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गुरुवार, 11 अक्टूबर 2018

अनुग्रह



      अमरीकी गृह युद्ध के अंतिम दिन, ऑफिसर जोशुआ चैमबरलेन विजयी यूनियन सेना का नेतृत्व कर रहे थे। जिस मार्ग से पराजित हुई कॉन्फेडरेट सेना को समर्पण के लिए निकलना था, उसकी दोनों ओर यूनियन सेना के जवान पंक्तिबद्ध खड़े थे। बड़ी नाज़ुक स्थिति थी, क्योंकि किसी के भी द्वारा कहा गया एक अपशब्द, कोई गलत भाव या प्रक्रिया, और वह वाँछित शान्ति तुरंत नरसंहार में परिवर्तित हो जाती। ऐसे में चैमबरलेन द्वारा अपने सैनिकों को दिया गया आदेश न केवल अत्यंत बुद्धिमता पूर्ण था, वरन मर्मस्पर्शी भी था; उन्होंने सैनिकों से कहा कि वे उस मार्ग से निकलने वाली पराजित सैनिकों को अपनी बंदूकें और तलवारें ऊँची उठा कर सलामी तथा आदर दें! कोई ताना नहीं, कोई तीखे शब्द नहीं, केवल सलामी में आदर देने के लिए उठाई गई तलवारें और बंदूकें।

      जब प्रभु यीशु मसीह ने, परमेश्वर के वचन बाइबल में लूका 6 में दर्ज क्षमा के विषय शिक्षा दी, तो वे हमारी सहायता कर रहे थे कि हम अनुग्रह के लोगों और अनुग्रह रहित लोगों के मध्य अन्तर को समझ सकें। हम मसीही विश्वासी, जिन्होंने प्रभु यीशु की क्षमा को अनुभव किया है, हमें औरों से बिलकुल भिन्न व्यक्ति होना है। हमें वैसे व्यवहार करना है, जिसे और लोग असंभव समझते हैं: अपने शत्रुओं को क्षमा करने और उनसे प्रेम करने वाले; जैसा कि प्रभु यीशु मसीह ने कहा था, “जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो” (लूका 6:36)।

      उस प्रभाव की कल्पना कीजिए जो हमारे कार्यस्थलों, और परिवारों में दिखाई देगा, जब हम प्रभु की इस शिक्षा को अपने जीवनों में लागू करेंगे। यदि सलामी देने मात्र से सेनाएं परस्पर एक हो सकती हैं, तो हम में होकर प्रतिबिंबित होने वाले प्रभु यीशु के अनुग्रह में कितनी अधिक सामर्थ्य होगी। पवित्रशास्त्र में हम इसके उदाहरण पाते हैं, जब एसव ने अपने धोखेबाज़ भाई को क्षमा करके गले लगाया (उत्पत्ति 33:4); महसूल लेने वाले ज़क्कई के आनन्द के साथ मन-फिराव करने में (लूका 19:1-10); और पिता द्वारा उड़ाऊ पुत्र को क्षमा के साथ वापस घर में स्वागत करके उसके स्थान पर बहाल करने में (लूका 15)।

      होने दें कि मसीह के अनुग्रह के द्वारा, हमारे बैरियों और विरोधियों के प्रति हमारी कड़ुवाहट का यह अंतिम दिन हो। - रैंडी किल्गोर


अनुग्रह के समक्ष क्रोध लगभग सदा ही लुप्त हो जाता है।

हे प्रियो अपना पलटा न लेना; परन्तु क्रोध को अवसर दो, क्योंकि लिखा है, पलटा लेना मेरा काम है, प्रभु कहता है मैं ही बदला दूंगा। परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा। बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो। - रोमियों 12:19-21

