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शुक्रवार, 13 दिसंबर 2019

मैं नहीं



      बीसवीं सदी के सबसे अधिक विख्यात ऑर्केस्ट्रा संचालकों में से एक, आरट्यूरो टोसकनिनी को इस बात के लिए भी स्मरण किया जाता है कि वे उसे अवश्य ही श्रेय देते थे, जिसे श्रेय मिलना चाहिए। डेविड इवन की पुस्तक “डिक्टेटर्स औफ द बैटन” में लेखक ने बताया है कि किस प्रकार से न्यू यॉर्क फिल्हार्मोनिक ऑर्केस्ट्रा के संगीतज्ञों ने बीथोवेन की ‘नाइन्थ सिम्फनी’ के एक अभ्यास के बाद खड़े होकर टोस्किनिनी की प्रशंसा की। जब उस प्रशंसा की ध्वनि कुछ कम हुई, तो आँखों में आंसूओं के साथ टोसकनिनी को भरभराई आवाज़ में कहते सुना गया, “यह मैं नहीं...यह तो बीथोवेन हैं!...टोसकनिनी तो कुछ भी नहीं है।”

      परमेश्वर के वचन बाइबल में प्रेरित पौलुस द्वारा लिखित पत्रियों में भी हम देखते हैं कि उसने किसी भी आत्मिक अंतदृष्टि और प्रभाव के लिए श्रेय लेने से इन्कार किया। वह जानता था कि वह अनेकों ऐसे लोगों के लिए जिन्होंने प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास किया है, आत्मिक माता-पिता के समान है। उसने यह भी माना कि बहुतेरों के मसीही विश्वास को प्रोत्साहित करने, उन्हें आशा और प्रेम देने के लिए उसने बहुत कठिन परिश्रम किया तथा सताव भी झेले हैं (1 कुरिन्थियों 15:10)। परन्तु उसका विवेक उसे उनकी प्रशंसा को स्वीकार करने की अनुमति नहीं देता था जिन्होंने उसके जीवन में मसीही विश्वास, प्रेम, और अंतदृष्टि द्वारा प्रेरणा पाई थी।

      अपने तब, तथा अब के, सभी पाठकों के लिए, पौलुस एक प्रकार से यही कह रहा था कि, “भाइयों और बहिनों, यह मैं नहीं हूँ। यह तो प्रभु यीशु मसीह है...पौलुस तो कुछ नहीं है।” हम अपने आप में कुछ नहीं हैं, हम केवल अपने प्रभु के संदेशवाहक हैं; और वही समस्त श्रेय तथा प्रशंसा का हकदार है। - मार्ट डीहॉन

बुद्धिमान है वह व्यक्ति जो सम्मान लेने के स्थान पर देना जानता है।

अपुल्लोस क्या है? और पौलुस क्या है? केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्तु परमेश्वर ने बढ़ाया। - 1 कुरिन्थियों 3:5-6

बाइबल पाठ: 1 कुरिन्थियों 15:1-11
1 Corinthians 15:1 हे भाइयों, मैं तुम्हें वही सुसमाचार बताता हूं जो पहिले सुना चुका हूं, जिसे तुम ने अंगीकार भी किया था और जिस में तुम स्थिर भी हो।
1 Corinthians 15:2 उसी के द्वारा तुम्हारा उद्धार भी होता है, यदि उस सुसमाचार को जो मैं ने तुम्हें सुनाया था स्मरण रखते हो; नहीं तो तुम्हारा विश्वास करना व्यर्थ हुआ।
1 Corinthians 15:3 इसी कारण मैं ने सब से पहिले तुम्हें वही बात पहुंचा दी, जो मुझे पहुंची थी, कि पवित्र शास्त्र के वचन के अनुसार यीशु मसीह हमारे पापों के लिये मर गया।
1 Corinthians 15:4 ओर गाड़ा गया; और पवित्र शास्त्र के अनुसार तीसरे दिन जी भी उठा।
1 Corinthians 15:5 और कैफा को तब बारहों को दिखाई दिया।
1 Corinthians 15:6 फिर पांच सौ से अधिक भाइयों को एक साथ दिखाई दिया, जिन में से बहुतेरे अब तक वर्तमान हैं पर कितने सो गए।
1 Corinthians 15:7 फिर याकूब को दिखाई दिया तब सब प्रेरितों को दिखाई दिया।
1 Corinthians 15:8 और सब के बाद मुझ को भी दिखाई दिया, जो मानो अधूरे दिनों का जन्मा हूं।
1 Corinthians 15:9 क्योंकि मैं प्रेरितों में सब से छोटा हूं, वरन प्रेरित कहलाने के योग्य भी नहीं, क्योंकि मैं ने परमेश्वर की कलीसिया को सताया था।
1 Corinthians 15:10 परन्तु मैं जो कुछ भी हूं, परमेश्वर के अनुग्रह से हूं: और उसका अनुग्रह जो मुझ पर हुआ, वह व्यर्थ नहीं हुआ परन्तु मैं ने उन सब से बढ़कर परिश्रम भी किया: तौभी यह मेरी ओर से नहीं हुआ परन्तु परमेश्वर के अनुग्रह से जो मुझ पर था।
1 Corinthians 15:11 सो चाहे मैं हूं, चाहे वे हों, हम यही प्रचार करते हैं, और इसी पर तुम ने विश्वास भी किया।

