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Tuesday, April 30, 2013

अनुग्रह


   प्रेरित पौलुस ने रोमियों को लिखी अपनी पत्री में एक बहुत महत्वपूर्ण बात कही: "...परन्तु जहां पाप बहुत हुआ, वहां अनुग्रह उस से भी कहीं अधिक हुआ" (रोमियों 5:20)। किंतु इस बात को लेकर लोगों ने परमेश्वर के अनुग्रह की सहजता और मनुष्य की उस अनुग्रह के दुरुपयोग की प्रवृति तथा दिखावे की धार्मिकता पर बहुत विवाद भी खड़ा कर लिया है। परमेश्वर के वचन बाइबल के एक और लेखक यहूदा ने चेतावनी दी कि परमेश्वर के अनुग्रह को मनमानी और लुचपन करने की छूट के रूप में ना लिया जाए (यहूदा 4) - जब निश्चित है कि क्षमा मिल ही जाएगी, तो भले एवं धर्मी क्यों बनें? परमेश्वर के वचन में पापों के लिए पश्चाताप पर दिया गया ज़ोर एवं महत्व भी कई लगों के मनों से इस विचार को पूर्णतः हटाने नहीं पाता है।

   इसी संदर्भ में पौलुस प्रेरित ने रोमियों की पत्री में आगे लिखा, "सो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो?" (रोमियों 6:1); और फिर साथ ही बड़ी दृढ़ता से उत्तर दिया: "कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं?" (रोमियों 6:2) - इस बात को प्रभावी बनाने के लिए पौलुस ने मृत्यु और जीवन को तुलनात्मक रूप में प्रयोग किया। नए जन्म का अनुभव पाया हुआ कोई भी मसीही विश्वासी पाप की लालसाओं के साथ जीवन व्यतीत कदापि नहीं कर सकता।

   लेकिन साथ ही यह भी सच है कि पाप और दुष्टता अपने साथ सदा ही मृत्यु की दुर्गन्ध लिए हुए नहीं आतीं; अनेक बार वे बहुत ही आकर्षक और लुभावने होते हैं। इसीलिए पौलुस की सलाह है कि: "ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो। इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो" (रोमियों 6:11-12)। पाप की लालसाओं से बचे रहने का यही एकमात्र मार्ग है, अन्य सभी मार्ग कुछ समय तक कारगर लगते हैं परन्तु किसी न किसी सीमा पर आकर समाप्त हो जाते हैं और मनुष्य फिर पाप में पड़ जाता है। परन्तु जो अपने आप को पाप के लिए तो मरा हुआ परन्तु मसीह यीशु में परमेश्वर के लिए जीवित मानकर जीवन व्यतीत करता है उस पर पाप हावी नहीं हो पाता और वह पाप करने से बचा रहता है।

   परमेश्वर का यही अनुग्रह है: मसीह यीशु में मिलने वाली पापों से क्षमा और उद्धार; यह अनुग्रह क्षमा मिलने के निश्चय के आधार पर हमें पाप करते रहने की स्वतंत्रता नहीं वरन पाप के लिए मरे हुए होने और पवित्रता का जीवन जीने को उभारता है। जो इस अनुग्रह को पाप करने की स्वतंत्रता के लिए प्रयोग करते हैं, उन्होंने इस अनुग्रह को वास्तविकता में कभी जाना ही नहीं है, पापों की क्षमा और नए जीवन का अनुभव किया ही नहीं है। इसीलिए जैसे "कि कुत्ता अपनी छांट की ओर और धोई हुई सुअरनी कीचड़ में लोटने के लिये फिर चली जाती है" (2 पतरस 2:22) ऐसे ही ये लोग भी पाप में जीवन व्यतीत करने की अपनी प्रवृति की ओर बार बार लौट जाते हैं और परमेश्वर के अनुग्रह का अनुचित लाभ उठाना चाहते हैं - जो संभव नहीं है, क्योंकि ना तो परमेश्वर ठठ्ठों में उड़ाया जा सकता है और ना ही कोई उसका मूर्ख बना कर मनमानी कर सकता है या उसे अपनी स्वार्थ सिद्धी के लिए उपयोग कर सकता है। ऐसा करने के प्रयास करने वाले एक बहुत ही कड़ुवे सच का सामना करने को तैयार रहें।

   यदि किसी ने अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम की सच्चाई तथा उसके अनुग्रह की महानता को वास्तविकता से जाना है तो वह फिर उस अनुग्रह के दुरुपयोग के मार्ग ढूंढ़ने में नहीं वरन स्वतः ही उस अनुग्रह की विशालता और गहराई को समझने तथा स्वाभाविक रीति से उसे दूसरों के साथ बाँटने में अपने जीवन तथा समय को बितायगा। - फिलिप यैन्सी


परमेश्वर अपने अनुग्रह द्वारा हमें इसलिए नहीं बचाता कि हम अपने जीवन व्यर्थ और लुचपन की बातों में बिताएं। - फेबर

क्योंकि कितने ऐसे मनुष्य चुपके से हम में आ मिले हैं, जिन के इस दण्‍ड का वर्णन पुराने समय में पहिले ही से लिखा गया था: ये भक्तिहीन हैं, और हमारे परमेश्वर के अनुग्रह को लुचपन में बदल डालते हैं, और हमारे अद्वैत स्‍वामी और प्रभु यीशु मसीह का इन्कार करते हैं। - यहूदा 1:4 

बाइबल पाठ: रोमियो 6:1-14
Romans 6:1 सो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो?
Romans 6:2 कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं?
Romans 6:3 क्या तुम नहीं जानते, कि हम जितनों ने मसीह यीशु का बपतिस्मा लिया तो उस की मृत्यु का बपतिस्मा लिया
Romans 6:4 सो उस मृत्यु का बपतिस्मा पाने से हम उसके साथ गाड़े गए, ताकि जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मरे हुओं में से जिलाया गया, वैसे ही हम भी नए जीवन की सी चाल चलें।
Romans 6:5 क्योंकि यदि हम उस की मृत्यु की समानता में उसके साथ जुट गए हैं, तो निश्चय उसके जी उठने की समानता में भी जुट जाएंगे।
Romans 6:6 क्योंकि हम जानते हैं कि हमारा पुराना मनुष्यत्व उसके साथ क्रूस पर चढ़ाया गया, ताकि पाप का शरीर व्यर्थ हो जाए, ताकि हम आगे को पाप के दासत्व में न रहें।
Romans 6:7 क्योंकि जो मर गया, वह पाप से छूटकर धर्मी ठहरा।
Romans 6:8 सो यदि हम मसीह के साथ मर गए, तो हमारा विश्वास यह है, कि उसके साथ जीएंगे भी।
Romans 6:9 क्योंकि यह जानते हैं, कि मसीह मरे हुओं में से जी उठ कर फिर मरने का नहीं, उस पर फिर मृत्यु की प्रभुता नहीं होने की।
Romans 6:10 क्योंकि वह जो मर गया तो पाप के लिये एक ही बार मर गया; परन्तु जो जीवित है, तो परमेश्वर के लिये जीवित है।
Romans 6:11 ऐसे ही तुम भी अपने आप को पाप के लिये तो मरा, परन्तु परमेश्वर के लिये मसीह यीशु में जीवित समझो।
Romans 6:12 इसलिये पाप तुम्हारे मरनहार शरीर में राज्य न करे, कि तुम उस की लालसाओं के आधीन रहो।
Romans 6:13 और न अपने अंगो को अधर्म के हथियार होने के लिये पाप को सौंपो, पर अपने आप को मरे हुओं में से जी उठा हुआ जानकर परमेश्वर को सौंपो, और अपने अंगो को धर्म के हथियार होने के लिये परमेश्वर को सौंपो।
Romans 6:14 और तुम पर पाप की प्रभुता न होगी, क्योंकि तुम व्यवस्था के आधीन नहीं वरन अनुग्रह के आधीन हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 8-9 
  • लूका 21:1-19


Monday, April 29, 2013

सर्वसामर्थी


   हम में से जितने किसी त्रासदी से होकर निकले हैं और फिर इसके बारे में परमेश्वर से प्रश्न पूछने का साहस किया है, उन सब के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में अय्यूब की पुस्तक के 38वें अध्याय में विचार करने के लिए बहुत कुछ है। ज़रा कल्पना कीजिए कि अपने इलाके की जानी-मानी हस्ती अय्यूब को कैसा अनुभव हुआ होगा जब एक आंधी में से उसे परमेश्वर कि वाणी सुनाई दी और "तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया, यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है? पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे" (अय्यूब 38:1-3) - उसका तो गला सूख गया होगा; अय्यूब ने अपने को चींटी के समान छोटा सा अनुभव किया होगा।

   इसके आगे के पदों में अय्यूब से किए गए परमेश्वर के प्रश्न ना केवल अनपेक्षित थे वरन हिला देने वाली सामर्थ भी रखते थे। परमेश्वर ने अय्यूब के अपनी त्रासदी से संबंधित उसके द्वारा उठाए "ऐसा क्यों?" वाले किसी भी प्रश्न का उत्तर नहीं दिया; वरन परमेश्वर ने अय्यूब का ध्यान अपनी सृजने की शक्ति जिससे उसने इस सृष्टि की रचना करी तथा सृष्टि को संभालने की अपनी सामर्थ की ओर खींचा और उसे जताया कि वही है जो इस संपूर्ण सृष्टि की हर बात को नियंत्रित एवं संचालित करता है। तात्पर्य था कि अय्यूब समझ सके कि यह सब स्पष्ट प्रमाण है कि उसे अपनी परिस्थितियों और जीवन के लिए परमेश्वर पर पूरा पूरा भरोसा रखना चाहिए।

   परमेश्वर ने ना केवल इस पृथ्वी की रचना और संचालन और इस पर विद्यमान एवं कार्यकारी विभिन्न प्राकृतिक शक्तियों की ओर अय्यूब का ध्यान खींचा, वरन आकाश के तारागण और विभिन्न नक्षत्र समूहों की ओर भी उसे देखने को कहा और पूछा कि क्या वह समझता है कि कैसे ये सब आपस में तालमेल के साथ बने रहते हैं तथा अपने अपने उद्देश्य पूरे करते रहते हैं? अद्भुत सृष्टि और विशाल आकाश के भव्य तारागण के सामने मनुष्य कितना गौण है!

   किंतु जो परमेश्वर उन तारगणों को अपने हाथों में रख कर नियंत्रित एवं संचालित करता है, वह मनुष्य की गति को भी उतनी ही कुशलता और बारीकी से नियंत्रित तथा संचालित करता है। उसकी दृष्टि से एक भी चीज़ पल भर के लिए भी ओझल नहीं होती; वह वास्तव में सर्वसामर्थी है। इसीलिए जो जीवन उसके हाथों में समर्पित कर दिया गया है, वही सबसे सुरक्षित है और उस जीवन के लिए अन्ततः हर बात के द्वारा परमेश्वर भलाई ही उत्पन्न करेगा। - डेव ब्रैनन


वह जो अंतरिक्ष में नक्षत्रों को थामे रहता है, पृथ्वी पर अपने लोगों को भी वैसे ही थामे रहता है।

इस कारण मैं इन दुखों को भी उठाता हूं, पर लजाता नहीं, क्योंकि मैं उसे जिस की मैं ने प्रतीति की है, जानता हूं; और मुझे निश्‍चय है, कि वह मेरी थाती की उस दिन तक रखवाली कर सकता है। - 2 तिमुथियुस 1:12 

बाइबल पाठ: अय्यूब 38:1-11;31-33
Job 38:1 तब यहोवा ने अय्यूब को आँधी में से यूं उत्तर दिया,
Job 38:2 यह कौन है जो अज्ञानता की बातें कहकर युक्ति को बिगाड़ना चाहता है?
Job 38:3 पुरुष की नाईं अपनी कमर बान्ध ले, क्योंकि मैं तुझ से प्रश्न करता हूँ, और तू मुझे उत्तर दे।
Job 38:4 जब मैं ने पृथ्वी की नेव डाली, तब तू कहां था? यदि तू समझदार हो तो उत्तर दे।
Job 38:5 उसकी नाप किस ने ठहराई, क्या तू जानता है उस पर किस ने सूत खींचा?
Job 38:6 उसकी नेव कौन सी वस्तु पर रखी गई, वा किस ने उसके कोने का पत्थर बिठाया,
Job 38:7 जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे?
Job 38:8 फिर जब समुद्र ऐसा फूट निकला मानो वह गर्भ से फूट निकला, तब किस ने द्वार मूंदकर उसको रोक दिया;
Job 38:9 जब कि मैं ने उसको बादल पहिनाया और घोर अन्धकार में लपेट दिया,
Job 38:10 और उसके लिये सिवाना बान्धा और यह कहकर बेंड़े और किवाड़ें लगा दिए, कि
Job 38:11 यहीं तक आ, और आगे न बढ़, और तेरी उमंडने वाली लहरें यहीं थम जाएं?
Job 38:31 क्या तू कचपचिया का गुच्छा गूंथ सकता वा मृगशिरा के बन्धन खोल सकता है?
Job 38:32 क्या तू राशियों को ठीक ठीक समय पर उदय कर सकता, वा सप्तर्षि को साथियों समेत लिये चल सकता है?
Job 38:33 क्या तू आकाशमण्डल की विधियां जानता और पृथ्वी पर उनका अधिकार ठहरा सकता है?

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 6-7 
  • लूका 20:27-47


Sunday, April 28, 2013

ईश-विरोधी


   हाल ही में मैंने एक पुस्तक सुनी - उस पुस्तक के लेखक ने स्वयं ही उसे पढ़कर रिकॉर्ड किया था। वह लेखक नास्तिकता का घोर समर्थक था और बड़े रोष, व्यंग्य और कटुता के साथ अपनी रचना को पढ़ रहा था और मैं सोच रहा था कि ऐसा क्यों है कि यह व्यक्ति इतनी कड़ुवाहट से भरा है? वह अपनी बात और अपने विचार सामन्य ढंग से और साधारण भाषा में भी तो व्यक्त कर सकता है!