बाइबल पाठ: लूका 6:27-36
Luke 6:27 परन्तु मैं तुम सुनने वालों से कहता हूं, कि अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उन का भला करो।
Luke 6:28 जो तुम्हें श्राप दें, उन को आशीष दो: जो तुम्हारा अपमान करें, उन के लिये प्रार्थना करो।
Luke 6:29 जो तेरे एक गाल पर थप्पड़ मारे उस की ओर दूसरा भी फेर दे; और जो तेरी दोहर छीन ले, उसको कुरता लेने से भी न रोक।
Luke 6:30 जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे; और जो तेरी वस्तु छीन ले, उस से न मांग।
Luke 6:31 और जैसा तुम चाहते हो कि लोग तुम्हारे साथ करें, तुम भी उन के साथ वैसा ही करो।
Luke 6:32 यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी अपने प्रेम रखने वालों के साथ प्रेम रखते हैं।
Luke 6:33 और यदि तुम अपने भलाई करने वालों ही के साथ भलाई करते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी भी ऐसा ही करते हैं।
Luke 6:34 और यदि तुम उसे उधार दो, जिन से फिर पाने की आशा रखते हो, तो तुम्हारी क्या बड़ाई? क्योंकि पापी पापियों को उधार देते हैं, कि उतना ही फिर पाएं।
Luke 6:35 वरन अपने शत्रुओं से प्रेम रखो, और भलाई करो: और फिर पाने की आस न रखकर उधार दो; और तुम्हारे लिये बड़ा फल होगा; और तुम परमप्रधान के सन्तान ठहरोगे, क्योंकि वह उन पर जो धन्यवाद नहीं करते और बुरों पर भी कृपालु है।
Luke 6:36 जैसा तुम्हारा पिता दयावन्‍त है, वैसे ही तुम भी दयावन्‍त बनो।


एक साल में बाइबल: 
  • यशायाह 37-38
  • कुलुस्सियों 3



बुधवार, 9 नवंबर 2016

दीवारें


   दूसरे विश्वयुद्ध के बाद के वर्षों को "शीत युद्ध" का समय कहा जाता है, जिसमें देश एक-दूसरे को डराने-धमकाने और वर्चस्व के लिए एक-दूसरे पर पैंतरे आज़माते रहे। इस सुलगते हुए वैमनस्य का एक चिन्ह था बर्लिन शहर को विभाजित करने वाली दीवार, जिसे अगस्त 1961 में खड़ा किया गया, और जो लगभग तीन दशक तक शीत युद्ध का प्रबल चिन्ह बनी रही। फिर 9 नवंबर 1989 को यह घोषणा करी गई कि उस दीवार की पूर्व और पश्चिम, दोनों ओर रहने वाले नागरिक स्वतंत्रता पूर्वक दीवार के पार एक दूसरे के पास आ-जा सकते हैं। इसके एक वर्ष पश्चात उस दीवार को गिरा दिया गया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में यूसुफ के जीवन का वृतांत दिया गया है जो चिर-परिचित है। युसुफ अपने पिता का दुलारा बेटा था जिस कारण उसके अन्य भाई उससे ईर्ष्या तथा बैर करते थे (उत्पत्ति 37-50)। उन भाईयों मे अवसर पाकर यूसुफ को गुलामी में बेच दिया और पिता से झूठ बोल दिया कि यूसुफ को किसी जानवर ने मार डाला है। लेकिन यूसुफ ने अपने तथा अपने भाईयों के बीच बैर की दीवार खड़ी नहीं करी। वर्षों पश्चात, परमेश्वर की अद्भुत योजना और तरीकों से यूसुफ मिस्त्र का प्रधानमंत्री बन गया और जब उस इलाके में भयानक अकाल पड़ा तो यूसुफ के भाई, जो उसके बारे में अब कुछ नहीं जानते थे, उसके पास मिस्त्र में भोजन लेने आए। यूसुफ ने उन से दया और प्रेम का ही बर्ताव किया, उन्हें अपने पास मिस्त्र में रहने के लिए बुलाया और उनकी आशंकाओं को शांत करते तथा अपने संबंध को दृढ़ करते हुए उन से कहा, "यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। सो अब मत डरो: मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाल-बच्चों का पालन पोषण करता रहूंगा; इस प्रकार उसने उन को समझा बुझाकर शान्ति दी" (उत्पत्ति 50:20-21)।

   मनुष्यों द्वारा बनाई गई एक दमनात्मक दीवार 25 वर्ष से भी अधिक पहले ढा दी गई, जिससे वहाँ के निवासियों को परस्पर मिलने की स्वतंत्रता और परिवारों को फिर से एक हो जाने अवसर मिल गया। यदि आपने किसी के साथ क्रोध और विभाजन करने वाली कोई दीवारें खड़ी कर लीं हैं, तो परमेश्वर की सहायता से उन्हें ढा दें और प्रेम के साथ अपने संबंधों को पुनःस्थापित कर लें। - डेविड मैक्कैसलैंड


