ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

बुधवार, 29 जनवरी 2020

बालक



      बहुत वर्ष पहले की बात है, मेरी पत्नी ने हमारी दो वर्षीय बेटी के साथ उसे सुलाने से पहले रात्रि की प्रार्थना की, और उसे बिस्तर में लेटा रही थी, कि उसने प्रश्न पूछा, “मम्मी, यीशु कहाँ हैं?” मेरी पत्नी ने उत्तर दिया, “यीशु स्वर्ग में हैं, और सभी स्थानों पर भी हैं; वे अभी हमारे साथ भी हैं; और यदि तुम उन्हें आने के लिए कहोगी, तो वे तुम्हारे हृदय में भी आ कर रह सकते हैं।” बेटी ने उत्तर दिया, “मैं चाहती हूँ कि यीशु मेरे हृदय में आएं।”

      जब मेरी पत्नी ने कहा, “ठीक है; किसी दिन तुम उन्हें आने के लिए कह सकती हो;” तो हमारी बेटी बोली, “मैं उन्हें अभी अपने हृदय में आने के लिए कहना चाहती हूँ।” तब हमारी बेटी ने प्रार्थना की, “यीशु, कृपया मेरे हृदय में आएं और मेरे साथ रहें।” और यहाँ से उसके मसीही विश्वास की यात्रा का आरंभ हुआ।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा है कि जब प्रभु यीशु के शिष्यों ने उससे पूछा कि स्वर्ग के राज्य में कौन बड़ा है, तो प्रभु ने एक छोटे बालक को अपने पास बुलाया (मत्ती 18:1-2) और शिष्यों से कहा, “मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे। जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा। और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है” (पद 3-5)।

      प्रभु यीशु के दृष्टिकोण से हम एक भरोसा करने वाले बालक को विश्वास के उदाहरण के रूप में देख सकते हैं। और हम से कहा गया है कि जो भी प्रभु के लिए अपने हृदय को खोलता है, हमें उसका स्वागत करना है, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है (मत्ती 19:14)। - डेविड मैक्कैसलैंड

प्रभु यीशु मसीह में हमारा विश्वास, बालक द्वारा किए गए भरोसे के समान है।

यीशु ने कहा, बालकों को मेरे पास आने दो: और उन्हें मना न करो, क्योंकि स्वर्ग का राज्य ऐसों ही का है। - मत्ती 19:14

बाइबल पाठ: मत्ती 18:1-5
Matthew 18:1 उसी घड़ी चेले यीशु के पास आकर पूछने लगे, कि स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?
Matthew 18:2 इस पर उसने एक बालक को पास बुलाकर उन के बीच में खड़ा किया।
Matthew 18:3 और कहा, मैं तुम से सच कहता हूं, यदि तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तो स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे।
Matthew 18:4 जो कोई अपने आप को इस बालक के समान छोटा करेगा, वह स्वर्ग के राज्य में बड़ा होगा।
Matthew 18:5 और जो कोई मेरे नाम से एक ऐसे बालक को ग्रहण करता है वह मुझे ग्रहण करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 21-22
  • मत्ती 19



मंगलवार, 28 जनवरी 2020

आनन्द



      मैं जीवन की एक नई ऋतु की ओर बढ़ रही हूँ – वृद्धावस्था की “शरद” ऋतु – किन्तु अभी वहाँ पहुँची नहीं हूँ। यद्यपि मेरे वर्ष तेज़ी से बीतते चले जा रहे हैं, और कभी-कभी मैं उनकी गति को कम भी करना चाहती हूँ, फिर भी मुझ में एक आनन्द है जो मुझे संभाले रहता है। हर दिन मुझे प्रभु परमेश्वर द्वारा दिया गया एक नया दिन है। मैं भी परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार के साथ कह सकती हूँ, “यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना; प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना” (भजन 92:1-2)।