एक साल में बाइबल: 
  • होशे 12-14
  • प्रकाशितवाक्य 4



बुधवार, 24 जनवरी 2018

उपलब्धि


   चर्च में आराधना जारी थी, और उस प्रातः हमारे साथ आराधना में सम्मिलित होने के लिए कुछ मेहमान भी आए हुए थे। उस दिन का सन्देश देने वाला उपदेशक अभी अपने सन्देश को लगभग आधा ही कहने पाया था कि मैंने देखा कि मेहमानों में से एक उठकर बाहर जाने लगी।मैं यह देखकर चिन्तित हुआ और जिज्ञासु भी; इसलिए उनके उठकर जाने का कारण जानने के लिए उसके पास गया।

   मैंने उनके पास जाकर उन से पूछा, “आप बहुत शीघ्र जा रहीं हैं; क्या कोई समस्या है, क्या मैं आपकी कोई सहायता कर सकता हूँ?” वह महिला बहुत स्पष्टवादी थी,और उसने बड़ी खराई से कहा, “हाँ, समस्या है – यह सन्देश! मैं उस उपदेशक के साथ सहमत नहीं हूँ।” उनकी असहमति उपदेशक के उस कथन से थी जिसमें उसने कहा था कि जीवन में हमारी प्रत्येक उपलब्धि का श्रेय परमेश्वर को जाता है, वही सारी महिमा का पात्र है। उस महिला ने शिकायत के स्वर में कहा, “मेरी उपलब्धियों के लिए कुछ श्रेय तो मुझे भी मिलना ही चाहिए।”

   मैं ने उन्हें उपदेशक के कहने के अभिप्राय को समझाया। लोगों को उनकी उपलब्धियों के लिए अवश्य ही मान्यता और प्रशंसा मिलनी चाहिए, परन्तु हमें यह कभी नहीं भूलना चाहिए कि हमारे सभी गुण और योग्यताएं, जो हमारी उपलब्धियों के आधार हैं, हमें परमेश्वर से, उसके अनुग्रह से मिले हैं, इसीलिए वही सारे श्रेय और सारी महिमा का पात्र है। इसीलिए प्रभु यीशु ने भी कहा था, “...मैं तुम से सच सच कहता हूं, पुत्र आप से कुछ नहीं कर सकता, केवल वह जो पिता को करते देखता है, क्योंकि जिन जिन कामों को वह करता है उन्हें पुत्र भी उसी रीति से करता है” (यूहन्ना 5:19); और प्रभु ने अपने शिष्यों से कहा, “...क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते” (यूहन्ना 15:5)।

   इसीलिए हम मसीही विश्वासी यह मानते हैं कि प्रभु परमेश्वर ही है जो हर उपलब्धि, हर योग्यता की सामर्थ्य हमें प्रदान करता है, और वह ही हमसे उस सामर्थ्य का सदुपयोग भी करवाता है, वही हमारी हर उपलब्धि का आधार है। - लौरेंस दर्मानी


परमेश्वर की सन्तान, उसकी इच्छा उसकी महिमा के लिए पूरी करती है।

मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते। - यूहन्ना 15:5

बाइबल पाठ: यूहन्ना 15:1-5
John 15:1 सच्ची दाखलता मैं हूं; और मेरा पिता किसान है।
John 15:2 जो डाली मुझ में है, और नहीं फलती, उसे वह काट डालता है, और जो फलती है, उसे वह छांटता है ताकि और फले।
John 15:3 तुम तो उस वचन के कारण जो मैं ने तुम से कहा है, शुद्ध हो।
John 15:4 तुम मुझ में बने रहो, और मैं तुम में: जैसे डाली यदि दाखलता में बनी न रहे, तो अपने आप से नहीं फल सकती, वैसे ही तुम भी यदि मुझ में बने न रहो तो नहीं फल सकते।
John 15:5 मैं दाखलता हूं: तुम डालियां हो; जो मुझ में बना रहता है, और मैं उस में, वह बहुत फल फलता है, क्योंकि मुझ से अलग हो कर तुम कुछ भी नहीं कर सकते।


