ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

शनिवार, 24 अगस्त 2019

औरों के



      मेरा मित्र जेमी एक विशाल अन्तर्राष्ट्रीय कंपनी में काम करता है। उस कंपनी में काम करने के उसके आरंभिक दिनों की बात है कि एक व्यक्ति उसके दफ्तर में उसके पास आया और उससे बातचीत करने लगा, उसने जेमी से पता किया कि वह वहाँ क्या काम कर रहा है। जेमी ने उस व्यक्ति को अपने काम के बारे में बताने के पश्चात, उससे उसका नाम पूछा, तो उस व्यक्ति ने कहा ‘मेरा नाम रिच है’; जेमी ने उत्तर दिया कि ‘आपसे मिलकर प्रसन्नता हुई; आप यहाँ पर क्या काम करते हैं?’ तो व्यक्ति ने जेमी को उत्तर दिया, ‘मैं यहाँ का मालिक हूँ!’ जेमी ने उस पल अचानक ही पहचाना कि उसका यह आकस्मिक, सामान्य शिष्टाचार के अन्तर्गत किया जा रहा वार्तालाप, सँसार के सबसे धनी व्यक्तियों में से एक के साथ हो रहा था।

      आज के आत्म-प्रशंसा और “मैं” के महत्व को ऊपर रखने के युग में, जेमी की यह कहानी हमारा ध्यान पौलुस प्रेरित द्वारा परमेश्वर के वचन बाइबल में फिलिप्पी की मसीही मण्डली को लिखी गई पत्री की बात स्मरण की ओर खींचती है: “विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (फिलिप्पियों 2:3)। पौलुस यहाँ जिन गुणों का वर्णन कर रहा है वे उन में पाए जाते हैं जो अपने पर नहीं वरन औरों पर अपना ध्यान लगाते हैं।

      जब हम “दूसरे को अपने आप से अच्छा” समझते हैं, तब हम मसीह यीशु के समान दीनता को प्रगट करते हैं (पद 3); हम अपने जीवनों से प्रभु यीशु के जीवन को प्रतिबिंबित करते हैं जो सेवा लेने नहीं परन्तु औरों की सेवा करने के लिए आए थे (मरकुस 10:45)। जब हम प्रभु यीशु के समान सेवक का स्वरूप धारण कर लेते हैं (2:7), तब हम में प्रभु यीशु का स्वभाव आ जाता है (पद 5)।

      आज जब हम औरों के साथ बातचीत करें, उनके साथ संपर्क में आएँ, तो हम केवल अपने बारे में ही न सोचें, वरन औरों के हितों की भी चिंता करें (पद 4)। - डेव ब्रैनन


औरों की सेवा के द्वारा परमेश्वर की सेवा करें।

क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे। - मरकुस 10:45

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2: 1-11
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है।
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो।
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो।
Philippians 2:4 हर एक अपने ही हित की नहीं, वरन दूसरों के हित की भी चिन्‍ता करे।
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा।
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया।
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली।
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है।
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे है; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें।
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 116-118
  • 1 कुरिन्थियों 7:1-19



शुक्रवार, 23 अगस्त 2019

क्षमा



      अपनी युवावस्था में मैंने अपनी एक सहेली को आमंत्रित किया कि वह मेरे साथ हमारे घर के निकट स्थित उपहारों की वस्तुओं को बेचने की के दूकान में सामान दखने के लिए आए। किन्तु उसने मुझे चकित कर दिया, जब उसने एक मुट्ठी-भर बालों में लगाए जाने वाले रंगीन क्लिप्स उठाकर मेरी जेब में डाल दिए और दुकानदार को पैसे दिए बिना मुझे खींचती हुई दूकान से बाहर ले गई। मैं इस बात के दोष को लेकर सप्ताह भर परेशान रही और फिर मैंने रोते हुए अपनी माँ से सब कह सुनाया।

