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शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

चट्टान


   हाई स्कूल की भू-विज्ञान कक्षा में प्रायोगिक गतिविधि के अन्तर्गत मैंने अपनी एक सहेली के साथ मिलकर जल प्रवाह को प्रभावित करने वाला एक प्रयोग बनाकर लगाया, जिसमें मेरे पिताजी ने हमारी बहुत सहायता करी। हमने प्लाएवुड से एक लंबा बक्सा बनाया, उसके मध्य में एक कब्ज़ा लगाया, फिर उसमें अन्दर से प्लास्टिक लगाया, उसमें रेत भरी, उसके एक सिरे पर पानी का पाइप लगाया और दूसरे सिरे पर पानी निकलने के लिए छेद बनाया। इस सब को तैयार करने के बाद हमने बक्से के पानी के पाइप वाले सिरे को कुछ ऊँचा उठा कर पानी को चालू कर दिया। हमारे सामने प्रत्यक्ष था कि कैसे पानी उस छेद से निकलने के लिए अपना मार्ग बनाता है। फिर अपने प्रयोग के दूसरे भाग को दिखाने के लिए हमने पानी के उस प्रवाह-मार्ग में एक बड़ा पत्थर रख दिया और फिर देखा कि उस पत्थर के प्रभाव से कैसे पानी को उस छेद तक पहुँचने के लिए अपना मार्ग बदलना पड़ा।

   इस प्रयोग ने मुझे ना केवल विज्ञान, वरन जीवन के प्रवाह के बारे में भी बहुत कुछ सिखाया। मैंने सीखा कि किनारे पर खड़े रहकर मैं प्रवाह की दिशा नहीं बदल सकती - उसके लिए मुझे प्रवाह में उतर कर स्थिर खड़े होना पड़ेगा, यदि मैं एक स्थान पर स्थिर खड़ी नहीं रहूँगी तो प्रवाह की दिशा भी बदलने नहीं पाऊँगी।

   ठीक यही कार्य समस्त मानव जाति के लिए प्रभु यीशु ने किया है। परमेश्वर का वचन बाइबल, परमेश्वर से भेंट स्वरूप मिलने वाले उद्धार को चट्टान कहता है (2 शमूएल 22:47; भजन 62:2,6-7) और प्रेरित पौलुस अपनी पत्री में बताता है कि वह चट्टान प्रभु यीशु है (1 कुरिन्थियों 10:4)। परमेश्वर ने संसार के प्रवाह में प्रभु यीशु को दृढ़ और स्थिर चट्टान के रूप में रखा है जिससे संसार के प्रवाह की दिशा विनाश से अनन्त जीवन की ओर बदल सके। जो भी अपने पापों से पश्चाताप कर के प्रभु यीशु पर विश्वास लाता है, अपना जीवन प्रभु यीशु को समर्पित करता है, उसके जीवन का प्रवाह अनन्त विनाश से अनन्त जीवन की ओर मुड़ जाता है।

   हम मसीही विश्वासी भी जब प्रभु यीशु में स्थिर बने रहते हैं, प्रभु के कार्य में संलग्न रहते हैं, प्रभु के आज्ञाकारी रहते हैं तो परमेश्वर हमें भी दूसरों के जीवनों के प्रवाह को अनन्त जीवन की चट्टान प्रभु यीशु की ओर मोड़ने के लिए प्रयोग करता है। मुक्ति की चट्टान प्रभु यीशु में स्थिर बने रहें, आप भी पाप के कारण विनाश की ओर प्रवाहित होने वाले जीवनों की दिशा को अनन्त जीवन की ओर बदलने वाले हो जाएंगे। - जूली ऐकरमैन लिंक


अपने कदमों का सही जगह पड़ना निश्चित करके वहाँ स्थिर खड़े हो जाएं। - एब्राहम लिंकन

सो हे मेरे प्रिय भाइयो, दृढ़ और अटल रहो, और प्रभु के काम में सर्वदा बढ़ते जाओ, क्योंकि यह जानते हो, कि तुम्हारा परिश्रम प्रभु में व्यर्थ नहीं है। - 1 कुरिन्थियों 15:58 

