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रविवार, 26 जुलाई 2020

सेवा


     कुछ लोग एक साथ खड़े थे, और आँगन में गिरे हुए एक विशाल वृक्ष को देख रहे थे। एक वृद्ध महिला, अपनी छड़ी के सहारे खड़ी हुई, रात आए तूफ़ान और उसके कारण उस वृक्ष के गिर जाने का वर्णन कर रही थी। उसने भरभराई आवाज़ में कहा, “न केवल यह पेड़ गिरा, परन्तु इससे पत्थरों से बनी हमारे आँगन की सुन्दर दीवार भी गिर गई, जिसे मेरे पति ने हमारे विवाह के वर्ष में बनाया था। उन्हें वह दीवार बहुत पसंद थी, और मुझे भी वह बहुत पसंद थी! अब उनके समान यह दीवार भी जाती रही है।”

     अगली प्रातः उसने खिड़की से बाहर झाँक कर देखा कि कंपनी के कर्मचारी आकर उस गिरे हुए पेड़ को हटा रहे थे; साथ ही कुछ और भी हो रहा था, जिसे देखकर उसके चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कराहट आ गई। गिरे हुए पेड़ के डालियों के बीच में से उसने देखा कि दो वयस्क आदमी और एक लड़का जो उसके लॉन की घास काटता था, उसकी प्रिय दीवार की मरम्मत करने के सामान के साथ वहां थे और दीवार के नाप ले रहे थे, जिससे उसकी प्रिय दीवार को फिर से बना दें।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता उस सेवा का वर्णन करता है जो परमेश्वर को पसंद है: ऐसे कार्य जो हमारे आस-पास के लोगों के मनों को प्रसन्न करते हैं, जैसे कि उन दीवार की मरम्मत करने वालों ने उस वृद्ध महिला के लिए किया था। बाइबल का यह खण्ड यह भी बताता है कि परमेश्वर धार्मिक क्रियाओं के व्यर्थ निर्वाह करने के स्थान पर निःस्वार्थ सेवा को अधिक मूल्यवान समझता है। यथार्थ में, परमेश्वर अपने बच्चों द्वारा की गई निःस्वार्थ सेवा पर दोहरी आशीष देता है। पहले, परमेश्वर हमारी स्वेच्छा से की गई सेवा को शोषित और आवश्यकता में पड़े लोगों की सहायता के लिए प्रयोग करता है (यशायाह 58:7-10)। फिर वह जो इस सेवा में लगे हैं, उनको आदर प्रदान करता है, उनकी प्रतिष्ठा को बना या बढ़ा कर, जिससे वे उसके राज्य में प्रबल सकारात्मक प्रभाव हों (पद 11, 12)।

     आज आप परमेश्वर के लिए क्या सेवा अर्पित करेंगे? – रैंडी किल्गोर

 

दूसरों की निःस्वार्थ सेवा से परमेश्वर को आदर मिलता है।


 अपनी रोटी जल के ऊपर डाल दे, क्योंकि बहुत दिन के बाद तू उसे फिर पाएगा। - सभोपदेशक 11:1

बाइबल पाठ: यशायाह 58:6-12

यशायाह 58:6 जिस उपवास से मैं प्रसन्न होता हूं, वह क्या यह नहीं, कि, अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहने वालों का जुआ तोड़कर उन को छुड़ा लेना, और, सब जूओं को टुकड़े टुकड़े कर देना?

यशायाह 58:7 क्या वह यह नहीं है कि अपनी रोटी भूखों को बांट देना, अनाथ और मारे मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहनाना, और अपने जाति-भाइयों से अपने को न छिपाना?

यशायाह 58:8 तब तेरा प्रकाश पौ फटने के समान चमकेगा, और तू शीघ्र चंगा हो जाएगा; तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।

यशायाह 58:9 तब तू पुकारेगा और यहोवा उत्तर देगा; तू दुहाई देगा और वह कहेगा, मैं यहां हूं। यदि तू अन्धेर करना और उंगली मटकाना, और, दुष्ट बातें बोलना छोड़ दे,

यशायाह 58:10 उदारता से भूखे की सहायता करे और दीन दु:खियों को सन्तुष्ट करे, तब अन्धियारे में तेरा प्रकाश चमकेगा, और तेरा घोर अन्धकार दोपहर का सा उजियाला हो जाएगा।

