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सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

स्वर्ग में धन


   हमारे नए बने हुए घर को बिजली की तार लगाने में की गई कमियों और त्रुटियों ने जलाकर राख कर दिया, घंटे भर में ही घर के स्थान पर केवल राख का ढेर रह गया था। एक और समय पर जब हम चर्च से लौट कर अपने घर वापस आए तो हमने पाया कि कोई चोर घर में से कुछ सामान चुरा कर ले गया है।

   हमारे इस अपूर्ण संसार में, सांसारिक सम्पत्ति की हानि होना बहुत सामान्य है - गाड़ियाँ चोरी या दुर्घटनाग्रस्त हो जाती हैं, जहाज़ डूब जाते हैं, इमारतें ढह जाती हैं, बाढ़ से घर और सामान बह जाते हैं, व्यक्तिगत सामान चोरी हो जाता है। यह सब प्रभु यीशु मसीह की सांसारिक धन में भरोसा न रखने की शिक्षा (मत्ती 6:19) को बहुत अर्थपूर्ण बना देता है।

   प्रभु यीशु मसीह ने सांसारिक धन की बजाए स्वर्ग में धन के महत्व को समझाने के लिए एक नीतिकथा सुनाई; एक मनुष्य ने बहुत लाभ कमाया और उस धन पर भरोसा रखते हुए अपने भविष्य को सुनिश्चित मान लिया (लूका 12:16-21); उस व्यक्ति ने अपने आप से कहा, "...प्राण, तेरे पास बहुत वर्षों के लिये बहुत संपत्ति रखी है; चैन कर, खा, पी, सुख से रह"। परन्तु परमेश्वर ने उससे कहा कि उसी रात उसे सब कुछ छोड़ कर जाना पड़ेगा; तब उसके पास क्या रह जाएगा? इस कहानी का निष्कर्ष देते हुए प्रभु यीशु ने कहा, "ऐसा ही वह मनुष्य भी है जो अपने लिये धन बटोरता है, परन्तु परमेश्वर की दृष्टि में धनी नहीं" (लूका 12:21)।

   सांसारिक सम्पत्ति नश्वर है, अस्थायी है। कुछ भी ऐसा नहीं है जो सदा बना रहे, सिवाए उसके जो हम परमेश्वर की इच्छा और मार्गदर्शन में दूसरों की भलाई के लिए करते हैं। स्वर्ग में धन एकत्रित करने (मत्ती 6:20) के कुछ उपाए हैं, अपने समय और संसाधनों में से प्रभु यीशु में पाप क्षमा और उद्धार के सुसमाचार के प्रचार के लिए देना, उनकी सुधि लेना जो अकेले हैं, जो आवश्यकता में हैं उनकी सहायता करना; इत्यादि। स्वर्ग में एकत्रित धन ही अविनाशी और सच्चा धन है। - लॉरेंस दरमानी


हमारा असली धन वह है जो संसार में रहते हुए 
हम आने वाले अनन्त काल के लिए निवेश करते हैं।

इसलिये पहिले तुम उसे राज्य और धर्म की खोज करो तो ये सब वस्तुएं भी तुम्हें मिल जाएंगी। - मत्ती 6:33

बाइबल पाठ: मत्ती 6:19-24
Matthew 6:19 अपने लिये पृथ्वी पर धन इकट्ठा न करो; जहां कीड़ा और काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर सेंध लगाते और चुराते हैं। 
Matthew 6:20 परन्तु अपने लिये स्वर्ग में धन इकट्ठा करो, जहां न तो कीड़ा, और न काई बिगाड़ते हैं, और जहां चोर न सेंध लगाते और न चुराते हैं। 
Matthew 6:21 क्योंकि जहां तेरा धन है वहां तेरा मन भी लगा रहेगा। 
Matthew 6:22 शरीर का दिया आंख है: इसलिये यदि तेरी आंख निर्मल हो, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला होगा। 
Matthew 6:23 परन्तु यदि तेरी आंख बुरी हो, तो तेरा सारा शरीर भी अन्धियारा होगा; इस कारण वह उजियाला जो तुझ में है यदि अन्धकार हो तो वह अन्धकार कैसा बड़ा होगा। 
Matthew 6:24 कोई मनुष्य दो स्‍वामियों की सेवा नहीं कर सकता, क्योंकि वह एक से बैर ओर दूसरे से प्रेम रखेगा, वा एक से मिला रहेगा और दूसरे को तुच्‍छ जानेगा; “तुम परमेश्वर और धन दोनों की सेवा नहीं कर सकते”।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 47-49
  • 1 थिस्सलुनीकियों 4


