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गुरुवार, 9 मार्च 2017

द्वार


   मेरे पति जे और मैंने परिवार में एक नया सदस्य लिया है - 2 माह का बिल्ली का बच्चा, जैस्पर। जैस्पर को सुरक्षित रखने के लिए हमें अपनी कुछ पुरानी आदतें, जैसे कि घर के द्वार खुले छोड़ना, बदलनी पड़ी हैं। परन्तु एक बात हमारे लिए अभी भी चुनौती बनी हुई है: खुली सीढ़ी। बिल्लियों को ऊँचाई पर चढ़ना अच्छा लगता है। बिल्ली के बच्चों को भी पता रहता है कि जब आप ऊपर से नीचे संसार को देखते हैं तो वह अधिक अच्छा दिखता है। इसलिए जब भी जैस्पर मेरे साथ नीचे होती है, उसका प्रयास रहता है कि वह ऊपर चढ़ जाए। उसे अपने पास सुरक्षित बैठाए रखना मेरी चतुराई के लिए चुनौती बना हुआ है। वे द्वार जो बच्चों और कुत्तों के लिए कार्य करते हैं, बिल्लियों के लिए कार्य नहीं करते।

   द्वार को लेकर मेरी यह दुविधा मुझे प्रभु यीशु द्वारा अपने लिए प्रयुक्त उपमा स्मरण करवाती है। प्रभु यीशु ने अपने विषय में कहा, "...मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं" (यूहन्ना 10:7)। उन दिनों में मध्य-पूर्व की भेड़शालाएं चारदीवारी से घिरा एक स्थान होती थीं जिसका एक ही द्वार होता था, जिससे भेड़ें अन्दर या बाहर आती-जाती थीं। रात को सभी भेड़ों को अन्दर सुरक्षित करके उनका चरवाहा स्वयं द्वार के सामने लेट जाता था जिससे ना तो भेड़ बाहर जा सके और ना ही उन्हें हानि पहुँचाने वाला कोई अन्दर उन तक जा सके।

   यद्यपि मैं जैस्पर को सुरक्षित रखना चाहती हूँ, परन्तु मैं अपने आप को वैसा ’द्वार’ बनाने के लिए तैयार नहीं हूँ; मेरे पास करने के लिए और भी बहुत काम हैं। परन्तु प्रभु यीशु मसीह हमारे लिए यही करते हैं; वे हमारे तथा हमारे शत्रु शैतान के बीच बने रहते हैं, जिससे वह हमारी कोई आत्मिक हानी ना करने पाए। प्रभु यीशु रूपी इस द्वार के भीतर मैं और सभी मसीही विश्वासी शैतान की हर चाल से सुरक्षित बने रहते हैं। क्या आपने भी इस द्वार, प्रभु यीशु मसीह के पीछे अपने आप को सुरक्षित कर लिया है? - जूली ऐकरमैन लिंक


आप जितना चरवाहे के निकट रहेंगे, भेड़िया आप से उतना ही दूर रहेगा।

अच्छा चरवाहा मैं हूं; जिस तरह पिता मुझे जानता है, और मैं पिता को जानता हूं। इसी तरह मैं अपनी भेड़ों को जानता हूं, और मेरी भेड़ें मुझे जानती हैं, और मैं भेड़ों के लिये अपना प्राण देता हूं। - यूहन्ना 10:14-15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 10:1-10
John 10:1 मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि जो कोई द्वार से भेड़शाला में प्रवेश नहीं करता, परन्तु और किसी ओर से चढ़ जाता है, वह चोर और डाकू है। 
John 10:2 परन्तु जो द्वार से भीतर प्रवेश करता है वह भेड़ों का चरवाहा है। 
John 10:3 उसके लिये द्वारपाल द्वार खोल देता है, और भेंड़ें उसका शब्द सुनती हैं, और वह अपनी भेड़ों को नाम ले ले कर बुलाता है और बाहर ले जाता है। 
John 10:4 और जब वह अपनी सब भेड़ों को बाहर निकाल चुकता है, तो उन के आगे आगे चलता है, और भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं; क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं। 
John 10:5 परन्तु वे पराये के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उस से भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानती। 
John 10:6 यीशु ने उन से यह दृष्‍टान्‍त कहा, परन्तु वे न समझे कि ये क्या बातें हैं जो वह हम से कहता है।
John 10:7 तब यीशु ने उन से फिर कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूं, कि भेड़ों का द्वार मैं हूं। 
John 10:8 जितने मुझ से पहिले आए; वे सब चोर और डाकू हैं परन्तु भेड़ों ने उन की न सुनी। 
John 10:9 द्वार मैं हूं: यदि कोई मेरे द्वारा भीतर प्रवेश करे तो उद्धार पाएगा और भीतर बाहर आया जाया करेगा और चारा पाएगा। 
John 10:10 चोर किसी और काम के लिये नहीं परन्तु केवल चोरी करने और घात करने और नष्‍ट करने को आता है। मैं इसलिये आया कि वे जीवन पाएं, और बहुतायत से पाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 8-10
  • मरकुस 11:19-33