यशायाह 58:11 और यहोवा तुझे लगातार लिये चलेगा, और काल के समय तुझे तृप्त और तेरी हड्डियों को हरी भरी करेगा; और तू सींची हुई बारी और ऐसे सोते के समान होगा जिसका जल कभी नहीं सूखता।

यशायाह 58:12 और तेरे वंश के लोग बहुत काल के उजड़े हुए स्थानों को फिर बसाएंगे; तू पीढ़ी पीढ़ी की पड़ी हुई नेव पर घर उठाएगा; तेरा नाम टूटे हुए बाड़े का सुधारक और पथों का ठीक करने वाला पड़ेगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 40-42
  • प्रेरितों 27:1-26


शनिवार, 25 जुलाई 2020

सिद्ध


     मेरे कॉलेज के एक प्रोफ़ेसर ने मेरी बिलकुल सिद्ध कार्य करने की अभिलाषा के कारण काम करने को टालने की प्रवृति के विषय मुझे कुछ अच्छा परामर्श दिया। उनहोंने कहा, “सिद्धता को अच्छे होने का शत्रु मत बनने दो,” उन्होंने समझाते हुए कहा, सिद्ध प्रदर्शन के प्रयास में मैं बढ़ोतरी के लिए आवश्यक जोखिम उठाने से अपने आप को रोके रख सकती हूँ। यह स्वीकार कर लेना कि मैं सदा ही असिद्ध रहूँगी, मुझे बढ़ोतरी के लिए प्रयास करने की स्वतंत्रता देगा।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस इससे भी गंभीर कारण बताता है कि हम स्वयं को सिद्ध बनाने के प्रयासों को छोड़ दें – क्योंकि यह हमें प्रभु यीशु की हमारी आवश्यकता के प्रति अँधा कर सकता है। पौलुस ने इस तथ्य को कठिन तरीके से सीखा था। वह वर्षों तक सिद्धता से परमेश्वर की व्यवस्था के पालन के लिए प्रयास करता रहा। लेकिन जब उसका प्रभु यीशु से सामना हुआ तो उस से सब कुछ बदल गया (गलातियों 1:11-16)। पौलुस को बोध हुआ कि परमेश्वर के समक्ष सही और पूर्ण होने के लिए यदि उसके अपने प्रयास पर्याप्त होते, तो फिर प्रभु यीशु को मरने की कोई आवश्यकता ही नहीं थी (गलातियों 2:21)। केवल अपने इस प्रयास को छोड़ देने के द्वारा, अपने आप पर निर्भर होने की अपनी प्रवृति का त्याग कर देने के बाद ही, वह प्रभु यीशु को अपने अन्दर निवास करते हुए अनुभव कर सका (पद 20)। अपनी असिद्धता में ही वह परमेश्वर की सिद्ध सामर्थ्य को अनुभव कर सका।

     इसका यह अभिप्राय नहीं है कि हम पाप का प्रतिरोध करना छोड़ दें (पद 17); परन्तु इसका यह अर्थ अवश्य है कि हम अपनी आत्मिक बढ़ोतरी के लिए अपने प्रयासों पर भरोसा करना छोड़ दें (पद 20)। हमारे पृथ्वी के जीवन में हम सदा ही “कार्य प्रगति पर है” बने रहेंगे। परन्तु जब हम दीन होकर उस सर्वसिद्ध प्रभु परमेश्वर की हमारी निरंतर बनी रहने वाली आवश्यकता को स्वीकार करेंगे, तो वह  हमारे अन्दर घर बनाएगा और रहेगा (इफिसियों 3:17)।

     उस सर्व सिद्ध में अपने जीवनों की जड़ें जमा कर हम उसके प्रेम में और अधिक बढ़ते जाने के लिए पूर्णतः स्वतंत्र हैं, और वह हमें अपने सिद्ध स्वरूप में ढालता चला जाएगा (2 कुरिन्थियों 3:18)। - मोनिका ब्रैंड्स

 

हम सिद्ध यीशु के प्रेम में बढ़ते जाने के लिए स्वतंत्र हैं।


परन्तु जब हम सब के उघाड़े चेहरे से प्रभु का प्रताप इस प्रकार प्रगट होता है, जिस प्रकार दर्पण में, तो प्रभु के द्वारा जो आत्मा है, हम उसी तेजस्‍वी रूप में अंश अंश कर के बदलते जाते हैं। - (2 कुरिन्थियों 3:18)