      चाहे मेरे जीवन में कई संघर्ष हों; और चाहे कभी औरों के दुःख और कठिनाइयाँ मुझे अभिभूतित करें, किन्तु प्रभु परमेश्वर मुझे सक्षम करता है कि मैं भी भजनकार के साथ कह सकती हूँ, “हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा” (पद 4)। जो आशीषें उसने मुझे दी हैं: परिवार, मित्र, संतोषजनक व्यवसाय – वह सब मेरे लिए आनन्द का कारण है। मैं आनन्दित हूँ परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि और उसके प्रेरित जीवते वचन के लिए। इसलिए भी आनन्दित हूँ क्योंकि प्रभु यीशु ने मुझ से इतना प्रेम किया कि मेरे पापों के बदले अपने आप को बलिदान कर दिया। मैं आनन्दित हूँ क्योंकि प्रभु परमेश्वर ने हमें अपना पवित्र आत्मा दिया है जो सच्चे आनन्द का स्त्रोत है (रोमियों 15:13)। प्रभु परमेश्वर के अनुग्रह के कारण, उस पर विश्वास रखने वाले, “धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे। वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे। वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:12-14)।

      यह कौन सा फल है भजनकार जिसके लिए कह रहा है? हमारे जीवन की परिस्थितियाँ या जीवन की ऋतु चाहे जो भी हो, हम अपनी जीवन शैली, अपनी बोलचाल, तथा अपने व्यावहार के द्वारा प्रभु परमेश्वर के प्रेम के उदाहरण हो सकते हैं। प्रभु को जानने, उसके बारे में औरों को बताने, और उसके लिए जीवन जीने में सच्चा और स्थाई आनन्द है। - एलिसन कीडा

परमेश्वर ही सब आनन्द का दाता है।

सो परमेश्वर जो आशा का दाता है तुम्हें विश्वास करने में सब प्रकार के आनन्द और शान्ति से परिपूर्ण करे, कि पवित्र आत्मा की सामर्थ से तुम्हारी आशा बढ़ती जाए। - रोमियों 15:13

बाइबल पाठ: भजन 92
Psalms 92:1 यहोवा का धन्यवाद करना भला है, हे परमप्रधान, तेरे नाम का भजन गाना;
Psalms 92:2 प्रात:काल को तेरी करूणा, और प्रति रात तेरी सच्चाई का प्रचार करना,
Psalms 92:3 दस तार वाले बाजे और सारंगी पर, और वीणा पर गम्भीर स्वर से गाना भला है।
Psalms 92:4 क्योंकि, हे यहोवा, तू ने मुझ को अपने काम से आनन्दित किया है; और मैं तेरे हाथों के कामों के कारण जयजयकार करूंगा।
Psalms 92:5 हे यहोवा, तेरे काम क्या ही बड़े हैं! तेरी कल्पनाएं बहुत गम्भीर हैं!
Psalms 92:6 पशु समान मनुष्य इस को नहीं समझता, और मूर्ख इसका विचार नहीं करता:
Psalms 92:7 कि दुष्ट जो घास के समान फूलते- फलते हैं, और सब अनर्थकारी जो प्रफुल्लित होते हैं, यह इसलिये होता है, कि वे सर्वदा के लिये नाश हो जाएं,
Psalms 92:8 परन्तु हे यहोवा, तू सदा विराजमान रहेगा।
Psalms 92:9 क्योंकि हे यहोवा, तेरे शत्रु, हां तेरे शत्रु नाश होंगे; सब अनर्थकारी तित्तर बित्तर होंगे।
Psalms 92:10 परन्तु मेरा सींग तू ने जंगली सांढ़ का सा ऊंचा किया है; मैं टटके तेल से चुपड़ा गया हूं।
Psalms 92:11 और मैं अपने द्रोहियों पर दृष्टि कर के, और उन कुकर्मियों का हाल मेरे विरुद्ध उठे थे, सुनकर सन्तुष्ट हुआ हूं।
Psalms 92:12 धर्मी लोग खजूर के समान फूले फलेंगे, और लबानोन के देवदार के समान बढ़ते रहेंगे।
Psalms 92:13 वे यहोवा के भवन में रोपे जा कर, हमारे परमेश्वर के आंगनों में फूले फलेंगे।
Psalms 92:14 वे पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे,
Psalms 92:15 जिस से यह प्रगट हो, कि यहोवा सीधा है; वह मेरी चट्टान है, और उस में कुटिलता कुछ भी नहीं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 19-20
  • मत्ती 18:21-35