बुधवार, 8 मार्च 2017

पवित्रता


   हम बहुधा ऐसे सर्वेक्षण देखते हैं जिनमें लोगों से पूछा जाता है कि क्या वे प्रसन्न हैं, या अपने काम से संतुष्ट हैं, या क्या जीवन का आनन्द ले रहे हैं, इत्यादि। परन्तु मैंने आज तक कभी कोई ऐसा सर्वेक्षण नहीं देखा है जिसमें पूछा गया हो "क्या आप पवित्रता का जीवन व्यतीत कर रहे हैं?" यदि आप से यह प्रश्न किया जाए तो अपने विषय में आप इस प्रश्न का क्या उत्तर देंगे?

   परमेश्वर के वचन बाइबल के शब्दों के एक शब्दकोष के अनुसार पवित्रता की परिभाषा है, "परमेश्वर के लिए पृथक होना और इस पृथक होने के अनुसार जीवन व्यतीत करना।" लेखक फ्रेड्रिक ब्युकनर ने कहा कि किसी व्यक्ति के चरित्र के बारे में लिखते समय, "उसमें पवित्रता को सजीव बनाने से कठिन और कुछ भी नहीं है।" उन्होंने आगे लिखा, "भलाई के सदगुण के समान, पवित्रता मनुष्यों का गुण है ही नहीं। पवित्रता ऐसा कुछ भी नहीं है जो मनुष्य कर सकें, वरन वह है जो परमेश्वर उनके अन्दर करता है।"

   बाइबल में रोमियों 6 में उस अद्भुत उपहार -’नए जीवन’ का चित्रण है जो परमेश्वर हमें मसीह यीशु में विश्वास लाने के द्वारा प्रदान करता है: "सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें" (रोमियों 6:4)। पवित्रता के अनुसरण का प्रयास प्रतिदिन तब ही होता है जब हम अपने पुराने चरित्र के अनुसार अपनी स्वार्थ-सिद्धी तथा आत्म-संतुष्टि के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर का आज्ञाकारी बनाते हैं: "...परन्तु अब पाप से स्वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है" (रोमियों 6:22)।

   क्या आप प्रतिदिन पवित्रता में बढ़ते जा रहे हैं? यदि आपने प्रभु यीशु में विश्वास से परमेश्वर के अनुग्रह और सामर्थ को अपना लिया है तो उसके द्वारा आपका भी गुंजायामान उत्तर हो सकता है, "हाँ! प्रतिदिन और अधिक।" - डेविड मैक्कैसलैण्ड


पवित्रता के खोजी होकर उसका अनुसरण करना जीवन अथवा मृत्यु का मामला है।

सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा। - इब्रानियों 12:14

बाइबल पाठ: रोमियों 6:12-23
Romans 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो। 
Romans 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो। 
Romans 6:14 और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो। 
Romans 6:15 तो क्या हुआ क्या हम इसलिये पाप करें, कि हम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हैं? कदापि नहीं। 
Romans 6:16 क्या तुम नहीं जानते, कि जिस की आज्ञा मानने के लिये तुम अपने आप को दासों की नाईं सौंप देते हो, उसी के दास हो: और जिस की मानते हो, चाहे पाप के, जिस का अन्त मृत्यु है, चाहे आज्ञा मानने के, जिस का अन्त धामिर्कता है।
Romans 6:17 परन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, कि तुम जो पाप के दास थे तौभी मन से उस उपदेश के मानने वाले हो गए, जिस के सांचे में ढाले गए थे। 
Romans 6:18 और पाप से छुड़ाए जा कर धर्म के दास हो गए। 
Romans 6:19 मैं तुम्हारी शारीरिक दुर्बलता के कारण मनुष्यों की रीति पर कहता हूं, जैसे तुम ने अपने अंगो को कुकर्म के लिये अशुद्धता और कुकर्म के दास कर के सौंपा था, वैसे ही अब अपने अंगों को पवित्रता के लिये धर्म के दास कर के सौंप दो। 
Romans 6:20 जब तुम पाप के दास थे, तो धर्म की ओर से स्वतंत्र थे। 
Romans 6:21 सो जिन बातों से अब तुम लज्ज़ित होते हो, उन से उस समय तुम क्या फल पाते थे? 
Romans 6:22 क्योंकि उन का अन्त तो मृत्यु है परन्तु अब पाप से स्वतंत्र हो कर और परमेश्वर के दास बनकर तुम को फल मिला जिस से पवित्रता प्राप्त होती है, और उसका अन्त अनन्त जीवन है। 
Romans 6:23 क्योंकि पाप की मजदूरी तो मृत्यु है, परन्तु परमेश्वर का वरदान हमारे प्रभु मसीह यीशु में अनन्त जीवन है।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 5-7
  • मरकुस 11:1-18