बाइबल पाठ: गलातियों 2:17-21

गलातियों 2:17 हम जो मसीह में धर्मी ठहरना चाहते हैं, यदि आप ही पापी निकलें, तो क्या मसीह पाप का सेवक है? कदापि नहीं।

गलातियों 2:18 क्योंकि जो कुछ मैं ने गिरा दिया, यदि उसी को फिर बनाता हूं, तो अपने आप को अपराधी ठहराता हूं।

गलातियों 2:19 मैं तो व्यवस्था के द्वारा व्यवस्था के लिये मर गया, कि परमेश्वर के लिये जीऊं।

गलातियों 2:20 मैं मसीह के साथ क्रूस पर चढ़ाया गया हूं, और अब मैं जीवित न रहा, पर मसीह मुझ में जीवित है: और मैं शरीर में अब जो जीवित हूं तो केवल उस विश्वास से जीवित हूं, जो परमेश्वर के पुत्र पर है, जिसने मुझ से प्रेम किया, और मेरे लिये अपने आप को दे दिया।

गलातियों 2:21 मैं परमेश्वर के अनुग्रह को व्यर्थ नहीं ठहराता, क्योंकि यदि व्यवस्था के द्वारा धामिर्कता होती, तो मसीह का मरना व्यर्थ होता।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 37-39
  • प्रेरितों 26


शुक्रवार, 24 जुलाई 2020

समझ


     मेरे कुछ मित्र हैं जिन्हें आंशिक चंगाई तो मिली है, किन्तु उन्हें अभी भी अपनी अस्वस्थता के दुखद पहलुओं से अभी भी संघर्ष करना पड़ता है। एनी मित्रों को उनकी किसी लत से चंगाई मिली है परन्तु वे अभी भी आत्म-ग्लानि और अयोग्यता की भावनाओं के साथ संघर्ष करते हैं। और मैं विचार करता हूँ कि परमेश्वर उन्हें एक ही बार में पूर्णतया चंगा क्यों नहीं कर देता है?

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम मरकुस 8:22-26 में प्रभु यीशु द्वारा जन्म के अंधे मनुष्य की चंगाई की घटना को पढ़ते हैं। यीशु उस अंधे आदमी को पहले गाँव से बाहर ले गया, फिर उसने उस आदमी की आँखों पर थूका और उनपर अपने हाथ रखे। आदमी ने कहा कि वह देख तो सकता है, परन्तु उसे आदमी चलते हुए, और पेड़ों के समान दिखाई देते हैं। प्रभु यीशु ने फिर से उस आदमी की आँखों को छुआ, और अब वह आदमे सब कुछ स्पष्ट देखने लगा।

     पृथ्वी पर उसकी सेवकाई के दिनों में यीशु की कार्यों ने बहुधा उसके अनुयायियों और भीड़ को चकित किया, दुविधा में डाला (मत्ती 7:28; लूका 8:10; 11:14) जिस से कुछ तो उसे छोड़ कर भी चले गए (यूहन्ना 6:60-66)। निःसंदेह इस दो भागों में किए गए आश्चर्यकर्म से भी लोग असमंजस में पड़े होंगे। उस आदमी को एक ही बार में और तुरंत ही पूरी चंगाई क्यों नहीं दे दी गई?

     हम नहीं जानते क्यों; परन्तु प्रभु यीशु जानते थे की उस आदमी को, और वहाँ उपस्थित प्रभु के शिष्यों को, उस स्थिति और उस समय में क्या आवश्यक था। और आज वह हमारे विषय भी जानता है कि उसकी निकटता में बढ़ने के लिए हमें आज हमें किसे बात की आवश्यकता है। चाहे हम हमेशा समझ न सकें, हम भरोसा रख सकते हैं  कि परमेश्वर हमारे तथा हमारे प्रिय जनों के जीवनों में कार्यरत है। और वह हमें सामर्थ्य, साहस, और स्पष्टता प्रदान करेगा कि हम उसके पीछे चलते रहें। - एलिसन कीडा

 

प्रभु, हमारी आँखें खोलिए, हम यीशु को देखना चाहते हैं। - रोबर्ट कल


जब यीशु ये बातें कह चुका, तो ऐसा हुआ कि भीड़ उसके उपदेश से चकित हुई। क्योंकि वह उन के शास्‍त्रियों के समान नहीं परन्तु अधिकारी के समान उन्हें उपदेश देता था। - मत्ती 7:28-29

बाइबल पाठ: मरकुस 8:22-26

मरकुस 8:22 और वे बैतसैदा में आए; और लोग एक अन्धे को उसके पास ले आए और उस से बिनती की, कि उसको छूए।

मरकुस 8:23 वह उस अन्धे का हाथ पकड़कर उसे गांव के बाहर ले गया, और उस की आंखों में थूककर उस पर हाथ रखे, और उस से पूछा; क्या तू कुछ देखता है?