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो परमेश्वर का इन्कार करते रहते हैं और उसकी चेतावनियों को नहीं मानते वे वास्तव में उसके प्रति और कटुता एवं घृणा रखने लग जाते हैं, क्योंकि फिर परमेश्वर भी उन्हें उनके मन की करने को स्वतंत्र छोड़ देता है और वे बद से बदतर होते जाते हैं: "और जब उन्होंने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा, इसलिये परमेश्वर ने भी उन्हें उन के निकम्मे मन पर छोड़ दिया; कि वे अनुचित काम करें। सो वे सब प्रकार के अधर्म, और दुष्टता, और लोभ, और बैरभाव, से भर गए; और डाह, और हत्या, और झगड़े, और छल, और ईर्ष्या से भरपूर हो गए, और चुगलखोर, बदनाम करने वाले, परमेश्वर के देखने में घृणित, औरों का अनादर करने वाले, अभिमानी, डींगमार, बुरी बुरी बातों के बनाने वाले, माता पिता की आज्ञा न मानने वाले। निर्बुद्धि, विश्वासघाती, मायारिहत और निर्दयी हो गए" (रोमियों 1:28-31)। परमेश्वर से मुँह मोड़ लेने से कोई मनुष्य धर्मनिरपेक्ष तटस्थता की ओर नहीं जाता, वरन धर्म तथा सदाचार से भी विमुख हो जाता है।

   संसार का इतिहास गवाह है कि जैसे जैसे समाज से परमेश्वर के नाम और नियमों को हटाने के प्रयास बढ़े हैं, समाज में अराजकता, आपसी कलह, दुराचार आदि भी बढ़ा है। ना मनुष्यों के ज्ञान ने और ना ही उनकी संपन्नता ने उन्हें सदाचार की ओर मोड़ा है; सबसे धनी और सबसे अधिक शिक्षित देशों में भी जहाँ जहाँ लोग परमेश्वर के विमुख हुए तो उनके समाज अशान्ति, तथा सामाजिक एवं नैतिक पतन की ओर ही गए हैं। जहाँ परमेश्वर का नाम और नियम आदर पाते हैं उन परिवारों और समाजों में शांति और सदाचारिता अन्य सभी से अधिक देखने को मिलती है।

   जब हम नास्तिक और अन्य मसीह विरोधी लोगों द्वारा परमेश्वर के विरुद्ध कार्य और प्रचार होते देखते-सुनते हैं तो हम मसीही विश्वासियों का क्या रवैया होना चाहिए? घृणा और बैर के प्रत्युत्तर में घृणा और बैर देना तो बहुत सरल है, परन्तु परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि हम सत्य का बचाव विरोध से नहीं वरन प्रेम से करें: "और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें" (2 तिमुथियुस 2:25)। जब लोगों ने परमेश्वर की ओर से अपना मुँह फेरा और उसके विरोध में बातें करीं और कहीं, तो परमेश्वर ने तुरंत ही उनसे कोई बदला नहीं लिया। चाहे परमेश्वर ने उनके चुनाव के अनुसार उन्हें छोड़ दिया हो और उनसे सीधे-सीधे संपर्क ना रखा हो, परन्तु उसने उन्हें तजा कदापि नहीं; वरन हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दे दी कि हम अपने जीवन, प्रेम और उदाहरण से उन्हें उनकी गलती का एहसास कराएं और सच्चाई का नमूना उनके सामने रखें जिससे वे मन फिराव की ओर आ सकें।

   अगली बार जब आपका सामना किसी नास्तिक या ईश-विरोधी से हो, और चाहे आप उसकी कटुता से आहत भी हों, तो भी अपने रवैये का आंकलन अवश्य कर लें; और फिर परमेश्वर से मांगें कि वह आपको धैर्य और संयम का आत्मा दे जिससे आप नम्रता और प्रेम पूर्वक उसके सामने सत्य को जानने और अनुसरण करने का सजीव उदाहरण प्रस्तुत कर सकें। क्या जाने आपका उदाहरण और आपके जीवन की गवाही उसके जीवन में क्या परिवर्तन ले आए। - डेनिस फिशर


सत्य का बचाव प्रेम से ही संभव है।

और जब उन्होंने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा, इसलिये परमेश्वर ने भी उन्हें उन के निकम्मे मन पर छोड़ दिया; - रोमियों 1:28

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:22-26
2 Timothy 2:22 जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
2 Timothy 2:23 पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं।
2 Timothy 2:24 और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
2 Timothy 2:25 और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।
2 Timothy 2:26 और इस के द्वारा उस की इच्छा पूरी करने के लिये सचेत हो कर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 3-5 
  • लूका 20:1-26


Saturday, April 27, 2013

कानाफूसी के शब्द


   लंडन शहर का सैलानियों के लिए एक प्रमुख स्थान है वहाँ का विशाल और भव्य ’सेंट पॉल्स कैथेड्रल’। सर क्रिस्टोफर वैरन द्वारा योजनबद्ध रीति से बनवाया गया यह प्राचीन गिरजाघर सबसे अधिक अपने विशाल गुम्बद के लिए जाना जाता है। इस गुम्बद में वास्तुशिल्प का एक अनोखा नमूना है - ’व्हिस्परिंग गैलरी’; यह एक ऐसा गलियारा है जहां दीवार की ओर मुँह करके कही गई हल्की सी फुसफुसाहट भी दूसरे छोर पर स्पष्ट सुनाई देती है क्योंकि उस गुम्बद की गोलाकार रचना आवाज़ को पूर्ण रीति से एक से दूसरे स्थान पहुँचा देती है। इस कारण दो जन एक दुसरे की ओर पीठ करके, विपरीत छोरों पर बैठकर केवल फुसफुसाते हुए एक दूसरे से बात कर सकते हैं।

   सेंट पॉल कैथेड्रल की यह रोचक विशेषता हमें एक अन्य तथ्य के लिए सचेत भी करती है - दूसरों के लिए फुसफुसा कर कही गई हमारी बातें भी अन्य लोगों तक पहुँच सकती हैं। हमारी कानाफूसी और इधर-उधर की बातें ना केवल यहाँ-वहाँ पहुंच सकती हैं, वरन वे बहुत हानि भी पहुंचा सकती हैं। इसीलिए परमेश्वर का वचन बाइबल अनेक बार पाठकों को अपने शब्दों के सही उपयोग के लिए चिताती है। बुद्धिमान राजा सुलेमान ने लिखा: "जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है" (नीतिवचन 10:19)।

   बजाए इसके कि हम दूसरों को चोट पहुँचाने वाली अथवा औरों का नुकसान करने वाली बातें कानाफूसी में भी कहें, भला होगा कि यदि हम मुँह खोलें तो दूसरों की भलाई के लिए, उन्हें आशीष देने के लिए या फिर परमेश्वर की स्तुति और आराधना के लिए; क्योंकि यह ना केवल औरों का भला करेगा, वरन स्वयं हमारी भलाई और आशीष का भी कारण बनेगा। - बिल क्राउडर


व्यर्थ कानाफूसी का अन्त बुद्धिमान के कान तक पहुँचने पर हो जाता है।

जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है। - नीतिवचन 10:19

बाइबल पाठ: नीतिवचन 10:11-23
Proverbs 10:11 धर्मी का मुंह तो जीवन का सोता है, परन्तु उपद्रव दुष्टों का मुंह छा लेता है।
Proverbs 10:12 बैर से तो झगड़े उत्पन्न होते हैं, परन्तु प्रेम से सब अपराध ढंप जाते हैं।
Proverbs 10:13 समझ वालों के वचनों में बुद्धि पाई जाती है, परन्तु निर्बुद्धि की पीठ के लिये कोड़ा है।
Proverbs 10:14 बुद्धिमान लोग ज्ञान को रख छोड़ते हैं, परन्तु मूढ़ के बोलने से विनाश निकट आता है।
Proverbs 10:15 धनी का धन उसका दृढ़ नगर है, परन्तु कंगाल लोग निर्धन होने के कारण विनाश होते हैं।
Proverbs 10:16 धर्मी का परिश्रम जीवन के लिये होता है, परन्तु दुष्ट के लाभ से पाप होता है।
Proverbs 10:17 जो शिक्षा पर चलता वह जीवन के मार्ग पर है, परन्तु जो डांट से मुंह मोड़ता, वह भटकता है।
Proverbs 10:18 जो बैर को छिपा रखता है, वह झूठ बोलता है, और जो अपवाद फैलाता है, वह मूर्ख है।
Proverbs 10:19 जहां बहुत बातें होती हैं, वहां अपराध भी होता है, परन्तु जो अपने मुंह को बन्द रखता है वह बुद्धि से काम करता है।
Proverbs 10:20 धर्मी के वचन तो उत्तम चान्दी हैं; परन्तु दुष्टों का मन बहुत हलका होता है।
Proverbs 10:21 धर्मी के वचनों से बहुतों का पालन पोषण होता है, परन्तु मूढ़ लोग निर्बुद्धि होने के कारण मर जाते हैं।
Proverbs 10:22 धन यहोवा की आशीष ही से मिलता है, और वह उसके साथ दु:ख नहीं मिलाता।
Proverbs 10:23 मूर्ख को तो महापाप करना हंसी की बात जान पड़ती है, परन्तु समझ वाले पुरूष में बुद्धि रहती है।

एक साल में बाइबल: 1 राजा 1-2 लूका 19:28-48

Friday, April 26, 2013

कल्पना से बाहर


   जब कभी मैं और मेरी पत्नि कहीं छुट्टियाँ बिताने जाने की योजना बनाते हैं तो हम उस स्थान के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्रित करते हैं, वहाँ से संबंधित नक्शों और चित्रों का अध्ययन करते हैं और फिर उन बातों को प्रत्यक्ष देखने के रोमांच से भरे वहाँ पहुँचने की प्रतीक्षा में रहते हैं। जो लोग मसीही विश्वासी हैं, उनका भी एक गन्तव्य स्थान है - स्वर्ग, जहाँ वे अनन्त काल तक अपने प्रभु और उद्धारकर्ता मसीह यीशु के साथ रहेंगे।

   लेकिन मुझे यह कुछ विचित्र सा लगता है कि बहुतेरे मसीही विश्वासी स्वर्ग पहुँचने और वहाँ के बारे में जानने में अधिक रुचि नहीं लेते। ऐसा क्यों? संभवतः इसलिए क्योंकि हम स्वर्ग को अधिक समझ नहीं पाते। हम वहाँ चोखे सोने से बनी सड़कों और मोतियों से बने द्वारों की बात तो करते हैं, किन्तु वास्तव में वह कैसा स्थान है और वहाँ हम क्या कुछ देखने पाएंगे, किन किन से मिलने पाएंगे, क्या कुछ करेंगे आदि बातें स्वर्ग के बारे में हमारी उत्सुकता को जगाने नहीं पातीं।

   मेरे विचार से स्वर्ग के बारे में कही गई बातों में से सबसे गहन प्रेरित पौलुस द्वारा फिलिप्पियों की मण्डली को लिखी पत्री के एक पद में मिलती है; पौलुस ने कहा: "... जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है" (फिलिप्पियों 1:23)। जब मेरे 8 वर्षीय पोते ने स्वर्ग के बारे में मुझ से पूछा तो मैंने उसे यही उत्तर दिया। अपने उत्तर को देने से पहले मैंने उससे पूछा, "तुम्हारे जीवन में सबसे रोमांचक बात कौन सी है?" उसने अपने कंप्यूटर पर खेले जाने वाले खेलों के बारे में बताना आरंभ किया और कंप्यूटर पर वह क्या कुछ कर लेता है। तब मैंने उससे कहा, स्वर्ग इन सबसे भी कहीं अधिक अच्छा और रोमांचकारी है। उसने थोड़ा सा सोच कर उत्तर दिया, "दादा, इस की तो कल्पना भी करना कठिन है।"

   आप अपने जीवन में किस बात की आशा रखते हैं? क्या है जो आपको उत्तेजित करता है? क्या है जिसकी कल्पना मात्र भी आपको रोमांचित कर देती है? वह जो कुछ भी हो, स्वर्ग उससे भी कहीं बढकर है - चाहे यह बात कल्पना से बाहर ही क्यों ना हो! - जो स्टोवैल


आप जितना स्वर्ग की प्रतीक्षा में रहेंगे, पृथ्वी की इच्छाएं उतनी ही कम होती जाएंगी।

क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है। - फिलिप्पियों 1:23

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 1:19-26
Philippians 1:19 क्योंकि मैं जानता हूं, कि तुम्हारी बिनती के द्वारा, और यीशु मसीह की आत्मा के दान के द्वारा इस का प्रतिफल मेरा उद्धार होगा।
Philippians 1:20 मैं तो यही हार्दिक लालसा और आशा रखता हूं, कि मैं किसी बात में लज्ज़ित न होऊं, पर जैसे मेरे प्रबल साहस के कारण मसीह की बड़ाई मेरी देह के द्वारा सदा होती रही है, वैसा ही अब भी हो चाहे मैं जीवित रहूं या मर जाऊं।
Philippians 1:21 क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है।
Philippians 1:22 पर यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिये लाभदायक है तो मैं नहीं जानता, कि किस को चुनूं।
Philippians 1:23 क्योंकि मैं दोनों के बीच अधर में लटका हूं; जी तो चाहता है कि कूच कर के मसीह के पास जा रहूं, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है।
Philippians 1:24 परन्तु शरीर में रहना तुम्हारे कारण और भी आवश्यक है।
Philippians 1:25 और इसलिये कि मुझे इस का भरोसा है सो मैं जानता हूं कि मैं जीवित रहूंगा, वरन तुम सब के साथ रहूंगा जिस से तुम विश्वास में दृढ़ होते जाओ और उस में आनन्‍दित रहो।
Philippians 1:26 और जो घमण्‍ड तुम मेरे विषय में करते हो, वह मेरे फिर तुम्हारे पास आने से मसीह यीशु में अधिक बढ़ जाए।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 23-24 
  • लूका 19:1-27


