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गुरुवार, 24 जनवरी 2019

व्यर्थ



      मेरा परिचित जन, जो वित्तीय सलाहकार का कार्य करता है, धन निवेश करने की वास्तविकता के बारे में एक तथ्य बताता है। वह कहता है, “सर्वोत्तम की आशा रखो किन्तु सर्वाधिक हानि के लिए तैयार रहो।” जीवन में हम जितने भी निर्णय करते हैं , उन सब के साथ अंतिम परिणाम के विषय कुछ न कुछ अनिश्चितता जुड़ी ही रहती है। परन्तु फिर भी एक मार्ग है जिसका अनुसरण कर के हम कभी हानि में नहीं रहेंगे, हमारा प्रयास कभी व्यर्थ नहीं जाएगा; वह मार्ग है प्रभु यीशु मसीह को उद्धारकर्ता स्वीकार करके अपना जीवन उसे समर्पित कर देना।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने भ्रष्ट और अनैतिक आचरण के लिए कुख्यात कोरिन्थ शहर में मसीह यीशु के अनुयायियों के साथ एक वर्ष बिताया। वहाँ से जाने के पश्चात, उसने उन्हें लिखे एक पत्र द्वारा प्रोत्साहित किया कि वे निराश न हों और यह न समझें कि मसीह यीशु के लिए उनके जीवन की गवाही व्यर्थ रही है। पौलुस ने उन्हें आश्वस्त किया कि वह दिन आ रहा है जब प्रभु यीशु लौट कर आएगा और तब मृत्यु भी पराजित हो जाएगी (1 कुरिन्थियों 15:52-55)।

      प्रभु यीशु के प्रति वफादार बने रहना कठिन, निराशाजनक, और खतरनाक तो हो सकता है, परन्तु कभी व्यर्थ और निर्थक नहीं होगा। हम जब प्रभु के साथ चलते हैं, हमारे जीवनों में कार्यकारी उसकी उपस्थिति और सामर्थ्य की गवाही देते हैं, तो हमारे जीवन व्यर्थ नहीं हैं! हम इसके विषय भरोसा रख सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


प्रभु यीशु मसीह के विषय हमारा जीवन और गवाही व्यर्थ नहीं है।

क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। - 2 कुरिन्थियों 4:11

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:50-58
1 Corinthians 15:50 हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाश अविनाशी का अधिकारी हो सकता है।
1 Corinthians 15:51 देखे, मैं तुम से भेद की बात कहता हूं: कि हम सब तो नहीं सोएंगे, परन्तु सब बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:52 और यह क्षण भर में, पलक मारते ही पिछली तुरही फूंकते ही होगा: क्योंकि तुरही फूंकी जाएगी और मुर्दे अविनाशी दशा में उठाए जांएगे, और हम बदल जाएंगे।
1 Corinthians 15:53 क्योंकि अवश्य है, कि यह नाशमान देह अविनाश को पहिन ले, और यह मरनहार देह अमरता को पहिन ले।
1 Corinthians 15:54 और जब यह नाशमान अविनाश को पहिन लेगा, और यह मरनहार अमरता को पहिन लेगा, तब वह वचन जो लिखा है, पूरा हो जाएगा, कि जय ने मृत्यु को निगल लिया।
1 Corinthians 15:55 हे मृत्यु तेरी जय कहां रही?
1 Corinthians 15:56 हे मृत्यु तेरा डंक कहां रहा? मृत्यु का डंक पाप है; और पाप का बल व्यवस्था है।
1 Corinthians 15:57 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवन्‍त करता है।
1 Corinthians 15:58 सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39



बुधवार, 23 जनवरी 2019

भरोसा



      कल्पना कीजिए कि आपको यात्रा पर जाना है, परन्तु अपने साथ कुछ भी नहीं ले जाना है – न बुनियादी आवश्यकताओं की कोई वस्तुएँ, न कपड़े, न पैसा, न क्रेडिट कार्ड, न कुछ और – यह बहुत मूर्खतापूर्ण और भयावह लगता है न?