एक साल में बाइबल: 
  • निर्गमन 9-11
  • मत्ती 15:21-39


शुक्रवार, 11 अगस्त 2017

श्रेय


   जब मेरे पति स्थानीय कॉलेज में लेखांकन सिखा रहे थे, तो मैं मज़े के लिए एक परीक्षा में बैठी, यह देखने के लिए कि मैं कितना जानती हूँ। परिणाम अच्छे नहीं थे; मैंने प्रत्येक प्रशन का गलत उत्तर दिया। मेरे गलत उत्तरों का मूल कारण था कि मैंने जमा और खर्च का लेखा रखने के बैंकिंग के बुनियादी सिद्धांत को ही गलत समझा था; मैंने अपने उत्तरों में जमा के स्थान पर खर्च और खर्च के स्थान पर जमा डाल दिया।

   कभी-कभी आत्मिक जीवन में भी हम अपने जमा और खर्च को लेकर ऐसे ही उलझनों में पड़ जाते हैं। जब हमारे साथ जो कुछ भी गलत हो रहा है, हम उस सब का श्रेय शैतान को देते हैं, चाहे वह खराब मौसम हो, या ठीक से काम नहीं कर रहा कोई उपकरण हो, या कोई आर्थिक समस्या हो, तो हम शैतान को वह देते हैं जिसके काबिल वह है ही नहीं। ऐसा करके हम उसे उस सामर्थ्य का श्रेय दे रहे हैं जो वह कभी कर नहीं सकता - हमारे जीवनों से संबंधित बातें और उन बातों की गुणवन्ता को निर्धारित करना। शैतान समय और स्थान की सीमाओं में बंधा हुआ है। बिना परमेश्वर से अनुमति लिए वह हम मसीही विश्वासियों को छू भी नहीं सकता है (अय्युब 1:12; लूका 22:31)।

   परन्तु इस संसार के सरदार और झूठ का पिता (यूहन्ना 8:44; 16:11) होने के नाते, शैतान भ्रम और उलझनें उत्पन्न कर सकता है। प्रभु यीशु ने चिताया था कि ऐसा समय आएगा कि जब लोग सही और गलत में भेद और पहिचान करने नहीं पाएंगे (16:2)। परन्तु प्रभु यीशु ने साथ ही आश्वसन भी दिया कि शैतान दोषी ठहराया जा चुका है (पद 11)।

   हमारे जीवनों के साथ समस्याएं तो लगी रहेंगी; वे हमें परेशान तो कर सकती हैं किंतु पराजित नहीं कर सकती हैं; क्योंकि जगत के उद्धाकर्ता, हमारे प्रभु यीशु ने संसार को जीत लिया है। इसलिए सारा श्रेय उस ही को जाता है; केवल वह ही इसका हकदार है। - जूली ऐकैरमैन लिंक


शैतान चाहे दोष लगाए, भ्रम और उलझनें उत्पन्न करे; 
नियंत्रण और निर्धारण परमेश्वर ही के हाथों में है।

तुम अपने पिता शैतान से हो, और अपने पिता की लालसाओं को पूरा करना चाहते हो। वह तो आरम्भ से हत्यारा है, और सत्य पर स्थिर न रहा, क्योंकि सत्य उस में है ही नहीं: जब वह झूठ बोलता, तो अपने स्‍वभाव ही से बोलता है; क्योंकि वह झूठा है, वरन झूठ का पिता है। - यूहन्ना 8:44

बाइबल पाठ: यूहन्ना 16:1-11
John 16:1 ये बातें मैं ने तुम से इसलिये कहीं कि तुम ठोकर न खाओ। 
John 16:2 वे तुम्हें आराधनालयों में से निकाल देंगे, वरन वह समय आता है, कि जो कोई तुम्हें मार डालेगा वह समझेगा कि मैं परमेश्वर की सेवा करता हूं। 
John 16:3 और यह वे इसलिये करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं।
John 16:4 परन्तु ये बातें मैं ने इसलिये तुम से कहीं, कि जब उन का समय आए तो तुम्हें स्मरण आ जाए, कि मैं ने तुम से पहिले ही कह दिया था: और मैं ने आरम्भ में तुम से ये बातें इसलिये नहीं कहीं क्योंकि मैं तुम्हारे साथ था। 
John 16:5 अब मैं अपने भेजने वाले के पास जाता हूं और तुम में से कोई मुझ से नहीं पूछता, कि तू कहां जाता है? 
John 16:6 परन्तु मैं ने जो ये बातें तुम से कही हैं, इसलिये तुम्हारा मन शोक से भर गया। 
John 16:7 तौभी मैं तुम से सच कहता हूं, कि मेरा जाना तुम्हारे लिये अच्छा है, क्योंकि यदि मैं न जाऊं, तो वह सहायक तुम्हारे पास न आएगा, परन्तु यदि मैं जाऊंगा, तो उसे तुम्हारे पास भेज दूंगा। 
John 16:8 और वह आकर संसार को पाप और धामिर्कता और न्याय के विषय में निरूत्तर करेगा। 
John 16:9 पाप के विषय में इसलिये कि वे मुझ पर विश्वास नहीं करते। 
John 16:10 और धामिर्कता के विषय में इसलिये कि मैं पिता के पास जाता हूं, 
John 16:11 और तुम मुझे फिर न देखोगे: न्याय के विषय में इसलिये कि संसार का सरदार दोषी ठहराया गया है।

