संयम कमजोरी नहीं है, क्योंकि यह वास्तविक सामर्थ्य से ही संभव है।

इसलिये जब कि लड़के मांस और लोहू के भागी हैं, तो वह आप भी उन के समान उन का सहभागी हो गया; ताकि मृत्यु के द्वारा उसे जिसे मृत्यु पर शक्ति मिली थी, अर्थात शैतान को निकम्मा कर दे। और जितने मृत्यु के भय के मारे जीवन भर दासत्‍व में फंसे थे, उन्हें छुड़ा ले। - इब्रानियों 2:14-15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 18:10-14, 33-37
John 18:10 शमौन पतरस ने तलवार, जो उसके पास थी, खींची और महायाजक के दास पर चला कर, उसका दाहिना कान उड़ा दिया, उस दास का नाम मलखुस था।
John 18:11 तब यीशु ने पतरस से कहा, अपनी तलवार काठी में रख: जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है क्या मैं उसे न पीऊं?
John 18:12 तब सिपाहियों और उन के सूबेदार और यहूदियों के प्यादों ने यीशु को पकड़कर बान्‍ध लिया।
John 18:13 और पहिले उसे हन्ना के पास ले गए क्योंकि वह उस वर्ष के महायाजक काइफा का ससुर था।
John 18:14 यह वही काइफा था, जिसने यहूदियों को सलाह दी थी कि हमारे लोगों के लिये एक पुरूष का मरना अच्छा है।
John 18:33 तब पीलातुस फिर किले के भीतर गया और यीशु को बुलाकर, उस से पूछा, क्या तू यहूदियों का राजा है?
John 18:34 यीशु ने उत्तर दिया, क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या औरों ने मेरे विषय में तुझ से कही?
John 18:35 पीलातुस ने उत्तर दिया, क्या मैं यहूदी हूं? तेरी ही जाति और महायाजकों ने तुझे मेरे हाथ सौंपा, तू ने क्या किया है?
John 18:36 यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं।
John 18:37 पीलातुस ने उस से कहा, तो क्या तू राजा है? यीशु ने उत्तर दिया, कि तू कहता है, क्योंकि मैं राजा हूं; मैं ने इसलिये जन्म लिया, और इसलिये जगत में आया हूं कि सत्य पर गवाही दूं जो कोई सत्य का है, वह मेरा शब्द सुनता है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 32-33
  • इब्रानियों 1



शनिवार, 3 नवंबर 2018

सप्रेम



      अपनी पुस्तक Spiritual Leadership में ओस्वौल्ड सैंडर्स मसीही अगुवों द्वारा युक्ति और सप्रेम कूटनीति के गुणों के प्रयोग के महत्व को उजागर करते हैं। सैंडर्स ने कहा कि इन दो शब्दों के मेल से वह मार्ग बनता है जिससे कि, बिना ठेस पहुँचाए और बिना नैतिक सिद्धांतों से समझौता किए, विपरीत दृष्टिकोणों को परस्पर साथ लेकर चला जा सकता है।

      पौलुस जब रोम में बन्दीगृह में था, उस समय वह फिलेमोन नामक मसीही विश्वासी, जो कुलुस्से की एक मसीही मण्डली का अगुवा था, के एक भगोड़े दास उनेसिमुस का आत्मिक सलाहकार और अंतरंग मित्र हो गया था। जब पौलुस ने फिलेमोन को उनेसिमुस को एक मसीही भाई के समान वापस स्वीकार करने के लिए लिखा, तब पौलुस ने इसी सप्रेम युक्ति और कूटनीति के गुणों का उपयोग किया। पौलुस ने फिलेमोन को लिखी पत्री में कहा, “इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं। तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं। परन्तु अब से दास के समान नहीं, वरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो” (फिलेमोन 1:8-9, 16)।