रविवार, 15 अक्टूबर 2017

मार्गदर्शन


   एक शताब्दी पूर्व, 41 वर्षीय ऑस्वौल्ड चैम्बर्स, प्रथम विश्व-युद्ध के समय में मिस्त्र में स्थित ब्रिटिश राष्ट्रमण्डल सेनाओं में YMCA की ओर से पादरी का कार्य करने के लिए पहुँचे। उन्हें मिस्त्र की राजधानी काइरो से 6 मील उत्तर में स्थित एक शिविर में नियुक्त किया गया। वहाँ बिताई अपनी पहली रात में चैम्बर्स ने अपनी डायरी में लिखा, "यह इलाका बिलकुल मरुभूमि है, सैनिकों के हृदयों में भी, और मनुष्यों के लिए अद्भुत सुअवसर है। ऐसा मैंने पहले कभी नहीं देखा या अनुभव किया है। मैं बड़ी रुचि के साथ उन नई बातों की ओर देख रहा हूँ जो परमेश्वर यहाँ करने जा रहा है।"

   चैम्बर्स परमेश्वर के वचन बाइबल में नीतिवचन 3:5-6 की बात: "तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा" पर विश्वास रखता था, और उसका पालन करता था। ऐसा करना चुनौतीपूर्ण भी है और शान्तिदायक भी। यह जानने और मानने में कि परमेश्वर प्रतिदिन हमारा मार्गदर्शन करेगा, सुरक्षा है; परन्तु हमें अपनी योजनाओं से इतना आसक्त नहीं हो जाना चाहिए कि हम परमेश्वर के द्वारा दिए जाने वाले मार्गदर्शन के पुनःनिर्देशनों की तथा किसी कार्य को करने के उसके समय की अवहेलना करने लगें।

   चैम्बर्स ने कहा, "हमें कोई अधिकार नहीं है कि हम पूर्वनिर्धारण कर के बैठ जाएं कि परमेश्वर को हमें कहाँ रखना चाहिए, या करने के लिए क्या कार्य देना चाहिए। परमेश्वर ही हमारे लिए हर योजना बनाता है। वह हमें जहाँ भी रखे, जिस बात के लिए भी हमारा मार्गदर्शन करे, हमारा लक्ष्य बस पूरे मन से उसके प्रति समर्पित रहना और उस कार्य को पूरी लगन एवं निष्ठा के साथ पूरा करना है।" - डेविड मैक्कैसलैण्ड


जब हम परमेश्वर पर भरोसा बनाए रखते हैं, 
तो वह हमारा मार्गदर्शन भी करता जाता है।

क्योंकि यहोवा की यह वाणी है, कि जो कल्पनाएं मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूंगा। - यिर्मयाह 29:11

बाइबल पाठ: नीतिवचन 3:1-8
Proverbs 3:1 हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना; 
Proverbs 3:2 क्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा। 
Proverbs 3:3 कृपा और सच्चाई तुझ से अलग न होने पाएं; वरन उन को अपने गले का हार बनाना, और अपनी हृदय रूपी पटिया पर लिखना। 
Proverbs 3:4 और तू परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह पाएगा, तू अति बुद्धिमान होगा।
Proverbs 3:5 तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। 
Proverbs 3:6 उसी को स्मरण कर के सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा। 
Proverbs 3:7 अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना। 
Proverbs 3:8 ऐसा करने से तेरा शरीर भला चंगा, और तेरी हड्डियां पुष्ट रहेंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 45-46
  • 1 थिस्सलुनीकियों 3


शनिवार, 14 अक्टूबर 2017

भरोसा


   जनवरी 1915 में, एन्डयोरेंस नामक जलपोत अन्टारिकटिका के तट के निकट बर्फ में फंसकर नष्ट हो गया। उस जलपोत में सवार, अर्नेस्ट शैकलटन के नेतृत्व में दक्षिणी ध्रुव पर खोज करने आए लोगों का दल, बचने के लिए तीन छोटी नौकाओं में होकर एलीफेंट द्वीप पहुँचा। अब वे एक ऐसे निर्जन द्वीप पर फंस गए थे जो सामान्य व्यापारी जल मार्गों से दूर स्थित था। उनके पास एक ही आशा थी; 24 अप्रैल 1916 को 22 लोगों के सामने शैकलटन और उसके पाँच साथी, एक छोटी नौका पर 800 मील दूर स्थित एक अन्य द्वीप, साऊथ जौर्जिया, के लिए निकल पड़े। परिस्थितियाँ और संभावनाएं असंभव प्रतीत होती थीं, और यदि वे नाविक अपने इस प्रयास में विफल हो जाते तो सभी की मृत्यु निश्चित थी। सोचिए वह कितने आनन्द का समय था, जब चार माह से भी अधिक समय के बाद एलीफेंट द्वीप पर प्रतीक्षा कर रहे उन 22 लोगों ने क्षितिज पर एक नौका को आते देखा और उस नौका में सबसे आगे शैकलटन खड़े थे, और ऊँची आवाज़ में पूछ रहे थे, "क्या आप सब ठीक हैं?" और द्वीप से उत्तर मिला, "सब ठीक! सब सुरक्षित!"