एक साल में बाइबल: 
  • भजन 81-83
  • रोमियों 11:19-36


गुरुवार, 5 मई 2016

श्रेय


   क्रिस लैंगन का IQ (बुद्धिमता-स्तर) एल्बर्ट आईन्सटाईन से भी अधिक है। मुस्तफा इस्माईल की बाँहों (biceps) का घेरा 31 इंच का है और वह 600 पौंड वज़न उठा सकता है। बिल गेट्स की संपत्ति का अनुमान अरबों डॉलर है। जिनके पास कोई अद्भुत प्रतिभा या उपलब्धि है, वे अपने बारे में आवश्यकता से अधिक बढ़कर सोच सकते हैं। लेकिन अपनी उपलब्धियों का श्रेय लेने के लिए हमें बहुत ही बुद्धिमान, या ताकतवर, या धनवान होना आवश्यक नहीं है। उपलब्धि चाहे कैसी भी हो, चाहे कितनी भी बड़ी अथवा छोटी हो, उसके साथ एक प्रश्न सदा ही जुड़ा रहता है - उसका श्रेय किसका है?

   परमेश्वर ने अपने लोगों, इस्त्राएलियों से यिर्मयाह भविष्यद्वक्ता द्वारा कहा: "यहोवा यों कहता है, बुद्धिमान अपनी बुद्धि पर घमण्ड न करे, न वीर अपनी वीरता पर, न धनी अपने धन पर घमण्ड करे; परन्तु जो घमण्ड करे वह इसी बात पर घमण्ड करे, कि वह मुझे जानता और समझता है, कि मैं ही वह यहोवा हूँ, जो पृथ्वी पर करुणा, न्याय और धर्म के काम करता है; क्योंकि मैं इन्हीं बातों से प्रसन्न रहता हूँ" (यिर्मयाह 9:23-24)। परमेश्वर चाहता था कि उसके लोग उसे और उसकी उत्तमता को अन्य किसी भी बात से अधिक बढ़कर जानें, सर्वश्रेष्ठ मानें।
   यदि हम अपनी प्रशंसा को अपने अहम को फुलाने देते हैं तो हम भूल जाते हैं कि परमेश्वर का वचन बाइबल हमें सिखाती है कि "क्योंकि हर एक अच्छा वरदान और हर एक उत्तम दान ऊपर ही से है, और ज्योतियों के पिता की ओर से मिलता है, जिस में न तो कोई परिवर्तन हो सकता है, ओर न अदल बदल के कारण उस पर छाया पड़ती है" (याकूब 1:17)। इसलिए हर बात के लिए परमेश्वर को महिमा, आदर और धन्यवाद देना भला है क्यों कि ऐसा करने से ना केवल हम घमंड में पड़ने से बचे रहते हैं, वरन इसलिए भी क्योंकि वास्तविकता में परमेश्वर को ही सारा श्रेय जाता है: "वह तो एसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते" (अय्यूब 5:9)। - जेनिफर बेन्सन शुल्ट


हमें परमेश्वर को महिमा देने के लिए सृजा गया है।

परन्तु तू अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण रखना, क्योंकि वही है जो तुझे सम्पति प्राप्त करने का सामर्थ्य इसलिये देता है, कि जो वाचा उसने तेरे पूर्वजों से शपथ खाकर बान्धी थी उसको पूरा करे, जैसा आज प्रगट है। - व्यवस्थाविवरण 8:18