सोमवार, 27 जनवरी 2020

नम्र



      एक दिन विश्वविद्यालय की एक दर्शनशास्त्र की कक्षा में, एक छात्र ने अपने शिक्षक द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण को लेकर भड़काऊ टिप्पणी की। अन्य छात्र यह देखकर हैरान रह गए कि उस शिक्षक ने उस छात्र का धन्यवाद किया, और अगली टिप्पणी की ओर मुड़ गया। बाद में जब उससे पूछा गया कि उसने उस उद्दण्ड छात्र को उचित उत्तर क्यों नहीं दिया, तो शिक्षक का उत्तर था, “मैं अपनी ही बात को अंतिम बात न रखने के अनुशासन का अभ्यास कर रहा हूँ।”

      यह शिक्षक परमेश्वर से प्रेम करता था और उसका आदर करता था, और परमेश्वर के प्रेम को प्रतिबिंबित करने वाले व्यवहार को दिखाने के लिए वह नम्र भावना रखता था। उस शिक्षक के शब्द मुझे एक अन्य शिक्षक के शब्दों को स्मरण करवाते हैं, और यह दूसरा शिक्षक बहुत समय पहले का है – परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक का लेखक। यद्यपि इस दूसरे शिक्षक ने यह बात किसी क्रुद्ध व्यक्ति के प्रति व्यवहार करने के सन्दर्भ में नहीं कही थी, वरन परमेश्वर के निकट आने के समय हमारे उचित व्यवहार को सिखाने के लिए कही थी। सभोपदेशक के लेखक ने लिखा, “जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं। बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों” (सभोपदेशक 5:1-2)।

      आप परमेश्वर के निकट किस मानसिकता के साथ आते हैं? यदि आपको लगता है कि आपके व्यवहार में कुछ सुधार होना चाहिए तो क्यों न कुछ समय परमेश्वर की महानता और महिमा पर विचार करने में बिताएं? जब हम परमेश्वर की असीम बुद्धिमत्ता, सामर्थ्य, और उपस्थिति पर मनन करते हैं, तो हमारे प्रति उसके उमड़ते हुए प्रेम से हम अभिभूतित हो सकते हैं, जो फिर हमें नम्र बनाता है। जब हम ऐसे नम्र रहना पसंद करेंगे, तो फिर अपनी बात को सबसे ऊपर रखने की प्रवृत्ति रहेगी ही नहीं। - एमी बाउचर पाई

ध्यान पूर्वक चुने गए शब्द परमेश्वर को आदर देते हैं।

...यह वही बात है जिसे यहोवा ने कहा था, कि जो मेरे समीप आए अवश्य है कि वह मुझे पवित्र जाने, और सारी जनता के साम्हने मेरी महिमा करे। - लैव्यवस्था 10:3

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:1-7
Ecclesiastes 5:1 जब तू परमेश्वर के भवन में जाए, तब सावधानी से चलना; सुनने के लिये समीप जाना मूर्खों के बलिदान चढ़ाने से अच्छा है; क्योंकि वे नहीं जानते कि बुरा करते हैं।
Ecclesiastes 5:2 बातें करने में उतावली न करना, और न अपने मन से कोई बात उतावली से परमेश्वर के साम्हने निकालना, क्योंकि परमेश्वर स्वर्ग में हैं और तू पृथ्वी पर है; इसलिये तेरे वचन थोड़े ही हों।
Ecclesiastes 5:3 क्योंकि जैसे कार्य की अधिकता के कारण स्वप्न देखा जाता है, वैसे ही बहुत सी बातों का बोलने वाला मूर्ख ठहरता है।
Ecclesiastes 5:4 जब तू परमेश्वर के लिये मन्नत माने, तब उसके पूरा करने में विलम्ब न करना; क्यांकि वह मूर्खों से प्रसन्न नहीं होता। जो मन्नत तू ने मानी हो उसे पूरी करना।
Ecclesiastes 5:5 मन्नत मान कर पूरी न करने से मन्नत का न मानना ही अच्छा है।
Ecclesiastes 5:6 कोई वचन कहकर अपने को पाप में ने फंसाना, और न ईश्वर के दूत के साम्हने कहना कि यह भूल से हुआ; परमेश्वर क्यों तेरा बोल सुन कर अप्रसन्न हो, और तेरे हाथ के कार्यों को नष्ट करे?
Ecclesiastes 5:7 क्योंकि स्वप्नों की अधिकता से व्यर्थ बातों की बहुतायत होती है: परन्तु तू परमेश्वर को भय मानना।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 16-18
  • मत्ती 18:1-20



