ई-मेल संपर्क / E-Mail Contact

इन संदेशों को ई-मेल से प्राप्त करने के लिए अपना ई-मेल पता इस ई-मेल पर भेजें : rozkiroti@gmail.com / To Receive these messages by e-mail, please send your e-mail id to: rozkiroti@gmail.com

गुरुवार, 17 जून 2021

स्वरूप


          मेरी एक सहेली, और मेरी परामर्शदाता ने एक कागज़ पर मानव आकृति का रेखा चित्र बनाया, और कहा कि यह हमारा “व्यक्तिगत” या भीतरी स्वरूप है। फिर उसने उस रेखा चित्र से लगभग आधा इंच बाहर उसी रेखा चित्र के समानान्तर एक और रेखा चित्र बना दिया, और उसे कहा कि यह हमारा “प्रकट” या दिखाने का स्वरूप है। और फिर मुझ से कहा कि इन दोनों चित्रों के मध्य की दूरी हमारी ईमानदारी को दिखाती है। मैं उसकी इस शिक्षा पर विचार करने लगी; मेरे मन में प्रश्न उठा, क्या मैं अपने सार्वजनिक स्वरूप में वही व्यक्ति हूँ, जो व्यक्तिगत स्वरूप में हूँ?

          परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कोरिन्थ के मसीही विश्वासियों की मण्डली को पत्रियाँ लिखीं, जिनके द्वारा उसने प्रेम और अनुशासन को मिश्रित करते हुए, उन्हें प्रभु यीशु मसीह के समान होने की सलाह दी। उन्हें लिखी गई अपनी दूसरी पत्री के अन्त की ओर आते समय उसने उस पर उन दोष लगाने वालों को चुनौती दी; उन पर जो उसकी ईमानदारी पर उंगली उठाते थे, और कहते थे कि वह पत्री लिखने में तो साहसी है, किन्तु व्यक्तिगत स्वरूप में निर्बल है (2 कुरिन्थियों 10:10)।

          ये आलोचक वे लोग थे जो भाषण देने को व्यवसाय के रूप में प्रयोग करते थे, और अपने श्रोताओं से पैसे कमाते थे। जबकि, उनकी तुलना में, यद्यपि पौलुस बहुत शिक्षित व्यक्ति थी, किन्तु बहुत साधारण और स्पष्ट शब्दों में अपनी बात कहता था। पौलुस ने अपनी पहली पत्री में उन्हें लिखा था,और मेरे वचन, और मेरे प्रचार में ज्ञान की लुभाने वाली बातें नहीं; परन्तु आत्मा और सामर्थ्य का प्रमाण था” (1 कुरिन्थियों 2:4)। उसने अपनी दूसरी पत्री में अपनी ईमानदारी के विषय लिखा,सो जो ऐसा कहता है, वह यह समझ रखे, कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे सामने हमारे काम भी होंगे” (2 कुरिन्थियों 10:11)।

          पौलुस ने अपने व्यक्तिगत और सार्वजनिक स्वरूप को एक समान बनाकर रखा और दिखाया। क्या हम भी उसके समान हैं? – एलिसा मॉर्गन

 

हे प्रभु मैं आपके सामने अपने व्यक्तिगत स्वरूप में 

और संसार के सामने सार्वजनिक स्वरूप में भिन्न न रहूं।


तुम मेरी सी चाल चलो जैसा मैं मसीह की सी चाल चलता हूं। - 1 कुरिन्थियों 11:1

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 10:1-11

2 कुरिन्थियों 10:1 मैं वही पौलुस जो तुम्हारे सामने दीन हूं, परन्तु पीठ पीछे तुम्हारी ओर साहस करता हूं; तुम को मसीह की नम्रता, और कोमलता के कारण समझाता हूं।

2 कुरिन्थियों 10:2 मैं यह बिनती करता हूं, कि तुम्हारे सामने मुझे निर्भय हो कर साहस करना न पड़े; जैसा मैं कितनों पर जो हम को शरीर के अनुसार चलने वाले समझते हैं, वीरता दिखाने का विचार करता हूं।

2 कुरिन्थियों 10:3 क्योंकि यद्यपि हम शरीर में चलते फिरते हैं, तौभी शरीर के अनुसार नहीं लड़ते।