Thursday, April 25, 2013

अपना भोजन


   नॉर्फोक वन्स्पति उद्यान में लगे एक कैमरे से बड़ा रोचक घटनाक्रम दिखाया जा रहा था - उस उद्यान में चील के एक घोंसले में चील के तीन चूज़े भूखे थे और ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उनके माता-पिता इस बात कि अन्देखी कर रहे हैं। उन चूज़ों में से एक ने स्वयं ही अपनी भूख की समस्या का समाधान निकालने का प्रयास किया - वह अपने पास की घोंसले की लकड़ी को चबाने का प्रयास करने लगा। किंतु शीघ्र ही उसने यह करना छोड़ दिया - संभवतः उसे वह स्वादिष्ट नहीं लगी, या वह उसे चबा नहीं पाया।

   लेकिन जिस बात ने मुझे विस्मित किया वह चूज़े का लकड़ी चबाने का प्रयास नहीं था, वरन यह कि उन चूज़ों के पीछे ही एक बड़ी मछली घोंसले में पड़ी हुई थी, लेकिन वे उसे अपना पेट भरने के लिए उपयोग नहीं कर रहे थे। उन चूज़ों ने अब तक अपना भोजन आप लेना नहीं सीखा था; वे अभी भी अपने माता-पिता द्वारा भोजन छोटे छोटे टुकड़ों में बना कर उनके मुँह में डाले जाने के आदी थे। संभवतः चूज़ों के माता-पिता उन चूज़ों को अपनी निगरानी में भूखा रख कर प्रयास कर रहे थे कि चूज़े भोजन को पहचानें और अपना भोजन आप ही खाना सीखें - क्योंकि यदि वे अपना भोजन आप जुटाना और खाना नहीं सीखेंगे तो फिर उनका जीवित बने रहना खतरे में पड़ जाएगा।

   आत्मिक जीवन में भी यह बात इतनी ही महत्वपूर्ण है। बहुत से लोग आत्मिक संगति तो करते हैं परन्तु सदा ही आत्मिक शिक्षाओं और उससे होने वाली आत्मिक बढ़ोतरी के लिए दूसरों पर ही निर्भर रहते हैं। परमेश्वर अपने प्रत्येक सन्तान को व्यक्तिगत रीति से सिखाना चाहता है, उनसे संपर्क रखना चाहता है, किंतु लोग इस बात को अन्देखा कर, परमेश्वर की बजाए अन्य मनुष्यों पर ही निर्भर रहते हैं। यह समस्या आज की नहीं है, यही प्रवृति पुराने नियम में इस्त्राएली समाज में और फिर नए नियम में प्राथमिक मसीही विश्वासी मण्डली में भी देखी जाती थी तथा आज भी मसीही विश्वासी मण्डलियों में विद्यमान है। बजाए परमेश्वर की उपस्थिति में परमेश्वर के वचन बाइबल के साथ बैठ कर उस पर स्वयं मनन करने के, वे सदा दूसरों के मनन और प्रवचन से सीखने की प्रवृति रखते हैं। आत्मिक भोजन उनके पास है, परन्तु उसे ग्रहण करना वे नहीं जानते, और इस कारण आत्मिक रीति से कमज़ोर रहते हैं। इब्रानियों की मण्डली को लिखी अपनी पत्री में लेखक के द्वारा परमेश्वर का आत्मा कहता है: "समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए और ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए" (इब्रानियों 5:12)।

   प्रचारकों और वचन के शिक्षकों से परमेश्वर के वचन को सीखना अच्छा है और कई बातों में लाभप्रद भी है, किंतु यह कभी स्वयं परमेश्वर के वचन पर मनन के द्वारा परमेश्वर से सीखने का स्थान नहीं ले सकता। आत्मिक सामर्थ और बढ़ोतरी के लिए अपना आत्मिक भोजन आप जुटाना भी आवश्यक है। - जूली ऐकरमैन लिंक


आत्मिक बढ़ोतरी परमेश्वर के वचन के ठोस भोजन से ही संभव है।

समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए और ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए। - इब्रानियों 5:12

बाइबल पाठ: इब्रानियों 5:12-6:2
Hebrews 5:12 समय के विचार से तो तुम्हें गुरू हो जाना चाहिए था, तौभी क्या यह आवश्यक है, कि कोई तुम्हें परमेश्वर के वचनों की आदि शिक्षा फिर से सिखाए और ऐसे हो गए हो, कि तुम्हें अन्न के बदले अब तक दूध ही चाहिए।
Hebrews 5:13 क्योंकि दूध पीने वाले बच्‍चे को तो धर्म के वचन की पहिचान नहीं होती, क्योंकि वह बालक है।
Hebrews 5:14 पर अन्न सयानों के लिये है, जिन के ज्ञानेन्‍द्रिय अभ्यास करते करते, भले बुरे में भेद करने के लिये पक्के हो गए हैं।
Hebrews 6:1 इसलिये आओ मसीह की शिक्षा की आरम्भ की बातों को छोड़ कर, हम सिद्धता की ओर आगे बढ़ते जाएं, और मरे हुए कामों से मन फिराने, और परमेश्वर पर विश्वास करने।
Hebrews 6:2 और बपतिस्मों और हाथ रखने, और मरे हुओं के जी उठने, और अन्‍तिम न्याय की शिक्षारूपी नेव, फिर से न डालें।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 21-22 
  • लूका 18:24-43


Wednesday, April 24, 2013

वैध प्रवेश


   मैं अपनी पत्नि के साथ अमेरिका से बाहर के एक देश में शिक्षण कार्य के लिए निकला। जिस देश में हमें जाना था जब हम वहाँ पहुँचे तो हमारे वीसा (प्रवेश आज्ञा पत्र) में कुछ गड़बड़ के कारण हमें प्रवेश करने से रोक दिया गया। हम इस विश्वास में थे कि हमें बिलकुल सही वीसा मिले हैं, परन्तु जब उस देश में प्रवेश करने के लिए उन्हें जांचा गया तो उनमें त्रुटियाँ पाई गईं। कई लोगों, सरकारी और गैर-सरकारी ने, हमारे प्रवेश कर पाने के लिए बहुत प्रयास किए, हमारे भले उद्देश्य और अच्छे चरित्र की दुहाई दी, किंतु कुछ भी नहीं हो सका और हमें अमेरिका जाने वाले अगले ही वायु यान में बैठा कर वापस भेज दिया गया। किसी की ओर से कोई भी प्रयास इस तथ्य को बदल नहीं सका कि हमारे प्रवेश पत्र वैध नहीं थे और हमें उन अवैध प्रवेश पत्रों के आधार पर प्रवेश कदापि नहीं मिल सकता था। हमारे चरित्र, हमारे उद्देश्य, हमारे कार्य, हमारे लिए करी गई सिफारिशें आदि कुछ भी काम नहीं आए और हमें लौटना ही पड़ा। केवल एक ही उपाय था, एक नए कार्यक्रम के अन्तर्गत और वैध तथा सही प्रवेश पत्र लेकर हम पुनः वहाँ आएं।

   वीसा संबंधित यह अनुभव अति असुविधाजनक तो था, लेकिन इससे मेरा ध्यान एक और प्रकार के अवैध प्रवेशों के प्रयासों की ओर गया, जिनमें संसार का प्रायः अधिकांश लोग लिप्त रहते आए हैं और लिप्त हैं। मेरा तात्पर्य स्वर्ग में परमेश्वर के पास प्रवेश से है। अन्तिम क्षण पर जब फिर कभी कुछ नहीं हो सकता, स्वर्ग के द्वार से लौटना एक ऐसा दर्दनाक और भयावह अनुभव है जिसकी कल्पना भी हम मनुष्यों की बुद्धि से परे है और उस परदेश की सीमा से हमारे लौटने की असुविधा तो उसके सामने कुछ भी नहीं है। संसार के लोग इस बात को भूल जाते हैं या अन्देखा करते हैं कि स्वर्ग परमेश्वर का निवास स्थान है, कोई छुट्टी बिताने या सैलानियों के समान कुछ समय के लिए घूमने जाने का स्थान नहीं है जहां आप अपनी इच्छा, अपनी योजनाओं और अपनी सुविधानुसार पहुंच जाएं। परमेश्वर के निवास स्थान में जो प्रवेश पाएगा वह परमेश्वर की अनुमति से और परमेश्वर द्वारा निर्धारित शर्तों के आधार पर ही यह करने पाएगा; ना कि अपनी इच्छा, अपनी योजनाओं या अपनी किन्ही योग्यताओं के आधार पर।

   ऐसे असंख्य लोग हैं जो अपने धर्म-कर्म और भलाई के जीवन को इस प्रवेश के लिए वैध समझते हैं, किंतु परमेश्वर का वचन सभी मनुष्यों के लिए कहता है "जैसा लिखा है, कि कोई धर्मी नहीं, एक भी नहीं। कोई समझदार नहीं, कोई परमेश्वर का खोजने वाला नहीं। इसलिये कि सब ने पाप किया है और परमेश्वर की महिमा से रहित हैं" (रोमियों 3:10, 11, 23)। बहुतेरे अपने अच्छे चरित्र और समाज में अच्छे नाम को प्रवेश के लिए वैध समझते हैं, किंतु परमेश्वर का वचन कहता है "हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं, और हमारे धर्म के काम सब के सब मैले चिथड़ों के समान हैं। हम सब के सब पत्ते की नाईं मुर्झा जाते हैं, और हमारे अधर्म के कामों ने हमें वायु की नाईं उड़ा दिया है" (यशायाह 64:6)। कितने ही अपने पूर्वजों के नाम और अपनी उच्च वंशावली को अपने लिए स्वर्ग में प्रवेश का वैध आधार मानते हैं, लेकिन परमेश्वर का वचन सिखाता है कि "क्योंकि तुम जानते हो, कि तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बाप दादों से चला आता है उस से तुम्हारा छुटकारा चान्दी सोने अर्थात नाशमान वस्‍तुओं के द्वारा नहीं हुआ" (1 पतरस 1:18 )। परमेश्वर की चेतावनी सब के  लिए है: "हे भाइयों, मैं यह कहता हूं कि मांस और लोहू परमेश्वर के राज्य के अधिकारी नहीं हो सकते, और न विनाशी अविनाशी का अधिकारी हो सकता है" (1 कुरिन्थियों 15:50); "यीशु ने उसको उत्तर दिया; कि मैं तुझ से सच सच कहता हूं, यदि कोई नये सिरे से न जन्मे तो परमेश्वर का राज्य देख नहीं सकता। क्योंकि जो शरीर से जन्मा है, वह शरीर है; और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है" (यूहन्ना 3:3, 6)।

   परमेशवर के निवास स्थान अर्थात परमेश्वर के पास प्रवेश का केवल एक ही वैध प्रवेश मार्ग है: "यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता" (यूहन्ना 14:6)। केवल प्रभु यीशु ही है जिसने समस्त मानव जाति के पापों लिए अपने प्राणों के बलिदान और फिर मृत्कों में से पुनरुत्थान के द्वारा परमेश्वर के पास प्रवेश का मार्ग संभव किया है और केवल वह ही परमेश्वर की उपस्थिति में आने के लिए हमें उस पर लाए गए विश्वास और उससे प्राप्त होने वाली पापों की क्षमा द्वारा वैध प्रवेश प्रदान कर सकता है।

   क्या आपने प्रभु यीशु पर विश्वास किया है, उससे पापों की क्षमा मांगी है? समय कब पूरा हो जाए और अन्तिम यात्रा कब करनी पड़ जाए, कोई नहीं जानता। अब और अभी ही स्वर्ग में अपने प्रवेश की वैधता को सुनिश्चित कर लीजिए। - बिल क्राउडर


केवल प्रभु यीशु के माध्यम से ही हम प्रमेश्वर पिता के समक्ष प्रवेश पा सकते हैं।

यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता। - यूहन्ना 14:6

बाइबल पाठ: यूहन्ना 14:1-10
John 14:1 तुम्हारा मन व्याकुल न हो, तुम परमेश्वर पर विश्वास रखते हो मुझ पर भी विश्वास रखो।
John 14:2 मेरे पिता के घर में बहुत से रहने के स्थान हैं, यदि न होते, तो मैं तुम से कह देता क्योंकि मैं तुम्हारे लिये जगह तैयार करने जाता हूं।
John 14:3 और यदि मैं जा कर तुम्हारे लिये जगह तैयार करूं, तो फिर आकर तुम्हें अपने यहां ले जाऊंगा, कि जहां मैं रहूं वहां तुम भी रहो।
John 14:4 और जहां मैं जाता हूं तुम वहां का मार्ग जानते हो।
John 14:5 थोमा ने उस से कहा, हे प्रभु, हम नहीं जानते कि तू कहां जाता है तो मार्ग कैसे जानें?
John 14:6 यीशु ने उस से कहा, मार्ग और सच्चाई और जीवन मैं ही हूं; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुंच सकता।
John 14:7 यदि तुम ने मुझे जाना होता, तो मेरे पिता को भी जानते, और अब उसे जानते हो, और उसे देखा भी है।
John 14:8 फिलेप्पुस ने उस से कहा, हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे: यही हमारे लिये बहुत है।
John 14:9 यीशु ने उस से कहा; हे फिलेप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूं, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है: तू क्यों कहता है कि पिता को हमें दिखा।
John 14:10 क्या तू प्रतीति नहीं करता, कि मैं पिता में हूं, और पिता मुझ में हैं? ये बातें जो मैं तुम से कहता हूं, अपनी ओर से नहीं कहता, परन्तु पिता मुझ में रहकर अपने काम करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 19-20 
  • लूका 18:1-23