      अपनी सहेली द्वारा चोरी करने का विरोध न करने से दुखी होकर मैंने जाकर वे चोरी के क्लिप्स दुकानदार को लौटा दिए, उससे क्षमा माँगी और प्रण लिया कि मैं फिर कभी चोरी नहीं करूँगी। परन्तु दुकानदार ने मुझ से कहा कि अब से मैं उसकी दूकान में फिर कभी न आऊँ। परन्तु क्योंकि मेरी माँ ने मुझे आश्वस्त किया कि मैंने बात को ठीक करने के लिए अपनी ओर से सब कुछ कर दिया था, और क्योंकि उन्होंने मुझे क्षमा कर दिया था, इसलिए मैं उस रात चैन से सो सकी।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में हम पढ़ते हैं कि राजा दाऊद ने भी पापों के अंगीकार और क्षमा के द्वारा विश्राम पाया (भजन 32:1-2)। उसने बतशीबा और उरिय्याह के विरुद्ध किए गए अपने पाप को छुपाया था (2 शमूएल 11-12), किन्तु उसकी “तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई” (भजन 32:3-4)। फिर जब दाऊद ने अपने पाप को प्रगट कर दिया, तो प्रभु ने उसे क्षमा कर दिया (पद 5)। फिर परमेश्वर ने “संकट से” उसकी रक्षा की, और “छुटकारे के गीतों से घेर लेगा” (पद 7)। दाऊद आनन्दित हुआ क्योंकि “जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा” (पद 10)।

      हम अपने पापों के परिणामों को नहीं चुन सकते हैं और न ही जब हम उन्हें स्वीकार करके उनके लिए क्षमा माँगते हैं तो लोगों की प्रतिक्रिया को नियंत्रित कर सकते हैं। परन्तु परमेश्वर हमें सामर्थी कर सकता है कि हम पापों कोस्वीकार करके, पाप के दासत्व से स्वतंत्र होकर, शान्ति का आनन्द लें, क्योंकि प्रभु हमें आश्वस्त करता है कि उसने उन पापों को मिटा दिया है। - जोशील डिक्सन


जब परमेश्वर क्षमा करता है तो सारा दोष मिट जाता है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9

बाइबल पाठ: भजन 32:1-11
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गई।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करूणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 113-115
  • 1 कुरिन्थियों 6



गुरुवार, 22 अगस्त 2019

फसल



ग्रीष्म ऋतु के अन्त के समय हम इंग्लैण्ड के न्यू फॉरेस्ट नामक क्षेत्र में घूमने के लिए गए, हमने वहाँ जंगली झाड़ियों से फल चुने और आस-पास घोड़ों को अटखेलियाँ करते हुए देखने का आनन्द लिया। हम नहीं जानते थे कि उन मीठे रसभरे फलों के बीज किसने और कब डाले थे, शायद बहुत वर्ष पहले, परन्तु उनके द्वारा बोए गए बीजों की फसल का आनन्द आज हम उठा पा रहे थे, और इससे मुझे प्रभु यीशु द्वारा कहे गए शब्द स्मरण हो आए, “मैं ने तुम्हें वह खेत काटने के लिये भेजा, जिस में तुम ने परिश्रम नहीं किया” (यूहन्ना 4:38)।

      उन शब्दों में प्रतिबिंबित होने वाली परमेश्वर के राज्य की उदारतापूर्ण भलाई मुझे बहुत पसन्द है। परमेश्वर हमें किसी अन्य के परिश्रम के फलों का आनन्द लेने देता है, जैसे कि तब, जब हम किसी के साथ प्रभु यीशु मसीह के लिए अपने प्रेम की गवाही देते हैं, इस बात से अनजान कि उस व्यक्ति के परिवार जन उसके लिए वर्षों से प्रार्थनाएं कर रहे हैं कि वह प्रभु के बारे में जानें, जिसके परिणामस्वरूप हमें आज यह अवसर प्राप्त हुआ है।