2 कुरिन्थियों 10:4 क्योंकि हमारी लड़ाई के हथियार शारीरिक नहीं, पर गढ़ों को ढा देने के लिये परमेश्वर के द्वारा सामर्थी हैं।

2 कुरिन्थियों 10:5 सो हम कल्पनाओं को, और हर एक ऊंची बात को, जो परमेश्वर की पहचान के विरोध में उठती है, खण्डन करते हैं; और हर एक भावना को कैद कर के मसीह का आज्ञाकारी बना देते हैं।

2 कुरिन्थियों 10:6 और तैयार रहते हैं कि जब तुम्हारा आज्ञा मानना पूरा हो जाए, तो हर एक प्रकार के आज्ञा न मानने का पलटा लें।

2 कुरिन्थियों 10:7 तुम इन्हीं बातों को देखते हो, जो आंखों के सामने हैं, यदि किसी का अपने पर यह भरोसा हो, कि मैं मसीह का हूं, तो वह यह भी जान ले, कि जैसा वह मसीह का है, वैसे ही हम भी हैं।

2 कुरिन्थियों 10:8 क्योंकि यदि मैं उस अधिकार के विषय में और भी घमण्ड दिखाऊं, जो प्रभु ने तुम्हारे बिगाड़ने के लिये नहीं पर बनाने के लिये हमें दिया है, तो लज्जित न हूंगा।

2 कुरिन्थियों 10:9 यह मैं इसलिये कहता हूं, कि पत्रियों के द्वारा तुम्हें डराने वाला न ठहरूं।

2 कुरिन्थियों 10:10 क्योंकि कहते हैं, कि उस की पत्रियां तो गम्भीर और प्रभावशाली हैं; परन्तु जब देखते हैं, तो वह देह का निर्बल और वक्तव्य में हल्का जान पड़ता है।

2 कुरिन्थियों 10:11 सो जो ऐसा कहता है, वह यह समझ रखे, कि जैसे पीठ पीछे पत्रियों में हमारे वचन हैं, वैसे ही तुम्हारे सामने हमारे काम भी होंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 7-9
  • प्रेरितों 3


बुधवार, 16 जून 2021

जानकारी

 

          मेरे बेटे ने पिछली सीट से पूछा, “पापा, समय क्या हुआ है”, और मैंने उत्तर दिया “5:30 बजे हैं” मैं जानता था कि अब वह आगे क्या कहेगा, और उसने वही कहा, “नहीं, अभी 5:28 बजा है।” उसके चेहरे की बड़ी से मुस्कराहट कह रही थी, “देखा! मैंने आपकी गलती पकड़ ली।” मैं भी आनन्दित था – उस आनन्द से जो अपने बच्चों के बारे में जानकारी रखने से माता-पिता को होता है।

          किसी भी अन्य ध्यान रखने वाले माता-पिता के समान, मैं अपने बच्चों को जानता हूँ। मुझे जानकारी है कि उन्हें सोते से उठाने पर वो क्या कहेंगे। मुझे जानकारी है कि उन्हें उनके भोजन में क्या चाहिए। मुझे उनकी बहुत सी अन्य बातों की जानकारी है – उनकी रुचि, अभिलाषाएँ, पसंद आदि, सब की। लेकिन यह सब होते हुए भी, मैं उन्हें कभी वैसे अन्दर-बाहर से नहीं जानने पाऊँगा, जैसे हमारा प्रभु परमेश्वर हमें जानता है।

          हम परमेश्वर के वचन बाइबल में, यूहन्ना 1 में उसकी उस घनिष्ठ जानकारी की एक झलक देखते हैं, जो प्रभु हमारे बारे में रखता है। जब नतनएल, फिलिप्पुस के कहने पर , प्रभु यीशु से मिलने के लिए आगे बढ़ा, तो प्रभु यीशु ने उसके लिए कहा, “...देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं” (पद 47)। यह सुनकर नतनएल अचंभित रह गया, और उसने पूछा,तू मुझे कहां से जानता है? ” प्रभु यीशु ने रहस्यमय भाव से उत्तर दिया कि उसने नतनएल को अंजीर के पेड़ के नीचे देख लिया था (पद 48)।

          हमें यह तो नहीं पता है कि प्रभु यीशु ने इस ख़ास बात को नतनएल को क्यों बताया, लेकिन शायद नतनएल उसके यह कहने से कुछ समझ गया! वह अभिभूत होकर प्रत्युत्तर दिया, “... हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है; तू इस्राएल का महाराजा है” (पद 49)।

