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मंगलवार, 10 जुलाई 2018

‘ज़बान’



      मेरी दादी मिशनरी बनकर मेक्सिको गईं थीं और उन्हें स्थानीय स्पैनिश भाषा सीखने में बहुत कठिनाई हुई। एक दिन वे बाज़ार खरीददारी करने गईं, उनके साथ सहायता के लिए एक छोटी लड़की भी थी। उन्होंने उस लड़की को खरीदने वाले सामान की सूची दिखाते हुए कहा कि वह दो ‘ज़बानों’ (lenguas) में है, जबकि वे कहना चाहती थीं कि वह दो ‘भाषाओं’ (idiomas) में है। कसाई ने उन दोनों की बातें सुनीं तो उसे लगा कि उन्हें पशु की दो ‘ज़बान’ अर्थात ‘जीभें’ चाहिएं, और उसने वही उन्हें बांधकर दे दीं। दादी को यह बात घर पहुँचने का बाद ही मालूम पड़ी; उन्होंने इससे पहले कभी ‘जीभ’ भोजन के लिए नहीं पकाई थी!

      जब हम कोई दूसरी भाषा सीख रहे होते हैं तो गलतियाँ होना स्वाभाविक है। यही परमेश्वर की प्रेम की भाषा सीखते हुए भी होता है। कभी-कभी हमारा बोलना विरोधाभास वाला होता है, क्योंकि हम प्रभु परमेश्वर की स्तुति भी करते हैं और फिर लोगों के लिए बुरा-भला भी बोलते हैं। हमारा पुराना पापी मनुष्यत्व मसीह यीशु में हमारे नए जीवन का विरोध करता है। हमारे मुँह से जो निकालता है, वह दिखाता है कि अपने शब्दों के विषय हमें परमेश्वर की सहायता की कितनी आवश्यकता है।

      मसीही जीवन अपना लेने के पश्चात हमारी पुरानी ‘ज़बान’ को जाना ही होगा। परमेश्वर के प्रेम की नई भाषा सीखने का एकमात्र तरीका है प्रभु यीशु को अपनी ‘ज़बान’ का भी प्रभु बना लेना। जब परमेश्वर का पवित्र-आत्मा हम में काम करता है तो वह हमें आत्म-संयम भी प्रदान करता है कि हम परमेश्वर पिता को भावते हुए शब्दों का प्रयोग करें। होने दें कि हम हमारे मुँह से निकलने वाले प्रत्येक शब्द को प्रभु को समर्पित रखें; और भजनकार के समान हमारी भी प्रार्थना हो, “हे यहोवा, मेरे मुख का पहरा बैठा, मेरे हाठों के द्वार पर रखवाली कर!” (भजन 141:3)।


होने दें कि जो शब्द आप बोलें वे लोगों को प्रभु यीशु की ओर आकर्षित करें।


अपनी जीभ को बुराई से रोक रख, और अपने मुंह की चौकसी कर कि उस से छल की बात न निकले। - भजन 34:13

बाइबल पाठ: याकूब 3:1-12
James 3:1 हे मेरे भाइयों, तुम में से बहुत उपदेशक न बनें, क्योंकि जानते हो, कि हम उपदेशक और भी दोषी ठहरेंगे।
James 3:2 इसलिये कि हम सब बहुत बार चूक जाते हैं: जो कोई वचन में नहीं चूकता, वही तो सिद्ध मनुष्य है; और सारी देह पर भी लगाम लगा सकता है।
James 3:3 जब हम अपने वश में करने के लिये घोड़ों के मुंह में लगाम लगाते हैं, तो हम उन की सारी देह को भी फेर सकते हैं।
James 3:4 देखो, जहाज भी, यद्यपि ऐसे बड़े होते हैं, और प्रचण्‍ड वायु से चलाए जाते हैं, तौभी एक छोटी सी पतवार के द्वारा मांझी की इच्छा के अनुसार घुमाए जाते हैं।
James 3:5 वैसे ही जीभ भी एक छोटा सा अंग है और बड़ी बड़ी डींगे मारती है: देखो, थोड़ी सी आग से कितने बड़े वन में आग लग जाती है।
James 3:6 जीभ भी एक आग है: जीभ हमारे अंगों में अधर्म का एक लोक है और सारी देह पर कलंक लगाती है, और भवचक्र में आग लगा देती है और नरक कुण्ड की आग से जलती रहती है।
James 3:7 क्योंकि हर प्रकार के बन-पशु, पक्षी, और रेंगने वाले जन्‍तु और जलचर तो मनुष्य जाति के वश में हो सकते हैं और हो भी गए हैं।
James 3:8 पर जीभ को मनुष्यों में से कोई वश में नहीं कर सकता; वह एक ऐसी बला है जो कभी रुकती ही नहीं; वह प्राण नाशक विष से भरी हुई है।
James 3:9 इसी से हम प्रभु और पिता की स्‍तुति करते हैं; और इसी से मनुष्यों को जो परमेश्वर के स्‍वरूप में उत्पन्न हुए हैं श्राप देते हैं।
James 3:10 एक ही मुंह से धन्यवाद और श्राप दोनों निकलते हैं।
James 3:11 हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए।
James 3:12 क्या सोते के एक ही मुंह से मीठा और खारा जल दोनों निकलते हैं? हे मेरे भाइयों, क्या अंजीर के पेड़ में जैतून, या दाख की लता में अंजीर लग सकते हैं? वैसे ही खारे सोते से मीठा पानी नहीं निकल सकता।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 41-42
  • प्रेरितों 16:22-40



