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Monday, November 30, 2015

ध्यान


   सी. एस. ल्युईस एक ऐसे व्यक्तिव थे जिनके लेख और रचनाओं ने बच्चों और विद्वानों, दोनों में ही समान रूप से मसीही विश्वास की अलख जागृत करी थी। सन 1963 में सी. एस. ल्युईस के देहांत के एक सप्ताह पश्चात उनके सहकर्मी और मित्रगण इंगलैंड में ऑक्सफोर्ड स्थित मैगडेलेन कॉलेज के प्रार्थना घर में उन्हें श्रद्धांजलि देने एकत्रित हुए। उस श्रद्धांजलि सभा में सी. एस. ल्युईस के एक करीबी मित्र औस्टिन फेरर ने बताया कि उनके लेखों और रचनाओं को पढ़ने वाले संसार भर के लोगों से जो भी पत्र ल्युईस के पास आते थे वे उन सबका अपने हाथ से लिखकर उत्तर देते थे; लोगों के प्रति उनका व्यवहार और आचरण सबको आदर देने और ध्यान रखने का था, इसीलिए वे आपके द्वारा उन्हें लिखे गए शब्दों का ध्यान रखते थे और अपने उत्तर से सम्मान देते थे।

   अपने इस व्यवहार से ल्युईस ने परमेश्वर के एक गुण को प्रदर्शित किया, परमेश्वर भी हमारी प्रार्थनाओं के प्रत्येक शब्द पर ध्यान रखता है, किसी बात को नज़रन्दाज़ नहीं करता। परमेश्वर के वचन बाइबल में, बड़ी कठिनाई के समय में भजनकार ने परमेश्वर की दोहाई दी (भजन 66:10-14)। बाद में भजनकार ने प्रभु परमेश्वर को उसके द्वारा दी गई सहायता के लिए उसका धन्यवाद और आराधना करते हुए कहा, "परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है" (भजन 66:19)।

    जब हम प्रार्थना में उसके पास आते हैं तो परमेश्वर हमारे शब्दों को भी सुनता है और हमारे मनों की वास्तविक दशा तथा आवश्यकताओं को भी जानता है। हम भी भजनकार के साथ कह सकते हैं, "धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है" (भजन 66:20)। परमेश्वर से करी गई हमारी प्रार्थनाएं उसके साथ हमारा एक गहरा संबम्ध बनाने का माध्यम बन जाती हैं। हमारी हर परिस्थिति में, हमारी हर आवश्यकता में, हर कठिनाई में वह हमारी प्रार्थनाओं पर ध्यान रखता है, उनका आदर करता है। - डेविड मैक्कैसलैंड


परमेश्वर का ध्यान सदा हम पर बना रहता है।

देख, यहोवा की दृष्टि सारी पृथ्वी पर इसलिये फिरती रहती है कि जिनका मन उसकी ओर निष्कपट रहता है, उनकी सहायता में वह अपना सामर्थ दिखाए। - 2 इतिहास 16:9

बाइबल पाठ: भजन 66:10-20
Psalms 66:10 क्योंकि हे परमेश्वर तू ने हम को जांचा; तू ने हमें चान्दी की नाईं ताया था। 
Psalms 66:11 तू ने हम को जाल में फंसाया; और हमारी कटि पर भारी बोझ बान्धा था; 
Psalms 66:12 तू ने घुड़चढ़ों को हमारे सिरों के ऊपर से चलाया, हम आग और जल से हो कर गए; परन्तु तू ने हम को उबार के सुख से भर दिया है।
Psalms 66:13 मैं होमबलि ले कर तेरे भवन में आऊंगा मैं उन मन्नतों को तेरे लिये पूरी करूंगा, 
Psalms 66:14 जो मैं ने मुंह खोल कर मानीं, और संकट के समय कही थीं। 
Psalms 66:15 मैं तुझे मोटे पशुओं के होमबलि, मेंढ़ों की चर्बी के धूप समेत चढ़ऊंगा; मैं बकरों समेत बैल चढ़ाऊंगा।
Psalms 66:16 हे परमेश्वर के सब डरवैयों आकर सुनो, मैं बताऊंगा कि उसने मेरे लिये क्या क्या किया है। 
Psalms 66:17 मैं ने उसको पुकारा, और उसी का गुणानुवाद मुझ से हुआ। 
Psalms 66:18 यदि मैं मन में अनर्थ बात सोचता तो प्रभु मेरी न सुनता। 
Psalms 66:19 परन्तु परमेश्वर ने तो सुना है; उसने मेरी प्रार्थना की ओर ध्यान दिया है।
Psalms 66:20 धन्य है परमेश्वर, जिसने न तो मेरी प्रार्थना अनसुनी की, और न मुझ से अपनी करूणा दूर कर दी है!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 37-39
  • 2पतरस 2



Sunday, November 29, 2015

धारणा


   एक दिन जब मैं किराने की दुकान से सामान खरीदने गया तो एक व्यक्ति ने मुझे चोर तो एक अन्य ने मुझे नायक समझ लिया। अपनी खरीद्दारी कर के जब मैं दुकान से बाहर निकलने को था तो दुकान के एक कर्मचारी ने मुझ से कहा, "श्रीमन, क्षमा कीजिए किंतु आपकी रेढ़ी में बहुत सी वस्तुएं ऐसी हैं जो थैलों में नहीं रखी गई हैं", और मेरी जाँच करने लगा। क्योंकि दुकानों से सामान चोरी करने वाले अकसर सामान को बिना थैलों में बाँधे बाहर ले जाते हैं, इसीलिए उस कर्मचारी ने मुझे रोका और जाँचा। जब उसने मेरे सामान का नीरिक्षण करने पर देखा कि मेरी खरीदी हुई वस्तुओं में से कई इतनी बड़ी थीं कि वे थैलों में नहीं रखी जा सकती थीं तो उसने मुझ से क्षमा मांगी और बाहर जाने की अनुमति दे दी।

   बाहर निकलकर जब मैं गाड़ी खड़ी करने के स्थान पर अपनी गाड़ी के निकट सामान लेकर पहुँचा तो पास से निकलती एक महिला ने मुझे देखा और बोली, "देश की रक्षा में योगदान करने के लिए धन्यवाद" और  आगे बढ़ गई। उस महिला को संभवतः मेरी टोपी देखकर यह गलतफहमी हुई कि मैं फौजी हूँ और उसने मुझे धन्यवाद बोला। उस दुकान के कर्मचारी और बाहर मिली उस महिला, दोनों ने मेरे बारे में जल्दबाज़ी में अपनी धारणा बना ली थी, और दोनों ही अपनी धारणा में गलत थे। प्रथमदृष्टया किसी के बारे में धारणा बना लेना बहुत सामान्य और सरल है, और हम प्रतिदिन के जीवन में ऐसा जाने-अनजाने अनेक बार करते रहते हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में एक घटना लिखी है, जब परमेश्वर ने अपने नबी शमूएल को यिशै के घर भेजा कि उसके पुत्रों में से एक को भविष्य में इस्त्राएल का राजा होने के लिए अभिषिक्त करे, तो उसने भी यही गलती करी, प्रथमदृष्टया ही अपनी धारणा बना ली कि किसे अभिषेक करना है। लेकिन परमेश्वर ने उससे कहा, "...न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है;..." (1 शमूएल 16:7)।

   परमेश्वर की सहायता लें कि वह आपको उसकी नज़रों से, उसके दृष्टिकोण के समान लोगों और संसार को देखना सिखाए, "...क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है" (1 शमूएल 16:7) और तब आप गलत धारणा बनाने से बचे रहेंगे। - डेनिस फिशर


प्रथमदृष्टया धारणाएं अकसर गलत निर्णय करवाती हैं।

और हे मेरे पुत्र सुलैमान! तू अपने पिता के परमेश्वर का ज्ञान रख, और खरे मन और प्रसन्न जीव से उसकी सेवा करता रह; क्योंकि यहोवा मन को जांचता और विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है उसे समझता है। यदि तू उसकी खोज में रहे, तो वह तुझ को मिलेगा; परन्तु यदि तू उसको त्याग दे तो वह सदा के लिये तुझ को छोड़ देगा। - 1 इतिहास 28:9

बाइबल पाठ: 1 शमूएल 16:1-7
1 Samuel 16:1 और यहोवा ने शमूएल से कहा, मैं ने शाऊल को इस्राएल पर राज्य करने के लिये तुच्छ जाना है, तू कब तक उसके विषय विलाप करता रहेगा? अपने सींग में तेल भर के चल; मैं तुझ को बेतलेहेमी यिशै के पास भेजता हूं, क्योंकि मैं ने उसके पुत्रों में से एक को राजा होने के लिये चुना है। 
1 Samuel 16:2 शमूएल बोला, मैं क्योंकर जा सकता हूं? यदि शाऊल सुन लेगा, तो मुझे घात करेगा। यहोवा ने कहा, एक बछिया साथ ले जा कर कहना, कि मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं। 
1 Samuel 16:3 और यज्ञ पर यिशै को न्योता देना, तब मैं तुझे जता दूंगा कि तुझ को क्या करना है; और जिस को मैं तुझे बताऊं उसी को मेरी ओर से अभिषेक करना। 
1 Samuel 16:4 तब शमूएल ने यहोवा के कहने के अनुसार किया, और बेतलहेम को गया। उस नगर के पुरनिये थरथराते हुए उस से मिलने को गए, और कहने लगे, क्या तू मित्रभाव से आया है कि नहीं? 
1 Samuel 16:5 उसने कहा, हां, मित्रभाव से आया हूं; मैं यहोवा के लिये यज्ञ करने को आया हूं; तुम अपने अपने को पवित्र कर के मेरे साथ यज्ञ में आओ। तब उसने यिशै और उसके पुत्रों को पवित्र कर के यज्ञ में आने का न्योता दिया। 
1 Samuel 16:6 जब वे आए, तब उसने एलीआब पर दृष्टि कर के सोचा, कि निश्चय जो यहोवा के साम्हने है वही उसका अभिषिक्त होगा। 
1 Samuel 16:7 परन्तु यहोवा ने शमूएल से कहा, न तो उसके रूप पर दृष्टि कर, और न उसके डील की ऊंचाई पर, क्योंकि मैं ने उसे अयोग्य जाना है; क्योंकि यहोवा का देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 35-36
  • 2पतरस 1


Saturday, November 28, 2015

आशीष


   अपनी पुस्तक Daring to Draw Near में लेखक डॉ. जौन व्हाईट लिखते हैं कि बहुत साल पहले परमेश्वर ने उनके लिए संभव किया कि वे अनेक सुविधाओं से युक्त एक सुन्दर और आलीशान घर ले सकें। उस घर को लेकर उनके भावनाएं नाट्कीय रूप से बदलती रहीं।

   जब वे अपने आप को स्मरण दिलाते कि वह घर उन्हें परमेश्वर ने भेंट किया है तो वे आनन्द और धन्यवाद से भर जाते। किंतु जब वे अपने घर की तुलना अन्य मित्रों के घर से करते तो उन्हें गर्व होता कि उनका घर कितना आलीशान है परन्तु साथ ही उनका आनन्द भी जाता रहता। घर की भव्यता पर ध्यान देने से उन्हें वह एक बोझ लगने लगता क्योंकि तब उन्हें वह बड़ा आलीशान स्थान घर नहीं वरन ढेर सारी दीवारें, बगीचे, पेड़-पौधे और बाड़े दिखाई देना लगता जिसकी देख-रेख तथा रख-रखाव में उन्हें निरंतर लगे रहना पड़ता था। अपने इन अनुभवों को लेकर व्हाईट ने कहा, "जब भी घमण्ड मेरी नज़रों को धुंधला और मेरे मन को बोझिल कर देता, कृतज्ञता मेरे बोझ को हलका कर देती और मेरी दृष्टि को स्पष्ट कर देती।"

   परमेश्वर के वचन बाइबल में सभोपदेशक की पुस्तक के लेखक ने भी जीवन में प्रत्येक भौतिक वस्तु का आनन्द ले पाने में परमेश्वर की उपस्थिति को अनुभव किया। लेखक ने पहिचाना कि अपने परिश्रम के फल को आनन्द के साथ भोग पाना, यहाँ तक कि उसे उन फलों का प्राप्त होना और उनसे आनन्दित हो सकना, सब परमेश्वर ही से था (सभोपदेशक 5:18-19)।

   हमारे जीवन के आरंभ से लेकर अन्त तक, समस्त जीवन परमेश्वर के अनुग्रह से हमें मिलती रहने वाली अविरल भेंट है। यदि हम हर बात के लिए और सदा यह स्मरण रखें कि अपने आप में हम किसी भी चीज़ को पाने के योग्य नहीं हैं और परमेश्वर किसी बात को हमें देने के लिए कभी भी बाध्य या हमारा ऋणी नहीं है, लेकिन फिर भी वह अनुग्रह और अनुकंपा में होकर हम पर अपनी आशीषें और भेंटें न्योछावर करता है तो फिर हम कभी ना तो अपनी आशीषों को लेकर स्वार्थी होंगे और ना ही उनका आनन्द लेने में दोषी अनुभव करेंगे।

   हमारी सभी आशीषें, वे चाहे आत्मिक हों या पार्थिव, सब हमारे अनुग्रहकारी दयालु परमेश्वर पिता से हैं, उनका सदुपयोग उसकी महिमा और हमारी उन्नति करेगा। - डेनिस जे. डीहॉन


