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शनिवार, 28 मार्च 2015

मित्र


   सच्ची मित्रता जीवन के सबसे उत्त्म उपहारों में से एक है। सच्चे मित्र अपने मित्रों के लिए एक विशेष भलाई चाहते हैं, वह भलाई जो सबसे उत्कृष्ठ है, अर्थात यह कि उनके मित्र परमेश्वर को जानें तथा परमेश्वर से अपने सारे मन, प्राण और आत्मा से प्रेम करें। डिट्रिश बॉनहॉफर ने, जो जर्मनी के एक विख्यात पास्टर थे और अपने मसीही विश्वास के लिए शहीद हुए थे, इस विषय पर कहा, "मित्र अपना लक्ष्य दूसरे  के लिए परमेश्वर की इच्छा द्वारा निर्धारित करते हैं", अर्थात, सच्चा मित्र अपने मित्र को परमेश्वर कि इच्छानुसार जीवन व्यतीत करने के लिए प्रेरित करता रहता है।

   ऐसे सच्ची मित्रता का एक उत्कृष्ठ उदाहरण है परमेश्वर के वचन बाइबल में दाऊद के मित्र योनातान का। योनातान का पिता, राजा शाऊल, दाऊद का दुश्मन हो गया था, और दाऊद शाऊल से अपनी जान बचाकर जीप के बियाबान में होरेश नामक स्थान में जा छुपा था। योनातान उसे ढूँढ़ता हुआ, उससे मिलने के लिए वहाँ आया। इस घटना का महत्व योनातान के दाऊद से मिलने जाने के उद्देश्य में देखा जा सकता है, "शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया" (1 शमूएल 23:16); योनातान दाऊद के पास इसलिए गया कि उस से परमेश्वर के बारे में चर्चा करे तथा दाऊद को ढाढ़स दिलाए।

   मसीही विश्वास में मित्रता का यही सार है - परस्पर सामन्य रुचि, एक-दूसरे के प्रति लगाव, आपस में होने वाले मनोरंजन से ऊपर उठकर, अपने मित्र के जीवन में अनन्त आशीष के बीजों को बोना, उन्हें परमेश्वर की बुद्धिमता को स्मरण दिलाते रहना, अपने मित्रों की आत्मा को परमेश्वर के प्रेम भरे वचनों से तरोताज़ा करते रहना, सभी परिस्थितियों में उन्हें परमेश्वर में ढाढ़स बंधाना।

   अपने मित्रों के लिए परमेश्वर से प्रार्थना करें, और परमेश्वर से माँगें कि वह आपको उनके साथ बाँटने के लिए उनकी आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त वचन दे जिस से वे परमेश्वर के वचन में होकर एक नई सामर्थ पा सकें। - डेविड रोपर


सच्चा मित्र परमेश्वर से मिला उपहार और अपने मित्रों के परमेश्वर के समीप बढ़ने में सहायक होता है।

जैसे तेल और सुगन्ध से, वैसे ही मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है। जो तेरा और तेरे पिता का भी मित्र हो उसे न छोड़ना; और अपनी विपत्ति के दिन अपने भाई के घर न जाना। प्रेम करने वाला पड़ोसी, दूर रहने वाले भाई से कहीं उत्तम है। - नीतिवचन 27:9-10

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 23:12-18
1 Samuel 23:12 फिर दाऊद ने पूछा, क्या कीला के लोग मुझे और मेरे जनों को शाऊल के वश में कर देंगे? यहोवा ने कहा, हां, वे कर देंगे। 
1 Samuel 23:13 तब दाऊद और उसके जन जो कोई छ: सौ थे कीला से निकल गए, और इधर उधर जहां कहीं जा सके वहां गए। और जब शाऊल को यह बताया गया कि दाऊद कीला से निकला भागा है, तब उसने वहां जाने की मनसा छोड़ दी। 
1 Samuel 23:14 जब दाऊद तो जंगल के गढ़ों में रहने लगा, और पहाड़ी देश के जीप नाम जंगल में रहा। और शाऊल उसे प्रति दिन ढूंढ़ता रहा, परन्तु परमेश्वर ने उसे उसके हाथ में न पड़ने दिया। 
1 Samuel 23:15 और दाऊद ने जान लिया कि शाऊल मेरे प्राण की खोज में निकला है। और दाऊद जीप नाम जंगल के होरेश नाम स्थान में था; 
1 Samuel 23:16 कि शाऊल का पुत्र योनातन उठ कर उसके पास होरेश में गया, और परमेश्वर की चर्चा कर के उसको ढाढ़स दिलाया। 
1 Samuel 23:17 उसने उस से कहा, मत डर; क्योंकि तू मेरे पिता शाऊल के हाथ में न पड़ेगा; और तू ही इस्राएल का राजा होगा, और मैं तेरे नीचे हूंगा; और इस बात को मेरा पिता शाऊल भी जानता है। 
1 Samuel 23:18 तब उन दोनों ने यहोवा की शपथ खाकर आपस में वाचा बान्धी; तब दाऊद होरेश में रह गया, और योनातन अपने घर चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 4-6
  • लूका 4:31-44