      मुझे इस पद में, प्रभु यीशु के शब्दों में, निहित सीमा भी पसन्द है – कि हम ऐसे बीज भी बो सकते हैं जिनकी फसल हम नहीं वरन कोई और काटेगा। इसलिए हम हमारे समक्ष रखे गए कार्यों को करने में निश्चिन्त रह सकते हैं, इस चिन्ता द्वारा भरमाए जाए बिना कि परिणामों के लिए हम ही ज़िम्मेदार हैं। परमेश्वर भी कार्यरत है, और वह हम पर निर्भर नहीं है। उसके पास भरपूरी की फसल के लिए सभी संसाधन उपलब्ध हैं, और हम उसकी योजनाओं का एक भाग हैं।

      क्या हम पहचानते हैं कि मेरे सामने, आपके सामने तैयार फसल के कौन से खेत तैयार खड़े हैं? हम प्रभु यीशु के सप्रेम निर्देश: “अपनी आंखे उठा कर खेतों पर दृष्टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं” (पद 35) का पालन करें। - एमी बाउचर पाई


हम औरों द्वारा बोए गए बीजों के फसल काट सकते हैं।

और उसने उन से कहा; पके खेत बहुत हैं; परन्तु मजदूर थोड़े हैं: इसलिये खेत के स्‍वामी से बिनती करो, कि वह अपने खेत काटने को मजदूर भेज दे। - लूका 10:2

बाइबल पाठ: यूहन्ना 4:35-38
John 4:35 क्या तुम नहीं कहते, कि कटनी होने में अब भी चार महीने पड़े हैं? देखो, मैं तुम से कहता हूं, अपनी आंखे उठा कर खेतों पर दृष्टि डालो, कि वे कटनी के लिये पक चुके हैं।
John 4:36 और काटने वाला मजदूरी पाता, और अनन्त जीवन के लिये फल बटोरता है; ताकि बोने वाला और काटने वाला दोनों मिलकर आनन्द करें।
John 4:37 क्योंकि इस पर यह कहावत ठीक बैठती है कि बोने वाला और है और काटने वाला और।
John 4:38 मैं ने तुम्हें वह खेत काटने के लिये भेजा, जिस में तुम ने परिश्रम नहीं किया: औरों ने परिश्रम किया और तुम उन के परिश्रम के फल में भागी हुए।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 110-112
  • 1 कुरिन्थियों 5



बुधवार, 21 अगस्त 2019

शान्त



      लेखक डैनियल लेविटिन ने अपनी पुस्तक “The Organized Mind: Thinking Straight in the Age of Information Overload” में लिखा है कि “पिछले पाँच वर्षों में हमने इतनी जानकारी एकत्रित कर ली है जितनी मानव इतिहास में पहले कभी नहीं की गई। एक प्रकार से हम इस उत्तेजना के आसक्त हो गए हैं।” समाचारों और ज्ञान के निरन्तर होते रहने वाले ये आक्रमण हमारे मस्तिष्क पर काबू कर लेते हैं। हमारे वातावरण में मीडिया के द्वारा किए जा रहे लगातार प्रहार के कारण हमारे लिए शान्त होकर बैठना, विचार करना, और प्रार्थना करना कठिन होता जा रहा है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार लिखता है, “चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!” (भजन 46:10), जो हमें परमेश्वर की ओर ध्यान लगाने की अनिवार्यता के बारे में सचेत करता है। बहुत से लोगों के लिए प्रतिदिन परमेश्वर के साथ शान्त होकर समय बिताना, जब वे बाइबल पढ़ते, प्रार्थना करते और परमेश्वर की भलाई तथा महानता पर विचार करते हैं, दिनचर्या का एक अनिवार्य भाग है ।

      जब भजन 46 के भजनकार के समान हम भी यह अनुभव करते हैं कि “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक” (पद 1), तो इससे हमारे भय भाग जाते हैं (पद 2), तथा हमारा ध्यान सँसार की बेचैनी से हटकर परमेश्वर की शान्ति पर आ जाता है और हमारे अन्दर एक शान्त भरोसा जागृत करता है कि परमेश्वर नियंत्रण में है (पद 10)।