          प्रभु यीशु हम में से प्रत्येक को बहुत घनिष्ठता से, पूर्णतः, और सिद्ध रीति से जानता है; हमारी हर बात उसे पता है। और हम जैसे भी हैं, वह हमें वैसा ही स्वीकार करता है। यद्यपि उसके पास हमारे अन्दर-बाहर की पूरी जानकारी है, फिर भी उसका हमें खुला निमंत्रण है कि हम न केवल उसके अनुयायी बनें, वरन उसके प्रिय मित्र भी (यूहन्ना 15:15)। - एडम होल्ज़

 

हे प्रभु मुझे अच्छे से जानते हुए भी, मुझे अपना मित्र बना लेने के लिए आपका बहुत धन्यवाद।


अब से मैं तुम्हें दास न कहूंगा, क्योंकि दास नहीं जानता, कि उसका स्वामी क्या करता है: परन्तु मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं। - यूहन्ना 15:15

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:43-51

यूहन्ना 1:43 दूसरे दिन यीशु ने गलील को जाना चाहा; और फिलिप्पुस से मिलकर कहा, मेरे पीछे हो ले।

यूहन्ना 1:44 फिलिप्पुस तो अन्द्रियास और पतरस के नगर बैतसैदा का निवासी था।

यूहन्ना 1:45 फिलिप्पुस ने नतनएल से मिलकर उस से कहा, कि जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।

यूहन्ना 1:46 नतनएल ने उस से कहा, क्या कोई अच्छी वस्तु भी नासरत से निकल सकती है? फिलिप्पुस ने उस से कहा, चलकर देख ले।

यूहन्ना 1:47 यीशु ने नतनएल को अपनी ओर आते देखकर उसके विषय में कहा, देखो, यह सचमुच इस्राएली है: इस में कपट नहीं।

यूहन्ना 1:48 नतनएल ने उस से कहा, तू मुझे कहां से जानता है? यीशु ने उसको उत्तर दिया; उस से पहिले कि फिलिप्पुस ने तुझे बुलाया, जब तू अंजीर के पेड़ के तले था, तब मैं ने तुझे देखा था।

यूहन्ना 1:49 नतनएल ने उसको उत्तर दिया, कि हे रब्बी, तू परमेश्वर का पुत्र है; तू इस्राएल का महाराजा है।

यूहन्ना 1:50 यीशु ने उसको उत्तर दिया; मैं ने जो तुझ से कहा, कि मैं ने तुझे अंजीर के पेड़ के तले देखा, क्या तू इसी लिये विश्वास करता है? तू इस से बड़े बड़े काम देखेगा।

यूहन्ना 1:51 फिर उस से कहा, मैं तुम से सच सच कहता हूँ कि तुम स्वर्ग को खुला हुआ, और परमेश्वर के स्‍वर्गदूतों को ऊपर जाते और मनुष्य के पुत्र के ऊपर उतरते देखोगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 4-6
  • प्रेरितों 2:22-47


मंगलवार, 15 जून 2021

शब्द

 

          उस लड़के ने मेरा उपहास करते हुए मुझे, “हड्डी पर चढी चमड़ी” कहा, और एक अन्य ने उसके साथ सम्मिलित होते हुए मुझे “छड़ी” बुलाया। प्रत्युत्तर में मैं एक जाना-पहचाना वाक्य – “छड़ी और पत्थर मेरी हड्डियां तोड़ सकते हैं, किन्तु तुम्हारे शब्द मुझे कभी आहत नहीं करेंगे” बोल सकती थी। किन्तु उस छोटी आयु में भी मैं जानती थी कि यह वाक्य सत्य नहीं है। कठोर, दया-रहित, बिना विचार किए कहे गए शब्द निःसंदेह आहत करते थे। कभी-कभी शब्दों के घाव इतने गहरे होते थे,और इतने दिनों तक बने रहते थे, जितने किसी छड़ी या पत्थर के घाव नहीं होते थे।