Tuesday, April 23, 2013

सहायता


   अमेरिका के बहुत से वन प्राणी संख्या में घटते जा रहे हैं और उनकी प्रजातियाँ लुप्त होने के कगार पर पहुँच रही हैं। इस स्थिति का एक प्रमुख कारण शिकारीयों की बन्दूकें नहीं वरन सड़कों पर भारी यातायात और रिहायशी इलाकों की बढ़ती हुई सीमाएं हैं जो उनके विचरण और रहने के क्षेत्रों पर कब्ज़ा जमाते जा रहे हैं और उन वन प्राणियों को विस्थापित कर रहे हैं। मुझे इन वन प्राणियों की दयनीय स्थिति का सजीव उदाहरण तब देखने को मिला जब मैं एक बार गाड़ी चलाते हुए जा रहा था कि अचानक एक मादा हिरन बड़ी तेज़ी से मेरी गाड़ी के आगे से होकर भागी, फिर सड़क की दूसरी ओर पहुँच कर रुक गई और पलट कर देखने लगी। मैंने भी उसी ओर देखा जिधर उसकी नज़रें लगी थीं और पाया कि उसके दो नन्हे शावक बड़ी बेबसी से सड़क के पार खड़ी अपनी माँ की ओर देख रहे थे, लेकिन सड़क पर चल रही गाड़ियों के कारण पार नहीं हो पा रहे थे। कुछ देर तक ऐसे ही बेबस खड़े रहने के बाद वे दोनो बच्चे वापस जंगल की ओर मुड़ गए; शायद एक परिवार सदा के लिए एक दुसरे से बिछड़ गया था।

   संसार पर पाप के प्रभाव, सांसारिकता तथा जीवन में पाप की प्रवृति से समस्त मानव जाति भी विनाश के कगार पर खड़ी है। पाप की इस अव्यवस्था के दुषप्रभाव से, उस हिरनी और उसके शावकों के समान, हम भी अपने आप को अनापेक्षित परिस्थितियों, अनभिज्ञ खतरों अथवा विषम परिस्थितियों में पा कर असहाय तथा निरुपाय अनुभव कर सकते हैं। पाप के प्रभाव और दोष से पार पाने में हमारे अपने प्रयास और क्षमताएं तथा योजनाएं चाहे अक्षम हों, लेकिन वास्तव में हम असहाय या निरुपाय नहीं हैं; हम सब को पाप के दोष और उसके दुषप्रभावों से बचाने के लिए स्वर्गीय परमेश्वर पिता की सहायता की उपल्बध है। चाहे वे दुषपरिणाम पूर्वजों के पापों के कारण हो और हमें उन से उभरने तथा अपने जीवन में उन्हें ना दोहराने की समझ और शक्ति की आवश्यकता हो (नहेमेयाह 9:2-3); या उस प्रेमी परमेश्वर और ध्यानपूर्वक हमारी देखभाल करने वाले धैर्यवान पिता के पास पश्चाताप के साथ लौटने के लिए हिम्मत और सदबुद्धि की आवश्यकता हो (लूका 15:8), परमेश्वर हमारी सहायता के लिए सदैव तत्पर और तैयार है। परमेश्वर ने हमें पाप के दोष से छुड़ाने और स्वर्गीय जीवन जीने के लिए हमारी सहायता करने को प्रभु यीशु के रूप में अपना हाथ हमारी ओर बढ़ाया है। किंतु उसके बढ़े हुए हाथ की ओर अपना हाथ बढ़ाकर उसे थामने और पाप से निवारण के उसके उपाय को स्वीकार करने की बजाए यदि हम अपनी ही सीमित समझ और युक्तियों के सहारे कार्य करते रहेंगे, और फिर परिणामस्वरूप परेशानियों में पड़े रहने को सही एवं बुद्धिमतापूर्ण समझते रहेंगे तो समस्या का निवारण नहीं हो पाएगा।

   केवल हमारा स्वर्गीय परमेश्वर पिता ही हमारे जीवनों के संचालन के लिए हमें वह परिपूर्ण अनुग्रह, संपूर्ण क्षमा, खरा उदाहरण और भीतरी शान्ति प्रदान कर सकता है जिसके साथ हम जीवन की कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें। वह हमारी वास्तविकता, हमारी क्षमता और कमज़ोरियाँ जानता है और इसीलिए उसने अपने पुत्र और संसार के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु मसीह के द्वारा सेंत-मेंत बचाए जाने, तथा पापों से क्षमा और उद्धार पाने का मार्ग समस्त संसार के सभी लोगों के लिए बना कर दिया है। जो कोई उसके इस खुले निमंत्रण को स्वीकार करके प्रभु के पीछे हो लेता है, उसे वह सहायता के लिए अपना पवित्र आत्मा भी देता है, जो उस व्यक्ति में निवास करता है, उसकी सहायता करता है और उसका मार्गदर्शन करता है।

   परमेश्वर नहीं चाहता कि उसकी सृष्टि, उसके बच्चे अपने पापों में बने रहने के कारण उससे बिछड़ें इसलिए उसने अपने साथ चलने और बने रहने का मार्ग, क्षमा और सामर्थ सब के लिए दे दी है। उसकी इस प्रेम-भेंट को स्वीकार करके उसकी बात को मानना और उसका अनुसरण करना, अब यह प्रत्येक व्यक्ति का अपना निर्णय है। - मार्ट डी हॉन


परमेश्वर की ओर वापस लौट आने का मार्ग इस जीवन में ही खुला मिलता है।

और इस्राएलियों में से बहुतेरों को उन के प्रभु परमेश्वर की ओर फेरेगा। - (लूका 1:16)

बाइबल पाठ: मलाकी 4:4-6; मत्ती 1:21-23
Malachi 4:4 मेरे दास मूसा की व्यवस्था अर्थात जो जो विधि और नियम मैं ने सारे इस्रएलियों के लिये उसको होरेब में दिए थे, उन को स्मरण रखो।
Malachi 4:5 देखो, यहोवा के उस बड़े और भयानक दिन के आने से पहिले, मैं तुम्हारे पास एलिय्याह नबी को भेजूंगा।
Malachi 4:6 और वह माता पिता के मन को उनके पुत्रों की ओर, और पुत्रों के मन को उनके माता-पिता की ओर फेरेगा; ऐसा न हो कि मैं आकर पृथ्वी को सत्यानाश करूं।
Matthew 1:21 वह पुत्र जनेगी और तू उसका नाम यीशु रखना; क्योंकि वह अपने लोगों का उन के पापों से उद्धार करेगा।
Matthew 1:22 यह सब कुछ इसलिये हुआ कि जो वचन प्रभु ने भविष्यद्वक्ता के द्वारा कहा था; वह पूरा हो।
Matthew 1:23 कि, देखो एक कुंवारी गर्भवती होगी और एक पुत्र जनेगी और उसका नाम इम्मानुएल रखा जाएगा जिस का अर्थ यह है “परमेश्वर हमारे साथ”।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 16-18 
  • लूका 17:20-37


Monday, April 22, 2013

संयम


   प्रसिद्ध अमेरीकी अभिनेता जॉन वेन ने एक बार कहा था, "धीमा बोलें, धीरे बोलें और कम बोलें।" मेरे लिए उनका यह परामर्श मानना कठिन है क्योंकि मैं तेज़ गति से बोलने वाली हूँ, ऊँची आवाज़ में बोलती हूँ और जब बोलती हूँ तो बहुत कुछ कह जाती हूँ। लेकिन अपने शब्दों पर नियंत्रण रखना क्रोध तथा आवेश की स्थिति को काबू में रखने के लिए एक बहुत उपयोगी माध्यम हो सकता है। परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "...हर एक मनुष्य सुनने के लिये तत्‍पर और बोलने में धीरा और क्रोध में धीमा हो" (याकूब 1:19), तथा "कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है" (नीतिवचन 15:1)।

   बाइबल में न्यायियों के समय की घटना इन शिक्षाओं का जीवता उदाहरण है। न्यायियों की पुस्तक के 8 अध्याय में कुछ इस्त्राएलियों की गिदोन के साथ झड़प हुई। इस्त्राएली क्रोधित थे क्योंकि गिदोन उन्हें अपने साथ लिए बिना ही युद्ध के लिए निकल गया था और मिदियानी सेना को उखाड़ फेंका था - वास्तव में गिदोन परमेश्वर की आज्ञा पर परमेश्वर द्वारा उसे प्रदान किए गए केवल 300 लोगों के साथ ही मिदियानी सेना से युद्ध के लिए गया था। जब उसने मिदियानी सेना को उखाड़ फेंका और मिदियानी तितर-बितर होकर इधर-उधर भागने लगे तब गिदोन ने शेष इस्त्राएल के लोगों को उनका पीछा करके घात करने का सन्देश भेजा। इस जय का मुख्य श्रेय गिदोन को मिलने से बाकी इस्त्राएली चिढ़े हुए थे। गिदोन ने प्रत्युत्तर में उन्हें कोई कटु उत्तर नहीं दिया और ना ही उन पर कोई कटाक्ष किया। इसके विपरीत उसने बड़ी नम्रता से व्यवहार किया और उन इस्त्राएलियों को स्मरण कराया कि मिदियानी राजाओं को पकड़ने वाले और घात करने वाले तो वे ही थे, जबकि गिदोन सैनिकों के साथ ही युद्ध में उलझा था; उसने कहा: "तुम्हारे ही हाथों में परमेश्वर ने ओरब और जेब नाम मिद्यान के हाकिमों को कर दिया; तब तुम्हारे बराबर मैं कर ही क्या सका? जब उसने यह बात कही, तब उनका जी उसकी ओर से ठंड़ा हो गया" (न्यायियों 8:3)। गिदोन ने क्रोधित इस्त्राएलियों को आदर भी दिया और उनके क्रोध को शांत भी किया, और फिर इस्त्राएलियों ने उसे अपना न्यायी भी ठहरा लिया।

   परमेश्वर की सहायता से, अपने शब्दों को नियंत्रण में रखने के द्वारा हम क्रोधित लोगों और विस्फोटक स्थितियों को नियंत्रण में ला सकते हैं और उत्तेजित वातावरण को शांत कर सकते हैं। संयम और नम्रता का व्यवहार लोगों के क्रोध को शांत करने और आपसी मेलजोल को बढ़ाने तथा परमेश्वर की महिमा के लिए एक अच्छा उदाहरण प्रस्तुत करने में बहुत उपयोगी होता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


इससे पहले कि आपकी जीभ दूसरों को कष्ट दे, आप अपनी जीभ को दबा लें।

कोमल उत्तर सुनने से जलजलाहट ठण्डी होती है, परन्तु कटुवचन से क्रोध धधक उठता है। - नीतिवचन 15:1

बाइबल पाठ: न्यायियों 7:24-8:3
Judges 7:24 और गिदोन ने एप्रैम के सब पहाड़ी देश में यह कहने को दूत भेज दिए, कि मिद्यानियों से मुठभेड़ करने को चले आओ, और यरदन नदी के घाटों को बेतबारा तक उन से पहिले अपने वश में कर लो। तब सब एप्रैमी पुरूषों ने इकट्ठे हो कर यरदन नदी को बेतबारा तक अपने वश में कर लिया।
Judges 7:25 और उन्होंने ओरेब और जेब नाम मिद्यान के दो हाकिमों को पकड़ा; और ओरेब को ओरेब नाम चट्टान पर, और जेब को जेब नाम दाखरस के कुण्ड पर घात किया; और वे मिद्यानियों के पीछे पड़े; और ओरेब और जेब के सिर यरदन के पार गिदोन के पास ले गए।
Judges 8:1 तब एप्रैमी पुरूषों ने गिदोन से कहा, तू ने हमारे साथ ऐसा बर्ताव क्यों किया है, कि जब तू मिद्यान से लड़ने को चला तब हम को नहीं बुलवाया? सो उन्होंने उस से बड़ा झगड़ा किया।
Judges 8:2 उसने उन से कहा, मैं ने तुम्हारे समान भला अब किया ही क्या है? क्या एप्रैम की छोड़ी हुई दाख भी अबीएजेर की सब फसल से अच्छी नहीं है?
Judges 8:3 तुम्हारे ही हाथों में परमेश्वर ने ओरब और जेब नाम मिद्यान के हाकिमों को कर दिया; तब तुम्हारे बराबर मैं कर ही क्या सका? जब उसने यह बात कही, तब उनका जी उसकी ओर से ठंड़ा हो गया।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 14-15 
  • लूका 17:1-19


Sunday, April 21, 2013

पराजय से आगे


   अपने मसीही विश्वास में कमज़ोर पड़कर यदि हम से कोई ऐसा कार्य हो जाए जिससे हमारे परिवार और मित्र जनों में परमेश्वर का नाम और राज्य निन्दित हो, तो इस परिस्थिति का सामना हमें कैसे करना चाहिए?