      पौलुस आरंभिक मसीही मंडलियों में एक आदरणीय अगुवा था, और बहुधा मसीही विश्वासियों को स्पष्ट और सीधे निर्देश दिया करता था। परन्तु इस बार उसने आदेश देने के स्थान पर फिलेमोन के साथ समानता, मित्रता और प्रेम द्वारा व्यवहार किया; उसने फिलेमोन से कहा, “पर मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्द से हो” (पद 14)।

      अपने सभी संबंधों में हम परस्पर तालमेल और नैतिक सिद्धांतों के सप्रेम पालन को बनाए रखें। - डेविड मैक्कैस्लैंड


अच्छे अगुवे बनकर वे ही सेवकाई कर सकते हैं, 
जो सहनशीलता और नम्रता के साथ सेवा करते हैं ।

और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो। - कुलुस्सियों 3:13-14

बाइबल पाठ: फिलेमोन 1:8-18
Philemon 1:8 इसलिये यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा हियाव तो है, कि जो बात ठीक है, उस की आज्ञा तुझे दूं।
Philemon 1:9 तौभी मुझ बूढ़े पौलुस को जो अब मसीह यीशु के लिये कैदी हूं, यह और भी भला जान पड़ा कि प्रेम से बिनती करूं।
Philemon 1:10 मैं अपने बच्‍चे उनेसिमुस के लिये जो मुझ से मेरी कैद में जन्मा है तुझ से बिनती करता हूं।
Philemon 1:11 वह तो पहिले तेरे कुछ काम का न था, पर अब तेरे और मेरे दोनों के बड़े काम का है।
Philemon 1:12 उसी को अर्थात जो मेरे हृदय का टुकड़ा है, मैं ने उसे तेरे पास लौटा दिया है।
Philemon 1:13 उसे मैं अपने ही पास रखना चाहता था कि तेरी ओर से इस कैद में जो सुसमाचार के कारण है, मेरी सेवा करे।
Philemon 1:14 पर मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनन्द से हो।
Philemon 1:15 क्योंकि क्या जाने वह तुझ से कुछ दिन तक के लिये इसी कारण अलग हुआ कि सदैव तेरे निकट रहे।
Philemon 1:16 परन्तु अब से दास के समान नहीं, वरन दास से भी उत्तम, अर्थात भाई के समान रहे जो शरीर में भी और विशेष कर प्रभु में भी मेरा प्रिय हो।
Philemon 1:17 सो यदि तू मुझे सहभागी समझता है, तो उसे इस प्रकार ग्रहण कर जैसे मुझे।
Philemon 1:18 और यदि उसने तेरी कुछ हानि की है, या उस पर तेरा कुछ आता है, तो मेरे नाम पर लिख ले।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 30-31
  • फिलेमोन



शुक्रवार, 2 नवंबर 2018

सचेत और सतर्क



      काम करने की मेरी मेज़ हमारे पड़ौस की ओर खुलती है, और उस  स्थान से मैं निकट के पेड़ों पर आने-जाने वाले पक्षियों को नीचे धरती पर आकर चुगते हुए, और कुछ को खिड़की की जाली में फंसे कीड़ों को खाने के लिए आते देख सकता हूँ। वे पक्षी अपने चारों और किसी खतरे के आभास के लिए देखते और सुनते रहते हैं। वे तब ही भोजन करना आरंभ करते हैं जब वे निश्चिन्त हो जाते हैं कि आस-पास कोई ख़तरा नहीं है। तब भी, वे बीच-बीच में भोजन से रुक कर आसपास का किसी भी संभावित खतरे के लिए फिर से आँकलन कर लेते हैं।

      ये पक्षी जिस सतर्कता को दिखाते हैं, वह मुझे स्मरण दिलाती है कि परमेश्वर के वचन बाइबल में भी हम मसीही विश्वासियों को अपने मसीही विश्वास के प्रति सचेत और सतर्क रहने को कहा गया है। हमारा सँसार प्रलोभनों, आकर्षणों और लालचों से भरा हुआ है, जिनका प्रयोग शैतान हमें पथ-भ्रष्ट करने के प्रयासों के लिए करता रहता है, जैसे कि उसने अदन की वाटिका में आदम और हव्वा को बहकाने और पाप में फंसाने के लिए किया था; शैतान की बातों में आकर उन्होंने उस वर्जित फल को देखा कि “उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया” और वे परमेश्वर की अनाज्ञाकारिता के पाप को कर बैठे।