सोमवार, 9 जुलाई 2018

प्रावधान



      इंगलैंण्ड के एक ग्रामीण इलाके के मैदान में मसीही लेखक और व्याख्याकर्ता, जी. के. चेस्टरटन, अपने स्थान से जहाँ वे बैठे हुए थे, वहाँ से एकदम से उठकर खड़े हुए और बहुत ज़ोर से ठहाका मार कर हंसने लगे। उनका ऐसा करना इतना अचानक और प्रबल था कि मैदान की गाएं उनकी ओर देखने लगीं।

      ऐसा करने के कुछ मिनिट पहले चेस्टरटन बहुत दुखी थे। वे बेचैन होकर पहाड़ियों में घूमते फिर रहे थे, रंगीन चौक से खाकी कागज़ पर रेखा चित्र बना रहे थे। परन्तु चित्र बनाते-बनाते वे अचंभित हो गए जब उन्हें ध्यान आया कि उनके पास सफ़ेद रंग का चौक नहीं है, जो उनके विचार से, उनकी चित्रकारी के लिए बहुत आवश्यक था। लेकिन शीघ्र ही वे हँसने लगे, जब उन्हें एहसास हुआ कि उनके नीचे की धरती सफ़ेद चूना-पत्थर की बनी हुई है, जो सफ़ेद चौक के समान ही था। उन्होंने उस चूना-पत्थर का एक टुकड़ा तोड़ा और चित्र बनाना फिर से आरंभ कर दिया।

      जैसे चेस्टरटन ने एहसास किया कि वे “सफ़ेद चौक के असीम भण्डार पर बैठे हुए हैं” हम मसीही विश्वासियों के पास भी परमेश्वर के असीम भौतिक और आत्मिक संसाधनों का खज़ाना है: “क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है” (2 पतरस 1:3)।

      हो सकता है कि आपको ऐसा लगे कि भक्ति के लिए आवश्यक किसी महत्वपूर्ण तत्व, जैसे कि विश्वास, अनुग्रह, और बुद्धिमता, की आपके पास कमी है। किन्तु यदि आपके साथ प्रभु यीशु मसीह है, तो आपके पास जो कुछ भी आपके लिए आवश्यक है, वह उपलब्ध है, और बहुतायत से है। मसीह यीशु में होकर आपके पास परमेश्वर पिता के सभी संसाधन उपलब्ध हैं; पिता परमेश्वर ने अपनी संतान के लिए अपने बड़े अनुग्रह मैं सभी प्रावधान कर के दिए हैं। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर के सामर्थ्य और संसाधनों की कोई सीमा नहीं है।

हे यहोवा के पवित्र लोगो, उसका भय मानो, क्योंकि उसके डरवैयों को किसी बात की घटी नहीं होती! जवान सिंहों तो घटी होती और वे भूखे भी रह जाते हैं; परन्तु यहोवा के खोजियों को किसी भली वस्तु की घटी न होवेगी।  - भजन 34:9-10