   उन लोगों को इतने महीनों तक एक साथ और सुरक्षित तथा जीवित किस बात ने रखा? एक व्यक्ति में रखे गए भरोसे ने; उन्हें विश्वास था कि शैकलटन उन्हें बचाने के लिए कोई न कोई उपाय अवश्य निकाल लेंगे।

   भरोसे और आशा का इस मानवीय उदाहरण में, परमेश्वर के वचन बाइबल में, इब्रानियों 11 में दिए गए विश्वास के नायकों के भरोसे की गूँज है। इन नायकों के "विश्वास आशा की हुई वस्‍तुओं का निश्‍चय, और अनदेखी वस्‍तुओं का प्रमाण है" (इब्रानियों 11:1) में भरोसे ने उन्हें बड़ी कठिनाईयों और परीक्षाओं में भी परमेश्वर में अपने विश्वास में स्थिर बनाए रखा।

   आज जब हम अपने जीवन की परिस्थितियों और कठिनाईयों की ओर देखते हैं, तो उनसे अभिभूत होकर हताश न हो जाएं। हम अपने उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह पर अपने भरोसे में दृढ़ बने रहें - वह अपने वायदे के अनुरूप सदा हमारी भलाई के लिए कार्यरत रहता है। - रैंडी किल्गोर


हमारे सबसे अन्धकारमय दिन में भी, प्रभु यीशु में आशा तेज़ी से चमकती रहती है।

और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्पन्न करती है; अर्थात उन्हीं के लिये जो उस की इच्छा के अनुसार बुलाए हुए हैं। - रो्मियों 8:28

बाइबल पाठ: इब्रानियों 11:8-16
Hebrews 11:8 विश्वास ही से इब्राहीम जब बुलाया गया तो आज्ञा मानकर ऐसी जगह निकल गया जिसे मीरास में लेने वाला था, और यह न जानता था, कि मैं किधर जाता हूं; तौभी निकल गया। 
Hebrews 11:9 विश्वास ही से उसने प्रतिज्ञा किए हुए देश में जैसे पराए देश में परदेशी रह कर इसहाक और याकूब समेत जो उसके साथ उसी प्रतिज्ञा के वारिस थे, तम्बूओं में वास किया। 
Hebrews 11:10 क्योंकि वह उस स्थिर नेव वाले नगर की बाट जोहता था, जिस का रचने वाला और बनाने वाला परमेश्वर है। 
Hebrews 11:11 विश्वास से सारा ने आप बूढ़ी होने पर भी गर्भ धारण करने की सामर्थ पाई; क्योंकि उसने प्रतिज्ञा करने वाले को सच्चा जाना था। 
Hebrews 11:12 इस कारण एक ही जन से जो मरा हुआ सा था, आकाश के तारों और समुद्र के तीर के बालू के समान, अनगिनित वंश उत्पन्न हुआ।
Hebrews 11:13 ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं; पर उन्हें दूर से देखकर आनन्‍दित हुए और मान लिया, कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं। 
Hebrews 11:14 जो ऐसी ऐसी बातें कहते हैं, वे प्रगट करते हैं, कि स्‍वदेश की खोज में हैं। 
Hebrews 11:15 और जिस देश से वे निकल आए थे, यदि उस की सुधि करते तो उन्हें लौट जाने का अवसर था। 
Hebrews 11:16 पर वे एक उत्तम अर्थात स्‍वर्गीय देश के अभिलाषी हैं, इसी लिये परमेश्वर उन का परमेश्वर कहलाने में उन से नहीं लजाता, सो उसने उन के लिये एक नगर तैयार किया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 43-44
  • 1 थिस्सलुनीकियों 2


शुक्रवार, 13 अक्टूबर 2017

साथ


   उत्तरी अमेरिका के मूल-विवासियों की एक प्राचीन कहानी है; कबीले की प्रथा के अनुसार, उसके साहस की परीक्षा के लिए, एक युवक को शरद ऋतु की एक रात अकेले जंगल में बिताने के लिए भेजा गया। संध्या को वह घर से निकला और जंगल में चला गया। शीघ्र ही अन्धेरा हो गया, रात्रि की आवाज़ें जंगल में आने लगीं। कहीं पेड़ चरमरा रहे थे तो कभी हवा से पत्ते सरसरा रहे थे; रात्रि में विचरण करने वाले विभिन्न जान्वरों और पक्षियों की आवाज़ें आ रहीं थीं। वह युवक भयभीत तो था किंतु फिर भी दृढ़ता से डटा रहा, जैसी कि उसकी परीक्षा की आवश्यकता थी। अन्ततः प्रातः हुई, और आकाश के प्रकाशमान होने के साथ ही उसने देखा कि एक और व्यक्ति भी उसके निकट ही था; सारी रात उसके दादा वहीं उसके पास डटे रहे थे, उसका ध्यान रख रहे थे।

