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रविवार, 7 अगस्त 2016

कठिन लोग


   अपनी पुस्तक, "God in the Dock" में लेखक सी० एस० ल्यूईस ऐसे लोगों का वर्णन करते हैं जिनके साथ कार्य करना या निभाना कठिन होता है। ऐसे लोगों का स्वार्थीपन, क्रोध, ईर्ष्या आदि जैसे दुर्गुण उनके साथ हमारे संबंधों को अकसर बिगाड़ देते हैं, संबंध निभाना कठिन कर देते हैं। ऐसे लोगों को लेकर हम यह सोचने लगते हैं कि, "यदि यह व्यक्ति ना होता तो जीवन कितना सहज हो जाता; काश कि हम ऐसे लोगों के साथ कार्य करने या निभाने से बच सकते!"

   फिर ल्यूईस हम पर पासा पलट देते हैं और हमारे सामने एक कटु सत्य लेकर आते हैं; उन कठिन लोगों के कारण जैसी कुँठाओं और निराशाओं का सामना हमें करना पड़ता है, वैसी ही बातों का सामना हमारे कारण परमेश्वर को भी प्रतिदिन करना पड़ता है। ल्यूईस लिखते हैं, "आप भी वैसे ही कठिन व्यक्ति हैं। आपके चरित्र में भी कुछ गंभीर दोष हैं। जैसे आपकी योजनाएं और आशाएं किसी अन्य के चरित्र के कारण धाराशायी हो गई हैं, वैसे ही औरों की योजनाएं और आशाएं आपके चरित्र के कारण भी धाराशाई हुई हैं।" जैसे परमेश्वर प्रतिदिन हमारे प्रति धैर्य तथा सहनशीलता दिखाते हुए हमें स्वीकार करे रहता है, इस तथ्य का बोध होने के पश्चात हमें भी उन कठिन लोगों के प्रति वैसे ही धैर्य तथा सहनशीलता दिखाते रहना चाहिए।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में इफसुस के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो" (इफिसियों 4:2)। जो कोई धैर्यवान है, वह बिना क्रोधित हुए या बिना बदला लेने की भावना के, किसी भी कठिन जन के साथ अधिक अच्छे से व्यवहार कर सकता है; बिना उत्तेजित एवं विचलित हुए, उसे सहनशीलता के साथ अनुग्रह दिखा सकता है।

   क्या आपके जीवन में कठिन लोग हैं? परमेश्वर से प्रार्थना में मांगें कि वह आप में होकर उन तक अपना प्रेम और अनुग्रह पहुँचाए। - डेनिस फिशर


जैसा परमेश्वर आपको देखता है, आपके साथ व्यवहार करता है, 
आप भी औरों के साथ वैसा ही करें।

क्योंकि मैं ने तुम्हें नमूना दिखा दिया है, कि जैसा मैं ने तुम्हारे साथ किया है, तुम भी वैसा ही किया करो। - यूहन्ना 13:15

बाइबल पाठ: इफिसियों 4:1-12
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। 
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। 
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो। 
Ephesians 4:4 एक ही देह है, और एक ही आत्मा; जैसे तुम्हें जो बुलाए गए थे अपने बुलाए जाने से एक ही आशा है। 
Ephesians 4:5 एक ही प्रभु है, एक ही विश्वास, एक ही बपतिस्मा। 
Ephesians 4:6 और सब का एक ही परमेश्वर और पिता है, जो सब के ऊपर और सब के मध्य में, और सब में है।
Ephesians 4:7 पर हम में से हर एक को मसीह के दान के परिमाण से अनुग्रह मिला है। 
Ephesians 4:8 इसलिये वह कहता है, कि वह ऊंचे पर चढ़ा, और बन्‍धुवाई को बान्‍ध ले गया, और मनुष्यों को दान दिए। 
Ephesians 4:9 (उसके चढ़ने से, और क्या पाया जाता है केवल यह, कि वह पृथ्वी की निचली जगहों में उतरा भी था। 
Ephesians 4:10 और जो उतर गया यह वही है जो सारे आकाश से ऊपर चढ़ भी गया, कि सब कुछ परिपूर्ण करे)। 
Ephesians 4:11 और उसने कितनों को भविष्यद्वक्ता नियुक्त कर के, और कितनों को सुसमाचार सुनाने वाले नियुक्त कर के, और कितनों को रखवाले और उपदेशक नियुक्त कर के दे दिया। 
Ephesians 4:12 जिस से पवित्र लोग सिद्ध हों जाएं, और सेवा का काम किया जाए, और मसीह की देह उन्नति पाए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 72-73
  • रोमियों 9:1-15