बाइबल पाठ: 2 पतरस 1:1-10
2 Peter 1:1 शमौन पतरस की और से जो यीशु मसीह का दास और प्रेरित है, उन लोगों के नाम जिन्होंने हमारे परमेश्वर और उद्धारकर्ता यीशु मसीह की धामिर्कता से हमारा सा बहुमूल्य विश्वास प्राप्त किया है।
2 Peter 1:2 परमेश्वर के और हमारे प्रभु यीशु की पहचान के द्वारा अनुग्रह और शान्‍ति तुम में बहुतायत से बढ़ती जाए।
2 Peter 1:3 क्योंकि उसके ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्‍ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है।
2 Peter 1:4 जिन के द्वारा उसने हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं: ताकि इन के द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूट कर जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्‍वभाव के समभागी हो जाओ।
2 Peter 1:5 और इसी कारण तुम सब प्रकार का यत्‍न कर के, अपने विश्वास पर सद्गुण, और सद्गुण पर समझ।
2 Peter 1:6 और समझ पर संयम, और संयम पर धीरज, और धीरज पर भक्ति।
2 Peter 1:7 और भक्ति पर भाईचारे की प्रीति, और भाईचारे की प्रीति पर प्रेम बढ़ाते जाओ।
2 Peter 1:8 क्योंकि यदि ये बातें तुम में वर्तमान रहें, और बढ़ती जाएं, तो तुम्हें हमारे प्रभु यीशु मसीह के पहचानने में निकम्मे और निष्‍फल न होने देंगी।
2 Peter 1:9 और जिस में ये बातें नहीं, वह अन्‍धा है, और धुन्‍धला देखता है, और अपने पूर्वकाली पापों से धुल कर शुद्ध होने को भूल बैठा है।
2 Peter 1:10 इस कारण हे भाइयों, अपने बुलाए जाने, और चुन लिये जाने को सिद्ध करने का भली भांति यत्‍न करते जाओ, क्योंकि यदि ऐसा करोगे, तो कभी भी ठोकर न खाओगे।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 38-40
  • प्रेरितों 16:1-21



रविवार, 8 जुलाई 2018

आदर



      जब एक ब्रिटिश विद्वान ने सँसार भर के सभी धर्मों को एक साथ मिलकर विश्वव्यापी एकता के लिए कार्य करने का आवाहन किया तो सभी ने उसे बहुत सराहा। उस विद्वान ने इस बात की ओर ध्यान खींचा कि सभी धर्म ‘सुनहरे नियम’ में विश्वास रखते हैं, और सुझाव दिया कि “हमारे समय का मुख्य उद्देश्य है एक वैश्विक समाज का निर्माण करना जहाँ सभी विचारधाराओं के लोग एक साथ शान्ति और मेल-मिलाप के साथ रह सकें।”

      प्रभु यीशु ने भी उस ‘सुनहरे नियम’ को सिखाया: “इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है” (मत्ती 7:12)। अपने इसी उपदेश में प्रभु ने यह भी कहा, “...अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो” (मत्ती 5:44)। इन मौलिक आज्ञाओं का पालन करने के द्वारा निश्चय ही शान्ति और मेल-मिलाप को बहुत बढ़ावा मिलगा। सुनहरे नियम को कहने के तुरंत बाद प्रभु ने सचेत रहने की बात भी कही। प्रभु ने अपने अनुयायियों को लुभावनी और आकर्षक बातों के बनाने वालों के प्रति सचेत करते हुए कहा, “झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेड़िए हैं” (मत्ती 7:15)।

      औरों के प्रति आदर रखना, तथा सत्य की पहचान करने की क्षमता रखना साथ-साथ ही चलते हैं। यदि हमारे पास सत्य है, तो हमारे पास लोगों को सिखाने योग्य सन्देश भी होगा। परन्तु प्रभु परमेश्वर ने प्रत्येक व्यक्ति को यह स्वतंत्रता दी है कि वह स्वेच्छा से प्रभु को चुने या उसका तिरिस्कार कर दे। हम मसीही विश्वासियों की यह जिम्मेदारी है कि हम प्रभु के विषय सत्य को प्रेम, और नम्रता के साथ दूसरों के सामने प्रस्तुत कर दें और फिर सत्य के उस सन्देश के विषय दूसरों द्वारा किए गए निर्णय का आदर करें, जैसे परमेश्वर उन लोगों के प्रति करता है।