      परन्तु हम परमेश्वर के वचन बाइबल में देखते हैं कि जब प्रभु यीशु ने अपने शिष्यों को उनकी सर्वप्रथम प्रचार और चंगाई की यात्रा पर भेजा तो उनसे ऐसा ही करने को कहा – “मार्ग के लिए लाठी छोड़ और कुछ नहीं लेना; कोई रोटी नहीं, कोई झोला नहीं, कोई बटुआ या पैसे नहीं, जूतियाँ तो पहन लो परन्तु दो कुरते मत ले जाना” (मरकुस 6:8-9)।

      परन्तु बाद में, जब प्रभु यीशु उन्हें अपने जाने के बाद के प्रचार के लिए तैयार कर रहे थे तो उनसे कहा, “परन्तु अब जिस के पास बटुआ हो वह उसे ले, और वैसे ही झोली भी, और जिस के पास तलवार न हो वह अपने कपड़े बेचकर एक मोल ले” (लूका 22:36)।

      ऐसा क्यों? प्रभु की इस बात का क्या अभिप्राय था? प्रभु अपने शिष्यों को परमेश्वर पर भरोसा रखना सिखा रहे थे।

      बाद में जब प्रभु ने उस पहले यात्रा के संदर्भ में उनसे पूछा, “जब मैं ने तुम्हें बटुए, और झोली, और जूते बिना भेजा था, तो क्या तुम को किसी वस्तु की घटी हुई थी?” तो शिष्यों ने उत्तर दिया, “किसी वस्तु की नहीं” (लूका 22:35)। उन शिष्यों के पास परमेश्वर के कार्य को करने के लिए जो कुछ आवश्यक था, सब उपलब्ध हो गया; परमेश्वर ने उन्हें उसका कार्य करने के लिए संपूर्ण सामर्थ्य दी (मरकुस 6:7)।

      क्या हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए परमेश्वर पर भरोसा रखते हैं? क्या हम उसकी सेवकाई के लिए अपनी ज़िम्मेदारी और योजना की आवश्यकता को समझते हैं? हम भरोसा रखें कि जब हम उसकी इच्छा के अनुसार उसके कार्य को करेंगे तो जो भी आवश्यक होगा, वह उसे हमें उपलब्ध करवाएगा। - पोह फैंग चिया


परमेश्वर की इच्छा, 
जब परमेश्वर के अनुसार पूरी की जाएगी, 
तो उसमें परमेश्वर के प्रावधानों के कभी घटी नहीं होगी
 – हडसन टेलर, चाइना इनलैंड मिशन के संस्थापक

और मेरा परमेश्वर भी अपने उस धन के अनुसार जो महिमा सहित मसीह यीशु में है तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा। - फिलिप्पियों 4:19

बाइबल पाठ: मरकुस 6:7-12
Mark 6:7 और वह बारहों को अपने पास बुलाकर उन्हें दो दो कर के भेजने लगा; और उन्हें अशुद्ध आत्माओं पर अधिकार दिया।
Mark 6:8 और उसने उन्हें आज्ञा दी, कि मार्ग के लिये लाठी छोड़ और कुछ न लो; न तो रोटी, न झोली, न पटुके में पैसे।
Mark 6:9 परन्तु जूतियां पहिनो और दो दो कुरते न पहिनो।
Mark 6:10 और उसने उन से कहा; जहां कहीं तुम किसी घर में उतरो तो जब तक वहां से विदा न हो, तब तक उसी में ठहरे रहो।
Mark 6:11 जिस स्थान के लोग तुम्हें ग्रहण न करें, और तुम्हारी न सुनें, वहां से चलते ही अपने तलवों की धूल झाड़ डालो, कि उन पर गवाही हो।
Mark 6:12 और उन्होंने जा कर प्रचार किया, कि मन फिराओ।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15: 1-20



मंगलवार, 22 जनवरी 2019

चेहरा



      एक लेखक के रूप में मेरी अधिकांश जीविका दुःख की समस्या को संबोधित करने में व्यतीत हुई है। मैं बारंबार लौट कर उन्हीं प्रश्नों पर आ जाता हूँ, मानो एक ऐसे घाव को कुरेदता रहता हूँ जो कभी भरने का नहीं। मुझे अपने पाठकों की प्रतिक्रियाएं प्राप्त होती हैं, और उनकी दुखद कहानियाँ मेरी शंकाओं को एक मान्वीय चहरे प्रदान करती हैं। मुझे स्मरण है कि एक युवा पास्टर ने मुझे फोन करके प्रश्न किया, “अब भला मैं अपने युवाओं के समूह के साथ एक प्रेमी परमेश्वर के बारे में कैसे बात कर सकता हूँ?” – उसकी पत्नि और शिशु बच्ची ऐड्स से ग्रसित होकर मर रहे थे क्योंकि उन्हें एड्स से संक्रमित रक्त चढ़ा दिया गया था!