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 1:19-27
Colossians 1:19 क्योंकि पिता की प्रसन्नता इसी में है कि उस में सारी परिपूर्णता वास करे। 
Colossians 1:20 और उसके क्रूस पर बहे हुए लोहू के द्वारा मेल मिलाप कर के, सब वस्‍तुओं का उसी के द्वारा से अपने साथ मेल कर ले चाहे वे पृथ्वी पर की हों, चाहे स्वर्ग में की। 
Colossians 1:21 और उसने अब उसकी शारीरिक देह में मृत्यु के द्वारा तुम्हारा भी मेल कर लिया जो पहिले निकाले हुए थे और बुरे कामों के कारण मन से बैरी थे। 
Colossians 1:22 ताकि तुम्हें अपने सम्मुख पवित्र और निष्‍कलंक, और निर्दोष बनाकर उपस्थित करे। 
Colossians 1:23 यदि तुम विश्वास की नेव पर दृढ़ बने रहो, और उस सुसमाचार की आशा को जिसे तुम ने सुना है न छोड़ो, जिस का प्रचार आकाश के नीचे की सारी सृष्‍टि में किया गया; और जिस का मैं पौलुस सेवक बना।
Colossians 1:24 अब मैं उन दुखों के कारण आनन्द करता हूं, जो तुम्हारे लिये उठाता हूं, और मसीह के क्‍लेशों की घटी उस की देह के लिये, अर्थात कलीसिया के लिये, अपने शरीर में पूरी किए देता हूं। 
Colossians 1:25 जिस का मैं परमेश्वर के उस प्रबन्‍ध के अनुसार सेवक बना, जो तुम्हारे लिये मुझे सौंपा गया, ताकि मैं परमेश्वर के वचन को पूरा पूरा प्रचार करूं। 
Colossians 1:26 अर्थात उस भेद को जो समयों और पीढिय़ों से गुप्‍त रहा, परन्तु अब उसके उन पवित्र लोगों पर प्रगट हुआ है। 
Colossians 1:27 जिन पर परमेश्वर ने प्रगट करना चाहा, कि उन्हें ज्ञात हो कि अन्यजातियों में उस भेद की महिमा का मूल्य क्या है और वह यह है, कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40


गुरुवार, 9 जुलाई 2015

सृष्टि में आनन्दित


   अमेरिका की एक अन्तरिक्ष शोधशाला ने दूर अन्तरिक्ष में एक ऐसे ब्लैक-होल का पता लगाया है जो गुनगुनाता है! पृथ्वी से 250 अरब प्रकाश-वर्ष दूर नक्षत्र-पुँजों के समूह में स्थित यह ब्लैक-होल एक विशेष सुर की आवृत्ति पर कंपन करता है, किंतु इससे उत्पन्न होने वाली ध्वनि मनुष्य के कानों के सुनने की क्षमता से परे है।

   अंतरिक्ष में संगीत का विचार कोई नया नहीं है; परमेश्वर के वचन बाइबल में जब परमेश्वर ने अपने आप को अय्युब पर प्रकट किया तो उस से प्रशन किया: "जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था?...जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे" (अय्युब 38:4,7)। यह हमें बताता है कि इस अद्भुत सृष्टि की रचना के समय स्वर्गदूतों द्वारा परमेश्वर की स्तुति और जयजयकार के नारे सृष्टि में गूँज उठे थे।

   सुप्रसिद्ध असिसी के सन्त फ्रांसिस द्वारा लिखा एक भजन परमेश्वर की सृष्टि में विदित परमेश्वर की महानता और सृष्टि की विलक्षणता को प्रकट करता है:
हमारे राजा और परमेश्वर की समस्त सृष्टि
हमारे साथ आवाज़ उठाए और स्तुतिगान करे अल्लेलुइया, अल्लेलुइया!
हे ज्वलंत सूर्य अपनी सुनहरी किरणों के साथ
हे चांदी समान चन्द्रमा अपनी कोमल किरणों से साथ
उसकी स्तुति करो, हाँ स्तुति करो
अल्लेलुइया! अल्लेलुइया! अल्लेलुइया!

   भजनकार ने परमेश्वर के वचन में लिखा, "आकाश ईश्वर की महिमा वर्णन कर रहा है; और आकशमण्डल उसकी हस्तकला को प्रगट कर रहा है" (भजन 19:1)।

   जिसने हमारी सृष्टि करी तथा हमारे लिए सृष्टि में आनन्दित रहने के लिए इतनी अद्भुत और विलक्षण बातें रचीं, आईए उसके प्रति अपने आप को समर्पित करें, अपने जीवनों और होठों से उसकी स्तुति और बड़ाई करें। - डेनिस फिशर


सृष्टि की सुन्दरता और विलक्षण्ता हमें परमेश्वर की प्रशंसा और आराधना के लिए प्रेरित करती है।

जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चंद्रमा और तरागण को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूं; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले? - भजन 8:3-4

बाइबल पाठ: अय्युब 38:1-7
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?