मरकुस 8:24 उसने आंख उठा कर कहा; मैं मनुष्यों को देखता हूं; क्योंकि वे मुझे चलते हुए दिखाई देते हैं, जैसे पेड़।

मरकुस 8:25 तब उसने फिर दोबारा उस की आंखों पर हाथ रखे, और उसने ध्यान से देखा, और चंगा हो गया, और सब कुछ साफ साफ देखने लगा।

मरकुस 8:26 और उसने उस से यह कहकर घर भेजा, कि इस गांव के भीतर पांव भी न रखना।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 35-36
  • प्रेरितों 25


गुरुवार, 23 जुलाई 2020

चौकसी


     उसके स्कूल के लिए दरवाज़े के बाहर भाग जाने से पहले मैंने अपने बेटे से पूछा कि उसने अपने दांत साफ़ कर लिए थे कि नहीं। उसे सच बोलने के महत्त्व को समझाते हुए, मैंने उससे दोबारा यही प्रश्न पूछा। मेरी हलकी सी चेतावनी की परवाह किए बिना, उसने कुछ विनोद के साथ मुझ से कहा कि मुझे बाथरूम में एक सुरक्षा कैमरा लगवा लेना चाहिए। तब मुझे कुछ पूछने के आवश्यकता ही नहीं होगी, और मैं अपने आप जाँचने पाऊँगी कि उसने दांत साफ़ किए हैं अथवा नहीं, और वह भी झूठ बोलने के प्रलोभन से बचा रहेगा।

     चाहे सुरक्षा कैमरा की उपस्थिति हमारे लिए नियमों का पालन करने को स्मरण रखने में सहायक हो सकती है, परन्तु फिर भी ऐसे अनेकों स्थान होते हैं जहाँ हम बिना कैमरे द्वारा देखे रह सकते हैं, या उस से बच सकते हैं। हम सुरक्षा कैमरा से तो बच सकते हैं, या उसे झाँसा दे सकते हैं, परन्तु हम अपने आप को धोखा देते हैं यदि यह समझते हैं कि हम कभी भी परमेश्वर की दृष्टि से ओझल हो सकते हैं।

     परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में पूछा है, “फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?” (यिर्मयाह 23:24)। उसके इस प्रश्न में चेतावनी भी है और प्रोत्साहन भी। चेतावनी यह है की हम कभी परमेश्वर की दृष्टि से ओझल नहीं हो सकते हैं, कभी उसे धोखा नहीं दे सकते हैं, कभी उससे आगे नहीं निकल सकते हैं। हम जो कुछ भी करते हैं, उसे सब दिखता रहता है।

     प्रोत्साहन यह कि संसार या आकाश में ऐसा कोई स्थान नहीं है जहाँ हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की चौकसी से बाहर हों। हम चाहे अपने आप को अकेला अनुभव करें, परमेश्वर फिर भी हमारे साथ होता है। हम चाहे जहाँ चले जाएँ, परन्तु उसके इस सत्य का एहसास हमें सदा प्रोत्साहित करता रहे कि हम उसके वचन के आज्ञाकारी बने रहें, क्योंकि वह हम पर चौकसी रखता है। - लीसा सामरा

 

हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की चौकसी के कभी बाहर नहीं होते हैं।


मैं तेरे आत्मा से भाग कर किधर जाऊं? वा तेरे साम्हने से किधर भागूं? यदि मैं आकाश पर चढूं, तो तू वहां है! यदि मैं अपना बिछौना अधोलोक में बिछाऊं तो वहां भी तू है!  - भजन 139:7-8

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 23:20-24

यिर्मयाह 23:20 जब तक यहोवा अपना काम और अपनी युक्तियों को पूरी न कर चुके, तब तक उसका क्रोध शान्त न होगा। अन्त के दिनों में तुम इस बात को भली भांति समझ सकोगे।