परमेश्वर जो हमें इतना कुछ देता है, एक और बात भी देता है - एक कृतज्ञ मन। - हर्बर्ट

क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है। - याकूब 1:17

बाइबल पाठ: सभोपदेशक 5:13-20
Ecclesiastes 5:13 मैं ने धरती पर एक बड़ी बुरी बला देखी है; अर्थात वह धन जिसे उसके मालिक ने अपनी ही हानि के लिये रखा हो, 
Ecclesiastes 5:14 और वह किसी बुरे काम में उड़ जाता है; और उसके घर में बेटा उत्पन्न होता है परन्तु उसके हाथ मे कुछ नहीं रहता। 
Ecclesiastes 5:15 जैसा वह मां के पेट से निकला वैसा ही लौट जाएगा; नंगा ही, जैसा आया था, और अपने परिश्रम के बदले कुछ भी न पाएगा जिसे वह अपने हाथ में ले जा सके। 
Ecclesiastes 5:16 यह भी एक बड़ी बला है कि जैसा वह आया, ठीक वैसा ही वह जाएगा; उसे उस व्यर्थ परिश्रम से और क्या लाभ है? 
Ecclesiastes 5:17 केवल इसके कि उसने जीवन भर बेचैनी से भोजन किया, और बहुत ही दु:खित और रोगी रहा और क्रोध भी करता रहा? 
Ecclesiastes 5:18 सुन, जो भली बात मैं ने देखी है, वरन जो उचित है, वह यह कि मनुष्य खाए और पीए और अपने परिश्रम से जो वह धरती पर करता है, अपनी सारी आयु भर जो परमेश्वर ने उसे दी है, सुखी रहे: क्योंकि उसका भाग यही है। 
Ecclesiastes 5:19 वरन हर एक मनुष्य जिसे परमेश्वर ने धन सम्पत्ति दी हो, और उन से आनन्द भोगने और उस में से अपना भाग लेने और परिश्रम करते हुए आनन्द करने को शक्ति भी दी हो- यह परमेश्वर का वरदान है। 
Ecclesiastes 5:20 इस जीवन के दिन उसे बहुत स्मरण न रहेंगे, क्योंकि परमेश्वर उसकी सुन सुनकर उसके मन को आनन्दमय रखता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 33-34
  • 1पतरस 5


Friday, November 27, 2015

जीवन जल


   पृथ्वी के सबसे निर्जल स्थानों में से एक है पूर्वी अफ्रीका; इसीलिए उस इलाके के एक शहर का नाम "नैरिबी" होना बहुत रोचक बात है। यह नाम उस इलाके के एक कबीले, मसाई, की भाषा के एक वाक्यंश, जिसका अर्थ होता है "ठंडा पानी" से लिया गया है और नैरोबी का अर्थ है "जल का स्थान"।

   संसार के इतिहास में जल की उपस्थिति सदैव ही जीवन-दायक और सामरिक रही है। चाहे कोई निर्जल रेगिस्तान में रहे या फिर वर्षा-वन में, जीवन के लिए पानी का कोई विकल्प नहीं है; बिना जल के जीवन संभव नहीं है। किसी सूखे पर्यावरण वाले उजाड़ स्थान पर पानी के स्त्रोत का पता होना जीवन और मृत्यु को निर्धारित करता है।

   हमारे आत्मिक जीवन में भी कुछ बातें हैं जिनका कोई विकल्प नहीं है। इसीलिए जब एक कुएं पर प्रभु यीशु का साक्षात्कार एक आत्मिक रीति से प्यासी स्त्री से हुआ तो उन्होंने उससे कहा कि जिस जीवन जल की उसे आवश्यकता है वह जल उसे केवल वे ही दे सकते हैं। प्रभु ने उस स्त्री से कहा, "परन्तु जो कोई उस जल में से पीएगा जो मैं उसे दूंगा, वह फिर अनन्तकाल तक प्यासा न होगा: वरन जो जल मैं उसे दूंगा, वह उस में एक सोता बन जाएगा जो अनन्त जीवन के लिये उमड़ता रहेगा" (यूहन्ना 4:14)।

   हमारे मन परमेश्वर के लिए वैसे ही प्यासे होने चाहिएं जैसे जल के लिए हाँफने वाली प्यासी हिरणी की उपमा परमेश्वर के वचन बाइबल में दी गई है (भजन 42:1-2)। हमारी आत्मा केवल उस पोषण से ही तृप्त हो सकती है जो हमें प्रभु यीशु से मिलता है; क्योंकि केवल प्रभु यीशु ही जीवन जल का वह स्त्रोत है जो सबके मनों को तरोताज़ा कर सकता है, नया जीवन प्रदान कर सकता है, अनन्तकाल के लिए सन्तुष्ट कर सकता है। - बिल क्राउडर


प्रभु यीशु सारे संसार के सभी लोगों के लिए सेंत-मेंत उपलब्ध जीवन जल का सोता है।

हे परमेश्वर, तू मेरा ईश्वर है, मैं तुझे यत्न से ढूंढूंगा; सूखी और निर्जल ऊसर भूमि पर, मेरा मन तेरा प्यासा है, मेरा शरीर तेरा अति अभिलाषी है। - भजन 63:1

बाइबल पाठ: भजन 42:1-5
Psalms 42:1 जैसे हरिणी नदी के जल के लिये हांफती है, वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिये हांफता हूं। 
Psalms 42:2 जीवते ईश्वर परमेश्वर का मैं प्यासा हूं, मैं कब जा कर परमेश्वर को अपना मुंह दिखाऊंगा? 
Psalms 42:3 मेरे आंसू दिन और रात मेरा आहार हुए हैं; और लोग दिन भर मुझ से कहते रहते हैं, तेरा परमेश्वर कहां है? 
Psalms 42:4 मैं भीड़ के संग जाया करता था, मैं जयजयकार और धन्यवाद के साथ उत्सव करने वाली भीड़ के बीच में परमेश्वर के भवन को धीरे धीरे जाया करता था; यह स्मरण कर के मेरा प्राण शोकित हो जाता है। 
Psalms 42:5 हे मेरे प्राण, तू क्यों गिरा जाता है? और तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 30-32
  • 1पतरस 4


Thursday, November 26, 2015

वास्तविक प्रेम


   कुछ वर्ष पहले मेरी सहेली बेथ की माँ को दिमाग़ के एल्ज़ाईमर्स रोग का रोगी पाया गया, इस रोग का कोई इलाज नहीं है और इसका पीड़ित अपनी स्मरणशक्ति गंवाता तथा दूसरों पर निर्भर होता चला जाता है। तब से बेथ के लिए अपनी माँ की देखभाल करना अनेक कठिन और कष्टदायक निर्णयों का लेना बन गया है। अपनी ज़िन्दादिल और आनन्दप्रीय स्वभाव की माँ को धीरे धीरे कमज़ोर पड़ते तथा अपनी देखभाल के लिए दूसरों पर निर्भर होते देखना बेथ के लिए बहुत हृदयविदारक रहा है। इस प्रक्रिया के अनिभव से बेथ ने जाना है कि वास्तविक प्रेम सदा ही सरल या सुविधाजनक नहीं होता।

   पिछले वर्ष जब उसकी माँ को कुछ समय के लिए अस्पताल में भरती करना पड़ा था, बेथ ने अपने कुछ मित्रों को यह लिखा: "चाहे यह उल्टे रुख ही क्यों ना प्रतीत हो, अपनी माँ के साथ मैं जिस जीवन यात्रा पर हूँ, उसके लिए मैं बहुत धन्यवादी हूँ। उनकी स्मरणशक्ति क्षीण हो जाने, उलझनों में रहने और निःसहाय होने के पीछे एक अति सुन्दर व्यक्तित्व है जो जीवन से प्रेम करता है और अपने अन्दर पूर्णतः शान्ति से है। इस अनुभव से मैं सीख रही हूँ कि वास्तविक प्रेम क्या होता है। संभवतः स्वेच्छा से मैं कभी इस यात्रा और इसके साथ मिले दुखों तथा आँसुओं को पाने की चेष्टा कभी नहीं करती, लेकिन आज मैं इस अनुभव का सौदा किसी अन्य अनुभव से भी नहीं करूँगी।"

   परमेश्वर का वचन बाइबल हमें स्मरण दिलाती है कि प्रेम धीरजवन्त और कृपालु होता है। प्रेम स्वार्थ नहीं चाहता और ना ही शीघ्र क्रोधित होता है; जैसा बाइबल बताती है, "प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है" (1 कुरिन्थियों 13:4-7)।

   वास्तविक प्रेम का उद्गम परमेश्वर पिता से है, जिसने अपने एकलौते पुत्र प्रभु यीशु मसीह को हमारे लिए बलिदान कर दिया। हम मसीही विश्वासी जब परमेश्वर के इस प्रेम की गवाही लोगों के समक्ष रखने का प्रयास करते हैं तो हमें प्रभु यीशु मसीह के उदाहरण का अनुसरण करना उचित है, जिसने समस्त संसार के उद्धार और पापों से मुक्ति के लिए अपना जीवन न्योछावर कर दिया (1 यूहन्ना 3:16-18)। - सिंडी हैस कैसपर


वास्तविक प्रेम प्रभु यीशु के नाम से दूसरों की सहायता करना है, चाहे वे कभी इस भलाई को हमें वापस लौटा ना सकें।

हम ने प्रेम इसी से जाना, कि उसने हमारे लिये अपने प्राण दे दिए; और हमें भी भाइयों के लिये प्राण देना चाहिए। - 1 यूहन्ना 3:16

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 13:1-8
1 Corinthians 13:1 यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं। 
1 Corinthians 13:2 और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं। 
1 Corinthians 13:3 और यदि मैं अपनी सम्पूर्ण संपत्ति कंगालों को खिला दूं, या अपनी देह जलाने के लिये दे दूं, और प्रेम न रखूं, तो मुझे कुछ भी लाभ नहीं। 
1 Corinthians 13:4 प्रेम धीरजवन्‍त है, और कृपाल है; प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं। 
1 Corinthians 13:5 वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता। 
1 Corinthians 13:6 कुकर्म से आनन्‍दित नहीं होता, परन्तु सत्य से आनन्‍दित होता है। 
1 Corinthians 13:7 वह सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। 
1 Corinthians 13:8 प्रेम कभी टलता नहीं; भविष्यद्वाणियां हों, तो समाप्‍त हो जाएंगी, भाषाएं हो तो जाती रहेंगी; ज्ञान हो, तो मिट जाएगा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 27-29
  • 1पतरस 3


Wednesday, November 25, 2015

वचन


   जब मैं अंग्रेज़ी भाषा में लिखना सिखाती हूँ तो विद्यार्थियों को मेरा निर्देश होता है कि वे कक्षा में बैठकर ही लिखें। ऐसा इसलिए क्योंकि कक्षा में लिखा गया उनकी अपनी मौलिक कृति होता है, इस प्रकार मैं प्रत्येक विद्यार्थी की लेखन शैली से परिचित हो जाती हूँ, और यह भी जानने पाती हुँ कि कहीं उन्होंने किसी अन्य के लेख से अत्याधिक सामग्री नकल तो नहीं कर ली। विद्यार्थियों को यह जानकर अचरज होता है कि उन में से प्रत्येक की लेखन शैली, जिसमें उनके विचार और उन्हें प्रगट करने का तरीका सम्मिलित हैं, अन्य सभी से वैसे ही भिन्न होती है जैसे उनकी वाणी और बोलने की शैली। जैसे हमारा बोलना हमारे मन से होता है, वैसे ही हमारा लिखना भी; दोनों ही हमारे व्यक्तित्व को प्रकट करते हैं।

   हम परमेश्वर की वाणी से भी इसी प्रकार परिचित होते हैं - जो उसने अपने बारे में हमें बताया है उसे पढ़ने से हम जानने पाते हैं कि वह कौन है और अपने आप को कैसे प्रकट तथा व्यक्त करता है। हमें बरगलाने तथा परमेश्वर से भटकाने के लिए शैतान भी हमारे सामने परमेश्वर की समानता लेकर आता है (2कुरिन्थियों 11:14)। वह परमेश्वर के शब्दों को थोड़ा सा फेर-बदल करके प्रयोग करता है और उन बदली हुई बातों द्वारा लोगों को असत्य पर विश्वास करने के लिए युक्तिसंगत परन्तु झूठी दलीलें देता है। उदाहरणस्वरुप, उद्धार पाने के लिए प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास लाने, उससे पापों की क्षमा माँगने और उसे जीवन समर्पित करके उसकी आज्ञाकरिता में रहने की बजाए भक्तिपूर्ण प्रतीत होने वाले कार्यों, जैसे कि आत्मानुशासन, बाहरी क्रीया-कलापों और रिति-रिवाज़ों का पालन और उन्हें प्राथमिकता देना (कुलुस्सियों 2:23), आदि के द्वारा, अर्थात अपने कर्मों से परमेश्वर के राज्य में प्रवेश करने के प्रयास का मार्ग दिखाकर शैतान ने संसार के बहुतेरे लोगों को परमेश्वर के मार्ग और राज्य से भटका रखा है।

   यह सुनिश्चित करने के लिए कि मनुष्य उसकी वाणी को सुन और समझ सकें परमेश्वर ने जो कुछ हो सकता था वह किया। उसने ना केवल अपना वचन हमें बाइबल के रूप में लिखित दिया, वरन वचन को देहधारी करके (यूहन्ना 1:14) प्रभु यीशु के रूप में भी हमें दे दिया जिससे हम सरलता से बहकाए ना जाएं, उसके मार्ग से भटक ना जाएं। परमेश्वर का लिखित तथा जीवित वचन हमारे साथ, हमारे पास है - उसका भरपूर प्रयोग कीजिए, अधिकतम लाभ उठाईए; उसे आप ही के लिए उपलब्ध करवाया गया है। - जूले ऐकिअरमैन लिंक