   परमेश्वर के वचन बाइबल में राजा दाऊद का एक ऐसा ही उदाहरण है जिससे हम इस विषय पर शिक्षा ले सकते हैं। दाऊद अपने एक वफादार सैनिक ऊरिय्याह की पत्नि बतशेबा के साथ व्यभिचार में पड़ा, जिससे बतशेबा गर्भवती हुई। अपने पाप को छिपाने के लिए दाऊद ने ऊरिय्याह को छल से युद्ध भूमि में मरवा दिया। उसकी इस बात के लिए परमेश्वर ने अपने नबी नातान द्वारा दाऊद के पास अपनी नाराज़गी का सन्देश भेजा और कहा कि दाऊद को अपने इस पाप का प्रतिफल भोगना पड़ेगा। उस पाप के दर्दनाक परिणामों से तो दाऊद बच तो नहीं सका, लेकिन उसने परमेश्वर से अपने संबंध को टूटने भी नहीं दिया और वह लौट कर फिर परमेश्वर की संगति में आ सका, परमेश्वर के लिए फिर से उपयोगी हो सका। दाऊद के समान ही हम भी ऐसा कर सकते हैं।

   बाइबल के 2 शमूएल 12:13-23 में दिया गया राजा दाऊद के पुनःस्थापन का नमूना आज हमारे लिए भी परमेश्वर की संगति में लौट आने का मार्ग दिखाता है। पाप से मिली पराजय से आगे बढ़कर फिर से परमेश्वर की संगति और आशीषों में लौटने के लिए सबसे पहला कार्य है खुलकर अपने दोष का अंगीकार कर लेना (पद 13) और उसके लिए परमेश्वर से क्षमा माँगना तथा परमेश्वर से प्रार्थना करना कि हमारे पापों के दुषप्रभावों से अन्य संबंधित लोग बचे रहें (पद 16)। फिर यह पहचानना कि उन पापों के प्रतिफलों से बच पाना सदा ही संभव नहीं होता, और उन दुषपरिणामों को धैर्य पूर्वक सहन करना, उनके लिए परमेश्वर से प्रार्थना करते रहना। हम उन दुषपरिणामों के लिए दुखी हो सकते हैं, शोक कर सकते हैं लेकिन परमेश्वर पर अपना भरोसा सदा बनाए रहें। उन दुषपरिणामों को अपने ऊपर इतना हावी भी ना होने दें कि हम परमेश्वर से कट जाएं; सदा परमेश्वर से प्रार्थना का भाव बनाए रखें और यह परमेश्वर से संबंध को जोड़े रहेगा, शांति के मार्ग को खुला रखेगा (पद 20-23)।

   शैतान ना केवल हमें पाप में गिराने और फंसाने से प्रसन्न होता है वरन हमें आत्मिक तौर से निषक्रीय करने और पछतावे में निढाल होकर बैठे रहने तथा व्यर्थ हाथ मलते रहने से भी उसे आनन्द मिलता है। परमेश्वर हमें दुख और पछतावे में बैठे देख कर आनन्दित नहीं होता; वह आनन्दित होता है उस पछतावे और दुख में उससे पाप की क्षमा माँग कर हमारे आगे बढ़ने और उसकी भलाई तथा प्रेम पर विश्वास रख कर फिर से उसके लिए कार्यकारी होने से। उसका प्रेम हमारे लिए कभी कम नहीं होता, उसके मार्ग सदा अपने बच्चों के लिए खुले रहते हैं और वह उनके लौट आने की सदा प्रतीक्षा करता है तथा लौटने वालों का स्वागत आनन्द और आदर से करता है (लूका 15:11-24)।

   यदि हमने अपनी मसीही जीवन की गवाही बिगाड़ ली है तो उसके लिए पश्चातापी और दीन होना आवश्यक है; लेकिन इसका यह तात्पर्य नहीं कि हम बिलकुल चुपचाप होकर, संसार और लोगों से छुप कर बैठ जाएं। ऐसा करने से उस पाप के दुषपरिणाम हम पर और भी हावी होंगे। पाप के लिए क्षमा याचना के साथ परमेश्वर का हाथ फिर से थाम कर आगे बढ़ें; यही पराजय से आगे बढ़ने की कुंजी है। - रैंडी किलगोर


परमेश्वर हमारे पापों को क्षमा करके सदा ही हमें अपनी संगति तथा कार्य में फिर से स्थापित रखना चाहता है।

मैं वही हूं जो अपने नाम के निमित्त तेरे अपराधों को मिटा देता हूं और तेरे पापों को स्मरण न करूंगा। - (यशायाह 43:25)

बाइबल पाठ: 2 शमूएल 12:1-23
2 Samuel 12:1 तब यहोवा ने दाऊद के पास नातान को भेजा, और वह उसके पास जा कर कहने लगा, एक नगर में दो मनुष्य रहते थे, जिन में से एक धनी और एक निर्धन था।
2 Samuel 12:2 धनी के पास तो बहुत सी भेड़-बकरियां और गाय बैल थे;
2 Samuel 12:3 परन्तु निर्धन के पास भेड़ की एक छोटी बच्ची को छोड़ और कुछ भी न था, और उसको उसने मोल ले कर जिलाया था। और वह उसके यहां उसके बाल-बच्चों के साथ ही बढ़ी थी; वह उसके टुकड़े में से खाती, और उसके कटोरे में से पीती, और उसकी गोद मे सोती थी, और वह उसकी बेटी के समान थी।
2 Samuel 12:4 और धनी के पास एक बटोही आया, और उसने उस बटोही के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाने को अपनी भेड़-बकरियों वा गाय बैलों में से कुछ न लिया, परन्तु उस निर्धन मनुष्य की भेड़ की बच्ची ले कर उस जन के लिये, जो उसके पास आया था, भोजन बनवाया।
2 Samuel 12:5 तब दाऊद का कोप उस मनुष्य पर बहुत भड़का; और उसने नातान से कहा, यहोवा के जीवन की शपथ, जिस मनुष्य ने ऐसा काम किया वह प्राण दण्ड के योग्य है;
2 Samuel 12:6 और उसको वह भेड़ की बच्ची का चौगुणा भर देना होगा, क्योंकि उसने ऐसा काम किया, और कुछ दया नहीं की।
2 Samuel 12:7 तब नातान ने दाऊद से कहा, तू ही वह मनुष्य है। इस्राएल का परमेश्वर यहोवा यों कहता है, कि मैं ने तेरा अभिषेक करा के तुझे इस्राएल का राजा ठहराया, और मैं ने तुझे शाऊल के हाथ से बचाया;
2 Samuel 12:8 फिर मैं ने तेरे स्वामी का भवन तुझे दिया, और तेरे स्वामी की पत्नियां तेरे भोग के लिये दीं; और मैं ने इस्राएल और यहूदा का घराना तुझे दिया था; और यदि यह थोड़ा था, तो मैं तुझे और भी बहुत कुछ देने वाला था।
2 Samuel 12:9 तू ने यहोवा की आज्ञा तुच्छ जान कर क्यों वह काम किया, जो उसकी दृष्टि में बुरा है? हित्ती ऊरिय्याह को तू ने तलवार से घात किया, और उसकी पत्नी को अपनी कर लिया है, और ऊरिय्याह को अम्मोनियों की तलवार से मरवा डाला है।
2 Samuel 12:10 इसलिये अब तलवार तेरे घर से कभी दूर न होगी, क्योंकि तू ने मुझे तुच्छ जानकर हित्ती ऊरिय्याह की पत्नी को अपनी पत्नी कर लिया है।
2 Samuel 12:11 यहोवा यों कहता है, कि सुन, मैं तेरे घर में से विपत्ति उठा कर तुझ पर डालूंगा; और तेरी पत्नियों को तेरे साम्हने ले कर दूसरे को दूंगा, और वह दिन दुपहरी में तेरी पत्नियों से कुकर्म करेगा।
2 Samuel 12:12 तू ने तो वह काम छिपाकर किया; पर मैं यह काम सब इस्राएलियों के साम्हने दिन दुपहरी कराऊंगा।
2 Samuel 12:13 तब दाऊद ने नातान से कहा, मैं ने यहोवा के विरुद्ध पाप किया है। नातान ने दाऊद से कहा, यहोवा ने तेरे पाप को दूर किया है; तू न मरेगा।
2 Samuel 12:14 तौभी तू ने जो इस काम के द्वारा यहोवा के शत्रुओं को तिरस्कार करने का बड़ा अवसर दिया है, इस कारण तेरा जो बेटा उत्पन्न हुआ है वह अवश्य ही मरेगा।
2 Samuel 12:15 तब नातान अपने घर चला गया। और जो बच्चा ऊरिय्याह की पत्नी से दाऊद के द्वारा उत्पन्न था, वह यहोवा का मारा बहुत रोगी हो गया।
2 Samuel 12:16 और दाऊद उस लड़के के लिये परमेश्वर से बिनती करने लगा; और उपवास किया, और भीतर जा कर रात भर भूमि पर पड़ा रहा।
2 Samuel 12:17 तब उसके घराने के पुरनिये उठ कर उसे भूमि पर से उठाने के लिये उसके पास गए; परन्तु उसने न चाहा, और उनके संग रोटी न खाई।
2 Samuel 12:18 सातवें दिन बच्चा मर गया, और दाऊद के कर्मचारी उसको बच्चे के मरने का समाचार देने से डरे; उन्होंने तो कहा था, कि जब तक बच्चा जीवित रहा, तब तक उसने हमारे समझाने पर मन न लगाया; यदि हम उसको बच्चे के मर जाने का हाल सुनाएं तो वह बहुत ही अधिक दु:खी होगा।
2 Samuel 12:19 अपने कर्मचारियों को आपस में फुसफुसाते देखकर दाऊद ने जान लिया कि बच्चा मर गया; तो दाऊद ने अपने कर्मचारियों से पूछा, क्या बच्चा मर गया? उन्होंने कहा, हां, मर गया है।
2 Samuel 12:20 तब दाऊद भूमि पर से उठा, और नहाकर तेल लगाया, और वस्त्र बदला; तब यहोवा के भवन में जा कर दण्डवत्‌ की; फिर अपने भवन में आया; और उसकी आज्ञा पर रोटी उसको परोसी गई, और उसने भोजन किया।
2 Samuel 12:21 तब उसके कर्मचारियों ने उस से पूछा, तू ने यह क्या काम किया है? जब तक बच्चा जीवित रहा, तब तक तू उपवास करता हुआ रोता रहा; परन्तु ज्योंही बच्चा मर गया, त्योंही तू उठ कर भोजन करने लगा।
2 Samuel 12:22 उसने उत्तर दिया, कि जब तक बच्चा जीवित रहा तब तक तो मैं यह सोच कर उपवास करता और रोता रहा, कि क्या जाने यहोवा मुझ पर ऐसा अनुग्रह करे कि बच्चा जीवित रहे।
2 Samuel 12:23 परन्तु अब वह मर गया, फिर मैं उपवास क्यों करूं? क्या मैं उसे लौटा ला सकता हूं? मैं तो उसके पास जाऊंगा, परन्तु वह मेरे पास लौट न आएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 12-13 
  • लूका 16


Saturday, April 20, 2013

परमेश्वर की इच्छा


   एक युवक अनिश्चित भविष्य का सामना कर रहा था और समझ नहीं पा रहा था कि आता वर्ष उसके लिए कैसा होगा, अन्ततः अपनी निराशाओं और कुंठाओं में होकर वह इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि परमेश्वर की इच्छा क्या है यह कोई नहीं जानता। क्या वह सही था? क्या भविष्य के बारे में अनिश्चित होने का तात्पर्य है परमेश्वर की इच्छा जान पाना संभव नहीं है?

   परमेश्वर की इच्छा जानने का तात्पर्य अधिकांश लोगों के लिए यह जान पाने तक ही सीमित होता है कि "भविष्य में हम किस स्थिति में होंगे?" यद्यपि परमेश्वर की इच्छा के संबंध में इस बात का अवश्य ही एक महत्वपूर्ण स्थान है, लेकिन परमेश्वर की इच्छा से संबंधित केवल यही सब कुछ नहीं है। परमेश्वर की इच्छा से संबंधित एक और तथा उतना ही महत्वपूर्ण भाग है परमेश्वर की प्रगट इच्छा का प्रतिदिन पालन करते रहना।

   परमेश्वर ने हमारे प्रतिदिन के जीवन के बारे में कई बातें हम पर प्रगट करी हैं; उसके प्रति हमारे दायित्वों के बारे में हम सब काफी कुछ जानते हैं; उदाहरणस्वरूप, परमेश्वर की इच्छा है कि हम मसीही विश्वासी:

- अपने देश के अच्छे और ईमानदार नागरिक बनें, और हमारा यह भला चरित्र मसीह विरोधियों के लिए एक चुनौती हो। (1 पतरस 2:15)

- हर बात में, चाहे वह कैसी भी क्यों ना हो, हम परमेश्वर का धन्यवाद करें। (1 थिस्सलुनीकियों 5:18)

- सदा पवित्रता में बने रहें और हर प्रकार के लुचपन तथा व्यभिचार से बचे रहें। (1 थिस्सलुनीकियों 4:13)

- सदा परमेश्वर के पवित्र आत्मा की आधीनता में रहें और चलें। (इफिसीयों 5:18)

- परमेश्वर की स्तुति आराधना करते रहें। (इफिसीयों 5:19)

- मेलजोल के साथ एक दूसरे के आधीन रहें। (इफिसीयों 5:21)

 जैसे जैसे हम परमेश्वर की इन तथा अन्य ऐसी विदित इच्छाओं के प्रति समर्पित एवं आज्ञाकारी होते जाएंगे, वैसे वैसे हम रोमियों 12:2 में दिए निर्देष: "और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो" के अनुसार अन्य बातों के लिए परमेश्वर की इच्छा को अपने अनुभवों से मालुम करते रहने वाले भी होते जाएंगे। जो जो परमेश्वर हम पर प्रगट करता जाता है यदि हम उस पर फिर आगे भी बने रहते हैं, और उस पर चलते रहते हैं तो परमेश्वर फिर और बातें भी हम पर प्रगट करता जाता है। जो परमेश्वर की विदित इच्छानुसार उसकी सहमति और स्वीकृति में बना रहता है, वह परमेश्वर से आते समय के लिए मार्गदर्शन भी पाता रहता है।

   यदि भविष्य के लिए परमेश्वर की इच्छा जाननी है तो वर्तमान में उसकी प्रगट इच्छा की आज्ञाकारिता में रहना भी अनिवार्य है। - डेव ब्रैनन


यदि हम प्रतिदिन परमेश्वर से प्रेम करें और उसके आज्ञाकारी रहें तो वह स्वतः ही भविष्य की परतें भी हम पर खोलता चला जाएगा।

और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो। (रोमियों 12:2)

बाइबल पाठ: इफिसीयों 5:15-21
Ephesians 5:15 इसलिये ध्यान से देखो, कि कैसी चाल चलते हो; निर्बुद्धियों की नाईं नहीं पर बुद्धिमानों की नाईं चलो।
Ephesians 5:16 और अवसर को बहुमोल समझो, क्योंकि दिन बुरे हैं।
Ephesians 5:17 इस कारण निर्बुद्धि न हो, पर ध्यान से समझो, कि प्रभु की इच्छा क्या है?
Ephesians 5:18 और दाखरस से मतवाले न बनो, क्योंकि इस से लुचपन होता है, पर आत्मा से परिपूर्ण होते जाओ।
Ephesians 5:19 और आपस में भजन और स्‍तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो, और अपने अपने मन में प्रभु के साम्हने गाते और कीर्तन करते रहो।
Ephesians 5:20 और सदा सब बातों के लिये हमारे प्रभु यीशु मसीह के नाम से परमेश्वर पिता का धन्यवाद करते रहो।
Ephesians 5:21 और मसीह के भय से एक दूसरे के आधीन रहो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 9-11 
  • लूका 15:11-32