यिर्मयाह 23:21 ये भविष्यद्वक्ता बिना मेरे भेजे दौड़ जाते और बिना मेरे कुछ कहे भविष्यद्वाणी करने लगते हैं।

यिर्मयाह 23:22 यदि ये मेरी शिक्षा में स्थिर रहते, तो मेरी प्रजा के लोगों को मेरे वचन सुनाते; और वे अपनी बुरी चाल और कामों से फिर जाते।

यिर्मयाह 23:23 यहोवा की यह वाणी है, क्या मैं ऐसा परमेश्वर हूँ, जो दूर नहीं, निकट ही रहता हूँ?

यिर्मयाह 23:24 फिर यहोवा की यह वाणी है, क्या कोई ऐसे गुप्त स्थानों में छिप सकता है, कि मैं उसे न देख सकूं? क्या स्वर्ग और पृथ्वी दोनों मुझ से परिपूर्ण नहीं हैं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 33-34
  • प्रेरितों 24


बुधवार, 22 जुलाई 2020

आशा


     मेरे द्वारा सन 1988 से लेकर अब तक Our Daily Bread के लिए लिखे गए सैंकड़ों लेखों में से कुछ हैं जो मेरे मन में बस गए हैं। इनमें से एक लेख है जिसे मैंने 1990 के दशक के मध्य के समय लिखा था, जिसमें मैंने उस समय के बारे में बताया था जब हमारी तीनो बेटियाँ घर से बाहर या तो किसी कैम्प अथवा मिशन दौरे पर गई हुई थीं, और हमारा छः वर्षीय बेटा स्टीव हमारे साथ था।

     एक दिन स्टीव के साथ बाहर सैर पर जाते हुए, उसने कहा, “बिना मेलिस्सा के यह उतना मज़ेदार नहीं है” – मेलिस्सा उसकी आठ वर्षीय बहन थी, और दोनों की आपस में बहुत पटती थी। उस समय हम में से कोई नहीं जानता था कि उसके ये शब्द आगे कितने मार्मिक हो जाएँगे। कुछ वर्ष बाद, किशोरावस्था में मेलिस्सा की एक कार दुर्घटना में मृत्यु हो गई; और तब से उसके बिना जीवन वास्तव में “उतना मज़ेदार” नहीं रह गया है। समय के साथ उसके जाने का दुःख कम अवश्य हुआ है, परन्तु पूरी तरह से गया नहीं है, और न ही जाएगा। समय उस घाव को पूरी तरह कभी नहीं भरने पाएगा। परन्तु फिर भी कुछ है जो सहायता करता है – परमेश्वर को उसके वचन बाइबल में होकर सुनना, उस पर मनन करना, और उसकी शान्ति का स्वाद लेना।

     सुनना: “हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है” (विलापगीत 3:22)।

     मनन करना: “क्योंकि वह तो मुझे विपत्ति के दिन में अपने मण्डप में छिपा रखेगा; अपने तम्बू के गुप्त स्थान में वह मुझे छिपा लेगा, और चट्टान पर चढ़ाएगा” (भजन संहिता 27:5)।

     स्वाद लेना:  मेरे दु:ख में मुझे शान्ति उसी से हुई है, क्योंकि तेरे वचन के द्वारा मैं ने जीवन पाया है” (भजन 119:50)।

     जब हमारा कोई प्रिय जन जाता रहता है तो जीवन कभी पहले जैसा नहीं होने पाता है, परन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञाएँ आशा और शान्ति प्रदान करती हैं। - डेव ब्रैनन

 

परमेश्वर का वचन सच्ची शान्ति का स्त्रोत है।


तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है; और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती। - भजन 119:165

बाइबल पाठ: भजन 34:15-18

भजन संहिता 34:15 यहोवा की आंखे धर्मियों पर लगी रहती हैं, और उसके कान भी उसकी दोहाई की ओर लगे रहते हैं।

भजन संहिता 34:16 यहोवा बुराई करने वालों के विमुख रहता है, ताकि उनका स्मरण पृथ्वी पर से मिटा डाले।

भजन संहिता 34:17 धर्मी दोहाई देते हैं और यहोवा सुनता है, और उन को सब विपत्तियों से छुड़ाता है।