      औरों का आदर करने से ही हम उनके आदर के पात्र बन सकेंगे। और यह आदर तथा विश्वास पाना, प्रभु यीशु के सन्देश, “...मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता” (यूहन्ना 14:6) को लोगों तक पहुँचाने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। - टिम गुस्ताफासन


सत्य से प्रेम करें; लोगों से भी प्रेम करें।

क्योंकि ऐसे लोग झूठे प्रेरित, और छल से काम करने वाले, और मसीह के प्रेरितों का रूप धरने वाले हैं। और यह कुछ अचम्भे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। सो यदि उसके सेवक भी धर्म के सेवकों का सा रूप धरें, तो कुछ बड़ी बात नहीं परन्तु उन का अन्‍त उन के कामों के अनुसार होगा। - 2 कुरिन्थियों 11:13-15

बाइबल पाठ: मत्ती 7:12-23
Matthew 7:12 इस कारण जो कुछ तुम चाहते हो, कि मनुष्य तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो; क्योंकि व्यवस्था और भविष्यद्वक्तओं की शिक्षा यही है।
Matthew 7:13 सकेत फाटक से प्रवेश करो, क्योंकि चौड़ा है वह फाटक और चाकल है वह मार्ग जो विनाश को पहुंचाता है; और बहुतेरे हैं जो उस से प्रवेश करते हैं।
Matthew 7:14 क्योंकि सकेत है वह फाटक और सकरा है वह मार्ग जो जीवन को पहुंचाता है, और थोड़े हैं जो उसे पाते हैं।
Matthew 7:15 झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर से फाड़ने वाले भेड़िए हैं।
Matthew 7:16 उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोग क्या झाडिय़ों से अंगूर, वा ऊंटकटारों से अंजीर तोड़ते हैं?
Matthew 7:17 इसी प्रकार हर एक अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।
Matthew 7:18 अच्छा पेड़ बुरा फल नहीं ला सकता, और न निकम्मा पेड़ अच्छा फल ला सकता है।
Matthew 7:19 जो जो पेड़ अच्छा फल नहीं लाता, वह काटा और आग में डाला जाता है।
Matthew 7:20 सो उन के फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे।
Matthew 7:21 जो मुझ से, हे प्रभु, हे प्रभु कहता है, उन में से हर एक स्वर्ग के राज्य में प्रवेश न करेगा, परन्तु वही जो मेरे स्‍वर्गीय पिता की इच्छा पर चलता है।
Matthew 7:22 उस दिन बहुतेरे मुझ से कहेंगे; हे प्रभु, हे प्रभु, क्या हम ने तेरे नाम से भविष्यद्वाणी नहीं की, और तेरे नाम से दुष्टात्माओं को नहीं निकाला, और तेरे नाम से बहुत अचम्भे के काम नहीं किए?
Matthew 7:23 तब मैं उन से खुलकर कह दूंगा कि मैं ने तुम को कभी नहीं जाना, हे कुकर्म करने वालों, मेरे पास से चले जाओ।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 36-37
  • प्रेरितों 15:22-41



शनिवार, 7 जुलाई 2018

स्मरण



   मानव-विज्ञानी एंथोनी ग्रेश का कहना है कि फ्रिज के बाहर क्या कुछ है वह प्रगट करता है की परिवारों के लिए क्या महत्वपूर्ण है। लॉस एंजेलिस में किए गए एक शोध में, ग्रेश और उनके सहयोगियों ने पाया कि फ्रिज के दरवाज़े पर बाहर, औसतन 52 चीजें चिपकी होती हैं, जिनमें स्कूल की समय-सारिणी, परिवार की तस्वीरें, बच्चों द्वारा बनाए गए चित्र, और चुम्बक सम्मिलित होते हैं। ग्रेश फ्रिज के दरवाज़े को पारिवारिक समरण का भंडार गृह कहते हैं।

   प्रभु किसी प्रत्यक्ष वस्तु, जैसे कि कोई तस्वीर, कोई उपहार, या परमेश्वर के वचन बाइबल की किसी आयत के द्वारा हमें अपनी विश्वासयोग्यता और उसके वचन का पालन करने की बुलाहट को स्मरण करवा सकता है।  कनान में प्रवेश करने से ठीक पहले मूसा ने इस्राएलियों को संबोधित किया, और उनसे आग्रह किया की वे परमेश्वर के सभी वचनों का पालन करें: "और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना....और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना" (व्यवस्थविवरण 6:7, 9)