शनिवार, 6 अगस्त 2016

नया तथा सुन्दर


   हाल ही में मेरी बेटी ने मुझे अपना समुद्री काँच, जिसे समुद्र-तटीय काँच भी कहते हैं, का संग्रह दिखाया। ये उन काँच के टुकड़ों का संग्रह है जो कभी काँच के बर्तन या बोतलें थे, किसी कारणवश टूट कर बिखर गए, और फिर क्योंकि उनकी कोई उपयोगिता नहीं रही इसलिए उन्हें फेंक दिया गया। व्यर्थ समझ कर फेंके गए वे टुकड़े बहते हुए समुद्र में पहुँच जाते हैं, जहाँ लहरों के थपेड़ों और रेत से रगड़-रगड़ कर उनके तीखे किनारे घिस कर गोल हो जाते हैं। अन्त-परिणाम एक अलग ही सुन्दरता लिए हुए काँच होता है जिसकी बहुत कीमत है, जिसे संग्रहकर्ता और कलाकार बड़ी मेहनत से ढूँढ़ते हैं और संजो-सजा कर रखते हैं। कभी व्यर्थ जानकर फेंका गया वह काँच अब नया और सुन्दर आकार लेकर बहुमूल्य और उपयोगी हो जाता है।

   यही कार्य परमेश्वर अपने अनुग्रह और प्रेम द्वारा उन टूटे हुए जीवनों के साथ भी करता है, जो अपने आप को उसके हाथों में समर्पित कर देते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम खण्ड में हम पढ़ते हैं कि परमेश्वर ने यिर्मयाह नबी को एक कुम्हार को कार्य करते हुए देखने को कहा। यिर्मयाह ने देखा कि कुम्हार चाक पर बर्तन बना रहा था और बर्तन बिगड़ गया; लेकिन कुम्हार ने उस बिगड़े हुए बर्तन को फेंक नहीं दिया, वरन तुरंत ही उसे सुधार कर एक नया तथा सुन्दर बर्तन बना दिया (यिर्मयाह 18:1-6)। परमेश्वर ने समझाया कि इस्त्राएल के लोग, उसकी प्रजा, उसके हाथ में वैसे ही है जैसे वह बर्तन कुम्हार के हाथों में था; परमेश्वर भी अपने लोगों को आवश्यकतानुसार सुधार तथा संवार सकता है, उन्हें नया और सुन्दर बना सकता है।

   हम सभी उसी एकमात्र परमेश्वर ही की सृष्टि हैं; वह हमारी रचना को हमसे अधिक गहराई और बारीकी से जानता है। जीवन या संसार की कोई परिस्थिति, हमारा कोई भी पाप, हमें ऐसा कभी नहीं बिगाड़ अथवा तोड़ सकता है कि परमेश्वर हमें पुनः सुधार तथा संवार के नया तथा सुन्दर ना बना सके। वह तो ऐसा करना चाहता है; वह आपकी प्रतीक्षा में है, कि आप उसके हाथों में अपने आप को समर्पित करें, उसे अपना कार्य करने की अनुमति तथा स्वतंत्रता दें और वह आपको सुधार तथा संवार कर, अपने कार्य के लिए उपयोगी, नया तथा सुन्दर बना दे। - सिंडी हैस कैसपर


जब हम परिस्थितियों द्वारा पिघला दिए जाते हैं, 
तब उस ’कुम्हार’ के लिए हमें नए आकार में ढालने का सर्वोत्तम अवसर होता है।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17 

बाइबल पाठ: यिर्मयाह 18:1-6
Jeremiah 18:1 यहोवा की ओर से यह वचन यिर्मयाह के पास पहुंचा, उठ कर कुम्हार के घर जा, 
Jeremiah 18:2 और वहां मैं तुझे अपने वचन सुनवाऊंगा। 
Jeremiah 18:3 सो मैं कुम्हार के घर गया और क्या देखा कि वह चाक पर कुछ बना रहा है! 
Jeremiah 18:4 और जो मिट्टी का बासन वह बना रहा था वह बिगड़ गया, तब उसने उसी का दूसरा बासन अपनी समझ के अनुसार बना दिया। 
Jeremiah 18:5 तब यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुंचा, हे इस्राएल के घराने, 
Jeremiah 18:6 यहोवा की यह वाणी है कि इस कुम्हार की नाईं तुम्हारे साथ क्या मैं भी काम नहीं कर सकता? देख, जैसा मिट्टी कुम्हार के हाथ में रहती है, वैसा ही हे इस्राएल के घराने, तुम भी मेरे हाथ में हो।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 70-71
  • रोमियों 8:22-39