क्रोध तथा बैर जो दीवारें खड़ी करते हैं, प्रेम उन्हें गिरा देता है।

प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। - 1 कुरिन्थियों 13:4-7

बाइबल पाठ: उत्पत्ति 50:15-21
Genesis 50:15 जब यूसुफ के भाइयों ने देखा कि हमारा पिता मर गया है, तब कहने लगे, कदाचित यूसुफ अब हमारे पीछे पड़े, और जितनी बुराई हम ने उस से की थी सब का पूरा पलटा हम से ले। 
Genesis 50:16 इसलिये उन्होंने यूसुफ के पास यह कहला भेजा, कि तेरे पिता ने मरने से पहिले हमें यह आज्ञा दी थी, 
Genesis 50:17 कि तुम लोग यूसुफ से इस प्रकार कहना, कि हम बिनती करते हैं, कि तू अपने भाइयों के अपराध और पाप को क्षमा कर; हम ने तुझ से बुराई तो की थी, पर अब अपने पिता के परमेश्वर के दासों का अपराध क्षमा कर। उनकी ये बातें सुनकर यूसुफ रो पड़ा।
Genesis 50:18 और उसके भाई आप भी जाकर उसके साम्हने गिर पड़े, और कहा, देख, हम तेरे दास हैं। 
Genesis 50:19 यूसुफ ने उन से कहा, मत डरो, क्या मैं परमेश्वर की जगह पर हूं? 
Genesis 50:20 यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था; परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। 
Genesis 50:21 सो अब मत डरो: मैं तुम्हारा और तुम्हारे बाल-बच्चों का पालन पोषण करता रहूंगा; इस प्रकार उसने उन को समझा बुझाकर शान्ति दी।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 46-47
  • इब्रानियों 6


शनिवार, 26 जुलाई 2014

मित्र


   अमेरिका के गृह युद्ध के समय देश के दक्षिणी एवं उत्तरी भाग के निवासियों में परस्पर नफरत बैठ गई थी। एक अवसर पर जब राष्ट्रपति एब्राहम लिंकन ने विद्रोही दक्षिण अमेरिका के लोगों के साथ परोपकारी व्यवहार करने की बात कही तो एक आलोचक ने खड़े होकर उन्हें स्मरण दिलाया कि उत्तर तथा दक्षिण में युद्ध चल रहा है, दक्षिण अमेरिका के लोग विद्रोही हैं, शत्रु हैं और उनका नाश किया जाना चाहिए। प्रत्युत्तर में लिंकन ने बड़े शांत और शिष्ट रीति तथा बड़ी बुद्धिमानी से कहा: "जब मैं उन्हें अपने मित्र बना लूँगा तो शत्रु तो स्वतः ही नष्ट हो जाएंगे"।

   लिंकन की कही यह बात गंभीर है और प्रभु यीशु द्वारा अपने चेलों को दिए गए ’पहाड़ी सन्देश’ में दी गई शिक्षा के अनुसार है: "परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है" (मत्ती 5:44-45)।

   हम मसीही विश्वासियों को अपने जीवन में कठिन लोगों का सामना तो करना ही पड़ेगा; कुछ ऐसे भी होंगे जिनके साथ हमें अपने संपर्क एवं व्यवहार के लिए सीमाएं भी निर्धारित करनी पड़ेंगी। लेकिन ऐसे लोगों को भी चोट पहुँचाने अथवा उन्हें नीचा दिखाने से हमें बच कर रहना है क्योंकि यह परमेश्वर का मार्ग नहीं है। इसके विपरीत परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि हम ऐसे लोगों के लिए प्रार्थना करें, उनकी भलाई का सोचें, उनके प्रति संवेदनशील और सकारात्मक रवैया रखें। संभव है इससे कोई शत्रु मित्र में परिवर्तित हो जाए। आवश्यक नहीं कि हमारे इस भले व्यवाहार का प्रत्युत्तर प्रत्येक व्यक्ति सकारात्मक रीति से ही दे, लेकिन तब भी हमें उसके साथ एक सामंजस्यपूर्ण और भले संबंध के लिए प्रार्थना करनी है तथा योजना बनानी है।

  क्या आप किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं जिसके साथ आपके संबंध कठिन रहे हैं? प्रभु यीशु मसीह की शिक्षा एवं सहायता से उसे मित्र बना लेने की प्रक्रिया आरंभ कर लीजिए। - डेनिस फिशर