   परमेश्वर के सामर्थी वचन को अपने घरों तथा जीवनों में आदर का स्थान देना उन इस्राएलिएयों के लिए प्रबल दैनिक ताकीद थी: "तब सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि तू यहोवा को भूल जाए, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है (व्यवस्थाविवरण 6:12)

   जी तब इस्राएलियों को, वैसे ही आज प्रभु हम मसीही विश्वासियों को प्रोत्साहित करता है कि हम उसके वचन को स्मरण रखें, उसके आज्ञाकारी रहें, और उसके सभी कार्यों को स्मरण रखते हुए, अपने आने वाले समय के लिए उसकी विश्वासयोग्य देखभाल पर निर्भर बने रहें। - डेविड मैक्कैसलैंड


दैनिक आशीषें परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का स्मरण करवाती हैं।

हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना; अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहनाक्योंकि ऐसा करने से तेरी आयु बढ़ेगी, और तू अधिक कुशल से रहेगा। - नीतिवचन 3:1-2 

बाइबल पाठ: व्यवस्थविवरण 6:1-12
Deuteronomy 6:1 यह वह आज्ञा, और वे विधियां और नियम हैं जो तुम्हें सिखाने की तुम्हारे परमेश्वर यहोवा ने आज्ञा दी है, कि तुम उन्हें उस देश में मानो जिसके अधिकारी होने को पार जाने पर हो;
Deuteronomy 6:2 और तू और तेरा बेटा और तेरा पोता यहोवा का भय मानते हुए उसकी उन सब विधियों और आज्ञाओं पर, जो मैं तुझे सुनाता हूं, अपने जीवन भर चलते रहें, जिस से तू बहुत दिन तक बना रहे।
Deuteronomy 6:3 हे इस्राएल, सुन, और ऐसा ही करने की चौकसी कर; इसलिये कि तेरा भला हो, और तेरे पितरों के परमेश्वर यहोवा के वचन के अनुसार उस देश में जहां दूध और मधु की धाराएं बहती हैं तुम बहुत हो जाओ।
Deuteronomy 6:4 हे इस्राएल, सुन, यहोवा हमारा परमेश्वर है, यहोवा एक ही है;
Deuteronomy 6:5 तू अपने परमेश्वर यहोवा से अपने सारे मन, और सारे जीव, और सारी शक्ति के साथ प्रेम रखना।
Deuteronomy 6:6 और ये आज्ञाएं जो मैं आज तुझ को सुनाता हूं वे तेरे मन में बनी रहें;
Deuteronomy 6:7 और तू इन्हें अपने बाल-बच्चों को समझाकर सिखाया करना, और घर में बैठे, मार्ग पर चलते, लेटते, उठते, इनकी चर्चा किया करना।
Deuteronomy 6:8 और इन्हें अपने हाथ पर चिन्हानी कर के बान्धना, और ये तेरी आंखों के बीच टीके का काम दें।
Deuteronomy 6:9 और इन्हें अपने अपने घर के चौखट की बाजुओं और अपने फाटकों पर लिखना।
Deuteronomy 6:10 और जब तेरा परमेश्वर यहोवा तुझे उस देश में पहुंचाए जिसके विषय में उसने इब्राहीम, इसहाक, और याकूब नाम, तेरे पूर्वजों से तुझे देने की शपथ खाई, और जब वह तुझ को बड़े बड़े और अच्छे नगर, जो तू ने नहीं बनाए,
Deuteronomy 6:11 और अच्छे अच्छे पदार्थों से भरे हुए घर, जो तू ने नहीं भरे, और खुदे हुए कुंए, जो तू ने नहीं खोदे, और दाख की बारियां और जलपाई के वृक्ष, जो तू ने नहीं लगाए, ये सब वस्तुएं जब वह दे, और तू खाके तृप्त हो,
Deuteronomy 6:12 तब सावधान रहना, कहीं ऐसा न हो कि तू यहोवा को भूल जाए, जो तुझे दासत्व के घर अर्थात मिस्र देश से निकाल लाया है।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 34-35
  • प्रेरितों 15:1-21