तेरा वचन पूरी रीति से ताया हुआ है, इसलिये तेरा दास उस में प्रीति रखता है। - भजन 119:140

और यह कुछ अचंभे की बात नहीं क्योंकि शैतान आप भी ज्योतिमर्य स्वर्गदूत का रूप धारण करता है। - 2 कुरिन्थियों 11:14

बाइबल पाठ: यूहन्ना 1:1-18
John 1:1 आदि में वचन था, और वचन परमेश्वर के साथ था, और वचन परमेश्वर था। 
John 1:2 यही आदि में परमेश्वर के साथ था। 
John 1:3 सब कुछ उसी के द्वारा उत्पन्न हुआ और जो कुछ उत्पन्न हुआ है, उस में से कोई भी वस्तु उसके बिना उत्पन्न न हुई। 
John 1:4 उस में जीवन था; और वह जीवन मुनष्यों की ज्योति थी। 
John 1:5 और ज्योति अन्धकार में चमकती है; और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया। 
John 1:6 एक मनुष्य परमेश्वर की ओर से आ उपस्थित हुआ जिस का नाम यूहन्ना था। 
John 1:7 यह गवाही देने आया, कि ज्योति की गवाही दे, ताकि सब उसके द्वारा विश्वास लाएं। 
John 1:8 वह आप तो वह ज्योति न था, परन्तु उस ज्योति की गवाही देने के लिये आया था। 
John 1:9 सच्ची ज्योति जो हर एक मनुष्य को प्रकाशित करती है, जगत में आनेवाली थी। 
John 1:10 वह जगत में था, और जगत उसके द्वारा उत्पन्न हुआ, और जगत ने उसे नहीं पहिचाना। 
John 1:11 वह अपने घर आया और उसके अपनों ने उसे ग्रहण नहीं किया। 
John 1:12 परन्तु जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर के सन्तान होने का अधिकार दिया, अर्थात उन्हें जो उसके नाम पर विश्वास रखते हैं। 
John 1:13 वे न तो लोहू से, न शरीर की इच्छा से, न मनुष्य की इच्छा से, परन्तु परमेश्वर से उत्पन्न हुए हैं। 
John 1:14 और वचन देहधारी हुआ; और अनुग्रह और सच्चाई से परिपूर्ण हो कर हमारे बीच में डेरा किया, और हम ने उस की ऐसी महिमा देखी, जैसी पिता के एकलौते की महिमा। 
John 1:15 यूहन्ना ने उसके विषय में गवाही दी, और पुकारकर कहा, कि यह वही है, जिस का मैं ने वर्णन किया, कि जो मेरे बाद आ रहा है, वह मुझ से बढ़कर है क्योंकि वह मुझ से पहिले था। 
John 1:16 क्योंकि उस की परिपूर्णता से हम सब ने प्राप्त किया अर्थात अनुग्रह पर अनुग्रह। 
John 1:17 इसलिये कि व्यवस्था तो मूसा के द्वारा दी गई; परन्तु अनुग्रह, और सच्चाई यीशु मसीह के द्वारा पहुंची। 
John 1:18 परमेश्वर को किसी ने कभी नहीं देखा, एकलौता पुत्र जो पिता की गोद में हैं, उसी ने उसे प्रगट किया।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 24-26
  • 1पतरस 2


Tuesday, November 24, 2015

सिद्ध समय


   वह पुरानी कहावत, "सही समय ही सब कुछ है" बिल्कुल सटीक है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस का गल्तिया के मसीही विश्वासियों को लिखी पत्री कहा गया कथन, "परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा...." (गल्तियों 4:4) मेरे अन्दर बहुत कौतहूल जगाता है।

   संसार के इतिहास पर एक झलक डालने से समझ आता है कि प्रभु यीशु का जन्म वास्तव में बिल्कुल सही वक्त पर हुआ था। उनके जन्म से सदियों पहले सिकन्दर ने ग्रीस (यूनान) से निकलकर ज्ञात संसार के अधिकांश भाग को जीत लीया था और इससे उन सब स्थानों पर यूनानी भाषा और सभ्यता का एकीकृत करने वाला प्रभाव आ गया था। सिकन्दर की मृत्योप्रांत रोमी साम्राज्य ने अपना दबदबा कायम करना आरंभ किया और यूनानी सभ्यता तथा भाषा के एक जुट कर देने वाले प्रभाव को और आगे बढ़ाया। रोमी साम्राज्य में कैदियों को क्रूस द्वारा मृत्यु दण्ड देने की प्रथा आरंभ हुई, जो रोमी साम्राज्य के आरंभ होने के सैंकड़ों वर्ष पहले बाइबल में प्रभु यीशु से संबंधित भविष्यवाणियों में प्रभु की मृत्यु के लिए लिखी गई थी, और उसी के अनुसार क्रूस पर मसीह यीशु का बलिदान हुआ और फिर वह मृतकों में से जी उठा, जिसका उल्लेख उस समय के इतिहसकारों ने भी किया है। रोमी साम्राज्य के समय में ही प्रभु यीशु के सन्देश को सारे संसार में पहुँचाने के लिए उपयुक्त संसाधन - अच्छी सड़कें, सभी जगहों पर अधिकांशतः एक ही भाषा का प्रयोग और एक ही साम्राज्य होने के कारण देश तथा इलाके के सीमाओं को बिना प्रतिबंध पार करने की सुविधा, तैयार और लागू हुए। परमेश्वर के इंतिज़ाम ने अपने पुत्र को संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता के रूप में भेजने के लिए सारी तैयारी करवा कर ही उसे संसार में अपना उद्देश्य पूरा करने के लिए भेजा।

   हर बात, हर कार्य के लिए परमेश्वर का समय सिद्ध है। हो सकता है कि आज आप किसी बात को लेकर चिंतित हों, विचार कर रहे हों कि क्यों परमेश्वर आपके हित में कार्यवाही नहीं कर रहा है; लेकिन यह कभी ना भूलें कि चाहे दिखाई ना दे, प्रतीत ना हो, किंतु परमेश्वर पृष्ठभूमि में सदा कार्यरत रहता है जिससे सही समय पर अपने कार्य को आपके सामने प्रकट करे। उस पर विश्वास रखें, उसे पता है कि कब क्या और कैसे करना है; उसका समय सिद्ध है। - जो स्टोवैल


हे प्रभु हमें धैर्य रखने का अनुशासन सिखा, क्योंकि धैर्य के साथ प्रतीक्षा करना कार्य करने से अधिक कठिन होता है। - मार्शल

और कहा, समय पूरा हुआ है, और परमेश्वर का राज्य निकट आ गया है; मन फिराओ और सुसमाचार पर विश्वास करो। - मर्कुस 1:15

बाइबल पाठ: गल्तियों 3:26-4:7
Galatians 3:26 क्योंकि तुम सब उस विश्वास करने के द्वारा जो मसीह यीशु पर है, परमेश्वर की सन्तान हो। 
Galatians 3:27 और तुम में से जितनों ने मसीह में बपतिस्मा लिया है उन्होंने मसीह को पहिन लिया है। 
Galatians 3:28 अब न कोई यहूदी रहा और न यूनानी; न कोई दास, न स्‍वतंत्र; न कोई नर, न नारी; क्योंकि तुम सब मसीह यीशु में एक हो। 
Galatians 3:29 और यदि तुम मसीह के हो, तो इब्राहीम के वंश और प्रतिज्ञा के अनुसार वारिस भी हो।
Galatians 4:1 मैं यह कहता हूं, कि वारिस जब तक बालक है, यद्यपि सब वस्‍तुओं का स्‍वामी है, तौभी उस में और दास में कुछ भेद नहीं। 
Galatians 4:2 परन्तु पिता के ठहराए हुए समय तक रक्षकों और भण्‍डारियों के वश में रहता है। 
Galatians 4:3 वैसे ही हम भी, जब बालक थे, तो संसार की आदि शिक्षा के वश में हो कर दास बने हुए थे। 
Galatians 4:4 परन्तु जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा, जो स्त्री से जन्मा, और व्यवस्था के आधीन उत्पन्न हुआ। 
Galatians 4:5 ताकि व्यवस्था के आधीनों को मोल ले कर छुड़ा ले, और हम को लेपालक होने का पद मिले। 
Galatians 4:6 और तुम जो पुत्र हो, इसलिये परमेश्वर ने अपने पुत्र के आत्मा को, जो हे अब्‍बा, हे पिता कह कर पुकारता है, हमारे हृदय में भेजा है। 
Galatians 4:7 इसलिये तू अब दास नहीं, परन्तु पुत्र है; और जब पुत्र हुआ, तो परमेश्वर के द्वारा वारिस भी हुआ।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 22-23
  • 1पतरस 1


Monday, November 23, 2015

जीवित पत्रियाँ


   सन 1963 के नवम्बर माह में जिस दिन अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ़. कैनेडी की हत्या हुई, एक और प्रमुख अगुवे - क्लाईव स्टेप्ल्स ल्युईस की भी मृत्यु हुई। ऑक्सफॉर्ड के इस विद्वान ने, जिसे सामान्यतः सी. एस. ल्युईस के नाम से जाना जाता है, नास्तिकवाद को छोड़कर मसीही विश्वास को अपनाया था, और वह बहुतायत से लिखने वाला एक सफल लेखक था। उनकी कलम से बुद्धिमता से परिपूर्ण पुस्तकें, विज्ञान पर आधारित कहानियाँ, बच्चों के लिए काल्पनिक कहानियाँ बहुतायत से निकलती रहती थीं और प्रत्येक में एक बलवन्त मसीही सन्देश होता था। उनकी लेखनी को परमेश्वर ने बहुत से लोगों को मसीही विश्वास में लाने के लिए प्रयोग किया, जिनमें एक राजनितिक नेता और एक नोबल पुरुस्कार विजेता वैज्ञानिक भी हैं।

   परमेश्वर कुछ को अपनी लेखनी के द्वारा अन्य लोगों को मसीह यीशु के बारे में बताने के लिए प्रयोग करता है, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी अपने जीवन के द्वारा मसीह यीशु के लिए एक जीवित पत्री है। परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थ के मसीही विश्वासियों को लिखा: "यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है" (2 कुरिन्थियों 3:3)। ऐसा लिखने में निश्चय ही पौलुस का यह तात्पर्य नहीं था कि मसीही विश्वासी कागज़ के समान उपयोग होने के लिए हैं जिन पर स्याही से मसीह का सन्देश लिखा जाए। वरन उसका तात्पर्य था कि जैसे पत्रियों को पढ़कर सन्देश का अर्थ जाना जाता है वैसे ही हम मसीही विश्वासियों के जीवन भी हमारे प्रभु यीशु के सन्देश को संसार लोगों के सामने रखते हैं, और अपने व्यवहार तथा ईमानदारी के द्वारा हम ’जीवित पत्रियाँ’ होने का कार्य करते हैं।

   समाज पर जो प्रभाव सी. एस. ल्युईस ने डाला, वैसा प्रभाव बहुत कम लोग ही डाल सकते हैं, लेकिन प्रत्येक मसीही विश्वासी का जीवन और व्यवहार अपने तथा समस्त संसार के उद्धारकर्ता और मुक्तिदाता प्रभु यीशु के नाम गौरव और महिमा देने का कार्य कर सकता है। - डेनिस फिशर


जितने हमारे जीवनों को पढ़ते हैं उनके लिए हम मसीह यीशु के प्रेम की पत्री हैं।

उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के साम्हने चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई करें। - मत्ती 5:16

बाइबल पाठ: 2 कुरिन्थियों 3:1-11
2 Corinthians 3:1 क्या हम फिर अपनी बड़ाई करने लगे? या हमें कितनों कि नाईं सिफारिश की पत्रियां तुम्हारे पास लानी या तुम से लेनी हैं? 
2 Corinthians 3:2 हमारी पत्री तुम ही हो, जो हमारे हृदयों पर लिखी हुई है, और उसे सब मनुष्य पहिचानते और पढ़ते है। 
2 Corinthians 3:3 यह प्रगट है, कि तुम मसीह की पत्री हो, जिस को हम ने सेवकों की नाईं लिखा; और जो सियाही से नहीं, परन्तु जीवते परमेश्वर के आत्मा से पत्थर की पटियों पर नहीं, परन्तु हृदय की मांस रूपी पटियों पर लिखी है। 
2 Corinthians 3:4 हम मसीह के द्वारा परमेश्वर पर ऐसा ही भरोसा रखते हैं। 
2 Corinthians 3:5 यह नहीं, कि हम अपने आप से इस योग्य हैं, कि अपनी ओर से किसी बात का विचार कर सकें; पर हमारी योग्यता परमेश्वर की ओर से है। 
2 Corinthians 3:6 जिसने हमें नई वाचा के सेवक होने के योग्य भी किया, शब्द के सेवक नहीं वरन आत्मा के; क्योंकि शब्द मारता है, पर आत्मा जिलाता है। 
2 Corinthians 3:7 और यदि मृत्यु की यह वाचा जिस के अक्षर पत्थरों पर खोदे गए थे, यहां तक तेजोमय हुई, कि मूसा के मुंह पर के तेज के कराण जो घटता भी जाता था, इस्त्राएल उसके मुंह पर दृष्टि नहीं कर सकते थे। 
2 Corinthians 3:8 तो आत्मा की वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:9 क्योंकि जब दोषी ठहराने वाली वाचा तेजोमय थी, तो धर्मी ठहराने वाली वाचा और भी तेजोमय क्यों न होगी? 
2 Corinthians 3:10 और जो तेजोमय था, वह भी उस तेज के कारण जो उस से बढ़कर तेजामय था, कुछ तेजोमय न ठहरा। 
2 Corinthians 3:11 क्योंकि जब वह जो घटता जाता था तेजोमय था, तो वह जो स्थिर रहेगा, और भी तेजोमय क्यों न होगा?