   परमेश्वर के वचन बाइबल के एक प्रमुख पात्र मूसा ने जंगल में एकान्त में एक चकित करने वाला दृष्य देखा, एक झाड़ी जल तो रही थी परन्तु भस्म नहीं हो रही थी। जब वह निकट गया तो उसने परमेश्वर की आवाज़ सुनी; परमेश्वर उसे मिस्त्र में जाकर इस्त्राएलियों को क्रूर दासत्व से छुड़ाकर लाने के लिए कह रहा था। अनिच्छुक मूसा ने बच निकलने के लिए परमेश्वर से प्रश्न करने आरंभ किए: अपने भय के कारण मूसा ने कहा, "मैं हूँ कौन, कि मैं जाऊँ?" परमेश्वर ने उत्तर दिया, "मैं तेरे साथ रहूँगा।" मूसा ने फिर कहा, "मान लो मैं जाकर कहता हूँ, ’तुम्हारे पित्रों के परमेश्वर ने मुझे भेजा है’, और वे मुझसे पूछें, ’अच्छा! तो भला उसका नाम क्या है?’ तो मैं उन्हें क्या उत्तर दूँगा?" परमेश्वर ने उत्तर दिया, "उनसे कहना, ’मैं जो हूँ सो हूँ’...उनसे कहना, मैं जो हूँ सो हूँ ने मुझे भेजा है" (निर्गमन 31:1-14)।

   वाक्यांश, ’मैं जो हूँ सो हूँ’ को ’मैं जो होऊँगा सो होऊँगा’ भी लिखा जा सकता है, और यह परमेश्वर के अनन्त और हर बात, हर परिस्थिति, हर आवश्यकता के लिए पूर्णतः पर्याप्त चरित्र को दिखाता है। परमेश्वर का सदा ही वायदा रहा है कि वह अपने लोगों के साथ, उनके जिन्होंने प्रभु यीशु पर विश्वास किया है, बना रहेगा। चाहे जीवन की परिस्थितियाँ कितनी भी भयावह, कठिन या अन्धकारमय क्यों न लगें, हमारा अदृश्य परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ और हमारे निकट बना रहता है। वह हमारी प्रत्येक आवश्यकता के लिए उप्युक्त उत्तर देने को सदा उपलब्ध रहता है। - डेव एग्नर