शुक्रवार, 5 अगस्त 2016

स्वतंत्र


   हाथी पृथ्वी की सतह पर रहने वाला सबसे विशाल और शक्तिशाली जीव है। लेकिन उसे थामे रखने के लिए केवल एक रस्सी ही काफी है। ऐसा कैसे? जब हाथी बच्चा ही होता है तो उसे एक मज़बूत रस्सी के साथ एक बड़े पेड़ के साथ बाँध दिया जाता है। कई सप्ताह वह ऐसे ही बंधा ज़ोर लगाकर, खींच कर, इधर-उधर भागकर उस रस्सी से छूटने के असफल प्रयास करता रहता है, और अन्ततः हारकर, छूट पाने को असंभव जानकर वह प्रयास करना छोड़ देता है। अब, बड़ा और अधिक ताकतवर होने के बाद भी, जैसे ही वह हाथी किसी रस्सी के बंधन के प्रतिरोध को अनुभव करता है, वह उससे छूटने के प्रयास करता ही नहीं है। उसे अभी भी यही लगता है कि यह प्रयास करना व्यर्थ है और वह कभी स्वतंत्र नहीं हो पाएगा।

   शैतान भी हमें अपना बंदी बनाए रखने के लिए कुछ ऐसी ही चालें हमारे साथ भी चलता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें आश्वस्त करती है कि "सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया" (रोमियों 8:1-2); लेकिन हमारी आत्माओं का शत्रु शैतान हमें उलझाए रखने और हमें यही मनवाए रखने के प्रयास करता रहता है कि हम अभी भी उसके बंधनों में बंधे हुए हैं।

   ऐसे में हमें क्या करना चाहिए? उन बातों पर ध्यान लगाएं और मनन करें जो प्रभु यीशु मसीह ने हमारे लिए करीं हैं। हम ध्यान करें कि प्रभु हमारे पापों के लिए बलिदान हुआ, मरकर फिर मृतकों में से जी उठा और पाप के हर बंधन से हमें स्वतंत्र कर दिया (पद 3)। उसमें लाए गए विश्वास, और उससे मिल्ने वाली पापों की क्षमा के कारण हम परमेश्वर कि सन्तान हो गए हैं (यूहन्ना 1:12-13); अब परमेश्वर का पवित्र-आत्मा हमारे अन्दर निवास करता है और हमें सामर्थी करता है (पद 11)।

   मसीह यीशु में हम पाप, शैतान और संसार के हर बंधन से स्वतंत्र हैं। - पोह फैंग चिया


सच्ची स्वत्संत्रता का अनुभव करें - 
अपनी प्रत्येक बात, प्रत्येक विचार को मसीह यीशु के आधीन कर दें।

परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: रोमियों 8:1-11
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया। 
Romans 8:3 क्योंकि जो काम व्यवस्था शरीर के कारण दुर्बल हो कर न कर सकी, उसको परमेश्वर ने किया, अर्थात अपने ही पुत्र को पापमय शरीर की समानता में, और पाप के बलिदान होने के लिये भेज कर, शरीर में पाप पर दण्ड की आज्ञा दी। 
Romans 8:4 इसलिये कि व्यवस्था की विधि हम में जो शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं, पूरी की जाए। 
Romans 8:5 क्योंकि शरीरिक व्यक्ति शरीर की बातों पर मन लगाते हैं; परन्तु आध्यात्मिक आत्मा की बातों पर मन लगाते हैं। 
Romans 8:6 शरीर पर मन लगाना तो मृत्यु है, परन्तु आत्मा पर मन लगाना जीवन और शान्ति है। 
Romans 8:7 क्योंकि शरीर पर मन लगाना तो परमेश्वर से बैर रखना है, क्योंकि न तो परमेश्वर की व्यवस्था के आधीन है, और न हो सकता है। 
Romans 8:8 और जो शारीरिक दशा में है, वे परमेश्वर को प्रसन्न नहीं कर सकते। 
Romans 8:9 परन्तु जब कि परमेश्वर का आत्मा तुम में बसता है, तो तुम शारीरिक दशा में नहीं, परन्तु आत्मिक दशा में हो। यदि किसी में मसीह का आत्मा नहीं तो वह उसका जन नहीं। 
Romans 8:10 और यदि मसीह तुम में है, तो देह पाप के कारण मरी हुई है; परन्तु आत्मा धर्म के कारण जीवित है। 
Romans 8:11 और यदि उसी का आत्मा जिसने यीशु को मरे हुओं में से जिलाया तुम में बसा हुआ है; तो जिसने मसीह को मरे हुओं में से जिलाया, वह तुम्हारी मरणहार देहों को भी अपने आत्मा के द्वारा जो तुम में बसा हुआ है जिलाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 68-69
  • रोमियों 8:1-21