      मैंने सीख लिया है कि इस प्रकार के “क्यूँ?” प्रश्नों का उत्तर देने का प्रयास भी नहीं करूँ। उस पास्टर के पत्नि को वही एक संक्रमित खून की बोतल ही क्यों मिली? क्यों चक्रवाधि तूफ़ान ने एक नगर को तबाह कर दिया और पास के दूसरे नगर की कुछ हानि नहीं हुई? क्यों शारीरिक चंगाई के लिए की गई प्रार्थनाएं निरुत्तरित चली जाती हैं?

      लेकिन एक प्रश्न है जो मुझे अब वैसे परेशान नहीं करता है, जैसे पहले किया करता था – “क्या परमेश्वर को हमारी परवाह है?” मैं इस प्रश्न का केवल एक ही उत्तर जानता हूँ, और वह उत्तर है प्रभु यीशु मसीह। प्रभु यीशु मसीह में परमेश्वर ने हमें वह चेहरा दिया है जिसे देखने से हमें पता चल जाता है कि परमेश्वर इस दुःख से कराहते हुए सँसार की परवाह करता है कि नहीं।

      “क्या परमेश्वर को हमारी प्रवाह है?” हमारे पापों के लिए परमेश्वर के पुत्र की मृत्यु, जिससे अन्तः सारा दुःख, कष्ट, पीड़ा, और मृत्यु भी सदा के लिए समाप्त हो जाएँगी, ही इस प्रश्न का उत्तर है – “इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो” (2 कुरिन्थियों 4: 6)। - फिलिप यैंसी


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम का विस्तार क्रूस पर मसीह यीशु की फ़ैली हुई बाहों के जितना है।

फिर मैं ने सिंहासन में से किसी को ऊंचे शब्द से यह कहते सुना, कि देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है; वह उन के साथ डेरा करेगा, और वे उसके लोग होंगे, और परमेश्वर आप उन के साथ रहेगा; और उन का परमेश्वर होगा। और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:3-4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-11
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते।
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते।
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो।
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 4-6
  • मत्ती 14: 22-36



सोमवार, 21 जनवरी 2019

भरोसा



      जब मैं कॉलेज में बास्केटबॉल खेला करता था, तो खेल के प्रत्येक समय में मुझे जान-बूझकर निर्णय लेना और निभाना होता था कि मैं खेलने के लिए नियमित रूप से क्रीड़ास्थल तक जाऊँगा, और अपने प्रशिक्षक पर पूरा भरोसा रखते हुए उसके कहे के अनुसार करूँगा और खेलूँगा। यह मेरे स्वयँ के लिए तथा मेरी टीम के लिए भी कदापि लाभप्रद नहीं होता यदि मैं खेल के स्थान पर पहुँचकर कहने लगता, “देखिए प्रशिक्षक महोदय, मैं यहाँ आ गया हूँ और मैं गेंद को बास्केट में डालना, तथा उसे टप्पा खिलाते हुए लेकर भागना तो चाहता हूँ, परन्तु मुझ से दौड़ कर मैदान के चक्कर लगाने, पीछे रहकर रक्षक की भूमिका में खेलने, या पसीना बहाने के लिए मत कहिए!” प्रत्येक सफल खिलाड़ी को अपने प्रशिक्षक पर भरोसा रख कर उसके कहे के अनुसार करना होता है, अपने तथा टीम के भले के लिए।

      इसी प्रकार मसीही विश्वास के जीवन में भी हमें परमेश्वर को समर्पित “जीवित बलिदान” (रोमियों 12:1) बनना होता है। हम अपने उद्धारकर्ता और प्रभु से कहते हैं, “मैं आप पर भरोसा रखता हूँ; आप जो और जैसा चाहेंगे मैं वो और वैसा करूँगा।” हमारे ऐसे समर्पण एवँ आज्ञाकारिता के परिणामस्वरूप वह हमारे मनों को उन बातों पर लगाने में हमारी सहायता और मार्गदर्शन करता है जो उसे पसन्द हैं और हमारे तथा मसीही समाज की भलाई के लिए हैं, और इसके द्वारा हमें अपने स्वरूप में परिवर्तित करता रहता है।