      प्रेरितों ने अपनी पत्रियों में हमें सचेत किया है: पौलुस ने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा, “जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो, पुरूषार्थ करो, बलवन्‍त होओ” (1 कुरिन्थियों 16:13); पतरस ने भी अपनी पत्री में लिखा, “सचेत हो, और जागते रहो, क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जने वाले सिंह के समान इस खोज में रहता है, कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8); और यहूदा ने भी लिखा कि “हे प्रियो, जब मैं तुम्हें उस उद्धार के विषय में लिखने में अत्यन्‍त परिश्रम से प्रयत्न कर रहा था, जिस में हम सब सहभागी हैं; तो मैं ने तुम्हें यह समझाना आवश्यक जाना कि उस विश्वास के लिये पूरा यत्‍न करो जो पवित्र लोगों को एक ही बार सौंपा गया था” (यहूदा 1:3)।

      अपने दैनिक जीवनों के लिए परिश्रम करते हुए, क्या हम उन बातों के प्रति सचेत रहते हैं जो हमारे लिए हानिकारक हो सकती हैं, हमें फंसा और पाप में गिरा सकती हैं? क्या हम अपने अन्दर आने वाले किसी भी स्वाभिमान अथवा उलझाने वाली लालसा के पनपने के प्रति सतर्क रहते हैं? क्या हम अपनी प्रत्येक इच्छा और लालसा को परमेश्वर के हाथों में समर्पित करके, उसकी इच्छा को सर्वोपरि रखने के लिए प्रयासरत रहते हैं? – लॉरेंस दरमानी


प्रलोभनों और परीक्षाओं से बच कर निकलने का सबसे सुरक्षित तरीका है
 परमेश्वर की आधीनता की ओर भागना।

इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकने वाली वस्तु, और उलझाने वाले पाप को दूर कर के, वह दौड़ जिस में हमें दौड़ना है, धीरज से दौड़ें। - इब्रानियों 12:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 3:1-7
Genesis 3:1 यहोवा परमेश्वर ने जितने बनैले पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, कि तुम इस बाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना?
Genesis 3:2 स्त्री ने सर्प से कहा, इस बाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं।
Genesis 3:3 पर जो वृक्ष बाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।
Genesis 3:4 तब सर्प ने स्त्री से कहा, तुम निश्चय न मरोगे,
Genesis 3:5 वरन परमेश्वर आप जानता है, कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आंखें खुल जाएंगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।
Genesis 3:6 सो जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उस में से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, और उसने भी खाया।
Genesis 3:7 तब उन दोनों की आंखे खुल गई, और उन को मालूम हुआ कि वे नंगे है; सो उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़ जोड़ कर लंगोट बना लिये।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 27-29
  • तीतुस 3



गुरुवार, 1 नवंबर 2018

सुरक्षा



      स्थानीय पार्क में विचरण करते समय, मेरा और मेरे बच्चों का सामन वहाँ विचरण के लिए आए किसी अन्य जन के कुत्तों से हुआ, जो पट्टे अथवा रस्सी से बंधे हुए नहीं थे, खुले घूम रहे थे। उन कुत्तों के मालिक को यह बात ध्यान में नहीं आई कि उन कुत्तों में से एक मेरे बेटे को डराने लगा था। मेरे बेटे ने उस कुत्ते को भगाने का प्रयास किया, परन्तु वह और भी अधिक उसे डराने लगा। अन्ततः घबराकर मेरे बेटे ने दूर की ओर भागना आरंभ कर दिया, किन्तु वह कुत्ता भी उसके पीछे  जाने लगा। यह देख मैंने तुरंत अपने बेटे को पुकार कर कहा, “दूर मत जाओ; भाग कर मेरे पास आओ!” मेरा बेटा भाग कर मेरे पास आ गया और शान्त हो गया। वह कुत्ता भी उसे मेरे पास देखकर किसी अन्य स्थान पर गड़बड़ी करने चला गया।