एक साल में बाइबल: 

  • अय्युब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21


बुधवार, 8 जुलाई 2015

प्रेम का आनन्द


   जब मौसम ठंडा होता है तो हमारा पालतु कुत्ता, जो अब बूढ़ा हो चला है, हमारे आँगन में धूप का स्थान ढूँढ़ कर, गर्म रहने के लिए धूप में बैठा रहता है; जैसे जैसे धूप स्थान बदलती है, वह भी अपना स्थान बदलता रहता है जिससे वह दिन भर धूप से गर्मी लेता रहे।

   यह मुझे स्मरण दिलाता है कि हम मसीही विश्वासियों को भी अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखना चाहिए। इसका यह कदापि तात्पर्य नहीं है कि हमें कुछ ऐसा विशेष करते रहना होगा कि परमेश्वर हम से प्रेम करता रहे! मसीही विश्वासी होने के नाते हम परमेश्वर की सन्तान हैं और परमेश्वर हम से सदा प्रेम करता है, हमारे प्रति उसका प्रेम कभी कम नहीं होता, चाहे हम कुछ करें या ना करें - हमारे प्रति उसका प्रेम हमारे कर्मों पर नहीं वरन मसीह यीशु में होकर उसके साथ हमारे कभी ना बदलने तथा कभी ना टलने वाले पिता-पुत्र के संबंध पर आधारित है, और उसने तो हम से तब भी प्रेम किया जब हम अपने पापों में थे, उससे दूर थे; परमेश्वर ने हमसे हमारे जन्म लेने से पूर्व भी प्रेम किया और वह अब भी हम से प्रेम करता है। परमेश्वर के हमारे प्रति प्रेम से हमें कुछ भी अलग नहीं कर सकता, जैसा परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी" (रोमियों 8:39)। उसके प्रेम में बने रहने से तात्पर्य यह है कि हमें उसके साथ निकटता से बने रहने और चलते रहने के द्वारा अपने आप को सदा उसके प्रेम की गर्माहट में बनाए रखना है।

   प्रेरित यूहन्ना ने अपने द्वारा लिखित प्रभु यीशु की जीवनी में पाँच बार अपने आप को "वह चेला जिससे प्रभु प्रेम करता था" कहकर संबोधित किया (यूहन्ना 13:23; 19:26; 20:2; 21:7, 20)। प्रभु यीशु तो अपने सब चेलों से प्रेम रखता था, चेलों के प्रति प्रभु के प्रेम में कभी कोई भेद-भाव नहीं था; यहूदा इस्करियोती के प्रति भी नहीं जो अन्ततः उसे पकड़वाने वाला था। लेकिन यूहन्ना इस बात से आनन्दित रहता था कि प्रभु उससे प्रेम करता है और इस बात को व्यक्त करता रहता था। आज हम भी यूहन्ना की यह बात ऐसे ही अपना सकते हैं और इस बात से आनन्दित रह सकते हैं, इसे बार बार अपने आप से दोहरा सकते हैं कि प्रभु हम से भी प्रेम करता है।

   हम जितना अपने प्रति प्रभु परमेश्वर के प्रेम को स्मरण करते रहेंगे, हम उसके प्रेम के आनन्द को उतना अधिक अनुभव करते रहेंगे और हमारे लिए शैतान तथा संसार की बातों में आकर ठोकर खाना और गिरना उतना ही अधिक कठिन होता जाएगा। परमेश्वर के प्रेम के आनन्द में बने रहें; उससे बढ़कर कोई अन्य आनन्द नहीं है। - डेविड रोपर

    
परमेश्वर हम से इसलिए प्रेम नहीं करता कि हम कौन हैं, वरन वह कौन है इसलिए प्रेम करता है।

अपने आप को परमेश्वर के प्रेम में बनाए रखो; और अनन्त जीवन के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह की दया की आशा देखते रहो। - यहूदा 1:21