जब आप किसी की भलाई कर रहे हों तो उसके लिए आप से नफरत करना कठिन होगा।

बुराई के बदले बुराई मत करो; और न गाली के बदले गाली दो; पर इस के विपरीत आशीष ही दो: क्योंकि तुम आशीष के वारिस होने के लिये बुलाए गए हो। - 1 पतरस 3:9

बाइबल पाठ: मत्ती 5:43-48
Matthew 5:43 तुम सुन चुके हो, कि कहा गया था; कि अपने पड़ोसी से प्रेम रखना, और अपने बैरी से बैर। 
Matthew 5:44 परन्तु मैं तुम से यह कहता हूं, कि अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सताने वालों के लिये प्रार्थना करो। 
Matthew 5:45 जिस से तुम अपने स्‍वर्गीय पिता की सन्तान ठहरोगे क्योंकि वह भलों और बुरों दोनों पर अपना सूर्य उदय करता है, और धर्मियों और अधर्मियों दोनों पर मेंह बरसाता है। 
Matthew 5:46 क्योंकि यदि तुम अपने प्रेम रखने वालों ही से प्रेम रखो, तो तुम्हारे लिये क्या फल होगा? क्या महसूल लेने वाले भी ऐसा ही नहीं करते? 
Matthew 5:47 और यदि तुम केवल अपने भाइयों ही को नमस्‍कार करो, तो कौन सा बड़ा काम करते हो? क्या अन्यजाति भी ऐसा नहीं करते? 
Matthew 5:48 इसलिये चाहिये कि तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्‍वर्गीय पिता सिद्ध है।

एक साल में बाइबल: 
  • श्रेष्ठगीत 5-8


रविवार, 28 अप्रैल 2013

ईश-विरोधी


   हाल ही में मैंने एक पुस्तक सुनी - उस पुस्तक के लेखक ने स्वयं ही उसे पढ़कर रिकॉर्ड किया था। वह लेखक नास्तिकता का घोर समर्थक था और बड़े रोष, व्यंग्य और कटुता के साथ अपनी रचना को पढ़ रहा था और मैं सोच रहा था कि ऐसा क्यों है कि यह व्यक्ति इतनी कड़ुवाहट से भरा है? वह अपनी बात और अपने विचार सामन्य ढंग से और साधारण भाषा में भी तो व्यक्त कर सकता है!

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें बताती है कि जो परमेश्वर का इन्कार करते रहते हैं और उसकी चेतावनियों को नहीं मानते वे वास्तव में उसके प्रति और कटुता एवं घृणा रखने लग जाते हैं, क्योंकि फिर परमेश्वर भी उन्हें उनके मन की करने को स्वतंत्र छोड़ देता है और वे बद से बदतर होते जाते हैं: "और जब उन्होंने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा, इसलिये परमेश्वर ने भी उन्हें उन के निकम्मे मन पर छोड़ दिया; कि वे अनुचित काम करें। सो वे सब प्रकार के अधर्म, और दुष्टता, और लोभ, और बैरभाव, से भर गए; और डाह, और हत्या, और झगड़े, और छल, और ईर्ष्या से भरपूर हो गए, और चुगलखोर, बदनाम करने वाले, परमेश्वर के देखने में घृणित, औरों का अनादर करने वाले, अभिमानी, डींगमार, बुरी बुरी बातों के बनाने वाले, माता पिता की आज्ञा न मानने वाले। निर्बुद्धि, विश्वासघाती, मायारिहत और निर्दयी हो गए" (रोमियों 1:28-31)। परमेश्वर से मुँह मोड़ लेने से कोई मनुष्य धर्मनिरपेक्ष तटस्थता की ओर नहीं जाता, वरन धर्म तथा सदाचार से भी विमुख हो जाता है।

   संसार का इतिहास गवाह है कि जैसे जैसे समाज से परमेश्वर के नाम और नियमों को हटाने के प्रयास बढ़े हैं, समाज में अराजकता, आपसी कलह, दुराचार आदि भी बढ़ा है। ना मनुष्यों के ज्ञान ने और ना ही उनकी संपन्नता ने उन्हें सदाचार की ओर मोड़ा है; सबसे धनी और सबसे अधिक शिक्षित देशों में भी जहाँ जहाँ लोग परमेश्वर के विमुख हुए तो उनके समाज अशान्ति, तथा सामाजिक एवं नैतिक पतन की ओर ही गए हैं। जहाँ परमेश्वर का नाम और नियम आदर पाते हैं उन परिवारों और समाजों में शांति और सदाचारिता अन्य सभी से अधिक देखने को मिलती है।