      हमारे जीवनों में ऐसी परिस्थितियाँ आती हैं जब परेशानियां हमें तंग करने लगती हैं, और हम उन बच कर इधर-उधर भागने लग जाते हैं। हम जितना उन परेशानियों से बचना चाहते हैं, वे उतनी अधिक हम पर हावी होने लगती हैं, हम उनसे बचने नहीं पाते हैं। हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता हमें अपने पास बुलाता है, पुकार कर हमें कहता है, “दूर मत जाओ; भाग कर मेरे पास आओ!”

      हम अपने आप में उन परेशानियों और कठिनाइयों पर जयवंत होने में सक्षम नहीं हैं; परन्तु हमारा परमेश्वर पिता सदैव हमारे साथ उपस्थित रहता है, हमें सहायता और सांत्वना प्रदान करता रहता है। हमें बस उसकी वाणी सुनकर उसकी ओर लौट कर आना है, उसका शरणागत होना है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करता है कि “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उस में भाग कर सब दुर्घटनाओं से बचता है” (नीतिवचन 18:10)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


संकट के समयों में परमेश्वर हमारा शरणस्थान है।

यहोवा मेरी चट्टान, और मेरा गढ़ और मेरा छुड़ाने वाला है; मेरा ईश्वर, मेरी चट्टान है, जिसका मैं शरणागत हूं, वह मेरी ढ़ाल और मेरी मुक्ति का सींग, और मेरा ऊँचा गढ़ है। - भजन 18:2

बाइबल पाठ: यशायाह 43:1-7
Isaiah 43:1 हे इस्राएल तेरा रचने वाला और हे याकूब तेरा सृजनहार यहोवा अब यों कहता है, मत डर, क्योंकि मैं ने तुझे छुड़ा लिया है; मैं ने तुझे नाम ले कर बुलाया है, तू मेरा ही है।
Isaiah 43:2 जब तू जल में हो कर जाए, मैं तेरे संग संग रहूंगा और जब तू नदियों में हो कर चले, तब वे तुझे न डुबा सकेंगी; जब तू आग में चले तब तुझे आंच न लगेगी, और उसकी लौ तुझे न जला सकेगी।
Isaiah 43:3 क्योंकि मैं यहोवा तेरा परमेश्वर हूं, इस्राएल का पवित्र मैं तेरा उद्धारकर्ता हूं। तेरी छुड़ौती में मैं मिस्र को और तेरी सन्ती कूश और सबा को देता हूं।
Isaiah 43:4 मेरी दृष्टि में तू अनमोल और प्रतिष्ठित ठहरा है और मैं तुझ से प्रेम रखता हूं, इस कारण मैं तेरी सन्ती मनुष्यों को और तेरे प्राण के बदले में राज्य राज्य के लोगों को दे दूंगा।
Isaiah 43:5 मत डर, क्योंकि मैं तेरे साथ हूं; मैं तेरे वंश को पूर्व से ले आऊंगा, और पच्छिम से भी इकट्ठा करूंगा।
Isaiah 43:6 मैं उत्तर से कहूंगा, दे दे, और दक्खिन से कि रोक मत रख; मेरे पुत्रों को दूर से और मेरी पुत्रियों को पृथ्वी की छोर से ले आओ;
Isaiah 43:7 हर एक को जो मेरा कहलाता है, जिस को मैं ने अपनी महिमा के लिये सृजा, जिस को मैं ने रचा और बनाया है।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 24-26
  • तीतुस 2