      हमारे चारों ओर का सँसार चाहे जितना भी अस्त-व्यस्त क्यों न हो जाए, हम अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की उपस्थिति में  शान्त होकर उसके प्रेम और सामर्थ्य में रह सकते हैं। - डेविड मैक्कैस्लैंड


हमें प्रतिदिन शान्त होकर परमेश्वर की सुनना ज़रूरी है।

प्रभु यहोवा, इस्राएल का पवित्र यों कहता है, लौट आने और शान्त रहने में तुम्हारा उद्धार है; शान्त रहते और भरोसा रखने में तुम्हारी वीरता है। परन्तु तुम ने ऐसा नहीं किया – यशायाह 30:15

बाइबल पाठ: भजन 46
Psalms 46:1 परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलने वाला सहायक।
Psalms 46:2 इस कारण हम को कोई भय नहीं चाहे पृथ्वी उलट जाए, और पहाड़ समुद्र के बीच में डाल दिए जाएं;
Psalms 46:3 चाहे समुद्र गरजे और फेन उठाए, और पहाड़ उसकी बाढ़ से कांप उठें।।
Psalms 46:4 एक नदी है जिसकी नहरों से परमेश्वर के नगर में अर्थात परमप्रधान के पवित्र निवास भवन में आनन्द होता है।
Psalms 46:5 परमेश्वर उस नगर के बीच में है, वह कभी टलने का नहीं; पौ फटते ही परमेश्वर उसकी सहायता करता है।
Psalms 46:6 जाति जाति के लोग झल्ला उठे, राज्य राज्य के लोग डगमगाने लगे; वह बोल उठा, और पृथ्वी पिघल गई।
Psalms 46:7 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।
Psalms 46:8 आओ, यहोवा के महाकर्म देखो, कि उसने पृथ्वी पर कैसा कैसा उजाड़ किया है।
Psalms 46:9 वह पृथ्वी की छोर तक लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है, और रथों को आग में झोंक देता है!
Psalms 46:10 चुप हो जाओ, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं। मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!
Psalms 46:11 सेनाओं का यहोवा हमारे संग है; याकूब का परमेश्वर हमारा ऊंचा गढ़ है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 107-109
  • 1 कुरिन्थियों 4



मंगलवार, 20 अगस्त 2019

उपस्थित



      एक वृद्ध सेवानिवृत सैनिक के अंतिम संस्कार के समय, पादरी विचार करने लगा कि वह मृत अब कहाँ होगा। फिर, लोगों को यह बताने की बजाए कि वे परमेश्वर को कैसे जान सकते हैं, वह उन काल्पनिक बातों के बारे में बोलने लगा जो बाइबल में पाई भी नहीं जाती हैं। और मैं सोचने लगा कि आशा कहाँ है?

      अन्त में उसने हम सबसे एक अंतिम स्तुति-गीत गाने के लिए कहा। हम सब “प्रभु महान” गाने के लिए खड़े हुए, और लोग दिल की गहराई से परमेश्वर की स्तुति करने लगे। कुछ ही पल में कमरे का वातावरण बदल गया। अचानक ही उस स्तुति-गीत के तीसरे पद में आने पर मैं भावुक हो उठा और मेरी आवाज़ रुंध गई। उस तीसरे पद में लिखा है:
जब सोचता हूँ कि पिता ने अपना पुत्र, मरने भेजा है वर्णन से अपार,
कि क्रूस पर उसने मेरे पाप सब लेकर, रक्त बहाया कि मेरा हो उद्धार।
     