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 20-21
  • याकूब 5


Sunday, November 22, 2015

छाया


   पचास से भी अधिक वर्ष पूर्व हुई अमेरिका के राष्ट्रपति जौन एफ. केनेडी की हत्या ने सारे विश्व के लोगों को स्तब्ध कर दिया था। हत्या के अगले दिन लंडन से प्रकाशित होने वाले समाचार पत्र ’द टाइम्स’ ने इस घटना के कारण सारे विश्व के आर्थिक बाज़ारों पर आए प्रभाव के बारे में लिखा। उस अखबार का मुख्य शीर्षक था, "अमेरीकी त्रासदी के छाया अन्य सभी बातों पर।"

   हमारे जीवनों में ऐसे समय आते हैं जब कोई मृत्यु, कोई त्रासदी या घटनाओं का अचानक मोड़े ले लेना अन्य हर एक बात से अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है, प्रत्येक बात पर पर छा जाता है। कुछ ऐसा ही लगभग दो हज़ार वर्ष से कुछ पूर्व एक कुँवारी युवती मरियम के साथ इस्त्राएल में हुआ - परमेश्वर के एक स्वर्गदूत जिब्राईल ने आकर उसे बताया कि वह परमेश्वर के पुत्र और संसार के उद्धारकर्ता की माँ बनेगी (लूका 1:26-33)। जब उस युवती ने स्वर्गदूत से पूछा कि ऐसा कैसे होगा, तो उस स्वर्गदूत ने उत्तर दिया, "...पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होनेवाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा" (लूका 1:35), और स्वर्गदूत को उसका प्रत्युत्तर आज भी हमें आश्चर्य में डाल देता है: "...देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो..." (लूका 1:38)। इतिहास गवाह है कि असंभव प्रतीत होने वाली इस घटना से मरियम के जीवन पर अन्धकार की नहीं वरन परमेश्वर की सामर्थ और महिमा की छाया आई।

   आते सप्ताहों में जब हम क्रिसमस की घटना और संसार में प्रभु यीशु के जन्म के बारे में और पढ़ेंगे तथा विचार करेंगे, तो इस शब्द ’छाया’ पर चिंतन करना लाभदायक रहेगा। यदि प्रभु यीशु की उपस्थिति हमारे जीवनों पर छाया करे तो वह हमारे जीवन के सबसे अन्धकारपूर्ण पलों को भी अपनी ज्योति से रौशन कर देगा। - डेविड मैक्कैसलैंड


हर परिस्थिति में परमेश्वर का सर्वसामर्थी प्रेम हम पर छाया किए रहता है।

परन्तु ये इसलिये लिखे गए हैं, कि तुम विश्वास करो, कि यीशु ही परमेश्वर का पुत्र मसीह है: और विश्वास कर के उसके नाम से जीवन पाओ। - यूहन्ना 20:31 

बाइबल पाठ: लूका 1:26-38
Luke 1:26 छठवें महीने में परमेश्वर की ओर से जिब्राईल स्वर्गदूत गलील के नासरत नगर में एक कुंवारी के पास भेजा गया। 
Luke 1:27 जिस की मंगनी यूसुफ नाम दाऊद के घराने के एक पुरूष से हुई थी: उस कुंवारी का नाम मरियम था। 
Luke 1:28 और स्वर्गदूत ने उसके पास भीतर आकर कहा; आनन्द और जय तेरी हो, जिस पर ईश्वर का अनुग्रह हुआ है, प्रभु तेरे साथ है। 
Luke 1:29 वह उस वचन से बहुत घबरा गई, और सोचने लगी, कि यह किस प्रकार का अभिवादन है? 
Luke 1:30 स्वर्गदूत ने उस से कहा, हे मरियम; भयभीत न हो, क्योंकि परमेश्वर का अनुग्रह तुझ पर हुआ है। 
Luke 1:31 और देख, तू गर्भवती होगी, और तेरे एक पुत्र उत्पन्न होगा; तू उसका नाम यीशु रखना। 
Luke 1:32 वह महान होगा; और परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा; और प्रभु परमेश्वर उसके पिता दाऊद का सिंहासन उसको देगा। 
Luke 1:33 और वह याकूब के घराने पर सदा राज्य करेगा; और उसके राज्य का अन्‍त न होगा। 
Luke 1:34 मरियम ने स्वर्गदूत से कहा, यह क्योंकर होगा? मैं तो पुरूष को जानती ही नहीं। 
Luke 1:35 स्वर्गदूत ने उसको उत्तर दिया; कि पवित्र आत्मा तुझ पर उतरेगा, और परमप्रधान की सामर्थ तुझ पर छाया करेगी इसलिये वह पवित्र जो उत्पन्न होने वाला है, परमेश्वर का पुत्र कहलाएगा। 
 Luke 1:36 और देख, और तेरी कुटुम्बिनी इलीशिबा के भी बुढ़ापे में पुत्र होने वाला है, यह उसका, जो बांझ कहलाती थी छठवां महीना है। 
Luke 1:37 क्योंकि जो वचन परमेश्वर की ओर से होता है वह प्रभावरहित नहीं होता। 
Luke 1:38 मरियम ने कहा, देख, मैं प्रभु की दासी हूं, मुझे तेरे वचन के अनुसार हो: तब स्वर्गदूत उसके पास से चला गया।

एक साल में बाइबल: 

  • यहेजकेल 18-19
  • याकूब 4


Saturday, November 21, 2015

नाम


   हमारे साथ मिशिगन में कुछ समय बिताने के बाद हमारी एक वर्षीय पोती मैगी और उसका परिवार वापस अपने घर मिसूरी चले गए। मैगी की माँ ने हमें बताया कि घर वापस लौटने के कुछ दिन बाद तक मैगी घर के अन्दर घूमते-फिरते बड़े आनन्द के साथ ’मिशिगन’, ’मिशिगन’ कहती रहती थी। उस नाम में कुछ था जिसने मैगी को आकर्षित किया; शायद उसका उच्चारण, शायद वह आनन्दायक समय जो उसने मिशिगन में हमारे साथ बिताया। वह क्या आकर्षण था यह एक वर्ष के बच्चे के विषय में कहना तो संभव नहीं है, लेकिन उस नाम ’मिशिगन’ ने मैगी पर ऐसा प्रभाव डाला था कि वह उसे बार बार लेने से रुक नहीं पा रही थी।

   यह मुझे एक और नाम का स्मरण दिलाता है - हमारे तथा समस्त जगत के उद्धारकर्ता प्रभु का नाम - यीशु, जिस नाम के लिए परमेश्वर के वचन बाइबल में लिखा गया है, "...परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है" (फिलिप्पियों 2:9)। क्यों यह नाम हम मसीही विश्वासियों को इतना प्रीय है? क्योंकि यह हमारे उद्धारकर्ता, हमें पापों से मुक्ति देने वाले, हमारी चिंता और रक्षा करने वाले, हमें अनन्त जीवन और परमेश्वर की सन्तान होने का अधिकार देने वाले का नाम है। जो संज्ञाएं प्रभु यीशु का वर्णन करती हैं उनमें कितनी गहराई है! जब हम यीशु के महान नाम का उल्लेख उन से करते हैं जिन्हें उसे मुक्तिदाता के रूप में स्वीकार करने की आवश्यकता है, तो हम उन्हें बता सकते हैं कि उसने हमारे तथा संसार के सभी लोगों के लिए क्या कुछ किया है, क्या कुछ सेंत-मेंत उपलब्ध करवाया है।

   यीशु हमारा उद्धारकर्ता है, उसने अपने लहु के द्वारा हमें छुड़ाया है, हम ने स्वेच्छा से अपने जीवन उसे समर्पित किए हैं और उसे अपना प्रभु स्वीकार किया है; और अब अपने व्यक्तिगत अनुभवों के आधार पर हम सब लोगों से बाइबल की बात निःसंकोच कह सकते हैं कि यीशु के नाम के अतिरिक्त और किसी नाम में उद्धार नहीं है (प्रेरितों 4:12), इसलिए संपूर्ण स्वर्ग और सारी पृथ्वी और उसके सब निवासी यीशु नाम को महिमा दें उसका आदर करें। - डेव ब्रैनन


समस्त सृष्टि में सबसे बहुमूल्यतम नाम है यीशु।

और किसी दूसरे के द्वारा उद्धार नहीं; क्योंकि स्वर्ग के नीचे मनुष्यों में और कोई दूसरा नाम नहीं दिया गया, जिस के द्वारा हम उद्धार पा सकें। - प्रेरितों 4:12

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:5-11
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। 
Philippians 2:6 जिसने परमेश्वर के स्‍वरूप में हो कर भी परमेश्वर के तुल्य होने को अपने वश में रखने की वस्तु न समझा। 
Philippians 2:7 वरन अपने आप को ऐसा शून्य कर दिया, और दास का स्‍वरूप धारण किया, और मनुष्य की समानता में हो गया। 
Philippians 2:8 और मनुष्य के रूप में प्रगट हो कर अपने आप को दीन किया, और यहां तक आज्ञाकारी रहा, कि मृत्यु, हां, क्रूस की मृत्यु भी सह ली। 
Philippians 2:9 इस कारण परमेश्वर ने उसको अति महान भी किया, और उसको वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है। 
Philippians 2:10 कि जो स्वर्ग में और पृथ्वी पर और जो पृथ्वी के नीचे हैं; वे सब यीशु के नाम पर घुटना टेकें। 
Philippians 2:11 और परमेश्वर पिता की महिमा के लिये हर एक जीभ अंगीकार कर ले कि यीशु मसीह ही प्रभु है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 16-17
  • याकूब 3


Friday, November 20, 2015

वास्तविक चिंता


   परिवारों के लिए आयोजित एक शिविर की पहली रात को शिविर के निर्देशक ने उपस्थित सभी परिवारों को उस पूरे सप्ताह का कार्यक्रम बताया और अपनी बात समाप्त करते हुए पूछा कि किसी को कुछ और कहना या जानना है? एक युवा लड़की ने खड़े होकर सबसे सहायता के लिए भावुक निवेदन किया। उसने अपने छोटे भाई के बारे में बताया, जिसे कुछ शारीरिक कमज़ोरियाँ थीं जिनके कारण उसकी देखभाल करना एक चुनौती भरा कार्य था, और यह कार्य उसके परिवार के लिए कठिन तथा थका देने वाला हो जाता था; इसलिए उसका सबसे निवेदन था कि वे उसके भाई पर नज़र बनाए रखें जिससे उसकी देखभाल ठीक से करी जा सके। उसका यह निवेदन अपने माता-पिता तथा अपने भाई के लिए उसकी वास्तविक चिंता के कारण था। जैसे जैसे शिविर में वह सप्ताह बीतता गया, लोगों द्वारा उस परिवार को लगातार दी जा रही सहायता देखना बहुत उत्साहवर्धक था।

   उस युवती का निवेदन हमें यह स्मरण दिलाता है कि कैसे अपने ही संसार, जीवन और समस्याओं में उलझ कर हम दूसरों के प्रति असंवेदनशील हो जाते हैं और उनकी समस्याओं के प्रति ध्यान देने से चूक जाते हैं। लेकिन परमेश्वर के वचन बाइबल में हम मसीही विश्वासियों को यह ज़िम्मेदारी दी गई है कि जैसे हमारा प्रभु हमारी चिंता करता है वैसे ही हम भी दूसरों की सहायता के लिए जागरूक रहें: "हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो" (फिलिप्पियों 2:4-5)।

   हमारे प्रभु यीशु मसीह की हमारे प्रति चिंता और देखभाल हमें दुखी लोगों की चिंता और देखभाल करने को प्रेरित करती है। परमेश्वर पिता के अनुग्रह में हमें मिलने वाला विश्राम और उस पर हमारा विश्वास दूसरों के दुख के समयों में उनके प्रति वास्तविक चिंता तथा उनकी देखभाल करने में प्रकट होता है। - बिल क्राउडर


दूसरों की वास्तविक देखभाल तथा चिंता करने जितना महंगा और कुछ नहीं है; सिवाए देखभाल और चिंता ना करने के।

प्रभु यीशु ने कहा: "हे सब परिश्रम करने वालों और बोझ से दबे लोगों, मेरे पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा।" - मत्ती 11:28

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 2:1-5
Philippians 2:1 सो यदि मसीह में कुछ शान्‍ति और प्रेम से ढाढ़स और आत्मा की सहभागिता, और कुछ करूणा और दया है। 
Philippians 2:2 तो मेरा यह आनन्द पूरा करो कि एक मन रहो और एक ही प्रेम, एक ही चित्त, और एक ही मनसा रखो। 
Philippians 2:3 विरोध या झूठी बड़ाई के लिये कुछ न करो पर दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो। 
Philippians 2:4 हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। 
Philippians 2:5 जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 14-15
  • याकूब 2