Friday, April 19, 2013

दीवार


   नवंबर 9, 2010 बर्लिन की दीवार के गिराए जाने की 21वीं वर्षगाँठ थी। उसी दिन 1989 में पूर्वी जर्मनी के टेलिविज़न पर हुई एक घोषणा द्वारा लोगों को बताया गया कि अब वे बिना रोक-टोक पश्चिमी जर्मनी में जा सकते हैं और उसके अगले दिन पूर्वी जर्मनी के बुल्डोज़र बर्लिन की दीवार को गिराने लग गए जो पिछले 28 वर्ष से पूर्वी तथा पश्चिमी जर्मनी को विभाजित किए हुई थी।

   प्रभु यीशु मसीह ने भी यहूदी एवं गैरयहूदियों को परस्पर विभाजित करने वाली दीवार को गिरा दिया (इफिसियों 2:14)। लेकिन इससे भी अधिक अभेद्य एक और दिवार थी - मनुष्यों के पाप की दीवार जो मनुष्यों को परमेश्वर कि संगति से दूर रखती थी, उसे भी प्रभु यीशु मसीह के क्रूस पर बलिदान और मृतकों में से पुनरुत्थान ने गिरा दिया और सभी मनुष्यों के लिए परमेश्वर के साथ संगति करने का मार्ग खोल दिया (इफिसियों 2:16)। इन दीवारों के गिराए जाने से अब हर मसीही विश्वासी परमेश्वर के घराने के सदस्य हो जाता है और सभी विश्वासी एक साथ मिल कर परमेश्वर के पवित्र आत्मा का मन्दिर और परमेश्वर का निवास स्थान बन गए हैं (इफिसियों 2:19-21)।

   लेकिन दुख की बात है कि प्रभु यीशु द्वारा सभी दीवारें गिराए जाने और सब प्रकार का मेल-मिलाप करवा देने के बाद भी मसीही विश्वासी अपने बीच में कई दीवारें खड़ी कर लेते हैं और अपने अपने दायरों में सिमट कर रहना चाहते हैं। लेकिन परमेश्वर का वचन सिखाता है कि "सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो। अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो। और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो" (इफिसियों 4:1-3)।

   बजाए परस्पर दीवारें खड़ी करने के, विभाजित करने वाली दीवारों को गिराने के प्रयास करें और संसार को व्यावाहरिक रूप में दिखा दें कि हम एक ही परिवार के सदस्य, एक ही देह के अंग हैं। - सी. पी. हिया


मसीही विश्वासियों में एकता मसीह के साथ एक होने से संभव है।

क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया। - इफिसियों 2:14

बाइबल पाठ: इफिसियों 2:11-22; इफिसियों 4:1-3
Ephesians 2:11 इस कारण स्मरण करो, कि तुम जो शारीरिक रीति से अन्यजाति हो, (और जो लोग शरीर में हाथ के किए हुए खतने से खतना वाले कहलाते हैं, वे तुम को खतना रहित कहते हैं)।
Ephesians 2:12 तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्‍त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में ईश्वर रहित थे।
Ephesians 2:13 पर अब तो मसीह यीशु में तुम जो पहिले दूर थे, मसीह के लोहू के द्वारा निकट हो गए हो।
Ephesians 2:14 क्योंकि वही हमारा मेल है, जिसने दोनों को एक कर लिया: और अलग करने वाली दीवार को जो बीच में थी, ढा दिया।
Ephesians 2:15 और अपने शरीर में बैर अर्थात वह व्यवस्था जिस की आज्ञाएं विधियों की रीति पर थीं, मिटा दिया, कि दोनों से अपने में एक नया मनुष्य उत्पन्न कर के मेल करा दे।
Ephesians 2:16 और क्रूस पर बैर को नाश कर के इस के द्वारा दानों को एक देह बना कर परमेश्वर से मिलाए।
Ephesians 2:17 और उसने आकर तुम्हें जो दूर थे, और उन्हें जो निकट थे, दानों को मेल-मिलाप का सुसमाचार सुनाया।
Ephesians 2:18 क्योंकि उस ही के द्वारा हम दोनों की एक आत्मा में पिता के पास पंहुच होती है।
Ephesians 2:19 इसलिये तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे, परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्‍वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।
Ephesians 2:20 और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नेव पर जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु आप ही है, बनाए गए हो।
Ephesians 2:21 जिस में सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मन्दिर बनती जाती है।
Ephesians 2:22 जिस में तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवास स्थान होने के लिये एक साथ बनाए जाते हो।
Ephesians 4:1 सो मैं जो प्रभु में बन्‍धुआ हूं तुम से बिनती करता हूं, कि जिस बुलाहट से तुम बुलाए गए थे, उसके योग्य चाल चलो।
Ephesians 4:2 अर्थात सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो।
Ephesians 4:3 और मेल के बन्ध में आत्मा की एकता रखने का यत्‍न करो।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 6-8 
  • लूका 15:1-10

Thursday, April 18, 2013

भलाई का उद्देश्य


   बचपन में हम सण्डे स्कूल में एक गाना गाया करते थे, जो कुछ इस प्रकार था: "परमेश्वर मेरे प्रति भला है! परमेश्वर मेरे प्रति भला है! वह मेरा हाथ थामता है और मुझे सहारा देता है। परमेश्वर मेरे प्रति भला है!

   मैं इस बात का पूरी रीति से विश्वास करता हूँ कि परमेश्वर मेरे प्रति भला है, और ना केवल मेरे प्रति वरन सभी मनुष्यों के प्रति वह भला है और उनके लिए भले कार्य करने में वह आनन्दित होता है। वह वास्तव में हमारे हाथ थामे रहता है, विशेषकर कठिन समयों में और जीवन की समस्याओं का सामना करने में वह हमें सहारा देता है। लेकिन क्या आपने कभी अपने आप से यह पूछा कि परमेश्वर भला क्यों है? अवश्य ही ऐसा इसलिए नहीं है क्योंकि हम उसकी भलाई के योग्य हैं और ना ही इसलिए उसे अपने किसी प्रयोजन के लिए हमारा साथ और प्रेम चाहिए। कौन मनुष्य परमेश्वर को कुछ दे सकता है, या किसी मनुष्य के पास ऐसा क्या है जो परमेश्वर के पास नहीं; जो कुछ हम हैं और जो भी हमारे पास है वह अन्ततः उसी का प्रदान किया हुआ ही तो है!

   भजनकार ने अपनी एक प्रार्थना में कहा: "परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए" (भजन 67:1-2)। परमेश्वर से मिलने वाली हमारी प्रतिदिन की आशीषें इस बात का प्रमाण हैं कि वह भला परमेश्वर है जो अपने लोगों की चिन्ता करता है। लेकिन संसार के लोग इस बात को कैसे जानेंगे यदि हम उन भलाईयों के लिए परमेश्वर की सार्वजनिक रूप में स्तुति और बड़ाई नहीं करेंगे? परमेश्वर के भले कार्यों के वर्णन से ही लोग उसके बारे में तथा उसकी वास्तविकता और उसके गुणों के बारे में जानने पाएंगे। इसीलिए भजनकार ने आगे लिखा: "हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें" (भजन 67:3)।

   इसलिए अगली बार जब हम परमेश्वर की भलाई के पात्र होने का अनुभव करें तो साथ ही उसे सार्वजनिक रूप में धन्यवाद करना ना भूलें। उसकी भलाईयों का उपभोग बिना उसे उन भलाईयों के योग्य धन्यवाद दिए या आभार प्रकट किए हुए करते रहना, परमेश्वर का अनादर है और हमारे जीवनों में उसकी भलाई के उद्देश्य को नकारता है। - जो स्टोवैल


परमेश्वर भला है - सुनिश्चित करें कि आप के आस-पास के लोग आपके जीवन से इस बात को अवश्य जानें।

परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए - भजन 67:1

बाइबल पाठ: भजन 67
Psalms 67:1 परमेश्वर हम पर अनुग्रह करे और हम को आशीष दे; वह हम पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए
Psalms 67:2 जिस से तेरी गति पृथ्वी पर, और तेरा किया हुआ उद्धार सारी जातियों में जाना जाए।
Psalms 67:3 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:4 राज्य राज्य के लोग आनन्द करें, और जयजयकार करें, क्योंकि तू देश देश के लोंगों का न्याय धर्म से करेगा, और पृथ्वी के राज्य राज्य के लोगों की अगुवाई करेगा।
Psalms 67:5 हे परमेश्वर, देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें।
Psalms 67:6 भूमि ने अपनी उपज दी है, परमेश्वर जो हमारा परमेश्वर है, उसने हमें आशीष दी है।
Psalms 67:7 परमेश्वर हम को आशीष देगा; और पृथ्वी के दूर दूर देशों के सब लोग उसका भय मानेंगे।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 3-5 
  • लूका 14:25-35

Wednesday, April 17, 2013

धन की चिन्ता


   परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखी प्रभु यीशु की शिक्षाओं में, विषयानुसार, सबसे अधिक शिक्षाएं धन-संपत्ति से संबंधित हैं। जितना प्रभु यीशु ने धन-संपत्ति के बारे में सिखाया उतना किसी अन्य विषय के बारे में नहीं सिखाया। लूका 12 धन के विषय में उनकी शिक्षाओं का एक अच्छा सारांश है। उन्होंने धन की निन्दा नहीं करी लेकिन अपने भविष्य और आवश्यकताओं के लिए धन-संपत्ति पर भरोसा करने के विषय में चेतावनी अवश्य दी क्योंकि धन-संपत्ति जीवन की समस्याओं का हल नहीं कर सकते।

   प्रभु यीशु ने धन-संपत्ति के विषय में बहुत सी बातें कहीं, लेकिन एक प्रश्न पर उन्होंने ध्यान केंद्रित रखा, "धन-संपत्ति का तुम्हारे जीवन में क्या प्रयोजन हैं?" धन-संपत्ति किसी के भी जीवन को नियंत्रित कर सकते हैं और उनका ध्यान परमेश्वर से हटा सकते हैं। इसके विपरीत प्रभु चाहते हैं कि हम स्वर्ग में अपना धन एकत्रित करें क्योंकि वह धन ना केवल इस जीवन में वरन आते जीवन में भी हमारे काम आएगा।

   प्रभु यीशु, धन-संपत्ति अर्जित करते रहने की लालसा में पड़े रहने, इसे ही अपने जीवन का ध्येय बनाने और धन-संपत्ति की अनिश्चित सामर्थ पर भरोसे के नियंत्रण से बचाए रखने को कहते हैं चाहे इसके लिए हमें अपना सब कुछ छोड़ना ही क्यों ना पड़े। हमारा भरोसा नाश्मान धन पर नहीं वरन अविनाशी परमेश्वर पर होना चाहिए क्योंकि हमारे जीवन की आवश्यकताएं पूरी करने में परमेश्वर सक्षम है, और परमेश्वर जो देता है उससे बेहतर संसार की कोई सामर्थ, कोई धन नहीं दे सकता। उदहरणस्वरूप प्रभु ने संसार के सबसे धनी राजा सुलेमान का उदाहरण दिया और कहा कि राजा सुलेमान अपने सारे वैभव में भी मैदानों में उगने वाला एक जंगली फूल, जो आज है और कल जाता रहता है, के समान सुन्दर नहीं हो सका। इसलिए अपने खाने-पीने, रहने, पहनने-ओढ़ने की चिंता मत करो (लूका 12:27-29) वरन परमेश्वर के राज्य और उसकी धर्मिकता की खोज में रहो तो जीवन की सब आवश्यकताएं भी परमेश्वर की ओर से स्वतः ही पूरी कर दी जाएंगी (लूका 12:31)।

   सच है; नाशमान और क्षणिक धन-संपत्ति पर भरोसा रखने की बजाए अविनाशी और अनन्त परमेश्वर पर, जो सारी सृष्टि के देखभाल और संचालन करता है, भरोसा रखना अधिक युक्ति संगत तथा लाभकारी है। - फिलिप यैन्सी


हमारे धन-संपत्ति का सही माप स्वर्ग में जो हमने अर्जित किया है वही है।

हे छोटे झुण्ड, मत डर; क्योंकि तुम्हारे पिता को यह भाया है, कि तुम्हें राज्य दे। - लूका 12:32 

बाइबल पाठ: लूका 12:22-31
Luke 12:22 फिर उसने अपने चेलों से कहा; इसलिये मैं तुम से कहता हूं, अपने प्राण की चिन्‍ता न करो, कि हम क्या खाएंगे; न अपने शरीर की कि क्या पहिनेंगे।
Luke 12:23 क्योंकि भोजन से प्राण, और वस्‍त्र से शरीर बढ़कर है।
Luke 12:24 कौवों पर ध्यान दो; वे न बोते हैं, न काटते; न उन के भण्‍डार और न खत्ता होता है; तौभी परमेश्वर उन्हें पालता है; तुम्हारा मूल्य पक्षियों से कहीं अधिक है।
Luke 12:25 तुम में से ऐसा कौन है, जो चिन्‍ता करने से अपनी अवस्था में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है?
Luke 12:26 इसलिये यदि तुम सब से छोटा काम भी नहीं कर सकते, तो और बातों के लिये क्यों चिन्‍ता करते हो?
Luke 12:27 सोसनों के पौधों पर ध्यान करो कि वे कैसे बढ़ते हैं; वे न परिश्रम करते, न कातते हैं: तौभी मैं तुम से कहता हूं, कि सुलैमान भी, अपने सारे वैभव में, उन में से किसी एक के समान वस्‍त्र पहिने हुए न था।
Luke 12:28 इसलिये यदि परमेश्वर मैदान की घास को जो आज है, और कल भाड़ में झोंकी जाएगी, ऐसा पहिनाता है; तो हे अल्प विश्वासियों, वह तुम्हें क्यों न पहिनाएगा?
Luke 12:29 और तुम इस बात की खोज में न रहो, कि क्या खाएंगे और क्या पीएंगे, और न सन्‍देह करो।
Luke 12:30 क्योंकि संसार की जातियां इन सब वस्‍तुओं की खोज में रहती हैं: और तुम्हारा पिता जानता है, कि तुम्हें इन वस्‍तुओं की आवश्यकता है।
Luke 12:31 परन्तु उसके राज्य की खोज में रहो, तो ये वस्‍तुऐं भी तुम्हें मिल जाएंगी।