गुरुवार, 4 अगस्त 2016

आवश्यक बातें


   गायक फर्नैन्डो ओर्टेगा द्वारा गाए गए सुप्रसिद्ध मसीही भजन "Just As I am" (जैसा मैं हूँ) की रिकॉर्डिंग में विश्व-विख्यात मसीही प्रचारक डॉ० बिली ग्राहम की आवाज़ पृष्ठभूमि में हलकी सी सुनाई देती है। डॉ० ग्राहम उस समय को स्मरण कर रहे हैं जब वे बीमार थे और उन्हें लग रहा था कि वे मृत्यु के समीप हैं। अपने जीवन पर विचार करते हुए उन्हें यह एहसास हुआ कि वे कितने बड़े पापी हैं और प्रतिदिन उन्हें परमेश्वर के अनुग्रह और क्षमा की कितनी अधिक आवश्यकता बनी रहती है।

   बिली ग्राहम इस धारणा का अन्त करने का प्रयास कर रहे थे कि परमेश्वर के बिना भी हम ठीक-ठाक रह सकते हैं। हम अपने बारे में भला तो सोच और अनुभव कर सकते हैं, परन्तु यह भावना केवल इस तथ्य पर आधारित होनी चाहिए कि हम केवल परमेश्वर के अनुग्रह के कारण ही उसकी सनतान और उसके प्रेम के भागी हैं (यूहन्ना 3:16), ना कि इस बात पर कि हम अपने कर्मों या प्रयासों से अच्छे हैं (रोमियों 7:18)।

   मसीह यीशु का अनुयायी होने के बाद, परमेश्वर की नज़रों में तथा वास्तव में अच्छा बनने के लिए पहला कदम होता है इस पाखण्ड का अन्त करना कि हम अपने कर्मों और प्रयासों से अच्छे बने हैं या बन सकते हैं, और परमेश्वर पिता से माँगना कि वह ही हमें जितना संभव है उतना अच्छा और भला बनाए। ऐसा करने के लिए परमेश्वर हम से कुछ बातों को करने, कुछ को छोड़ने, अपनी प्राथमिकताओं तथा इच्छाओं को बदलने आदि जैसी कई बातों के लिए कहेगा, और उन्हें पूरा करने में हम अनेकों बार असफल भी रहेंगे; लेकिन जब तक हम परमेश्वर को समर्पित रहकर उसके आज्ञाकारी बने रहेंगे, उसकी इच्छापूर्ति के लिए प्रयासरत रहेंगे, वह हमें अपनी समानता में अंश अंश करके बदलता और बढ़ाता रहेगा (2 कुरिन्थियों 3:18)। परमेश्वर विश्वासयोग्य है और वह अपने समय तथा अपनी योजना के अनुसार हम में बदलाव लाता रहेगा (फिलिप्पियों 1:6)।

   अपने जीवन के अन्तिम दिनों में, "Amazing Grace" (फज़ल अजीब क्या खुशइल्हान) नामक सुप्रसिद्ध मसीही भजन के लेखक जौन न्युटन की स्मरण शक्ति क्षीण होने लगी और बातों को स्मरण ना रख पाने को लेकर वे दुःखी होते थे। लेकिन ऐसे में भी, उन्होंने अंगीकार किया, "मुझे दो बातें स्मरण रहती हैं: पहली, मैं एक बहुत बड़ा पापी हूँ; दूसरी, मसीह यीशु बहुत ही बड़ा उद्धारकर्ता है।" जब मसीही विश्वास की बात आती है, तो केवल यही दो बातें हैं जिनको जानना और मानना हमारे लिए आवश्यक है। इन आवश्यक बातों को हमें कभी नज़रन्दाज़ नहीं करना चाहिए, कभी नहीं भुलाना चाहिए। - डेविड रोपर