शुक्रवार, 27 मार्च 2015

संदर्भ


   हमारे एक मित्र ने अचानक ही अटपटी और निराशाजनक बातें कहना आरंभ कर दिया, जिससे हम लोग उसके लिए चिंतित हुए, उसे प्रोत्साहित करने लगे और उसे सलाह देने लगे। बाद में पता पड़ा कि वह ऐसा मज़ाक में कर रहा था, जान-बूझ कर कुछ गानों की पंक्तियों को इधर-उधर से मिला कर बोल रहा था जिससे लोग उसके साथ वार्तालाप आरंभ कर सकें। जिन मित्रों ने उसकी सहायता करने के लिए प्रयास किए, उन्होंने अपना समय ही व्यर्थ किया क्योंकि उसे किसी सहायात अथवा सलाह की आवश्यकता थी ही नहीं। हमारे उस मित्र द्वारा कही गई बातों के कोई दुषपरिणाम तो नहीं हुए, लेकिन ऐसा हो सकता था यदि किसी ने उसकी सहायाता के लिए अपने किसी आवश्यक कार्य या ज़िम्मेदारी को छोड़ कर उसके प्रति अधिक ध्यान दिया होता। संदर्भ से हटकर कहे गए गीतों के बोल आनन्द नहीं, परेशानी देने वाले हो गए।

   कुछ लोगों का जीवन की अनेक बातों के प्रति यही रवैया रहता है; वे किसी अन्य की कही गई बात को संदर्भ से हटाकर बताते हैं जिससे कि दूसरों का ध्यान आकर्षित कर सकें या किसी बहस को जीत सकें। अन्य कुछ तो इससे भी अधिक चालाक एवं खतरनाक होते हैं - वे दूसरों के ऊपर अधिकार जताने के लिए सत्य को ना केवल संदर्भ से हटाकर, वरन तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं। ऐसे सभी लोग ना केवल दूसरों के जीवनों को वरन उनकी आत्माओं को भी खतरे में डाल देते हैं। जब लोग दूसरों के शब्दों को संदर्भ से हटाकर या तोड़-मरोड़ कर प्रयोग करते हैं जिससे कि वे सुनने वालों को अपनी मनसा के अनुसार चला सकें, तो इसके नुकसान से बचने का एक ही उपाय होता है - उन शब्दों की वास्तविकता को जानना, उन्हें उनके सही संदर्भ में देखना और समझना।

   यही बात और उपाय परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ भी लागू होती है। बहुतेरे हैं जो बाइबल की बातों को संदर्भ से हटाकर या तोड़-मरोड़ कर प्रस्तुत करते हैं जिससे दूसरों को गलत प्रभाव में लाएं और उनसे कुछ अनुचित करवाएं। परमेश्वर के वचन की जो सच्चाईयाँ परमेश्वर द्वारा हमारी आशीष और आनन्द के लिए दी गई हैं, ऐसा करने से व्यर्थ एवं अनेपक्षित परेशानी का कारण हो जाती हैं। बाइबल की सच्चाईयों को स्वयं बाइबल को पढ़ने के द्वारा ही जाना जा सकता है; बाइबल परमेश्वर का वचन है, और परमेश्वर किसी को भी कभी कोई अनुचित व्यवहार नहीं सिखाता। शैतान ने प्रभु यीशु की भी परीक्षा परमेश्वर के वचन को उसके संदर्भ से बाहर कह कर के करी थी, और प्रभु यीशु ने शैतान की गलत बातों के इस हमले को परमेश्वर के वचन के सही प्रयोग द्वारा ही निष्क्रीय किया था (लूका 4)। परमेश्वर ने अपने वचन को हमारे हाथों में इसीलिए रखा है और उस वचन को समझाने तथा हमारा मार्ग-दर्शन करने के लिए अपने विश्वासियों को अपनी पवित्र-आत्मा को दिया है जिससे हम ना तो कभी धोखा खाएं और ना ही किसी गलत मार्ग पर चलें।