   जब हम नास्तिक और अन्य मसीह विरोधी लोगों द्वारा परमेश्वर के विरुद्ध कार्य और प्रचार होते देखते-सुनते हैं तो हम मसीही विश्वासियों का क्या रवैया होना चाहिए? घृणा और बैर के प्रत्युत्तर में घृणा और बैर देना तो बहुत सरल है, परन्तु परमेश्वर का वचन हमें सिखाता है कि हम सत्य का बचाव विरोध से नहीं वरन प्रेम से करें: "और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें" (2 तिमुथियुस 2:25)। जब लोगों ने परमेश्वर की ओर से अपना मुँह फेरा और उसके विरोध में बातें करीं और कहीं, तो परमेश्वर ने तुरंत ही उनसे कोई बदला नहीं लिया। चाहे परमेश्वर ने उनके चुनाव के अनुसार उन्हें छोड़ दिया हो और उनसे सीधे-सीधे संपर्क ना रखा हो, परन्तु उसने उन्हें तजा कदापि नहीं; वरन हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दे दी कि हम अपने जीवन, प्रेम और उदाहरण से उन्हें उनकी गलती का एहसास कराएं और सच्चाई का नमूना उनके सामने रखें जिससे वे मन फिराव की ओर आ सकें।

   अगली बार जब आपका सामना किसी नास्तिक या ईश-विरोधी से हो, और चाहे आप उसकी कटुता से आहत भी हों, तो भी अपने रवैये का आंकलन अवश्य कर लें; और फिर परमेश्वर से मांगें कि वह आपको धैर्य और संयम का आत्मा दे जिससे आप नम्रता और प्रेम पूर्वक उसके सामने सत्य को जानने और अनुसरण करने का सजीव उदाहरण प्रस्तुत कर सकें। क्या जाने आपका उदाहरण और आपके जीवन की गवाही उसके जीवन में क्या परिवर्तन ले आए। - डेनिस फिशर


सत्य का बचाव प्रेम से ही संभव है।

और जब उन्होंने परमेश्वर को पहिचानना न चाहा, इसलिये परमेश्वर ने भी उन्हें उन के निकम्मे मन पर छोड़ दिया; - रोमियों 1:28

बाइबल पाठ: 2 तिमुथियुस 2:22-26
2 Timothy 2:22 जवानी की अभिलाषाओं से भाग; और जो शुद्ध मन से प्रभु का नाम लेते हैं, उन के साथ धर्म, और विश्वास, और प्रेम, और मेल-मिलाप का पीछा कर।
2 Timothy 2:23 पर मूर्खता, और अविद्या के विवादों से अलग रह; क्योंकि तू जानता है, कि उन से झगड़े होते हैं।
2 Timothy 2:24 और प्रभु के दास को झगड़ालू होना न चाहिए, पर सब के साथ कोमल और शिक्षा में निपुण, और सहनशील हो।
2 Timothy 2:25 और विरोधियों को नम्रता से समझाए, क्या जाने परमेश्वर उन्हें मन फिराव का मन दे, कि वे भी सत्य को पहिचानें।
2 Timothy 2:26 और इस के द्वारा उस की इच्छा पूरी करने के लिये सचेत हो कर शैतान के फंदे से छूट जाएं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 3-5 
  • लूका 20:1-26


शनिवार, 12 फ़रवरी 2011

सब बातों द्वारा भलाई

युसुफ के भाईयों ने उस की इमानदारी और खराई के कारण उससे बैर रखा और उसे मार डलने की योजना बनाई, फिर उसे दास होने के लिये बेच दिया, और वह दास बनाकर मिस्त्र ले जाया गया। लेकिन मिस्त्र में युसुफ वहां के शासक फिरौन का विश्वासपात्र बना और फिरौन ने उसे अपने बाद देश के दूसरे शासक होने का पद दिया और युसुफ की सूझ बूझ द्वारा मिस्त्र भयंकर अकाल का सामना कर सका और वहां भोजन सामग्री उपलब्ध रही। उस अकाल के समय यूसुफ के भाई मिस्त्र से भोजन लेने आये, वे यह नहीं जानते थे कि यूसुफ जीवित है और वह ही भोजन सामग्री के वितरण को नियंत्रित करता है। उन्होंने उसे नहीं पहचाना, लेकिन बाद में यूसुफ ने अपने आप को उनपर प्रगट किया और उनसे कहा: "अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।" ( उत्पत्ति ४५:५) और बाद में उनहें फिर दिलासा दी: "यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था, परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं।" ( उत्पत्ति ५०:२०)