      यह ध्यान रखना हमारे लिए लाभदायक है कि परमेश्वर हमें कभी ऐसे कार्य करने के लिए नहीं बुलाएगा जिनके लिए उसने हमें आवश्यक सामर्थ्य नहीं दे दी है, जैसा कि परमेश्वर के वचन बाइबल में पौलुस प्रेरित ने रोम के मसीही विश्वासियों को स्मरण करवाया: “और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं...” (पद 6)।

      यह जानते हुए कि हम अपने जीवनों और आवश्यकताओं के लिए परमेश्वर पर पूरा भरोसा रख सकते हैं, हम निश्चिन्त होकर उसकी आज्ञाकारिता में जीवन व्यतीत कर सकते हैं, इस ज्ञान से आश्वस्त कि जिसने हमें रचा है, वही हमारा रक्षक और मार्गदर्शक भी है। - डेव ब्रैनन


निश्चिन्त होकर अपने आप को परमेश्वर के हाथों में छोड़ देने में कोई जोखिम नहीं है।

परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे। - यशायाह 40:31

बाइबल पाठ: रोमियों 12:1-8
Romans 12:1 इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है।
Romans 12:2 और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो।
Romans 12:3 क्योंकि मैं उस अनुग्रह के कारण जो मुझ को मिला है, तुम में से हर एक से कहता हूं, कि जैसा समझना चाहिए, उस से बढ़कर कोई भी अपने आप को न समझे पर जैसा परमेश्वर ने हर एक को परिमाण के अनुसार बांट दिया है, वैसा ही सुबुद्धि के साथ अपने को समझे।
Romans 12:4 क्योंकि जैसे हमारी एक देह में बहुत से अंग हैं, और सब अंगों का एक ही सा काम नहीं।
Romans 12:5 वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह हो कर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।
Romans 12:6 और जब कि उस अनुग्रह के अनुसार जो हमें दिया गया है, हमें भिन्न भिन्न वरदान मिले हैं, तो जिस को भविष्यद्वाणी का दान मिला हो, वह विश्वास के परिमाण के अनुसार भविष्यद्वाणी करे।
Romans 12:7 यदि सेवा करने का दान मिला हो, तो सेवा में लगा रहे, यदि कोई सिखाने वाला हो, तो सिखाने में लगा रहे।
Romans 12:8 जो उपदेशक हो, वह उपदेश देने में लगा रहे; दान देनेवाला उदारता से दे, जो अगुआई करे, वह उत्साह से करे, जो दया करे, वह हर्ष से करे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 1-3
  • मत्ती 14: 1-21



रविवार, 20 जनवरी 2019

कृतज्ञता और धन्यवाद



      एक सर्द, जमा देने वाली ठंडी की प्रातः, मैं और मेरी बेटी चलकर स्कूल जा रहे थे, और उस ठण्ड में हम अपने श्वास को भाप में परिवर्तित होता देखकर आनन्दित हो रहे थे। हम भाप के उन छोटे बादलों को बनाने से आनन्दित हो रहे थे, मेरे लिए वे पल एक उपहार के समान थे, जब मैं अपनी बेटी की संगति में आनदित हो सकती थी, जीवित अनुभव कर सकती थी।

      हमारी श्वास जो सामान्यतः अदृश्य रहती है, हवा के ठन्डे होने के कारण दिखाई दे रही थी, और इससे मैं अपने जीवन और श्वास के स्त्रोत – हमारे सृष्टिकर्ता प्रभु के बारे में सोचने लगी। उसी ने आदम को धरती की मिट्टी से बनाया और उसमें जीवन का श्वास फूंका, और वही है जो हमें तथा सभी जीवित प्राणियों को जीवन का दान देता है (उत्पत्ति 2:7)। सभी वस्तुएँ उस ही से आती हैं, हमारी श्वास भी, जिसे अन्दर-बाहर लेते हुए हम उसके बारे में सोचते भी नहीं हैं।