   परमेश्वर के वचन का नियमित अध्ययन करें जिससे कि उसके संदर्भ से हटाकर कहे जाने के दुरुपयोग के प्रति सचेत रहें, तथा ऐसा किए जाने के दुषप्रभावों से बचकर रह सकें। - जूली ऐकैरमैन लिंक


यदि हम परमेश्वर के सत्य को थामे रहेंगे तो शैतान के झूठ में कभी फंसने नहीं पाएंगे।

कि शैतान का हम पर दांव न चले, क्योंकि हम उस की युक्तियों से अनजान नहीं। - 2 कुरिन्थियों 2:11 

बाइबल पाठ: लूका 4:1-13
Luke 4:1 फिर यीशु पवित्रआत्मा से भरा हुआ, यरदन से लैटा; और चालीस दिन तक आत्मा के सिखाने से जंगल में फिरता रहा; और शैतान उस की परीक्षा करता रहा। 
Luke 4:2 उन दिनों में उसने कुछ न खाया और जब वे दिन पूरे हो गए, तो उसे भूख लगी। 
Luke 4:3 और शैतान ने उस से कहा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो इस पत्थर से कह, कि रोटी बन जाए। 
Luke 4:4 यीशु ने उसे उत्तर दिया; कि लिखा है, मनुष्य केवल रोटी से जीवित न रहेगा। 
Luke 4:5 तब शैतान उसे ले गया और उसको पल भर में जगत के सारे राज्य दिखाए। 
Luke 4:6 और उस से कहा; मैं यह सब अधिकार, और इन का वैभव तुझे दूंगा, क्योंकि वह मुझे सौंपा गया है: और जिसे चाहता हूं, उसी को दे देता हूं। 
Luke 4:7 इसलिये, यदि तू मुझे प्रणाम करे, तो यह सब तेरा हो जाएगा। 
Luke 4:8 यीशु ने उसे उत्तर दिया; लिखा है; कि तू प्रभु अपने परमेश्वर को प्रणाम कर; और केवल उसी की उपासना कर। 
Luke 4:9 तब उसने उसे यरूशलेम में ले जा कर मन्दिर के कंगूरे पर खड़ा किया, और उस से कहा; यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो अपने आप को यहां से नीचे गिरा दे। 
Luke 4:10 क्योंकि लिखा है, कि वह तेरे विषय में अपने स्‍वर्गदूतों को आज्ञा देगा, कि वे तेरी रक्षा करें। 
Luke 4:11 और वे तुझे हाथों हाथ उठा लेंगे ऐसा न हो कि तेरे पांव में पत्थर से ठेस लगे। 
Luke 4:12 यीशु ने उसको उत्तर दिया; यह भी कहा गया है, कि तू प्रभु अपने परमेश्वर की परीक्षा न करना। 
Luke 4:13 जब शैतान सब परीक्षा कर चुका, तब कुछ समय के लिये उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 
  • न्यायियों 1-3
  • लूका 4:1-30



गुरुवार, 26 मार्च 2015

पिता की सृष्टि


   कॉलेज से अपने स्नात्क होने से पूर्व के वर्ष में अमान्डा का दृष्टिकोण इस पृथ्वी के प्रति एक मसीही विश्वासी की ज़िम्मेदारी को लेकर बदलने लगा। उस समय तक अमान्डा की धारणा रही थी कि प्रभु यीशु के साथ उसके संबंध का पृथ्वी के पर्यावरण के प्रति उसकी ज़िम्मेदारी से कुछ लेना-देना नहीं है। लेकिन अमान्डा ने इस विषय पर पुनःविचार करना तब आरंभ किया जब उसके सामने यह प्रश्न रखा गया कि एक मसिही विश्वासी का इस पृथ्वी की देखरेख तथा संभाल में क्या योगदान हो सकता है - विशेषकर उन लोगों के संदर्भ में जो सबसे ज़रुरतमन्द हैं और अनेक ऐसे संसाधानों से वंचित हैं जिनकी अनेक उन्नत देशों में बरबादी या दुरुपयोग हो रहा है।