रविवार, 26 जनवरी 2020

उद्देश्य



      कहा जाता है कि “जब आप मज़े ले रहे हों, तो समय बहुत तेज़ी से बीतता है।” यह कोई तथ्य तो नहीं है, किन्तु अनुभव इसे सत्य प्रतीत करवाता है। जब जीवन मनोरम हो, तो समय बहुत जल्दी बीत जाता है। यदि मैं कोई ऐसा कार्य कर रही हूँ जो मुझे अच्छा लगता है, या मैं किसी ऐसे व्यक्ति के साथ हूँ जिसकी संगति मुझे अच्छी लगती है, तो फिर समय का कोई महत्व नहीं रहता है।

      इस बात के अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रकाशितवाक्य 4 अध्याय में वर्णित दृश्य के प्रति एक नई समझ दी है। पहले जब मैं परमेश्वर के सिंहासन के चारों ओर बैठे उन चार प्राणियों के बारे में विचार करती थी, जो वही शब्द बारंबार दोहरा रहे हैं, तो मुझे लगता था, यह कितनी उबाऊ स्थिति होगी।

      परन्तु अब मैं ऐसा नहीं सोचती हूँ। अब जब मैं उन दृश्यों के बारे में सोचती हूँ जो उन्होंने अपनी अनेकों आँखों से देखे हैं (पद 8), और उन दर्शनों के बारे में विचार करती हूँ जिन्हें उन्होंने परमेश्वर के सिंहासन के पास होने के कारण निहारा है (पद 6), तो मुझे लगता है कि वे कितने आश्चर्यचकित होंगे परमेश्वर के गलती करते रहने वाले मनुष्यों के प्रति बुद्धिमान और प्रेम पूर्ण व्यवहार के लिए। इसलिए फिर इस सब के लिए उनके उस प्रत्युत्तर से बेहतर और क्या प्रत्युत्तर हो सकता है? वे और क्या कहेंगे, सिवाए इसके कि “पवित्र, पवित्र, पवित्र”?

      क्या उन्हीं शब्दों को बारंबार कहते रहना उबा देने वाला हो सकता है? यदि आप किसी ऐसे के साथ हैं जिसे आप प्रेम करते हैं, तब तो नहीं; और न ही तब जब आप ठीक वही कर रहे हैं जिसे करने के लिए आपको योजनाबद्ध रीति से बनाया गया है। उन चार प्राणियों के समान जिन्हें परमेश्वर ने अपनी महिमा करने के उद्देश्य से बनाया है, हमें भी परमेश्वर ने अपनी महिमा के उद्देश्य से बनाया है। यदि हम अपने जीवन परमेश्वर द्वारा हमारे लिए रखे गए उद्देश्य पर केंद्रित रखें, और उस उद्देश्य को पूरा करते रहें, तो हमारे जीवन कभी भी उबाऊ नहीं होंगे। - जूली एकरमैन लिंक

परमेश्वर के साथ सामंजस्य में बना हुआ ह्रदय, उसकी स्तुति किए बिना रह नहीं सकता है।