बाइबल पाठ: रोमियों 8:31-39
Romans 8:31 सो हम इन बातों के विषय में क्या कहें? यदि परमेश्वर हमारी ओर है, तो हमारा विरोधी कौन हो सकता है? 
Romans 8:32 जिसने अपने निज पुत्र को भी न रख छोड़ा, परन्तु उसे हम सब के लिये दे दिया: वह उसके साथ हमें और सब कुछ क्योंकर न देगा? 
Romans 8:33 परमेश्वर के चुने हुओं पर दोष कौन लगाएगा? परमेश्वर वह है जो उन को धर्मी ठहराने वाला है। 
Romans 8:34 फिर कौन है जो दण्ड की आज्ञा देगा? मसीह वह है जो मर गया वरन मुर्दों में से जी भी उठा, और परमेश्वर की दाहिनी ओर है, और हमारे लिये निवेदन भी करता है। 
Romans 8:35 कौन हम को मसीह के प्रेम से अलग करेगा? क्या क्लेश, या संकट, या उपद्रव, या अकाल, या नंगाई, या जोखिम, या तलवार? 
Romans 8:36 जैसा लिखा है, कि तेरे लिये हम दिन भर घात किए जाते हैं; हम वध होने वाली भेंडों की नाईं गिने गए हैं। 
Romans 8:37 परन्तु इन सब बातों में हम उसके द्वारा जिसने हम से प्रेम किया है, जयवन्त से भी बढ़कर हैं। 
Romans 8:38 क्योंकि मैं निश्चय जानता हूं, कि न मृत्यु, न जीवन, न स्वर्गदूत, न प्रधानताएं, न वर्तमान, न भविष्य, न सामर्थ, न ऊंचाई, 
Romans 8:39 न गहिराई और न कोई और सृष्टि, हमें परमेश्वर के प्रेम से, जो हमारे प्रभु मसीह यीशु में है, अलग कर सकेगी।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41


मंगलवार, 7 जुलाई 2015

मूल्यांकन


   मेरे शहर की मुख्य सड़क के दोनों ओर हो रहे सौंदर्यकरण-कार्य के अन्तरगत 1930 के दशक में बने एक चर्च भवन को गिराना पड़ा। गिराने से पहले उस चर्च भवन की खिडकियाँ निकाल ली गई थीं किन्तु दरवाज़े बहुत समय तक लगे रहे, यद्यपि बुलडोज़र अन्दर दीवारों को गिराने का काम कर रहे थे। लोगों की सुरक्षा के लिए चर्च के उन दरवाज़ों पर चमकने वाले बड़े-बड़े अक्षरों में लिख कर लगा दिया गया था, "बाहर रहें!" यह एक विडंबना ही थी कि परमेश्वर के भवन के दरवाज़ों पर, जहाँ सबका स्वागत रहता है, यह लिखा गया था।

   लेकिन इससे भी अधिक दुखी करने वाली ऐसी ही एक अन्य प्रकार की विडंबना होती है; कुछ चर्च ऐसे भी होते जहाँ के भवन के दरवाज़े चाहे खुले रहते हों किंतु उसमें आने वाले लोगों के दिलों पर आगन्तुकों के लिए स्पष्ट लिखा होता है, "बाहर रहें", विशेषकर उन लोगों के लिए जो उन चर्च वालों के मूल्यांकन में उनके अपने स्तर के अनुरूप नहीं होते। उन्हें कुछ कहना भी नहीं पड़ता, उन्हें चमकने वाले या बड़े अक्षरों में कुछ लिखना नहीं पड़ता; वे हिकारत से भरी अपनी एक ही दृष्टि से तथा अपने शरीर के हाव-भाव द्वारा आने वालों को स्पष्ट कर देते हैं कि उस चर्च में उनका स्वागत नहीं है।

   लोग जैसा बाहर से दिखते हैं, आवश्यक नहीं कि वह उनके मन के अन्दर की स्थिति का सच्चा प्रतिरूप हो। बाहरी स्वरूप तो दिखावा होता है जो समय, व्यक्ति और परिस्थिति के साथ बदलता रहता है। इसीलिए परमेश्वर हमारे बाहरी स्वरूप का नहीं, हमारे अन्दर गहराई से झांककर हमारे मन का मूल्यांकन करता है (1 शमूएल 16:7); और वह भली-भांति जानता है कि जो बाहर से धर्मी दिखाई देते हैं वे अन्दर से कैसे अधर्म और दोगलेपन से भरे हैं (मत्ती 23:28)। इसीलिए परमेश्वर चाहता है कि हम मसीही विश्वासी भी लोगों का मूल्यांकन अपने स्वर्गीय पिता के उदाहरणानुसार भीतरी स्थिति को जानकर ही करें, ना कि बाहरी स्वरूप को देखकर।

   हमारा प्रेमी परमेश्वर पिता किसी को भी अपने पास आने से नहीं रोकता; चाहे वह अपनी या संसार कि नज़रों में कैसा भी हो, कितना भी गिरा हुआ और पाप से भरा हुआ क्यों ना हो (यशायाह 55:7)। और वह चाहता है कि हम मसीही विश्वासी भी इसी प्रेम, अनुग्रह और सहिषुणता को लोगों के दिखाएं; उनके लिए अपने दिलों के दरवाज़ों पर "बाहर रहें" नहीं वरन "स्वागत है" लगा कर रखें। - सिंडी हैस कैस्पर