   अमान्डा ने पहचाना कि इस सुन्दर संसार के प्रति, जिसे हमारे परमेश्वर पिता ने बना कर हमें दिया है, एक भण्डारीपन है। इस संसार की सभी वस्तुओं और इसके लोगों के प्रति हमारी देखभाल और संभाल परमेश्वर के प्रति हमारी श्रद्धा को प्रगट करता है। यह बात परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए गए दो सिद्धांतों पर आधारित है।

   पहला सिद्धांत यह कि पृथ्वी परमेश्वर की है (भजन 24:1-2)। भजनकार ने परमेश्वर की इस सृष्टि के लिए और उसके स्वामित्व के लिए प्रशंसा करी - आकाशमण्डल, पृथ्वी और उन में का सब कुछ परमेश्वर का ही है, उसी ने सब कुछ को सृजा है। इन सब पर परमेश्वर का प्रभुत्व है (भजन 93:1-2) और वह इन सबकी परवाह तथा देखभाल करता है (मत्ती 6:26-30)।

   दूसरा सिद्धांत यह कि परमेश्वर ने इस पृथ्वी की देखरेख का दायित्व मनुष्य को सौंपा है (उत्पत्ति 1:26-28), और इस दायित्व में लोगों के प्रति ज़िम्मेदारी (रोमियों 15:2) और प्रकृति के प्रति ज़िम्मेदारी (लैव्यवस्था 25:2-5, 11; नीतिवचन 12:10) दोनों ही आ जाते हैं।

   हम मसीही विश्वासियों को कभी इस तथ्य को नज़रन्दाज़ नहीं करना चाहिए कि यह सृष्टि हमारे परमेश्वर पिता की है। इस सृष्टि की देखभाल और परवाह कर के हम अपने पिता के प्रति अपने प्रेम और आदर को प्रगट करते हैं। - मार्विन विलियम्स


सृष्टि के साथ दुर्व्यवहार सृष्टिकर्ता का अपमान है।

पृथ्वी और जो कुछ उस में है यहोवा ही का है; जगत और उस में निवास करने वाले भी। - भजन 24:1

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 1:26-31
Genesis 1:26 फिर परमेश्वर ने कहा, हम मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार अपनी समानता में बनाएं; और वे समुद्र की मछलियों, और आकाश के पक्षियों, और घरेलू पशुओं, और सारी पृथ्वी पर, और सब रेंगने वाले जन्तुओं पर जो पृथ्वी पर रेंगते हैं, अधिकार रखें। 
Genesis 1:27 तब परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप के अनुसार उत्पन्न किया, अपने ही स्वरूप के अनुसार परमेश्वर ने उसको उत्पन्न किया, नर और नारी कर के उसने मनुष्यों की सृष्टि की। 
Genesis 1:28 और परमेश्वर ने उन को आशीष दी: और उन से कहा, फूलो-फलो, और पृथ्वी में भर जाओ, और उसको अपने वश में कर लो; और समुद्र की मछलियों, तथा आकाश के पक्षियों, और पृथ्वी पर रेंगने वाले सब जन्तुओं पर अधिकार रखो। 
Genesis 1:29 फिर परमेश्वर ने उन से कहा, सुनो, जितने बीज वाले छोटे छोटे पेड़ सारी पृथ्वी के ऊपर हैं और जितने वृक्षों में बीज वाले फल होते हैं, वे सब मैं ने तुम को दिए हैं; वे तुम्हारे भोजन के लिये हैं: 
Genesis 1:30 और जितने पृथ्वी के पशु, और आकाश के पक्षी, और पृथ्वी पर रेंगने वाले जन्तु हैं, जिन में जीवन के प्राण हैं, उन सब के खाने के लिये मैं ने सब हरे हरे छोटे पेड़ दिए हैं; और वैसा ही हो गया। 
Genesis 1:31 तब परमेश्वर ने जो कुछ बनाया था, सब को देखा, तो क्या देखा, कि वह बहुत ही अच्छा है। तथा सांझ हुई फिर भोर हुआ। इस प्रकार छठवां दिन हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 22-24
  • लूका 3