परमेश्वर के अनुग्रह को स्वीकार करने से ही परमेश्वर की संगति और शांति का अनुभव मिलता है।

हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते की नाईं मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु की नाईं उड़ा दिया है। - यशायाह 64:6

बाइबल पाठ: रोमियों 7:18-8:2
Romans 7:18 क्योंकि मैं जानता हूं, कि मुझ में अर्थात मेरे शरीर में कोई अच्छी वस्तु वास नहीं करती, इच्छा तो मुझ में है, परन्तु भले काम मुझ से बन नहीं पड़ते। 
Romans 7:19 क्योंकि जिस अच्छे काम की मैं इच्छा करता हूं, वह तो नहीं करता, परन्तु जिस बुराई की इच्छा नहीं करता वही किया करता हूं। 
Romans 7:20 परन्तु यदि मैं वही करता हूं, जिस की इच्छा नहीं करता, तो उसका करने वाला मैं न रहा, परन्तु पाप जो मुझ में बसा हुआ है। 
Romans 7:21 सो मैं यह व्यवस्था पाता हूं, कि जब भलाई करने की इच्छा करता हूं, तो बुराई मेरे पास आती है। 
Romans 7:22 क्योंकि मैं भीतरी मनुष्यत्व से तो परमेश्वर की व्यवस्था से बहुत प्रसन्न रहता हूं। 
Romans 7:23 परन्तु मुझे अपने अंगो में दूसरे प्रकार की व्यवस्था दिखाई पड़ती है, जो मेरी बुद्धि की व्यवस्था से लड़ती है, और मुझे पाप की व्यवस्था के बन्धन में डालती है जो मेरे अंगों में है। 
Romans 7:24 मैं कैसा अभागा मनुष्य हूं! मुझे इस मृत्यु की देह से कौन छुड़ाएगा? 
Romans 7:25 मैं अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर का धन्यवाद करता हूं: निदान मैं आप बुद्धि से तो परमेश्वर की व्यवस्था का, परन्तु शरीर से पाप की व्यवस्था का सेवन करता हूं।
Romans 8:1 सो अब जो मसीह यीशु में हैं, उन पर दण्ड की आज्ञा नहीं: क्योंकि वे शरीर के अनुसार नहीं वरन आत्मा के अनुसार चलते हैं। 
Romans 8:2 क्योंकि जीवन की आत्मा की व्यवस्था ने मसीह यीशु में मुझे पाप की, और मृत्यु की व्यवस्था से स्वतंत्र कर दिया।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 66-67
  • रोमियों 7


बुधवार, 3 अगस्त 2016

बन्धन


   मेरी गाड़ी के दरवाज़े का ताला दिक्कत दे रहा था और मुझे तालों की मरम्मात करने वाले कारीगर को बुलाना पड़ा। जब वह अपना काम कर रहा था तो हम बातचीत भी करने लगे और मुझे उसके बात करने का अंदाज़ बड़ा स्नेहिल और पहिचाना हुआ सा लगा। फिर बातचीत के दौरान मुझे यह जान कर सुखद आश्चर्य हुआ कि वह भी मूलतः जमाईका से है - ऐसे स्थान से, जहाँ मैं अनेकों बार गया हूँ और जिसे मैं चाहने लगा हूँ। उस सुन्दर द्वीप-राष्ट्र जमाईका के प्रति हमारे व्यक्तिगत प्रेम ने परस्पर हम दोनों को जोड़ने वाले एक समान बन्धन की पहिचान करवाई।

   इस घटना से मुझे एक और भी अधिक प्रगाढ़ सौहार्द के बन्धन की याद करवाई - किसी अन्य मसीही विश्वासी से मिलने और पहिचानने का आनन्द की; कि वह भी मसीह यीशु में लाए गए विश्वास के द्वारा हम से जुड़ा हुआ है। उन जगहों पर जहाँ अनेकों मसीही विश्वासी रहते हैं, इस बन्धन का आनन्द वैसा अभिभूत कर देने वाला अनुभव नहीं होता जैसा कि वहाँ होता है जहाँ मसीही विश्वासी कम हैं, लेकिन फिर भी अनायास ही किसी विश्वासी से मुलाकात हो जाती है। तब मसीह यीशु में लाए गए विश्वास द्वारा मिली पापों की क्षमा और स्वतंत्रता तथा विश्वास के जीवन के अनुभव एक दूसरे के साथ बाँटना बड़ा रोमांचकारी होता है।