अपने बच्चों के जीवन में परमेश्वर सदा उपस्थित तथा कार्यरत रहता है।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: निर्गमन 3:1-14
Exodus 3:1 मूसा अपने ससुर यित्रो नाम मिद्यान के याजक की भेड़-बकरियों को चराता था; और वह उन्हें जंगल की परली ओर होरेब नाम परमेश्वर के पर्वत के पास ले गया। 
Exodus 3:2 और परमेश्वर के दूत ने एक कटीली झाड़ी के बीच आग की लौ में उसको दर्शन दिया; और उसने दृष्टि उठा कर देखा कि झाड़ी जल रही है, पर भस्म नहीं होती। 
Exodus 3:3 तब मूसा ने सोचा, कि मैं उधर फिरके इस बड़े अचम्भे को देखूंगा, कि वह झाड़ी क्यों नहीं जल जाती। 
Exodus 3:4 जब यहोवा ने देखा कि मूसा देखने को मुड़ा चला आता है, तब परमेश्वर ने झाड़ी के बीच से उसको पुकारा, कि हे मूसा, हे मूसा। मूसा ने कहा, क्या आज्ञा। 
Exodus 3:5 उसने कहा इधर पास मत आ, और अपने पांवों से जूतियों को उतार दे, क्योंकि जिस स्थान पर तू खड़ा है वह पवित्र भूमि है। 
Exodus 3:6 फिर उसने कहा, मैं तेरे पिता का परमेश्वर, और इब्राहीम का परमेश्वर, इसहाक का परमेश्वर, और याकूब का परमेश्वर हूं। तब मूसा ने जो परमेश्वर की ओर निहारने से डरता था अपना मुंह ढ़ांप लिया। 
Exodus 3:7 फिर यहोवा ने कहा, मैं ने अपनी प्रजा के लोग जो मिस्र में हैं उनके दु:ख को निश्चय देखा है, और उनकी जो चिल्लाहट परिश्रम कराने वालों के कारण होती है उसको भी मैं ने सुना है, और उनकी पीड़ा पर मैं ने चित्त लगाया है; 
Exodus 3:8 इसलिये अब मैं उतर आया हूं कि उन्हें मिस्रियों के वश से छुड़ाऊं, और उस देश से निकाल कर एक अच्छे और बड़े देश में जिस में दूध और मधु की धारा बहती है, अर्थात कनानी, हित्ती, एमोरी, परिज्जी, हिव्वी, और यबूसी लोगों के स्थान में पहुंचाऊं। 
Exodus 3:9 सो अब सुन, इस्राएलियों की चिल्लाहट मुझे सुनाई पड़ी है, और मिस्रियों का उन पर अन्धेर करना भी मुझे दिखाई पड़ा है, 
Exodus 3:10 इसलिये आ, मैं तुझे फिरौन के पास भेजता हूं कि तू मेरी इस्राएली प्रजा को मिस्र से निकाल ले आए। 
Exodus 3:11 तब मूसा ने परमेश्वर से कहा, मैं कौन हूं जो फिरौन के पास जाऊं, और इस्राएलियों को मिस्र से निकाल ले आऊं? 
Exodus 3:12 उसने कहा, निश्चय मैं तेरे संग रहूंगा; और इस बात का कि तेरा भेजने वाला मैं हूं, तेरे लिये यह चिन्ह होगा कि जब तू उन लोगों को मिस्र से निकाल चुके तब तुम इसी पहाड़ पर परमेश्वर की उपासना करोगे। 
Exodus 3:13 मूसा ने परमेश्वर से कहा, जब मैं इस्राएलियों के पास जा कर उन से यह कहूं, कि तुम्हारे पित्रों के परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है, तब यदि वे मुझ से पूछें, कि उसका क्या नाम है? तब मैं उन को क्या बताऊं? 
Exodus 3:14 परमेश्वर ने मूसा से कहा, मैं जो हूं सो हूं। फिर उसने कहा, तू इस्राएलियों से यह कहना, कि जिसका नाम मैं हूं है उसी ने मुझे तुम्हारे पास भेजा है।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 41-42
  • 1 थिस्सलुनीकियों 1


गुरुवार, 12 अक्टूबर 2017

चिन्ता


   एक व्यक्ति को हर बात के लिए सदा चिन्ता करते रहने की आदत थी। फिर एक दिन उसके मित्रों ने उसे प्रसन्नचित और तनावमुक्त होकर सीटी बजाते हुए देखा। उन्होंने आश्चर्यचकित होकर उससे पूछा, "क्या हो गया?" उसने उत्तर दिया, अब मैंने अपनी चिन्ताएं करने के लिए किसी को नौकरी पर रख लिया है, और वही मेरी सभी चिन्ताएं किया करेगा। मित्रों ने पूछा, "इसके लिए तुम उसे कितनी तनख्वाह दे रहे हो?" तो व्यक्ति ने उत्तर दिया, "दो हज़ार डॉलर प्रति सप्ताह!" मित्रों फिर चकित होकर उससे पूछा, "वाह! लेकिन क्या तुम इतना दे सकते हो? इतनी बड़ी रकम उसे कैसे देने पाओगे?" तो उस व्यक्ति का उत्तर था, "मैं दे तो नहीं सकता हूँ; लेकिन कैसे दे पाऊँगा, इसकी चिन्ता करना अब उसका काम है!"

   वस्तविक जीवन में तनाव के समाधान के लिए यह हास्यस्पद विधि काम नहीं करती है; परन्तु हम मसीही विश्वासियों के लिए, क्योंकि हम परमेश्वर की सन्तान हैं, परमेश्वर ने हमारे लिए प्रावधान किया है कि हम अपनी सारी चिन्ताएं उसे सौंप सकते हैं जो सब कुछ को सदा नियंत्रण में रखता और संभालता है, विशेषकर तब जब हमें लगता है कि कुछ भी नियंत्रण में नहीं है।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह भविष्यद्वक्ता की पुस्तक हमें स्मरण करवाती है कि परमेश्वर सितारों को भी गिन-गिनकर निकालता है, और उन सबको नाम ले लेकर बुलाता है; "अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता" (यशायाह 40:25-26)। और जैसे परमेश्वर सितारों को उनके नाम से जानता है, वैसे ही वह हमें भी व्यक्तिगत रीति से जानता है, और हम उसकी ध्यानपूर्वक देख-रेख में सदा बने रहते हैं (यशायाह 40:27)।

   यदि हम किसी बात के लिए चिन्ता करने की प्रवृत्ति रखते हैं तो उसे प्रभु परमेश्वर को सौंप सकते हैं। वह कभी थकता नहीं है जिससे हमारा ध्यान न रख सके। उसके पास सारी बुध्दिमता और सामर्थ्य है जिसका उपयोग वह हमारे लिए करना चाहता है। वह पवित्र परमेश्वर जो सितारों को संचालित करता है, वही हमें अपनी बाहों में भर कर भी रखता है; इसलिए हमें चिन्ता करने की कोई आवश्यकता नहीं है; अपने सारी चिन्ता उसी पर डाल दें। - पोह फैंग चिया