शुक्रवार, 6 जुलाई 2018

प्रशिक्षण



      मेरे घर के पास ही एक फिटनेस केंद्र था जहाँ वर्षों से मैं जाकर व्यायाम किया करता था। परन्तु पिछले माह वह बन्द हो गया, और मुझे एक नए जिम में जाकर दाखला लेना पड़ा। व्यायाम का मेरा पहला स्थान स्नेहिल, मितव्यता वाला स्थान था जहाँ वे लोग आया करते थे जो व्यायाम करते हुए एक दूसरे के साथ मित्रता के संबंध भी बनाना चाहते थे। हमारे मध्य शायद ही कभी कोई तनाव हुआ होगा। परन्तु अब जिस नए स्थान पर मैं व्यायाम के लिए जाता हूँ वह शरीर के डील-डौल बनाने के प्रति गंभीर लोगों का स्थान है, जो बस यही करने में लगे होते हैं। मैं उन्हें शरीर को बनाने सुधारने के लिए परिश्रम करते हुई देखता हूँ। उनके शरीर तो बलवंत लगते हैं, परन्तु मैं सोचता हूँ कि क्या उनके हृदय भी अनुग्रह के द्वारा बलवंत होते जा रहे हैं?

      हृदय एक प्रकार की मांस-पेशी है; ऐसी मांस-पेशी जो अन्य मांस-पेशियों को सक्रीय रखती है। अपनी अन्य मांस-पेशियों को बढ़ाते और बलवंत करते रहना अच्छा है, परन्तु मुख्य बात है वह प्रशिक्षण लेना जो हृदय को बलवंत रखने के लिए सही है।

      यही बात हमारे आत्मिक हृदय पर भी लागू होती है। हम इस हृदय को परमेश्वर के वचन बाइबल के संदेश को ग्रहण करके तथा उसकी बातों के पालन के द्वारा स्वस्थ एवँ हृष्ट-पुष्ट रखते हैं। अपने आत्मिक हृदय को स्वस्थ और बलवंत रखना हमारी पहली प्राथमिकता होनी चाहिए, जिसका प्रशिक्षण हमें अन्य सभी बातों से पहले और बढ़ाकर लेना चाहिए।

      प्रेरित पौलुस हमारे साथ सहमत होगा, क्योंकि उसने कहा था: “पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर। क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है” (1 तिमुथियुस 4:7-8)।


परमेश्वर का प्रशिक्षण हमें विश्वास में विकसित करने के लिए होता है।

नाना प्रकार के और विचित्र उपदेशों से न भरमाए जाओ, क्योंकि मन का अनुग्रह से दृढ़ रहना भला है, न कि उन खाने की वस्‍तुओं से जिन से काम रखने वालों को कुछ लाभ न हुआ। - इब्रानियों 13:9

बाइबल पाठ: 1 तिमुथियुस 4:6-11
1 Timothy 4:6 यदि तू भाइयों को इन बातों की सुधि दिलाता रहेगा, तो मसीह यीशु का अच्छा सेवक ठहरेगा: और विश्वास और उस अच्‍छे उपदेश की बातों से, जा तू मानता आया है, तेरा पालन-पोषण होता रहेगा।
1 Timothy 4:7 पर अशुद्ध और बूढिय़ों की सी कहानियों से अलग रह; और भक्ति के लिये अपना साधन कर।
1 Timothy 4:8 क्योंकि देह की साधना से कम लाभ होता है, पर भक्ति सब बातों के लिये लाभदायक है, क्योंकि इस समय के और आने वाले जीवन की भी प्रतिज्ञा इसी के लिये है।
1 Timothy 4:9 और यह बात सच और हर प्रकार से मानने के योग्य है।
1 Timothy 4:10 क्योंकि हम परिश्रम और यत्‍न इसी लिये करते हैं, कि हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है; जो सब मनुष्यों का, और निज कर के विश्वासियों का उद्धारकर्ता है।
1 Timothy 4:11 इन बातों की आज्ञा कर, और सिखाता रह।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 32-33
  • प्रेरितों 14