इस प्रजा को मैं ने अपने लिये बनाया है कि वे मेरा गुणानुवाद करें। - यशायाह 43:21

बाइबल पाठ: प्रकाशितवाक्य 4
Revelation 4:1 इन बातों के बाद जो मैं ने दृष्टि की, तो क्या देखता हूं कि स्वर्ग में एक द्वार खुला हुआ है; और जिस को मैं ने पहिले तुरही के से शब्द से अपने साथ बातें करते सुना था, वही कहता है, कि यहां ऊपर आ जा: और मैं वे बातें तुझे दिखाऊंगा, जिन का इन बातों के बाद पूरा होना अवश्य है।
Revelation 4:2 और तुरन्त मैं आत्मा में आ गया; और क्या देखता हूं, कि एक सिंहासन स्वर्ग में धरा है, और उस सिंहासन पर कोई बैठा है।
Revelation 4:3 और जो उस पर बैठा है, वह यशब और मानिक सा दिखाई पड़ता है, और उस सिंहासन के चारों ओर मरकत सा एक मेघधनुष दिखाई देता है।
Revelation 4:4 और उस सिंहासन के चारों ओर चौबीस सिंहासन है; और इन सिंहासनों पर चौबीस प्राचीन श्वेत वस्‍त्र पहिने हुए बैठें हैं, और उन के सिरों पर सोने के मुकुट हैं।
Revelation 4:5 और उस सिंहासन में से बिजलियां और गर्जन निकलते हैं और सिंहासन के साम्हने आग के सात दीपक जल रहे हैं, ये परमेश्वर की सात आत्माएं हैं।
Revelation 4:6 और उस सिंहासन के साम्हने मानो बिल्लौर के समान कांच का सा समुद्र है, और सिंहासन के बीच में और सिंहासन के चारों ओर चार प्राणी हैं, जिन के आगे पीछे आंखे ही आंखे हैं।
Revelation 4:7 पहिला प्राणी सिंह के समान है, और दूसरा प्राणी का मुंह बछड़े के समान है, तीसरे प्राणी का मुंह मनुष्य का सा है, और चौथा प्राणी उड़ते हुए उकाब के समान है।
Revelation 4:8 और चारों प्राणियों के छ: छ: पंख हैं, और चारों ओर, और भीतर आंखे ही आंखे हैं; और वे रात दिन बिना विश्राम लिये यह कहते रहते हैं, कि पवित्र, पवित्र, पवित्र प्रभु परमेश्वर, सर्वशक्तिमान, जो था, और जो है, और जो आने वाला है।
Revelation 4:9 और जब वे प्राणी उस की जो सिंहासन पर बैठा है, और जो युगानुयुग जीवता है, महिमा और आदर और धन्यवाद करेंगे।
Revelation 4:10 तब चौबीसों प्राचीन सिंहासन पर बैठने वाले के साम्हने गिर पड़ेंगे, और उसे जो युगानुयुग जीवता है प्रणाम करेंगे; और अपने अपने मुकुट सिंहासन के साम्हने यह कहते हुए डाल देंगे।
Revelation 4:11 कि हे हमारे प्रभु, और परमेश्वर, तू ही महिमा, और आदर, और सामर्थ के योग्य है; क्योंकि तू ही ने सब वस्तुएं सृजीं और वे तेरी ही इच्छा से थीं, और सृजी गईं।

(इस लेक की लेखिका, जूली, अब स्वर्ग में परमेश्वर की स्तुति करने वालों के साथ हैं)

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 14-15
  • मत्ती 17



शनिवार, 25 जनवरी 2020

आशा



      कुछ समय पहले मैं अपने एक मित्र के साथ एम्पायर स्टेट बिलडिंग देखने गया। हमारे समान उसे देखने आए अन्य लोगों की लाइन छोटी ही लग रही थी, बस थोड़ा सा आगे जाकर कोना मुड़ने तक की। परन्तु जब हम ने उस बिलडिंग में प्रवेश किया तो पाया कि आए हुए लोगों की लाइन लॉबी से आगे सीढ़ियों , और फिर एक कमरे के अन्दर तक तक जा रही थी। हमारा हर मोड़ मुड़ना, कुछ और दूरी को दिखाता था। आकर्षणस्थल और घूमने के स्थानों के संचालक, आने वाले लोगों की भीड़ को ऐसे मार्गों से ले चलते हैं कि देखने वालों को भीड़ कम लगे, किन्तु वास्तविकता तो “मोड़ मुड़ते ही” दिखाई देती है।

      इसी प्रकार जीवन की निराशाएं भी कभी-कभी जितनी दिखाई देती हैं, उससे बढ़कर गंभीर होती हैं। हमने जिस नौकरी के मिलने की आशा रखी थी, वह नहीं मिलती है; जिन मित्रों पर हमने भरोसा किया था उन्होंने हमारे भरोसे को तोड़ दिया; जिस प्रेम संबंध पर हमने आशा रखी थी, वह सफल नहीं हुआ; आदि। परन्तु इन नाकामियों और दिल तोड़ने वाली घटनाओं में परमेश्वर का वचन बाइबल हमें एक नई आशा के प्रति प्रोत्साहित करता है। प्रेरित पौलुस ने लिखा, “केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज। और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है। और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (रोमियों 5:3-5)।