   जितने भी जन मसीह यीशु के विश्वासी हैं, उनमें परस्पर संबंध का एक बन्धन है; मसीह यीशु में होकर बनने वाला समानता का यह संबंध (गलतियों 3:27-28), संगति का ऐसा आनन्द प्रदान करता है जो हरेक अन्धकार में भी आशा की अद्भुत ज्योति प्रज्जवलित कर देता है।

   परमेश्वर का शत-शत धन्यवाद हो कि जितनों ने मसीह यीशु को स्वेच्छा से अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया है और अपना जीवन उसे समर्पित किया है, उन्हें वह अपने साथ तथा परस्पर एक अनन्तकाल के प्रेम तथा आनन्द के बन्धन में ले आता है। - डेव ब्रैनन


मसीह यीशु की संगति हमें परस्पर प्रेम के बन्धन में बाँधती, बनाती और बढ़ाती है।

और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। - गलतियों 3:27-28

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:10-18
Ephesians 2:10 क्योंकि हम उसके बनाए हुए हैं; और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिये सृजे गए जिन्हें परमेश्वर ने पहिले से हमारे करने के लिये तैयार किया।
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)। 
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे। 
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो। 
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। 
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे। 
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बनाकर परमेश्वर से मिलाए। 
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया। 
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 63-65
  • रोमियों 6


मंगलवार, 2 अगस्त 2016

अनुग्रह-स्थल


   अमेरिका के टेनेस्सी प्रांत के मेम्फिस शहर में स्थित ग्रेसलैंड मैन्शन एक ऐसा घर है जिसे देखने के लिए प्रति वर्ष अनेकों सैलानी जाते हैं। इस भवन का निर्माण सन 1930 में हुआ था, और इसका नाम इस भवन के मूल मालिक की बुज़ुर्ग रिश्तेदार ’ग्रेस’ के नाम पर रखा गया था। इसे यह ख्याति बाद में इसमें रहने वाले विश्व-प्रसिद्ध गायक एल्विस प्रैस्ली के कारण मिली, और आज एल्विस के घर को देखने के लिए ही सैलानी वहाँ आते हैं।

   मुझे वह नाम ’ग्रेसलैंड’ अर्थात ’अनुग्रह-स्थल’ बहुत पसन्द है क्योंकि यह मुझे उस क्षेत्र का स्मरण दिलाता है जहाँ परमेश्वर ने अपने अनुग्रह में होकर मुझे प्रदान करी गई मेरे पापों की क्षमा के बाद मुझे अपनाकर रखा है। परमेश्वर ने मुझे पाप के अन्धकार से निकाल कर अपनी ज्योति के अनुग्रह-स्थल में निवास करने का आदर प्रदान किया है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में रोम के मसीही विश्वासियों को लिखी अपनी पत्री में प्रेरित पौलुस ने लिखा, "पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लोगों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ" (रोमियों 5:15)। मैं सदा ही इस बात का आभारी तथा धन्यवादी रहूँगा कि पौलुस जिन ’बहुतेरे लोगों’ का उल्लेख यहाँ पर कर रहा है, उन में से एक मैं भी हूँ; और मेरे किसी कर्म, गुण, योग्यता, उपलब्धि, ख्याति या विशेषता के कारण नहीं परन्तु परमेश्वर के महान प्रेम के कारण ही मेरा स्थानान्तरण उसके अद्भुत, अनन्त और अनुपम अनुग्रह-स्थल में हुआ है। प्रभु यीशु मसीह में स्वेच्छा से लाए गए विश्वास और उनसे माँगी गई पापों की क्षमा ने मेरे लिए यह संभव कर दिया है।

   परमेश्वर के उस अनुग्रह-स्थल में होने की आशीष के बारे में विचार करें; यह एक ऐसा स्थान है जिसमें होकर परमेश्वर ने हमें अपनी उपस्थिति में रहने का सौभाग्य प्रदान किया है, और उसका यह अनुग्रह दिन-प्रतिदिन हमारे जीवनों में अविरल एक समान प्रवाहित होता रहता है; हमारी किसी बात के कारण यह अनुग्रह ना बढ़ता है और ना ही घटता है, वरन हर बात, हर परिस्थिति में सदा उपलब्ध और एक समान बना रहता है। पौलुस अपने अनुभव के आधार पर हमें आशवस्त करता है कि हम यदि किसी असहनीय, अति निराशाजनक परिस्थिति में भी पड़ जाएं जिसका हल नहीं मिल पा रहा हो, तब भी यह अनुग्रह हमें उस परिस्थिति से पार लगा देता है (2 कुरिन्थियों 12:9)। जीवन और संसार हमारे सामने कुछ भी क्यों ना ले आएं, लेकिन हमें परमेश्वर के अनुग्रह-स्थल से अलग कभी नहीं कर सकते।