Thursday, November 19, 2015

यात्रा


   हाल ही में मैंने अपने साथ कॉलेज से स्नात्क होने वाले छात्रों के बारे में पता लगाया, और पाया कि मेरे साथ के कई विद्यार्थी अब संसार से कूच कर चुके हैं; जीवन के अल्पकालीन होने का यह गंभीर स्मरण था। परमेश्वर के वचन बाइबल में मनुष्य की आयु के लिए लिखा है, "हमारी आयु के वर्ष सत्तर तो होते हैं, और चाहे बल के कारण अस्सी वर्ष के भी हो जाएं, तौभी उनका घमण्ड केवल नष्ट और शोक ही शोक है; क्योंकि वह जल्दी कट जाती है, और हम जाते रहते हैं" (भजन 90:10) - बस अस्सी वर्ष के लगभग और हमारे संसार से कूच करके अनन्तकाल में प्रवेश करने का समय हो जाता है। भजनकार सही है, हम इस पृथ्वी पर परदेशी और यात्री ही तो हैं (भजन 39:12)।

   जीवन के अल्पकालीन होने के कारण हमें अपने ’अन्त’ तथा अनन्त, दोनों के बारे में गंभीरता से विचार कर लेना चाहिए, यह जानते हुए कि हम कैसे अनित्य हैं (भजन 39:4); और जैसे जैसे हमारा अन्त समय निकट आता जाता है, यह भावना और प्रबल होती जाती है कि संसार हमारा घर नहीं है, हम तो यहाँ परदेशी और यात्री मात्र हैं। लेकिन हम मसीही विश्वासियों को एक बहुत सामर्थी आश्वासन भी है - इस यात्रा में हम अकेले नहीं हैं; हमारा परमेश्वर पिता भी हमारे हर पल, हर पग में हमारे साथ बना रहता है। इस कारण यात्री और परदेशी होने तथा अनन्तकाल व्यतीत करने संसार से बाहर जाने का विचार हमारे लिए कम परेशानी, कम भय और कम चिंता उत्पन्न करने वाला है। इस संसार में भी और आने वाले संसार में भी हमारा प्रेमी स्वर्गीय पिता हमारा सहायक तथा मार्गदर्शक बनकर सदा हमारे साथ रहता है (मत्ती 28:20); अपनी यात्रा में हम कभी अकेले नहीं होते (भजन 73:24-25)।

   हमारे माता-पिता, जीवन साथी, मित्रगण हमारी नज़रों से ओझल हो सकते हैं, लेकिन हम जानते हैं कि परमेश्वर सदा हमारे साथ बना रहता है, और जैसा एक पुरानी कहावत है, ’अच्छे साथी के साथ मार्ग सरल प्रतीत होता है’ - इस लोक तथा आते लोक, दोनों में परमेश्वर का साथ हमारी यात्रा को सरल और सार्थक बना देता है। - डेविड रोपर


जीवन के थका देने वाले मार्ग पर प्रभु यीशु आपका भारी बोझ उठाना चाहता है।

तू सम्मति देता हुआ, मेरी अगुवाई करेगा, और तब मेरी महिमा कर के मुझ को अपने पास रखेगा। स्वर्ग में मेरा और कौन है? तेरे संग रहते हुए मैं पृथ्वी पर और कुछ नहीं चाहता। - भजन 73:24-25

बाइबल पाठ: - भजन 39
Psalms 39:1 मैं ने कहा, मैं अपनी चाल चलन में चौकसी करूंगा, ताकि मेरी जीभ से पाप न हो; जब तक दुष्ट मेरे साम्हने है, तब तक मैं लगाम लगाए अपना मुंह बन्द किए रहूंगा। 
Psalms 39:2 मैं मौन धारण कर गूंगा बन गया, और भलाई की ओर से भी चुप्पी साधे रहा; और मेरी पीड़ा बढ़ गई, 
Psalms 39:3 मेरा हृदय अन्दर ही अन्दर जल रहा था। सोचते सोचते आग भड़क उठी; तब मैं अपनी जीभ से बोल उठा; 
Psalms 39:4 हे यहोवा ऐसा कर कि मेरा अन्त मुझे मालुम हो जाए, और यह भी कि मेरी आयु के दिन कितने हैं; जिस से मैं जान लूं कि कैसा अनित्य हूं! 
Psalms 39:5 देख, तू ने मेरे आयु बालिश्त भर की रखी है, और मेरी अवस्था तेरी दृष्टि में कुछ है ही नहीं। सचमुच सब मनुष्य कैसे ही स्थिर क्यों न हों तौभी व्यर्थ ठहरे हैं। 
Psalms 39:6 सचमुच मनुष्य छाया सा चलता फिरता है; सचमुच वे व्यर्थ घबराते हैं; वह धन का संचय तो करता है परन्तु नहीं जानता कि उसे कौन लेगा! 
Psalms 39:7 और अब हे प्रभु, मैं किस बात की बाट जोहूं? मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है। 
Psalms 39:8 मुझे मेरे सब अपराधों के बन्धन से छुड़ा ले। मूढ़ मेरी निन्दा न करने पाए। 
Psalms 39:9 मैं गूंगा बन गया और मुंह न खोला; क्योंकि यह काम तू ही ने किया है। 
Psalms 39:10 तू ने जो विपत्ति मुझ पर डाली है उसे मुझ से दूर कर दे, क्योंकि मैं तो तेरे हाथ की मार से भस्म हुआ जाता हूं। 
Psalms 39:11 जब तू मनुष्य को अधर्म के कारण डाँट डपटकर ताड़ना देता है; तब तू उसकी सुन्दरता को पतंगे की नाईं नाश करता है; सचमुच सब मनुष्य व्यर्थ अभिमान करते हैं।
Psalms 39:12 हे यहोवा, मेरी प्रार्थना सुन, और मेरी दोहाई पर कान लगा; मेरा रोना सुनकर शांत न रह! क्योंकि मैं तेरे संग एक परदेशी यात्री की नाईं रहता हूं, और अपने सब पुरखाओं के समान परदेशी हूं। 
Psalms 39:13 आह! इस से पहिले कि मैं यहां से चला जाऊं और न रह जाऊं, मुझे बचा ले जिस से मैं प्रदीप्त जीवन प्राप्त करूं!

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 11-13
  • याकूब 1


Wednesday, November 18, 2015

पुनःस्वागत


   जिम ने दस वर्ष की आयु में प्रभु यीशु के पीछे चलने का निर्णय किया था। इसके पन्द्रह वर्ष बाद उसका यह समर्पण फीका पड़ चुका था। उसने परिस्थिति और आवश्यकतानुसार जीवन जीने का दृष्टिकोण अपना लिया था और उसके जीवन में अनेक बुरी आदतें और बातें आ गई थीं। फिर उसका जीवन बिखर सा गया; उसके कार्य में समस्याएं आईं, उसके परिवार के तीन सदस्य एक के बाद एक करके जाते रहे, जिम को डर और संदेह सताने लगे, और कोई भी, कुछ भी उसकी सहायता नहीं कर पा रहा था। एक दिन जिम ने परमेश्वर के वचन बाइबल से भजन 121:2 पढ़ा: "मुझे सहायता यहोवा की ओर से मिलती है, जो आकाश और पृथ्वी का कर्ता है"; बाइबल के इन शब्दों ने उसके मन से सारी निराशा, संदेह और डर को निकाल डाला। वह सहायता के लिए परमेश्वर की ओर मुड़ा, और परमेश्वर ने सहर्ष उसे अपने पास स्वीकार कर लिया (लूका 15:22, 24)।

   जिम के आत्मिक जीवन की यह यात्रा मुझे प्राचीन इस्त्राएल के इतिहास की याद दिलाती है। परमेश्वर के साथ इस्त्रएलियों का एक अनूठा रिश्ता था - वे उसके चुने हुए लोग थे (नहेम्याह 9:1-15)। लेकिन फिर भी उन इस्त्राएलियों ने अनेक वर्ष परमेश्वर की भलाईयों को नज़रंदाज़ करने, अपनी इच्छानुसार चलने और परमेश्वर के निर्देशों तथा शिक्षाओं के विरुद्ध बलवा करने में बिताए थे (नहेम्याह 9:16-21)। लेकिन जब वे इस्त्राएली अपने पापों से पश्चाताप करके परमेश्वर की ओर मुड़े तो परमेश्वर ने उन्हें स्वीकार कर लिया क्योंकि वह "...क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है" (नहेम्याह 9:17)।

   परमेश्वर के ये गुण हमें उत्साहित करते हैं कि हम परमेश्वर की निकटता में आएं - चाहे हम उससे कितने भी समय पहले, कितनी ही दूर ही क्यों ना चले गए हों। हम जब भी नम्र मन के साथ उसे समर्पित रहने, अपने विरोधी स्वभाव को त्यागकर पुनः परमेश्वर की इच्छानुसार चलने का निर्णय लेते हैं, वह अपने अनुग्रह और दया में होकर हमारा पुनःस्वागत करता है, हमें फिर से अपने साथ ले लेता है। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


परमेश्वर की बाहें हमारा स्वागत करने के लिए सदा खुली रहती हैं।

परन्तु पिता ने अपने दासों से कहा; फट अच्‍छे से अच्छा वस्‍त्र निकाल कर उसे पहिनाओ, और उसके हाथ में अंगूठी, और पांवों में जूतियां पहिनाओ। क्योंकि मेरा यह पुत्र मर गया था, फिर जी गया है: खो गया था, अब मिल गया है: और वे आनन्द करने लगे। - लूका 15:22, 24

बाइबल पाठ: नहेम्याह 9:7-21
Nehemiah 9:7 हे यहोवा! तू वही परमेश्वर है, जो अब्राहाम को चुनकर कसदियों के ऊर नगर में से निकाल लाया, और उसका नाम इब्राहीम रखा; 
Nehemiah 9:8 और उसके मन को अपने साथ सच्चा पाकर, उस से वाचा बान्धी, कि मैं तेरे वंश को कनानियों, हित्तियों, एमोरियों, परिज्जियों, यबूसियों, और गिर्गाशियों का देश दूंगा; और तू ने अपना वह वचन पूरा भी किया, क्योंकि तू धमीं है। 
Nehemiah 9:9 फिर तू ने मिस्र में हमारे पुरखाओं के दु:ख पर दृष्टि की; और लाल समुद्र के तट पर उनकी दोहाई सुनी। 
Nehemiah 9:10 और फ़िरौन और उसके सब कर्मचारी वरन उसके देश के सब लोगों को दण्ड देने के लिये चिन्ह और चमत्कार दिखाए; क्योंकि तू जानता था कि वे उन से अभिमान करते हैं; और तू ने अपना ऐसा बड़ा नाम किया, जैसा आज तक वर्तमान है। 
Nehemiah 9:11 और तू ने उनके आगे समुद्र को ऐसा दो भाग किया, कि वे समुद्र के बीच स्थल ही स्थल चलकर पार हो गए; और जो उनके पीछे पड़े थे, उन को तू ने गहिरे स्थानों में ऐसा डाल दिया, जैसा पत्थर महाजलराशि में डाला जाए। 
Nehemiah 9:12 फिर तू ने दिन को बादल के खम्भे में हो कर और रात को आग के खम्भे में हो कर उनकी अगुआई की, कि जिस मार्ग पर उन्हें चलना था, उस में उन को उजियाला मिले। 
Nehemiah 9:13 फिर तू ने सीनै पर्वत पर उतर कर आकाश में से उनके साथ बातें की, और उन को सीधे नियम, सच्ची व्यवस्था, और अच्छी विधियां, और आज्ञाएं दीं। 
Nehemiah 9:14 और उन्हें अपने पवित्र विश्राम दिन का ज्ञान दिया, और अपने दास मूसा के द्वारा आज्ञाएं और विधियां और व्यवस्था दीं। 
Nehemiah 9:15 और उनकी भूख मिटाने को आकाश से उन्हें भोजन दिया और उनकी प्यास बुझाने को चट्टान में से उनके लिये पानी निकाला, और उन्हें आज्ञा दी कि जिस देश को तुम्हें देने की मैं ने शपथ खाई है उसके अधिकारी होने को तुम उस में जाओ। 
Nehemiah 9:16 परन्तु उन्होंने और हमारे पुरखाओं ने अभिमान किया, और हठीले बने और तेरी आज्ञाएं न मानी; 
Nehemiah 9:17 और आज्ञा मानने से इनकार किया, और जो आश्चर्यकर्म तू ने उनके बीच किए थे, उनका स्मरण न किया, वरन हठ करके यहां तक बलवा करने वाले बने, कि एक प्रधान ठहराया, कि अपने दासत्व की दशा में लौटे। परन्तु तू क्षमा करने वाला अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करने वाला, और अतिकरुणामय ईश्वर है, तू ने उन को न त्यागा। 
Nehemiah 9:18 वरन जब उन्होंने बछड़ा ढालकर कहा, कि तुम्हारा परमेश्वर जो तुम्हें मिस्र देश से छुड़ा लाया है, वह यही है, और तेरा बहुत तिरस्कार किया, 
Nehemiah 9:19 तब भी तू जो अति दयालु है, उन को जंगल में न त्यागा; न तो दिन को अगुआई करने वाला बादल का खम्भा उन पर से हटा, और न रात को उजियाला देने वाला और उनका मार्ग दिखाने वाला आग का खम्भा। 
Nehemiah 9:20 वरन तू ने उन्हें समझाने के लिये अपने आत्मा को जो भला है दिया, और अपना मन्ना उन्हें खिलाना न छोड़ा, और उनकी प्यास बुझाने को पानी देता रहा। 
Nehemiah 9:21 चालीस वर्ष तक तू जंगल में उनका ऐसा पालन पोषण करता रहा, कि उन को कुछ घटी न हुई; न तो उनके वस्त्र पुराने हुए और न उनके पांव में सूजन हुई।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 8-10
  • इब्रानियों 13