एक साल में बाइबल: 
  • 2 शमूएल 1-2 
  • लूका 14:1-24

Tuesday, April 16, 2013

पीड़ा और प्राप्ति


   एक फुटबॉल टीम के खिलाड़ीयों का मनोबल बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण शिविर में प्रशिक्षकों ने प्रोत्साहित करने वाला एक वाक्य लिखी हुई टी-शर्ट्स पहन कर रखीं; वह वाक्य था: "तुम्हें प्रतिदिन चुनाव करना होगा -  आज के अनुशासन का कष्ट अथवा बाद में खेद की पीड़ा।" अनुशासन कठोर होता है, और अकसर हम उससे बचने के प्रयास करते हैं। लेकिन जीवन हो या खेल-कूद, कुछ पाने के लिए आज अनुशासन का थोड़ा सा कष्ट कल की बड़ी उपल्बधि का कारण होता है। यदि कष्ट उठाने को तैयार नहीं हैं तो कुछ प्राप्त करना भी असंभव होगा। युद्ध के मैदान में तैयारी और प्रशिक्षण का समय नहीं होता, यह तैयारी तो पहले से ही कर के रखनी होती है और अनुशासित जीवन ही चुनौतियों का सामना करने और उन पर विजयी होने में सक्षम होते हैं। या तो आप जीवन की चुनौतियों के लिए अपने आप को तैयार करे रखते हैं या फिर आपका जीवन "यदि केवल", "अगर", "काश कि मैंने" जैसे शब्दों तथा हार और खेद की पीड़ा से भरा होगा।

   किसी ने खेद की परिभाषा में कहा है कि "यह करे गए पिछले कार्यों और व्यवहार के प्रति सूझबूझपूर्ण एवं भावनात्मक नापसन्दगी है।" पीछे मुड़कर अपने गलत निर्णयों और कार्यों को देखना और उनके कारण मिली हार तथा निराशा के बोझ को उठाए रहना पीड़ादायक ही नहीं शिक्षाप्रद भी होता है। एक मसीही विश्वासी को उसका परमेश्वर पिता कभी नहीं छोड़ता; उस पीड़ा की अग्नि से परमेश्वर अपने विश्वासी जन के अन्दर की व्यर्थ बातों को भस्म करता है और उसे निर्मल करता है। यही स्थिति भजनकार की भी थी। अपने पाप और उसके कारण मिले पीड़ादायक अनुभवों के आधार पर उसने लिखा: "दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा" (भजन 32:10)। ना केवल भजनकार ने अपनी गलती को पहचाना वरन उस पीड़ा में भी उसने परमेश्वर की उपस्थिति और सहायता को अनुभव किया।

   हर परिस्थिति में परमेश्वर पर भरोसा और समर्पण; उसके सामने अपने पापों का इनकार नहीं वरन अंगीकर और क्षमा याचना एक ऐसा जीवन प्रदान करते हैं जो खेद की पीड़ा से नहीं लेकिन परमेश्वर की आशीष से भरा होता है। यही हमारा प्रतिदिन का चुनाव है मसीही जीवन के अनुशासन का कष्ट या फिर खेद की पीड़ा। - बिल क्राउडर


वर्तमान के चुनाव भविष्य की आशीषें निर्धारित करते हैं।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया। - भजन 32:5 

बाइबल पाठ: भजन 32
Psalms 32:1 क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो।
Psalms 32:2 क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो।
Psalms 32:3 जब मैं चुप रहा तब दिन भर कराहते कराहते मेरी हडि्डयां पिघल गईं।
Psalms 32:4 क्योंकि रात दिन मैं तेरे हाथ के नीचे दबा रहा; और मेरी तरावट धूप काल की सी झुर्राहट बनती गई।
Psalms 32:5 जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया।
Psalms 32:6 इस कारण हर एक भक्त तुझ से ऐसे समय में प्रार्थना करे जब कि तू मिल सकता है। निश्चय जब जल की बड़ी बाढ़ आए तौभी उस भक्त के पास न पहुंचेगी।
Psalms 32:7 तू मेरे छिपने का स्थान है; तू संकट से मेरी रक्षा करेगा; तू मुझे चारों ओर से छुटकारे के गीतों से घेर लेगा।
Psalms 32:8 मैं तुझे बुद्धि दूंगा, और जिस मार्ग में तुझे चलना होगा उस में तेरी अगुवाई करूंगा; मैं तुझ पर कृपा दृष्टि रखूंगा और सम्मत्ति दिया करूंगा।
Psalms 32:9 तुम घोड़े और खच्चर के समान न बनो जो समझ नहीं रखते, उनकी उमंग लगाम और बाग से रोकनी पड़ती है, नहीं तो वे तेरे वश में नहीं आने के।
Psalms 32:10 दुष्ट को तो बहुत पीड़ा होगी; परन्तु जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से घिरा रहेगा।
Psalms 32:11 हे धर्मियों यहोवा के कारण आनन्दित और मगन हो, और हे सब सीधे मन वालों आनन्द से जयजयकार करो!

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 30-31 
  • लूका 13:23-35

Monday, April 15, 2013

अनिश्चितता में निश्चय


   अप्रैल 2010 की घटना है, आईसलैंड में फटने वाले एक ज्वालामुखी से राख के बादल आकाश में छा गए और परिणामस्वरूप यूरोप तथा इंगलैंड के वायु अड्डे 5 दिन तक बन्द रहे। इसके कारण लगभग 100,000 उडानें रद्द हो गईं और लाखों वायु यात्री अपनी यात्रा से वंचित हो गए। बहुत से लोगों के अनेक आवश्यक कार्य अवरुद्ध हो गए, संसार भर में व्यापार में बहुत घाटा हुआ और सब अनिश्चितता से भर गए क्योंकि कोई नहीं जानता था कि घटना क्रम कब सामान्य होगा।

   जब हमारी योजनाएं बिखर जाएं, कोई उपाए सूझ ना पड़े तो उस कुंठा और निराशा का सामना हम कैसे करते हैं? परमेश्वर के वचन बाइबल में यशायाह 26:3-4 जीवन के हर तूफान में हमें स्थिर बांधे रखने वाला लंगर है: "जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है" (यशायाह 26:3-4)। परमेश्वर की इस अटल प्रतिज्ञा को स्मरण रखना और हर रात सोने से पहले दोहराना हमें सदा ही हिम्मत देता रहेगा और हर परिस्थिति का सामना करने की सामर्थ देगा।

   प्रत्येक मसीही विश्वासी को यह आश्वासन है कि चाहे हम झुंझला देने वाले असुविधा का सामना करें या हृदयविदारक हानि का, चाहे हमारी सभी योजनाएं बिखर जाएं और समस्या हमारी समझ और सामर्थ से परे हो, लेकिन हमारा परमेश्वर पिता सदा हमारे साथ है, उसका प्रेम, शांति और सुरक्षा सदा ही हमारे जीवन में बने रहते है। वह हमारे लिए हर बात से अन्ततः भलाई ही उत्पन्न करता है (रोमियों 8:28) और हमारी सामर्थ से बाहर किसी परीक्षा में हमें नहीं पड़ने देता (1 कुरिन्थियों 10:13)।

   जीवन की हर अनिश्चितता में हर मसीही विश्वासी के साथ परमेश्वर की सदा बनी रहने वाली उपस्थिति हमारी आशीष और सुरक्षा का निश्चय है। - डेविड मैक्कैसलैंड


जब हम अपनी समस्याएं परमेश्वर के हाथों में सौंप देते हैं तो वह अपनी शांति हमारे हृदय में भर देता है।

जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है। - यशायाह 26:3

बाइबल पाठ: यशायाह 26:1-9
Isaiah 26:1 उस समय यहूदा देश में यह गीत गाया जाएगा, हमारा एक दृढ़ नगर है; उद्धार का काम देने के लिये वह उसकी शहरपनाह और गढ़ को नियुक्त करता है।
Isaiah 26:2 फाटकों को खोलो कि सच्चाई का पालन करने वाली एक धर्मी जाति प्रवेश करे।
Isaiah 26:3 जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए हैं, उसकी तू पूर्ण शान्ति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है।
Isaiah 26:4 यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु यहोवा सनातन चट्टान है।
Isaiah 26:5 वह ऊंचे पद वाले को झुका देता, जो नगर ऊंचे पर बसा है उसको वह नीचे कर देता। वह उसको भूमि पर गिराकर मिट्टी में मिला देता है।
Isaiah 26:6 वह पांवों से, वरन दरिद्रों के पैरों से रौंदा जाएगा।
Isaiah 26:7 धर्मी का मार्ग सच्चाई है; तू जो स्वयं सच्चाई है, तू धर्मी की अगुवाई करता है।
Isaiah 26:8 हे यहोवा, तेरे न्याय के मार्ग में हम लोग तेरी बाट जोहते आए हैं; तेरे नाम के स्मरण की हमारे प्राणों में लालसा बनी रहती है।
Isaiah 26:9 रात के समय मैं जी से तेरी लालसा करता हूं, मेरा सम्पूर्ण मन यत्न के साथ तुझे ढूंढ़ता है। क्योंकि जब तेरे न्याय के काम पृथ्वी पर प्रगट होते हैं, तब जगत के रहने वाले धर्म की सीखते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 27-29 
  • लूका 13:1-22


Sunday, April 14, 2013

उद्देश्य


   अपनी पुस्तक Life after Heart Surgery (हृदय शल्य चिकित्सा के बाद जीवन) में डेविड बर्क ने मृत्यु से अपना आमना-सामना होने के बारे में बताया है। अपने हृदय पर हुए दूसरे ऑपरेशन के बाद अस्पताल के बिस्तर पर लेटे हुए उसे असहनीय पीड़ा हुई और उसके लिए सांस लेना भी दूभर हो गया। यह समझकर कि अब अन्त निकट है और वह अनन्त में प्रवेश करने वाला है उसने एक बार फिर परमेश्वर से प्रार्थना करी, पापों से मिली क्षमा के लिए धन्यवाद किया और उस पर अपना विश्वास पुनः व्यक्त किया।

   डेविड स्वर्ग पहुँच कर अपने पिता से मिलने के बारे में सोचने लगा जिनकी मृत्यु कई वर्ष पहले हो गई थी, इतने में नर्स ने पूछा कि वह अब कैसा अनुभव कर रहा है। डेविड ने उत्तर दिया कि "ठीक है! बस अब  स्वर्ग जाकर परमेश्वर से मिलने की प्रतीक्षा में हूँ।" नर्स ने उसे उत्तर दिया, "मित्र, मेरे कार्य समय में तो मैं यह नहीं होने दूँगी!" और थोड़े ही समय में डॉक्टर फिर से उसका ऑपरेशन कर रहे थे। उसकी छाती फिर से खोली गई और वहाँ एकत्रित दो लिटर पानी निकाला गया। इसके पश्चात डेविड स्वस्थ होने लगा और ठीक होकर घर जा सका।

   हमारे लिए यह विचार करना कि पृथ्वी पर हमारे अन्तिम क्षण कैसे होंगे, और हम उनका सामना कैसे करेंगे कोई सामान्य बात नहीं है। लेकिन जो प्रभु यीशु में पापों की क्षमा और उद्धार पाने के बाद मृत्यु प्राप्त करते हैं उन्हें यह पता है कि वे धन्य हैं (प्रकशितवाक्य 14:13) और परमेश्वर की नज़रों में उनकी मृत्यु बहुमूल्य है (भजन 116:15)।

   हमारे अस्तित्व में आने से पहले ही परमेश्वर ने हमारे समयों और दिनों को निर्धारित कर दिया था (भजन 139:16) और हम आज केवल इसलिए जीवित हैं क्योंकि सर्वशक्तिमान की श्वास से हमें जीवन मिलता है (अय्युब 33:4)। यद्यपि हम यह नहीं जानते कि हमारी कितनी सांसें शेष हैं, लेकिन हमें यह आशवासन है कि परमेश्वर इस बात को जानता है।

   हमारा उद्देश्य अपने जीवन के शेष समय के बारे में चिंतित होना नहीं वरन इस बात की चिंता हो कि जीवन और मृत्यु दोनों में हम परमेश्वर को भाते रहें (2 कुरिन्थियों 5:9) और हमारे जीवन तथा मृत्यु, दोनों ही से परमेश्वर की महिमा हो। तब ही हम प्रेरित पौलुस के समान कह सकेंगे: "क्योंकि मेरे लिये जीवित रहना मसीह है, और मर जाना लाभ है" (फिलिप्पियों 1:21)। सिंडी हैस कैस्पर


अपनी पहली श्वास से लेकर अन्तिम श्वास तक हम परमेश्वर की देखरेख में रहते हैं।

मुझे ईश्वर की आत्मा ने बनाया है, और सर्वशक्तिमान की सांस से मुझे जीवन मिलता है। - अय्युब 33:4 