जहाँ विश्वास आरंभ होता है, चिन्ता वहीं पर समाप्त होती है।

अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा; वह धर्मी को कभी टलने न देगा। - भजन 55:22

बाइबल पाठ: यशायाह 40:25-31
Isaiah 40:25 सो तुम मुझे किस के समान बताओगे कि मैं उसके तुल्य ठहरूं? उस पवित्र का यही वचन है। 
Isaiah 40:26 अपनी आंखें ऊपर उठा कर देखो, किस ने इन को सिरजा? वह इन गणों को गिन गिनकर निकालता, उन सब को नाम ले ले कर बुलाता है? वह ऐसा सामर्थी और अत्यन्त बली है कि उन में के कोई बिना आए नहीं रहता।
Isaiah 40:27 हे याकूब, तू क्यों कहता है, हे इस्राएल तू क्यों बोलता है, मेरा मार्ग यहोवा से छिपा हुआ है, मेरा परमेश्वर मेरे न्याय की कुछ चिन्ता नहीं करता? 
Isaiah 40:28 क्या तुम नहीं जानते? क्या तुम ने नहीं सुना? यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सिरजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है, उसकी बुध्दि अगम है। 
Isaiah 40:29 वह थके हुए को बल देता है और शक्तिहीन को बहुत सामर्थ देता है। 
Isaiah 40:30 तरूण तो थकते और श्रमित हो जाते हैं, और जवान ठोकर खाकर गिरते हैं; 
Isaiah 40:31 परन्तु जो यहोवा की बाट जोहते हैं, वे नया बल प्राप्त करते जाएंगे, वे उकाबों के समान उड़ेंगे, वे दौड़ेंगे और श्रमित न होंगे, चलेंगे और थकित न होंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 39-40
  • कुलुस्सियों 4


बुधवार, 11 अक्टूबर 2017

जाँच


   स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं को गंभीर होने से पहले ही पकड़ लेने के लिए चिकित्सक नियमित शारीरिक जाँच की सलाह देते हैं। हम यही कार्य अपने आत्मिक स्वास्थ्य के लिए भी कर सकते हैं, परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रभु यीशु द्वारा बताई गई महान आज्ञाओं (मरकुस 12:29-31) पर आधारित कुछ प्रश्नों के उत्तर देने के द्वारा; जैसे कि:

*क्योंकि पहले उस ने मुझसे प्रेम किया है, इसलिए क्या मैं भी परमेश्वर से अपने सारे मन से प्रेम करता हूँ? मेरे अन्दर क्या अधिक प्रबल रहता है, सांसारिक लाभ, या मसीह यीशु में मेरे लिए रखे गए खज़ाने? (कुलुस्सियों 3:1) प्रभु चाहता है कि उसकी शान्ति हमारे हृदयों में राज्य करे।

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारे प्राण से प्रेम करता हूँ? क्या मैं परमेश्वर की वाणी को सुनता हूँ जो मुझे बताती है कि मैं कौन हूँ? क्या मैं स्वार्थी अभिलाषाओं से दूर हटता जा रहा हूँ? (कुलुस्सियों 3:5) क्या मैं और अधिक दयालु, कृपालु, नम्र, सुशील, और धीरजवन्त बनता जा रहा हूँ? (कुलुस्सियों 3:12)

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारी बुध्दि से प्रेम करता हूँ? क्या मैं उसके पुत्र प्रभु यीशु मसीह के साथ अपने संबंध के प्रति सचेत रहता हूँ, या मैं अपनी बुध्दि को इधर-उधर भटकने देता हूँ? (कुलुस्सियों 3:2) मेरे विचार क्या उत्पन्न करते हैं, समस्याएं या समाधान? एकता या फूट? क्षमा या प्रतिशोध? (कुलुस्सियों 3:13)

*क्या मैं परमेश्वर से अपनी सारी शक्ति से प्रेम करता हूँ? क्या मैं कमज़ोर दिखने के लिए राज़ी रहता हूँ जिससे परमेश्वर को अपनी सामर्थ्य मुझमें होकर दिखाने का अवसर मिले? (कुलुस्सियों 3:2) क्या मैं उसके आत्मा के द्वारा सामर्थी होने के लिए उसके अनुग्रह पर निर्भर रहता हूँ?