मंगलवार, 7 मार्च 2017

स्थिरता


   बचपन में मेरे पास मुस्कुराते हुए चेहरे और गोलाकार पेंदे वाला प्लास्टिक से बना एक गुड्डा था जिसमें हवा भरकर उसे खड़ा किया जाता था। फुला कर खड़ा करने के बाद उसकी ऊँचाई मेरे बराबर हो जाती थी। मेरे लिए चुनौती थी कि उसे मुक्कों से मारकर नीचे धरती पर लेटा दूँ। परन्तु मैं चाहे जितनी भी ज़ोर से उसे क्यों ना मारूँ, वह तुरंत उठकर खड़ा हो जाता था। इसका रहस्य? उसके गोलाकार पेंदे में लगाया गया सीसे का एक वज़नी टुकड़ा, जो उसे सदा ही खड़ा रखता था।

   पाल नौकाएं भी इसी सिद्धांत द्वारा काम करती हैं - उनके पेंदों में पानी में नीचे की ओर ’कील’ नामक वज़न लगा होता है जिससे उनका पेंदा सदा पानी में नीचे की ओर स्थिर रहता है। पाल पर लगने वाली तेज़ हवाएं यदि पाल नौका को ऊपर से इधर-उधर टेढ़ा भी करें, तो भी उनकी कील का वह वज़न उन्हें वापस सीधा कर देता है, और नौका तेज़ हवाओं में भी स्थिर बनी रहती है।

   मसीही विश्वासी के जीवन में भी ऐसा ही होता है। चुनौतियों का सामना करने की हमारी सामर्थ हमारी अपनी नहीं है, वरन हम में बसने वाले परमेश्वर से है। हम जीवन के थपेड़ों और तूफानों से अछूते तो नहीं हैं, परन्तु सुरक्षित किए गए हैं, क्योंकि हमें स्थिर करने वाला हमारा परमेश्वर हम में रहता है। इसीलिए प्रेरित पौलुस ने लिखा, "हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते" (2 कुरिन्थियों 4:8-9)।

   जीवन मार्ग के उन अनेकों यात्रियों के साथ हो कर चलिए जिन्होंने दुःख और क्लेश के गहरे जल में भी इस तथ्य को थामे रखा कि उन्हें स्थिर रखने वाले परमेश्वर का अनुग्रह हर परिस्थिति में उनके लिए पर्याप्त है; और पौलुस के समान इस विश्वास में बने रहे कि जब हम अपने आप में दुर्बल होते हैं, तब ही परमेश्वर के अनुग्रह द्वारा बलवान होते हैं: "और उसने मुझ से कहा, मेरा अनुग्रह तेरे लिये बहुत है; क्योंकि मेरी सामर्थ निर्बलता में सिद्ध होती है; इसलिये मैं बड़े आनन्द से अपनी निर्बलताओं पर घमण्‍ड करूंगा, कि मसीह की सामर्थ मुझ पर छाया करती रहे" (2 कुरिन्थियों 12:9)। इस विचार को थामे रखना, इसमें दृढ़ रहना हमारे जीवनों को हर परिस्थिति में स्थिरता देगा। - जो स्टोवैल


आपके अन्दर विद्यमान परमेश्वर की सामर्थ, 
आपके चारों ओर की समस्याओं के तनाव और दबाव से कहीं अधिक बढ़कर है।