गुरुवार, 5 जुलाई 2018

सहायता


      माई आस्या के तीस सहपाठी और उनके अभिभावक देख रहे थे जब वह घबराई हुई स्कूल में पांचवीं कक्षा उत्तीर्ण करने के दीक्षांत समारोह में बोलने के लिए मंच की ओर बढ़ी। स्कूल की प्रधान-अध्यापिका ने उसके कद के अनुसार माईक की ऊँचाई को ठीक किया, परन्तु माई आस्या माईक और दर्शकों की ओर पीठ करके खड़ी हो गई। दर्शकों में से लोग उसका हौसला बढ़ाने के लिए  उस से कहने लगे, “डरो नहीं, तुम यह कर सकती हो” परन्तु वह हिली तक नहीं। फिर उसका एक सहपाठी चलकर उसके पास आया और उसके साथ खड़ा हो गया। तब, एक ओर उसका मित्र, और दूसरी ओर प्रधान-अध्यापिका, तीनों ने मिलकर उसके उस भाषण को इकठ्ठे पढ़ा। सहारा बनने और सहायता करने का यह कैसा सुन्दर उदाहरण था।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पाते हैं कि अमालेकियों से हो रहे युद्ध के दौरान मूसा को भी सहायता और सहारे की आवश्यकता पड़ी (निर्गमन 17:10-16)। “और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था” (पद 11); जब हारून और हूर ने देखा कि क्या हो रहा है, वे दोनों मूसा के साथ खड़े हो गए, एक इस ओर तो दूसरा दूसरी ओर, और उसके थकते हुए हाथों को सहारा दिया। उनके इस सहयोग की सहायता से, सांझ होने तक, इस्राएलियों को युद्ध में विजय मिल गई।

      हम सभी को एक दूसरे की सहायता, सहयोग और सहारे की आवश्यकता पड़ती है। परमेश्वर के परिवार के भाई-बहनों के रूप में, हमारे पास मसीही विश्वास की अपनी इस यात्रा में एक दूसरी की सहायता करने के अनेकों अवसर होते हैं। और परमेश्वर हमारे साथ, हमारे मध्य में रहता है, हमें ऐसा करने के लिए आवश्यक अनुग्रह प्रदान करता रहता है। -ऐनी सेटास

प्रोत्साहन की एक चिंगारी से आशा का दीपक जल उठता है।

प्रभु यहोवा ने मुझे सीखने वालों की जीभ दी है कि मैं थके हुए को अपने वचन के द्वारा संभालना जानूं। भोर को वह नित मुझे जगाता और मेरा कान खोलता है कि मैं शिष्य के समान सुनूं। - यशायाह 50:4

बाइबल पाठ: निर्गमन 17:8-16
Exodus 17:8 तब अमालेकी आकर रपीदीम में इस्राएलियों से लड़ने लगे।
Exodus 17:9 तब मूसा ने यहोशू से कहा, हमारे लिये कई एक पुरूषों को चुनकर छांट ले, ओर बाहर जा कर अमालेकियों से लड़; और मैं कल परमेश्वर की लाठी हाथ में लिये हुए पहाड़ी की चोटी पर खड़ा रहूंगा।
Exodus 17:10 मूसा की इस आज्ञा के अनुसार यहोशू अमालेकियों से लड़ने लगा; और मूसा, हारून, और हूर पहाड़ी की चोटी पर चढ़ गए।
Exodus 17:11 और जब तक मूसा अपना हाथ उठाए रहता था तब तक तो इस्राएल प्रबल होता था; परन्तु जब जब वह उसे नीचे करता तब तब अमालेक प्रबल होता था।
Exodus 17:12 और जब मूसा के हाथ भर गए, तब उन्होंने एक पत्थर ले कर मूसा के नीचे रख दिया, और वह उस पर बैठ गया, और हारून और हूर एक एक अलंग में उसके हाथों को सम्भाले रहें; और उसके हाथ सूर्यास्त तक स्थिर रहे।
Exodus 17:13 और यहोशू ने अनुचरों समेत अमालेकियों को तलवार के बल से हरा दिया।
Exodus 17:14 तब यहोवा ने मूसा से कहा, स्मरणार्थ इस बात को पुस्तक में लिख ले और यहोशू को सुना दे, कि मैं आकाश के नीचे से अमालेक का स्मरण भी पूरी रीति से मिटा डालूंगा।
Exodus 17:15 तब मूसा ने एक वेदी बनाकर उसका नाम यहोवानिस्सी रखा ;
Exodus 17:16 और कहा, यहोवा ने शपथ खाई है, कि यहोवा अमालेकियों से पीढिय़ों तक लड़ाई करता रहेगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 30-31
  • प्रेरितों 13:26-52