Tuesday, November 17, 2015

विजेता नायक


   कुछ समय पहले किसी ने मुझ से एक बहुत कठिन प्रश्न पूछा: "बगैर पाप किए आप अधिक से अधिक कितनी देर तक रहने पाई हैं? एक सप्ताह, एक दिन, एक घण्टा?" ऐसे प्रश्न का हम क्या उत्तर दे सकते हैं? यदि हम सच्चे हों तो संभवतः हम कहेंगे, "बिना पाप किए कोई एक दिन भी रह पाया हो, ऐसा संभव नहीं है।" यदि हम अपने जीवन के पिछले सप्ताह का अवलोकन करें तो हो सकता है कि हमने पूरे सप्ताह परमेश्वर से किसी भी पाप के लिए अंगीकार ना किया हो, क्षमा ना माँगी हो; लेकिन यदि इससे हम यह मान बैठें के हमने अपने मन, या ध्यान या विचारों में पूरे सप्ताह कभी एक भी पाप नहीं किया है तो हम अपने आप को धोखा ही देंगे।

   परमेश्वर हमारे मनों को जानता है, और यह भी कि हम परमेश्वर के पवित्र आत्मा द्वारा पापों के लिए कायल किए जाने के प्रति संवेदनशील रहते हैं या नहीं। यदि हम वास्तव में अपने आप को जानते हैं और अपने पाप तथा परमेश्वर के पवित्र आत्मा के निर्देशों के प्रति संवेदनशील हैं तो हमें परमेश्वर के वचन बाइबल के कथन: "यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं" (1 यूहन्ना 1:8) को स्वीकार कर लेने में कोई संकोच नहीं होगा; और ना ही हम इससे आगे के पद में कही बात, "यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है" (1 यूहन्ना 1:10) के दोषी होना चाहेंगे।

   मुझसे जो प्रश्न मुझसे पूछा गया था, उसकी बजाए उससे बेहतर और उत्साहजनक प्रश्न होगा, "जब हम अपने पाप को मान लेते हैं और उसके लिए परमेश्वर से क्षमा माँगते हैं तो परमेश्वर का प्रत्युत्तर क्या होता है?" उत्तर है उपरोक्त दोनों पदों के बीच का पद, "यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)। प्रभु यीशु ने हमारे पाप और उसके सारे दोष को अपने ऊपर लेकर उसका सारा दण्ड भी हमारे लिए सह लिया; वह हमारे पापों के लिए ही क्रूस पर बलिदान हुआ और फिर मृतकों में से जी उठा। इसीलिए वह हमारे अन्दर एक शुद्ध मन उत्पन्न करने और हमें एक नया जीवन, जो परमेश्वर के प्रति समर्पित और संवेद्नशील है, देने में सक्षम है (भजन 51:10)। जो कोई स्वेच्छा और पूरे समर्पण के साथ उसके पास पाप क्षमा के लिए आता है वह नए जीवन को प्राप्त करता है।

   मेरा युवा मित्र जेडन बिलकुल सही कहता है, प्रभु यीशु हमारे पापों का विजेता, हमारा नायक है। - ऐनी सेटास


प्रभु यीशु से मिलने वाली क्षमा नए जीवन का आरंभ है।

हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर, और मेरे भीतर स्थिर आत्मा नये सिरे से उत्पन्न कर। - भजन 51:10

बाइबल पाठ: 1 यूहन्ना 1
1 John 1:1 उस जीवन के वचन के विषय में जो आदि से था, जिसे हम ने सुना, और जिसे अपनी आंखों से देखा, वरन जिसे हम ने ध्यान से देखा; और हाथों से छूआ। 
1 John 1:2 (यह जीवन प्रगट हुआ, और हम ने उसे देखा, और उस की गवाही देते हैं, और तुम्हें उस अनन्त जीवन का समाचार देते हैं, जो पिता के साथ था, और हम पर प्रगट हुआ)। 
1 John 1:3 जो कुछ हम ने देखा और सुना है उसका समाचार तुम्हें भी देते हैं, इसलिये कि तुम भी हमारे साथ सहभागी हो; और हमारी यह सहभागिता पिता के साथ, और उसके पुत्र यीशु मसीह के साथ है। 
1 John 1:4 और ये बातें हम इसलिये लिखते हैं, कि हमारा आनन्द पूरा हो जाए। 
1 John 1:5 जो समाचार हम ने उस से सुना, और तुम्हें सुनाते हैं, वह यह है; कि परमेश्वर ज्योति है: और उस में कुछ भी अन्धकार नहीं। 
1 John 1:6 यदि हम कहें, कि उसके साथ हमारी सहभागिता है, और फिर अन्धकार में चलें, तो हम झूठे हैं: और सत्य पर नहीं चलते। 
1 John 1:7 पर यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं; और उसके पुत्र यीशु का लोहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है। 
1 John 1:8 यदि हम कहें, कि हम में कुछ भी पाप नहीं, तो अपने आप को धोखा देते हैं: और हम में सत्य नहीं। 
1 John 1:9 यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। 
1 John 1:10 यदि कहें कि हम ने पाप नहीं किया, तो उसे झूठा ठहराते हैं, और उसका वचन हम में नहीं है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 5-7
  • इब्रानियों 12


Monday, November 16, 2015

श्रेय


   मैं और मेरे पति एक ग्रामीण इलाके में रहते हैं जिसके चारों ओर खेत ही खेत हैं। हमारे इस खेतीहर इलाके में अनेक स्थानों पर यह वाक्य लिखा हुआ है: ’यदि आज आपने भोजन किया है तो किसान के धन्यवादी हों।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि किसान हमारे धन्यवाद के हकदार हैं; वे हर मौसम को झेलते हुए खेत जोतने की कड़ी मेहनत करते हैं, बीज बोते हैं, फसल की देखभाल करते हैं फिर अन्न काट कर बाज़ारों में पहुँचाते हैं जिससे सब लोगों को भोजन मिलता रहे, उन्हें भूखों परेशान ना होना पड़े।

   लेकिन जितनी बार मैं किसानों का धन्यवाद करती हूं, साथ ही उस परमेश्वर पिता की भी धन्यवादी होती हूँ जिसे इस सारे भोजन को बनाने, उगाने, उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है। खेत में अन्न उगाने के लिए धरती में उपयुक्त गुण, सूरज की रौशनी, सींचने के लिए बारिश, धरती से निकल कर बाहर आने के लिए अँकुर को सामर्थ, अँकुर से पौधा और फिर पौधे में अन्न उगना आदि सब परमेश्वर की ओर से ही तो दिया जाता है। यद्यपि धरती और उसकी हर चीज़ परमेश्वर की है (भजन 24:1), परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उसके रख-रखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए संसाधनों का प्रयोग वैसे करें जैसा वह चाहता है, पृथ्वी पर उसके कार्य करने के लिए (भजन 115:16)।

   जैसे हम मनुष्य परमेश्वर की भौतिक सृष्टि के भंडारी हैं, हम समाज के लिए परमेश्वर की आत्मिक योजना को पूरा करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यह आत्मिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें उनको योग्य आदर देना है जिन्हें उसने हमारा अधिकारी ठहराया है, हमें अपने कर अदा करने हैं और आपस में प्रेम से एक दूसरे के साथ रहना और निर्वाह करना है (रोमियों 13:7-8)। लेकिन एक बात है जिसका हकदार केवल परमेश्वर है - हमारी सारी स्तुति और हमारे द्वारा उसकी महिमा, क्योंकि सृष्टि की हर बात को बनाने, संचालित तथा संभव करने वाला केवल परमेश्वर ही है (भजन 96:8-9)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के रहस्यमय तरीके हमारी असीमित आराधना के हकदार हैं।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! - भजन 96:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों13:1-10
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40


Sunday, November 15, 2015

निर्भीक सहायक


   बचपन में मेरे लिए रात को सो जाना बड़ा चुनौतीपूर्ण कार्य था। जैसे ही मेरे माता-पिता कमरे की बत्ती बन्द करते, कुर्सी पर जो कपड़े बेतरतीब पड़े हुए थे, उनकी ऊबड़-खाबड़ दशा मेरे लिए विभिन्न काल्पनिक डरावने जानवरों का रूप ले लेती थी और साथ ही मुझे भय सताता था कि मेरे पलंग के नीचे कुछ है जो बस अभी बाहर निकलकर मुझ पर हमला कर देगा। भय की इस मनोदशा में नींद मेरी आँखों से कोसों दूर भाग जाती थी।

   उम्र और अनुभव के साथ मुझे यह एहसास हो चला है कि भय ना केवल बच्चों को वरन व्यसकों को भी कमज़ोर और जड़ कर देता है, सब कुछ जानते और समझते हुए भी सही कार्य को करने से रोक देता है। भय के कारण ही हम क्षमा नहीं करते, अपने कार्य स्थल पर सही बात के लिए निर्णय लेकर खड़े नहीं होते या अपने विचार सबके सामने नहीं रखते, अपने संसाधनों को परमेश्वर के राज्य में उपयोग होने के लिए नहीं देते, जब हमारे सब मित्र ’हाँ’ बोल रहे होते हैं तब ’ना’ कहने की हिम्मत नहीं रख पाते। यदि हम अपने सहारे हों तो हमारे जीवनों में ना जाने कितने डरावनी बातें हैं जो हमें सही और सच का साथ देने से रोकती रहती हैं।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में दर्ज की गई प्रभु यीशु और उनके चेलों का तूफान में फंसी नाव की घटना को जब मैं देखता हूँ तो उस नाव में केवल एक ही था जो भयभीत नहीं था - प्रभु यीशु। ना तो प्रभु कभी किसी तूफान से डरा, ना ही दुष्ट-आतमाओं का सामना करने से और ना ही कब्रों में रहने वाले और दुष्ट-आत्मा की सेना से भरे उन व्यक्तियों से डरा जिन्हें कोई वश में नहीं कर सका था (मत्ती 8:23-34)। संसार या जीवन की कोई परिस्थिति, व्यक्ति, घटना, सामर्थ, अधिकार या कोई भी बात हमारे प्रभु को कभी ज़रा सा भी भयभीत नहीं करने पाई, उससे कभी कुछ गलत या अनुचित नहीं करवाने पाई; क्योंकि ऐसा कुछ नहीं है जिस पर हमारा प्रभु सामर्थी नहीं है, जिसे वश में नहीं कर सकता, जिसे बदल नहीं सकता, जिसकी दुषक्रीयाओं को विफल नहीं कर सकता, जिसकी हानिकारक योजनाओं को पलट नहीं सकता। हमारे प्रभु ने हम मसीही विश्वासियों से वायदा किया है, "...और देखो, मैं जगत के अन्‍त तक सदैव तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20)।

   अगली बार जब हमें किसी डर का सामना करना पड़े, या कोई भय हमें सही निर्णय लेने से रोकना चाहे, तब हमें चाहिए कि हम प्रभु यीशु द्वारा चेलों से किया गया प्रश्न अपने सामने रखें: "...हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो?..." (मत्ती 8:26) और स्मरण करें कि उसने वायदा किया है कि वह हमें ना तो कभी छोड़ेगा और ना त्यागेगा (इब्रानियों 13:5-6)। जब कभी संसार और शैतान की शक्तियाँ हमें कमज़ोर करने, हमसे गलत करने या करवाने, हमारी मसीही विश्वासी होने की गवाही को बिगाड़ने के लिए हमें किसी भय के द्वारा अपनी आधीनता में लाना चाहें तो अपने निर्भीक और सदैव जयवन्त प्रभु यीशु और उसके हमारे साथ सदा बने रहने के वायदे को याद करें और भयभीत होकर कभी कुछ भी गलत, अनुचित या असंगत ना करें। - जो स्टोवैल


हर भय के समय में अपने निर्भीक सहायक प्रभु यीशु को पुकारें।

तुम्हारा स्‍वभाव लोभरिहत हो, और जो तुम्हारे पास है, उसी पर संतोष किया करो; क्योंकि उसने आप ही कहा है, कि मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी तुझे त्यागूंगा। इसलिये हम बेधड़क हो कर कहते हैं, कि प्रभु, मेरा सहायक है; मैं न डरूंगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकता है। - इब्रानियों 13:5-6