भजन संहिता 34:18 यहोवा टूटे मन वालों के समीप रहता है, और पिसे हुओं का उद्धार करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 31-32
  • प्रेरितों 23:16-35


मंगलवार, 21 जुलाई 2020

शरण स्थान


     जब मैं ओक्लाहोमा में रहता था, तो मेरा एक मित्र था, जॉन, जो चक्रवाधी तूफानों का “पीछा” करता था। जॉन बड़े ध्यान से अपने समान अन्य तूफ़ान का पीछा करने वालों के और स्थानीय रडार यंत्र के साथ संपर्क में बना रहता था, और उनकी सहायता से एक सुरक्षित दूरी से लोगों को उस चक्रवाध की स्थिति, दिशा, और संभावित मार्ग बताता रहता था, जिससे जो लोग उस तूफ़ान के मार्ग में हों, वे अपनी सुरक्षा की तैयारी कर लें। एक दिन एक चक्रवाध ने अचानक और इतनी तीव्रता से अपनी दिशा बदली कि जॉन बड़े खतरे में पड़ गया। किन्तु संयोग से उसे एक शरण स्थान मिल गया, और वह वहाँ सुरक्षित रह सका।

     जॉन के उस दोपहर के अनुभव से मुझे एक अन्य विनाशकारी बात का स्मरण हो आता है – हमारे जीवनों में बसा हुआ पाप। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है, “परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है। फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है” (याकूब 1:14-15)। इस पद में पाप के दुष्परिणामों का एक क्रम दिया गया है। वह जो आरम्भ में अहानिकारक प्रतीत होता है, वही अचानक ही नियंत्रण से बाहर होकर विनाशकारी बन सकता है। परन्तु हम मसीही विश्वासियों को हमारा प्रभु परमेश्वर एक शरण स्थान प्रदान करता है, जो हमें सदा उपलब्ध रहता है।

     परमेश्वर का वचन हमें यह भी आश्वासन देता है कि कभी भी परमेश्वर हमें किसी परीक्षा में नहीं डालता है, और हम अपने बुरे या गलत चुनावों के लिए अपने आप को ही दोषी कह सकते हैं। परमेश्वर का आश्वासन है “तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े, जो मनुष्य के सहने से बाहर है: और परमेश्वर सच्चा है: वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में न पड़ने देगा, वरन परीक्षा के साथ निकास भी करेगा; कि तुम सह सको” (1 कुरिन्थियों 10:13)। जब हम उसकी ओर मुड़ते हैं, और परीक्षा की घड़ी में उससे सहायता की प्रार्थना करते हैं, तब हमारा प्रभु हमें उस परिस्थिति पर जयवंत होने तथा सुरक्षित रहने के लिए आवश्यक सामर्थ्य एवं मार्गदर्शन भी उपलब्ध करवाता है।

     प्रभु यीशु सदा हमारा दृढ़ और विश्वसनीय शरण स्थान है। - जेम्स बैंक्स

 

जगत का उद्धारकर्ता प्रभु यीशु, हमारे जीवनों के तूफानों में हमारा शरण स्थान है।


परन्तु परमेश्वर के समीप रहना, यही मेरे लिये भला है; मैं ने प्रभु यहोवा को अपना शरण स्थान माना है, जिस से मैं तेरे सब कामों का वर्णन करूं। - भजन 73:28

बाइबल पाठ: याकूब 1:12-18

याकूब 1:12 धन्य है वह मनुष्य, जो परीक्षा में स्थिर रहता है; क्योंकि वह खरा निकल कर जीवन का वह मुकुट पाएगा, जिस की प्रतिज्ञा प्रभु ने अपने प्रेम करने वालों को दी है।

याकूब 1:13 जब किसी की परीक्षा हो, तो वह यह न कहे, कि मेरी परीक्षा परमेश्वर की ओर से होती है; क्योंकि न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है।

याकूब 1:14 परन्तु प्रत्येक व्यक्ति अपनी ही अभिलाषा में खिंच कर, और फंस कर परीक्षा में पड़ता है।

याकूब 1:15 फिर अभिलाषा गर्भवती हो कर पाप को जनती है और पाप जब बढ़ जाता है तो मृत्यु को उत्पन्न करता है।