हे बालको, तुम परमेश्वर के हो: और तुम ने उन पर जय पाई है; क्योंकि जो तुम में है, वह उस से जो संसार में है, बड़ा है। - 1 यूहन्ना 4:4

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 4:7-14
2 Corinthians 4:7 परन्तु हमारे पास यह धन मिट्ठी के बरतनों में रखा है, कि यह असीम सामर्थ हमारी ओर से नहीं, वरन परमेश्वर ही की ओर से ठहरे। 
2 Corinthians 4:8 हम चारों ओर से क्‍लेश तो भोगते हैं, पर संकट में नहीं पड़ते; निरूपाय तो हैं, पर निराश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:9 सताए तो जाते हैं; पर त्यागे नहीं जाते; गिराए तो जाते हैं, पर नाश नहीं होते। 
2 Corinthians 4:10 हम यीशु की मृत्यु को अपनी देह में हर समय लिये फिरते हैं; कि यीशु का जीवन भी हमारी देह में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:11 क्योंकि हम जीते जी सर्वदा यीशु के कारण मृत्यु के हाथ में सौंपे जाते हैं कि यीशु का जीवन भी हमारे मरनहार शरीर में प्रगट हो। 
2 Corinthians 4:12 सो मृत्यु तो हम पर प्रभाव डालती है और जीवन तुम पर। 
2 Corinthians 4:13 और इसलिये कि हम में वही विश्वास की आत्मा है, (जिस के विषय मे लिखा है, कि मैं ने विश्वास किया, इसलिये मैं बोला) सो हम भी विश्वास करते हैं, इसी लिये बोलते हैं। 
2 Corinthians 4:14 क्योंकि हम जानते हैं, जिसने प्रभु यीशु को जिलाया, वही हमें भी यीशु में भागी जानकर जिलाएगा, और तुम्हारे साथ अपने साम्हने उपस्थित करेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 3-4
  • मरकुस 10:32-52


सोमवार, 6 मार्च 2017

रहस्य


   सैलिनियों के लिए इंगलैण्ड के सबसे लोकप्रीय आकर्षणों में से एक है स्टोनहेंज में लगे हुए पत्थर के विशाल स्तंभ। बड़ी चट्टानों के ये टुकड़े एक बड़े रहस्य का स्त्रोत भी हैं। हर साल अनेकों लोग स्टोनहेंज आते हैं कि इन्हें देखें, उनके अन्दर कौतुहल होता है कि इन्हें क्यों खड़ा किया गया और इन्हें किसने खड़ा किया? इंजीनियरिंग की इस विलक्षण उपलब्धि को करने वाला कौन है और यह चमत्कार उसने कैसे करा? परन्तु सैलानियों को उन खामोश पत्थरों से इन प्रश्नों का कोई उत्तर नहीं मिलता है और यह रहस्य बना ही रहता है।

   पवित्रशास्त्र इससे भी बड़े एक रहस्य के बारे में बताता है - यह तथ्य कि परमेश्वर हमारे बीच में मनुष्य बनकर रहा। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने लिखा: "और इस में सन्‍देह नहीं, कि भक्ति का भेद गम्भीर है; अर्थात वह जो शरीर में प्रगट हुआ, आत्मा में धर्मी ठहरा, स्‍वर्गदूतों को दिखाई दिया, अन्यजातियों में उसका प्रचार हुआ, जगत में उस पर विश्वास किया गया, और महिमा में ऊपर उठाया गया" (1 तिमुथियुस 3:16)। प्रभु यीशु मसीह के जीवन का यह संक्षिप्त अवलोकन, अर्थात भक्ति का यह भेद, अपने आप में विलक्षण है। परन्तु इस सृष्टि के सृष्टिकर्ता ने संसार में आकर मानव रूप में रहना और अपनी रचना के लिए बलिदान होना क्यों स्वीकार कर लिया, यह रहस्य नहीं है, क्योंकि बाइबल बताती है, "परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा" (रोमियों 5:8) - हमारे प्रति परमेश्वर का महान प्रेम ही भक्ति के इस भेद के पीछे है और समस्त मानव जाति के लिए क्रूस पर दिए गए प्रभु यीशु के बलिदान ने इसे सब पर प्रगट कर दिया है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु कैसे मनुष्य बने यह तो रहस्य हो सकता है, 
परन्तु परमेश्वर का प्रेम रहस्य नहीं है।

क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे, वह नाश न हो, परन्तु अनन्त जीवन पाए। - यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें। 
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें। 
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। 
Romans 5:4 ओर धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। 
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है। 
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा। 
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे। 
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा। 
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे? 
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे? 
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • व्यवस्थाविवरण 1-2
  • मरकुस 10:1-31