      उस महान गीत को गाने के समय तक मैं सोच रहा था कि उस अंतिम संस्कार में क्या परमेश्वर उपस्थित होगा? वास्तव में, वह हमें छोड़ कर कभी जाता ही नहीं है। परमेश्वर के वचन बाइबल में एस्तेर की पुस्तक को पढ़ने पर हमें इस तथ्य की एक पुष्टि मिलती है। यहूदी लोग अपने देश से निर्वासित थे, और उनके निर्वासन के स्थान पर शक्तिशाली लोग उन्हें मार डालना चाहते थे। किन्तु उनके उस अति-कठिन समय में भी, एक अधर्मी राजा ने  बंधुआई में रहने वाले यहूदियों को यह अधिकार दिया कि वे अपने मारने वालों के विरुद्ध बचाव में हाथ उठा सकें (एस्तेर 8:11-13)। इसके उपरान्त यहूदियों ने सफलता पूर्वक अपना बचाव किया और फिर एक उत्सव मनाया (9:17-19)।

      इसमें अचरज की कोई बात नहीं होनी चाहिए कि एक अंतिम संस्कार के समय परमेश्वर की उपस्थिति एक स्तुति-गीत के द्वारा पहचानी गई। आख़िरकार वह एक योजनाबद्ध नरसंहार के समय उपस्थित था और उसने उसे एक उत्सव में परिवर्तित कर दिया; वह प्रभु के क्रूस पर चढ़ाए जाने के समय में उपस्थित था और उसे सँसार के उद्धार का मार्ग बना दिया! – टिम गुस्ताफ्सन


चकित करने वाला हमारा परमेश्वर अपनी उपस्थिति
 वहाँ दिखाता है जहाँ हम आशा भी नहीं करते हैं।

तू हियाव बान्ध और दृढ़ हो, उन से न डर और न भयभीत हो; क्योंकि तेरे संग चलने वाला तेरा परमेश्वर यहोवा है; वह तुझ को धोखा न देगा और न छोड़ेगा। - व्यवस्थाविवरण 31:6

बाइबल पाठ: एस्तेर 8:11-17
Esther 8:11 इन चिट्ठियों में सब नगरों के यहूदियों को राजा की ओर से अनुमति दी गई, कि वे इकट्ठे हों और अपना अपना प्राण बचाने के लिये तैयार हो कर, जिस जाति वा प्रान्त से लोग अन्याय कर के उन को वा उनकी स्त्रियों और बाल-बच्चों को दु:ख देना चाहें, उन को विध्वंसघात और नाश करें, और उनकी धन सम्मत्ति लूट लें।
Esther 8:12 और यह राजा क्षयर्ष के सब प्रान्तों में एक ही दिन में किया जाए, अर्थात अदार नाम बारहवें महीने के तेरहवें दिन को।
Esther 8:13 इस आज्ञा के लेख की नकलें, समस्त प्रान्तों में सब देशें के लोगों के पास खुली हुई भेजी गईं; ताकि यहूदी उस दिन अपने शत्रुओं से पलटा लेने को तैयार रहें।
Esther 8:14 सो हरकारे वेग चलने वाले सरकारी घोड़ों पर सवार हो कर, राजा की आज्ञा से फुर्ती कर के जल्दी चले गए, और यह आज्ञा शूशन राजगढ़ में दी गई थी।
Esther 8:15 तब मोर्दकै नीले और श्वेत रंग के राजकीय वस्त्र पहिने और सिर पर सोने का बड़ा मुकुट धरे हुए और सूक्ष्मसन और बैंजनी रंग का बागा पहिने हुए, राजा के सम्मुख से निकला, और शूशन नगर के लोग आनन्द के मारे ललकार उठे।
Esther 8:16 और यहूदियों को आनन्द और हर्ष हुआ और उनकी बड़ी प्रतिष्ठा हुई।
Esther 8:17 और जिस जिस प्रान्त, और जिस जिस नगर में, जहां कहीं राजा की आज्ञा और नियम पहुंचे, वहां वहां यहूदियों को आनन्द और हर्ष हुआ, और उन्होंने जेवनार कर के उस दिन को खुशी का दिन माना। और उस देश के लोगों में से बहुत लोग यहूदी बन गए, क्योंकि उनके मन में यहूदियों का डर समा गया था।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 105-106
  • 1 कुरिन्थियों 3