   क्या आपने परमेश्वर के इस अनुग्रह-स्थल में अपना स्थान ले लिया है? - जो स्टोवैल


स्मरण रखें कि परमेश्वर ने आपको कहाँ रखा है और उसके अनुग्रह-स्थल में सदा आनन्दित रहें।

और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे। - 2 कुरिन्थियों 12:9

बाइबल पाठ: रोमियों 5:10-21
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।
Romans 5:12 इसलिये जैसा एक मनुष्य के द्वारा पाप जगत में आया, और पाप के द्वारा मृत्यु आई, और इस रीति से मृत्यु सब मनुष्यों में फैल गई, इसलिये कि सब ने पाप किया। 
Romans 5:13 क्योंकि व्यवस्था के दिए जाने तक पाप जगत में तो था, परन्तु जहां व्यवस्था नहीं, वहां पाप गिना नहीं जाता। 
Romans 5:14 तौभी आदम से ले कर मूसा तक मृत्यु ने उन लोगों पर भी राज्य किया, जिन्हों ने उस आदम के अपराध की नाईं जो उस आने वाले का चिन्ह है, पाप न किया। 
Romans 5:15 पर जैसा अपराध की दशा है, वैसी अनुग्रह के वरदान की नहीं, क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध से बहुत लोग मरे, तो परमेश्वर का अनुग्रह और उसका जो दान एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के अनुग्रह से हुआ बहुतेरे लोगों पर अवश्य ही अधिकाई से हुआ। 
Romans 5:16 और जैसा एक मनुष्य के पाप करने का फल हुआ, वैसा ही दान की दशा नहीं, क्योंकि एक ही के कारण दण्ड की आज्ञा का फैसला हुआ, परन्तु बहुतेरे अपराधों से ऐसा वरदान उत्पन्न हुआ, कि लोग धर्मी ठहरे। 
Romans 5:17 क्योंकि जब एक मनुष्य के अपराध के कराण मृत्यु ने उस एक ही के द्वारा राज्य किया, तो जो लोग अनुग्रह और धर्म रूपी वरदान बहुतायत से पाते हैं वे एक मनुष्य के, अर्थात यीशु मसीह के द्वारा अवश्य ही अनन्त जीवन में राज्य करेंगे। 
Romans 5:18 इसलिये जैसा एक अपराध सब मनुष्यों के लिये दण्ड की आज्ञा का कारण हुआ, वैसा ही एक धर्म का काम भी सब मनुष्यों के लिये जीवन के निमित धर्मी ठहराए जाने का कारण हुआ। 
Romans 5:19 क्योंकि जैसा एक मनुष्य के आज्ञा न मानने से बहुत लोग पापी ठहरे, वैसे ही एक मनुष्य के आज्ञा मानने से बहुत लोग धर्मी ठहरेंगे। 
Romans 5:20 और व्यवस्था बीच में आ गई, कि अपराध बहुत हो, परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ। 
Romans 5:21 कि जैसा पाप ने मृत्यु फैलाते हुए राज्य किया, वैसा ही हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा अनुग्रह भी अनन्त जीवन के लिये धर्मी ठहराते हुए राज्य करे।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 60-62
  • रोमियों 5