   जब हम "मसीह के वचन को अपने हृदय में अधिकाई से बसने देंगे" (कुलुस्सियों 3:16), तो जैसे जैसे हम आत्मिक रीति से योग्य और उसके लिए उपयोगी बनते जाएंगे, वह हमें एक दूसरे को उभारने, सुधारने और उन्नत करने के लिए संसाधन और समझ-बूझ प्रदान करता चला जाएगा। - जूली ऐकैरमैन लिंक


आत्मिक रीति से स्वस्थ होने के लिए, 
परमेश्वर के वचन का भोजन तथा अपने विश्वास का अभ्यास करें।

यीशु ने उसे उत्तर दिया, सब आज्ञाओं में से यह मुख्य है; हे इस्राएल सुन; प्रभु हमारा परमेश्वर एक ही प्रभु है। और तू प्रभु अपने परमेश्वर से अपने सारे मन से और अपने सारे प्राण से, और अपनी सारी बुध्दि से, और अपनी सारी शक्ति से प्रेम रखना। और दूसरी यह है, कि तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखना: इस से बड़ी और कोई आज्ञा नहीं। - मरकुस 12:29-31

बाइबल पाठ: कुलुस्सियों 3:1-14
Colossians 3:1 सो जब तुम मसीह के साथ जिलाए गए, तो स्‍वर्गीय वस्‍तुओं की खोज में रहो, जहां मसीह वर्तमान है और परमेश्वर के दाहिनी ओर बैठा है। 
Colossians 3:2 पृथ्वी पर की नहीं परन्तु स्‍वर्गीय वस्‍तुओं पर ध्यान लगाओ। 
Colossians 3:3 क्योंकि तुम तो मर गए, और तुम्हारा जीवन मसीह के साथ परमेश्वर में छिपा हुआ है। 
Colossians 3:4 जब मसीह जो हमारा जीवन है, प्रगट होगा, तब तुम भी उसके साथ महिमा सहित प्रगट किए जाओगे। 
Colossians 3:5 इसलिये अपने उन अंगो को मार डालो, जो पृथ्वी पर हैं, अर्थात व्यभिचार, अशुद्धता, दुष्‍कामना, बुरी लालसा और लोभ को जो मूर्ति पूजा के बराबर है। 
Colossians 3:6 इन ही के कारण परमेश्वर का प्रकोप आज्ञा न मानने वालों पर पड़ता है। 
Colossians 3:7 और तुम भी, जब इन बुराइयों में जीवन बिताते थे, तो इन्‍हीं के अनुसार चलते थे। 
Colossians 3:8 पर अब तुम भी इन सब को अर्थात क्रोध, रोष, बैरभाव, निन्‍दा, और मुंह से गालियां बकना ये सब बातें छोड़ दो। 
Colossians 3:9 एक दूसरे से झूठ मत बोलो क्योंकि तुम ने पुराने मनुष्यत्‍व को उसके कामों समेत उतार डाला है। 
Colossians 3:10 और नए मनुष्यत्‍व को पहिन लिया है जो अपने सृजनहार के स्‍वरूप के अनुसार ज्ञान प्राप्त करने के लिये नया बनता जाता है। 
Colossians 3:11 उस में न तो यूनानी रहा, न यहूदी, न खतना, न खतनारिहत, न जंगली, न स्‍कूती, न दास और न स्‍वतंत्र: केवल मसीह सब कुछ और सब में है।
Colossians 3:12 इसलिये परमेश्वर के चुने हुओं के समान जो पवित्र और प्रिय हैं, बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो। 
Colossians 3:13 और यदि किसी को किसी पर दोष देने को कोई कारण हो, तो एक दूसरे की सह लो, और एक दूसरे के अपराध क्षमा करो: जैसे प्रभु ने तुम्हारे अपराध क्षमा किए, वैसे ही तुम भी करो। 
Colossians 3:14 और इन सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबन्‍ध है बान्‍ध लो।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3


मंगलवार, 10 अक्टूबर 2017

प्रेम


   एक संध्या मेरी एक सहेली ने उसके घर की बैठक में लगने वाली तीन सजावटी पट्टियों में से एक, जिस पर ’प्रेम’ शब्द लिखा हुआ था दिखाते हुए कहा, "देखो मेरे पास ’प्रेम’ तो आ गई है; ’विश्वास’ और ’आशा’ आने वाले हैं। मैंने विचार किया, "तो प्रेम पहले आता है, और फिर उसके बाद विश्वास तथा आशा भी आ जाते हैं।"

   यह वास्तविकता है कि प्रेम ही पहले आता है। परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि प्रेम का उद्गम स्वयं परमेश्वर है: "क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है" (1 यूहन्ना 4:7)। परमेश्वर के सिध्द प्रेम का वर्णन 1 कुरिन्थियों 13 में किया गया है, और इसे बाइबल का ’प्रेम अध्याय’ भी कहा जाता है। यहाँ हम प्रेम का एक गुण पाते हैं, "प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा" (1 कुरिन्थियों 13:8)।