          परमेश्वर के वचन बाइबल में शमूएल नबी की माँ, हन्ना, निःसंदेह, बिना विचारे कहे गए शब्दों की चोट को अच्छे से जानती थी। उसका पति, एल्काना उसे प्यार करता था, परन्तु क्योंकि वह संतानहीन थी, इसलिए उसकी सौतन, पनिन्ना, जिसके बहुत से बच्चे थे, उसे ताने मारती थी। ऐसी संस्कृति में, जिसमें अकसर पत्नी का मूल्यांकन उसके बच्चों की संख्या के आधार पर होता था, पनिन्ना के ये ताने उसके निःसंतान होने की पीड़ा को और बढ़ा देते थे। अन्ततः हन्ना की यह हालत हो जाती थी कि वह रोटी रहती और भोजन भी नहीं करने पाती थी (1 शमूएल 1:6-7)। उसके पति एल्काना की भले उद्देश्य से कही गई बात, हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?” (पद 8) भी उसे सांत्वना नहीं देने पाती थी।

          हन्ना के समान ही हम में से कई लोगों ने आहत करने वाले शब्दों के पीड़ादायक परिणाम झेले होंगे। और हम में से कुछ ने उन आहत करने वालों शब्दों की प्रतिक्रिया में, दूसरों को आहत करने वाले शब्द भी कहे होंगे। लेकिन हम सभी अपने प्रेमी और दयालु परमेश्वर के पास अपनी इस पीड़ा को लेकर जा सकते हैं, उस से उस परिस्थिति का सामना करने की शक्ति और चंगाई पाने के लिए (भजन 27:5, 12-14)। वह हमसे हर हाल में प्रेम करता है, हमें शान्ति देता है; हमसे प्रेम और अनुग्रह के शब्द बोलता है। - एलिसन कीड़ा

 

परमेश्वर हमारी हर बात सुनने और समाधान करने के लिए सदैव तत्पर रहता है।


ऐसे लोग हैं जिनका बिना सोच विचार के बोलना तलवार के समान चुभता है, परन्तु बुद्धिमान के बोलने से लोग चंगे होते हैं। - नीतिवचन 12:18

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 1:1-8

1 शमूएल 1:1 एप्रैम के पहाड़ी देश के रामतैम सोपीम नाम नगर का निवासी एल्काना नाम पुरुष था, वह एप्रेमी था, और सूप के पुत्र तोहू का परपोता, एलीहू का पोता, और यरोहाम का पुत्र था।

1 शमूएल 1:2 और उसके दो पत्नियां थीं; एक का तो नाम हन्ना और दूसरी का पनिन्ना था। और पनिन्ना के तो बालक हुए, परन्तु हन्ना के कोई बालक न हुआ।

1 शमूएल 1:3 वह पुरुष प्रति वर्ष अपने नगर से सेनाओं के यहोवा को दण्डवत करने और मेलबलि चढ़ाने के लिये शीलो में जाता था; और वहां होप्नी और पीनहास नाम एली के दोनों पुत्र रहते थे, जो यहोवा के याजक थे।

1 शमूएल 1:4 और जब जब एल्काना मेलबलि चढ़ाता था तब तब वह अपनी पत्नी पनिन्ना को और उसके सब बेटे-बेटियों को दान दिया करता था;

1 शमूएल 1:5 परन्तु हन्ना को वह दूना दान दिया करता था, क्योंकि वह हन्ना से प्रीति रखता था; तौभी यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी।

1 शमूएल 1:6 परन्तु उसकी सौत इस कारण से, कि यहोवा ने उसकी कोख बन्द कर रखी थी, उसे अत्यन्त चिढ़ाकर कुढ़ाती रहती थीं।

1 शमूएल 1:7 और वह तो प्रति वर्ष ऐसा ही करता था; और जब हन्ना यहोवा के भवन को जाती थी तब पनिन्ना उसको चिढ़ाती थी। इसलिये वह रोती और खाना न खाती थी।

1 शमूएल 1:8 इसलिये उसके पति एल्काना ने उस से कहा, हे हन्ना, तू क्यों रोती है? और खाना क्यों नहीं खाती? और मेरा मन क्यों उदास है? क्या तेरे लिये मैं दस बेटों से भी अच्छा नहीं हूं?