आपका कथन, "परमेश्वर प्रेम है" किसी की समझ में नहीं आएगा जब तक आप अपने जीवन तथा व्यवहार से उसे दिखाएंगे नहीं।

परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है। - 1 शमूएल 16:7

बाइबल पाठ: यशायाह 55:1-9
Isaiah 55:1 अहो सब प्यासे लोगो, पानी के पास आओ; और जिनके पास रूपया न हो, तुम भी आकर मोल लो और खाओ! दाखमधु और दूध बिन रूपए और बिना दाम ही आकर ले लो। 
Isaiah 55:2 जो भोजनवस्तु नहीं है, उसके लिये तुम क्यों रूपया लगाते हो, और, जिस से पेट नहीं भरता उसके लिये क्यों परिश्रम करते हो? मेरी ओर मन लगाकर सुनो, तब उत्तम वस्तुएं खाने पाओगे और चिकनी चिकनी वस्तुएं खाकर सन्तुष्ट हो जाओगे। 
Isaiah 55:3 कान लगाओ, और मेरे पास आओ; सुनो, तब तुम जीवित रहोगे; और मैं तुम्हारे साथ सदा की वाचा बान्धूंगा अर्थात दाऊद पर की अटल करूणा की वाचा। 
Isaiah 55:4 सुनो, मैं ने उसको राज्य राज्य के लोगों के लिये साक्षी और प्रधान और आज्ञा देने वाला ठहराया है। 
Isaiah 55:5 सुन, तू ऐसी जाति को जिसे तू नहीं जानता बुलाएगा, और ऐसी जातियां जो तुझे नहीं जानतीं तेरे पास दौड़ी आएंगी, वे तेरे परमेश्वर यहोवा और इस्राएल के पवित्र के निमित्त यह करेंगी, क्योंकि उसने तुझे शोभायमान किया है।
Isaiah 55:6 जब तक यहोवा मिल सकता है तब तक उसकी खोज में रहो, जब तक वह निकट है तब तक उसे पुकारो; 
Isaiah 55:7 दुष्ट अपनी चालचलन और अनर्थकारी अपने सोच विचार छोड़कर यहोवा ही की ओर फिरे, वह उस पर दया करेगा, वह हमारे परमेश्वर की ओर फिरे और वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा। 
Isaiah 55:8 क्योंकि यहोवा कहता है, मेरे विचार और तुम्हारे विचार एक समान नहीं है, न तुम्हारी गति और मेरी गति एक सी है। 
Isaiah 55:9 क्योंकि मेरी और तुम्हारी गति में और मेरे और तुम्हारे सोच विचारों में, आकाश और पृथ्वी का अन्तर है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 34-35
  • प्रेरितों 15:1-21


सोमवार, 6 जुलाई 2015

प्यास


   पिछले कुछ वर्षों में मैं एक-दो बार शरीर में पानी की कमी होने के कारण अस्वस्थ हुआ हूँ। जब भी मेरे शरीर में पानी की कमी हुई, मुझे चक्कर आने लगे, मैं ठीक से दिखने नहीं पा रहा था, मुझे समय स्थान और व्यक्ति को पहचान पाने में बहुत कठिनाई होने लगी, मैं स्पष्ट बोल भी नहीं पा रहा था। अपने उन कष्टदायक अनुभवों से मैंने सीख लिया कि पानी की उचित मात्रा शरीर में रहना कितना आवश्यक है; और मैं दोबारा उस अनुभव से कतई नहीं निकलना चाहता हूँ।

   शरीर में पानी की कमी के इन अनुभवों ने मुझे प्रभु यीशु के एक निमंत्रण के बारे में नया मूल्यांकन दिया है; प्रभु यीशु ने मन्दिर में खड़े होकर सार्वजनिक निमंत्रण दिया: "फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए" (यूहन्ना 7:37)। प्रभु द्वारा की गई यह घोषणा, जिस दिन वह करी गई उसके संदर्भ में, नाटकीय थी। यूहन्ना बताता है कि वह यहूदियों के एक बड़े पर्व का अन्तिम एवं मुख्य दिन था। जिस पर्व का यहाँ उल्लेख आया है वह यहूदियों के मिस्त्र की गुलामी से निकलकर वाचा किए हुए कनान देश तक पहुँचने की चालीस वर्षीय जंगल यात्रा को समरण करने का पर्व था। उस पर्व के अन्तिम एवं मुख्य दिन मन्दिर की सीढ़ियों पर जल प्रवाहित किया जाता था जो परमेश्वर द्वारा बियाबान और जंगल की यात्रा में भी उन इस्त्राएलियों को पानी उपलब्ध करवाते रहने को स्मरण करवाता था। उस जल प्रवाह करने के समय, प्रभु यीशु ने अपने आप को सभी के लिए अति आवश्यक जीवन का जल होना घोषित किया और निमंत्रण दिया कि जो प्यासा हो वह स्वेच्छा से आए और उससे जीवन जल भरपूरी से ले।