बुधवार, 25 मार्च 2015

बोझ


   बहुत सवेरे, जब अंधेरा ही था, मैंने अपनी कार को स्टार्ट किया, तो कार की सूचक बत्ती ने दिखाना आरंभ कर दिया कि सीटबेल्ट लगा हुआ नहीं है। मैंने ध्यान से अपने सीट बेल्ट को देखा, उसको खींच कर भी देखा - सब सही था; फिर मैंने कार के दरवाज़ों पर ध्यान किया, उन्हें खोल कर फिर से बन्द किया, सब कुछ ठीक था किंतु वह बत्ती बुझ ही नहीं रही थी। फिर मेरा ध्यान अपनी सीट के साथ वाली दूसरी सीट पर रखे हुए अपने पर्स-बैग की ओर गया; मैंने धीरे से उस बैग को सीट से ऊपर उठाया और वह बत्ती बन्द हो गई! बात यह हुई कि उस बैग में रखे मेरे सेल फोन, सिक्कों की ढेरों चिल्लर, एक मोटे कवर वाली वज़नी किताब और मेरे दोपहर के भोजन इत्यादी का कुल बोझ इतना हो गया था कि सीट में लगे यंत्रों ने उसे सीट पर बैठी एक छोटी सवारी समझ लिया, और क्योंकि उस ’सवारी’ ने सीट बेल्ट नहीं लगाया हुआ था इसलिए कार की सूचक बत्ती मुझे सचेत किए जा रही थी कि सीट बेल्ट लगा लूँ!

   मेरे लिए अपने बैग को खोल कर के उसके बोझ को कम कर देना कोई कठिन बात नहीं थी; लेकिन कुछ अन्य बोझ हैं जिन्हें इतनी सरलता से हटाया नहीं जा सकता, हलका नहीं किया जा सकता। ऐसे बोझ जीवन को बोझिल तथा आत्मा को उदास कर देते हैं। चाहे वह बोझ पाप-बोध का हो, जैसा दाऊद ने अपने दुषकर्मों के कारण अनुभव किया (भजन 32:1-6); या उस भय का हो जैसा पतरस ने प्रभु यीशु का इन्कार करते समय अनुभव किया (मत्ती 26:20-35); या फिर शक का हो जैसा थोमा ने प्रभु यीशु के पुनरुत्थान पर अविश्वास करने से अनुभव किया (यूहन्ना 20:24-29)। लेकिन प्रभु यीशु का सभी लोगों से सभी प्रकार के बोझों के लिए निमंत्रण है: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा" (मत्ती 11:28)।

   हमारी सृष्टि अकेले ही बोझ उठाते रहने के लिए नहीं हुई है; इसलिए जब हम अपने बोझों को उसे, अर्थात प्रभु यीशु को, सौंप देते हैं जो हमारी सहायता करना तथा हमारे बोझ को उठाना चाहता है (भजन 68:19; 1 पतरस 5:7), तब वह उन बोझों को अपने ऊपर लेकर उनके स्थान पर हमें अपनी क्षमा, चंगाई और शांति देता है। प्रभु यीशु के लिए ना तो कोई बोझ भारी है, ना कोई व्यक्ति सहायता के लिए अनुपयुक्त और ना ही कोई ऐसा बोझ है जिसे वह उठाना नहीं चाहता। उसका यह खुला निमंत्रण सबके लिए, उनके सभी बोझों के लिए है - इस निमंत्रण को व्यर्थ ना जानें दें। - सिंडी हैस कैसपर


जो कुछ भी आपको बोझिल करे, उसे निःसंकोच प्रभु यीशु को सौंप दीजिए।

धन्य है प्रभु, जो प्रति दिन हमारा बोझ उठाता है; वही हमारा उद्धारकर्ता ईश्वर है। - भजन 68:19

बाइबल पाठ: भजन 32:1-6; मत्ती 11:28-30
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई। 
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी। 

Matthew 11:28 हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा। 
Matthew 11:29 मेरा जूआ अपने ऊपर उठा लो; और मुझ से सीखो; क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे। 
Matthew 11:30 क्योंकि मेरा जूआ सहज और मेरा बोझ हल्का है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 19-21
  • लूका 2:25-52