सोमवार, 1 अगस्त 2016

शरणस्थान


   हम ऑस्ट्रेलिया की अपनी यात्रा के दौरान एक नगर में प्रवेश कर रहे थे; वहाँ हमने एक स्वागत सन्देश लिखा हुआ देखा: "जो भी शरण या आश्रय का स्थान ढूँढ़ रहे हैं हम उनका स्वागत करते हैं।" इस प्रकार का यह स्वागत सन्देश परमेश्वर के वचन बाइबल के पुराने नियम के काल में परमेश्वर द्वारा बनवाए गए शरण नगरों की याद दिलाता है: "तब ऐसे नगर ठहराना जो तुम्हारे लिये शरणनगर हों, कि जो कोई किसी को भूल से मार के खूनी ठहरा हो वह वहां भाग जाए। वे नगर तुम्हारे निमित्त पलटा लेने वाले से शरण लेने के काम आएंगे, कि जब तक खूनी न्याय के लिये मण्डली के साम्हने खड़ा न हो तब तक वह न मार डाला जाए" (गिनती 35:11-12)। उस समय में, यदि कोई गलती से किसी को मार डाले, या किसी पर हत्या का आरोप आए, तो अपनी जान बचाने के लिए वह कुछ निर्धारित नगरों में जाकर, जब तक उसका न्याय नहीं हो जाता, वहाँ सुरक्षित रह सकता था। परमेश्वर की ओर से अपने लोगों के लिए यह प्रयोजन करवाया गया था।

   यह केवल प्राचीन इस्त्राएल के मानने के लिए एक प्रथा मात्र ही नहीं थी, वरन यह अपने लोगों के लिए परमेश्वर के हृदय, उसकी भावनाओं की सूचक भी थी। जीवन की असफलताओं, दुःखों और हानियों में परमेश्वर स्वयं अपने लोगों का ऐसा सुरक्षित आश्रय स्थान, जहाँ वे शांति और सांत्वना पाएं, बनना चाहता है। हम भजन 59:16-17 में पढ़ते हैं, "परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है। हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है"

   हर समय, हर काल और हर स्थान पर समस्त मानव जाति के लिए शरणस्थान कोई नगर नहीं, वरन परमेश्वर स्वयं बनना चाहता है, क्योंकि उसने हमें रचा है, वह हमसे अनन्तकाल के प्रेम से प्रेम करता है, और अपने साथ हमारा मेल-मिलाप करवाने के लिए उसने अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को भी हमारे पापों के बदले बलिदान कर दिया।

   आज यह शरणस्थान सभी के लिए सारे समय खुला है, उपलब्ध है; कैसे अभागे होंगे वे जो परमेश्वर के प्रेम और इस अवसर को ठुकरा कर कहीं और अपना शरणस्थान खोजेंगे और अनन्तकाल के विनाश में चले जाएंगे। आज, अभी प्रभु यीशु को अपना शरणस्थान बना लीजिए। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु ही वास्तविक शरणस्थान है; उसी में सच्चा आश्रय और विश्राम है।

यहोवा भला है; संकट के दिन में वह दृढ़ गढ़ ठहरता है, और अपने शरणागतों की सुधी रखता है। - नहूम 1:7

बाइबल पाठ: भजन 59:9-17
Psalms 59:9 हे मेरे बल, मुझे तेरी ही आस होगी; क्योंकि परमेश्वर मेरा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 59:10 परमेश्वर करूणा करता हुआ मुझ से मिलेगा; परमेश्वर मेरे द्रोहियों के विषय मेरी इच्छा पूरी कर देगा।
Psalms 59:11 उन्हें घात न कर, न हो कि मेरी प्रजा भूल जाए; हे प्रभु, हे हमारी ढाल! अपनी शक्ति से उन्हें तितर बितर कर, उन्हें दबा दे। 
Psalms 59:12 वह अपने मुंह के पाप, और ओठों के वचन, और शाप देने, और झूठ बोलने के कारण, अभिमान में फंसे हुए पकड़े जाएं। 
Psalms 59:13 जलजलाहट में आकर उनका अन्त कर, उनका अन्त कर दे ताकि वे नष्ट हो जाएं तब लोग जानेंगे कि परमेश्वर याकूब पर, वरन पृथ्वी की छोर तक प्रभुता करता है।
Psalms 59:14 वे सांझ को लौटकर कुत्ते की नाईं गुर्राएं, और नगर के चारों ओर घूमें। 
Psalms 59:15 वे टुकड़े के लिये मारे मारे फिरें, और तृप्त न होने पर रात भर वहीं ठहरे रहें।
Psalms 59:16 परन्तु मैं तेरी सामर्थ्य का यश गाऊंगा, और भोर को तेरी करूणा का जयजयकार करूंगा। क्योंकि तू मेरा ऊंचा गढ़ है, और संकट के समय मेरा शरणस्थान ठहरा है। 
Psalms 59:17 हे मेरे बल, मैं तेरा भजन गाऊंगा, क्योंकि हे परमेश्वर, तू मेरा ऊंचा गढ़ और मेरा करूणामय परमेश्वर है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 57-59
  • रोमियों 4