   मसीही विश्वासी के लिए विश्वास और आशा अनिवार्य, क्योंकि परमेश्वर के सम्मुख हम, "हम विश्वास से धर्मी ठहरे..." (रोमियों 5:1); और मसीह यीशु में अपनी आशा के कारण स्थिर रहते हैं, जैसा इब्रानियों की पत्री में आशा के विषय लिखा गया है कि "वह आशा हमारे प्राण के लिये ऐसा लंगर है जो स्थिर और दृढ़ है" (इब्रानियों 6:19)।

   एक दिन ऐसा भी आएगा जब हमें विश्वास और आशा की आवश्यकता नहीं रहेगी; क्योंकि हमारा विश्वास - हमारा प्रभु यीशु हमारे सामने प्रत्यक्ष होगा और सदा रहेगा, तथा हमारी प्रत्येक आशा हमारे उध्दारकर्ता प्रभु यीशु में परिपूर्ण हो जाएगी। परन्तु प्रेम शाश्वत है, क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है तथा परमेश्वर प्रेम है (1 यूहन्ना 4:8), वह सदा काल तक अटल बना रहेगा।

   इसीलिए कुरिन्थियों में लिखा है, "पर अब विश्वास, आशा, प्रेम थे तीनों स्थाई है, पर इन में सब से बड़ा प्रेम है" (1 कुरिन्थियों 13:13); प्रेम ही प्रथम और प्रेम ही अन्तिम तथा इसके बीच का सब कुछ है। - सिंडी हैस कैस्पर


हम प्रेम इसलिए करते हैं क्योंकि परमेश्वर ने पहले हम से प्रेम किया।

क्योंकि आत्मा के कारण, हम विश्वास से, आशा की हुई धामिर्कता की बाट जोहते हैं। - गलतियों 5:5

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 4:7-21
1 John 4:7 हे प्रियों, हम आपस में प्रेम रखें; क्योंकि प्रेम परमेश्वर से है: और जो कोई प्रेम करता है, वह परमेश्वर से जन्मा है; और परमेश्वर को जानता है। 
1 John 4:8 जो प्रेम नहीं रखता, वह परमेश्वर को नहीं जानता है, क्योंकि परमेश्वर प्रेम है। 
1 John 4:9 जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं। 
1 John 4:10 प्रेम इस में नहीं कि हम ने परमेश्वर ने प्रेम किया; पर इस में है, कि उसने हम से प्रेम किया; और हमारे पापों के प्रायश्‍चित्त के लिये अपने पुत्र को भेजा। 
1 John 4:11 हे प्रियो, जब परमेश्वर ने हम से ऐसा प्रेम किया, तो हम को भी आपस में प्रेम रखना चाहिए। 
1 John 4:12 परमेश्वर को कभी किसी ने नहीं देखा; यदि हम आपस में प्रेम रखें, तो परमेश्वर हम में बना रहता है; और उसका प्रेम हम में सिद्ध हो गया है। 
1 John 4:13 इसी से हम जानते हैं, कि हम उस में बने रहते हैं, और वह हम में; क्योंकि उसने अपने आत्मा में से हमें दिया है। 
1 John 4:14 और हम ने देख भी लिया और गवाही देते हैं, कि पिता ने पुत्र को जगत का उद्धारकर्ता कर के भेजा है। 
1 John 4:15 जो कोई यह मान लेता है, कि यीशु परमेश्वर का पुत्र है: परमेश्वर उस में बना रहता है, और वह परमेश्वर में। 
1 John 4:16 और जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, उसको हम जान गए, और हमें उस की प्रतीति है; परमेश्वर प्रेम है: जो प्रेम में बना रहता है, वह परमेश्वर में बना रहता है; और परमेश्वर उस में बना रहता है। 
1 John 4:17 इसी से प्रेम हम में सिध्द हुआ, कि हमें न्याय के दिन हियाव हो; क्योंकि जैसा वह है, वैसे ही संसार में हम भी हैं। 
1 John 4:18 प्रेम में भय नहीं होता, वरन सिध्द प्रेम भय को दूर कर देता है, क्योंकि भय से कष्‍ट होता है, और जो भय करता है, वह प्रेम में सिध्द नहीं हुआ। 
1 John 4:19 हम इसलिये प्रेम करते हैं, कि पहिले उसने हम से प्रेम किया। 
1 John 4:20 यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिसे उसने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उसने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता। 
1 John 4:21 और उस से हमें यह आज्ञा मिली है, कि जो कोई अपने परमेश्वर से प्रेम रखता है, वह अपने भाई से भी प्रेम रखे।

एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 34-36
  • कुलुस्सियों 2