बाइबल पाठ: भजन 49
Psalms 49:1 हे देश देश के सब लोगों यह सुनो! हे संसार के सब निवासियों, कान लगाओ! 
Psalms 49:2 क्या ऊंच, क्या नीच क्या धनी, क्या दरिद्र, कान लगाओ! 
Psalms 49:3 मेरे मुंह से बुद्धि की बातें निकलेंगी; और मेरे हृदय की बातें समझ की होंगी। 
Psalms 49:4 मैं नीतिवचन की ओर अपना कान लगाऊंगा, मैं वीणा बजाते हुए अपनी गुप्त बात प्रकाशित करूंगा।
Psalms 49:5 विपत्ति के दिनों में जब मैं अपने अड़ंगा मारने वालों की बुराइयों से घिरूं, तब मैं क्यों डरूं? 
Psalms 49:6 जो अपनी सम्पत्ति पर भरोसा रखते, और अपने धन की बहुतायत पर फूलते हैं, 
Psalms 49:7 उन में से कोई अपने भाई को किसी भांति छुड़ा नहीं सकता है; और न परमेश्वर को उसकी सन्ती प्रायश्चित्त में कुछ दे सकता है, 
Psalms 49:8 (क्योंकि उनके प्राण की छुड़ौती भारी है वह अन्त तक कभी न चुका सकेंगे)। 
Psalms 49:9 कोई ऐसा नहीं जो सदैव जीवित रहे, और कब्र को न देखे।
Psalms 49:10 क्योंकि देखने में आता है, कि बुद्धिमान भी मरते हैं, और मूर्ख और पशु सरीखे मनुष्य भी दोनों नाश होते हैं, और अपनी सम्पत्ति औरों के लिये छोड़ जाते हैं। 
Psalms 49:11 वे मन ही मन यह सोचते हैं, कि उनका घर सदा स्थिर रहेगा, और उनके निवास पीढ़ी से पीढ़ी तक बने रहेंगे; इसलिये वे अपनी अपनी भूमि का नाम अपने अपने नाम पर रखते हैं। 
Psalms 49:12 परन्तु मनुष्य प्रतिष्ठा पाकर भी स्थिर नहीं रहता, वह पशुओं के समान होता है, जो मर मिटते हैं।
Psalms 49:13 उनकी यह चाल उनकी मूर्खता है, तौभी उनके बाद लोग उनकी बातों से प्रसन्न होते हैं। 
Psalms 49:14 वे अधोलोक की मानों भेड़-बकरियां ठहराए गए हैं; मृत्यु उनका गड़रिया ठहरी; और बिहान को सीधे लोग उन पर प्रभुता करेंगे; और उनका सुन्दर रूप अधोलोक का कौर हो जाएगा और उनका कोई आधार न रहेगा। 
Psalms 49:15 परन्तु परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण कर अपनाएगा।
Psalms 49:16 जब कोई धनी हो जाए और उसके घर का वैभव बढ़ जाए, तब तू भय न खाना। 
Psalms 49:17 क्योंकि वह मर कर कुछ भी साथ न ले जाएगा; न उसका वैभव उसके साथ कब्र में जाएगा। 
Psalms 49:18 चाहे वह जीते जी अपने आप को धन्य कहता रहे, (जब तू अपनी भलाई करता है, तब वे लोग तेरी प्रशंसा करते हैं) 
Psalms 49:19 तौभी वह अपने पुरखाओं के समाज में मिलाया जाएगा, जो कभी उजियाला न देखेंगे। 
Psalms 49:20 मनुष्य चाहे प्रतिष्ठित भी हों परन्तु यदि वे समझ नहीं रखते, तो वे पशुओं के समान हैं जो मर मिटते हैं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 19-20
  • लूका 23:1-25


सोमवार, 16 नवंबर 2015

श्रेय


   मैं और मेरे पति एक ग्रामीण इलाके में रहते हैं जिसके चारों ओर खेत ही खेत हैं। हमारे इस खेतीहर इलाके में अनेक स्थानों पर यह वाक्य लिखा हुआ है: ’यदि आज आपने भोजन किया है तो किसान के धन्यवादी हों।’ इसमें कोई दो राय नहीं कि किसान हमारे धन्यवाद के हकदार हैं; वे हर मौसम को झेलते हुए खेत जोतने की कड़ी मेहनत करते हैं, बीज बोते हैं, फसल की देखभाल करते हैं फिर अन्न काट कर बाज़ारों में पहुँचाते हैं जिससे सब लोगों को भोजन मिलता रहे, उन्हें भूखों परेशान ना होना पड़े।

   लेकिन जितनी बार मैं किसानों का धन्यवाद करती हूं, साथ ही उस परमेश्वर पिता की भी धन्यवादी होती हूँ जिसे इस सारे भोजन को बनाने, उगाने, उपलब्ध कराने का श्रेय जाता है। खेत में अन्न उगाने के लिए धरती में उपयुक्त गुण, सूरज की रौशनी, सींचने के लिए बारिश, धरती से निकल कर बाहर आने के लिए अँकुर को सामर्थ, अँकुर से पौधा और फिर पौधे में अन्न उगना आदि सब परमेश्वर की ओर से ही तो दिया जाता है। यद्यपि धरती और उसकी हर चीज़ परमेश्वर की है (भजन 24:1), परमेश्वर ने हम मनुष्यों को उसके रख-रखाव और देखभाल के लिए नियुक्त किया है। यह हमारी ज़िम्मेदारी है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए संसाधनों का प्रयोग वैसे करें जैसा वह चाहता है, पृथ्वी पर उसके कार्य करने के लिए (भजन 115:16)।

   जैसे हम मनुष्य परमेश्वर की भौतिक सृष्टि के भंडारी हैं, हम समाज के लिए परमेश्वर की आत्मिक योजना को पूरा करने के लिए भी ज़िम्मेदार हैं। यह आत्मिक ज़िम्मेदारी निभाने के लिए हमें उनको योग्य आदर देना है जिन्हें उसने हमारा अधिकारी ठहराया है, हमें अपने कर अदा करने हैं और आपस में प्रेम से एक दूसरे के साथ रहना और निर्वाह करना है (रोमियों 13:7-8)। लेकिन एक बात है जिसका हकदार केवल परमेश्वर है - हमारी सारी स्तुति और हमारे द्वारा उसकी महिमा, क्योंकि सृष्टि की हर बात को बनाने, संचालित तथा संभव करने वाला केवल परमेश्वर ही है (भजन 96:8-9)। - जूली ऐकैरमैन लिंक