      हम आज की तकनीकियों और सुविधाओं में होकर अपने आरंभ को तथा इस तथ्य को कि परमेश्वर ही है जो हमें जीवन देता है, भूल सकते हैं। परन्तु जब हम थोड़ा थम कर यह स्मरण करते हैं कि परमेश्वर ही हमारा सृष्टिकर्ता है, तो हम उसके प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी बन सकते हैं। हम उससे अपने जीवन एवं कार्यों के लिए सहायता माँग सकते हैं, और कृतज्ञ तथा धन्यवादी हृदयों के साथ उससे मिलने वाली सहायता, कृपा और सुरक्षा के लिए उसकी आराधना कर सकते हैं। हमारा यह कृतज्ञ एवँ धन्यवादी होना औरों को भी छू सकता है, और उन्हें भी इन बातों के प्रति सजग करके, उनके मनों से भी कृतज्ञता एवँ धन्यवाद के साथ परमेश्वर की आराधना और स्तुति करवा सकता है। - एमी बाउचर पाई


अपने सृष्टिकर्ता परमेश्वर के प्रति कृतज्ञ और धन्यवादी रहो, 
जिससे जीवन और सभी आशीषें मिलती हैं।

इस संसार के धनवानों को आज्ञा दे, कि वे अभिमानी न हों और चंचल धन पर आशा न रखें, परन्तु परमेश्वर पर जो हमारे सुख के लिये सब कुछ बहुतायत से देता है। - 1 तिमुथियुस 6:17

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 2:4-8
Genesis 2:4 आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया:
Genesis 2:5 तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था;
Genesis 2:6 तौभी कोहरा पृथ्वी से उठता था जिस से सारी भूमि सिंच जाती थी
Genesis 2:7 और यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूंक दिया; और आदम जीवता प्राणी बन गया।
Genesis 2:8 और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर अदन देश में एक वाटिका लगाई; और वहां आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 49-50
  • मत्ती 13:31-58



शनिवार, 19 जनवरी 2019

खज़ाना



      मार्च 1974 में चीन में कुछ किसानों द्वारा कूँआ खोदते समय एक चौंका देने वाली खोज हुई: मध्य चीन की उस सूखी भूमि में चीन की प्रसिद्ध टेराकोटा सेना छुपी हुई थी – मिट्टी की आदम-कद मूर्तियाँ जिन्हें आग में पका कर मजबूत किया गया था, और जो ईसा-पूर्व तीसरी शताब्दी में बनाई गई थीं। उस अद्भुत खोज में 8000 सैनिकों, 150 अश्वरोही सेना, 130 रथ, जिन्हें 520 घोड़े खींच रहे थे पाए गए। वह टेराकोटा सेना चीन के प्रमुख सैलानी स्थलों में से एक बन गई है, जहाँ दस लाख से भी अधिक सैलानी प्रति वर्ष आते हैं। वह अद्भुत खज़ाना शताब्दियों तक छिपा पड़ा रहा, परन्तु अब उसे सँसार के साथ साझा किया जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, कि हम मसीही अनुयायियों में एक खज़ाना उपलब्ध करवाया गया है, जिसे हमें संसार के साथ बाँटना है: “परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे” (2 कुरिन्थियों 4:7)। हमारे अन्दर रखा गया वह खज़ाना मसीह यीशु के प्रेम और उसमें सँसार के प्रत्येक व्यक्ति को मिल सकने वाली पापों की क्षमा तथा उद्धार का सन्देश है।

      इस खजाने को हमें छिपा कर नहीं रखना है वरन इसे सँसार के साथ बाँटना है जिससे परमेश्वर के प्रेम और अनुग्रह में होकर सँसार के प्रत्येक स्थान के लोग परमेश्वर के परिवार में सम्मिलित हो सकें। आज, हम मसीही विश्वासियों में निवास करने वाली परमेश्वर की पवित्र आत्मा की सहायता से, इस अद्भुत खजाने को किसी के साथ बाँटें। - बिल क्राउडर