   हमारे आत्मिक स्वास्थ्य और भलाई के लिए हमारा प्रभु यीशु पर ऐसे निर्भर रहना जैसे हम दैनिक जीवन में जल पर निर्भर रहते हैं अति आवश्यक है; अन्यथा आत्मिक जल की कमी के वैसे ही आत्मिक लक्षण हम में दिखने लगेंगे जैसे मैंने शारीरिक जल की कमी के कारण अनुभव किए थे। अपने अन्दर इस आत्मिक जल की मात्रा को बनाए रखने और आत्मिक प्यास को बुझाए रखने के लिए हमें प्रभु के साथ प्रार्थना में बातचीत करते रहना चाहिए, उसके वचन के अध्ययन के द्वारा उसके साथ संपर्क तथा संगति को बनाए रखना चाहिए और अपने प्रत्येक निर्णय में उसकी बुद्धिमता और मार्गदर्शन को प्राप्त करना चाहिए।

   प्रभु यीशु से घनिष्ठता से जुड़े रहें, आपके आत्मा की प्यास को केवल वह ही बुझा सकता है। - जो स्टोवैल


जीवन जल की तरोताज़गी प्राप्त करने के लिए प्रभु यीशु के पास आएं, उसके साथ बने और चलते रहें।

क्योंकि मैं प्यासी भूमि पर जल और सूखी भूमि पर धाराएं बहाऊंगा; मैं तेरे वंश पर अपनी आत्मा और तेरी सन्तान पर अपनी आशीष उण्डेलूंगा। - यशायाह 44:3

बाइबल पाठ: यूहन्ना 7:37-39
John 7:37 फिर पर्व के अंतिम दिन, जो मुख्य दिन है, यीशु खड़ा हुआ और पुकार कर कहा, यदि कोई प्यासा हो तो मेरे पास आकर पीए। 
John 7:38 जो मुझ पर विश्वास करेगा, जैसा पवित्र शास्त्र में आया है उसके हृदय में से जीवन के जल की नदियां बह निकलेंगी। 
John 7:39 उसने यह वचन उस आत्मा के विषय में कहा, जिसे उस पर विश्वास करने वाले पाने पर थे; क्योंकि आत्मा अब तक न उतरा था; क्योंकि यीशु अब तक अपनी महिमा को न पहुंचा था।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 32-33
  • प्रेरितों 14


रविवार, 5 जुलाई 2015

अनुग्रह


   कहा जाता है कि रोमी साम्राज्य के दिनों में जब कोई रोमी सेनापति युद्ध-भूमि से विजयी होकर लौटता था तो उसके सम्मान में उसकी घर-वापसी पर एक बड़ा जलूस निकाला जाता था जिसमें उसके सैनिक तथा उसके द्वारा बंदी बनाकर लाए गए पराजित लोग उसकी विजय के प्रमाण के रूप में होते थे। जलूस के मार्ग के किनारों पर खड़े लोग सेनापति की जय-जयकार के नारे लगाते थे और अपने नायक का अभिनन्दन करते थे। वह सेनापति एक रथ पर स्वार होकर चलता था। सेनापति का अहम कहीं अनावश्यक रीति से फूल ना जाए, इसलिए उसके रथ में उसके साथ एक ग़ुलाम भी खड़ा रहता तो जो सेनापति से लगातार कहता रहता था, "आप भी एक मरणहार मनुष्य ही हैं।"

   सफलता हमें विनाशकारी अहंकार में ढ़केल सकती है, हमारे मनों को फुला कर हम से हमारी वास्तविकता को नज़रंदाज़ करवा सकती है। परमेश्वर के वचन बाइबल में याकूब ने अपनी पत्री में हमें अहंकार के खतरों से सचेत करते हुए नम्र होकर परमेश्वर के साथ चलते रहने की शिक्षा दी; याकूब ने लिखा, "वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है" (याकूब 4:6)। याकूब के इस कथन की मुख्य बात है उसके द्वारा प्रयुक्त शब्द "अनुग्रह"। इससे बढ़कर कुछ और नहीं है; केवल प्रभु परमेश्वर ही है जो धन्यवाद और प्रशंसा के योग्य है - विशेषकर उस अनुग्रह के लिए जो उसने हमारे प्रति किया है, हम पर बहुतायत से उण्डेला है।