याकूब 1:16 हे मेरे प्रिय भाइयों, धोखा न खाओ।

याकूब 1:17 क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है।

याकूब 1:18 उसने अपनी ही इच्छा से हमें सत्य के वचन के द्वारा उत्पन्न किया, ताकि हम उस की सृष्‍टि की हुई वस्‍तुओं में से एक प्रकार के प्रथम फल हों।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 29-30
  • प्रेरितों 23:1-15


सोमवार, 20 जुलाई 2020

घर


     मेरे बेटे ने मुझ से पूछा, “हमें अपना घर छोड़कर दूसरे स्थान पर क्यों जाना पड़ रहा है?” किसी को भी, विशेषकर एक पाँच वर्षीय बालक को यह समझा पाना कठिन है कि घर क्या होता है। हम एक मकान छोड़ रहे थे, घर नहीं, इस अर्थ में कि घर वह स्थान है जहाँ हमारे प्रिय जन हैं; घर वह स्थान है जहाँ लौटने के लिए हम लालायित रहते हैं, चाहे दिन भर के काम के बाद, या किसी लंबी यात्रा के बाद।

     परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि अपनी मृत्यु से कुछ ही घंटे पहले, प्रभु यीशु जब अपने शिष्यों के साथ ऊपर के कमरे में थे, तब उन्होंने उन से कहा, “तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो” (यूहन्ना 14:1)। क्योंकि प्रभु यीशु ने अपनी मृत्यु की भविष्यवाणी की थी, इसलिए शिष्य अपने भविष्य को लेकर दुविधा में थे। परन्तु प्रभु यीशु ने उनके साथ अपनी उपस्थिति के विषय उन्हें आश्वस्त किया, और उन्हें स्मरण करवाया कि वे फिर से उन्हें देखेंगे। प्रभु ने उन से कहा, “मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं” (पद 2)। स्वर्ग के बारे में बताने के लिए प्रभु अन्य शब्द भी प्रयोग कर सकते थे। परन्तु उन्होंने वो शब्द चुनें जो किसी असुविधाजनक या अपरिचित स्थान के बारे में नहीं थे, वरन ऐसे स्थान के बारे में थे जहाँ हमारा प्रिय जन, प्रभु यीशु स्वयं होगा।

     सी. एस. ल्युइस ने लिखा, “हमारी यात्रा में हमारा परमेश्वर पिता हमें अनेकों आरामदायक सरायों में लाकर हमें तरोताज़ा करता है, परन्तु हमें कभी यह सोचने के लिए प्रोत्साहित नहीं करता है कि हम उन्हें अपना घर समझ लें।” हम जीवन यात्रा के आरामदायक पड़ावों के लिए प्रभु परमेश्वर के धन्यवादी हो सकते हैं, परन्तु यह सदा स्मरण रखें कि हमारा वास्तविक घर स्वर्ग में है, जहाँ “हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे” (1 थिस्सलुनीकियों 4:17)। कीला ओकोआ

 

हम प्रभु के साथ अनन्तकाल की राह देख रहे हैं।


तब हम जो जीवित और बचे रहेंगे, उन के साथ बादलों पर उठा लिये जाएंगे, कि हवा में प्रभु से मिलें, और इस रीति से हम सदा प्रभु के साथ रहेंगे। - 1 थिस्स्लुनीकियों 4:17

बाइबल पाठ: युहन्ना 14:1-14

यूहन्ना 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।

यूहन्ना 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।

यूहन्ना 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।

यूहन्ना 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।

यूहन्ना 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?

यूहन्ना 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।

यूहन्ना 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।

यूहन्ना 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।

यूहन्ना 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।

यूहन्ना 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।

यूहन्ना 14:11 मेरी ही प्रतीति करो, कि मैं पिता में हूं; और पिता मुझ में है; नहीं तो कामों ही के कारण मेरी प्रतीति करो।

यूहन्ना 14:12 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो मुझ पर विश्वास रखता है, ये काम जो मैं करता हूं वह भी करेगा, वरन इन से भी बड़े काम करेगा, क्योंकि मैं पिता के पास जाता हूं।

यूहन्ना 14:13 और जो कुछ तुम मेरे नाम से मांगोगे, वही मैं करूंगा कि पुत्र के द्वारा पिता की महिमा हो।

यूहन्ना 14:14 यदि तुम मुझ से मेरे नाम से कुछ मांगोगे, तो मैं उसे करूंगा।

 

एक साल में बाइबल: 

  • भजन 26-28
  • प्रेरितों 22