परमेश्वर के रहस्यमय तरीके हमारी असीमित आराधना के हकदार हैं।

यहोवा के नाम की ऐसी महिमा करो जो उसके योग्य है; भेंट ले कर उसके आंगनों में आओ! पवित्रता से शोभायमान हो कर यहोवा को दण्डवत करो; हे सारी पृथ्वी के लोगों उसके साम्हने कांपते रहो! - भजन 96:8-9

बाइबल पाठ: रोमियों13:1-10
Romans 13:1 हर एक व्यक्ति प्रधान अधिकारियों के आधीन रहे; क्योंकि कोई अधिकार ऐसा नहीं, जो परमेश्वर की ओर से न हो; और जो अधिकार हैं, वे परमेश्वर के ठहराए हुए हैं। 
Romans 13:2 इस से जो कोई अधिकार का विरोध करता है, वह परमेश्वर की विधि का साम्हना करता है, और साम्हना करने वाले दण्ड पाएंगे। 
Romans 13:3 क्योंकि हाकिम अच्छे काम के नहीं, परन्तु बुरे काम के लिये डर का कारण हैं; सो यदि तू हाकिम से निडर रहना चाहता है, तो अच्छा काम कर और उस की ओर से तेरी सराहना होगी; 
Romans 13:4 क्योंकि वह तेरी भलाई के लिये परमेश्वर का सेवक है। परन्तु यदि तू बुराई करे, तो डर; क्योंकि वह तलवार व्यर्थ लिये हुए नहीं और परमेश्वर का सेवक है; कि उसके क्रोध के अनुसार बुरे काम करने वाले को दण्ड दे। 
Romans 13:5 इसलिये आधीन रहना न केवल उस क्रोध से परन्तु डर से अवश्य है, वरन विवेक भी यही गवाही देता है। 
Romans 13:6 इसलिये कर भी दो, क्योंकि शासन करने वाले परमेश्वर के सेवक हैं, और सदा इसी काम में लगे रहते हैं। 
Romans 13:7 इसलिये हर एक का हक चुकाया करो, जिस कर चाहिए, उसे कर दो; जिसे महसूल चाहिए, उसे महसूल दो; जिस से डरना चाहिए, उस से डरो; जिस का आदर करना चाहिए उसका आदर करो।
Romans 13:8 आपस के प्रेम से छोड़ और किसी बात में किसी के कर्जदार न हो; क्योंकि जो दूसरे से प्रेम रखता है, उसी ने व्यवस्था पूरी की है। 
Romans 13:9 क्योंकि यह कि व्यभिचार न करना, हत्या न करना; चोरी न करना; लालच न करना; और इन को छोड़ और कोई भी आज्ञा हो तो सब का सारांश इस बात में पाया जाता है, कि अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख। 
Romans 13:10 प्रेम पड़ोसी की कुछ बुराई नहीं करता, इसलिये प्रेम रखना व्यवस्था को पूरा करना है।

एक साल में बाइबल: 
  • यहेजकेल 3-4
  • इब्रानियों 11:20-40


शनिवार, 5 अप्रैल 2014

घमण्‍ड


   छोटे बच्चों को सिखाई जाने वाली अंग्रेज़ी कविता, Little Jack Horner, को लेकर मैं सदा ही उलझन में रहा हूँ। कविता की पंक्तियाँ कहती हैं कि छोटा बालक जैक हॉर्नर एक कोने में बैठ कर पाइ नामक वयंजन खा रहा था; उसने अपना अंगूठा पाइ में डाला, पाइ में से एक आलूबुखारा निकाला और बोला "देखो मैं कितना अच्छा हूँ!" यह मुझे बड़ा अटपटा लगता है, कि जैक एक कोने में बैठा यह सब कर रहा था और अपने आप को अच्छा कह रहा था, जबकि कोने में तो उन बच्चों को बैठने के लिए कहा जाता है जो कुछ बुरा करते हैं। मेरी उलझन है कि उस कविता में बयान किए गए जैक के कार्यों में आपस में कोई तालमेल नहीं था, तो क्या जैक अपने प्रति लोगों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह सब कर रहा था?