      हम जब परमेश्वर में अपना भरोसा बनाए रखते हैं, तो परमेश्वर अपनी आत्मा के द्वारा हमें धीमी आवाज़ में बताता है कि वह हम से बिना किसी शर्त के प्रेम करता है और एक दिन हम उसके साथ होंगे – चाहे आज हमारे सामने कैसी भी बाधाएं क्यों न आ रही हों।

      एक ऐसे संसार में, जो हमें बहुधा निराश करता है, यह जानना कितना अच्छा है कि परमेश्वर में हमें एक वास्तविक आशा मिलती है। - जेम्स बैंक्स

मसीह यीशु में निराश लोगों को भी आशा मिलती है।

प्रभु यीशु ने कहा: “हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।” (मत्ती 11:28)

बाइबल पाठ: रोमियों 5:1-11
Romans 5:1 सो जब हम विश्वास से धर्मी ठहरे, तो अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के साथ मेल रखें।
Romans 5:2 जिस के द्वारा विश्वास के कारण उस अनुग्रह तक, जिस में हम बने हैं, हमारी पहुंच भी हुई, और परमेश्वर की महिमा की आशा पर घमण्ड करें।
Romans 5:3 केवल यही नहीं, वरन हम क्लेशों में भी घमण्ड करें, यही जानकर कि क्लेश से धीरज।
Romans 5:4 और धीरज से खरा निकलना, और खरे निकलने से आशा उत्पन्न होती है।
Romans 5:5 और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है।
Romans 5:6 क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।
Romans 5:7 किसी धर्मी जन के लिये कोई मरे, यह तो र्दुलभ है, परन्तु क्या जाने किसी भले मनुष्य के लिये कोई मरने का भी हियाव करे।
Romans 5:8 परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा।
Romans 5:9 सो जब कि हम, अब उसके लोहू के कारण धर्मी ठहरे, तो उसके द्वारा क्रोध से क्यों न बचेंगे?
Romans 5:10 क्योंकि बैरी होने की दशा में तो उसके पुत्र की मृत्यु के द्वारा हमारा मेल परमेश्वर के साथ हुआ फिर मेल हो जाने पर उसके जीवन के कारण हम उद्धार क्यों न पाएंगे?
Romans 5:11 और केवल यही नहीं, परन्तु हम अपने प्रभु यीशु मसीह के द्वारा जिस के द्वारा हमारा मेल हुआ है, परमेश्वर के विषय में घमण्ड भी करते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 12-13
  • मत्ती 16



शुक्रवार, 24 जनवरी 2020

जीवन



      कुछ वर्ष पहले, हमारे निवास स्थान पर शरद ऋतु असामान्य लंबे समय तक रही और दो सप्ताह तक बाहर का तापमान शून्य से बहुत नीचे, -20oC रहा। एक बहुत ही ठंडी प्रातः, रात्रि की शान्ति को दर्जनों, या सैंकड़ों पक्षियों के चहचहाहट ने भंग किया; वे सभी ऊँची आवाज़ में अपना अपना गीत गा रहे थे। यदि मुझे सही बात पता नहीं होती, तो मैं तो यही मानता कि वे अपने सृष्टिकर्ता से माँग कर रहे थे कि अब तो इस सर्दी को समाप्त करके  गर्म मौसम को ले आए।

      पक्षी विशेषज्ञ हमें बताते हैं कि शरद ऋतु के अंत के निकट जो पक्षियों का कोलाहल हम सुनते हैं, वह अधिकांशतः नर पक्षियों द्वारा मादाओं को आकर्षित करने और अपने-अपने क्षेत्र स्थापित करने के लिए किया जाता है। उनके इस चहचहाने ने मुझे स्मरण दिलाया कि परमेश्वर ने अपनी सृष्टि का बारीकी से समंजन किया है जिससे जीवन बना रहे और बढ़ता रहे – क्योंकि वह जीवन का परमेश्वर है।

      परमेश्वर के वचन बाइबल में भजन 104 में, जो परमेश्वर की फूलती-फलती धरती को लेकर परमेश्वर की स्तुति करने का भजन है, भजनकार ने यह कहकर आरंभ किया कि, “हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!...” (भजन 104:1); फिर उसने आगे लिखा, “उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं”(भजन 104:12)।