   हमारी उपलब्धियाँ, सफलताएं, महानता, चरित्र आदि संसार की दृष्टि में चाहे कितना भी अच्छा और प्रशंसनीय हो, वह सब केवल प्रभु परमेश्वर के उस अनुग्र्ह के कारण ही संभव हो सका जो उसने हम पर किया और जिसके अन्तर्गत यह सब कर पाने की योग्यता तथा क्षमता हमको प्रदान करी है। यह परमेश्वर का अनुग्रह ही है कि उसने प्रभु यीशु में होकर हमारे पापों की क्षमा और उसके साथ हमारे मेल-मिलाप का मार्ग तैयार करके दिया, हमें अनन्त विनाश से बचने का मार्ग बनाकर दिया।

   क्या आपने प्रभु परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करके अपने अनन्त भविष्य को सुनिश्चित कर लिया है? - बिल क्राउडर


परमेश्वर का अनुग्रह उसका असीम प्रेम है जो हमारे प्रति उसकी अनन्त भलाई में प्रकट होता है।

हे नवयुवकों, तुम भी प्राचीनों के आधीन रहो, वरन तुम सब के सब एक दूसरे की सेवा के लिये दीनता से कमर बान्‍धे रहो, क्योंकि परमेश्वर अभिमानियों का साम्हना करता है, परन्तु दीनों पर अनुग्रह करता है। - 1 पतरस 5:5 

बाइबल पाठ: याकूब 4:6-17
James 4:6 वह तो और भी अनुग्रह देता है; इस कारण यह लिखा है, कि परमेश्वर अभिमानियों से विरोध करता है, पर दीनों पर अनुग्रह करता है। 
James 4:7 इसलिये परमेश्वर के आधीन हो जाओ; और शैतान का साम्हना करो, तो वह तुम्हारे पास से भाग निकलेगा। 
James 4:8 परमेश्वर के निकट आओ, तो वह भी तुम्हारे निकट आएगा: हे पापियों, अपने हाथ शुद्ध करो; और हे दुचित्ते लोगों अपने हृदय को पवित्र करो। 
James 4:9 दुखी होओ, और शोक करा, और रोओ: तुम्हारी हंसी शोक में और तुम्हारा आनन्द उदासी में बदल जाए। 
James 4:10 प्रभु के साम्हने दीन बनो, तो वह तुम्हें शिरोमणि बनाएगा। 
James 4:11 हे भाइयों, एक दूसरे की बदनामी न करो, जो अपने भाई की बदनामी करता है, या भाई पर दोष लगाता है, वह व्यवस्था की बदनामी करता है, और व्यवस्था पर दोष लगाता है; और यदि तू व्यवस्था पर दोष लगाता है, तो तू व्यवस्था पर चलने वाला नहीं, पर उस पर हाकिम ठहरा। 
James 4:12 व्यवस्था देने वाला और हाकिम तो एक ही है, जिसे बचाने और नाश करने की सामर्थ है; तू कौन है, जो अपने पड़ोसी पर दोष लगाता है? 
James 4:13 तुम जो यह कहते हो, कि आज या कल हम किसी और नगर में जा कर वहां एक वर्ष बिताएंगे, और व्यापार कर के लाभ उठाएंगे। 
James 4:14 और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा: सुन तो लो, तुम्हारा जीवन है ही क्या? तुम तो मानो भाप समान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है, फिर लोप हो जाती है। 
James 4:15 इस के विपरीत तुम्हें यह कहना चाहिए, कि यदि प्रभु चाहे तो हम जीवित रहेंगे, और यह या वह काम भी करेंगे। 
James 4:16 पर अब तुम अपनी ड़ींग पर घमण्‍ड करते हो; ऐसा सब घमण्‍ड बुरा होता है। 
James 4:17 इसलिये जो कोई भलाई करना जानता है और नहीं करता, उसके लिये यह पाप है।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 30-31
  • प्रेरितों 13:26-52