बुधवार, 31 अक्टूबर 2018

योजना



      मेरी एक मित्र अपने कार्य से सेवा-निवृत्ति पाने वाली थी, और मैंने उससे पूछा कि जीवन के अगले चरण के लिए उसकी क्या योजना है? उसने कहा कि वह सुनिश्चित करना चाहती है कि उसके पास जीवन यापन के लिए पर्याप्त पैसा रहे। इस वार्तालाप के अगले दिन, मैं अपने आर्थिक सलाहकार के साथ बात कर रहा था, और उसने मुझे सलाह दी कि मैं कैसे सुनिश्चित कर सकता हूँ कि मेरे पास पैसे की कमी न होने पाए। इसमें कोई संदेह नहीं कि हम सभी चाहते हैं कि हमारे पास हमारे शेष जीवन भर के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।

      किन्तु कोई भी आर्थक योजना पृथ्वी पर इस प्रकार की सुरक्षा की संपूर्ण गारंटी नहीं दे सकती है। परन्तु एक योजना है जो न केवल पृथ्वी पर, वरन इस जीवन के बाद भी अनन्त काल तक के लिए हमें सुरक्षा प्रदान कर सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में इसका विवरण दिया गया है। प्रभु यीशु का शिष्य, प्रेरित पतरस इसके विषय लिखते हुए कहता है, “हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया। अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये” (1 पतरस 1:3-4)।

      जब हम प्रभु यीशु मसीह में विशवास लाते हैं और उससे अपने पापों की क्षमा माँगकर अपना जीवन उसे समर्पित कर देते हैं, तब हम अपने उस विश्वास के द्वारा परमेश्वर की संतान और उसके घराने के हो जाते हैं, और परमेश्वर की अनन्त, अक्षय मीरास के वारिस बन जाते हैं। विश्वास से मिली इस आशीष के कारण, हम अनन्त काल तक जीवित रहेंगे और हमें कभी अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति में कमी नहीं होगी।

      यदि हम ऐसा कर सकते हैं, तो सेवा-निवृत्ति के लिए योजनाएं बनाना अच्छा है। परन्तु सबसे अधिक महत्वपूर्ण है ऐसे अक्षय संसाधनों और मीरास का वारिस होना, जिसकी सुरक्षा सदा बनी रहेगी, उपलब्ध रहेगी। और ऐसी योजना का लाभार्थी होना केवल प्रभु यीशु मसीह में लाए गए विश्वास के द्वारा ही संभव है। - डेव ब्रैनन


स्वर्ग की प्रतिज्ञा हमारी अनन्त आशा है।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 1:3-9
1 Peter 1:3 हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर और पिता का धन्यवाद दो, जिसने यीशु मसीह के हुओं में से जी उठने के द्वारा, अपनी बड़ी दया से हमें जीवित आशा के लिये नया जन्म दिया।
1 Peter 1:4 अर्थात एक अविनाशी और निर्मल, और अजर मीरास के लिये।
1 Peter 1:5 जो तुम्हारे लिये स्वर्ग में रखी है, जिन की रक्षा परमेश्वर की सामर्थ से, विश्वास के द्वारा उस उद्धार के लिये, जो आने वाले समय में प्रगट होने वाली है, की जाती है।
1 Peter 1:6 और इस कारण तुम मगन होते हो, यद्यपि अवश्य है कि अब कुछ दिन तक नाना प्रकार की परीक्षाओं के कारण उदास हो।
1 Peter 1:7 और यह इसलिये है कि तुम्हारा परखा हुआ विश्वास, जो आग से ताए हुए नाशमान सोने से भी कहीं अधिक बहुमूल्य है, यीशु मसीह के प्रगट होने पर प्रशंसा, और महिमा, और आदर का कारण ठहरे।
1 Peter 1:8 उस से तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास कर के ऐसे आनन्‍दित और मगन होते हो, जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है।
1 Peter 1:9 और अपने विश्वास का प्रतिफल अर्थात आत्माओं का उद्धार प्राप्त करते हो।


एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 22-23
  • तीतुस 1