      चहचहाते और बसेरा करते हुए पक्षियों से लेकर समुद्र के अनगिनत जलचरों तक (पद 25)हमें चारों ओर सृष्टिकर्ता परमेश्वर पिता की स्तुति और आराधना करने के कारण दिखाई देते हैं, उसके द्वारा जीवन को बनाए रखने और फूलता-फलता रखने के कार्यों के द्वारा। - जैफ ओलसन

और वही सब वस्‍तुओं में प्रथम है, और सब वस्तुएं उसी में स्थिर रहती हैं। - कुलुस्सियों1:17

क्योंकि उसके अनदेखे गुण, अर्थात उस की सनातन सामर्थ, और परमेश्वरत्व जगत की सृष्टि के समय से उसके कामों के द्वारा देखने में आते हैं... – रोमियों 1:20

बाइबल पाठ: भजन 104:1-12, 24-30
Psalms 104:1 हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह! हे मेरे परमेश्वर यहोवा, तू अत्यन्त महान है! तू वैभव और ऐश्वर्य का वस्त्र पहिने हुए है,
Psalms 104:2 जो उजियाले को चादर के समान ओढ़े रहता है, और आकाश को तम्बू के समान ताने रहता है,
Psalms 104:3 जो अपनी अटारियों की कड़ियां जल में धरता है, और मेघों को अपना रथ बनाता है, और पवन के पंखों पर चलता है,
Psalms 104:4 जो पवनों को अपने दूत, और धधकती आग को अपने टहलुए बनाता है।
Psalms 104:5 तू ने पृथ्वी को उसकी नींव पर स्थिर किया है, ताकि वह कभी न डगमगाए।
Psalms 104:6 तू ने उसको गहिरे सागर से ढांप दिया है जैसे वस्त्र से; जल पहाड़ों के ऊपर ठहर गया।
Psalms 104:7 तेरी घुड़की से वह भाग गया; तेरे गरजने का शब्द सुनते ही, वह उतावली कर के बह गया।
Psalms 104:8 वह पहाड़ों पर चढ़ गया, और तराईयों के मार्ग से उस स्थान में उतर गया जिसे तू ने उसके लिये तैयार किया था।
Psalms 104:9 तू ने एक सिवाना ठहराया जिस को वह नहीं लांघ सकता है, और न फिरकर स्थल को ढांप सकता है।
Psalms 104:10 तू नालों में सोतों को बहाता है; वे पहाड़ों के बीच से बहते हैं,
Psalms 104:11 उन से मैदान के सब जीव- जन्तु जल पीते हैं; जंगली गदहे भी अपनी प्यास बुझा लेते हैं।
Psalms 104:12 उनके पास आकाश के पक्षी बसेरा करते, और डालियों के बीच में से बोलते हैं।
Psalms 104:24 हे यहोवा तेरे काम अनगिनित हैं! इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है; पृथ्वी तेरी सम्पत्ति से परिपूर्ण है।
Psalms 104:25 इसी प्रकार समुद्र बड़ा और बहुत ही चौड़ा है, और उस में अनगिनित जलचर जीव- जन्तु, क्या छोटे, क्या बड़े भरे पड़े हैं।
Psalms 104:26 उस में जहाज भी आते जाते हैं, और लिव्यातान भी जिसे तू ने वहां खेलने के लिये बनाया है।
Psalms 104:27 इन सब को तेरा ही आसरा है, कि तू उनका आहार समय पर दिया करे।
Psalms 104:28 तू उन्हें देता हे, वे चुन लेते हैं; तू अपनी मुट्ठी खोलता है और वे उत्तम पदार्थों से तृप्त होते हैं।
Psalms 104:29 तू मुख फेर लेता है, और वे घबरा जाते हैं; तू उनकी सांस ले लेता है, और उनके प्राण छूट जाते हैं और मिट्टी में फिर मिल जाते हैं।
Psalms 104:30 फिर तू अपनी ओर से सांस भेजता है, और वे सिरजे जाते हैं; और तू धरती को नया कर देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39