शनिवार, 4 जुलाई 2015

दृष्टि


   पिछले महीने जब मैं अपनी आँखों की जाँच के लिए गया तो जाँच की रिपोर्ट से मुझे अच्छा लगने वाला समाचार मिला कि मेरी दूर देखने की दृष्टि पहले से बेहतर हो गई है। मैं इस बात से खुश था, लेकिन मेरे एक मित्र ने मुझे बताया कि उम्र के साथ दूर देखने की दृष्टि तो बेहतर हो सकती है, किंतु पास का देखने वाली दृष्टि कम होती जाती है।

   इस बात से मेरा ध्यान एक और प्रकार की दूर का देखने वाली दृष्टि की ओर गया जो मैंने कई मसीही विश्वासियों में देखी है। जो मसीही विश्वासी प्रभु यीशु के साथ निकटता से चलते रहते हैं या जिन्हें प्रभु यीशु के लिए कठिनाईयों तथा परीक्षाओं से होकर निकलना पड़ा है, अन्य विश्वासियों के मुकाबले उनकी स्वर्गीय तथा अलौकिक बातों की दृष्टि बेहतर और सांसारिक बातों के लिए कमज़ोर हो जाती है।

   प्रेरित पौलुस की दृष्टि भी ऐसी ही हो गई थी; उसने कुरिन्थुस की मसीही मण्डली को प्रोत्साहित किया, "क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है।और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं" (2 कुरिन्थियों 4:17-18)।

   धर्मशास्त्री जौनथन एडवर्ड्स ने कहा था, "स्वर्ग जाना, और परमेश्वर में पूर्णतः आनन्दित होना, पृथ्वी की सबसे आनन्दायक बातों से भी कहीं अधिक उत्तम है।" आज हम अपनी दृष्टि को लेकर पशोपेश में रहते हैं - पार्थिव वस्तुओं की ओर आकर्षित होकर उनका आनन्द लें या जौनथन एडवर्ड्स की कही बात का अनुसरण करें। लेकिन जब सब बातों के लिए हमारी नज़रें प्रभु यीशु पर टिकी रहती हैं तो हमारा दृष्टि भी स्वर्गीय हो जाती है। - एनी सेटास


अपनी आँखें प्रभु पर तथा उससे मिलने वाले ईनाम पर लगाए रखें।

सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। कुलुस्सियों 3:1-2

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:16-5:8
2 Corinthians 4:16 इसलिये हम हियाव नहीं छोड़ते; यद्यपि हमारा बाहरी मनुष्यत्‍व नाश भी होता जाता है, तौभी हमारा भीतरी मनुष्यत्‍व दिन प्रतिदिन नया होता जाता है। 
2 Corinthians 4:17 क्योंकि हमारा पल भर का हल्का सा क्‍लेश हमारे लिये बहुत ही महत्‍वपूर्ण और अनन्त महिमा उत्पन्न करता जाता है। 
2 Corinthians 4:18 और हम तो देखी हुई वस्‍तुओं को नहीं परन्तु अनदेखी वस्‍तुओं को देखते रहते हैं, क्योंकि देखी हुई वस्तुएं थोड़े ही दिन की हैं, परन्तु अनदेखी वस्तुएं सदा बनी रहती हैं। 
2 Corinthians 5:1 क्योंकि हम जानते हैं, कि जब हमारा पृथ्वी पर का डेरा सरीखा घर गिराया जाएगा तो हमें परमेश्वर की ओर से स्वर्ग पर एक ऐसा भवन मिलेगा, जो हाथों से बना हुआ घर नहीं परन्तु चिरस्थाई है। 
2 Corinthians 5:2 इस में तो हम कराहते, और बड़ी लालसा रखते हैं; कि अपने स्‍वर्गीय घर को पहिन लें। 
2 Corinthians 5:3 कि इस के पहिनने से हम नंगे न पाए जाएं। 
2 Corinthians 5:4 और हम इस डेरे में रहते हुए बोझ से दबे कराहते रहते हैं; क्योंकि हम उतारना नहीं, वरन और पहिनना चाहते हैं, ताकि वह जो मरनहार है जीवन में डूब जाए। 
2 Corinthians 5:5 और जिसने हमें इसी बात के लिये तैयार किया है वह परमेश्वर है, जिसने हमें बयाने में आत्मा भी दिया है। 
2 Corinthians 5:6 सो हम सदा ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं और यह जानते हैं; कि जब तक हम देह में रहते हैं, तब तक प्रभु से अलग हैं। 
2 Corinthians 5:7 क्योंकि हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं। 
2 Corinthians 5:8 इसलिये हम ढाढ़स बान्‍धे रहते हैं, और देह से अलग हो कर प्रभु के साथ रहना और भी उत्तम समझते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • अय्युब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25