रविवार, 5 मार्च 2017

मुझ से


   मैं उन्हें ’मैल नोट्स’ कहता हूँ - छोटी टिप्पणियाँ जो हमारी बेटी मैलिस्सा ने अपनी बाइबल में लिखीं जिससे वह उस पद या परिच्छेद को अपने जीवन में लागू कर सके। जैसे कि उसने मत्ती 7 के पहले दो पदों के चारों ओर एक रेखा खींची थी। परमेश्वर के वचन बाइबल के इस खण्ड में प्रभु यीशु मसीह ने औरों का न्याय करने से संबंधित शिक्षा दी है; प्रभु ने यहाँ सिखाया है कि हम जिस नाप से औरों के लिए नापते हैं उसी नाप से हमारे लिए भी नापा जाएगा। इस खण्ड के चारों ओर रेखा खींचने के बाद मैल ने अपने नोट में लिखा: "इससे पहले कि दूसरे क्या कर रहे हैं देखो, यह देखो कि तुम क्या कर रहे हो।"

   मैलिस्सा औरों के प्रति ध्यान रखने वाली किशोरी थी। वह परमेश्वर के वचन बाइबल के फिलिप्पियों 2:4 के निर्देष को जीया करती थी। उसके सहपाठी मैट ने, जो मैलिस्सा के साथ छोटी आयु से लेकर ग्यारहवीं कक्षा के उस समय तक रहा था जब एक कार दुर्घटना में मैलिस्सा की मृत्यु हुई, मैलिस्सा की मृत्योपरांत रखी गई यादगार सभा कहा: "मुझे कोई ऐसा समय याद नहीं आता है जब मैंने तुम्हें मुस्कुराते हुए या किसी के लिए कुछ ऐसा करते हुए नहीं देखा जिससे उनका दिन आनन्दपूर्ण हो जाए।" उसकी सहेली तारा ने कहा: "मेरी सहेली होने के लिए धन्यवाद, उस समय में भी जब कोई तुम्हारे समान भला और हँसमुख नहीं होता था।"

   ऐसे समय में जब औरों के प्रति कर्कश रवैया रखते हुए उनका आँकलन करना सामान्यतः देखा जाता है, यह ध्यान करना भला है कि प्रेम का आरंभ हम से ही होता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, "पर अब विश्वास, आशा, प्रेम ये तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है" (1 कुरिन्थियों 13:13)। यह कितना प्रभावी होगा जब हम औरों को देखें और तो विचार करें कि उनके प्रति प्रेम का आरंभ मुझ से ही होगा। क्या यह प्रभु यीशु द्वारा हम से किए गए प्रेम को प्रतिबिंबित करना नहीं होगा? - डेव ब्रैनन


हमारे प्रति परमेश्वर के प्रेम को स्वीकार करना ही 
औरों से प्रेम प्रदर्शित करने का आधार है।

हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। - फिलिप्पियों 2:4

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:9 क्योंकि हमारा ज्ञान अधूरा है, और हमारी भविष्यद्वाणी अधूरी। 
1 Corinthians 13:10 परन्तु जब सवर्सिद्ध आएगा, तो अधूरा मिट जाएगा। 
1 Corinthians 13:11 जब मैं बालक था, तो मैं बालकों की नाईं बोलता था, बालकों का सा मन था बालकों की सी समझ थी; परन्तु सियाना हो गया, तो बालकों की बातें छोड़ दी। 
1 Corinthians 13:12 अब हमें दर्पण में धुंधला सा दिखाई देता है; परन्तु उस समय आमने साम्हने देखेंगे, इस समय मेरा ज्ञान अधूरा है; परन्तु उस समय ऐसी पूरी रीति से पहिचानूंगा, जैसा मैं पहिचाना गया हूं। 
1 Corinthians 13:13 पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है।

एक साल में बाइबल: 