 

एक साल में बाइबल: 

  • नहेम्याह 1-3
  • प्रेरितों 2:1-21


सोमवार, 14 जून 2021

प्रार्थना

 

          एशिया में यात्रा करते समय, मेरा आई-पैड, जिसमें मेरी सारी पढ़ने की सामग्री तथा काम से संबंधित बहुत सारे दस्तावेज़ थे, खराब हो गया – उसका स्क्रीन एक काला स्क्रीन बन गया। सहायता ढूँढ़ते हुए, मैं एक कंप्यूटर की दुकान पर पहुँचा और वहाँ पहुँचकर मेरे सामने एक और समस्या आ गई – मुझे चीनी भाषा बोलनी नहीं आती थी, और उस दुकान के कारीगर को अंग्रजी बोलनी नहीं आती थी। क्या समाधान हो? उस कारीगर ने एक सॉफ्टवेयर  प्रोग्राम खोला, जिसमें वह चीनी भाषा में टाइप करता था, किन्तु मैं उसे अंग्रेज़ी में पढ़ने पाता था; और जब मैं अंग्रेज़ी में टाइप करता था, तो वह उसे चीनी में पढ़ने पाता था। उस सॉफ्टवेयर की सहायता से हम, भिन्न भाषाएँ होते हुए भी, एक दूसरे के साथ स्पष्टता से संवाद कर सके।

          कभी-कभी मुझे लगता है कि मैं जब अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता के साथ प्रार्थना में संवाद करता हूँ , तो स्पष्टता के साथ अपने मन की बात व्यक्त नहीं करने पाता हूँ। और इस बात में मैं अकेला नहीं हूँ; हम में से अनेकों, प्रार्थना में कभी-न-कभी संघर्ष करते हैं। परमेश्वर के वचन बाइबल में परमेश्वर पवित्र आत्मा ने हमारे लिए इसका समाधान प्रेरित पौलुस के द्वारा लिखवाया है। पौलुस ने रोमियों को लिखी अपनी पत्री में लिखा, इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है। और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है” (रोमियों 8:26-27)।

          पवित्र आत्मा का यह वरदान कितना अद्भुत है! यह किसी भी कंप्यूटर प्रोग्राम या सॉफ्टवेयर से कहीं अधिक उत्तम है, वह स्वयं ही मेरे विचारों और अभिलाषाओं को पिता परमेश्वर के उद्देश्यों के साथ सामंजस्य में लाकर, मेरे और पिता परमेश्वर के मध्य स्पष्ट रीति से व्यक्त कर देता है। पवित्र आत्मा का कार्य, प्रार्थना को कार्यकारी बना देता है। - बिल क्राउडर

 

पिता परमेश्वर, परमेश्वर पवित्र आत्मा और उनके के वरदानों के लिए आपका धन्यवाद।


परन्तु जब वह अर्थात सत्य का आत्मा आएगा, तो तुम्हें सब सत्य का मार्ग बताएगा, क्योंकि वह अपनी ओर से न कहेगा, परन्तु जो कुछ सुनेगा, वही कहेगा, और आने वाली बातें तुम्हें बताएगा। - यूहन्ना 16:13

बाइबल पाठ: रोमियों 8:18-27

रोमियों 8:18 क्योंकि मैं समझता हूं, कि इस समय के दु:ख और क्लेश उस महिमा के सामने, जो हम पर प्रगट होने वाली है, कुछ भी नहीं हैं।

रोमियों 8:19 क्योंकि सृष्टि बड़ी आशा भरी दृष्टि से परमेश्वर के पुत्रों के प्रगट होने की बाट जोह रही है।

रोमियों 8:20 क्योंकि सृष्टि अपनी इच्छा से नहीं पर आधीन करने वाले की ओर से व्यर्थता के आधीन इस आशा से की गई।

रोमियों 8:21 कि सृष्टि भी आप ही विनाश के दासत्व से छुटकारा पाकर, परमेश्वर की सन्तानों की महिमा की स्वतंत्रता प्राप्त करेगी।

रोमियों 8:22 क्योंकि हम जानते हैं, कि सारी सृष्टि अब तक मिलकर कराहती और पीड़ाओं में पड़ी तड़पती है।

रोमियों 8:23 और केवल वही नहीं पर हम भी जिन के पास आत्मा का पहिला फल है, आप ही अपने में कराहते हैं; और लेपालक होने की, अर्थात अपनी देह के छुटकारे की बाट जोहते हैं।

रोमियों 8:24 आशा के द्वारा तो हमारा उद्धार हुआ है परन्तु जिस वस्तु की आशा की जाती है जब वह देखने में आए, तो फिर आशा कहां रही? क्योंकि जिस वस्तु को कोई देख रहा है उस की आशा क्या करेगा?