बाइबल पाठ: मत्ती 8:23-34
Matthew 8:23 जब वह नाव पर चढ़ा, तो उसके चेले उसके पीछे हो लिए। 
Matthew 8:24 और देखो, झील में एक ऐसा बड़ा तूफान उठा कि नाव लहरों से ढंपने लगी; और वह सो रहा था। 
Matthew 8:25 तब उन्होंने पास आकर उसे जगाया, और कहा, हे प्रभु, हमें बचा, हम नाश हुए जाते हैं। 
Matthew 8:26 उसने उन से कहा; हे अल्पविश्वासियों, क्यों डरते हो? तब उसने उठ कर आन्‍धी और पानी को डांटा, और सब शान्‍त हो गया। 
Matthew 8:27 और लोग अचम्भा कर के कहने लगे कि यह कैसा मनुष्य है, कि आन्‍धी और पानी भी उस की आज्ञा मानते हैं। 
Matthew 8:28 जब वह उस पार गदरेनियों के देश में पहुंचा, तो दो मनुष्य जिन में दुष्टात्माएं थीं कब्रों से निकलते हुए उसे मिले, जो इतने प्रचण्‍ड थे, कि कोई उस मार्ग से जा नहीं सकता था। 
Matthew 8:29 और देखो, उन्होंने चिल्लाकर कहा; हे परमेश्वर के पुत्र, हमारा तुझ से क्या काम? क्या तू समय से पहिले हमें दु:ख देने यहां आया है? 
Matthew 8:30 उन से कुछ दूर बहुत से सूअरों का एक झुण्ड चर रहा था। 
Matthew 8:31 दुष्टात्माओं ने उस से यह कहकर बिनती की, कि यदि तू हमें निकालता है, तो सूअरों के झुण्ड में भेज दे। 
Matthew 8:32 उसने उन से कहा, जाओ, वे निकलकर सूअरों में पैठ गए और देखो, सारा झुण्ड कड़ाड़े पर से झपटकर पानी में जा पड़ा और डूब मरा। 
Matthew 8:33 और चरवाहे भागे, और नगर में जा कर ये सब बातें और जिन में दुष्टात्माएं थीं उन का सारा हाल कह सुनाया। 
Matthew 8:34 और देखो, सारे नगर के लोग यीशु से भेंट करने को निकल आए और उसे देखकर बिनती की, कि हमारे सिवानों से बाहर निकल जा।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 1-2
  • इब्रानियों 11:1-19


Saturday, November 14, 2015

सहायक


   जब चारागाहें बर्फ से ढक जाती हैं तब पशु-पालकों को पशुओं के लिए चारा और भूसा अपने हाथों से डालना पड़ता है। जब चारा और भूसा मैदान में डाला जा रहा होता है, तब ताकतवर और कद्दावर जानवर अपने बल के द्वारा आगे आकर पहले खाने लगते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ जानवरों को खाने के लिए कुछ नहीं मिलता जब तक कि पशु-पालक स्वयं कुछ यत्न करके उन्हें भोजन उपलब्ध ना करवा दें।

   शरणार्थी शिविरों और ज़रूरतमन्दों के मध्य भोजन बाँटने के भंडारे में कार्य करने वाले भी इसी समस्या का सामना करते हैं; जब भोजन वितरण आरंभ होता है तब बलवान आगे आकर भोजन छीन-झपट लेते हैं और कमज़ोर तथा अस्वस्थ बिना भोजन के रह जाते हैं जब तक कि भंडारे का आयोजन करने वाले कुछ विशेष प्रबंध करके उन कमज़ोरों और अस्वस्थ लोगों को भोजन उपलब्ध ना करवाएं। यह समाज का प्रचलन है कि गरीबों, कमज़ोरों और लाचारों तक अकसर सही सहायता नहीं पहुँचती, जब तक की किसी विशेष प्रबंध के द्वारा उन्हें वह ना पहुँचाई जाए।

   किनारा किए गए लोगों तक विशेष प्रबंध द्वारा सहायता पहुँचाना परमेश्वर द्वारा स्थापित सिद्धांत का पालन करना है। परमेश्वर ने अपने वचन बाइबल में अपनी प्रजा इस्त्राएल के लोगों को निर्देश दिए कि वे अपने खेतों और दाख की बारियों से फसल जमा करते समय कुछ कुछ वहीं छोड़ दिया करें जिससे गरीबों और परदेशियों के पास भोजन के लिए कुछ हो (लैव्यवस्था 19:9-10)।

   आज हम मसीही विश्वासी भी परमेश्वर द्वारा हमें दिए गए गुणों और संसाधनों के सही उपयोग के द्वारा कमज़ोर, थके-मांदे और लाचारों के सहायक बन सकते हैं; शिक्षक भीरु, शर्मीले और दब्बू छात्रों को प्रोत्साहित करके, उनकी सहायता करके उन्हें बेहतर बना सकते हैं; मज़दूर अपने किसी कमज़ोर सह-कर्मी के काम में हाथ बंटा सकते हैं; कैदी नए कैदियों को समझाने और उन्हें शान्त करने में सहायता कर सकते हैं; अभिभावक अपने बच्चों को उभारने और संवारने में सहायक हो सकते हैं - यदि इच्छा हो तो सहायक होने के अवसरों की कमी नहीं है, सहायक बन कर हम परमेश्वर का आदर करते हैं, उसे महिमा देते हैं।

   जैसे परमेश्वर ने हमारी कमज़ोरी की दशा में हम पर अनुकंपा और अनुग्रह किया, हमारा सहायक बना, हमें उठा कर खड़ा किया, वैसे ही आज हम परमेश्वर के इसी गुण और वरदान को दूसरों तक पहुँचा कर परमेश्वर के प्रेम को उनके साथ बांट सकते हैं, उन्हें जगत के उद्धारकर्ता प्रभु यीशु के निकट आने और उसे समझने का अवसर प्रदान कर सकते हैं। - रैंडी किलगोर


दूसरों की सेवा करके हम परमेश्वर की सेवा करते हैं।

हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्‍ता करे। जैसा मसीह यीशु का स्‍वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्‍वभाव हो। - फिलिप्पियों 2:4-5

बाइबल पाठ: लैव्यवस्था 19:9-15
Leviticus 19:9 फिर जब तुम अपने देश के खेत काटो तब अपने खेत के कोने कोने तक पूरा न काटना, और काटे हुए खेत की गिरी पड़ी बालों को न चुनना। 
Leviticus 19:10 और अपनी दाख की बारी का दाना दाना न तोड़ लेना, और अपनी दाख की बारी के झड़े हुए अंगूरों को न बटोरना; उन्हें दीन और परदेशी लोगों के लिये छोड़ देना; मैं तुम्हारा परमेश्वर यहोवा हूं। 
Leviticus 19:11 तुम चोरी न करना, और एक दूसरे से न तो कपट करना, और न झूठ बोलना। 
Leviticus 19:12 तुम मेरे नाम की झूठी शपथ खाके अपने परमेश्वर का नाम अपवित्र न ठहराना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:13 एक दूसरे पर अन्धेर न करना, और न एक दूसरे को लूट लेना। और मजदूर की मजदूरी तेरे पास सारी रात बिहान तक न रहने पाए। 
Leviticus 19:14 बहिरे को शाप न देना, और न अन्धे के आगे ठोकर रखना; और अपने परमेश्वर का भय मानना; मैं यहोवा हूं। 
Leviticus 19:15 न्याय में कुटिलता न करना; और न तो कंगाल का पक्ष करना और न बड़े मनुष्यों का मुंह देखा विचार करना; उस दूसरे का न्याय धर्म से करना।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 3-5
  • इब्रानियों 10:19-39


Friday, November 13, 2015

पूरक


   क्रिस्टी ने अपने जन्मदिन के उत्सव के दिन आए हुए सब मेहमानों को अपनी ओर से भेंट देकर चकित कर दिया। क्रिस्टी ने हम सब को एक एक व्यक्तिगत चिठ्ठी दी जिसमें उसने प्रत्येक के लिए व्यक्तिगत रिति से लिखा था कि उसके जीवन में हम क्या स्थान रखते हैं, और साथ ही परमेश्वर ने हमें जैसा बनाया और जो जो कार्य सौंपा है उसके विषय में हमें प्रोत्साहित करने के लिए भी कुछ शब्द लिखे थे; प्रत्येक व्यक्ति को लिखी चिठ्ठी के साथ क्रिस्टी ने एक और चीज़ रखी थी - जिग्सौ पहेली के अंश, हमें यह स्मरण दिलाने के लिए हम अपने आप में अद्वितीय तो हैं, किसी के भी बिलकुल जैसा और कोई अन्य नहीं है, लेकिन साथ ही हम एक दूसरे के पूरक भी हैं, जिग्सौ पहेली के समान हम एक साथ मिलकर ही परमेश्वर की योजना का पूरा चित्र बना सकते हैं।

   इस अनुभव ने मुझे परमेश्वर के वचन बाइबल में दिए 1 कुरिन्थियों 12 के विविरण को नए दृष्टिकोण से पढ़ने-समझने में सहायता करी। इस अध्याय में प्रेरित पौलुस ने परमेश्वर के विश्वासियों की मण्डली अर्थात चर्च की तुलना मानव शरीर से करी है, यह समझाने के लिए जैसे शरीर अनेक अंगों जैसे हाथ, पैर, आँख, कान इत्यादि से मिलकर बना है और प्रत्येक अंग का अपना उपयोग, अपनी भूमिका, अपनी आवश्यकता है, वैसे ही मसीही मण्डली या चर्च भी मसीह यीशु के सभी विश्वासियों से मिलकर बनी है और सबकी अपनी उपयोगिता, भूमिका और आवश्यकता है, जिसके बिना मण्डली या चर्च अपूर्ण है।

   बहुत सरल होता है किसी दूसरे की सेवकाई और वरदानों को देखकर अपने आप को गौण और महत्वहीन समझ लेना, विशेषकर तब जब वह दूसरा किसी प्रमुख या प्रगट कार्य में लगा हो। लेकिन प्रभु चाहता है कि हम अपने आप को उस नज़रिए से देखें जिससे प्रभु हमें देखता है - उसके द्वारा सृजन में अद्वितीय और भूमिका तथा उपयोगिता में बहुमूल्य तथा अति महत्वपूर्ण। इस सृष्टि और परमेश्वर की योजना रूपी जिग्सौ पहेली में आप एक महत्वपूर्ण भाग हैं, आपके बिना उसका चित्र पूरा नहीं हो सकता। इस चित्र में अपने स्थान को भरने के लिए परमेश्वर ने आपको एक स्वरूप और कुछ गुण दिए हैं, और आप उन ही संसाधनों के द्वारा परमेश्वर के लिए कार्यकारी, उपयोगी और उसे महिमा देने वाले बन सकते हैं।

   अन्य लोगों से अपनी तुलना करने के स्थान पर अपने आप को परमेश्वर की मण्डली में अन्य लोगों के साथ पूरक बनाईए और उसके द्वारा दिए गए संसाधनों का सदुपयोग कीजिए। - डेविड मैक्कैअसलैंड


आपका जीवन परमेश्वर की ओर से आपको दिया गया उपहार है; इस जीवन को परमेश्वर को भेंट करके उसकी महिमा के लिए कार्य करें।

इसलिये हे भाइयों, मैं तुम से परमेश्वर की दया स्मरण दिला कर बिनती करता हूं, कि अपने शरीरों को जीवित, और पवित्र, और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान कर के चढ़ाओ: यही तुम्हारी आत्मिक सेवा है। - रोमियों 12:1

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 12:12-27
1 Corinthians 12:12 क्योंकि जिस प्रकार देह तो एक है और उसके अंग बहुत से हैं, और उस एक देह के सब अंग, बहुत होने पर भी सब मिलकर एक ही देह हैं, उसी प्रकार मसीह भी है। 
1 Corinthians 12:13 क्योंकि हम सब ने क्या यहूदी हो, क्या युनानी, क्या दास, क्या स्‍वतंत्र एक ही आत्मा के द्वारा एक देह होने के लिये बपतिस्मा लिया, और हम सब को एक ही आत्मा पिलाया गया। 
1 Corinthians 12:14 इसलिये कि देह में एक ही अंग नहीं, परन्तु बहुत से हैं। 
1 Corinthians 12:15 यदि पांव कहे कि मैं हाथ नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:16 और यदि कान कहे; कि मैं आंख नहीं, इसलिये देह का नहीं, तो क्या वह इस कारण देह का नहीं? 
1 Corinthians 12:17 यदि सारी देह आंख ही होती तो सुनना कहां से होता? यदि सारी देह कान ही होती तो सूंघना कहां होता? 
1 Corinthians 12:18 परन्तु सचमुच परमेश्वर ने अंगो को अपनी इच्छा के अनुसार एक एक कर के देह में रखा है। 
1 Corinthians 12:19 यदि वे सब एक ही अंग होते, तो देह कहां होती? 
1 Corinthians 12:20 परन्तु अब अंग तो बहुत से हैं, परन्तु देह एक ही है। 
1 Corinthians 12:21 आंख हाथ से नहीं कह सकती, कि मुझे तेरा प्रयोजन नहीं, और न सिर पांवों से कह सकता है, कि मुझे तुम्हारा प्रयोजन नहीं। 
1 Corinthians 12:22 परन्तु देह के वे अंग जो औरों से निर्बल देख पड़ते हैं, बहुत ही आवश्यक हैं। 
1 Corinthians 12:23 और देह के जिन अंगो को हम आदर के योग्य नहीं समझते हैं उन्‍ही को हम अधिक आदर देते हैं; और हमारे शोभाहीन अंग और भी बहुत शोभायमान हो जाते हैं। 
1 Corinthians 12:24 फिर भी हमारे शोभायमान अंगो को इस का प्रयोजन नहीं, परन्तु परमेश्वर ने देह को ऐसा बना दिया है, कि जिस अंग को घटी थी उसी को और भी बहुत आदर हो। 
1 Corinthians 12:25 ताकि देह में फूट न पड़े, परन्तु अंग एक दूसरे की बराबर चिन्‍ता करें। 
1 Corinthians 12:26 इसलिये यदि एक अंग दु:ख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दु:ख पाते हैं; और यदि एक अंग की बड़ाई होती है, तो उसके साथ सब अंग आनन्द मनाते हैं। 
1 Corinthians 12:27 इसी प्रकार तुम सब मिल कर मसीह की देह हो, और अलग अलग उसके अंग हो।