  • गिनती 34-36
  • मरकुस 9:30-50


शनिवार, 4 मार्च 2017

आश्वस्त


   ब्रिस्टल विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, यूरोप की चट्टानों मे रहने वाली चीटियाँ अपने निवास स्थान संबंधित माप-दण्डों और उनका विश्लेषण करने में संभवतः हम मनुष्यों से बेहतर हैं। उन शोधकर्ताओं ने पाया कि वे चीटियाँ अपने रहने के स्थान के बारे में जानकारी एकत्रित करने के लिए विशेष गुप्तचर चीटियों का उपयोग करती रहती हैं। वैज्ञानिकों को भी स्तब्ध कर देने वाले सामाजिक जीवन कौशल का उपयोग करके वे चट्टानी चीटियाँ साथ-साथ मिलकर कार्य करती हैं जिससे कि वे रहने के लिए सही स्थान, अन्धकार और आवश्यक सुरक्षा का पता लगा सकें और रानी चींटी को और उसके अँडों-लार्वों को सबसे उपयुक्त रहने का स्थान दे सकें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में हम देखते हैं कि मूसा के समय में, इस्त्राएल को रहने-बसने के लिए एक नया स्थान चाहिए था। मिस्त्र में उन्हें कठोर दास्तव का सामना करना पड़ा था जिससे निकलकर वे अब सिनै के बियाबान से होकर यात्रा कर रहे थे, और यह भी बसने के लिए उपयुक्त नहीं था। परमेश्वर उन्हें अपने वायदे के अनुसार एक ऐसे देश में ले कर जा रहा था जहाँ दूध और मधु की नदियाँ बहती थीं; परन्तु उस स्थान से संबंधित, उनकी नज़रों में, एक गंभीर समस्या आ गई थी - इस्त्राएल को जो लोग उस देश के बारे में पता लगाने के लिए गए थे, उन्होंने आकर इस बात की तो पुष्टि की कि वह देश बहुत ही मनोहर, उपजाऊ और संपन्न है; लेकिन साथ ही यह भी बताया कि उस देश में गढ़वाले नगर और दैत्याकार अनाकवंशी भी रहते थे, जिनके समक्ष उन इस्त्राएली भेदियों ने अपने आप को टिड्डियों के समान पाया (गिनती 13:28, 33)। उनकी इस बात से निराश होकर इस्त्राएलियों ने परमेश्वर की कही बात पर अविश्वास किया और उस देश में जाने से इन्कार कर दिया, जो उन्हें फिर बहुत भारी पड़ गया।

   अपनी तुलना परमेश्वर द्वारा बनाए गए अन्य जीवों से करना कभी कभी लभदायक हो सकता है, परन्तु यह तुलना केवल आकार तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए; उन जीवों द्वारा परमेश्वर की आज्ञाकारिता का भी वैसा ही पालन होना चाहिए। यूरोपीय चट्टानी चीटियाँ अपने सृष्टिकर्ता द्वारा उन्हें दिए गए नैसर्गिक गुणों और सहजबुद्धि का पालन करती हैं, और अद्भुत कार्य कर लेती हैं। हम अपने भय और अविश्वास के कारण परमेश्वर की मानने और करने से कतराते रहते हैं और परेशानियों में जीवन व्यतीत करते हैं। जब भी हम आश्वस्त होकर परमेश्वर के प्रेम और हमारी भलाई ही के लिए उसके प्रत्येक कार्य को स्वीकार करके उसकी इच्छा के अनुसार चलते और कार्य करते हैं, हम भी अपने जीवनों में सफल, समृद्ध और उन्नत होते जाते हैं; और हम सच्चे मन से कह सकते हैं, "हे प्रभु, तू पीढ़ी से पीढ़ी तक हमारे लिये धाम बना है" (भजन 90:1)। - मार्ट डी हॉन


अपने आप को परमेश्वर में सुरक्षित और बसा हुआ देखना,
 जीवन के सही स्थान पर होना है।

मेरे लिये सनातन काल की चट्टान का धाम बन, जिस में मैं नित्य जा सकूं; तू ने मेरे उद्धार की आज्ञा तो दी है, क्योंकि तू मेरी चट्टान और मेरा गढ़ ठहरा है। हे मेरे परमेश्वर दुष्ट के, और कुटिल और क्रूर मनुष्य के हाथ से मेरी रक्षा कर। - भजन 71:3-4