मंगलवार, 24 मार्च 2015

प्रेम


   सफल और लगातार बने रहने तथा बढ़ते रहने वाले संबंधों का आधार प्रेम ही है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्पष्ट करती है कि हमें प्रेम रखने वाले लोग होना है - वे जो परमेश्वर से अपने पूरे मन से प्रेम रखें, जो अपने पड़ौसियों से अपने समान प्रेम रखें और अपने शत्रुओं से भी प्रेम रखें। लेकिन जब हमें ही प्रेम का अनुभव नहीं हो तो फिर हमारा दूसरों से प्रेम रखना कठिन है - वे बच्चे जिन्होंने उपेक्षित जीवन व्यतीत किया है, वे लोग जिन्होंने अपने परिवार या जीवन साथी से तिरिस्कार भोगा है, वे अभिभावक जिनके बच्चों ने उन्हें बिसरा दिया है, नज़रन्दाज़ कर रखा है - ये तथा इनके समान अनुभव रखने वाले अन्य सभी लोग प्रेम विहीन जीवन के दुख से भली-भांति परिचित हैं।

   इसलिए जो कोई भी प्रेम के अनुभव की लालसा रखता है, उन सबको परमेश्वर का निमंत्रण है, क्योंकि परमेश्वर सभी अद्भुत प्रेम करता है। परमेश्वर के प्रेम के प्रकटिकरण को हम कलवरी के क्रूस पर प्रभु यीशु के बलिदान में देखते हैं, तथा उस प्रेम के जीवन बदलने वाले गहरे प्रभाव को सभी जन विश्वास द्वारा अपने जीवन में अनुभव कर सकते हैं। इस बात पर थोड़ा मनन कीजिए कि यदि आपने विश्वास द्वारा उस प्रेम को अपने जीवन में स्वीकार कर लिया है, तो परमेश्वर का वह प्रेम आपके सभी पापों और दोषों को अपनी बेदाग़ धार्मिकता ढांप देगा (रोमियों 3:22-24)। तब आप इस बात से आश्वस्त तथा आनन्दित रह सकते हैं कि अब आपको उस प्रेम से कोई कभी अलग नहीं कर सकता (रोमियों 8:38-39)। इसलिए अपने सुरक्षित वर्तमान एवं अनन्तकाल के आनन्दमय भविष्य के लिए उस के प्रेम के निमंत्रण को स्वीकार कर लें (यूहन्ना 3:16)।

   जब प्रेरित यूहन्ना कहता है, "...हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए", तो वह साथ ही यह भी स्मरण दिलाता है कि हम परमेश्वर के प्रीय हैं (1 यूहन्ना 4:11; 3:1-2)। जब एक बार आप परमेश्वर के अद्भुत प्रेम को पहचान लेते हैं, उसे स्वीकार कर लेते हैं, तो फिर आपके लिए वैसा प्रेम करने वाला व्यक्ति बन जाना सरल हो जाता है, जैसा परमेश्वर चाहता है कि हम बनें। तब ही हम परमेश्वर प्रभु यीशु के समान ही उनसे भी प्रेम रखने की सामर्थ पा लेते हैं जो हमसे प्रेम नहीं रखते या हमारे शत्रु हैं। प्रेम सब बातों को ढांप देता है। - जो स्टोवैल


अपने लिए परमेश्वर के प्रेम को स्वीकार कर लेना ही दूसरों के प्रति प्रेम दिखाने की कुंजी है।

क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी। - रोमियों 8:38-39

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-21
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर से प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिद्ध हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिद्ध प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिद्ध नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। 
1 John 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिस उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1 John 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 16-18
  • लूका 2:1-24



सोमवार, 23 मार्च 2015

आशा


   यद्यपि मैं प्रयास में रहता हूँ कि आजकल आस-पास दिखाई देने वाली बातों से चकित ना हूँ फिर भी एक दिन बाज़ार में एक महिला द्वारा पहनी हुई टी-शर्ट पर लिखे वाक्य ने मुझे विचलित कर दिया। मोटे और बड़े शब्दों में उसकी टी-शर्ट पर लिखा था, "आशा मूर्खों के लिए है!" मैं मानता हूँ कि आज की परिस्थितियों में भोला बनकर रहना या सीधा-सादा होना मूर्खतापूर्ण या फिर खतरनाक भी हो सकता है। मैं यह भी मानता हूँ कि बेबुनियाद आशा का परिणाम निराशा और दुख हो सकते हैं; लेकिन यह मान लेना कि आशा का जीवन में कोई स्थान नहीं है, जीवन के प्रति एक बहुत संकीर्ण एवं नकारात्मक दृष्टिकोण रखना है।