एक साल में बाइबल: 
  • विलापगीत 1-2
  • इब्रानियों 10:1-18


Thursday, November 12, 2015

असफलता तथा शर्मिंदगी


   मार्ग के किनारे पुलिस की गाड़ी की जलती-बुझती बत्तियों ने मेरा ध्यान वहाँ खड़ी एक अन्य गाड़ी की ओर खेंचा, उसे यातायात नियम के उल्लंघन के लिए रोका गया था। मुझे पुलिस कार से उतरकर, हाथ में चालान काटने की पुस्तिका लिए उस गाड़ी की ओर बढ़ता हुआ पुलिस अधिकारी दिखाई दिया, और गाड़ी के अन्दर बैठी चालिका भी जो अपने चेहरे को अपने हाथों से ढाँपे हुए थी जिससे आते-जाते लोग उसको पहचान ना सकें। उसकी प्रतिक्रीया दिखा रही थी कि वह अपने गलत चुनाव और उसके दुषपरिणाम को लेकर कैसी शर्मिंदा थी।

   प्रभु यीशु के सामने जब भीड़ एक दोषी स्त्री को लाई, और उसके व्यभिचार को प्रकट किया तो भीड़ की मनसा केवल उस स्त्री को शर्मिंदा मात्र ही करने की नहीं थी; वे देखना चाहते थे कि प्रभु की क्या प्रतिक्रीया होगी। वे उस स्त्री को दोषी और दंड पाने के योग्य देखना चाहते थे, लेकिन प्रभु यीशु ने उस पर दया दिखाई; वह, केवल जिसे पाप का दोष और उसका दण्ड देने का अधिकार है, उस स्त्री के विफल चरित्र के प्रति करुणामय और क्षमाशील था। जब उस स्त्री पर दोषारोपण करने वाले चले गए, तब "यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना" (यूहन्ना 8:11)।

   प्रभु यीशु की यह करुणा हमें उसके क्षमा करने वाले अनुग्रह की याद दिलाती है, और उस स्त्री को दिया गया उसका निर्देश दिखाता है कि प्रभु चाहता है कि हम इस अनुग्रह के आनन्द में सदा बने रहें; और यह दोनों बातें मिलकर ठोकर खाकर पाप में गिरने वालों के प्रति प्रभु यीशु के नज़रिए को दिखाती हैं कि वह पापियों को भी नाश नहीं वरन पाप से परिवर्तित जीवन, पाप और उसके दोष तथा दुषपरिणामों से रहित आनन्दमय जीवन देना चाहता है।

   हम अपने सबसे बुरी नैतिक असफलता तथा शरमिंदगी की हालात में भी पूरे भरोसे के साथ उसे पुकार सकते हैं, उसकी ओर निःसंकोच हाथ बढ़ा सकते हैं क्योंकि उस की करुणा वास्तव में अद्भुत है, उसकी दया और क्षमा असीम हैं, वह किसी को भी अपने से दूर रखना नहीं चाहता। - बिल क्राउडर


हर परीक्षा का सामना करने के लिए आवश्यक अनुग्रह और सामर्थ हमें केवल प्रभु यीशु से ही प्राप्त हो सकती है।

यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने, और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है। - 1 यूहन्ना 1:9 

बाइबल पाठ: यूहन्ना 8:1-11
John 8:1 परन्तु यीशु जैतून के पहाड़ पर गया। 
John 8:2 और भोर को फिर मन्दिर में आया, और सब लोग उसके पास आए; और वह बैठकर उन्हें उपदेश देने लगा। 
John 8:3 तब शास्त्री और फरीसी एक स्त्री को लाए, जो व्यभिचार में पकड़ी गई थी, और उसको बीच में खड़ी कर के यीशु से कहा। 
John 8:4 हे गुरू, यह स्त्री व्यभिचार करते ही पकड़ी गई है। 
John 8:5 व्यवस्था में मूसा ने हमें आज्ञा दी है कि ऐसी स्‍त्रियों को पत्थरवाह करें: सो तू इस स्त्री के विषय में क्या कहता है? 
John 8:6 उन्होंने उसको परखने के लिये यह बात कही ताकि उस पर दोष लगाने के लिये कोई बात पाएं, परन्तु यीशु झुककर उंगली से भूमि पर लिखने लगा। 
John 8:7 जब वे उस से पूछते रहे, तो उसने सीधे हो कर उन से कहा, कि तुम में जो निष्‍पाप हो, वही पहिले उसको पत्थर मारे। 
John 8:8 और फिर झुककर भूमि पर उंगली से लिखने लगा। 
John 8:9 परन्तु वे यह सुनकर बड़ों से ले कर छोटों तक एक एक कर के निकल गए, और यीशु अकेला रह गया, और स्त्री वहीं बीच में खड़ी रह गई। 
John 8:10 यीशु ने सीधे हो कर उस से कहा, हे नारी, वे कहां गए? क्या किसी ने तुझ पर दंड की आज्ञा न दी। 
John 8:11 उसने कहा, हे प्रभु, किसी ने नहीं: यीशु ने कहा, मैं भी तुझ पर दंड की आज्ञा नहीं देता; जा, और फिर पाप न करना।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 51-52
  • इब्रानियों 9


Wednesday, November 11, 2015

आशा


   यीव्स कोंगर 10 वर्ष का बालक था जब प्रथम विश्वयुद्ध आरंभ हुआ और फ्रांस के जिस कसबे में वह रहता था उसपर जर्मन सेना का हमाला हुआ। यीव्स की माँ ने उसे प्रोत्साहित किया कि वह अपने अनुभवों को एक डायरी में लिखे, जिसका परिणाम था उस सैन्य कबज़े का एक स्पष्ट और विस्तृत विवरण जिसमें रंगीन रेखा-चित्र भी सम्मिलित थे। यीव्स की डायरी में एक बच्चे के नज़रिये से उस आपदा का चित्रण किया गया; जो कुछ उसने देखा और अनुभव किया उसका इतना गहरा प्रभाव उसके जीवन पर पड़ा कि उसने अपने आप को विवश महसूस किया कि वो मसीह यीशु में उपलब्ध आश्गा को अन्य लोगों तक पहुँचाने में प्रयासरत रहे।

   सदियों पहले यिर्मयाह नबी भी एक आपदा का गवाह रहा था, यरुशालेम पर राजा नबूक्दनेस्सर की चढ़ाई और विनाश का। यिर्मयाह ने भी अपने अनुभव और जो कुछ उसने देखा एक पुस्तिका में लिखा जो आज ’विलापगीत’ के नाम से परमेश्वर के वचन बाइबल का एक भाग है। उन दिनों के कष्टप्रद अनुभवों और बातों के बावजूद यिर्मयाह ने परमेश्वर में आशा और शान्ति पाई; उसने लिखा, "हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है" (विलापगीत 3:22-23)।

   जीवन के भिन्न समयों में हम कटु अनुभवों, त्रास्दियों और आपदाओं से होकर निकल सकते हैं, लेकिन ये कष्ट और परेशानी के समय सदा बने नहीं रहते। यिर्मयाह के समान ही हमारी सबसे भरोसेमन्द आशा है अपने स्वर्गीय परमेश्वर पिता की विश्वासयोग्यता और प्रावधानों पर विचार करना और उसपर अपने विश्वास को बनाए रखना। जब हम ऐसा करना आरंभ करेंगे तो जैसा यिर्मयाह का अनुभव था, हम भी पाएंगे कि परमेश्वर की करुणा हमारे लिए प्रतिदिन नई रहती है, हर परिस्थिति में हमारे प्रति उसकी विश्वासयोग्यता अति महान बनी रहती है। - डेनिस फिशर


परमेश्वर की विश्वासयोग्यता ही हमारी आशा का सर्वोत्तम आधार है।

क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई  के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्त्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा। यहोवा परमेश्वर मेरा बलमूल है, वह मेरे पांव हरिणों के समान बना देता है, वह मुझ को मेरे ऊंचे स्थानों पर चलाता है। हबकुक 3:17-19

बाइबल पाठ: विलापगीत 3:19-33
Lamentations 3:19 मेरा दु:ख और मारा मारा फिरना, मेरा नागदौने और-और विष का पीना स्मरण कर! 
Lamentations 3:20 मैं उन्हीं पर सोचता रहता हूँ, इस से मेरा प्राण ढला जाता है। 
Lamentations 3:21 परन्तु मैं यह स्मरण करता हूँ, इसीलिये मुझे आाशा है: 
Lamentations 3:22 हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महाकरुणा का फल है, क्योंकि उसकी दया अमर है। 
Lamentations 3:23 प्रति भोर वह नई होती रहती है; तेरी सच्चाई महान है। 
Lamentations 3:24 मेरे मन ने कहा, यहोवा मेरा भाग है, इस कारण मैं उस में आशा रखूंगा। 
Lamentations 3:25 जो यहोवा की बाट जोहते और उसके पास जाते हैं, उनके लिये यहोवा भला है। 
Lamentations 3:26 यहोवा से उद्धार पाने की आशा रख कर चुपचाप रहना भला है। 
Lamentations 3:27 पुरुष के लिये जवानी में जूआ उठाना भला है। 
Lamentations 3:28 वह यह जान कर अकेला चुपचाप रहे, कि परमेश्वर ही ने उस पर यह बोझ डाला है; 
Lamentations 3:29 वह अपना मुंह धूल में रखे, क्या जाने इस में कुछ आशा हो; 
Lamentations 3:30 वह अपना गाल अपने मारने वाले की ओर फेरे, और नामधराई सहता रहे। 
Lamentations 3:31 क्योंकि प्रभु मन से सर्वदा उतारे नहीं रहता, 
Lamentations 3:32 चाहे वह दु:ख भी दे, तौभी अपनी करुणा की बहुतायत के कारण वह दया भी करता है; 
Lamentations 3:33 क्योंकि वह मनुष्यों को अपने मन से न तो दबाता है और न दु:ख देता है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 50
  • इब्रानियों 8


Tuesday, November 10, 2015

स्मरण


   जिम डेविडसन रेनियर पहाड़ से नीचे उतर रहा था जब वह बर्फ से ढकी दरार में से बर्फ में बनी एक गहरी अंधेरी खाई में जा गिरा। उस खाई के तले पर जिम लहु-लुहान खड़ा होकर अपने बचपन की बातों को और उसके पिता द्वारा उससे कही गई बातों को स्मरण कर रहा था। जिम को स्मरण आया कैसे उसके पिता उससे कहा करते थे कि यदि वह विपरीत परिस्थितियों में हिम्मत ना हारे और प्रयास करता रहे तो बड़े बड़े कार्य कर सकता है। पिता की बातों को स्मरण करने से उसकी हिम्मत बंधी और बिना किसी विशेष सामान या किसी बाहरी सहायता के पांच घंटों के कड़े परिश्रम के बाद जिम उस बर्फीली खाई से चढ़कर बाहर निकल पाया।

   परमेश्वर के वचन बाइबल में भजनकार भी जीवन के दुख और कष्ट की खाई से अपने परमेश्वर पिता के वचनों को स्मरण करके बाहर निकल सका। भजनकार ने माना कि यदि परमेश्वर और परमेश्वर का वचन उसका सहारा ना बनते, उसे आनन्द नहीं देते तो वह अपने क्लेष में ही नाश हो जाता (भजन 119:92)। भजनकार ने परमेश्वर के वचन में और परमेश्वर के चरित्र में अपना पूरा भरोसा व्यक्त किया (भजन 119:89-90)। परमेश्वर की इस विश्वासयोग्यता के कारण भजनकार ने यह निर्णय लिया कि वह कभी परमेश्वर के वचनों को नहीं भूलेगा क्योंकि उसे बचाने और सामर्थ देने में वही वचन कारगर हुआ था।

   अपने जीवन में आने वाले दुखों, क्लेषों, सताव और विपरीत परिस्थितियों की खाई में पड़े होने पर भी हमारे प्राण परमेश्वर के वचन और उसके चरित्र को स्मरण करने के द्वारा तरोताज़ा हो सकते हैं, हमें निराशाओं से बाहर निकालकर स्थिर खड़ा कर सकते हैं। परमेश्वर के वचन को सदा स्मरण रखें, वही सदा आपका सही मार्गदर्शक रहेगा। - मार्विन विलियम्स


परमेश्वर के वचन को स्मरण रखना आत्मा को हर्षित रखता है।

तेरी व्यवस्था से प्रीति रखने वालों को बड़ी शान्ति होती है; और उन को कुछ ठोकर नहीं लगती। - भजन 119:165

बाइबल पाठ: भजन 119:89-93
Psalms 119:89 हे यहोवा, तेरा वचन, आकाश में सदा तक स्थिर रहता है। 
Psalms 119:90 तेरी सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है; तू ने पृथ्वी को स्थिर किया, इसलिये वह बनी है। 
Psalms 119:91 वे आज के दिन तक तेरे नियमों के अनुसार ठहरे हैं; क्योंकि सारी सृष्टि तेरे आधीन है। 
Psalms 119:92 यदि मैं तेरी व्यवस्था से सुखी न होता, तो मैं दु:ख के समय नाश हो जाता। 
Psalms 119:93 मैं तेरे उपदेशों को कभी न भूलूंगा; क्योंकि उन्हीं के द्वारा तू ने मुझे जिलाया है।

एक साल में बाइबल: 
  • यिर्मयाह 48-49
  • इब्रानियों 7