बाइबल पाठ: गिनती 13:17-33
Numbers 13:17 उन को कनान देश के भेद लेने को भेजते समय मूसा ने कहा, इधर से, अर्थात दक्षिण देश हो कर जाओ, 
Numbers 13:18 और पहाड़ी देश में जा कर उस देश को देख लो कि कैसा है, और उस में बसे हुए लोगों को भी देखो कि वे बलवान्‌ हैं वा निर्बल, थोड़े हैं वा बहुत, 
Numbers 13:19 और जिस देश में वे बसे हुए हैं सो कैसा है, अच्छा वा बुरा, और वे कैसी कैसी बस्तियों में बसे हुए हैं, और तम्बुओं में रहते हैं वा गढ़ वा किलों में रहते हैं, 
Numbers 13:20 और वह देश कैसा है, उपजाऊ है वा बंजर है, और उस में वृक्ष हैं वा नहीं। और तुम हियाव बान्धे चलो, और उस देश की उपज में से कुछ लेते भी आना। वह समय पहली पक्की दाखों का था। 
Numbers 13:21 सो वे चल दिए, और सीन नाम जंगल से ले रहोब तक, जो हमात के मार्ग में है, सारे देश को देखभाल कर उसका भेद लिया। 
Numbers 13:22 सो वे दक्षिण देश हो कर चले, और हेब्रोन तक गए; वहां अहीमन, शेशै, और तल्मै नाम अनाकवंशी रहते थे। हेब्रोन तो मिस्र के सोअन से सात वर्ष पहिले बसाया गया था। 
Numbers 13:23 तब वे एशकोल नाम नाले तक गए, और वहां से एक डाली दाखों के गुच्छे समेत तोड़ ली, और दो मनुष्य उस एक लाठी पर लटकाए हुए उठा ले चले गए; और वे अनारों और अंजीरों में से भी कुछ कुछ ले आए। 
Numbers 13:24 इस्त्राएली वहां से जो दाखों का गुच्छा तोड़ ले आए थे, इस कारण उस स्थान का नाम एशकोल नाला रखा गया। 
Numbers 13:25 चालीस दिन के बाद वे उस देश का भेद ले कर लौट आए। 
Numbers 13:26 और पारान जंगल के कादेश नाम स्थान में मूसा और हारून और इस्त्राएलियों की सारी मण्डली के पास पहुंचे; और उन को और सारी मण्डली को संदेशा दिया, और उस देश के फल उन को दिखाए। 
Numbers 13:27 उन्होंने मूसा से यह कहकर वर्णन किया, कि जिस देश में तू ने हम को भेजा था उस में हम गए; उस में सचमुच दूध और मधु की धाराएं बहती हैं, और उसकी उपज में से यही है। 
Numbers 13:28 परन्तु उस देश के निवासी बलवान हैं, और उसके नगर गढ़ वाले हैं और बहुत बड़े हैं; और फिर हम ने वहां अनाकवंशियों को भी देखा। 
Numbers 13:29 दक्षिण देश में तो अमालेकी बसे हुए हैं; और पहाड़ी देश में हित्ती, यबूसी, और एमोरी रहते हैं; और समुद्र के किनारे किनारे और यरदन नदी के तट पर कनानी बसे हुए हैं। 
Numbers 13:30 पर कालेब ने मूसा के साम्हने प्रजा के लोगों को चुप कराने की मनसा से कहा, हम अभी चढ़ के उस देश को अपना कर लें; क्योंकि नि:सन्देह हम में ऐसा करने की शक्ति है। 
Numbers 13:31 पर जो पुरूष उसके संग गए थे उन्होंने कहा, उन लोगों पर चढ़ने की शक्ति हम में नहीं है; क्योंकि वे हम से बलवान हैं। 
Numbers 13:32 और उन्होंने इस्त्राएलियों के साम्हने उस देश की जिसका भेद उन्होंने लिया था यह कहकर निन्दा भी की, कि वह देश जिसका भेद लेने को हम गये थे ऐसा है, जो अपने निवासियों निगल जाता है; और जितने पुरूष हम ने उस में देखे वे सब के सब बड़े डील डौल के हैं। 
Numbers 13:33 फिर हम ने वहां नपीलों को, अर्थात नपीली जाति वाले अनाकवंशियों को देखा; और हम अपनी दृष्टि में तो उनके साम्हने टिड्डे के सामान दिखाई पड़ते थे, और ऐसे ही उनकी दृष्टि में मालूम पड़ते थे।

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 31-33
  • मरकुस 9:1-29


शुक्रवार, 3 मार्च 2017

बदलाव


   यदि आप मेरे समान हैं तो आपने ने भी कोई नई ज़िम्मेदारी को निभाना स्वीकार करने के लिए संघर्ष किया होगा - विशेषकर तब जब वह किसी भले कार्य तथा औरों की सहायाता करने से संबंधित हो। निभाने के लिए इन्कार करने या अपनी प्राथमिकताओं का ध्यानपूर्वक चयन करने के हमारे पास उचित कारण हो सकते हैं। परन्तु फिर भी कई बार, और अधिक कुछ करने के लिए सहमत नहीं होने के कारण हम दोषी अनुभव कर सकते हैं या हमें प्रतीत हो सकता है कि हम अपने मसीही विश्वास में कम हो गए हैं।