गुरुवार, 23 जनवरी 2020

प्रेम



      अगस्त 21, 2016 के दिन कैरिस्सा ने सोशल मीडिया पर लुइसियाना प्रांत में आई विनाशकारी बाढ़ के चित्र पोस्ट किए। अगले दिन उसने उस बाढ़ग्रस्त क्षेत्र से किसी के द्वारा भेजे गई सहायता करने की विनती को पोस्ट किया। इसके पाँच घंटे बाद, कैरिस्सा ने एक और निवेदन पोस्ट किया, कि लोग उंके साथ 1000 मील की यात्रा पर उन बाढ़ पीड़ितों की सहायता करने के लिए निकल चलें। इसके चौबीस घंटों के अन्दर तेरह लोग उन लोगों की सहायता के लिए चल पड़े थे जिनके घर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए थे।

      वह क्या था जिसने लोगों को अपना हर काम छोड़कर सत्रह घंटे की यात्रा करके एक ऐसे स्थान पर जाने के प्रेरित किया जहाँ वे पहले कभी नहीं गए थे, जिससे कि वहां जाकर उन लोगों की सहायता कर सकें जिन से वे पहले कभी नहीं मिले थे, जिन्हें वे कभी नहीं जानते थे? यह प्रेरणा देने वाला प्रेम है।

      कैरिस्सा द्वारा सहायता करने के उस निवेदन के साथ परमेश्वर के वचन बाइबल से लेकर पोस्ट किए गए बाइबल के इस पद पर विचार कीजिए: “अपने मार्ग की चिन्ता यहोवा पर छोड़; और उस पर भरोसा रख, वही पूरा करेगा” (भजन 37:5)। यह विशेषकर महत्वपूर्ण होता है जब हम सहायता करने की परमेश्वर की बुलाहट पर कार्य करते हैं। प्रेरित यूहन्ना ने लिखा, “पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है?” (1 यूहन्ना 3:17)। ऐसा करना एक कठिन कार्य हो सकता है, परन्तु परमेश्वर ने हम से वायदा किया है, “...जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह उस में, और वह उन में बना रहता है...” (पद 22)।

      जब भी आवश्यकता आए, हम परमेश्वर का आदार कर सकते हैं, औरों की सहायता करने की उसके द्वारा हमें दी रही बुलाहट को स्वीकार करके, जो हमारे प्रेम का प्रमाण है। - डेव ब्रैनन

औरों की सहायता करना स्वीकार करके हम परमेश्वर के प्रेम को दिखाते हैं;
 उसके द्वारा हमें सौंपे गए कार्यों को करने के द्वारा हम उसकी सामर्थ्य को दिखाते हैं।

सो जब कि तुम ने भाईचारे की निष्‍कपट प्रीति के निमित्त सत्य के मानने से अपने मनों को पवित्र किया है, तो तन मन लगा कर एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो। - 1 पतरस 1:22

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 3:16-24
1 John 3:16 हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए।
1 John 3:17 पर जिस किसी के पास संसार की संपत्ति हो और वह अपने भाई को कंगाल देख कर उस पर तरस न खाना चाहे, तो उस में परमेश्वर का प्रेम क्योंकर बना रह सकता है?
1 John 3:18 हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करें।
1 John 3:19 इसी से हम जानेंगे, कि हम सत्य के हैं; और जिस बात में हमारा मन हमें दोष देगा, उसके विषय में हम उसके साम्हने अपने अपने मन को ढाढ़स दे सकेंगे।
1 John 3:20 क्योंकि परमेश्वर हमारे मन से बड़ा है; और सब कुछ जानता है।
1 John 3:21 हे प्रियो, यदि हमारा मन हमें दोष न दे, तो हमें परमेश्वर के साम्हने हियाव होता है।
1 John 3:22 और जो कुछ हम मांगते हैं, वह हमें उस से मिलता है; क्योंकि हम उस की आज्ञाओं को मानते हैं; और जो उसे भाता है वही करते हैं।
1 John 3:23 और उस की आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र यीशु मसीह के नाम पर विश्वास करें और जैसा उसने हमें आज्ञा दी है उसी के अनुसार आपस में प्रेम रखें।
1 John 3:24 और जो उस की आज्ञाओं को मानता है, वह उस में, और वह उन में बना रहता है: और इसी से, अर्थात उस आत्मा से जो उसने हमें दिया है, हम जानते हैं, कि वह हम में बना रहता है।

एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 7-8
  • मत्ती 15:1-20