   परमेश्वर का वचन बाइबल जिस आशा को हमारे सामने रखती है वह विलक्षण है; सामान्यतः संसार के व्यवहार में कही और दिखाई जाने वाली आशा से भिन्न है। बाइबल जिस आशा की बात हम से करती है वह परमेश्वर में तथा उसके द्वारा संसार और हमारे जीवन में करे जाने वाले कार्यों की सार्थकता के प्रति दृढ़ विश्वास रखना है; और यह वह आशा है जिसकी आवश्यकता सभी को है! बाइबल में इब्रानियों के नाम लिखी पत्री का लेखक इस आशा के महत्व के विषय में स्पष्ट कहता है: "और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है" (इब्रानियों 10:23)।

   उस आशा पर विश्वास रखना जो बाइबल के अनुसार है कोई मूर्खतापूर्ण बात नहीं है, क्योंकि उसका आधार बहुत दृढ़ है। हम उस आशा को थामे रहते हैं जो हमें मसीह यीशु में मिलती है क्योंकि यह जानते हैं कि हमारा परमेश्वर वास्तविक, जीवित और विश्वासयोग्य परमेश्वर है। हम बाइबल के परमेश्वर पर हर हाल में, हर बात के लिए हमेशा विश्वास रख सकते हैं - वर्तमान में भी और भविष्य के लिए भी। हमारी आशा का आधार परमेश्वर का विश्वासयोग्य होना और उसका हम से अनन्तकाल का निस्वार्थ प्रेम रखना है।

   इसलिए मेरे लिए उस टी-शर्ट पर लिखा वह वाक्य गलत था; मेरा मानना है कि आशा मूर्खों के लिए नहीं, मेरे और आपके लिए है - हमारे जीवन कि हर परिस्थिति के लिए है, प्रभु यीशु में साधारण विश्वास द्वारा हमें पापों से क्षमा देने के लिए है, उस विश्वास द्वारा हमें पापी इन्सान से परमेश्वर की सन्तान बनाने के लिए है, इस पार्थिव जीवन में परमेश्वर द्वारा हमारी देखभाल और सुरक्षा के लिए है तथा हमें स्वर्ग में परमेश्वर के साथ सहभागित एवं अनन्तकाल का जीवन और आनन्द देने के लिए है। ऐसी आशा की आवश्यकता संसार के प्रत्येक व्यक्ति को है; ऐसी आशा को थाम लें और थामें रहें। - बिल क्राउडर


वह आशा जिसकी नींव परमेश्वर पर है, जीवन के दबावों में कभी टूटेगी नहीं।

परन्तु प्रभु सच्चा है; वह तुम्हें दृढ़ता से स्थिर करेगा: और उस दुष्‍ट से सुरक्षित रखेगा। - 2 थिस्सुलुनीकियों 3:3 

बाइबल पाठ: इब्रानियों 10:19-25
Hebrews 10:19 सो हे भाइयो, जब कि हमें यीशु के लोहू के द्वारा उस नए और जीवते मार्ग से पवित्र स्थान में प्रवेश करने का हियाव हो गया है। 
Hebrews 10:20 जो उसने परदे अर्थात अपने शरीर में से हो कर, हमारे लिये अभिषेक किया है, 
Hebrews 10:21 और इसलिये कि हमारा ऐसा महान याजक है, जो परमेश्वर के घर का अधिकारी है। 
Hebrews 10:22 तो आओ; हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ, और विवेक को दोष दूर करने के लिये हृदय पर छिड़काव ले कर, और देह को शुद्ध जल से धुलवा कर परमेश्वर के समीप जाएं। 
Hebrews 10:23 और अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामें रहें; क्योंकि जिसने प्रतिज्ञा किया है, वह सच्चा है। 
Hebrews 10:24 और प्रेम, और भले कामों में उक्साने के लिये एक दूसरे की चिन्‍ता किया करें। 
Hebrews 10:25 और एक दूसरे के साथ इकट्ठा होना ने छोड़ें, जैसे कि कितनों की रीति है, पर एक दूसरे को समझाते रहें; और ज्यों ज्यों उस दिन को निकट आते देखो, त्यों त्यों और भी अधिक यह किया करो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 13-15
  • लूका 1:57-80