   परन्तु परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक 3:1-8 के अनुसार, बुद्धि पहचानती है कि जीवन में प्रत्येक बात का अपना समय होता है - मानवीय गतिविधियों में भी तथा प्रकृति के कार्यों में भी: "हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है" (सभोपदेशक 3:1)।

   हो सकता है कि आप का विवाह होने वाला हो, या आप पहली बार माता या पिता बनने वाले हैं। हो सकता है कि आपके लिए पढ़ाई पूरी कर के अब नौकरी में जाने का समय आ रहा है, या अपनी कार्य अवधि पूरी करके आप की सेवानिवृति होने वाली है। जैसे जैसे हमारे समय बदलते हैं, हमारी प्राथमिकताएं भी बदलती हैं। हमें जो हम करते आ रहे हैं उसे छोड़कर अपनी शक्तियों को किसी अन्य ओर लगाने के बारे में विचार करना पड़ता है।

   जब जीवन हमारी परिस्थितियों तथा ज़िम्मेदारियों में बदलाव लाता है, तो उन नई परिस्थितियों में हमें बुद्धिमता तथा ज़िम्मेदारी के साथ चुनाव करना होता है कि हम किन बातों को स्वीकार करें या निभाएं, और किन को नहीं। ऐसे समय में निर्णय लेने में सहायक बातों में से एक है, "जो कुछ भी करो परमेश्वर कि महिमा के लिए करो" (1 कुरिन्थियों 10:31)। बाइबल में नीतिवचन 3:5-6 हमें आश्वस्त करता है कि जब हम सब बातों में परमेश्वर को प्राथमिकता देते हैं, तो वह जिस मार्ग पर हमें जाना चाहिए उसके लिए हमारा मार्गदर्शन भी करता है; हमारे जीवन के हर बदलाव और हर परिस्थिति में। - पो फैंग चिया


मसीह यीशु के प्रति समर्पण का जीवन विचार करके 
सही कार्य करने की हमारी प्रतिदिन की बुलाहट है।

तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। - नीतिवचन 3:5-6

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 3:1-13
Ecclesiastes 3:1 हर एक बात का एक अवसर और प्रत्येक काम का, जो आकाश के नीचे होता है, एक समय है। 
Ecclesiastes 3:2 जन्म का समय, और मरण का भी समय; बोने का समय; और बोए हुए को उखाड़ने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:3 घात करने का समय, और चंगा करने का भी समय; ढा देने का समय, और बनाने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:4 रोने का समय, और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:5 पत्थर फेंकने का समय, और पत्थर बटोरने का भी समय; गल लगाने का समय, और गल लगाने से रूकने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:6 ढूंढ़ने का समय, और खो देने का भी समय; बचा रखने का समय, और फेंक देने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:7 फाड़ने का समय, और सीने का भी समय; चुप रहने का समय, और बोलने का भी समय है; 
Ecclesiastes 3:8 प्रेम का समय, और बैर करने का भी समय; लड़ाई का समय, और मेल का भी समय है। 
Ecclesiastes 3:9 काम करने वाले को अधिक परिश्रम से क्या लाभ होता है? 
Ecclesiastes 3:10 मैं ने उस दु:खभरे काम को देखा है जो परमेश्वर ने मनुष्यों के लिये ठहराया है कि वे उस में लगे रहें। 
Ecclesiastes 3:11 उसने सब कुछ ऐसा बनाया कि अपने अपने समय पर वे सुन्दर होते है; फिर उसने मनुष्यों के मन में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, तौभी काल का ज्ञान उत्पन्न किया है, वह आदि से अन्त तक मनुष्य बूझ नहीं सकता। 
Ecclesiastes 3:12 मैं ने जान लिया है कि मनुष्यों के लिये आनन्द करने और जीवन भर भलाई करने के सिवाय, और कुछ भी अच्छा नहीं; 
Ecclesiastes 3:13 और यह भी परमेश्वर का दान है कि मनुष्य खाए-पीए और अपने सब परिश्रम में सुखी रहे। 

एक साल में बाइबल: 
  • गिनती 28-30
  • मरकुस 8:22-38