रोमियों 8:25 परन्तु जिस वस्तु को हम नहीं देखते, यदि उस की आशा रखते हैं, तो धीरज से उस की बाट जोहते भी हैं।

रोमियों 8:26 इसी रीति से आत्मा भी हमारी दुर्बलता में सहायता करता है, क्योंकि हम नहीं जानते, कि प्रार्थना किस रीति से करना चाहिए; परन्तु आत्मा आप ही ऐसी आहें भर भरकर जो बयान से बाहर है, हमारे लिये बिनती करता है।

रोमियों 8:27 और मनों का जांचने वाला जानता है, कि आत्मा की मनसा क्या है क्योंकि वह पवित्र लोगों के लिये परमेश्वर की इच्छा के अनुसार बिनती करता है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • एज्रा 9-10
  • प्रेरितों 1

रविवार, 13 जून 2021

विशेष

 

          सन 1877 में इंग्लैंड के एक स्थान की एक मसीही आराधना सभा के बाद जब चर्च में उन लोगों से आगे आने के लिए कहा गया, जिन्होंने प्रभु यीशु को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण किया था, तब उन आगे आने वालों में से एक रॉडनी स्मिथ भी था। उसे आगे की ओर जाता हुआ देख, बैठे हुए लोगों में से किसी ने घृणा भरे स्वर में फुसफुसाकर कहा, “अरे यह तो बंजारों का लड़का है।” किसी को भी उस किशोर से, जो अशिक्षित बंजारों के परिवार में से था, कोई अपेक्षा नहीं थी। किन्तु रॉडनी ने उन सभी आलोचकों की कोई परवाह नहीं की। वह दृढ़ निश्चय था कि उसके जीवन के लिए परमेश्वर का कोई उद्देश्य है, इसलिए उसने अपने लिए परमेश्वर के वचन बाइबल की एक प्रति तथा अंग्रेज़ी भाषा का एक शब्दकोष मोल लिया, और अपने आप को पढ़ना तथा लिखना सिखाया। उसने एक बार कहा था, “प्रभु यीशु तक पहुँचने का मार्ग कैम्ब्रिज, हार्वर्ड, या येल (इंग्लैंड के विश्व-विख्यात विश्व-विद्यालय), या कवियों में से होकर नहीं जाता है। वह तो उस पुराने टीले, कलवरी से होकर जाता है।” अनेकों कठिनाइयों के बावजूद, रॉडनी एक ऐसा सुसमाचार प्रचारक बना जिसे परमेश्वर ने इंग्लैंड और अमेरिका में बहुत से लोगों को प्रभु यीशु मसीह के पास लाने के लिए प्रयोग किया।

          बाइबल का एक प्रमुख पात्र, प्रभु यीशु मसीह के बारह चेलों में से एक, पतरस, भी गलील में रहने वाला एक साधारण अनपढ़ मछुआरा था (प्रेरितों 4:13)। वह अपने इसी कार्य में लगा हुआ था, जब प्रभु यीशु ने उसे अपने पीछे हो लेने के लिए बुलाया (मत्ती 4:19)। वही पतरस, उसकी साधारण परवरिश और प्रभु यीशु का अनुसरण करते हुए अनेकों असफलताओं के अनुभाव करने के बावजूद, बाद में अपनी पत्री में लिखता है कि जो प्रभु यीशु मसीह के पीछे चलने की ठान लेते हैं, वे परमेश्वर के विशेष, आशीष पाए हुए, अद्भुत लोग हो जाते हैं (1 पतरस 2:9)।

          प्रभु यीशु मसीह में विश्वास लाने के द्वारा, संसार का कोई भी जन, उसकी शिक्षा, परवरिश, लिंग, जाति, स्तर आदि चाहे कुछ भी हो, वह परमेश्वर के परिवार का एक विशिष्ट सदस्य बन जाता है। फिर वह परमेश्वर के लिए उपयोगी हो जाता है, और स्वर्ग के राज्य में उसका एक विशेष स्थान हो जाता है।

          क्या आपने प्रभु यीशु पर विश्वास करने के द्वारा अपना विशेष दर्जा प्राप्त कर लिया है? – एस्तेरा पिरोसका एस्कोबार