रविवार, 22 मार्च 2015

दौड़


   प्रति वर्ष मार्च महीने में उत्तरी ध्रुवीय इलाके अलास्का में आएडीटेरोड ट्रेल दौड़ प्रतियोगिता होती है। सारे साल बर्फीले तथा अति ठंडे रहने वाले उस इलाके में, कुत्तों द्वारा बर्फ पर खींची जाने वाली गाड़ियों और उनके चालकों को, जिन्हें ’मुशर्स’ कहा जाता है, ऐंकरेज से नोम नामक स्थान की 1049 मील की दूरी तय करनी होती है। दौड़ में भाग लेने वाली टीमों को यह दूरी तय करने में 8 से 15 दिनों तक का समय लगता है। सन 2011 की दौड़ में मुशर जौन बेकर ने एक नया कीर्तिमान स्थापित किया जब उसने यह दौड़ 8 दिन, 19 घंटे, 46 मिनिट तथा 39 सेकेंड में पूरी करी। इस दौड़ को पूरा करने के लिए गाड़ी खींचने वाले कुत्तों और उनके चालकों के बीच अद्भुत समझ-बूझ तथा सामंजस्य होता है, और भाग लेने वाले सभी प्रतियोगी जीतने के अपने प्रयास में बहुत दृढ़ होते हैं। प्रथम स्थान पाने वाले को नकद पुरुस्कार के अतिरिक्त एक नया पिकअप ट्रक भी ईनाम में दीया जाता है। किंतु इतने अधिक ठंडे वातावरण और जोखिम भरे मार्ग पर दौड़ में दृढ़ता से डटे रहने के पश्चात यह सब शाबाशी और पुरुस्कार क्षणिक तथा महत्वहीन ही प्रतीत होते हैं।

   प्रेरित पौलुस के लिए दौड़ की उत्तेजना एवं रोमांच कोई अनजानी बात नहीं थे; पौलुस ने प्रतियोगिता की भावना को एक अनन्तकालीन बात के बारे में समझाने के लिए उपयोग किया; उसने लिखा, "और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं" (1 कुरिन्थियों 9:25)।

   बहुत बार हमें प्रलोभन रहता है कि हम नश्वर सांसारिक उपलब्धियों पर ध्यान लगाएं, उन बातों को महत्वपूर्ण आँकें जो समय बीतने के साथ नष्ट होती जाती हैं। किंतु परमेश्वर का वचन बाइबल हमें प्रभु यीशु में विश्वास द्वारा मिलने वाले चिरस्थाई तथा अविनाशी पुरुस्कार पर मन लगाने की शिक्षा देती है, चाहे इसके लिए हमें संसार से कितना ही कष्ट और कैसी भी परेशानियाँ क्यों ना झेलनी पड़ें। जब हम दृढ़ता से आत्मिक बातों की खोज में रहकर परमेश्वर पिता से प्रभु यीशु में होकर अनन्तकाल तक बने रहने वाली बातों पर पूरी निश्ठा के साथ मन लगाते हैं, उन्हें अपनाते हैं, तब ना केवल हम परमेश्वर को आदर देते हैं वरन उससे अविनाशी तथा चिरस्थाई आदर प्राप्त भी करते हैं। - डेनिस फिशर


अपने जीवन की दौड़ को अनन्तकाल के परिपेक्ष्य में रखकर ही दौड़ें।

विश्वास की अच्छी कुश्‍ती लड़; और उस अनन्त जीवन को धर ले, जिस के लिये तू बुलाया, गया, और बहुत गवाहों के साम्हने अच्छा अंगीकार किया था। - 1 तिमुथियुस 6:12

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 9:24-27
1 Corinthians 9:24 क्या तुम नहीं जानते, कि दौड़ में तो दौड़ते सब ही हैं, परन्तु इनाम एक ही ले जाता है तुम वैसे ही दौड़ो, कि जीतो। 
1 Corinthians 9:25 और हर एक पहलवान सब प्रकार का संयम करता है, वे तो एक मुरझाने वाले मुकुट को पाने के लिये यह सब करते हैं, परन्तु हम तो उस मुकुट के लिये करते हैं, जो मुरझाने का नहीं। 
1 Corinthians 9:26 इसलिये मैं तो इसी रीति से दौड़ता हूं, परन्तु बेठिकाने नहीं, मैं भी इसी रीति से मुक्कों से लड़ता हूं, परन्तु उस की नाईं नहीं जो हवा पीटता हुआ लड़ता है। 
1 Corinthians 9:27 परन्तु मैं अपनी देह को मारता कूटता, और वश में लाता हूं; ऐसा न हो कि औरों को प्रचार कर के, मैं आप ही किसी रीति से निकम्मा ठहरूं।

एक साल में बाइबल: 
  • यहोशू 10-12
  • लूका 1:39-56