   अपनी ओर लोगों का ध्यान आकर्षित करना और अपनी उपलब्धियों तथा योग्यताओं को लोगों के सामने प्रदर्षित करना हमारी स्वाभाविक प्रतिक्रिया होती है। हम हर बात का श्रेय लेने की लालसा रखते हैं और चाहते हैं कि सभी लोग हमारा ध्यान रख कर ही कार्य करें, हम ही सभी गतिविधियों का केन्द्र बिन्दु बने रहें। लेकिन इस प्रकार अपने आप को हर बात का केन्द्र बनाकर जीवन जीना अपने आप को धोखा देना और एक निकृष्ट जीवन जीना है। सच्चाई यह है कि हमारे पापों ने हमें परमेश्वर के सामने दोषी ठहराकर हमें एक ’कोने में’ खड़ा कर दिया है, अर्थात दण्ड का भागी बना दिया है। अब फैसला हमारा है कि हम अपने पापों में बने रह कर दण्ड भोगते रहने को तैयार रहेंगे, अथवा परमेश्वर द्वारा प्रभु यीशु में मिलने वाली पापों की क्षमा का लाभ उठाकर उस दण्ड को भोगते रहने से बच निकलेंगे।

   प्रेरित पौलुस ने इस स्थिति के संबंध में हमारे लिए अपनी गवाही के द्वारा एक सही दृष्टिकोण रखा है। सांसारिक दृष्टि से पौलुस एक बहुत गुणी, ज्ञानी और प्रभावशाली व्यक्ति था। लेकिन पौलुस ने पहचाना के उसका यह सांसारिक ज्ञान, स्थान और उपलब्धियां परमेश्वर के सामने उसे पाप के दोष से मुक्त ठहराने के लिए कतई सक्षम नहीं थे; वह अपने पापों में ही जी रहा था और उनके दण्ड का भागी था। सत्य तथा वास्तविक वस्तुस्थिति का बोध होते ही पौलुस ने उस अनन्त काल के दण्ड से बचने के एकमात्र उपाय को सहर्ष अपना लेने में कोई समय नहीं गंवाया; उसने प्रभु यीशु के प्रभुत्व को सहर्ष स्वीकार किया, और जिन बातों को वह पहले अपने लाभ की मानता था, उन्हें प्रभु यीशु के आधीन कर दिया - "परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं" (फिलिप्पियों 3:7-8)।

   जिस वास्तविकता को पौलुस ने पहचाना, उसे संसार के लोगों को आज भी पौलुस के समान ही पहचानने की आवश्यकता है - हमारे गुण, योग्यताएं, स्थान और उपलब्धियां हमें हमारे पापों के दोष एवं दण्ड से मुक्त नहीं करेंगे। पाप के दोष एवं दण्ड से बचने का एकमात्र उपाय है प्रभु यीशु पर किया गया विश्वास और समर्पण। उसके बाद फिर अपने ऊपर किसी प्रकार का घमण्ड करने या अपनी ओर ध्यान आकर्षित करने का कोई स्थान नहीं रह जाता है, वरन फिर "जैसा लिखा है, वैसा ही हो, कि जो घमण्‍ड करे वह प्रभु में घमण्‍ड करे" (1 कुरिन्थियों 1:31)। - जो स्टोवैल


हम प्रभु यीशु के बिना कुछ भी नहीं हैं, इसलिए सारा आदर और श्रेय प्रभु यीशु को ही दें।

सो यदि कोई मसीह में है तो वह नई सृष्‍टि है: पुरानी बातें बीत गई हैं; देखो, वे सब नई हो गईं। - 2 कुरिन्थियों 5:17

बाइबल पाठ: फिलिप्पियों 3:1-11
Philippians 3:1 निदान, हे मेरे भाइयो, प्रभु में आनन्‍दित रहो: वे ही बातें तुम को बार बार लिखने में मुझे तो कोई कष्‍ट नहीं होता, और इस में तुम्हारी कुशलता है। 
Philippians 3:2 कुत्तों से चौकस रहो, उन बुरे काम करने वालों से चौकस रहो, उन काट कूट करने वालों से चौकस रहो। 
Philippians 3:3 क्योंकि खतना वाले तो हम ही हैं जो परमेश्वर के आत्मा की अगुवाई से उपासना करते हैं, और मसीह यीशु पर घमण्‍ड करते हैं और शरीर पर भरोसा नहीं रखते। 
Philippians 3:4 पर मैं तो शरीर पर भी भरोसा रख सकता हूं यदि किसी और को शरीर पर भरोसा रखने का विचार हो, तो मैं उस से भी बढ़कर रख सकता हूं। 
Philippians 3:5 आठवें दिन मेरा खतना हुआ, इस्त्राएल के वंश, और बिन्यामीन के गोत्र का हूं; इब्रानियों का इब्रानी हूं; व्यवस्था के विषय में यदि कहो तो फरीसी हूं। 
Philippians 3:6 उत्‍साह के विषय में यदि कहो तो कलीसिया का सताने वाला; और व्यवस्था की धामिर्कता के विषय में यदि कहो तो निर्दोष था। 
Philippians 3:7 परन्तु जो जो बातें मेरे लाभ की थीं, उन्‍हीं को मैं ने मसीह के कारण हानि समझ लिया है। 
Philippians 3:8 वरन मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूं: जिस के कारण मैं ने सब वस्‍तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूं, जिस से मैं मसीह को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:9 और उस में पाया जाऊं; न कि अपनी उस धामिर्कता के साथ, जो व्यवस्था से है, वरन उस धामिर्कता के साथ जो मसीह पर विश्वास करने के कारण है, और परमेश्वर की ओर से विश्वास करने पर मिलती है। 
Philippians 3:10 और मैं उसको और उसके मृत्युंजय की सामर्थ को, और उसके साथ दुखों में सहभागी हाने के मर्म को जानूँ, और उस की मृत्यु की समानता को प्राप्त करूं। 
Philippians 3:11 ताकि मैं किसी भी रीति से मरे हुओं में से जी उठने के पद तक पहुंचूं।