मैं परमेश्वर का बहुत धन्यवादी और उससे आश्वस्त हूँ कि उसकी सामर्थ और बुद्धिमता के कारण उसके कोई भी उद्देश्य कभी विफल नहीं होते; यहां तक की वह लोगों के षड़यंत्रों और नुकसान की योजनाओं से भी भलाई उत्पन्न कर सकता है। मेरे लिये उसकी यह सामर्थ कि चाहे कोई मेरी कैसी भी बुराई करने का प्रयत्न करे, मेरा परमेश्वर मेरे लिये उसमें से भी मेरे लिये भलाई और अपनी महिमा उत्पन्न कर देगा बहुत उत्साहित, आश्वस्त और प्रोत्साहित करने वाली है।

जब हम परिस्थितियों, चुनौतियों और क्लेशों के कारण निराश हों तो हम परमेश्वर की बुद्धिमता, सामर्थ और सार्वभौमिकता में विश्वास रख कर आनन्दित हो सकते हैं - वह हमारे लिये सब बातों द्वारा हमारी भलाई ही करवा रहा है "और हम जानते हैं, कि जो लोग परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उन के लिये सब बातें मिलकर भलाई ही को उत्‍पन्न करती हैं, अर्थात उन्‍हीं के लिये जो उस की इच्‍छा के अनुसार बुलाए हुए हैं।" (रोमियों ८:२८) - रिचर्ड डी हॉन


ठोकर खाकर अटक जाना परमेश्वर द्वारा किसी नए और उत्तम मार्ग के खोले जाने का सूचक हो सकता है।

यद्यपि तुम लोगों ने मेरे लिये बुराई का विचार किया था, परन्तु परमेश्वर ने उसी बात में भलाई का विचार किया, जिस से वह ऐसा करे, जैसा आज के दिन प्रगट है, कि बहुत से लोगों के प्राण बचे हैं। - उत्पत्ति ५०:२०


बाइबल पाठ: उत्पत्ति ४५:१-८

तब यूसुफ उन सब के साम्हने, जो उसके आस पास खड़े थे, अपने को और रोक न सका और पुकार के कहा, मेरे आस पास से सब लोगों को बाहर कर दो। भाइयों के साम्हने अपने को प्रगट करने के समय यूसुफ के संग और कोई न रहा।
तब वह चिल्ला चिल्लाकर रोने लगा : और मिस्रियों ने सुना, और फिरौन के घर के लोगों को भी इसका समाचार मिला।
तब यूसुफ अपने भाइयों से कहने लगा, मैं यूसुफ हूं, क्या मेरा पिता अब तब जीवित है? इसका उत्तर उसके भाई न दे सके क्योंकि वे उसके साम्हने घबरा गए थे।
फिर यूसुफ ने अपने भाइयों से कहा, मेरे निकट आओ। यह सुनकर वे निकट गए। फिर उस ने कहा, मैं तुम्हारा भाई यूसुफ हूं, जिसको तुम ने मिस्र आनेहारों के हाथ बेच डाला था।
अब तुम लोग मत पछताओ, और तुम ने जो मुझे यहां बेच डाला, इस से उदास मत हो क्योंकि परमेश्वर ने तुम्हारे प्राणों को बचाने के लिये मुझे आगे से भेज दिया है।
क्योंकि अब दो वर्ष से इस देश में अकाल है और अब पांच वर्ष और ऐसे ही होंगे, कि उन में न तो हल चलेगा और न अन्न काटा जाएगा।
सो परमेश्वर ने मुझे तुम्हारे आगे इसी लिये भेजा, कि तुम पृथ्वी पर जीवित रहो, और तुम्हारे प्राणों के बचने से तुम्हारा वंश बढ़े।
इस रीति अब मुझ को यहां पर भेजने वाले तुम नहीं, परमेश्वर ही ठहरा: और उसी ने मुझे फिरौन का पिता सा, और उसके सारे घर का स्वामी, और सारे मिस्र देश का प्रभु ठहरा दिया है।


एक साल में बाइबल:
  • लैव्यवस्था १३
  • मत्ती २६:२६-५०