औरों को मसीही जीवन की अपनी गवाही को देखने और सुनने दें।

और लोग दिया जलाकर पैमाने के नीचे नहीं परन्तु दीवट पर रखते हैं, तब उस से घर के सब लोगों को प्रकाश पहुंचता है। उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:15-16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4: 1-7
2 Corinthians 4:1 इसलिये जब हम पर ऐसी दया हुई, कि हमें यह सेवा मिली, तो हम हियाव नहीं छोड़ते।
2 Corinthians 4:2 परन्तु हम ने लज्ज़ा के गुप्‍त कामों को त्याग दिया, और न चतुराई से चलते, और न परमेश्वर के वचन में मिलावट करते हैं, परन्तु सत्य को प्रगट कर के, परमेश्वर के साम्हने हर एक मनुष्य के विवेक में अपनी भलाई बैठाते हैं।
2 Corinthians 4:3 परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है।
2 Corinthians 4:4 और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके।
2 Corinthians 4:5 क्योंकि हम अपने को नहीं, परन्तु मसीह यीशु को प्रचार करते हैं, कि वह प्रभु है; और अपने विषय में यह कहते हैं, कि हम यीशु के कारण तुम्हारे सेवक हैं।
2 Corinthians 4:6 इसलिये कि परमेश्वर ही है, जिसने कहा, कि अन्धकार में से ज्योति चमके; और वही हमारे हृदयों में चमका, कि परमेश्वर की महिमा की पहिचान की ज्योति यीशु मसीह के चेहरे से प्रकाशमान हो।
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 46-48
  • मत्ती 13:1-30



शुक्रवार, 18 जनवरी 2019

प्रभाव



      कई वर्ष पहले की बात है, मेरी पत्नि और मैं इंग्लैंड के एक ग्रामीण इलाके के एक छोटे से होटल में रुके थे, जहाँ चार और ब्रिटिश जोड़े भी रुके हुए थे, किन्तु हम एक दूसरे से पहले कभी नहीं मिले थे। रात्रि के भोजन के पश्चात हम सब बैठे कॉफी पी रहे थे और वार्तालाप हो रहा था, जिसमें हमारे कार्य के बारे में बात उठी। उस समय मैं अमेरिका के शिकागो शहर में मूडी बाइबल इंस्टीट्यूट का अध्यक्ष था, और मुझे लगा कि उन उपस्थित परिवारों में से किसी ने भी मेरे कार्यस्थल का नाम नहीं सुना होगा, और न ही उसके संस्थापक डी. एल. मूडी के विषय वे कुछ जानते होंगे। परन्तु मेरे द्वारा मूडी का नाम लेते ही, उन सबकी तुरन्त प्रतिक्रिया से मैं अचंभित हुआ; एक ने कहा “वह मूडी जो मूडी और सैन्की वाले हैं?” एक अन्य ने कहा, “हमारे पास सैन्की के भजनों की पुस्तक है, और हमारा परिवार बहुधा प्यानों के चारों ओर एकत्रित होकर उसमें से परमेश्वर की स्तुति में भजन गाता है।” मुझे बहुत अचरज हुआ! सुसमाचार प्रचारक ड्वाइट मूडी और उनके साथ की संगीतज्ञा आयरा सैन्की ने ब्रिटेन के इलाकों में 120 वर्ष से भी अधिक पहले सुसमाचार सभाएं संबोधित की थीं, और उनका प्रभाव अभी भी अनुभव किया जा रहा था।

      उस रात्रि, उस कमरे से जाते हुए, मैं सोच रहा था कि हमारे जीवन परमेश्वर के लिए बहुत दूर तक प्रभाव डाल सकते हैं – एक प्रार्थना करने वाले माँ का उसके बच्चों के जीवन पर प्रभाव, एक सहकर्मी द्वारा कहे गए प्रोत्साहन के शब्दों का प्रभाव, एक शिक्षक अथवा परामर्शदाता से मिलने वाली सहायता और चुनौतियों का प्रभाव, एक मित्र के सप्रेम कहे गए सुधारने वाले शब्दों का प्रभाव – सभी बहुत दूर तक जीवन में प्रभाव दिखाते हैं।

      परमेश्वर के आश्वासन, “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) में होकर उसके लिए कार्य करना एक महान सौभाग्य है। - जो स्टोवैल


केवल वही स्थाई रहेगा जो मसीह यीशु में होकर किया गया है।

इसलिये जान रख कि तेरा परमेश्वर यहोवा ही परमेश्वर है, वह विश्वासयोग्य ईश्वर है; और जो उस से प्रेम रखते और उसकी आज्ञाएं मानते हैं उनके साथ वह हजार पीढ़ी तक अपनी वाचा पालता, और उन पर करूणा करता रहता है; - व्यवस्थाविवरण 7:9

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।
                                                                                                                                                        
एक साल में बाइबल: 
  • उत्पत्ति 43-45
  • मत्ती 12:24-50