सोमवार, 19 अगस्त 2019

आनन्द



      केली की गर्भावस्था में कुछ समस्याएँ आ गई थीं, और उसके डॉक्टर उसके लिए चिन्तित थे। लंबे प्रसव के समय, उन्होंने ऑपरेशन द्वारा बच्चे को जन्म देने का निर्णय लिया। किन्तु इस कठिन समय और पीड़ा के बावजूद, केली शीघ्र ही अपनी पीड़ा को भूल गई जब उसने अपने नवजात पुत्र को अपने हाथों में पकड़ा; आनन्द ने पीड़ा को हटा दिया था।

      परमेश्वर का वचन बाइबल इस सत्य की पुष्टि करती है: “जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती” (यूहन्ना 16:21)। प्रभु यीशु ने इस चित्रण को अपने शिष्यों को दिया, इस बात पर बल देने के लिए कि चाहे शीघ्र ही उसके चले जाने से वे शोकित होंगे, परन्तु उनका यह दुःख आनन्द में बदल जाएगा जब वे उसे दोबारा देखेंगे (पद 20-22)।

      प्रभु यीशु अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान, और जो उसके बाद होना था, उसके विषय बात कर रहे थे। अपने मृतकों में से पुनरुत्थान के पश्चात, शिष्य आनन्दित हुए कि, प्रभु ने चालीस दिन उन्हें सिखाते, उनके साथ रहते और चलते फिरते हुए बिताए, और फिर उनका स्वर्गारोहण हुआ (प्रेरितों 1:3)। परन्तु अपने स्वर्गारोहण के बाद भी प्रभु ने उन्हें अकेला और शोकित नहीं छोड़ा; उन्होंने अपना पवित्र आत्मा उन्हें दिया जिससे वे आनन्द से भर गए (यूहन्ना 16:7-15; प्रेरितों 13:52)।

      यद्यपि हमने प्रभु को कभी आमने-सामने नहीं देखा है, किन्तु मसीही विश्वासी होने के नाते हमें यह आश्वासन है कि एक दिन हम प्रभु को देखेंगे, उसके साथ होंगे। उस दिन इस पृथ्वी पर जो दुःख और तकलीफ हम सहते हैं वह सब भुला दी जाएगी। परन्तु उस दिन तक, प्रभु ने हमें बिना आनन्द के नहीं छोड़ा है; उसने हमें अपना आत्मा दिया है (रोमियों 15:13; 1 पतरस 1:8-9)। - एलीसन कीडा


एक दिन हमारा सभी दुःख आनन्द में बदल जाएगा!

और वह उन की आंखों से सब आंसू पोंछ डालेगा; और इस के बाद मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहिली बातें जाती रहीं। - प्रकाशितवाक्य 21:4

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:16-22
John 16:16 थोड़ी देर तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:17 तब उसके कितने चेलों ने आपस में कहा, यह क्या है, जो वह हम से कहता है, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे? और यह इसलिये कि मैं कि मैं पिता के पास जाता हूं?
John 16:18 तब उन्होंने कहा, यह थोड़ी देर जो वह कहता है, क्या बात है? हम नहीं जानते, कि क्या कहता है।
John 16:19 यीशु ने यह जानकर, कि वे मुझ से पूछना चाहते हैं, उन से कहा, क्या तुम आपस में मेरी इस बाते के विषय में पूछ पाछ करते हो, कि थोड़ी देर में तुम मुझे न देखोगे, और फिर थोड़ी देर में मुझे देखोगे।
John 16:20 मैं तुम से सच सच कहता हूं; कि तुम रोओगे और विलाप करोगे, परन्तु संसार आनन्द करेगा: तुम्हें शोक होगा, परन्तु तुम्हारा शोक आनन्द बन जाएगा।
John 16:21 जब स्त्री जनने लगती है तो उसको शोक होता है, क्योंकि उस की दु:ख की घड़ी आ पहुंची, परन्तु जब वह बालक जन्म चुकी तो इस आनन्द से कि जगत में एक मनुष्य उत्पन्न हुआ, उस संकट को फिर स्मरण नहीं करती।
John 16:22 और तुम्हें भी अब तो शोक है, परन्तु मैं तुम से फिर मिलूंगा और तुम्हारे मन में आनन्द होगा; और तुम्हारा आनन्द कोई तुम से छीन न लेगा।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 103-104
  • 1 कुरिन्थियों 2