 

प्रभु परमेश्वर अपने में मुझे विशेष बना लेने के लिए धन्यवाद।


परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। वे न तो लहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। - यूहन्ना 1:12-13

बाइबल पाठ: 1 पतरस 2:4-10

1 पतरस 2:4 उसके पास आकर, जिसे मनुष्यों ने तो निकम्मा ठहराया, परन्तु परमेश्वर के निकट चुना हुआ, और बहुमूल्य जीवता पत्थर है।

1 पतरस 2:5 तुम भी आप जीवते पत्थरों के समान आत्मिक घर बनते जाते हो, जिस से याजकों का पवित्र समाज बन कर, ऐसे आत्मिक बलिदान चढ़ाओ, जो यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर को ग्राह्य हों।

1 पतरस 2:6 इस कारण पवित्र शास्त्र में भी आया है, कि देखो, मैं सिय्योन में कोने के सिरे का चुना हुआ और बहुमूल्य पत्थर धरता हूं: और जो कोई उस पर विश्वास करेगा, वह किसी रीति से लज्जित नहीं होगा।

1 पतरस 2:7 सो तुम्हारे लिये जो विश्वास करते हो, वह तो बहुमूल्य है, पर जो विश्वास नहीं करते उन के लिये जिस पत्थर को राजमिस्त्रीयों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का सिरा हो गया।

1 पतरस 2:8 और ठेस लगने का पत्थर और ठोकर खाने की चट्टान हो गया है: क्योंकि वे तो वचन को न मान कर ठोकर खाते हैं और इसी के लिये वे ठहराए भी गए थे।

1 पतरस 2:9 पर तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो।

1 पतरस 2:10 तुम पहिले तो कुछ भी नहीं थे, पर अब परमेश्वर ही प्रजा हो: तुम पर दया नहीं हुई थी पर अब तुम पर दया हुई है।

 

एक साल में बाइबल: 

  • एज्रा 6-8
  • यूहन्ना 21


शनिवार, 12 जून 2021

पर्दा

 

          एक भयानक कार दुर्घटना ने मैरी ऍन फ्रैंको तबाह कर दिया। यद्यपि वह जीवित बच गई, किन्तु चोटों के कारण वह पूर्णतः अंधी हो गई। उसने कहा, “मैं केवल काले अन्धकार को ही देख सकती थी।” इसके इक्कीस वर्ष पश्चात, गिरने के कारण उसकी पीठ में चोट आई, जिसके लिए उसका ऑपरेशन किया गया। ऑपरेशन की बेहोशी से उठने पर उसने पाया कि आश्चर्यजनक रीति से उसकी दृष्टि वापस लौट आई है, यद्यपि ऑपरेशन का उसकी आँखों के साथ कोई संबंध नहीं था। दो दशक से भी अधिक के बाद, फ्रैंको ने पहली बार अपनी बेटी को देखा। उसके चिकित्सकों ने यही कहा कि उनके पास उसकी दृष्टि के ठीक हो जाने का कोई स्पष्टीकरण नहीं है। वह अन्धकार जो अंतिम प्रतीत होता था, उसके स्थान पर अब ज्योति और सुन्दरता आ गई थी।

          परमेश्वर का वचन बाइबल, तथा हमारे अपने अनुभव हमें बताते हैं कि सारे संसार पर पाप और अज्ञानता का पर्दा पड़ा हुआ है, जिसने सभी को परमेश्वर के प्रेम के प्रति अँधा कर दिया है (यशायाह 25:7)। हमारी सांसारिक अभिलाषाएँ – हमारा लालच और स्वार्थ, हमारी परमेश्वर की अवहेलना और अपने स्वयं पर ही भरोसा करना, हमारा सांसारिक स्तर और शक्ति में बढ़ते जाने की लालसा पाले रखना – हमारे दृष्टिकोण को धूमिल कर देते हैं, हमें उस परमेश्वर को स्पष्टता से नहीं देखने देते हैं जिसने हमें और सृष्टि को रचा है, जो हम से प्रेम करता है, और हमारी भलाई की योजनाएँ बनाता है।