बाइबल पाठ: भजन 139:13-18
Psalms 139:13 मेरे मन का स्वामी तो तू है; तू ने मुझे माता के गर्भ में रचा।
Psalms 139:14 मैं तेरा धन्यवाद करूंगा, इसलिये कि मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूं। तेरे काम तो आश्चर्य के हैं, और मैं इसे भली भांति जानता हूं।
Psalms 139:15 जब मैं गुप्त में बनाया जाता, और पृथ्वी के नीचे स्थानों में रचा जाता था, तब मेरी हडि्डयां तुझ से छिपी न थीं।
Psalms 139:16 तेरी आंखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब अंग जो दिन दिन बनते जाते थे वे रचे जाने से पहिले तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे।
Psalms 139:17 और मेरे लिये तो हे ईश्वर, तेरे विचार क्या ही बहुमूल्य हैं! उनकी संख्या का जोड़ कैसा बड़ा है।
Psalms 139:18 यदि मैं उन को गिनता तो वे बालू के किनकों से भी अधिक ठहरते। जब मैं जाग उठता हूं, तब भी तेरे संग रहता हूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 25-26
  • लूका 12:32-59


Saturday, April 13, 2013

खमीर


   अमेरिका में मध्य-1800 के समय बहुत से लोग कैलिफोर्निया प्रांत के इलाकों में सोना खोजने के लिए निकले थे; फिर यही सोना खोजने की धुन 1890 के दशक में अलास्का प्रांत में भी देखी गई। दोनों ही समयों में उन खोजकर्ताओं में खमीरी रोटी बहुत प्रचलित हुई।। खमीर का एक गुण है कि वह बाहर से कोई परिवर्तन दिखाए बिना ही आटे को अन्दर ही अन्दर परिवर्तित करता रहता है और थोड़ा सा खमीर थोड़े ही समय में बहुत सा आटा खमीरा कर देता है। ये खोजकर्ता अपने साथ थोड़े से आटे में खमीर गूंध कर लिए चलते थे जिससे जहां भी वे पड़ाव डालें उस खमीरे आटे को नए आटे में मिलाकर अपनी पसंदीदा खमीरी रोटी बनाने का आटा शीघ्रता से तैयार कर लें।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में खमीर को बुराई का सूचक करके भी दिखाया गया है। बाइबल के नए नियम में खमीर को अधिकांशतः बिगाड़ने वाले प्रभाव के रूप में दिखाया गया है। प्रभु यीशु ने अपने चेलों को चेतावनी दी: "...कि फरीसियों के कपटरूपी खमीर से चौकस रहना" (लूका 12:1)। कपटी लोग बाहर से धार्मिकता का दिखावा करते हैं लेकिन अन्दर ही अन्दर उनके मन पापमय विचारों और व्यवहार से भरे रहते हैं। उनकी संगति मे रहने से उनका प्रभाव खमीर के समान अन्य लोगों में भी फैल जाता है, क्योंकि मनुष्य की स्वाभाविक प्रतिक्रीया है कि वह भलाई की बजाए बुराई का अनुसरण अधिक सरलता और सहजता से करता है।

   लेकिन प्रभु यीशु ने साथ ही यह चेतावनी भी दी है कि, "कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा" (लूका 12:2); अर्थात कभी ना कभी सब के मन की बातें, उनकी सच्चाई प्रकट हो ही जाएगी। परमेश्वर सब के सामने सब कुछ उजागर कर ही देगा। इस बात की सच्चाई और वास्तविकता हम अपने प्रतिदिन के समाचारों में देखते रहते हैं जहां एक के बाद एक बड़ी चतुराई और सफाई से किये गए घोटालों और बेईमानियों की पोल आए दिन खुलती रहती है और समाज में अच्छे और नामी समझे जाने वालों की काली करतूतें तथा वास्तविकता प्रकट होती रहती है।

   इसलिए बेहतर यही है कि हम परमेश्वर के भय में और उसको जवाबदेह होने को सदा स्मरण रखते हुए अपने जीवनों को उसके भय और आज्ञाकारिता में बिताएं जिससे फिर कभी बदनामी और जग-हंसाई का अवसर ना रहे। साथ ही पाप और बुराई के खमीर से सावधान रहें, उसे अपने जीवन से दूर ही रखें क्योंकि थोड़ा सा खमीर बहुत से आटे को खमीरा कर देता है। - डेनिस फिशर


और यदि तुम ऐसा न करो, तो यहोवा के विरुद्ध पापी ठहरोगे; और जान रखो कि तुम को तुम्हारा पाप लगेगा। - गिनती 32:23

थोड़ा सा खमीर सारे गूंधे हुए आटे को खमीरा कर डालता है। - गलतियों 5:9

बाइबल पाठ: लूका 12:1-7
Luke 12:1 इतने में जब हजारों की भीड़ लग गई, यहां तक कि एक दूसरे पर गिरे पड़ते थे, तो वह सब से पहिले अपने चेलों से कहने लगा, कि फरीसियों के कपटरूपी खमीर से चौकस रहना।
Luke 12:2 कुछ ढपा नहीं, जो खोला न जाएगा; और न कुछ छिपा है, जो जाना न जाएगा।
Luke 12:3 इसलिये जो कुछ तुम ने अन्‍धेरे में कहा है, वह उजाले में सुना जाएगा: और जो तुम ने कोठिरयों में कानों कान कहा है, वह कोठों पर प्रचार किया जाएगा।
Luke 12:4 परन्तु मैं तुम से जो मेरे मित्र हो कहता हूं, कि जो शरीर को घात करते हैं परन्तु उसके पीछे और कुछ नहीं कर सकते उन से मत डरो।
Luke 12:5 मैं तुम्हें चिताता हूं कि तुम्हें किस से डरना चाहिए, घात करने के बाद जिस को नरक में डालने का अधिकार है, उसी से डरो: वरन मैं तुम से कहता हूं उसी से डरो।
Luke 12:6 क्या दो पैसे की पांच गौरैयां नहीं बिकतीं? तौभी परमेश्वर उन में से एक को भी नहीं भूलता।
Luke 12:7 वरन तुम्हारे सिर के सब बाल भी गिने हुए हैं, सो डरो नहीं, तुम बहुत गौरैयों से बढ़कर हो।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 22-24
  • लूका 12:1-31


Friday, April 12, 2013

संकेत


   मेरे पति जे और मैं कार से जे के पिता से मिलने निकले जो दक्षिण कैरोलाइना में रहते थे। मार्ग अच्छा था और हम बिना किसी परेशानी के बढ़ते जा रहे थे। जब हम टेनिस्सी के मनोहर पहाड़ी रास्ते से होकर निकलने लगे तो कुछ समय पश्चात मुझे मार्ग के किनारे लगे संकेत दिखने आरंभ हो गए जो इस मार्ग को छोड़कर दूसरे मार्ग की ओर जाने को कह रहे थे। लेकिन जे फिर भी उसी मार्ग पर चलते जा रहे थे, इसलिए मैंने भी यह मान लिया कि ये संकेत हमारे लिए नहीं हैं, उन संकेतों के निर्देश हम पर लागू नहीं होते। लेकिन उत्तरी कैरोलाइना की सीमा के निकट आते आते मार्ग रुका हुआ मिला और वहां लिखा था कि आगे पहाड़ी मलबा गिरने के कारण मार्ग अवरुद्ध हो गया है। जे को बड़ा आश्चर्य हुआ और उन्होंने क्षुब्ध होकर कहा, "पहले से ही इसके संकेत क्यों नहीं दीए गए? अब कितना पीछे जाकर मार्ग बदलना पड़ेगा।" मैंने कहा, "तुमने देखा नहीं; मार्ग में तो बहुत से संकेत लगे हुए थे!" तो जे बोले, "नहीं, मैंने संकेतों की ओर ध्यान नहीं दिया; लेकिन तुमने मुझे क्यों नहीं बताया?" मेरा उत्तर था, "मैंने समझा तुम देख रहे हो और सही मार्ग जानते हो।" अब हम यह घटना अपने मित्रों को एक मनोरंजक कहानी के रूप में सुनाते हैं।

   लेकिन इस जीवन से आने वाले अनन्त जीवन को ले जाने वाले सही मार्ग के चुनाव के संकेतों की अनदेखी कोई मनोरंजक घटना नहीं होगी और ना ही फिर कोई वापसी का मार्ग होगा। मानव जाति के संपूर्ण इतिहास में परमेश्वर सभी लोगों को एक के बाद एक अनेक संकेत देता आया है कि सही मार्ग कौन सा है और किस पर उन्हें चलना चाहिए, लेकिन अधिकांश लोग उन संकेतों की अन्देखी कर के अपने ही बनाए और चुने मार्ग पर चलते जा रहे हैं।

   परमेश्वर ने अपने पुत्र प्रभु यीशु मसीह को समस्त मानव जाति के लिए पापों की क्षमा, उद्धार और अनन्त जीवन का मार्ग बनाकर दिया। अपने जीवन काल के समय में वह इस्त्राएल के लिए एक चिन्ह और संकेत थे (लूका 11:30)। किंतु इस्त्राएल के धार्मिक अगुवों ने उनकी चेतावनियों की अनदेखी करी और अपनी गलती के बारे में सुनना नहीं चाहा (पद 43, 45)। प्रभु यीशु ने संसार के अन्त और मानव जाति के न्याय के संबंध में भी अनेक चिन्ह बताए जो आज हमारे समय में एक के बाद एक पूरे होते जा रहे हैं। यह दिखाता है कि प्रभु यीशु का दूसरा आगमन और संसार का न्याय बहुत निकट है; पापों से पश्चाताप और उद्धार पाने का समय अब थोड़ा ही रह गया है।

   आज हम भी ऐसे ही हो सकते हैं। जब सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा होता है तो हम गलत मार्ग से सही मार्ग पर आने की चेतावनी संकेतों की अनदेखी करते रहते हैं। मार्ग का सुगम, तथा बाहरी दृश्य का मनोहर होना भी इस बात का निश्चय नहीं है कि मार्ग सही है। संकेतों की अनदेखी ना करें, चिन्हों पर ध्यान दें और उन्हें पहचाने, हाथ से निकला अवसर फिर नहीं मिलेगा। प्रभु यीशु आज एक प्रेमी उद्धारकर्ता के रूप में आपको बुला रहा है; ना हो कि उससे आपकी अगली मुलाकात संसार के न्यायी के रूप में हो। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर अपनी चेतावनियां हमें दण्डित करने के लिए नहीं, हमें सुरक्षित रखने के लिए देता है।

जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा। - लूका 11:30 

बाइबल पाठ: लूका 11:29-45
Luke 11:29 जब बड़ी भीड़ इकट्ठी होती जाती थी तो वह कहने लगा; कि इस युग के लोग बुरे हैं; वे चिन्ह ढूंढ़ते हैं; पर यूनुस के चिन्ह को छोड़ कोई और चिन्ह उन्हें न दिया जाएगा।
Luke 11:30 जैसा यूनुस नीनवे के लोगों के लिये चिन्ह ठहरा, वैसा ही मनुष्य का पुत्र भी इस युग के लोगों के लिये ठहरेगा।
Luke 11:31 दक्‍खिन की रानी न्याय के दिन इस समय के मनुष्यों के साथ उठ कर, उन्हें दोषी ठहराएगी, क्योंकि वह सुलैमान का ज्ञान सुनने को पृथ्वी की छोर से आई, और देखो यहां वह है जो सुलैमान से भी बड़ा है।
Luke 11:32 नीनवे के लोग न्याय के दिन इस समय के लोगों के साथ खड़े हो कर, उन्हें दोषी ठहराएंगे; क्योंकि उन्होंने यूनुस का प्रचार सुनकर मन फिराया और देखो, यहां वह है, जो यूनुस से भी बड़ा है।
Luke 11:33 कोई मनुष्य दीया बार के तलघरे में, या पैमाने के नीचे नहीं रखता, परन्तु दीवट पर रखता है कि भीतर आने वाले उजियाला पाएं।
Luke 11:34 तेरे शरीर का दीया तेरी आंख है, इसलिये जब तेरी आंख निर्मल है, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला है; परन्तु जब वह बुरी है, तो तेरा शरीर भी अन्‍धेरा है।
Luke 11:35 इसलिये चौकस रहना, कि जो उजियाला तुझ में है वह अन्‍धेरा न हो जाए।
Luke 11:36 इसलिये यदि तेरा सारा शरीर उजियाला हो, ओर उसका कोई भाग अन्‍धेरा न रहे, तो सब का सब ऐसा उलियाला होगा, जैसा उस समय होता है, जब दीया अपनी चमक से तुझे उजाला देता है।
Luke 11:37 जब वह बातें कर रहा था, तो किसी फरीसी ने उस से बिनती की, कि मेरे यहां भेजन कर; और वह भीतर जा कर भोजन करने बैठा।
Luke 11:38 फरीसी ने यह देखकर अचम्भा दिया कि उसने भोजन करने से पहिले स्‍नान नहीं किया।
Luke 11:39 प्रभु ने उस से कहा, हे फरीसियों, तुम कटोरे और थाली को ऊपर ऊपर तो मांजते हो, परन्तु तुम्हारे भीतर अन्‍धेर और दुष्‍टता भरी है।
Luke 11:40 हे निर्बुद्धियों, जिसने बाहर का भाग बनाया, क्या उसने भीतर का भाग नहीं बनाया?
Luke 11:41 परन्तु हां, भीतरवाली वस्‍तुओं को दान कर दो, तो देखो, सब कुछ तुम्हारे लिये शुद्ध हो जाएगा।
Luke 11:42 पर हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम पोदीने और सुदाब का, और सब भांति के साग-पात का दसवां अंश देते हो, परन्तु न्याय को और परमेश्वर के प्रेम को टाल देते हो: चाहिए तो था कि इन्हें भी करते रहते और उन्हें भी न छोड़ते।
Luke 11:43 हे फरीसियों, तुम पर हाय! तुम आराधनालयों में मुख्य मुख्य आसन और बाजारों में नमस्‍कार चाहते हो।
Luke 11:44 हाय तुम पर! क्योंकि तुम उन छिपी कब्रों के समान हो, जिन पर लोग चलते हैं, परन्तु नहीं जानते।
Luke 11:45 तब एक व्यवस्थापक ने उसको उत्तर दिया, कि हे गुरू, इन बातों के कहने से तू हमारी निन्‍दा करता है।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 शमूएल 19-21
  • लूका 11:29-54