रविवार, 18 अगस्त 2019

आनन्दित



      हम में से प्रत्येक जन अपने आप में अनूठा है, परमेश्वर द्वारा बनाई गई एकमात्र मूल-प्रति है। ऐसा कोई भी पुरुष अथवा स्त्री नहीं है जिसने अपने आप को बनाया है। कोई भी, कभी भी अपने आप से गुणवान, ज्ञानवान, और बुद्धिमान नहीं बना है। परमेश्वर ने ही हम सभी को वैसा बनाया है जैसा वह चाहता था और जैसे हम हैं। उसने अपने अवर्णनीय प्रेम में होकर हमारी कल्पना की और फिर हमारी रचना की।

      परमेश्वर ने ही आपके देह, आत्मा, प्राण को बनाया है; और अभी हम में उसका काम पूरा नहीं हुआ है। अब परमेश्वर का हमारे लिए उद्देश्य है हमारी परिपक्वता – हम में आरंभ हुए उसके काम का पूर्ण होना : “और मुझे इस बात का भरोसा है, कि जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फिलिप्पियों 1:6)। परमेश्वर आपको और अधिक निर्भीक, सामर्थी, शुद्ध, अधिक शांतिप्रिय, अधिक प्रेम करने वाला, कम स्वार्थी व्यक्ति बनाने में लगा हुआ है – संभवतः आप भी अपने लिए यही चाहते रहे होंगे।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार ने लिखा, “क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5)। परमेश्वर सदा ही आपसे प्रेम करता रहा है, और वह जीवनपर्यंत आपके प्रति विश्वासयोग्य बना रहेगा। उसने आप से एक ऐसा प्रेम रखा है जो सदाकाल का है, और वह कभी आपसे हताश होकर आपको छोड़ेगा नहीं। यह आनन्दित होने और परमेश्वर के सम्मुख स्तुति के गीतों के साथ आने के लिए अच्छा कारण है। परमेश्वर की जयजयकार करें, उसमें आनन्दित हों। - डेविड रोपर


जब विश्वास का पोषण होता है तो आत्मिक उन्नति होती है।

तेरे जीवन भर कोई तेरे साम्हने ठहर न सकेगा; जैसे मैं मूसा के संग रहा वैसे ही तेरे संग भी रहूंगा; और न तो मैं तुझे धोखा दूंगा, और न तुझ को छोडूंगा। - यहोशू 1:5

बाइबल पाठ: भजन 100
Psalms 100:1 हे सारी पृथ्वी के लोगों यहोवा का जयजयकार करो!
Psalms 100:2 आनन्द से यहोवा की आराधना करो! जयजयकार के साथ उसके सम्मुख आओ!
Psalms 100:3 निश्चय जानो, कि यहोवा ही परमेश्वर है। उसी ने हम को बनाया, और हम उसी के हैं; हम उसकी प्रजा, और उसकी चराई की भेड़ें हैं।
Psalms 100:4 उसके फाटकों से धन्यवाद, और उसके आंगनों में स्तुति करते हुए प्रवेश करो, उसका धन्यवाद करो, और उसके नाम को धन्य कहो!
Psalms 100:5 क्योंकि यहोवा भला है, उसकी करूणा सदा के लिये, और उसकी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 100-102
  • 1 कुरिन्थियों 1