बुधवार, 4 जुलाई 2018

पुकारें



      मेरे देश में महिलाओं की एक प्रार्थना मण्डली प्रति माह घाना और अन्य अफ्रीकी देशों के लिए नियमित प्रार्थना के सत्र आयोजित करती है। जब उनसे पूछा गया कि वे देशों के लिए नियमित निरंतर प्रार्थनाएं क्यों करते रहते हैं, तो उनकी अगुआ ने उत्तर दिया, “अपने आस-पास देखिए, समाचारों को सुनिए और देखिए। हमारे देश पीड़ित हैं: युद्ध, बीमारियाँ, और हिंसा, परमेश्वर के मनुष्यों के लिए प्रेम और आशीषों पर हावी हुआ चाहती हैं। हमारा विश्वास है कि परमेश्वर राष्ट्रों के कार्यों में हस्तक्षेप करता है, इसलिए हम उसकी आशीषों के लिए उसका धन्यवाद करते और उसके हस्तक्षेप करने के लिए उसे पुकारते हैं।”

      परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि वास्तव में परमेश्वर राष्ट्रों के कार्यों में हस्तक्षेप करता है (2 इतिहास 7:14)। और अपने हस्तक्षेप के लिए वह सामान्य लोगों को प्रयोग करता है। आवश्यक नहीं कि वह हमें कोई बड़ा या जटिल कार्य करने के लिए दे, परन्तु जो भी कार्य वह देता है, वह चाहे प्रार्थना करते रहना ही हो, हम उसके माध्यम से उस शान्ति और धार्मिकता को लाने में अपना योगदान दे सकते हैं, जिसके द्वारा राष्ट्र की उन्नति होती है: “जाति की बढ़ती धर्म ही से होती है, परन्तु पाप से देश के लोगों का अपमान होता है” (नीतिवचन 14:34)। पौलुस प्रेरित ने लिखा, “अब मैं सब से पहिले यह उपदेश देता हूं, कि बिनती, और प्रार्थना, और निवेदन, और धन्यवाद, सब मनुष्यों के लिये किए जाएं। राजाओं और सब ऊंचे पद वालों के निमित्त इसलिये कि हम विश्राम और चैन के साथ सारी भक्ति और गम्भीरता से जीवन बिताएं” (1 तिमुथियुस 2:1-2)।

      जिस प्रकार भजनकार ने प्राचीन इस्राएलियों को प्रोत्साहित किया कि वे “यरूशलेम की शान्ति के लिए प्रार्थना करने” में समय बिताएं (भजन 122:6), उसी प्रकार हम भी अपने-अपने देशों की शान्ति और चंगाई के लिए प्रार्थना करने में समय बिताएं। जब हम अपनी बुराई से फिर कर नम्र होकर प्रार्थना करेंगे और उसके खोजी होंगे, वह हमारी सुनेगा। - लॉरेंस दरमानी


अधिकारियों के लिए प्रार्थना करना कर्तव्य भी है और विशेषाधिकार भी।

तब यदि मेरी प्रजा के लोग जो मेरे कहलाते हैं, दीन हो कर प्रार्थना करें और मेरे दर्शन के खोजी हो कर अपनी बुरी चाल से फिरें, तो मैं स्वर्ग में से सुन कर उनका पाप क्षमा करूंगा और उनके देश को ज्यों का त्यों कर दूंगा। - 2 इतिहास 7:14

बाइबल पाठ: भजन 122:6-9
Psalms 122:6 यरूशलेम की शान्ति का वरदान मांगो, तेरे प्रेमी कुशल से रहें!
Psalms 122:7 तेरी शहरपनाह के भीतर शान्ति, और तेरे महलों में कुशल होवे!
Psalms 122:8 अपने भाइयों और संगियों के निमित्त, मैं कहूंगा कि तुझ में शान्ति होवे!
Psalms 122:9 अपने परमेश्वर यहोवा के भवन के निमित्त, मैं तेरी भलाई का यत्न करूंगा।
                                                 

एक साल में बाइबल: 
  • अय्यूब 28-29
  • प्रेरितों 13:1-25