          हमारे अपने प्रयास और आकांक्षाएँ हमें केवल अन्धकार, निराशा, और भ्रम में ही फंसाए रखते हैं। हम इधर-उधर टटोलते हैं, अपनी ही इच्छा और समझ के अनुसार अपने ही प्रयास करते हैं, किन्तु आगे बढ़ने का मार्ग न तो ढूँढने पाते हैं और न ही आगे बढ़ने पाते हैं। लेकिन परमेश्वर का धन्यवाद हो कि उसने अपने भविष्यद्वक्ता, यशायाह के द्वारा यह वायदा दिया है कि अन्ततः, परमेश्वर संसार के लोगों पर पड़े हुए इस अन्धकार के परदे को हटा कर नष्ट कर देगा।

          परमेश्वर हमें आशाहीन नहीं छोड़ेगा; उसका ज्योतिर्मय प्रेम उस सब को हटा देता है जो हमें अंधा करता है। प्रभु यीशु में लाया गया विश्वास हमें एक भले जीवन तथा उसके बहुतायत के अनुग्रह की आशीषों से भर देता है। - विन्न कोलियर

 

हे पिता, मुझे पाप के अन्धकार से निकाल कर प्रभु यीशु के जीवन की ज्योति में ले आ।


परन्तु यदि हमारे सुसमाचार पर परदा पड़ा है, तो यह नाश होने वालों ही के लिये पड़ा है। और उन अविश्वासियों के लिये, जिन की बुद्धि को इस संसार के ईश्वर ने अन्‍धी कर दी है, ताकि मसीह जो परमेश्वर का प्रतिरूप है, उसके तेजोमय सुसमाचार का प्रकाश उन पर न चमके। - 2 कुरिन्थियों 4:3-4

बाइबल पाठ: यशायाह 25:1-9

यशायाह 25:1 हे यहोवा, तू मेरा परमेश्वर है; मैं तुझे सराहूंगा, मैं तेरे नाम का धन्यवाद करूंगा; क्योंकि तू ने आश्चर्यकर्म किए हैं, तू ने प्राचीनकाल से पूरी सच्चाई के साथ युक्तियां की हैं।

यशायाह 25:2 तू ने नगर को ढेर बना डाला, और उस गढ़ वाले नगर को खण्डहर कर डाला है; तू ने परदेशियों की राजपुरी को ऐसा उजाड़ा कि वह नगर नहीं रहा; वह फिर कभी बसाया न जाएगा।

यशायाह 25:3 इस कारण बलवन्त राज्य के लोग तेरी महिमा करेंगे; भयंकर अन्यजातियों के नगरों में तेरा भय माना जाएगा।

यशायाह 25:4 क्योंकि तू संकट में दीनों के लिये गढ़, और जब भयानक लोगों का झोंका भीत पर बौछार के समान होता था, तब तू दरिद्रों के  लिये उनकी शरण, और तपन में छाया का स्थान हुआ।

यशायाह 25:5 जैसे निर्जल देश में बादल की छाया से तपन ठण्डी होती है वैसे ही तू परदेशियों का कोलाहल और क्रूर लोगों को जयजयकार बन्द करता है।

यशायाह 25:6 सेनाओं का यहोवा इसी पर्वत पर सब देशों के लोगों के लिये ऐसी जेवनार करेगा जिस में भांति भांति का चिकना भोजन और निथरा हुआ दाखमधु होगा; उत्तम से उत्तम चिकना भोजन और बहुत ही निथरा हुआ दाखमधु होगा।

यशायाह 25:7 और जो पर्दा सब देशों के लोगों पर पड़ा है, जो घूंघट सब अन्यजातियों पर लटका हुआ है, उसे वह इसी पर्वत पर नाश करेगा।

यशायाह 25:8 वह मृत्यु को सदा के लिये नाश करेगा, और प्रभु यहोवा सभों के मुख पर से आंसू पोंछ डालेगा, और अपनी प्रजा की नामधराई सारी पृथ्वी पर से दूर करेगा; क्योंकि यहोवा ने ऐसा कहा है।

यशायाह 25:9 और उस समय यह कहा जाएगा, देखो, हमारा परमेश्वर यही है; हम इसी की बाट जोहते आए हैं, कि वह हमारा उद्धार करे। यहोवा यही है; हम उसकी बाट जोहते आए हैं। हम उस से उद्धार पाकर मगन और आनन्दित होंगे।

 

एक साल में बाइबल: 

  • एज्रा 3-5
  • यूहन्ना 20