एक साल में बाइबल: 
  • 1 राजा 20-22


मंगलवार, 21 दिसंबर 2010

केवल परमेश्वर

मई २९, १९५३ के दिन, न्यूज़ीलैंड के एडमंड हिलेरी और उनके शेरपा तेनज़िंग नोरगे संसार के सबसे ऊंचे पर्वत एवरेस्ट के शिखर पर चढ़ने वाले सबसे पहले व्यक्ति बने। क्योंकि तेनज़िंग को कैमरा प्रयोग करना नहीं आता था इसलिये एडमंड ने प्रमाण के लिये शिखर पर तेनज़िंग की फोटो खींची।

बाद में पत्रकारों ने बार बार प्रश्न किया कि शिखर पर पहले कौन पहुंचा? अभियान के नेता जौन हन्ट ने यही उत्तर दिया के वे एक टीम कि तरह एकसाथ ही ऊपर पहुंचे। वे दोनो एक ही लक्ष्य की प्राप्ति के लिये एक साथ थे और उनमें में से किसी को भी इससे कोई मतलब नहीं था कि किसे अधिक श्रेय मिलेगा।

जब कोई भला काम किया जाता है तो इस बात की चिंता करना कि किसे अधिक श्रेय मिलेगा, काम की सफलता में अवरोध बन जाता है। कोरिंथ नगर की मण्डली दो भागों में विभाजित हो रही थी - वे जो पौलुस का अनुसरण करते थे और वे जो अपुल्लोस का अनुसरण करते थे। प्रेरित पौलुस ने उन्हें समझाया "अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया। मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया। इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।" - १ कुरिंथियों ३:३-७

जब हम परमेश्वर के लिये या परमेश्वर के नाम से काम करें तो अपनी प्रशंसा या अपने नाम को ऊंचा उठाने के लिये नहीं वरन इस उद्देश्य से करें कि परमेश्वर को ही सारा आदर और महिमा मिले। यदि हम अपने नाम या प्रशंसा के महत्वकांक्षी होंगे तो आपसी कलह और फूट के शिकार भी होंगे, किंतु यदि केवल प्रभु को आदर देने की इच्छा से काम करेंगे तो एकजुट भी रहेंगे और मसीह के सच्चे गवाह भी ठहरेंगे। - सी. पी. हिया


जब मेरे जीवन में ’मैं’ घटेगा तब ही मसीह बढ़ेगा।

क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं। - १ कुरिंथियों ३:९


बाइबल पाठ: १ कुरिंथियों ३:१-९

हे भाइयों, मैं तुम से इस रीति से बातें न कर सका, जैसे आत्मिक लोगों से, परन्‍तु जैसे शारीरिक लोगों से, और उन से जो मसीह में बालक हैं।
मैं ने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया, क्‍योंकि तुम उस को न खा सकते थे; वरन अब तक भी नहीं खा सकते हो।
क्‍योंकि अब तक शारीरिक हो, इसलिये, कि जब तुम में डाह और झगड़ा है, तो क्‍या तुम शारीरिक नहीं, और मनुष्य की रीति पर नहीं चलते?
इसलिये कि जब एक कहता है, कि मैं पौलुस का हूं, और दूसरा कि मैं अपुल्लोस का हूं, तो क्‍या तुम मनुष्य नहीं?
अपुल्लोस क्‍या है और पौलुस क्‍या केवल सेवक, जिन के द्वारा तुम ने विश्वास किया, जैसा हर एक को प्रभु ने दिया।
मैं ने लगाया, अपुल्लोस ने सींचा, परन्‍तु परमेश्वर ने बढ़ाया।
इसलिये न तो लगाने वाला कुछ है, और न सींचने वाला, परन्‍तु परमेश्वर जो बढ़ाने वाला है।
लगाने वाला और सींचने वाला दानों एक हैं परन्‍तु हर एक व्यक्ति अपने ही परिश्र्म के अनुसार अपनी ही मजदूरी पाएगा।
क्‍योंकि हम परमेश्वर के सहकर्मी हैं; तुम परमेश्वर की खेती और परमेश्वर की रचना हो।

एक साल में बाइबल:
  • मीका ४, ५
  • प्रकाशितवाक्य १२